बेरोजगारी का आलम

देश में बेरोजगारी का हाल यह है कि महाराष्ट्र में 8,000 कौंस्टेबलों की भरती के लिए 12,00,000 अर्जियां आई हैं. सरकार तो चाहती थी कि उन का एग्जाम भी औनलाइन हो जिस में इन अधपढ़े नौजवानों को किसी साइबर कैफे में जा कर सैकड़ों घंटे और सैकड़ों रुपए बरबाद करने ही थे और सरकार के पास मनमाने ढंग से फैसले करने का हक रहता. हो सकता है अब कागजपैन पर ही कौंस्टेबलों का एग्जाम हो.

कौंस्टेबलों का वेतन कोई ज्यादा नहीं होता. काम के घंटे बहुत ज्यादा होते हैं. वर्षों तक अफसरों की चाकरी करनी पड़ती है. रहने की सुविधा बहुत ही घटिया होती है, पर फिर भी नौकरी लग जाने पर रोब भी रहता है और ऊपरी कमाई भी होती है, इसीलिए 12 लाख दांव लगा रहे हैं.

इस तरह की भरतियों में सरकारी आदमियों की खूब मौज होती है. अर्जी देने वालों को लूटने का सिलसिला चालू हो जाता है. तरहतरह के सर्टिफिकेट औनलाइन एप्लीकेशन के साथ लगवाए जाते हैं जिन्हें जमा करने में खर्च होता है. जो रिजर्व कोटों से होते हैं उन्हें एससी, ओबीसी का सर्टिफिकेट बनवा कर लाने के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं.

ये भी पढ़ें- पुलिस को फटकार

अर्जी ढंग से गई या नहीं, यह पता करना भी मुश्किल होता है. उस के बाद एकदम चुप्पी छा जाती है. महीनों पता ही नहीं चलता कि इन भरतियों का क्या हुआ. जिस ने अर्जी दी, वह आराम से बैठ कर सपने देखने लगता है जबकि उसे यह मालूम ही नहीं होता कि औनलाइन गड़बडि़यों का धंधा अलग चालू हो गया है.

अगर गलती से इंटरव्यू और फिजिकल का बुलावा आ जाए तो खुशी तो होती है पर लाखों की रिश्वत की मांग आने लगती है. देश में कानून बनाए रखने के लिए जो बेईमानी भरती

में हाती है वह अपनेआप में एक अचंभा है. इस बेईमानी पर वे मंत्री चुप रहते हैं जो दिन में 10 बार में सच बोलने की कसम खाते हैं. उन्हीं कौंस्टेबलों के बल पर देश में हिंदूहिंदू, मुसलिममुसलिम किया जाता है. सरकार अगर उछलती है तो उन कौंस्टेबलों के बल पर जिन के वीडियो जामिया और उत्तर प्रदेश में गाडि़यों, स्कूटरों को तोड़ते हुए खूब वायरल हुए हैं. यही कौंस्टेबल सड़क चलतों से मारपीट कर सकते हैं, ये सरकार के असल हाथ हैं पर इन की भरती बेहद घिनौनी है.

महाराष्ट्र में औनलाइन एग्जाम को न करने की जो अपील की जा रही है वह सही है, क्योंकि चाहे औनलाइन में स्काइप से फोटो चालू रहे, बेईमानी की गुंजाइश कई गुना है. कौंस्टेबलों की भरती साफसुथरी हो, यह देश की जनता की आजादी के लिए जरूरी है. उन्हें निचले पद पर तैनात अदना आदमी न सम झें, असल में वही सरकार की आंख व हाथ हैं. अगर दलितों, पिछड़ों, मुसलिमों को अपनी जगह बनानी है तो जम कर इस भरती में हिस्सा लेना चाहिए और पुलिस फोर्स को भर देना चाहिए, ताकि उन पर जुल्म न हों.

ये भी पढ़ें- फेल हुए मोदी

किसान हुए बेहाल

आम आदमी की जरूरत की चीजों जैसे प्याज, आलू, दूध के दाम बढ़ने पर सरकार लगातार मौसम को दोष दे रही है. कभी कहते हैं कि सूखा पड़ गया है तो कभी कहते हैं कि बेमौसम की बारिश हो गई. पर जिस भी किसान को जिस आलू से 5 रुपए किलो न मिलते हों और प्याज से 2 रुपए किलो न मिलते हों वह आलू बाजार में 30 रुपए से 50 रुपए और प्याज 75 से 125 रुपए तक हो जाए, एक बड़ी बेवकूफी और साजिश का नतीजा होने के अलावा कुछ और नहीं.

बेवकूफी यह है कि पिछले 2 सालों में भारतीय जनता पार्टी ने किसानों के युवा बच्चों को बड़ी गिनती में भगवा दुपट्टे पहना कर सड़कों पर दंगे करवाने के लिए उतार दिया है. किसानी दोस्तों के साथ नहीं की जाती. यह उबाऊ होती है. मेहनत का काम होती है. जिन लड़कों के पास पहले बाप के साथ खेत पर काम करने के अलावा कुछ और नहीं होता था, उन्हें चौराहे पर खड़ा कर के हिंदू राष्ट्र बनाने के भाषण देने पर लगा दिया है. वे ट्रकों में बैठ कर सैकड़ों मीलों दूर मंदिरों में घंटे बजाने भी जाने लगे और भगवा आंदोलन में भी.

बाप बेचारा बेटे को पाले भी, जेबखर्च का पैसा भी दे और खेत पर काम भी करे. पहले जब 12-13 साल के लड़के किसान का हाथ बंटाने आ जाते थे, आज खेतों में सफेद बालों वाले कमर तोड़ते आदमीऔरत नजर आते हैं.

ये भी पढ़ें- नागरिकता कानून पर बवाल

साजिश यह है कि जरा सी फसल कम होने पर दाम 4-5 गुना तक बढ़ सकते हैं. किसान से हमेशा की तरह पुराने दामों पर माल खरीद कर गांवों, कसबों और शहरों के गोदामों में भरा जाने लगा है. व्यापारीआढ़ती जानते हैं कि किसान निकम्मा होने लगा है और न वह कम फसल होने पर फसल जमा कर के रख सकता है, न उस के पास फसल बढ़ाने का तरीका है. वह यह भी जानता है कि उस का थोड़ा पढ़ालिखा बेटा तो हिंदू धर्म को बचाने में लगा है, खेत की फसल से उसे क्या लेनादेना?

व्यापारीआढ़ती का बेटा पढ़ कर बाप को कंप्यूटर चलाना सिखाता है, किसान का बेटा बाप को मुसलमान और दलित से नफरत का पाठ पढ़ाने लगा है या गांव में अपनी जाति का मंदिर बनाने के लिए उकसाने लगा है.

देश की उपजाऊ जमीन पर अब पूजापाठी नारों की फसल लहलहा रही है. भला आलूप्याज की क्या औकात कि वे मुकाबला कर सकें.

कोरोनावायरस के बाद अब बर्डफ्लू फैलने का खतरा मंडराया, चेक रिपब्लिक में मिला दूसरा मामला

चीन के वुहान शहर से निकला कोरोना वायरस दुनियाभर में फैल चुका है. एशिया के बाद यूरोप, अमेरिका समते तमाम मुल्कों में इसके मरीज देखने को मिले. भारत में फिलहाल अभी तक इस वायरस से किसी की भी मौत की खबर नहीं है इसी बीच एक और बड़ी बीमारी फैलने का डर मंडराने लगा है.

चेक रिपब्लिक के कृषि मंत्रालय ने सोमवार को पार्डुबिस के मध्य चेक क्षेत्र में एवियन इंन्फ्लूएंजा (बर्डफ्लू) के दूसरे मामले के फैलने की पुष्टि की है. मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “एच5एन8 (बर्डफ्लू) के प्रसार को रोकने के लिए 1 लाख मुर्गियों को मारना पड़ेगा.” समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, पारडुबिक के स्लोपोटिक गांव के एक पॉल्ट्री बीडर ने रविवार को इस सप्ताहंत तुर्की के 7500 मुर्गियों में से 1300 की मौत की पुष्टि की.

