टीवी के फेमस कपल Sanjeeda Shaikh और Aamir Ali का हुआ तलाक, पढ़ें खबर

टीवी के पॉपुलर कपल आमिर अली और संजीदा शेख से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि दोनों का तलाक हो चुका है. दोनों करीब एक साल से अलग रहे हैं. हालांकि ये खबर अब सामने आई है.

आमिर अली और संजीदा शेख ने मार्च 2012 में शादी की थी. सरोगेसी के जरिए ये Parents बने थे. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये कपल अपनी पर्सनल लाइफ को पर्सनल ही रखना चाहते थे, इसलिए किसी तरह का कोई ऐलान नहीं किया.

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खबरों के अनुसार 2020 से ही दोनों के बीच अनबन चल रही थी. संजीदा आमिर से अलग रह रही थी. वह अपनी मां के घर चली गई थीं. बच्चे की कस्टडी संजीदा शेख को मिली है. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के तलाक के पेपर 9 महीने पहले ही तैयार हो चुके थे और दोनों ने ही अपनी लाइफ में मूव ऑन कर लिया है. इस खबर को प्राइवेट रखा गया था. लेकिन अब ये खबर सामने आ रही है.

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आपको बता दें कि ये कपल नच बलिए और झलक दिखलाजा जैसे शो का हिस्सा रह चुके हैं. आमिर और संजिदा काफी लंबे समय से टीवी की दुनिया में हैं. उन्होंने कहानी घर घर की, एफआईआर, वो रहने वाली महलों की और एक हसीना थी जैसे शोज में काम किया है.

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Anupamaa: अनिरुद्ध की होगी वापसी, क्या है काव्या का मास्टर प्लान

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में लगातार नया ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि न्यू इयर की पार्टी की तैयारी चल रही है. तो दूसरी तरफ मालविका ने पार्टी में आने से मना कर दिया है. अनुपमा कहती है वह मालविका को पार्टी में आने के लिए जरूर मनाएगी. शो के अपकमिंग एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

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मालविका का राज आएगा सामने

 

शो में आप देखेंगे कि अनुपमा के सामने मालविका का बड़ा राज सामने आया है. अनुपमा मालविका को उनके साथ नया साल मनाने के लिए मना लेती है. तो दूसरी तरफ मालविका अपार्टमेंट गैलरी में एक जोड़े को लड़ते हुए देखेगी और उन दोनों को भागते हुए देखेगी. ऐसे में मालविका ट्रॉमा में चली जाएगी.

मालविका डर के मारे कांपती उठेगी. मालविका और अक्षय का कैसा रिश्ता था. इसका राज जल्द ही शो में देखने को मिलेगा. अनुज और अनुपमा मालविका को इस बुरे अतीत से कैसे बाहर निकालेंगे.

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अनिरुद्ध की होगी वापसी

अब काव्या नए साल पर मास्टर प्लान करने वाली है. जी हां, वह चाल चलेगी कि वह वनराज को किसी तरह पा सके. काव्या अपने पहले पति अनिरुद्ध का इस्तेमाल कर चाल चलने वाली है. अब अनिरुद्ध एकबार फिर से शो में दिखाई देने वाला है.काव्या इस नए साल की पार्टी में एक बड़ा सरप्राइज देगी. अनिरुद्ध के आने से वनराज-काव्या करीब होंगे?

 

शो में आपने ये भी देखा कि काव्या, नंदिनी को सलाह देती है कि अगर वह उससे शादी करती है तो वह समर के साथ कहीं और शिफ्ट हो जाए या फिर शादी न करें. क्या शादी के बाद नंदिनी-समर शाह हाउस से अलग हो जाएंगे?

आखिरी मंगलवार: भाग -2

 वेणी शंकर पटेल ‘ब्रज’

धर्मराज ने सपना की पीठ पर हाथ रखते हुए कहा, ‘‘5 मंगलवार नियमित रूप से दरबार में हाजिरी लगाओ. मन की हर मुराद पूरी होगी.’’ धर्मराज ने उन्हें प्रसाद दिया और इस के बाद दूसरे भक्तों की परेशानियां सुनने लगे. अपनी सूनी गोद भरने की आस में सपना और सुभाष अब हर मंगलवार को दरबार में हाजिरी लगाने लगे. चौथे मंगलवार को धर्मराज स्वामी ने उन्हें बताया, ‘‘संतान की प्राप्ति के लिए आखिरी मंगलवार को विशेष पूजा करनी पड़ेगी. इस से तुम्हारी मनोकामना पूरी हो जाएगी.’’

दरबार में रहने वाली आरती नाम की सेवादार ने सपना को बताया कि 5वें मंगलवार को रात के एकांत में स्वामीजी तांत्रिक साधना करेंगे, उस दौरान तुम्हें पूरी तरह निर्वस्त्र रहना होगा. तांत्रिक की इस साधना को कोई भी दूसरा इनसान देख नहीं सकेगा. आरती की बताई बातों से सुभाष को  तो पूरी तरह से यकीन हो गया था कि यह धर्मराज धर्म की आड़ में औरतों की मजबूरियों का फायदा उठा कर जरूर उन की आबरू से खेल रहा है. सपना को भी समझ आ रहा था कि अगले मंगलवार को यह ढोंगी बाबा उस की इज्जत से खेलने का सपना देख रहा है, मगर वह औलाद की चाह में इस तरह पागल हो गई थी कि धर्मराज के आगे कुछ भी करने को तैयार थी. वह किसी भी तरह एक बच्चा पैदा कर के समाज के मुंह पर तमाचा मारना चाहती थी.

आखिरी मंगलवार को सपना और सुभाष धर्मराज के दरबार में पहुंच गए. धर्मराज महाराज के हाथों में नारियल देते हुए सपना ने जैसे ही उन के पैर छुए, धर्मराज ने सपना को ललचाई नजरों से देख कर कहा, ‘‘संतान की प्राप्ति के लिए रात में कुछ घंटे एकांत में तंत्र साधना करनी पड़ेगी. शर्त यह है कि इस तांत्रिक अनुष्ठान को कोई देख नहीं सकता.’’

सुभाष और सपना धर्मराज की बात मानने को राजी हो गए. रात के तकरीबन 11 बज चुके थे. मंदिर में बाबा धर्मराज का एक आलीशान कमरा था, जिस में सभी आधुनिक सुखसुविधाएं मौजूद थीं. धर्मराज के सेवादारों ने सुभाष और सपना के लिए कमरे में ही भोजनपानी का इंतजाम कर दिया था और रात के 12 बजते ही धर्मराज की सेवादार आरती सपना को तांत्रिक साधना के लिए धर्मराज के कमरे में ले आई. कमरे के अंदर पहुंची सपना ने देखा कि एक लग्जरी सोफे पर धर्मराज बैठा हुआ मोबाइल फोन पर किसी से बात कर रहा था.

सपना के अंदर पहुंचते ही बाबा ने उसे सोफे पर बैठने का इशारा किया. कुछ ही देर में आरती ने गिलास में पानी भर कर धर्मराज को दिया, जिसे उस ने कुछ मंत्र बुदबुदा कर सपना को दे दिया और आरती को बाहर जाने का इशारा किया. फिर वह पूजापाठ की तैयारी का नाटक करने लगा. कुछ ही देर में सपना ने महसूस किया कि उसे नशा छाने लगा है. इस के बाद धर्मराज के अंदर का शैतान जाग गया. उस ने सपना को सोफे से उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया और धीरेधीरे उस के हाथ सपना के जिस्म पर रेंगने लगे.

