हम खो जाएंगे : भाग 1

हर औरत की तरह मेरी बीवी हूरा बेगम को भी जेवरात का बड़ा शौक है. मैं ने शादी पर जो जेवरात चढ़ाए थे, 20 साल गुजरने के बावजूद उन्हें यों सीने से लगाए रखती है जैसे बंदरिया अपने बच्चे को. मैं उस से कहता भी हूं, ‘हूरा बेगम इन्हें बेच कर नए फैशन के जेवरात खरीद लाओ. तुम्हारा दिल इन से अभी तक भरा नहीं?’

तो वो एकदम जज्बाती सी हो कर कहती है ‘मंसूर इंसान का उन चीजों से कभी दिल नहीं भरता जो उस के दिलोदिमाग में खुशगवार यादों की बस्ती आबाद कर देती हों. जब मैं आज की बोझिल जिम्मेदारियों से थक कर इन जेवरात की पिटारी खोलती हूं तो ऐसा लगता है कि मैं वही नई ब्याहता दुल्हन हूं और तुम अपने जज्बात से लरजते हाथों से मुझे ये जेवर पहना रहे हो.

तुम्हें याद है न, तुम ने चुपके से अपनी बहन सलमा से कहलवाया था कि हूरा से कह देना जब मैं आऊं तो वो फूलों का गहना पहने मिले, धातु के जेवरात उतार देना. मैं ने तुम्हारा हुक्म फौरन मान लिया था. मगर पता नहीं क्यों मुझे यह बदशगुनी सी लगी थी कि शादी की पहली रात ही दूल्हे को अपने रूप का जलवा दिखाए बगैर दुलहन जेवर उतार दे.

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मेरी आंखों में आंसू भर आए थे. तुम ने मेरे दुखी दिल को महसूस कर के पूछा था ‘हूरा क्या बात है तुम खुश नहीं लग रहीं. क्या मुझ से शादी तुम्हारी मरजी के बगैर हुई है?’ मैं ने तड़प कर तुम्हारे मुंह पर हाथ रख दिया था, याद है न. फिर तुम्हारे बहुत जोर देने पर मैं ने अपने दिल की बात बता दी थी.

तुम बहुत देर तक गुमसुम से बैठे रहे थे. फिर उठ कर मेरे पास आ गए थे और जेवरात का डिब्बा खोल कर सारे जेवर मुझे अपने हाथों से पहनाते हुए कहा था. लो बस अपना दिल मैला न करो.

आज की रात एकदूसरे के लिए हमारे दिल में मोहब्बत के सिवा और कोई जज्बा पैदा नहीं होना चाहिए. तुम्हें याद है न? और तुम ने मुंह दिखाई में मुझे यह सैट दिया था?’

मेरी बीवी यह वाकया कई बार मुझे सुना चुकी है. हर बार वह एक मजे के साथ इस वाकिए का एकएक लफ्ज सौसौ रंगों में डुबो कर सुनाती है. मगर बेवकूफ यह नहीं जानती कि यह वाकया सुनते हुए मेरा ब्लडप्रेशर हाई होने लगता है. उसे नहीं मालूम कि उस के शौहर को इन जेवरात से क्या एलर्जी होती है. उस ने शादी की पहली रात यह क्यों कहा था कि वो फूलों का गहना पहन ले. हर आदमी की जिंदगी में कुछ बातें ऐसी जरूर होती हैं जिन का राजदार वो खुद ही होता है.

सालोंसाल बल्कि सारी उम्र साथ रहने वाली बीवी भी नहीं जानती कि उस के शौहर के दिल के चंद खाने उस से छिपे हुए हैं. वह खुश कर देने वाले चंद जुमलों से अपने दिल को आबाद करती रहती है. खुद को धोखा देती रहती है कि उस की जिंदगी में दाखिल होने वाली मैं वो अकेली औरत हूं जो उस के दिलोदिमाग पर पूरी तरह कब्जा किए हुए है.

इस आत्ममुग्धता के सहारे वो खुशीखुशी अपने जिस्मोजान की कुर्बानी देती चली जाती है. अच्छा ही है कि वह इस आत्ममुग्धता में डूबी रहती है. अगर वह हर सच्चाई की तह में उतरने वाली अकल ले कर पैदा होती तो शिकारी फितरत वाला मर्द सारी उम्र शिकार से महरूम (वंचित) रह जाता.

हां, दूसरे मर्दों की तरह मैं भी शिकारी फितरत वाला मर्द था. जवानी के दौर में कई सारी लड़कियां मेरी मोहब्बत के जाल में फंस कर मुझ पर अपना तनमन और धन न्यौछावर करती रहीं. कुलसुम, जैनब, हमीदा, गुलफ्शां, साजिदा. कोई एक नाम हो तो याद भी करूं, बहुत से चेहरे तो वक्त ने धुंधला भी दिए हैं.

सिर्फ एक चेहरा ऐसा है जिसे मैं कोशिश के बावजूद अपनी नजरों से जुदा नहीं कर सका हूं. और वो है शाहीना का चेहरा. उस का बाप एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था. उन दिनों मैं ने इंटर का इम्तिहान दिया था. वक्त ही वक्त था.

मेरे एक दोस्त ने मशविरा दिया कि जब तक रिजल्ट न आ जाए हम कहीं नौकरी कर लेते हैं. अगर कामयाब हो गए तो पढ़ाई जारी रखेंगे. कभी नौकरी पढ़ाई में रुकावट बनी तो उसे छोड़ देंगे. वह गुजराती लड़का था. हमेशा फायदे की बात सोचा करता था.

हम दोनों की गाढ़ी छनती थी. हम दोनों ने नौकरी की तलाश बड़ी लगन से शुरू कर दी. दोनों एक साथ कई औफिसों की धूल छानते फिरा करते थे. इस फाकामस्ती (दरिद्रता) की हालत में भी मोहब्बत का कारोबार जारी रहता था.

यहांवहां घूमतेभटकते शाहीना के अब्बा से मुलाकात हो गई. वो अकाउंटेंट थे. उन्होंने हमारी दरखास्तें बड़े गौर से पढ़ीं और दोनों को बुलवा लिया. कहने लगे हमारे यहां एक जगह खाली है. और वो भी टैंपरेरी है. संभव है कुछ महीनों बाद हम वो पद खत्म कर दें या स्थाई कर दें. यह बात अगले 3 महीने बाद मीटिंग में ही तय होगी, तुम में से एक को यह नौकरी दी जा सकती है. आपस में फैसला कर लो कि तुम दोनों में से ज्यादा जरूरत किस को है?

मेरा गुजराती दोस्त फौरन पीछे हट गया. कहने लगा, ‘जनाब मेरे इस दोस्त को रख लीजिए. मेरे अब्बा की दुकान है, मैं तो वैसे भी व्यस्त रहता हूं. यह बिलकुल बेकार फिरता रहता है. इसे बैठने का ठिकाना मिल जाएगा.’

इस तरह मुझे नौकरी मिल गई. इस पद के रहने न रहने का अधिकार वहीद साहब के हाथ में था. इसलिए मैं ज्यादातर उन्हीं के आसपास मंडराता रहता था. उन्होंने मुझे अपने निजी कामों के लिए घर भेजना शुरू कर दिया. घर में शाहीना से मुलाकात हो गई. गोरी रंगत वाली यह लड़की मेरी नजरों में आ गई.

उन दिनों मेरा चक्कर जैनब से चल रहा था, जो मेरे लगातार झूठ बोलने से तंग आ गई थी. वह चुपकेचुपके अपने रिश्ते के भाई को शीशे में उतार कर शादी की तैयारियां कर रही थी. मुझे उस की बहन ने सब कुछ बता दिया था.

इस से पहले कि वो मुझे दुत्कारती मैं खुद उसे छोड़ना चाहता था. मगर जब तक इस ध्ांधे के लिए कोई दूसरी लड़की नहीं मिलती, यह जरा मुश्किल काम लगता था. शाहीना पर नजर पड़ी तो दिल ने चुटकी ली कि लो मियां तुम्हारा बंदोबस्त हो गया. लड़की कम बोलती है, सूरतशक्ल अच्छी है. थोड़ी सी मेहनत करनी पड़ेगी. यह कौन सा मुश्किल है, ज्यादा से ज्यादा एकदो हफ्ते लगातार अदाकारी करनी पड़ेगी.

सब से पहले मैं ने उस का बैकग्राउंड मालूम किया. पता चला कि शाहीना वहीद साहब की सगी औलाद नहीं है. वह उस की मां के पहले शौहर से है. मां का तलाक हो गया था. बच्ची उसी के पास रही. उस ने वहीद साहिब से शादी कर ली. उन की बीवी एक बच्चे को जन्म दे कर मर चुकी थी. बच्चा जिंदा था.

उस की परवरिश के लिए वह दूसरी शादी के इच्छुक थे. शाहीना की उम्र उस समय ढाई साल थी. किसी दोस्त के जरिए से यह रिश्ता तय हो गया था. शादी के बाद दोनों मियांबीवी ने अपने बच्चों की हिफाजत के लिए एक फैसला किया.

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बीवी अपने फैसले पर कायम रही, उस ने वहीद साहब के बेटे को अपनी औलाद से बढ़ कर प्यार दिया. मगर वहीद साहब अपनी सौतेली बच्ची से दिमागी तौर पर समझौता न कर सके. उन्होंने कभी उसे गोद तक में नहीं लिया. उस की जरूरतों का खयाल न रखा. ऊपर से 4 बच्चे और आ गए शाहीना बिलकुल बैकग्राउंड (नेपथ्य) में चली गई.

