राजनीति के मंजे खिलाड़ी साबित हो रहे हैं तेजस्वी यादव

बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है. एक तरफ राजग गठबंधन है, तो दूसरी तरफ महागठबंधन. महागठबंधन की अगुआई नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रह चुके तेजस्वी यादव के हाथ में है. एक तरफ राजग गठबंधन में मंजे हुए राजनीतिबाज हैं तो दूसरी तरफ 30 साल का नौजवान नेता तेजस्वी यादव उन्हें चुनौती देने के लिए मुस्तैदी के साथ खड़ा है.

तेजस्वी यादव वर्तमान में बिहार विधायक दल के नेता प्रतिपक्ष हैं. वे बिहार विधानसभा में राघोपुर से विधायक हैं. वे खासकर नौजवानों के चहेते नेता के रूप में उभरे हैं. उन के ट्विटर हैंडल पर 20 लाख से भी जायद फालोअर हैं. तेजस्वी यादव जैसे नौजवान चेहरे से बिहार के लोगों में एक नई उम्मीद जगी है.

तेजस्वी यादव वर्तमान सरकार के मुखिया नीतीश कुमार और उन के सहयोगी दल भाजपा को हर मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं. इस कोरोना काल में हो रहे चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर वे काफी ऐक्टिव हैं. लोगों को अपनी बात सोशल मीडिया और अपने कार्यकर्ताओं के जरीए जनजन तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.

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कृषि सुधार बिल और बेरोजगारी जैसे मुद्दे को तेजस्वी यादव चुनावी मुद्दा बनाने जा रहे हैं. तेजस्वी यादव का कहना है कि किसानों ने बड़ी उम्मीद के साथ केंद्र में भाजपा की सरकार बनाई थी, लेकिन अब उन के पेट पर ही प्रहार होने लगा है. शिक्षा, स्वास्थ्य के बाद कृषि को भी पूंजीपतियों के हाथों बेचा जा रहा है. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की बाध्यता खत्म की जा रही है. किसान पूंजीपतियों के खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकते. राज्य सरकार ने इस बिल का समर्थन कर के यह साबित कर दिया है कि वह राज्य के 70 फीसदी किसानों का भला नहीं चाहती है. इस सरकार को किसान तबके की जान की रत्तीभर भी परवाह नहीं है.

तेजस्वी यादव ने यह ऐलान कर दिया है कि किसानों के हकों की हिफाजत के लिए राजद का कृषि बिल के खिलाफ संसद से सड़क तक विरोध जारी रहेगा. नए कृषि बिल के जरीए सरकार किसानों को बरबाद करना चाहती है. उन की पार्टी इसे बरदाश्त नहीं करेगी. किसान विरोधी बिल का विरोध करते हुए उन्होंने ट्रैक्टर का स्टेयरिंग थामे हुए विरोध प्रदर्शन किया.

बेरोजगारी जैसे मुद्दे पर तेजस्वी यादव का कहना है कि बिहार में हर जातिधर्म के नौजवान बेरोजगारी से बेहाल हैं. राजग के लोग नौजवानों और बेरोजगारों को जातिधर्म के जाल में उलझाए रखना चाहते हैं, ताकि उन का सत्ता रूपी रोजगार चलता रहे. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थक चुके हैं. उन पर उम्र का असर साफ दिखाई पड़ रहा है. वे रूढ़िवादी और अहंकारी सोच के चलते बिहार के करोड़ों नौजवानों के सपनों को साकार करने में नाकाम साबित हो रहे हैं.

पिछले दिनों तेजस्वी यादव ने एक मंजे हुए नेता की तरह लोगों से अपील की थी कि अगर 15 साल के लालूराबड़ी शासनकाल में गलतियां हुईं तो वे उस के लिए माफी चाहते हैं. एक बार उन्हें मौका दे कर देखें. अगर मौका मिला तो वे किसी को निराश नहीं होने देंगे.

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बिहार के अवाम से उन्होंने अपील की कि अगर वह एक कदम आगे बढ़ेंगी तो वे चार कदम आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं. उन्हें एक मौका दे कर देखें.

युवा राजद के राष्ट्रीय महासचिव ऋषि कुमार ने दिल्ली प्रैस को बताया कि वर्तमान सरकार से इस प्रदेश की जनता तंग आ चुकी है. वह इसे हर हाल में बदलेगी. तेजस्वी यादव की अगुआई में बिहार का कायाकल्प होगा. तेजस्वी यादव उत्साही, लगनशील और कर्मठ नौजवान हैं. बिहार को आगे बढ़ाने के लिए उन का एक अलग विजन है. बिहार को आगे बढ़ाने में वे हर हाल में खरा उतरेंगे.

भोजपुरी एक्ट्रेस गुंजन पंत ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया वर्कआउट वीडियो, फैंस ने की जमकर तारीफ

कोरोना वायरस (Corona Virus) जैसी महामारी के चलते चाहे धीरे धीरे सब कुछ अनलॉक होता रहा है लेकिन अभी भी कुछ एक्ट्रर्स और एक्ट्रेसेस ऐसे हैं जो घर से ही अपने फैंस का और खुद का एंटरटेनमेंट करते दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में भोजपुरी फिल्मों की जानी मानी एक्ट्रेस गुंजन पंत (Gunjan Pant) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने के साथ वे अपने फैंस के एंटरटेनमेंट का खूब ध्यान रखती हैं.

 

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‘What hurts today makes you stronger tomorrow.’ #gunjanpant #workoutroutine #instadaily

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हाल ही में एक्ट्रेस गुंजन पंत (Gunjan Pant) ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी वर्कआउट की एक वीडियो शेयर की थी जो कि सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है. इस वीडियो में गुंजन पंत (Gunjan Pant) डंबल उठाए एक्सरसाइज करती दिखाई दे रही हैं. इस वीडियो के कैप्शन में एक्ट्रेस गुंजन पंत ने लिखा है कि, ‘What hurts today makes you stronger tomorrow.’ #gunjanpant #workoutroutine #instadaily.

 

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So what? Iam still a rockstar😍 #gunjanpant #cheetah #tuesdayvibes #picoftheday #instagood

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इस वीडियो में एक्ट्रेस गुंजन पंत (Gunjan Pant) ने डेनिम शॉर्ट्स (Denim Shorts) और ब्लैक कलर की क्रॉप टॉप (Black Crop Top) पहनी है जिसमें वे काफी ग्लैमरस लग रही हैं. इस वीडियो के जरिए एक्ट्रेस अपने फैंस को ये भी मोटिवेशन देती नजर आ रही हैं कि हमें घर बैठे भी अपनी फिटनेस का पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकी हम अपने आप को फिट रख सकें.