इन पक्षियों में कथित रूप से एवियन इंन्फ्लूएंजा (बर्डफ्लू) के लक्षण देखे गए थे, इस बात की पुष्टि बाद में प्राग के राज्य पशु चिकित्सा संस्थान ने की थी. इसके अलावा फार्म में 1,30,000 ब्राइलर मुर्गियां भी हैं. कृषि मंत्री मिरोस्लेव तोमान ने कहा, “पूरे कंपनी परिसरों को बंद कर दिया गया है. परिसर से बाहर बीमारी को फैलने से रोकने के लिए प्रवेशद्वार पर एहतियाती उपाय अपनाए जाएंगे.”

ये भी पढ़ें- कहा भी न जाए सहा भी न जाए

कोरोना वायरस की वजह से दुनिया भर के व्यापार में भी काफी फर्क देखने को मिला है. फिलहाल अब हालात कुछ सुधरने की ओर हैं. चीन में सोमवार तक 80 प्रतिशत से अधिक केंद्रीय उद्यमों में कामकाम फिर से शुरू हो गया है. नए कोरोना वायरस महामारी से केंद्रीय उद्यमों के उत्पादन लक्ष्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

चीनी राज्य परिषद के राज्य-अधिकृत संपत्ति के पर्यवेक्षण और प्रबंध आयोग के उप प्रमुख रन होंगपिन ने मंगलवार को पेइचिंग में यह बात कही. नए कोरोना वायरस निमोनिया की महामारी फैलने के बाद चीन के केंद्रीय उद्यमों ने पूरी तरह से महामारी की रोकथाम और नियंत्रण का समर्थन किया. सीओएफसीओ निगम हर दिन 200 टन से अधिक चावल वुहान पहुंचाता है.

रन होंगपिन ने कहा कि काम और उत्पादन की बहाली महामारी की रोकथाम और आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण गारंटी है. प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार 80 प्रतिशत से अधिक केंद्रीय उद्यमों ने अपने कामकाज बहाल किया है. पेट्रोलियम, संचार, पावर ग्रिड और परिवहन आदि व्यवसाय में फिर से काम शुरू करने की दर 95 से 100 प्रतिशत तक जा पहुंची है.

कोरोना वायरस से व्यापार में होने वाले नुकसान का असर केवल चीन में नहीं बल्कि हिंदुस्तान में हुआ है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि सरकार कोरोना वाइरस का घरेलू उद्योगों पर पड़ने वाले प्रभाव से निपटने के लिए जल्दी ही उपायों की घोषणा करेगी. उन्होंने चीन में फैले खतरनाक वाइरस से उत्पन्न स्थिति को लेकर उद्योग प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी.

ये भी पढ़ें- मर्दों में बढ़ती शीघ्रपतन की समस्या, पढ़ें खबर

दिल्ली में राजनीति के सफल प्रयोग को बिहार में दोहारने के आसार, पीके ने किया इशारा

राजधानी दिल्ली में आप ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई. सीएम केजरीवाल साल के पहले चुनाव में 70 में से 62 सीटों पर फतह हासिल कर विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया. इसबार के दिल्ली चुनाव हर बार से बहुत अलग थे. आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव को बहुत ही होशियारी के साथ लड़ा और इसमें विजय भी पाई. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि दिल्ली जैसा प्रयोग बिहार में भी देखने को मिल सकता है. वैसे तो यूपी और बिहार की राजनीति दिल्ली की राजनीति से बहुत अलग है. यहां के मुद्दों,नेताओं,जनता सभी में काफी असमानताएं हैं फिर भी चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की बातों से ऐसा लग रहा है कि वो भी बिहार की राजनीति में हाथ आजमाना चाहते हैं.

जेडीयू से निकाले गए नेता और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार के लिए बड़ी योजना का ऐलान कर दिया है. राजधानी पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत ने हालांकि किसी राजनीतिक दल बनाने का तो ऐलान नहीं किया लेकिन उन्होंने राज्य के लाखों युवकों को जोड़ने के लिए ‘बात बिहार की’ कार्यक्रम की घोषणा की. अपनी योजना की घोषणा करते हुए किशोर ने आज कहा कि वह बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होते हुए देखना चाहते हैं और इसके लिए वह मिशन पर निकलेंगे और युवाओं की फौज तैयार करेंगे. प्रशांत की इस तैयारी को राज्य में तीसरे मोर्चे के संकेत में रूप में भी देखा जा रहा है.

ये भी पढ़ें- तो क्या विकास की राजनीति के आगे फीकी पड़ गई शाहीन बाग की राजनीति

प्रशांत ने सीधे तौर पर बिहार की राजनीति में एंट्री का ऐलान तो नहीं किया लेकिन ये संकेत तो जरूर दे दिया कि वह भविष्य में ऐसा जरूर कर सकते हैं. बिहार में इस साल नवंबर में चुनाव होने हैं. उससे पहले प्रशांत की ‘बात बिहार की’ कार्यक्रम के जरिए युवाओं को जोड़ने की मंशा को तीसरे मोर्चे की कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है. प्रशांत ने कहा कि वह बिहार के युवाओं को राजनीति सिखाएंगे और उन्हें आगे करेंगे. उन्होंने कहा, ‘मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा लेकिन पंचायत स्तर से युवाओं को चुनकर उन्हें आगे बढ़ाया जाएगा.’ उन्होंने दावा किया बिहार में उनके पास सवा लाख सक्रिय सदस्य हैं.

किशोर ने कहा कि वह युवाओं के अपने से जोड़ने के लिए एक कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘ 20 फरवरी से बात बिहार की नाम से एक कार्यक्रम शुरू करने जा रहा हूं. राज्य के 8,800 पंचायतों में से लड़कों की एक टीम बनाने जा रहा हूं. अभी तक हमारे साथ 2 लाख 93 हजार लड़के जुड़ चुके हैं. हमसे जुड़े लोगों में बीजेपी के भी लोग शामिल हैं. 20 मार्च तक हम राज्य के 10 लाख लड़कों को शामिल करने की योजना है.’ उन्होंने कहा कि बिहार के गांव-गांव से लड़कों को जोड़कर आगे बढ़ाने की रणनीति है. हमारी योजना है कि राज्य में 10 हजार अच्छे मुखिया जीतकर आएं.’

प्रशांत किशोर की राह यहां आसान नहीं होगी क्योंकि उनको शायद नहीं मालूम की अमित शाह की अगुआई में बीजेपी का संगठन हर बूथ पर पन्ना प्रमुख साल भर पहले बना चुका है. बिहार में बीजेपी के 90 लाख तो सिर्फ प्राथमिक सदस्य हैं. अगर बूथ लेवल तक पहुंच को काउंट करें तो संख्या कहीं अधिक हो जाएगी. इसलिए जिस बुनियाद का सपना संजोकर पीके बिहार की राजनीति के महारथियों से लोहा लेने उतरे हैं, उसके बारे में खुद भी आश्वस्त नहीं हैं.

ये भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ : सुपर सीएम भूपेश चले अमेरिका!

प्रशांत किशोर ने सामाजिक और आर्थिक सूचकांक गिनाए. हर मोर्चे पर नीतीश कुमार को फेल बताया. उनका कहना था, “लड़कियों को फ्री साइकल मिल गई लेकिन शिक्षा बर्बाद हो गई, बिजली पहुंच गई लेकिन प्रति व्यक्ति आय नहीं बढ़ी. लालू के 15 साल के नाम पर राज करते रहे नीतीश लेकिन बेहतरी के लिए कुछ नहीं किया.” हालांकि प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए पीके क्या करेंगे ये बताना भूल गए. उनकी प्राथमिक शिक्षा नीति क्या होगी ये भी बताना भूल गए. कुल मिलाकर पीके वही काम कर रहे थे जिसे तेजस्वी यादव ठीक से नहीं कर पा रहे हैं.