जैसेजैसे वह बड़ी होती गई उस पर जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ता गया. मां को इतना समय नहीं मिलता था कि उस की परेशानियों को समझ सकती. वो अंदर ही अंदर अपने सारे बहनभाइयों से जलती थी, जिन्होंने मिल कर उस की मां को उस से छीन लिया था.

पढ़ाई में कमजोर थी या शायद उस ने अपना सारा दिमाग बहनभाइयों को जलाते रहने की तरकीबों पर लगा दिया था. बाप उस से नफरत करता था. हर गलती उसी के सिर पर थोप कर उस से पूछताछ करता था.

देखने में तो कम बोलने वाली और दूसरों की खिदमत करते रहने वाली लड़की नजर आती थी, मगर जैसेजैसे उस के भेद खुलते गए मुझे अंदाजा हो गया कि वह बहनभाइयों को आपस में लड़वा कर बड़ी खुश होती है.

19-20 बरस की लड़की, नन्ही बच्ची की तरह भागतीदौड़ती फिरा करती थी. कभी आंगन वाले पेड़ पर चढ़ जाती तो कभी दीवार पर जा बैठती. जुबान नहीं खोलती थी. मैं ने कुछ दिन उस की मनोस्थिति समझने में लगाए फिर बिल्ली की तरह पुचकार कर उसे अपने करीब कर लिया.

उस की गुर्राहटें आहिस्ताआहिस्ता कम होने लगीं. लहजे में नरमी आ गई. जज्बात की हल्की सी तपिश से उस के दिल की सख्त चट्टान मोम में बदल गई और इस से पहले कि जैनब मुझे अपनी शादी का कार्ड थमाती, मैं ने शाहीना से मोहब्बत का इकरार करवा लिया.

जैनब की छुट्टी कर के मैं जोरशोर से शाहीना पर मरने लगा. मुझे उस जमाने में हर लड़की फ्लर्ट लगती थी. शायद इसलिए कि मेरी पहले की सारी महबूबाओं में एक भी वफा वाली नहीं थी. वहीद साहब के हुक्म पर जब भी मैं उन के घर जाता था, मोहल्ले के किसी बच्चे के हाथ पहले ही शाहीना को इत्तला भिजवा दिया करता था.

वह किसी न किसी बहाने बैठक (उस जमाने में ड्राइंगरूम को बैठक कहते थे) में आ जाती. मुझ से मिलने के बाद उस के चेहरे पर काफी सुकून छा जाता. अकसर कहती थी मंसूर आप ने हमारे दिल में जीने की उमंग पैदा कर दी है. वरना हम सोचा करते थे किसी रोज अफीम खाकर मर जाएं. हम से यहां कोई प्यार नहीं करता. अब्बू कहते हैं कि हमारी रगों में उन का खून नहीं है, इसलिए हम बदतमीज हैं, चालाक हैं, बेहूदा हैं.

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उन्हें हमारे अंदर दुनिया भर की कमियां नजर आती हैं. अम्मी उन्हें और उन की औलाद को खुश करने के लिए हमें उन सब के सामने जलील करती रहती हैं. वो हम से इतना काम लेती हैं कि अगर हम कहीं नौकरी कर लें तो इस जगह से कहीं ज्यादा बेहतर तरीके से जिंदगी गुजार सकते हैं.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

धर्म की दोधारी तलवार : भाग 3

शाहनवाज का पिता रशीद अहमद शौकत अली पार्क कर्नलगंज बजरिया में रहता था. शाहनवाज उस का सब से छोटा बेटा था. बड़ी बेटी फरजाना जाजमऊ सरैया बाजार निवासी आमिर खान को ब्याही थी. बड़ा बेटा रशीद अहमद चमड़े का व्यवसाय करता था. शाहनवाज उन के व्यवसाय में मदद करता था. शाहनवाज शादीशुदा था.

शाजिया उस की पत्नी थी, लेकिन वह फरेब कर सीता से शादी करना चाहता था. उस ने मन बना लिया था कि वह सीता उर्फ नेहा से शादी रचा कर उसे परिवार से अलग कमरा ले कर रहेगा.

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शाहनवाज निश्चित दिन तारीख व समय पर आजमगढ़ पहुंच गया और होटल गगन में ठहर गया. उस के लिए होटल का कमरा सीता ने बुक कराया था. शाहनवाज ने होटल रूम में ठहरने की जानकारी सीता को दी. कुछ देर बाद वह भी होटल रूम में पहुंच गई. रूम में दोनों का आमनासामना हुआ तो दोनों ही एकदूसरे से प्रभावित हुए. शाहनवाज जहां शरीर से हृष्टपुष्ट सजीला आकर्षक युवक था, तो सीता भी खूबसूरत व जवानी से भरपूर थी.

शाहनवाज से शादी पर अड़ी सीता

शाहनवाज से बातें करतेकरते सीता सोचने लगी कि उस ने भावी पति के रूप में जैसे सुंदर व सजीले युवक के सपने संजोए थे, शाहनवाज वैसा ही निकला. अगर शाहनवाज से उस की शादी हो जाए तो उस के जीवन में बहार आ जाएगी.

सीता अभी इसी सोच में डूबी थी कि शाहनवाज बोला, ‘‘मैं ने जितना सोचा था, तुम उस से कहीं ज्यादा हसीन हो. वैसे बुरा न मानो तो एक बात बोलूं?’’

‘‘बोलो, जो कहना चाहते हो बेहिचक कहो.’’ सीता की धड़कनें तेज हो गईं.

‘‘तुम्हें देखते ही दिल में प्यार का अहसास जाग उठा है.’’ कहते हुए शाहनवाज उस के हाथ पर हाथ रख कर बोला, ‘‘आई लव यू सीता.’’

प्रेम निवेदन सुन कर सीता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उस ने अपना दूसरा हाथ उठा कर शाहनवाज के हाथ पर रख कर कह दिया, ‘‘आई लव यू टू.’’

दोनों तरफ से प्यार का इजहार हुआ तो चंद मिनटों में दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई. कुछ देर बातचीत करने के बाद शाहनवाज वहां से चला गया. इस के बाद दोनों का प्यार दिन दूना रात चौगुना बढ़ने लगा. उन के बीच की दूरियां कम होती गईं. फिर शारीरिक संबंध भी बन गए.

शाहनवाज महीने में एकदो बार आजमगढ़ आता, होटल या लौज में ठहरता. सीता घर वालों को बिना कुछ बताए वहां आ जाती. दोनों में प्यारमोहब्बत की बातें होतीं. दोनों एकदूसरे के होने की कसमें खाते. उन के बीच शारीरिक मिलन होता फिर दोनों अपनेअपने घर लौट जाते.

शाहनवाज और सीता एकदूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करने लगे थे. दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन शादी कर पाते उस के पहले ही उन के प्यार का भांडा फूट गया. हुआ यह कि एक रात सीता शाहनवाज से बातें कर रही थी, तभी उस की मां सरोज की आंखें खुल गईं. उस ने दोनों के बीच होने वाली प्यारमोहब्बत की बातें सुन लीं.

सरोज को समझते देर न लगी कि उस की बेटी के कदम बहक गए हैं. वह रात में तो कुछ नहीं बोली लेकिन सवेरा होते ही उस ने पूछा, ‘‘सीता, तू रात में किस से बहकीबहकी बातें कर रही थी? यह शाहनवाज कौन है?’’

शाहनवाज का नाम सुन कर सीता चौंकी. उसे समझते देर नहीं लगी कि उस के प्यार का भांडा फूट चुका है. अब सच्चाई बताने में ही भलाई है. वह बोली, ‘‘मां, मैं शाहनवाज से बात कर रही थी. शाहनवाज कानपुर में रहता है और हमारी दोस्ती फेसबुक पर हुई थी. हम दोनों एकदूसरे को बेहद प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं.’’

सीता की बात सुन कर सरोज सन्न रह गई. वह उसे समझाते हुए बोली, ‘‘बेटी, हम हिंदू और वह मुसलमान. हम गैरधर्म के लड़के से तेरी शादी नहीं कर सकते, इसलिए अपने कदम वापस खींच ले, हम जल्द ही तेरा विवाह किसी हिंदू लड़के से कर देंगे.’’

‘‘मां, अब जमाना बदल गया है. अब हिंदूमुसलमान के बीच कोई मतभेद नहीं रहा है. शाहनवाज पढ़ालिखा कमाऊ लड़का है, इसलिए हम शादी उसी से करेंगे. आप लोग राजी न हुए तो मैं भाग कर शाहनवाज से शादी कर लूंगी.’’ उस ने समझाया.

सरोज ने बेटी की हरकतों की जानकारी पति को दी तो जवाहर को बहुत दुख हुआ. उस ने भी सीता को बहुत समझाया कि वह मुसलिम समाज के युवक से शादी न करे. लेकिन सीता ने मांबाप की बात नहीं मानी और अपनी जिद पर अड़ी रही. तब जवाहर ने  बड़ी बेटी सुशीला को घर बुलाया और सीता को समझाने को कहा.

लेकिन सीता ने तकवितर्क से बड़ी बहन को शादी के लिए राजी कर लिया. उस के बाद सुशीला ने अपने मांबाप को भी मना लिया. जवाहर और उस की पत्नी सरोज सीता की शादी शाहनवाज से करने को राजी तो हो गए. लेकिन इज्जत के कारण अपने घर से बेटी को विदा करने को राजी नहीं हुए. तब सुशीला ने अपनी ससुराल मसखारी से दोनों का विवाह कराने का निश्चय किया.

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बढ़ने लगी विषबेल

21 अगस्त, 2019 को सुशीला ने अपनी ससुराल मसखारी अंबेडकर नगर में मौलवी को बुला कर सीता का निकाह शाहनवाज से करा दिया. इस के बाद सीता शाहनवाज की बीवी बन कर कानपुर आ गई. शाहनवाज ने निकाह से पहले ही जाजमऊ में किराए पर कमरा ले लिया था.

इसी कमरे में वह सीता उर्फ नेहा के साथ पतिपत्नी की तरह रहने लगा. शाहनवाज की बीवी को पता ही नहीं चला कि उस के शौहर ने दूसरा निकाह कर लिया.

सीता 3 माह तक शाहनवाज के साथ खुश रही. उस के बाद दोनों में तकरार होने लगी. तकरार का पहला कारण था ससुराल वालों से मिलवाने तथा ससुराल में रहने की जिद. दरअसल, सीता चाहती थी कि वह पति के घर वालों के साथ रहे लेकिन शाहनवाज पहली पत्नी का भेद खुलने के भय से उसे घर ले जाने को मना कर देता था.

दूसरा कारण यह था कि शाहनवाज कभी दिन में तो कभी रात को और कभीकभी 2 दिन तक घर से गायब हो जाता था. सीता पूछती तो लड़ने लगता था. इस से सीता को शक होने लगा था कि वह कोई राज छिपा रहा है. राज छिपाने की जानकारी उस ने अपनी बहन सुशीला तथा मां सरोज को भी फोन के माध्यम से दे दी थी.

सीता जब ससुराल जाने की ज्यादा जिद करने लगी तो शाहनवाज को भेद खुलने का डर सताने लगा, अत: इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए शाहनवाज जाजमऊ सरैया कानपुर निवासी अपने बहनोई आमिर खान के घर गया और उस से विचारविमर्श किया.

विचारविमर्श के बाद तय हुआ कि सीता को ठिकाने लगा दिया जाए. इस के बाद सीता को ठिकाने लगाने की योजना बनी. इस योजना में शाहनवाज ने अपने बहनोई आमिर खान के अलावा दोस्त शरीफ उर्फ सोनू तथा हसीब को भी शामिल कर लिया.

27 दिसंबर, 2019 को शाहनवाज ने सीता को बताया कि आज शाम वह उसे घुमाने ले जाएगा. इस के बाद वह उसे अपने घर ले जाएगा. यह सुन कर सीता खुशी से झूम उठी. उस ने साजशृंगार किया. आभूषण पहने फिर पति के साथ जाने का इंतजार करने लगी.

शाम 5 बजे शाहनवाज कार ले कर आया. कार में उस के साथ उस का बहनोई आमिर खान भी था. शाहनवाज कार अपने दोस्त जीशान से यह कह कर लाया था कि वह 2 रोज के लिए बाहर घूमने जा रहा है. किराए के तौर पर उस ने जीशान को 10 हजार रुपए दिए थे.

जहर भरी जिंदगी का अंत

जाजमऊ के किराए वाले घर से शाहनवाज सीता उर्फ नेहा को कार में बिठा कर निकला. रामादेवी चौराहे पर उस ने दोस्त शरीफ व हसीब को भी कार में बिठा लिया. फिर सभी कंपनी बाग चौराहा पहुंचे. वहां की शराब की एक दुकान से इन लोगों ने शराब खरीदी. इस के बाद वे गंगा बैराज पहुंचे.

सभी ने चलती गाड़ी में शराब पी और सीता उर्फ नेहा को भी शराब जबरदस्ती पिलाई. कुछ देर बाद सीता जब नशे में अर्धमूर्छित हो गई, तब शाहनवाज ने कार सिंहपुर बिठूर की ओर मुड़वा दी.

इस के बाद चलती कार में ही शाहनवाज ने अपने बहनोई आमिर खान तथा दोस्त शरीफ की मदद से सीता की गला घोंट कर हत्या कर दी.

हत्या करने के बाद उन लोगों ने सीता के शरीर से गहने उतारे, उस का मोबाइल कब्जे में किया फिर कार सुनसान स्थान पर रोक कर सीता के शव को सड़क किनारे झाडि़यों में फेंक दिया.

सीता के शरीर से उतारे गए गहने तथा मोबाइल फोन को भी वहीं झाड़ी में छिपा दिया. शाहनवाज ने अपना तमंचा भी झाड़ी में छिपा दिया था. इस के बाद वे कार से अपनेअपने घर चले गए.

दूसरे दिन 12 बजे के बाद थाना नवाबगंज पुलिस को महिला का शव पड़े होने की सूचना मिली. थानाप्रभारी दिलीप कुमार बिंद घटनास्थल पहुंचे और शव कब्जे में ले कर जांच शुरू की. जांच में हत्या का परदाफाश हुआ और कातिल पकड़े गए.

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5 जनवरी, 2020 को थाना नवाबगंज पुलिस ने अभियुक्त शाहनवाज तथा आमिर खान को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट डी.के. राय की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. अन्य 2 अभियुक्त शरीफ व हसीब फरार थे. पुलिस उन्हें पकड़ने को प्रयासरत थी.

धर्म की दोधारी तलवार : भाग 2

शाहनवाज के बयान के आधार पर अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए थानाप्रभारी दिलीप कुमार बिंद ने पुलिस टीम के साथ शाहनवाज के बहनोई आमिर खान के घर में छापा मारा. पुलिस के साथ शाहनवाज को देख कर आमिर खान ने भागने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उसे दबोच लिया.

इस के बाद पुलिस ने शरीफ सोनू तथा हसीब के घर छापा मारा किंतु वे दोनों फरार हो चुके थे. आमिर खान को पुलिस थाना नवाबगंज ले आई. थाने पर जब उस से सीता की हत्या के संबंध में पूछताछ की गई तो उस ने सहज ही हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

थाना नवाबगंज पुलिस ने अब तक सीता उर्फ नेहा के मुख्य हत्यारोपियों को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन अभी तक सीता का मोबाइल फोन तथा उस के आभूषण पुलिस बरामद नहीं कर पाई थी. बिंद ने मोबाइल फोन और जेवरात के बाबत पूछताछ की तो शाहनवाज और आमिर खान ने बताया कि मोबाइल फोन तथा जेवरात उन दोनों ने घटनास्थल के पास झाडि़यों में छिपा दिए थे.

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3 जनवरी, 2020 की सुबह थानाप्रभारी दोनों आरोपियों को साथ ले कर मोबाइल फोन व जेवरात बरामद करने के लिए घटनास्थल पहुंचे. आमिर खान और शाहनवाज ने सड़क किनारे की झाडि़यों में मोबाइल फोन व जेवरात खोजने लगे. जेवरात खोजते अभी 10 मिनट ही बीते थे कि शाहनवाज ने झाड़ी में पहले से छिपा कर रखा गया तमंचा निकाला और पुलिस पर फायर झोंक दिया. साथ ही भागने का प्रयास किया.

तभी थानाप्रभारी ने शाहनवाज पर गोली चला दी, जो उस के दाएं पैर में लगी वह लड़खड़ा कर गिर गया. पुलिस ने उसे दबोच लिया. इस के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए आमिर और शाहनवाज की निशानदेही पर झाड़ी में छिपा कर रखा गया सीता का मोबाइल फोन, अंगूठी, मंगलसूत्र, नोज पिन, कानों के बाले व पायल बरामद कर लीं.

पुलिस ने वह तमंचा भी बरामद कर लिया जिस से शाहनवाज ने पुलिस पर फायर किया था. बरामद सामान के साथ पुलिस दोनों को थाने ले आई.

कुछ ही देर में एसएसपी अनंतदेव तिवारी, एसपी (पश्चिम) डा. अनिल कुमार तथा सीओ अजीत सिंह चौहान थाना नवाबगंज आ गए. पुलिस अधिकारियों ने हत्यारोपी शाहनवाज और आमिर खान से एक घंटे तक पूछताछ की, उस के बाद एसएसपी अनंतदेव तिवारी ने प्रैसवार्ता की और ब्लाइंड मर्डर का खुलासा किया.

जीजा-साले की जुगलबंदी का नतीजा

शाहनवाज और आमिर ने सीता उर्फ नेहा की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, साथ ही हत्या में प्रयुक्त कार तथा मृतका का मोबाइल फोन और जेवरात भी बरामद करा दिए थे. अत: थानाप्रभारी ने शाहनवाज, आमिर खान, शरीफ उर्फ सोनू तथा हसीब के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 120बी और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. पुलिस जांच में फरेबी पति की सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई—

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ शहर के कोतवाली थानांतर्गत एक मोहल्ला है गडया. इसी मोहल्ले के पुराना मध्य पुल के पास जवाहर अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी सरोज के अलावा 2 बेटियां सुशीला तथा सीता उर्फ नेहा थीं. जवाहर बुनाई कारखाने में काम करता था. कारखाने से उसे जो वेतन मिलता था, उसी से परिवार का भरणपोषण होता था. जवाहर बड़ी बेटी सुशीला का विवाह हो चुका था. सुशीला ससुराल में सुखमय जीवन व्यतीत कर रही थी.

सुशीला से छोटी सीता उर्फ नेहा थी. वह पढ़लिख कर अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती थी. वह इंटरमीडिएट के बाद आगे भी पढ़ना चाहती थी, लेकिन उस के मातापिता की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, जिस से वह उस के आगे की पढ़ाई को मना कर रहे थे.

इस समस्या के निदान के लिए सीता ने प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका की नौकरी कर ली. स्कूल के माध्यम से उसे कुछ बच्चों के ट्यूशन भी मिल गए. इस तरह वह अपना तथा अपनी पढ़ाई का खर्चा स्वयं निकालने लगी.

एक दिन सीता उर्फ नेहा स्कूल से पढ़ा कर घर लौट रही थी, तभी एकाएक पीछे से किसी ने उस के कंधे पर हाथ रख दिया. सीता चौंक कर पलटी तो उस के मुंह से हर्षमिश्रित चीख निकल गई, ‘अरे मनीषा, तू…’

मनीषा शर्मा सीता की बचपन की सहेली थी. पहली से ले कर 8वीं कक्षा तक दोनों साथ पढ़ी थीं. उस के बाद मनीषा दूसरे मोहल्ले में जा कर रहने लगी थी. 5 साल बाद दोनों की अब मुलाकात हुई थी. बरसों बाद बिछुड़ी हुई सहेलियां मिलीं तो दोनों बातचीत के साथ पुरानी यादें ताजा करने नजदीक के रेस्तरां जा पहुंचीं.

रेस्तरां में चाय की चुस्कियों के बीच दोनों सहेलियां बचपन से ले कर स्कूल तक की अपनी पुरानी यादें ताजा करने लगीं. बातोंबातों में मनीषा ने पूछा, ‘‘अच्छा ये बता जिंदगी कैसे कट रही है. कोई दोस्त है या नहीं? शादी का इरादा है या कोई हमसफर मिल गया है?’’

सीता के चेहरे पर दर्द की परछाइयां तैरने लगीं. वह ठंडी सांस ले कर बोली, ‘‘मनीषा, तू मेरी सब से प्यारी और भरोसेमंद सहेली है, इसलिए तुझ से क्या छिपाऊं. घर की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं है. दहेज के डर से मातापिता परेशान हैं, इसलिए अभी तक मेरे लिए लड़का भी देखना शुरू नहीं किया है. रही बात दोस्त बनाने की, वह मैं ने किसी को बनाया नहीं है.’’

फेसबुक ने बनाई जोड़ी

मनीषा खिलखिला कर हंसी और फिर उस के गाल पर चुटकी काटते हुए बोली, ‘‘मातापिता के सहारे रहेगी तो तेरी शादी कभी नहीं होगी. तुझे खुद ही पहल कर दोस्त बनाना होगा और शादी की पहल करनी होगी.’’

‘‘वह कैसे?’’ सीता ने पूछा.

‘‘इंटरनेट की एक साइट है फेसबुक. उस के बारे में तू जानती है?’’

‘‘हां, जानती हूं. मैं जब 10वीं में पढ़ रही थी तब कंप्यूटर क्लास भी जौइन कर रखी थी. उसी दौरान फेसबुक, गूगल, याहू वगैरह के बारे में जाना था.’’

‘‘अच्छी बात है कि तुम फेसबुक के बारे में जानती हो वरना मुझे समझाने में दिक्कत हो जाती.’’ फिर मनीषा ने अपने पत्ते खोले, ‘‘फेसबुक पर मैं नएनए दोस्त बनाती हूं. इन से रसीली और चटपटी बातें करती हूं, जिस से मुझे पूरी संतुष्टि मिलती है. तुम्हें यह जान कर ताज्जुब होगा कि मैं उन अनजान दोस्तों से ऐसीऐसी बातें भी खुल कर कर लेती हूं, जो किसी से रूबरू करते भी शरम आए. मेरी तरह तू भी फेसबुक की मुरीद हो जा, फिर देखना तेरी हर मुराद पूरी होगी.’’

सीता मुसकराने लगी, ‘‘आइडिया तो बेहतरीन है, मैं तेरे सुझाव पर गौर करूंगी.’’

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फिर दोनों रेस्तरां से बाहर निकलीं और अपनेअपने घर चली गईं. उस रात सीता को नींद नहीं आई. वह रात भर सहेली के सुझाव पर मंथन करती रही. आखिर उसे यह सुझाव सही लगा. उस ने भी फेसबुक पर नए दोस्त बनाने का निश्चय कर लिया.

सीता को मोबाइल पर इंटरनेट चलाने का शौक था. अब वह सोशल साइट फेसबुक पर नएनए दोस्त बनाने लगी और उन से चैटिंग करने लगी. जो युवक मन को पसंद आ जाता था, उस का मोबाइल नंबर ले कर वह उसे अपना नंबर दे देती. वह मनपसंद युवक से ही बात करती थी, अन्य के फोन रिसीव नहीं करती थी.

फेसबुक पर ही सीता का परिचय शाहनवाज से हुआ. सीता ने उस की प्रोफाइल देखी तो पता चला उस की उम्र 30 वर्ष है और वह कानपुर शहर के बजरिया का रहने वाला है. शाहनवाज पढ़ालिखा था और व्यवसाय करता था. शाहनवाज हालांकि दूसरे धर्म का था, फिर भी सीता का झुकाव उस की ओर हो गया. दोनों ने अपने मोबाइल नंबर एकदूसरे को दे दिए, जिस से दोनों की अकसर देर रात तक बातें होने लगीं.

हालांकि सीता का दिल शाहनवाज को स्वीकार कर चुका था. लेकिन उसे इस बात की चिंता थी कि कहीं शाहनवाज शादीशुदा तो नहीं. इस चिंता से मुक्ति पाने के लिए एक दिन सीता ने बातोंबातों में पूछ लिया, ‘‘शाहनवाज, तुम शादीशुदा हो या कुंवारे? सचसच बताना, झूठ का सहारा मत लेना. क्योंकि झूठ से मुझे सख्त नफरत है.’’

‘‘झूठ बोलना मेरे स्वभाव में नहीं है, इसलिए सच यह है कि मैं कुंवारा भी हूं और शादीशुदा भी.’’ उस ने बताया.

‘‘क्या मतलब?’’ सीता चौंकी.

‘‘मतलब यह कि मेरी शादी हुई थी, लेकिन चंद दिनों बाद ही बीवी से मेरा तलाक हो गया था. अब उस से मेरा कोई संबंध नहीं है. इस तरह मैं अब कुंवारा ही हूं.’’

सीता मन ही मन खुश हुई और बोली, ‘‘शाहनवाज, मुझे जान कर खुशी हुई कि तुम ने सब सच बताया. अब मेरी चिंता दूर हो गई.’’

धीरेधीरे दोनों की दोस्ती गहरा गई. शाहनवाज को लगने लगा कि सीता उस की जिंदगी में बहार बन कर आएगी. वहीं सीता को भी आभास होने लगा था कि शाहनवाज ही उस के सपनों का राजकुमार है, इसलिए उस का मन उस से रूबरू होने को मचलने लगा.

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एक दिन सीता ने बातोंबातों में शाहनवाज को अपने शहर आजमगढ़ आने को कह दिया. दिन, तारीख, समय और होटल का नाम भी उसी दिन निश्चित हो गया. शाहनवाज तो यह चाहता ही था, सो उस ने सीता के आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार कर लिया. इस के बाद वह आजमगढ़ जाने तथा महबूबा से रूबरू होने की तैयारी में जुट गया.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

धर्म की दोधारी तलवार : भाग 1

उस दिन दिसंबर महीने की 28 तारीख थी. कड़ाके की ठंड थी. घना कोहरा भी छाया था. ठंड की वजह से लोग घरों में दुबके थे. मंद गति से बह रही बर्फीली पछुआ हवाएं ठंड का कुछ ज्यादा ही अहसास करा रही थीं. दोपहर बाद जब कोहरा छंटा और सूरज ने हलकी रोशनी बिखेरी तभी कुछ लोगों ने गंगा बैराज से सिंहपुर बिठूर जाने वाली रोड के किनारे झाडि़यों में एक जवान महिला का शव पड़ा देखा.

जैसेजैसे लोगों को यह जानकारी मिली, लोग वहां जुटने लगे. कुछ ही देर बाद वहां भीड़ बढ़ गई. इसी बीच किसी ने महिला का शव पड़ा होने की सूचना थाना नवाबगंज को दे दी.

सूचना प्राप्त होते ही नवाबगंज थानाप्रभारी दिलीप कुमार बिंद पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पहुंच गए. उन्होंने अज्ञात महिला का शव मिलने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी, फिर निरीक्षण में जुट गए. मृतका का रंग गोरा, शरीर स्वस्थ तथा उम्र 28 साल के आसपास थी. वह गुलाबी रंग का सलवारकुरता पहने थी. उस के हाथों पर मेहंदी रची थी और वह पैरों में बिछिया पहने थी. उस की गरदन, पीठ और सीने पर खरोंच व रगड़ के निशान थे. उस के मुंह से शराब की दुर्गंध भी आ रही थी.

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देखने से ऐसा लग रहा था जैसे मृत्यु से पहले महिला ने शराब पी थी या फिर उसे जबरन पिलाई गई थी. उस के बाद उस की हत्या कर शव सड़क किनारे झाडि़यों में फेंक दिया गया होगा. महिला के शरीर पर कोई आभूषण नहीं था, लेकिन ऐसा लग रहा था कि उस की नाक, कान, गले से आभूषण खींचे गए थे. क्योंकि नाक, कान से खून रिस रहा था. महिला की हत्या कहीं अन्यत्र की गई थी.

थानाप्रभारी दिलीप कुमार बिंद अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसएसपी अनंत देव तिवारी, एसपी (पश्चिम) डा. अनिल कुमार तथा सीओ अजीत सिंह चौहान भी वहां आ गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को भी बुलवा लिया.

पुलिस अधिकारियों ने महिला के शव का बारीकी से निरीक्षण किया. साथ ही कुछ आवश्यक दिशानिर्देश थानाप्रभारी दिलीप कुमार को दिए. उस के बाद फोरैंसिक टीम ने भी निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए.

खोजी कुत्ता महिला के शव को सूंघ कर सड़क पर गया और गंगा बैराज की ओर भौंकते हुए भागा. कुछ दूर जा कर वह रुका और चक्कर काटने लगा. टीम ने वहां निरीक्षण किया तो कार के पहियों के निशान दिखे. टीम ने अनुमान लगाया कि महिला की हत्या कार में की गई होगी और बाद में शव को झाडि़यों में फेंक दिया गया होगा. शव फेंकने के बाद कार को वहीं से बैक किया गया था.

घटनास्थल पर भीड़ जुटी थी, पर कोई भी शव को नहीं पहचान पाया. अत: पुलिस अधिकारियों ने सहज ही अनुमान लगा लिया कि महिला पासपड़ोस के गांव या नवाबगंज की रहने वाली नहीं है. घटनास्थल की काररवाई पूरी करने के बाद थानाप्रभारी ने शव पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय चिकित्सालय कानपुर भिजवा दिया.

थानाप्रभारी दिलीप कुमार बिंद महिला के शव की शिनाख्त के बाद ही पोस्टमार्टम कराना चाहते थे, इसलिए उन्होंने 3 दिन तक पोस्टमार्टम नहीं कराया. इस बीच उन्होंने कानपुर शहर समेत आसपास के जिलों के थानों में महिला की फोटो तसदीक के लिए भेजी. साथ ही कानपुर शहर से प्रकाशित होने वाले दैनिक अखबारों में भी महिला के हुलिया सहित फोटो छपवाई.

पिता को पता चला अखबार की खबर से

अखबारों में छपी फोटो तथा महिला का हुलिया पढ़ कर जाजमऊ (कानपुर) निवासी वी.के. सिंह का माथा ठनका. क्योंकि जिस महिला की फोटो अखबार में छपी थी, वह उन की किराएदार सीता उर्फ नेहा की थी. वह पिछले 3 महीने से अपने पति शाहनवाज के साथ उन के मकान में किराए पर रह रही थी. नेहा और शाहनवाज पिछले 3 दिन से वापस नहीं लौटे थे.

चूंकि मामला हत्या का था, अत: वी.के. सिंह तुरंत थाना नवाबगंज पहुंचे और थानाप्रभारी दिलीप कुमार बिंद को यह जानकारी दी. इस के बाद बिंद वी.के. सिंह को अस्पताल ले गए और उन्हें महिला का शव दिखाया. वी.के. सिंह ने शव देखते ही पहचान लिया. उन्होंने बताया कि यह शव सीता उर्फ नेहा का ही है. शव की शिनाख्त हो जाने के बाद बिंद ने नेहा के शव का पोस्टमार्टम करा दिया.

पुलिस को यह तो पता चल गया था कि मृतका शाहनवाज की पत्नी थी लेकिन वह कहां की रहने वाली थी, उस की हत्या उस के पति शाहनवाज ने की थी या फिर हत्या किसी से कराई गई थी. शाहनवाज कहां का रहने वाला है, ये सब बातें पुलिस को पता लगानी थी.

थानाप्रभारी दिलीप कुमार बिंद ने जांच आगे बढ़ाने के लिए सर्विलांस टीम का सहयोग लिया. सर्विलांस टीम ने घटनास्थल के पास वाले मोबाइल टावर का डाटा डंप कराया तो 2 ऐसे नंबर मिले, जो घटना वाली रात (27 दिसंबर, 2019) को देर रात कुछ देर तक साथ रहे थे.

बिंद ने इन संदिग्ध नंबरों के पते निकलवाए तो एक नंबर सीता के नाम का था, जिस का पता आजमगढ़ कोतवाली के गडया मोहल्ला पुराना मध्य पुल दर्ज था. जबकि दूसरा फोन नंबर शाहनवाज का था, जिस का पता शौकत अली पार्क, थाना बजरिया, कानपुर दर्ज था.

पुलिस की एक टीम सीता के संबंध में जानकारी जुटाने आजमगढ़ पहुंची और कोतवाली पुलिस के सहयोग से उस के घर गडया मोहल्ला मध्य पुल पहुंच गई. घर पर नेहा के पिता जवाहर मौजूद थे. उन से पता चला कि नेहा का ही दूसरा नाम सीता था. पुलिस ने उन्हें मृतका की फोटो दिखाई तो वह फफक पडे़, ‘‘साहब, यह फोटो मेरी बेटी सीता की है. 3 महीने पहले उस ने कानपुर के शाहनवाज से शादी की थी. हम ने उसे मना किया था कि दूसरे धर्म के लड़के से शादी मत करो लेकिन वह नहीं मानी.’’

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मां सरोज को बेटी नेहा की हत्या की जानकारी हुई तो वह दहाड़ें मार कर रोने लगी. बड़ी बेटी सुशीला ने किसी तरह मां को संभाला. उस ने पुलिस को बताया कि नेहा से कभीकभार फोन पर बात होती थी.

उसे शिकायत थी कि शाहनवाज उसे ससुराल वालों से नहीं मिलवाता. ज्यादा जोर देने पर नाराज हो जाता है, प्रताडि़त भी करता है. साहब, हम लोगों ने उसे शादी के लिए बहुत मना किया था, लेकिन उस की जिद के आगे हमें झुकना पड़ा था. उस ने कहा कि नेहा की हत्या शाहनवाज ने ही की है. उसे सजा जरूर दिलवाना.

जवाहर की बेटी सुशीला कुछ दिन पहले ही मायके आई थी. उस ने पुलिस को बताया कि उस की ससुराल अंबेडकर नगर जिले के गांव मसखारी में है. उस ने ही 21 अगस्त को सीता की शादी शाहनवाज के साथ कराई थी. शादी के बाद वह खुश थी. क्रिसमस वाले दिन सीता का फोन आया था.

तब उस ने बताया था कि उस का पति कोई राज छिपा रहा है. फिर यह भी बताया कि 27 दिसंबर को वह उसे अपने घर वालों से मिलवाने ले जाएगा. सुशीला ने बताया कि पहले कई बार शाहनवाज से बात हुई पर कभी ऐसा नहीं लगा कि वह बहन की हत्या कर देगा.

मिल गया सुराग

मातापिता और बहन से जानकारी हासिल कर पुलिस टीम कानपुर लौट आई. टीम ने सीता उर्फ नेहा के संबंध में सारी जानकारी थानाप्रभारी दिलीप कुमार बिंद तथा पुलिस अधिकारियों को दे दी. अब तक की जांचपड़ताल से यह बात साफ हो चुकी थी कि सीता उर्फ नेहा की हत्या उस के शौहर शाहनवाज ने ही की थी. पर नईनवेली पत्नी की हत्या उस ने क्यों की, इस का राज उस की गिरफ्तारी के बाद ही खुल सकता था. अत: पुलिस ने शाहनवाज को गिरफ्तार करने के लिए जाल फैलाया.

2 जनवरी, 2020 की शाम पुलिस को सर्विलांस टीम की मदद से पता चला कि शाहनवाज कंपनी बाग चौराहे पर मौजूद है. यह पता चलते ही थानाप्रभारी पुलिस फोर्स के साथ कंपनी बाग चौराहा पहुंच गए.

पुलिस जीप रुकते ही एक युवक वहां से आर्यनगर चौराहे की ओर भागा. लेकिन पुलिस ने उसे दबोच लिया. पूछताछ में वह शाहनवाज ही था. उसे थाना नवाबगंज लाया गया.

शाहनवाज से जब उस की पत्नी सीता उर्फ नेहा की हत्या के संबंध में पूछा गया तो वह साफ मुकर गया. उस ने कहा कि वह स्वयं पत्नी की तलाश में भटक रहा है. शाहनवाज के इस सफेद झूठ पर थानाप्रभारी दिलीप कुमार बिंद को गुस्सा आ गया. उन्होंने शाहनवाज से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया. उस ने पत्नी की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. यही नहीं, उस ने हत्या में प्रयुक्त कार भी बरामद करा दी, जो उस के दोस्त जीशान की थी.

थानाप्रभारी दिलीप कुमार बिंद ने शाहनवाज से पत्नी की हत्या का कारण पूछा तो वह कुछ क्षण मौन रहा फिर बोला, ‘‘सर, सीता को मैं बहुत चाहता था. वह भी मुझ से बहुत प्यार करती थी लेकिन भेद खुल जाने के भय से मैं ने उसे मौत की नींद सुला दिया.’’

‘‘कौन सा भेद खुलने का डर था तुम्हें?’’ बिंद ने पूछा.

‘‘सर, शादीशुदा होने का. दरअसल, मैं ने सीता से झूठ बोल कर निकाह कर लिया था, जबकि मेरा पहले ही निकाह हो चुका था. मैं ने सीता से कहा था कि मेरा निकाह तो हुआ था लेकिन तलाक हो गया है. इसी झूठ को छिपाने के लिए मैं ने निकाह के बाद सीता को जाजमऊ स्थित किराए के मकान में रखा था. इधर कुछ दिनों से वह ससुराल वालों से मिलवाने और उन्हीं के साथ रहने की जिद करने लगी थी. अगर मैं उसे अपने घर ले जाता तो भेद खुल जाता, इसलिए मैं ने उसे मार डाला.’’ शाहनवाज ने बताया.

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‘‘हत्या की साजिश में और कौनकौन शामिल थे?’’ बिंद ने पूछा.

‘‘सर, हत्या में मेरा बहनोई आमिर खान, जो सरैया बाजार जाजमऊ में रहता है, दोस्त शरीफ उर्फ सोनू और हसीब शामिल थे. दोनों जाजमऊ में रहते हैं. हत्या में इस्तेमाल हुई कार जीशान की थी, जिसे मैं 10 हजार रुपए किराए पर लाया था.’’

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

धर्म की दोधारी तलवार

कुल्हाड़ी से वार पर वार : ऊंटनी का बच्चा हुआ हलाल

यह मामला बेहद अमानवीय और इनसानियत को शर्मसार करने वाला है. बेजुबान जानवर ऊंटनी के बच्चे की गलती सिर्फ इतनी थी कि उस ने खेत में जा कर फसल खराब कर दी थी. इतनी सी गलती के लिए 3 लोगों ने न सिर्फ उस पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार किया, बल्कि उस की आगे की टांगें भी काट दीं. इलाज के दौरान देर रात उस ऊंटनी के बच्चे की मौत हो गई.

बेजबान जानवरों को भले ही जबान न दी गई हो, पर वह समझता हर बात है. चाहे वह गायभैंस, भेड़बकरी हों या गधासांड या फिर हाथी, शेर, चीता, सांपबिच्छू वगैरह ही क्यों न हों. लेकिन इन पर अत्याचार के मामले देशभर में थमने का नाम ही नहीं ले रहे. चाहे केरल में गर्भवती हथिनी को विस्फोटक भरा अनानास खिलाने का मामला हो या राजस्थान के चूरू जिले की सरदारशहर तहसील के साजनसर गांव में ऊंटनी के बच्चे को कुल्हाड़ी से काटने का.

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18 जुलाई, 2020 को राजस्थान के चूरू जिले की सरदारशहर तहसील के साजनसर गांव में यह ताजा मामला देखने को मिला, जहां एक ऊंटनी के 4 साला बच्चे के साथ कुछ दबंग युवकों ने बर्बरता की. इतना ही नहीं, ऊंटनी के बच्चे पर आरोपियों ने ताबड़तोड़ कुल्हाडियों से वार किए. साथ ही, उस के आगे के पैरों को तोड़ कर अलग कर दिया.

दर्द से कलपते ऊंटनी के बच्चे को बचाने गए 2 लोगों को भी आरोपियों ने कुल्हाडी से काट देने की धमकी दी.

घायल ऊंटनी के बच्चे को गांव कल्याणपुरा बिदावतान की गौशाला में इलाज के लिए पहुंचाया गया, जहां देर रात दम तोड दिया.

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, मेहरासर चाचेरा गांव के ओमप्रकाश सिंह ने सरदारशहर थाने में इस मामले की शिकायत  दर्ज कराई. गांव के पन्नाराम, गोपीराम और लिछूराम के खिलाफ दी गई शिकायत में बताया कि ये ही 2 बाइक से उस का पीछा कर रहे थे.

प्रत्यक्षदर्शी ओमप्रकाश सिंह के मुताबिक, 18 जुलाई की सुबह 10 बजे वे गांव साजनसर की गोचर जमीन में अपने पशु चरा रहे थे. इस दौरान उन के साथ वहां नोपाराम जाट भी थे, तभी  एक ऊंटनी का बच्चा भागता हुआ आया. उस के पीछेपीछे 2 मोटरसाइकिल पर 3 लोग पीछा करते हुए आए.

ऊंटनी का बच्चा बदहवास भागा जा रहा था, तभी आगे का रास्ता बंद होने से जैसे ही वह रुका, तो उसे तीनों ने घेरा दे कर जमीन पर पटक दिया और कुल्हाड़ी से उस के आगे के दोनों पैर काटने लगे.

इस दौरान ऊंटनी का बच्चा तड़पता रहा, कलपता रहा, पर उन दरिंदों के दिल नहीं पसीजे. उस की आवाज सुन कर कुछ लोग वहां पहुंचे, तो आरोपियों ने उन्हें भी जान से मारने की धमकी दे दी.

उन दबंगों या कहें दरिंदों का कहना था कि इस ऊंटनी के बच्चे ने हमारे खेत में नुकसान किया है, लेकिन लोगों ने जब शोर मचाना शुरू किया, तो तीनों मोटरसाइकिल ले कर भाग गए. बाद में पुलिस को खबर की गई और घायल ऊंटनी के बच्चे को गांव कल्याणपुरा बिदावतान की गौशाला में इलाज के लिए पहुंचाया गया था, जहां देर रात उस ने दम तोड दिया.

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18 जुलाई, 2020 को गांव के पन्नाराम, गोपीराम और लिछमणराम के खिलाफ ओमप्रकाश सिंह की शिकायत सरदारशहर थाने में ले ली गई और अगले दिन यानी 19 जुलाई, 2020 को पुलिस ने इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया, पर आने वाले समय में देखते हैं कि कोर्ट में इन तीनों पर क्या कार्यवाही होती है?

इन तीनों ने 4 साल की ऊंटनी के बच्चे को बड़ी  निर्ममतापूर्वक मारा, काटा, जगहजगह जख्मी किया.  इनसानियत को शर्मसार करने वाली ऐसी वारदात अब कम ही  लोगों के दिल दहलाती है. वजह, इनसानियत धीरेधीरे खत्म जो होती जा रही है. वहीं सोचनेसमझने की ताकत भी.

पर क्या किसी को मार देने से उस नुकसान की भरपाई हो पाएगी? नामुमकिन. पर, ऐसे बेजबान जानवरों के साथ अमानवीयता की सारी हदें लांघ दी जाती हैं. कोई हमदर्दी नहीं, कोई रहम नहीं. यही वजह है कि ये बेजबान जानवर भी अनदेखी के शिकार होते जा रहे हैं.

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भारत नेपाल : दिलों में दरार क्यों? – सरकार की नीतियां जिम्मेदार या नेपाल की मजबूरी

यो रेडियो नेपाल छ…तपाइहरू कं अनुरोध पर प्रस्तुत छ लता मंगेशकर कं स्वर में यो गाना…

भारत के कई हिस्सों खासकर पूर्वोतर राज्य पश्चिम बंगाल, नेपाल से सटे यूपी और बिहार के कुछ भागों में आज भी रेडियो पर यह चिरपरिचित आवाज सुनने को मिल जाएगी.

आज भी पश्चिम बंगाल स्थित दुनिया का मशहूर पर्यटक स्थल दार्जिलिंग में प्रवेश करते ही बङेबङे अक्षरों में लिखा दिख जाएगा- तपाइहरू कं दार्जिलिंग मं स्वागत छ…

यों भले ही टैलीविजन ने घरघर पहचान बना ली है मगर बिहार के पूर्णिया जिले से सटे जोगबनी में आज भी घरों के दलान (बरामदे का खुला भाग) में चारपाई डाले लोग नेपाली रेडियो को सुनते दिख जाते हैं.

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फारबिसगंज के एक गांव के रहने वाले 63 साल के रविकांत को मालूम नहीं कि वे कब से नेपाली रेडियो सुनतेसुनते अब अच्छी तरह नेपाली भाषा बोलने और समझने लगे हैं.

रविकांत कहते हैं,”घर के लोग टीवी देखते हैं पर मुझे तो रेडियो से लगाव है. जब से होश संभाला है रेडियो ही सुनते आया हूं. पहले बाबूजी सुनते थे तो पास आ कर बैठ जाता था.

“मुझे औल इंडिया रेडियो के साथसाथ काठमांडू से प्रसारित नेपाली कार्यक्रम सुनना बहुत पसंद है.”

यह पूछने पर कि क्या आप नेपाल गए हैं?

रविकांत कहते हैं,”कितनी मरतबा गया याद नहीं. नेपाल जाते यह कभी नहीं लगा कि यह दूसरा देश है.”

इन की बात में काफी हद तक सचाई भी है, क्योंकि आज भी नेपाल भारत से अलग देश जरूर है पर वहां भारतीय नोट चलते हैं. खानपान, पहनावा और यहां तक कि रहनसहन तक भी में भी दोनों देशों में कोई अंतर नहीं है.

आश्चर्य तो यह भी है कि भारतीय सेना में नेपालीभाषी गोरखों की तादाद भी अच्छीखासी है और ये गजब के बहादुर और फुरतीले होते हैं और शायद यही वजह है कि देश की राजधानी दिल्ली हो, मुंबई या फिर कोलकाता आम नेपालीभाषी को लोग आज भी ‘बहादुर’ नाम से बुलाते हैं.

बहादुरी और ईमानदारी की वजह से इन्हें अकसर किसी कंपनी, सोसाइटी आदि में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते देखा जा सकता है. आज भी लोग इन्हें रातभर जाग कर चौकीदारी करते देख सकते हैं.

यों भारत में नेपाली बोलने वाले भारतीयों की संख्या भी लगभग एक करोड़ है. न सिर्फ नेपाली भाषा से भारतीयों का लगाव बराबर बना हुआ है, नियमित तौर पर भारत के अलगअलग हिस्सों में नेपाली साहित्य और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन भी होता रहा है.

भारत की 8वीं अनुसूची में शामिल

पिछले दिनों नेपाल के पहले कवि भानु भक्त आचार्य की जयंती पर दिल्ली में एक कार्यक्रम हुआ.

भानु ने अपने साहित्य से नेपाली भाषा को लोकप्रिय बनाया था और नेपाली भी उन भाषाओं में शामिल है जिन्हें भारतीय संविधान में मान्यता दी गई है और जो संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में से एक है.

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सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग खुद नेपाली भाषा के एक जानेमाने लेखक हैं और वे निर्माण प्रकाशन भी चलाते हैं जो नेपाली साहित्य प्रकाशित करता है.”

वहीं औल इंडिया रेडियो दिन में 3 बार नेपाली में 1-1 घंटे का कार्यक्रम प्रसारित करता है.

लेकिन इतना सब होने के बावजूद हाल ही में नेपालियों के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है या फिर कहें कि जो माहौल पैदा किया जा रहा है, वह दशकों से चली आ रही भारतनेपाल संबंधों के लिए कतई उचित नहीं.

नेपालियों के साथ अभद्रता

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कुछ सिरफिरे लोगों ने एक नेपाली युवक को पकङ कर उस के सिर मुडवा दिए और उस से जबरन ओली मुरदाबाद के नारे लगवाए.

यह सब इसलिए किया गया क्योंकि  नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने  राम को नेपाली और अयोध्या को नेपाल में बताया था.

इस बयान से बौराए विश्व हिंदू सेना ने एक पोस्टर जारी किया. उक्त पोस्टर में हिंदू सेना ने यह चेतावनी दी कि नेपाली प्रधानमंत्री अपने बयान को वापस लेते हुए माफी मांगें नहीं तो भारत में नेपालियों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

इस के बाद विश्व हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने उक्त युवक को न सिर्फ पकङ कर मुंडन किया, मुड़े हुए सिर पर श्रीराम लिख कर उस वीडियो को फेसबुक पर पोस्ट भी कर दिया.

यह सब तब हुआ है जब से नेपाल ने भारत के कुछ हिस्सों पर अपना दावा जताया है. इस से नेपाल के खिलाफ लोगों की नाराजगी फूट पङी है और इस नाराजगी में जहर घोल रहे हैं वे सिरफिरे जो देशभक्ति के नाम पर सोशल मीडिया पर रोज भड़ास निकाल रहे हैं.

फेसबुक का एक यूजर लिखता है,”नेपाल हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे.”

एक ने लिखा,”पुरानी भारत सरकार बोलती थी कि राम काल्पनिक थे. आज नेपाल बोल रहा कि राम हमारे हैं, कल पूरा विश्व बोलेगा.”

दिल्ली में पिछले कई सालों से रह रही ज्योति को चिंता है कि उसे अब भारत छोङना पङेगा. यहां रहते हुए वह न सिर्फ अच्छी हिंदी बोल लेती है, मैथिली भाषा पर भी उस की पकङ अच्छी है. नेपाल के कुछ भागों में मैथिली लोकप्रिय भाषा है और पूरे विश्वभर में लगभग 7 करोङ लोग मैथिलभाषी हैं. देश में मिथिलांचल के नाम से जाना जाने वाले जगहों में दरभंगा, मधुबनी, सीतामढी, मुजफ्फरपुर, पुर्णिया, कटिहार, सहरसा व सुपौल आदि कई जिलों में हिंदी के बाद मैथिली भाषा ही बोली जाती है.

पिछले दिनों दिल्ली के कनाट प्लेस में दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित मैथिलभोजपुरी कार्यक्रम हुआ था तो ज्योति भी उस कार्यक्रम को देखने गई थी.

ज्योति कहती है,”नेपाल में नेपाली भाषा के साथसाथ बङी संख्या में लोग मैथिली बोलते हैं. हमारे घर के लोग मैथिली बोलते हैं. मुझे मैथिली गाना पसंद है.”

वह अकसर विश्व कवि विद्यापति द्वारा लिखित गाना, ‘उगना रे मोर कतै गेलें…’ बङे चाव से गाती है. पर अब उसे दिल्ली में डर लगता है, क्योंकि हाल ही में कई लोग उस से पूछने लगे हैं कि तुम नेपाली हो क्या?

कहीं चीनी साजिश तो नहीं

यों जिस नेपाल के साथ भारत के दशकों से अच्छे संबंध थे आजकल वही नेपाल न सिर्फ भारत को आंखें दिखाने लगा है, दोनों देशों के बीच टकराव की नौबत तक आ गई है. चीन से नजदीकियों के बाद यह सही है कि नेपाल भारत को चिढ़ाने लगा है पर यह तनाव की स्थिति यों ही नहीं आई है.

भारत की ओर से नेपाल सीमा के पास सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ तो दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया. यहां कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख को ले कर दोनों देशों के बीच टकराव है.

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नेपाल का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भारत की ओर से जारी किए गए नए नक्शे में विवादित जगहों को भारत के हिस्से में दिखाया गया है.

इस के बाद नेपाल ने इन तीनों इलाकों  को अपने हिस्से में दिखाते हुए देश का नया नक्शा जारी किया. इस नक्शे को नेपाली संसद के निचले सदन ने भी मंजूरी दे दी तो भारत ने इस पर कङा ऐतराज किया.

कभी भारत को नेपाल बड़ा भाई मानता था पर आजकल वहां हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं.

संबंधों में खटास की वजह

संबंधों में खटास वहां से आनी शुरू हुई थी जब नेपाल पर भूकंप का कहर बरपा था और उस वक्त भारत की मीडिया द्वारा नेपाल के बारे में बहुत बढ़ाचढ़ा कर खबरें प्रसारित की जाने लगी थीं, जिस के कारण आम नेपाली के दिलों में भारत के प्रति नफरत बढ़ गई थी.

न्यूज चैनलों की खबरों में नेपाल को पूरी तरह से बरबाद और भविष्य के लिए भी पूरी तरह से असुरक्षित बताया जाने लगा था, जिस से नेपाल की रीढ़ माने जाने वाला पर्यटन व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ था.

उस के बाद नेपाल में राजनीतिक संकट शुरू हुआ और नए संविधान के लिए आंदोलन शुरू हो गए. कट्टर नेपाली व मधेसी समुदायों के बीच टकराव की आग भड़क गई. मधेसियों का वर्चस्व तराई क्षेत्र के साथ सीमा क्षेत्रों में था और उन्होंने भारत से आने वाली हर प्रकार की सप्लाई को बौर्डर पर ही रोक दिया.

इस से ईंधन के अभाव के साथसाथ रोजमर्रा की जरूरत का हर सामान सीमा पर ही फंस कर रह गया. नेपाल के हर क्षेत्र में अशांति का माहौल बन गया और करीब 52 लोगों की जान भी गई. इस सब का दोष थोपा गया भारत पर क्योंकि नए संविधान को भारत सरकार ने नकार दिया था और वह उस में परिवर्तन की मांग कर रही थी.

राजनीति और कूटनीति का खेल

इस अराजकता के माहौल में राजनीति और कूटनीति का खेल भी खेला गया. नेपाल ने अपना नया रहनुमा चीन को बनाने की घोषणा भारत को धमकी देते हुए की और चीन इसी ताक में था. फिर हालात खराब ही होते चले गए.

यह सही है कि जब भारत 1947 में आजाद हुआ था, उस के पङोसी देश पाकिस्तान से कभी बेहतर संबंध नहीं रहे. पाकिस्तान ने परोक्षअपरोक्ष रूप से भारत से लड़ाईयां भी लङी हैं, जिस में हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी है पर नेपाल के साथ भारत के संबंध कभी खराब नहीं हुए. मगर इधर कुछ महीनों से नेपाल के साथ संबंध बेहद खराब चल रहे.

उधर, हाल ही में भारतचीन सीमा के गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं में जानलेवा संघर्ष को लोग शायद ही भूल पाएं. इस संघर्ष में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे और 60 के लगभग सैनिक घायल हुए थे. खबर है कि इस संघर्ष में चीन को भी नुकसान हुआ और उस के भी कई सैनिक मारे गए मगर चीन ने अभी तक इस बारे में कोई भी आधिकारिक बयान नहीं दिया.

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देश में चीन को ले कर पहले से ही गुस्सा रहा है, क्योंकि चीन की विस्तारवादी नीतियों की न सिर्फ भारत, बल्कि विश्व के कई देशों में विरोध है.

चीन दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है और इस के लिए वह अपने आर्थिक संसाधनों और कूटनीति की मदद से नेपाल को भारत से तोड़ने की पूरी कोशिश कर रहा है.

2015 से भारत और नेपाल के बीच काफी मनमुटाव रहा है और इस का पूरापूरा फायदा चीन ने उठाया है. नेपाल में अकसर चीनी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और वहां के कई नेता नेपाल दौरे पर आते रहते हैं.

उधर सीएए और एनआरसी के मसले पर बांग्लादेश से भी भारत के संबंधों में खटास आ गई है. नागरिकता कानून को ले कर हो रहे विरोध के बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्री अब्दुल मोमिन और गृहमंत्री असद उजमान खान ने हाल ही में भारत दौरा भी रद्द कर दिया था.

जाग जाए सरकार

मगर मुख्य चिंता पङोसी मुल्क नेपाल को ले है, इस स्थिति में जब चीन ने पाकिस्तान के साथसाथ श्रीलंका में भी अपना प्रभुत्व जमा लिया है. हाल ही में ईरान ने भी चीन की सह पर भारत से चारबाह परियोजना छीन ली है.

मगर कोरोना वयारस से लड़ाई और गिरती अर्थव्यवस्था के बीच  पड़ोसियों से तनाव भारत के लिए गंभीर चिंता है और इस से निबट पाना भारत के लिए फिलहाल आसान नहीं लगता.

देश में नेपाल और नेपालियों को ले कर सोशल मीडिया पर भड़ास निकाला जा रहा है और जाहिर है इस से माहौल खराब ही होंगे.

हमें यह समझना होगा कि नेपाल चीन नहीं है और उसे एक छोटा और गरीब देश कह कर नजरअंदाज नहीं कर सकते. भारत को वाकई में बङा भाई होने का फर्ज निभाना होगा.

पर पहले नोटबंदी, फिर जीएसटी और फिर कोरोना काल से उपजी समस्या में बुरी तरह असफल रहने वाली सरकार से कुछ उम्मीद करें, ऐसा लगता नहीं.

भोजपुरी ऐक्ट्रेस अंजना सिंह को गुलाबी साड़ी में देख रोमांटिक हुए आनंद ओझा, देखें Photos

COVID-19 के चलते लगाए गए लॉक डाउन में भोजपुरी सिने जगत में सन्नाटा सा छाया हुआ था. इस वजह से शूटिंग बंद होने के चलते ज्यादातर एक्टर्स या तो गांवों में अपना समय बिता रहें थे जिस दौरान वे सब ऑनलाइन ही अपने फैन्स का मनोरंजन करते नजर आ रहें थे, लेकिन जब से अनलॉक-2 की घोषणा की गई है तब से एक बार फिर भोजपुरी सिने जगत में हलचल शुरू हो गई है. अब पहले से बन कर तैयार फिल्मों के फर्स्ट लुक और ट्रेलर लौंच किये जाने शुरू हो चुके हैं. ऐसे में इन फिल्मों से जुड़ी तमाम तस्वीरें भी वायरल होने लगी हैं. जिसे भोजपुरी बेल्ट में काफी पसंद किया जा रहा है.

anjana-singh

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अनलॉक-2 में ऐसी ही एक तस्वीर खूब वायरल हो रही है जिसमें भोजपुरी सिनेस्टार आनंद ओझा (Anand Ojha) हॉट ऐक्ट्रेस माने जाने वाली अंजना सिंह (Anjana Singh) के साथ रोमांस करते हुए नजर आ रहे हैं. इस तस्वीर में भोजपुरिया हॉट केक अंजना सिंह (Anjana Singh) गुलाबी साड़ी में नजर आ रहीं हैं जो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही हैं.

Anand-Ojha

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह तस्वीर आनंद ओझा (Anand Ojha) अंजना सिंह (Anjana Singh) की अपकमिंग फिल्म कुंभ (Kumbh) के सेट पर की है. जो इन दिनों चर्चा का केन्द्र बनी हुई हैं. गुलाबी साड़ी पहनी अंजना सिंह इस तस्वीर में कयामत ढा रहीं हैं, जिनको देख भोजपुरी अभिनेता आनंद ओझा मन ही मन रोमान्टिक हो रहे हैं जो कि इन तस्वीरो में साफ साफ देखा जा सकता हैं.

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kumbh

वैसे तो यह पहली बार नहीं हुआ है जब इन दोनों की रोमान्टिक तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चाओं का केन्द्र बनी है. इससे पहले भी इन दोनों की रोमान्टिक तस्वीरें सोशल मीडिया पर सुर्खियां बिटोर चुकी हैं.
“प्रज्ञा फिल्मस क्रिएशन” और निर्देशक “मनोज प्रसाद” के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अभिनेता आनंद ओझा लीड रोल में हैं. उनके अपोजिट अंजना सिंह नजर आएंगी. इस फिल्म के अभिनेता आनंद ओझा ने बताया कि फिल्म की कहानी के हिसाब से यह रोमान्टिक पोज फिलमा गया है.

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उन्होने बताया की मुझे खुशी हैं की दर्शक मुझे अंजना जी के साथ पसंद कर रहे हैं. अंजना सिंह भोजपुरी की सबसे बेहतरीन अभिनेत्रीयो में शुमार हैं. और तो और आनंद ओझा और अंजना की केमेस्ट्री सेट पर काफी सफल मानी जाती है.

सलमान से लेकर धर्मेंद्र तक इन एक्टर्स ने की फार्मिंग, सोशल मीडिया पर वायरल हुईं फोटोज

कोरोना वायरस (Corona Virus) के चलते लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से कई लोगों ने कुछ ऐसी चीज़ें की हैं जिसे देख काफी लोग इंस्पायर हुए हैं. लॉकडाउन के पहले दिन से ही बॉलीवुड सेलेब्स (Bollywood Celebs) जहां एक तरफ सबसे अपने अपने घरों में रहने की अपील कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ वे घर में अपने आप को व्यस्त रखने के नए नए तरीके भी सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं.

 

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Farminggg

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बॉलीवुड इंडस्ट्री में कुछ ऐसे कलाकार हैं जिन्हें फार्मिंग (Farming) यानी कि खेती करना बेहद पसंद है लेकिन अपनी बिजी लाइफ के चलते वे मिट्टी से जुड़ नहीं पाते लेकिन इन दिनों जहां सभी फिल्मों की शूटिंग बंद हैं और सभी एक्टर्स/एक्ट्रेसेस (Actors/Actresses) अपने अपने घरों में है तो वे इस मौके का जमकर फायदा उठा रहे हैं और फार्मिंग कर अपनी वीडियोज और फोटोज फैंस के साथ शेयर कर रहे हैं.

 

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Rice plantation done . .

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बात करें बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार सलमान खान (Salman Khan) की वे भी इन दिनों अपने फार्म हाउस पर फार्मिंग का लुत्फ उठा रहे हैं और फोटोज और वीडियोज सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस तक पहुंचा रहे हैं. इसी दौरान वे अपने पोस्ट में “जय जवान जय किसान” (Jai Jawan Jai Kisaan) के नारे को प्रोमोट करते भी दिखाई दिए.

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जहां बात आए खेती करने की और पंजाब की शान धर्मेंद्र (Dharmendra) जी की बात ना हों ऐसा तो हो ही नहीं सकता. बॉलीवुड इंडस्ट्री के मेगा स्टार धर्मेंद्र (Mega Star Dharmendra) की भी फार्मिंग फोटो वायरल हो रही है जिसमें वे अपने फार्म हाउस में पेड़-पौधे और फल-सब्जियां दिखाते हुए नजर आ रहे हैं. इस उम्र में भी धर्मेंद्र का अपने खेतों प्रति जज्बा कमाल का है.

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इसी कड़ी में बॉलीवड एक्ट्रेस जूही चावला (Juhi Chawla) की ही एक फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है जिसमें वे भी फार्मिंग को बढ़ावा देती दिखाई दे रही हैं. इस फोटो में जूही चावला (Juhi Chawla) खेत में बैठ कर पौधों का ख्याल रखती नजर आ रही हैं.

सोशल मीडिया पर छाया हार्दिक और नताशा की रोमांटिक फोटोज का जादू, फैंस हुए दीवाने

बॉलीवुड एक्ट्रेस नताशा स्तांकोविक (Natasa Stankovic) और इंडियन क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के जाने माने प्लेयर हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) इन दिनों खूब सुर्खियों में बने हुए हैं. जैसा कि हम सब जानते हैं कि नताशा और हार्दिक बहुत ही जल्द मम्मी-पापा बनने वाले हैं और इसी के चलते वे दोनों अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स एक दूसरे के साथ बिताए हर खूबसूरत लम्हे को फैंस के साथ शेयर करते हैं.

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नताशा स्तांकोविक (Natasa Stankovic) और हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) आए दिन अपनी रोमांटिक फोटोज अपने इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर शेयर कर रहे हैं जिसे कि उनके फैंस बेहद पसंद कर रहे हैं और उनकी आने वाली नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं. कुछ दिनों पहने हार्दिक ने अपनी और नताशा कि फोटो शेयर की थी जिसके कैप्शन में लिखा था कि,- “Natasa and I have had a great journey together and it is just about to get better . Together we are excited to welcome a new life into our lives very soon. We’re thrilled for this new phase of our life and seek your blessings and wishes.”

 

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@natasastankovic__ bubs from where are you getting the glow on your face? 😍

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इन दोनों की इस फोटो पर फैंस दीवाने से हो गए थे और हर जगह बस हार्दिक और नताशा के ही चर्चे थे. इसके बाद हार्दिक ने गाड़ी में नताशा के साथ फोटो शेयर की थी जिसके कैप्शन में हार्दिक ने नताशा से एक सवाल पूछा था और वो सवाल था कि, “bubs from where are you getting the glow on your face?” नताशा और हार्दिक की कैमिस्ट्री इतनी स्ट्रौंग है कि उनकी हर फोटोज में उनकी कैमिस्ट्री साफ नजर आती है.

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Family 💫💝 Photographer- @rahuljhangiani Hardik’s stylist – @nikitajaisinghani Natasa’s stylist – @soodpranav

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बार करें हार्दिक और नताशा कि इस फोटो की तो इस फोटो में नताशा हार्दिक की गोदी में सर रख के लेटी हुई हैं और इस फोटो में नताशा का बेबी बंप (Baby Bump) साफ दिखाई दे रहा है. इस फोटो में इन दोनों के साथ उनके पेट्स भी हैं और इस फोटो के कैप्शन में हार्दिक ने लिखा है कि, “Family”. इस फोटो से साफ पता चल रहा है कि दोनों को अपने पेट्स से काफी लगाव है.

 

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💐💝🥰 Photographer- @rahuljhangiani Hardik’s stylist – @nikitajaisinghani Natasa’s stylist – @begborrowstealstudio

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