Shubh Mangal Zyada Saavdhan: दिल जीत लेगी आयुष्मान खुराना की ‘गे’ लव स्टोरी

रेटिंग: चार स्टार    

निर्माताः भूषण कुमार,आनंद एल राय, हिमांशु शर्मा और किशन कुमार

निर्देशकः हितेश केवल्य

कलाकारः आयुष्मान खुराना, जीतेंद्र कुमार, मानवी गागरू, नीना गुप्ता, गजराज राव और पंखुड़ी अवस्थी

अवधिः एक घंटा 57 मिनट

‘गे’ यानी समलैंगिकता के मुद्दे पर बौलीवुड में कई फिल्में बन चुकी हैं. मगर वह सभी गंभीर किस्म की फिल्में रही हैं और इन फिल्मों में सभी ‘गे’ किरदार बेबस नजर आते रहे हैं. मगर फिल्मकार हितेश केवल्य की फिल्म ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’ में ऐसा नही है. इस फिल्म के ‘गे’ किरदार बेबस नजर नहीं आते हैं, बल्कि खुलकर स्वीकार करते हैं कि यह उनकी सेक्सुएलिटी है.

हितेश केवल्य ने अपनी इस फिल्म के माध्यम से समलैंगिक परिवार के संघर्ष और उनकी बेबसी को रेखांकित किया है. फिल्म के किरदार अपने संवादो के माध्यम से इस बात को रेखांकित करने में पूरी तरह से सफल रहते है कि भले ही समलैंगिकता को कानूनी रूप से अपराध के दायरे से बाहर कर दिया गया हो, मगर समलैंगिक इंसानों को होमोफोबिया के तौर पर हर दिन अपने परिवार से घृणा ही मिलती है.

कहानीः

यह कहानी है दिल्ली में रह रहे कार्तिक (आयुष्मान खुराना) और अमन त्रिपाठी (जीतेंद्र कुमार) की. दोनो समलैंगिक हैं और एक दूसरे से गहरा प्यार करते हैं. अमन त्रिपाठी का लंबा चैड़ा परिवार है, जो कि इलहाबाद में रहता है. अमन के पिता शंकर त्रिपाठी (गजराज राव) वैज्ञानिक हैं. उनकी मां सुनयना (नीना गुप्ता) घरेलू महिला हैं. चाचा चमन (मनु रिषि) एडवोकेट और चाची (सुनीता राजभर) गृहिणी हैं. जबकि चचेरी बहन गॉगल अपनी शादी को लेकर परेशान है. बड़ी मुश्किल से गॉगल की शादी एक बुजुर्ग इंसान के साथ तय होती है. इस शादी में शामिल होने के लिए अमन भी कार्तिक के साथ पहुंचता है. पूरा त्रिपाठी परिवार शादी के लिए ट्रेन से बनारस जा रहा है. रास्ते में ट्रेन के अंदर कार्तिक और अमन को चुंबन करते देखकर शंकर त्रिपाठी को सदमा सा लग जाता है. शंकर अपनी तरफ से अमन को काफी कुछ समझाते हैं. बारात पहुंच जाती है. विवाह स्थल पर डांस के समय एक बार फिर सभी के सामने कार्तिक और अमन एक दूसरे को गले लगाकर किस कर लेते हैं. फिर कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं. गॉगल की शादी टूट जाती है. गॉगल भागकर आत्महत्या करने का प्रयास करती है, पर कार्तिक उसे रोक लेता है. अमन की मां सुनयना, पंडित जी से कर्म-कांड करवा कर अमन का अंतिम संस्कार कर उसे नया जन्म देने की विधि भी करवाती है. उधर शंकर त्रिपाठी और उसने भाई चमन के बीच दूरी बढ़ जाती है. पारिवारिक कलह के बीच कई गड़े मुर्दे उखड़ते हैं. तो वहीं कुसुम (पंखुड़ी अवस्थी) की चालाक सलाह में फंस कर अमन ऐसा फंसते हैं कि नया घटनाक्रम पैदा होता है. अंततः शंकर त्रिपाठी अपने बेटे अमन को पूरी स्वतंत्रता दे देते हैं और फिर अमन व कार्तिक दिल्ली के लिए रवाना हो जाते हैं.

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लेखन व निर्देशनः

फिल्मकार हितेश केवल्य ने हास्य व व्यंग के साथ अपनी इस फिल्म में इस बात पर जोर दिया है कि समलैंगिकता/ होमोसेक्सुआलिटी कोई बीमारी नहीं बल्कि कुदरत, प्रकृति है. जिससे आप नफरत नहीं कर सकते. फिल्मकार की उपलब्धि केवल उस स्थिति में नहीं है, जहां बौलीवुड पहले नहीं गया है. यह फिल्म कार्तिक (आयुष्मान खुराना) और अमन (जितेंद्र कुमार) को सिर्फ एक जोड़े के रूप में चित्रित कर रहा है, न कि ‘होमो‘ के रूप में. फिल्मकार ने समलैंगिकों की सैक्सुआलिटी पर जोर देने की बनिस्बत उनकी परिवार में स्वीकृति पर जोर दिया है. फिल्म में एक संवाद है कि ‘प्यार का कोई रंग नहीं होता.’ तो वहीं फिल्म पति और पत्नी,  पिता और पुत्र,  माता और बच्चों को लेकर कई प्रासंगिक सवाल उठाती है. एक बिंदु पर अमन पूछता है, “केवल बेटों को ही नायक बनने की आवश्यकता क्यों है? एक पिता एक बार के लिए क्यों नहीं हो सकता? ” फिल्म के कुछ संवाद काफी चुटीले हैं. फिल्म के कुछ सीन काफी अच्छे बन पड़े हैं. इंटरवल से पहले फिल्म काफी सशक्त है, मगर इंटरवल के बाद फिल्म शिथिल हो गयी है. क्लायमेक्स में निर्देशक पूरी तरह से हड़बड़ा गए हैं. क्लायमेक्स काफी गड़बड़ है. फिल्मकार ने क्लामेक्स में यह दिखाने की कोशिश की है कि सुप्रीम कोर्ट अब भारतीय संस्कार तय करने लगा है, जबकि ऐसा नहीं है. 377 खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान नहीं लिया था.

अभिनयः

कार्तिक के किरदार को आयुष्मान खुराना ने अपने शानदार अभिनय से जीवंतता प्रदान की है. उन्होने ‘गे’ किरदार को निभाने का खतरा उठाने के साथ उसे उत्कृष्टता के साथ अंजाम तक पहुंचाया भी है. यह उनके अभिनय का कमाल है कि उनका समलैंगिक किरदार किसी भी मोड़ पर दर्शकों को विरक्त नहीं करता है. अमन के किरदार में जीतेंद्र कुमार ने भी काफी सहज अभिनय कर साबित किया है कि उनके अंदर अभिनय को लेकर काफी संभावनाएं हैं. मातापिता के किरदार में नीना गुप्ता और गजराज राव की केमिस्ट्री जबरदस्त है. गॉगल के किरदार में मानवी गागरू लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल रही है.

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‘मलंग’ की वजह से बढ़ी आदित्य रॉय कपूर और दिशा पटानी की लोकप्रियता

बॉलीवुड के नए एक्शन हीरो आदित्य रॉय कपूर और बॉलीवुड की इस वक्त की सबसे सेक्सी एक्ट्रेस दिशा पटानी की ‘मलंग’ केमिस्ट्री यंगस्टर्स को खूब पसंद आयी. जिसका असर उनकी लोकप्रियता पर हुआ. दोनों की बढ़ती लोकप्रियता के चलते स्कोर ट्रेंड्स इंडिया न्यूज़प्रिंट लीडरशिप में आदित्य और दिशा की रैकिंग काफी बढी.

