उर्मिला ने दिया कांग्रेस से इस्तीफा, लोकल नेताओं पर फोड़ा ठीकरा

45 साला उर्मिला मातोंडकर ने साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले राजनीति के क्षेत्र में कदम रखा और कांग्रेस में शामिल हो गईं. तब उन्होंने मुंबई उत्तर लोकसभा सीट से बतौर कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनाव में उन्हें भारतीय जनता पार्टी के नेता गोपाल शेट्टी से करारी शिकस्त मिली थी.

लोकसभा चुनाव हुए अभी 5 महीने ही बीते थे कि उर्मिला मातोंडकर को एहसास हो गया कि यहां उन की दाल नहीं गलने वाली. उन्हें लगने लगा कि वे यहां रह कर कोई बड़ा लक्ष्य हासिल नहीं कर सकतीं. अपनी हार के पीछे वे मुंबई कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी मानती हैं. कमजोर रणनीति, कार्यकर्ताओं की अनदेखी और फंड की कमी को उन्होंने जिम्मेदार बताया.

उन्होंने एक गोपनीय खत लिखा था जो लीक हो गया. इस बात से आहत हो कर उर्मिला ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देना बेहतर समझा.

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उर्मिला मातोंडकर ने अपने इस्तीफे में लिखा है, ”मैं ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. पहली बार मेरे मन में इस्तीफे का विचार तब आया था जब मेरी लगातार कोशिशों के बावजूद तत्कालीन मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा को लिखे 16 मई के मेरे खत के संबंध में पार्टी ने कोई ऐक्शन नहीं लिया. इस के बाद इस खत में की गई गोपनीय बातों को बड़ी आसानी से मीडिया में लीक कर दिया गया.

”मेरे साथ यह एक घोर छल था. मेरे लगातार विरोध जाहिर करने के बावजूद पार्टी में किसी ने इस को ले कर माफी नहीं मांगी. यहां तक कि चिंता भी नहीं जताई. यही नहीं, मेरे खत में जिन लोगों के नाम थे, उन में से कुछ को मुंबई नौर्थ में कांग्रेस के घटिया प्रदर्शन के बावजूद नए पदों से नवाजा गया.”

उर्मिला मातोंडकर ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान मुंबई के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम के करीबी सहयोगियों संदेश कोंडविल्कर और भूषण पाटिल के बरताव की भी आलोचना की थी.

बता दें कि राजनीति में आने से पहले उर्मिला मातोंडकर फिल्मों की चहेती हीरोइन थीं. उन्होंने ‘रंगीला’, ‘जुदाई’, ‘सत्या’, ‘कुंवारा’, ‘प्यार तूने क्या किया’ और ‘पिंजर’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम कर के अपनी अलग पहचान बनाई.

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US Open Final: राफेल नडाल ने जीता 19वां ग्रैंड स्लैम, 23 साल के मेदवेदेव दी मात

न्यूयार्क: साल का आखिरी ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन का खिताब स्पेनिश दिग्गज खिलाड़ी राफेल नडाल की झोली पर चला गया. नडाल का ये 19वां ग्रैंड स्लैम है. अब नडाल इतिहास रचने से महज एक ग्रैंड स्लैम ही दूर है. पुरूष एकल वर्ग में सबसे ज्यादा ग्रैंड स्लैम जीतने का रिकौर्ड अभी रोजर फेडरर के नाम हैं.

नडाल ने रूस के खिलाड़ी मेदवेदेव को 7-5, 6-3, 5-7, 4-6, 6-4 से मात दी. इस मैच को जीतने के लिए नडाल को चार घंटे 49 मिनट का समय लगा. नडाल ने अपने प्रतिद्वंद्वी को हर एक अंक के लिए तरसाया और रूसी खिलाड़ी के आक्रमक रवैये को अपने अनुभव से ठंडा किया.

मेदवेदेव ने दो सेट और एक ब्रेकडाउन कर मैच को काफी रोमांचक बना दिया था. 33 साल के नडाल ने हालांकि अपने सामने आई हर बाधा को पार कर जीत हासिल की. अब नडाल स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर के पुरुष वर्ग में सबसे ज्यादा ग्रैंड स्लैम जीतने के रिकार्ड की बराबरी करने से सिर्फ एक कदम दूर हैं. फेडरर के नाम अभी तक 20 ग्रैंड स्लैम खिताब हैं. इसी के साथ उन्होंने अपने और नोवाक जोकोविक के बीच के ग्रैंड स्लैम खिताब के अंतर को तीन तक पहुंचा दिया है.

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मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में मेदवेदेव ने नडाल से कहा, “आप जिस तरह से खेलते हैं वो मजाक जैसा लगता है, आपके खिलाफ खेलना बेहद मुश्किल है. मैं दर्शकों के कारण काफी कड़ी प्रतिस्पर्धा दे पा रहा था.” 23 साल के इस युवा ने कहा, “तीसरे सेट में मैं पहले से ही यह सोच रहा था कि मैं जब बोलूंगा तो क्या कहूंगा. मैं लड़ रहा था और हार नहीं मान रहा था, लेकिन दुर्भाग्यवश मैं अपने रास्ते पर बना नहीं रह पाया.”

मैच के बाद नडाल ने रूस के युवा खिलाड़ी का तारीफ की है और कहा है कि उनके सामने इस तरह के मौके और भी आएंगे. मैच के बाद नडाल ने कहा, “मेरे लिए यह जीत काफी जरूरी थी. खासकर तब जब यह मैच मुश्किल होता जा रहा था. मैं मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखने में कामयाब रहा. यह बेहतरीन मैच था. मैं काफी भावुक हूं.”

