अनुष्का शर्मा ने करवाया HOT फोटोशूट, देखें उनकी खूबसूरत अदाएं

बौलीवुड की पौपुलर और टैलेंटेड एक्ट्रेसेस मे से एक अनुष्का शर्मा इन दिनों अपने नए फोटोशूट के वजह से सुर्खियों मेंं हैं. अनुष्का ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत बौलीवुड के किंग शाहरूख खान के साथ फिल्म ‘रब ने बना दी जोडी’ से की थी और उसके बाद से अनुष्का ने एक के बाद एक सुपर-हिट फिल्मों मे काम कर बहुत कामयाबी हासिल की. अनुष्का शर्मा एक सक्सेसफुल एक्ट्रेस होने के साथ-साथ फिल्म प्रोड्यूसर, मौडल और फैशन डिजाइनर भी हैं.

अनुष्का का लेटेस्ट फोटोशूट…

हाल ही में अनुष्का शर्मा ने एक और फोटोशूट करवाया जिसकी फोटोज सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं. इस फोटोशूट मे अनुष्का बेहद खूबसूरत लग रही हैं. खबरों की माने तो अनुष्का का ये लेटेस्ट फोटोशूट फैशन मैगजीन ‘फिल्मफेयर’ के लिए है.

 

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@filmfare

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अनुष्का इस फोटोशूट मे काफी सुंदर नजर आ रही है और दर्शको का ध्यान अच्छे से अपनी ओर आर्कषित कर रही हैं. फैंस ने भी अनुष्का शर्मा  के इस फोटोशूट को बेहद पसंद कर रहे हैं.

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वैसे अनुष्का शर्मा अक्सर अपने कातिलाना लुक्स से अपने फैंस को इम्प्रेस करने मे कोई कसर नही छोड़ती. हाल ही में उन्होंने ‘इंडिया कोचर फैशन वीक 2019’ मे हिस्सा लिया था. इस इवेंट मे अनुष्का ने डिजाइनर सब्यसाची द्वारा डिजाइन की गई साड़ी पहनी थी. अनुष्का का ये साड़ी लुक काफी चर्चा मे कहा और फैंस ने उनकी जमकर तारीफ भी की.

 

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बता दें, अनुष्का शर्मा की लव लाइफ भी काफी पौपुलर रही है. अनुष्का शर्मा और क्रिकेटर विराट कोहली काफी समय से एक दूसरे को डेट कर कहे थे और दोनो ने 11 दिसम्बर 2017 को इटली ने शादी की थी. अनुष्का आखिरी बार फिल्म जीरो में नजर आई थीं. फिलहाल वो फिल्मों से दूर हैं.

एडिट बाय- करण…

नच बलिए 9: आप भी ट्राय करें इस टीवी कपल के फैशन टिप्स

“नच बलिए 9” धमाकेदार शुरुआत से ही कंटेस्टेंट जोड़ियों की चर्चाएं चोरों तरफ हैं. उन्हीं जोड़ियों में से एक है रोहित रेड्डी और अनीता हंसदानी की. दोनों की कैमिस्ट्री और डांस को सभी काफी पसंद कर रहे हैं. अनिता एक तरफ छोटे पर्दे की सफल एक्ट्रेस है तो वही रोहित एक बिजनेस मैन हैं. हालाकि रोहित ने भी एक्टिंग में अपना हाथ आजमाया और अनिता  के साथ एक म्यूजिक वीडियों में काम किया. अलग प्रोफेशन होने के बाद भी दोनों एक दुसरे के काम को बहुत तवज्जुब देते हैं. इस लिए आज हम इस कपल के कुछ स्टाइल लुक आपके लिए लेकर आए है जिसको आप अपनी पर्टनर के साथ ट्राय कर स्टाइलिश कपल बन सकते हैं.

रेड एंड ब्लैक का कौम्बिनेशन

अगर आप आपने पर्टनर के साथ किसी पार्टी में जा रहे है तो ये लुक आपके लिए परफेक्ट है. रेड कलर प्यार और रोमांस को कलर है और साथ में ब्लैक लुक को और भी अच्छा बना देता हैं. अनिता की  तरह आप अपनी पार्टनर को लोंग रेड गाउन ट्राय कराएं और आप ब्लैक पठानी कुर्ता और पजामा पहने, जो पूरे स्टाइल को काफी रिच बना देगा.

 

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… and the festivities begin!

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दोस्त का शादी में ट्राय करें ये लुक

मौनसून के आते ही शादी का सीजन भी शुरु हो जाता है और शादी जब किसी करीबी दोस्त की हो तो क्या पहने ये सवाल सब के दिमाग में रहता हैं. रोहित और अनिता का ये लुक किसी शादी के फंगशन के लिए परफेक्ट हैं. ग्रीन साड़ी के साथ जोधपुरी बांघनी सूट के नीचे हेरम सलवार काफी रौयल लुक दे रहा हैं.

 

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All set for Diwali at the Patels’!! Styled by @silverettebykhushbooraj

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हौलीडे कपल लुक

अगर आप किसी अपनी पार्टनर के साथ किसी वेकेशन का प्लान कर रहे है तो अपने फैशन का भी ध्यान रखें. रोहित और अनिता के इस लुक को आप किसी भी वेकेशन ट्रीप में ट्राय कर सकते हैं. इस लुक में आप अपनी पार्टनर के साथ काफी प्रजेंटेबल लगेंगे.

पार्टी में करें ये लुक ट्राय

अगर आप किसी पार्टी में जा रहे है और अपने पार्टनर के साथ कुछ अच्छा ट्राय करना चाहते है तो ये लुक काफी कौम्प्लिमेंट दिलवाएगा. यूलो अनारकली सूट के साथ केजुअल का कौम्बिनेशल काफी अच्छा लग रहा हैं.

 

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Coz twinning is so passé…

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तो ये थे कुछ कपल्स लुक को आप अपने पार्टनर के साथ ट्राय कर सकते हैं.

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद

अब घबराया हुआ है क्योंकि भाजपा के अंधभक्त अब पौराणिक कानून को हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के बराबर समझने लगे हैं. सोशल मीडिया में यह ज्यादा दिख रहा है.

नरेंद्र मोदी ने फिलहाल अपने जानेपहचाने चेहरों को बेवजह बेमतलब की बातें न बोलने की बात कह दी है पर उन के लाखों भक्त जिन्होंने बिना भाजपा के मैंबर बने पिछले 6-7 सालों में सोशल मीडिया पर लगातार पहले राहुल गांधी, फिर जब मायावती से फैसला नहीं हुआ तो उन्हें गालियों से नवाजा है, अब अपनी निशानेबाजी नहीं छोड़ रहे.

गौतम गंभीर और सुषमा स्वराज तक को नहीं छोड़ा गया जो भाजपा के ही हैं क्योंकि उन्होंने मुसलिमों को बचाने की कोशिश कर डाली. बहुत से टीवी पत्रकार जिन्होंने न चाहते हुए भी भाजपा की खिंचाई करते हुए उसे मुफ्त पब्लिसिटी दी इन को नहीं छोड़ा क्योंकि वे हिंदूवादी जयजयकार करने से कतरा रहे थे.

ये भक्त असल में अब भाजपा के भी कंट्रोल से बाहर हैं. थे तो वे पहले भी किसी के कंट्रोल के बाहर, पर तब उन की पैठ बस घरोंपरिवारों, दुकानों, व्यापारों तक थी. अब ये राजा बनवाने वाले कहे जा रहे हैं और राजा के नाम पर ये किसी से कुछ भी करा सकते हैं. जो काम ये पहले गांवों के चौराहों पर बैठ कर किया करते थे, अब मोबाइल के सहारे कर रहे हैं. इन के पास शब्दों का भंडार है. फालतू समय है. ये दिनभर नएनए शब्द गढ़ कर बात का बतंगड़ बना सकते हैं और अपनी सफाई देने वाले की धुलाई कर सकते हैं. धर्म के नाम पर सदाचार, नैतिकता की बात करने वाले अपने नाम से ट्विटर और फेसबुक पर मांबहन की गालियां भी दे सकते हैं.

