हरेली त्योहार: मुख्यमंत्री की राजनीति या सच्ची श्रद्धा!

यह आरोप लगाकर कर भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक सांस्कृतिक तिहार हरेली को राजकीय तौर पर मनाने का ऐलान बहुत पहले कर दिया था. आज छत्तीसगढ़ के 27 जिलों में विधायक,मंत्री, वीवीआईपी के आतिथ्य में “हरेली” त्यौहार मनाया जा रहा है. छत्तीसगढ़ की संस्कृति के नाम पर यह त्यौहार शासकीय मंच और पैसों से मनाया जाना कितना उचित है यह आप स्वयं अनुमान लगा सकते हैं. मगर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज स्वयं आज बिलासपुर जिला के तखतपुर विकासखंड के ग्राम नेवरा पहुंचे और यहां हरेली त्यौहार में शिरकत कर रहे हैं .उन्होंने 26 गोठान का उद्घाटन करके हरेली त्यौहार का आगाज किया . भूपेश सरकार ने आज हरेली त्यौहार पर शासकीय छुट्टी घोषित कर दी है. वही भूपेश बघेल के प्रखर विरोधी अजीत जोगी के सुपुत्र अमित जोगी ने आज हरेली पर्व पर सभी जिला मुख्यालयों में भूपेश बघेल के खिलाफ आंदोलन प्रदर्शन प्रारंभ किया हुआ है.

कैसे मनाया जाता है हरेली त्यौहार

किसानों का यह त्यौहार औज़ार पूजा से शुरू होता है. किसान आज कोई काम पर नहीं करते, घर पर ही खेत के औजार व उपकरण जैसे नांगर, गैंती, कुदाली, रापा इत्यादि की साफ-सफाई कर पूजा करते हैं. यहीं नहीं बैलों व गायों की भी आज के शुभ दिन पर पूजा की जाती है. त्यौहार में सुबह घरों के प्रवेश द्वार पर नीम की पत्तियाँ व चौखट में कील लगाई जाती है.ऐसा माना जाता है कि द्वार पर नीम की पत्तियाँ व कील लगाने से घर में रहने वाले लोगो की
तंत्र मंत्र भूत प्रेत से रक्षा होती हैं . ग्रामीण अपने कुल देवताओं का भी विशेष पूजन करते है. छत्तीसगढ़ी समाज के विशेष पकवान जैसे गुड़ और चावल का चिला बनाकर मंदिरों में चढ़ाया जाता है. दरअसल प्रकृति और
पर्यावरण को समर्पित यह त्यौहार छत्तीसगढ़ी लोगों का प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण दर्शाता है. सावन मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह त्यौहार पूर्णतः हरियाली का पर्व है.
छत्तीसगढ़ी संस्कृति का पर्व ‘हरेली अमावस्या’ की धूम इस बार राजधानी समेत प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों मे है .राज्य सरकार के निर्देश पर पहली बार संस्कृति विभाग द्वारा पर्व को धूमधाम से सेलिब्रेट किया जा रहा है. सुबह से लेकर रात तक छत्तीसगढ़ी लोक नृत्यों के साथ छत्तीसगढ़ व्यंजनों का भी बंदोबस्त किया गया है. सुबह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हरेली जोहार यात्रा निकाली .
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने रायपुर निवास से बैलगाड़ी पर सवार होकर गांधी उद्यान होते हुए संस्कृति विभाग के मुक्ताकाशी मंच पर पहुंचकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया . यहां ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ की जीवंत झांकी बनाई गई है . 500 लोक नर्तक कलाकारों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में वाद्ययंत्रों एवं साज-सज्जा के साथ छत्तीसगढ़ी व्यंजन, गेड़ी नृत्य, करमा नृत्य, सुआ नृत्य, राउत नाचा नृत्य, पंथी नृत्य, गौरा-गौरी, अखाड़ा, गतका दल की आकर्षक प्रस्तुति दी गई.

हरेली के साथ तंत्र मंत्र अंधविश्वास भी !

सदियों से हरेली पर्व को लेकर अंधविश्वास फैला हुआ है. आज भी गांवों में ग्रामीण मानते हैं कि इस दिन तंत्र मंत्र ,जादू, टोना करने वाले सक्रिय रहते हैं. अपने बच्चों को ऐसे लोगों की बुरी नजर से बचाने के लिए ग्रामीण घर के मुख्य द्वार पर नीम पत्तों की टहनी लगाते हैं. साथ ही दीवार पर गोबर से पुतला-पुतली का चित्र भी बनाते हैं. आज से
तंत्र विद्या की शुरुआत होती है. वरिष्ठ पत्रकार रामाधार देवांगन बताते हैं, श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानी हरेली के दिन से तंत्र विद्या की शिक्षा देने की शुरुआत होती है. आज के दिन से प्रदेश में लोकहित की दृष्टि से जिज्ञासु शिष्यों को पीलिया, सांप बिच्छू का विष उतारने, नजर से बचाने, महामारी और बाहरी हवा से बचाने समेत कई तरह की समस्याओं से बचाने के लिए मंत्र सिखाया जाता है.तंत्र दीक्षा देने का यह सिलसिला भाद्र शुक्ल पंचमी तक चलता है.

125 साल बाद आया अवसर!!

यह प्रचार भी सुर्खियों में है की आज का दिन अति विशिष्ट है. जन्म से ब्राह्मण,लेकिन कर्म से एक शासकीय सेवक रहे लव कुमार शर्मा कहते हैं हिंदू संवत्सर के सावन माह मे मनाया जाने वाला हरेली पर्व आज कुछ विशेष रूप से श्रद्धा-उल्लास से मनाया जा रहा है इसके पीछे अंधविश्वास और रुपए ऐंठने के पराक्रम के अलावा कुछ भी नहीं है . यह भी महत्वपूर्ण है कि
हिंदू पंडित एवं कैलेंडर के अनुसार अबकि हरेली पर्व पर पंच महायोग का संयोग बना है.यह संयोग लगभग 125 साल बाद आया है. और कहा जा रहा है कि पंच महायोग के संयोग में कुल देवी-देवता तथा मां पार्वती की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. वस्तुतः यह सीधे सीधे अवाम को पोंगापंथी बनाने जैसा है । कहा जा रहा है आज पांच महासंयोग,सिद्धि योग, शुभ योग,गुरु कुस्या मृत योग,
सर्वार्थ सिद्धि योग ,अमृत सिद्धि योग .हरियाली अमावस्या पर इस बार गुरुपुष्य नक्षत्र के साथ अमृतसिद्धि व सर्वार्थसिद्धि योग का विलक्षण संयोग है. यह प्रचारित करके, भरमा कर अंचल के सीधे सरल,भोले-भाले लोगों को बेवकूफ बनाना और पैसे ऐंठना लोगों का पेशा है. उनको भरमा कर कहा जाता है कि भाइयों और बहनों!
सालों बाद दिव्य संयोग आने वाली अमावस्या पर पितृ कर्म व पौधारोपण करना श्रेष्ठ है.आज हरियाली अमावस्या पर 6 घंटे तक पुष्य नक्षत्र का योग रहेगा!! इसलिए आओ और अंधविश्वास में रम जाओ. बहुतेरे लोग इस फरेब में आ भी जाते हैं और अधिसंख्य लोग इस धंधे बाजी को समझते हैं और पंडित पुरोहितों के संजाल में नहीं फंसते.

शहीद

लेखक- संजीव जायसवाल ‘संजय’

ऊबड़खाबड़ पथरीले रास्तों पर दौड़ती जीप तेजी से छावनी की ओर बढ़ रही थी. इस समय आसपास के नैसर्गिक सौंदर्य को देखने की फुरसत नहीं थी. मैं जल्द से जल्द अपनी छावनी तक पहुंच जाना चाहता था.

आज ही मैं सेना के अधिकारियों की एक बैठक में भाग लेने के लिए श्रीनगर आया था. कश्मीर रेंज में तैनात ब्रिगेडियर और उस से ऊपर के रैंक के सभी सैनिक अधिकारियों की इस बैठक में अत्यंत गोपनीय एवं संवेदनशील विषयों पर चर्चा होनी थी अत: किसी भी मातहत अधिकारी को बैठक कक्ष के भीतर आने की इजाजत नहीं थी.

बैठक 2 बजे समाप्त हुई. मैं बैठक कक्ष से बाहर निकला ही था कि सार्जेंट रामसिंह ने बताया, ‘‘सर, छावनी से कैप्टन बोस का 2 बार फोन आ चुका है. वह आप से बात करना चाहते हैं.’’

मैं ने रामसिंह को छावनी का नंबर मिलाने के लिए कहा. कैप्टन बोस की आवाज आते ही रामसिंह ने फोन मेरी तरफ बढ़ा दिया.

‘‘हैलो कैप्टन, वहां सब ठीक तो है?’’ मैं ने पूछा.

‘‘हां सर, सब ठीक है,’’ कैप्टन बोस बोले, ‘‘लेकिन अपनी छावनी के भीतर भारतीय सैनिक की वेशभूषा में घूमता हुआ पाकिस्तानी सेना का एक लेफ्टिनेंट पकड़ा गया है.’’

‘‘तुम्हें कैसे पता चला कि वह पाकिस्तानी सेना का लेफ्टिनेंट है? वह छावनी के भीतर कैसे घुस आया? उस के साथ और कितने आदमी हैं? उस ने छावनी में किसी को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचाया?’’ मैं ने एक ही सांस में प्रश्नों की बौछार कर दी.

‘‘सर, आप परेशान न हों. यहां सब ठीकठाक है. वह अकेला ही है. उस से बरामद पहचानपत्र से पता चला कि वह पाकिस्तानी सेना का लेफ्टिनेंट है,’’ कैप्टन बोस ने बताया.

‘‘मैं फौरन यहां से निकल रहा हूं तब तक तुम उस से पूछताछ करो लेकिन ध्यान रखना कि वह मरने न पाए,’’ इतना कह कर मैं ने फोन काट दिया.

श्रीनगर से 85 किलोमीटर दूर छावनी तक पहुंचने में 4 घंटे का समय इसलिए लगता है क्योंकि पहाड़ी रास्तों पर जीप की रफ्तार कम होती है. मैं अंधेरा होने से पहले छावनी पहुंच जाना चाहता था.

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मेरे छावनी पहुंचने की खबर पा कर कैप्टन बोस फौरन मेरे कमरे में आए.

‘‘कुछ बताया उस ने?’’ मैं ने कैप्टन बोस को देखते ही पूछा.

‘‘नहीं, सर,’’ कैप्टन बोस दांत भींचते हुए बोले, ‘‘पता नहीं किस मिट्टी का बना हुआ है. हम लोग टार्चर करकर के हार गए लेकिन वह मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं है.’’

‘‘परेशान न हो. मुझे अच्छेअच्छों का मुंह खुलवाना आता है,’’ मैं ने अपने कैप्टन को सांत्वना दी फिर पूछा, ‘‘क्या नाम है उस पाकिस्तानी का?’’

‘‘शाहदीप खान,’’ कैप्टन बोस ने बताया.

इन 2 शब्दों ने मुझे झकझोर कर रख दिया था.

मैं ने अपने मन को सांत्वना दी कि इस दुनिया में एक नाम के कई व्यक्ति हो सकते हैं किंतु क्या ‘शाहदीप’ जैसे अनोखे नाम के भी 2 व्यक्ति हो सकते हैं? मेरे अंदर के संदेह ने फिर अपना फन उठाया.

‘‘सर, क्या सोचने लगे,’’ कैप्टन बोस ने टोका.

