‘एक पहेली लीला’ फेम स्टार के कलरफुल फैशन को करें ट्राय

छोटे पर्दे के बहुत से ऐसे एक्टर्स है जिन्होंने एक्टिंग से ज्यादा नाम बतौर एंकर कमाया. उन्हीं में से एक है एकता कपूर के सीरियल ‘कयामत’ से अपने एक्टिंग कैरियर की शुरुआत करने वाले एक्टर कम एंकर जय भानुशाली. जय ने बतौर एंकर कई सारे रियालिटी शो का होस्ट किया. जय ने 2014 में बौलीवुड में  फिल्म ‘Hate story 2’  से डेब्यू किया जिसमें उनकी एक्टिंग काफी पसंद की गई. उसी साल आई फिल्म ‘देसी कट्टें’ में भी जय की काफी तारीफ हुई. ‘एक पहेली लीला’ में सनी लिओनी के साथ उनके इंटिमेट सीन काफी चर्चा में रहे. जय हमेशा अपने काम को लेकर बेहद फोकस रहते है. उनके लुक्स पर कई लड़किया फिदा है. जय का स्टाइल काफी यूनिक है. उनको काफी कलरपुल कपड़े पहनने का शौक है. आज हम उनके कुछ कलरफुल स्टाइल आपके लिए लेकर आए है जो फंकी के साथ साथ एलिगेंट लुक भी देंगे.

वाइट वीद येलो

इस लुक में जय काफी हौट नजर आ रहे है अगर आप भी किसी वेकेशन पर इस स्टाइल को ट्राय करेंगे तो यकीन मानिए आप सभी का ध्यान अपनी और खूच लेंगे. वाइट शोट्स और वाइट सूज साथ में येलो इन्नर काफी अच्छा लुक दे रहा है. सबसे अच्छी बात है इस लुक की शर्ट जिसकों जय ने काफी अच्छे से कैरी किया है.

वाइट वीद कलरफुल कोट

जय को वाइट कलर से कुछ ज्यादा ही लगाव है, अब इस लुक को ही देख लिजिए वाइट पेंट और शूज के साथ कलरफुल कोट कितना जच रहा है, इस कोट में जो प्रिंट है वो काफी यूनिक है. इस प्रिंट देख के आपको ऐसा लगेगा की इसको वेक्स कलर से प्रिंट किया गया है.

 

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Jacket @off_white @thesource Tshirt @hm Denims @zaraindia Styled by @saachivj Assisted by @nancyshahh @sanzimehta777

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औरेंज सूट में जय

जय को अलग अगल कलर्स के कपड़ो को ट्राय करना काफी पसंग है अब उनके इस लुक को ही देख लिजिए, औरेंज सूट में जय किसी सूपर स्टार से कम नही लग रहे है. इस लुक की खास बात है उनकी शर्ट जो इस सूट के साथ परफैक्ट जा  रही है. जय की हेयर स्टाइल और उनकी बियर्ड भी इस लुक को काफी कौम्प्लिमेंट दे रहा है.

लेमन येलो वीद स्कई ब्लू

जय ने इस लुक को में जो कौम्बिनेशन पहना है वो इस लुक की जान है. स्कई ब्लू और लेमन येलो वाले इस लुक में वो काफी अच्छे लग रहे है. अगर आप किसी खास पार्टी में जाने वाले है तो इस लुक को ट्राय करने के बारे में सोच सकते है.

इब्जा बीच पर छुट्टियां मनाने पहुंचीं ‘यारियां’ फेम रकुल प्रीत सिंह, शेयर की बिकिनी फोटोज

तेलुगु, तामिल और कंन्नड सिनेमा की स्टार यानी रकुल प्रीत सिंह ने बौलीवुड में अपना पहला कदम साल 2014 में आई फिल्म ‘यारियां’ से किया जिसके बाद  उन्होंने करोड़ो का दिल जीत तो लिआ लेकिन हाल ही में इन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से कुछ फोटोज शेयर की जिसको देखने बाद सभी दंग रह गए. रकुल प्रीत इन फोटोज में ब्लू बिकिनी में नजर आ रही है जिसे देखने के फैंस उनको काफी कौम्प्लिमेंट दे रहे हैं. रकुल प्रीत इन दिनों इब्जा की वादियों में डूबी हुई है. वो वहां छुट्टियां बिताने गई हैं और उनकी लेटेस्ट इंस्टाग्राम पोस्ट सभी की धड़कन बढ़ा रहे है.

अजय देवगन के साथ कर चुकी है स्क्रीन शेयर

अजय देवगन की फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ में रकुल प्रीत सिंह उनकी गर्लफ्रेंड का रोल निभा चुकी है. ब्लू कलर की बिकिनी को पहनकर वो इंटरनेट पर आग लगा रही है. वो इब्जा के समुंदर में जमकर मौज मस्ती कर रही हैं और इन सेंसेशनल फोटोज से इंटरनेट पर हंगामा बचा रही है. फैंस रकुल की इन फोटोज को काफी पसंद कर रहे है.

 

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Beach bum!! #ibizadiaries ❤️ #makingmemories @flirtatious_india

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BELIEVE IN YOUR SELFIE 😝❤️ #ibizadiaries

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चश्मे ने और निखारा रकुल को

इन फोटोज में रकुल सनग्लासेज पहनी है जिससे उनके लुक में चार चांद लग गए है. इन फोटोज की सबसे खास बात ये है की इन फोटोज में रकुल का मेक ओवर देखने को मिला. फोटोज में रकुल के बाल लाल रंग के दिख रहे है जो उनकी पर्सनेलिटी पर काफी सूट कर रहे है. इन हाई लाइडेट बालों को फैंस काफी पसंद कर रहे है.

अलग अलग पौज मारती नजर आए रकुल

बेहद हौट अंदाज में बैठी रकुल प्रीत न जाने किसके इंतजार में आस लगाए हुए हैं. लेकिन उनकी हर अदा जरुर बेहद खास दिख रही है.मरकुल प्रीत सिंह ने यहां आंखों ही आंखों में कई सारे इशारे कर डाले हैं. जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे है, सोशल मीडिया पर रकुल की इन फोटोज को काफी वायरल किया जा रहा हैं.

बिकिनी फोटोज की वजह से सुर्खियों में आई ये एक्ट्रेस, रणबीर के साथ कर चुकी हैं काम

लाइमलाइट से कोसो दूर हो चुकी एक्ट्रेस मिनिषा लांबा काफी समय बाद सोशल मीडिया में तहलका मचाने आ गई है. मिनिषा ने हाल ही में अपनी कुछ फोटोज शेयर की हैं जिसमें वो काफी अलग अंदाज में नजर आ रही है. इन फोटोज में मिनिषा ने येलो कलर की बिकिनी  पहनी है जिसमें वो काफी बौल्ड नजर आ रही है. जैसे ही मिनिषा ने इन फोटोज को शेयर की वैसे ही फैंस ने कमेंट की बरसात करना शुरु कर दी. इन फोटोज को सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है.

मिनिषा की बिकिनी सेल्फी

मिनिषा एक फोटो में पीले रंग की बिकिनी में सेल्फी लेती नजर आई. इसके बाद मिनिषा ने इसी येलो बिकिनी के साथ चश्मा लगातार स्वीमिंग पूल की ओर रुख किया. इस दौरान उन्होंने अपनी एक और सेल्फी खींची.

 

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काफी समय से नही है लाइमलाइट में

मिनिषा काफी लम्बे समय से लाइमलाइट से दूर हैं. मिनिषा ने अपने कैरियर की शुरूआत साल 2005 में आई फिल्म ‘यहां’ से की थी जिसमें जिम्मी शेरगिल के साथ उनकी कैमिस्ट्री को काफी पसंद किया था. इसके बाद ‘रौकी’ ’10 कहानियां’ ‘किडनेप’ ‘वेल डन आप्पा’ ‘भेजा फाई’ ‘जिला गाजियाबाद’ ‘ब्लैक करेंसी’ और  आखिरी बार ‘भूमी’ मे देखा गया था. मिनिषा बौलीवुड की उन चुनिंदा एक्ट्रेसेस में से एक है जिन्होंने बड़े पर्दे के बाद छोटे पर्दे पर भी हाथ आजमाया. मिनिषा ने ‘छूना है आसमान’ ‘बिगबौस 8’ ‘कौमेडी नाईट्स बचाओं’ और  ‘तेनाली रामा’ जैसे सीरियल्स में भी काम किया.

सेल्फी की है शौकीन

मिनिषा को सेल्फी लेना काफी पसंद है. जब भी वो स्वीमिंग पूल में जाती है. तो फोन ले जाना बिल्कुल भी नहीं भूलती है मिनिषा को जब तक अपनी अच्छी सेल्फी नहीं मिल जाती है, वह सेल्फी खींचती ही रहती है. इस बाद का सबूत है उनका इंस्टाग्राम अकाउंट जिसमें उनकी फोटोज देख किसी की भी दिल की धड़कन बड़ सकती हैं.

 

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काले रंग की बिकिनी में भी आ चुकी है नजर

मिनिषा कुछ दिन पहले भी काले रंग की मोनोकिनी में अपने नैनों के बाण चलाती हुई नजर आ चुकी है. समुंदर से मिनिषा को कुछ खास लगाव है. तभी तो समुंदर में जाते ही वह बच्ची बनकर खेलने लगी. मिनिषा ने समुंदर के बीचों बीच ही अपने बाल संवारे. उनकी इन फोटोज को भी फैंस ने काफी पसंद किया था.

 

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Monday Morning thoughts are of Goa…. #sun #beach #ocean #goa #photography #photooftheday #picoftheday #pic #instapic #monday

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रस्सी का सांप

लेखक- अरशद हाशमी

मैं तब 11वीं क्लास में था जब रिजर्वेशन के विरोध में पूरे देश में आंदोलन हो रहा था. उस दिन भी मैं क्लास में बैठा था. यों तो महेश सर फिजिक्स का कोई बोरिंग सा चैप्टर पढ़ा रहे थे लेकिन मेरा पूरा ध्यान अगले दिन होने वाले भारतपाकिस्तान मैच में लगा था.

मैं कपिल देव की घातक गेंदबाजी और नवजोत सिंह सिद्धू की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के सपने देख रहा था और पता भी नहीं चला कि कब कुछ रिजर्वेशन विरोधी छात्र मेरी क्लास में आ गए और सब से बाहर निकलने को बोलने लगे.

मेरे विचारों में कपिल देव अपनी अगली गेंद पर जावेद मियांदाद को बोल्ड करने ही वाले थे और मैं इस नजारे को मिस नहीं कर सकता था. इसलिए मैं ने उन छात्रों की बात सुनी ही नहीं.

