परिणीति का स्वयंवर, दूल्हे की लिस्ट में होंगे ये 4 TV एक्टर्स

बॉलिवुड की सबसे बबली और क्यूट एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा इन दिनों कलर्स के शो ‘हुनरबाज- देश की शान (Hunarbaaz)’ में बतौर जज नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस के साथ करण जौहर और मिथुन चक्रवर्ती भी बतौर जज बने हैं.

शो के होस्ट भारती और हर्ष परिणीति की खूब खिंचाई करते हैं.साथ ही ऐक्ट्रेस भी उनके साथ खूब मस्ती करती नजर आती है. हर्ष और भारती कई दिनों से परिणीति को अपना स्वयंवर करने के लिए बोल रहे थे और फाइनली वो दिन आ ही गया, जब परिणीति ने अपने स्वयंवर के लिए हामी भर दी है.

शो के अपकमिंग वीकेंड एपिसोड में परिणीति का स्वयंवर होते हुए दिखाया जाएगा. परिणीति को अक्सर शो में यह कहते सुना जाता है कि वह शादी करने के लिए तैयार हैं और एक परफेक्ट मैच की तलाश में हैं और अब वो दिन आ गया है, जब परिणीति ने हुनरबाज के मंच पर अपनी तलाश खत्म कर दी है.

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स्वयंवर में शामिल होंगे ये टीवी चेहरे

टेलीविजन इंडस्ट्री के कुछ लोकप्रिय चेहरे परिणीति के स्वयंवर का हिस्सा बनने जा रहे हैं जैसे ‘कुमकुम भाग्य’ ऐक्टर अरिजीत तनेजा, ‘बेगूसराय’ के विशाल आदित्य सिंह, ‘बिग बॉस 13’ फेम सिद्धार्थ डे और पूर्व ‘खतरों के खिलाड़ी 10’ प्रतियोगी शिविन नारंग.

ये सभी ऐक्टर्स परिणीति को अपने अंदाज़ से इम्प्रेस करेंगे. परिणीति के लिए फूल लाने, डांस करने और दूसरी अदाएं दिखाने तक वे ‘हंसी तो फंसी’ की इस एक्ट्रेस को रिझाने के लिए सब कुछ करेंगे.

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शो के जज करण जौहर, मिथुन चक्रवर्ती और होस्ट भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया सही फैसला लेने में परिणीति की मदद करते नजर आएंगे. स्पेशल गेस्ट के रूप में वेटरन सिंगर कुमार शानू भी शो में शामिल होंगे.

करण जौहर अपनी प्रतिभा दिखाने और खुद को साबित करने के लिए उम्मीदवारों को एक-एक करके मंच पर बुलाएंगे. बता दें कि ‘हुनरबाज-देश की शान’ हर वीकेंड कलर्स पर प्रसारित होता है.

Lock upp: आपस में भिड़ीं पायल रोहातगी और अंजलि अरोड़ा

कंगना रनौत का शो ‘लॉक अप’ जैसे-जैसे आगे बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे कंटेस्टेंट्स अपना आपा खोते जा रहे हैं. शो की शुरुआत में कंटेस्टेंट्स के बीच थोड़ा खुशनुमा माहौल दिख रहा था, लेकिन अब सभी  के बीच आपस में लड़ाईयां शुरू हो गई हैं .हाल ही में दो कंटेस्टेंट्स के बीच बात इतनी बढ़ गई कि हाथापाई तक की नौबत आ गई.

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वो दो कंटेस्टेंट्स हैं पायल रोहतगी और अंजली अरोड़ा, वैसे इन दोनों स्टार्स के बीच शुरुआत से ही थोड़ी तल्खी देखी जा रही है.ऑल्ट बालाजी ने इसका प्रोमो भी जारी किया है.

वीडियो में साफ दिख रहा है कि पायल घर का कुछ सामान फेंक देती हैं, वहीं ब्लू टीम के सदस्य करणवीर, निशा, पूनम और अंजली उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं. पायल तब भी नहीं रुकतीं तो अंजली उन्हें पकड़ लेती हैं.

इस दौरान दोनों में थोड़ी हाथापाई भी होती है, इस दौरान अंजली  कहती हैं  कि उन्होंने उन्हें काटा तो वहीं पायल कहती हैं कि अंजली के ऐसे पकड़ने से उनका दम घुट रहा है. देखें वीडियो.

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जाने पूरा मामला

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दरअसल, हुआ यूं था कि एक टास्क के दौरान पायल ने कहा था कि ‘एक्सपीरियंस लोगों के साथ खड़े रहना सीखो…बच्चों का काम नहीं है ये’. पायल की इस बात का जवाब देते हुए अंजलि ने कहा था, ‘तो बुड्ढों के लिए भी तो जगह नहीं है…बच्चों के सामने बुड्ढे खड़े हैं.’ अंजलि की इस बात पर पायल और निशा भड़क गई थीं. इसके बाद वीकेंड पर कंगना ने अंजलि को आड़े हाथों ले लिया.

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अंजलि अरोड़ा पर भड़कीं कंगना रनौत

इस शर्मनाक हिंसा के बाद ‘क्वीन’ ने अंजलि से कहा ‘आप मेरी उम्र को कैसे जस्टिफाई करेंगी? आप मुझे क्या कहेंगी आंटी..बुड्ढी? क्योंकि मैं आपसे बड़ी हूं. या आप मुझे बहन जी..आंटी कहेंगी क्योंकि आप किसी की इज्ज़त नहीं करतीं’. कंगना की बात सुनकर अंजलि ने अपनी सफाई में कहा कि वो अपनी मम्मी को बहुत मिस कर रही थीं इसलिए उन्होंने गुस्से में वो कह दिया.

जिंदगी का गणित: भाग 2

‘‘अभी आई,’’ कह कर वह बच्चे को पालने में लिटा फिर वहां आ गई. परंतु अब राहुल बाहर जाने को उद्यत था. उसे बाहर फाटक तक छोड़ने गई तो उस ने पलट कर रमा को हाथ जोड़ कर नमस्कार किया और हौले से मुसकरा कर हिचकते हुए कहा, ‘‘यह तो अशिष्टता ही होगी कि पहली मुलाकात में ही मैं आप से इतनी छूट ले लूं, लेकिन कहना भी जरूरी है…’’

रमा एकाएक घबरा गई, ‘बाप रे, यह क्या हो गया. क्या कहने जा रहा है राहुल, कहीं मेरे मन की कमजोरी इस ने भांप तो नहीं ली?’