सपना पर नशे का असर इस कदर हावी था कि वह विरोध नहीं कर पा रही थी. सपना के खिले हुए बदन को देख कर धर्मराज के अंदर की हवस ज्वाला की तरह भड़क उठी. धीरेधीरे उस ने सपना को निर्वस्त्र कर दिया था. धर्मराज के शरीर में उठा हवस का तूफान जब तक शांत नहीं हुआ, तब तक वह सपना के जिस्म के साथ खेलता रहा. सपना की आंखों से जब नशे की खुमारी दूर हुई, तो उस ने अपनेआप को अधनंगी हालत में पाया. बदहवास सी बिस्तर पर पड़े अपने कपड़ों को बदन पर लपेटते हुए वह अपनेआप को ठगा सा महसूस कर रही थी. उस के करीब लेटा हुआ धर्मराज अपनी कुटिल मुसकान के साथ उस से कह रहा था, ‘‘अब तुम्हारी गोद सूनी नहीं रहेगी.’’

उस ने सपना को अपना मोबाइल फोन दिखाते हुए कहा, ‘‘हमारे बीच जोकुछ भी हुआ है, वह मोबाइल के कैमरे में कैद है. अगर तुम्हें संतान सुख हासिल करना है, तो किसी को कुछ नहीं बताओगी…’’ उस ने सपना को आगे भी उस की खिदमत में दरबार आते रहने की हिदायत भी दी. अपना सबकुछ लुटा चुकी सपना रात के तकरीबन 2 बजे धर्मराज के कमरे से बाहर निकल कर सीधे सुभाष के पास पहुंची. मन में औलाद की चाह लिए अपने दर्द को छिपाते हुए सुभाष के पूछने पर उस ने केवल यही बताया कि धर्मराज स्वामी द्वारा की गई तांत्रिक साधना सफल रही है.

एकएक दिन गिन रही सपना को अगले महीने जब समय पर माहवारी  नहीं हुई, तो उस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उसे अपनी इज्जत लुटने के दुख से ज्यादा अपने मां बनने की खुशी थी. अगले हफ्ते जब सपना के प्रैग्नैंसी टैस्ट की रिपोर्ट पौजिटिव आई, तो सुभाष और उस की मां भी खुशी से फूले नहीं समा रहे थे. आसपड़ोस में धर्मराज स्वामी के प्रसाद का गुणगान चल रहा था. इधर सपना का पूरा ध्यान अपने होने वाले बच्चे की सेहत पर था, मगर धर्मराज स्वामी के दरबार से उसे फोन आने लगे थे.

धर्मराज उसे अब उस के साथ बनाए संबंधों का वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर फिर से संबंध बनाने के लिए दरबार बुला रहा था. सपना की कोख में धर्मराज का बच्चा पल रह था, इसलिए उस ने सोचा कि धर्मराज को अभी नाराज न किया जाए, मगर वह दोबारा अपना जिस्म भी उसे नहीं सौंपना चाहती थी. धर्मराज सपना को हर हाल में वापस बुला कर उस के साथ रंगरलियां मनाना चाहता था.

एक दिन धर्मराज ने सपना के मोबाइल पर वही वीडियो भेज कर धमकी दे दी कि अगर वह उस के दरबार में नहीं आई, तो इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे. दिमाग से तेज सपना ने इस वीडियो से घबराने के बजाय इसे अपनी ढाल बना लिया. उस ने फोन कर के धर्मराज को उलटा ही धमका दिया, ‘‘मैं इस वीडियो को वायरल कर के समाज को बता दूंगी कि धर्म की आड़ में तू पाखंड की दुकान चला रहा है.’’

धर्मराज को सपना से ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी. सपना को दरबार बुलाने की ख्वाहिश रखने वाला धर्मराज अब सपना के फोन से घबराने लगा था. उसे यह डर सताने लगा था कि कहीं सपना उस वीडियो के जरीए उस का भांडा न फोड़ दे, इसलिए धर्मराज उस पर वीडियो को डिलीट करने का दबाव बनाने लगा. धर्मराज के चेले आएदिन उसे धमकाने लगे, तो इस बात को ले कर सपना परेशान रहने लगी, मगर वह आसानी से हार मानने वाली नहीं थी.

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साथी- भाग 1: क्या रजत और छवि अलग हुए?

रजत औफिस से घर पहुंचा, घंटी बजाई तो छवि ने दरवाजा खोल दिया. छवि पर नजर पड़ते ही रजत का मन खिन्नता से भर गया. उस ने एक उड़ती सी नजर छवि पर डाली और सीधे बैडरूम में चला गया. कपड़े बदल कर वह बाथरूम में फ्रैश हो कर निकला तो छवि कमरे में आ गई.

‘‘चलो, चायनाश्ता रख दिया है…’’ छवि कोमल स्वर में बोली. रजत और भी चिढ़ गया. चप्पलें घसीटता हुआ डाइनिंगटेबल की तरफ बढ़ गया. तब तक बच्चे भी आ गए. सब खातेपीते बातें करने लगे. बच्चों के साथ बात करतेकरते उस का मूड कुछ ठीक हो गया.

अभी वे बातें कर ही रहे थे छवि फिर उठ गई और जूठे बरतन समेटने लगी. उस ने छवि पर नजर दौड़ाई. फैला बेडौल शरीर, बढ़ा पेट, कमर में खोंसा साड़ी का पल्ला, बेतरतीब बालों को ठूंस कर बनाया जूड़ा, बेजान होता चेहरा. बच्चों के साथ बातें करतेकरते रजत का ठीक होता मूड फिर उखड़ गया.

छवि बरतन उठा कर किचन में चली गई. उस के प्रैशर कुकर, चकलाबेलन और बरतनों की खनखन ने अपना बेसुरा संगीत शुरू कर दिया था. रजत ने झुंझला कर अखबार उठाया और बाहर बरामदे में चला गया. थोड़ी देर सुबह के पढ़े बासी अखबार को दोबारा पढ़ता रहा. फिर शाम का धुंधलका छाने लगा तो दिखाई देना कम हो गया. उस ने लाइट नहीं जलाई. अंदर जाने का मन नहीं किया. कुरसी पर पीछे सिर टिका कर यादों में खो गया…

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इसी छवि को कभी रजत ने लड़कियों की भीड़ में पसंद किया था. घर वालों की मरजी के खिलाफ जा कर अपनाया था. उस के जेहन में वह दुबलीपतली, बड़ीबड़ी आंखों वाली सलोनी सी छवि तैर गई.

चाचा की बेटी की शादी में लखनऊ गया रजत जब लौटा तो अकेला नहीं आया. छवि का वजूद भी उस के जेहन से लिपटा साथ आ गया. बरातियों से हंसीठिठोली करती दुलहन की सहेलियों के बीच उस की नजर गोरी, लंबी, छरहरी छवि पर अटक गई.

छवि की लंबी वेणी दिल से लिपट गई. छवि के गुलाबी गाल, बड़ीबड़ी आंखों की झील सी गहराई, रसीले होंठों की चमक भुलाए न भूली. जब भी आंखें बंद करता हंसतीमुसकराती छवि उस की आंखों में उतर जाती.