यह आंकड़े अमरिका की मीडिया टेक कंपनी स्कोर ट्रेंड्स इंडिया द्वारा प्रमाणित और संशोधित किए गयें हैं. इन आंकड़ों के अनुसार, मलंग के प्रोमो के आने से पहले, आदित्य रॉय कपूर और दिशा पटानी रैंक 21 (23 जनवरी) और रैंक 15 (23 जनवरी) पर थे. फिल्म का पहला पोस्टर और प्रोमो आने के बाद एक हफ्ते में ही, उनकी धमाकेदार केमिस्ट्री ‘टॉक ऑफ दि टाउन’ बन गयीं. खास कर युवा वर्ग में उनकी लोकप्रियता और बढ़ी और फिर रैंकिग बढ़ कर आदित्य 21 से सीधे 11 पर तो दिशा 15 से सीधे 5 पर (30 जनवरी) पहुंच गयीं.

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रिलीज के वक्त और रिलीज के बाद आदित्य और दिशा दोनों को देश भर के सभी न्यूजप्रिंट में कवरेज मिला. जिसकी वजह से 13 फरवरी तक आयें आंकड़ों के अनुसार आदित्य 11 वे स्थान से 5वें स्थान पर और दिशा 5वें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंच गईं.

स्कोर ट्रेंड्स इंडिया के सह-संस्थापक अश्वनी कौल कहतें हैं, “आदित्य और दिशा युवा वर्ग में काफी लोकप्रिय हैं.. मलंग ने उनकी लोकप्रियता में चार-चांद लगायें. दोनों की छरहारी काया पर युवावर्ग फिदा हैं. साथ ही, मलंग फिल्म के रिलीज के वक्त न्यूज प्रिंट में इन दोनों के बारें में काफी लिखा गया. उनके पहले पोस्टर के बाद उनको काफी कवरेज मिला. इसी के चलते, दोनो स्कोर ट्रेंड्स के न्यूजप्रिंट प्लेटफॉर्म पर आगे बढते गयें. उनकी लोकप्रियता देखते हुए वह और आगे बढ़ सकतें हैं. “

अश्वनी कौल आगें बतातें हैं, “हम मीडिया का विश्लेषण करने के लिए भारत में 14 भाषाओं में 600 से अधिक समाचार स्रोतों से डेटा एकत्र करते हैं. इनमें फेसबुक, ट्विटर, प्रिंट प्रकाशन, सोशल मीडिया, वायरल खबरें, प्रसारण और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं. विभिन्न परिष्कृत एल्गोरिदम तब डेटा की इस भारी मात्रा को संसाधित करने और हस्तियों के स्कोर और रैंकिंग पर पहुंचने में हमारी मदद करते हैं.”

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नागौर में बर्बरता की हद पार: पेट्रोल से गीले कपड़े को प्राइवेट पार्ट में डाला

राजस्थान के नागौर जिले के एक गांव पांचौड़ी में चोरी के आरोप में 2 दलित नौजवानों को इतनी बुरी तरह पीटा गया कि देखने वालों के होश फाख्ता हो गए. उन दलित लडक़ों को अपनी जान बचाने के लाले पड़ गए. जो हुआ सो हुआ, पर इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई.

पीडि़त ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह 16 फरवरी को अपने चचेरे भाई के साथ बाइक की ठीक कराने के लिए करणु गांव में एजेंसी में गया था. वहां कुछ लोगों ने उन पर ही चोरी का आरोप लगा दिया. जब उन युवकों ने कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं किया तो वे उन दोनों युवकों को एजेंसी के पीछे ले गए और वहां जम कर पिटाई की. इतना ही नहीं, आरोपियों ने पेट्रोल से गीले कपड़े को पेचकस से लपेट कर उनके प्राइवेट पार्ट में डाल दिया. भयावह नजारा. वहां मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे. परंतु इस बेरहमी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक सियासत गरमा गई.

वीडियो हुआ वायरल…

वीडियो वायरल होते ही एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान में कांग्रेस शासित सरकार पर हमला किया, वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और राहुल गांधी से भी इस घटना को ले कर सवाल भी पूछे गए. पर वे सटीक जवाब नहीं दे पाए. इतना ही कहा कि राजस्थान सरकार इस घटना पर फौरन कार्यवाही करे.

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राहुल गांधी ने किया ट्ववीट…

राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि राजस्थान के नागौर में 2 दलित लडक़ों को बुरी तरह से पीटने का मामला सामने आया है. मैं राज्य सरकार से आग्रह करता हूं कि वह इस घटना को संज्ञान में ले कर कार्यवाही करे, ताकि पीडि़तों को इंसाफ मिल सके.

The recent video of two young Dalit men being brutally tortured in Nagaur, Rajasthan is horrific & sickening. I urge the state Government to take immediate action to bring the perpetrators of this shocking crime to justice.

— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 20, 2020

वहीं, उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि ‘राहुल जी, प्रियंका जी, ये भी दलित हैं. बस, फर्क केवल इतना है कि ये बर्बर अत्याचार आप की हुकूमत वाले राजस्थान में हो रहा है, इसीलिए इन का दर्द आप को नजर नहीं आएगा. सहानुभूति का सियासी नाटक फैलाने के लिए तो आप को भाजपा शासित राज्य चाहिए. हद है इस ओछी सियासत की.’

अशोक गहलोत ने दी सफाई…

जैसे ही विपक्ष ने इस मामले पर कांग्रेस को घेरा, तो तुरंत ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सफाई दी कि नागौर में हुई भयावह घटना के बाद तुरत कार्यवाही करते हुए सभी सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. कानून के मुताबिक अपराधियों को सजा मिलेगी.

In the horrific incident in Nagaur, immediate and effective action has been taken and seven accused have been arrested so far. Nobody will be spared. The culprits will be punished according to the law and we will ensure that the victims get justice.

— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) February 20, 2020

पर ऐसा करने से पहले उन्हें आगापीछा भी सोचना चाहिए. यह तो बेरहमी की हद ही है. इन दलित लडक़ों का क्या कुसूर जो बिना वजह का आरोप इन पर थोपा गया.  यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि आरोपियों की सजा क्या तय हुई, पर इन दलित नौजवानों के साथ जो हुआ, बहुत बुरा हुआ.

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और वक्त बदल गया भाग 2 : क्या हुआ नीरज के साथ

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- और वक्त बदल गया भाग 1 : क्या हुआ नीरज के साथ

इधर, सोनाली भी बहुत महत्त्वाकांक्षी थी. उस ने भी दौड़धूप व कोशिश की. उसे मलयेशिया में नौकरी मिल गई. अब सवाल उठा बच्चे का. उस का क्या किया जाए. सोनाली भी अकेले यह जिम्मेदारी उठाना नहीं चाहती थी. अभी उस के सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी. उस की कजिन नीता ने सुझाव दिया कि उस की कोई औलाद नहीं है, वह नीरज को अपने बेटे की तरह रखेगी. सोनाली ने नीरज को उसे दे दिया. एक मौखिक समझौते के तहत बच्चा उसे मिल गया. कोई कानूनी कार्यवाही की जरूरत ही नहीं समझी गई.