मोटे तौर पर ये कहा जा सकता है कि पीके ने सरकार की विफलताएं तो खूब गिनाई लेकिन वो बिहार की जनता के लिए क्या करेंगे इसका कोई ठोस रोडमैप वो नहीं बता पाए. पीके भी कुछ वैसा ही कर रहे हैं जैसा की कई सालों से तेजस्वी यादव करते आ रहे हैं. फिलहार तो प्रशांत किशोर की बातों से तो यही समझ आता है कि वो पंचायत स्तर से शुरूआत करके बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर करने की सोच रहे हैं लेकिन यहां मुकाबला विश्व की सबसे बड़ी पार्टी से है तो पीके को खास रणनीति के साथ मैदान पर उतरलना पड़ेगा.

ये भी पढ़ें- इलाहाबाद में तिरंगे के साथ धरना

मजहब गरीबों का सब से बड़ा दुश्मन

बिहार में बहुत ज्यादा गरीबों की हालत कमोबेश वही है, जो आजादी के पहले थी. आज भी निहायत गरीब रोटी, कपड़ा, मकान, तालीम और डाक्टरी सेवाओं जैसी बुनियादी जरूरतों से कोसों दूर है. समाज में पंडेपुजारियों, मौलाना और नेताओं के गठजोड़ ने आम लोगों को धार्मिक कर्मकांड, भूतप्रेत, यज्ञहवन के भरमजाल में उल झा कर रख दिया है.

पंडेपुजारियों द्वारा दलित और कमजोर तबके के बीच इस तरह का माहौल बना दिया है कि ये लोग अपना कामकाज छोड़ कर धार्मिक त्योहारों, पूजापाठ, पंडाल बनवाने के लिए चंदा करने, नाचगाने, यज्ञहवन कराने में अपने समय को गंवा रहे हैं. कसबों और गांवों में भी महात्माओं के प्रवचन, रामायण कथा पाठ, पुत्रेष्टि यज्ञ समेत कई तरह के धार्मिक आयोजन आएदिन कराए जाते हैं. इन कार्यक्रमों का फायदा साधुसंन्यासी, पंडेपुजारी वगैरह उठाते हैं.

ये भी पढ़ें- जानें कैसे भांगड़ा ने पर्व कौर को बनाया लंदन की ढोल क्वीन

गांवों में यज्ञ का आयोजन किया जाता है. उस यज्ञ की शुरुआत जलभरी रस्म के साथ होती है. नदी से हजारों की तादाद में लड़कियां और औरतें सिर पर मिट्टी के बरतन में नदी का जल ले कर कोसों दूरी तय कर आयोजन की जगह तक पहुंचती हैं. इस काम में ज्यादातर लड़कियां और औरतें दलित और पिछड़ी जाति की होती हैं और साथ में घोड़े और हाथी पर सवार लोग अगड़ी जाति के होते हैं.

जहां पर यह यज्ञ होता है, वहां अगलबगल के गांव के दलित और पिछड़ी जाति के लोग अपना सारा कामधंधा छोड़ कर इन कार्यक्रमों में बिजी रहते हैं यानी अगड़े समुदाय के लोग मंच संचालन, पूजापाठ और यज्ञहवन कराने में और दलित व पिछड़े तबके के लोग यज्ञशाला बनाने, पानी का इंतजाम करने यानी शारीरिक मेहनत वाला काम करते हैं.

दलित और पिछड़े तबके के बच्चे अपनी पढ़ाईलिखाई छोड़ कर इन्हीं कार्यक्रम में बिजी रहते हैं. गांव में भी अगड़े समुदाय के बच्चे पढ़ाई में लगे रहते हैं. इन कार्यक्रमों में करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जाते हैं.

ये भी पढ़ें- आतंकवाद की दुनिया से वापस लौटा माजिद

हर गांवकसबे में शिव चर्चा की बाढ़ सी आ गई है. औरतें, मर्द अपने घर का काम छोड़ कर शिव चर्चा में हिस्सा लेते हैं. इन लोगों द्वारा अपने घरों में शिव चर्चा कराने की परंपरा का प्रचलन जोरों पर है. इन्हें नहीं मालूम कि बेटे की नौकरी उस की मेहनत से मिली है, न कि ‘ओम नम: शिवाय’ का जाप करने से. अगर जाप करने से ही सारा काम होने लगे, तो कामधंधा, पढ़ाईलिखाई छोड़ कर लोग जाप ही करते रहें.

धर्म का महिमामंडन

इन धार्मिक आयोजनों के उद्घाटन समारोहों में नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, लालू प्रसाद यादव, उपेंद्र कुशवाहा, सुशील कुमार मोदी समेत दूसरे नेता, जो अन्य पिछड़ा वर्ग और दलित समाज से आते हैं, शिरकत करते हैं, इस का महिमामंडन करते हैं. वे ब्राह्मणवादी व्यवस्था की जड़ों में खादपानी देने का काम अपनी कुरसी बचाए रखने के लिए गाहेबगाहे करते रहते हैं.

पंडेपुरोहितों द्वारा लोगों के दिमाग में भर दिया गया है कि उन की गरीबी की वजह पिछले जन्म में किए गए पाप हैं. अगर इस जन्म में अच्छा काम करोगे यानी पंडेपुजारियों और धर्म पर खर्च करोगे, तो अगले जन्म में स्वर्ग मिलेगा.

बच्चों की जन्मपत्री, कुंडली, उन के बड़े होने पर मुंडन, उस से बड़े होने पर शादीब्याह, नए घर में प्रवेश करने पर, किसी की मौत होने पर इन ब्राह्मणों को आज भी इज्जत के साथ बुलाया जाता है और दानदक्षिणा भी दी जाती है. ये लोग मजदूर तबके की कमाई का एक बड़ा हिस्सा बिना मेहनत किए किसी परजीवी की तरह सदियों से लोगों को जाहिल बना कर लूटते रहे हैं.

ये भी पढ़ें- वल्लरी चंद्राकर : एमटेक क्वालीफाई महिला किसान

गुलाम बनाने की साजिश ‘शोषित समाज दल’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके रघुनीराम शास्त्री ने बताया कि हमारे लिए मुक्ति का मार्ग धर्मशास्त्र और मंदिरमसजिद नहीं हैं, बल्कि ऊंची पढ़ाईलिखाई, रोजगार अच्छा बरताव और नैतिकता है. तीर्थयात्रा, व्रत, पूजापाठ और कर्मकांड में कीमती समय बरबाद करने की जरूरत नहीं है. धर्मग्रंथों का अखंड पाठ करने, यज्ञ में आहुति देने, मंदिरों में माथा टेकने से हमारी गरीबी कभी दूर नहीं होगी.

भाग्य और ईश्वर के भरोसे नहीं रहें. आप अपना उद्धार खुद करें. जो धर्म हमें इनसान नहीं सम झता, वह धर्म नहीं अधर्म है. जहां ऊंचनीच की व्यवस्था है, वह धर्म नहीं, बल्कि गुलाम बनाने की साजिश है.

स्वर्ग का मजा

पेशे से इंजीनियर सुनील कुमार भारती ने बताया कि सभी धर्म गरीबों को महिमामंडित करते हैं, पर वे गरीबी खत्म करने की बात नहीं करते हैं. कोई फतवा या धर्मादेश इस को खत्म करने के लिए क्यों नहीं जारी किया जाता?

इस धार्मिकता की वजह से साधुओं, फकीरों, मौलवियों, पंडेपुजारियों, पादरियों की फौज मेहनतकश लोगों की कमाई पर पलती है. परलोक का तो पता नहीं, पर इन धार्मिक जगहों के लाखों निकम्मे और कामचोर इस लोक में ही स्वर्ग का मजा ले रहे हैं.

ये भी पढ़ें- नींदड़ जमीन समाधि सत्याग्रह हक के लिए जमीन में गडे़ किसान

और वक्त बदल गया भाग 1 : क्या हुआ नीरज के साथ

नीरज की परेशानी दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी. स्कूल के इम्तिहान खत्म हो चुके थे. ट्यूशन क्लासेज भी बंद हो गई थीं. अभी उस के सामने कई खर्चे खड़े थे- कमरे का किराया, घर का सामान. उस के पास इतने पैसे न थे कि सारे खर्च एकसाथ निबट जाते. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. नीरज को एकाएक खयाल आया कि मकानमालकिन मिसेज रेमन से बात की जाए, शायद कोई हल निकल आए. मिसेज रेमन उस 2 कमरों के मकान में अकेली ही रहती थीं. छत पर उस का कमरा था. वहां एक कमरा वाशरूम के साथ था. बरामदे को घेर कर छोटी सी रसोई बना दी थी. नीरज के लिए कमरा ठीकठीक था. उस की अच्छी गुजर हो रही थी. पिछले दिनों उस की बीमारी की वजह से पैसों की समस्या खड़ी हो गई थी. इलाज में पैसा खर्च हो गया और बचत न हो सकी.