रमा अपने भीतर की कंपकंपी दबाने के लिए चुप ही रही. राहुल ही बोला, ‘‘असल में मैं अपने एक दोस्त के साथ रहता हूं. अब उस की पत्नी उस के पास आ कर रहना चाहती है और वह परेशान है. अगर आप की सिफारिश से मुझे कोई बरसाती या कमरा कहीं आसपास मिल जाए तो बहुत एहसान मानूंगा. आप तो जानती हैं, एक छड़े व्यक्ति को कोई आसानी से…’’ वह हंसने लगा तो रमा की जान में जान आई. वह तो डर ही गई थी कि पता नहीं राहुल एकदम क्या छूट उस से ले बैठे.

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‘‘शाम को अपने पति से इस सिलसिले में भी बात करूंगी. इसी इमारत में ऊपर एक छोटा सा कमरा है. मकान मालिक इन्हें बहुत मानता है. हो सकता है, वह देने को राजी हो जाए. परंतु खाना वगैरह…?’’

‘‘वह बाद की समस्या है. उसे बाद में हल कर लेंगे,’’ कह कर वह बाहर निकल गया. गहरे ऊहापोह और असमंजस के बाद आखिर रमा ने अपने पति विनोद से फिर नौकरी करने की बात कही. विनोद देर तक सोचता रहा. असल परेशानी बच्चे को ले कर थी.

‘‘अपनी मां को मैं मना लूंगी. कुछ समय वे साथ रह लेंगी,’’ रमा ने सुझाव रखा.

‘‘देख लो, अगर मां राजी हो जाएं तो मुझे एतराज नहीं है,’’ वह बोला, ‘‘उमेशजी हमारे जानेपरखे व्यक्ति हैं. उन की कंपनी में नौकरी करने से कोई परेशानी और चिंता नहीं रहेगी. फिर तुम्हारी पसंद का काम है. शायद कुछ नया करने को मिल जाए.’’

राहुल के लिए ऊपर का कमरा दिलवाने की बात जानबूझ कर रमा ने उस वक्त नहीं कही. पता नहीं, विनोद इस बात को किस रूप में ले. दूसरे दिन वह बच्चे के साथ मां के पास चली गई और मां को मना कर साथ ले आई. विनोद भी तनावमुक्त हो गया.

रमा ने फिर से नौकरी आरंभ कर दी. पुराने कर्मचारी उस की वापसी से प्रसन्न ही हुए, पर राहुल तो बेहद उत्साहित हो उठा, ‘‘आप ने मेरी बात रख ली, मेरा मान रखा, इस के लिए किन शब्दों में आभार व्यक्त करूं?’’

रमा सोचने लगी, ‘यह आदमी है या मिसरी की डली, कितनी गजब की चाशनी है इस के शब्दों में. कितने भी तीखे डंक वाली मधुमक्खी क्यों न हो, इस डली पर मंडराने ही लगे.’ एक दिन उमेशजी ने कहा था, ‘कंपनी में बहुत से लोग आएगए, पर राहुल जैसा होनहार व्यक्ति पहले नहीं आया.’

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‘लेकिन राहुल आप की डांटफटकार से बहुत परेशान रहता है. उसे हर वक्त डर रहता है कि कहीं आप उसे कंपनी से निकाल न दें,’ रमा मुसकराई थी.

‘तुम्हें पता ही है, अगर ऐसा न करें तो ये नौजवान लड़के हमारे लिए अपनी जान क्यों लड़ाएंगे?’ उमेशजी हंसने लगे थे.

‘‘राहुल, एक सूचना दूं तुम्हें?’’ एक दिन अचानक रमा राहुल की आंखों में झांकती हुई मुसकराने लगी तो राहुल जैसे निहाल ही हो गया था.

‘‘अगर आप ने ये शब्द मुसकराते हुए न कहे होते तो मेरी जान ही निकल जाती. मैं समझ लेता, साहब ने मुझे कंपनी से निकाल देने का फैसला कर लिया है और मेरी नौकरी खत्म हो गई है.’’

‘‘आप उमेशजी से इतने आतंकित क्यों रहते हैं? वे तो बहुत कुशल मैनेजर हैं. व्यक्ति की कीमत जानते हैं. आदमी की गहरी परख है उन्हें और वे आप को बहुत पसंद करते हैं.’’

‘‘क्यों सुबहसुबह मेरा मजाक बना रही हैं,’’ वह हंसा, ‘‘उमेशजी और मुझे पसंद करें? कहीं कैक्टस में भी हरे पत्ते आते हैं. उस में तो चारों तरफ सिर्फ तीखे कांटे ही होते हैं, चुभने के लिए.’’

‘‘नहीं, ऐसा नहीं है,’’ वह बोली, ‘‘वे तुम्हें बहुत पसंद करते हैं.’’

‘‘उन्हें छोडि़ए, रमाजी, अपने को तो अगर आप भी थोड़ा सा पसंद करें तो जिंदगी में बहुतकुछ जैसे पा जाऊं,’’ उस ने पूछा, ‘‘क्या सूचना थी?’’

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‘‘हमारे ऊपर वाला वह छोटा कमरा आप को मिलना तय हो गया है. 500 रुपए किराया होगा, मंजूर…?’’ रमा ने कहा तो राहुल ने अति उत्साह में आ कर उस का हाथ ही पकड़ लिया, ‘‘बहुतबहुत…’’ कहताकहता वह रुक गया.

उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो तुरंत हाथ छोड़ दिया, ‘‘क्षमा करें, रमाजी, मैं सचमुच कमरे को ले कर इतना परेशान था कि आप अंदाजा नहीं लगा सकतीं. कंपनी के काम के बाद मैं अपना सारा समय कमरा खोजने में लगा देता था. आप ने…आप समझ नहीं सकतीं, मेरी कितनी बड़ी मदद की है. इस के लिए किन शब्दों में…’’

‘‘कल से आ जाना,’’ रमा ने झेंपते हुए कहा.