मुझे होश तब आया जब उन में से एक छात्र हाथ में कुरसी उठाए मेरे सामने खड़ा था.

‘‘उठता है या फोड़ दूं तेरा सिर,’’ वह छात्र दहाड़ा तो मैं हकीकत के फर्श पर धड़ाम से आ कर गिरा और किसी तरह गिरतेपड़ते क्लास से बाहर भागा.

समझ नहीं आ रहा था कि स्कूल बंद होने की खुशी मनाऊं या सामने उस छात्र नेता का भाषण सुन कर दुखी होऊं जिस में वह रिजर्वेशन के चलते छात्रों का भविष्य अंधेरे से भरा होने की भविष्यवाणी कर रहा था. सारे छात्र एक जुलूस की शक्ल में स्कूल से बाहर निकले तो मैं भी अपने दोस्तों कलीम, नफीस और हेमेंद्र के साथ जुलूस के साथसाथ चलने लगा.

‘‘भाई, मैं तो रिजर्वेशन का विरोधी नहीं हूं, फिर हम इन के साथ कहां जा रहे हैं?’’ कलीम ने पूछा.

‘‘अरे, थोड़ा बाहर तो निकलो, फिर हम चुपके से अलग हो जाएंगे और

घर चले जाएंगे,’’ नफीस ने फुसफुसा कर कलीम को चुप कराया.

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‘‘यार, मैं ने तो कभी किसी जुलूस में हिस्सा नहीं लिया है. आज जरा देखूंगा क्या होता है इन में, इसलिए मैं तो घर नहीं जा रहा,’’ हेमेंद्र ने अपना फैसला सुनाया.

‘‘वैसे, कोई जुलूस तो मैं ने भी कभी नहीं देखा. चलो, चल लेते हैं. थोड़ा घूमफिर ही लेंगे,’’ मैं ने अपनी राय रखी.

स्कूल से निकल कर जुलूस रेलवे स्टेशन की तरफ बढ़ रहा था कि मौका देख कर नफीस नौ दो ग्यारह हो गया. कलीम भी वहां से निकलना चाहता था लेकिन मैं ने रोक लिया.

रेलवे स्टेशन पहुंच कर कुछ छात्रों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी तो हम दोनों ने वहां से खिसकने में ही भलाई समझी. मैं और कलीम बसअड्डे की तरफ चल दिए, गुप्ताजी के समोसे खाने.

अभी समोसे और चाय खत्म भी नहीं हुए थे कि छात्रों का जुलूस बसअड्डे की तरफ आता दिखाई दिया.

‘‘चलो निकलते हैं यहां से जल्दी,’’ कलीम ने मुझे चेताया लेकिन मैं समोसे और चाय का मोह त्याग नहीं पा रहा था इसलिए मैं ने हाथ पकड़ कर कलीम को अपने साथ ही बिठा लिया.

छात्रों ने बसअड्डे पर भी जम कर उत्पात मचाया और खूब तोड़फोड़ की. औफिस, बसों के शीशे, वहां लगे स्टौल सबकुछ तोड़ डाला और बसों के टायरों की हवा निकाल दी.

यह सब चल ही रहा था कि पुलिस की कुछ गाडि़यां वहां आ गईं और

बिना समय गंवाए पुलिस वालों ने छात्रों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं. फिर क्या था, 5 मिनट में बसअड्डा खाली

हो गया.

तब तक मैं ने भी अपने समोसे खत्म कर लिए थे और डकार ले कर अपने घर की तरफ चल दिया.

मजे से टहलतेटहलते जब मैं अपने घर के पास पहुंचा तो देखा कि 2-3 लड़के इधरउधर भाग रहे थे और कुछ पुलिस वाले उन लड़कों के पीछे डंडे लिए दौड़ रहे थे. इस से पहले कि मैं कुछ समझ पाता, एक पुलिस वाले ने कलीम पर डंडा चलाया जो उस के कंधे को छू कर निकल गया.

कलीम ने दौड़ लगाई और मेरी गली में घुस गया, लेकिन में वहीं खड़ा रह गया और पलभर में ही एक पुलिस वाले ने एक डंडा हमारे घुटने पर और एक कूल्हे पर जमा दिया.

डंडा खाते ही मुझे सनी देओल की फिल्म ‘घायल’ वाला सीन याद आ गया लेकिन मैं सनी देओल तो था नहीं.

2 डंडे मुझे दिन में तारे दिखने के लिए काफी थे. भला हो एक दूसरे पुलिस वाले का जिस ने शायद मेरे भीतर के अमोल पालेकर को पहचान लिया और मुझे वहां से जाने के लिए बोला.

मेरे घर पहुंचने से पहले ही मेरी खातिरदारी की खबर घर वालों तक पहुंच चुकी थी. बड़े भाई ने मुझे जम

कर डांटा और शायद 2-4 हाथ भी लगा देता लेकिन डंडे खा कर हो रहे हमारे

दर्द को देख कर उस ने अपना इरादा बदल दिया.

अब यह अच्छी तरह समझ आ गया था कि पुलिस वालों से दोस्तीदुश्मनी तो दूर की बात है, उन के आसपास भी नहीं फटकना.

कई साल बाद मैं ने दिल्ली में अपना सैलून खोल लिया था, जो अच्छाखासा चल रहा था. अब इस को संयोग कहें या मेरी बदकिस्मती, एक पुलिस वाले को मेरे एक हेयर ड्रैसर का काम बड़ा पसंद आ गया. वह जब भी आता, उसी से अपने बाल कटवाता.

मैं पुलिस वालों से अपनी पिटाई भूला नहीं था इसलिए इन महाशय से ज्यादा क्या थोड़ी भी बात नहीं करता था. लेकिन ये इंस्पैक्टर साहब आम पुलिस वाले नहीं लगते थे. बड़ी तमीज से बात करते, हमेशा पैसे भी पूरे दे कर जाते और हर बार मेरा हालचाल पूछते.

पुलिस वालों को ले कर मेरी भी सोच थोड़ीथोड़ी बदलने लगी थी

और मैं भी उन से थोड़ीबहुत बातचीत करने लगा.

एक दिन इंस्पैक्टर साहब बाल कटा रहे थे और टैलीविजन पर कोई फिल्म चल रही थी. फिल्म में एक किरदार डायलौग बोल रहा था कि पुलिस वाले रस्सी का भी सांप बना देते हैं.

यह सुन कर मेरी हंसी निकल गई और पता नहीं किस तरह मैं ने इंस्पैक्टर साहब से पूछ ही लिया कि आखिर पुलिस वाले रस्सी का भी सांप कैसे बना देते हैं? मेरे इस सवाल के जवाब में इंस्पैक्टर साहब कुछ बोले नहीं, बस हंस कर रह गए.

फिर कुछ दिनों बाद वही इंस्पैक्टर साहब बाल कटा रहे थे कि अचानक कुछ पुलिस वाले धड़धड़ाते हुए मेरे सैलून में दाखिल हुए.

‘‘क्या बात है सर?’’ इतने सारे पुलिस वालों को देख कर मेरी घिग्घी बंध गई थी, फिर भी बड़ी हिम्मत से मैं ने एक पुलिस वाले से पूछा.

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‘‘हमें पक्की खबर मिली है कि

तुम गैरकानूनी हथियारों का धंधा करते हो,’’ एक पुलिस वाले ने कड़क आवाज में कहा.

‘‘अरे सर, गैरकानूनी तो क्या मैं ने तो आज तक किसी हथियार को देखा तक नहीं,’’ मैं मिमियाया.

‘‘वह तो हम पता कर ही लेंगे. तलाशी लो दुकान की,’’ उस पुलिस वाले ने सिपाहियों को आदेश दिया.

तलाशी लेतेलेते जब एक सिपाही ने एक दराज खोला तो उस में एक तमंचा रखा था. यह देख कर मेरी तो सांस ही अटक गई.

‘‘यह… यह मेरा नहीं है. मुझे तो

पता भी नहीं कि यह यहां कैसे आ गया,’’ बड़ी मुश्किल से मेरी आवाज निकली.

‘‘हर खूनी यही कहता है कि खून उस ने नहीं किया. बच्चू तू तो गया,’’ जीत की खुशी उस पुलिस वाले के चेहरे पर साफ चमक रही थी.

‘‘आप ही बताइए सर इन को कि मैं शरीफ आदमी हूं,’’ मुझे अपने पुराने ग्राहक इंस्पैक्टर साहब का ध्यान आया तो मैं ने उन से कहा.

‘‘अरे दारोगाजी, ये ऐसे आदमी नहीं हैं. लगता है, किसी ने फंसा दिया है इन को,’’ हमारे इंस्पैक्टर साहब ने उस पुलिस वाले से कहा.

फिर इंस्पैक्टर साहब उस पुलिस वाले से कुछ खुसुरफुसुर करने लगे.

‘‘ठीक है, मामला यहीं रफादफा कर देंगे. तुम शाम तक एक लाख रुपए

का इंतजाम कर लो,’’ दारोगाजी ने मुझ से कहा.

‘‘एक लाख रुपए. इतने पैसे तो नहीं हैं मेरे पास,’’ मैं ने फरियाद की.

‘‘पैसे नहीं हैं तो चल फिर थाने. गैरकानूनी हथियार बेचता है और पैसे नहीं हैं,’’ वह पुलिस वाला गुर्राया.

मेरी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा. फिर भी हिम्मत कर के मैं ने शाम तक की मुहलत ले ली. दौड़ाभागा, घर गया, जो कुछ पैसे थे वे उठाए, बैंक का अकाउंट खाली कर दिया, दोस्तों से उधार लिया और किसी तरह एक लाख रुपए ले कर थाने पहुंचा.

सामने ही इंस्पैक्टर साहब और वे दारोगा बैठे थे. मैं ने पैसे उन दारोगा को दे दिए.

‘‘हम्म, चलो निकलो यहां से. और आज के बाद कभी कोई गैरकानूनी काम किया तो सीधा अंदर कर दूंगा,’’ दारोगा ने मुझे चेतावनी दी.

मैं नमस्ते कर के वापस मुड़ा ही था कि इंस्पैक्टर साहब मेरे पास आए और कान में बोले, ‘‘अब समझ आ गया कि पुलिस वाले रस्सी का सांप कैसे बना देते हैं. वह तमंचा मैं ने ही तुम्हारी दुकान में रखा था,’’ इंस्पैक्टर साहब के चेहरे पर एक कुटिल मुसकान थी.