शाम को वह मिसेज रेमन के दरवाजे की घंटी बजा रहा था. उन्होंने दरवाजा खोला और मुसकरा कर बोलीं, ‘‘हैलो यंगमैन, कैसे हो?’’ उस के जवाब का इंतजार किए बगैर उन्होंने प्यार से उसे बिठाया. उस के न कहने के बावजूद वे चाय ले आईं. फिर पूछा, ‘‘बताओ, कैसे आना हुआ?’’

नीरज ने धीमे से कहा, ‘‘मैम, आप को तो पता है मैं एमई कर रहा हूं और ट्यूशन कर के अपना खर्च चलाता हूं. छुट्टियों में कोई काम कर लेता हूं पर इस बार बीमारी के इलाज में खर्च ज्यादा हो गया, इसलिए इस महीने का किराया वक्त पर नहीं दे पाऊंगा. मुझे थोड़ी मोहलत दे दीजिए.’’

इस से पहले कभी नीरज से मिसेज रेमन को कोई शिकायत न थी. बहुत शिष्ट और शालीन था वह. किराया हमेशा वक्त पर देता था. मिसेज रेमन अच्छी महिला थीं, बोलीं, ‘‘कोई बात नहीं, जब तुम्हें सहूलियत हो तब किराया दे देना. तुम स्टूडैंट हो और बहुत अच्छे लड़के हो. इतनी रियायत तो मैं तुम्हें दे सकती हूं.’’

ये भी पढ़ें- पलभर का सच: भाग 1

नीरज खुश हो गया, बोला, ‘‘बहुतबहुत शुक्रिया मैम.’’

वे बोलीं, ‘‘नीरज मेरे पास तुम्हारे लिए एक औफर है. मेरा एक स्टोर है. उस को मेरे एक पुराने मित्र मिस्टर जैकब देखते हैं. वे भी काफी उम्र के हैं. हिसाबकिताब में उन्हें परेशानी होती है. अगर तुम शाम को थोड़ा वक्त निकाल कर हिसाबकिताब देख लो तो तुम्हारे किराए के रुपए भी उसी में से कट जाएंगे और कुछ रुपए तुम्हें मिल भी जाएंगे.’’

नीरज ने तुरंत कहा, ‘‘ठीक है मैम, मैं कल से यह काम शुरू कर दूंगा. इस से मुझे बहुत मदद मिल जाएगी. मैं आप का बहुत एहसानमंद हूं.’’

दूसरे दिन से नीरज 1-2 घंटे स्टोर पर हिसाबकिताब वगैरा देखने लगा. मिस्टर जैकब बहुत सुलझे हुए और सहयोग करने वाले इंसान थे. बड़े अच्छे से उस का काम चलने लगा. महीना पूरा होने पर किराए के पैसे काट कर उसे कुछ रकम भी मिल गई. नीरज के सैमेस्टर शुरू हो गए. परीक्षाएं खत्म होने पर उसे सुकून मिला.

उस दिन वह अच्छे मूड में नीचे गार्डन में बैठा था कि मिसेज रेमन आ गईं. उस की परीक्षाएं खत्म होने की बात सुन कर वे बहुत खुश हुईं. उसे रात के खाने पर आमंत्रित किया. बहुत अच्छे माहौल में खाना खाया गया. उन्होंने बिरयानी बहुत अच्छी बनाई थी. बरसों बाद उसे किसी ने इतने प्यार से खाना खिलाया था. मिसेज रेमन ने छुट्यों में उसे 1-2 जगह और काम दिलाने का भी वादा किया.

रात को जब वह बिस्तर पर लेटा तो मिसेज रेमन के बारे में सोच रहा था. पर पता नहीं कैसे एक खूबसूरत चेहरा उस के खयालों में उभर आया. उस हसीन चेहरे को वह भूल जाना चाहता था. अपने अतीत को अपने जेहन से खुरच कर फेंक देना चाहता था. पर न जाने क्यों वह चेहरा बारबार उस की यादों में चला आता था. न चाहते हुए भी वह अतीत में डूब गया…

उस समय वह करीब 6 साल का था. एक बहुत खूबसूरत औरत, जो उस की मम्मी थी, उसे प्यार करती, उस का खयाल रखती. उस के पापा भी बहुत हैंडसम और डैश्ंिग थे. वे उसे घुमाने ले जाते, खिलौने दिलाते. पर एक बात से वह बहुत परेशान रहता कि अकसर किसी न किसी बात पर उस के मातापिता के बीच लड़ाई हो जाती, खूब तकरार होती. वह सहम कर अपने कमरे में छिप जाता. उस का मासूम दिल यह समझ ही नहीं पाता कि उस के मम्मीपापा क्यों झगड़ते हैं. फिर घर में खाना नहीं पकता. पापा गुस्से से बाहर चले जाते और खूब देर से घर लौटते. वह दूध और डबलरोटी खा कर सो जाता. इसी तरह दिन गुजर रहे थे. एक दिन दोनों के बीच बड़ी जोरदार लड़ाई हुई. फिर पापा जोरजोर से चिल्ला कर पता नहीं क्याक्या बक कर बाहर चले गए. मम्मी भी देर तक चिल्लाती रहीं. उस रात को पापा घर वापस लौट कर नहीं आए. दूसरे दिन आए तो फिर दोनों में तकरार शुरू हो गई. बीचबीच में उस का नाम भी ले रहे थे. फिर पापा सूटकेस में अपना सामान भर कर चले गए और कभी लौट कर नहीं आए.

ये भी पढ़ें- घुट-घुट कर क्यों जीना

मम्मी का मिजाज बिगड़ा रहता.

3 महीने इसी तरह गुजर गए, फिर मम्मी एकदम, खुश दिखने लगीं. एक दिन एक बैग में उस का सामान पैक किया, फिर उस की मम्मी, जिस का नाम सोनाली था, ने कहा, ‘नीरज, मुझे विदेश में जौब मिल गई है. अब तुम मेरी कजिन नीता आंटी के साथ रहोगे. वे तुम्हारा बहुत खयाल रखेंगी. बेटा, तुम भी उन को तंग न करना.’ दूसरे दिन सोनाली उसे नीता आंटी के यहां छोड़ने गई.

नीरज किसी भी हाल में मम्मी को छोड़ना नहीं चाहता था. रोरो कर उस की हिचकियां बंध गईं. मम्मी भी रो रही थीं पर फिर वे आंचल छुड़ा कर चली गईं. नीरज उदास सा, हालात से समझौता करने को मजबूर था. उस के पास और कोई रास्ता न था.

उस का ऐडमिशन दूसरे स्कूल में हो गया. नीता आंटी का व्यवहार उस से अच्छा था. वे उसे प्यार भी करती थीं. अंकल बहुत कम बोलते, उसे अलग कमरे में अकेले सोना होता था. रात में सोते समय वह कई बार डर कर उठ जाता, तकिया सीने से लगाए रोरो कर रात काट देता. कोई ऐसा न था जो उसे उन काली रातों में उसे सीने से लगा कर प्यार करता. उसे समझ नहीं आता था, मां उसे छोड़ कर क्यों चली गईं? पापा कहां चले गए? दिन बीतते रहे. 10-12 दिनों बाद मम्मी उस से मिलने आईं. खिलौने, चौकलेट, कपड़े लाई थीं. उसे खूब प्यार किया और फिर उसे रोताबिलखता छोड़ कर मलयेशिया चली गईं.