किसीकिसी आदमी की छुअन में इतनी बिजली होती है कि सारा शरीर, शरीर का रोमरोम झनझना उठता है. रगरग में न जाने क्या बहने लगता है कि अपनेआप को समेट पाना असंभव हो जाता है. पति की छुअन में भी पहले रमा को ऐसा ही प्रतीत होता था, परंतु धीरेधीरे सबकुछ बासी पड़ गया था, बल्कि अब तो पति की हर छुअन उसे एक जबरदस्ती, एक अत्याचार प्रतीत होती थी. हर रात उसे लगता था कि वह एक बलात्कार से गुजर रही है. वह जैसे विनोद को पति होने के कारण झेलती थी. उस का मन उस के साथ अब नहीं रहता था. यह क्या हो गया है, वह खुद समझ नहीं पा रही थी.

मां से अपने मन की यह गुत्थी कही थी तो वे हंसने लगीं, ‘पहले बच्चे के बाद ऐसा होने लगता है. कोई खास बात नहीं. औरत बंट जाती है, अपने आदमी में और अपने बच्चे में. शुरू में वह बच्चे से अधिक जुड़ जाती है, इसलिए पति से कटने लगती है. कुछ समय बाद सब ठीक हो जाएगा.’

‘पर यह राहुल…? इस की छुअन…?’ रमा अपने कक्ष में बैठी देर तक झनझनाहट महसूस करती रही.

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राहुल ऊपर के कमरे में क्या आया, रमा को लगा, जैसे उस के आसपास पूरा वसंत ही महकने लगा है. वह खुशबूभरे झोंके की तरह हर वक्त उस के बदन से जैसे अनदेखे लिपटता रहता.

वह सोई विनोद के संग होती और उसे लगता रहता, राहुल उस के संग है और न जाने उसे क्या हो जाता कि विनोद पर ही वह अतिरिक्त प्यार उड़ेल बैठती.

नींद से विनोद जाग कर उसे बांहों में भर लेता, ‘‘क्या बात है मेरी जान, आज बहुत प्यार उमड़ रहा है…’’

वह विनोद को कुछ कहने न देती. उसे बेतहाशा चूमती चली जाती, पागलों की तरह, जैसे वह उस का पति न हो, राहुल हो और वह उस में समा जाना चाहती हो.

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जिंदगी का गणित: भाग 3

अब वह मन ही मन राहुल से बोलती, बतियाती रहती, जैसे वह हर वक्त उस के भीतरबाहर रह रहा हो. उस के रोमरोम में बसा हुआ हो. वह अब जो भी रसोई में पकाती, उसे लगता राहुल के लिए पका रही है, वह खाती या विनोद को खिलाती तो उसे लगता रहता, राहुल को खिला रही है. वह अपने सामने बैठे पति को अपलक ताकती रहती, जैसे उस के पीछे राहुल को निहार रही हो.

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वह स्नानघर में वस्त्र उतार कर नहा रही होती तो उसे लगता रहता, राहुल उस के पोरपोर को अपनी नरम उंगलियों से छू और सहला रहा है और वह पानी की तरह ही बहने लगती.

राहुल के लिए ऊपर छत पर कोई स्नानघर नहीं था. नीचे सीढि़यां उतर कर इमारत के कर्मचारियों के लिए एक साझा स्नानघर था, जिस में उसे नहाने की अनुमति थी. वह किसी महकते साबुन से नहा कर जब सीढि़यां चढ़ता हुआ उस के फ्लैट के सामने से गुजरता तो अनायास ही वह जंगले में आ कर खड़ी हो जाती. देर तक उस के साबुन की सुगंध हवा के साथ वह अपने भीतर फेफड़ों में महसूस करती रहती. आदमी में भी कितनी महक होती है. आदमी की आदम महक और वह उस महक की दीवानी…उस में मदहोश, गाफिल.

वह जानबूझ कर विनोद के सामने कभी गलती से भी राहुल का जिक्र न करती थी. कमरे में आ जाने के बावजूद कभी उस ने विनोद के सामने उस से बात करने का प्रयास नहीं किया था. न उसे कभी चाय या खाने पर ही बुलाया था.

परंतु क्या सचमुच ऐसा था, इतना सहज और सरल? या संख्याएं और गणितीय रेखाएं आपस में उलझ गई थीं, गड्डमड्ड हो गई थीं?

उस ने कभी सपने में भी कल्पना नहीं की थी कि वह विनोद के अलावा भी किसी अन्य पुरुष की कामना करेगी कि उस के भीतर कोई दूसरा भी कभी इस तरह रचबस जाएगा कि वह पूरी तरह अपनेआप पर से काबू खो बैठेगी.

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‘‘राहुल, तुम मेरा भला चाहते हो या बुरा…?’’ एक दिन उस की चार्टर्ड बस नहीं आई थी तो उसे राहुल के साथ ही सामान्य बस से दफ्तर जाना पड़ रहा था. वे दोनों उस समय बस स्टौप पर खड़े थे.

‘‘तुम ने कैसे सोच लिया कि मैं कभी तुम्हारा बुरा भी चाह सकता हूं? अपने मन से ही पूछ लेतीं. मेरे बजाय तुम्हारा मन ही सच बता देता,’’ राहुल सीधे उस की आंखों में झांक रहा था.

‘‘तुम मेरी खातिर ऊपर का कमरा ही नहीं, बल्कि यह नौकरी भी छोड़ कर कहीं चले जाओ. सच राहुल, मैं अब…’’

‘‘अगर तुम मेरे बिना रह सकती हो तो कहो, मैं दुनिया ही छोड़ दूं. मैं तुम्हारे बिना जीवित रहने की अब कल्पना नहीं करना चाहता,’’ उस ने कहा तो रमा की पलकों पर नमी तिर आई.

‘‘किसी भी दिन मेरा पागलपन विनोद पर उजागर हो जाएगा. और उस दिन की कल्पनामात्र से ही मैं कांप उठती हूं.’’

‘‘सच बताना, मेरे बिना अब जी सकती हो तुम?’’चुप रह गई रमा.

बस आई तो राहुल उस में चढ़ गया. उस ने हाथ पकड़ कर रमा को भी चढ़ाना चाहा तो वह बोली, ‘‘तुम जाओ, मैं आज औफिस नहीं जाऊंगी,’’ कह कर वापस घर आ गई.