इस तरह मासूम नीरज, नीता आंटी के पास आ गया. बिना मांबाप के एक मांगे की जिंदगी गुजारने की खातिर. नीता आंटी उस का खूब खयाल रखती थीं, पढ़ाई भी अच्छी चल रही थी. जो बच्चे बचपन में दुख उठाते हैं, तनहाई और महरूमी झेलते हैं, वे वक्त से पहले सयाने और समझदार हो जाते हैं. नीरज ने अपना सारा ध्यान पढ़ाई में लगा दिया. एक ही धुन थी उसे कि कुछ बन कर दिखाना है. मेहनत और लगन से उस का रिजल्ट भी खूब अच्छा आता था.

दुख और हादसे कह कर नहीं आते. नीता आंटी का रोड ऐक्सिडैंट हो गया. 4-5 दिन मौत से संघर्ष करने के बाद वे चल बसीं. नीरज की तो दुनिया उजड़ गई. अब बूआ एकमात्र सहारा थीं. वे उस का बहुत ध्यान रखतीं. अंकल पहले से ही कटेकटे से रहते थे. अब और तटस्थ हो गए. धीरेधीरे हालात सामान्य हो गए. उस वक्त वह 10वीं में पढ़ रहा था. एक साल गुजर गया. आंटी की कमी तो बहुत महसूस होती पर सहन करने के अलावा कोईर् रास्ता न था. पहले भी वह अकेला था अब और अकेला हो गया.

उस के सिर पर आसमान तो तब टूटा जब अंकल दूसरी शादी कर के दूसरी पत्नी को घर ले आए. दूसरी पत्नी रेनू 30-31 साल की स्मार्ट औरत थी. कुछ अरसे तक वह चुपचाप हालात देखती और समझती रही और जब उसे पता चला, नीरज गोद लिया बच्चा है, तो उस के व्यवहार में फर्क आने लगा.

नीरज ने अपनेआप को अपने कमरे तक सीमित कर लिया. खाने वगैरा का काम बूआ ही देखतीं. डेढ़ साल बाद जब रेनू का बेटा पैदा हुआ तो नीरज के लिए जिंदगी और तंग हो गई. अब तो रेनू उसे बातबेबात डांटनेफटकारने लगी थी. खानेपीने पर भी रोकटोक शुरू हो गई. बासी बचा खाना उस के लिए रखा जाता. वह तो गनीमत थी कि बूआ उसे बहुत प्यार करती थीं, छिपछिपा कर उसे खिला देतीं.

धीरेधीरे रेनू ने अंकल के कान भरने शुरू कर दिए. अब नीरज उन की नजरों में भी खटकने लगा. बेवजह के ताने व प्रताड़ना शुरू हो गई. उस दिन तो हद हो गई, उसे एक किताब की जरूरत थी, उस ने अंकल से पैसे मांगे. इस बात को ले कर इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा हो गया कि अतीत के सारे कालेपन्ने खोल कर उसे सुनाए गए. उस पर किए गए एहसान जताए गए, खर्च के हिसाब बताए गए. नीरज खामोश खड़ा सब सुनता रहा.  उस के पास कहने को क्या था? उस के मांबाप ने उसे ऐसी स्थिति में ला कर खड़ा कर दिया था कि शरम से उस का सिर झुक जाता था. अच्छे मार्क्स लाने के बाद उस की न कोई कद्र थी, न कोई तारीफ. 10वीं में उस के 97 फीसदी नंबर आए थे. स्कौलरशिप मिल रही थी. पढ़ाई के सारे खर्चे उसी में से पूरे हो जाते. कभीकभार किताबें वगैरा के लिए कुछ पैसे मांगने पड़ते थे. उस पर भी हंगामा खड़ा हो जाता.

उस दिन वह अपने कमरे में आ कर बेतहाशा रोया. उस के मांबाप ने अपनी मुहब्बत व अपने ऐश, अपनी सहूलियतों, अपने स्वार्थ के लिए उस की जिंदगी बरबाद कर दी थी. अगर उन दोनों ने विधिवत शादी की होती, अपनी जिम्मेदारी समझी होती तो ननिहाल या ददिहाल में से कोई भी उसे रख लेता. उस की जिंदगी यों शर्मसार न हुई होती. उसी दिन रात को उस ने तय किया कि 12वीं पास होते ही वह यह घर छोड़ देगा. अपने बलबूते पर अपनी पढ़ाई पूरी करेगा.

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12वीं उस ने मैरिट में उत्तीर्ण की. पर घर में कोई खुशी मनाने वाला न था. रूखीफीकी मुबारकबाद मिली. बस, बूआ ने बहुत प्यार किया. अपने पास से मिठाई मंगा कर उसे खिलाई. हां, उस के दोस्तों ने खूब सैलिब्रेट किया. 2-4 दिनों बाद उस ने घर छोड़ दिया. पढ़ाई के खर्चे की उसे कोई फिक्र न थी. स्कौलरशिप मिल रही थी. एक अच्छे स्टूडैंट के लिए कुछ मुश्किल नहीं होती.

उस की परफौर्मेंस बहुत अच्छी थी. उस का ऐडमिशन एक अच्छे कालेज में हो गया. उस ने अपने एक दोस्त के साथ मिल कर कमरा किराए पर ले लिया और ट्यूशन कर के निजी खर्च निकालने लगा. उस का पढ़ाने का ढंग इतना अच्छा था कि उसे 10वीं के बच्चों की ट्यूशन

मिल गई. जिंदगी सुकून से गुजरने लगी. छुट्टियों में काम कर के कुछ और पैसे कमा लेता. बीई में उस ने पोजीशन ली. बीई के बाद उस के दोस्त ने जौब कर

ली और दूसरे शहर में चला गया. मकानमालिक को कमरे की जरूरत थी, उसे वह घर छोड़ना पड़ा. फिर थोड़ी कोशिश के बाद उसे मिसेज रेमन के यहां कमरा मिल गया. यह खूब पुरसुकून व अच्छी जगह थी. उस ने दुनिया के सारे शौक, सारे मजे छोड़ दिए थे. उस की जिंदगी का बस एक मकसद था, पढ़ाई और सिर्फ पढ़ाई. यहां भी वह ट्यूशन कर के अपना खर्च चलाता था. अब स्टोर में भी काम मिल गया, ये सब पुरानी बातें सोचतेसोचते वह नींद की आगोश में चला गया.

नीरज का यह फाइनल सैमेस्टर था. कैंपस सिलैक्शन में उसे एक अच्छी कंपनी ने चुन लिया. जीभर कर उस ने खुशियां मनाई. फाइनल होने के बाद उस ने वही कंपनी जौइन कर ली. शानदार पैकेज, बहुत सी सहूलियतें जैसे उस की राह देख रही थीं. मिसेज रेमन और मिस्टर जैकब को भी उस ने बाहर डिनर कराया. उन दोनों ने भी उसे तोहफे व दुआएं दे कर उस का हौसला बढ़ाया. मिसेज रेमन ने एक मां की तरह प्यार किया. बूआ को साड़ी व पैसे दिए.

वक्त और हालात बदलते देर नहीं लगती. आज वह 6 साल का मजबूर व बेबस बच्चा न था, 24 साल का खूबसूरत, मजबूत और समृद्ध जवान था. एक शानदार घर में रह रहा था. दुनिया की सारी सुखसुविधाएं उस के पास थीं. पर फिर भी उस की आंखों में उदासी और जिंदगी में तनहाई थी. वह हर वीकैंड पर मिसेज रेमन से मिलने जाता. वही एकमात्र उस की दोस्त, साथी या रिश्तेदार थीं. अच्छा वक्त तो वैसे भी पंख लगा कर उड़ता है.