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अब मैं अच्छी तरह समझ चुका था कि पुलिस वालों से न दोस्ती रखो, न दुश्मनी, बल्कि हो सके तो दूर की नमस्ते भी नहीं.                              द्य

शौचालय में चढ़ा चूल्हा

इस मामले में और ज्यादा विवाद तो तब बढ़ा जब 23 जुलाई को राज्य की महिला विकास मंत्री इमरती देवी ने कहा, ‘‘आप को समझना चाहिए कि शौचालय के अंदर एक दीवार है. उस के एक तरफ सीट रखी है और दूसरी तरफ खाना पक रहा है. इस में क्या समस्या है?

‘‘हमारे घरों के कमरों में भी अटैच्ड लैट्रिनबाथरूम होते हैं. क्या हम लोग या हमारे घर आने वाले मेहमान हमारे घर का खाना खाने से इनकार कर देते हैं कि आप के घर में अटैच्ड लैट्रिनबाथरूम है?’’

गहलोत की खरीखरी

जयपुर. 23 जुलाई को कांग्रेस के दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कर्नाटक के नाटक पर कहा, ‘‘यह घटनाक्रम लंबे समय से चल रहा है. पूरा देश देख रहा है कि किस तरह मोदीजी को भारी बहुमत मिला लेकिन

आम जनता को उम्मीद नहीं थी कि जीतने के बावजूद राजग सरकार इस तरह की हरकत करेगी…

‘‘कर्नाटक में आप तमाशा देख ही रहे हैं. जोकुछ हो रहा है वह जनता के जेहन में बैठ रहा है और आने वाले वक्त में उन्हें यह भारी पड़ेगा. इन की खुद की पार्टी में बगावत होगी, यह मैं कह सकता हूं…

‘‘ये लोग लोकतंत्र को खत्म करने का खेल खेल रहे हैं. इन का बस चले तो हिंदुस्तान भर में यही काम करेंगे. और कोई काम तो है नहीं इन के पास. देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है, नौजवानों में गुस्सा पैदा हो रहा है, किसान खुदकुशी कर रहे हैं, इन्हें उस की चिंता नहीं है.’’

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नेता के भाई की धोखाधड़ी

देहरादून. 23 जुलाई को उत्तराखंड के बड़े कांग्रेस नेता किशोर उपाध्याय के छोटे भाई

सचिन पर ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया गया.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस संबंध में जून महीने में एक बिल्डर द्वारा की गई शिकायत पर जांच के आदेश दिए थे. बिल्डर मुकेश जोशी ने मुख्यमंत्री से मिल कर अपने बिजनैस पार्टनर रह चुके सचिन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने एसएम होस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड नाम के बिजनैस जौइंट वैंचर में उन के 50 फीसदी शेयर उन के फर्जी दस्तखत कर अपनी पत्नी के नाम कर दिए थे.

मुकेश जोशी ने सचिन पर ब्लैकमेल करने का भी आरोप लगाते हुए उन के बड़े भाई किशोर उपाध्याय की राजनीतिक हैसियत को देखते हुए अपनी जान के खतरे का डर भी जताया था. किशोर उपाध्याय उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं.

दिल्ली की मोदी से नई मांग

नई दिल्ली. अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय करों में दिल्ली की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग को ले कर शहर के विकास के लिए केंद्र सरकार से पैसे से मदद मांगी है.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 25 जुलाई को 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह से मुलाकात की, उन्हें एक ज्ञापन सौंपा और कहा कि जिस तरह से केंद्र सरकार बाकी राज्यों को पैसा देती है, उसी तरह से केंद्रीय करों में दिल्ली को उस की वाजिब हिस्सेदारी मिलनी चाहिए.

मीडिया के साथ बातचीत में अरविंद केजरीवाल ने बताया कि केंद्र सरकार को दिल्ली तकरीबन पौने

2 लाख करोड़ रुपए इनकम टैक्स जमा कर के देती है, उस में से दिल्ली को यहां के विकास के लिए केवल 325 करोड़ रुपए ही वापस मिलते हैं. सालों से इतना ही पैसा दिया जाता रहा है. बाकी राज्यों की तरह दिल्ली के नगरनिगमों को भी पैसा दिया जाना चाहिए.

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बैकफुट पर आजम खां

लखनऊ. समाजवादी पार्टी के बड़े नेता और सांसद आजम खां ने 24 जुलाई को लोकसभा में भाजपा की

एक सांसद रमा देवी पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, जिस के बाद उन्हें लेने के देने पड़ गए. उन की इतनी किरकिरी हुई कि रमा देवी को अपनी बहन जैसा बताना पड़ा.

लेकिन देश की महिला नेताओं को आजम खां का ऐसा कहना रास नहीं आया. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, भाजपा नेता जया प्रदा समेत कई दिग्गज नेताओं द्वारा आजम खां के कथन की निंदा की गई.

इतना ही नहीं, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी आजम खां की टिप्पणी को अशोभनीय बताते हुए उन्हें सभी औरतों से माफी मांगने को कहा. बाद में आजम खां ने माफी भी मांगी.

झटके पर लगा झटका

मुंबई. लगता है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है. 24 जुलाई को उस की मुंबई इकाई के प्रमुख और महाराष्ट्र के मंत्री रह चुके सचिन अहिर शिव सेना में शामिल हो गए थे और बाद में सुनने में आया कि इस दल की महाराष्ट्र महिला विंग की अध्यक्ष चित्रा वाघ ने भी पार्टी का साथ छोड़ दिया. उन्होंने कहा, ‘‘मैं नैशनलिस्ट महिला महाराष्ट्र प्रदेश के अध्यक्ष पद और एनसीपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देती हूं.’’

लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन और नेताओं द्वारा पार्टी छोड़ने से राकांपा का महाराष्ट्र में जनाधार खतरे में दिखाई पड़ने लगा है. नेता पार्टी न छोड़ें, इस के लिए ठाणे में राकांपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हवन कराया, पर लगता है, वह भी काम नहीं आया.

रिकौर्ड घंटे चली बैठक

गांधीनगर. गुजरात की 14वीं विधानसभा ने एक दिन की सब से लंबी बैठक के साल 1993 के अपने ही रिकौर्ड को तोड़ दिया. 26 और 27 जुलाई को विधानसभा की कार्यवाही 17 घंटे और 40 मिनट तक चली थी. यह 26 जुलाई की सुबह 10 बजे शुरू हुई थी और अगले दिन के तड़के 3 बज कर 40 मिनट पर खत्म हुई थी.

शनिवार, 27 जुलाई को जारी की गई एक प्रैस रिलीज के मुताबिक, ‘चौथे सैशन का आखिरी दिन गुजरात विधानसभा के लिए ऐतिहासिक रहा क्योंकि इस की कार्यवाही 17 घंटे और 40 मिनट तक चली और इस से 6 जनवरी, 1993 का रिकौर्ड टूट गया.’

6 जनवरी, 1993 को विधानसभा की कार्यवाही

12 घंटे और 8 मिनट तक चली थी. इस सिलसिले में विधानसभा अध्यक्ष के ऐलान के बाद विधायकों और अफसरों ने इस ‘ऐतिहासिक घटना’ पर खुशी मनाई.

पूर्व विधायक की चिंता

श्रीनगर. जम्मूकश्मीर के विधायक रह चुके शेख अब्दुल राशिद ने रविवार, 28 जुलाई को केंद्र सरकार पर लोगों के बीच डर पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया और यह अपील की कि केंद्र कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए ठोस कदम उठाए.

अवामी इत्तेहाद पार्टी के प्रमुख शेख अब्दुल राशिद ने कहा कि भाजपा वाली केंद्र सरकार को राज्य में ‘प्रयोग’ करना बंद करना चाहिए और यहां अतिरिक्त बलों की तैनाती को ले कर अफवाहों पर जवाब देना चाहिए. उन्होंने केंद्र को अनुच्छेद 35ए या अनुच्छेद 350 के साथ छेड़छाड़ के खिलाफ आगाह भी किया.

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राजद में फिर टूट

पटना. केंद्रीय मंत्री रह चुके मोहम्मद अली अशरफ फातमी ने रविवार, 28 जुलाई को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता ले ली.

राष्ट्रीय जनता दल यानी राजद के बड़े नेता माने जाने वाले मोहम्मद अली अशरफ फातमी ने हालिया लोकसभा चुनावों में टिकट नहीं मिलने से नाराज हो कर राजद से नाता तोड़ लिया था.

मोहम्मद अली अशरफ फातमी ने कहा कि जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई में हो रहे न्याय के साथ विकास, खासकर बिहार के अल्पसंख्यकों के लिए सरकार द्वारा जितनी भी जनोपयोगी योजनाएं बनाई और चलाई गई हैं, इस से पहले किसी भी पार्टी की सरकार द्वारा ऐसा नहीं हुआ है.

समाज की डोर पर 2 की फांसी

लेखक- सुरेशचंद्र मिश्र

डेयरी संचालक भूरा राजपूत अपना काम निपटा कर वापस घर आया तो उस की नजर घरेलू कामों में लगीं बेटियों पर पड़ी. उन की 4 बेटियों में 3 तो घर में थीं लेकन सब से बड़ी बेटी शैफाली घर में नजर नहीं आई. उन्होंने पत्नी से पूछा, ‘‘रेनू, शैफाली दिखाई नहीं दे रही. वह कहीं गई है क्या?’’

‘‘अपनी सहेली शिवानी के घर गई है. कह रही थी, उस की किताबें वापस करनी हैं.’’ रेनू ने पति को बताया.

पत्नी की बात सुन कर भूरा झल्ला उठा, ‘‘मैं ने तुम्हें कितनी बार समझाया है कि शैफाली को अकेले घर से मत जाने दिया करो, लेकिन मेरी बात तुम्हारे दिमाग में घुसती कहां है. उसे जाना ही था तो अपनी छोटी बहन को साथ ले जाती. उस पर अब मुझे कतई भरोसा नहीं है.’’  पति की बात सही थी. इसलिए रेनू ने कोई जवाब नहीं दिया. शैफाली सुबह 10 बजे अपनी मां रेनू से यह कह घर से निकली थी कि वह शिवानी को किताबें वापस कर घंटा सवा घंटा में वापस आ जाएगी. लेकिन दोपहर एक बजे तक भी वह घर नहीं लौटी थी. उसे गए हुए 3 घंटे हो गए थे. जैसेजैसे समय बीतता जा रहा था, वैसेवैसे रेनू और उस के पति भूरा की चिंता बढ़ती जा रही थी.

रेनू बारबार उस का मोबाइल नंबर मिला रही थी, लेकिन उस का मोबाइल स्विच्ड औफ था. जब भूरा से नहीं रहा गया तो शैफाली का पता लगाने के लिए घर से निकल पड़ा. उस ने बेटे अशोक को भी साथ ले लिया था.