उन्होंने कहा, “यह शानदार फाइनल था. डेनिल सिर्फ 23 साल के हैं और जिस तरह से वो खेल रहे थे और अपनी लय में बदलाव कर रहे थे वो शानदार है.” उन्होंने कहा, “उनके सामने इस तरह के कई मौके आएंगे.”

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ठोको ताली: शिल्पा ने कैसे सिखाया अनूप और सीमा को सबक?

लेखिका- मधु जैन 

“शिल्पा आज अनूप का फोन आया था.”

“ओफ्फो!! फिर से…”

“अरे! परेशान होने की बात नहीं मैंने कह दिया हम दो दिन के लिए बाहर जा रहे हैं.”

“हम इस तरह कब तक मुंह चुराएंगे, कुछ ऐसा करना पड़ेगा कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.”
अनूप शिल्पा के छोटे भाई का दोस्त है. इसीलिए शिल्पा से पहले से परिचित भी है. नई शादी और उसके ही शहर में रहने के कारण शिल्पा जब भी कुछ नया बनाती उन दोनों को बुला लेती. वह नहीं जानती थी कि वह आ बैल मुझे मार वाला काम कर रही है.

वैसे भी शिल्पा को खाना बनाना और खिलाना दोनों में ही मजा आता था. पर अब तो अनूप और उसकी पत्नी सीमा कभी भी किसी समय आ धमकते और खाने की फरमाइश कर देते.

शिल्पा ने तो उन्हें अंगुली पकड़वाई थी पर वह तो पौंचा ही पकड़ बैठे. उस दिन शिल्पा खाने से फुरसत ही हुई थी कि ये दोनों आ गये.

“शिल्पा दी आज तो आपके हाथ की कढ़ी चावल खाने का बहुत मन हो रहा है.”
“दी, कढ़ी बनाती भी तो इतनी अच्छी है.” मस्का लगाते हुए सीमा बोली.
“दी, वो पकौड़े वाली कढ़ी बनाना और थोड़े पकौड़े ज्यादा बना लेना सूखे खाने के लिए.”

शिल्पा के तो तन बदन में आग सी लग गयी थी फिर भी बनावटी मुस्कान ओढ़कर खाना बनाया. शिल्पा ने अब इन्हें सबक सिखाने का मनसूबा बना लिया था.

शर्मा जी के बेटे की बर्थडे पार्टी से लौटने के बाद शिल्पा काफी थकावट महसूस कर रही थी और बर्तन वाली न आने से बर्तन भी पड़े थे. थोड़ी देर आराम करने की सोच कर लेट गई. तभी उसे अनूप की आवाज सुनाई दी “जीजा जी आज हमारा मन आलू के पराठें खाने का हो रहा था और दीदी के हाथ के पराठों का तो जवाब ही नहीं. बाजार में भी इतने अच्छे नहीं मिलते.”

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शिल्पा ने एक चुन्नी सिर पर बांधी और बाहर आकर बोली “मेरे सिर में बहुत तेज दर्द हो रहा है अच्छा हुआ सीमा तुम आ गयीं पहले तो सबके लिए चाय बना लाओ.”

पति को चुप रहने का इशारा करती हुई “और हां कुकर धोकर आलू उबलने रख देना, बाई नहीं आई न. आज मैं तुम्हें आलू के पराठें बनाना सिखाऊंगी. आखिर तुम्हें भी तो अनूप की पसंद सीखना होगी.”

प्यार से “तुम तो अपनी हो, तो तुमसे कहने में क्या संकोच मेरी तो तबीयत ठीक नहीं है तो तुम्हें ही चारों के लिए पराठें बनाना होगें.”

चाय से ज्यादा तो सीमा का मन उबल रहा था.”क्या मैं नौकरानी हूं? जो बर्तन भी साफ करूं और सबके लिए पराठें भी बनाऊं.” अनूप से भी बात नहीं कर पा रही थी.

उसने अनूप को व्हाट्सएप पर सारी परेशानी बताई. और साथ ही उपाय भी.

चाय पीने के बाद कप रखने के बहाने अंदर जाकर सीमा ने अनूप को फोन लगाया .

फोन उठाते ही अनूप बोला. जी सर अभी घर पहुंच रहा हूं

“किसका फोन था?” शिल्पा ने पूछा.

“वो दीदी बौस का फोन है घर पर आ रहे हैं तो हमें निकलना पड़ेगा.”

“कोई बात नहीं फिर कभी, जब भी आओगे हम सीमा के हाथ के पराठें खा लेगें.”

अब तो अनूप और सीमा ऐसे नौ दो ग्यारह हुए कि शिल्पा के घर का रास्ता ही भूल गये.

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हर जगह के लिए परफेक्ट है हिमांश कोहली के ये 4 लुक्स

नेहा कक्कड़ के एक्स बौयफ्रेंड और बौलीवुड एक्टर हिमांश कोहली अपने लुक्स से अक्सर ही सबको इम्प्रैस करने में लगे रहते हैं. ना केवल लड़कियां बल्कि लड़के भी इनके लुक्स के दीवाने हैं. हिमांश कई फिल्मों और सीरियल में काम कर सबके फेवरेट बन चुके हैं. हिमांश ने ‘यारियां’, ‘जीना इसी का नाम है’, ‘दिल जो ना कह सका’ और ‘इत्तेफाक’ जैसी फिल्मों में काम किया है. हिमांश अक्सर अपने सोशल मीडिया अकाउंट से अपनी फोटोज फैंस के साथ शेयर कर उनको इम्प्रेस करने में लगे रहते हैं. तो अगर आप भी हिमांश की तरह स्मार्ट और डैशिंग दिखना चाहते है तो ट्राय कर सकते हैं उनके कुछ ऐसे लुक्स.