जिंदगी एक ढर्रे पर चलने लगी. नीता आंटी उस का बहुत खयाल रखतीं. आंटी के यहां रहते हुए उसे कई बातें पता चलीं. आंटी की शादी को 8 साल हो गए थे. उन के यहां औलाद न थी. इसलिए उन्होंने उसे गोद लिया था. जैसेजैसे वह बड़ा होता गया, उसे सारी बातें समझ में आती गईं. कुछ बातें उसे नीता आंटी से पता चलीं. कुछ बातें उन की पुरानी बूआ कमला से पता चलीं. उस के मांबाप की कहानी भी उन्हीं लोगों से मालूम पड़ीं.

उस की मम्मी सोनाली बहुत खूबसूरत, चंचल और जहीन थीं. जब वे एमएससी कर रही थीं, उन की मुलाकात उस के पापा रवि से हुई. पहले दोस्ती, फिर मुहब्बत. दोनों के धर्म में फर्क था. दोनों के घरों से शादी का इनकार ही था. पर इश्के जनून कहां रुकावटों से रुकता है. दोनों की पढ़ाई पूरी होते ही उन दोनों ने सोचसमझ कर आपसी सहमति से अपना शहर छोड़ दिया और इस शहर में आ कर बस गए. सोनाली और रवि दोनों ही नए जमाने के साथ चलने वाले, ऊंची उड़ान भरने वाले परिंदे सरीखे थे. पुराने रीतिरिवाजों के विरोधी, नई सोच नई डगर, आजाद खयालों के हामी, उन दोनों ने ‘लिवइन रिलेशन’ में एकसाथ रहना शुरू कर दिया. विवाह उन्हें एक बंधन लगा.

उन का एजुकेशनल रिकौर्ड काफी अच्छा था. जल्द ही उन्हें अच्छी नौकरी मिल गई. जल्द ही उन्होंने जीवन की सारी जरूरी सुविधाएं जुटा लीं. एक साल फूलों की महक की तरह हलकाफुलका खुशगवार गुजर गया. फिर उन की जिंदगी में नीरज आ गया. शुरूशुरू में दोनों ने खुशी से जिम्मेदारी उठाई. दिन पंख लगा कर उड़ने लगे. सोनाली चंचल और आजाद रहने वाली लड़की थी. घर में सासससुर या कोई बड़ा होता तो कुछ दबाव होता, थोड़ा समझौता करने की आदत बनती. पर ऐसा कोई न था.

रवि बेहद महत्त्वाकांक्षी और थोड़ा स्वार्थी था. खर्च और काम बढ़ने से दोनों के बीच धीरेधीरे कलह होने लगी. पहले तो कभीकभार लड़ाई होती, फिर अंतराल घटने लगा. दोनों में बरदाश्त और सहनशीलता जरा न थी. फिर हर दूसरे, तीसरे दिन लड़ाई होने लगी. रवि के अपने मांबाप, परिवार से सारे संबंध टूट चुके थे और वे लोग उस से कोई संबंध रखना भी नहीं चाहते थे. उन के रवि के अलावा एक बेटा और एक बेटी थी. उन्हें डर था कि कहीं रवि के व्यवहार का दोनों बच्चों पर बुरा प्रभाव न पड़ जाए. जो लड़का प्यार की खातिर घरपरिवार छोड़ दे, उस से उम्मीद भी क्या रखी जा सकती है.

ये भी पढ़ें- टकराती जिंदगी

रिश्तेदारों से तो रवि पूरी तरह कट चुका था. कभी किसी दोस्त या सहयोगी के यहां कोई समारोह में शामिल होने का मौका मिलता, वहां भी कोई न कोई ऐसी बात हो जाती कि मन खराब हो जाता. कभी कोई इशारा कर के कहता, ‘यही हैं जो लिवइन रिलेशन में रह रहे हैं.’ या कोई कह देता, ‘इन लोगों की शादी नहीं हुई है, ऐसे ही साथ रहते हैं.’ उन दिनों लिवइन रिलेशन बहुत कम चलन में था. लोग इसे बहुत बुरा समझते थे. लोग खूब आलोचना भी करते थे.

रवि भी इस बात को महसूस करता था कि अगर समाज में घुलमिल कर रहना है तो समाज के बनाए उसूलों के अनुसार चलना जरूरी है. पर अब इन सब बातों के लिए बहुत देर हो चुकी थी. जो जैसा चल रहा था, वही अच्छा लगने लगा था.

सोनाली अपने परिवार की बड़ी बेटी थी. उस से छोटी 2 बहनें थीं. उस ने घर से भाग कर रवि के साथ रहना शुरू कर दिया. इन सब बातों की उस के मांबाप को खबर हो गई थी. बिना शादी के दोनों साथ रहते हैं, इस बात से उन्हें बहुत धक्का लगा. ऐसी खबरें तो पंख लगा कर उड़ती हैं. उन की 2 बेटियां कुंआरी थीं. कहीं सोनाली की कालीछाया उन दोनों के भविष्य को भी ग्रहण न लगा दे, यह सोच कर उन लोगों ने सोनाली से कोई संबंध नहीं रखा, न उस की कोई खोजखबर ली. वैसे भी, एक आजाद लड़की को क्या समझाना. इस तरह सोनाली भी अपने परिवार से अलग हो गई थी. उस की रिश्ते की एक बहन नीता इसी शहर में रहती थी. उस से मेलमुलाकात होती रहती थी. उस की शादी को 8 साल हो गए थे. उस की कोई औलाद न थी. वह बच्चे के लिए तरसती रहती थी.

इधर, रवि और सोनाली के बीच अहं का टकराव होता रहता. दोनों पढ़ेलिखे, सुंदर और जहीन थे. कोई झुकना न चाहता था. एक बात और थी, दोनों ही अपने परिवारों से कटे हुए थे. इस बात का एहसास उन्हें खटकता तो था पर खुल कर इस को कभी स्वीकार नहीं करते थे क्योंकि उन की ही गलती नजर आती. फिर सोशललाइफ भी कुछ खास न थी. इसी घुटन और कुंठा ने दोनों को चिड़चिड़ा बना दिया था.

नीरज की जिम्मेदारी और खर्च दोनों को ही भारी पड़ता. दोनों को अपनाअपना पैसा बचाने की धुन सवार रहती. नतीजा निकला रोजरोज की लड़ाई और अंजाम, रवि घर, नीरज और सोनाली को छोड़ कर चला गया. न कोई बंधन था, न कोई दवाब, न कोई कानूनी रोक. बड़ी आसानी से वह सोनाली और बच्चे को छोड़ चला गया. किसी से पता चला कि वह दुबई चला गया.

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

सोशल मीडिया पर बनी रश्मि देसाई और आसिम के भाई की जोड़ी, देखें VIDEO

कलर्स टीवी (Colors TV) के सबसे पौपुलर रिएलिटी शो बिग बौस (Bigg Boss) का सीजन 13 शुरूआती दिनों से ही काफी चर्चा में रहा है. यह बात तो हर जगह साबित हो चुकी है कि बिग बौस के बाकी सीजन के मुताबित सीजन 13 सबसे कामयाब और कौन्ट्रोवर्सियल (Controversial) रहा है. भले ही बिग बौस सीजन 13 (Bigg Boss 13) खत्म हो चुका है लेकिन फैंस के दिलों में बिग बौस के इस सीजन की यादें हमेशा ही सलामत रहेगी. बिग बौस सीजन 13 के विनर भले ही सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) बने हैं लेकिन इस सीजन के सभी कंटेस्टेंटस् ने कमाल की फैन फौलोविंग गेन की है और सबसे ज्यादा जिस कंटेस्टेंट ने लोगों के दिलों पर राज किया है वो है असीम रियाज (Asim Riaz).