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ये लोग बेहद ताकतवर हो चले हैं क्योंकि भाजपा को इस मुफ्तखोरों की विशाल भीड़ की जरूरत रहेगी ताकि अपने हकों को मांगने वाले कभी सिर न उठा पाएं. जिस ने हक मांगा उसे फौरन देशद्रोही कह डाला जाएगा. जैसे कन्हैया कुमार, हार्दिक पटेल व चंद्रशेखर आजाद को जेलों में सड़ाया गया, वैसे हर गांव, कसबे, शहरी महल्ले मेंहोने लगेगा.

देश के दलित, मुसलिमों, पिछड़ों, सिखों, ईसाइयों को ही नहीं, ऊंची जातियों के पढ़ेलिखे भी खतरे में हैं क्योंकि यह फौज अपने पूज्य के खिलाफ एक शब्द न सुनने को तैयार कर दी गई है. इन के पास समय और पैसा है क्योंकि ये ही जागरणों, आरतियों, तीर्थयात्राओं, मंदिरों, कुंडलियों, धर्म के धंधों पर कब्जा जमाए हुए हैं, इन्हें न किसानों की फिक्र है, न बेरोजगारों की, न सड़कों पर सोने वालों की पर हिंदू धर्म और उस की चहेती पार्टी बनी रहे.

राम का नाम लेने से परलोक में स्वर्ग मिले या न मिले इहलोक में सत्ता तो मिल ही रही है. भारतीय जनता पार्टी अब नए पैतरे में ‘भारत माता की जय’ का नारा छोड़ कर पश्चिम बंगाल में ‘जय श्रीराम’ के नारे को इस्तेमाल कर रही है और चूंकि ममता बनर्जी के गढ़ में भाजपा ने अच्छीखासी कामयाबी पा ली है, उसे उम्मीद है कि रामजी उस की नैया पार करा ही देंगे.

राम का नाम ले कर देश के गरीब और अमीर दोनों ही सदियों से अपना वर्तमान व भविष्य लिखते आए हैं. यह बात अलग है कि देश का रामनामी गरीब गरीब बना रहा है और अमीर भी कष्टों से दूर नहीं रहा. राम का नाम लेने वालों को बीमारियां, कारोबार में नुकसान, पारिवारिक क्लेश, अपराधियों से सामना उसी तरह करना पड़ता रहा है जैसे किसी को भी किसी भी समाज में करना पड़ता है. गरीब का तो हाल और बुरा रहा है. वह इस देश में हमेशा ही गरीबी में जिया है.

राम के मंदिर को बनवाने या राम के नाम को ले कर राजनीति करना वैसे गलत है, क्योंकि अगर राम में यकीन हो तो भी यह किसी इनसान का अपना निजी मामला है. एक छोटे या बड़े समूह को कोई हक नहीं कि उसे अपने मतलब के लिए दूसरों पर थोपे और मारपिटाई पर उतर आए. आज देशभर में राम के नाम पर तरहतरह के बवाल करने का मानो लाइसैंस मिल गया है क्योंकि राम को राष्ट्रवाद की चाशनी में लपेट कर इस तरह वोटरों को परोसा गया कि वे देशभक्ति व रामभक्ति में फर्क ही नहीं कर पाए.

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सरकार का काम धर्म चलाना नहीं, प्रशासन चलाना है, टैक्स जमा करना है, इंसाफ कायम रखना है, बुनियादी चीजें बनवाना है, देश की हिफाजत करना है, नागरिकों की जानमाल की सिक्योरिटी करना है, इन में राम नाम कहीं नहीं आता. पूजापाठ से तो 2 दाने गेहूं के भी नहीं उग सकते.

हां, राम के नाम पर धार्मिक धंधे जोर से चल सकते हैं अगर जनता को बहकाया जा सके कि उस से उस की माली तरक्की होगी, बीमारियां दूर होंगी, मुसीबतें खत्म होंगी. यह बात इतनी पीढि़यों से कही जा रही है और इतने यकीन से कही जा रही है कि लोगों की दिमागी बीमारी का हिस्सा बन गई है. लोग अब फिर अपनी सोच से नहीं, नारों पर फैसले लेने लगे हैं. पहले देश 2500 साल इसी वजह से गुलाम सा रहा है. अब गुलामी चाहे न हो, गरीबी जरूर बनी रहेगी.

बारिश में शाहरुख खान के साथ स्वालीना क्या करना चाहती हैं?

उनकी तमन्ना है कि उन्हें इस बारिश में शाहरुख खान के साथ डांस करने का अवसर मिल जाए. खुद स्वालीना कहती हैं- ‘हर इंसान मानसून का अपने अपने तरीके से लुत्फ उठाता है. मुझे मानसून यानी किक बारिश में भीगना और डांस करने में आनंद आता है. मेरी राय में जिसने बारिश में भीगते हुए डांस नहीं किया, उसने जिंदगी में कुछ नहीं किया.

मेरे लिए बारिश में डांस के आदर्श साथी शाहरुख खान हैं. मैं तो उनके साथ बारिश में भीगते हुए डांस का आनंद लेनाचाहूंगी. फिल्म ‘‘दिल तो पागल है’’ में माधुरी दीक्षित के साथ जिस तरह से शाहरुख खान ने डांस किया है, उसी तरह से मैं उनके के साथ डांस करने का अवसर पाने के लिए इंतजार कररही हूं.

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मुझे बारिश के मौसम में ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ और ‘रूप तेरा मस्ताना’ जैसे गीत सुनना पसंद है. मेरे लिए बारिश का मौसम यानी कि समोसे खाने और मसाला चाय पीने का मौसम है.’’

Edited By- Neelesh Singh Sisodia

सैफ अली खान की अगली फिल्म में नजर आएंगी ‘‘सेक्रेड गेम्स’’ की कुकू

वेब सीरीज ‘‘सेक्रेड गेम्स’’ में कुकू का किरदार निभाते हुए सैफ अली खान और नवाजुद्दीन सिद्दिकी के साथ अभिनय कर चुकी कुब्रा सैत अब सैफ अली खान के साथ दूसरी बार फिल्म ‘‘जवानी जानेमन’’ में अभिनय कर रही हैं. जिनकी वह तारीफ करते हुए नहीं थकती हैं. कुब्रा सैत कहती हैं-  ‘‘सैफ अली खानबहुत ही ज्यादा सुलझे हुए और धैर्यवान कलाकार हैं. वह बहुत अनुभवी कलाकार हैं.

 

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I’m the carnival 🎡

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It’s 6PM in Thailand. And about 4:30 PM in India… and about this time last year just about everything seemed to make sense. The last ten years of hard work paid off with the cinematic the death of Cuckoo. A new Kubbra was born. A talent who people discovered through @sacredgames_tv I have many people to thank and I’ll do so now, because after Sacred Games, I have found myself, finding avenues to work as an actor, which I think I accidentally stumbled into… (secretly I was becoming complacent as a host.) so thank you for the jolt. I am learning, I will continue to stumble around with a body of work in gestation. This year has been a landmark in a career shift. You as an audience have been kind, accepting, encouraging and loving. Thank You for your love. It’s blessed with me a new trajectory for work. Thank You @anuragkashyap10 Your unfettered imagination to cast a girl for cuckoo made me do more than I ever imagined to. You’ve given me a present to last me till the day I die. @ankurtewari @swanandkirkire for that morning at Bagel shop @castingchhabra for the audition process @nawazuddin._siddiqui for the man you are… I love you. The entire team who helped me feel and look the way I did @shaz.2.6 @sylvesterfonseca @ankitasorot #AryaMenon @misterbistar @vidushak @vasantnath @vikramadityamotwane @ishikamohanmotwane @saqibpandor @alokanandadasgupta for Dhuan Dhuan, you’ve made me cry a million tears. I love you. @an_il584 and I know I’m missing people here on Instagram but know that I love you and I am grateful for each one of you. Also, thank You @yasusait and @danishsait for being my pillars and votes of confidence without your freedom and the respect I have for it, I wouldn’t have made the choice I did. I am lucky and blessed to be born in our family. Ok. Thank You. Bye.