आपको बता दें एक्ट्रेस गुंजन पंत (Gunjan Pant) ने भोजपुरी की कई सुपरहिट फिल्मों के साथ साथ भोजपुरी गानों में भी अपनी कमाल की अदाकारी दिखाई है.

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Bigg Boss एक्स कंटेस्टेंट हिमांशी खुराना को हुआ कोरोना, इंस्टाग्राम पर बताई वजह

पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री की जानी मानी मॉडल और सिंगर हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं. जैसा कि हम सब जानते हैं कि एक्ट्रेस हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) टेलीविजन इंडस्ट्री के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बॉस के सीजन 13 (Bigg Boss 13) की कंटेस्टेंट रह चुकी हैं जहां उनके असीम रियाज (Asim Riaz) के साथ रिशते को दर्शकों ने खूब पसंद किया था.

 

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आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पंजाबी सिंगर हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) कोरोना पॉजीटिव पाई गई हैं. हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और एक्टिव रहने के साथ वे अपने से जुड़ी हर अप्डेट फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं. पिछले दिन ही हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) ने एक पोस्ट के जरिए अपने फैंस को कोरोना पॉजीटिव होने की जानकारी दी जिसके बाद से उनके फैंस उनके ठीक होने के लिए दुआ कर रहे हैं.

 

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🙏🙏

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हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) ने अपने पोस्ट में लिखा कि, “मैं आप सभी को बताना चाहती हूं कि मैं कोरोना पॉजिटिव पाई गई हूं. सभी सावधानियां बरतने के बाद ऐसा हुआ है. आप सभी जानते हैं कि मैं दो दिन पहले एक रैली में शामिल हुई थी और वह एरिया काफी भीड़ वाला था. मुझे शूट पर जाना था तो इससे पहले मैंने खुद का कोरोना टेस्ट कराने का सोचा. जो लोग मेरे कॉन्टैक्ट में आए हैं उन्हें मैं कहना चाहती हूं कि वह भी खुद का कोरोना टेस्ट करा लें. आगे आने वाली रैली में सावधानियां बरतें. न भूलें कि हम महामारी से जूझ रहे हैं, इसलिए अपना ख्याल रखें.”

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बिग बॉस (Bigg Boss) के घर से निकलने के बाद हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) को काफी पौपुलैरिटी मिली और उन्होनें एक बाद एक म्यूजिक वीडियोज असीम रियाज (Asim Riaz) के साथ किए जो कि दर्शकों ने खूब पसंद किए. असीम और हिमांशी की जोड़ी बिग बॉस के घर के साथ साथ बिग बॉस के निकलने के बाद भी फैंस का खूब प्यार मिला.

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सहनशीलता से आगे

सहनशीलता से आगे: भाग 3

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उस की आवश्यकता को ध्यान में रख कर वमसी लता ने उसे औफर दिया और बोली, ‘‘मैं तुम्हारे लिए पैसों का इंतजाम कर सकती हूं.’’ यह सुन कर लवकुश बहुत खुश हुआ. उस ने कहा, ‘‘दीदी, मैं आप का यह अहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगा.’’

‘‘मगर तुम्हें मेरा एक काम करना होगा.’’ वमसी लता ने कहा.

‘‘बताइए, एक क्या 2 काम करूंगा.’’

‘‘सोच लो, मैं पैसे काम होने पर दूंगी, पहले एडवांस में भी कुछ नहीं.’’

थोड़ी देर सोच कर लवकुश ने कहा, ‘‘ठीक है, मुझे आप पर पूरा भरोसा है, मैं तैयार हूं.’’

यह सुन वमसी लता ने उसे अपने भाई जैसा होने का वास्ता दे कर अपनी तारतार जिंदगी का रोना रोते हुए कहा, ‘‘भैया, मैं सीमा के पापा से हद दर्जे तक परेशान हूं. तुम चाहो तो मुझे उन से मुक्ति दिला सकते हो.’’

‘‘मैं समझा नहीं,’’ लवकुश ने कहा.

‘‘तुम्हें उन को मेरे रास्ते से हटाना होगा.’’ वमसी लता ने कहा तो लवकुश अंदर ही अंदर कांप कर रह गया. लेकिन उस की आंखों के आगे 5 लाख रुपए नाच रहे थे. उसे अभिनेता बनने का अपना ख्वाब पूरा होता दिखाई दिया. इसलिए वह मान गया.

उस ने वमसी लता के साथ बैठ कर फूलप्रूफ योजना बनानी शुरू कर दी. के. विश्वनाथ को कब और कैसे रास्ते से हटाया जाए, दोनों ने उसी दिन से सोचना शुरू कर दिया. लवकुश यह अच्छी तरह जानता था कि वह अकेले यह काम नहीं कर सकता, क्योंकि के. विश्वनाथ उस से बलिष्ठ थे. उन के सामने वह बहुत कमजोर था.

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इसलिए उस ने इस काम के लिए अपने नौकर अविनाश यादव से बात करने का निश्चय किया. एक दिन अविनाश ने उस से रुपयों की मांग की, क्योंकि उस की बहन रुकमणी का विवाह होना था और इस के लिए उसे मोटी रकम की जरूरत थी.

बहन की शादी के लिए ली सुपारी

अविनाश की जिंदगी अंधेरों से घिरी लौ की तरह टिमटिमा रही थी. नौकरी कर के वह जैसेतैसे परिवार का भरणपोषण करता था. एक बहन थी, रुकमणी जो विवाह योग्य हो चुकी थी. मां को उस की चिंता रहती थी. अविनाश को बहन के ब्याह के लिए डेढ़ लाख रुपयों की जरूरत थी.

एक दिन दुकान पर अच्छा मूड देख कर उसने मालिक लवकुश से अपना दुखड़ा रो कर मदद मांगी. संयोग से लवकुश तैयार हो गया. मगर उस ने कहा, ‘‘अविनाश, इस के बदले तुम्हें एक काम करना होगा. बोलो कर पाओगे?’’ लवकुश ने उसे पूरी योजना बता दी. उस की योजना सुन कर अविनाश घबराया नहीं बल्कि तैयार हो गया.

लवकुश ने उसे आश्वस्त कर कहा, ‘‘सिर्फ एक आदमी को रास्ते से हटाना है. हटाओ और डेढ़ लाख रुपए ले लो.’’

हालात ने बना दिया हत्यारा

अविनाश इस काम के लिए तैयार था. लवकुश ने अविनाश को के. विश्वनाथ शर्मा के संबंध में एकएक कर सारी बातें समझा दीं. इस के बाद दोनों वमसी लता से मिले. बातचीत में तय हुआ कि रात को वे दोनों आएंगे और विश्वनाथ का काम तमाम कर देंगे.