ट्राय करें हिमांश कोहली का ये कूल लुक…

 

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I love the days when my only problem is tea or coffee ☕ #HimanshKohli #ThursdayThoughts #coffeeLover

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हिमांश कोहली ने अपना एक लुक फैंस के साथ शेयर किया है जिसमें वे बेहद कूल में नजर आ रहे हैं. हिमांश ने अपने इस कूल लुक में व्हाइट कलर की राउंड नैक टी-शर्ट के ऊपर औरेंज कलर की लूज शर्ट और डार्क ब्लू कलर का लोअर पहना हुआ है. इस लुक के साथ उन्होने व्हाइट कलर के शूज़ और ब्लैक शेड्स पहने हुए हैं. आप भी हिमांश का ये लुक अपनी डेली-लाइफ में ट्राई कर सकते हैं.

हिमांश कोहली का कौलेज लुक…

 

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Sunshine Is Delicious During Winters⛄️☀️ #HimanshKohli #HeemanDiaries #WinterVibes

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कौलेज में सबसे अलग और डैशिंग दिखने के लिए ट्राय कर सकते है हिमांश का ये कौलेज लुक. इस लुक में हिमांश ने व्हाइट कलर की राउंड नैक टी-शर्ट के ऊपर ब्लैक कलर की जैकेट पहनी हुई है. साथ ही उन्होने क्रीम कलर की rugged जींस और ब्लैक कलर के शूज़ पहने हुए हैं. हिमांश अपने इस लुक में बिल्कुल कौलेज गोइंग स्टूडेंट लग रहे हैं.

हिमांश कोहली का ट्रेडिशनल लुक…

 

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HappyDiwali!! Spread Love and Positivity 🙏🏼😇 #HimanshKohli #HappyDiwali #Ethnic #OOTD

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पिछले साल दीवाली के मौके पर हिमांश ने अपना एक ट्रेडिशनल लुक अपने फैंस के साथ शेयर किया था जिसमें वे काफी स्मार्ट नजर आ रहे थे. हिमांश ने इस लुक ओरेंज कलर का कुर्ता और व्हाइट कलर की पयजामी पहनी हुई है. इस आउट-फिट के साथ हिमांश ने कोलापुरी चप्पल पहनी हुई है जो कि इस लुक में चार चांद लगा रही है.

ट्राय करें हिमांश कोहली का ये ट्रेंडी लुक…

जैसा कि आज-कल प्लावर प्रिंट जैकेट्स और शर्टस् काफी ट्रेंड में है तो इस लुक में हिमांश ने व्हाइट कलर के कुर्ते के ऊपर फ्लावर प्रिंट जैकेट पहनी हुई है. इसी के साथ उन्होने इसके नीचे rugged पयजामा पहना हुआ है जो इस आउट-फिट के साथ बेहद अच्छा लग रहा है. आप भी हिमांश का ये लुक अपने फैमिली फंक्शन्स या किसी ट्रेडिशनल फंक्शन में ट्राय कर सबको इम्प्रेस कर सकते हैं.

बता दें, काफी समय से सिंगिंग क्वीन नेहा कक्कड़ और हिमांश कोहली एक दूसरे को डेट कर रहे थे और ये दोनो लव बर्ड्स सबके फेवरेट बन चुके थे पर कुछ महीने पहले ही खबरे आई थीं कि नेहा और हिमांश का ब्रेक-अप हो गया है. इस खबर ने दोनो के फैंस को काफी निराश कर दिया था.

Written By: Karan Manchanda

देवी महंगाई! कृपा बरसा रही…

कनछेदीलाल ने महसूस किया देश में महंगाई कम होने लगी है. यह अचानक हुआ है , सामने न संसदीय चुनाव है, न ही किसी महापुरुष या सत्तारूढ़ दल के नेता का जन्मदिन. मगर महंगाई कम होने लगी है . दसों दिशाओं में आश्चर्य मिश्रित स्वर सुनाई पड़ने लगे. पेट्रोल के दाम गिर गए टमाटर, सब्जियों के दाम गिरने लगे .प्याज, दाल सहित आवश्यक वस्तुओ खाद्य, जींस के दाम आसमान से जमीं पर उतर आए. चहूं और आश्चर्य का माहौल था.कनछेदी लाल सोचने लगे कि आखिर यह सब क्या हो रहा है ? अगर अति आवश्यक जींस के दाम इस तरह गिरते चले गए तो प्रधानमंत्रीजी का क्या होगा ? अर्थव्यवस्था के मजबूती का परिचायक है- महंगाई .और महंगाई कम हो जाएगी तो देश की अर्थव्यवस्था ही ढह जाएगी.

आज भारत सीना तान कर दुनिया के बाजार में खड़ा है. मुद्रा स्फीती बढ़ रही है. दुनिया सम्मान की दृष्टि से देख रही थी. प्रधानमंत्री जी ने अपने कुशल नेतृत्व में देश को महंगाई दी, देश के आम आदमी में क्रय करने का माद्दा उत्पन्न किया. कहां तो इस देश का आम तो क्या विशिष्ट आदमी भी जेब में चिल्लर लेकर घूमता था. आज दो दो हजार के नोट लेकर घूमता है. इसके पीछे प्रधानमंत्री जी की मनमोहिनी अर्थव्यवस्था का जादू है .

