इस हौट ब्राजीलियन एक्ट्रेस को डेट कर रहे हैं सूरज पंचोली, देखें फोटोज देखें

बौलीवुड एक्टर सूरज पंचोली वैसे तो ज्यादा लाइमलाइट में नहीं रहते है, पर इस बार वो अपनी गर्लफ्रेंड के कारण चर्चाओं में आ गए है. दरअसल सूरज पंचोली की गर्लफ्रेंड लारिसा बोनेसी काफी बोल्ड अंदाज में फोटोज शेयर करती है. जिसके चलते उनकी फैन फौलोविंग काफी है. लारिसा बोनेसी के अकेले इंस्टाग्राम पर 117 हजार फौलोवर्स है. लारिसा को फोटोज क्लीक कराने का काफी शौक है, आए दिन वो अपनी बिकिनी फोटोज शेयर करती रहती है. हौटनेस से भरपूर इन फोटोज से वो करोड़ो लोगों का दिल जीत चुकी है. हाल ही में भी लारिसा ने कुछ बिकिनी फोटोज शेयर की जिसके बाद उनकी फोटोज काफी वायरल हुई.

लारिसा बोनेसी को पसंद है समुंदर

लारिसा बोनेसी को समुंदर किनारे जाकर सनबाथ लेना काफी पसंद है वो खाली समय में अक्सर इसी अंदाज में ही देखा जाता है. हाल ही में वो वेकेशन पर गई थी जिसकी फोटोज उन्होंने शेयर की, लारिसा की इन फोटोज ने सभी का ध्यान अपनी ओर खीचा.

 

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art has no rules ✨ – Captured and edited by my baby girl @gabisabbagh

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Brazil feels like . . . ? 🇧🇷🐚🧜🏽‍♀️

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सूरज पंचोली को पसंद है लारिसा का नेचर

सूरज की गर्लफ्रेंड लारिसा काफी बबली है उनके इस  अंदाज को सूरज काफी पसंद करते है. लारिसा क्यूटनेस के मामले में हर किसी को मात दे सकती है.  इस फोटोज में ही देख लीजिए सूरज पंचोली की गर्लफ्रेंड वाकई में किसी डौल से कम नहीं लग रही है. लारिसा की स्माइल इतनी प्यारी है कि कोई भी उसपर अपना दिल हार सकता है. शायद इसी स्माइल में बौलीवुड एक्टर सूरज पंचोली भी फिदा हो गए है.

 

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“ Find a place where every single thing you see tells you to stay. “ 🐚🌸🌏☀️ #BaliVibes #MotherNature #FindYourself

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 बिकिनी में दिखा अलग रंग

इंस्टाग्राम पर की काफी बिकिनी फोटोज है जिसको देखकर ही बताया जा सकता है की वो क्यों लाखों लोगों की धड़कन है. सूरज की इस ब्राजीलियन गर्लफ्रेंड को काफी समय से डेट कर रहे है. दोनों आपने रिलेशन को लेकर काफी ओपन है. इन दोनों की  जोड़ी को फैंस काफी पसंद करते है.

‘बेटी पढ़ाओ’ नारे को नहीं मानता यह समुदाय

लेखक-शंकर जालान

मूल रूप से गुजरात के अहमदाबाद व राजकोट के बीच जोटिया गांव के इस ‘गुजराती’ समुदाय का मानना है कि लड़की को चौथी जमात तक पढ़ा लिया, उसे जोड़घटाव व गुणाभाग आ गया, बस उस की पढ़ाई पूरी हो गई. मूल रूप से पुराने कपड़ों के बदले स्टील और प्लास्टिक के बरतन व दूसरा सामान दे कर उस से होने वाली मामूली आमदनी पर ये लोग किसी तरह दो वक्त की रोटी का जुगाड़ ही कर पाते हैं.

सिंधी बागान बस्ती की रहने वाली

25 साला बंदनी गुजराती ने बताया कि इस बस्ती में ‘गुजराती’ समुदाय के तकरीबन 30 परिवार रहते हैं, लेकिन किसी घर की लड़की ने 5वीं जमात की दहलीज पर पैर नहीं रखा है.

बेटियों यानी लड़कियों को पढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कई तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं, इस के बावजूद भी आप लोग लड़कियों को चौथी जमात से आगे क्यों नहीं पढ़ाते हैं? इस सवाल के जवाब में इस बस्ती की सब से बुजुर्ग 55 साला विद्या गुजराती नामक औरत ने बताया कि दिनरात मेहनत कर के किसी तरह घरपरिवार का गुजारा होता है. औसतन 6 से 8 हजार रुपए महीने की कमाई में उन के लिए लड़कियों को ज्यादा पढ़ाना मुमकिन नहीं है.

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23 साला चुन्नी गुजराती ने बताया कि उस के समुदाय में लड़कों का काम घर पर रहना और घर की देखरेख करना है, जबकि लड़कियों का काम गलीगली, दरवाजेदरवाजे जा कर पुराने कपड़ों की एवज में ग्राहकों को उन की जरूरत के मुताबिक स्टील व प्लास्टिक के बरतन व दूसरा सामान देना होता है.

पुराने कपड़ों का क्या करते हैं? इस सवाल के जवाब में 26 साला जैली गुजराती व 20 साला राजा गुजराती ने बताया कि पुराने कपड़ों को बेचते हैं. पुराने कपड़ों का यह बाजार चितरंजन एवेन्यू में गिरीश पार्क से ले कर बिडन स्ट्रीट तक रोजाना देर रात तक लगता है.

शिमला माठ के रहने वाले 30 साला पंकज गुजराती की बात मानें तो इन दिनों ‘गुजराती’ समुदाय की कुछ लड़कियां पढ़ना चाहती हैं, लेकिन कोई सही सलाह देने वाला नहीं है. चुनाव के समय हर पार्टी के नेता यहां आ कर उन के विकास के बाबत भरोसा दे जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद उन की सुध लेने वाला कोई नहीं होता है.

इस बाबत स्थानीय पार्षद और विधायक स्मिता बक्सी का कहना है कि वे अपने लैवल पर पूरी कोशिश करती हैं कि हर बच्चा चाहे वह लड़की हो या लड़का स्कूल जाए लेकिन अगर किसी लड़की के मातापिता ऐसा नहीं चाहते हैं, तो इस में वे क्या कर सकते हैं.

दूसरी ओर, कोलकाता नगरनिगम के शिक्षा विभाग के मेयर परिषद के सदस्य अभिजीत मुखर्जी का कहना है कि विभाग की सारी कोशिशों के बावजूद कुछ मातापिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते. सर्वशिक्षा अभियान के तहत नगरनिगम द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों को अपग्रेड कर 8वीं जमात तक किया गया है. कामकाजी औरतें अपनी बेटियों को अकेले छोड़ने से डरती हैं, इसलिए वे उन्हें अपने साथ ले कर काम पर निकलती हैं.

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ऐसी ही गरीब कामकाजी औरतों को ध्यान में रख कर डे बोर्डिंग स्कूल तैयार किया जा रहा है, जहां पर लड़कियां महफूज भी रह सकें और पढ़ भी सकें. द्य

40 की उम्र में भी स्टाइल आइकन है गौरव चौपड़ा

रघुवेंद्र प्रताप सिंह राठौर के नाम से फैमस और छोटे पर्दे के टफ मेन यानी गौरव चौपड़ा 40 साल के हो चुके लेकिन उन्होंने अपने फिटनेस पर जो कंट्रोल किया है उसे देखकर आपको भी लगेगा की वो महज 24-25 साल के नौजवान हैं. गौरव ने अपने कैरियर की शुरुआत साल 2003 में आए सीरियल ‘पिया का घर’ से की. साल 2006 में आए सीरियल ‘लेफ्ट राईट लेफ्ट’ में उनकी एक्टिंग को काफी सराहा गया इसके बाद 2010 में ‘उतरन’ सीरियल में उनके रोल रघुवेंद्र प्रताप सिंह राठौर को लोगों ने अपने दिल में वो जगह दी जो आज भी कायम है. गौरव अपनी परसनेलिटी के चलते लड़कियों में खासा पौपुलर रहते है. बात अगर उनकी स्टाइल की करें तो सभी उनको फौलो करते है. इसलिए आज हम लेकर आए है गौरव के कुछ खास लुक्स जिसे ट्राय करके आप भी लड़कियों में पौपुलर हो सकते है.

वेकेशन पर ट्राय करें ये लुक

अगर आप किसी हौलीडे पर जाने की प्लेनिंग कर रहे है त़ो इस लुक को ट्राय करना ना भूले. ओपन शर्ट और गले में स्कार्फ साथ में सन ग्लासेज इस पूरे लुक को कंप्म्लिट कर रहा हैं. अगर आप किसी सी साइट पर जा रहे है तो ये लुक आपके लिए परफेक्ट है.

 

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❤️ My daily dose of #lovesharing #vacation #valentineanniversaryweek #maldives @kandima_maldives

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मेन इन ब्लैक लुक

अगर आप गौर करेंगे तो दिखेगा इस सूट की स्लीव्स और नीचे साइट लेदर का काम है जो इस ब्लैक सूट को किसी और सूट से अलग बनाता है. इस सूट में जो बौ टाई का यूज किया है वो इस लुक को और रिच बना रहा है.

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सूट के साथ ट्राय करें चेक टी शर्ट

इस लुक की सबसे खास बात है इसका चेक प्रिंट जो पूरा घ्यान खीच रहा है. सूट के साथ हमेशा शर्ट को हि ट्राय किया जाता है पर अगर आप इसे टी-शर्ट के साथ ट्राय करेंगे तो ये आपको कौन्ट्रास लुक तो देगा ही साथ  आपकी परसनेलिटी को भी इंफ्रूव करेंगा.

 

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Presenting the #geeklook ! From last night ! Onset of winters. Brings about the experiment! #winterfashion #mensfashion #just

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कभी ट्राय करना हो अगर कलरफुल लुक

गौरव के इस लुक की बात अलग है क्योंकि इस स्टाइल को आप कही भी ट्राय कर सकते है. रेड बंडाना के साथ ग्रे कोट और लाईट ग्रे कलर की टी-शर्ट वीद औरेंज ट्राउजर, काफी अलग और हटके है. इस लुक गौरव कमाल लग रहा है.

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समुंदर में यूं मस्ती करती दिखीं ‘जमाई राजा 2’ की एक्ट्रेस, दिखा हौट अवतार

छोटे पर्दे की सबसे हौट एक्ट्रेसेस में से एक निया शर्मा इन दिनों फिर अपनी हौटनेस के कारण सोशल मीडिया में काफी वायरल हो रही है. साल 2010 में अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली निया को सीरियल ‘एक हजारो में मेरी बहना है’ से काफी पौपुलेरिटी मिलने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर भी लोगों का दिल जीत लिआ है. निया सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है जिसके चलते उनकी फैन फौलोविंग काफी अच्छी है. हाल ही में निया सफेद बिकीनी में समुंद्र में बेहद अलग अंदाज में दिखाई दी. जिसमें वो काफी सेक्सी लग रही थी.