‘‘वह पाकिस्तानी यहां क्यों आया था, यह हर हालत में पता लगाना जरूरी है,’’ मैं ने सख्त स्वर में कहा और अपनी कुरसी से उठ खड़ा हुआ.

कैप्टन बोस मुझे बैरक नंबर 4 में ले आए. उस पाकिस्तानी के हाथ इस समय बंधे हुए थे. नीचे से ऊपर तक वह खून से लथपथ था. मेरी गैरमौजूदगी में उस से काफी कड़ाई से पूछताछ की गई थी. मुझे देख उस की बड़ीबड़ी आंखें पल भर

के लिए कुछ सिकुड़ीं फिर उन में एक अजीब बेचैनी सी समा गई.

मुझे वे आंखें कुछ जानीपहचानी सी लगीं किंतु उस का पूरा चेहरा खून से भीगा हुआ था इसलिए चाह कर भी मैं उसे पहचान नहीं पाया. मुझे अपनी ओर घूरता देख उस ने कोशिश कर के पंजों के बल ऊपर उठ कर अपने चेहरे को कमीज की बांह से पोंछ लिया.

खून साफ हो जाने के कारण उस का आधा चेहरा दिखाई पड़ने लगा था. वह शाहदीप ही था. मेरे और शाहीन के प्यार की निशानी. हूबहू मेरी जवानी का प्रतिरूप.

मेरा अपना ही खून आज दुश्मन के रूप में मेरे सामने खड़ा था और उस के घावों पर मरहम लगाने के बजाय उसे और कुरेदना मेरी मजबूरी थी. अपनी इस बेबसी पर मेरी आंखें भर आईं. मेरा पूरा शरीर कांपने लगा. एक अजीब सी कमजोरी मुझे जकड़ती जा रही थी. ऐसा लग रहा था कि कोई सहारा न मिला तो मैं गिर पड़ ूंगा.

‘‘लगता है कि हिंदुस्तानी कैप्टन ने पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट से हार मान ली, तभी अपने ब्रिगेडियर को बुला कर लाया है,’’ शाहदीप ने यह कह कर एक जोरदार कहकहा लगाया.

यह सुन मेरे विचारों को झटका सा लगा. इस समय मैं हिंदुस्तानी सेना के ब्रिगेडियर की हैसियत से वहीं खड़ा था और सामने दुश्मन की सेना का लेफ्टिनेंट खड़ा था. उस के साथ कोई रिआयत बरतना अपने देश के साथ गद्दारी होगी.

मेरे जबड़े भिंच गए. मैं ने सख्त स्वर में कहा, ‘‘लेफ्टिनेंट, तुम्हारी भलाई इसी में है कि सबकुछ सचसच बता दो कि यहां क्यों आए थे वरना मैं तुम्हारी ऐसी हालत करूंगा कि तुम्हारी सात पुश्तें भी तुम्हें नहीं पहचान पाएंगी.’’

‘‘आजकल एक पुश्त दूसरी पुश्त को नहीं पहचान पाती है और आप सात पुश्तों की बात कर रहे हैं,’’ यह कह कर शाहदीप हंस पड़ा. उस के चेहरे पर भय का कोई निशान नहीं था.

मैं ने लपक कर उस की गरदन पकड़ ली और पूरी ताकत से दबाने लगा. देशभक्ति साबित करने के जनून में मैं बेरहमी पर उतर आया था. शाहदीप की आंखें बाहर निकलने लगी थीं. वह बुरी तरह से छटपटाने लगा. बहुत मुश्किल से उस के मुंह से अटकते हुए स्वर निकले, ‘‘छोड़…दो मुझे…मैं…सबकुछ…. बताने के लिए तैयार हूं.’’

‘‘बताओ?’’ मैं उसे धक्का देते हुए चीखा.

‘‘मेरे हाथ खोलो,’’ शाहदीप कराहा.

कैप्टन बोस ने अपनी रिवाल्वर शाहदीप के ऊपर तान दी. उन के इशारे पर पीछे खड़े सैनिकों में से एक ने शाहदीप के हाथ खोल दिए.

हाथ खुलते ही शाहदीप मेरी ओर देखते हुए बोला, ‘‘क्या पानी मिल सकता है?’’

मेरे इशारे पर एक सैनिक पानी का जग ले आया. शाहदीप ने मुंह लगा कर 3-4 घूंट पानी पिया फिर पूरा जग अपने सिर के ऊपर उड़ेल लिया. शायद इस से उस के दर्द को कुछ राहत मिली तो उस ने एक गहरी सांस भरी और बोला, ‘‘हमारी ब्रिगेड को खबर मिली थी कि कारगिल युद्ध के बाद हिंदुस्तानी फौज ने सीमा के पास एक अंडरग्राउंड आयुध कारखाना बनाया है. वहां खतरनाक हथियार बना कर जमा किए जा रहे हैं ताकि युद्ध की दशा में फौज को तत्काल हथियारों की सप्लाई हो सके. उस कारखाने का रास्ता इस छावनी से हो कर जाता है. मैं उस की वीडियो फिल्म बनाने यहां आया था.’’

इस रहस्योद्घाटन से मेरे साथसाथ कैप्टन बोस भी चौंक पड़े. भारतीय फौज की यह बहुत गुप्त परियोजना थी. इस के बारे में पाकिस्तानियों को पता चल जाना खतरनाक था.

‘‘मगर तुम्हारा कैमरा कहां है जिस से तुम वीडियोग्राफी कर रहे थे,’’ कैप्टन बोस ने डपटा.

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शाहदीप ने कैप्टन बोस की तरफ देखा, इस के बाद वह मेरी ओर मुड़ते हुए बोला, ‘‘आज के समय में फिल्म बनाने के लिए कंधे पर कैमरा लाद कर घूमना जरूरी नहीं है. मेरे गले के लाकेट में एक संवेदनशील कैमरा फिट है जिस की सहायता से मैं ने छावनी की वीडियोग्राफी की है.’’

इतना कह कर उस ने अपने गले में पड़ा लाकेट निकाल कर मेरी ओर बढ़ा दिया. वास्तव में वह लाकेट न हो कर एक छोटा सा कैमरा था जिसे लाकेट की शक्ल में बनाया गया था. मैं ने उसे कैप्टन बोस की ओर बढ़ा दिया.

उस ने लाकेट को उलटपुलट कर देखा फिर प्रसंशात्मक स्वर में बोला, ‘‘सर, भारतीय सेना के हौसले आप जैसे काबिल अफसरों के कारण ही इतने बुलंद हैं.’’

‘काबिल’ यह एक शब्द किसी हथौड़े की भांति मेरे अंतर्मन पर पड़ा था. मैं खुद नहीं समझ पा रहा था कि यह मेरी काबिलीयत थी या कोई और कारण जिस की खातिर शाहदीप इतनी जल्दी टूट गया था. मेरे सामने मेरा खून इस तरह टूटने के बजाय अगर देश के लिए अपनी जान दे देता तो शायद मुझे ज्यादा खुशी होती.

‘‘सर, अब इस लेफ्टिनेंट का क्या किया जाए?’’ कैप्टन बोस ने यह पूछ कर मेरी तंद्रा भंग की.

‘‘इसे आज रात इसी बैरक में रहने दो. कल सुबह इसे श्रीनगर भेज देंगे,’’ मैं ने किसी पराजित योद्धा की भांति सांस भरी.

शाहदीप को वहीं छोड़ मैं कैप्टन बोस के साथ चल पड़ा था कि उस ने आवाज दी, ‘‘ब्रिगेडियर साहब, मैं आप से अकेले में कुछ बात करना चाहता हूं.’’

मैं असमंजस में पड़ गया. ऐसी कौन सी बात हो सकती है जो वह मुझ से अकेले में करना चाहता है. कैप्टन बोस ने मेरे असमंजस को भांप लिया था अत: वह सैनिकों के साथ दूर हट गए.

मैं वापस बैरक के भीतर घुसा तो देखा कि घायल शाहदीप का पूरा शरीर कांप रहा था.

मैं उस के करीब पहुंचा ही था कि उस का शरीर लहराते हुए मेरी ओर गिर पड़ा. मैं ने उसे अपनी बांहों में संभाल कर सामने बने चबूतरे पर लिटा दिया. वह लंबीलंबी सांसें लेने लगा.

उस की उखड़ी हुई सांसें कुछ नियंत्रित हुईं तो मैं ने पूछा, ‘‘बताओ, क्या कहना चाहते हो?’’

‘‘सिर्फ इतना कि मैं ने आप का कर्ज चुका दिया है.’’

‘‘कैसा कर्ज? मैं कुछ समझा नहीं.’’

‘‘अगर मैं चाहता तो आप मुझे मार भी डालते तो भी मेरे यहां आने का राज कभी मुझ से न उगलवा पाते. मैं यह भी जानता था कि देशभक्ति के जनून में आप मुझे मार डालेंगे किंतु यदि ऐसा हो जाता तो फिर जिंदगी भर आप अपने को माफ नहीं कर पाते.’’

‘‘फौजी तो अपने दुश्मनों को मारते ही रहते हैं, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है,’’ मैं ने अचकचाते हुए कहा.

‘‘लेकिन एक बाप को फर्क पड़ता है. अपने बेटे की हत्या करने के बाद वह भला चैन से कैसे जी सकता है?’’ शाहदीप के होंठों पर दर्द भरी मुसकान तैर गई.

‘‘कैसा बाप और कैसा बेटा. तुम कहना क्या चाहते हो?’’ मेरा स्वर कड़ा हो गया.

शाहदीप ने अपनी बड़ीबड़ी आंखें मेरे चेहरे पर टिका दीं और बोला, ‘‘ब्रिगेडियर दीपक कुमार सिंह, यही लिखा है न आप की नेम प्लेट पर? सचसच बताइए कि आप ने मुझे पहचाना या नहीं?’’

मेरा सर्वांग कांप उठा.

मेरी ही तरह मेरे खून ने भी अपने खून को पहचान लिया था. हम बापबेटों ने जिंदगी में पहली बार एकदूसरे को देखा था किंतु रिश्ते बदल गए थे. हम दुश्मनों की भांति एकदूसरे के सामने खड़े थे. मेरे अंदर भावनाओं का समुद्र उमड़ने लगा था. मैं बहुत कुछ कहना चाहता था किंतु जड़ हो कर रह गया.

‘‘डैडी, आप को पुत्रहत्या के दोष से बचा कर मैं पुत्रधर्म के ऋण से उऋण हो चुका हूं. आज के बाद जब भी हमारी मुलाकात होगी आप अपने सामने पाकिस्तानी सेना के जांबाज और वफादार अफसर को पाएंगे, जो कट जाएगा लेकिन झुकेगा नहीं,’’ शाहदीप ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए कहा.

‘‘इस का मतलब तुम ने जानबूझ कर अपना राज खोला है,’’ बहुत मुश्किलों से मेरे मुंह से स्वर फूटा.

‘‘मैं कायर नहीं हूं. मैं आप की सौगंध खा कर वादा करता हूं कि जिस देश का नमक खाया है उस के साथ नमकहरामी नहीं करूंगा,’’ शाहदीप की आंखें आत्मविश्वास से जगमगा उठीं.

शाहदीप के स्वर मेरे कानों में पिघले शीशे की भांति दहक उठे. मैं एक फौजी था अत: अपने बेटे को अपनी फौज के साथ गद्दारी करने के लिए नहीं कह सकता था किंतु जो वह कह रहा था उस की भी इजाजत कभी नहीं दे सकता था. अत: उसे समझाते हुए बोला, ‘‘बेटा, तुम इस समय हिंदुस्तानी फौज की हिरासत में हो इसलिए कोई दुस्साहस करने की कोशिश मत करना. ऐसा करना तुम्हारे लिए खतरनाक हो सकता है.’’