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Mood board. @melissadeblok

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उनके साथ अभिनय करने का मतलब मजेदार मास्टरक्लास. वह अपने सह कलाकार को ‘क्यू’ देने के लिए स्वयं मौजूद रहते हैं. यह बहुत बड़ी बात है.’’ फिल्म‘‘जवानी जानेमन’’के अलावा कुबरा सैट इन दिनों वेब सीरीज ‘रिजेक्ट्स’ और ट्रिपलिंग’ कर रही है.

Edited By- Neelesh Singh Sisodia

फेमस डांसर फैजल खान के इस लुक से करे गर्लफ्रेंड को इम्प्रेस

छोटे पर्दे के मशहूर एक्टर और डांसर फैजल खान अपने लुक्स और डांस को लेकर काफी पौपुलर है. फैजल ‘डांस इंडिया डांस लिटिल चैंप्स 2’ और ‘झलक दिखला जा सीजन-8’ के विनर रहे हैं और साथ ही फैजल ने कई सीरियल्स में भी काम किया है जैसे कि, ‘भारत का वीर पुत्र – महाराणा प्रताप’, ‘चंद्रगुप्त मौर्य’, आदी. फैजल खान अक्सर ही अपने डांस फौर्म्स और लुक्स से अपने फैंस को इम्प्रेस करते रहते है तो अगर आप भी अपने फैशन से करना चाहते है लोगो को इम्प्रेस तो अपनाएं उनके कुछ चुनिंदा लुक्स.

फैजल खान का कैसुअल लुक…

 

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Admit it. You’re not like others, and that’s not just okay. It’s beautiful 😉

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फैजल खान ने अपने इस कैसुअल लुक में ब्लैक कलर की राउंड नैक टी-शर्ट के ऊपर यैल्लो कलर की शर्ट और साथ में व्हाइट कलर का लोअर पहना हुआ है. आप भी फैजल खान का ये कैसुअल लुक अपनी डेली-रूटीन मे ट्राय कर सकते है.

फैजल खान का ट्रेंडी लुक…

 

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Everything comes to you, In the right moment. Be patient. Be grateful.

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फैजल खान ने इस ट्रेंडी लुक मे व्हाइट कलर की वी-नैक टी-शर्ट के ऊपर कोक कलर की शर्ट और साथ ही में ब्लैक ‘rugged’ जींस पहनी हुई है. आप फैजल खान का ये लुक अपने कौलेज या इंस्टीट्यूट में ट्राय कर अपने आस-पास वालो को इम्प्रेस कर सकते है.

फैजल खान इन ब्लैक…

 

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Thank you @pick_store_official_ for this super awesome pair of shoes 🤟🏻 Contact:- @pick_store_official_

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फैजल खान ने अपने इस लुक में ब्लैक कलर की फुल स्लीव्स हुडी और ब्लैक कलर का ही लोअर पहना हुआ है. साथ ही मे फैजल ने इस आउट-फिट के साथ मल्टी-कलर के स्पोर्टस शूज भी पहने हुए है जो काफी अच्छे और फंकी लग रहे है. आप फैजल को ये लुक अपने जिम या फिटनेस क्लब मे ट्राय कर सकते है.

डेट पर जाने के लिए पर्फेक्ट है फैजल खान का ये लुक…

फैजल खान ने इन लुक मे व्हाइट कलर की वी-नैक टी-शर्ट के ऊपर पिंक कलर का ब्लेजर पहना हुआ है और साथ ही में उन्होने ब्लू कलर की ‘rugged’ जींस पहनी हुई है. इस आउट-फिट के साथ फैजल के व्हाइट कलर के शूज काफी सूट कर रहे है. फैजल खान के इस लुक से आप डेट पर अपनी गर्लफ्रेंड को इम्प्रेस कर सकते है.

बता दें, फैजल खान ने मराठी फिल्म  ‘प्रेम कहानी’ मे भी काम किया है और उन्होने सीरियल ‘भारत का वीर पुत्र – महाराणा प्रताप’ के चलते ‘बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट (मेल)’ और ‘बेस्ट चाइल्ड एक्टर’ का अवार्ड भी जीता है.

पराकाष्ठा

लेखक- नरेंद्र कौर छाबड़ा

आज भी मुखपृष्ठ की सुर्खियों पर नजर दौड़ाने के पश्चात वह भीतरी पृष्ठों को देखने लगी. लघु विज्ञापन तथा वर/वधू चाहिए, पढ़ने में साक्षी को सदा से ही आनंद आता है.

कालिज के जमाने में वह ऐसे विज्ञापन पढ़ने के बाद अखबार में से उन्हें काट कर अपनी सहेलियों को दिखाती थी और हंसीठट्ठा करती थी.

शहर के समाचार देखने के बाद साक्षी की नजर वैवाहिक विज्ञापन पर पड़ी जिसे बाक्स में मोटे अक्षरों के साथ प्रकाशित किया गया था, ‘30 वर्षीय नौकरीपेशा, तलाकशुदा, 1 वर्षीय बेटे के पिता के लिए आवश्यकता है सुघड़, सुशील, पढ़ीलिखी कन्या की. गृहकार्य में दक्ष, पति की भावनाओं, संवेदनाओं के प्रति आदर रखने वाली, समझौतावादी व उदार दृष्टिकोण वाली को प्राथमिकता. शीघ्र संपर्र्ककरें…’

साक्षी के पूरे शरीर में झुरझुरी सी होने लगी, ‘कहीं यह विज्ञापन सुदीप ने ही तो नहीं दिया? मजमून पढ़ कर तो यही लगता है. लेकिन वह तलाकशुदा कहां है? अभी तो उन के बीच तलाक हुआ ही नहीं है. हां, तलाक की बात 2-4 बार उठी जरूर है.

शादी के पश्चात हनीमून के दौरान सुदीप ने महसूस किया कि अंतरंग क्षणोें में भी वह उस की भावनाओं का मखौल उड़ा देती है और अपनी ही बात को सही ठहराती है. सुदीप को बुरा तो लगा लेकिन तब उस ने चुप रहना ही उचित समझा.

शादी के 2 महीने ही बीते होंगे, छुट्टी का दिन था. शाम के समय अचानक साक्षी बोली, ‘सुदीप अब हमें अपना अलग घर बसा लेना चाहिए, यहां मेरा दम घुटता है.’

सुदीप जैसे आसमान से नीचे गिरा, ‘यह क्या कह रही हो, साक्षी? अभी तो हमारी शादी को 2 महीने ही हुए हैं और फिर मैं इकलौता लड़का हूं. पिताजी नहीं हैं इसलिए मां की और कविता की जिम्मेदारी भी मुझ पर ही है. तुम ने कैसे सोच लिया कि हम अलग घर बसा लेंगे.’

साक्षी तुनक कर बोली, ‘क्या तुम्हारी जिम्मेदारी सिर्फ तुम्हारी मां और बहन हैं? मेरे प्रति तुम्हारी कोई जिम्मेदारी नहीं?’