‘‘कैसे किस तरह?’’ लता ने पूछा तो लवकुश ने अविनाश की तरफ देख कर कहा, ‘‘यह जांबाज लड़का है, ऐसे छोटेमोटे काम इस के बाएं हाथ का खेल है. बस दीदी, आप को घर का दरवाजा खुला रखना है. बाकी सब यह देख लेगा.’’

वमसी लता तैयार हो गई. योजनानुसार उस दिन रात को लगभग एक बजे अविनाश और लवकुश को घर के पीछे वाले दरवाजे से प्रवेश करना था. वमसी को केवल पीछे वाला दरवाजा खुला छोड़ देना था. लेकिन योजना में ऐन वक्त पर परिवर्तन हो गया.

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लवकुश ने अविनाश के सामने 2 लाख का औफर रखते हुए कहा, ‘‘अविनाश, यह काम अब तुम अकेले करो, और 2 लाख रुपए ले लो. मैं वहां नहीं जाऊंगा.’’

लवकुश के हाथ खड़े करने पर भी अविनाश पीछे नहीं हटा. बल्कि यह सोच कर खुश हुआ कि अब उसे 2 लाख रुपए मिलेंगे. वह अकेला 5 किलो का लोहे का घन ले कर एक्टिवा से विश्वनाथ शर्मा के घर के पिछवाड़े पहुंच गया.

योजना के मुताबिक वहां दरवाजा खुला होना चाहिए था, लेकिन वह बंद था. अविनाश ने वहीं से लवकुश को मोबाइल पर काल की और दरवाजा बंद होने की जानकारी दी. लवकुश ने कहा, ‘‘तुम वहीं रुको मैं अभी बताता हूं, क्या करना है.’’

लवकुश ने मोबाइल पर वमसी लता से बातचीत की तो उस ने कहा, ‘‘दरवाजा नहीं खुलेगा, अविनाश से कहो, बाउंड्री कूद कर आ जाए.’’ लवकुश ने अविनाश को यह बता दिया.

अविनाश बाउंड्री कूद कर घर में पहुंच गया. फिर वह के. विश्वनाथ के कमरे में घुस गया, जिस का दरवाजा वमसी ने पहले ही खुला छोड़ दिया था.

अविनाश ने देखा के. विश्वनाथ अर्द्धनिद्रा में थे और इधरउधर करवट बदल रहे थे. वह घबरा कर बाहर आ गया तो सामने लता खड़ी मिली, उस ने यथास्थिति बताई. लता ने उसे आश्वस्त किया कि शर्माजी शराब पिए हुए हैं और नशे में हैं. तुम अपना काम कर सकते हो. यह सुन कर अविनाश ने कमरे में घुस कर उन के सिर पर घन से 5-6 वार किए. नींद की वजह से विश्वनाथ अपना बचाव भी नहीं कर सके और चीख कर अचेत हो गए.

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अविनाश ने खून से लथपथ विश्वनाथ को देख सोचा कि वह मर गए हैं. इस के बाद वह वहां से निकल गया. घन वह अपने साथ घन लेता गया.

तहकीकात के बाद पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त घन शहर के बूढ़ापारा तालाब के पास से बरामद कर लिया. वहीं से 5 मोबाइल और एक एक्टिवा जब्त की गई.

पुलिस ने मृतक के. विश्वनाथ की हत्या की आरोपी मृतक की पत्नी के. वमसी लता, किराएदार लवकुश शुक्ला और नौकर अविनाश यादव को गिरफ्तार कर लिया.

तीनों के खिलाफ रायपुर के गुढि़यारी थाने में भादंवि की धारा 302, 34 के तहत केस दर्ज किया गया. लवकुश शुक्ला उत्तर प्रदेश के गांव बड़ी के मोहल्ला शुक्लान का रहने वाला था. अविनाश भी उत्तर प्रदेश का ही रहने वाला था. उस का घर जिला भदोही के गांव लोहारा, दुर्गागंज में था. पूछताछ के बाद तीनों आरोपियों को रायपुर कोर्ट के न्यायिक दंडाधिकारी के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

–  कथा पुलिस सूत्रों से बातचीत के आधार पर

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

सहनशीलता से आगे: भाग 2

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इस के बाद विश्वनाथ उसे भद्दीभद्दी गालियां देने लगे.

‘‘मुझे अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना है, दूसरों से क्या मतलब. तुम शराब पीना और मारपीट करना बंद नहीं करोगे, मैं अच्छी तरह जानती हूं. तुम कभी नहीं सुधर सकते.’’

यह सुन कर विश्वनाथ शर्मा ने बेल्ट से लता की और पिटाई की. वह चीखनेचिल्लाने लगी. लेकिन विश्वनाथ को उस पर जरा भी दया नहीं आई. उसी दिन वमसी लता के मन में पहली बार यह बात आई थी कि क्यों न वह अपने पति को जहर दे कर मार डाले. जब तक वह जिंदा रहेगा उसे सुखचैन की सांस नहीं लेने देगा.

रक्तरंजित विश्वनाथ

उस के पास पति से मुक्ति का इस के अलावा कोई रास्ता नहीं था. उस के पास पैसों की कमी नहीं थी, अच्छा बैंक बैलेंस, सोनाचांदी व जवाहरात सब कुछ था. साथ ही हर माह मकान का अच्छाखासा किराया भी मिलता था. अगर पति की आकस्मित मृत्यु हो जाती, तो उसे नेवी से अच्छीखासी रकम भी मिलने की उम्मीद थी.

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20 जुलाई, 2019 की सुबह सीमा बाथरूम जाने के लिए उठी तो पिता विश्वनाथ शर्मा के कमरे से कराहने की आवाज आई. आवाज में पीड़ा थी, फलस्वरूप सीमा के पांव खुदबखुद पिता के कमरे की ओर बढ़ गए. कमरे के अंदर जा कर उस ने जैसे ही लाइट औन की. उस की आंखें फटी रह गईं. मुंह से जोरों की चीख निकल गई.

विश्वनाथ शर्मा खून से लथपथ कराह रहे थे. उसे कुछ समझ नहीं आया तो वह उल्टे पांव मां के कमरे में पहुंची और चिल्ला कर मां को जगाया.

मां आंखें मलते हुए उठी तो सीमा घबराए स्वर में बोली, ‘‘मां…पापा…’’ सीमा के मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी.

कुसुमलता ने घबराई हुई सीमा को देखा तो पूछा, ‘‘क्या हुआ बेटा?’’