‘‘दुस्साहस तो फौजी का सब से बड़ा हथियार होता है, उसे मैं कैसे छोड़ सकता हूं. आप अपना फर्ज पूरा कीजिएगा मैं अपना फर्ज पूरा करूंगा,’’ शाहदीप निर्णायक स्वर में बोला.

मैं दर्द भरे स्वर में बोला, ‘‘बेटा, तुम्हारे पास समय बहुत कम है. मेहरबानी कर के तुम इतना बता दो कि तुम्हारी मां इस समय कहां है और यहां आने से पहले क्या तुम मेरे बारे में जानते थे?’’

‘‘साल भर पहले मां का इंतकाल हो गया. वह बताया करती थीं कि मेरे सारे पूर्वज सेना में रहे हैं. मैं भी उन की तरह बहादुर बनना चाहता था इसलिए फौज में भरती हो गया था. अपने अंतिम दिनों में मां ने आप का नाम भी बता दिया था. मैं जानता था कि आप भारतीय फौज में हैं किंतु यह नहीं जानता था कि आप से इस तरह मुलाकात होगी,’’ बोलतेबोलते पहली बार शाहदीप का स्वर भीग उठा था.

मैं भी अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पा रहा था. अत: शाहदीप को अपना खयाल रखने के लिए कह कर तेजी से वहां से चला आया.

‘‘सर, वह क्या कह रहा था?’’ बाहर निकलते ही कैप्टन बोस ने पूछा.

‘‘कह रहा था कि मैं ने आप की मदद की है इसलिए मेरी मदद कीजिए, और मुझे यहां से निकल जाने दीजिए,’’ मेरे मुंह से अनजाने में ही निकल गया.

मैं चुपचाप अपने कक्ष में आ गया. बाहर खड़े संतरी से मैं ने कह दिया था कि किसी को भी भीतर न आने दिया जाए. इस समय मैं दुनिया से दूर अकेले में अपनी यादों के साथ अपना दर्द बांटना चाहता था.

कुरसी पर बैठ उस की पुश्त से पीठ टिकाए आंखें बंद कीं तो अतीत की कुछ धुंधली तसवीर दिखाई पड़ने लगी.

उस शाम थेम्स नदी के किनारे मैं अकेला टहल रहा था. अचानक एक अंगरेज नवयुवक दौड़ता हुआ आया और मुझ से टकरा गया. इस से पहले कि मैं कुछ कह पाता उस ने अत्यंत शालीनता से मुझ से माफी मांगी और आगे बढ़ गया. अचानक मेरी छठी इंद्री जाग उठी. मैं ने अपनी जेब पर हाथ मारा तो मेरा पर्स गायब था.

‘पकड़ोपकड़ो, वह बदमाश मेरा पर्स लिए जा रहा है,’ चिल्लाते हुए मैं उस के पीछे दौड़ा.

मेरी आवाज सुन उस ने अपनी गति कुछ और तेज कर दी. तभी सामने से आ रही एक लड़की ने अपना पैर उस के पैरों में फंसा दिया. वह अंगरेज मुंह के बल गिर पड़ा. मेरे लिए इतना काफी था. पलक झपकते ही मैं ने उसे दबोच कर अपना पर्स छीन लिया. पर्स में 500 पाउंड के अलावा कुछ जरूरी कागजात भी थे. पर्स खोल कर मैं उन्हें देखने लगा. इस बीच मौका पा कर वह बदमाश भाग लिया. मैं उसे पकड़ने के लिए दोबारा उस के पीछे दौड़ा.

‘छोड़ो, जाने दो उसे,’ उस लड़की ने लगभग चिल्लाते हुए कहा था.

उस की आवाज से मेरे कदम ठिठक कर रुक गए. उस बदमाश के लिए इतना मौका काफी था. मैं ने उस लड़की की ओर लौटते हुए तेज स्वर में पूछा, ‘आप ने उसे जाने क्यों दिया?’

‘लगता है तुम इंगलैंड में नए आए हो,’ वह लड़की कुछ मुसकरा कर बोली.

‘हां.’

‘ये अंगरेज आज भी अपनी सामंती विचारधारा से मुक्त नहीं हो पाए हैं. प्रतिभा की दौड़ में आज ये हम से पिछड़ने लगे हैं तो अराजकता पर उतर आए हैं. प्रवासी लोगों के इलाकों में दंगा करना और उन से लूटपाट करना अब यहां आम बात होती जा रही है. यहां की पुलिस पर सांप्रदायिकता का आरोप तो नहीं लगाया जा सकता, फिर भी उन की स्वाभाविक सहानुभूति अपने लोगों के साथ ही रहती है. सभी के दिमाग में यह सोच भर गई है कि बाहर से आ कर हम लोग इन की समृद्धि को लूट  रहे हैं.’

मैं ने उसे गौर से देखते हुए पूछा, ‘तुम भी इंडियन हो?’

‘पाकिस्तानी हूं,’ लड़की ने छोटा सा उत्तर दिया, ‘शाहीन नाम है मेरा. कैंब्रिज विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन कर रही हूं.’

‘मैं दीपक कुमार सिंह. 2 दिन पहले मैं ने भी वहीं पर एम.बी.ए. में प्रवेश लिया है,’ अपना संक्षिप्त परिचय देते हुए मैं ने अपना हाथ आगे बढ़ाया तो यह कहते हुए शाहीन ने मेरा हाथ गर्मजोशी से पकड़ लिया कि फिर तो हमारी खूब निभेगी.

उस अनजान देश में शाहीन जैसा दोस्त पा कर मैं बहुत खुश था. उस के पापा का पाकिस्तान में इंपोर्टएक्सपोर्ट का व्यवसाय था. मां नहीं थीं. पापा अपने व्यापार में काफी व्यस्त रहते थे इसलिए वह यहां पर अपनी मौसी के पास रह कर पढ़ने आई थी.

शाहीन के मौसामौसी से मैं जल्दी ही घुलमिल गया और अकसर सप्ताहांत उन के साथ ही बिताने लगा. शाहीन की तरह वे लोग भी काफी खुले विचारों वाले थे और मुझे काफी पसंद करते थे. सब से अच्छी बात तो यह थी कि यहां पर ज्यादातर हिंदुस्तानी व पाकिस्तानी आपस में बैरभाव भुला कर मिलजुल कर रहते थे. ईद हो या होलीदीवाली, सारे त्योहार साथसाथ मनाए जाते थे.

शाहीन बहुत अच्छी लड़की थी. मेरी और उस की दोस्ती जल्दी ही प्यार में बदल गई. साल बीततेबीतते हम ने शादी करने का फैसला कर लिया. हमें विश्वास था कि शाहीन के मौसीमौसा इस रिश्ते से बहुत खुश होंगे और वे शाहीन के पापा को इस शादी के लिए मना लेंगे, किंतु यह हमारा भ्रम निकला.

‘तुम्हारी यह सोचने की हिम्मत कैसे हुई कि कोई गैरतमंद पाकिस्तानी तुम हिंदुस्तानी काफिरों से अपनी रिश्तेदारी जोड़ सकता है,’ शाहीन के मौसा मेरे शादी के प्रस्ताव को सुन कर भड़क उठे थे.

‘अंकल, यह आप कैसी बातें कर रहे हैं. इंगलैंड में तो सारे हिंदुस्तानी और पाकिस्तानी आपस का बैर भूल कर साथसाथ रहते हैं,’ मैं आश्चर्य से भर उठा.

‘अगर साथसाथ नहीं रहेंगे तो मारे जाएंगे इसलिए हिंदुस्तानी काफिरों की मजबूरी है,’ मौसाजी ने कटु सत्य पर से परदा उठाया.

शाहीन ने जब अपने मौसामौसी को समझाने की कोशिश की तो उन्होंने यह कह कर उसे चुप करा दिया कि अभी अच्छाबुरा समझने की तुम्हारी उम्र नहीं है.

उस दिन के बाद से मेरे और शाहीन के मिलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया.

मुझे विश्वास था कि मेरे घर वाले मेरा साथ जरूर देंगे किंतु मैं यहां भी गलत था.

डैडी ने फोन पर साफ कह दिया, ‘हम फौजी हैं. हम लोग जातिपांति में विश्वास नहीं रखते. हमारा धर्म, हमारा मजहब सबकुछ हमारा देश है इसलिए अपने जीतेजी मैं दुश्मन की बेटी को अपने घर में घुसने की इजाजत नहीं दे सकता.’

चुपचाप अदालत में जा कर शादी करने के अलावा हमारे पास अब दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा था और हम ने वही किया. शाहीन के मौसामौसी को जब पता चला तो उन्होंने बहुत हंगामा किया किंतु कुछ कर न सके. हम दोनों बालिग थे और अपनी मरजी की शादी करने के लिए आजाद थे.

अपनी दुनिया में हम दोनों बहुत खुश थे. शाहीन ने तय किया था कि छुट्टियों में पाकिस्तान चल कर हम लोग उस के पापा को मना लेंगे. मैं ने पासपोर्ट के लिए आवेदनपत्र भर कर भेज दिया था.

एक दिन शाहीन ने बताया कि वह मां बनने वाली है तो मैं खुशी से झूम उठा. मेरे चौड़े सीने पर सिर रखते हुए उस ने कहा, ‘दीपक, जानते हो अगर मेरा बेटा हुआ तो मैं उस का नाम शाहदीप रखूंगी.’

‘ऐसा नाम तो किसी का नहीं होता,’ मैं ने टोका.

‘लेकिन मेरे बेटे का होगा. शाहीन और दीपक का सम्मिलित रूप शाहदीप. इस नाम का दुनिया में केवल हमारा ही बेटा होगा. जो भी यह नाम सुनेगा जान जाएगा कि वह हमारा बेटा है,’ शाहीन मुसकराई.

कितनी निश्छल मुसकराहट थी शाहीन की लेकिन वह ज्यादा दिनों तक मेरे साथ नहीं रह पाई. एक बार मैं 2 दिन के लिए बाहर गया हुआ था. मेरी गैरमौजूदगी में उस के पापा आए और जबरदस्ती उसे पाकिस्तान ले गए. वह मेरे लिए एक छोटा सा पत्र छोड़ गई थी जिस में लिखा था, ‘हमारी शादी की खबर सुन कर पापा को हार्टअटैक हो गया था. वह बहुत कमजोर हो गए हैं. उन्होंने धमकी दी है कि अगर मैं तुम्हारे साथ रही तो वह जहर खा लेंगे. मैं जानती हूं वह बहुत जिद्दी हैं. मैं उन की मौत की गुनहगार बन कर अपनी दुनिया नहीं बसाना चाहती इसलिए उन के साथ जा रही हूं. लेकिन मैं तुम्हारी हूं और सदा तुम्हारी ही रहूंगी. अगर हो सके तो मुझे माफ कर देना.’

इस घटना ने मेरे वजूद को हिला कर रख दिया था. मैं पागलों की तरह पाकिस्तान का वीजा पाने के लिए दौड़ लगाने लगा किंतु यह इतना आसान न था. बंटवारे ने दोनों देशों के बीच इतनी ऊंची दीवार खड़ी कर दी थी जिसे लांघ पाने में मुझे कई महीने लग गए. लाहौर पहुंचने पर पता चला कि शाहीन के पापा अपनी सारी जायदाद बेच कर कहीं दूसरी जगह चले गए हैं. मैं ने काफी कोशिश की लेकिन शाहीन का पता नहीं लगा पाया.