फोटोज के जरीए मचाया तहलका

निया ने इंस्टाग्राम पर अपनी लेटेस्ट फोटोज शेयर की है जो उनके फैंस को बहुत पसंद आ रही हैं. नीले समुंदर में निया सफेद बिकीनी पहने जेट स्कींग करती दिख रही हैं. हाल ही में निया शूटिंग के लिए पांडिचेरी गयी थी और वहीँ पर उन्होंने ने अपनी ये फोटोज क्लीक कराई है. सोशल मीडिया पर वो अक्सर अपनी हौट फोटोज शेयर करती रहती है जिसके चलते वो चर्चाओं में रहती है. निया शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत टीवी सीरियल ‘एक हजारो में मेरी बहना है’ से की थी.

 

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Running away from boring lectures and conversations like @zee5premium #jamai2.0 @viniyardfilms @cashmakeupartistry @sankpalsavita

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You may have Seen a blue sky and blue sea together but have you Seen Pizzas and a flat stomach together? 😊

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जल्द नजर आएंगी ‘जमाई राजा 2′ में

निया शर्मा इन दिनों अपने टीवी शो ‘जमाई राजा 2’ की शूटिंग में व्यस्त चल रही हैं. इसी की शूटिंग के लिए वो पांडिचेरी गई हुई थी. शूटिंग में व्यस्त होने के बावजूद उन्होंने अपने लिए थोड़ा समय निकाल कर पांडिचेरी के बीच पर जेट स्कींग की.

नंबर 1 पर रहा निया का शो

सीरियल ‘एक हजारो में मेरी बहना है’ दर्शकों को बहुत पसंद आया था और तो और निया शर्मा का किरदार भी अपना लगा था. ‘एक हजारो में मेरी बहना है’ के बाद निया शर्मा जमाई राजा में नजर आई. टीआरपी की लिस्ट में ये शो नंबर 1 पर रह चुका है. उनकी एक्टिंग स्टाइल के सभी दिवाने है. निया को ‘खतरों के खिलाड़ी’ में भी काफी पसंद किया था.

सलमान खान ने औनस्क्रीन मां के साथ मनाया रक्षाबंधन

बौलीवुड स्टार सलमान खान को यू ही भाई के नाम से नहीं जाना जाता, किसी भी रिश्ते को निभाना सलमान भली भाती जानते है. ऐसा ही कुछ देखने को मिला रक्षाबंधन के दिन, जब सलमान अपनी औनस्क्रीन मां यानी बीना काक जिनको आपने फिल्म “मैंने प्यार क्यों किया” में सलमान की मां के रोल में देखा होगा उनके घर रक्षाबंधन बनाने पहुंचे. कहना गलत नहीं होगा कि, सलमान खान एक बार जिसे दिल से अपना मानते हैं उसका साथ कभी नहीं छोड़ते.

राजस्थान पहुंचकर बनाया रक्षाबंधन

एक्ट्रेस बीना काक एक्टिंग के अलावा राजस्थान की राजनीति में भी काफी सक्रिय रहती हैं. जयपुर पहुंचकर सलमान खान ने बीना की बेटी से भी राखी बंधवाई. इस दौरान सलमान खान के चेहरे की खुशी देखने लायक थी. सलमान खान ने अपनी रक्षाबंधन बीना के घर पर मनाई. सलमान खान पहले भी कई बार बीना के साथ नजर आ चुके हैं.

बीना ने भी बांधा रक्षासूत्र

इस खास मौके पर बीना ने भी सलमान खान को राखी बांधी, जिसके बाद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर सलमान खान की फोटोज शेयर करके बताया कि, सलमान खान उनकी जिंदगी में कितना महत्व रखते है. सलमान के इसी लगाव के कारण लोग उनको भाई कहते हैं.

काफी करीब है अपनी औनस्क्रीन मां से

आपको बता दे कि, फिल्म में सलमान खान की मां के किरदार में नजर आ चुकी बीना काक असल जिंदगी में भी सलमान के बेहद करीब हैं. सलमान को बीना की बेटी की शादी की हर रस्म को अटेंड करते हुए देखा गया था.

 

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SK ,Kabir n Jawahar !!! My life line !!

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फिल्म दबंग 3’ के चलते थे राजस्थान में

सलमान इस समय अपनी फिल्म ‘दबंग 3’ की शूटिंग के लिए जयपुर पहुंचे हुए हैं. ऐसे में अपने काम से समय निकालकर सलमान खान बीना के घर रक्षाबंधन मनाने जा पहुंचे.  जहां उन्होंने काफी एंजौय किया. सलमान की इन राखी फोटोज को काफी पसंद किया जा रहा है. फैंस सलमान की इन्हीं अदाओं पर मर मिटते है.

पटना की सबसे बड़ी डकैती

उस दिन तारीख थी 21 जून. दोपहर करीब एक बजे का समय रहा होगा. सूरज अपने पूरे तेवर दिखा रहा था. लगता था जैसे आसमान से आग बरस रही हो. तेज गरमी और उमस के कारण बाजारों में ज्यादा भीड़भाड़ नहीं थी. बिहार की राजधानी पटना में दीघा-आशियाना रोड पर आभूषणों का नामी शोरूम पंचवटी रत्नालय है. इस शोरूम में उस समय कोई ग्राहक नहीं था. शोरूम मालिक रत्नेश शर्मा को भूख लगी थी. वैसे भी दोपहर के भोजन का समय हो गया था.

उन्होंने सोचा कि कोई ग्राहक नहीं है तो क्यों न इस समय का सदुपयोग कर के भोजन कर लें. शोरूम में 8 कर्मचारी अपनीअपनी सीट पर बैठे ग्राहकों का इंतजार कर रहे थे. गार्ड दीपू श्रीवास्तव शोरूम के अंदर गेट पर बैठा हुआ था.

रत्नेश शर्मा इसी उधेड़बुन में थे कि भोजन करने बैठें या कुछ देर और रुकें. इतनी देर में 2 ग्राहक गेट खोल कर शोरूम में आए. ग्राहकों को देख कर रत्नेश शर्मा और शोरूम के कर्मचारियों के चेहरे पर खुशी आ गई. दोनों ग्राहकों ने एक शोकेस पर पहुंच कर कहा, ‘‘भैया, हमें डायमंड के ईयरिंग्स लेने हैं, कोई लेटेस्ट डिजाइन वाले दिखाओ.’’

शोरूम के कर्मचारी ने दोनों ग्राहकों को शोकेस के सामने रखी आरामदायक कुरसी पर बैठने का इशारा किया और अलमारी से डायमंड के ईयरिंग्स निकालने लगा. शोरूम कर्मचारियों को अचानक याद आया कि ये ग्राहक तो 1-2 बार पहले भी आए थे, लेकिन खरीदारी कुछ नहीं की थी.

कर्मचारियों ने उन में से एक ग्राहक को पहचान लिया था, लेकिन आमतौर पर कई बार ऐसा होता है कि ग्राहक को भले ही किसी दुकान पर कोई चीज पसंद न आए. लेकिन वह दोबारा उस दुकान पर खरीदारी करने पहुंचता है.

उसी दौरान 8-10 युवक तेजी से शोरूम के अंदर घुस आए. इन में से 3 युवकों के चेहरे हेलमेट से ढंके हुए थे. 2-3 युवकों ने चेहरा गमछे से इस तरह ढंका हुआ था, जैसे गरमी से परेशान लोग ढंक लेते हैं. उन में से 2-3 युवकों के चेहरे खुले हुए थे. इन सभी युवकों के पास हाथ में या पीठ पर बैग था. इन में से कुछ युवक जींस और कुछ पैंट टीशर्ट पहने हुए थे.

शोरूम में घुसते ही 3-4 युवकों ने पिस्टल वगैरह निकाल ली. बाद में आए युवकों को देख कर डायमंड के ईयरिंग्स खरीदने आए दोनों युवकों ने भी अपने बैग से हथियार निकाल लिए. उन लोगों के हाथ में पिस्टल देख कर गार्ड दीपू श्रीवास्तव ने विरोध करने का प्रयास किया, तो एक युवक ने उस के सिर पर पिस्टल के बट से हमला कर दिया. इस से दीपक के सिर से खून बहने लगा.

गार्ड दीपू पर हमला होते देख कर शोरूम मालिक रत्नेश शर्मा आगे बढ़े तो एक युवक ने उन के सिर में भी पिस्टल से हमला कर दिया. उन के सिर से भी खून रिसने लगा. रत्नेश समझ गए कि वे लोग बदमाश हैं और शोरूम में डाका डालने आए हैं.

रत्नेश ने दुनिया देखी थी, उन्हें पता था कि ऐसे मौके पर विरोध करने का मतलब अपनी जान जोखिम में डालना होता है. इसलिए उन्होंने बदमाशों से कहा, ‘‘तुम्हें जो ले जाना है, ले जाओ लेकिन ये पिस्टल, तमंचे वगैरह दूर रखो.’’

शोरूम मालिक की बात सुन कर उन युवकों में हावभाव से सरगना नजर आ रहे अच्छी कदकाठी और खुले चेहरे वाले युवक ने कहा, ‘‘सेठजी, समझदार हो. तुम इस दुकान का बीमा करवाए हो न, ज्यादा होशियार बनोगे तो यहीं ठोंक देंगे.’’

ठोंकने की धमकी सुन कर शोरूम के कर्मचारी सहम गए. सरगना ने शोरूम के कर्मचारियों से अपनेअपने मोबाइल देने को कहा. कर्मचारियों ने अपने मोबाइल दे दिए तो सरगना ने शोरूम के कर्मचारियों को एक तरफ जमीन पर बैठा दिया.

इस के बाद सरगना ने शोरूम का गेट अंदर से बंद कर लिया और गेट पर एक कुरसी लगा कर बैठ गया. उस के निर्देशों पर उन बदमाशों ने शोरूम की एकएक अलमारी और शोकेसों को खंगाल कर सारे कीमती आभूषण निकाल लिए. इस बीच सरगना अपने गुर्गों को लगातार हिदायत देता रहा कि जल्दी करो और शांत रहो.वह शोरूम के कोने में जमीन पर बैठे कर्मचारियों को भी बीचबीच में धमकाता रहा कि हिलोगे तो गोली मार दूंगा.सरगना के कहे अनुसार बदमाशों ने सारे आभूषण अपने साथ लाए बैगों में भर लिए. तभी सरगना ने शोरूम मालिक रत्नेश से तिजोरी की चाबी मांगी. तिजोरी खोल कर सारे कीमती रत्नजवाहरात, डायमंड और सोने के आभूषण निकाल लिए. ये सभी जेवर भी एक बैग में भर लिए.