मां ने उस की हालत देखी तो पहले तो कुछ नहीं कहा, पर जब वह अपने शयनकक्ष में बिस्तर पर तकिए में मुंह गड़ाए सिसकती रही तो न जाने कब मां उस के पलंग पर आ बैठीं, ‘‘अपनेआप को संभालो, बेटी. यह सब ठीक नहीं है. मैं समझ रही हूं, तू कहां और क्यों परेशान है. मैं आज ही राहुल से चुपचाप कह दूंगी कि वह यहां से नौकरी छोड़ कर चला जाए. इस तरह कमजोर पड़ना अच्छा नहीं होता, बेटी. तेरा अपना घरपरिवार है. संभाल अपनेआप को.’’

रमा न जाने क्यों देर तक एक नन्ही बच्ची की तरह मां की गोद में समाई फफकती रही, जैसे कोई उस का बहुत प्रिय खिलौना उस से छीनने की कोशिश कर रहा हो.

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जिंदगी का गणित: भाग 1

जिंदगी का गणित सीधा और सरल नहीं होता. वह बहुत उलझा हुआ और विचित्र होता है. रमा को लगा था, सबकुछ ठीकठाक हो गया है. जिंदगी के गणितीय नतीजे सहज निकल आएंगे. उस ने चाहा था कि वह कम से कम शादी से पहले बीए पास कर ले. वह कर लिया. फिर उस ने चाहा कि अपने पैरों पर खड़े होने के लिए कोई हुनर सीख ले. उस ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया और उस में महारत भी हासिल कर ली.

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फिर उस ने चाहा, किसी मनमोहक व्यक्तित्व वाले युवक से उस की शादी हो जाए, वह उसे खूब प्यार करे और वह भी उस में डूबडूब जाए. दोनों जीवनभर मस्ती मारें और मजा करें. यह भी हुआ. विनोद से उस के रिश्ते की बात चली और उन लोगों ने उसे देख कर पसंद कर लिया. वह भी विनोद को पा कर प्रसन्न और संतुष्ट हो गई पर…

शादी हुए 2 साल गुजरे थे. 7-8 माह का एक सुंदर सा बच्चा भी हो गया था. वह सबकुछ छोड़छाड़ कर और भूलभाल कर अपनी इस जिंदगी को भरपूर जी रही थी. दिनरात उसी में खोई रहती थी. वह पहले एक रेडीमेड वस्त्रों की निर्यातक कंपनी में काम करती थी. जब उस की शादी हुई, उस वक्त इस धंधे में काफी गिरावट चल रही थी. इसलिए उस नौकरी को छोड़ते हुए उसे कतई दुख नहीं हुआ. कंपनी ने भी राहत की सांस ली.

परंतु जैसे ही इधर फिर कारोबार चमका और विदेशों में भारतीय वस्त्रों की मांग होने लगी, इस व्यापार में पहले से मौजूद कंपनियों ने अपने हाथ आजमाने शुरू कर दिए.

राहुल इसी सिलसिले में कंपनी मैनेजर द्वारा बताए पते पर रमा के पास आया था, ‘‘उमेशजी आप के डिजाइनों के प्रशंसक हैं. वे चाहते हैं, आप फिर से नौकरी शुरू कर लें. वेतन के बारे में आप जो उपयुक्त समझें, निसंकोच कहें. मैं साहब को बता दूंगा…

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‘‘मैडम, हम चाहते हैं कि आप इनकार न करें, इसलिए कि हमारा भविष्य भी कंपनी के भविष्य से जुड़ा हुआ है. अगर कंपनी उन्नति करेगी तो हम भी आगे बढ़ेंगे, वरना हम भी बेकारों की भीड़ के साथ सड़क पर आ जाएंगे. आप अच्छी तरह जानती हैं, चार पैसे कंपनी कमाएगी तभी एक पैसा हमें वेतन के रूप में देगी.’’

व्यापारिक संस्थानों में आदमी कितना मतलबी और कामकाजी हो जाता है, राहुल रमा को इसी का जीताजागता प्रतिनिधि लगा था. एकदम मतलब की और कामकाजी बात सीधे और साफ शब्दों में कहने वाला. रमा ने उस की तरफ गौर से देखा, आकर्षक व्यक्तित्व और लंबी कदकाठी का भरापूरा नौजवान. वह कई पलों तक उसे अपलक ताकती रह गई.

‘‘उमेशजी को मेरी ओर से धन्यवाद कहिएगा. उन के शब्दों की मैं बहुत कद्र करती हूं. उन का कहा टालना नहीं चाहती पर पहले मैं अपने फैसले स्वयं करती थी, अब पति की सहमति जरूरी है. वे शाम को आएंगे. उन से बात कर के कल उमेशजी को फोन करूंगी. असल में हमारा बच्चा बहुत छोटा है और हमारे घर में उस की देखभाल के लिए कोई है नहीं.’’

चाय पीते हुए रमा ने बताया तो राहुल कुछ मायूस ही हुआ. उस की यह मायूसी रमा से छिपी न रही.

‘‘कंपनी में सभी आप के डिजाइनों की तारीफ अब तक करते हैं. अरसे तक बेकार रहने के बाद  इस कंपनी ने मुझे नौकरी पर रखा है. अगर कामयाबी नहीं मिली तो आप जानती हैं, कंपनी मुझे निकाल सकती है.’’

जाने क्यों रमा के भीतर उस युवक के प्रति एक सहानुभूति सी उभर आई. उसे लगा, वह भीतर से पिघलने लगी है. किसीकिसी आदमी में कितना अपनापन झलकता है. अपनेआप को संभाल कर रमा ने एक व्यक्तिगत सा सवाल कर दिया, ‘‘इस से पहले आप कहां थे?’’

‘‘कहीं नहीं, सड़क पर था,’’ वह झेंपते हुए मुसकराया, ‘‘बंबई में अपने बड़े भाई के पास रह कर यह कोर्स किया. वहीं नौकरी कर सकता था परंतु भाभी का स्वभाव बहुत तीखा था. फिर हमारे पास सिर्फ एक कमरा था. मैं रसोई में सोता था और कोई जगह ही नहीं थी.

‘‘भैया तो कुछ नहीं कहते थे, पर भाभी बिगड़ती रहती थीं. शायद सही भी था. यही दिन थे उन के खेलनेखाने के और उस में मैं बाधक था. वे चाहती थीं कि मैं कहीं और जा कर नौकरी करूं, जिस से उन के साथ रहना न हो. मजबूरन दिल्ली आया. 3-4 महीने से यहां हूं. हमेशा तनाव में रहता हूं.’’