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मेरा मन उचट गया था. अत: इंगलैंड न जा कर भारत लौट आया. एम.बी.ए. तो मैं केवल डैडी का मन रखने के लिए कर रहा था वरना बचपन से मेरा सपना भी अपने पूर्वजों की तरह फौज में भरती होने का था. मैं ने वही किया. धीरेधीरे 25 वर्ष बीत गए.

अपने अतीत में खोया मुझे समय का एहसास ही न रहा. ठंड लगी तो घड़ी पर नजर पड़ी. देखा रात के 2 बज गए थे. चारों ओर खामोशी छाई हुई थी. पूरी दुनिया शांति से सो रही थी किंतु मेरे अंदर हाहाकार मचा हुआ था. मेरा बेटा मेरी ही कैद में था और मैं अभी तक उस की कोई मदद नहीं कर पाया था.

बेचैनी जब हद से ज्यादा बढ़ने लगी तो मैं बाहर निकल आया. अनायास ही मेरे कदम बैरक नंबर 4 की ओर बढ़ गए. मन का एक कोना वहां जाने से रोक रहा था किंतु दूसरा कोना उधर खींचे लिए जा रहा था. मुझे इस बात का एहसास भी न था कि इतनी रात में मुझे अकेला एक पाकिस्तानी की बैरक की ओर जाते देख कोई क्या सोचेगा. इस समय अपने ऊपर मेरा कोई नियंत्रण नहीं बचा था. मैं खुद नहीं जानता था कि मैं क्या करने जा रहा हूं.

शाहदीप की बैरक के बाहर बैठा पहरेदार आराम से सो रहा था. मैं दबे पांव उस के करीब पहुंचा तो देखा वह बेहोश पड़ा था. बैरक के भीतर झांका, शाहदीप वहां नहीं था.

‘‘कैदी भाग गया, कैदी भाग गया,’’ मैं पूरी शक्ति से चिल्लाया. रात के सन्नाटे में मेरी आवाज दूर तक गूंज गई.

मैं ने पहरेदार की जेब से चाबी निकाल कर फुरती से बैरक का दरवाजा खोला. भीतर घुसते ही मैं चौंक पड़ा. बैरक के रोशनदान की सलाखें कटी थीं और शाहदीप उस से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था किंतु रोशनदान छोटा होने के कारण उसे परेशानी हो रही थी.

‘‘शाहदीप, रुक जाओ,’’ मैं पूरी ताकत से चीख पड़ा और अपना रिवाल्वर उस पर तान कर सर्द स्वर में बोला, ‘‘शाहदीप, अगर तुम नहीं रुके तो मैं गोली मार दूंगा.’’

मेरे स्वर की सख्ती को शायद शाहदीप ने भांप लिया था. अपने धड़ को पीछे खिसका सिर निकाल कर उस ने कहर भरी दृष्टि से मेरी ओर देखा. अगले ही पल उस का दायां हाथ सामने आया. उस में छोटा सा रिवाल्वर दबा हुआ था. उसे मेरी ओर तानते हुए वह गुर्राया, ‘‘ब्रिगेडियर दीपक कुमार सिंह, वापस लौट जाइए वरना मैं अपने रास्ते में आने वाली हर दीवार को गिरा दूंगा, चाहे वह कितनी ही मजबूत क्यों न हो.’’

इस बीच कैप्टन बोस और कई सैनिक दौड़ कर वहां आ गए थे. इस से पहले कि वे बैरक के भीतर घुस पाते शाहदीप दहाड़ उठा, ‘‘तुम्हारा ब्रिगेडियर मेरे निशाने पर है. अगर किसी ने भी भीतर घुसने की कोशिश की तो मैं इसे गोली मार दूंगा.’’

आगे बढ़ते कदम जहां थे वहीं रुक गए. बड़ी विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गई थी. हम दोनों एकदूसरे पर निशाना साधे हुए थे.

‘‘लेफ्टिनेंट शाहदीप, तुम यहां से भाग नहीं सकते,’’ मैं गुर्राया.

‘‘और तुम मुझे पकड़ नहीं सकते, ब्रिगेडियर,’’ शाहदीप ने अपना रिवाल्वर मेरी ओर लहराया, ‘‘मैं आखिरी बार कह रहा हूं कि वापस लौट जाओ वरना मैं गोली मार दूंगा.’’

मेरे वापस लौटने का तो प्रश्न ही नहीं उठता था. शाहदीप जिस स्थिति में लटका हुआ था उस में ज्यादा देर नहीं रहा जा सकता था. जाने क्या सोच कर उस ने एक बार फिर अपने शरीर को रोशनदान की तरफ बढ़ाने की कोशिश की.

‘‘धांय…धांय…’’ मेरे रिवाल्वर से 2 गोलियां निकलीं. शाहदीप की पीठ इस समय मेरी ओर थी. दोनों ही गोलियां उस की पीठ में समा गईं. वह किसी चिडि़या की तरह नीचे गिर पड़ा और तड़पने लगा.

मुझे और बरदाश्त नहीं हुआ. अपना रिवाल्वर फेंक मैं उस की ओर दौड़ पड़ा और उस का सिर अपने हाथों में ले बुरी तरह फफक पड़ा, ‘‘शाहदीप, मेरे बेटे, मुझे माफ कर दो.’’

कैप्टन बोस दूसरे सैनिकों के साथ इस बीच भीतर आ गए थे. मुझे इस तरह रोता देख वे चौंक पड़े, ‘‘सर, यह आप क्या कह रहे हैं.’’

‘‘कैप्टन, तुम तो जानते ही हो कि मेरी शादी एक पाकिस्तानी लड़की से हुई थी. यह मेरा बेटा है. मैं इस के निशाने पर था अगर चाहता तो यह पहले गोली चला सकता था लेकिन इस ने ऐसा नहीं किया,’’ इतना कह कर मैं ने शाहदीप के सिर को झिंझोड़ते हुए पूछा, ‘‘बता, तू ने मुझे गोली क्यों नहीं मारी? बता, तू ने ऐसा क्यों किया?’’

शाहदीप ने कांपते स्वर में कहा, ‘‘डैडी, जन्मदाता के लिए त्याग करने का अधिकार सिर्फ हिंदुस्तान के लोगों का ही नहीं हम पाकिस्तानियों का भी इस पर बराबर का हक है.’’

शाहदीप ने एक बार फिर मुझे बहुत छोटा साबित कर दिया था. मैं उसे अपने सीने से लगा कर बुरी तरह रो पड़ा.

‘‘डैडी, जीतेजी तो मैं आप की गोद में न खेल सका किंतु अंतिम समय मेरी यह इच्छा पूरी हो गई. अब मुझे जिंदगी से कोई शिकायत नहीं है.’’

इसी के साथ शाहदीप ने एक जोर की हिचकी ली और उस की गरदन एक ओर ढुलक गई. मेरे हाथ में थमा उस का हाथ फिसल गया और इसी के साथ उस की उंगली में दबी अंगूठी मेरे हाथों में आ गई. उस अंगूठी पर दृष्टि पड़ते ही मैं एक बार फिर चौंक पड़ा. उस में भी एक नन्हा सा कैमरा फिट था. इस का मतलब उस ने एकसाथ 2 कैमरों से वीडियोग्राफी की थी. एक कैमरा हमें दे कर उस ने अपने एक फर्ज की पूर्ति की थी और अब दूसरा कैमरा ले कर अपने दूसरे फर्ज की पूर्ति करने जा रहा था.

शाहदीप के निर्जीव शरीर से लिपट कर मैं विलाप कर उठा. अपने आंसुओं से उसे भिगो कर मैं अपना प्रायश्चित करना चाहता था तभी कैप्टन बोस ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, ‘‘सर, आंसू बहा कर शहीद की आत्मा का अपमान मत कीजिए.’’

मैं ने आंसू भरी नजरों से कैप्टन बोस की ओर देखा फिर भर्राए स्वर में पूछा, ‘‘कैप्टन, क्या तुम मेरे बेटे को शहीद मानते हो?’’

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‘‘हां, सर, ऐसी शहादत न तो पहले कभी किसी ने दी थी और न ही आगे कोई देगा. एक वीर के बेटे ने अपने बाप से भी बढ़ कर वीरता दिखाई है. इस का जितना भी सम्मान किया जाए कम है,’’ इतना कह कर कैप्टन बोस ने शाहदीप के पार्थिव शरीर को सैल्यूट मारा फिर पीछे मुड़ कर अपने सैनिकों को इशारा किया.

सब एक कतार में खड़े हो कर आसमान में गोली बरसाने लगे. पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट को 101 गोलियों की सलामी देने के बाद ही हिंदुस्तानी रायफलें शांत हुईं. दुनिया में आज तक किसी भी शहीद को इतना बड़ा सम्मान प्राप्त नहीं हुआ होगा.

मेरे कांपते हाथ खुद ही ऊपर उठे और उस वीर को सलामी देने लगे.  द्य

सहारा

लेखक- रमणी मोटाना

‘‘अर्चना,’’ उस ने पीछे से पुकारा.

‘‘अरे, रजनीश…तुम?’’ उस ने मुड़ कर देखा और मुसकरा कर बोली.

‘‘हां, मैं ही हूं, कैसा अजब इत्तिफाक है कि तुम दिल्ली की और मैं मुंबई का रहने वाला और हम मिल रहे हैं बंगलौर की सड़क पर. वैसे, तुम यहां कैसे?’’

‘‘मैं आजकल यहीं रहती हूं. यहां घडि़यों की एक फैक्टरी में जनसंपर्क अधिकारी हूं. और तुम?’’

‘‘मैं यहां अपने व्यापार के सिलसिले में आया हुआ हूं. मेरी पत्नी भी साथ है. हम पास ही एक होटल में ठहरे हैं.’’

2-4 बातें कर के अर्चना बोली, ‘‘अच्छा…मैं चलती हूं.’’

‘‘अरे रुको,’’ वह हड़बड़ाया, ‘‘इतने  सालों बाद हम मिले हैं, मुझे तुम से ढेरों बातें करनी हैं. क्या हम दोबारा नहीं मिल सकते?’’

‘‘हांहां, क्यों नहीं,’’ कहते हुए अर्चना ने विजिटिंग कार्ड पर्स में से निकाला और उसे देती हुई बोली, ‘‘यह रहा मेरा पता व फोन नंबर. हो सके तो कल शाम की चाय मेरे साथ पीना और अपनी पत्नी को भी लाना.’’

अर्चना एक आटो-रिकशा में बैठ कर चली गई. रजनीश एक दुकान में घुसा जहां उस की पत्नी मोहिनी शापिंग कर तैयार बैठी थी.

‘‘मेरीखरीदारी हो गई. जरा देखो तो ये साडि़यां ज्यादा चटकीली तो नहीं हैं. पता नहीं ये रंग

मुझ पर खिलेंगे

या नहीं,’’ मोहिनी बोली.

रजनीश ने एक उचटती नजर मोहिनी पर डाली. उस का मन हुआ कि कह दे, अब उस के थुलथुल शरीर पर कोई कपड़ा फबने वाला नहीं है, पर वह चुप रह गया.

मोहिनी की जान गहने व कपड़ों में बसती है. वह सैकड़ों रुपए सौंदर्य प्रसाधनों पर खर्चती है. घंटों बनती-संवरती है. केश काले करती है, मसाज कराती है. नाना तरह के उपायों व साधनों से समय को बांधे रखना चाहती है. इस के विपरीत रजनीश आगे बढ़ कर बुढ़ापे को गले लगाना चाहता है. बाल खिचड़ी, तोंद बढ़ी हुई, एक बेहद नीरस, उबाऊ जिंदगी जी रहा है वह. मन में कोई उत्साह नहीं. किसी चीज की चाह नहीं. बस, अनवरत पैसा कमाने में लगा रहता है.