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‘तुम्हारे प्रति कौन सी जिम्मेदारी मैं नहीं निभा रहा? घर में कोई रोकटोक, प्रतिबंध नहीं. और क्या चाहिए तुम्हें?’ सुदीप भी कुछ आवेश में आ गया.

‘मुझे आजादी चाहिए, अपने ढंग से जीने की आजादी, मैं जो चाहूं पहनूं, खाऊं, करूं. मुझे किसी की भी, किसी तरह की टोकाटाकी पसंद नहीं.’

‘अभी भी तो तुम अपने ढंग से जी रही हो. सवेरे 9 बजे से पहले बिस्तर नहीं छोड़तीं फिर भी मां चुप रहती हैं, भले ही उन्हें बुरा लगता हो. मां को तुम से प्यार है. वह तुम्हें सुंदर कपड़े, आभूषण पहने देख कर अपनी चाह, लालसा पूरी करना चाहती हैं. रसोई के काम तुम्हें नहीं आते तो तुम्हें सिखा कर सुघड़ बनाना चाहती हैं. इस में नाराजगी की क्या बात है?’

‘बस, अपनी मां की तारीफों के कसीदे मत काढ़ो. मैं ने कह दिया सो कह दिया. मैं उस घर में असहज महसूस करती हूं, मुझे वहां नहीं रहना?’

‘चलो, आज खाना बाहर ही खा लेते हैं. इस विषय पर बाद में बात करेंगे,’ सुदीप ने बात खत्म करने के उद्देश्य से कहा.

‘बाद में क्यों? अभी क्यों नहीं? मुझे अभी जवाब चाहिए कि तुम्हें मेरे साथ रहना है या अपनी मां और बहन के  साथ?’

सुदीप सन्न रह गया. साक्षी के इस रूप की तो उस ने कल्पना भी नहीं की थी. फिर किसी तरह स्वयं को संयत कर के उस ने कहा, ‘ठीक है, घर चल कर बात करते हैं.’

‘मुझे नहीं जाना उस घर में,’ साक्षी ने अकड़ कर कहा. सुदीप ने उस का हाथ खींच कर गाड़़ी में बैठाया और गाड़ी स्टार्ट की.

‘तुम ने मुझ पर हाथ उठाया. यह देखो मेरी बांह पर नीले निशान छप गए हैं. मैं अभी अपने मम्मीपापा को फोन कर के बताती हूं.’

साक्षी के चीखने पर सुदीप हक्काबक्का रह गया. किसी तरह स्वयं पर नियंत्रण रख कर गाड़ी चलाता रहा.

घर पहुंचते ही साक्षी दनदनाती हुई अपने कमरे की ओर चल पड़ी. मां तथा कविता संशय से भर उठीं.

‘सुदीप बेटा, क्या बात है. साक्षी कुछ नाराज लग रही है?’ मां ने पूछा.

‘कुछ नहीं मां, छोटीमोटी बहसें तो चलती ही रहती हैं. आप लोग सो जाइए. हम बाहर से खाना खा कर आए हैं.’

साक्षी को समझाने की गरज से सुदीप ने कहा, ‘साक्षी, शादी के बाद लड़की को अपनी ससुराल में तालमेल बैठाना पड़ता है, तभी तो शादी को समझौता भी कहा जाता है. शादी के पहले की जिंदगी की तरह बेफिक्र, स्वच्छंद नहीं रहा जा सकता. पति, परिवार के सदस्यों के साथ मिल कर रहना ही अच्छा होता है. आपस में आदर, प्रेम, विश्वास हो तो संबंधों की डोर मजबूत बनती है. अब तुम बच्ची नहीं हो, परिपक्व हो, छोटीछोटी बातों पर बहस करना, रूठना ठीक नहीं…’

‘तुम्हारे उपदेश हो गए खत्म या अभी बाकी हैं? मैं सिर्फ एक बात जानती हूं, मुझे यहां इस घर में नहीं रहना. अगर तुम्हें मंजूर नहीं तो मैं मायके चली जाऊंगी. जब अलग घर लोगे तभी आऊंगी,’ साक्षी ने सपाट शब्दों में धमकी दे डाली.

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अमावस की काली रात उस रोज और अधिक गहरी और लंबी हो गई थी. सुदीप को अपने जीवन में अंधेरे के आने की आहट सुनाई पड़ने लगी. किस से अपनी परेशानियां कहे? जब लोगों को पता लगेगा कि शादी के 2-3 महीनों में ही साक्षी सासननद को लाचार, अकेले छोड़ कर पति के साथ अलग रहना चाहती है तो कितनी छीछालेदर होगी.

सुदीप रात भर इन्हीं तनावों के सागर में गोते लगाता रहा. इस के बाद भी अनेक रातें इन्हीं तनावों के बीच गुजरती रहीं.

मां की अनुभवी आंखों से कब तक सुदीप आंखें चुराता. उस दिन साक्षी पड़ोस की किसी सहेली के यहां गई थी. मां ने पूछ ही लिया, ‘सुदीप बेटा, तुम दोनों के बीच कुछ गलत चल रहा है? मुझ से छिपाओगे तो समस्या कम नहीं होगी, हो सकता है मैं तुम्हारी मदद कर सकूं?’

सुदीप की आंखें नम हो आईं. मां के प्रेम, आश्वासन, ढाढ़स ने हिम्मत बंधाई तो उस ने सारी बातें कह डालीं. मां के पैरों तले जमीन खिसक गई. वह तो साक्षी को बेटी से भी अधिक प्रेम, स्नेह दे रही थीं और उस के दिल में उन के प्रति अनादर, नफरत की भावना. कहां चूक हो गई?

एक दिन मां ने दिल कड़ा कर के फैसला सुना दिया, ‘सुदीप, मैं ने इसी कालोनी में तुम्हारे लिए किराए का मकान देख लिया है. अगले हफ्ते तुम लोग वहां शिफ्ट हो जाओ.’ सुदीप अवाक् सा मां के उदास चेहरे को देखता रह गया. हां, साक्षी के चेहरे पर राहत के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे.

‘लेकिन मां, यहां आप और कविता अकेली कैसे रहेंगी?’ सुदीप का स्वर भर्रा गया.

‘हमारी फिक्र मत करो. हो सकता है कि अलग रह कर साक्षी खुश रहे तथा हमारे प्रति उस के दिल में प्यार, आदर, इज्जत की भावना बढ़े.’

विदाई के समय मां, कविता के साथसाथ सुदीप की भी रुलाई फूट पड़ी थी. साक्षी मूकदर्शक सी चुपचाप खड़ी थी. कदाचित परिवार के प्रगाढ़ संबंधों में दरार डालने की कोशिश की पहली सफलता पर वह मन ही मन पुलकित हो रही थी.

अलग घर बसाने के कुछ ही दिनों बाद साक्षी ने 2-3 महिला क्लबों की सदस्यता प्राप्त कर ली. आएदिन महिलाओं का जमघट उस के घर लगने लगा. गप्पबाजी, निंदा पुराण, खानेपीने में समय बीतने लगा. साक्षी यही तो चाहती थी.

उस दिन सुदीप मां और बहन से मिलने गया तो प्यार से मां ने खाने का आग्रह किया. वह टाल न सका. घर लौटा तो साक्षी ने तूफान खड़ा कर दिया, ‘मैं यहां तुम्हारा इंतजार करती भूखी बैठी हूं और तुम मां के घर मजे से पेट भर कर आ रहे हो. मुझे भी अब खाना नहीं खाना.’

सुदीप ने खुशामद कर के उसे खाना खिलाया और उस के जोर देने पर थोड़ा सा स्वयं भी खाया.