रजत इंजीनियर था. बहुत अच्छी नौकरी में था. उस के पिता रिटायर्ड आर्मी औफिसर थे. बहुत अच्छेअच्छे घरों से शादी के प्रस्ताव उस के पिता के पास उस के लिए आए हुए थे. उन सब पर घर में सलाहमशवरा चल रहा था. वह खुद भी बहुत खूबसूरत था. इंजीनियरिंग कालेज में कई लड़कियां उस पर जान छिड़कती थीं, पर वह किसी की गिरफ्त में नहीं आया. रीतिका से तो उस की बहुत अच्छी दोस्ती थी. वह उसे केवल दोस्त मानता था. रीतिका ने उसे कई तरह से जताया कि वह उस से शादी करना चाहती है, पर साधारण शक्लसूरत की रीतिका उसे शादी के लिए पसंद नहीं आई.

मगर छवि अपना जादू चला चुकी थी. घर में आए सारे विवाह प्रस्तावों को नकार कर जब उस ने मां के सामने अपनी बात रखी तो मां ने चाचा को फोन कर के सारी बात बताई. फिर उन्होंने छवि के बारे में सबकुछ पता लगाया. छवि बीए पास एक सामान्य घर की लड़की थी. दूसरी जाति की भी थी. मातापिता ने रजत को बहुत समझाया कि सुंदरता ही सब कुछ नहीं होती. लड़की किसी भी तरह उस के योग्य नहीं हैं. आजकल के हिसाब से उसे ज्यादा पढ़ीलिखी भी नहीं कहा जा सकता.

‘‘बीए पास तो है… कौन सा मुझे उस से नौकरी करवानी है,’’ रजत बोला.

‘‘बात नौकरी की नहीं है बेटा… घर का रहनसहन, स्कूलिंग ये सब भी माने रखते हैं. इन सब बातों का असर इंसान के विचारों पर पड़ता है… आज समय बहुत बदल गया है. कुछ समय बाद तुझे खुद यह बात महसूस होने लगेगी. बीए तो हमारी कामवाली की बेटी भी कर रही है तो क्या तू उस से शादी कर सकता है?’’

पिता का ऐसा कहना रजत को खल गया. काम करने वाली की बेटी की तुलना छवि से करने से उस का दिल टूट गया. फिर चिढ़ कर बोला, ‘‘बाकी बातें तो सीखने की हैं… सिखाई जा सकती हैं, पर जो चीज कुदरत देती है वह पैदा नहीं की जा सकती… मेरे साथ रहेगी तो सब सीख जाएगी.’’

अपनी दलीलों से रजत ने मातापिता को चुप कर दिया था. आखिर मातापिता मान गए. छवि उस के जीवन में क्या आई, वह उस के रूपसौंदर्य व भोलीभाली बातों में पूरी तरह डूब गया. छवि जितनी सुंदर थी उस का स्वभाव भी उतना ही अच्छा था. सासससुर ने उसे खुले मन से स्वीकार कर लिया. वे उसे बहुत प्यार करते थे.

प्यार तो रजत भी उसे दीवानों की तरह करता था. औफिस से छूटते ही सीधे घर की दौड़ लगाता. लेकिन घर आ कर देखता छवि किचन में उलझी हुई कभी ससुरजी के लिए सूप बना रही होती है, कभी सास के लिए घुटनों का तेल गरम कर रही होती है, कभी गरम पानी की थैली भर रही होती है, कभी सब्जी काट रही होती है, तो कभी उस के लिए बढि़या नाश्ता बनाने में मसरूफ होती है.

‘‘छोड़ो न छवि ये सब… मुझे ये सब नहीं चाहिए,’’  कह रजत गैस बंद कर देता, ‘‘मांपापा का काम तुम पहले निबटा लिया करो… जब मैं आऊं तो सिर्फ मेरे पास रहा करो,’’ वह उसे अपनी बांहों में कसने की कोशिश करता.

छवि कसमसा जाती, ‘‘क्याकरते हो… मां आ जाएंगी,’’ कह वह जबरन खुद को छुड़ा लेती.

‘‘तो फिर कमरे में चलो,’’ रजत शरारत करते हुए कहता.

‘‘अरे कैसे चल दूं… खाना बनाने में देर हो जाएगी,’’ वह उसे चाय का कप थमा देती, ‘‘देखो, मैं ने आप के लिए ब्रैडरोल बनाए हैं. खा कर बताओ कैसे बने हैं.’’

वह कुढ़ कर कहता, ‘‘हमारी नईनई शादी हुई है छवि… तुम समझती क्यों नहीं,’’ और वह उसे फिर पास खींच कर चूमने का प्रयास करता.

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छवि परे छिटक जाती. अपने मचलते अरमानों को काबू कर रजत पैर पटकता किचन से बाहर निकल जाता. उस का बहुत मन करता कि छवि सबकुछ उस के आने से पहले निबटा कर अच्छी तरह सजधज कर उस का इंतजार करे और उस के आने के बाद उस के पास बैठे, उस के साथ घूमने चले, फिल्म देखने चले, बाहर खाना खाने चले, आइसक्रीम खाने चले.

मगर शायद छवि की जिंदगी में इन सब बातों की प्राथमिकता नहीं थी, उस ने अपनी मां को भी ऐसे ही काम में उलझा देखा था और यही सोचती थी कि काम करने से ही सब खुश होते हैं. यहां तक कि पति भी… पतिपत्नी के बीच इस के अलावा दूसरी बातें भी हैं, जो इस से भी जरूरी हैं, पतिपत्नी के रिश्ते के लिए यह वह नहीं समझती थी.

यहां तक कि अखबार पढ़ना, टीवी पर खबरें सुनना, इन सब बातों से भी उस का कोई मतलब नहीं रहता था. उस के लिए घर और घर का काम, सासससुर की सेवा, पति की देखभाल बस यही सबकुछ था.

रजत का मन करता उस की नईनवेली बीवी उस से कभी रूठे और वह उसे मनाए या उस के नाराज होने पर वह उसे मनाए, मीठी छेड़छाड़ करे. पर धीरेधीरे उसे लगने लगा कि इस माटी की खूबसूरत गुडि़या से ऐसी बातों की उम्मीद करना बेकार है.

समय बीतता रहा. उन के 2 बच्चे भी हो गए. अब तो छवि और भी ज्यादा व्यस्त हो गई. उस के पास पलभर की भी फुरसत नहीं रहती.

वह कई बार कहता, ‘‘छवि, खाना बनाने के लिए कोई रख लो. तुम बस अपनी देखरेख में बनवा लिया करो… काम में इतनी उलझी रहती हो… मेरे लिए तो तुम्हारे पास कभी समय नहीं रहता.’’

‘‘कब समय नहीं रहता आप के लिए,’’ छवि हैरानी से कहती, ‘‘कौन सा काम नहीं करती हूं आप का?’’

‘‘छवि, काम ही तो सबकुछ नहीं होता… तुम समझती क्यों नहीं… हमारी यह उम्र लौट कर नही आएगी… बहुत सी जरूरतें होती हैं तनमन की… इन्हें तुम समझना नहीं चाहती… बिस्तर पर एक मशीन की तरह जरूरत पूरी कर के सो जाना, तो सबकुछ नहीं… इस के अलावा भी बहुत कुछ है जीवन में…’’

छवि रजत की सारी जरूरतों को समझती पर उस के मन को न समझती. वह अच्छी बहू थी, अच्छी मां थी, अच्छी पत्नी थी पर अच्छी साथी नहीं थी. और एक साथी की कमी रजत को हमेशा अकेलेपन, एक अजीब तरह की तृष्णा व भटकन से भर देती.

Manohar Kahaniya: डॉ प्रिया पर हुआ लालच का हमला

सौजन्य- मनोहर कहानियां

उत्तर प्रदेश के शहर बिजनौर की साकेत कालोनी में अपने मातापिता के साथ रह रही डा. प्रिया शर्मा 29 अक्तूबर की सुबह जल्दीजल्दी घरेलू काम निपटा रही थी. इसी बीच उस की मां ने आवाज दी, ‘‘बेटी प्रिया, मैं ने पूजा कर ली है, तुम भी नहाधो लो. बाथरूम खाली है.’’