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कभीकभी वह सोचता है कि वह क्यों इतनी जीतोड़ मेहनत करता है. उस के बाद उस के ऐश्वर्य को भोगने वाला कौन है. न कोई आसऔलाद न कोई नामलेवा… और तो और इसी गम में घुलघुल कर उस की मां चल बसीं.

संतान की बेहद इच्छा ने उसे अर्चना को तलाक दे कर मोहिनी से ब्याह करने को प्रेरित किया था. पर उस की इच्छा कहां पूरी हो पाई थी.

होटल पहुंच कर रजनीश बालकनी में जा बैठा. सामने मेज पर डिं्रक का सामान सजा हुआ था. रजनीश ने एक पैग बनाया और घूंटघूंट कर के पीने लगा.

उस का मन बरबस अतीत में जा पहुंचा.

कालिज की पढ़ाई, मस्तमौला जीवन. अर्चना से एक दिन भेंट हुई. पहले हलकी नोकझोंक से शुरुआत हुई, फिर छेड़छाड़, दोस्ती और धीरेधीरे वे प्रेम की डोर में बंध गए थे.

एक रोज अर्चना उस के पास घबराई हुई आई और बोली, ‘रजनीश, ऐसे कब तक चलेगा?’

‘क्या मतलब?’

‘हम यों चोरी- छिपे कब तक मिलते रहेंगे?’

‘क्यों भई, इस में क्या अड़चन है? तुम लड़कियों के होस्टल में रहती हो, मैं अपने परिवार के साथ. हमें कोई बंदिश नहीं है.’

‘ओहो…तुम समझते नहीं, हम शादी कब कर रहे हैं?’

‘अभी से शादी की क्या जल्दी पड़ी है, पहले हमारी पढ़ाई तो पूरी हो जाए…उस के बाद मैं अपने पिता के व्यापार में हाथ बंटाऊंगा फिर जा कर शादी…’

‘इस में तो सालों लग जाएंगे,’ अर्चना बीच में ही बोल पड़ी.

‘तो लगने दो न…हम कौन से बूढ़े हुए जा रहे हैं.’

‘हमारे प्यार को शादी की मुहर लगनी जरूरी है.’

‘बोर मत करो यार,’ रजनीश ने उसे बांहों में समेटते हुए कहा, ‘तनमनधन से तो तुम्हारा हो ही चुका हूं, अब अग्नि के सामने सिर्फ चंद फेरे लेने में ही क्या रखा है.’

‘रजनीश,’ अर्चना उस की गिरफ्त से छूट कर घुटे हुए स्वर में बोली, ‘मैं…मैं प्रेग्नैंट हूं.’

‘क्या…’ रजनीश चौंका, ‘मगर हम ने तो पूरी सावधानी बरती थी…खैर, कोई बात नहीं. इस का इलाज है मेरे पास, अबार्शन.’

‘अबार्शन…’ अर्चना चौंक कर बोली, ‘नहीं, रजनीश, मुझे अबार्शन से बहुत डर लगता है.’

‘पागल न बनो. इस में डरने की क्या बात है? मेरा एक दोस्त मेडिकल कालिज में पढ़ता है. वह आएदिन ऐसे केस करता रहता है. कल उस के पास चले चलेंगे, शाम तक मामला निबट जाएगा. किसी को कानोंकान खबर भी न होगी.’

‘लेकिन जब हमें शादी करनी ही है तो यह सब करने की जरूरत?’

‘शादी करनी है सो तो ठीक है, लेकिन अभी से शादी के बंधन में बंधना सरासर बेवकूफी होगी. और जरा सोचो, अभी तक मेरे मांबाप को हमारे संबंधों के बारे में कुछ भी नहीं मालूम. अचानक उन के सामने फूला पेट ले कर जाओगी तो उन्हें बुरी तरह सदमा पहुंचेगा.

‘नहीं, अर्चना, मुझे उन्हें धीरेधीरे पटाना होगा. उन्हें राजी करना होगा. आखिर मैं उन की इकलौती संतान हूं. मैं उन की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहता.’

‘प्यार का खेल खेलने से पहले ही यह सब सोचना था न?’ अर्चना कुढ़ कर बोली.

‘डार्ल्ंिग, नाराज न हो, मैं वादा करता हूं कि पढ़़ाई पूरी होते ही मैं धूमधड़ाके से तुम्हारे द्वार पर बरात ले कर आऊंगा और फिर अपने यहां बच्चों की लाइन लगा दूंगा…’

लेकिन शादी के 10-12 साल बाद भी बच्चे न हुए तो रजनीश व अर्चना ने डाक्टरों का दरवाजा खटखटाया था और हरेक डाक्टर का एक ही निदान था कि अर्चना के अबार्शन के समय नौसिखिए डाक्टर की असावधानी से उस के गर्भ में ऐसी खराबी हो गई है जिस से वह भविष्य में गर्भ धारण करने में असमर्थ है.

यह सुन कर अर्चना बहुत दुखी हुई थी. कई दिन रोतेकलपते बीते. जब जरा सामान्य हुई तो उस ने रजनीश को एक बच्चा गोद लेने को मना लिया.

अनाथाश्रम में नन्हे दीपू को देखते ही वह मुग्ध हो गई थी, ‘देखो तो रजनीश, कितना प्यारा बच्चा है. कैसा टुकुरटुकुर हमें ताक रहा है. मुझे लगता है यह हमारे लिए ही जन्मा है. बस, मैं ने तो तय कर लिया, मुझे यही बच्चा चाहिए.’

‘जरा धीरज धरो, अर्चना. इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं. एक बार अम्मां व पिताजी से भी पूछ लेना ठीक रहेगा.’

‘क्योें? उन से क्यों पूछें? यह हमारा व्यक्तिगत मामला है, इस बच्चे को हम ही तो पालेंगेपोसेंगे.’

‘फिर भी, यह बच्चा उन के ही परिवार का अंग होगा न, उन्हीं का वंशज कहलाएगा न?’

यह सुन कर अर्चना बुरा सा मुंह बना कर बोली, ‘वह सब मैं नहीं जानती. तुम्हारे मातापिता से तुम्हीं निबटो. यह अच्छी रही, हर बात में अपने मांबाप की आड़ लेते हो. क्या तुम अपनी मरजी से एक भी कदम उठा नहीं सकते?’

रजनीश के मांबाप ने अनाथाश्रम से बच्चा गोद लेने के प्रस्ताव का जम कर विरोध किया इधर अर्चना भी अड़

गई कि वह दीपू को गोद ले कर ही रहेगी.

‘‘रजनीश…’’ मोहिनी ने आवाज दी, ‘‘खाना खाने नीचे, डाइनिंग रूम में चलोगे या यहीं पर कुछ मंगवा लें?’’

यह सुन कर रजनीश की तंद्रा टूटी. एक ही झटके में वह वर्तमान में लौट आया. बोला, ‘‘यहीं पर मंगवा लो.’’

खाना खाते वक्त रजनीश ने पूछा, ‘‘कल शाम को तुम्हारा क्या प्रोग्राम है?’’

‘‘सोच रही थी यहां की जौहरी की दुकानें देखूं. मेरी एक सहेली मुझे ले जाने वाली है.’’

‘‘ठीक है, मैं भी शायद व्यस्त रहूंगा.’’

रजनीश ने अर्चना को फोन किया, ‘‘अर्चना, हमारा कल का प्रोग्राम तय है न?’’

‘‘हां, अवश्य.’’

फोन का चोंगा रख कर अर्चना उत्तेजित सी टहलने लगी कि रजनीश अब क्यों उस से मिलने आ रहा है. उसे अब मुझ से क्या लेनादेना है?

तलाकनामे पर हुए हस्ताक्षर ने उन के बीच कड़ी को तोड़ दिया था. अब वे एकदूसरे के लिए अजनबी थे.

‘अर्चना, तू किसे छल रही है?’ उस के मन ने सवाल किया.

रजनीश से तलाक ले कर वह एक पल भी चैन से न रह पाई. पुरानी यादें मन को झकझोर देतीं. भूलेबिसरे दृश्य मन को टीस पहुंचाते. बहुत ही कठिनाई से उस ने अपनी बिखरी जिंदगी को समेटा था, अपने मन की किरिचों को सहेजा था.

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उस का मन अनायास ही अतीत की गलियों में विचरने लगा.

उसे वह दिन याद आया जब नन्हे दीपू को ले कर घर में घमासान शुरू हो गया था.

उस ने रजनीश से कहा था कि वह दफ्तर से जरा जल्दी आ जाए ताकि वे दोनों अनाथाश्रम जा कर बच्चों में मिठाई बांट सकें. आश्रम वालों ने बताया है कि आज दीपू का जन्मदिन है.

यह सुन कर रजनीश के माथे पर बल पड़ गए थे. वह बोला, ‘यह सब न ही करो तो अच्छा है. पराए बालक से हमें क्या लेना.’

‘अरे वाह…पराया क्यों? हम जल्दी ही दीपू को गोद लेने वाले जो हैं न?’

‘इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं.’

‘तुम जल्दीबाजी की कहते हो, मेरा वश चले तो उसे आज ही घर ले आऊं. पता नहीं इस बच्चे से मुझे इतना मोह क्यों हो गया है. जरूर हमारा पिछले जन्म का रिश्ता रहा होगा,’ कहती हुई अर्चना की आंखें भर आई थीं.

यह देख कर रजनीश द्रवित हो कर बोला था, ‘ठीक है, मैं शाम को जरा जल्दी लौटूंगा. फिर चले चलेंगे.’

रजनीश को दरवाजे तक विदा कर के अर्चना अंदर आई तो सास ने पूछा, ‘कहां जाने की बात हो रही थी, बहू?’

‘अनाथाश्रम.’

यह सुन कर तो सास की भृकुटियां तन गईं. वह बोली, ‘तुम्हें भी बैठेबैठे पता नहीं क्या खुराफात सूझती रहती है. कितनी बार समझाया कि पराई ज्योति से घर में उजाला नहीं होता, पर तुम हो कि मानती ही नहीं. अरे, गोद लिए बच्चे भी कभी अपने हुए हैं, खून के रिश्ते की बात ही और होती है,’ फिर वह भुनभुनाती हुई पति के पास जा कर बोली, ‘अजी सुनते हो?’

‘क्या है?’

‘आज बहूबेटा अनाथाश्रम जा रहे हैं.’

‘सो क्यों?’

‘अरे, उसी मुए बच्चे को गोद लेने की जुगत कर रहे हैं और क्या. मियांबीवी की मिलीभगत है. वैद्य, डाक्टरों को पैसा फूंक चुके, पीरफकीरों को माथा टेक चुके, जगहजगह मन्नत मान चुके, अब चले हैं अनाथाश्रम की खाक छानने.

‘न जाने किस की नाजायज संतान, जिस के कुलगोत्र का ठिकाना नहीं, जातिपांति का पता नहीं, ला कर हमारे सिर मढ़ने वाले हैं. मैं कहती हूं, यदि गोद लेना ही पड़ रहा है तो हमारे परिवार में बच्चों की कमी है क्या? हम से तो भई जानबूझ कर मक्खी निगली नहीं जाती. तुम जरा रजनीश से बात क्यों नहीं करते.’

‘ठीक है, मैं रजनीश से बात करूंगा.’