शैफाली की सहेली शिवानी का घर गांव के दूसरे छोर पर था. भूरा राजपूत वहां पहुंचा तो घर का दरवाजा अंदर से बंद था. भूरा ने दरवाजा खटखटाया तो कुछ देर बाद शिवानी के भाई संदीप ने दरवाजा खोला. शैफाली के पिता को देख कर संदीप घबरा गया. लेकिन अपनी घबराहट को छिपाते हुए उस ने पूछा, ‘‘अंकल आप, कैसे आना हुआ?’’

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भूरा गुस्से में बोला, ‘‘शैफाली और शिवानी कहां हैं?’’

‘‘अंकल शैफाली तो यहां नहीं आई. मेरी बहन शिवानी मातापिता और भाई के साथ गांव गई है. वे लोग 2 दिन बाद वापस आएंगे.’’ संदीप ने जवाब दिया.

संदीप की बात सुन कर भूरा अपशब्दों की बौछार करते हुए बोला, ‘‘संदीप, तू ज्यादा चालाक मत बन. तू ने मेरी भोलीभाली बेटी को अपने प्यार के जाल में फंसा रखा है. तू झूठ बोल रहा है कि शैफाली यहां नहीं आई. उसे जल्दी से घर के बाहर निकाल वरना पुलिस ला कर तेरी ऐसी ठुकाई कराऊंगा कि प्रेम का भूत उतर जाएगा.’’  ‘‘अंकल मैं सच कह रहा हूं, शैफाली नहीं आई. न ही मैं ने उसे छिपाया है.’’ संदीप ने फिर अपनी बात दोहराई.

यह सुनते ही भूरा संदीप से भिड़ गया. उस ने संदीप के साथ हाथापाई की. फिर पुलिस लाने की धमकी दे कर चला गया. उस के जाते ही संदीप ने दरवाजा बंद कर लिया. यह बात 13 जून, 2019 की है. भूरा राजपूत लगभग 2 बजे पुलिस चौकी मंधना पहुंचा. संयोग से उस समय बिठूर थाना प्रभारी विनोद कुमार सिंह भी चौकी पर मौजूद थे. भूरा ने उन्हें बताया, ‘‘सर, मेरा नाम भूरा राजपूत है और मैं कछियाना गांव का रहने वाला हूं. मेरे गांव में संदीप रहता है. उस ने मेरी बेटी शैफाली को बहलाफुसला कर अपने घर में छिपा रखा है. शायद वह शैफाली को साथ भगा ले जाना चाहता है. आप मेरी बेटी को मुक्त कराएं.’’

चूंकि मामला लड़की का था. थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह पुलिस के साथ कछियाना गांव निवासी संदीप के घर जा पहुंचे. घर का मुख्य दरवाजा बंद था. थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने दरवाजे की कुंडी खटखटाई, साथ ही आवाज भी लगाई. लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. संदीप के दरवाजे पर पुलिस देख कर पड़ोसी भी अपने घरों से बाहर आ गए. वे लोग जानने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर संदीप के घर ऐसा क्या हुआ जो पुलिस आई है. जब दरवाजा नहीं खुला तो थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ पड़ोसी विजय तिवारी की छत से हो कर संदीप के घर में दाखिल हुए.

घर के अंदर एक कमरे का दृश्य देख कर सभी पुलिस वाले दहल उठे. कमरे के अंदर संदीप और शैफाली के शव पंखे के सहारे साड़ी के फंदे से झूल रहे थे. इस के बाद गांव में कोहराम मच गया. भूरा राजपूत और उस की पत्नी रेनू बेटी का शव देख कर फफक पड़े. शैफाली की बहनें भी फूटफूट कर रोने लगीं. पड़ोसी विजय तिवारी ने संदीप द्वारा आत्महत्या करने की सूचना उस के पिता दिनेश कमल को दे दी.

थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने प्रेमी युगल द्वारा आत्महत्या करने की बात वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी तो कुछ देर बाद एसपी (पश्चिम) संजीव सुमन तथा सीओ अजीत कुमार घटनास्थल पर आ गए. उन्होंने फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया.

उस के बाद पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और फंदों से लटके शव नीचे उतरवाए. मृतक संदीप की उम्र 20-22 वर्ष थी, जबकि मृतका शैफाली की उम्र 18 वर्ष के आसपास. मौके पर फोरैंसिक टीम ने भी जांच की.

टीम ने मृतक संदीप की जेब से मिले पर्स व मोबाइल को जांच के लिए कब्जे में ले लिया. मृतका शैफाली की चप्पलें और मोबाइल भी सुरक्षित रख ली गईं. पुलिस टीम ने वह साड़ी भी जांच की काररवाई में शामिल कर ली. जिस से प्रेमीयुगल ने फांसी लगाई थी.

दोनों के परिजनों ने लगाए एकदूसरे पर आरोप

अब तक मृतक संदीप के मातापिता  व भाईबहन भी गांव से लौट आए थे और शव देख कर बिलखबिलख कर रोने लगे. संदीप की मां माधुरी गांव जाने से पहले उस के लिए परांठा सब्जी बना कर रख कर गई थी. संदीप ने वही खाया था.

पुलिस अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों से घटना के संबंध में पूछताछ की और दोनों के शव पोस्टमार्टम हेतु लाला लाजपत राय अस्पताल कानपुर भिजवा दिए. मृतकों के परिजन एकदूसरे पर दोषारोपण कर रहे थे, जिस से गांव में तनाव की स्थिति बनती जा रही थी. इसलिए पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा की दृष्टि से गांव में पुलिस तैनात कर दी. साथ ही आननफानन में पोस्टमार्टम करा कर शव उन के घर वालों को सौंप दिए.

कानपुर महानगर से 15 किलोमीटर दूर जीटी रोड पर एक कस्बा है मंधना. जो थाना बिठूर के क्षेत्र में आता है. मंधना कस्बे से कुरसोली जाने वाली रोड पर एक गांव है कछियाना. मंधना कस्बे से मात्र एक किलोमीटर दूर बसा यह गांव सभी भौतिक सुविधाओं वाला गांव है.

भूरा राजपूत अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहता है. उस के परिवार में पत्नी रेनू के अलावा एक बेटा अशोक तथा 4 बेटियां शैफाली, लवली, बबली और अंजू थीं. भूरा राजपूत डेयरी चलाता था. इस काम में उसे अच्छी आमदनी होती थी. उस की आर्थिक स्थिति मजबूत थी.

भाईबहनों में बड़ी शैफाली थी. वह आकर्षक नयननक्श वाली सुंदर युवती थी. वैसे भी जवानी में तो हर युवती सुंदर लगती है. शैफाली की तो बात ही कुछ और थी. वह जितनी खूबसूरत थी, पढ़ने में उतनी ही तेज थी. उस ने सरस्वती शिक्षा सदन इंटर कालेज मंधना से हाईस्कूल पास कर लिया था. फिलहाल वह 11वीं में पढ़ रही थी.

पढ़ाईलिखाई में तेज होने के कारण उस के नाजनखरे कुछ ज्यादा ही थे. लेकिन संस्कार अच्छे थे. स्वभाव से वह तेजतर्रार थी, पासपड़ोस के लोग उसे बोल्ड लड़की मानते थे.

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कछियाना गांव के पूर्वी छोर पर दिनेश कमल रहते थे. उन के परिवार में पत्नी माधुरी के अलावा 2 बेटे थे. संदीप उर्फ गोलू, प्रदीप उर्फ मुन्ना और बेटी शिवानी थी. दिनेश कमल मूल रूप से कानपुर देहात जनपद के रूरा थाने के अंतर्गत चिलौली गांव के रहने वाले थे. वहां उन की पुश्तैनी जमीन थी. जिस में अच्छी उपज होती थी. दिनेश ने कछियाना गांव में ही एक प्लौट खरीद कर मकान बनवा लिया था. इस मकान में वह परिवार सहित रहते थे. वह चौबेपुर स्थित एक फैक्ट्री में काम करते थे.

दिनेश कमल का बेटा संदीप और बेटी शिवानी पढ़ने में तेज थे. इंटरमीडिएट पास करने के बाद संदीप ने आईटीआई कानपुर में दाखिला ले लिया. वह मशीनिस्ट ट्रेड से पढ़ाई कर रहा था.

शैफाली की सहेली का भाई था संदीप

शिवानी और शैफाली एक ही गांव की रहने वाली थीं, एक ही कालेज में साथसाथ पढ़ती थीं. अत: दोनों में गहरी दोस्ती थीं. दोनों सहेलियां एक साथ साइकिल से कालेज आतीजाती थीं. जब कभी शैफाली का कोर्स पिछड़ जाता तो वह शिवानी से कौपीकिताब मांग कर कोर्स पूरा कर लेती और जब शिवानी पिछड़ जाती तो शैफाली की मदद से काम पूरा कर लेती. दोनों के बीच जातिबिरादरी का भेद नहीं था. लंच बौक्स भी दोनों मिलबांट कर खाती थीं.

एक रोज कालेज से छुट्टी होने के बाद शिवानी और शैफाली घर वापस आ रही थीं. तभी रास्ते में अचानक शैफाली का दुपट्टा उस की साइकिल की चेन में फंस गया. शैफाली और शिवानी दुपट्टा निकालने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन वह निकल नहीं रहा था.

उसी समय पीछे से शिवानी का भाई संदीप आ गया. वह मंधना बाजार से सामान ले कर लौट रहा था. उस ने शिवानी को परेशान हाल देखा तो स्कूटर सड़क किनारे खड़ा कर के पूछा, ‘‘क्या बात है शिवानी, तुम परेशान दिख रही हो?’’

‘‘हां, भैया देखो ना शैफाली का दुपट्टा साइकिल की चेन में फंस गया है. निकल ही नहीं रहा है.’’

‘‘तुम परेशान न हो, मैं निकाल देता हूं.’’ कहते हुए संदीप ने प्रयास किया तो शैफाली का दुपट्टा निकल गया. उस रोज संदीप और शैफाली की पहली मुलाकात हुई. पहली ही नजर में दोनों एकदूसरे की ओर आकर्षित हो गए. खूबसूरत शैफाली को देख कर संदीप को लगा यही मेरी सपनों की रानी है. हृष्टपुष्ट स्मार्ट संदीप को देख कर शैफाली भी प्रभावित हो गई.

सहेली के भाई से हो गया प्यार

उसी दिन से दोनों के दिलों में प्यार की भावना पैदा हुई तो मिलन की उमंगें हिलोरें मारने लगीं. आखिर एक रोज शैफाली से नहीं रहा गया तो उस के कदम संदीप के घर की ओर बढ़ गए. उस रोज शनिवार था. आसमान पर घने बादल छाए थे, ठंडी हवा चल रही थी. संदीप घर पर अकेला था. वह कमरे में बैठा टीवी पर आ रही फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ देख रहा था. तभी दरवाजे पर दस्तक हुई. संदीप ने दरवाजा खोला तो सामने खड़ी शैफाली मुसकरा रही थी.