‘‘जी मम्मी, बस 2 रोटियां और सेंकनी है. पापा के लिए चाय का पानी चढ़ा दिया है. आ कर देख लेना.’’ प्रिया बोली.

‘‘और हां, देखो आज लाल रंग वाली साड़ी पहन कर ही कालेज जाना. शुक्रवार है, माता रानी का दिन. मैं ने लाल वाली साड़ी निकाल कर तुम्हारे बैड पर रख दी है.’’ प्रिया की मां बोलीं.

‘‘क्या मम्मी, तुम भी अंधविश्वास में पड़ी रहती हो. जमाना कहां से कहां चला गया और तुम लालपीली करती रहती हो.’’

‘‘अरे, तुम नहीं समझती हो बेटी. यह अंधविश्वास नहीं है, मेरा विश्वास है. आज के दिन लाल रंग के कपड़े पहनने से माता रानी की कृपा बनी रहती है और पूरा दिन शुभ रहता है.’’

‘‘कुछ नहीं होता उस से,’’ प्रिया बोली.

‘‘होता है… बहुत कुछ होता है. मातारानी की कृपा बनी रहती है. वैसे भी तुम्हारे लिए यह जरूरी है. मैं तुम्हारे रिश्तों के लिए ही कह रही हूं, ऐसा करने से तुम्हारे पति के साथ बिगड़े संबंध सुधर जाएंगे.’’ प्रिया की मां ने समझाने की कोशिश की.

‘‘तुम भी न मम्मी, बात को कहां से कहां ले कर चली जाती हो. हर बात को उस के साथ जोड़ देती हो, जो नाकारानिठल्ला है.’’ प्रिया चिढ़ती हुई बोली.

‘‘अरे बेटी, ऐसा नहीं कहते. वह तुम्हारा पति है. आज नहीं तो कल कमाने लगेगा. तब सब ठीक हो जाएगा बेटी.’’

‘‘अच्छा सुनो मां, मैं आज कालेज से जल्दी लौट आऊंगी. तुम और पापा को तैयार रहना है. दीवाली की खरीदारी आज ही कर लेंगे.’’ प्रिया बोली.

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‘‘हां बेटी, धनतेरस की खरीदारी का शुभ मुहुर्त दिन में ही शुरू हो रहा है.’’ मां ने कहा.

‘‘फिर वही दकियानूसी बात. मुहूर्तवुहूर्त क्या होता है?’’ प्रिया हंसती हुई बोली.

मांबेटी के बीच इस तरह की समझनेसमझाने की बातें दिन में एकदो बार अकसर हो ही जाती थीं. प्रिया को कभी मां की नसीहतें मिलतीं तो कभी प्रिया मां की देखभाल करती हुई समय से भोजन करने और दवाई लेने के लिए समझाती.

करीब 35 वर्षीया डा. प्रिया शर्मा न केवल अपने घर में मातापिता की चहेती बनी हुई थी, बल्कि मोहल्ले में भी उस की एक खास पहचान थी. वह उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर में आर.बी.डी. डिग्री कालेज की प्रवक्ता जो थी. उस ने अंगरेजी विषय में पीएच.डी. की थी.

प्रवक्ता की नौकरी यूजीसी की बेहद मुश्किल परीक्षा पास करने के बाद मिली थी. 3 साल पहले ही उस की कमल शर्मा नाम के व्यक्ति से शादी हुई थी, लेकिन महीनों से वह अपने पिता गणेश दत्त शर्मा और माता रुकमणी शर्मा के साथ रह रही थी. इस की एक अलग कहानी है.

घर से निकलते ही मारी गोली

डा. प्रिया शर्मा कालेज जाने के लिए तैयार हो चुकी थी. उस ने लंच रख लिया था. खुद भी नाश्ता कर लिया था. इस से पहले डायनिंग टेबल पर पैरेंट्स के लिए सभी जरूरी चीजें रख दी थीं. उन के लिए अलगअलग प्लेटें, पानी का जग और 2 गिलास रख दिए थे. खाने का सामान भी वहीं रख दिया था. मां के लिए फल भी काट दिए थे.

सब कुछ समय से हो गया था. मांपिता को आवाज लगाती हुई दरवाजे के पास सैंडल पहन वह घर के मुख्य दरवाजे से बाहर निकल गई थी. कुछ समय के लिए घर में एकदम सन्नाटा हो गया था. प्रिया के पिता अपने कमरे से बाहर निकले थे. वह मुख्य गेट बंद करने के लिए अभी चार कदम ही चले थे कि धांय..धांय..की आवाज सुन कर चौंक पड़े.

‘‘अरे, यह तो गोली चलने की आवाज है.’’ आवाज काफी तेज थी.

ऐसा लग रहा था, मानो बहुत पास ही किसी ने गोली चलाई हो. अभी वह कुछ सोच पाते कि इतने में 2 आवाजें एक साथ सुनाई पड़ीं. एक तेज आवाज, ‘‘क्या हुआ बाहर?’’

उन की पत्नी रुकमणी की थी और दूसरी आवाज प्रिया की, ‘‘मम्मी, आह! मर गई मैं…’’ इसी के साथ किसी के गिरने की धम्म की आवाज आई. गणेशदत्त शर्मा भागेभागे दरवाजे के पास पहुंचे. सामने का दृश्य देख कर सन्न रह गए. बेटी प्रिया दरवाजे के एक ओर बन रहे मकान की तरफ औंधे मुंह बेजान गिरी हुई थी.

उस का बैग, मोबाइल फोन और लंच बौक्स का दूसरा थैला वहीं गिरा पड़ा था. उन्होंने तुरंत उसे चेहरे की ओर सीधा किया. देखा, उस के शरीर से खून तेजी से निकल रहा था. किसी ने उसे ही गोली मारी थी.

तब तक उस की मां रुकमणी भी वहां आ चुकी थी. वह प्रिया को खून से लथपथ देखते ही दहाड़ मार कर रोने लगीं. तभी थोड़ी दूर पर बाइक पर सवार 2 लोग तेजी से भागते दिखे. गोली की आवाज सुन कर आसपास के घरों से कई लोग बाहर निकल आए.

देखते ही देखते पूरे मोहल्ले में कोहराम मच गया. प्रिया के बूढ़े मातापिता के घर मातम पसर गया. आज सुबह ही दोनों ने धनतेरस और आने वाली दीवाली की तैयारियों के बारे में बात की थी.

रुकमणी ने उसे कालेज से जल्द लौट आने को कहा था. शर्मा परिवार का दुर्भाग्य देखिए कि बूढ़े मांबाप के घर से धनतेरस के दिन ही घर की लक्ष्मी चली गई.

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हालांकि इस लक्ष्मी को उन्होंने 3 साल पहले ही अपने घर से डोली में बिठा कर विदा किया था, लेकिन अब उसे 4 कंधों पर अर्थी में विदा करने की असहनीय पीड़ा का माहौल बन गया था. वही इस घर की इकलौता सहारा और समस्या समाधान में अकेली मददगार भी थी.

सुबहसुबह अफरातफरी के बने इस माहौल में पड़ोसियों की जुटी भीड़ में से किसी ने पुलिस को सूचना दे दी, तो किसी ने घायल प्रिया को तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलवा ली. तब तक इतना तो स्पष्ट हो चुका था कि प्रिया को किसी ने काफी नजदीक से गोली मारी है.