अब जब सभी चीजों के दाम गिरने लगे हैं तो देश में कौतूहल का माहौल बन गया है और लोगों के चेहरे पर आश्चर्य मिश्रित भय के चिन्ह स्पष्ट देखे जा सकते हैं. अगर महंगाई अगर इस तरह कम होती गई तो देश का क्या होगा ?

कनछेदी लाल जानता है, लोगों को महंगाई की आदत सी पड़ गई है. जीवन में एक सनसनी है महंगाई .सुबह उठा सुना सोने के दाम 200 बढ़ गए चांदी के 5 सौ रुपए … अच्छा लगता है. टमाटर 40 रुपए किलो प्याज 50 रुपए अच्छा लगता है . थोड़ी देर के लिए सनसनाहट रहती है. मन खींझता है- क्या होगा इस देश का ? हाय महंगाई डायन खा डालेगी क्या ? मगर यह सब बातें सिर्फ कहने की हैं क्या महंगाई के कारण लोगों ने जीना छोड़ दिया था ? या छोड़ दिया है ? हर आदमी प्रसन्नचित्त दिखता है हर घर में महंगी से महंगी सब्जी बन रही है फिर भी लोग महंगाई का रोना रोते रहते हैं.

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दरअसल महंगाई का रोना एक आदत बन गई है. कनछेदी लाल सोच रहा है मै वर्षों से देख रहा हूं ऐसा कोई दिन, महीना , साल नहीं होता जब महंगाई को लेकर लोग रोते हुए नहीं मिलेंगे. मगर यह सब घड़ियाली आंसू है. दरअसल देश का हर आदमी सक्षम है. हमारे देश की सरकार ने हर आदमी को खुशहाल बना दिया है . हर आदमी मालामाल है. बस दिखाने को रोता रहता है यह आदिकाल से चला आ रहा है.

ऐसा कोई साल नहीं रहा जब महंगाई नहीं बड़ी हो . कांग्रेस और भाजपा तो अभी पैदा हुई है .लोकतंत्र में पली बढ़ी है. मगर अंग्रेजों के समय में भी महंगाई थी .मराठों और मुगलों के समय भी, दरअसल महंगाई का अर्थ है – प्रगति, प्रोग्रेस, तरक्की. अगर महंगाई नहीं होगी तो देश के विकास का पहिया रुक जाएगा.

कनछेदी लाल यह जानता है, जब तलक हम आम आदमी हैं हम इसे समझ नहीं सकते. मगर जैसे ही हमारे बीच से कोई देश का प्रधानमंत्री बन जाता है उसकी समझ में यह बात आ जाती है और वह हरी झंडी लेकर खड़ा हो जाता है .

यही कारण है कि समझदार आदमी कभी भी महंगाई को लेकर गंभीर नहीं होता, मन को छोटा नहीं करता और ना ही कभी इसे गलत निरूपित करता है. महंगाई चाहे जैसे बड़े वह सहृदय भाव से स्वीकार करता है. गले से लगाता है.

मगर देश में औचक करिश्मा सा हुआ. महंगाई कम होने लगी. भारत सरकार यह देखकर चिंतित हुई. देश के प्रमुख, हमारे प्रधानमंत्री के चेहरे पर शिकन का एक संजाल विस्तारित हो उठा. उन्होंने महंगाई से हाथ जोड़कर विनय की,- “देवी ! हमसे क्या भूल हो गई जो हमें छोड़ कर जा रही हो. हे माते! हम पर कृपा बनाए रखो. हम आपके बच्चे हैं.”

महंगाई ने तुनक कर कहा, – “मैं परदेस जा रही हूं. अब मुझे नहीं रहना इस भारत भूमि में. जिसको देखो मुझे लाते मारता है, भला बुरा कहता है .यह सुन सुनकर मेरे कान पक गए हैं.”

प्रधानमंत्री ने चापलूसी भरे स्वर में कहा, – “देवी ! अनर्थ ना करो. हमारे नाम पर बट्टा ना लगाओ. मैं तो आपका परम भक्त हूं.”

महंगाई गंभीर हो गई, – “तुम मेरे परम उपासक हो, मगर तुम्हारे राज में मेरे साथ क्या हो रहा है मेरा हर आदमी चीरहरण कर रहा है .जब तक तुम वादा नहीं करोगे मैं नहीं रुकने वाली.”

यह सुनकर प्रधानमंत्री गंभीर हो गए कहा,- “मैं कसम खाने तत्पर हूं…”
महंगाई, – “तो ठीक है,खाओ कसम.” तो पाठकों जान लीजिए यह रहस्य प्रधानमंत्री ने महंगाई की इच्छा अनुरूप कसम खाई, तब जाकर देवी महंगाई पुन: प्रसन्न होकर देश में कृपा बरसा रही है.

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बच्चों के मिड डे मील में नमक-रोटी

जी हां, मिर्जापुर के सरकारी स्कूलों का इस वक्त यही हाल है. शायद ये कोई अचरज की बात नहीं होगी, क्योंकि सरकारी स्कूल के शिक्षक शायद ऐसे ही गरीब बच्चों का पेट काटकर अपने बच्चों को अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ाते हैं. बच्चों को मीड डे मील में मिलती है नमक-रोटी. इस खबर ने सरकारी स्कूलों की पोल खोल दी हैं.

एक प्रिंट के पत्रकार को जब ये पता चला कि मिर्जापुर के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को नमक-रोटी दी जाती है तब उसने तुरन्त इस बात की सच्चाई को पता लगाने के लिए उस स्कूल का जायजा लिया और आखिरकार वही हुआ बच्चे नमक-रोटी खा रहे थें. मीरजापुर के जमालपुर प्रखंड का शिऊर प्राइमरी स्कूल दो तरफ से पहाड़ियों से घिरा है. अहरौरा से स्कूल की दूरी करीब चार किमी है.स्कूल तक पहुंचने का रास्ता बहुत ही दिक्कतों भरा है. जरा सोचिए कि जिस स्कूल का रास्ता इतना दुर्गम है उस स्कूल में कुछ गरीब बच्चे सिर्फ इसलिए आते हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें खाना भी मिल जाएगा लेकिन खाने का पैसा तो यहां शिक्षक हजम कर जाते हैं.

यहां कि पड़ताल के बाद पता चला कि यहां दो रसोइयां हैं रुक्मणी देवी और ममता. दोनों से बात करने पर पता चला कि स्कूल का ताला खोलने से लेकर बच्चों का खाना खिलाने तक का जिम्मा इन्हीं का है. उन्होंने बताया कि बच्चों को नमक-रोटी खिलाने की कहानी आज की नहीं बल्कि कई दिनों की है. उन्हें सामान ही नहीं मिलता कि वो बच्चों को अच्छा खाना खिला सकें और सिर्फ नमक-रोटी ही नहीं. कई बार तो बच्चों को चावल नमक भी दिया गया है जबकि सरकार ने इन सरकारी स्कूलों को मिड डे मील में खाना खिलाने की पूरी व्यवस्था की है. एक चार्ट बनाया है कि बच्चों को कब क्या देना है. लेकिन इस स्कूल के हालात तो कुछ और ही बयां कर रहे हैं.

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वहां पर बच्चों को एक दिन दूध भी दिया जाता है, लेकिन 95 बच्चों में मात्र 2 किग्रा ही दूध आता है और बच्चों को ऐसे दिया जाता है जैसे ऊंट के मुंह में जीरा दिया जा रहा हो. इतना ही नहीं अगर पढ़ाई की बात करें तो कुछ शिक्षिका ऐसी हैं जो सिर्फ वेतन लेने के लिए ही स्कूल में जाती हैं और बच्चों को पढ़ाई के नाम पर कुछ भी नहीं पढ़ाती. इस बात को लेकर पहले भी काफी बवाल हुआ है लेकिन स्थिति ज्यों कि त्यों बनी हुई है और आज भी सिर्फ वेतन लेने ही आती हैं मोहतरमा. वहां पर पढ़ाई के मामले में शायद ही किसी बच्चे को कुछ आता हो.

अब बात यही निकलकर सामने आती है कि बच्चों के भविष्य का क्या? इन स्कूलों को सरकार, बच्चों की पढ़ाई और खाने के लिए पैसा देती है लेकिन वो पैसा शायद स्कूल तक पहुंचता ही नहीं या फिर तो नेता या फिर तो शिक्षक उन पैसों को हजम कर जाते हैं. कुल मिलाकर निष्कर्ष यही सामने आता है कि बच्चों का भविष्य खतरे में है और खाने का जो हाल है वो तो बहुत ही बुरा है. सरकार को जल्द ही इस पर कोई एक्शन लेना होगा नहीं तो आने वाले दिनों में सरकारी स्कूलों के हाल और भी बद्तर हो जाएंगे.

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एडिट बाय- निशा राय

‘सैक्रेड गेम्स’ का छाया जलवा, शो से जुड़े एक्टर्स हुए डिजिटल वर्ल्ड में पौपुलर

सेक्रेड गेम्स का दूसरा सीजन काफी लोकप्रिय रहा. इस वेबसीरिज के किरदारों को और उनके डायलौग्स को भी लोगों ने काफी पसंद किया. कई डायलौग तो दर्शकों के जुबान पर चढ गयें. सरताज सिंह और गणेश गायतोंडे, यह दो किरदार तो सैक्रेड गेम्स के पहले सीजन से ही काफी लोकप्रिय रहें हैं. इस सीजन में इन दो किरदारों के अलावा बाकी किरदारों को भी काफी पसंद किया गया. नतीजन, यह किरदार निभानेवाले एक्टर्स की लोकप्रियता बढी.

अमरिका स्थित मीडिया टेक स्कोर ट्रेंड्स इंडिया ने सैक्रेड गेम्स के अभिनेताओं का एक विशेश सांख्यिकी वेब चार्ट जारी किया है. इन आंकड़ों के अनुसार, सरताज का किरदार निभानेवाले  सैफ अली खान की लोकप्रियता सैक्रेड गेम्स सीजन 2 रिलीज होने के बाद एक सप्ताह (15 अगस्त से 22 अगस्त) के भीतर 78 अंक से 100 अंक तक बढी हैं, और सैफ लोकप्रियता में शीर्ष स्थान पर पहूंचे हैं. वहीं, गणेश गायतोंडे बने नवाजुद्दीन सिद्दीकी की लोकप्रियता भी 55 अंकों से 59 अंकों तक बढीं. और वह लोकप्रियता में दूसरे स्थान पर हैँ.

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बात्या एबेलमैन बनी कल्कि कोचलिन लोकप्रियता में तिसरे स्थान पर हैं. उनके किरदार को दर्शकों द्वारा सराहा गया. शुरुआत में 39 अंक पर रहीं कल्कि की लोकप्रियता 47 अंक तक बढ़ी. दिलचस्प बात यह है कि रणवीर शौरी के परिपक्व, मजाकिया पूर्व आईएसआई प्रमुख शाहिद खान के खतरनाक किरदार को बहुत प्रशंसा मिली. जिसकी वजह से अभिनेता रणवीर शौरी लोकप्रियता में चौथे स्थान पर हैं.

सीज़न 2 के सबसे लोकप्रिय कैरेक्टर  गुरुजी याने की प्रतिभाशाली अभिनेता पंकज त्रिपाठी पांचवें स्थान पर हैं. तो, सीजन 1 में नजर आयी राधिका आपटे छठे स्थान पर रही हैं. दर्शक को राधिका सीजन 2 में भी दिखने की उम्मीद थी. और इसिलिए सीजन-2 के रिलीज के दौरान राधिका की लोकप्रियता में बढोतरी आयी हैं.

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सुरवीन चावला उर्फ जोजो, केडी यादव मैडम के रूप में दिखी अमृता सुभाष, जोया मिर्ज़ा के रूप में नजर आयी, एलनाज़ नौरोज़ी और मलकोम का किरदार निभानेवाले ल्यूक केनी की मौखिक प्रचार से लोकप्रियता काफी बढी हैं.

स्कोर ट्रेंड्स के सह-संस्थापक अश्वनी कौल खुलासा करते हैं, “शीर्ष स्थान पर पहूंचे सभी 6 अभिनेताओं की सैक्रेड गेम्स की वजह से काफी लोकप्रियता बढी दिखायी दे रहीं हैं. सैक्रेड गेम्स के पहले सीजन के बाद दर्शकों को काफी अरसे से दूसरे सीजन का इंतजार था. और अगस्त के पूरे महिने में हर हफ्ते इन सितारों के लोकप्रियता बढती दिखायी दी. सोशल, वायरल न्यूज़ डिजिटल न्यूज़ और न्यूज़पेपर्स में इनकी बहुत बड़ी फैन फौलोइंग हमने पाई है.”

अश्वनी कौल आगे बताते हैं, “ 14 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध 600 से अधिक समाचार स्रोतों से यह रैंकिंग उपलब्ध होती हैं. यह नंबर फेसबुकट्विटरप्रिंट प्रकाशनवायरल न्यूजब्रौडकास्ट और डिजिटल प्लेटफोर्म जैसे सैकड़ों स्रोतों से उठाए गए हैं और फिर कई अत्याधुनिक एल्गोरिदम इस विशाल डेटा की प्रक्रिया में सहायता करते हैं, जिससे बौलीवुड सितारों के स्कोर और रैंकिंग तक हम पहुंच पाते हैं

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नेहा कक्कड़ के एक्स बौयफ्रेंड ने किया ‘बिग बौस’ में आने से इंकार, जाने क्यों

कलर्स टी.वी. के सबसे बड़े रियलिटी शो “बिग बौस” का सीजन 13 जल्द ही दर्शकों को एंटरटेन करने आ रहा है. हर बार की तरह बौलीवुड के भाईजान यानी सलमान खान इस शो को होस्ट करेंगे. खबरें कुछ ऐसी हैं कि ‘बिग बौस’ सीजन 13 सितम्बर महीने के आखिर में छोटे पर्दे पर लौंच किया जाएगा. इसी बीच ‘बिग बौस सीजन 13’ के कुछ कंटेस्टेंट्स के नाम भी सामने आए जिनमें से चंकी पांडे, राजपाल यादव, माहिका शर्मा और मुग्धा गोडसे जैसे कलाकारो शामिल है. बीते दिनों खबर आई थी कि नेहा कक्कड़ के एक्स बौयफ्रेंड और बौलीवुड अभिनेता हिमांश कोहली भी इस शो में नजर आने वाले हैं.

‘बिग बौस सीजन 13’ में आने से किया इंकार

खबरो की माने तो हिमांश कोहली ने ‘बिग बौस सीजन 13’ का हिस्सा बनने से साफ मना कर दिया है. हिमांश ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि, ‘मुझे ये शो बेहद पसंद है, यह काफी अच्छा कौन्सेप्ट है और जिस तरह से भाईजान यानी कि सलमान खान इस शो को होस्ट करते है और लोगों को एंटरटेन करते है, मुझे उनका ये अंदाज बहुत अच्छा लगता है, लेकिन फिलहाल मैं अपनी बाकि चीज़ों पर ज्यादा फोकस कर रहा हूं और उसी के चलते मैं अभी बिग बौस का हिस्सा नहीं बन सकता पर मैं आगे इसके बारे में जरूर सोचूंगा.’

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फैंस का तोड़ा दिल

 

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जहां एक तरफ दर्शक बिग बौस सीजन 13 में हिमांश कोहली के आने का इंतजार कर थे तो वहीं उन्होंने इस शो में आने से इंकार कर अपने फैंस का दिल तोड़ दिया है. हिमांश के फैंस उनको इस शो में शायद इसलिए भी देखना चाहते थे क्यूंकि उन्हे एसा लग रहा था कि इस शो के जरिए घर के अंदर उनके निजी जिंदगी को लेकर कई राज़ खुलेंगे. हिमांश ने इस शो के लेकर कहा कि, ‘मुझे ये शो काफी शानदार लगता है लेकिन उस चीज की आदत खराब है जोकि आपका समय ज्यादा जाया करती है. यही वजह है कि मैं इसे रेगुलर फौलो नहीं करता हूं.’

बता दें, कुछ समय पहले ही सिंगिंग क्वीन नेहा कक्कड़ और हिमांश कोहली के ब्रेक-अप की खबरों ने उनको फैंस को निराश कर दिया था. वहीं नेहा ने हिमांश के ऊपर धोखाधड़ी करने का इल्जाम भी लगाया था और उसके बाद फैंस के रिएक्शन को देख नेहा ने हिमांश को भला-बुरा कहने से साफ मना कर दिया था.

Written By: Karan Manchanda

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आखिर क्यों जेन्टस टौयलेट घुसीं आयुष्मान की ‘ड्रीम गर्ल’, पढ़ें पूरी खबर

आयुष्मान खुराना और नुसरत भरूचा की अपकमिंग फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ दर्शकों को एंटरटेन करने सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. एक के बाद एक हिट फिल्में करने के बाद आयुष्मान खुराना अपनी इस फिल्म के लिए काफी एक्साइटेड दिखाई दे रहे हैं. नुसरत भरूचा द्वारा दिए गए इंटरव्यू में एक एसी बात सामने आई है जिसे सुनकर लोगों के होश उड़ गए. फिल्म ड्रीम गर्ल में आयुष्मान लड़की बन लड़कियों वाला किरदार निभा रहे हैं, तो इसी के चलते जब नुसरत भरूचा से पूछा गया कि क्या उन्हें भी ऐसी कुछ अजीबो-गरीब समस्या का सामना करना पड़ा तो उन्होनें शर्माते हुए बताया कि एक बार वे गलती से जेन्टस टोयलेट में घुस गई थीं. आखिर क्या थी वजह..

गलती से घुसी जेन्टस टौयलेट में

नुशरत भरुचा ने आगे बताया कि मुझे इस बात कि खुशी है कि जब मुझसे ये गलती हुई तब वहां जेन्टस टौयलेट में कोई नहीं था, और ना ही किसी ने मुझे अंदर या बाहर आते हुए देखा नहीं तो उस सिचुएशन में मुझे काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता. नुसरत ने अपनी सफाई देते हुए आगे कहा कि, “कई बार रेस्टोरेंट या सार्वजनिक जगहों पर टौयलेट्स के बाहर इतना आर्टवर्क कर दिया जाता है कि ये उल्टा कन्फ्यूज कर देते हैं कि ये मेल टोयलेट है या फीमेल.”

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ट्रोलिंग की वजह बन सकती थी ये वजह

नुसरत भरुचा की ये बात वाकई सबको हैरान कर देने वाली थी, और अगर वहां उनको कोई देख लेता या उस समय वे टौयलेट खाली ना होता तो सचमुच नुसरत एक चर्चा का विषय बन कर रह जाती और जो उनकी ट्रोलिंग होता वो अलग.

बता दें, नुसरत भरुचा काफी समय बाद बड़े पर्दे पर नजर आने वाली है. इससे पहले नुसरत कार्तिक आर्यन के साथ सुपरहिट फिल्म ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ में दिखाई दी थीं, और उस फिल्म में नुसरत की बेहतरीन एक्टिंग ने लोगों का दिल जीता लिया था. आयुष्मान खुराना और नुसरत भरुचा की आने वाली फिल्म ड्रीम गर्ल 13 सितम्बर को बड़े पर्दे पर रिलीज होने वाली है और इस फिल्म के डायरेक्टर राज शांडिल्य और प्रोड्यूसर एकता कपूर हैं.

Written By: Karan Manchanda

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आखिर कैसे बदहाली का शिकार हुआ बौलीवुड का ये सितारा

25 साल से ज्यादा का अरसा गुजर जाने के बाद भी बौलीवुड के खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेता राज किरण मेहतानी आज भी हिन्दी फिल्मों के दर्शकों के जेहन में जिंदा हैं तो इसकी वजहें भी हैं. वे वाकई एक ज़िंदादिल अभिनेता थे. जिसने सौ से भी ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया और रोल छोटा होते हुये भी अपनी दमदार एक्टिंग की छाप छोड़ी.

कर्ज से हुए थे फेमस…

साल 1980 में सुभाष घई द्वारा निर्देशित सुपर डुपर हिट कर्ज फिल्म में वे एक ऐसे ही छोटे रोल में थे लेकिन पूरी फिल्म के फ्रेम्स में दिखाई दिये थे. इस फिल्म में सिम्मी ग्रेवाल एक लालची पत्नी की भूमिका में थीं जो पति की जायदाद हड़पने के लिए उसकी हत्या कर देती है. बाद में राज किरण का पुनर्जन्म ऋषि कपूर के रूप में होता है और वह पूर्वजन्म में की गई अपनी हत्या का बदला पत्नी से लेता है. हालांकि कर्ज अंधविश्वास पर आधारित फिल्म थी फिर भी वह खूब चली थी क्योंकि उसमें वह सब कुछ था जो दर्शकों को चाहिए रहता है. फिल्म में ऋषि कपूर मोंटी नाम के सिंगर बने थे जो राज किरण का दूसरा जन्म था.

सेट पर हुई थी राज और ऋषि की दोस्ती…

इसी फिल्म से ऋषि और राज की दोस्ती परवान चढ़ी थी. कर्ज हिट हुई तो राज किरण को धडाधड़ फिल्में मिलने लगीं. इनमें घर हो तो ऐसा, बसेरा, बुलंदी और तेरी मेहरबानियां उल्लेखनीय हैं लेकिन यह उनकी बदकिस्मती ही कही जाएगी कि उन्हें अधिकतर रोल सहायक अभिनेता के ही मिले.

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सी ग्रेड फिल्मों में भी किया काम…

राज किरण महत्वाकांक्षी थे लेकिन उन्होने एक पेशेवर अभिनेता की तरह अपनी हालत से समझौता कर लिया और अच्छी फिल्म और किरदार की चाह में सी ग्रेड तक की फिल्में करते रहे. फिर हर चौथी पांचवी फिल्म में राज किरण दिखने लगे पर अपने अभिनय की छाप छोड़ी

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो’…

उन्होने महेश भट्ट निर्देशित कला फिल्म अर्थ से जिसमें वे एक फ्रीलान्स सिंगर के रोल में थे जो पति कुलभूषण खरबन्दा की परित्यक्ता शबाना आजमी से प्यार करने लगता है. इस फिल्म में उन पर फिल्माई एक गजल ‘तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो…. क्या गम है जिसको छुपा रहे हो’, आज भी शिद्दत से सुनी और गुनगुनाई जाती है. 1995 तक राज किरण फिल्मों और शेखर सुमन के एक टीवी सीरियल रिपोर्टर में दिखे लेकिन फिर एकाएक ही रहस्यमय तरीके से न केवल फिल्मों से बल्कि भारत से ही गायब हो गए.

डिप्रेशन में थे राज…

1949 में मुंबई में जन्मे राज किरण दिखते रहते यानि फिल्मी ढंग से ही लापता न होते तो तय एक बेहतर चरित्र अभिनेता होते. उनके घर में पत्नी कथिजा नाचियार उर्फ रूपा और बेटी ऋषिका के अलावा दो भाई भी हैं. राज किरण की यूं गुमशुदगी के बारे में तरह तरह की अफवाहें फिल्म इंडस्ट्री में उड़ने लगीं. कइयों ने तो उन्हें मृत ही मान लिया. इसके पहले यह बात भी उजागर हुई थी कि राज किरण नामालूम वजहों के चलते गहरे अवसाद में आ गए हैं. जिनका इलाज मुंबई के भायखला स्थित मसीना अस्पताल में चला था लेकिन इसके बाद वे कहां गए इसकी जानकारी उनकी पत्नी और बेटी भी नहीं दे पाईं.

सस्पेंस पर सस्पेंस…

राज किरण को भारत में आखिरी दफा देखने का दावा महेश भट्ट ने ही किया था जो उनकी मिजाजपुर्सी के लिए मसीना अस्पताल गए थे और मीडिया को उनके डिप्रेशन में होने की जानकारी दी थी. बाद मे जब यही मीडिया उनकी पत्नी और बेटी के पीछे पड़ गया तो उन्होने बताया कि राज किरण लापता हैं और पुलिस उन्हें ढूंढ रही है इसके अलावा प्राइवेट जासूसों की सेवाएं भी ली जा रहीं हैं.

दीप्ति नवल ने फेसबुक पर चलाई मुहिम…

फिल्म इंडस्ट्री में जिन इने गिने लोगों से राज किरण की गहरी छनती थी उनमें से एक अभिनेत्री दीप्ति नवल भी हैं. जिन्होने अपने इस दोस्त को ढूंढने के लिए फेसबुक पर मुहिम भी चलाई थी और बाद में बताया भी कि राज किरण को अमेरिका में टैक्सी चलाते देखा गया. लेकिन अब तक फिल्म इंडस्ट्री में काफी कुछ बदल गया था जिसमें राज किरण एक खूबसूरत हादसे की तरह भुला दिये गए थे.

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ऋषि कपूर ने दिया था ये बयान…

अमेरिका से राज किरण का नाता था क्योंकि उनके भाई गोविद मेहतानी वहां के बड़े कारोबारी हैं जिनके कारोबार को जमाने में उन्होने काफी मदद की थी. यह एक संभावना भर थी कि राज किरण अपने भाई के पास चले गए होंगे लेकिन दीप्ति नवल के खुलासे के बाद साल 2009 में उनके एक और दोस्त ऋषि कपूर ने यह बयान देकर फिर से राज किरण को जिंदा कर दिया था कि वे अमेरिका में ही हैं और टेक्सास के एक मेंटल हास्पिटल में इलाज करा रहे हैं और इलाज का खर्च वहां काम करके उठा रहे हैं. ऋषि कपूर ने यह भी कहा था कि वे जल्द अपने दोस्त को भारत वापस ले आएंगे और उन्हें पूरी सहूलियत से रखेंगे. हालांकि ऋषिकपूर अपनी बात पर अमल नहीं कर पाए.

उधर राज किरण की पत्नी और बेटी ने इस बात को झूठा बताकर पल्ला झाड लिया. इसी दौरान यह बात भी सामने आई कि राज किरण अपनी पत्नी के लालच और बेबफाई के चलते डिप्रेशन का शिकार हुये थे. यानि कर्ज फिल्म की कहानी उनकी जाती ज़िंदगी में भी लागू हो रही थी . फर्क इतना भर था कि हकीकत में ऋषिकपूर या किसी और ने फिल्म की तरह उनके लिए कुछ नहीं किया.

किसी को नहीं पता कहां हैं राज किरण…

अब राज किरण के बारे में अधिकृत रूप से कोई कुछ नहीं कह पा रहा. आए दिन उनके होने न होने के बारे में तरह तरह की अफवाहें जरूर उड़ती रहती हैं और अब तो यह सिलसिला भी बंद हो गया है. ऐसे में यह कह पाना मुश्किल है कि वे जिंदा हैं भी या नहीं. लेकिन यह कहना जरूर लाजिमी है कि वाकई राज किरण परवीन बाबी की तरह फिल्म इंडस्ट्री की क्रूरता और अपनों की ही की अनदेखी का शिकार हुये हैं. जब तक वे काम कर रहे थे तब तक सुर्खियों और खबरों में बने रहे लेकिन जैसे ही बीमारी और नाकामयाबी का दौर आया तो सभी ने आंखे फेर लीं. उनकी फिल्मों से कमाई गई शौहरत तो जिंदा है और रहेगी लेकिन दौलत कहां गई यह राज अब उनके नाम की तरह राज ही रहेगा.

एडिट बाय- निशा राय

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