‘‘शिवानी है?’’ वह बोली.

‘‘वह तो मां के साथ बाजार गई है, आओ बैठो. मैं शिवानी को फोन कर देता हूं.’’ संदीप ने कहा.

‘‘मैं बाद में आ जाऊंगी.’’ शैफाली ने कहा ही था कि मूसलाधार बारिश शुरू हो गई.

‘‘अब कहां जाओगी?’’

‘‘जी.’’ कहते हुए शैफाली कमरे में आ गई और संदीप के पास बैठ कर फिल्म देखने लगी.

कमरे का एकांत हो 2 युवा विपरीत लिंगी बैठे हों, और टीवी पर रोमांटिक फिल्म चल रही हो तो माहौल खुदबखुद रूमानी हो जाता है. ऐसा ही हुआ भी शैफाली ने फिल्म देखतेदेखते संदीप से कहा, ‘‘संदीप एक बात पूछूं?’’

‘‘पूछो?’’

‘‘प्यार करने वालों का अंजाम क्या ऐसा ही होता है.’’

‘‘कोई जरूरी नहीं.’’ संदीप ने कहा, ‘‘प्यार  करने वाले अगर समय के साथ खुद अनुकूल फैसला लें और समझौता न कर के आगे बढ़ें तो उन का अंत सुखद होगा.’’

‘‘अपनी बात तो थोड़ा स्पष्ट करो.’’

‘‘देखो शैफाली, मैं समझौतावादी नहीं हूं. मैं तो तुरतफुरत में विश्वास करता हूं और दूसरे मेरा मानना है कि जो चीज सहज हासिल न हो उसे खरीद लो.’’

‘‘अच्छा संदीप अगर मैं कहूं कि मैं तुम से प्यार करती हूं, तब तुम मेरा प्यार हासिल करना चाहोगे या खरीदना पसंद करोगे?’’

शैफाली के सवाल पर संदीप चौंका. उस का चौंकना स्वाभाविक था. वह यह तो जानता था कि शैफाली बोल्ड लड़की है, लेकिन उस की बोल्डनैस उसे क्लीन बोल्ड कर देगी, वह नहीं जानता था. संदीप, शैफाली के प्रश्न का उत्तर दे पाता, उस के पहले ही शिवानी मां के साथ बाजार से लौट आई. आते ही शिवानी ने चुटकी ली, ‘‘शैफाली, संदीप भैया से मिल लीं. आजकल तुम्हारे ही गुणगान करता रहता है ये.’’

‘‘धत…’’ शैफाली ने शरमाते हुए उसे झिड़क दिया. फिर कुछ देर दोनों सहेलियां हंसीमजाक करती रहीं. थोड़ा रुक कर शैफाली अपने घर चली गई.

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बढ़ने लगा प्यार का पौधा

उस दिन के बाद दोनों में औपचारिक बातचीत होने लगी. दिल धीरेधीरे करीब आ रहे थे. संदीप शैफाली को पूरा मानसम्मान देने लगा था. जब भी दोनों का आमनासामना होता, संदीप मुसकराता तो शैफाली के होंठों पर भी मुसकान तैरने लगती. अब दोनों की मुसकराहट लगातार रंग दिखाने लगी थी.

एक रविवार को संदीप यों ही स्कूटर से घूम रहा था कि इत्तेफाक से उस की मुलाकात शैफाली से हो गई. शैफाली कुछ सामान खरीदने मंधना बाजार गई थी. चूंकि शैफाली के मन में संदीप के प्रति चाहत थी. इसलिए उसे संदीप का मिलना अच्छा लगा. उसने मुसकरा कर पूछा, ‘‘तुम बाजार में क्या खरीदने आए थे?’’  ‘‘मैं बाजार से कुछ खरीदने नहीं बल्कि घूमने आया था. मुझे पंडित रेस्तरां की चाय बहुत पसंद है. तुम भी मेरे साथ चलो. तुम्हारे साथ हम भी वहां एक कप चाय पी लेंगे.’’  ‘‘जरूर.’’ शैफाली फौरन तैयार हो गई.

पास ही पंडित रेस्तरां था. दोनों जा कर रेस्तरां में बैठ गए. चायनाश्ते का और्डर देने के बाद संदीप शैफाली से मुखातिब हुआ, ‘‘बहुत दिनों से मैं तुम से अपने मन की बात कहना चाह रहा था. आज मौका मिला है, इसलिए सोच रहा हूं कि कह ही दूं.’’

शैफाली की धड़कनें तेज हो गईं. वह समझ रही थी कि संदीप के मन में क्या है और वह उस से क्या कहना चाह रहा है. कई बार शैफाली ने रात के सन्नाटे में संदीप के बारे में बहुत सोचा था.

उस के बाद इस नतीजे पर पहुंची थी कि संदीप अच्छा लड़का है. जीवनसाथी के लिए उस के योग्य है. लिहाजा उस ने सोच लिया था कि अगर संदीप ने प्यार का इजहार किया तो वह उस की मोहब्बत कबूल कर लेगी.

‘‘जो कहूंगा, अच्छा ही कहूंगा.’’ कहते हुए संदीप ने शैफाली का हाथ पकड़ा और सीधे मन की बात कह दी, ‘‘शैफाली मैं तुम से प्यार करने लगा हूं.’’

शैफाली ने उसे प्यार की नजर से देखा, ‘‘मैं भी तुम से प्यार करती हूं संदीप, और यह भी जानती हूं कि प्यार में कोई शर्त नहीं होती. लेकिन दिल की तसल्ली के लिए एक प्रश्न पूछना चाहती हूं. यह बताओ कि मोहब्बत के इस सिलसिले को तुम कहां तक ले जाओगे?’’

साथ निभाने की खाईं कसमें

‘‘जिंदगी की आखिरी सांस तक.’’ संदीप भावुक हो गया, ‘‘शैफाली, मेरे लफ्ज किसी तरह का ढोंग नहीं हैं. मैं सचमुच तुम से प्यार करता हूं. प्यार से शुरू हो कर यह सिलसिला शादी पर खत्म होगा. उस के बाद हमारी जिंदगी साथसाथ गुजरेगी.’’

शैफाली ने भी भावुक हो कर उस के हाथ पर हाथ रख दिया, ‘‘प्यार के इस सफर में मुझे अकेला तो नहीं छोड़ दोगे?’’

‘‘शैफाली,’’ संदीप ने उस का हाथ दबाया, ‘‘जान दे दूंगा पर इश्क का ईमान नहीं जाने दूंगा.’’

शैफाली ने संदीप के होंठों को तर्जनी से छुआ और फिर उंगली चूम ली. उस की आंखों की चमक बता रही थी कि उसे जैसे चाहने वाले की तमन्ना थी, वैसा ही मिल गया है.

शैफाली और संदीप की प्रेम कहानी शुरू हो चुकी थी. गुपचुप मेलमुलाकातें और जीवन भर साथ निभाने के कसमेवादे, दिनोंदिन उन का पे्रमिल रिश्ता चटख होता गया. दोनों का मेलमिलाप कराने में शैफाली की सहेली शिवानी अहम भूमिका निभाती रही.

एक दिन प्यार के क्षणों में बातोंबातों में संदीप ने बोला, ‘‘शैफाली, अपने मिलन के अब चंद महीने बाकी हैं. मैं कानपुर आईटीआई से मशीनिस्ट टे्रड का कोर्स कर रहा हूं. मेरा यह आखिरी साल है. डिप्लोमा मिलते ही मैं तुम से शादी कर लूंगा.’’

संदीप की बात सुन कर शैफाली खिलखिला कर हंस पड़ी.

संदीप ने अचकचा कर उसे देखा, ‘‘मैं इतनी सीरियस बात कर रहा हूं और तुम हंस रही हो.’’

‘‘बचकानी बात करोगे तो मुझे हंसी आएगी ही.’’

‘‘मैं ने कौन सी बचकानी बात कह दी?’’

‘‘शादी की बात.’’ शैफाली ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘बुद्धू शादी के बाद पत्नी की सारी जिम्मेदारियां पति की हो जाती हैं. एक पैसा तुम कमाते नहीं हो, मुझे खिलाओगे कैसे? मेरे खर्च और शौक कैसे पूरे करोगे?’’

‘यह मैं ने पहले से सोच रखा है,’’ संदीप बोला, ‘‘डिप्लोमा मिलते ही मैं दिल्ली या नोएडा जा कर कोई नौकरी कर लूंगा. शादी के बाद हम दिल्ली में ही अपनी अलग दुनिया बसाएंगे.’’

बनाने लगे सपनों का महल

संदीप की यह बात शैफाली को मन भा गई. दिल्ली उस के भी सपनों का शहर था. इसीलिए संदीप ने उस से दिल्ली में बसने की बात कही तो उस का मन खुशी से झूम उठा.

संदीप और शैफाली का प्यार परवान चढ़ ही रहा था कि एक दिन उन का भांडा फूट गया. हुआ यूं कि उस रोज शैफाली अपने कमरे में मोबाइल पर संदीप से प्यार भरी बातें कर रही थी. उस की बातें मां रेनू ने सुनीं तो उन का माथा ठनका. कुछ देर बाद उन्होंने उस से पूछा, ‘‘शैफाली, ये संदीप कौन है? उस से तुम कैसी अटपटी बातें करती हो?’’

शैफाली न डरी न लजाई, उस ने बता दिया, ‘‘मां संदीप मेरी सहेली शिवानी का भाई है. गांव के पूर्वी छोर पर रहता है. बहुत अच्छा लड़का है. हम दोनों एकदूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं.’’

रेनू कुछ देर गंभीरता से सोचती रही, फिर बोली, ‘‘बेटी अभी तो तुम्हारी पढ़नेलिखने की उम्र है. प्यारव्यार के चक्कर में पड़ गई. वैसे तुम्हारी पसंद से शादी करने पर मुझे कोई एतराज नहीं है. किसी दिन उस लड़के को घर ले अना, मैं उस से मिल लूंगी और उस के बारे में पूछ लूंगी. सब ठीकठाक लगा तो तुम्हारे पापा को शादी के लिए राजी कर लूंगी.’’

3-4 दिन बाद शैफाली ने संदीप को चाय पर बुला लिया. होने वाली सास ने बुलाया है. यह जान कर संदीप के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे. उसे विश्वास हो था कि शैफाली के घर वालों की स्वीकृति के बाद वह अपने घर वालों को भी मना लगा. उस ने अभी तक अपने मांबाप को अपने प्यार के बारे में कुछ भी नहीं बताया था. घर में उस की बहन शिवानी ही उस की प्रेम कहानी जानती थी.