पास के निर्माणाधीन मकान की छत से 2 मजदूरों ने बाइक सवार हमलावरों को भागते हुए भी देखा था. उन्हीं मजदूरों के मुताबिक प्रिया को गोली मारने वाले बाइक पर फर्राटा भरते तेजी से निकल भागे थे.

अस्पताल में कर दिया मृत घोषित

कुछ मिनटों में ही घटनास्थल पर बिजनौर थाने की पुलिस टीम पहुंच गई थी. उसी वक्त स्थानीय अस्पताल से एक एंबुलेंस भी आ चुकी थी. उस के साथ आए डाक्टर ने प्राथमिक जांच में प्रिया को मृत घोषित कर दिया था.

फिर भी वे खानापूर्ति और दस्तावेजी काररवाई के लिए प्रिया के शव को अस्पताल ले जाने की तैयारी करने लगे थे. इसी क्रम में पुलिस हत्याकांड की शिनाख्त में जुट गई थी. पुलिस हत्यारे तक पहुंचने का सुराग तलाशने लगी थी.

जांच अधिकारी ने इधरउधर नजरें दौड़ाईं. आसपास लगे आधा दरजन से अधिक सीसीटीवी कैमरों पर निगाह गई. वे सीधे बिजनौर पुलिस मुख्यालय के कंट्रोल रूम से जुड़े हुए थे. थानाप्रभारी ने तुरंत उन कैमरों की फुटेज इकट्ठा करवाने के निर्देश साथ में मौजूद पुलिसकर्मियों को दिए.

घटनास्थल पर ही 2 मोबाइल फोन मिल गए, जिस में एक तो प्रिया का था, जबकि दूसरा किसी और का. पुलिस ने मृतका प्रिया के पिता गणेशदत्त शर्मा और मां रुकमणी शर्मा से पूछताछ की. उन्होंने उस रोज की घटना से कुछ समय पहले की ही बातें बताईं.

डा. प्रिया का पति आया शक के दायरे में

उन की उस वक्त की स्थिति को देख कर पुलिस ने विशेष पूछताछ करना सही नहीं समझा. फिर भी बातोंबातों में इतना पता चल गया कि उन्होंने एक दिन पहले ही प्रिया के पति कमल शर्मा और ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज करवाई थी.

डा. प्रिया शर्मा हत्याकांड बिजनौर शहर वासियों के बीच चर्चा का विषय बन गया. लोगों ने असुरक्षित माहौल के लिए सीधेसीधे पुलिस की नाकामी पर सवाल उठाए. लोगों की प्रतिक्रियाओं से बिजनौर पुलिस पर हत्यारों को पकड़ने का भारी दबाव बन गया.

त्यौहार के वक्त शहर में ऐसी सनसनीखेज वारदात से जनता में भय के साथसाथ नाराजगी भी थी. लोगों ने पुलिस प्रशासन द्वारा शहर भर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की खस्ताहाली पर भी सवाल उठाए. कारण उन में नब्बे फीसदी कैमरे काम ही नहीं करते थे.

ऐसी ही स्थिति उस कालोनी के सभी 11 कैमरों की भी थी. नतीजतन प्रिया हत्याकांड के घटनास्थल से वारदात के वक्त का एक भी दृश्य कैमरे में रिकौर्ड नहीं हो पाया था. साथ ही पूछताछ के दौरान कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला था.

अब पुलिस को हत्यारे तक पहुंचने का एक सुराग घटनास्थल से मिला मोबाइल फोन ही थी. मीडिया में इन बातों को ले कर लगातार पुलिस प्रशासन की छीछालेदर हो रही थी. इस दबाव के चलते पुलिस ने अपनी दबिश और चैकिंग तेज कर दी थी.

हालांकि त्यौहार की वजह से पूरे शहर में हर नाकेगली पर पुलिस की चैकिंग पहले से ही चल रही थी. शहर की कोतवाली पुलिस विदुरकुटी चांदपुर रोड पर चैकिंग कर रही थी. वहीं पर पुलिस ने एक बाइक पर सवार 2 लोगों को रुकने का इशारा किया, मगर वे भागने की कोशिश करने लगे. उन में से एक सवार ने पुलिस के ऊपर फायरिंग भी कर दी. पुलिस ने अपनी बाइक उस के पीछे दौड़ा दी और जवाबी फायरिंग की.

पुलिस से हुई मुठभेड़ में एक बाइक सवार गिरफ्तार हो गया, जबकि दूसरा भागने में सफल रहा. पकड़े गए युवक के साथ एक सिपाही मोनू भी जख्मी हो गया था, जिसे जिला अस्पताल में भरती करवा दिया गया.

प्राथमिक उपचार के बाद पूछताछ की गई. उस ने अपना नाम राजू बताते हुए मुरादाबाद के थानांतर्गत मझौला का निवासी बताया. उस का फरार साथी गोलू मुरादाबाद में कांशीराम कालोनी का रहने वाला था.

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राजू से गहन पूछताछ में डा. प्रिया शर्मा हत्या का राज भी खुल गया. राजू ने पुलिस को बताया कि उसे कमल शर्मा ने प्रिया को मारने के लिए साढ़े 5 लाख रुपए की सुपारी दी थी. वह और उस का साथी गोलू शार्पशूटर हैं. उन्होंने ही प्रिया की गोली मार कर हत्या की है.

इसी के साथ पकड़े गए बदमाश राजू ने पुलिस को बताया कि वे 3 लोग चांदपुर जा रहे थे. किसी काम की वजह से अचानक उन के साथ आया छोटू बिजनौर रुक गया था. मुठभेड़ के समय बाइक गोलू चला रहा था, जबकि उस ने पुलिस को डराने के लिए फायरिंग कर दी थी.

हत्याकांड की तसवीर हो गई साफ

संयोग से बाइक फिसल गई थी और नीचे गिर गया था. गोलू ने बाइक संभाली, लेकिन वह उस पर सवार नहीं हो पाया था, कारण तब तक पुलिस की गोली उस के पैर में लगने से जख्मी हो गया था.

चांदपुर जाने के बारे में पूछने पर राजू ने बताया कि उन्हें प्रिया की हत्या के बाद उस के जीजा ब्रजेश कौशिक को मारने की भी सुपारी मिली थी. उसी के लिए दोनों चांदपुर कमल शर्मा के पास जा रहे थे.

अब प्रिया हत्याकांड की तहकीकात कर रही बिजनौर पुलिस के सामने तसवीर साफ हो गई थी. उन्होंने बगैर समय गंवाए डा. प्रिया के पति कमल दत्त शर्मा को उस के खिलाफ पहले से दर्ज की गई रिपोर्ट के आधार पर हिरासत में ले लिया.

राजू के बयान के मुताबिक डा. प्रिया शर्मा के पति कमलदत्त शर्मा ने ही हत्या की साजिश रची थी.

कमल शर्मा से पूछताछ के पहले पुलिस ने प्रिया के पिता और मां से उन की शादी और आपसी संबंधों के बारे में जानकारी हासिल कर ली. जब उन से पूछा गया कि उन्होंने किस कारण कमल शर्मा, उस की मां और बहन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी, तब वे बिफर गए.

वे नाराजगी दिखाते हुए कमल शर्मा और उस के परिवार को कोसने लगे. उन्होंने कहा कि 3 साल पहले कमल शर्मा के घर वालों ने झूठ बोल कर प्रिया से शादी करवाई थी. प्रिया ने उन्हीं दिनों प्रोफेसर की नौकरी जौइन की थी. वे उस की कमल से शादी करवाने के लिए लट्टू हो गए थे.