‘‘लेकिन आप तो बहुत स्मार्ट युवक हैं, अच्छा व्यवसाय कर सकते हैं.’’

‘‘आप भी मेरा मजाक बनाने लगेंगी, यह उम्मीद नहीं थी. कंपनी की अन्य लड़कियां भी यही कह कर मेरा मजाक उड़ाती हैं. मुझे सफलता की जगह असफलता ही हाथ लगती है. पिछले महीने भी मैं ज्यादा व्यवसाय नहीं कर पाया था. तब उमेशजी ने बहुत डांट पिलाई थी. इतनी डांट तो मैं ने अपने मांबाप और अध्यापकों से भी नहीं खाई. नौकरी में कितना जलील होना पड़ता है, यह मैं अब जान रहा हूं.’’

मुसकरा दी रमा, ‘‘हौसला रखिए, ऐसा होता रहता है. ऊपर से जो हर वक्त मुसकराते दिखाई देते हैं, भीतर से वे उतने खुश नहीं होते. बाहर से जो बहुत संतुष्ट नजर आते हैं, भीतर से वे उतने ही परेशान और असंतुष्ट होते हैं. यह जीवन का कठोर सत्य है.’’

चलतेचलते राहुल ने नमस्कार करते हुए जब कृतज्ञ नजरों से रमा की ओर देखा तो वह सहसा आरक्त हो उठी. बेधड़क आंखों में आंखें डाल कर अपनी बात कह सकने की सामर्थ्य रखने वाली रमा को न जाने क्या हो गया कि वह छुईमुई की तरह सकुचा गई और उस की पलकें झुक गईं.

‘‘आप मेरी धृष्टता को क्षमा करें, जरूर आप का बच्चा आप की ही तरह बेहद सुंदर होगा. क्या मैं एक नजर उसे देख सकता हूं?’’ दरवाजे पर ठिठके राहुल के पांव वह देख रही थी और आवाज की थरथराहट अपने कानों में अनुभव कर रही थी.

रमा तुरंत शयनकक्ष में चली गई और पालने में सो रहे अपने बच्चे को उठा लाई.

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‘‘अरे, कितना सुंदर और प्यारा बच्चा है,’’ लपक कर वह बाहर फुलवारी में खिले एक गुलाब के फूल को तोड़ लाया और रमा के आंचल में सोए बच्चे पर हौले से रख दिया. फिर उस ने झुक कर उस के नरम गालों को चूम लिया तो बच्चा हलके से कुनमुनाया. जेब से 50 रुपए का नोट उस बच्चे की नन्ही मुट्ठी में वह देने लगा तो रमा बिगड़ी, ‘‘यह क्या कर रहे हैं आप?’’

‘‘यह हमारे और इस बच्चे के बीच का अनुबंध है. आप को बीच में बोलने का हक नहीं है, रमाजी,’’ कह कर वह मुसकराया.

‘यह आदमी कोई जादूगर है. कंपनी की अन्य लड़कियों को तो इस ने दीवाना बना रखा होगा,’ रमा पलभर में न जाने क्याक्या सोच गई.

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बलात्कार के बाद जन्मा बच्चा नाजायज और बोझ क्यों?

वाकिआ 9 नवंबर, 2016 का है. मध्य प्रदेश के खंडवा जिला अस्पताल में 16 साला कल्पना (बदला नाम) ने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन उसे अपनाने से इनकार कर दिया और अपने मांबाप के साथ घर लौट गई.

वह नवजात बच्ची जिला अस्पताल में बिन मां के रही, बाद में उसे बच्चों की परवरिश करने वाली एक संस्था को सौंप दिया गया. कल्पना एक साल पहले मांबाप के साथ अपने गांव सिंगोट से महाराष्ट्र गई थी, जहां उस के मांबाप मजदूरी कर पेट पालते थे.

एक दिन पड़ोस में ही रहने वाले सतीश नाम के नौजवान ने उस का बलात्कार किया, जिस से वह पेट से हो गई. सतीश ने उसे सख्त लहजे में धौंस दी थी कि अगर बलात्कार की बात किसी को बताई, तो वह उस के छोटे भाई को जान से मार डालेगा.

यह बात सुन कर कल्पना डर गई और किसी को नहीं बताया, लेकिन जब उस के पेट से होने की बात उजागर हुई, तो बात छिपी नहीं रह सकी. उस ने वापस खंडवा आ कर सच बताया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और बच्चा गिराया नहीं जा सकता था.

बच्ची के पैदा होने पर हकीकत पता चली, तो पुलिस ने सतीश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. बलात्कार से पैदा हुई बच्ची से कल्पना का कोई मतलब नहीं, जो बच्चा पालने वाली संस्थाओं में जैसेतैसे पल तो जाएगी, लेकिन उस का कोई भविष्य नहीं है, जबकि उस के मांबाप दोनों जिंदा हैं. ऐसे में कानूनी पेचीदगियों के चलते उसे आसानी से किसी जरूरतमंद मियांबीवी को गोद भी नहीं दिया जा सकता.

क्या करती कल्पना

 क्या कल्पना ने गलत किया? इस सवाल पर बहस की गुंजाइशें मौजूद हैं, जो एक हद तक उस के हक में ही जाती हैं कि एक नाबालिग, कम पढ़ीलिखी लड़की कैसे एक दुधमुंही बच्ची को पालती, जो खुद अपना पेट पालने के लिए अपने मांबाप की मुहताज है?

यह गलती कल्पना की गरीबी के अलावा सामाजिक हैसियत के साथसाथ हवस के मारे सतीश की ज्यादा थी, जिस ने कल्पना की मजबूरी का फायदा उठाया और उसे जिंदगीभर के लिए जिस्मानी व दिमागी तकलीफ भोगने के लिए मजबूर कर दिया.

समाज ऐसे पैदा हुए बच्चों को किस नजरिए से देखता है, यह बात किसी सुबूत की मुहताज नहीं कि उसे नाजायज कहा जाता है. जाहिर है, ऐसे में कल्पना के कान ताने सुनसुन कर पक जाते और उस का इज्जत और सुकून से जीना दूभर हो जाता, क्योंकि यह नाजायज बच्ची एक ऐसे ढोल की तरह उस के गले में पड़ी रहती, जिसे लोग अपना दिल बहलाने के लिए बजाते रहते.