ये भी पढ़ें- Bigg Boss Finale : 34 साल की हुई रश्मि देसाई, 14 सालों में इतना बदल गया है लुक

पार्टी की वीडियो हुई वायरल…

 

View this post on Instagram

 

FOLLOW @asimriaz_fan_club_ FOR MORE Update #asimriaz #asimanshi #biggboss13 #bollywood #pollywood

A post shared by ASIM RIAZ FANS (@asimriaz_fan_club_) on

असीम रियाज (Asim Riaz) ने बिग बौस (Bigg Boss) के घर में काफी स्ट्रौंग गेम प्ले की है और साथ ही नए रिश्ते बनाने में भी कामयाब रहे हैं फिर चाहे हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) के लिए उनका प्यार हो या फिर रश्मि देसाई (Rashami Desai) के प्रति उनकी दोस्ती. बिग बौस के खत्म होने के बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही है जिसमें असीम रियाज (Asim Riaz), रश्मि देसाई (Rashami Desai), हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) और असीम रियाज के भाई उमर रियाज (Umar Riaz) एक साथ पार्टी करते नजर आ रहे हैं.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: फिनाले की रात फैंस को मिलेगा ऐसा सरप्राइज, होगी कैटरीना की एंट्री

फैंस ने जोड़ा रश्मि देसाई का उमर रियाज के साथ नाम…

इस दौरान सभी काफी मस्ती कर रहे हैं और साथ ही एक दूसरे के साथ जमकर डांस भी करते दिखाई दे रहे हैं. इस वीडियो में रश्मि देसाई असीम रियाज के भाई उमर रियाज के साथ खड़ी हैं जिसे देख फैंस काफी खुश हो रहे हैं. इतना ही नहीं ये सब देख कर रश्मि देसाई के फैंस ने तो रश्मि और उमर की जोड़ी तक बना दी है और सोशल मीडिया पर #UMRASH नाम का हैशटैग भी बनाया है जो कि ट्रेड भी कर रहा है.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: Siddharth ने बताई Rashami से झगड़े की असली वजह, देखें Video

उमर ने किया रश्मि का धन्यवाद…

 

View this post on Instagram

 

#lovelycouple #asimanshi #friendship #biggboss13 #asimforthewin #johncena #bohemianstyle #rashmidesai #

A post shared by Jassie (@asim_riaz_fan001) on

रश्मि देसाई के फैंस चाह रहे हैं कि अरहान खान से ब्रेक-अप के बाद अब रश्मि को उमर से शादी कर लेनी चाहिए. जैसा कि हम सबने देखा कि बिग बौस के घर में फैमिली राउंड के चलते जब उमर घर के अंदर आए थे तो उन्होनें रश्मि को गले लगाने से पहले उनती इजाजत ली थी और साथ ही असीम को सपोर्ट करने के लिए उनकी धन्यवाद भी किया था.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: Rajat Sharma के सामने हुई Siddharth-Rashami की बोलती बंद, जानें क्यों उड़े होश

असीम रियाज के बारे में हिमांशी ने कही ये बात…

बात करें असीम रियाज और हिमांशी खुराना की तो इसी पार्टी के चलते असीम और हिमांशी की एक फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें दोनों एक दूसरे को हग करते दिखाई दे रहे हैं. हिमांशी ने एक इंटरव्यू के दौरान असीम रियाज के बारे में बात करते हुए कहा कि, “हम सब चाहते थे कि वो विनर बने. मेरी तो आंखें बंद थीं और दिल की धड़कन बढ़ी हुई थी. लग रहा था कि अभी आसिम का नाम लेंगे और हम सब भागकर उनके पास जाएंगे. विशाल मेरे पीछे बैठे थे और हम सब यही चाहते थे. असिम का परिवार मेरे बगल में बैठा था. जब अचानक नाम लिया तो मैं काफी निराशा हुई लेकिन ठीक है. ट्रौफी से कुछ नहीं होता, क्योंकि लोग तो हर जगह असिम का नाम ही जप रहे थे. तो मेरे हिसाब से वो विनर ही है.”

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: रातों रात ये कंटेस्टेंट होगा घर से बेघर, पारस की गेम पर पड़ेगा

अब देखने वाली बात ये होगी कि असीम रियाज और हिमांशी खुराना का ये रिलेशन किस मुकाम तक पहुंचता है और साथ ही ये भी देखना होगा कि रश्मि देसाई और उमर रियाज का रिश्ता आगे बढ़ पाता है या नहीं.

फिर अलग हुए कार्तिक-नायरा, लव-कुश बने वजह

स्टार प्लस (Star Plus) का पौपुलर सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehelata Hai) में आए दिन दर्शकों को कोई ना कोई नया ट्विस्ट देखने को मिलता रहता है और इसी वजह से ये सीरियल लम्बे समय से दर्शकों का फेवरेट भी बना हुआ है. जब से शो में लव-कुश (Luv-Kush) की रीएंट्री हुई है तब से ही कार्तिक (Mohsin Khan) – नायरा (Shivangi Joshi) काफी परेशान हैं और इसकी वजह ये है कि लव-कुश आए दिन कोई ना कोई ऐसी हरकत करते हैं जिस वजह से कार्तिक (Kartik) नायरा (Naira) को परेशान होना पड़ता है.

ये भी पढ़ें- लव-कुश पर यूं फूटेगा कार्तिक का गुस्सा, घरवालों के खिलाफ जाकर नायरा लेगी ये फैसला

सबके सामने आई लव-कुश की सच्चाई…

 

View this post on Instagram

 

Precap ❣️ #shivangijoshi #mohsinkhan #shivin #kairamilan #kairaromance #kaira #yehrishtakyakehlatahai @shivangijoshi18 @khan_mohsinkhan

A post shared by shivi ❣️ (@kaira_creation13) on

बीते एपिसोड्स में लव-कुश (Luv-Kush) ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर त्रिशा (Trisha) को मोलेस्ट और उसके साथ बद्तमीजी करने की कोशिश की थी और इसके चलते त्रिशा ने अपनी जान भी लेना चाही. त्रिशा की जान बच तो गई और साथ ही लव-कुश की सच्चाई भी सबके सामने आई जिसे सुन पूरे परिवार को काफी बड़ा झटका लगा. इस दौरान कार्तिक (Kartik) ने लव-कुश की जमकर पिटाई भी की और साथ ही नायरा (Naira) ने फैसला लिया था कि वे लव-कुश को सजा दिला कर रहेगी.

ये भी पढ़ें- जल्द ही सामने आएगी लव-कुश की सच्चाई, त्रिशा देगी कार्तिक-नायरा को ऐसा हिंट

नायरा ने किया पुलिस को फोन…

बात करें आने वाले एपिसोड्स तो लव-कुश (Luv-Lush) की वजह से कार्तिक-नायरा (Kartik-Naira) में हो रही लड़ाइयां अब अलग ही मुकाम पर पहुंचने वाली है. दरअसल, लव-कुश ने जिस तरह से त्रिशा (Trisha) को धमकाया है उसकी जानकारी नायरा तक पहुंच गई थी और जैसे ही नायरा (Naira) को इन सब बातों का पता चला तो वे काफी शौक्ड हो गई और तुरंत ही पुलिस को फोन कर दिया ताकी त्रिशा के साथ लव-कुश ने जो भी किया उसकी सजा उन्हें मिल सके.

ये भी पढ़ें- फिर होगी कार्तिक-नायरा की दादी से तकरार, त्रिशा बनेगी वजह

लव-कुश की वजह से फिर आई कार्तिक-नायरा के रिश्ते में दरार…

 

View this post on Instagram

 

Precap ❣️ #shivangijoshi #mohsinkhan #shivin #kaira #kairamilan #yrkkh #yehrishtakyakehlatahai @shivangijoshi18 @khan_mohsinkhan

A post shared by shivi ❣️ (@kaira_creation13) on

जैसे ही कार्तिक (Kartik) को नायरा की इस हरकत के बारे में पता चला तो वे गुस्से से आग बबूला हो उठा और इस दौरान कार्तिक सबके सामने नायरा के साथ लड़ाई करने लगा. ऐसे में लव-कुश (Luv-Kush) की वजह से एक बार फिर कार्तिक और नायरा के बीच दूरियां आ गई हैं. अब देखने वाली बात ये होगी कि क्या लव-कुश को उनके गुनाहों की सजा मिलेगा और क्या नायरा त्रिशा को न्याय दिलाने में कामयाब हो पाएगी.