‘‘मां…पापा… खून?’’ सीमा ने हकलाते हुए कहा तो वमसी लता झटके से उठ कर पति के कमरे की तरफ भागी. पीछेपीछे सीमा और राजेश भी थे. वहां का दृश्य देख कर लता दहाड़ मार कर रोने लगी. बच्चे भी रोने लगे. रोने की आवाज सुन कर आसपास के लोग आ गए.

के. विश्वनाथ का चेहरा बुरी तरह कुचला हुआ था. चादर कपड़े सब रक्तरंजित. पड़ोसियों की मदद से विश्वनाथ को अस्पताल पहुंचाया गया. विश्वनाथ शर्मा का चेहरा कुचल दिया गया था. मुंह से सिर्फ कराहने की आवाज आ रही थी. अस्पताल पहुंचने तक वह जीवित थे, वहां जा कर उन की मृत्यु हो गई. अस्पताल प्रबंधन ने वमसी कुसुमलता से के. विश्वनाथ के संदर्भ में आवश्यक जानकारी प्राप्त की. मामला प्रथमदृष्टया संदिग्ध नजर आ रहा था. इसलिए प्रबंधन ने घटना की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दे दी. जब पुलिस अस्पताल पहुंची तो के. विश्वनाथ की पत्नी और बच्चे वहीं थे.

गुढि़यारी थाने के थानाप्रभारी सुशांतो बनर्जी ने अस्पताल पहुंच कर सबसे पहले मृतक के बारे में वमसी लता का बयान लिया. अपने बयान में उस ने बताया कि उस के पति विश्वनाथ मर्चेंट नेवी में इंजीनियर थे और छुट्टी पर घर आए हुए थे.

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उस ने सुबहसुबह उन्हें उन के कमरे में खून से लथपथ देखा तो उस के होश उड़ गए, पता नहीं कौन घर में  घुस आया और उन्हें बुरी तरह घायल कर के चला गया. दोनों बच्चों राजेश व सीमा ने भी यही बात बताई.

सुशांतो बनर्जी ने वमसी लता के साथ आए अन्य लोगों का भी बयान लिया. इस के बाद उन्होंने एसएसपी आरिफ शेख, एडिशनल एसपी प्रफुल्ल ठाकुर, एसपी (सिटी) अभिषेक माहेश्वरी को इस वारदात के बारे में बता दिया.

अधिकारियों के आने के बाद जब मुआयना और लिखापढ़ी हो गई तो थाना गुढि़यारी पुलिस ने विश्वनाथ की लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

मामला मर्चेंट नेवी के इंजीनियर की हत्या का था. इसलिए अधिकारियों ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए केस की जांच के लिए क्राइम ब्रांच की एक टीम गठित कर के जांच शुरू करा दी. थानाप्रभारी सुशांतो बनर्जी और एडिशनल एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने एक बार फिर घटनास्थल का मुआयना किया.

आसपास के लोगों से बातचीत की गई तो इस घटना की सच्चाई प्याज के छिलके की तरह परतदर परत खुल कर सामने आने लगी. पता चला कि पतिपत्नी के बीच सब कुछ ठीकठाक नहीं था.

दोनों की अनबन पासपड़ोस के लोगों से छिपी नहीं थी. थोड़ी सी पड़ताल में यह जानकारी भी मिली कि वमसी लता ने पति के खिलाफ गुढि़यारी थाने में 4 बार मारपीट की रिपोर्ट लिखाई थी.

वमसी लता को थाने ले जा कर जब एडिशनल एसपी प्रफुल्ल ठाकुर और थानाप्रभारी सुशांत बनर्जी ने उस से सख्ती से पूछताछ की तो वह फूटफूट कर रोने लगी. लेकिन पति के. विश्वनाथ शर्मा की मौत के बारे में कुछ भी जानने से इनकार करती रही. बाद में जब पुलिस ने लता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो एक चौंकाने वाली बात सामने आई.

घटना की रात 2 बजे उस के मोबाइल पर एक काल आई थी. पुलिस ने पता लगाया तो नंबर के. विश्वनाथ शर्मा और वमसी कुसुमलता के किराएदार लवकुश शुक्ला का निकला. पुलिस लवकुश को पकड़ कर थाने ले आई. थाने पहुंच कर वह सूखे पत्ते की तरह थरथर कांपने लगा. पुलिस की थोड़ी सी सख्ती पर उस ने के. विश्वनाथ शर्मा की हत्या का सारा राज खोल दिया.

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लवकुश के बताने पर अविनाश को भी पकड़ लिया गया. वह लवकुश के यहां नौकरी करता था. पूछताछ में उस ने स्वयं ही विश्वनाथ की हत्या करने की बात मान ली. इस के बाद पुलिस के सामने जो कहानी आई, उस का लब्बोलुवाब यह था.

लवकुश शुक्ला और अविनाश यादव मूलत: उत्तर प्रदेश के निवासी थे. लवकुश काफी समय से के. विश्वनाथ शर्मा और उन की पत्नी को जानता था. वह शर्मा दंपति के पंडरी स्थित दुबे नगर के मकान में बतौर किराएदार रहता था. शुक्ला जिंदगी में कुछ कर गुजरना चाहता था. उस की इच्छा थी कि वह फिल्मों में अभिनय करे.

शुक्ला पुणे स्थित फिल्म इंस्टीट्यूट भी गया था ताकि वहां एडमिशन ले कर अभिनय की बारीकियां सीख सके. लेकिन वहां एडमिशन के लिए उसे 5 लाख रुपयों की जरूरत थी. इसी दरम्यान एक दिन मकान मालिक वमसी लता को उस ने अपनी समस्या बताई और भाग्य का रोना भी रोया.

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कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

सहनशीलता से आगे: भाग 1

के. विश्वनाथ शर्मा बतौर इंजीनियर मर्चेंट नेवी में तैनात थे. नौकरी की वजह से उन्हें मुंबई में रहना पड़ता था. जबकि उन की पत्नी वमसी लता और 2 बच्चे राजेश और सीमा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बमलेश्वरी नगर में रह रहे थे. उन का बेटा राजेश 11वीं में पढ़ रहा था और बेटी 9वीं में.

मर्चेंट नेवी में रहते हुए विश्वनाथ को शिप पर मुंबई से दुबई जाना होता था. इसी वजह से वह महीनोंमहीनों तक घर नहीं जा पाते थे. के. विश्वनाथ और वमसी लता की शादी को 18 साल बीत चुके थे. 2 किशोर बच्चों के मातापिता होने के बावजूद पतिपत्नी के संबंध सामान्य नहीं थे.

इस की वजह थी विश्वनाथ की शराबखोरी. शराब पी कर वह बिलकुल हैवान बन जाते थे. कई बार तो बच्चों के सामने ही पत्नी की पिटाई कर देते थे. उन की करतूत के लिए पिटाई शब्द हलका है, इसे तुड़ाई कहें तो बेहतर होगा. इसी सब के चलते विश्वनाथ और वमसी लता के संबंध कभी ठीक नहीं रह सके.