अब कुछ साल बाद मुमकिन है कि कल्पना की शादी कहीं हो जाए. यह हालांकि मौके की बात है कि बात छिपी रहे और कोई दरियादिल नौजवान सच जानने के बाद उसे जीवनसाथी बनाने को तैयार हो जाए.

अगर ऐसा हुआ तो कल्पना का भविष्य तो संवर जाएगा, पर वह बेगुनाह बच्ची जिंदगीभर एक ऐसे जुर्म की सजा भुगतती रहेगी, जो उस ने किया ही नहीं था. वह तो एक जुर्म की उपज थी.

हालांकि मुमकिन यह भी है कि उसे भी कोई जरूरतमंद मियांबीवी गोद ले लें, उस की अच्छी परवरिश करें, तालीम दिलाएं और अपना नाम दें, पर इस से बलात्कार से पैदा हुए बच्चों की दिनोंदिन बढ़ती परेशानियां सुलझने वाली नहीं, क्योंकि देश में हर साल घूरों, डस्टबिनों, बसअड्डों और रेलवे स्टेशनों पर लाखों नाजायज बच्चे मरे हुए मिलते हैं.

हिम्मती पार्वती

 उस के उलट एक मामला दिल्ली के पौश इलाके का है, जहां पढ़ेलिखे और सुलझे दिलोदिमाग वाले लोग रहते हैं.  ऐसी ही एक कालोनी में तकरीबन 15 साल पहले पार्वती (बदला नाम) अपनी दुधमुंही बच्ची को ले कर आई थी और काम की तलाश में भटक रही थी.

पार्वती की दिक्कत कल्पना सरीखी ही थी. उस की बच्ची के बाप का कोई अतापता नहीं था. दिल्ली जैसे बड़े शहर में बच्ची को गोद में लटकाए वह काम की तलाश में घूमती रही और कामयाब भी रही. अच्छी बात यह थी कि यहां लोग कुरेदकुरेद कर बच्ची के पिता के बारे में नहीं पूछते थे.

एक साहब ने उसे सहारा दिया, तो पार्वती की जिंदगी ढर्रे पर आ गई. वह घरों में काम करने लगी और बच्ची धीरेधीरे बड़ी होती गई. अब वह बच्ची 12 साल की है और कोई पार्वती से यह नहीं पूछता कि उस का बाप कौन है.

पार्वती के साथ बलात्कार हुआ था या उस ने प्यार में धोखा खाया था, ये बातें उतनी अहम नहीं हैं, जितनी यह कि वह अपनी गुजरी जिंदगी के हादसे को भूल कर बच्ची की बेहतर परवरिश कर रही है और खुश है.

पार्वती की हिम्मत तो दाद देने के काबिल है ही, पर तारीफ उन लोगों की भी करना जरूरी है, जिन्होंने पार्वती के गुजरे कल से वास्ता न रखते हुए बच्ची को पालने में उस की मदद की.

दरअसल, कल्पना और पार्वती थीं तो एक ही हादसे की शिकार, पर उन्हें माहौल अलगअलग मिला था. कल्पना उस समाज में रहती थी, जहां बलात्कार से पैदा हुए बच्चे को हिकारत से देखा जाता है, साथ ही, पीडि़ता को किसी भी लैवल पर नहीं बख्शा जाता.

इस के उलट पार्वती को उन लोगों का सहारा मिल गया था, जो ऐसे हादसों को अपने एक अलग नजरिए से देखते हैं और कोई भेदभाव न रखते हुए हमदर्दी और इनसानियत से पेश आते हुए किसी की जिंदगी संवारने में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं.

क्या कहता है कानून

बलात्कार से पैदा हुए बच्चों के बारे में अब अदालतें भी पीडि़ता और बच्चे से हमदर्दी रखने लगी हैं, क्योंकि इस में उन की कोई गलती नहीं होती है.

13 दिसंबर, 2016 को दिल्ली हाईकोर्ट ने एक चर्चित मुकदमे में फैसला सुनाते हुए कहा था कि बलात्कार से जन्म लेने वाली औलाद निश्चित रूप से अपराधी के गंदे काम की उपज है और वह उस की मां को मुआवजे में मिली रकम से अलग मुआवजे की हकदार है.

इस मामले में एक पिता ने अपनी नाबालिग सौतेली बेटी से बलात्कार किया था, जिस पर उसे अदालत ने कुसूरवार पाए जाने पर उम्रकैद की सजा सुनाई थी. लेकिन बच्ची का क्या होगा, इस पर जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस आरके गाबा की बैंच ने उस बच्ची के भविष्य के बाबत अलग से मुआवजे की बात कही है.

ऐसे ही एक मामले में 4 नवंबर, 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी कहा था कि बलात्कार से पैदा हुई औलाद अपने असल पिता यानी बलात्कारी की जायदाद में बतौर वारिस हकदार होगी.

तब जस्टिस शबीहुल हसनैन और जस्टिस डीके उपाध्याय की बैंच ने पहल करते हुए यह हिदायत दी थी कि बलात्कार से पैदा हुई औलाद को दुराचारी की नाजायज औलाद माना जाएगा और उस का पिता की जायदाद पर हक होगा.

अदालत ने अपने फैसले में यह भी जोड़ा था कि अगर कोई और ऐसे बच्चे को गोद ले लेता है, तो उस का अपने असल पिता की जायदाद में कोई हक नहीं रह पाएगा.

इस मामले में भी गरीब परिवार की एक 13 साला लड़की साल 2015 की शुरुआत में बलात्कार के चलते पेट से हो गई थी. घर वालों को जब इस बात का पता चला, तब तक सुरक्षित गर्भपात की मीआद यानी 21 हफ्ते से ज्यादा का वक्त बीत चुका था.

हालांकि लड़की के घर वालों ने बच्चा गिराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था और लड़की का कहना यह था कि वह अपने साथ हुए इस बलात्कार के भयावह हादसे की निशानी को साथ ले कर नहीं जी सकती. आखिरकार उसे बच्चे को जन्म देना ही पड़ा, पर बच्चे को साथ रखने से उस ने भी इनकार कर दिया था.

तो क्या करें

हालांकि कानून अब बलात्कार से पैदा हुए बच्चों से हमदर्दी दिखा रहा है और बलात्कारी की जायदाद में से हिस्सा दिलाने की भी बात कर रहा है. पर उस समाज का नजरिया बदलने का कोई जरीया उस के पास भी नहीं है, जहां रह कर पीडि़ता और बच्चे को जिंदगी गुजारनी होती है.