उस दिन शाम को वह लौन में बैठा चाय पी रहा था कि गेट पर एक टैक्सी आ कर रुकी. उस में से एक सांवली सी अधेड़ औरत उतरी और गेट खोल कर अंदर चली आई. नीरज उस महिला को पहचान न सका, फिर भी शिष्टाचार के नाते कहा, ‘‘बैठिए, आप कौन हैं?’’ उस औरत की आंखें गीली थीं. चेहरे पर बेपनाह मजबूरी और उदासी थी. उस ने धीरेधीरे कहना शुरू किया, ‘‘नीरज, तुम ने मुझे पहचाना नहीं. मैं सोनाली हूं, तुम्हारी मम्मी.’’

नीरज भौचक्का रह गया. कहां वह जवान और खूबसूरत औरत, कहां यह सांवली सी अधेड़ औरत. दोनों में बड़ा फर्क था. ‘मम्मी’ शब्द सुन कर नीरज के मन में कोई हलचल न हुई. उस की सारी कोमल भावनाएं बर्फ की तरह सर्द हो कर जम चुकी थीं. अब दिल पर इन बातों का कोई असर न होता था. उस ने सपाट लहजे में कहा, ‘‘कहिए, कैसे आना हुआ? आप को मेरा पता कहां से मिला?’’

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‘‘बेटा, मैं दूर जरूर थी पर तुम से बेखबर न थी. तुम्हारा रिजल्ट, तुम्हारी कामयाबी, नौकरी सब की खबर रखती थी. इंटरनैट से दुनिया बहुत छोटी हो गई है. जीजाजी से मिसेज रेमन का पता चला. उन से तुम्हारे बारे में मालूम हो गया. इस तरह तुम तक पहुंच गई. मैं जानती हूं, मेरा तुम से माफी मांगना व्यर्थ है क्योंकि जो कुछ मैं ने किया है उस की माफी नहीं हो सकती. तुम्हारा बचपन, तुम्हारा लड़कपन, मेरी नादानी और मेरे स्वार्थ की भेंट चढ़ गया. मैं ने जज्बात में आ कर गलत फैसला किया. न मैं खुश रह सकी न तुम्हें सुख दे सकी. मैं ने वह खिड़की खुद ही बंद कर दी जहां से ताजी हवा का झोंका, मुहब्बत की ठंडी फुहार मेरे तपते वजूद की तपिश कम कर सकती थी. मैं ने थोड़े से ऐश की खातिर उम्रभर के दुखों से सौदा कर लिया. अब सिर्फ पछतावा ही मेरी जिंदगी है.’’

‘‘ठीक है, सोनाली मैम, जो आप ने किया, सोचसमझ कर किया था. आज से 30-32 साल पहले ‘लिवइन रिलेशनशिप’ इतनी आम बात न थी. बहुत कम लोग यह कदम उठाते थे. आप उस समय इतनी बोल्ड थीं, आप ने यह कदम उठाया. फिर उस को निभाना था. एक बच्चे को जन्म दे कर आप ने उस की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया. न मेरा कोई ननिहाल रहा, न ददिहाल. मैं ने कैसे खुद को संभाला, यह मैं जानता हूं.

‘‘जिस उम्र में बच्चे मां के सीने पर सिर रख कर सोते हैं उस उम्र में मैं ने तकिए से लिपट कर रोरो कर रातें काटी हैं. आप ने और पापा ने सिर्फ अपने ऐश देखे. एक पल को भी, उस बच्चे के बारे में न सोचा जिसे दुनिया में लाने के आप दोनों जिम्मेदार थे. अब मेरी मासूमियत, मेरा बचपन, मेरी कोमल भावनाएं सब बेवक्त मर चुकी हैं.’’

‘‘नीरज, तुम जो भी कह रहे हो, एकदम सच है. मैं ने हर कदम सोचसमझ कर उठाया था. पर उस के अंजाम ने मुझे ऐसा सबक सिखाया है कि हर लमहा मैं खुद को बुराभला कहती हूं. मलयेशिया में मैं ने दूसरी शादी की थी. पर 6 साल तक मुझे औलाद न हुई तो उस ने मुझे तलाक दे दिया. उसे औलाद चाहिए थी और मैं मां न बन सकी. औलाद की बेकद्री की मुझे सजा मिल गई. मैं औलाद मांगती रही, मेरे बच्चा न हुआ. सारे इलाज कराए. यहां औलाद थी तो मैं ने दूसरों को दे दी. मेरे गुनाहों का अंत नहीं है.

‘‘मुझे कैंसर है. थोड़ा ही वक्त मेरे पास है. मैं अपने गुनाहों का, अपनी भूलों का प्रायश्चित्त करना चाहती हूं. अब मैं तुम्हारे पास रहना चाहती हूं. मैं तनहाई से तंग आ गई हूं. मुझे तुम्हारी तनहाई का भी एहसास है. पैसा है मेरे पास, पर उस से तनहाई कम नहीं होती. भले तुम मुझे खुदगर्ज समझो पर यह मेरी आखिरी ख्वाहिश है. एक बार मुझे मेरी गलतियां सुधारने का मौका दो. अपनी बेबस व मजबूर मां की इतनी बात रख लो.’’

नीरज सोच में पड़ गया. एक बार दिल हुआ, मां को माफ कर दे. दूसरे पल संघर्षभरे दिन, अकेले रोतेरोते गुजारी रातें याद आ गईं. उस ने धीमे से कहा, ‘‘सोनाली मैम, इतने सालों से मैं बिना रिश्तों के जीने का आदी हो गया हूं. रिश्ते मेरे लिए अजनबी हो गए हैं. मुझे थोड़ा वक्त दीजिए कि मैं अपने दिल को रिश्ते होने का यकीन दिला सकूं, अपनों के साथ जीने का तरीका अपना सकूं.

‘‘इतने सालों तक तपते रेगिस्तान में झुलसा हूं, अब एकदम से ठंडी फुहार बरदाश्त न कर सकूंगा. मुझे अपनेआप को ‘मां’ शब्द से मिलने का, समझने का मौका दीजिए. अभी मुझे नए तरीकों को अपनाने में थोड़ी हिचकिचाहट है. जैसे ही मुझे लगेगा कि मैं ने मां को पहचान लिया है, मैं आप को खबर कर के लेने आ जाऊंगा. आप अपना फोन नंबर और पता मुझे दे जाइए.’’

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सोनाली ने एक उम्मीदभरी नजर से बेटे को देखा. उस की आंखें डबडबा गईं. वह थकेथके कदमों से गेट की तरफ मुड़ गई.

भूपेश बघेल की अमेरिका यात्रा के कुछ यक्ष-प्रश्न

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अमेरिका यात्रा प्रदेश में चर्चा का और आलोचना का सबब बनी हुई है. छत्तीसगढ़ सरकार का तर्क है भूपेश बघेल की अमेरिका यात्रा से छत्तीसगढ़ की शान, मान मे वृद्धि हुई है. अमेरिका से छत्तीसगढ़ उद्योग धंधे, पैसे आएंगे. जबकि विपक्ष विशेषकर डॉ. रमन सिंह और धरमलाल कौशिक ने भूपेश बघेल की अमेरिका यात्रा पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि एक तरफ छत्तीसगढ़ में किसान त्राहि-त्राहि कर रहे हैं, खून के आंसू बहा रहे हैं. सरकार धान का एक-एक दाना खरीदा नहीं पा रही है और मुख्यमंत्री अमेरिका जैसे समृद्ध देश में पिकनिक मना रहे है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अमेरिका यात्रा पर जिस तरह भाजपा हमलावर हुई है उससे कांग्रेस तिलमिला गई है और 15 वर्ष भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के विदेश यात्रा का ब्यौरा मांग रही है.कांग्रेस कहती है भूपेश बघेल की अमेरिका यात्रा सफल है भाजपा कहती है कि भूपेश बघेल  की यात्रा असफल है! और छत्तीसगढ़ की अस्मिता उड़ान पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाली है. अब सवाल है कि यहां की आवाम अमेरिका यात्रा को लेकर क्या धारणा बनाती है या जिस तरह भाजपा के 15 वर्षों के कार्यकाल में डॉ रमन सिंह और उनका मंत्रिमंडल विदेश भ्रमण करता रहा,अधिकारी विदेश मे खरीददारी करते रहे वहीं सब कुछ कांग्रेस की सरकार में भी होगा? यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है जिसका जवाब शायद न कांग्रेस के पास है न भाजपा के पास.