‘पता नहीं कब बात करोगे, जब पानी सिर से ऊपर हो जाएगा तब? जाने यह निगोड़ी बहू हम से किस जन्म का बदला ले रही है. पहले मेरे भोलेभाले बेटे पर डोरे डाले, अब बच्चा गोद लेने का तिकड़म कर रही है.’

रजनीश अपने कमरे में आ कर बिस्तर पर निढाल पड़ गया. अर्चना उस के पास खिसक आई और उस के बालों में उंगलियां चलाती हुई बोली, ‘क्या बात है, बहुत थकेथके लग रहे हो.’

‘आज अम्मां व पिताजी के साथ जम कर बहस हुई. वे दीपू को गोद लेने के कतई पक्ष में नहीं हैं.’

‘तो फिर?’

‘तुम्हीं बताओ.’

‘मैं क्या बताऊं, एक जरा सी बात को इतना तूल दिया जा रहा है. क्या और निसंतान दंपती बच्चा गोद नहीं लेते? हम कौन सी अनहोनी बात करने जा रहे हैं.’

‘मैं उन से कह कर हार गया. वे टस से मस नहीं हुए. मैं तो चक्की के दो पाटों के बीच पिस रहा हूं. इधर तुम्हारी जिद उधर उन की…’

‘तो अब?’

‘उन्होंने एक और प्रस्ताव रखा है…’

‘वह क्या?’ अर्चना बीच में ही बोल पड़ी.

‘वे कहते हैं कि चूंकि तुम मां नहीं बन सकती हो. मैं तुम्हें तलाक दे कर दूसरी शादी कर लूं.’

‘क्या…’ अर्चना बुरी तरह चौंकी, ‘तुम मेरा त्याग करोगे?’

‘ओहो, पूरी बात तो सुन लो. दूसरी शादी महज एक बच्चे की खातिर की जाएगी. जैसे ही बच्चा हुआ, उसे तलाक दे कर मैं दोबारा तुम से ब्याह कर लूंगा.’

‘वाह…वाह,’ अर्चना ने तल्खी से कहा, ‘क्या कहने हैं तुम लोगों की सूझबूझ के. मेरे साथ तो नाइंसाफी कर ही रहे हो, उस दूसरी, निरपराध स्त्री को भी छलोगे. बिना प्यार के उस से शारीरिक संबंध स्थापित करोगे और अपना मतलब साध कर उसे चलता करोगे?’

‘और कोई चारा भी तो नहीं है.’

‘है क्यों नहीं. कह दो अपने मातापिता से कि यह सब संभव नहीं. तुम पुरुष हम स्त्रियों को अपने हाथ की कठपुतली नहीं बना सकते. क्या तुम से यह कहते नहीं बना कि मैं ने शादी से पहले गर्भ धारण किया था? यदि तुम ने अबार्शन न करा दिया होता तो…’ कहतेकहते अर्चना का गला भर आया था.

‘अर्चना डियर, तुम बेकार में भावुक हो रही हो. बीती बातों पर खाक डालो. मुझे तुम्हारी पीड़ा का एहसास है. दूसरी तरफ मेरे बूढ़े मांबाप के प्रति भी मेरा कुछ कर्तव्य है. वे मुझ से एक ही चीज मांग रहे थे, इस घर को एक वारिस, इस वंश को एक कुलदीपक.’

‘तो कर लो दूसरी शादी, ले आओ दूसरी पत्नी, पर इतना बताए देती हूं कि मैं इस घर में एक भी पल नहीं रुकूंगी,’ अर्चना भभक कर बोली.

‘अर्चना…’

‘मैं इतनी महान नहीं हूं कि तुम्हारी बांहों में दूसरी स्त्री को देख कर चुप रह जाऊं. मैं सौतिया डाह से जल मरूंगी. नहीं रजनीश, मैं तुम्हें किसी के साथ बांटने के लिए हरगिज तैयार नहीं.’

‘अर्चना, इतना तैश में न आओ. जरा ठंडे दिमाग से सोचो. यह दूसरा ब्याह महज एक समझौता होगा. यह सब बिना विवाह किए भी हो सकता है पर…’

‘नहीं, मैं तुम्हारी एक नहीं सुनूंगी. हर बात में तुम्हारी नहीं चलेगी. आज तक मैं तुम्हारे इशारों पर नाचती रही. तुम ने अबार्शन को कहा, सो मैं ने करा दिया. तुम ने यह बात अपने मातापिता से गुप्त रखी, मैं राजी हुई. तुम क्या जानो कि तुम्हारी वजह से मुझे कितने ताने सहने पड़ रहे हैं. बांझ…आदि विशेषणों से मुझे नवाजा जाता है. तुम्हारी मां ने तो एक दिन यह भी कह दिया कि सवेरेसवेरे बांझ का मुंह देखो तो पूरा दिन बुरा गुजरता है. नहीं रजनीश, मैं ने बहुत सहा, अब नहीं सहूंगी.’

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‘अर्चना, मुझे समझने की कोशिश करो.’

‘समझ लिया, जितना समझना था. तुम लोगों की कूटनीति में मुझे बलि का बकरा बनाया जा रहा है. जैसे गायगोरू के सूखने पर उस की उपयोगिता नहीं रहती उसी तरह मुझे बांझ करार दे कर दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल फेंका जा रहा है. लेकिन मुझे भी तुम से एक सवाल करना है…’

‘क्या?’ रजनीश बीच में ही बोल पड़ा.

‘समझ लो तुम मेें कोई कमी होती और मैं भी यही कदम उठाती तो?’

‘अर्चना, यह कैसा बेहूदा सवाल है?’

‘देखा…कैसे तिलमिला गए. मेरी बात कैसी कड़वी लगी.’

रजनीश मुंह फेर कर सोने का उपक्रम करने लगा. उस रात दोनों के दिल में जो दरार पड़ी वह दिनोंदिन चौड़ी होती गई.

रजनीश ने दरवाजे की घंटी बजाई तो एक सजीले युवक ने द्वार खोला.

‘‘अर्चनाजी हैं?’’ रजनीश ने पूछा.

‘‘जी हां, हैं, आप…आइए, बैठिए, मैं उन्हें बुलाता हूं.’’

अर्चना ने कमरे में प्रवेश किया. उस के हाथ में ट्रे थी.

‘‘आओ रजनीश. मैं तुम्हारे लिए काफी बना रही थी. तुम्हें काफी बहुत प्रिय है न,’’ कह कर वह उसे प्याला थमा कर बोली, ‘‘और सुनाओ, क्या हाल हैं तुम्हारे? अम्मां व पिताजी कैसे हैं?’’

‘‘उन्हें गुजरे तो एक अरसा हो गया.’’

‘‘अरे,’’ अर्चना ने खेदपूर्वक कहा, ‘‘मुझे पता ही न चला.’’

‘‘हां, तलाक के बाद तुम ने बिलकुल नाता तोड़ लिया. खैर, तुम तो जानती ही हो कि मैं ने मोहिनी से शादी कर ली. और यह नियति की विडंबना देखो, हम आज भी निसंतान हैं.’’

‘‘ओह,’’ अर्चना के मुंह से निकला.

‘‘हां, अम्मां को तो इस बात से इतना सदमा पहुंचा कि उन्होंने खाट पकड़ ली. उन के निधन के बाद पिताजी भी चल बसे. लगता है हमें तुम्हारी हाय लग गई.’’

‘‘छि:, ऐसा न कहो रजनीश, जो होना होता है वह हो कर ही रहता है. और शादी आजकल जन्म भर का बंधन कहां होती है? जब तक निभती है निभाते हैं, बाद में अलग हो जाते हैं.’’

‘‘लेकिन हम दोनों एकदूसरे के कितने करीब थे. एक मन दो प्राण थे. कितना साहचर्य, सामंजस्य था हम में. कभी सपने में भी न सोचा था कि हम एकदूसरे के लिए अजनबी हो जाएंगे. और आज मैं मोहिनी से बंध कर एक नीरस, बेमानी ज्ंिदगी बिता रहा हूं. हम दोनों में कोई तालमेल नहीं. अगर जीवनसाथी मनमुताबिक न हो तो जिंदगी जहर हो जाती है.

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‘‘खैर छोड़ो, मैं भी कहां का रोना ले बैठा. तुम अपनी सुनाओ. यह बताओ, वह युवक कौन था जिस ने दरवाजा खोला?’’

यह सुन कर अर्चना मुसकरा कर बोली, ‘‘वह मेरा बेटा है.’’

‘‘ओह, तो तुम ने भी दूसरी शादी कर ली.’’

‘‘नहीं, मैं ने शादी नहीं की, मैं ने तो केवल उसे गोद लिया है.’’

‘‘क्या?’’

‘‘हां, रजनीश, यह वही बच्चा दीपू है, अनाथाश्रम वाला. तुम से तलाक ले कर मैं दिल्ली गई जहां मेरा परिवार रहता था. एक नौकरी कर ली ताकि उन पर बोझ न बनूं, पर तुम तो जानते हो कि एक अकेली औरत को यह समाज किस निगाह से देखता है.

‘‘पुरुषों की भूखी नजरें मुझ पर गड़ी रहतीं. स्त्रियों की शंकित नजरें मेरा पीछा करतीं. कई मर्दों ने करीब आने की कोशिश की. कई ने मुझे अपनी हवस का शिकार बनाना चाहा, पर मैं उन सब से बचती रही. 1-2 ने विवाह का प्रलोभन भी दिया, पर जहां मन न मिले वहां केवल सहारे की खातिर पुरुष की अंकशायिनी बनना मुझे मंजूर न था.

‘‘इस शहर में आ कर अपना अकेलापन मुझे सालने लगा. नियति की बात देखो, अनाथाश्रम में दीपू मानो मेरी ही प्रतीक्षा कर रहा था. इस ने मेरे हृदय के रिक्त स्थान को भर दिया. इस के लालनपालन में लग कर जीवन को एक गति मिली, एक ध्येय मिला. 15 साल हम ने एकदूसरे के सहारे काट दिए. इस आशा में हूं कि यह मेरे बुढ़ापे का सहारा बनेगा, यदि नहीं भी बना तो कोई गम नहीं, कोई गिला नहीं,’’ कहती हुई अर्चना हलके से मुसकरा दी.

ट्राय करें “कुंडली भाग्य” के “करण” के प्रिंटेड फैशन लुक्स

टीवी के सभी एक्टर रोजाना अपने शोज के चलते सभी घर पर पहुंचते है शायद यही कारण है की उनकी फैन फौलोविंग किसी भी बौलीवुड एक्टर से कम नहीं है. उनके फैंस ना सिर्फ उनको देखते है बल्कि उनको काफी पौलो भी करते हैं. ऐसे ही एक्टर है धीरज धूपर, जो अपनी एक्टिंग के लिए लोगों की पहली पसंद तो है, उनकी स्टाइल की भी फैंस काफी फौलो करते हैं. धीरज के स्माइल और उनकी फिजिक पर लाखों लड़कियां आपना दिल बैठी हैं. उनकी इसी फैन फौलोविंग को देखते हुए आज हम लेकर आए है धीरज के कुछ खास लुक्स जिसे  ट्राय कर आप भी बन सकते है लड़कियों के बीच पौपुलर…

चेक प्रिंट को करें फैशन में शामिल  

धीरज के इस टू पीस की बात करें तो ये काफी क्लासी है. चेक प्रिंट वाले इस लुक में धीरज का लुक काफी अच्छा लग रहा हैं. इस लुक को आप किसी भी पार्टी में ट्राय कर सकते हैं. इस पूरे लुक को चार चांद लगा रहा है उनके वाइट शूज और वाइट टी-शर्ट.