पति को बस में करने के नएनए तरीके आजमाने की जब उस ने कोशिश की तो सुदीप का माथा ठनका. इस तरह शर्तों पर तो जिंदगी नहीं जी जा सकती. आपस में विश्वास, समझ, प्रेम व सामंजस्य की भावना ही न हो तो संबंधों में प्रगाढ़ता कहां से आएगी? रिश्तों की मधुरता के लिए दोनों को प्रयास करने पड़ते हैं और साक्षी केवल उस पर हावी होने, अपनी जिद मनवाने तथा स्वयं को सही ठहराने के ही प्रयास कर रही है. यह सब कब तक चल पाएगा. इन्हीं विचारों के झंझावात में वह कुछ दिन उलझा रहा.

एक दिन अचानक खुशी की लहर उस के शरीर को रोमांचित कर गई जब साक्षी ने उसे बताया कि वह मां बनने वाली है. पल भर के लिए उस के प्रति सभी गिलेशिकवे वह भूल गया. साक्षी के प्रति अथाह प्रेम उस के मन में उमड़ पड़ा. उस के माथे पर प्रेम की मोहर अंकित करते हुए वह बोला, ‘थैंक्यू, साक्षी, मैं तुम्हारा आभारी हूं, तुम ने मुझे पिता बनने का गौरव दिलाया है. मैं आज बहुत खुश हूं. चलो, बाहर चलते हैं. लेट अस सेलीब्रेट.’

मां को जब यह खुशखबरी सुदीप ने सुनाई तो वह दौड़ी चली आईं. अपने अनुभवों की पोटली भी वह खोलती जा रही थीं, ‘साक्षी, वजन मत उठाना, भागदौड़ मत करना, ज्यादा मिर्चमसाले, गरम चीजें मत लेना…’ कह कर मां चली गईं.

एकांत के क्षणों में सुदीप सोचता, बच्चा होने के बाद साक्षी में सुधार आ जाएगा. बच्चे की सारसंभाल में वह व्यस्त हो जाएगी, सहेलियों के जमघट से भी छुटकारा मिल जाएगा.

प्रसवकाल नजदीक आने पर मां ने आग्रह किया कि साक्षी उन के पास रहे मगर साक्षी ने दोटूक जवाब दिया, ‘मुझे यहां नहीं रहना, मां के पास जाना है. मेरी मम्मी, मेरी व बच्चे की ज्यादा अच्छी देखभाल कर सकती हैं.’

हार कर उसे मां के घर भेजना ही पड़ा था सुदीप को.

3 माह के बेटे को ले कर साक्षी जब घर लौटी तो सब से पहले उस ने आया का इंतजाम किया. चूंकि उस का वजन भी काफी बढ़ गया था इसलिए हेल्थ सेंटर जाना भी शुरू कर दिया. उसे बच्चे को संभालने में खासी मशक्कत करनी पड़ती. दिन भर तो आया ही उस की जिम्मेदारी उठाती थी. कई दफा मुन्ना रोता रहता और वह बेफिक्र सोई रहती. एक दिन बातों ही बातों में सुदीप ने जब इस बारे में शिकायत कर दी तो साक्षी भड़क उठी, ‘हां, मुझ से नहीं संभलता बच्चा. शादी से पहले मैं कितनी आजाद थी, अपनी मर्जी से जीती थी. अब तो अपना होश ही नहीं है. कभी घर, कभी बच्चा, बंध गई  हूं मैं…’

सुदीप के पैरों तले जमीन खिसक गई, ‘साक्षी, यह क्या कह रही हो तुम? अरे, बच्चे के बिना तो नारी जीवन ही अधूरा है. यह तो तुम्हारे लिए बड़ी खुशी की बात है कि तुम्हें मां का गौरवशाली, ममता से भरा रूप प्राप्त हुआ है. हम खुशकिस्मत हैं वरना कई लोग तो औलाद के लिए सारी उम्र तरसते रह जाते हैं,’ सुदीप ने समझाने की गरज से कहा.

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‘तुम आज भी उन्हीं दकियानूसी विचारों से भरे हो. दुनिया कहां से कहां पहुंच गई है. अभी भी तुम कुएं के मेढक बने हुए हो. घर, परिवार, बच्चे, बस इस के आगे कुछ नहीं.’

साक्षी के कटाक्ष से सुदीप भीतर तक आहत हो उठा, ‘साक्षी, जबान को लगाम दो. तुम हद से बढ़ती जा रही हो.’

‘मुझे भी तुम्हारी रोजरोज की झिकझिक में कोई दिलचस्पी नहीं. मुझे तुम्हारे साथ नहीं रहना, तलाक चाहिए मुझे…’

साक्षी के इतना कहते ही सुदीप की आंखों के आगे अंधेरा छा गया, ‘क्या कहा तुम ने, तलाक चाहिए? तुम्हारा दिमाग तो ठीक है?’

‘बिलकुल ठीक है. मैं अपने मम्मीपापा के पास रहूंगी. वे मुझे किसी काम के लिए नहीं टोकते. मुझे अपने ढंग से जीने देते हैं. मेरी खुशी में ही वे खुश रहते हैं…’

उन के संबंधों में दरार आ चुकी थी. मुन्ने के माध्यम से यह दरार कभी कम अवश्य हो जाती लेकिन पहले की तरह प्रेम, ऊष्मा, आकर्षण नहीं रहा.

तनावों के बीच साल भर का समय बीत गया. इस बीच साक्षी 2-3 बार तलाक की धमकी दे चुकी थी. सुदीप तनमन से थकने लगा था. आफिस में काम करते वक्त भी वह तनावग्रस्त रहने लगा.

मुन्ना रोए जा रहा था और साक्षी फोन पर गपशप में लगी थी. सुदीप से रहा नहीं गया. उस का आक्रोश फट पड़ा, ‘तुम से एक बच्चा भी नहीं संभलता? सारा दिन घर रहती हो, काम के लिए नौकर लगे हैं. आखिर तुम चाहती क्या हो?’

‘तुम से छुटकारा…’ साक्षी चीखी तो सुदीप भी आवेश में हो कर बोला, ‘ठीक है, जाओ, शौक से रह लो अपने मांबाप के घर.’

साक्षी ने फौरन अटैची में अपने और मुन्ने के कपड़े डाले.

‘इसे कहां लिए जा रही हो. यह यहीं रहेगा, मेरी मां के पास. तुम से नहीं संभलता न…’

सुदीप मुन्ने को लेने आगे बढ़ा.

‘यह मेरे पास रहेगा. मेरे मम्मीपापा इस की बेहतर परवरिश करेंगे…’ कह कर साक्षी मुन्ने को ले कर मायके चली गई.

मां से सारी घटना कहते हुए सुदीप की रुलाई फूट पड़ी थी. पत्नी के कारण मां व बहन के प्रति अपने फर्ज ठीक से न निभाने के कारण वह पहले ही अपराधबोध से ग्रस्त था. अब तो साक्षी के व्यवहार ने उन की इज्जत, मानमर्यादा पर भी बट्टा लगा दिया था.

सदा की तरह साक्षी के मातापिता ने उस की हरकत को हलके ढंग से लिया था. साक्षी के अनुसार सुदीप उस के तथा मुन्ना के बगैर नहीं रह सकता था अत: वह स्वयं आ कर उसे मना कर ले जाएगा. लेकिन जब एकएक दिन कर के 4-5 महीने बीत गए, सुदीप नहीं आया तो साक्षी के साथसाथ उस के मातापिता का भी माथा ठनका. कहीं सुदीप हकीकत में तलाक को गंभीरता से तो नहीं लेने लगा? हालांकि साक्षी तलाक नहीं चाहती थी. जैसेजैसे समय बीतता जा रहा था साक्षी का तनाव भी बढ़ता जा रहा था. अब उसे सुदीप का प्यार, मनुहार, उस की जिद के आगे झुकना, उस के कारण मांबहन से अलग हो कर रहना, रातों को उठ कर मुन्ने को संभालना, उस की ज्यादतियां बरदाश्त करना, समयसमय पर उस के लिए उपहार लाना, उसे खुश रखने का हरसंभव प्रयास करना बेइंतहा याद आने लगा था. सोच कर उसे कंपकंपी सी छूटने लगी. नहीं, वह सुदीप के बिना नहीं रह सकती. पर यह सब किस से कहे, कैसे कहे? उस का अहं भी तो आडे़ आ रहा था.