ये भी पढ़ें- लव-कुश के बाद अब कायरव की वजह से होंगे कार्तिक-नायरा परेशान, पढ़ें खबर

इस पुजारी ने की 5 शादियां और फिर उन को धकेल दिया जिस्मफरोशी के धंधे में

धर्म के नाम पर काले कारनामे करने वाले बाबाओं की फिहरिस्त यों तो काफी लंबी है पर हम आप को एक ऐसे बाबा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिस की करतूत जान कर आप के होश फाख्ता हो जाएंगे.
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में स्वामी अनुज चेतन सरस्वती नाम के एक ढोंगी बाबा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इस पर आरोप है कि इस ने सत्संग के बहाने महिलाओं को अपने जाल में फंसा कर गलत काम को अंजाम दिया है.

महिलाओं को फंसाता था जाल में

माथे पर तिलक और शरीर में भभूत लगा कर इस ढोंगी बाबा ने न जाने कितनी ही महिलाओं को अपने जाल में फंसाया होगा पर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस बाबा पर 5 महिलाओं ने धोखा देने, यौन शोषण करने और फिर जिस्मफरोशी कराने को मजबूर करने का आरोप लगाया है.
महंगी गाङी में चलने वाले और मीठीमीठी बातें करने वाले इस बाबा का नाम है स्वामी अनुज चेतन सरस्वती.

शातिराना अंदाज

इस का काम करने का अंदाज इतना शातिराना था कि एकबारगी लोगों को यकीन ही नहीं हुआ कि यह बाबा ऐसा भी कर सकता है.
तथाकथित यह बाबा पहले सत्संग में महिलाओं को धर्मकर्म की बातें बताता था फिर उन्हें अपनी बातों में फंसा कर शादी कर लेता था और बाद में उन्हें जिस्मफरोशी का धंधा करने के लिए मजबूर करता था.

ये भी पढ़ें- प्रिया मेहरा मर्डर केस भाग 2 : लव कर्ज और धोखा

नशे का इंजैक्शन लगाता था

इस ने 1-2 नहीं 5-5 शादियां की हैं. इस पर आरोप है कि यह महिलाओं को नशे का इंजैक्शन भी लगता था ताकि वे इस का आदी हो जाएं और फिर उन से यह मनमानी कर सके.
इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना पर से परदा तब उठा जब इन महिलाओं ने भाग कर पुलिस में शिकायत दी.

पुलिस गिरफ्त में यह ढोंगी बाबा

क्षेत्र के डीआईजी राजेश कुमार पांडेय ने मीडिया से बातचीत में खुलासा किया कि उक्त ढोंगी बाबा को गिरफ्तार कर जानकारी जुटाई जा रही है और दोष साबित होने पर कानूनन उसे कङी से कङी सजा दिलाई जाएगी.
वैसे, यह घटना कोई नई भी नहीं है. समाज में आएदिन ऐसे ढोंगी बाबाओं की पोल खुलती रही है. बावजूद जागरूकता के अभाव में सब से अधिक महिलाएं ही इन जैसों की जाल में फंसती रही हैं.
इन बाबाओं को यह पता है कि महिलाएं कोमल मन की होती हैं और अधिकतर धर्मभीरु भी जिन्हें धर्म का डर दिखा कर आसानी से शिकार बनाया जा सकता है.

सतर्क रहें ताकि…

धर्म के नाम पर खुद की जिंदगी दांव पर लगाने से बेहतर है कि सतर्क रहा जाए और इन बाबाओं की चिकनीचुपङी बातों में न आया जाए.

हमारे समाज में ऐसे कई तथाकथित बाबाओं की काली करतूत से परदा उठता आया है और कईयों को उस के किए की कानूनन सजा भी मिल चुकी है. कुछ जेल में हैं और कुछ खुद के पकङाए जाने के डर से देश से बाहर भी भाग चुके हैं.

ये भी पढ़ें- लव में हत्या : नेता जी आखिरकार जेल गए

अपना ध्यान इस तरह के धर्मकर्म से हटा कर समाजिक कामों में भी लगाया जा सकता है, जहां नाम भी है और शोहरत भी.

इसलिए सावधान रहिए और ऐसे ढोंगी बाबाओं की शिकायत पुलिस में करिए.

पलभर का सच: भाग 1

लेखक- अनुराधा चितले

उस दिन रात में लगभग 12 बजे फोन की घंटी बजी तो नींद में हड़बड़ाते हुए ही मैं ने फोन उठाया था और फिर लड़खड़ाते शब्दों में हलो कहा तो दूसरी ओर से मेरे दामाद सचिन की चिरपरिचित आवाज मुझे सुनाई दी :

‘‘मैं सचिन बोल रहा हूं सा मां.’’

मेरी सब से प्रिय सहेली शुभ का बेटा सचिन पहले मुझे ‘आंटी’ कह कर बुलाता था. मगर जब से मेरी बेटी पूजा के साथ उस की शादी हुई है वह मुझे मजाक में ‘सा मां’ यानी सासू मां कह कर बुलाता था. उस रात उस की आवाज सुन कर मैं अनायास ही खुश हो गई थी और बोल पड़ी थी :

‘‘हां, बोलो बेटे…क्या बात है? इतनी रात गए कैसे फोन किया…सब ठीक तो है?’’

‘‘हां हां, सबकुछ ठीक है सा मां… पर आप को एक सरप्राइज दे रहा हूं. पूजा और मम्मी कल राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली आप के पास पहुंच रही हैं.’’

‘‘अरे वाह, क्या दिलखुश करने वाली खबर सुनाई है…और तुम क्यों नहीं आ रहे उन के साथ?’’

‘‘अरे, सा मां…आप को तो पता ही है कि मैं काम छोड़ कर नहीं आ सकता. और इन दोनों का प्रोग्राम तो अचानक ही बन गया. तभी तो प्लेन से नहीं आ रहीं. मैं तो कल से आप का फोन ट्राई कर रहा था. मगर फोन मिल ही नहीं रहा था…तभी तो आप को इतनी रात को तंग करना पड़ा… ये दोनों कल 10 साढ़े 10 बजे निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर उतरेंगी… राजू भैया को लेने के लिए भेज देना.’’

‘‘हां हां, राजू जरूर जाएगा और वह नहीं जा सका तो उस के डैडी जाएंगे… तुम चिंता मत करना.’’

यह कहते हुए मैं ने फोन रख दिया था और खुशी से तुरंत अपने पति को जगाते हुए उन्हें पूजा के आने की खबर सुना दी.

ये भी पढ़ें- अम्मा बनते बाबूजी : एक अनोखी कहानी

‘‘गुडि़या आ रही है यह तो बहुत अच्छी बात है पर उस के साथ तुम्हारी वह नकचढ़ी सहेली क्यों आ रही है?’’ हमेशा की तरह उन्होंने शुभा से नाराजगी जताते हुए मजाक में कहा.

‘‘अरे, उस का और एक बेटा भी यहां दिल्ली में ही रहता है. उस से मिलने का जी भी तो करता होगा उस का. पूजा को यहां पहुंचा कर शुभा कल चली जाएगी अपने बेटे के पास.’’

शुभा को शुरू से ही जाने क्यों यह पसंद नहीं करते थे जबकि वह मेरी सब से प्रिय सहेली थी. स्कूल और कालिज से ही हमारी अच्छीखासी दोस्ती थी. कालिज में शुभा को मेरी ही कक्षा के एक लड़के शेखर से प्यार हो गया था. उन दोनों के प्यार में मैं ने किसी नाटक के ‘सूत्रधार’ सी भूमिका निभाई थी. मुझे कभी शेखर की चिट्ठी शुभा को पहुंचानी होती तो कभी शुभा की चिट्ठी शेखर को. शुभा अपने प्यार की बातें मुझे सुनाती रहती थी.

खूबसूरत और तेज दिमाग की शुभा अमीर बाप की इकलौती बेटी होने के बावजूद मेरे जैसी सामान्य मिडल क्लास परिवार की लड़की से दोस्ती कैसे रखती है…यह उन दिनों कालिज के हर किसी के मन में सवाल था शायद. दोस्ती में जहां मन मिल जाते हैं वहां कोई कुछ कर सकता है भला?