करीब आधे घंटे तक लूटपाट करने के बाद बदमाश जेवरों से भरे बैग ले कर एकएक कर शोरूम से बाहर निकल गए. सरगना नजर आ रहे खुले मुंह वाले बदमाश ने जाते समय शोरूम मालिक रत्नेश से कहा, ‘‘मुझे पहचान लो. हम मोस्टवांटेड हैं. पटना की पुलिस कई साल से हमारे पीछे पड़ी हुई है.’’ सरगना की भाषा लोकल थी. उस के गुर्गे भी स्थानीय भाषा में बात कर रहे थे.

भागने से पहले एक बदमाश ने शोरूम में लगे सीसीटीवी कैमरों का रिकौर्डर निकाल कर अपने बैग में रख लिया. जाते समय सरगना ने शोरूम के गार्ड दीपू श्रीवास्तव के सिर से खून बहता देख कर अपना गमछा उसे देते हुए कहा सिर पर बांध लो. इस के बाद सरगना व बाकी बदमाश शोरूम का गेट बाहर से बंद कर फरार हो गए. शोरूम मालिक व कर्मचारियों के मोबाइल वे अपने साथ ही ले गए थे.डकैतों के भागने के बाद शोरूम कर्मचारियों ने शोर मचा कर गेट खुलवाया. गेट खुला तो आसपास के लोगों को पता चला कि दिनदहाड़े ज्वैलरी शोरूम में डकैती डाली गई है. आसपास के दुकानदार और राहगीर वहां एकत्र हो गए.

पुलिस को सूचना दी गई तो करीब आधे घंटे बाद पुलिस पहुंची. पुलिस ने शोरूम मालिक रत्नेश शर्मा से पूछताछ की. रत्नेश ने मोटे तौर पर हिसाब लगा कर बताया कि डकैत लगभग 5 करोड़ रुपए के हीरेजवाहरात और कीमती आभूषणों के अलावा 13 लाख रुपए नकद लूट कर ले गए हैं. यह पटना की सब से बड़ी डकैती बताई गई.

दिनदहाड़े 5 करोड़ की डकैती की वारदात का पता चलने पर आईजी (जोन) सुनील कुमार, डीआईजी (सेंट्रल) राजेश कुमार, सीआईडी के डीआईजी पी.एन. मिश्रा और एसएसपी गरिमा मलिक सहित पुलिस के तमाम अफसर मौके पर पहुंच गए. शोरूम कर्मचारियों ने अधिकारियों से शिकायत करते हुए कहा कि अगर बाजार में पुलिस गश्त कर रही होती लुटेरे पकड़ लिए जाते.

पुलिस ने जांचपड़ताल शुरू करते हुए शोरूम मालिक और कर्मचारियों से पूछताछ की. शोरूम के आसपास के लोगों से भी पूछताछ की गई. पूछताछ में पता चला कि शोरूम में घुसे 10 बदमाशों की उम्र 20 से 35 साल के बीच थी. वे स्थानीय भाषा में बोल रहे थे.

सुराग की तलाश

मौके पर पुलिस को बदमाशों द्वारा गार्ड को दिया गया केवल एक गमछा ही मिला. बदमाश इस के अलावा कोई चीज वहां नहीं छोड़गए थे, जिस से उन का सुराग मिलता. पुलिस ने बदमाशों का सुराग लगाने और साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल टीम और डौग स्क्वायड को भी मौके पर बुला लिया.

बदमाशों का सुराग लगाने के लिए पुलिस ने बाजार में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. आसपास के लोगों से पूछताछ में प्रारंभिक तौर पर पता चला कि बदमाश 3 बाइकों और एक कार में सवार हो कर भागे थे. ये बाइक और कार ज्वैलरी शोरूम से कुछ दूर खड़ी की गई थीं.

इस का मतलब था कि बदमाश अपने वाहनों को शोरूम से दूर खड़ा कर पैदल ही डकैती डालने पहुंचे थे और डकैती डालने के बाद आराम से पैदल ही अपने वाहनों तक गए थे. पुलिस ने अनुमान लगाया कि शोरूम में घुसे बदमाशों के अलावा एकदो बदमाश बाहर भी जरूर रहे होंगे. इस तरह वारदात में 10 से 12 बदमाश शामिल होने का अनुमान लगाया गया.

उसी दिन शोरूम मालिकों की ओर से पटना के राजीव नगर थाने में डकैती की रिपोर्ट दर्ज करा दी गई. दिनदहाड़े सरेबाजार शोरूम मालिक और कर्मचारियें को बंधक बना 5 करोड़ रुपए की ज्वैलरी लूट कर बदमाशों ने पुलिस के सामने चुनौती पैदा कर दी. इस पर आईजी ने बदमाशों का सुराग लगाने के लिए एसएसपी गरिमा मलिक के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया.

एफएसएल टीम ने जांचपड़ताल कर पंचवटी रत्नालय से बदमाशों के करीब 25-30 फिंगरप्रिंट लिए. डौग स्क्वायड को वह गमछा सुंघाया गया, जिसे बदमाश गार्ड को दे गया था. गमछा सूंघ कर खोजी कुत्ता दुकान से बाहर निकला और कुछ दूर दीघा रोड तक जा कर वापस लौट आया.

प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई कि बदमाशों ने पंचवटी रत्नालय में डकैती डालने से पहले कई दिन रेकी की थी. वारदात से 2 दिन पहले 2 लोग शोरूम पर खरीदारी करने आए थे. उस दिन उन्होंने डायमंड के आभूषण देखे और बाद में आ कर लेने की बात कही थी.

इस के दूसरे दिन भी वे दोनों दोपहर में करीब एकसवा बजे आए थे और सोने की चेन देखने के बाद एटीएम से पैसा निकालने की बात कह कर चले गए थे. इन में से एक व्यक्ति डकैती डालने वालों में शामिल था. मुंह ढंका न होने से कर्मचारियों ने उसे पहचान लिया था.

वारदात का तरीका जान कर पुलिस अफसर समझ गए कि इस में किसी प्रोफेशनल गिरोह का हाथ है. पुलिस ने बदमाशों का सुराग लगाने के लिए सब से पहले सोना और ज्वैलरी लूटने वाले गिरोहों का रिकौर्ड निकलवाया. उन गिरोहों के सरगनाओं की ताजा गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए मुखबिर लगा दिए गए.

पता चला कि देश के सब से चर्चित सोना लूटने वाले गिरोह का सरगना सुबोध सिंह पटना के राजीव नगर इलाके का ही रहने वाला है और आजकल जेल में बंद है. लेकिन उस का गिरोह सक्रिय है. सुबोध सिंह कई राज्यों में सोना लूट की बड़ीबड़ी वारदातें कर चुका था. उस के गिरोह के एक बदमाश मनीष को एसटीएफ ने कुछ दिन पहले वैशाली जिले में मुठभेड़ में मार गिराया था.

नालंदा का रहने वाला सुबोध सिंह कुछ महीने पहले रूपसपुर में गिरफ्तार किया गया था. इस के बाद उसे सोना लूट की वारदातों के सिलसिले में जयपुर, कोलकाता, भुवनेश्वर व आसनसोल जेल ले जाया गया था. बाद में उसे आसनसोल से पटना की बेउर जेल में भेज दिया गया था.

बदमाशों की बातचीत के लहजे और वारदात के तरीके से पुलिस ने अनुमान लगाया कि इस में राजीव नगर के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले फुलवारी शरीफ और दानापुर के बदमाशों का हाथ हो सकता है.

वारदात वाले दिन पुलिस बदमाशों की तलाश, नाकेबंदी और इस तरह की वारदात करने वाले बदमाशों की धरपकड़ व पूछताछ की छापेमारी में जुटी रही, लेकिन कहीं से कोई सुराग नहीं मिला. दूसरे दिन पुलिस अधिकारी फिर से इस वारदात को सुलझाने की मशक्कत करने लगे.

पुलिस को शोरूम के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकौर्डिंग से बदमाशों के बारे में कुछ सुराग जरूर मिले, लेकिन उन के चेहरे साफ नहीं हुए. पुलिस को इतना जरूर पता चला कि बदमाशों ने वारदात में 3-4 बाइकों और एक फार्च्युनर गाड़ी इस्तेमाल की थी. बदमाशों के वाहनों की तसवीर रामनगरी से ले कर रूपसपुर नहर तक कैमरों में कैद हुई. रूपसपुर नहर से कुछ बदमाश जेपी सेतु से फरार हो गए और कुछ खगोल की ओर चले गए.

शोरूम मालिक और कर्मचारियों की ओर से बताए गए हुलिए के आधार पर पुलिस ने 2 बदमाशों के स्कैच बना कर जारी किए. ये स्कैच शोरूम में डकैती डालने वाले गिरोह के सरगना नजर आ रहे बदमाशों के थे.

पुलिस अधिकारियों ने स्कैच बनने के बाद अपराधियों की पहचान कर लेने का दावा किया, लेकिन उन के नामपते का खुलासा नहीं किया. पुलिस इन बदमाशों की तलाश में जुटी रही. इस के लिए अलगअलग जगहों से पचासों बदमाशों को थाने ला कर पूछताछ की गई.

वारदात के दूसरे ही दिन पंचवटी रत्नालय से करीब एक किलोमीटर दूर राजीव नगर नाला रोड साकेत भवन के पास लावारिस हालत में एक अपाचे बाइक खड़ी मिली. जांच में इस बाइक का नंबर फरजी निकला.

अपाचे बाइक पर रौयल एनफील्ड बुलेट का नंबर था. यह बाइक पटना के एक व्यक्ति के नाम पंजीकृत थी. पुलिस ने अनुमान लगाया कि यह बाइक बदमाशों के उन साथियों की हो सकती है, जो वारदात में लाइनर बन कर सहयोग कर रहे थे.

दिनदहाड़े 5 करोड़ की ज्वैलरी की लूट की वारदात को ले कर सर्राफा व्यापारियों में भारी आक्रोश था. पाटलिपुत्र सर्राफा संघ व अन्य व्यावसायिक संगठनों ने बिहार में आए दिन हो रही इस तरह की लूट की वारदातों के खिलाफ राज्यव्यापी अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी.

पुलिस पहुंची गर्लफ्रैंड तक

तीसरे दिन भी पटना पुलिस, सीआईडी और एसटीएफ  अपने तरीके से जांचपड़ताल और कई जिलों में छापेमारी कर बदमाशों का सुराग लगाने में जुटी रही, लेकिन इस का कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया. पुलिस ने बेउर जेल में बंद सोना लूटने वाले गिरोह के सरगना सुबोध सिंह से भी कई घंटों तक पूछताछ की. सुबोध से पूछताछ के बाद पुलिस ने बेउर जेल से पिछले दिनों छूटे 3-4 कुख्यात बदमाशों को संदिग्ध मानते हुए उन की तलाश शुरू की.