शैफाली की मां रेनू ने संदीप को देखा तो उस की शक्ल सूरत, कदकाठी तो उन्हें पसंद आई. लेकिन जब जाति कुल के बारे में पूछा तो रेनू की आंखों के आगे अंधेरा छा गया. संदीप दलित समाज का था.

नहीं बनी शादी की बात

संदीप के जाने के बाद रेनू ने शैफाली को डांटा, ‘‘यह क्या गजब किया. दिल लगाया भी तो एक दलित से. राजपूत और दलित का रिश्ता नहीं हो सकता. तू भूल जा उसे, इसी में हम सब की भलाई है. समाज उस से तुम्हारा रिश्ता स्वीकर नहीं करेगा. हम सब का हुक्कापानी बंद हो जाएगा. तुम्हारी अन्य बहनें भी कुंवारी बैठी रह जाएंगी. भाई को भी कोई अपनी बहनबेटी नहीं देगा.’’

शैफाली ने ठंडे दिमाग से सोचा तो उसे लगा कि मां जो कह रही हैं, सही बात है. इसलिए उस ने उस वक्त तो मां से वादा कर लिया कि वह संदीप को भूल जाएगी. लेकिन वह अपना वादा निभा नहीं सकी. वह संदीप को अपने दिल से निकाल नहीं पाई.

संदीप के बारे में वह जितना सोचती थी उस का प्यार उतना ही गहरा हो जाता. आखिर उस ने निश्चय कर लिया कि चाहे जो भी हो, वह संदीप का साथ नहीं छोड़ेगी. शादी भी संदीप से ही करेगी.

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भूरा राजपूत को शैफाली और संदीप की प्रेम कहानी का पता चला तो उस ने पहले तो पत्नी रेनू को आड़े हाथों लिया, फिर शैफाली को जम कर फटकार लगाई. साथ ही चेतावनी भी दी, ‘‘शैफाली, तू कान खोल कर सुन ले, अगर तू इश्क के चक्कर में पड़ी तो तेरी पढ़ाई लिखाई बंद हो जाएगी और तुझे घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं मिलेगी.’’

घर वालों के विरोध के कारण शैफाली भयभीत रहने लगी. वह अच्छी तरह जान गई थी कि परिवार वाले उस की शादी किसी भी कीमत पर संदीप के साथ नहीं करेंगे. उस ने यह बात संदीप को बताई तो उस का दिल बैठ गया. वह बोला, ‘‘शैफाली घर वाले विरोध करेंगे तो क्या तुम मुझे ठुकरा दोगी?’’

‘‘नहीं संदीप, ऐसा कभी नहीं होगा., मैं तुम से प्यार करती हूं और हमेशा करती रहूंगी. हम साथ जिएंगे, साथ मरेंगे.’’

‘‘मुझे तुम से यही उम्मीद थी, शैफाली.’’ कहते हुए संदीप ने उसे अपनी बांहों में भर लिया. उस की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे.

रेनू अपनी बेटी शैफाली पर भरोसा करती थीं. उन्हें विश्वास था कि समझाने के बाद उस के सिर से इश्क का भूत उतर गया है. इसलिए उन्होंने शैफाली के घर से बाहर जाने पर एतराज नहीं किया. लेकिन उस का पति भूरा राजपूत शैफाली पर नजर रखता था. उस ने  पत्नी से कह रखा था कि शैफाली जब भी घर से निकले, छोटी बहन के साथ निकले.

संदीप ने बुला लिया शैफाली को

13 जून, 2019 की सुबह 8 बजे संदीप के पिता दिनेश कमल अपनी पत्नी माधुरी बेटी शिवानी तथा बेटे मुन्ना के साथ अपने गांव चिलौली (कानपुर देहात) चले गए. दरअसल, बरसात शुरू हो गई थी. उन्हें मकान की मरम्मत करानी थी. उन्हें वहां सप्ताह भर रुकना था. जाते समय संदीप की मां माधुरी ने उस से कहा, ‘‘बेटा संदीप, मैं ने पराठा, सब्जी बना कर रख दी है. भूख लगने पर खा लेना.’’.

मांबाप, भाईबहन के गांव चले जाने के बाद घर सूना हो गया. ऐसे में संदीप को तन्हाई सताने लगी. इस तनहाई को दूर करने के लिए उस ने अपनी प्रेमिका शैफाली को फोन किया, ‘‘हैलो, शैफाली आज मैं घर पर अकेला हूं. घर के सभी लोग गांव गए हैं. तुम्हारी याद सता रही थी. इसलिए जैसे भी हो तुम मेरे घर आ जाओ.’’

‘‘ठीक है संदीप, मैं आने की कोशिश करूंगी.’’ इस के बाद शैफाली तैयार हुई और मां से प्यार जताते हुए बोली, ‘‘मां, कुछ दिन पहले मैं अपनी सहेली शिवानी से कुछ किताबें लाई थी. उसे किताबें वापस करने उस के घर जाना है. घंटे भर बाद वापस आ जाऊंगी.’’ मां ने इस पर कोई ऐतराज नहीं किया.

शैफाली किताबें वापस करने का बहाना बना कर घर से निकली ओर संदीप के घर जा पहुंची. संदीप उस का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. उस के आते ही संदीप ने उसे बांहों में भर कर चुंबनों की झड़ी लगा दी. इस के बाद दोनों प्रेमालाप में डूब गए.

दोनों ने लगा लिया मौत को गले

इधर भूरा राजपूत घर पहुंचा तो उसे अन्य बेटियां तो घर में दिखीं पर शैफाली नहीं दिखी. उस ने पत्नी से पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह सहेली के घर किताबें वापस करने लगने लगी थी. यह सुनते ही भूरा का मथा ठनका. उसे शक हुआ कि शैफाली बहाने से घर से निकली है और प्रेमी संदीप से मिलने गई है.

भूरा ने कुछ देर शैफाली के लौटने का इंतजार किया, फिर उस की तलाश में घर से निकल से निकल पड़ा. वह सीधा संदीप के घर पहुंचा. संदीप घर पर ही था. शैफाली के बारे में पूछने पर उस ने भूरा से झूठ बोल दिया कि शैफाली उस के घर नहीं है. शैफाली को ले कर भूरा की संदीप से हाथापाई भी हुई फिर वह पुलिस लाने की धमकी दे कर वहां से पुलिस चौकी चला गया.

संदीप ने शैफाली को घर में ही छिपा दिया था. पिता की धमकी से वह डर गई थी. उस ने संदीप से कहा, ‘‘संदीप, घर वाले हम दोनों को एक नहीं होने देंगे. और मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकती. अब तो बस एक ही रास्ता बचा है वह है मौत का. हम इस जन्म में न सही अगले जन्म में फिर मिलेंगे.’’

संदीप ने शैफाली को गौर से देखा फिर बोला, ‘‘शैफाली मैं भी तुहारे बिना नहीं जी सकता. मैं तुम्हारा साथ दूंगा. इस के बाद दोनों ने मिल कर पंखे के कुंडे से साड़ी बांधी और साड़ी के दोनों किनारों का फंदा बनाया, एकएक फंदा डाल कर दोनों झूल गए. कुछ ही देर में उन की मौत हो गई.

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इधर भूरा राजपूत अपने साथ पुलिस ले कर संदीप के घर पहुंचा. बाद में पुलिस को कमरे में संदीप और शैफाली के शव फंदों से झूले मिले. इस के बाद तो दोनों परिवारों में कोहराम मच गया.

(कहानी सौजन्य- मनोहर कहानी )

पशु की सेहत का रखें खयाल

लेखक- एम. जीलानी

लेकिन कुछ किसान ही अपनी गायभैंसों से अच्छा दूध ले पाते हैं. ज्यादातर किसान अपनी गायभैंसों से उन की कूवत के मुताबिक दूध लेने में नाकाम रहते हैं और उन की गायभैंसें भी सेहतमंद नहीं रहती हैं. ज्यादातर गायभैंसें अक्तूबरनवंबर महीनों में ब्याती हैं. आमतौर पर गायभैंसें ब्याने में आधा घंटे से ले कर 3 घंटे तक का समय लेती हैं. अगर गायभैंसें ब्याने में इस से ज्यादा समय लें, तो फौरन पशु चिकित्सक को बुला कर दिखाएं.

अगर गाय या भैंस का नवजात बच्चा (बछिया, बछड़ा या कटिया, कटरा) पैदा होने के 30 सैकंड बाद भी सांस लेना शुरू नहीं करता?है तो उसे कृत्रिम सांस (आर्टिफिशियल सांस) दिलाएं. नवजात बच्चे की छाती को धीरेधीरे दबाएं और पिछले हिस्से को उठा लें. ऐसा करने से बच्चा सांस लेना शुरू कर देगा.

नवजात बच्चा पैदा होने के 2-3 घंटे बाद पहला गोबर करता है. अगर नवजात बच्चा पैदा होने के 2-3 घंटे बाद गोबर नहीं करता है, तो उसे 30 मिलीलिटर अरंडी का तेल पिला दें.

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नवजात बच्चे के जिस्म पर (ब्याने के फौरन बाद) लगा लसलसा पदार्थ आमतौर पर मां (गाय या भैंस) चाट कर साफ कर देती है. अगर लसलसा पदार्थ नवजात बच्चे की मां चाट कर ठीक से साफ नहीं करती है तो ऐसी हालत में उसे साफ, सूखे कपड़े से पोंछ दें.

आमतौर पर गायभैंसें ब्याने के 2-4 घंटे बाद जेर गिरा देती हैं, लेकिन कभीकभी वे

8-12 घंटे तक का समय जेर गिराने में लेती हैं.

अगर गायभैंसें ब्याने के 8-12 घंटे बाद भी जेर नहीं डालती हैं तो इस का मतलब जेर रुक गई है. ऐसी हालत में फौरन पशुओं के डाक्टर या किसी माहिर से बच्चेदानी में फ्यूरिया जैसी दवा डलवाएं.

अगर गायभैंसें ब्याने के 30 घंटे बाद भी जेर नहीं गिराती हैं, तो पशुओं के डाक्टर से उसे निकलवाएं. ब्याई गई गाय या भैंस को पहले

5 दिनों तक 100 मिलीलिटर बच्चेदानी की सफाई वाली दवा दिन में 2 बार पिलाएं.

बच्चे (बछिया, बछड़ा या कटिया या कटरा) के पैदा होते ही उस की टुंडी यानी नाभि पर एंटीसैप्टिक यानी टिंचर आयोडीन, डेटोल या हलदी पाउडर लगाएं.

पैदा हुए बच्चे को खीस (पेवसी/पहला दूध) जल्द ही पिला दें. खीस की खुराक बच्चे के जिस्म के 1/10वें हिस्से के बराबर रखें यानी 10 किग्रा के बच्चे को 1 लिटर खीस पीने को दें और 30 किग्रा के बच्चे को 3 लिटर खीस पिलाएं.

यह खीस बच्चे के लिए बहुत ही पौष्टिक आहार है. खीस में ऐसी खासीयत होती है, जो बच्चे को बीमारियों से बचाती है. यह बच्चे में बीमारी से लड़ने की कूवत पैदा करती है. खीस पिलाने से बच्चा बचपन से ही तंदुरुस्त रहता है.

अक्तूबनवंबर माह में सर्दी पड़ना शुरू हो जाता है, ऐसे में बच्चे और उस की मां को सर्दी से बचाएं. बच्चे को सेहतमंद रखने के लिए और कब्ज से बचाने के लिए समयसमय पर 30-40 मिलीलिटर अरंडी का तेल पिलाते रहें.

जब बच्चे की उम्र 3 महीने की हो जाए तो उसे खुरपकामुंहपका बीमारी से बचाव का टीका लगवाएं. 6 महीने से ज्यादा उम्र वाले पशुओं को खुरपकामुंहपका, गलघोंटू और लंगरिया बीमारियों को रोकने वाला टीका लगवाएं.

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गाय और भैंस को हर 3 लिटर व ढाई लिटर दूध के हिसाब से 1 किलोग्राम राशन दें. जो गायभैंसें दूध नहीं दे रही हैं, उन्हें हर दिन

1 किलोग्राम राशन देना चाहिए.

गायभैंसों को 70 फीसदी हरा चारा और 30 फीसदी सूखा चारा देना चाहिए. तकरीबन 100 किलोग्राम वजन वाली गाय को

2.5 किलोग्राम और भैंस को 3 किलोग्राम सूखी खुराक की जरूरत होती है. इस में दोतिहाई चारा और एकतिहाई दाना देना चाहिए.

हरे चारे में कम से कम 11-12 फीसदी प्रोटीन होना चाहिए और दाने में 18-20 फीसदी प्रोटीन जरूरी?है. सभी पशुओं को संतुलित मात्रा में प्रोटीन देना जरूरी होता है.

पशुओं को संतुलित मात्रा में चारादाना दिन में 2 बार 8-10 घंटे के अंतराल पर दें. इस के अलावा 2 बार साफ ताजा पानी पीने को दें.

6 महीने की गाभिन गाय को 1 किलोग्राम व

6 महीने की गाभिन भैंस को डेढ़ किलोग्राम राशन (दाना) अलग से दें.

दुधारू पशुओं को रोजाना कम से कम

5 किलोग्राम हरा चारा जरूर दें. सर्दी के मौसम में बरसीम सब से अच्छा हरा चारा होता?है.

पशु के राशन में 2 फीसदी मिनरल मिक्सचर जरूर मिलाएं.

पशुओं से ज्यादा दूध लेने और उन को लंबे समय तक सेहतमंद बनाए रखने के लिए उन्हें संतुलित मात्रा में चारादाना (राशन) देना जरूरी होता?है. संतुलत राशन में खनिज लवण के साथ पोषक तत्त्व, प्रोटीन, विटामिन वगैरह तय मात्रा में रखे जाते हैं.

संतुलित आहार (राशन) बनाने का फार्मूला न्यूट्रीशन ऐक्सपर्ट से संपर्क कर के हासिल करें. संतुलित राशन घर पर भी बना सकते हैं. राशन बनाने में उम्दा क्वालिटी का अनाज (जई, जौ, गेहूं, ज्वार वगैरह), तेल, खली (सरसों, मूंगफली वगैरह की खली), ग्वारमील, शीरा, नमक, मिनरल मिक्सचर व विटामिनों का संतुलित मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है.

एडवांस डेरी फार्म पर पूरक आहार (सप्लीमैंट्री राशन) दिया जाता है. पूरक आहार खिलाने से पशु के जिस्म में आई कमियां दूर हो जाती हैं और वह लंबे समय तक सेहतमंद व दुधारू बना रहता?है. पूरक आहार में मिनरल मिक्सचर, फीड एडिटिव, बाईपास प्रोटीन, बी कांप्लैक्स वगैरह को शामिल किया जाता?है. बहुत सी प्राइवेट कंपनियां पूरक आहार बाजार में बेचती?हैं, तो उन की पूरी जानकारी हासिल कर के अपने पशु को पूरक आहार खिलाएं.

छोटे या जवान पशुओं को बाहरी और अंदरूनी कीड़े काफी नुकसान पहुंचाते हैं. अंदरूनी कीड़े जैसे फीताकृमि, गोलकृमि, वगैरह पशु के पेट में रह कर उस का आहार व खून पीते हैं, वहीं बाहरी कीड़े जैसे जूं, किल्ली, पिस्सू माइट वगैरह पशु के बाहरी जिस्म पर रहते हैं और उस का खून चूसते हैं. बाहरी और अंदरूनी दोनों ही कीड़े पशु को कमजोर बना देते हैं, जिस के चलते पशु की दूध देने की कूवत कम होती जाती है और पशु समय से पहले ही कमजोर व बीमार हो कर मर सकता है.

पशुओं के अंदरूनी कीड़ों को मारने के लिए कीड़ेमार दवा जैसे फेंटास, एल्बोमार, पैनाखुर वगैरह की सही मात्रा पशु

चिकित्सक से पूछ कर दें. वहीं बाहरी कीड़ों को मारने के लिए ब्यूटाक्स दवा की

2 मिलीलिटर मात्रा को 1 लिटर पानी में घोल कर पशु के शरीर पर अच्छी तरह से पोंछा लगाएं, पर दवा लगाने से पहले पशु के मुंह पर मुचका जरूर बांध दें, ताकि पशु दवा को चाट न सके.

पशुओं के गोबर का इस्तेमाल उपले यानी ईंधन बनाने में कतई न करें. गड्ढा खोद कर उस में गोबर डालें और गोबर की खाद तैयार करें. जिन पशुपालकों के पास खेती की जमीन नहीं है, वे गोबर की खाद गड्ढे में तैयार कर उसे अच्छे दामों पर बेच सकते हैं. जैविक खेती में गोबर की सड़ी खाद की काफी मांग रहती है.

दूध उत्पादन के लिए हमेशा दुधारू नस्ल के पशु ही पालें. गाय में साहीवाल, हरियाणा, करनस्विस, करनफ्रिज वगैरह और भैंस में मुर्रा, मेहसाना वगैरह नस्लें माली नजरिए से फायदेमंद साबित होती हैं.

दुधारू पशु (गायभैंस) खरीदने से पहले उस की नस्ल, दूध देने की कूवत वगैरह की जांच जरूर करनी चाहिए. पशु की वंशावली का रिकौर्ड भी जरूर देखना चाहिए यानी उस की मां, नानी, परनानी वगैरह कितना दूध देती थीं. इस के अलावा आप अपने इलाके और सुविधाओं के आधार पर ही पशु का चुनाव करें.

पशुशाल हमेशा ऐसी जगह बनाएं, जहां बारिश का पानी नहीं भरता हो. जगह हवादार व साफसुथरी होनी चाहिए. पशुशाला का फर्श पक्का खुरदरा रखें. गोबर को पशुशाला से उठा कर दूर खाद के गड्ढे में डालें. पशुशाला से पानी की निकासी का भी सही बंदोबस्त रखें.

पशुशाला के आसपास गंदा पानी जमा न होने दें. पशुशाला में मक्खीमच्छर से

बचाव का भी इंतजाम करें. पशुओं को सर्दी, गरमी व बरसात से बचाने के लिए पशुशाला में पुख्ता इंतजाम करें.

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ध्यान रखें कि पशुओं को किसी भी तरह की परेशानी न हो. सर्दी के मौसम में पशुशाला में बिछावन के लिए भूसा, लकड़ी का बुरादा, पेड़ों की सूखी पत्तियां या गन्ने की सूखी पत्तियों का इस्तेमाल करें. बिछावन गीला होने के बाद उसे गोबर के साथ उठा कर खाद के गड्ढे में डाल दें. हर रोज सूखा बिछावन ही इस्तेमाल में लाएं.   ठ्ठ

गाजर की खेती में कृषि यंत्र

लेखक-भानु प्रकाश राणा

इस फसल को तकरीबन हर तरह की मिट्टी में उपजाया जा सकता है, लेकिन इस के लिए सब से सही बलुई दोमट मिट्टी होती है. इस फसल पर पाले का असर भी नहीं होता है.

खेत की तैयारी

खेत की जुताई कर के छोड़ दें, जिस से मिट्टी को तेज धूप लगे और कीड़ेमकोड़े खत्म हो जाएं. उस के बाद ट्रैक्टर हैरो या कल्टीवेटर से 3-4 बार जुताई करें. अच्छी तरह से पाटा चलाएं, जिस से मिट्टी भुरभुरी हो जाए. देशी गोबर वाली खाद मिला कर खेत को तैयार करें. इस के बाद गाजर के बीजों की बोआई करें. खेत में चाहें तो क्यारियां भी बना सकते हैं.

गाजर की मुख्य किस्में

पूसा केसर : यह एक उन्नतशील एशियाई किस्म है, जिस की जड़ें लालनारंगी सी होती हैं. जड़ें लंबीपतली व पत्तियां कम होती हैं. यह अगेती किस्म है, जिस में अधिक तापमान को सहन करने की कूवत होती है.

पूसा यमदिग्न: यह अधिक उपज देने वाली किस्म है. इस की जड़ों का रंग हलका नारंगी (बीच के हिस्से में हलका पीला) होता है. गूदा मुलायम व मीठा होता है.

पूसा मेघाली : यह किस्म अच्छी मानी जाती है. किसान अपने इलाके के हिसाब से कृषि जानकारों से राय ले कर इस के बीज बो सकते हैं. यह किस्म भी अच्छे गुण वाली है.

पूसा रुधिर : यह पूसा की खास किस्म है. आकर्षक लंबी लाल जड़ें, चमकता लाल रंग, समान आकार और ज्यादा मिठास इस प्रजाति की खासीयतें हैं. इस के अलावा हिसार गेरिक, हिसार रसीली, हिसार मधुर, पूसा अंकिता वगैरह हैं.

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इन सब के अलावा यूरोपियन किस्मों की बोआई अक्तूबरनवंबर माह में करते हैं.