प्रिया की शादी की उम्र निकल रही थी. इस कारण उन पर प्रिया की जल्द शादी करने का मानसिक दबाव बना हुआ था. इस का असर यह हुआ कि उन लोगों ने शादी में बिचौलिया बने कमल के मामा और मामी की गलत जानकारी पर विशेष ध्यान नहीं दिया.

मामामामी ने कमल की खूब तारीफ करते हुए बताया था कि कमल एक बड़ी मल्टीनैशनल कंपनी में मैनेजर है. उस के बाद प्रिया के परिवार वाले उन की बातों में आ गए थे.

शर्मा दंपति ने कमाऊ बेटी होने बावजूद अच्छाखासा दहेज भी दिया और प्रिया की कमल के साथ बड़े ही धूमधाम से शादी की.

शादी के बाद जब प्रिया को पता चला कि उस का पति निठल्ला है, तब उस ने ऐसा महसूस किया मानो उस के पैरों तले जमीन खिसक गई हो. उस के मातापिता मायूस हो गए. लेकिन वे अब पछताने के अलावा कुछ कर भी नहीं सकते थे.

निठल्ला निकला डा. प्रिया का पति कमल

सच तो यह था कि कमल ने प्रिया से शादी उस की सैलरी और दहेज के लालच में की थी. उसे प्रिया से कोई लगाव नहीं था. प्रिया को इस शादी से बहुत बड़ा झटका लगा था. वह बुरी तरह टूट गई थी. फिर भी वह किसी तरह 3 साल तक पति, सास और ननद से रिश्ता निभाती रही.

प्रिया के लिए कमल किसी मुसीबत से कम नहीं था. वह लगातार दहेज में और अधिक पैसे की मांग करता रहता था. प्रिया के मातापिता जबतब थोड़ाथोड़ा पैसा दे दिया करते थे, ताकि दामाद शांत रहे और बेटी का घर अच्छी तरह से बस जाए. जबकि कमल का लालच बढ़ता ही जा रहा था.

हद तो तब हो गई जब उस ने प्रिया से अपने पिता का मकान बेच कर पैसा देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. इस कारण प्रिया और कमल के बीच अनबन होने लगी. बातबात पर घर में तकरार की स्थिति बन गई. इस कारण प्रिया और कमल के बीच मतभेद हो गए. बातबात पर घर में तकरार होने लगी.

प्रिया को न केवल उस का पति, बल्कि सास और ननद की तीखी बातें सुननी पड़ती थीं. कमल के लिए प्रिया केवल सोने का अंडा देने वाली मुरगी जैसी थी. उस के वेतन के पैसे पर वह मौजमस्ती करने लगा था.

प्रिया के पिता गणेशदत्त शर्मा ने बताया कि जनवरी 2021 में कमल के घर वालों ने मांग पूरी नहीं होने पर प्रिया को घर से ही निकाल दिया. उस के बाद से प्रिया अपने मायके आ कर रहने लगी थी. मायके में रहते हुए प्रिया अपने कालेज पढ़ाने जाती थी और सीधा घर लौटती थी.

कहने को तो वह ससुराल से निकाल दी गई थी, लेकिन कमल से उस का पीछा नहीं छूटा था. इस बारे में प्रिया ने कई बार अपनी मां को सारी बातें बताई थीं कि वह किस तरह उसे कालेज आतेजाते रास्ते में ही रोक लिया करता था. बीच रास्ते में ही उस से पैसे की मांग कर बैठता था. एकदो बार तो उस ने तूतड़ाक की बातें कर दी थीं और हाथापाई तक करने लगा था.

प्रिया ने बताया था कि वह काफी सहमीसहमी सी रहने लगी थी. जब कभी वह कमल को दूर से आता देखती तो वह अपना रास्ता बदल लिया करती थी. उसे हमेशा डर सताता रहता था कि पता नहीं कब कमल कोई खतरनाक कदम उठा ले. उस के तेवर हमेशा रूखे और लड़ने वाले ही होते थे.

घटना से 3-4 माह पहले से कमल के तेवर और भी खतरनाक हो गए थे. इसे ले कर उन्होंने पुलिस में शिकायत भी की थी, मगर पुलिस से उन्हें कोई मदद नहीं मिली. उन की शिकायत पर कोई नहीं ध्यान नहीं दिया गया. अगर पुलिस कुछ करती तब आज प्रिया जीवित रहती.

ससुराल से निकाल दिया गया डा. प्रिया को

गणेश दत्त ने बताया कि प्रिया ने कमल के साथ रहते हुए अपना घर संभालने और अपनी शादी को बचाने की हरसंभव कोशिश की थी. उन्होंने 3 सालों के दरम्यान किसी तरह 15 लाख रुपए का इंतजाम कर कमल को दिए भी थे.

यही नहीं, प्रिया अपनी पूरी तनख्वाह पति के खाते में ट्रांसफर कर देती थी. फिर भी उस का उत्पीड़न कम नहीं हुआ था. उस की सास और ननद इस उत्पीड़न में बराबर से शामिल रहती थीं.

आखिर एक दिन लड़ाईझगड़े के बाद कमल ने जब उस को घर से बाहर धकेल दिया, तब तो वह अपने बूढ़े मातापिता के पास चली आई थी. प्रिया के मायके रहने पर भी कमल उसे चैन से रहने नहीं देता था.

उस ने सभी रिश्तेदारों और दोस्तों में गलत बात फैला दी थी कि प्रिया का किसी और से चक्कर चल रहा है, इसलिए वह उसे छोड़ कर अपने मायके में रह रही है.

उस के रवैए से नाराज प्रिया कुछ महीने पहले से वेतन उसे नहीं भेज रही थी. इसलिए वह चाहता था कि प्रिया वापस लौट आए. ताकि वह उसे वेतन के पैसे के लिए दबाव बना सके. लेकिन प्रिया अब उस नरक में लौटने को तैयार नहीं थी.

पत्नी की हत्या के लिए कमल ने दी सुपारी

कमल ने पुलिस पूछताछ में बताया कि इसी बात से नाराज हो कर उस ने हत्या की साजिश रच डाली थी. साजिश के अनुसार उस ने साढ़े 5 लाख रुपए में प्रिया की सुपारी दे डाली थी. इस के लिए विक्रांत नाम के व्यक्ति से संपर्क किया था. उस ने एक अन्य व्यक्ति अंकुर उर्फ छोटू के माध्यम से शार्पशूटर राजू, कपिल और गोलू से संपर्क किया और कुछ पैसा एडवांस दे कर प्रिया को खत्म करने के लिए कहा.

कमल ने घटना के करीब डेढ़ महीना पहले छोटू को साथ ले जा कर प्रिया की पहचान करवा दी थी. फिर उस के घर और उन तमाम रास्तों की पहचान करा दी, जिस से हो कर वह अकसर आतीजाती थी.

कमल की मां और बहन ने भी शूटरों को साथ ले जा कर प्रिया के घर और आसपास के इलाकों की पहचान करवा दी थी. उन्होंने प्रिया को दूर से दिखा दिया था.

उस के बाद तीनों शूटरों ने कई बार खुद प्रिया के कालेज से आनेजाने और घर के आसपास शौपिंग वगैरह जाने के समय का आंकलन किया था.

कमल ने बताया कि उस को मारने के लिए वे मुरादाबाद से करीब 6 बार बिजनौर आए, मगर हर बार प्रिया रास्ता बदल कर बचती रही. मगर 29 अक्तूबर, 2021 के दिन दोनों शूटरों को सातवीं बार मौका मिल गया और उन्होंने प्रिया पर गोलियां बरसा कर उसे मौत की नींद सुला दी.