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भूपेश बघेल की निवेशकों के साथ बैठक

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  ने पहले चरण में सैन फ्रांसिस्को में करीब 250 निवेशकों से संवाद किया. आधिकारिक  जानकारी के अनुसार, बघेल को अमेरिकी निवेशकों से छत्तीसगढ़ में उद्योग लगाने के लिए अनेक  प्रस्ताव मिले हैं. यात्रा के अगले पड़ाव के लिए मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ की टीम बोस्टन गयी जहां बघेल इंस्टीट्यूट फॉर कम्पीटिटीवनेस में वहां के औद्योगिक प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया.

यात्रा के पहले पड़ाव में मुख्यमंत्री बघेल ने सैन फ्रांसिस्को के सिलिकन वैली और रेड वुड शोर्स में औद्योगिक प्रतिनिधियों और निवेशकों से सीधी चर्चा की.उन्होंने निवेशकों को बताया कि छत्तीसगढ़ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए भारत के शीर्ष राज्यों में शामिल है। उन्होंने भरोसा जताया कि छत्तीसगढ़ निवेश करने के लिए सबसे अच्छी जगह है, क्योंकि यह देश के मध्य में स्थित है और यहां बेहतर कनेक्टिविटी है.

उन्होंने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति निवेशकों के लिए काफी अनुकूल है।बघेल ने एक इंटरव्यू मे कहा, ”हमारा राज्य खनिज समृद्ध है और हमारे यहां खनिज आधारित कई उद्योग हैं। हम अमेरिका की कंपनियों और निवेशकों को आने तथा मुख्य क्षेत्रों में अवसर तलाशने का न्यौता देते हैं.”छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  अमेरिका के कई शहरों की यात्रा पर रहे. वह इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर राज्य की, निवेशकों के अनुकूल और कारोबार सुगम नीतियों की जानकारी देते रहे .

भूपेश बघेल की दृष्टि 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार अगले कुछ साल राज्य के लोगों की क्रयशक्ति बढ़ाने पर ध्यान देगी. राज्य सरकार गरीबी हटाने तथा खनिज, इस्पात एवं विद्युत जैसे मुख्य उद्योगों के साथ ही कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव इथेनॉल, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग एवं रक्षा, उच्च शिक्षा, दवा, वाहन आदि जैसे क्षेत्रों के लिये भी प्रतिबद्ध है.

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मुख्यमंत्री के अनुसार, ” हमारा लक्ष्य लोगों की क्रयशक्ति बढ़ाना है. यदि लोगों के पास खरीदने का पैसा नहीं हो तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि हम कितने उद्योग लगाते हैं.बघेल ने कहा कि इस संतुलन को बनाये रखने के लिये लोगों की क्रयशक्ति बढ़ाना महत्वपूर्ण है, जो अंतत: उद्योगों और कंपनियों को फायदा  छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल का अमेरिका की कंपनियों को राज्य में निवेश का न्योता दिया .

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अमेरिका की कंपनियों को राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने के लिये आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार खनिज व इस्पात जैसे मुख्य क्षेत्रों के साथ ही छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास में ध्यान केंद्रित कर रही है.”

पलभर का सच: भाग 3

दूसरा भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- पलभर का सच: भाग 2

लेखक- अनुराधा चितले

‘‘10 साल पहले शेखर ने जब अपने आफिस में ‘पर्सनल आफिसर’ के तौर पर कविता की नियुक्ति की थी तब जाने कितने दिनों बाद शेखर से मेरी फिर एक बार जबरदस्त लड़ाई हुई थी.

‘‘वह सिर्फ झगड़ा नहीं था शालो… शेखर मुझे मारने पर भी उतर आया था.’’

यह सबकुछ बताते हुए शुभा की आंखें भर आई थीं और फिर जाने कितनी देर तक आंसू बहाते हुए वह निशब्द सी हो कर बैठ गई थी.

शुभा की सारी बातें सुन लेने के  बाद मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि उस से क्या कहूं. मन में बारबार एक ही सवाल उठ रहा था कि शुभा जैसी तेजतर्रार लड़की इतने दिनों तक यों चुप कर दब कर क्यों रह गई.

कुछ न सूझते हुए भी मैं ने अनायास ही शुभा से बेहद सरल सवाल करने शुरू किए थे :

‘‘तू इतने दिनों तक चुप क्यों थी? और अगर इतने दिनों तक चुप थी तो अब एकदम ही तलाक लेने की आफत क्यों मोल ले रही है? क्या अपनी खुद्दारी दिखाने का यही एक रास्ता बचा है तेरे पास? अपना विरोध हर कदम पर दिखा कर भी तो तू शेखर के साथ रह सकती है.’’

‘‘नहीं शालो, मेरी खुद्दारी, स्वाभिमान सब खत्म हो चुके हैं. अब मैं सिर्फ शांति से और अपने तरीके से जीना चाहती हूं.’’

‘‘मतलब, क्या करने वाली है तू?’’

‘‘यहां दिल्ली में एक वृद्धाश्रम खुला है. उस के संचालन का काम मुझे मिल गया है. सोचती हूं जरूरतमंद वृद्धों की सेवा करूंगी तो जीवन में कुछ करने की चाह भी पूरी हो सकेगी.’’

‘‘क्या शेखर ने इस की इजाजत दी है?’’

‘‘उस की इजाजत मिलेगी ही नहीं, यह मुझे पता है तभी तो पहले उस से तलाक ले कर अलग होने का फैसला लिया है. फिर अपना काम करूंगी.’’

‘‘क्या सचिन यह सब जानता है?’’

‘‘हां, जानता है और कुछ हद तक मेरी भावनाओं को समझता भी है मगर तुम्हारी तरह वह भी कहता है कि अब यह सब करने की क्या जरूरत है.’’

‘‘तो फिर सच में जरूरत क्या है, शुभा?’’

‘‘जीवन में ‘जरूरत’ शब्द की व्याख्या हर इनसान अपनेअपने मन से करता है और तब ‘जरूरत’ हर किसी की अलग हो सकती है…10 साल पहले शेखर ने जब अपने आफिस में कविता की नियुक्ति की थी तब हमारा आखिरी झगड़ा हुआ था. उस के बाद मैं ने कभी शेखर से झगड़ा नहीं किया…मैं अपनेआप से ही झगड़ती रही हूं…10 साल से शेखर के मुंह से कविता की तारीफ सुनसुन कर मैं ऊब सी गई हूं.

‘‘मैं जानती हूं कि इस में मेरी स्त्रीसुलभ ईर्ष्या भी हो सकती है लेकिन सच तो यह है कि शेखर के मुंह से कविता की तारीफ सुन कर मैं हैरान हो कर सोचती हूं कि एक इनसान इस तरह अलगअलग हिस्सों में अलगअलग बरताव कैसे कर सकता है.’’

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‘‘तो क्या तू समझती है कि शेखर और कविता में कुछ चल रहा है?’’ मैं ने बड़े ही संयत स्वरों में पूछा.