बीज की मात्रा और समय

अगेती किस्मों को अगस्त से सितंबर महीने तक ही बो दें. मध्यम व पछेती किस्मों को नवंबर महीने के आखिरी हफ्ते तक बोया जाता है. गाजर की बोआई के लिए 6-7 किलोग्राम बीजों की प्रति हेक्टेयर जरूरत होती?है. बोआई लाइनों में मेंड़ बना कर करें. इन मेंड़ों की आपस की दूरी 30-45 सैंटीमीटर और पौधे की दूरी 6 से 8 सैंटीमीटर रखें या छोटीछोटी क्यारियां बना कर बोएं.

खाद व उर्वरक

गाजर की अच्छी खेती लेने के लिए देशी गोबर की खाद 15 से 20 ट्रौली प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खेत में डालें. नाइट्रोजन 30 किलोग्राम, फास्फोरस 40 किलोग्राम और पोटाश 80 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बोआई से 15-20 दिन पहले मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएं. 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से नाइट्रोजन बोआई से 35-40 दिनों बाद छिड़कें, जिस से जड़ें अच्छी विकसित हो सकें.

सिंचाई : बोआई के लिए पलेवा करें या नमी होने पर बोएं. बोआई के 10-15 दिनों के बाद नमी न होने पर हलकी सिंचाई करें. सिंचाई अधिक पैदावार लेने के लिए जरूरी है, इसलिए हलकीहलकी सिंचाई करें. खेत में नमी रहना जरूरी है.

खरपतवार : खेत में खरपतवार न पनपने दें. समय रहते ही खरपतवार निकालते रहें. साथ ही, गाजर के पौधे ज्यादा घने महसूस हों तो उन्हें कम कर दें.

कीड़े व बीमारियां : गाजर में ज्यादातर पत्ती काटने वाला कीड़ा लगता है, जो पत्तियों को नुकसान पहुंचाता है. इस की रोकथाम के लिए जरूरी उपाय करें. फसल को अगेती बोएं. गाजर की फसल में एक पीलापन वाली बीमारी लगती है, जो पत्तियों को खराब करती है. बीजों को 0.1 फीसदी मरक्यूरिक क्लोराइड से उपचारित कर के बोने पर यह बीमारी नहीं लगती है.

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खुदाई : जब गाजर की मोटाई व लंबाई ठीकठाक और बाजार भेजने लायक हो जाए, तो खुदाई करनी चाहिए. खुदाई के लिए खेत में नमी होनी चाहिए. खुदाई के समय ध्यान रखें कि जड़ों को नुकसान न पहुंचे. जड़ों के कटने से भाव घट जाता?है.

उपज : गाजर की फसल का ठीक तरह से ध्यान रखा जाए, तो 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज होती है. वैसे, उपज किस्मों पर अधिक निर्भर करती?है.

कृषि मशीनों का इस्तेमाल

गाजर की बिजाई मजदूरों के अलावा मशीन से भी कर सकते हैं. इस के लिए तमाम कृषि यंत्र बाजार में मौजूद हैं. हरियाणा के अमन विश्वकर्मा इंजीनियरिंग वर्क्स के मालिक महावीर प्रसाद जांगड़ा ने खेती में इस्तेमाल की जाने वाली तमाम मशीनें बनाई हैं, जिन में गाजर बोने के लिए गाजर बिजाई की मशीन भी शामिल है.

बिजाई की मशीन

बैड प्लांटर व मल्टीक्रौप बिजाई मशीन बोआई के साथसाथ मेंड़ भी बनाती है. इस मशीन से गाजर के अलावा मूली, पालक, धनिया, हरा प्याज, मूंग, अरहर, जीरा, गेहूं, लोबिया, भिंडी, मटर, मक्का, चना, कपास, टिंडा, तुरई, फ्रांसबीन, सोयाबीन, टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी, सरसों, राई और शलगम जैसी तमाम फसलें बोई और काटी जा सकती हैं.

मशीन से धोएं गाजर

खेत से निकालने के बाद गाजरों की धुलाई का काम भी काफी मशक्कत वाला होता है, जिस के लिए मजदूरों के साथसाथ ज्यादा पानी की जरूरत भी होती है.

जिन किसानों के खेत किसी नहरपोखर वगैरह के किनारे होते हैं, उन्हें गाजर की धुलाई में आसानी हो जाती है. इस के लिए वे लोग नहर के किनारे मोटर पंप के जरीए पानी उठा कर गाजरों की धुलाई कर लेते हैं. लेकिन सभी को यह फायदा नहीं मिल पाता.

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महावीर जांगड़ा ने जड़ वाली सब्जियों की धुलाई करने के लिए भी मशीन बनाई है. इस धुलाई मशीन से गाजर, अदरक व हलदी जैसी फसलों की धुलाई आसानी से की जाती है. इस मशीन से कम पानी में ज्यादा गाजरों की धुलाई की जा सकती है. इस मशीन को ट्रैक्टर से जोड़ कर आसानी से इधरउधर ले जाया जा सकता है.

कपल्स के लिए परफैक्ट है आमिर अली और संजीदा शैख का फैशन

टीवी की दुनिया में कई नाम ऐसे है जो अपनी जोड़ी के कारण जाने जाते है. कुछ ऐसी ही जोड़ी है आमिर अली और संजिदा शेख की. शादी के 7 साल बाद भी दोनों के प्यार में वही नया पन है जो शुरुआती दिनों में था. फैंस इन दोनों की जोड़ी को काफी पसंद करते है. आमिर ने साल 2005 में साराभाई vs साराभाई से छोटे पर्दे पर कदम रखा था, इसमें उनका रोल कुछ एपिसोड तक ही था फिर उसी साल टीवी के पौपुलर सीरियलों मे से एक ‘कहानी घर घर की’  से उनको असल पहचान मिली. वही संजिदा ने 2006 में आए पौपुलर सीरियल ‘क्या होगा निम्मो का’ में लीड रोल से की. दोनों को ‘नच बलिए 3’ में काफी पसंद किया गया, इस शो को आमिर और  संजिदा ने जीता. इन दोनों की जाड़ी की बात करें तो दोनों एक दूसरे को काफी कोम्प्लिमेंट देते है. स्टाइल और फैशन में भी ये जोड़ी सबका दिल जीत चुकी है. अगर आप भी अपने पार्टनर के साथ कुछ खास ट्राय करना चाहते है तो इनके स्टाइल को जरुर फौलो करें.

इंडियन फेस्टिवल के लिए परफेक्ट है ये लुक

शादी और इंडियन फेस्टिवल की शुरुआत हो चुकी है ऐसे  में अगर आप अपने पार्टनर के साथ कुछ स्पेशल ट्राय करना चाहते है तो आमिर संजिदा का ये लुक परफेक्ट है. येलो कलर की धोती और कोटी साथ में वाइट कुर्ता काफी रिच लुक दे रहा है. वही संजिदा का वाइट लहंगा और साथ में ग्रीन चुनरी इस पूरे कपल लुक को काफी एलिगेंट बना रही है.

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खास पार्टी के लिए ट्राय करें ब्लैक लुक  

अगर आप किसी कपल पार्टी में जाने वाले है इस ब्लैक लुक से अच्छा कुछ और नही है. इंडो वेस्टर्न लुक के साथ संजिदा का ब्लैक गाउन काफी कौम्प्लिमेंटेबल लग रहा है. इस लुक में आमिर ने जो कलरफुल शूज पहने है वो इस लुक और भी अच्छा बना रहे है.

 

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Since it’s Thursday 😉😉 #throwbackthursday

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रोमांटिक डिनर के लिए ट्राय करें ये लुक

अगर आप केंडल लाइट डिनर प्लान कर रहे है और इस खास पल और भी ज्यादा हसीन बनाना चाहते है तो आपको कुछ खास पहनना चाहिए. इस कपल लुक को देखिए…संजिदा का वन पीस ड्रेस जिसपर नेट के उपर वर्क है, काफी सिड्क्टिव फील दे रहा है वही आमिर एक दम टफ लग रहे है इस लुक को परफेक्ट बना रहा है.

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Together is a wonderful place to be 😘@iamsanjeeda

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चेक के साथ आर्मी प्रिंट लुक

आमिर और संजिदा का ये लुक किसी भी ओकेजन के लिए परफेक्ट है. संजिदा का चेक प्रिंट टोप स्कर्ट काफी सेक्सी लुक दे रहा है वही आमिर का  ब्लैक एंड वाइट कलर आर्मी प्रिंट इसे पूरी तरह कम्प्लीट लुक बना रहा है. इस ब्लैक एंड वाइट लुक को कोई भी कपल और कैसी भी स्किन टोन वाले कपल ट्राय कर सकते है.

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जाने क्यों शादी से पहले ही विवियन डीसेना की एक्सगर्लफ्रेंड ने तोड़ा रिश्ता

श्रीमद भागवत महापुराण में देवी इंद्रानी को रोल में नजर आ रही एक्ट्रेस गरिमा जैन इन दिनों अपने रिलेशनशिप को लेकर सुर्खियों में है. गरिमा ने  डायमंड मर्चेंट राहुल सराफ के साथ इसी साल 13 जून को सगाई की थी. दोनों ने अपनी म्यूचल अंडरस्टैंडिंग के चलते साथ में जीवन खुजारने की कसमें भी खाई पर ये कसमें ज्यादा दिन नही टिकी और दोनों को अपनी सगाई तोड़नी पड़ी.

 मुझे लगता है कि हमने रिश्ते में जल्दबाजी कर दी

हाल ही में गरिमा जैन ने एक इंटरव्यू में बताया की ‘मुझे लगता है कि हमने रिश्ते में जल्दबाजी कर दी थी. हम मुश्किल से ही एक दूसरे को जान पाए थे की जिंदगी ने इस मोड़ ला खड़ा कर दिया. मेरे रोके के बाद से हमारे बीच कुछ ना कुछ दिक्कतें आ रही थी. शायद ये इस वजह से भी हो सकता है क्योंकि हम अलग-अलग इंडस्ट्री से बिलौन्ग करते है. राहुल मेरे इंटीमेट सीन्स करने में कम्फर्टेबल नहीं था और उसे खराब लगता था कि मैं ऑनस्क्रीन छोटे कपड़े पहनती हूं. हमने इस पर काम करने की भरपूर कोशिश की लेकिन चीजें सही नहीं हो रही थी. कई बार नाकाम होने के बाद हमने इस रिश्ते को खत्म करने का ही फैसला ले लिया’.

विवियन को कर चुकी है डेट

बता दे की गरिमा को सीरियल ‘शक्ति अस्तित्व के एहसास की’ में रावी के रोल में नजर आ चुकी है. इस सीरियल में गरिमा ने विवियन की बहन का रोल किया था. दोनों ने औफ स्क्रीन एक दूसरें को डेट किया पर दोनों का रिश्ता ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और दोनों ने इस रिश्ते को खत्म कर दिया, हालांकि आज तक ना विवियन ने और ना ही गरिमा ने इस रिश्ते को कबूला है.

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