 

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SUNDAYing.. 😎

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प्रिंटेड का फैशन

इस समय शर्ट और पेंट दोनों में प्रिंटेड डिजाइन काफी ट्रेंड में है. इस लुक को आप केजुअली और किसी फंगक्शन पर भी ट्राय कर सकते हैं. किसी औपन पूल पार्टी के लिए भी ये लुक काफी अच्छा हैं.

 

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The Moonwalker..

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ब्लेक एंड वाइट प्रिंट जैकेट

पेंट और शार्ट के बाद अब जैकेट में भी प्रिंटेड डिजाइन काफी ट्रेंडिंग में है जो देखने और पहनने में काफी रिच लुक देता हैं.

 

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No one is you, that’s your power !

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तो ये थे धीरज के कुछ लुक जिसे ट्राय कर आप भी खुद को स्लाइलिश बना सकते है.

गहरी पैठ

उन की औरतों को नंगा किया जाता था, उन को देह व्यापार में धकेला जाता था, उन से गुलामों से बदतर काम कराया जाता था. मुसलमानों के साथ यह व्यवहार न मुसलमानों के राज में हो पाया था, न ब्रिटिश राज में. मुसलिम राजाओं के और ब्रिटिशों के जमाने में भी पिछड़े व दलित ही शिकार हो रहे थे.

1947 के बाद भक्तों की बन आई. शुरू में उन्होंने मंदिरों को बनवाया. हर छोटा मंदिर बड़ा बन गया है. दलितों और पिछड़ों को छोटे देवता, जो आमतौर पर बड़े देवताओं के दास, वाहक या किसी और तरह पैदा हुए बच्चे थे, पकड़ा दिए गए और उन से दुश्मनी कम हो गई. उन की जगह मुसलमानों में दुश्मन खोजा गया जो पाकिस्तान बनाने के लिए जिम्मेदार थे. भक्त यह भूल जाते हैं कि अगर भारत के टुकड़े नहीं हुए होते तो पूरे हिंदुस्तान की करीब 160-170 करोड़ जनता में 60 करोड़ मुसलमान होते. लेकिन भक्तों को सच की फिक्र कहां होती है. वे तो झूठों पर जिंदा रहते हैं.

बाबरी मसजिद की पूरी नौटंकी मुसलमानों को देश का दुश्मन बनाने के लिए रची गई और उस में दलितों और पिछड़ों ने भी आहुति दे डाली कि शायद इस से उन को ऊंचा स्थान मिल जाए. लेकिन न 1998 से 2004 तक और न 2014 से अब तक के भक्तों के राज में दलितों और पिछड़ों को राज में बराबर का हिस्सेदार बनाया जा रहा है. उन से दुश्मनी है पर उस पर परदा डाला हुआ है. छिपेतौर पर आरक्षण की जम कर खिंचाई होती है. दलितों को मारापीटा जाता है.

भक्तों को पुलवामा के बहाने कश्मीरी मुसलमानों से बदला लेने का मौका मिला क्योंकि उन्हें तो दुश्मन चाहिए. भक्ति का एक बड़ा सुबूत दुश्मनी ही है. राम हो, कृष्ण हो, शिव हो, इंद्र हो, विष्णु हो, दुर्गा हो, हमारे ज्यादातर भगवान दुश्मनों के सहारे बने हैं. दुश्मनी भक्ति की जड़ में है. भक्तों को कश्मीरी मुसलमानों से दुश्मनी दिखाने का मौका मिला और सारे देश से कश्मीरियों को चुनचुन कर भगाया गया. जब यह मामला ठंडा पड़ जाएगा तो कोई और दुश्मन ढूंढ़ना पड़ेगा. मैदानी इलाकों के मुसलमानों को आतंकवाद की वजह फिलहाल नहीं कहा जा सकता क्योंकि वे ऐसा कुछ नहीं कर रहे.

भक्तों को मीडिया में भी दुश्मन नजर आने लगे क्योंकि वह उन की भक्ति के अंधेपन की पोल खोल रहा था. भक्त दिमाग से इतने अंधे हैं कि उन्हें यह भी समझ नहीं आता कि मीडिया उन की आंखें खोलना चाहता है जबकि उन का इस्तेमाल कर रहे उन्हें अंधा बनाए रखना चाहते हैं.

दुश्मनी से बढ़ कर अंधभक्तों के लिए कोई बड़ा वरदान नहीं है. तभी आप ने देखा होगा कि जिन घरों में पूजापाठ ज्यादा होता है वहां कलह भी ज्यादा होती है. अंधे बनिए, लाठी को सहारा नहीं, ऐरेगैरे पर चलाने के लिए इस्तेमाल करिए. जय बोलो देवीदेवता की. चुनावों के बाद थोड़ी शांति है, पर भक्त जल्दी ही किसी दुश्मन को ढूंढ़ लेंगे, यह गारंटी है.

मोटरबाइकों, गाडि़यों और बसों की बिक्री एक पैमाना है जिस में पता चलता है कि देश की माली हालत कैसी सुधर रही है. पिछले 3 माहों में इन की बिक्री 12 फीसदी से कम हो गई है क्योंकि शहरी खरीद के साथसाथ गांवकसबों में भी खरीदी कम हो गई है. यह गिरावट 2008 के बाद सब से ज्यादा है. जो लोग सोच रहे थे कि रामनाम दुपट्टा पहनने और जय श्रीराम के नारों से उन को नई ऊंचाइयां मिलेंगी, वे थोड़े परेशान तो होंगे ही.

यह तब है जब दुनियाभर में तेल की बहुतायत की वजह से पैट्रोलडीजल के दाम हाल के बजट के टैक्स से पहले बढ़ नहीं रहे थे. जब देश में न सड़कों की कमी हो, न वाहन बनाने वालों की, न लोहे की तो वाहन क्यों कम बिक रहे हैं? जवाब है कि लोगों को कामधाम से हटा कर बेमतलब के गुणगान में लगाया जा रहा है.

मेहनत करना एक सामाजिक आदत है. कुछ समाज हैं जहां 10-12 घंटे काम करना आम समझा जाता है. कहीं 2-3 घंटे के काम पहाड़ तोड़ना समझा जाता है. हमारे यहां पहले चौराहों पर चाय पीते या तंबाकू फांकने बकबक करने को काम करना समझा जाता था. बीच के सालों में यह कुछ बदला था और युवा लोग नारे लगाने की जगह नौकरियों की खोज में लगने लगे थे, बल्कि उलटा हो रहा था. रोजगार देने वालों को लोग नहीं मिल रहे थे. हर वर्कर अकड़ रहा था.

अब फिर इस पुराने ढर्रे पर आ गए हैं जहां सड़क पर जमा हो कर जय श्रीराम का नारा लगाना और लगवाना बड़ा काम हो गया है. गौरक्षकों की एक बड़ी जमात पैदा कर दी गई है जो काम नहीं करती, बल्कि दूध, चमड़े का व्यापार करने वालों के आड़े आ रही है. मंदिरों में पूजापाठ जोरशोर से होने लगा है.

ऐसे में वाहन खरीदने लायक कमाई कैसे होगी? किसी भी युवा से पूछ लें, वह ऐसा काम चाहता है जिस में उसे हाथ न हिलाने पड़ें. बदन से काम करना न पड़े. वैसे भी अब जाति का सवाल बड़ा हो गया है इसलिए छोटे काम को करना एक बार फिर अपनी जाति का अपमान माना जाने लगा है. एक समय ब्राह्मणों ने कारखानों में मशीनों पर खूब काम करना शुरू किया था जिस का फायदा पूरे देश को हुआ था. आज तो दलित व पिछड़ा भी पंडागीरी चाहता है ताकि उस की जाति का नहीं तो उस के परिवार का उद्धार तो हो जाए.

वाहनों की ही नहीं और बहुत सी चीजों की बिक्री सरकारी फैसलों की वजह से कमजोर हो रही है. जब देश में बेरोजगार बढ़ रहे हों, तो यह खतरनाक है. एक ऐसा लावा पैदा हो रहा है जो ज्वालामुखी की तरह फूटेगा और तहसनहस कर डालेगा.

मैं कितनी भी कोशिश कर लूं, पर मेरा पढ़ने में मन नहीं लगता है. मैं क्या करुं?

सवाल 

मैं 15 साल का लड़का हूं. मैं 10वीं जमात में पढ़ रहा हूं. मैं कितनी भी कोशिश कर लूं, पर मेरा पढ़ने में जरा भी मन नहीं लगता है. मुझे सही सलाह बताएं?

जवाब 

आप ही अपनेआप को बेहतर समझा सकते हैं कि बिना पढ़े लिखे आदमी की जिंदगी और हालत मवेशियों जैसी होती है और वह जिंदगीभर मेहनतमजदूरी कर पेट भर पाता है और खुद को कोसता रहता?है कि वक्त रहते पढ़ाई कर ली होती तो आज ये दिन नहीं देखने पड़ते, इसलिए जैसे भी हो, पढ़ाई में मन जरूर लगाएं. अलगअलग तरीकों से पढ़ें. कोचिंग और ट्यूशन जाएं और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखें. यह वक्त एक बार आप के हाथ से फिसल गया तो फिर कभी लौट कर नहीं आएगा.

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आम्रपाली-निरहुआ की ये फोटो देख फैंस ले पूछा- “शादी तो नहीं कर ली?”

भोजपुरी फिल्मों की सबसे पसंदिदा जोड़ी आम्रपाली दुबे और निरहुआ हमेंशा अपने डांस और एक्टिंग के कारण चर्चाओं में बने रहते है. इनकी जोड़ी भोजपुरी सिनेमा सबसे पौपुलर जोड़ी में ये एक. भोजपुरी के अधिकतर फिल्मों और गानों में दोनों एक साथ ही दिखाई देते हैं. इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी दोनों की तस्वीरें और विडियोज वायरल होते रहते हैं. दोनों के बीच कुछ होनी की बात भी समय समय बहार आती रही है पर दोनों ने काभी खुलकर इस बात पर हामी नहीं भरी. इन सब के बीच आम्रपाली और निरहुआ की नई फोटोज सोशल मीडिया पर सामने आई हैं और इन फोटोज को फैन्स काफी शेयर कर रहे हैं. यह फोटोज आम्रपाली ने खुद इन अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की हैं.

 कहां है आम्रपाली और निरहुआ

जब से ये फोटो सोशल मीडिया पर आई है सभी का रिएक्शन एक ही है की आखिर ये फोटोज है कहां की..? आपको बता दें कि उनकी यह फोटोज माता वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन के दौरान की है. जहां आम्रपाली अपने परिवार और निरहुआ संग नजर आ रही हैं. उन्होंने अपने परिवार और निरहुआ संग जो फोटोज शेयर की हैं वे फैन्स को काफी पसंद आ रही हैं. हालांकि इन फोटोज ने दोनों के अफेयर की चर्चा को और हवा दे दी है.

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कहीं शादी तो नहीं हो गई?

इन फोटो में दोनों गले में फूलों की माला डाले किसी शादीशुदा जोड़े की तरह दिखाई दे रहे हैं. इनकी इस फोटो पर सोशल मीडिया यूर्जस ने काफी अजीबों गरीब सवाल पुछना शुरु कर दिया हैं. एक यूजर ने कमेंट किया हा की- ‘आप दोनों ने शादी कर ली क्या!’ जिसपर दूसरे यूजर ने मजाक में जवाब देते हुए कमेंट किया,-‘जल्द ही करेंगे’ .