कुछ देर तक तो शुभा चुप रही फिर बड़े ही अटपटे से स्वर में बोली, ‘‘मैं दावे के साथ कुछ नहीं कह सकती मगर यह सच है कि शेखर का अधिकतर समय अब उस के साथ ही बीतता है. मैं यह भी नहीं कह सकती कि शेखर का मेरी तरफ ध्यान ही नहीं है, वह आज भी मेरी हर जिम्मेदारी को पूरा करता है.

त्योहारों में मुझे गहने व साडि़यां दिलाना, मुझे पार्टियों में ले जाना, यह सब कुछ पहले की तरह ही चल रहा है क्योंकि शेखर के जीवन में मैं आज भी ‘बीवी’ नामक ऐसी चीज हूं जिस पर कानूनन शेखर का ही अधिकार है. लेकिन शालो, अब इस तरह सिर्फ एक कानूनन हकदार चीज बन कर रहना मेरे लिए नामुमकिन हो गया है.’’

‘‘और दोनों बच्चों के बारे में तुम ने क्या सोचा है?’’

‘‘बच्चों का सोचतेसोचते ही तो शेखर के साथ 30 साल गुजारे, शालो, अब बच्चे बच्चे नहीं रहे… उन के जीने के अपनेअपने तरीके हैं, उन्हें अपने तरीके से जीने दें…मुन्ना ने भी अपनी शादी तय कर ली है और उस की शादी होते ही मैं मुक्त हो जाऊंगी… जब भी बच्चों को मेरी जरूरत होगी, मैं उन के पास जरूर हो आऊंगी.’’

‘‘उम्र के इस पड़ाव पर आ कर अचानक इस तरह का निर्णय लेने से तुझे डर नहीं लगा?’’

‘‘नहीं, शालो, अब सच में डर नहीं लगता. जीवन भर मैं ने जो मानसिक यातनाएं भोगी हैं उन्हें अब दोबारा बहूबेटों के सामने भुगतने से डर लगता है और इसी से अब मैं निर्भय हो कर जीना चाहती हूं.’’

शुभा की कहानी सुन कर मैं कुछ देर तक तो निशब्द सी बैठी रही फिर शुभा को गले लगा लिया और बोली, ‘‘तेरे इस निर्भीक फैसले पर मुझे गर्व है, शुभा. तेरे इस अनोखे निर्णय में तेरी यह सहेली हमेशा तेरे साथ रहेगी. जब कभी किसी चीज की जरूरत पड़ेगी तो बेहिचक मेरे पास चली आना, समधन समझ कर नहीं, अपनी प्रिय सहेली समझ कर.’’

इतनी सारी मन की बातें मुझ से कह लेने के बाद मेरे कहने पर ही शुभा बहुत ही सामान्य हो कर 2 दिन तक रह गई थी. लेकिन तीसरे दिन एक अनोखी घटना ने शुभा को और मुझे हिला कर रख दिया था.

एक कार दुर्घटना में शेखर की अचानक मौत हो गई और शुभा का जीवन फिर एक बार शेखर से जुड़ गया था.

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शुभा को ले कर तुरंत हम लोग मुंबई पहुंचे थे. तो एक बार फिर वह भूचाल में घिर गई थी.

मुंबई में इतने बड़े इंडस्ट्रीयलिस्ट की मौत का ‘नजारा’ किसी त्योहार से कम नहीं था.

शुभा की शुष्क आंखों ने पति की मौत का राजसी ठाटबाट भी ‘संयत’ मन से सह लिया था.

अब इतने बड़े उद्योगपति की विधवा होने का मानसम्मान भी उस के जीवन को त्याग नहीं सकता था. जिस मुक्ति की कामना वह कर रही थी वह तो अपनेआप ही मिल गई थी मगर किस ढंग से?

जीवन को खदेड़ देने वाले मुझ से कहे हुए उस पल भर के ‘सच’ को क्या वह कभी भूल सकती है? और क्या मैं कभी भुला पाऊंगी?

शो में आया नया ट्विस्ट, एक बार फिर अलग हुईं कार्तिक-नायरा की राहें

टेलीविजन इंडस्ट्री के पौपुलर सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehelata Hai) ने काफी समय से दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना रखी है और इसका एकमात्र कारण है इस सीरियल के लीड आर्टिस्ट यानी कि मोहसीन खान (Mohsin Khan) और शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi). दर्शक कार्तिक (Kartik) और नायरा (Naira) की जोड़ी को खूब पसंद करते हैं और दोनों पर जमकर प्यार बरसाते हैं. जब भी कार्तिक और नायरा एक दूसरे से अलग होते हैं तो इस शो के फैंस को ये बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगती.

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शो में आने वाला है नया ट्विस्ट…

 

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शो के शुरूआत से ही कार्तिक-नायरा (Kartik-Naira) एक दूसरे से कभी बिछड़ जाते हैं तो कभी फिर से एक हो जाते हैं लेकिन जब कार्तिक और नायरा एक हो जाते हैं तो इन दोनों को जोड़ी दर्शकों का दिल ले जाती है. सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है के मेकर्स इस शो में आए दिन कोई का कोई नया ट्विस्ट लेकर आते हैं जिसकी वजह से दर्शकों की शो के प्रति दिलचस्पी और ज्यादा बढ़ जाती है.

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लव-कुश को सजा दिलाना चाहती है नायरा…

 

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खबरों की माने तो इस सीरियल में फिर से एक नया ट्विस्ट आने वाला है जो शायद दर्शकों को पसंद नहीं आएगा क्योंकि इस नए ट्विस्ट में दर्शकों की फेवरेट जोड़ी कार्तिक (Kartik) और नायरा (Naira) के रिश्ते में एक बार फिर दरार पड़ने जा रही है. जैसा कि हम सब जानते हैं कि लव-कुश (Luv-Kush) ने त्रिशा (Trisha) के साथ जो कुछ भी किया उसकी वजह से नायरा (Naira) लव-कुश (Luv-Kush) को लेकर काफी गुस्से में है और जल्द से जल्द लव-कुश को उनके किए की सजा दिलवाना चाहती है.

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कार्तिक और नायरा आमने-सामने…

इसी के चलते कार्तिक (Kartik) चाहता है कि ये मामला जितनी जल्दी हो सके शांत हो जाए ताकी उसके परिवार की इज्जत समाज के आगे खराब ना हो. लेकिन नायरा (Naira) ऐसा बिल्कुल नहीं सोच रही और वे त्रिशा को न्याय दिलाना चाहती है. आने वाले एपिसोड में नायरा त्रिशा (Trisha) को न्याय दिलाने के लिए उसका जमकर साथ देगी जो कि कार्तिक को बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा. इस मामले में कार्तिक और नायरा दोनों एक दूसरे के सख्त खिलाफ होंगे.

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अब देखने वाली बात ये होगी कि कार्तिक और नायरा की ये लड़ाई आखिर किस अंजाम तक पहुंचेगी और क्या सच में लव-कुश की वजह से कार्तिक नायरा की जोड़ी एक बार फिर बिखर जाएगी.

भोजपुरी फिल्मो में इस हौट एक्ट्रेस के साथ नजर आने वाले हैं साउथ सुपर स्टार शिव कान्तमणिनी

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में कई सफल फिल्में दे चुके निर्देशक सुब्बा राव गोसांगी अब साउथ स्टार शिव कान्तमणिनी को भोजपुरी में लेकर आ रहे हैं. अभी हाल ही में निर्देशक सुब्बा राव गोसांगी ने प्रोडक्शन नम्बर 1 का मुहूर्त मुम्बई में किया. इस दौरान उन्होंने बताया कि उनकी आने वाली फिल्म में तेलगु के स्टार शिव कान्तमणिनी लीड रोल में होंगे, जबकि उनके अपोजिट अभिनेत्री पाखी हेगड़े होंगी. यह पहली बार होगा, जब कोई साउथ का हीरो भोजपुरी फिल्म में लीड रोल प्ले करेगा. वहीं, पाखी भी लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर नज़र आएंगी.