पुलिस ने 3 दिन में एक अपाचे बाइक के अलावा एक स्कौर्पियो और एक आई20 कार लावारिस हालत में बरामद की. इन वाहनों के नंबरों और चेसिस नंबरों के आधार पर भी पुलिस जांच करती रही. इस में अपाचे बाइक का वारदात में उपयोग होने की ज्यादा आशंका जताई गई.

चौथे दिन पुलिस को इस तरह की वारदात करने वाले एक कुख्यात बदमाश की गर्लफ्रैंड के बारे में पता चला. पुलिस ने दीघा इलाके में रहने वाली इस युवती से पूछताछ की. इस से पुलिस को कई अहम जानकारियां मिलीं. यह भी तय हो गया कि वारदात करने वाले कुछ बदमाश पटना सिटी और फुलवारी शरीफ के रहने वाले हैं.

पुलिस की कुछ टीमों ने इन बदमाशों पर फोकस कर दिया और उन की तलाश में जुट गईं. दूसरी तरफ  एसटीएफ  की टीमें नेपाल की सीमाओं, कोलकाता और ओडिशा में बदमाशों की तलाश करती रहीं.

एसटीएफ ने लूटे गए सोने की डीलिंग नेपाल के कसीनो में होने की आशंका में नेपाल पुलिस से भी सहयोग लिया. इस का कारण यह था कि सोना लूट के कुख्यात सरगना सुबोध सिंह का पुलिस मुठभेड़ में मारा गया साथी मनीष सिंह कुछ पार्टनरों के साथ नेपाल में कसीनो भी चलाता था.  पांचवें और छठे दिन भी पुलिस दावा करती रही कि बदमाशों की पहचान कर ली गई है, उन की तलाश में छापेमारी की जा रही है. लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद बदमाश पुलिस की पकड़ से दूर थे. उन का कोई अतापता नहीं मिल रहा था. पुलिस इस तरह की वारदात करने वाले 2-3 गिरोह के बदमाशों को ढूंढने में जुटी हुई थी.

इस बीच, 6 दिन से बंद रहे पंचवटी रत्नालय शोरूम की 27 जून को री-ओपनिंग की गई. शोरूम मालिक रत्नेश शर्मा ने अपने पुराने ग्राहकों, दोस्तों व रिश्तेदारों को बुलाया था. शोरूम को सजाया गया. ग्राहकों के आने से शोरूम में फिर से व्यापार शुरू कर दिया गया. पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से शोरूम पर 2 जवान तैनात कर दिए.

एक कुख्यात बदमाश की गर्लफ्रैंड से लगातार कई दिन की गई पूछताछ से 28 जून को पुलिस को भरोसा हो गया कि वारदात रवि गुप्ता और उस के गिरोह ने की है. पुलिस की ओर से बनवाए गए स्कैच भी रवि की शक्ल से मिलान कर रहे थे. सीसीटीवी फुटेज में भी रवि की तसवीर कुछ जगह नजर आई थी. पुलिस ने रवि के साथ वारदात करने वाले कुछ अपराधियों को सीसीटीवी फुटेज और स्कैच दिखाए तो उस की पुष्टि भी हो गई.

आखिर मिल गई सफलता

इस के बाद पुलिस ने रवि गुप्ता उर्फ नेताजी उर्फ रवि पेशेंट उर्फ मास्टरजी के साथ उस के गिरोह को तलाशने में अपनी सारी ऊर्जा लगा दी. रवि अपने ठिकानों पर नहीं मिला. वह अपनी गर्लफ्रैंड से भी काफी समय से नहीं मिला था. उस के मोबाइल व वाट्सऐप वगैरह भी बंद मिले. पुलिस लगातार जुटी रही. अंतत: उस की मेहनत का परिणाम सामने आ गया.

पंचवटी रत्नालय में हुई डकैती के मामले में पुलिस ने पहली जुलाई को रवि गुप्ता उर्फ रवि पेशेंट के अलावा उस के 2 साथी बदमाशों विकास कुमार और सिपू कुमार को गिरफ्तार कर लिया. एडीजी (मुख्यालय) जितेंद्र कुमार, डीआईजी राजेश कुमार और एसएसपी गरिमा मलिक ने पटना स्थित पुलिस मुख्यालय में प्रैस कौन्फ्रैंस कर वारदात का खुलासा कर दिया.

पुलिस अफसरों ने बताया कि उन के पास सूचना थी कि रवि गुप्ता और उस के गुर्गे दीघा थाना क्षेत्र के कुर्जी बालू में आएंगे. इस सूचना पर घेराबंदी और छापेमारी कर के रवि, विकास और सिपू को पकड़ लिया गया. जबकि इन के कुछ साथी बदमाश भाग गए.

पुलिस ने पूछताछ के बाद इन बदमाशों की निशानदेही पर कुर्जी बालू के विकास नगर में सिपू के ठिकाने से करीब एक करोड़

11 लाख रुपए के सोनेचांदी के आभूषण बरामद किए. बदमाशों से करीब एक लाख रुपए के रत्न, 6 लाख 30 हजार रुपए नकद, एक बाइक, एक बैग, 3 देसी पिस्तौल और 7 कारतूस भी बरामद किए.

डकैत गिरोह के सरगना रवि गुप्ता उर्फ रवि पेशेंट पर डकैती, हत्या, लूट आदि के 17 मामले दर्ज थे. वह पटना में आलमगंज थाना इलाके के मछुआ टोली में रहता है. दूसरे बदमाश विकास कुमार पर डकैती, लूट, आर्म्स एक्ट व अन्य गंभीर अपराधों के 19 मुकदमे चल रहे थे. वह पटना के आलमगंज में माली गायघाट दक्षिणी गली का रहने वाला था.

तीसरे बदमाश सिपू कुमार के खिलाफ  पुलिस रिकौर्ड में लूट का केवल एक मामला दर्ज था. वह मूलरूप से सारण का रहने वाला था और फिलहाल पटना के दीघा इलाके में कुर्जी बालू के विकास नगर में रहता था.

पुलिस की ओर से गिरफ्तार तीनों बदमाशों से की गई पूछताछ में रवि गुप्ता के कुख्यात अपराधी बनने और पंचवटी रत्नालय में डकैती डालने की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

रवि मूलरूप से अररिया के जोगबन का रहने वाला था. उस के पिता हिंदू और मां मुसलिम थी. रवि के जवान होने से पहले ही उस के मातापिता की हत्या हो गई थी. इस के बाद वह अररिया के अपराधियों के संपर्क में आया और छोटेमोटे अपराध करने लगा. बाद में वह पटना आ गया. पटना आ कर वह राजधानी और अन्य जिलों में बड़ी वारदातें करने लगा.

दिनदहाड़े डकैती डालना और विरोध करने पर गोलियां चलाना उस की फितरत थी. वह पटना से ले कर पूरे बिहार, झारखंड, ओडिशा और कोलकाता तक वारदातें करता था. इन सभी राज्यों के कुख्यात अपराधी उस के संपर्क में रहते थे.

वह अलगअलग वारदातों में दूसरे राज्यों के बदमाशों को शामिल करता था, ताकि पुलिस उन को पहचान न सके. आपराधिक वारदातों के बाद वह इन्हीं बदमाशों के जरिए दूसरे राज्यों में छिप जाता था.

रवि कई बार जेल जा चुका था. सन 2010 में उसे पटना की आलमगंज थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था. बाद में उसे जेल भेज दिया गया. जमानत पर छूटने के बाद वह फिर से एक अन्य आपराधिक मामले में जेल चला गया. सन 2017 में वह जेल से बाहर आया था. इस के बाद से वह फरार था. पुलिस उसे कई वारदातों में तलाश रही थी.

कुख्यात लुटेरा होने के साथ रवि अव्वल दरजे का अय्याश भी था. जेल से बाहर होने पर उस की अधिकांश रातें महंगे होटलों में अय्याशी करते हुए बीतती थीं. उस की एक गर्लफ्रैंड पटना सिटी में दीघा इलाके में रहती थी.

गर्लफ्रैंड के माध्यम से मिली सफलता

पुलिस ने इस युवती से पूछताछ की, तो पता चला कि रवि ने पिछले कई महीनों से कोई बड़ी वारदात नहीं की. इसलिए वह पैसे की तंगी से गुजर रहा था. वारदात के बाद रवि का अपनी गर्लफ्रैंड से संपर्क बना हुआ था. इसी से पुलिस को रवि का सुराग मिला था.

वारदात से करीब एक महीने पहले रवि ने पटना में ही बड़ी वारदात की योजना बनाई. इस के लिए उस ने राजधानी की करीब 10 ज्वैलरी शोरूमों की रैकी की. कई बार की रैकी के बाद उस ने पंचवटी रत्नालय को अपना निशाना बनाने का फैसला किया. यह बात रवि की गर्लफ्रैंड को पता थी.

वारदात में किनकिन बदमाशों को शामिल करना है, यह भी रवि ने तय कर लिया. इस में अधिकांश बदमाश धनबाद और झारखंड के थे. वारदात के लिए हथियार और गाडि़यों की व्यवस्था भी रवि ने ही की थी. वारदात से पहले सभी बदमाश दीघा के कुर्जी इलाके में एकत्र हुए. वहां रवि ने सभी बदमाशों को पूरी प्लानिंग समझाई. पंचवटी रत्नालय पहुंचने और वहां से फरार होने का रास्ता भी बताया. रवि की अगुवाई में कुल 10 बदमाशों की ओर से की गई इस वारदात में एक कार और 3 बाइकों का उपयोग किया गया. वारदात के बाद रवि व सिपू के साथ 2 अन्य बदमाश कार में बैठ कर फरार हुए. बाकी 6 बदमाश बाइकों से भागे. फरार होने के तुरंत बाद रवि ने कार में बैठेबैठे ही उन के पास मौजूद लूट के आभूषणों और नकदी का बंटवारा कर दिया.

कुछ किलोमीटर चलने के बाद बदमाश अलगअलग दिशाओं में बंट गए. जेपी सेतु पार कर रवि, सिपू और 2 अन्य बदमाश कार से छपरा की ओर भाग गए, जबकि बाइक पर सवार बदमाश रूपस नहर के सहारे खगोल स्टेशन की ओर चले गए. बाद में रवि और विकास धनबाद चले गए और सिपू अपने पैतृक गांव सारण चला गया. रवि बाद में गिरिडीह और कोलकाता भी गया था.

रवि ने अपने पास जो आभूषण रखे थे, उन में से कुछ गहने उस ने 20 लाख रुपए में एक दुकानदार को बेच दिए थे. रवि से बरामद 6 लाख 30 हजार रुपए उसी रकम में से बचे हुए थे. बाकी रकम रवि ने खर्च कर दी थी. रवि ने पुलिस को बताया कि लूट के बाकी जेवरात दूसरे फरार बदमाशों के पास हैं.