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जो भी हो पर साथ में ये भोजपुरी जोड़ी कमाल लगती हैं. रील लाइफ में तो ये जोड़ी सुपर हिट है अब देखना होगा की ये रीयल लाइफ में कम धमाल मचाएंगे.

मालदीव में वेकेशन बनाती मंदिरा बेदी, फोटोज हुई वायरल

बौलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने वाली मंदिरा बेदी की फिटनेस के सभी दिवाने है. सोशल मीडिया पर रेगुलर एक्टिव और अपने फैंस के लिए फोटोस अपडेट कर मंदिरा फैन फौलोविंग बढ़ती ही जा रही हैं. हाल ही में मंदिरा ने अपनी कुछ फोटोज शेयर की हैं जिसमें वो काफी सेक्सी लग रही हैं. मंदिरा इन दिनों मालदीव में वेकेशन एंजौय कर रही है जिसकी फोटोज उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की हैं. इन फोटोज में मंदिर ने अलग अलग बिकिनी पहनी है जिसमें वो काफी सेक्सी लग रही हैं. मंदिरा की इन फोटोज को फैंस खासा पसंद कर रहे हैं.

बिकनी में नजर आई मंदिरा

मंदिरा बेदी की सामने आई इन खूबसूरत फोटोज में वो बिकिनी पहन समुद्र किनारे झूले पर झूलती दिखाई दी. झूले पर मंदिरा बेदी का ये हौट अंदाज उनके चाहने वालों को दीवाना कर रहा हैं. इनक सभी फोटोज पर अब तक हजारों लाइक मिल चुके है.

फिटनेस फ्रिक मंदिरा

मंदिरा उन चुनिंदा एक्ट्रेस में से एक है जो समय के साथ और भी ज्यादा हसीन होती जा रही हैं. उनके फिटनेस के सभी दिवाने हैं. मंदिरा खुद को फिट रखने के लिए योगा, जिम और डाइट पर विशेष ध्यान रखती हैं.

अपने बेटे के साथ भी की फोटो शेयर

मंदिरा इस वेकेशन में अपने बेटे और पति के साथ गई हैं. उन्होंने अपने बेटे के साथ भी एक फोटो शेयर की है जिसमें वो काफी क्यूट लग रही हैं. इस फोटो के साथ उन्होंने लिखा की “Love. #OnlyLove.

 

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Love. #OnlyLove 🥰

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भोजपुरी डांसर संभावना सेठ की टिक टोक पर वापसी, Video की शेयर

इन दिनों टिक टौक वीडियो बनाने का एक अलग ही क्रेज लोगों में दिख रहा हैं. ना सिर्फ आम लोग बल्कि सेलेब्रिटी भी इस एप को काफी यूज कर रहे हैं. भोजपुरी डांसर संभावना सेठ ने भी एक टिक टौक वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया हैं. इस वीडियो में संभावना ने “ये ऊची अरमानी” सौंग  में जमकर अपने डांस मुव्ज दिखाए जिसे फैंस ने काफी पसंद किया हैं. जैसे ही संभावना ने इस वीडियो को शेयर किया, कमेंट की बौछार आने लगी.

फैंस ने कहा की…

संभावना की फैन फौलोविंग देखते ही बनती हैं, जैसे ही संभावने ने वीडियो शेयर किया कुछ फैंस ने कहा “मेम आप रौकस्टार है” तो किसी ने कहा “इस वीडियो को मेैं 100 बार देख चुकी हूं”. एक फैन ने तो उनके फिट होने का राज पूछते हुए संभावना से उनको डाइट प्लान ही पूछ लिया.

 

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Tiktok after 2 years…Hey friends do follow me on #tiktok 😁😁😁😁😁😁 #crazy #fun #video #superfun #dance #wakhraswag #lovethisong

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डांस मुव्स करती संभावना

इस वीडियो में संभावना ने काले कपड़ों के साथ काला चश्मा लगाया है जिसमे वो काफी सेक्सी लग रही हैं. इस वीडियो शेयर करते हुए संभावना ने लिखा- “2 साल बाद फिर से टिक टौक”. संभावना हमेशा किसी ना किसी नए अंदाज में फैंस को चौंका देती है और इस बार भी वो सफल हो गई.

 

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Happy hours with @memonicabedi ❤️❤️❤️❤️❤️ #movies #coffee #us #together #friends #goodtimes #queens #ourtime

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डांसिग क्वीन है संभावना

संभावना सेठ ने भोजपुरी और बौलीवुड में अब तक 50 से भी ज्यादा आइटम सौन्ग किए हैं, जिसकी बदौलत उन्होंने अपने फैंस का दिल जीता है.

बिग बौस में थीं कन्टेस्टेट…

संभावना “बिगबौस सिजन-2” में कन्टेस्टेट थीं, वो ये शो जीत तो नहीं पाई लेकिन औडियन्स ने उनको बेहद पसंद किया जिसके चलते उनको “बिग बौस सीजन-8” में चैलेंजर के रुप में शामिल किया.

गर्लफ्रेंड के धोखे के बाद इस एक्टर ने की थी सुसाइड की कोशिश

‘बालिका वधू’, ‘रजिया सुल्तान’ और ‘मेरी आशिकी तुम से ही’ जैसे कई पौपुलर टीवी शोज में काम कर चुके टीवी एक्टर मोहित अबरोल ने हाल ही में अपनी एक्स गर्लफ्रेंड और ‘इश्कबाज’ फेम टीवी एक्ट्रेस मानसी श्रीवास्तव को लेकर एक शौकिंग खुलासा किया है. मोहित ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक ओपन लेटर शेयर किया है जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे मानसी की वजह से उन्होंनेे सुसाइड करने की कोशिश की थी.

क्या है पूरा मामला…

मोहित अबरोल और मानसी श्रीवास्तव 8 सालों से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे. यहां तक की दोनों ने एक दूसरे के साथ सगाई भी कर ली थी पर लेकिन बाद में दोनो के बीच दूरियां आ गई. इतना ही नहीं दोनों ने एक-दूसरे को अपने-अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से अनफौलो भी कर दिया, जिससे साफ पता चलता है कि दोनों के रास्ते अलग हो चुके हैं.

 

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Fight for your love . People fall in and out of love but what if they get separated while still in love . That’s sad . Nothing in this world is more beautiful then love . It’s what makes us whole . The fulfilment you get will be unmatched to anything else you will ever get , how better it may be . Love doesn’t come around easily . You were lucky if you got love . You didn’t stop loving , you lost yourself in the process and when you realised that You won’t be able to love anyone else she was not there . You took time to be better so that you can give her all that she deserves . All the love that you have to give it’s all for her . When you realise this you need to fight . Fight for love . It would be such a big loss if we don’t get back together . You need to fight everyday . You fight for your love and feelings everyday without fail . Manifest your thoughts . Tell the universe do whatever you have to but you have to fight for your love . Don’t ever give up on love . She will come back . Your broken pieces will fit perfectly with hers , you will become whole again . Love will create its magic . Even god’s are created of love . It will happen , believe 🤗 . Keep fighting . Mohitvijayabrol . #thoughts #love #poetry #photography #photooftheday #actor #writer #modeling #lovequotes #deepquotes #passion #onelove #onelife #nevergiveup

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अरहान की वजह से हुआ ब्रेकअप…

मोहित ने मानसी के साथ हुए ब्रेक-अप के 2 महीने बाद इस बात का खुलासा किया. मोहित ने एक ओपन लैटर के जरिए बताया कि उन दोनों के टूटे रिश्ते की वजह मानसी की अरहान बहल से बढ़ती नजदीकियां थी. अरहान और मानसी ने सीरियल ‘दो दिल बंधे एक डोरी से‘ मे साथ मे काम किया था. मोहित ने मानसी पर बेवफा होने का आरोप भी लगाया.

मोहित ने अपने ओपन लैटर मे लिखा कि, ‘मैं उन्हें दोबारा देखना चाहता था. अपनी तरह से गुडबाय बोलना चाहता था, लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ कि अगर मैं ऐसा करुंगा तो कभी ऐसा नहीं कर पाउंगा. कितना मुश्किल होता है जिन्हें आप प्यार करते हैं या जिनका ख्याल रखते हैं उन्हें गुडबाय कहना. ये बिल्कुल ऐसा है कि अपने शरीर के किसी अंग को निकाल फेंकना.’

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Mohit-Abrol

देखिए मोहित अबरोल की ओपन लैटर-

इसके आगे उन्होंने लिखा, ’मैं संतुष्ट हूं कि तुम चले गए मैंने तुमसे सच्चा प्यार किया है, मेरे लिए यह हमेशा के लिए था तब मुझे एहसास हुआ कि कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता. ’हमेशा’ एक झूठ है. जैसे आप अभी भी मेरे साथ हो, लेकिन सबसे ज्यादा दर्द तब होता है, जब ये पहली बार न हो जब आपने ऐसा किया था. मुझे पता है कि यह आखिरी भी नहीं होगा. अपने नए प्रेमी का उपयोग वैसे न करें जैसा आपने मेरा इस्तेमाल किया या उसे आठ साल के लंबे वक्त तक न इस्तेमाल करें. तुम इतने वक्त मेरे साथ मेरी पत्नी की तरह रही. मैंने आपकी सारी ज़िम्मेदारी ली और मुझे दिल्ली से मुंबई जाने के बदले में जो कुछ मिला, मैंने आपके फाइनेंस से लेकर औडिशन और ड्राइविंग तक सबका ध्यान रखा. मैंने आपके लिए वही किया जो एक पति करता है. आठ साल तक आपके साथ रहने ने मुझे जिम्मेदार बना दिया. मैंने आपको अपने लंबे आठ साल, आठ साल दिए. मुझे अपने करियर या सेहत की परवाह नहीं थी, तब भी नहीं जब आपका अरहान के साथ अफेयर था और मैंने नींद की गोलियों से अपने आप को मारने की कोशिश की थी, मैं आईसीयू में 3 दिनों के बाद उठा और आप वहां भी नहीं थे. जब आप की जरूरत थी तब आप कभी नहीं थे. मैंने आपको उस समय जाने दिया था, लेकिन जब अरहान ने आपको छोड़ दिया तो आपने वापस आने की कोशिश की और मेरे जीवन को नरक बना दिया. मैंने अंत में आपको यह सोचकर दोबारा अपनी जिंदगी में आने दिया कि आपसे गलती हुई लेकिन अब मुझे उस क्षण पर पछतावा है जब मैने आपको दोबारा आने दिया. यह तभी खत्म हो जाना चाहिए था.‘

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मोहित ने इस पोस्ट के आखिरी में खुलासा किया है कि मानसी इन दिनों एक फोटोग्राफर को डेट कर रही हैं जिसका नाम कपिल तेजवानी है.

उन्होंने लिखा, ‘लेकिन मुझे गर्व है कि जो कुछ भी आपने मेरे साथ किया उसके बाद भी मैं जिंदा हूं लेकिन कर्म इतना दयालु नहीं है कि आपको वह मिलेगा जिसके आप अभी लायक नहीं हैं, लेकिन आप तब तक अपने नए प्रेमी के साथ खुश रहें. शुभकामनाएं मानसी श्रीवास्तव और कपिल तेजवानी, प्लीज उसे इस्तेमाल न करें और आप खुद को इस्तेमाल न होने दे.‘

हालांकि इसके बाद मोहित ने ये पोस्ट डिलीट कर दी. जब हमने उनसे बात करने की कोशिश की तो उन्होंने हमारी कौल्स का कोई जवाब नहीं दिया.

एडिट बाय- करण

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