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सुब्बा राव गोसांगी ने बताया कि…

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उन्होंने बताया कि फिल्म का निर्माण श्री गौरी क्रिएशन्स के बैनर तले होगा. फिल्म के निर्माता घंटा श्रीनिवासा राव हैं. फिलहाल फिल्म के प्री प्रोडक्शन का काम भी चल रहा है. प्रोडक्शन नम्बर 1 को लेकर उत्साहित सुब्बा राव गोसांगी ने बताया कि फिल्म की शूटिंग २० मार्च से तेलंगाना में शुरू हो जाएगी. उसके बाद 20 अप्रैल तक शूटिंग पूरा करने का लक्ष्य है, जिसके बाद हम पोस्ट प्रोडक्शन में लग जायेंगे. तकरीबन डेढ़ महीने पोस्ट प्रोडक्शन का काम होगा. उसके बाद छुट्टियां शुरू हो जाएंगी. इसी बीच कोई अच्छी सी डेट देख कर हम अपनी फिल्म रिलीज करेंगे.

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शिव कान्तमणिनी और पाखी हेगड़े के साथ ये कलाकार भी होंगे शामिल…

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सुब्बा राव गोसांगी ने फिल्म की कास्ट को लेकर कहा कि मैं इस बार एक प्रयोग कर रहा हूं. शिव कान्तमणिनी और पाखी हेगड़े के साथ भोजपुरी अभिनेता निसार खान और कौमेडियन मंटू लाल भी फिल्म में होंगे. संगीत ओम झा, गीत श्याम देहाती ने लिखा है. प्रोडक्शन हेड विजय प्रसाद और प्रचारक संजय भूषण पटियाला है.

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Mujhse Shaadi Karoge: ये टीवी स्टार बनना चाहते हैं शहनाज गिल का दूल्हा, देखें Video

बिग बौस (Bigg Boss) और परितोष त्रिपाठी (Paritosh Tripathi) का एक अनोखा रिस्ता बन गया है तभी तो अभिनेता परितोष त्रिपाठी बिग बौस में कौमेडी क्लब की होस्टिंग करने के बाद अब बहुत जल्द शहनाज गिल (Shehnaz Gill) और पारस छाबड़ा (Paras Chhabra) की शादी में शिरकत करने वाले हैं. आपको बता दें कि कलर्स चैनल पर प्रसारित हो रहे शो ‘मुझसे शादी करोगी’ (Mujhse Shaadi Karoge) जिसमे बिग बौस 13 (Bigg Boss 13) के प्रतियोगी शहनाज गिल और पारस छाबड़ा अपने लिए जीवन साथी की तलाश कर रहे हैं. अभिनेता परितोष त्रिपाठी भी शहनाज को अपनी दुल्हनिया बनाना चाहते है जिसके लिए वो अलग अलग किरदार में शहनाज को रिझा रहे हैं की वो परितोष को अपना दूल्हा बना ले.

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अनेक रूप में दिखाई देंगे परितोष त्रिपाठी…

जैसा की शो का प्रोमो दिलचस्प है उसी प्रकार इस शो में परितोष के कई रूप दर्शको को दिखाई देंगे. कभी बाराती तो कभी दूल्हा तो कभी दुल्हन के रिश्तेदार और अपने हर किरदार से दर्शकों को भरपूर हंसाएंगे.

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परितोष त्रिपाठी का कहना है…

 

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इस पर परितोष त्रिपाठी (Paritosh Tripathi) का कहना है कि “यह बहुत ही दिलचस्प और मजेदार शो है दर्शको को बहुत पसंद आएगा. इस शो में मनोरंजन का पूरा डोज है जैसे की पारस छाबड़ा (Paras Chhabra), शहनाज गिल (Shehnaz Gill), मनीष पौल (Manish Paul) और परितोष त्रिपाठी. मैं कई किरदार में और अपने अलग अलग अंदाज में शहनाज को इम्प्रेस करूंगा. अब यह उनपर है की वो पसंद करती है या नहीं. फिर भी दर्शको को हंसाने का कोई भी मौका नहीं छोडूंगा और मेरा शायराना अंदाज भी देखने को मिलेगा.”

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शो की तैय्यारियों में जुट गए हैं परितोष त्रिपाठी…

 

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इस शो के लिए हमेशा की तरह परितोष जमकर तैयारी में लग गए हैं और अपने अलग अलग किरदार में कौमेडी की प्रेम भरी कविताओं का तड़का लगाएंगे. परितोष अपनी कवितावों और कौमेडी से दर्शको का मनोरंजन करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. उम्मीद है दर्शकों को एक ही शो में परितोष त्रिपाठी के अनेक किरदार खूब पसंद आएंगे.

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पलभर का सच: भाग 2

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- पलभर का सच: भाग 1

लेखक- अनुराधा चितले

शुभा और शेखर ने हालात को समझते हुए एक भव्य फाइव स्टार होटल में शादी की जोरदार पार्टी दी थी और फिर सबकुछ ठीकठाक हो गया था.

पूजा की शादी को साल भर हो चुका था. इस दौरान वह और सचिन अकसर दिल्ली मेरे यहां आया करते थे मगर शुभा पहली बार मेरे यहां बतौर समधन आ रही थी इसलिए भी मैं मन ही मन बहुत खुश हो रही थी. मुझ में बहुत सी पुरानी यादें उमड़ती जा रही थीं और उन मीठी सुहानी यादों की डोर मुझे कभी बचपन में तो कभी जवानी में ले जा कर ‘मायके’ पहुंचा रही थी.

ठीक 11 बजे राजू पूजा और शुभा को घर ले आया. कार से उतरते हुए मैं ने उन दोनों को देखा तो पूजा सिर्फ एक बैग ले कर आई थी मगर शुभा तो 3-4 बैग के साथ आई थी. बैगों को देख कर मेरे चेहरे पर आए अजीबोगरीब भावों को देख कर कुछ झेंपते हुए शुभा बोली, ‘‘मेरा सामान बहुत ज्यादा है न. दरअसल, मैं अब दिल्ली में अपने बेटे मुन्ना के पास रहने के इरादे से आई हूं. मेरा सामान यहीं बाहर ही रहने दो…अभी थोड़ी देर में मुन्ना आ जाएगा तो मैं उस के साथ चली जाऊंगी.’’

‘‘मेरी प्यारी समधन जी, आप हमारे घर अपनी इच्छा से आई हैं, मगर जाएंगी हमारी इच्छा से, समझीं? अब ज्यादा नखरे मत दिखाओ और चुपचाप अंदर चलो.’’

मैं ने शुभा से मजाक करते हुए कहा था तो मेरे बोलने के अंदाज से वह बहुत खुश हो गई और मेरे गले लग कर पहले की तरह हंसनेबोलने लगी थी.

खाना खा लेने के बाद हम सब कुछ देर तक गपशप करते रहे. पूजा अपने डैडी से अपने काम की बातें करती जा रही थी. पूजा की बातों से प्रभावित हो कर राजू भी अपनी छोटी बहन से सवाल पर सवाल पूछता जा रहा था. कुछ देर तक उन तीनों की बातें सुन लेने के बाद मैं शुभा को ले कर अपने कमरे में चली गई थी.