आज विज्ञापन पढ़ कर तो उस की सिट्टीपिट्टी गुम हो गई. तभी याद आया, सुलभा के मामा उसी अखबार में काम करते हैं. पता लगवाया तो उस का शक सही था, विज्ञापन सुदीप ने ही दिया था. अब क्या किया जाए? रात भर साक्षी विचारों के घेरे में उलझी रही. सुबह तक उस ने निर्णय ले लिया था. पति को फोन मिलाया, ‘‘सुदीप, मैं वापस आ रही हूं तुम्हारे पास…’’

मांबाप ने सुना तो उन्होंने भी राहत की सांस ली. कुछ समय से वे भी अपराधबोध महसूस कर रहे थे.

सुदीप के आगोश में साक्षी सुबक रही थी, ‘‘सुदीप, मुझे माफ कर दो…अपनी हरकतों के लिए मैं शर्मिंदा हूं… क्या सचमुच तुम दूसरी शादी करने वाले थे…’’

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‘‘पगली, बस, इतना ही मुझे समझ सकीं? काफी सोचविचार के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि एक करारा झटका ही तुम्हारा विवेक जगा सकता है, तुम्हारी लापरवाही, अपरिपक्वता को गंभीरता में बदल सकता है, अपनी गलती का एहसास करा सकता है. मैं जानता था तुम्हें वैवाहिक विज्ञापन पढ़ने का बहुत शौक है. बस, इसी का फायदा उठा कर मैं ने यह चाल चली. अगर इस में सफल न होता तो शायद सचमुच ही…’’

‘‘बस, आगे कुछ मत कहना,’’ साक्षी ने सुदीप के मुंह पर हाथ रख दिया, ‘‘सुबह का भूला शाम से पहले घर लौट आयाहै.’’

सुदीप ने उसे आलिंगनबद्ध कर आंखें बंद कर लीं. मानो पिछले 3 वर्ष के समय को दुस्वप्न की तरह भूल जाने का प्रयास कर रहा हो.

टैक्नोलौजी में आगे बढ़ता भोजपुरी सिनेमा

लेखक- बृहस्पति कुमार पांडेय

22 फरवरी, 1963 में पटना के वीणा सिनेमाघर में आई इस फिल्म को देखने के लिए बैलगाडि़यों की लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गई थीं.

ब्लैक ऐंड ह्वाइट प्रिंट पर आई इस फिल्म को कुमकुम, असीम कुमार, नजीर हुसैन जैसे कलाकारों ने हिट करने में बड़ी मदद की थी. इस फिल्म की कामयाबी की एक वजह इस के गीतों की भी रही थी, क्योंकि इस फिल्म को शैलेंद्र जैसे संगीतकार ने अपनी धुनों से सजाया था, जबकि मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर जैसे गायकों ने अपनी आवाज दी थी.

फिल्म ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ के बाद आई एक और फिल्म ‘नदिया के पार’ भी दर्शकों को अपनी तरफ खींचने में कामयाब रही थी, लेकिन उस के बाद भोजपुरी में आई फिल्में दर्शकों पर ज्यादातर अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रही थीं.

इस के बाद तकरीबन 20 साल तक भोजपुरी फिल्म जगत पर संकट के बादल छाए रहे थे क्योंकि भोजपुरी फिल्म जगत में फाइनैंसर पैसा लगाने से कतरा रहे थे. इस के चलते भोजपुरी फिल्मों की कहानी के मुताबिक महंगे फिल्मी सैट और टैक्नोलौजी वाले कैमरों का इस्तेमाल तक नहीं हो पाता था. इस से मारधाड़ और ऐक्शन वाले सीन में वह असलियत नहीं आ पाती थी जो दूसरी फिल्म इंडस्ट्री की फिल्मों में नजर आती थी.

लेकिन साल 2004 में भोजपुरी गायक मनोज तिवारी की 30 लाख रुपए के बजट की फिल्म ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ में अव्वल टैक्नोलौजी का इस्तेमाल होने के चलते इस ने 20 करोड़ रुपए की कमाई की थी.

इसी फिल्म से भोजपुरी फिल्मों के सुनहरे समय की शुरुआत हुई. इस के बाद आई भोजपुरी फिल्मों ने टैक्नोलौजी का इस्तेमाल कर बौलीवुड की फिल्मों से टक्कर लेना शुरू कर दिया था.

आज के दौर में बन रही भोजपुरी फिल्में स्थानीय लोकेशन में तकनीक के जरीए जान डालने में कामयाब हो रही हैं. इस की एक बड़ी वजह फिल्मों में इस्तेमाल होने वाली कैमरा फिल्मांकन तकनीक को जाता है.

भोजपुरी फिल्मों के बड़े स्टार रितेश पांडेय का कहना है कि 20 साल पहले बनने वाली भोजपुरी फिल्मों का फिल्मांकन किसी भी साधारण कैमरे से कर लिया जाता था, जिस के चलते मारधाड़ के सीन बनावटी लगते थे. लेकिन आज ग्राफिक और दूसरी मौडर्न तकनीक के इस्तेमाल से यह समस्या दूर हो गई है.

इस की वजह अच्छे कैमरों से भोजपुरी फिल्मों के शौट लिए जाना और शूटिंग के बाद फिल्मों की शानदार ऐडिटिंग किया जाना भी है. इस के लिए अब कई हाई लैवल के सौफ्टवेयर भी मुहैया हैं.

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टैक्नोलौजी के इस्तेमाल से भोजपुरी फिल्मों की फेमस हीरोइन पाखी हेगड़े की फिल्म ‘हंटरवाली’ ने इस फिल्म के मारधाड़ के सीन में जान फूंक दी थी. इस फिल्म में नई टैक्नोलौजी के चलते ही दर्शकों की भीड़ सिनेमाघरों में खिंची चली आई थी.

बौलीवुड फिल्मों की तरह अब भोजपुरी फिल्मों में भी वीएफएस तकनीक का इस्तेमाल होने लगा है, जिस के चलते बड़ेबड़े और जानलेवा स्टंट और खतरनाक सीन को शूट करना आसान हो गया है. वैसे, यह तकनीक बहुत ज्यादा खर्चीली है, फिर भी कुछ भोजपुरी फिल्मों में इस का खूब इस्तेमाल हुआ है.

अरविंद अकेला ‘कल्लू’ की फिल्म ‘बलमा बिहारवाला-2’ में हौरर सीन में बेहतरीन टैक्नोलौजी का इस्तेमाल किया गया था. डरावने सीन में बैकग्राउंड लाइटिंग, म्यूजिक और साउंड तकनीक ने इस फिल्म में जान डाल दी थी.

अरविंद अकेला ‘कल्लू’ ने बताया कि फिल्मों में लाइटिंग तकनीक बड़ा माने रखती है. अगर फिल्म को किसी डरावने सीन के साथ शूट करना होता है तो उस में नीली रोशनी का ज्यादा इस्तेमाल होता है.

रितेश पांडेय की फिल्म ‘नाचे नागिन गलीगली’ में स्पैशल इफैक्ट व ग्राफिक टैक्नोलौजी का इस्तेमाल कर इस फिल्म को स्पैशल टच देने की कोशिश की गई थी.