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12 जुलाई, 2019 को के. विश्वनाथ लंबी छुट्टी ले कर सुबहसुबह रायपुर स्थित अपने घर पहुंचे. वह पत्नी और बच्चों के साथ कुछ दिन चैन से गुजारना चाहते थे. विश्वनाथ को उम्मीद थी कि उन्हें आया देख कर पत्नी और बच्चे खुश हो जाएंगे.

लेकिन जब वह बमलेश्वरी स्थित अपने आवास पर पहुंचे तो ऐसा कुछ नहीं हुआ. उन्हें देख कर पत्नी वमसी लता का चेहरा उतर गया. दोनों बच्चे राजेश और सीमा उस समय सोए हुए थे. जब वमसी लता ने उन का हालचाल नहीं पूछा तो वह समझ गए कि घर का माहौल पहले जैसा ही है, कुछ नहीं बदला.

एक बार तो विश्वनाथ ने सोचा कि उन्हें आना ही नहीं चाहिए था. लेकिन वह जानते थे कि शराब की लत के चलते इस माहौल को बनाया भी उन्होंने ही था. लेकिन यह भी सच था कि घर और बच्चों की फीस वगैरह के लिए वह वेतन का बड़ा हिस्सा घर भेजते थे. पत्नी के तेवर देख विश्वनाथ को गुस्सा आया, लेकिन उन्होंने खुद पर कंट्रोल कर लिया.

वमसी लता पति की परवाह न कर के अपने कमरे में सोने चली गई. विश्वनाथ को यह बात अच्छी नहीं लगी. वैसे भी उन्हें अपने कुछ मित्रों से मिलने जाना था. उन्होंने पत्नी को आवाज दी, ‘‘लता उठो, मुझे चाय पीनी है. चायनाश्ता बना दो. मुझे बाहर जाना है.’’

जब लता की ओर से कोई उत्तर नहीं मिला तो उन्होंने दोबारा आवाज दी. इस बार वमसी लता मन मसोस कर किचन में गई और चाय बनाने लगी.

लता चाय बना कर लाई और स्वभाव के अनुसार उन्हें घूर कर देखते हुए चाय रख कर चली गई.

विश्वनाथ ने लता को जाते देख गंभीर स्वर में कहा, ‘‘लता बैठो, मैं तुम से और बच्चों से मिलने आया हूं. कुछ दिन तुम लोगों के साथ गुजारूंगा.’’

लता जाते हुए बोली, ‘‘मैं, मेरे बच्चे तुम से कोई मतलब नहीं रखना चाहते. तुम खुद को बदल नहीं सकते तो इन बातों का क्या मतलब?’’

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‘‘लता, तुम तो मेरा स्वभाव जानती हो. मुझे गुस्सा जल्दी आ जाता है, पर मैं खुद को बदल लूंगा.’’

‘‘मैं विश्वास कर सकती हूं क्योंकि मैं पत्नी हूं. लेकिन तुम क्या वाकई अपने आप को बदल सकते हो? मैं ऐसा वादा तुम्हारे मुंह से हजारों बार सुन चुकी हूं. रात में शराब पी कर फिर शैतान बन जाते हो.’’

के. विश्वनाथ शर्मा ने आवाज में दृढ़ता लाने का प्रयास करते हुए कहा, ‘‘मैं वाकई बदलना चाहता हूं. मेरा यकीन करो.’’

‘‘अच्छा, बातें बाद में होंगी, पहले चाय पी लो.’’ कह कर वमसी लता अपने कमरे में चली गई.

विश्वनाथ चाय की चुस्कियां लेते हुए मन ही मन सोच रहे थे कि वह कहां गलत हैं. शराब पीना, पत्नी पर हाथ उठाना. मगर यह भी तो नहीं सुधरी, इस का भी तो फर्ज है पति की भावनाओं का सम्मान करे.

चाय पी कर विश्वनाथ ने लता के कमरे की ओर देखा. वह कमरे का दरवाजा बंद कर के सो गई थी.

यह देख कर उन्हें बहुत कोफ्त हुई. सोचा क्या यही पत्नी धर्म है? मैं 6 महीने बाद आया हूं और यह महारानी मुझ से बातें किए बिना जा कर सो गई. सोच कर उन्हें गुस्सा आने लगा. उन्होंने धीरे से दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई.

उन्होंने दरवाजा जोर से खटखटाया तो खुल गया. सामने आंखों में गुस्से की आग समेटे वमसी लता खड़ी थी. उस ने पति को ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा, ‘‘क्या बात है, क्या चाहते हो तुम?’’

‘‘तुम ने दरवाजा क्यों बंद कर लिया था, मैं क्या कुत्ता हूं जिसे बाहर से भगा दोगी. पति बाहर से आया है, और तुम त्रियाचरित्र दिखा रही हो.’’ के. विश्वनाथ का क्रोध जाग उठा.

‘‘साफसाफ सुनना चाहते हो सुनो, मैं तुम से कोई संबंध नहीं रखना चाहती.’’

‘‘तुम ऐसा क्यों कह रही हो. मैं कहां गलत हूं.’’

‘‘मैं 20 वर्षों से तुम्हारी नसनस से वाकिफ हूं. तुम इंसान नहीं हो, मैं औरत हूं, 2 बच्चों की मां. चाहती हूं कि मेरा घर संसारसुखी हो. लेकिन ऐसा नहीं हो सकता. तुम होने ही नहीं दोगे.’’

‘‘देखो, मैं अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूं मेरा सब कुछ तुम्हारा और बच्चों का है. मैं ने तुम्हें सारी सुखसुविधाएं दी हैं. फिर मेरे साथ ऐसा कठोर बर्ताव क्यों? लगता है, तुम ऐसे नहीं मानोगी.’’ कहते हुए विश्वनाथ ने वमसी लता की पिटाई शुरू कर दी.

होहल्ला सुन कर सीमा और राजेश आ गए. दोनों छिप कर मातापिता को लड़ते देख रहे थे. जब विश्वनाथ लता को पीटतेपीटते थक गए तो गालियां देते हुए अपने कमरे में जा कर बैठ गए और चिल्लाचिल्ला कर कहने लगे, ‘‘ऐसा है, तो मेरी नजरों से दूर चली जाओ. छोड़ दो मेरा घर. जहां तुम्हें सुखचैन मिले, वहीं चली जाओ अपने बच्चों को ले कर.’’

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वमसी लता अपने कमरे में बैठी रोरो कर अपना गुस्सा निकाल रही थी. उस का रोना वाजिब था क्योंकि यह सच है कि अगर पति पत्नी एकदूसरे को न समझें, समन्वय न रखें तो उन का परिवार तबाह हो जाता है. इस घर के नौनिहाल सीमा और राजेश का भविष्य मातापिता के दोजख बने जीवन में झुलस रहा था.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ था. विश्वनाथ जब भी छुट्टी पर आते थे, ऐसा ही होता था. एक बार छुट्टी पर आए विश्वनाथ ने रात में शराब पी कर पत्नी की पिटाई की. साथ ही चीखचीख कर कहा भी, ‘‘तुम मेरा घर छोड़ कर चली जाओ. जब तुम पत्नीधर्म नहीं निभा सकती, तो मेरे घर में क्या कर रही हो?’’

लता ने रोतेरोते जवाब दिया, ‘‘इस के लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं. तुम्हारे कर्म ही ऐसे हैं, मैं ने ही तुम से विवाह कर के अपना जीवन बर्बाद कर लिया है.’’

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कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

माधुरी दीक्षित को अपना आदर्श मानती हैं भोजपुरी एक्ट्रेस दिव्या द्विवेदी

भोजपुरी सिनेमा में कोरोना के चलते जहां एक तरफ फिल्मों की शूटिंग बंद है, वहीं दूसरी तरफ ज्यादातर कलाकार खुद को महफूज रखने के लिए अपने-अपने घरों में कैद हो कर रह गए हैं. लेकिन भोजपुरी बैल्ट के दर्शक निराश न हों, ऐसे में कुछ कलाकार औनलाइन ही अपने चाहने वालों से जुड़ कर उन का हालचाल जानने की कोशिश कर रहे हैं.

भोजपुरी की ज्यादातर हीरोइनों पर लौकडाउन का बुरा असर पड़ा है. ऐसे में भोजपुरी की दर्जनों फिल्मों में काम कर चुकी और तेजी से उभरती हुई अदाकारा दिव्या द्विवेदी (Divya Dwivedi) से उन के फिल्मी सफर व कोरोना से भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री पर पड़े असर को ले कर लंबी बातचीत हुई. पेश हैं, उसी के खास अंश :

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भोजपुरी फिल्मों में बतौर हीरोइन आना इत्तिफाक था या आप पहले से तैयारी कर के आई हैं?

भोजपुरी फिल्मों में आने को मैं इत्तिफाक के तौर पर ही लेती हूं, क्योंकि मेरी डांस में दिलचस्पी रही है और मैं एक फेमस डांसर बनना चाहती थी.

लेकिन मुझे बचपन में एक पंजाबी फिल्म में बाल कलाकार के रूप में काम करने का मौका मिला था. इस फिल्म में मेरे रोल को भोजपुरी के नामचीन डायरैक्टर पराग पाटिल ने भी देखा था. वे एक फिल्म ‘बहूरानी’ के नाम से डायरैक्ट कर रहे थे. उन्होंने मुझ से इस फिल्म में एक किरदार निभाने के लिए कहा, जिसे मैं मना नहीं कर पाई.

पहली फिल्म में कैरेक्टर रोल करने पर आप को कैसा महसूस हुआ?

फिल्म ‘बहूरानी’ में किया गया मेरा वह छोटा सा रोल भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में मुझे जमाने में बहुत मददगार साबित हुआ, क्योंकि इस के बाद मुझे खास और लीड रोल वाली एक के बाद एक कई फिल्में मिलती गईं. इन में ‘मन बसल तोरा गांव में’, ‘हत्या’, ‘दम है तो आ बिहार’, ‘बबली के बरात’,  ‘गंवार दूल्हा जैसी भोजपुरी की हिट फिल्में शामिल हैं.

अब तक का आप का सब से यादगार रोल कौन सा रहा है?

मेरा यादगार रोल हिंदी फिल्म ‘लव इन नालंदा’ का रहा है. इस फिल्म में काम कर ऐसा लगा था कि मैं किसी कैरेक्टर को निभा नहीं रही हूं, बल्कि उसे जी रही हूं. मैं ने उस फिल्म के सैट पर काफी मस्ती की थी.

इन दिनों ‘रैप सांग’ या ‘रैपर’ जैसे शब्द ज्यादा सुनने को मिल हैं. इन का क्या मतलब है? मैं ने यह भी सुना है कि आप पहले ‘रैपर’ बनना चाहती थीं, फिर उस से दूरी क्यों बना ली?

‘रैप सांग’ एक तरह की कविता की तरह गाई जाने वाली विधा है, जिस में कुछ में गाने के साथ डांस होता है और कुछ में नहीं. इस तरह के गीतों को पेश करने वाले को ‘रैपर’ कहा जाता है.

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जहां तक मेरे ‘रैपर बनने के शौक का सवाल है तो मेरी मां बहुत अच्छी गायिका हैं और इस का पूरा असर मेरे ऊपर भी पड़ा है, जिस के चलते मै सोचती थी कि फिल्मों में प्लेबैक सिंगर और रैपर बनूं, लेकिन ऐक्टिंग के क्षेत्र में आने के चलते मेरा यह सपना अभी अधूरा ही है. आगे कभी मौका मिलेगा तो जरूर हाथ आजमाऊंगी.

अभी भोजपुरी फिल्मों में किस हीरो के साथ काम करने की हसरत अधूरी है?

मेरी ख्वाहिश है कि मैं भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार पवन सिंह और यश मिश्रा के साथ काम करूं.

बौलीवुड में आप किसे अपना आदर्श मानती हैं? 

बौलीवुड में मैं ‘धकधक गर्ल’ माधुरी दीक्षित को अपना आदर्श मानती हूं क्योंकि माधुरी दीक्षित की हर अदा निराली है. मैं बचपन से उन की फिल्में देख कर बड़ी हुई हूं.

आजकल पूरी दुनिया कोरोना जैसी महामारी से जूझ रही है. कई तरह की इंडस्ट्रीज पर इस के चलते ताला लग चुका है. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री पर इस का क्या असर पड़ा है?

कोरोना के चलते भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में सबकुछ ठप पड़ा है. निर्माताओं के सैकड़ों करोड़ रुपए शूटिंग बंद होने के चलते और तैयार फिल्मों की रिलीजिंग पर रोक लगने के चलते फंसे हुए हैं. भोजपुरी सिने जगत से जुड़े सभी कलाकार कोरोना के चलते घर बैठे हुए हैं. पिछले कई महीनों से अपने पसंदीदा कलाकारों को परदे पर न देख पाने छटपटाहट दर्शकों में साफ देखी जा सकती है.

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भोजपुरी सिनेमा से जुड़े छोटे और दिहाड़ी कलाकारों पर कोरोना का क्या असर देखने को मिल रहा है?

कोरोना के असर से कोई भी अछूता नहीं है लेकिन फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े छोटे और दिहाड़ी कलाकारों की माली हालत शूटिंग बंद होने के चलते दिनोंदिन खराब होती जा रही है. अभी कुछ बड़े कलाकार इन की माली मदद कर रहें हैं, लेकिन यही हाल रहा रहा तो कलाकारों में भुखमरी की नौबत आ जाएगी.

पुलिस का संरक्षण, हुक्का बार परवान चढ़ा!

छत्तीसगढ़ में प्रतिबंध के बावजूद हुक्का “बार बार” सरकार और प्रशासन के द्वारा रोके नहीं रुक रहा है. प्रदेश की बड़ी बड़ी होटलों में सफेदपोश हाथों के संरक्षण तले यह खेल बिना रुके अविराम चल रहा है. और औपचारिकता वश पुलिस प्रशासन कार्रवाई करता है फिर कुंभकरण नींद में सो जाता है. जबकि यह सबको पता है कि भूपेश बघेल सरकार ने प्राथमिक रूप से इसे गंभीरता से लेकर पूर्णरूपेण प्रतिबंध लगा दिया है. और कानून सख्त रूप से बनाकर प्रशासन को यह जिम्मेदारी दे दी है कि प्रदेश में हुक्का बार कतई नहीं चलना चाहिए. मगर कागजों में, और हकीकत में, जैसा  अंतर होता है यहां भी वही हालो हवाल है.

कोरोना वायरस के समय में जब छत्तीसगढ़ के अधिकांश शहर लाक डाउन हैं हुक्का बार चल रहे हैं . राजधानी रायपुर में 22 सितंबर की रात को पुलिस ने बारंबार शिकायत के बाद एक बड़ी होटल में कार्रवाई की और यह प्रदर्शित किया कि पुलिस हुक्का बार पर कार्रवाई कर रही है. पुलिस के अनुसार

संपूर्ण लॉकडाउन के दूसरे दिन देर रात हुक्का बार में दबिश देकर 28 युवाओं को धड़ल्ले से बेखौफ होकर कर धुआं उड़ाते पकड़ा है-

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बता दें कि मामला सिविल लाइन, रायपुर थाना क्षेत्र का है. जहां ब्लू स्काई कैफे में छुप-छुप युवाओं के पहुँचने की सूचना पुलिस चेकिंग पोईँट में मिली थी, जिसके आधार पर पुलिस नगर पुलिस अधीक्षक नसर सिद्दीकी के नेतृत्व में पुलिस ने रेड की कार्रवाई की जहाँ से 28 युवाओं को हुक्का पीते हुए पकड़ा गया .पुलिस ने पकड़े गए युवाओं के विरुद्ध भा. द. वि. की धारा 269 ,270 के साथ कोटपा एक्ट के तहत कार्रवाई की.

सभी बड़े  शहरों की यही कहानी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित बिलासपुर, रायगढ़,  दुर्ग आदि शहरों  में धड़ल्ले से जगह-जगह संचालित हो रहे हुक्का बार पर पहले ही कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार लगाम कसने की औपचारिकता पूरी कर चुकी है. कैफे, रेस्टोरेंट, होटल के नाम पर चल रहे हुक्का बार में युवक-युवतियों, महिलाओं के साथ बच्चों को प्रवेश दिए जाने का मामला विधानसभा  में उठने के बाद सरकार की ओर से गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने रोक लगाने के लिए कानून बनाने के साथ छापामार कार्रवाई करने की घोषणा कर मामले को शांत करा दिया था. मगर हुआ क्या ? आने वाले दिनों में अवैध हुक्का बारों पर सख्त कार्रवाई करने के संकेत पुलिस अफसरों ने दिये थे बीते एक साल में  अनेक हुक्का बार पर छापामार कार्रवाई की गई है. मतलब यह कि कानून बन जाने के बाद भी कानून का भय है हुक्का बार संचालकों को होटल वालों को नहीं है?

शहर और आउटर इलाके में संचालित हुक्का बार की पड़ताल करें तो  पायेंगे  होटल, रेस्टोरेंट, क्लब, मॉल में  हुक्का बार  चल रहे हैं. इसके लिए कानून का कोई  अवरोध, भय नहीं  है. धूम्रपान और नशे वाली जगहों पर नाबालिगों को प्रवेश नहीं दिए जाने के आबकारी विभाग के  निर्देश हैं. बावजूद इसके अलग-अलग फ्लेवर के तंबाकू हुक्के में डालकर परोसा जा रहा है.  और पुलिस बहुत दबाव के बाद ही नाम मात्र की कार्रवाई कर रही है.

कानून है, कानून का राज नहीं है

नशाखोरी पर लगाम लगाने के लिए छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार  ने बड़ा निर्णय लिया . राज्य सरकार ने प्रदेश भर में संचालित हुक्का बार को बंद करने का निर्णय लिया . मुख्यमंत्री निवास में आनन-फानन में कैबिनेट की बैठक कर प्रदेश के सभी हुक्का बार को कड़ाई से बंद कराने का निर्णय लिया गया . बैठक के बाद वरिष्ठ मंत्री मोहम्‍मद अकबर ने मीडिया से चर्चा में इसकी पुष्टि की. मंत्री अकबर ने कहा कि सरकार अब कड़ाई से सभी हुक्का बारों को बंद कराएगी. हुक्का बार की चपेट में युवा वर्ग आ रहा है, जिसके बाद सरकार ने इसको बंद करने का निर्णय लिया है.  मगर सरकार के बड़ी-बड़ी बातों के बाद भी कानून बनाए जाने के बाद भी, अगरचे छत्तीसगढ़ में “हुक्का बार” चल रहा है तो आखिर दोषी कौन है? और  लाख टके का सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ को पंजाब के रास्ते पर ले जाकर, यहां के युवाओं को नशे का आदी कौन बनाना चाहता है.

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युवाओं को बर्बाद कौन करना चाहता है?

छत्तीसगढ़ अंचल के सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर रमाकांत कहते हैं- कोरोना समय में जिस तरीके से राजधानी रायपुर में होटल में 28 युवा हुक्का बार में पुलिस द्वारा धर दबोचे गए हैं उससे यह सिद्ध हो जाता है कि हुक्का बार बड़े मजे से चलाए जा रहे हैं और कानून का भय किसी को नहीं है.

दो सौ से लेकर बारह सौ का हुक्का, बार में  सहजता से  मिलता है .अलग-अलग फ्लेवर के हुक्के की कीमत अलग-अलग है.  कॉलेज के छात्र, बड़े घरों के युवक-युवती, नाबालिग आदि इनके शौकीन हैं. इन्हें आदी बनाया जा रहा है और जैसा कि मालूम है बाद में इन युवाओं का अपराधिक व अन्य गतिविधियों में उपयोग किया जाता है.

यहां उल्लेखनीय है कि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 (सीओटीपीए) के अंतर्गत 23 मई 2017 को केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर हुक्के के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है. गुजरात समेत कई राज्यों में इस तरह का काम करने वालों को तीन साल की जेल हो रही है. पंजाब में धारा 144 के तहत कार्रवाई भी की जा रही है. छत्तीसगढ़ में कानून होने के बाद भी हुक्का बार युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहा है. पहले तो सिर्फ कानून की आंखों में पट्टी बंधी रहती थी मगर अब लगता है कि पुलिस और जनप्रतिनिधियों की आंखों में भी पट्टी बंध गई है.

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खून : अवैध संबंधों का फलितार्थ!

छत्तीसगढ़ के जिला कोरबा में एक ऐसी ही घटना घटित हुई है जिसे देखने पर विचार करना पड़ता है कि शराब किस तरह छत्तीसगढ़ के गरीब आदिवासियों को  बर्बाद कर रही है. एक “शराब विक्रेता” आदिवासी महिला के घर शराब पीने के लिए गए एक वृद्ध को  अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया. गांव के ही  युवक से अवैध संबंध रखने वाली इस महिला के पति ने अपने भाई के साथ पत्नी की हत्या करने हमला कर दिया… लेकिन नशे में धुत्त होकर सोए वृद्ध को अपनी पत्नी समझकर  टांगिया से वार कर वृद्ध पिअकड़ को वहीं ढेर कर दिया. यही नहीं पास में ही सोया प्रेमी भी उनके गुस्से का शिकार हुआ लेकिन शोर मचाकर जान बचा नौ दो ग्यारह हो गया.

इस संपूर्ण हत्याकांड में महत्वपूर्ण यह बात रही की शराब बेचकर जीवन यापन करने वाली पत्नी दूसरे कमरे में सोने के कारण बाल बाल बच गई. शायद इसीलिए कहते हैं जाकर राखे साइयां मार सके ना कोई.

पति पत्नी और “वो” का किस्सा

छत्तीसगढ़ के औघोगिक जिला कोरबा  के आदिवासी बाहुल्य पाली थाना क्षेत्र के ग्राम बांधाखार  स्थित नीम चौक निवासी वृद्ध चमरा सिंह नामक व्यक्ति की  विगत 17 सितंबर को रक्त रंजित लाश गांव के मीना बाई कोल के घर में मिली थी. इस मामले की गुत्थी पुलिस ने अंततः सुलझा ली . थाना प्रभारी लीलाधर राठौर ने हमारे संवाददाता को बताया कि मृतक के पुत्र मनोहर सिंह मरावी (35 वर्ष) के द्वारा उसके पिता की 16 सितंबर की रात 7-8 बजे घर से निकलने और अधिकतर मीना बाई कोल के यहां जाकर शराब पीने के लिए जाने व घर वापस नहीं लौटने की सूचना दी गई थी.

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17 सितंबर को सुबह 8 बजे ग्राम सरपंच तानू सिंह मरावी ने मनोहर को उसके पिता के मीना बाई के घर में लहूलुहान मृत हालत में पड़े होने की सूचना दी. मनोहर सिंह वहां पहुंचा तो मीना बाई के घर के एक कमरे में चमरा सिंह मृत पड़ा था और उसके सिर पर गंभीर चोट थी. मीना बाई और पड़ोसी घायल शिव सिंह वहां कुर्सी पर बैठे मिले.शिव सिंह के गले, पीठ और सीने में चोट थी. मामले में पुलिस ने  जब मीना बाई व शिव सिंह से  पूछताछ की तो संपूर्ण मामला सामने आ गया – घटना  की रात मीना का पति गोरेलाल (45 वर्ष )और उसका भाई मूरित राम कोल( 30 वर्ष) दोनों पिता सुरूज लाल, है निवासी ग्राम बांधाखार शराब के नशे में धुत्त होकर मीना की हत्या करने की नीयत घर पहुंचे थे.

जांच अधिकारी राठौर ने बताया कि दोनों भाई कमरे में घुसे जहां औंधे मुंह वृद्ध चमरा सिंह सोया हुआ था और पास ही  शिव सिंह सोया था.वृद्ध को अपनी पत्नी मीना समझकर गोरेलाल ने टांगी से लगातार 3 वार किया तो तत्काल  उसकी मौत हो गई. इसके बाद शिव सिंह का गला काटने टांगी चलाया लेकिन शिव की नींद उचट गई और बचाव किया. उसके कंधे व गर्दन में जख्म आए हैं. शिव ने जोर-जोर से शोर मचाया तो गोरेलाल व मूरित राम भाग निकले.इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मीना बाई अपने मकान के ही एक अन्य कमरे में बच्चे के साथ सोई हुई थी. थाना प्रभारी लीलाधर राठौर ने आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त टांगी को जब्त कर दोनों को जेल दाखिल कराया.बताया गया कि महिला का उसके पति गोरेलाल से वैवाहिक संबंध  ठीक नहीं था.

पत्नी की शराब बेचने वाले अन्य हरकतों से गोरेलाल परेशान भी रहता था .उसने शिव सिंह के साथ पत्नी को आपत्तिजनक हालत में पकड़ भी लिया था तब दोनों घर से भाग गए थे. इस मामले में गोरेलाल ने पंचायत भी बुलाई पर पत्नी ने पंचायत की बात नहीं मानी और अपने पति को ही घर से मारपीट कर निकाल दिया. अपने घर में रह रहे गोरेलाल ने सबक सिखाने की ठान रखी थी और 16 सितंबर को शिव सिंह के संबंध में पता चला कि वह उसके घर जाने वाला है तब उसे खत्म करने के लिए गोरेलाल ने अपने भाई मूरित राम से मदद मांगी और सनसनीखेज वारदात कर डाली. पुलिस अधिकारी विवेक शर्मा के अनुसार उनके 20 वर्ष के कार्यकाल में अनेक घटनाओं को उन्होंने निकट से देखा है जिसमें अवैध संबंधों के कारण हत्याएं हुई जिसके मूल में शराब भी एक कारक रहा. उच्च न्यायालय के अधिवक्ता बीके शुक्ला बताते हैं कि आदिवासी बाहुल्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में शराब एक बहुत बड़ा कारण हत्या का मैं मानता हूं अच्छा हो सरकार इस पर अंकुश लगाने का निर्णय ले.

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