ऐसे में बलात्कार से मां बनी ये लड़कियां क्या करें? कल्पना की तरह अस्पताल में बच्चा छोड़ कर कहीं भाग जाएं या पार्वती की तरह हिम्मत दिखाते हुए हालात से लड़तेजूझते उस की परवरिश करें, उसे मां का प्यार दें, उस की जिंदगी बचाएं. इन में से कोई एक रास्ता पीडि़ता को चुनना पड़ता है. ज्यादातर पीडि़ता कल्पना वाला रास्ता चुनने को मजबूर रहती हैं.

पर अब समाज का नजरिया बदल रहा है, इसलिए पीडि़ता को हिम्मत न हारते हुए बच्चे की परवरिश करना ही एक बेहतर उपाय है.

यह हालांकि बेहद मुश्किल भरा काम है, लेकिन नामुमकिन नहीं है, इसलिए बच्चे को दूर ले जा कर परवरिश करना एक कारगर उपाय है.

पर इस के लिए जरूरत हिम्मत और दिमाग के साथसाथ हमदर्दी हासिल करने की होती है, जो अकसर बड़ी कालोनियों के बड़े लोगों से मिल जाती है, लेकिन अपने माहौल और समाज के लोगों से नहीं मिलती.

प्यार में धोखा खाई लड़कियां भी कई दफा इसी तरह मां बन जाती हैं. हर कहीं ऐसी पीडि़ताएं मिल जाती हैं और अखबारों की सुर्खियां भी बनती हैं.

ऐसा जमाने से होता चला आ रहा है कि वासना के मारे मर्द गरीब लड़की जो अकसर छोटी जाति की होती थी, को अपनी हवस का शिकार बना कर उन्हें मां बना देते थे और अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेते थे.

अब जमाना लोकतंत्र का है और कानून ऐसी पीडि़ताओं के साथ है, जो पीडि़ता और बच्चे को हक भी दिलाता है. ऐसे में समाज भी लड़की की बेगुनाही समझते हुए उसे इज्जत से रहने दे, तो 2 जिंदगियां संवर सकती हैं, जो आम लोगों की तरह इज्जत से जीने की हकदार होती है.

कई हिंदी फिल्मों में इस बात को फिल्माया गया है कि कैसे हीरो हीरोइन को धोखा देता है और मां बना कर मुंह छिपा कर भाग जाता है. बाद में हीरो बड़ा हो कर अपने नाजायज बाप से अपनी मां के साथ हुई ज्यादती का बदला लेता है.

अमिताभ बच्चन की हिट फिल्में ‘त्रिशूल’ और ‘लावारिस’ भी इसी मुद्दे पर बनी थीं. लेकिन वे फिल्में थीं, जिन का हकीकत में एक हद तक ही लेनादेना होता है, इसलिए नजरिया आम लोगों को ही बदलना होगा कि बलात्कार के मामलों में लड़की या बच्चे का क्या कुसूर? वे गुनाहगार या नाजायज क्यों?

कोई जायज पिता बच्चे पैदा कर अपनी जिम्मेदारियों से मुकर जाए, तो भी औरत को बच्चे की परवरिश करनी पड़ती है, ताने सुनने पड़ते हैं और तरहतरह की ज्यादतियां सहन करनी पड़ती हैं. जब उन के बच्चे नाजायज नहीं, तो बलात्कार पीडि़ता के बच्चे नाजायज क्यों?

अंकिता लोखंडे के साथ घर जमाई बनकर रहे थे पति विक्की, जानें वजह

अंकिता लोखंडे और विक्की जैन शादी के बाद नए घर में शिफ्ट होने का इंतजार कर रहे हैं. उनके नए घर में अभी रेनोवेशन का काम चल रहा है. अंकिता का मानना है कि नए घर में जाने के बाद ही उनका और विक्की की मैरिड कपल वाली असली लाइफ शुरू होगी. फिलहाल समय से घर तैयार ना होने पर विक्की को पत्नी अंकिता के घर पर ही रहना पड़ रहा है.

अंकिता के घर पर रहते हैं विक्की

विक्की जैन से जब पूछा गया कि वह पत्नी के साथ अपना स्पेस शेयर करने पर कैसा महसूस करते हैं, तो उन्होंने मजाक में कहा कि यह सवाल तो अंकिता से पूछा जाना चाहिए क्योंकि इन दिनों मैं उनके पैरेंट्स के घर पर एक घर जमाई की तरह रह रहा हूं.

विक्की ने बताई अपनी मजबूरी

एक चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान विक्की जैन ने बताया, हमने एक फ्लैट खरीदा था जिसका रिपेयरिंग, रेनोवेशन और बहुत सारे काम महामारी के कारण समय पर पूरा नहीं हो सका. इसमें देरी हुई और अभी भी ये पेंडिंग है, इसलिए हम अपने नए घर में शिफ्ट नहीं हो सके. उन्होंने हंसते हुए कहा, मैं अभी भी अंकिता के घर पर घर जमाई बनकर रह रहा हूं. जब कभी मैं मुंबई आता हूं तो अंकिता के घर पर ही रुकता हूं. तो ये सवाल अंकिता से पूछना चाहिए कि वह पिछले दो सालों से अपना घर मेरे साथ शेयर करने में कैसा फील कर रही हैं.

अंकिता लोखंडे ने दिया रिएक्शन 

विक्की की इन बातों पर अंकिता ने अपना रिएक्शन दिया. उन्होंने बताया कि उन्हें विक्की के साथ कुछ भी शेयर करने में कोई दिक्कत नहीं है. उन्होंने कहा, एक कपल के तौर पर हमारी असली जिंदगी लाइफ एक साथ तब शुरू होगी, जब हम दोनों अपने घर में पति-पत्नी के रूप में एक ही छत के नीचे रहना शुरू करेंगे. मुझे पता है कि मैं एक बहुत अच्छी हाउस वाइफ बनने जा रही हूं.

बता दें कि अंकिता और विक्की ने पिछले साल 14 दिसंबर को मुंबई में धूमधाम से शादी रचाई थी. इन दिनों कपल रिएलिटी शो ‘स्मार्ट जोड़ी’ में नजर आ रहा है.