इस के अलावा भी कई ऐसी फिल्में आई हैं जो टैक्नोलौजी के नजरिए से बहुत बेहतर मानी जा सकती हैं. इन में दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ की ‘पटना से पाकिस्तान’, ‘निरहुआ हिंदुस्तानी-2’, ‘निरहुआ रिकशावाला-2’, ‘जिगर वाला’, ‘राजा बाबू’, ‘गुलाम’ जैसी फिल्में खास रही हैं, वहीं खेसारी लाल यादव और काजल राघवानी की फिल्म ‘मुकद्दर’ में पानी में डांस को फिल्मा कर यह साबित कर दिया है कि भोजपुरी फिल्में भी टैक्नोलौजी के मामले में दक्षिण भारतीय और बौलीवुड की फिल्मों से कमतर नहीं हैं.

बेहतरीन कोरियोग्राफी

आज के दौर में बनने वाली भोजपुरी फिल्मों में डांस सीन में बेहतरीन कोरियोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल किया जाने लगा है, जिस का नतीजा यह रहा है कि बौलीवुड फिल्मों की अदाकारा राखी सावंत ने रविकिशन और पवन सिंह की  फिल्म ‘कट्टा तनल दुपट्टा पर’ में दमदार आइटम गीत पेश किया था.

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े संजय यादव ने बताया कि भोजपुरी फिल्मों के गीत और डांस की वजह से इन्हें खासा पसंद किया जाता रहा है. ऐसे में डांस डायरैक्टरों ने भोजपुरी फिल्मों के गानों में फिल्माए जाने वाले डांस की तकनीक पर ज्यादा जोर देना शुरू कर दिया है. भोजपुरी फिल्मों में जितना संवाद पर ध्यान दिया जाता है, उतना ही बेहतर कोरियोग्राफी पर भी जोर दिया जाने लगा है.

बौलीवुड वाले भी आगे

बेहद कम बजट में अच्छी कमाई के चलते बौलीवुड के नामचीन कलाकारों को भोजपुरी फिल्में अपनी तरफ खींचने में कामयाब रही हैं. यही वजह है कि प्रियंका चोपड़ा ने दिनेशलाल यादव और आम्रपाली को साथ ले कर ‘बमबम बोल रहा काशी’ में अपना पैसा लगाया था.

इस फिल्म में इस्तेमाल की गई बेहतरीन फिल्मांकन तकनीक, लाइट विजुअल और साउंड इफैक्ट के चलते फिल्म के रिलीज होने के 3 दिन के भीतर ही पूरी लागत निकाल ली थी.

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन व उन की पत्नी जया बच्चन ने दिनेशलाल यादव और पाखी हेगड़े के साथ भोजपुरी फिल्म ‘गंगा देवी’ में काम किया था. इस फिल्म में गुलशन ग्रोवर ने भी अपनी ऐक्टिंग की अलग ही छाप छोड़ी थी.

भोजपुरी फिल्मों में हिंदी फिल्म जगत के नामचीन चेहरों के शामिल होने से भोजपुरी की फिल्मों में टैक्नोलौजी का पक्ष अब बेहद मजबूत हो रहा है. इन कलाकारों के चलते ही अब भोजपुरी की फिल्में मुंबई के गोरेगांव में फिल्म सिटी समेत विदेशों तक में फिल्माई जाने लगी हैं.

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वीडियो और आर्ट डायरैक्टर आशीष यादव ने बताया कि हाल के साल में भोजपुरी फिल्मों के फिल्मांकन में टैक्नोलौजी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, इस के बावजूद अभी भी लोग भोजपुरी फिल्मों में पैसा लगाने से डर रहे हैं.

आशीष यादव ने आगे बताया कि अगर भोजपुरी फिल्मों में दूसरी फिल्म इंडस्ट्री में उपयोग लाई जाने वाली एडवांस तकनीक का उपयोग करना है तो इस के लिए भोजपुरी फिल्म बनाने का बजट कम से कम एक करोड़ रुपए तक होना चाहिए. तभी हम क्रोमा शूट और वीएफएस जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर पाएंगे.

क्रोमा तकनीक के जरीए पहले से ही जिस लोकेशन को शूट करना होता है, उसे हर एंगल से शूट कर लिया जाता है, बाद में बिना वहां गए ही कलाकारों के साथ क्रोमा के रूप में शूट कर लिया जाता है.

इस तकनीक का इस्तेमाल करने में कलाकारों को लाल और हरे रंग के कपड़े पहनने से बचाया जाता है, क्योंकि क्रोमा तकनीक में इन रंगों का इस्तेमाल करने से सीन के खराब होने का ज्यादा डर बना रहता है.

क्रोमा तकनीक के इस्तेमाल से समय, पैसा और भागमभाग तीनों की बचत होती है, क्योंकि फिर भारीभरकम सामान के साथ फिल्म टीम को सफर नहीं करना पड़ता है, बल्कि स्थानीय लोकेशन में हूबहू दूसरी जगहों के सीन क्रोमा तकनीक से शूट कर लिए जाते हैं.

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वहीं वीएफएस तकनीक के आ जाने से मुंबई के महंगे फिल्म सिटी और करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाले फिल्म सैट का इस्तेमाल किए बिना

ही बिहार और उत्तर प्रदेश के स्थानीय लोकेशन पर फिल्मों को शूट कर लिया जाता है. यह तकनीक दर्शकों की भीड़ खींचने में कामयाब रही है.

मायावती का मिशन अधूरा

लोकसभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन को वह कामयाबी नहीं मिली, जिस की उम्मीद दोनों ही दलों को थी.

मायावती ने इस का ठीकरा सपा नेता अखिलेश यादव के सिर पर फोड़ते हुए कहा, ‘‘समाजवादी पार्टी के वोट बसपा ट्रांसफर नहीं हुए. अखिलेश यादव को सपा में मिशनरी सिस्टम यानी कैडर बेस को सही करना चाहिए.’’

साल 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा की हालत सब से ज्यादा खराब थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में तो बसपा को एक भी सीट नहीं मिली थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन का ही फायदा है कि बसपा को 10 सीटें मिल गईं.

चुनाव आयोग के आंकड़ों को भी देखें तो यह बात साफ होती है कि सपा के वोट तो बसपा को मिले, उलटे बसपा के वोट सपा को नहीं मिले.

बीते तकरीबन 20 सालों से बसपा में कैडर के कार्यकर्ताओं की घोर अनदेखी हुई है. बसपा प्रमुख मायावती को सब

से ज्यादा नुकसान 2009 के बाद से

शुरू हुआ, जब वह बहुमत से सरकार बनाने में कामयाब हुई, पर उन्होंने दलित कार्यकर्ताओं और दूसरे दलित संगठनों की अनेदखी शुरू की थी.

टूटता बसपा का मिशन

बसपा से जाटव बिरादरी को छोड़ बाकी दलित जातियों का पूरी तरह से मोह भंग हो चुका है. इस की सब से बड़ी वजह खुद मायावती की नीतियां हैं.

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मायावती ने बसपा में लोकतंत्र को कभी आगे नहीं बढ़ने दिया. धीरेधीरे

कर के जनाधार वाले नेता पार्टी से दूर होते चले गए और पार्टी का जनाधार खिसकता गया.

टिकट के लिए पैसा लेने के सब

से ज्यादा आरोप बसपा पर लगते हैं. राजधानी लखनऊ के पास की मोहनलालगंज सुरक्षित लोकसभा सीट को देखें तो साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने रिटायर अफसर राम बहादुर को टिकट दिया था. वे कम वोट से चुनाव हार गए.

2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने इस सीट पर राम बहादुर को टिकट नहीं दिया और सीएल वर्मा को टिकट दिया जो मायावती के बेहद करीबी माने जाते हैं. सीएल वर्मा 2014 के मुकाबले ज्यादा वोट से चुनाव हार गए.