कमल ने इसी के साथ एक और खुलासा किया कि वह प्रिया की हत्या से पहले चांदपुर निवासी उस के जीजा ब्रजेश कौशिक की भी हत्या करवाना चाहता था. क्योंकि उसे शक था कि प्रिया के प्रेम संबंध उस के जीजा से हैं.

उन्होंने ही कमल और उस के पूरे परिवार एवं मामामामी समेत 8 लोगों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मुकदमा लिखवाने में गणेश दत्त शर्मा की मदद की थी. इस की पुष्टि पुलिस ने की. इस के लिए उन्होंने अपने साथियों के साथ कई बार कोशिश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी.

अंतत: उस ने प्लान बदल दिया था और पहले प्रिया को ठिकाने लगा दिया. कमल ने शूटरों को सुपारी के पैसों के अलावा 12 लाख और देने का वादा किया था. ब्रजेश कौशिक तक पहुंचने से पहले ही शूटर पकड़े गए.

कमल शर्मा के पिता का 18 साल पहले निधन हो चुका था. वह अपनी मां वर्षा दत्त शर्मा और बहन डौली के साथ रहता था. पुलिस ने कमल शर्मा के बाद उस की मां और बहन को भी दहेज हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

Rani Chatterjee इस टीवी सीरियल में लगाई ठुमके, पढ़ें खबर

भोजपुरी जगत की चर्चित अदाकारा रानी चटर्जी ने अब टीवी पर भी कदम रख दिया है.हाल ही में उन्होने ‘‘दंगल टीवी’’ पर रात नौ बजे प्रसारित हो रहे सीरियल ‘‘सिंदूर की कीमत’’ में नए साल के जश्न मनाने के खास अवसर पर डांस करके इस सीरियल का हिस्सा बनी हैं.

वास्तव में अवस्थी परिवार की दादी के जन्मदिन के साथ ही नए व-ुनवजर्या का भी जश्न मनाने के लिए अवस्थी परिवार ने खास आयोजन किया था.ऐसे में रानी चटर्जी के बवाल डांस और उनके ठुमकों ने परिवार के हर सदस्य को उत्सव के रंग में रंग दिया.रानी चटर्जी के साथ अवस्थी परिवार के सारे लोगों ने जम कर ठुमके लगाए.

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धमाकेदार -सजयंग से सभी ने नया साल मनाया और केक काटकर इस खुशी के मौके का भव्य जश्न मना. केक भी काटा गया. अपने इस खास डांस नंबर के लिए रानी चटर्जी ने कातिलाना कास्ट्यूम पहन रखी थी.

नीले रंग की पोषाक में वह वास्तव में लोगों के दिलों को लूटती नजर आ रही हैं.कपड़ों से मैच करती चूड़ियां, माथे पे ज्वेलरी और आक-ुनवजर्याक-हजयुमके के साथ जब रानी ने ठुमके लगाने शुरू किए,तो हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया.

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सीरियल ‘‘सिंदूर की कीमत’’ में रानी चटर्जी का आगमन भले ही खास डांस के साथ हुआ हो. मगर इसकी पृष्भूठमि में रोचक कहानी है. रानी चटर्जी चैरिटी कर धन जमा करती हैं और वह यह धन उस आश्रम को दान करती थी,जहां सीरियल की अहम किरदार मिश्री का पालन-ंउचयपो-ुनवजयाण हुआ था, इस तरह वह मिश्री को जानती हैं.रानी का डांस परफॉर्मेंस मिश्री के साथ उनके जुड़ाव की वजह से है.

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भोजपुरी सिनेमा में अभिनेत्री रानी चटर्जी का अपना एक अलग मुकाम है. पिछले सत्रह व-ुनवजर्या के अपने कैरियर में वह ‘‘ससुरा बड़ा पैसा वाला’’,‘‘देवरा बड़ा सतावेला’’ ‘‘दामादजी’’,‘‘कर्ज’,‘वकालत’,रंगबाज’, ‘इच्छाधारी’,‘छोटी ठकुराइन’ सहित पचास से अधिक भोजपुरी फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा दिखाकर जबरदस्त शोहरत बटोर चुकी हैं.

भोजपुरी सिंनेमा में उनकी गिनती ग्लैमरस अदाकारा के रूप में होती हैे.गत व-ुनवजर्या वह वेब सीरीज ‘मस्तराम’में भी नजर आयी थी.वहीं वह कलर्स टीवी पर रियालिटी शो ‘‘खतरों के खिलाड़ी’’में भी प्रतिस्पर्धी बनकर आ चुकी हैं. और अब वह टीवी सीरियल का हिस्सा बनी हैं. रानी चटर्जी कहती हैं-ंमुझे किसी भी माध्यम में काम करने से परहेज नहीं है. मैं टीवी,फिल्म व ओटीटी पर भी काम करना चाहती हूं.बशर्ते  किरदार दमदार हो.

मुझे मौका मिले तो में थिएटर भी करना चाहती हॅूं.’’ सीरियल ‘‘सिंदूर की कीमत’’ में धवन,प्रतीक चैधरी, जसविंदर गार्डनर व माधवी गोगते जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं.

अपना घर: भाग 3

‘‘मैं ने कभी सीमा को उस की पिछली जिंदगी की याद नहीं दिलाई. वह मेरा कितना उपकार मानती है कि मैं ने उसे ऐसे दलदल से बाहर निकाला जिस की उसे सपने में भी उम्मीद नहीं थी.’’

यह सुन कर विजय हैरान रह गया. वह अनिल की ओर एकटक देख रहा था. न जाने कितने लोग सीमा के जिस्म से खेले होंगे? आखिर यह सब कैसे सहन कर गया अनिल? क्या अनिल के सीने में दिल नहीं है? अनिल के सामने कोई मजबूरी नहीं थी, फिर भी उस ने सीमा को अपनाया.

अनिल ने कहा, ‘‘यार, भूल तो सभी से होती है. कभी किसी को माफ भी कर के देखो. भूल की सजा तो कोई भी दे सकता है, पर माफ करने वाला कोईकोई होता है. किसी गिरे हुए को ठोकर तो सभी मार सकते हैं, पर उसे उठाने वाले दो हाथ किसीकिसी के होते हैं.’’

तभी सीमा एक ट्रे में चाय के कप व कुछ खाने का सामान ले कर आई और बोली, ‘‘चाय लीजिए.’’

विजय सकपका गया. वह सीमा से आंखें नहीं मिला पा रहा था. वह खुद को बहुत छोटा महसूस कर रहा था. उसे लग रहा था कि सचमुच उस ने सुरेखा को घर से निकाल कर बहुत बड़ी भूल की है. शक के जाल में वह बुरी तरह उलझ गया था. आज उस जाल से बाहर निकलने के लिए छटपटाहट होने लगी. उसे खुद से ही नफरत हो रही थी.

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विजय चुपचाप चाय पी रहा था. अनिल ने कहा, ‘‘अब ज्यादा न सोचो. कल ही जा कर तुम भाभीजी को ले आओ. सब से पहले यह शराब उठा कर बाहर फेंक देना. भाभीजी के आने के बाद तुम्हें इस की जरूरत नहीं पड़ेगी.

‘‘शराब तुम्हें खोखला और बरबाद कर देगी. भाभीजी की याद में जलने से जिंदगी दूभर हो जाएगी. जिस का हाथ थामा है, उसे शक के अंधेरे में इस तरह भटकने के लिए न छोड़ो.