‘Lock Upp’ में निशा रावल का खुलासा, गैरमर्द को किया था Kiss!

टीवी की मशहूर एक्ट्रेस निशा रावल कुछ समय पहले अपने शादी शुदा जिंदगी में हुई उथल पुथल के बाद सुर्ख़ियों में आईं थीं. इन दिनों निशा रिएलिटी शो Lock Upp का हिस्सा बनी हैं. एक्ट्रेस वहां पर रहते हुए बेहतरीन खेल तो खेल ही रही हैं, साथ ही अपने को-कंटेस्टेंट्स को भी कड़ी टक्कर दे रही हैं. लेकिन हाल ही में निशा रावल ‘लॉकअप’ में किये गए अपने एक खुलासे के कारण काफी चर्चा में आ गई हैं.उन्होंने शो में पति करण मेहरा के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के बारे में भी बताया.

एक टास्क के दौरान कंगना रनौत जो कि इस शो कि जज हैं ने निशा को अपनी लाइफ से जुड़ा कोई एक खुलासा करने के लिए कहा था. जिसके बाद निशा ने यह खुलासा किया कि शादी-शुदा होने के बाद भी वह अपने पुराने दोस्त के प्रति आकर्षित हो गई थीं और उन्होंने उस दोस्त को किस भी किया था.

निशा ने शो में बताया “मिसकैरेज के बाद एक महिला के तौर पर मेरे दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था. मेरी जिंदगी भी उतार-चढ़ाव से गुजर रही थी. किसी से मैं अपने दिल की बात नहीं कह सकती थी, क्योंकि पब्लिक फिगर होने के नाते मैं और मेरे पति ऐसे सार्वजनिक तौर पर चीजें बयां नहीं कर सकते थे. मुझे किसी का सपोर्ट नहीं मिल रहा था और उस वक्त मैं एक ट्रॉमा से गुजर रही थी. 2015 में मेरे कजन की संगीत सेरेमनी के दौरान एक बड़ा हादसा हुआ था, जिससे मैं पूरी तरह से टूट चुकी थी. उस वक्त हम अपने नए घर में भी शिफ्ट कर रहे थे. तभी मेरी मुलाकात एक पुराने दोस्त से हुई.”

निशा रावल ने इस बारे में आगे कहा, “हम लंबे समय के बाद एक-दूसरे से मिले थे. मैंने उसके साथ अपनी जिंदगी के सभी उतार चढ़ावों को शेयर किया. मेरे एक्स-पति यानि (करण मेहरा) को भी यह मालूम था कि मेरी मेरे दोस्त से मुलाकात होती है. लेकिन उस दौरान मैं उसके नजदीक आ चुकी थी. मैं उसकी तरफ आकर्षित हो चुकी थी, क्योंकि उसी ने मुझे इमोशनल सपोर्ट किया. एक लम्हा ऐसा भी आया, जब मैंने उसे किस किया था. हालांकि अगले ही दिन मैंने यह बात अपने पति से बता दी थी.

बता दें कि निशा और करण साल 2012 में शादी के बंधन में बंधें थे.लेकिन कुछ समय पहले अपने और पति करण मेहरा के साथ हुई लड़ाई के बाद दोनों अलग हो चुके हैं.

पुरुषों को भी हो सकता है प्रेगनेंसी का एहसास, जानें कैसे?

किसी भी लड़की के लिए प्रेग्नेंसी जीवन के उन खास पलों में से एक है जो काफी अहम होता है. इस एहसास को पुरुषो कभी अनुभव नही कर सकते है पर सोचिए की अगर हम कहे की प्रेग्नेंसी के दौरान जैसा महिलाएं महसूस करती है वैसा ही किसी पुरुष को भी गर्भावस्था के लक्षण महसूस हो तो आप मानेंगे? अगर नहीं, तो आपको बता दें कि पुरुषों को भी गर्भावस्था के लक्षण महसूस हो सकते हैं. यह एक प्रकार का सिंड्रोम होता है जो पुरुषों को ठीक वैसे ही लक्षण महसूस कराता है जिसे महिलायें गर्भवती होने पर करती हैं इसे सिंपथेटिक प्रेगनेंसी जिसे कौवौड सिंड्रोम (Couvade syndrome) के नाम से भी जाना जाता है. इस स्थिति में स्वस्थ आदमी को भी गर्भावस्था के लक्षणों का आभास होता है.

क्या है कौवौड सिंड्रोम

एक रीसर्च के मुताबिक कौवौड सिंड्रोम आम हो सकता है, और ये कोई घोषित मानसिक बीमारी नहीं है. हालांकि आगे और भी रीसर्च से यह निर्धारित करने की जरूरत है कि कौवौड सिंड्रोम मनोवैज्ञानिक कारणों वाली कोई शारीरिक स्थिति है या नहीं. कौवौड सिंड्रोम के जुड़े लक्षणों की सूचनाओं के आधार पर व्यापक रूप से भिन्न हैं और आमतौर पर गर्भावस्था के पहले और तीसरे ट्राइमेस्टर के दौरान ही होते हैं.

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शरीर में कैसे आते है बदलाव

इस स्थिती में शरीर में लक्षणों आम होते है जैसे पेट में दर्द, सूजन, भूख में परिवर्तन, सांस की समस्याएं, दांत में दर्द, पैर में ऐंठन, पीठ दर्द और मूत्र या जननांग में जलन.

इसके मनोवैज्ञानिक लक्षणों में नींद आने में समस्या, चिंता, अवसाद, कम कामेच्छा, थकान और बेचैनी जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं.

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कौवौड सिंड्रोम से घबराएं नहीं

चाहे कौवौड सिंड्रोम असली है या नहीं, खास बात यह है कि एक पिता बनना भावनात्मक और तनावपूर्ण रूप से रोमांचक हो सकता है. अगर आपकी साथी भी गर्भवती हैं तो तनाव प्रबंधन करने के लिए कदम उठाएं और पिता बनने के लिए तैयार हो जाएं. आप इसके लिये डाक्टर से सलाह ले सकते हैं या फिर अपने मित्रों और परिवार के लोगों से इस संबंध में प्रोत्साहन ले सकते हैं. अपने साथी से भी इस संबंध में बात करें. ये कोई खातरनाक सिंड्रोम नही है बल्कि ये एक समान्य है.

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