जानकार लोग कहते हैं कि अगर राम बहादुर को दोबारा इस सीट से चुनाव लड़ाया जाता तो वे सीएल वर्मा के मुकाबले बेहतर चुनाव लड़ते.

कांशीराम के समय में बसपा में सभी दलित जातियों की नुमाइंदगी

होती थी. कांशीराम की मुहिम

‘85 बनाम 15’ की थी. यही लड़ाई भीमराव अंबेडकर की भी थी.

कांशीराम के बाद मायावती के हाथ सत्ता आते ही पार्टी अपने मिशन से भटक गई. मायावती पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे. वहीं से बसपा का मिशन अधूरा रह गया और पार्टी का जनाधार खिसकने लगा.

नाकाम सोशल इंजीनियरिंग

1998 के बाद से बसपा अपने मिशन को दरकिनार कर आगे बढ़ने लगी. ‘ठाकुर, बामन, बनिया छोड़ बाकी सब है डीएस फोर’ का नारा देने वाली बसपा अब सोशल इंजीनियरिंग के नाम पर ब्राह्मण समाज को आगे बढ़ाने लगी. इस तरह बसपा का मिशन खत्म हो गया.

बसपा के लिए परेशानी का सबब यह है कि पार्टी के दलित तबके ने सवर्णों की तरह से रीतिरिवाज और पूजापाठ करना शुरू कर दिया. भाजपा ने इन सब को हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के नाम पर अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया.

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एक भी मुसलिम को टिकट नहीं दिया तो बसपा ने दलितमुसलिम गठजोड़ बनाना शुरू किया. उस समय तक मायावती को इस बात का अहसास ही नहीं था कि दलित सवर्ण से ज्यादा मुसलिमों से दूर हैं. ऐसे में दलितों ने बसपा के मुसलिम प्रेम को नकारते हुए पार्टी से किनारा कर लिया.

2017 के विधानसभा चुनाव में मायावती ने बसपा के तकरीबन 100 टिकट मुसलिम बिरादरी को दिए. नतीजा एक बार फिर से बसपा के खिलाफ गया और बसपा तीसरे नंबर की पार्टी बन कर रह गई.

दलितपिछड़ा गठजोड़

चुनाव में जातीय समीकरण मजबूत करने के लिए बसपासपा ने गठबंधन किया. दोनों को लग रहा था कि यह गठजोड़ काम करेगा. असल में बसपा नेता मायावती की ही तरह सपा नेता अखिलेश यादव भी केवल यादव जाति के नेता बन कर रह गए. जमीनी स्तर पर दलित पिछड़ों के बीच वैसा ही भेदभाव है जैसा दलित और सवर्ण के बीच है. दलित तबके को अब लगता है कि उस को अगर समाज की मुख्यधारा में शामिल होना है तो धार्मिक होना पड़ेगा.

बसपा के खिसकते जनाधार को चुनावी नतीजों से समझा जा सकता है. 2014 में बसपा ने 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा, उस को 19.77 फीसदी वोट मिले. 2019 में बसपा ने सपा के साथ मिल कर 38 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19.36 फीसदी वोट मिले. केवल 38 सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद भी उसे पहले जैसे ही वोट मिले. इस से पता चलता है कि गठबंधन का लाभ बसपा को मिला. गठबंधन नहीं हुआ होता तो वोट प्रतिशत घट गया होता.

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सपा को देखें तो 2014 में उस को 22.35 फीसदी वोट मिले थे. 2019 में वे घट कर 18 फीसदी रह गए. ऐसे में साफ है कि गठबंधन का सपा को कोई फायदा नहीं हुआ. बसपा को केवल वोट फीसदी में ही फायदा नहीं हुआ बल्कि लोकसभा में वह जीरो से 10 सीटों पर आ पहुंची.

मायावती जो सीख अखिलेश यादव को दे रही हैं कि वे सपा कार्यकर्ताओं को समाजवादी मिशन से जोड़ें, असल में यह काम खुद मायावती को करने की जरूरत है. मुसलिम वोट बैंक मायावती के साथ नहीं है. वह भाजपा के खिलाफ है. ऐसे में जब तक चुनाव में राष्ट्रवाद और धर्म पर वोट डाले जाएंगे, तब

तक जातीय गठजोड़ काम नहीं आएगा. मुसलिमों का हिमायती बनने के चलते भी दलित सब से ज्यादा बसपा से नाराज हो कर पार्टी से दूर जा रहे हैं.         द्य

क्या आप जानते है धनिया कैसे घटाता है वजन

हमारे घर के किचन में ऐसे कई सारे खाने के आइटम्स होते है जो हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है. रोजाना खाने में शामिल कुछ सब्जियां और मसाले सेहत के लिए अच्छे हैं. उन्हीं में से एक है धनिया. जी हां.. क्या आप जानते है की धनिये की पत्तियों में ऐसे एंटीऔक्सीडेंट्स और मिनरल्स होते हैं, जो आपके वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं. पेट पर जमा चर्बी घटाना आसान नहीं होता है, पर अगर आप किसी बीमारी की वजह से मोटे नहीं हुए हैं, तो मोटापा घटाया जा सकता है. ऐसे मे धनिये के पत्ते से अच्छा कोई घरेलू नुस्खा नहीं हैं. धनिये की पत्तियां हमारे घर में आसानी से मिल जाती है और ये अमुमन सभी सब्जियों में डाली भी जाती है. तो चलिए जानते है की धनिये की पत्तियों से कैसे वजन खटाया जा  सकता हैं.

सालों से जमा चर्बी को घटाने के लिए रखे डाइट पर ध्यान

सालों से जमा चर्बी को खत्म करने के लिए सिर्फ धनिया की पत्तियां काफी नहीं हैं, बल्कि इसके लिए आपको अपने जंक फूड्स और ज्यादा खाने की आदत को थोड़ा कंट्रोल करना पड़ेगा और थोड़ी एक्सरसाइज करनी पड़ेगी. धनिया की पत्तियों का कमाल ये है कि ये आपका मेटाबौलिज्म बढ़ा देती हैं, जिससे आपके वजन घटाने की प्रक्रिया तेज हो जाती है. ऐसे में अगर आप सामान्य तरीके से सप्ताह में 1 किलो वजन घटाते हैं, तो धनिया पत्तियों की मदद से आपका वजन 1.5 से 2 किलो तक घट सकता है.

फैट बर्न करता है धनिया

धनिया को आमतौर पर सब्जियों में खुश्बू और स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है. मगर आयुर्वेद में धनिया को औषधि भी माना जाता है. धनिया की पत्तियों में क्वरसेटिन नाम का एक विशेष एंटीऔक्सीडेंट होता है, जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है. ये एंटीऔक्सीडेंट आपके मेटाबौलिज्म को बेहतर बनाता है और शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है. इसके अलावा धनिया के पत्तियों को बहुत अच्छा डिटॉक्स एजेंट माना जाता है, यानी धनिया पत्तियों के सेवन से शरीर में जमा सभी गंदगी बाहर निकल जाती हैं.

धनिया में होते है ऐसे तत्व

धनिया की पत्तियां मैग्नीशियम का बहुत अच्छा स्रोत होती हैं. इसके अलावा इनमें विटामिन बी और फौलिक एसिड भी अच्छी मात्रा में होता है. ये दोनों ही तत्व शरीर में ग्लूकोज को बर्न करने में मदद करते हैं, जिससे आप जो भी कैलोरीज लेते हैं, शरीर उनका इस्तेमाल कर लेता है और वे अतिरिक्त फैट के रूप में आपके शरीर में जमा नहीं होते हैं.

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