गिरफ्तार बदमाशों से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि वारदात में शामिल रहे 4 बदमाश झारखंड के धनबाद व बोकारो के रहने वाले हैं, जबकि सारण के 2 और पटना का एक अन्य बदमाश भी पंचवटी रत्नालय की डकैती में शामिल था. कथा लिखे जाने तक ये सातों बदमाश फरार थे. पुलिस इन की तलाश कर रही थी. अभी करीब 4 करोड़ रुपए के जेवरात बरामद नहीं हुए हैं. द्य

(कहानी सौजन्य मनोहर कहानी)

अरहर से लें अच्छी उपज

लेखक- भानु प्रकाश राणा

अरहर में पाई जाने वाली मजबूत जड़ें सीमित नमी की दशा में भी फसल की बढ़वार को बनाए रखने के साथसाथ मिट्टी की रासायनिक और जैविक दशाओं में सुधार ला कर उस की पैदावार कूवत सुधारने में सहायक होती है. इस की पत्तियां झड़ कर मिट्टी में मिलने के बाद कार्बनिक पदार्थों की मात्रा में बढ़ोतरी करती हैं और अरहर के पौधे की लकड़ी भी गांवदेहात में अनेक कामों में लाई जाती है. जैसे, भूस की बोगी बनाना और इस की लकड़ी को जलावन के रूप में?भी इस्तेमाल किया जाता?है.

खेत का चुनाव : अरहर की खेती के लिए ज्यादा पानी ठीक नहीं रहता इसलिए जमीन का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि खेत ऊंचा और समतल हो. खेत में बरसाती पानी के निकलने का अच्छा बंदोबस्त हो यानी अच्छे जल निकास वाली बलुई दोमट या दोमट मिट्टी अरहर के लिए मुफीद रहती है.

उन्नतशील प्रजातियां : अरहर का अधिकतम उत्पादन लेने के लिए प्रजाति का चुनाव बोआई के समय के आधार पर करना चाहिए. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आमतौर पर 2 तरह की प्रजातियों की बोआई की जाती है.

प्रगतिशील किसान प्रकाश सिंह रघुवंशी का कहना है कि अरहर कुदरत 3 अधिक उपज देने वाली किस्म है और यह कीट व रोगों से मुक्त है. इस की बोआई में 3 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज लगता है. 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार मिलती है. अधिक जानकारी के लिए किसान प्रकाश सिंह रघुवंशी के मोबाइल नंबर 9935281300 पर संपर्क कर सकते हैं.

बोआई का समय : जून माह में अरहर की अगेती प्रजातियों की बोआई कर देनी चाहिए जिस से कि गेहूं की बोआई समय से की जा सके और देरी से पकने वाली प्रजातियों की बोआई जुलाई माह तक कर देनी चाहिए.

बीज का उपचार?: मिट्टी में पनपने वाले रोग (उकठा और जड़ गलन) से बचाव के लिए फफूंदीनाशक दवा कार्बंडाजिम 2.5 ग्राम या ट्बूकोनाजोल 1 ग्राम मात्रा से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. इस के बाद 10 किलोग्राम बीज को 200 ग्राम राइजोबियम जीवाणु टीका से उपचारित कर बोआई करनी चाहिए. उपचारित बीजों को?छाया में सुखाना चाहिए. ध्यान रहे कि राइजोबियम जीवाणु टीका से उपचारित करने के बाद बीज को किसी भी रसायन से बीज शोधन न करें.

जल्दी पकने वाली किस्म 15 से

18 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और देर से पकने वाली किस्म 12 से 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की जरूरत होती है.

जिन इलाकों में बारिश ज्यादा होती है और पानी का जमाव होता है, वहां अरहर की फसल की बोआई मेंड़ों पर करना सही रहता है. अच्छे जल निकास से पौधों की बढ़वार भी अच्छी होती है व पौधों में बीमारी का प्रकोप भी कम होता?है.

उर्वरक की मात्रा : अरहर से सही पैदावार मिल सके, इस के लिए 15:40:20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से एनपीके की जरूरत होती है. इस की पूर्ति के लिए 125 किलोग्राम एनपीके या 87 किलोग्राम डीएपी व 33 किलोग्राम म्यूरेट औफ पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से बोआई करते समय डालनी चाहिए.

अरहर में फूल आने के बाद 200 लिटर पानी में 3 किलोग्राम यूरिया और 800 ग्राम जिंक सल्फेट और 800 ग्राम सल्फर का घोल बना कर एक एकड़ में स्प्रे करने से उपज बढ़ती?है.

साथ में लें दूसरी फसल : अरहर की पंक्तियों के बीच में शुरुआती 2-3 महीने तक काफी खाली जगह रहती है जिस में दूसरी फसलें सहफसल के रूप में ली जा सकती?हैं. अरहर के साथ?ज्वार की फसल लेने से अरहर में उकठा रोग का प्रकोप भी कम होता है. उड़द की सहफसली खेती खरपतवार बढ़ने से रोकती है. इस के अलावा तिल, मक्का, मूंगफली वगैरह भी अरहर के साथ सहफसल के रूप में ले सकते हैं.

सिंचाई : अगेती फसल में फलियां बनते समय अक्तूबर माह में एक सिंचाई जरूरी है. देर से पकने वाली प्रजातियों में पाले से बचाव के लिए दिसंबर या जनवरी माह में सिंचाई करना ठीक रहता है.

खरपतवार की रोकथाम : शुरुआती दौर में अरहर की फसल की बढ़वार कम होती है, जबकि खरपतवारों की बढ़वार तेजी से होती है, इसलिए बोआई के 20-25 दिन बाद खुरपी या फावड़े से एक निराई करनी चाहिए.

खरपतवार नियंत्रण के लिए पैंडीमिथेलीन (स्टांप) 30 ईसी 3 लिटर मात्रा को 800 लिटर पानी में घोल बना कर बोआई के तुरंत बाद स्प्रे भी कर सकते हैं.

बोआई का तरीका : अरहर की जल्दी पकने वाली प्रजाति की लाइन से लाइन की दूरी 45 से 60 सैंटीमीटर रखें और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सैंटीमीटर रखें. देर से पकने वाली प्रजाति की लाइन से लाइन की दूरी 60 से

70 सैंटीमीटर व पौधे से पौधे की दूरी 15 से

30 सैंटीमीटर रखें.

धर्म दीक्षा यानी गुरूओं की दुकानदारी

रिटायरमैंट के करीब पहुंचे एक सज्जन से मैं ने पूछा, ‘‘दीक्षा का मतलब क्या है?’’ वे बताने लगे, ‘‘दीक्षा का मतलब, दक्ष,’’ वे आगे बोले, ‘‘कृष्ण ने अर्जुन को महाभारत के युद्ध में दीक्षा दी थी.’’

‘‘क्या दीक्षा दी थी?’’ मेरे दोबारा पूछने पर वे कुछ नहीं बोले. जाहिर है, वे अपने गुरु के अंधसमर्थक थे.

इस बारे में महाभारत से स्पष्ट है कि कृष्ण ने छलकपट से कुरुक्षेत्र का युद्ध जीता था. तो क्या उन्होंने अर्जुन को छलकपट की दीक्षा दी? आमतौर पर दीक्षा का मतलब होता है, गुरु द्वारा दिया गया ज्ञान का सार, जिस पर शिष्य (छात्र) अपने जीवन में अमल कर सफलता की सीढ़ी चढ़ता है. स्कूल की पढ़ाई को तथाकथित गुरु अपर्याप्त शिक्षा मानते हैं. अनपढ़, गंवार गुरु अपने तप से जीवन में ऐसा कौन सा मंत्र प्राप्त करते हैं जो अपने शिष्यों में बांट कर उन का जीवन सुधारने का कार्य करते हैं, जबकि वे खुद असफल, जीवन के संघर्षों से भागने वाले लोग होते हैं.

गुरु के मर जाने के बाद भी दीक्षा का कार्यक्रम चलता है. यह समझ से परे है, क्योंकि गुरु खुद अपना ज्ञान दे तो समझ में आता है पर यह कार्य मरने के बाद उन के कुछ शिष्यों द्वारा चलता रहे, तो यही कहा जा सकता है कि यह गुरु की दुकानदारी है.

दीक्षा देने का तरीका सभी गुरुओं का एक जैसा नहीं होता. कुछ गुरु खास रंगों के वस्त्रों के साथ नहाधो कर ब्रह्ममुहूर्त में दीक्षा देते हैं, तो कुछ कभी भी, किसी भी अवस्था में. दीक्षा के लिए किस गुरु को चुना जाए, यह बुद्धि से ज्यादा गुरु के प्रचार पर निर्भर करता है जिस गुरु का जितना प्रचार होता है उस से दीक्षित होने के लिए लोग उतने ही उतावले होते हैं. इस के अलावा संपर्क भी एक माध्यम है. क्यों? जड़बुद्धि जनता के लिए यह महत्त्वपूर्ण नहीं होता क्योंकि इतना सोचने के लिए उस के पास दिमाग ही नहीं होता. उसे तो बस यह पता हो कि उक्त गुरुजी बहुत पहुंचे हुए महात्मा हैं.

इन गुरुओं से संबंधित अनेक मनगढं़त कहानियां होती हैं जो नए ग्राहक (शिष्य) को फंसाने के लिए सुनाई जाती हैं. एक दीक्षा प्राप्त महिला ने अपने गुरु के बारे में बताया कि एक बार मेरा बेटा मोटरसाइकिल से आ रहा था. उसे अचानक चक्कर आया और वह गिर पड़ा. गिरते ही बेहोश होने की जगह उस ने गुरुमंत्र जपा. तभी गुरु समान सड़क पर पता नहीं कहां से एक रिकशा वाला आ गया, जो मेरे बेटे को उठा कर पास के अस्पताल में ले गया. आमतौर पर उस अस्पताल में औक्सीजन सिलिंडर नहीं होता पर उस रोज था और इस तरह बेटे की जान बच गई. रिकशे वाले की सदाशयता और अस्पताल की सारी मुस्तैदी का के्रडिट गुरुजी ले उड़े.

दूसरी कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है : एक शिष्य साइकिल से जा रहा था. अचानक ट्रक ने पीछे से साइकिल में टक्कर मारी तो साइकिल सवार सड़क पर और साइकिल छिटक कर दूर जा पड़ी. सड़क पर गिरते ही उस का एक हाथ ट्रक के अगले पहिए के नीचे आ गया. तभी उस ने गुरुमंत्र जपा. मंत्र जपने के साथ ही उस में पता नहीं कहां से इतनी शक्ति आ गई कि उस ने सिर झटके से हटा लिया. इस तरह उस का सिर पिछले पहिए से कुचलने से बच गया.

समझने वाली बात है कि उस का ध्यान मंत्रजाप पर था या सिर बचाने पर. साफ पता लग रहा है कि सारी घटना में जानबूझ कर मंत्र का तड़का लगाया गया है.

गुरुमंत्र कानों में इस तरह फुसफुसाए जाते हैं ताकि कोई सुन न ले. ठीक पाकिस्तान के आणविक कार्यक्रम की तरह कहीं आतंकवादियों के हाथ न पड़ जाए, वरना महाविनाश निश्चित है. गुरुमंत्र से दीक्षित हो कर वह आदमी उस फार्मूले (मंत्र) को अपने तक ही सीमित रखता है.

दीक्षा मुफ्त में नहीं मिलती. इस के लिए बाकायदा चढ़ावा निश्चित है. ‘माया महा ठगिति हम जानी’, तिस पर गुरु व उन के खासमखास चेले बिना रुपया हाथ में लिए दीक्षा नहीं देते. यहां तक कि मर चुके गुरु के फोटो तक के पैसे शिष्यों से वसूल लिए जाते हैं. एकाधिकार बना रहे तभी कानों में मंत्र फूंकने का काम वह अपने तक ही सीमित रखता है. हां, मरने के बाद गुरु की दुकानदारी चलती रहे, सो अपने किसी प्रिय शिष्य को वह यह कार्य सौंप कर जाता है.

दीक्षा में कुछ नहीं है. कानों में गुरु अपना उपनाम बताता है, जिसे दीक्षित आदमी से हर वक्त जपने को कहा जाता है. यह एक तरह से व्यक्ति पूजा है ताकि कथित भगवानों से ऊपर लोग उसे जानें. तथाकथित गुरु का यह आत्ममोह से ज्यादा कुछ नहीं.

गुरु कितने आध्यात्मिक व ताकतवर हैं, यह सब को मालूम है. सुधांशु महाराज, जयगुरुदेव, कृपालु महाराज, आसाराम बापू, प्रभातरंजन सरकार (आनंदमार्गी) इन सब के क्रियाकलापों से सारा देश परिचित है. इन्होंने समाज को कौन सी सीख दी? क्या मंत्र दिया? उन का गुरुशिष्य के खेल में कितना कल्याण हुआ? यह बताने की जरूरत नहीं. हां, इतना जरूरी है कि दीक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए कमा चुके ये महात्मा खुद आलीशान जीवन जी रहे हैं और दीक्षा लेने वाला शिष्य भूखे पेट इन के नाम का जाप कर इन्हें धन्य कर रहा है.

अपनी गिरफ्तारी पर आसाराम बापू ढिठाई से कहते हैं, ‘‘नरेंद्र मोदी की सत्ता बच न सकेगी.’’ मानो वे कोई अंतर्यामी व सर्वशक्तिमान हैं. उन के गिरफ्तार होते ही प्रलय आ जाएगी. दुनिया तहसनहस हो जाएगी. अपनी दुकानदारी चलाने की नीयत से इन गुरुओं द्वारा, यदि दिवंगत हुए तो शिष्यों द्वारा साल में 1 या 2 बार विभिन्न धार्मिक शहरों में भंडारे का आयोजन होता है. जहां इन के शिष्य जुटते, खातेपीते, सत्संग (चुगलखोरी) करते हैं. कहने को सभी शिष्य आश्रम में गुरुभाई हैं पर जैसे ही भंडारा खत्म होता है फिर से वे जातिपांति, भाषा में बंटे अपने घरों को लौट जाते हैं. सिवा पिकनिक के इन भंडारों से कोई लाभ नहीं होता. भंडारे के लिए धन कहां से आता है? इस के लिए हर शिष्य चंदा देता है. कुछ पैसे वाले व्यापारी तो गुरु महाराज की इच्छा के नाम पर भंडारे का सारा खर्च अपने ऊपर ले लेते हैं. दरअसल, जमाखोरी कर के वे जो पाप की कमाई करते हैं उसे थोड़ा खर्च कर के अपने पाप को धोने की कोशिश करते हैं.

दीक्षित होने के बाद बताया जाता है कि गुरु की तसवीर के सामने बिना होंठ व जबान हिलाए मंत्र (गुरु नाम) का स्मरण करना चाहिए. यह प्रक्रिया दिनरात कभी भी की जा सकती है. सुबह अनिवार्य है. ऐसा कर के शिष्य के ऊपर कभी भी संकट नहीं आ सकता. तो क्या गुरुजी उस आदमी के लिए ‘बुलेटप्रूफ जैकेट’ का काम करते हैं? अगर गुरुजी पर संकट आए तब जैसा आसाराम बापू के साथ हुआ? तब मीडिया को कोसने का मंत्र गला फाड़फाड़ कर बोलने का नियम शायद लागू होता है.

कुल मिला कर दीक्षा वक्त व धन की बरबादी है. जो धर्मभीरु हैं, बेकार हैं व भाग्य के भरोसे रहने वाले हैं वे ही इन गुरुओं के चक्कर में पड़ते हैं. जो गुरु खुद दिग्भ्रमित हो वह क्या लोगों को रास्ता दिखाएगा. दोष कबीर का ही है, न वे कहते, ‘गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय. बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय.’ न आम लोगों में यह धारणा बनती कि गुरु ही भगवान के पास जाने का रास्ता जानते हैं.    द्य

देवी की कृपा

लेखक- नीलिमा टिक्कू

‘‘रमियाजी, रुकिए,’’ कानों में मिश्री घोलता मधुर स्वर सुन कर कुछ देर के लिए रमिया ठिठक गई फिर अपने सिर को झटक कर तेज कदमों से चलते हुए सोचने लगी कि उस जैसी मामूली औरत को भला कोई इतनी इज्जत से कैसे बुला सकता है, जिस को पेट का जाया बेटा तक हर वक्त दुत्कारता रहता है और बहू भड़काती है तो बेटा उस पर हाथ भी उठा देता है. बाप की तरह बेटा भी शराबी निकला. इस शराब ने रमिया की जिंदगी की सुखशांति छीन ली थी. यह तो लाल बंगले वाली अम्मांजी की कृपा है जो तनख्वाह के अलावा भी अकसर उस की मदद करती रहती हैं. साथ ही दुखी रमिया को ढाढ़स भी बंधाती रहती हैं कि देवी मां ने चाहा तो कोई ऐसा चमत्कार होगा कि तेरे बेटाबहू सुधर जाएंगे और घर में भी सुखशांति छा जाएगी.

तभी किसी ने उस के कंधे पर हाथ स्वयं रखा, ‘‘रमिया, मैं आप से ही कह रही हूं.’’

हैरानपरेशान रमिया ने पीछे मुड़ कर देखा तो एक युवती उसे देख कर मुसकरा रही थी.

हकबकाई रमिया बोल उठी, ‘‘आप कौन हैं? मैं तो आप को नहीं जानती… फिर आप मेरा नाम कैसे जानती हैं?’’

युवती ने अपने दोनों हाथ आसमान की तरफ उठाते हुए कहा, ‘‘सब देवी मां की कृपा है. मेरा नाम आशा है और हमारी अवतारी मां पर माता की सवारी आती है. देवी मां ने ही तुम्हारे लिए कृपा संदेश भेजा है.’’

रमिया अविश्वसनीय नजरों से आशा को देख रही थी. उस ने थोड़ी दूर खड़ी एक प्रौढ़ महिला की तरफ इशारा किया जोकि लाल रंग की साड़ी पहने थी और उस के माथे पर सिंदूर का टीका लगा हुआ था.

रमिया के पास आ कर अवतारी मां ने आशीर्वाद की मुद्रा में अपना दायां हाथ उठाया. उन की आंखों से आंसू बहने लगे. उन्होंने रमिया को खींच कर अपने गले  लगा लिया और बड़बड़ाने लगीं :

‘‘मैं जानती हूं कि तू बहुत दुखी है. तुझे न पति से सुख मिला न बेटेबहू से मिलता है. शराब ने तेरी जिंदगी को कभी सुखमय नहीं बनने दिया. लेकिन तेरी भक्ति रंग ले आई है. माता का संदेशा आया है. वह तुझ से बहुत प्रसन्न हैं. अब तेरा बेटा सोहन व तेरी बहू कमली तुझे कभी तंग नहीं करेंगे.’’

रमिया हतप्रभ रह गई. देवी मां चमत्कारी हैं यह तो उस ने सुना था पर उन की ऐसी कृपा उस अभागी पर होगी ऐसा सपने में भी उस ने नहीं सोचा था.

अवतारी ने मिठाई का एक डब्बा उसे देते हुए कहा, ‘‘क्या सोचने लगी? तुझे तो खुश होना चाहिए कि मां की तुझ पर कृपा हो गई है. और हां, मैं केवल माता के भक्तों से ही मिलती हूं, नास्तिकों से नहीं. चल, पहले इस डब्बे में से प्रसाद निकाल कर खा ले और इस में कुछ रुपए भी रखे हैं. तू इन रुपयों से अपनी नातिन ऊषा की शादी के लिए जो सामान खरीदना चाहे खरीद लेना.’’

आश्चर्य में डूबी रमिया ने भक्तिभाव से ओतप्रोत हो डब्बे की डोरी खोली तो उस में तरहतरह की मिठाइयां थीं. एक लिफाफे में 100 रुपए के 10 नोट भी थे. रमिया ने एक टुकड़ा मिठाई का मुंह में डाला और भावावेश में अवतारी के पैर छूने चाहे लेकिन वह तो जाने कहां गायब हो चुकी थीं.

रमिया की नातिन ऊषा का ब्याह होने वाला था. लाल बंगले वाली अम्मांजी ने दया कर के उसे 200 रुपए दे दिए थे. उसी से वह नातिन के लिए साड़ीब्लाउज खरीदने बाजार आई थी. पर यहां देवी कृपा से मिले रुपयों से रमिया ने नातिन के लिए बढि़या सी साड़ी खरीदी, एक जोड़ी चांदी की पायल व बिछुए भी खरीदे. उस के पास 400 रुपए बच भी गए थे. इस भय से रमिया सीधे घर नहीं गई कि बेटेबहू पैसा व सामान ले लेंगे.

सारा सामान अम्मांजी के पास रखने का निश्चय कर रमिया रिकशा कर के लाल बंगले पहुंच गई. उस ने बंगले की घंटी बजाई तो उसे देख कर अम्मांजी हैरान रह गईं.

‘‘रमिया, तू बाजार से इतनी जल्दी आ गई?’’

‘‘हां, अम्मांजी,’’ कहती वह अंदर आ गई. रमिया के हाथ में शहर के मशहूर मिष्ठान भंडार का डब्बा देख कर अम्मांजी हैरान रह गईं.

‘‘क्या तू ने नातिन के लिए सामान लाने के बजाय मेरे दिए पैसों से मंदिर में इतना महंगा प्रसाद चढ़ा दिया?’’

रमिया चहकी, ‘‘अरे, नहीं अम्मांजी, अब आप से क्या छिपाना है. आप तो खुद ‘देवी मां’ की भक्त हैं…’’ और फिर रमिया ने सारी आपबीती अम्मांजी को ज्यों की त्यों सुना दी.

रमिया की बात सुन कर सावित्री देवी चकित रह गईं. रमिया जैसी गरीब और मामूली औरत को भला कोई बेवकूफ क्यों बनाएगा…फिर इतना सबकुछ दे कर वह औरत तो गायब हो गई थी. निश्चय ही रमिया पर देवी की कृपा हुई है. पल भर के लिए सावित्री देवी को रमिया से ईर्ष्या सी होने लगी. वह कितने सालों से देवी के मंदिर जा रही हैं पर मां ने उन पर ऐसी कृपा कभी नहीं की.

सावित्री देवी पुरानी यादों में खो गईं. उन का बेटा मनोज  7वीं कक्षा में पढ़ता था. गणित की परीक्षा से एक दिन पहले वह रोने लगा कि मां, मैं ने गणित की पढ़ाई ठीक से नहीं की है और मैं कल फेल हो जाऊंगा.

‘बेटा, मेरे पास एक मंत्र है’ उन्होंने पुचकारते हुए कहा, ‘तू इस को 108 बार कागज पर लिख ले. तेरा पेपर जरूर अच्छा हो जाएगा.’

मनोज मंत्र लिखने लगा. थोड़ी देर बाद मनोज के पिता कामता प्रसाद फैक्टरी से आ गए. बेटे को गणित के सवाल हल करने के बजाय मंत्र लिखते देख वह गुस्से से बौखला उठे और जोर से एक थप्पड़ मनोज के गाल पर दे मारा. साथ ही पत्नी सावित्री को जबरदस्त डांट पड़ी थी.

‘देखो, तुम अपने मंत्रतंत्र, चमत्कार के जाल में उलझे रहने के बेहूदा शौक पर लगाम लगाओ. अपने बच्चे के भविष्य के साथ मैं तुम्हें किसी तरह का खिलवाड़ नहीं करने दूंगा. दोबारा ऐसी हरकत की तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’

उस दिन के बाद सावित्री ने मनोज को अपनी चमत्कारी सलाह देनी बंद कर दी थी. मनोज पिता की देखरेख में रह कर मेहनतकश नौजवान बन गया था. वहीं सावित्री की सोच ने उसे नास्तिक मान लिया था.

मनोज का विवाह अंजना से हुआ था. अंजना एक पढ़ीलिखी सुशील लड़की थी. पति व ससुर के साथ उस ने भी फैक्टरी का कामकाज संभाल लिया था. अपने विनम्र व्यवहार से उस ने सास को कभी शिकायत का कोई मौका नहीं दिया था लेकिन बहू के साथ रोज मंदिर जाने की उन की हसरत, अधूरी ही रह गई थी. अंजना पूजापाठ से पूरी तरह विरक्त एकएक पल कर्म में समर्पित रहने वाली युवती थी.

मनोज के विवाह को 5 साल हो गए थे. सावित्री एक पोती व पोते की दादी बन चुकी थीं. तभी अचानक हुए हृदयाघात में पति का देहांत हो गया. पिता के जाने के बाद मनोज और अंजना पर फैक्टरी का अतिरिक्त भार पड़ गया था. दोनों सुबह 10 बजे फैक्टरी जाते और रात 7-8 बजे तक घर आते. इसी तरह सालों निकल गए.

सावित्री की पोती अब एम.बी.ए. करने अहमदाबाद गई थी और पोता आई.आई.टी. की कोचिंग के लिए कोटा चला गया था. वह दिन भर घर में अकेली रहती थीं. ऐेसे में रमिया का साथ उन को राहत पहुंचाता था. वह रोज रमिया को ले कर ड्राइवर के साथ मंदिर जाती थीं. मंदिर से उन्हें घर छोड़ने के बाद ड्राइवर दोबारा फैक्टरी चला जाता था. रमिया सब को रात का खाना खिला कर अपने घर जाती थी.

‘‘अम्मांजी, क्या सोचने लगीं’’ रमिया का स्वर सुन कर सावित्री देवी की तंद्रा भंग हुई, ‘‘यह देखो, मैं ने कितनी सुंदर साड़ी, पायल व बिछुए खरीदे हैं लेकिन ये सबकुछ आप अपने पास ही रखना. जब विवाह में जाऊंगी तब यहीं से ले जाऊंगी.’’

रमिया खुशीखुशी घर के कामों में लग गई. सावित्री कुछ देर तक टेलीविजन देखती रही फिर जाने कब आंखें बंद हुईं और वह सो गईं.

उस दिन रात को जब रमिया अपने घर पहुंची तो यह देख कर हैरान रह गई कि घर में अजीब सी शांति थी. उसे देख कर बहू ने रोज की तरह नाकभौं नहीं सिकोड़ी बल्कि मुसकान बिखेरती उस के पास आ कर बड़े अपनेपन से बोली, ‘‘अम्मां, दिनभर काम कर के आप कितना थक जाती होंगी. मैं ने आज तक कभी आप का खयाल नहीं रखा. मुझे माफ कर दो.’’

आज बेटे ने भी शराब नहीं पी थी. वह भी पास आ कर बैठ गया और बोला, ‘‘मां, तू इतना काम मत किया कर. हम दोनों कमाते हैं. क्या तुझे खाना भी नहीं खिला सकते? क्या जरूरत है तुझे सुबह से रात तक काम करने की?’’

रमिया को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो पा रहा था. सचमुच आज सुबह से चमत्कार पर चमत्कार हो रहा था. यह सोच कर उस की आंखें भर आईं कि बेटेबहू ने आज उस की सुध ली है. स्नेह व अपनेपन की भूखी रमिया बेटेबहू का माथा सहलाते हएु बोली, ‘‘तुम्हें मेरी इतनी चिंता है, देख कर अच्छा लगा. सारा दिन घर में पड़ीपड़ी क्या करूं. काम पर जाने से मेरा मन लग जाता है.’’

दूसरे दिन सुबह जब रमिया ने अपने बेटेबहू के सुधरते व्यवहार के बारे में अम्मांजी को बताया तो वह भी हैरान रह गईं.

रमिया बोली, ‘‘अम्मांजी, मुझे लगता है देवी मां खुद ही इनसान का रूप धारण कर मुझ से मिलने आई थीं.’’

सावित्री के मुख से न चाहते हुए भी निकल गया, ‘‘काश, वह मुझ से भी मिलने आतीं.’’

रमिया के जीवन में खुशियां भर गई थीं. बेटाबहू पूरी तरह से सुधर गए थे. उस का पूरा ध्यान रखने लगे थे. एक दिन वह शाम को डेयरी से दूध ले कर लौट रही थी कि अचानक ही अपने सामने आशा व अवतारी मां को देख कर वह हैरान रह गई. अवतारी मां ने दायां हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में उठा दिया.

रमिया ने भावावेश में उन के पैर पकड़ लिए और बोली, ‘‘आप उस दिन कहां गायब हो गई थीं?’’

अवतारी मां बोलीं, ‘‘अब तुझे कभी कोई कष्ट नहीं होगा. अच्छा, बता तेरी लाल बंगले वाली सावित्री कैसी हैं? माता उन से भी बहुत प्रसन्न हैं.’’

यह सुनते ही हैरान रमिया बोली, ‘‘आप उन के बारे में भी जानती हैं?’’

अवतारी ने अपनी बड़ीबड़ी आंखें फैलाते हुए कहा, ‘‘भला, देवी से उस के भक्त कभी छिप सकते हैं? मैं भी सावत्री से मिलना चाहती हूं लेकिन उन के बेटे व बहू नास्तिक हैं. इसीलिए मैं उन के घर नहीं जाना चाहती.’’

रमिया तुरंत बोली, ‘‘आप अभी चलो. इस समय अम्मांजी अकेली ही हैं. बेटेबहू तो रात 8 बजे से पहले नहीं आते.’’

अवतारी मां ने कहा, ‘‘देख, आज रात मुझे तीर्थयात्रा पर जाना है लेकिन तू भक्त है और मैं अपने भक्तों की बात नहीं टाल सकती इसलिए तेरे साथ चल कर मैं थोड़ी देर के लिए उन से मिल लेती हूं.’’

अवतारी मां से मिल कर सावित्री की खुशी का ठिकाना न रहा. उन्होंने कुछ रुपए देने चाहे लेकिन अवतारी मां नाराज हो उठीं.

सावित्री ने अवतारी मां से खाना खा कर जाने की विनती की तो फिर किसी दिन आने का वादा कर के वह विदा हो गईं.

इस घटना को कई दिन बीत गए थे. एक दिन दोपहर के समय लाल बंगले की घंटी बज उठी. सावित्री ने झुंझलाते हुए बाहर लगे कैमरे में देखा तो बाहर आशा व अवतारी मां को खड़े पाया. उन की झुंझलाहट पलभर में खुशी में बदल गई. उन्होंने बड़ी तत्परता से दरवाजा खोला.

‘‘आप के लिए मां का प्रसाद लाई हूं. मां तुम से बहुत खुश हैं,’’ फिर इधरउधर देखते हुए अवतारी मां बोलीं, ‘‘रमिया दिखाई नहीं दे रही?’’

अम्मांजी चिंतित स्वर में बोलीं, ‘‘अभी कुछ देर पहले उस का बेटा आया था और बता गया है कि रात भर दस्त होने की वजह से उसे बहुत कमजोरी है. आज काम पर नहीं आ पाएगी.’’

अवतारी मां ने कहा, ‘‘चिंता मत करो. वह जल्दी ही ठीक हो जाएगी.’’

सावित्री के पूछने पर कि आप की तीर्थयात्रा कैसी रही, अवतारी मां कुछ जवाब देतीं इस से पहले ही फोन की घंटी घनघना उठी. सावित्री ने ड्राइंगरूम का फोन न उठा कर अपने बेडरूम में जा कर फोन उठाया. उन के बेटे का फोन था. वह कह रही थीं कि बेटा, तू चिंता मत कर, रमिया नहीं आई तो क्या हुआ, मैं कोई छोटी बच्ची तो हूं नहीं जो अकेली डर जाऊंगी.

फिर अपने स्वर को धीमा करते हुए वह बोलीं, ‘‘आनंदजी आए थे और 90 हजार रुपए दे गए हैं. मैं ने उन्हें तेरी अलमारी में रख दिया है.’’

बेटे से बात करते समय सावित्री को लगा कि ड्राइंगरूम का फोन किसी ने उठा रखा है. उन्होंने खिड़की के परदे से झांक कर देखा तो उन का शक सही निकला. फोन आशा ने उठा रखा था और इशारे से वह अवतारी को कुछ कह रही थी. सावित्री देवी तब और स्तब्ध रह गईं. जब उन्होंने अवतारी के पास मोबाइल फोन देखा, जिस से वह किसी को कुछ कह रही थी.

एसी से ठंडे हुए कमरे में भी सावित्री को पसीने आ गए. उन्होंने जल्दीजल्दी बेटे को दोबारा फोन मिलाया. उधर से हैलो की आवाज सुनते ही वह कुछ बोलतीं, इस से पहले ही अपनी कनपटी पर लगी पिस्तौल का एहसास उन की रूह कंपा गया. आशा ने लपक कर फोन काट दिया था.

दुर्गा मां का अवतार लगने वाली अवतारी अब सावित्री को साक्षात यमराज की दूत दिखाई दे रही थी.

‘‘बुढि़या, ज्यादा होशियारी दिखाई तो पिस्तौल की सारी गोलियां तेरे सिर में उतार दूंगी. चल, अपने बेटे को वापस फोन लगा कर बोल कि तू किसी और को फोन कर रही थी, गलती से उस का नंबर लग गया वरना उस का फोन आ जाएगा.’’

सावित्री कुछ कहतीं इस से पहले ही बेटे का फोन आ गया.

‘‘क्या बात है, अम्मां? फोन कैसे किया था?’’

‘‘काट क्यों दिया…’’ सावित्री देवी मिमियाईं, ‘‘मैं तुम्हारी नीरजा बूआ से बात करना चाह रही थी लेकिन गलती से तेरा नंबर मिल गया.’’

‘‘मुझे तो चिंता हो गई थी. सब ठीक तो है न?’’

‘‘हांहां, सब ठीक है,’’ कहते हुए उन्होंने फोन रख दिया.

अवतारी गुर्राई, ‘‘बुढि़या, झटपट सभी अलमारियों की चाबी पकड़ा दे. जेवर व कैश कहांकहां रखा है बता दे. मैं ने कई खून किए हैं. तुझे भी तेरी दुर्गा मां के पास पहुंचाते हुए मुझे देर नहीं लगेगी.’’

उसी समय उन के 2 साथी युवक भी आ धमके. सावित्री को उन लड़कों की शक्ल कुछ जानीपहचानी लगी.

तभी एक युवक गुर्राकर बोला, ‘‘ए… घूरघूर कर क्या देख रही है बुढि़या? तेरे चक्कर में मैं ने भी तेरी देवी मां के मंदिर में खूब चक्कर लगाए. तू जो अपनी नौकरानी के साथ घंटों मंदिर में बैठ कर बतियाती रहती थी तब तेरे बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हम दोनों भी वहीं तेरे आसपास मंडराते रहते थे. तेरी बड़ी गाड़ी देख कर ही हम समझ गए थे कि तू हमारे काम की मोटी आसामी है और हमारे इस विश्वास को तू ने मंदिर के बाहर हट्टेकट्टे भिखारियों को भीख में हर रोज सैकड़ों रुपए दान दे कर और भी पुख्ता कर दिया.’’

सावित्री के बताने पर आननफानन में उन्होंने घर में रखे सारे जेवरात व नकदी समेट लिए. तभी अवतारी जोर से खिलखिलाई, ‘‘बुढि़या, मैं आज तक किसी मंदिर में नहीं गई फिर भी तेरी देवी मां ने तेरी जगह मुझ पर कृपा कर दी. तेरी नौकरानी रमिया के बारे में पता चला कि वह तेरे यहां 20 साल से काम कर रही है. बड़ी नमकहलाल औरत है. उस को भरोसे में ले कर तो तुझे लूट नहीं सकते थे. इसीलिए तुम्हारी धार्मिक अंधता को भुनाने की सोची.

‘‘सच कहती हूं तुम्हारे जैसी धर्म में डूबी भारतीय नारियों की वजह से ही हम जैसे लोगों का धंधा जिंदा है. रमिया के बेटेबहू को भी पिस्तौल की नोक पर मेरे ही साथियों ने कई बार धमकाया था और रमिया समझी कि मां की कृपा से उस के बेटेबहू सुधर गए. कल रात को रास्ते में मैं ने रमिया को जमालघोटा डला प्रसाद दिया था ताकि वह आज काम पर न आ सके.’’

‘‘फालतू समय खराब मत करो,’’ एक युवक चिल्लाया, ‘‘अब इस बुढि़या का काम तमाम कर दो.’’

घबराहट से सावित्री के सीने में जोर का दर्द उठा और वह अपनी छाती पकड़ कर जमीन पर लुढ़क गईं.

पसीने से तरबतर सावित्री को देख अवतारी चहकी, ‘‘इसे मारने की जरूरत नहीं पड़ेगी. लगता है इसे दिल का दौरा पड़ा है. तुरंत भाग चलो.’’

उधर फैक्टरी में अपनी आवश्यक मीटिंग खत्म होने के बाद मनोज ने दोबारा घर फोन किया.

फोन की घंटी लगातार बज रही थी. जवाब न मिलने पर चिंतित मनोज ने पड़ोसी शर्माजी के घर फोन कर के अम्मां के बारे में पता करने को कहा.

पड़ोसिन अपनी बेटी के साथ जब उन के घर पहुंची तो घर के दरवाजे खुले थे और अम्मांजी जमीन पर बेसुध गिरी पड़ी थीं. यह देख कर वह घबरा गई. डरतेडरते वह अम्मांजी के पास पहुंची और देखा तो उन की सांस धीमेधीमे चल रही थी. उन्होंने तुरंत मनोज को फोन किया.

सावित्री को जबरदस्त हृदयाघात हुआ था. उन्हें आई.सी.यू. में भरती कराया गया. गैराज में खड़ी दूसरी गाड़ी गायब थी. 2 दिन बाद उन को होश आया. बेटे को देखते ही उन की आंखों से आंसुओं की अविरल धारा बहने लगी. बेटे ने उन के सिर पर तसल्ली भरा हाथ रखा. सावित्री को पेसमेकर लगाया गया था. धीरेधीरे उन की हालत में सुधार हो रहा था.

रमिया व उन के बयान से पता चला कि लुटेरों के गिरोह ने योजना बना कर कई दिन तक सारी बातें मालूम कर के ही उन की धार्मिकता को भुनाते हुए अपनी लूट की योजना को अंजाम दिया और लाखों रुपए के जेवरात व नकदी लूट ले गए.

उन की कार शहर के एक चौराहे पर लावारिस खड़ी मिली थी लेकिन लुटेरों का कहीं पता न चला.

दहशत व ग्लानि से भरी सावित्री को आज अपने पति की रहरह कर याद आ रही थी जो हरदम उन्हें तथाकथित साधुओं और उन के चमत्कारों से सावधान रहने को कहते थे. वह सोच रही थीं, ‘सच ही तो कहते थे मनोज के पिताजी कि अंधभक्ति का यह चक्कर किसी दिन उन की जान को सांसत में डाल देगा. अगर पड़ोसिन समय पर आ कर उन की जान न बचाती तो…और अगर वे लुटेरे उन्हें गोली मार देते तो?’

दहशत से उन के सारे शरीर में झुरझुरी आ गई. आगे से वह न तो किसी मंदिर में जाएंगी और न ही किसी देवी मां का पूजापाठ करेंगी.

खेती में जल निकासी का सही इंतजाम

कम पानी में जिस तरह से फसल की अच्छी पैदावार नहीं होती है, उसी तरह से?ज्यादा पानी में भी अच्छी पैदावार नहीं होती है. ऐसे में जरूरी?है कि फसल में पानी की मात्रा सही हो.

खेती के कामों में लगे किसानों द्वारा जल निकासी यानी पानी के निकलने पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है. जिन जगहों पर ज्यादा बारिश होती है, वहां पर जल निकासी का सही इंतजाम न होने से हर साल हजारों एकड़ फसल गल जाती है.

जल निकासी की जरूरत

कुछ जमीनें इस तरह की होती?हैं, जिन में बरसात ज्यादा होने से पानी काफी दिनों तक के लिए भर जाता है. नतीजतन, वहां बोई गई फसल खराब हो जाती है और अगली फसल बोने के लिए भी समय पर खेत तैयार नहीं हो पाता है.

* कहींकहीं नहरों की सतह पास के खेत से ऊंची होती है, वहां बरसात में खेत में पानी भर जाता है. ऐसे खेतों से पानी के निकलने का पुख्ता इंतजाम करना पड़ता?है.

* कुछ खेतों में पानी भरा होने से खेती की मशीनों का इस्तेमाल नहीं हो पाता. इन खेतों में जल निकासी का इंतजाम कर के ही खेती की मशीनों का इंतजाम किया जा सकता?है.

लाभकारी है जल निकासी

* जमीन में मौजूद ज्यादा पानी निकल जाने से औक्सीजन पौधों की जड़ों तक पहुंच जाता है, जिस से फसल अच्छी हो जाती है. फसल की सेहत के लिए पौधों की जड़ों तक हवा का पहुंचना जरूरी होता?है.

* जमीन के लाभदायक जीवाणु हवा में अपना काम ठीक तरह से करते हैं. हवा से उन के काम करने की रफ्तार भी तेज होती है. इस से फसल को जरूरी भोजन भी मिल जाता है.

* जल निकासी से जमीन फसल बोने के लिए जल्दी तैयार की जा सकती है.

* जल निकासी न होने से जमीन कम उपजाऊ हो जाती है. ज्यादा पानी रुकने से अकसर जमीन ऊसरीली हो जाती है.

* जल निकासी से मिट्टी में मिले हानिकारक लवण, जो फसल की बढ़वार में रुकावट होते हैं, वे पानी के साथ बह जाते हैं. नतीजतन, भूमि की उपजाऊ ताकत बढ़ जाती?है.

जल भराव से नुकसान

* जिन इलाकों में ज्यादा पानी भर जाता?है और वहां पर जल निकासी का सही इंतजाम नहीं होता है, उन इलाकों में फसलों को कई तरह से नुकसान हो सकता?है.

* पौधे के लिए एक तय तापमान जरूरी होता है, उस से कम या ज्यादा तापमान होने से फसल पर बुरा असर पड़ता है. नमी ज्यादा होने से मिट्टी का तापमान गिर जाता?है.

* जमीन में सही हवा और तापमान की सहायता से लाभदायक जीवाणु काम करते?हैं. नमी ज्यादा होने पर जीवाणुओं पर उलटा असर पड़ता?है.

* ज्यादा समय तक पानी भरा रहने से जमीन सामान्य फसलें पैदा करने की कूवत खो देती है. नमी ज्यादा होने से जुताई और बोआई समय पर नहीं हो पाती, जिस से फसल की उपज कम हो जाती है.

* बीज जमने के लिए भी सही तापमान की जरूरत होती?है. ज्यादा नमी होने से तापमान कम हो जाता?है, जिस से बीज देर से जमते?हैं. इस का असर फसल के बढ़ने पर पड़ता?है और फसल देर से पकती?है.

* जड़ें पानी के लिए ही नीचे की ओर बढ़ती?हैं. खेतों में ज्यादा पानी भरा रहने से जड़ों को पानी ऊपर ही मिल जाता है, जिस से वे

ऊपर ही रह जाती हैं. इस से फसल कमजोर रह जाती?है.                                         ठ्ठ

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