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‘‘कुछ त्याग भी कर के देखो यार. वैसे भी इस में भाभीजी की जरा भी गलती नहीं है.’’

विजय को लग रहा था कि अनिल ठीक ही कह रहा है. वह एक भूल तो कर चुका है सुरेखा को घर से निकाल कर, अब तलाक लेने की दूसरी भूल नहीं करेगा. कुछ दिनों में ही उस की और घर की क्या हालत हो गई है. अभी तो जिंदगी का सफर बहुत लंबा है.

‘‘हम 4 दिन बाद लौटेंगे तो भाभीजी से मिल कर जाएंगे,’’ अनिल ने कहा.

विजय ने मोबाइल फोन का स्विच औन किया और दूसरे कमरे में जाता हुआ बोला, ‘‘मैं सुरेखा को फोन कर के आता हूं.’’

अनिल और सीमा ने मुसकुरा कर एकदूसरे की ओर देखा.

विजय ने सुरेखा को फोन मिलाया. उधर से सुरेखा बोली, ‘हैलो.’

‘‘कैसी हो सुरेखा?’’ विजय ने पूछा.

‘मैं ठीक हूं. कब भेज रहे हो तलाक के कागज?’

‘‘सुरेखा, तलाक की बात न करो. मुझे दुख है कि उस दिन मैं ने तुम्हें घर से निकाल दिया था. फिर फोन पर न जाने क्याक्या कहा था. मुझे उस भूल का बहुत पछतावा है.’’

‘पी कर नशे में बोल रहे हो क्या? मुझे पता है कि अब तुम रोज शराब पीने लगे हो.’

‘‘नहीं सुरेखा, अब मैं नशे में नहीं हूं. मैं ने आज नहीं पी है. तुम्हारे बिना यह घर अधूरा है. अब अपना घर संभाल लो. मैं तुम्हें लेने कल आ रहा हूं.’’

उधर से सुरेखा का कोई जवाब

नहीं मिला.

‘‘सुरेखा, तुम चुप क्यों हो?’’

सुरेखा के रोने की आवाज सुनाई दी.

‘‘नहीं, सुरेखा नहीं, अब मैं तुम्हें रोने नहीं दूंगा. मैं कल ही आ कर मम्मीपापा से भी माफी मांग लूंगा. बस, एक रात की बात है. मैं कल शाम तक तुम्हारे पास पहुंच जाऊंगा.’’

‘मैं इंतजार करूंगी,’ उधर से सुरेखा की आवाज सुनाई दी.

विजय ने फोन बंद किया और अनिल व सीमा को यह सूचना देने के लिए मुसकराता हुआ उन के पास आ गया.

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TMKOC के जेठालाल को फैंस ने किया ट्रोल, पढ़ें खबर

टीवी का पॉपुलर कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (Tarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) दर्शकों का फेवरेट शोज में से एक है. यह शो लंबे समय  से दर्शकों का फुल एंटरटेनमेंट कर रहा है. इस शो के सभी किरदार घर-घर में मशहूर है. फैंस शो के इन किरदारों को खूब पसंद करते हैं. शो के सबसे पॉपुलर किरदार जेठालाल को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है. आइए बताते हैं क्या है पूरा मामला.

हाल ही में जेठालाल यानी दिलीप जोशी का एक वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि जेठालाल एयरपोर्ट पर नजर आ रहे हैं.  इस दौरान वह काफी तेज चल रहे हैं और उनके साथ उनका ट्रॉली बैग भी है जो ठीक तरह से मूव नहीं हो रहा हैं. ट्रॉली बैग का एक व्हील दूसरे व्हील पर पलट रहा है.

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दिलीप जोशी का ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो गया है. फैंस इसे ट्रोल कर रहे हैं. जेठालाल के इस वीडियो पर एक यूजर ने लिखा है कि बैग ने कौन सा नशा किया भाई? वहीं दूसरे यूजर ने लिखा बैग को अब तक हैंगओवर है. तो किसी ने लिखा है कि जेठालाल आम जिंदगी में भी कॉमेडियन है.

 

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दिलीप जोशी ने फिल्म मैंने प्यार किया से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कदम रखी थी. लेकिन वह टेलीविजन शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा से काफी मशहुर हैं. लोग उन्हें शो के किरदार जेठालाल के नाम से जानते हैं. खबरों के अनुसार दिलीप जोशी ने ने शो को लेकर कहा था कि यह एक कॉमेडी शो है और इसका हिस्सा बनना मजेदार है. जब तक मैं इसका आनंद लेता हूं तब तक मैं शो में काम करता रहूंगा.

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Anupamaa: वनराज के खिलाफ अनुपमा के कान भरेगी काव्या तो इस बात से नाराज होगा समर

रुपाली गांगुली और सुधांशु पांडे स्टारर सीरियल ‘अनुपमा’ की कहानी दर्शकों का दिल जीत रही है. यह शो लगातार हर हफ्ते टीआरपी लिस्ट में कब्जा जमाए हुए है. शो के बिते एपिसोड में आपने देखा कि जीके अनुपमा से बात करते हैं और कहते हैं कि अगर अनुपमा भी अनुज से प्यार करती है तो उसे जल्द से जल्द अनुज से अपनी दिल की बात कह देनी चाहिए. अनुपमा कहती है, सही वक्त आने पर वह अनुज से अपनी दिल की बात कह देगी. अनुज ने 26 साल से इंतजार किया है तो अनुपमा भी सही समय का इंतजार कर सकती है. शो के अपकमिंग एपिसोड में हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिलने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो में दिखाया गया कि मालविका वनराज को गले लगाती है, ऐसे में काव्या दोनों को साथ देख लेती है. और वह मालविका को सुनाती है कि तुम मेरे पति के गले क्यों लगती हो, मालविका उसे कहती है कि मैं तुम्हारी तरह पति चोर नहीं हूं.

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शो के आने वाले एपिसोड में दिखाया जाएगा कि मालविका, वनराज से अपने बिजनेस के बारे में बात करेगी. काव्या वनराज से कहगी कि वह भी जॉब करना चाहती है लेकिन वनराज उसे मना कर देता है.  वह अपना जॉब खुद ढूढे. अनुज और अनु शाह हाउस आते हैं.

 

तो दूसरी तरफ काव्या अनुपमा को एक तरफ ले जाती है और कहती है कि वह उससे बात करना चाहती है.काव्या फिर अनु से मालविका को उसके घर से ले जाने के लिए कहती है. काव्या आगे कहती है कि वनराज मालविका का कपाड़िया एंपायर की मालकिन होने का फायदा उठा सकता है. ऐसे में अनुपमा कहती है कि उसे अपने पति पर भरोसा करना चाहिए.

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शो में आप देखेंगे कि अनुपमा मालविका को अपने साथ ऑफिस जाने के लिए कहती है ताकि दोनों नये साल की पार्टी का प्लान बना सकें. वहीं, मालविका नये साल की पार्टी में नहीं जाने के लिए कहती है. अनुज कहेगा कि अगर वो पार्टी में शामिल नहीं होगी तो वो भी इसमें नहीं आएगा. अनुपमा मालविका को पार्टी में आने के लिए मनाएगी.

दूसरी तरफ आप शो में देखेंगे कि काव्या नंदिनी से कहेगी कि उसे समर से शादी करने से बचना चाहिए या शादी के बाद उसके साथ अलग रहना चाहिए. समर काव्या की बात सुन लेगा और आगबबूला हो जाएगा.

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