कमरे में जा कर हम दोनों जब पलंग पर लेट गए तो मैं ने सोचा कि हम दोनों एकसाथ होते ही पहले की तरह अनगिनत बातें शुरू कर देंगे और बातें करने को समय कम पड़ जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं था.

क्या उम्र के तकाजे ने या बदलते रिश्ते ने हमारे होंठ सिल दिए थे? मैं सोचने लगी कि शुभा बड़े धीरगंभीर और संयत स्वर में अचानक बोली थी, ‘‘मैं तलाक ले रही हूं, शालो.’’

‘‘क…क्याऽऽऽ?’’ कहते हुए मैं पलंग पर उठ कर बैठ गई थी.

‘‘हां, शालो, यह सच है. तुम्हें कहीं बाहर से खबर मिले और फिर तुम लोग परेशान हो जाओ, इस से अच्छा है कि मैं ही बता दे रही हूं…इसीलिए पहले मैं ने पूजा व सचिन की शादी 2 साल बाद करने की बात कही थी… सोचती थी कि बेटे की शादी के बाद यह सब अच्छा नहीं लगेगा… लेकिन अब मुझ से सहा नहीं जा रहा. अब मैं ने अपना मन पक्का कर लिया है.’’

‘‘लेकिन इतने सालों बाद यह फैसला क्यों, शुभा?’’

‘‘वैसे तो बहुत लंबी कहानी है, मगर जिस किसी को सुनाऊं उसे तो यह बहुत ही छोटी सी बात लगती है. कोई क्या जाने कि कभीकभी छोटी सी बात ही दिल में बवंडर बन कर समूचे जीवन को तहसनहस कर देती है.

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‘‘तुम तो जानती ही हो कि शेखर मुझ से बेहद प्यार करता था. प्यार तो वह शायद आज भी बहुत करता है लेकिन शादी के बाद ही मैं ने उस के प्यार में बहुत बड़ा अंतर पाया है. शादी के पहले मुझे यह तो पता था कि हमारे यहां शादी सिर्फ पति से ही नहीं उस के पूरे परिवार से होती है. लेकिन शेखर से शादी करने के बाद मुझे लगा कि मेरी शादी शेखर के परिवार से नहीं उस के  परिवार की अजीबोगरीब अमीरी से हुई है.

‘‘शादी के बाद मुझे यह भी पता चला कि अमीरों की भी अलगअलग जातियां होती हैं. शेखर के पिता बड़े अमीर थे जो अपने दोनों बेटों के साथ अपने उद्योग को और बढ़ाना चाहते थे. शेखर की मां का बहुत पहले ही देहांत हो चुका था. घर में हम सिर्फ 4 लोग थे. शेखर के पिता, शेखर का छोटा भाई विशाल, शेखर और मैं. घर के इन 4 लोगों में से मेरी बातचीत सिर्फ शेखर से होती थी. शेखर के पिता ने कभी भी मुझ से आमनेसामने हो कर बात नहीं की थी. जब भी कुछ कहना होता तो शेखर से कह देते कि बहू से कहो…

‘‘विशाल, मेरा छोटा देवर शेखर से सिर्फ 2 साल छोटा था. वह स्वभाव से बेहद शर्मीला था. शुरूशुरू में मैं ने उस से दोस्ती करने के लिए हंसीमजाक करने की कोशिश की तो एक दिन शेखर ने बड़े गंभीर अंदाज में मुझ से कहा था, ‘तुम विशाल से यों हंसीमजाक न किया करो… डैडी को अच्छा नहीं लगता.’

‘‘ ‘तुम्हारे डैडी को तो मैं ही अच्छी नहीं लगती. तभी तो वह सीधे मुंह मुझ से बात ही नहीं करते, जो कहना होता है तुम से कहलवाते हैं और अब विशाल से बात करने क ो भी मना कर रहे हैं.’

‘‘मैं ने गुस्से में तुनक कर कहा था. इस पर शेखर का जो रौद्र रूप उस रात मैं ने पहली बार देखा था वह आजतक नहीं भूल पाई हूं.

‘‘अपने मजबूत हाथों से मुझे पलंग से उठा कर नीचे गिराते हुए एकदम ही राक्षसी अंदाज में शेखर ने कहा था, ‘इस घर में जो डैडी कहेंगे वही होगा, और तुम्हें भी वही करना होगा. अगर तुम्हें यह सब पसंद नहीं है तो तुम इस घर को छोड़ कर जा सकती हो…मगर तब मैं तुम्हारे साथ नहीं जाऊंगा.’

‘‘और फिर बड़ी बेदर्दी से शेखर बेडरूम छोड़ कर बाहर चला गया था. और मैं रात भर रोती रही थी पर मेरी सिसकियां सुनने वाला वहां कोई नहीं था.

‘‘इस घटना के बाद 15-20 दिनों तक शेखर और मुझ में बोलचाल बिलकुल बंद थी. जाने कितने दिनों तक हम दोनों का यह मौनव्रत चालू रहता मगर एक दिन बात को निरर्थक न बढ़ाने की सोच कर मैं ने ही शेखर से बात करनी शुरू की और फिर शायद मुझे खुश करने के लिए ही वह उस समय मुझे घुमाने स्विट्जरलैंड ले गया था. वह 10-12 दिन जैसे परियों के पंख लगा कर उड़ गए थे. वापसी में मैं ने ही शेखर से कहा था, ‘सोचती हूं, कुछ दिन…मां से मिल आऊं.’

‘‘शेखर ने तब कहा था, ‘चलो, कल ही चले चलते हैं.’

‘‘मां और बाबूजी हम दोनों को देख कर बहुत खुश हो गए थे. मां तो दामाद की सेवा करतेकरते मुझे भूल ही गई थीं. लेकिन जब उन्होंने मुझे कुछ दिन उन के पास छोड़ जाने की बात शेखर से कही तो उस ने तपाक से मना कर दिया और फिर 2 दिन में ही मैं शेखर के साथ अपने घर वापस आ गई थी. उस वक्त भी मेरा मन बहुत खट्टा हो गया था और रात को शेखर से कुछ कहने ही वाली थी कि उस का तमतमाता हुआ चेहरा देख कर डर के मारे चुप ही रह गई थी.

‘‘इस घटना के बाद हर 15-20 दिनों के बाद कुछ न कुछ ऐसा घट जाता जिस से मैं जान गई कि इस घर में मुझे अपने मन की इच्छा पूरी करने की आजादी कभी मिल ही नहीं सकती. यह बात सच थी कि व्यावहारिक दृष्टिकोण से उस घर में सुख ही सुख था. गहने, कपड़े, खानापीना यानी किसी भी चीज की कोई कमी नहीं थी. शेखर मुझ से प्यार तो बहुत करता था मगर उस के प्यार में मेरी अपनी इच्छा की कोई कद्र नहीं होती थी.

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‘‘घर में कुछ काम नहीं था तो मैं ने शेखर से आगे की पढ़ाई करने की बात कहीं तो ‘जरूरत क्या है’ कह कर उस ने मना कर दिया.

‘‘कुछ करने की बात छोड़ो, किसी सहेली से मिलने जाने की बात करती तो हर वक्त शेखर के साथ ही जाना होता था और उसी के साथ वापस भी आना होता था… इसी कारण मैं तुम्हारे घर बहुत कम आती थी. वैसे पूजा के डैडी की आंखों में मैं ने रईसी के प्रति नफरत कब की पढ़ ली थी. तभी तो सचिन व पूजा की शादी से मैं डरती थी. लगता था पूजा को मेरा ही इतिहास न दोहराना पड़े मगर सचिन बहुत समझदार है.

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

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