शुभा का शेखर से प्यार हो जाने के बाद यह दोस्ती और भी पक्की हो गई थी. शेखर के पिता बहुत बड़े उद्योगपति थे. साइंस में इंटर करने के बाद शेखर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने मुंबई चला गया मगर शुभा को वह भूला नहीं था. आखिर कालिज की पढ़ाई पूरी करतेकरते ही शुभा और शेखर का प्रेम विवाह हम सब सहपाठियों के लिए एक यादगार बन कर रह गया था.

शुभा की शादी के साल भर बाद ही मेरी भी शादी हो गई और मैं यह जान कर बेहद खुश थी कि शादी के बाद मैं भी शुभा की ही तरह मुंबई में रहने जा रही थी.

मुंबई में हम जब तक रहे थे दोनों अकसर मिलते रहते थे मगर शुभा और शेखर के रईसी ठाटबाट से मेरे पति शायद कभी अडजस्ट नहीं हो सके थे. इसी से जब भी शुभा से मिलने की बात होती तो ये अकसर टाल देते.

मेरे पहले बेटे राजू के जन्म के बाद मेरे पति ने पहली नौकरी छोड़ कर दूसरी ज्वाइन की तो हम दिल्ली आ गए. यहां आने के 3 साल बाद पूजा का जन्म हुआ और फिर घरगृहस्थी के चक्कर में मैं पूरी तरह फंस गई.

शुभा से मेरी निकटता फिर धीरेधीरे कम होती गई थी. इस बीच शुभा भी 2 बच्चों की मां बन गई थी और दोनों बार लड़के हुए थे. यह सब खबरें तो मुझे मिलती रही थीं, मगर अब हमारी दोस्ती दीवाली, न्यू ईयर या बच्चों के जन्मदिनों पर बधाई भेजने तक ही सिमट कर रह गई थी.

पूजा को मुंबई के एक कालिज में एम.बी.ए. में एडमिशन मिल गया और वहीं उस की मुलाकात सचिन से हो गई.

पहले मुलाकात हुई, फिर दोस्ती हुई और फिर ठीक शुभा और शेखर की ही तरह पूजा और सचिन का प्यार भी परवान चढ़ा था.

मुझे धुंधली सी आज भी याद है… जब शादी तय करने की बारी आई थी तो सब से पहले शुभा ने ही शादी का विरोध किया था. कुछ अजीब से अंदाज में उस ने कहा था, ‘शादी के बारे में हम 2 साल बाद सोचेंगे.’

ये भी पढ़ें- तुम्हारा इंतजार था : क्या एक हो पाए अभय और एल्मा

मैं तो उस के मुंह से यह सुन कर हैरान रह गई थी. शुभा के बात करने के तरीके को देख कर गुस्से में ही मैं ने झट से कहा था, ‘तू ने भी तो कभी लव मैरिज की थी… तो आज अपने बच्चों को क्यों मना कर रही है?’

इस पर बड़े ही शांत स्वर में शुभा बोली थी, ‘तभी तो मुझे पता है कि लव और मैरिज ये 2 अलगअलग चीजें होती हैं.’

‘ये दर्शनशास्त्र की बातें मत झाड़. तू सचसच बता…क्या तुझे पूजा पसंद नहीं? या फिर हमारे परिवारों की आर्थिक असमानताओं के लिए तू मना कर रही है?’

‘नहींनहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. दरअसल, मैं शादी का विरोध नहीं कर रही हूं. मैं तो सिर्फ यह कह रही हूं कि शादी 2 साल बाद करेंगे.’

‘लेकिन क्यों, शुभा? सचिन तो अब अच्छाखासा कमा रहा है और पूजा की पढ़ाई खत्म हो चुकी है. फिर अब बेकार में 2 साल रुकने की क्या जरूरत है?’

‘यह मैं तुम्हें आज नहीं बता सकती,’ और पता नहीं कभी बता भी पाऊंगी कि नहीं.’

ये भी पढ़ें- किशमिश भाग 2 : मंजरी और दिवाकर के रिश्ते की मिठास

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

भोजपुरी फिल्मों की अश्लीलता को लेकर इस एक्ट्रेस ने कह दी ये बड़ी बात

बतौर रंगमंच कलाकार से अदायगी की दुनिया में कदम रखने वाली भोजपुरी अभिनेत्री श्यामली आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं.

बिहार के छोटे से शहर आरा में जहां अधिकांश परिवार अपने बेटेबेटियों को आइएएस और इंजीनियर बनाना चाहते हैं, वहीं किसी रंगमंच से जुड़ना और बतौर भोजपुरी अभिनेत्री खुद को स्थापित करना आसान भी नहीं. वह भी तब जब नातेरिश्तेदार मजाक उड़ाते हों, समाज के चंद लोग फब्तियां कसते हों.

मगर झारखंड के लोहरदगा में जन्मीं और बिहार के आरा में पलीबड़ी श्यामली का परिवार कहीं न कहीं रंगकर्म से जुड़े थे और तभी श्यामली को अपने सपनों को पंख देने में कोई परेशानी नहीं आई.

ये भी पढ़ें- साउथ की ये सुपरहिट एक्ट्रेस करेंगी भोजपुरी फिल्मों में एंट्री, खेसारीलाल यादव के साथ बनेगी जोड़ी

अभिनय का जलवा

भोजपुरी, मैथिली सहित कई भाषाओं  की अलबमों में अभिनय का जलवा बिखेरनी वाली श्यामली को पहचान मिली हर्ष जैन की भोजपुरी फिल्म ‘माई तोहरे खातिर से’. इस से पहले श्यामली ने मुख्य अलबम ‘ओढ़नियां वाली’, ‘हाय रे होंठ लाली’, ‘तोहार जोड़ केहू नईखे’ से खूब नाम और पैसा कमाया.

भोजपुरी की कई मशहूर फिल्मों में काम करने वाली श्यामली ने फिर पीछे मुङ कर नहीं देखा और एक से बढ कर एक हिट फिल्म देती रहीं. ‘टूटे न सनेहिया के डोर’, ‘हमार घरवाली’, ‘देश में लौटल परदेशी’, ‘बाबुल के घर’ में उन्होंने अपने अभिनय से जम कर शोहरत बटोरी.

shymali-srivastav-bhojpuri

फिल्मों में अश्लीलता क्यों

भोजपुरी फिल्मों में अश्लीलता पर श्यामली ने मीडिया से बातचीत में खुलासा किया था कि लोग भोजपुरी फिल्मों की हीरोइनों को समाजिक जीवन में अजीब निगाहों से देखते हैं और कभीकभी तो भोजपुरी फिल्म की अभिनेत्री बताने में शर्म महसूस होती है.

श्यामली भोजपुरी फिल्मों में परोसी जा रही अश्लीलता का विरोध करती नजर आती हैं और फिल्म बोल्ड बनाने के लिए काम कर रही अभिनेत्रियों को वैस्टर्न ड्रैस पहनने को अनावश्यक मानती हैं.

जब दर्शकों को ही पसंद हो अश्लीलता

मगर सच तो यह भी है कि भोजपुरी फिल्मों के अधिकतर गाने जो द्विअर्थी बोलों से भरे रहते हैं, का ऐसा भी दर्शक वर्ग है जिन्हें यही सब पसंद है.

मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में श्यामली ने यह जरूर बताया था कि हाल के दिनों में बन रहीं अधिकतर भोजपुरी फिल्में कतई साफसुथरी नहीं हैं.

‘खेला’, ‘रंगदार राजा’, ‘बलमा बिहारवाला’ उन की जल्द प्रदर्शित होने वाली भोजपुरी फिल्में हैं.

ये भी पढ़ें- जल्द ही शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं ये बोल्ड

परिवार का सहयोग

श्यामली ने भले ही खुद की पहचान अपने मातापिता की कोशिशों व सपोर्ट से बनाई हो, पर एक छोटे से शहर में रहते हुए भी अपने सपनों को मनमुताबिक पंख किस तरह दिया जाता है, यह कोई श्यामली से सीखे.

हां, भोजपुरी फिल्मों में अश्लीलता से टौलीवुड जरूर बदनाम है पर जब यह मांग दर्शक ही करे तो निर्मातानिर्देशक आखिर कर भी क्या सकते हैं?

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें