विधायक का खूनी पंजा

विधायक का खूनी पंजा : भाग 2

कल्पना बहुत खुश हुई. दूसरे दिन पिता के साथ वह स्थानीय कांग्रेस नेता व विधायक अनूप कुमार साय के आवास पर पहुंची, जहां उस के पिता ने उसे विधायक अनूप कुमार से मिलाया. एमएलए ने उस की भरपूर मदद करने का आश्वासन दिया.

कल्पना उस समय 24 साल की थी, प्रवती 4 वर्ष की बालिका थी. कल्पना को देख कर विधायक पहली ही नजर में उस का मुरीद हो गया. अब कल्पना रोजाना ही नेताजी के घर-औफिस आ जाती और उस का काम संभालती. दोनों जल्द ही एक रंग में रंग गए तो सुनील श्रीवास्तव का बसाबसाया घर टूट गया.

एमएलए से बन गए संबंध

इस की वजह यह थी कि 2006 आतेआते कल्पना अनूप कुमार साय की हमसाया बन चुकी थी. फिर एक दिन उस ने पति सुनील श्रीवास्तव से संबंध विच्छेद कर लिया. सन 2009 में अनूप कुमार तीसरी बार विधायक बना तो उस ने कल्पना के लिए 24, सुंदरपदा कालोनी, भुवनेश्वर, ओडिशा में एक आवासीय भूखंड खरीदा और वहां 2 मंजिला मकान बनवा कर दे दिया.

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मकान के ऊपर वाले भाग में कल्पना दास अपनी एकलौती बेटी के साथ ठसक से रहने लगी. विधायक ने मकान के नीचे का हिस्सा एक ठेकेदार शरद साहू को दे दिया जो मकान की देखरेख करता था.

विधायक अनूप कुमार साय ने कल्पना दास को एक तरह से दूसरी पत्नी के रूप में रखा हुआ था. उस की सारी जरूरतें वही पूरी करता था. प्रवती दास को विधायक ने अपना नाम दे कर उस का दाखिला नामीगिरामी सेंट जेवियर्स इंग्लिश स्कूल में करा दिया था.

कल्पना हंसीखुशी से रहने लगी. विधायक के रूप में अनूप कुमार साय की क्षेत्र में बड़ी प्रतिष्ठा थी. वह कांग्रेस पार्टी का एक तरह से सर्वेसर्वा था. राज्य में बीजू जनता दल की सरकार होने के बावजूद वह बारबार कांग्रेस से विधायक निर्वाचित हो रहा था और अंचल में उस का खासा रुतबा और दबदबा बढ़ता रहा.

विधायक अनूप व कल्पना प्रेम से रहते रहे. दोनों बच्ची प्रवती को साथ ले कर कभी गोवा, कभी हैदराबाद और कभी विशाखापट्टनम सहित देश भर के प्रमुख पर्यटक स्थलों पर घूमने जाते. मगर धीरेधीरे कल्पना को यह लगने लगा था कि वह दूसरी औरत है. उस की अपनी कोई हैसियत नहीं है इसलिए वह अनूप से शादी की जिद करने लगी. जिस की परिणति 6 मई, 2016 को उस की और बेटी प्रवती की हत्या के साथ पूरी हुई.

7 मई, 2016 को शाकुंभरी फैक्ट्री के निकट लोगों ने एक महिला और एक लड़की का शव देखा. यह खबर जंगल में आग की तरह फैली तो वहां लोगों का हुजूम जुट गया. किसी ने इस की सूचना चक्रधर नगर थाने में दी तो तत्कालीन टीआई अमित पाटले तुरंत घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए.

घटनास्थल पर वह 10 मिनट में ही पहुंच गए. वहां पहुंच कर उन्होंने घटनास्थल का सूक्ष्य निरीक्षण किया. वहां पर एक महिला और एक लड़की की खून से लथपथ लाशें पड़ी थीं. दोनों लाशें किसी गाड़ी के टायरों से कुचली हुई दिख रही थीं. टायरों के निशान भी साफ दिख रहे थे.

मीडिया में उछला मामला

इस से पुलिस ने अनुमान लगाया कि किसी ने योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम दिया है. घटना के बारे में उच्चाधिकारियों को जानकारी देने के बाद टीआई ने दोनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

मीडिया में जब यह घटना प्रमुखता से आई तो पुलिस अधिकारी भी हरकत में आ गए. अगले दिन तत्कालीन आईजी पवन देव, एसपी संजीव शुक्ला सहित कई अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने अंदेशा जताया कि ये कालगर्ल्स से जुड़ा मामला हो सकता है.

इस केस की जांच के लिए उन्होंने एक जांच टीम बनाई, जिस में टीआई अमित पाटले, राकेश मिश्रा (प्रभारी क्राइम ब्रांच) आदि को शामिल किया गया. जांच टीम ने जिले के सभी थानों को घटना की जानकारी देते हुए गुमशुदा हुए लोगों के संदर्भ में जानकारी मांगी.

जब पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला तो रायगढ़ पुलिस आईजी के निर्देश पर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल तक जांच के लिए पहुंच गई.

इन राज्यों के पुलिस कप्तानों के पास दोनों लाशों से संबंधित पैंफ्लेट भी छपवा कर भेज दिए ताकि दोनों लाशों की शिनाख्त हो सके.

ओडिशा के बरगढ़ थाने में कांस्टेबल के पद पर तैनात सरोज दास ने जब पैंफ्लेट पढ़ा तो वह परेशानी में पड़ गया. क्योंकि उन लाशों का हुलिया उस की बहन कल्पना दास और भांजी प्रवती दास से मिलताजुलता था. दोनों ही कुछ दिनों से लापता भी थीं.

सरोज दास ने उसी समय पैंफ्लेट में क्राइम ब्रांच प्रभारी राकेश मिश्रा के दिए गए फोन नंबर पर संपर्क किया. उस ने उन्हें बताया कि उस की बहन कल्पना दास एक वकील थी. उस का विवाह सुनील श्रीवास्तव नाम के शख्स से हुआ था. फिलहाल वह सुनील से अलग रह रही थी. उस ने उन्हें सुनील श्रीवास्तव का फोन नंबर भी दे दिया.

यह जानकारी मिलने के बाद जांच टीम को केस के खुलने के आसार नजर आने लगे. पुलिस ने सुनील श्रीवास्तव को चक्रधर थाने बुलवा लिया ताकि उस से विस्तार से बात की जा सके.

पुलिस ने सुनील को दोनों लाशों के फोटो दिखाए तो फोटो देखते ही वह फूटफूट कर रोने लगा. उस ने महिला की लाश की शिनाख्त कल्पना दास के रूप में की. लेकिन वह लड़की को नहीं पहचान सका.

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उस ने बताया कि पिछले 10 साल से वह पत्नी व बच्ची से अलग रहता है. कल्पना से उस का सन 2011 में तलाक हो चुका है, इसलिए वह उसे एक तरह से भूल चुका था. सुनील ने बताया कि कल्पना पूर्व विधायक अनूप कुमार साय के साथ रहती थी. तलाक होने से पहले वह पत्नी और बेटी से मिलने जाता था तो विधायक उसे बेटी व पत्नी से मिलने नहीं देता था.

एमएलए से की पूछताछ

पुलिस के सामने पूर्व विधायक अनूप कुमार साय का नाम आया, तो इस की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी. अधिकारियों के निर्देश पर जांच टीम ने इस मामले की गहराई से जांच की. इस जांच में यह तथ्य सामने आ गया कि कल्पना और अनूप कुमार साय की 6 मई, 2016 को मोबाइल पर बातचीत हुई थी.

पुलिस ने कल्पना व प्रवती दोनों का डीएनए टेस्ट करा लिया था, अब पूर्व विधायक अनूप कुमार साय से पूछताछ करनी जरूरी थी. इसलिए उस का बयान लेने के लिए पुलिस ने उसे नोटिस जारी किया. लेकिन व्यस्तता का बहाना बना कर वह पुलिस से बचने की कोशिश करता रहा.

एसपी के दबाव पर एक दिन वह चक्रधर नगर थाने पहुंचा तो उस ने बड़ी ही विनम्रता से घटना के बारे में अनभिज्ञता जाहिर कर दी. उस ने बयान में कहा कि वह कल्पना दास और प्रवती दास से वाकिफ तो है मगर घटना के संदर्भ में कुछ नहीं जानता.

विधायक अनूप कुमार साय के साफसाफ कन्नी काट जाने के बाद और राजनीतिक दखलंदाजी बढ़ने पर पुलिस जांच की गति धीमी पड़ने लगी. समय के साथ परिस्थितियां बदलीं. अनूप कुमार साय ने कांग्रेस पार्टी से अचानक इस्तीफा दे दिया और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के समक्ष बीजू जनता दल का दामन थाम लिया.

सत्तासीन पार्टी में होने के कारण अनूप कुमार साय राजनीतिक रूप से दबंग हो गया था. चूंकि ओडिशा राज्य में बीजू जनता दल और छत्तीसगढ़ में डा. रमन सिंह की भाजपा सरकार थी और दोनों में अच्छा समन्वय था, सो इस का असर इस दोहरे हत्याकांड की जांच पर पड़ा. फलस्वरूप जांच ठंडे बस्ते में चली गई.

अनूप कुमार साय मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का खासमखास बन चुका था. नवीन पटनायक 2014 के विधानसभा चुनाव में आस्का विधानसभा के अलावा बरगढ़ की बिजेपुर से चुनाव लड़े थे. जबकि अनूप कुमार को किसी भी विधानसभा से टिकट नहीं मिला था. तब नवीन पटनायक ने अनूप कुमार साय को चुनाव संचालक बना दिया था.

यहां से जब मुख्यमंत्री भारी मतों से चुनाव जीत गए तो उपहारस्वरूप उन्होंने अनूप कुमार साय को ओडिशा प्रदेश के वेयर हाउसिंग कारपोरेशन का चेयरमैन बना दिया. इस से अनूप का राजनीतिक रसूख और ज्यादा बढ़ गया.

इधर छत्तीसगढ़ में भाजपा 2018 के चुनावों में बुरी तरह पराजित हो गई और कांग्रेस की सरकार अस्तित्व में आ गई. मामला जब गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पहुंचा तो उन्होंने रायगढ़ पुलिस को निष्पक्ष तरीके से केस की जांच करने के आदेश दिए. उस समय संतोष सिंह ने एसपी (रायगढ़) का पदभार संभाला था. एसपी ने अपने निर्देशन में इस दोहरे हत्याकांड की जांच करानी प्रारंभ कर दी.

दोबारा शुरू हुई जांच

चूंकि कल्पना दास और उस की बेटी प्रवती की बड़ी ही बेदर्दी से सिर कुचल कर हत्या की गई थी, इसलिए यह हत्याकांड पुलिस के लिए एक चुनौती था. पुलिस ने अनूप कुमार साय के एकएक कदम की निगरानी करनी शुरू कर दी. 6 महीने निगरानी करने के बाद पुलिस को तमाम सबूत मिल गए.

पुलिस को पता चल गया था कि अनूप कुमार साय ने कल्पना दास को एक मकान 24 सुंदरपदा कालोनी, भुवनेश्वर, ओडिशा में दे रखा था. प्रवती को वह एक महंगे और प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ा रहा था और उन्हें ले कर गोवा, हैदराबाद, विशाखापट्टनम, दिल्ली आदि जगहों घूमने के लिए गया था. पुलिस ने कई पुख्ता सबूत इकट्ठा कर लिए, जिन्हें वह झुठला नहीं सकता था.

इस के बाद 13 फरवरी, 2020 को आधी रात रायगढ़ पुलिस ने पूर्व विधायक अनूप कुमार साय के ब्रजराज नगर स्थित आवास पर दबिश दे कर उसे हिरासत में ले लिया.

अनूप कुमार साय अपने बचाव के लिए खूब राजनीतिक दांवपेंच खेलता रहा. मगर पुलिस ने उस की एक न सुनी और थाने ला कर उस से पूछताछ शुरू की तो अंतत: वह टूट गया और उस ने स्वीकार कर लिया कि 6 मई, 2016 को उस ने लिवइन रिलेशनशिप में रह रही कल्पना दास व उस की बेटी प्रवती की हत्या लोहे की रौड से की थी. इस के बाद उस के आदेश पर उस के ड्राइवर बर्मन टोप्पो ने दोनों की लाशें बोलेरो गाड़ी से कुचल दी थीं.

अनूप कुमार साय से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने ब्रजराज नगर से उस के ड्राइवर बर्मन टोप्पो को भी हिरासत में ले लिया. उस ने भी अंतत: कल्पना व प्रवती मर्डर केस में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली. इस के बाद पुलिस ने घटना का सीन रीक्रिएट किया ताकि पता चल सके कि हत्याकांड को किस तरह अंजाम दिया गया था.

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अनूप कुमार साय के गिरफ्तार होने की खबर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक तक पहुंची तो उन्होंने जरा भी देर किए बिना अनूप कुमार साय को वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के चेयरमैन पद व पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बरखास्त कर दिया.

रायगढ़ पुलिस ने हत्या के आरोपी 59 वर्षीय अनूप कुमार साय और उस के ड्राइवर बर्मन टोप्पो को भादंवि की धारा 302, 201, 120 के तहत गिरफ्तार कर रायगढ़ के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के सामने पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

विधायक का खूनी पंजा : भाग 1

पूर्व विधायक अनूप कुमार साय ओडिशा के झारसुगड़ा स्थित होटल मेघदूत में अपनी प्रेमिका कल्पना दास के साथ ठहरा था. कल्पना के साथ उस की 14 वर्षीय बेटी प्रवती दास भी थी. कल्पना और अनूप कुमार के बीच एक महत्त्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो रही थी.

कमरे में बैठे अनूप कुमार साय ने पास बैठी कल्पना दास की ओर देखते हुए कहा, ‘‘कल्पना, हम छत्तीसगढ़ के शहर रायगढ़ चलते हैं. वहीं पर हमीरपुर में एक साईं मंदिर है. उसी मंदिर में हम शादी कर लेंगे, वहां मेरे कुछ रिश्तेदार भी हैं. कुछ दिनों वहीं रह लेंगे. यह बताओ कि अब तो तुम खुश हो न?’’

कल्पना दास ने उचटतीउचटती निगाह अनूप कुमार साय पर डाली और बोली, ‘‘देखो, अब मुझे तुम पर विश्वास नहीं है. कितने साल बीत गए, तुम तो बस हम मांबेटी का खून पीते रहे हो. पता नहीं वह दिन कब आएगा, जब मुझे शांति मिलेगी.’’

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कल्पना के रूखे स्वर से अनूप कुमार साय के तनबदन में आग लग गई. वह अपने ड्राइवर बर्मन टोप्पो की ओर देख कर बोला, ‘‘बर्मन, चलना है रायगढ़.’’

मालिक का आदेश सुन कर बर्मन टोप्पो मुस्तैद खड़ा हो गया. वह अनूप कुमार साय का सालों से ड्राइवर था. यानी एक तरह से उस का विश्वासपात्र मुलाजिम था. उस ने विनम्रता से कहा, ‘‘साहब, मैं नीचे इंतजार करता हूं.’’

इतना कह कर वह वहां से चला गया.

माहौल थोड़ा सामान्य हुआ तो अनूप साय ने बड़े प्यार से कल्पना को समझाया, ‘‘देखो कल्पना, मैं वादा करता हूं कि बस यह आखिरी मौका है. इस के बाद मैं तुम्हें कभी भी नाराज होने का मौका नहीं दूंगा.’’

अनूप साय की बात पर कल्पना शांत हो गई और बेटी के साथ जाने के लिए उस की बोलेरो में बैठ गई. झारसुगुडा से रायगढ़ लगभग 85 किलोमीटर दूर है. बोलेरो रायगढ़ की तरफ रवाना हो गई. यह 6 मई, 2016 की बात है.

3 बार विधायक रहा अनूप कुमार साय वर्तमान में ओडिशा के वेयर हाउसिंग कारपोरेशन का चेयरमैन था. ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के खासमखास लोगों में से एक. मुख्यमंत्री से अनूप कुमार के नजदीकी संबंधों की ही एक नजीर यह थी कि मई 2019 के विधानसभा चुनाव में विधानसभा की टिकट नहीं मिलने के बावजूद भी उसे मुख्यमंत्री का वरदहस्त प्राप्त था. राजनीतिक रसूख के कारण ही उसे कारपोरेशन का चेयरमैन नियुक्त किया गया था.

यह कथा है पूर्व विधायक अनूप कुमार साय की जो सन 1999, 2004 एवं 2009 में ओडिशा के ब्रजराजनगर विधानसभा से विधायक चुना गया. अनूप कुमार साय ने कल्पना दास के साथ प्रेम की पींगे भरीं. फिर देखते ही देखते वह अपराध के दलदल में चला गया.

राजनीति की उजलीकाली रोशनी में कोई राजनेता जब स्वयं को स्वयंभू समझने लगता है तो उस का पतन उस का समूल अस्तित्व नष्ट कर जेल के सींखचों में पहुंचा देता है. यही सब अनूप कुमार साय के साथ भी हुआ.

6 मई, 2016 की सुबह के समय अनूप कुमार साय अपनी प्रेमिका कल्पना दास और उस की बेटी को अपनी बोलेरो कार में बिठा कर रायगढ़ की तरफ रवाना हो गया. करीब 2 घंटे बाद वह छत्तीसगढ़ की सीमा में प्रवेश कर गया. इस बीच दोनों आपस में बातें करते रहे.

बातोंबातों में एक बार फिर से उन के स्वर तल्ख होते जा रहे थे. कल्पना ने कहा, ‘‘देखो, तुम्हारे साथ मेरा जीवन तो बरबाद हो ही गया, अब मैं प्रवती की जिंदगी कतई बरबाद नहीं होने दूंगी.’’

अनूप कुमार साय का स्वर तल्खीभरा हो चला था, ‘‘अच्छा, मेरी वजह से तुम्हारा जीवन बरबाद हो गया? तुम ने कभी यह सोचा कि पहले क्या थीं, क्या बन गई हो और कहां से कहां पहुंच गई हो. अहसानफरामोशी इसी को कहते हैं. तुम अपने दिल से पूछो कि क्या नहीं किया है मैं ने तुम्हारे और प्रवती के लिए. तुम लोगों की खातिर मैं ने अपना राजनीतिक जीवन तक दांव पर लगा दिया. बदनाम हो गया, मेरी विधायकी चली गई. यहां तक कि अपनी विवाहिता पत्नी, बच्चों तक से संबंध तोड़ बैठा हूं.’’

‘‘झूठ…बिलकुल झूठ.’’ कल्पना दास का स्वर स्पष्ट रूप से कठोर था, ‘‘जब तक तुम मुझे मेरा अधिकार नहीं दोगे, मैं तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ूंगी.’’

‘‘देखो, मैं भी तुम्हें प्यार से समझा रहा हूं कि जिद छोड़ दो, सब कुछ तो तुम्हारा ही है. सिर्फ लिख कर दे दूंगा तो क्या होगा? अरे पगली, मन जीतना सीखो. अगर मेरा मन तुम्हारे साथ है तो मैं जो भी लिखूंगा, नहीं लिखूंगा सब तुम्हारा है.’’ अनूप ने समझाया.

‘‘मुझे बातों में मत उलझाओ. 12 साल हो गए देखते हुए. मैं अब सब्र नहीं कर सकती. अब तो तुम्हें मुझ से शादी करनी ही होगी और तुम्हारी संपत्ति में भी मुझे हिस्सा चाहिए.’’ कल्पना ने स्पष्ट कह दिया.

‘‘तो यह तुम्हारा अंतिम फैसला है?’’ अनूप कुमार बिफर पड़ा.

‘‘हां, यह मेरा अंतिम फैसला है.’’ कल्पना दास के स्वर में दृढ़ता थी.

‘‘तो ठीक है, फिर…’’ कहते हुए अनूप कुमार साय ने ड्राइवर टोप्पो से गाड़ी रोकने का इशारा किया. ड्राइवर ने तुरंत गाड़ी रोक दी.

अनूप कुमार साय ने कार का दरवाजा खोला और बाहर निकलते हुए कहा, ‘‘आओ, आओ बाहर आओ.’’

उस के स्वर में बेहद रोष था.

कल्पना दास जब तक बाहर आती, अनूप कुमार साय जल्दी से गाड़ी के पीछे गया और पीछे रखी लोहे की एक मोटी रौड ले कर सामने खड़ा हो गया. कल्पना बाहर निकली तो उस ने रौड से कल्पना दास पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया. लोहे की रौड जब कल्पना के सिर पर पड़ी तो वह चीख कर वहीं गिर पड़ी.

मां के चीखने की आवाज सुनते ही बेटी प्रवती घबरा गई. मां को घायल देख घबरा कर वह बाहर आई तो अनूप कुमार ने उस के सिर पर भी उसी रौड से प्रहार कर दिया. उस का भी सिर फट गया और खून की धार फूट निकली. वह भी वहीं धराशाई हो कर गिर पड़ी.

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मांबेटी घायल पड़ी थीं. उन के सिर से खून बह रहा था. दोनों को घायलावस्था में देख अनूप कुमार उन्हें गालियां देते हुए चिल्ला रहा था, ‘‘मुझ से शादी करोगी, मेरी संपत्ति पर नजर लगा रखी है, मार डालूंगा.’’

कहते हुए उस ने रौड से उन पर कई वार किए, जिस से कुछ ही देर में उन दोनों की मौत हो गई. उन्हें मौत के घाट उतार कर उस ने लहूलुहान लोहे की रौड बोलेरो में रख ली. इस के बाद उस ने ड्राइवर बर्मन टोप्पो से कहा, ‘‘इन दोनों का हश्र ऐसा करो कि कोई पहचान भी न पाए. गाड़ी से दोनों का सिर कुचल डालो.’’

बर्मन टोप्पो ने मालिक के कहने पर बोलेरो स्टार्ट कर के कल्पना और उस की बेटी पर कई बार चढ़ाई. वह पहिया चढ़ा कर उन के चेहरे बिगाड़ने लगा ताकि कोई पहचान न पाए. अनूप ने यह वारदात छत्तीसगढ़ के जिला रायगढ़ में मां शाकुंभरी फैक्ट्री के सुनसान रास्ते पर की थी. घटनास्थल थाना चक्रधर नगर के अंतर्गत आता था.

अनूप कुमार साय अपनी बरसों से प्रेयसी रही कल्पना दास और उस की 14 वर्षीय बेटी प्रवती की नृशंस हत्या कर उसी बोलेरो में बैठ कर बृजराजनगर, ओडिशा की ओर चला गया. यह बात 6 मई, 2016 की है.

आइए जानें कि कल्पना दास कौन थी और वह पूर्व विधायक अनूप कुमार साय के चक्कर में कैसे फंसी?

कल्पना दास ब्रजराज नगर के रहने वाले रुद्राक्ष दास की बेटी थी. रुद्राक्ष दास की बेटी के अलावा 2 बेटे भी थे. उन्होंने अपने तीनों बच्चों को उच्चशिक्षा दिलवाई. पढ़ाई के दौरान ही कल्पना को कालेज में ही अपने साथ पढ़ने वाले सुनील श्रीवास्तव से प्यार हो गया था. सुनील भी ब्रजराज नगर में रहता था. उन का प्यार इस मुकाम पर पहुंच गया था कि उन्होंने शादी करने का फैसला ले लिया था.

कल्पना ने जब अपने प्यार के बारे में घर वालों को बताया तो उन्होंने उसे सुनील के साथ शादी करने की अनुमति नहीं दी. लेकिन कल्पना ने अपने घर वालों की बात नहीं मानी. लिहाजा एक दिन सुनील श्रीवास्तव और कल्पना दास ने घर वालों को बिना बताए एक मंदिर में शादी कर ली. यह सन 2000 की बात है.

सुनील से शादी करने के बाद कल्पना ने अपने पिता का घर छोड़ दिया. इस के बाद सुनील ने भी इलैक्ट्रौनिक की एक दुकान खोल ली, जिस से गुजारे लायक आमदनी होने लगी. शादी के बाद भी कल्पना ने अपनी पढ़ाई जारी रखी. इसी दौरान सन 2002 में उस ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम प्रवती रखा. इसी बीच कल्पना ने अपनी वकालत की पढ़ाई भी पूरी कर ली थी.

कल्पना सुनील के साथ खुश थी. लेकिन कुछ दिनों बाद ही जब उस के सिर से प्यार का नशा उतरा तो उसे पति में कई कमियां नजर आने लगीं. इस की सब से बड़ी वजह यह थी कि उसे खर्चे के लिए तंगी होती थी, क्योंकि सुनील की आमदनी बहुत ज्यादा नहीं थी. कम आय में कल्पना की महत्त्वाकांक्षाएं पूरी नहीं हो पाती थीं.

कल्पना जब कभी किसी पर्यटक स्थल पर घूमने को कहती तो सुनील पैसों का रोना रोने लगता था. न ही वह कल्पना को रेस्टोरेंट वगैरह में खाना खिलाने ले जाता था. एक बार कल्पना ने उस से गोवा घूमने की जिद की तो सुनील ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘अरे भई, ये सब बड़े लोगों के चोंचले हैं. हम साधारण लोग क्या गोवा घूमने जाएंगे.’’

सुनील कल्पना को समझाता मगर कल्पना की काल्पनिक उड़ान बहुत ऊंची थी. वह जीवन में उल्लास और ऐश्वर्य चाहती थी. वह सुनील के साथ घुट कर जीने से आजिज आ चुकी थी.

एक दिन कल्पना ने पति से कहा, ‘‘मैं ने वकालत की डिग्री हासिल की है. क्यों न वकालत कर के पैसे और नाम दोनों ही अर्जित करूं. इस से हमारे सपने भी पूरे होंगे और मेरा मन भी लगा रहेगा.’’

सुनील को कल्पना की यह सलाह पसंद आई. कल्पना ने बृजराज नगर में वकालत करनी शुरू कर दी. इसी दौरान कल्पना ने अपने मांबाप से बातचीत करना शुरू कर दिया था. वह मायके भी आनेजाने लगी थी. कल्पना ने वकालत जरूर शुरू कर दी थी लेकिन पेशे के पेंच समझे बिना कैसे पैसा कमाती.

फिर भी किसी तरह धीरेधीरे गाड़ी चल निकली. कल्पना के अपने मायके वालों से संबंध सामान्य हो चुके थे. पिता रुद्राक्ष दास ने भी सुनील और कल्पना को माफ कर दिया था. एक दिन कल्पना ने पिता रुद्राक्ष दास से जब अपने वकालत के पेशे में आ रही दिक्कतों के बारे में चर्चा की तो वे बोले, ‘‘वकालत का पेशा गहराई मांगता है. यह संबंधों का खेल है.’’

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‘‘क्या मतलब?’’ कल्पना ने भोलेपन से पूछा.

‘‘बेटी, जिन के संबंध जितने गहरे यानी दूर तक फैले होते हैं, वकालत में उसे ही ज्यादा काम मिलता है. मैं तुम्हें यहां के कांग्रेस पार्टी के एक बड़े नेता अनूप कुमार साय से मिला दूंगा. वह मेरे अच्छे परिचित हैं. वह तुम्हारी मदद जरूर करेंगे. रोजाना उन से सैकड़ों लोग मिलने आते हैं. देखना, उन के सहयोग से तुम्हारी वकालत को कैसे रवानगी मिलती है.’’

‘‘पापा, वह तो क्षेत्र के विधायक हैं न?’’ कल्पना ने आश्चर्य से पिता की ओर देखते हुए कहा.

‘‘हांहां, हमारे एमएलए हैं अनूप कुमार साय.’’ रुद्राक्ष दास ने बेटी की बात की पुष्टि करते हुए कहा.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

नफरत का बीज बना विशाल वृक्ष

मनीष कुमार अपने दोस्त को बीमारी के हालात में लेकर पटना एन एम सी एच गया था.उसके दोस्त का सुगर लेवल अचानक घट गया था. तीन दिन ईलाज के बाद वह नहीं बच सका. उसके दोस्त का कोरोना जाँच कराया गया.वह कोरोना पॉज़िटिव निकला .मनीष का भी जाँच कराया गया.यह भी कोरोना पॉजिटिव पाया गया .इसे जिला मुख्यालय के आइसोलेशन सेंटर में रखा गया.14 दिन के बाद वह पूर्णतः ठीक होकर घर चला आया .उसका रिपोर्ट भी निगेटिव आ गया .

वह सभी परिवार आमलोगों की तरह स्वस्थ है. लेकिन दो माह बीतने के बाद भी आज भी कोरोना से ग्रसित होने का फ़जीहत पूरा परिवार झेल रहा है. गाँव का कोई ब्यक्ति मनीष के पास बैठने और बात तक करने के लिए तैयार नहीं है. ठीक होने के बाद भी कोई रिश्तेदार तक मिलने के लिए नहीं आया.

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यह सिर्फ मनीष के साथ ही नहीं बल्कि गाँव कस्बे में कोरोना से संक्रमित होकर ठीक होने वाले सभी लोगों को कमोवेश यही झेलना पड़ रहा है.

सबसे अधिक स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर ,नर्स और कर्मचारियों को झेलना पड़ रहा है. इनसे कोई बात नहीं करना चाहता .यहाँ तक किराये पर रहे इन लोगों को मकान खाली करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

ममता कुमारी ए एन एम ने बताया कि होली के पहले मेरा ट्रांसफर कर दिया गया.घर से 70 किलोमीटर की दूरी पर.कुछ दिन घर से किसी तरह आना जाना शुरू किया.इसी बीच कोरोना की वजह से फर्स्ट लॉकडाउन लगा.ड्यूटी करना भी जरूरी और लॉक डाउन का पालन करना भी .बहुत कोशिश किया किराये पर कमरा लेने के लिए लेकिन नहीं मिल सका .चार महीने से एक मोटरसायकिल खरीदा और एक लड़के को पाँच हजार रुपये महीना ले जाने और ले आने के लिए दे रही हूँ.

मनीष और ममता तो एक उदाहरण है.इस नफरत की आग से बहुत लोग जल रहे हैं.जिन डॉक्टरों के सम्मान में थाली और ताली बजवायी गयी.हेलीकॉप्टर से फूल बरसाये गए.उनका यह हश्र होगा .कल्पना से भी परे की बात है.

बगल वाले कोरोना संक्रमित से इतनी नफरत और अमिताभ बच्चन  और उसके परिवार वालों को जब कोरोना होता है तो उसके लिए हम हवन करते हैं और ठीक होने के लिए दुआ माँगते हैं.जबकि अमिताभ बच्चन की नजर में हमारी औकात एक कीड़ा मकोड़ा के जितना भी नहीं है. जब तुम भूख से मर रहे थे.पैदल चलते तुम्हारे पैरों में छाले पड़ गये थे.तुम्हारी रोटियाँ रेलवे ट्रैक पर बिखरी हुवी रह गयी थी और तुम मौत की नींद सदा के लिए सो गये थे.तुम्हारे बूढ़े माँ बाप, जवान पत्नी और दूधमुँहे बच्चे घर आने का इंतजार कर रहे थे.तब तुम्हारा देश का यह महानायक करोना को ठेंगा दिखा रहा था और हाँथ धोने का तरीका बता रहा था. तुम्हारे पक्ष में बोलने के लिए इसे एक शब्द नहीं मिला था.

इन महानायकों के साजिश को समझना पड़ेगा.आज तक हम नहीं समझ पाये की हमारा असली महानायक कौन है.जब किसी सेलिब्रेटी,मंत्री ,विधायक और राजनेता को होता है तो उसके लिए दुआ,प्रार्थना जो पहचानता तक नहीं और बगल वाला जो हर दुःख सुख में एक पैर पर खड़ा रहता है. उससे घृणा और नफरत.

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सबसे पहले तब्लीगी जमात और मुसलमानों से नफरत करने के लिए देश के हुक्मरानों ने मीडिया के मिलीभगत से बीजारोपण किया.पूरे देश में इस तरह की हवा चली की लोग देश भर के मुसलमानों से लोग नफरत करने लगे.हिन्दू दुकानदार,दूध देने वाले,डॉक्टर तक मुस्लिमों से दूरी बनाने लगे और फटकार लगाने लगे.आज उसका परिणाम हम सभी लोग झेल रहे हैं.

हम जैसा समाज बनायेगे. उसका परिणाम हमें झेलना पड़ेगा. हम लोगों से नफरत करना सिखायेंगे तो वे नफरत ही करेंगे.हम अगर बबूल का बीज लगायेंग तो आम फलने की आशा नहीं रखेंगें. आज वही हो रहा है. हमारे देश के प्रधानमंत्री और महानायक जैसे लोग अगर देश में भाईचारा और अमन का पाठ पढ़ाते तो इस देश का हाल यह नहीं होता.

डॉ विमलेंदु कुमार ने कहा कि अगर हमें कोरोना महामारी से लड़ना है तो इससे पीड़ित लोगों के साथ नफरत नहीं करनी चाहिए.कोरोना मरीजों के साथ किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए बल्कि उनका हौसला बढ़ाकर ठीक होने में सहयोग करना चाहिए.मुझे हाथी मेरे साथी फ़िल्म का एक गाना बारबार याद आता है -“नफरत की दुनिया छोड़कर प्यार की दुनिया में खुश रहना मेरे यार”.मैं तो लोगों को यहाँ तक कह रहा हूँ कि अगर आपके टोले मुहल्ले से कोई कोरोना संक्रमित मिलता है तो आप उसे थाली और ताली बजाते हुवे.उसका हर हाल में हौसला बढ़ाते हुवे अस्पताल जाते हुवे.सभी लोग जोर से आवाज दो आप ठीक होकर अस्पताल से जल्द से जल्द हमलोगों के बीच आओगे.इस बीमारी में हौसला बढ़ाने की जरूरत है. किसी से नफरत करके उसका मनोबल कतई नहीं तोड़ें.

तिहाड़ में कैद सोनू पंजाबन की नई कारगुजारी : कर ली खुद ही मौत की तैयारी

बोलने में बेहद स्मार्ट, दिखने में काफी खूबसूरत और फर्राटेदार अंगरेजी बोलने वाली सोनू पंजाबन का पारिवारिक बैकग्राउंड भले ही अच्छा न रहा हो, पर उस की जिंदगी भी मुश्किलों भरी रही है. अभी वह तिहाड़ की जेल नंबर 6 में बंद है. 16 जुलाई, 2020 को दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने एक मामले में सोनू पंजाबन के साथसाथ उस के साथी संदीप को भी दोषी ठहराया. वहीं जेल सूत्रों के मुताबिक, 18 जुलाई, 2020 को सोनू पंजाबन ने सिरदर्द की शिकायत की थी. उसे जो दवाएं दी गईं, वे उस ने एकसाथ ले कर जान देने की कोशिश की. हालांकि जेल के अडिश्नल आईजी राजकुमार ने ऐसी किसी बात से इनकार किया. उन्होंने कहा कि सोनू ने सिरदर्द की गोलियां कुछ ज्यादा खा लीं, और कोई बात नहीं है.

परंतु जरूरत से ज्यादा दवा के सेवन से सोनू पंजाबन की तबीयत बिगड़ गई. यह तो अच्छा हुआ कि आननफानन में उसे अस्पताल पहुंचा दिया गया, जहां उस की जान बच गई.

जैसे ही दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने सोनू पंजाबन को नाबालिगों का अपहरण कर उन से वेश्यावृत्ति कराने के मामले में दोषी करार दिया, वह डिप्रैशन में आ गई और उसे सिरदर्द होने लगा. सिरदर्द की एकसाथ इकट्ठी दवा खाने के बाद उसे डीडीयू अस्पताल में भरती कराया गया, जहां डाक्टरों ने उस की जान बचा ली.

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गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन की कारगुजारियां फिल्म सरीखी हैं. उस ने अपनी खूबसूरती और चालाकी के दम पर देशभर में सैक्स रैकेट चलाया. इस दौरान वह कई बार जेल भी गई, लेकिन हर बार किसी तरह जमानत पर रिहा हो कर बाहर आ गई, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि वह दोषी करार दी गई. यही वजह है कि सोनू पिछली बातों व यादों को भूल नहीं पा रही और दोषी साबित होने पर तो वह बेहद तनाव में है.

अपने समय में पुलिस प्रशासन को छका देने वाली सोनू पंजाबन को कोई विष कन्या कह कर बुलाता है, तो कोई हुस्न की शहजादी. मौडर्न लाइफस्टाइल जीने वाली सोनू पंजाबन ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसे यह दिन भी देखने को मिलेगा.

वैसे भी पुलिस के साथ आंखमिचैली का खेल सोनू पंजाबन के लिए कोई नई बात नहीं है. पर अब दोषी साबित होने के बाद सोनू पंजाबन को लग रहा है कि उस का देह व्यापार का साम्राज्य खत्म हो जाएगा.

गौरतलब है कि दिल्ली की द्वारका कोर्ट में गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन और उस के साथी संदीप को नाबालिगों से देह धंधा कराने के आरोप में दोषी करार देने के बाद सजा का ऐलान किया जाएगा.

आरोप है कि सोनू और उस के साथी संदीप ने नाबालिगों का अपहरण किया, फिर कैद में रखा और मानव तस्करी भी कराई. नजफगढ़ के रहने वाले एक परिवार ने सोनू पंजाबन पर उन की नाबालिग बेटी का अपहरण कर उसे देह धंधे के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था. इस के बाद जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने साल 2014 में सोनू पंजाबन को गिरफ्तार कर लिया था.

इस किशोरी को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में अलगअलग जगहों पर बेचा गया था. वहां उस के साथ अलगअलग लोगों ने रेप किया. इसी दौरान पीड़िता उन के चंगुल से निकल भागी और अपने घर पहुंच गई.

इस दौरान किशोरी अवसाद में थी और आरोपितों से उसे जान का खतरा था. पुलिस ने सोनू पंजाबन को दिल्ली के उस के एक ठिकाने से धर दबोचा था. छानबीन में पता चला कि सोनू पंजाबन दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई मानव तस्करों के संपर्क में थी.

देशभर में सोनू पंजाबन ने देह व्यापार का धंधा फैलाया और इस दौरान करोड़ों की संपत्ति बनाई. दिल्ली के कई थानों के अलावा देश के कई राज्यों में सोनू पंजाबन पर सैक्स रैकेट चलाने के मामले दर्ज हैं. मकोका के तहत भी सोनू पंजाबन पर केस दर्ज किया गया था.

सोनू पंजाबन इतना बड़ा नाम हो गई थी कि उस के किरदार पर बौलीवुड में फिल्म भी बनने लगी थी. फिल्म ‘फुकरे’ में भोली पंजाबन का किरदार सोनू पंजाबन का ही असली किरदार है.

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फिलहाल तो सोनू पंजाबन की उम्मीदों पर डीडीयू अस्पताल के डाक्टरों ने पानी फेर दिया है यानी उसे बचा लिया गया है, पर देखना यह है कि अगली सुनवाई में कोर्ट सोनू पंजाबन को ले कर क्या फैसला सुनाता है. साथ ही यह सवाल भी गहराया हुआ है कि आखिर जेल में सोनू पंजाबन तक ऐसी जानलेवा दवा पहुंची कैसे? वहीं अब ठीक होने के बाद सोनू पंजाबन को एक और नई मुसीबत से जूझना होगा.

द्वारका कोर्ट अगली सुनवाई में सोनू पंजाबन को कितने साल की सजा सुनाती है, यह तो समय के गर्त में है. पर इतना तय है कि उसे सजा भुगतनी ही होगी.

प्रदीप पांडे चिंटू की भोजपुरी फिल्म Dostana का ट्रेलर हुआ रिलीज, सोशल मीडिया पर मचा धमाल

हाल ही में भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के चॉकलेटी हीरो मानें जानें वाले प्रदीप पांडे चिंटू (Pradeep Pandey Chintu) के बहुप्रतीक्षित भोजपुरी फिल्म ‘दोस्ताना’ (Dostana) का ट्रेलर एंटरटेन म्यूजिक भोजपुरी (Enterr10 Music Bhojpuri) के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर लौंच कर दिया गया है जो रिलीज होते ही धमाल मचा रहा है और महज तीन दिनों में ही 1 मिलियन व्यूज तक पहुंच गया है. अभी पिछले हफ्ते इस फिल्म का फर्स्ट लुक लौंच किया गया था जिसमें इसके पोस्टर ने खूब सुर्खियां बटोरी थी.

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इस फिल्म के ट्रेलर में प्रदीप पांडे चिंटू (Pradeep Pandey Chintu) और अवधेश मिश्रा (Awdhesh Mishra) को बाप बेटे के रिश्तों की खूबसूरत कैमेस्ट्री देखने को मिल रही है जिसमें अवधेश मिश्रा एक डाकिये के रोल में नजर आ रहें हैं. वहीं भोजपुरी सिनेमा की कमाल की ऐक्ट्रेस काजल राघवानी (Kajal Raghwani) एक डाक्टर के रूप में नजर आ रही हैं. बाप बेटे के रिश्तों पर बनी इस फिल्म में निर्देशक पराग पाटिल (Parag Patil) ने जान फूंक दी है. फिल्म के ट्रेलर को ही देख कर दर्शकों के आंखों में आंसू आ जाता है.

ट्रेलर को देख कर भोजपुरी बेल्ट के दर्शकों ने भी अपना रिएक्शन दिया है. एक दर्शक ने सोशल मीडिया पर लिखा है “कमाल का ट्रेलर है, दर्शकों को तौलिया लेकर इस फिल्म को देखना पड़ेगा. आज जब इस हाई फाई जनरेशन के दौर में जहां एक बाप और बेटे में कॉम्युनिकेशन गैप बढ़ रहा है वहीं निश्चित इस फिल्म को देखने के बाद बाप और बेटे की बीच की दूरियां खत्म हो जाएंगी. उन दोनों में दोस्ताना हो जाएगा ऐसा मुझे विश्वास हैं.”

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एक दर्शक नें लिखा है अभी तक हम मां के रिश्तों पर बहुत सारी फिल्में देख चुके है पर अभी तक बाप बेटे की दोस्ती पर शायद एक भी फिल्म मैंने नही देखी है अगर देखी भी होगी तो मुझे याद नही है, मदर इंडिया बनी पर फादर इंडिया नहीं बनी, दोस्ताना के रूप में इस फिल्म का ट्रेलर देखा मज़ा आ गया.”

एक दर्शक नें लिखा है की “अवधेश मिश्रा भैया का और चिंटू बाबू का अभिनय वाह… वो अपने चरित्र को बखूबी निभाकर एक बार फिर से एक्शन सुपर स्टार साबित करेंगे. भोजपुरी फिल्मों के ताकत बनकर उभरेंगे. गज़ब की जोड़ी है चिंटू और अवधेश भैया की. कमाल की स्टोरी राकेश त्रिपाठी और डायरेक्शन के बारे में तो जितनी तारीफ करूँ पराग पाटिल जी का वो कम है. एक नॉन भोजपुरिया आदमी जो मराठी कल्चर से बिलांग करता हो और वो भोजपुरी कल्चर के बारे भाषा के बारे में भोजपुरी बोलता हो और उसके ऊपर से दर्जनों अच्छी फिल्मो जा निर्देशन करता हो और संघर्ष जैसी आफ बिट विषय पर फिल्में बनाकर इतिहास रच देना कंही न कही ये पराग पाटिल जी अपनी ज़बरदस्त मेहनत है.

इस फिल्म के ट्रेलर को लेकर दर्शकों के मिल रहे रिस्पांस को लेकर यह अंदाज लगाया जा रहा है की यह फिल्म भोजपुरी सिनेमा में आई सबसे हिट फिल्म साबित होगी. इस फिल्म के निर्माता भोजपुरी फिल्मों के जानेमाने फ़िल्म मेकर प्रदीप सिंह (Pradeep Singh)और प्रतीक सिंह (Prateek Singh) हैं जब की निर्देशक पराग पाटिल (Parag Patil) और लेखक राकेश त्रिपाठी (Rakesh Tripathi) हैं. संगीत ओम झा (Om Jha) तो गीत राज कुमार आर पाण्डेय (Raj Kumar R. Pandey), अजित मंडल (Ajeet Mandal), सुमित सिंह चंद्रवंशी (Sumit Singh Chandravanshi), श्याम देहाती (Shyam Dehati) का है. छायांकन (DOP) साहिल जे अंसारी (Sahil J Ansari) नें किया है. जबकि संकलन संतोष हरावडे और एक्शन दिलीप यादव का है.

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यह फिल्म यशी फिल्म्स अभय सिन्हा एवं चन्द्रवर्षा इंटरटेनमेंट प्रस्तुत तथा वर्ल्ड वाईद फ़िल्म प्रोडक्शन के बैनर तले बनी है. फिल्म के मुख्य भूमिकाओं में प्रदीप पाण्डेय चिंटू, अवधेश मिश्रा, काजल राघवानी, रक्षा गुप्ता (Raksha Gupta), प्रीति सिंह (Priti Singh),  संजय पाण्डेय (Sanjay Pandey), देव सिंह (Dev Singh), बालेश्वर सिंह (Baleshwar Singh), संजीव मिश्रा ( Sanjeev Mishra), अरुण सिंह (Arun Singh), रोहित सिंह ‘मटरू’( Rohit Singh Matru), सुबोध शेठ( Subodh Seth), यादवेंद्र यादव ( Yadvendra Yadav) है.

सुशांत की लाइफ से इंस्यापर फिल्म का फर्स्ट लुक रिलीज, ये एक्टर निभाएंगे लीड रोल

बॉलीवुड इंडस्ट्री के जाने माने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की सुसाइड के बाद से इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों की सच्चाई सामने आई थीं जो कि इंडस्ट्री के बाहर से आए एक्टर्स को आगे नहीं बढ़ने देते और तो और खुलेआम नेपोटिज्म (Nepotism) फैला रहे थे. इसी कड़ी में बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान (Salman Khan), करण जौहर (Karan Johar), संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) जैसे लोगों का नाम सामने आया है जो कि सिर्फ और सिर्फ स्टार किड्स (Star Kids) को लेकर फिल्में बनाते हैं और बाहर से आए एक्टर को मौका तक नहीं देते.

 

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Receive without pride, let go without attachment. #Meditations

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सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की सुसाइड के बाद से उनके फैंस ने 2 चीज़ों की मांज बहुत जोरों से की थी. एक तो सुशांत के फैंस को ऐसा लगता था कि ये सुसाइड नहीं बल्कि मर्डर है तो इसलिए वे सब चाहते थे कि इस केस में सीबीआई जांच होनी चाहिए और दूसरा सुशांत के फैंस ये चाहते थे कि उनकी जिंदगी पर एक फिल्म बननी चाहिए क्योंकि जो भी कुछ उन्होनें इंडस्ट्री में बरदाश्त किया है वो दुनिया के सामने आ सके.

खबरों की माने तो सुशांत सिंह राजपूत के हमशक्ल के रुप में पौपुलर हुए एक्टर सचिन तिवारी (Sachin Tiwari) इस फिल्म में लीड रोल निभाने वाले हैं. आपको बता दें कि सचिन तिवारी एक टिक टॉक स्टार (Tik Tok Star) हैं जिन्होनें ऑडियंस में अपनी पौपुलैरिटी हासिल की हुई है. विजय शेखर गुप्ता (Vijay Shekhar Gupta) के प्रोडक्शन में बनने जा रही इस फिल्म की शूटिंग जल्द ही शुरु होने वाली है और इस फिल्म का नाम है “सुसाइड ऑर मर्डर” (Suicide or Murder).

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इस फिल्म का शर्स्ट लुक भी सामने आ चुका है जो कि विजय शेखर गुप्ता के प्रोडक्शन हाउस के ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर हुआ है. फिल्म के पहले लुक को शेयर करने के साथ ही कैप्शन में लिखा गया कि,- “A boy from small town became a Shining Star in the film industry. This is his journey. Introducing Sachin Tiwari as ‘The Outsider’.”

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हिना खान की इस फोटो पर फैंस हुए दीवाने, रश्मि देसाई भी हुईं फिदा

टेलीविजन इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस हिना खान (Hina Khan) आए दिन किसी ना किसी बात के चलते सुर्खियों में छाई रहती हैं. अपनी एक्टिंग और लुक्स से सबको दीवाना बनाने वाली एक्ट्रेस हिना खान (Hina Khan) अपने फैंस की काफी फेवरेट हैं. हिना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और एक्टिव रहने के साथ साथ आए दिन वे अपनी हॉट और ग्लैमरस फोटोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं और फैंस भी उनकी हर फोटो, हर वीडियो को बेहद प्यार देते हैं.

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इसी कड़ी में हिना खान (Hina Khan) अपने नए पोस्ट के चलते एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं. हिना खान ने अपनी इस फोटो में ब्लैक कलर की शॉर्ट ड्रैस पहनी हुई है जिसमें वे बेहद हॉट नजर आ रही हैं. हिना खान अपनी हर फोटो, हर वीडियो में इतनी खूबसूरत और इतनी ग्लैमरस दिखाई देती हैं कि कोई भी उनकी फोटोज देख उनसे प्यार करने लगे.

 

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जैसा कि हम जानते हैं कि सेलेब्रिटीज की फोटोज पर ना सिर्फ उनके फैंस कमेंट्स करते हैं बल्कि बाकी सेलेब्स भी कमेंट्स कर अपनी प्यार जाहिर करते हैं. हिना खान (Hina Khan) की इस फोटो पर मोनालिसा (Monalisa) से लेकर रश्मि देसाई (Rashmi Desai) तक काफी सेलेब्स ने कमेंट कर उनकी तारीफ की है. हिना खान की इस फोटो को एक ही दिन में साढ़े 6 लाख से भी ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं.

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हिना खान ने फिल्म “हैक्ड” (Hacked) से बॉलीवुड में अपने फिल्मी करियर की शुरूआत की थी और तो और हिना खान ने टेलिवीजन इंडस्ट्री के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बॉस सीजन 11 (Bigg Boss 11) का भी हिस्सा रह चुकी हैं. हिना ने कई टेलिवीजन सीरियल्स में अपनी कमाल की भूमिका निभा कर दर्शकों की फेवरेट बन गई हैं.

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उठाइए और्गेज्म का आनंद

स्त्रीपुरुष संबंध में चरम आनंद को और्गेज्म कहा जाता है. स्त्रियों में यह स्थिति धीरेधीरे या देर से आती है. इसलिए कई स्त्रियों को इस के आने या होने का एहसास भी नहीं होता. सैक्सोलौजिस्ट्स यह मानते हैं कि मनुष्य देह मल्टीपल और्गेज्म वाली है जबकि स्त्री को प्रकृति ने पुरुष की तुलना में ज्यादा बार और्गेज्म पर पहुंचने की क्षमता दी है. कुपोषण, पोषणहीनता विटामिंस की कमी, सेक्स संबंधों में अनाड़ीपन या अल्पज्ञान के चलते हमारे देश में लोग मोनो और्गेज्म का ही सुख पाते हैं और उसे ही पर्याप्त समझते हैं.

सुहागरात का प्रथम मिलन

अकसर दंपती सुहागरात के दिन चरम आनंद का अनुभव नहीं कर पाते. उन्हें लगता है व्यर्थ ही इतने सपने पाले.

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एक दंपती कहता है, बहुत भयंकर रहा हमारा प्रथम मिलन. पत्नी को छूते ही पति का काम हो गया (स्खलित हो गया). पत्नी कोरी (चरमानंद का एक अंश तक नहीं) ही रह गई. अभी पतिपत्नी के बीच न कुछ बात हुई, न विचार…पति ग्लानि का शिकार हो गया. उसी को दबाने के लिए उस ने नया पैंतरा अपनाया. शादी में ससुराल में हुए स्वागत और लेनदेन में मीनमेख निकालने लगा. पत्नी भी कब तक चुप रहती. दूसरेतीसरे दिन पति सहज था पर पत्नी न हो पाई. तब पति ने सचाई पत्नी को बताई. इस सच को बता कर और अपनी कमजोरी बता कर पति ने पत्नी का मन जीत लिया. उस दिन वे दोनों मन से मिले. दरअसल, वे उसी दिन को अपनी सुहागरात का नाम देते हैं.

कई बार प्रथम रात्रि में आनंद भी संभव नहीं होता, और्गेज्म तो दूर की बात है. दरअसल, उस रात्रि में कई तरह के डर हावी रहते हैं. मिलन के लिए दोनों की मानसिकता एकजैसी हो, यह भी आवश्यक नहीं. चरमानंद तालमेल, स्नेह व सद्व्यवहार पर निर्भर करता है.

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लंबे समय बाद भी सुख

अकसर पुरुष आनंद पा ले तो स्त्रियां अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेती हैं. पूछने पर कह देती हैं कि उन्हें आनंद आ गया. असल में 2 या 3 बच्चे हो जाने के बाद भी आनंद आता है. एक युवती कहती है, ‘‘संभोग करने में उसे दर्द रहता था. सहेलियों ने सलाह दी कि बच्चा पैदा होने पर यह दर्द गायब हो जाएगा. दर्द गायब हुआ पर चरमानंद तीसरे बच्चे के बाद ही आया. चरमानंद के बाद मैंने संभोग की असली स्टेज जानी जिस के बाद कुछ करने का मन नहीं करता.’’

एक स्त्री कहती है, ‘‘मुझे मेनोपौज के समय चरमानंद का पता चला. उस समय कामोत्तेजना बढ़ गई. मैं स्वयं ही इन से फरमाइश करने लगी. पहले चरमानंद आ जाता तो जीवन के लंबे अरसे तक इस का अनुभव लेते रहते.’’

कैसे पहचानें और्गेज्म

यह स्थिति चरम संतुष्टि की स्थिति है. यह अपनेआप पता लग जाती है. अकसर इस के बाद कुछ करने का मन नहीं करता. कुछ स्त्रियां आंख मीच कर निढाल भी रहती हैं.

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इस दौरान योनि में संकुचन हृदय धड़कन जैसा होने लगता है. निरंतर और्गेज्म पाते रहने से इस स्थिति पर पहुंचने का 20-30 सैकंड पहले पता लग जाता है. ऐसे में एकाग्रता बढ़ा लेना अच्छा रहता है. पुरुष भी अपनी देह पर पकड़ अनुभव करते हैं. यह स्थिति उन के लिए सफल सेक्स का बहुत बड़ा साइलैंट कम्युनिकेशन है.

और्गेज्म अपने सुख के लिए भी है. शरीर के साथ ही यह मन को भी हलका बनाता है. शरीर से निकले स्राव तनमन में रासायनिक क्रिया उपजाते हैं. मन को फुर्तीला बनाते हैं, जीवन के प्रति विश्वास जगाते हैं. जीना रुचिकर लगता है, उस में रस आता है. कभी स्खलन न हो या चरमानंद न आए तो मन बेचैन, उद्विग्न, अकारण परेशान, चिंतातुर रहता है. इसे चरमानंद पाने वाले लोग आसानी से जानसम झ सकते हैं.

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हर बार पहले जैसी अनुभूति

एक युवती कहती है कि पहला और्गेज्म उसे समझ न आया. संकुचन हुआ तो लगा पता नहीं यह क्या हो गया. इसे जानने के बाद अगली बार यह स्थिति न सिर्फ आनंददायक रही बल्कि तृप्तिदायक व संतुष्टिदायक भी रही. एक युवक कहता है, ‘‘मेरी पत्नी ने एक रात मुझे बताया कि आज मुझे नाभि तक सरसराहट महसूस हो रही है. लग रहा है मेरे भीतर घंटियां बज रही हैं.’’ मैं समझ गया, यह उस का पहला और्गेज्म है.

स्त्रियों का चरमानंद पुरुषों के चरमानंद जैसा मुखर नहीं होता कि बिना बताए उसे कोई जान ले या भांप ले. इसीलिए कई बार उस में बाधा होती है. कुछ स्त्रियों को चरमानंद से पूर्व जल्दी और ज्यादा घर्षण चाहिए. कुछ को पुरुष अंग और गहराई पर चाहिए तो किसीकिसी को सिर्फ कोराकोरा स्पर्श चाहिए.

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पुरुष करते हैं परवाह

स्त्रियों के चरमानंद की पुरुषों को बहुत परवाह रहती है. दरअसल, यह उन्हें अपनी सेक्स परफौर्मैंस की बदौलत पाई सफलता लगती है. इसलिए उन्हें सही स्थिति बताई जाए तो वे उस की परवा करते हैं, यहां तक कि अपने आनंद को स्थगित कर के भी. एक सज्जन कहते हैं कि मैं चरमानंद के नजदीक होता हूं और मेरी पत्नी कहती है, अब यह करो. यह मत करो तो मैं मान लेता हूं क्योंकि मुझे पता है, मेरी तृप्ति कैसे होती है पर उस की तृप्ति उस समय मेरे लिए सब से महत्त्वपूर्ण होती है.

चरमानंद से पूर्व भी आनंद आता है. अगर चरमानंद को डिले करना है तो थोड़ा ध्यान बांटा जाए. लेकिन डिले इतना न हो कि हाथ से ही निकल जाए. यह न हो कि वह पुरुष साथी स्खलित हो जाए और फिर स्त्री के योग्य होने में उसे समय लगे और तब चरमानंद हाथ न आए.

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फोरप्ले व आफ्टरप्ले दोनों स्थितियों का अपना महत्त्व है. अच्छे फोरप्ले से समय पर चरमानंद पाया जा सकता है और अच्छा आफ्टरप्ले चरमानंद को देर तक बनाए रखता है. ये भावात्मक निकटता उपजाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सेक्स को सिर्फ तन की क्रिया ही नहीं रहने देते बल्कि भावनात्मक, आंतरिक व सम्मानजनक बनाते हैं.

चरमानंद सेक्स को मुक्त मन से किए गए स्वागत का सुखद परिणाम है.ु यह स्त्रीत्व और पुरुषत्व के माने ठीक से बता देता है. एकदूसरे के लिए साथी का महत्त्व भी सम झाता है. समझदारी, समरसता से किया गया सेक्स सुख के द्वार खोलता है. यह और्गेज्म यानी चरमानंद पा कर ही अनुभव किया जा सकता है.

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दहशत के 11 घंटे : भाग 3

सुभाष बाथम के घर से विस्फोटक का जो जखीरा मिला, उस से साफ हो गया कि अगर धमाका होता तो 40 मीटर के दायरे में तबाही मच जाती. यह बात भी साफ थी कि सुभाष बम बनाना जानता था. सिलेंडर को सौर ऊर्जा की प्लेट और नीचे बैटरी के तार से जोड़ा गया था. दोनों तारों के कनेक्शन आपस में जुड़ जाते तो बड़ा धमाका हो जाता.

बच्चों ने झेली थी मानसिक यंत्रणा

दूसरी तरफ फोरैंसिक टीम ने तमंचा, राइफल तथा कारतूसों को साक्ष्य के तौर पर सील कर दिया. एएसपी त्रिभुवन सिंह ने सुभाष के मोबाइल को जांच हेतु जाब्ते में शामिल कर लिया. पूरे घर को खंगालने के बाद पुलिस ने सुभाष बाथम के मकान को सील कर के बाहर पुलिस का पहरा बिठा दिया.

इधर आईजी मोहित अग्रवाल ने डीएम मानवेंद्र सिंह, विधायक नागेंद्र सिंह राठौर, एसपी डा. अनिल कुमार मिश्र और गांव वालों की मौजूदगी में बंधक बनाए गए कुछ बच्चों से बातचीत की. इन में गांव के दिवंगत नरेंद्र की 13 वर्षीय बेटी अंजलि भी थी. अंजलि नौवीं कक्षा की छात्रा थी, समझदार. अंजलि ने कैद के दौरान उन 11 घंटों की खौफनाक दास्तां बताई तो सभी के रोंगटे खड़े हो गए.

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अंजलि ने बताया कि जब वह चाचा (सुभाष) के घर पहुंची तो तहखाने में 12 बच्चे मौजूद थे.

इस के बाद धीरेधीरे उस की तरह 24 बच्चे आ गए. बच्चों को एक दरी दी गई, सब उसी पर बैठ गए. वहां जन्मदिन मनाने जैसा कोई इंतजाम नहीं था, जिस से उस के मन में कुछ संशय हुआ.

कुछ देर में बच्चे शोर मचाने लगे तो सुभाष चाचा ने उन्हें डांटा और धमकी दी कि शोर मचाया तो बम से उड़ा देंगे. धमकी से बच्चे डर गए. इस के बाद तो बच्चों की सिसकियों पर भी पाबंदी लग गई. भूख और प्यास पर खौफ हावी हो गया. सामने मौत खड़ी थी, लेकिन कोई आवाज भी निकालता तो दूसरा बच्चा उस के मुंह पर हाथ लगा देता.

खौफनाक मंजर का हाल बताते समय अंजलि के चेहरे पर दहशत झलक रही थी. उस ने बताया कि तहखाने के अंदर एक बोरी में बारूद रखा था, जिस में बिजली का तार लगा था. एक 5 किलोग्राम का गैस सिलेंडर भी रखा था. उस में से भी तार निकला था, जो ऊपर कमरे की ओर गया था.

सुभाष चाचा बारबार धमकी दे रहे थे कि अगर मुंह से आवाज निकाली तो सब को बम से उड़ा देंगे. धमकी देने के बाद चाचा तहखाने से बाहर गए तो उस ने लपक कर तहखाने का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. फिर चाचा के कहने पर भी नहीं खोला.

अंजलि ने बताया कि जब उस की निगाह बोरी और सिलेंडर पर पड़ी तो उसे लगा कि चाचा बोरी में रखे बारूद से ही उड़ाने की धमकी दे रहा है. उस ने हिम्मत जुटा कर बोरी के बाहर निकला तार दांत से काट दिया, फिर गैस सिलेंडर से निकला तार भी दांत से काट दिया. चाची (रूबी) ने दरवाजे के नीचे से बिसकुट और खाना दिया, लेकिन किसी ने कुछ नहीं खाया और चुप रहे. रात करीब डेढ़ बजे पुलिस के कहने पर उस ने अंदर से दरवाजा खोला.

सुभाष और रूबी का शव कोई भी लेने को तैयार नहीं था, उस की मां सुरजा देवी भी इनकार कर चुकी थी. अंतत: पुलिस ने दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया.

सुभाष कौन था, वह अपराधी कैसे बना, उस ने मासूम बच्चों को बंधक क्यों बनाया, उस की पत्नी रूबी ने उस का साथ क्यों दिया? यह सब जानने के लिए अतीत में लौटना होगा.

फर्रुखाबाद जिले के थाना मोहम्मदाबाद क्षेत्र में एक गांव है करथिया. इटावा बेबर रोड पर बसा यह गांव जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर है. करथिया में 300 परिवार रहते हैं और यहां की आबादी है 1200. ज्यादातर परिवार खेतीकिसानी करते हैं. गरीब परिवार अधिक हैं जो मेहनतमजदूरी कर अपनी जीविका चलाते हैं.

इसी करथिया गांव के जगदीश प्रसाद बाथम का बेटा था सुभाष. वह शुरू से ही क्रोधी और सनकी था. वह आवारा लोगों के साथ घूमता, उन के साथ बैठ कर शराब पीता, शराब पी कर उत्पात मचाता.

मात्र 13 साल की उम्र में सुभाष चोरी करने लगा. सन 1998-99 में उस पर चोरी के 2 मुकदमे दर्ज हुए, जिन के इलजाम में थाना मोहम्मदाबाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया. जेल से बाहर आने के बाद वह फिर अपराध करने लगा. वह जबरदस्ती घर का अनाज बेच देता, मां विरोध करती तो उस के साथ मारपीट करता. पति की मौत के बाद दुष्ट बेटे से तंग आ कर सुरजा देवी अपनी बहन के घर अहकारीपुर जा कर रहने लगी.

स्वभाव से चिड़चिड़ा और सनकी था सुभाष

सुभाष की मौसी सुमन इसी करथिया गांव में मेघनाथ को ब्याही थी. मेघनाथ गांव के स्कूल में चपरासी था. सुभाष का मौसा मेघनाथ सुभाष को इसलिए पसंद नहीं करता था क्योंकि वह चोरी करता था. मेघनाथ उसे सुधर जाने की नसीहत देता था. इस के चलते सुभाष अपने मौसा से खुन्नस खाने लगा था. इसी खुन्नस में उस ने 25 नवंबर, 2001 की सुबह 8 बजे चाकू घोंप कर मौसा मेघनाथ की हत्या कर दी.

सुमन ने पति की हत्या की रिपोर्ट सुभाष के खिलाफ लिखवाई. थाना मोहम्मदाबाद पुलिस ने सुभाष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. सन 2005 में सुभाष को 10 साल की सजा सुनाई गई. सजा की अवधि 2015 में पूरी हुई. उस के बाद वह जेल से घर आ गया और मेहनतमजदूरी कर के अपना भरणपोषण करने लगा. हालांकि उस ने चोरी करना अब भी नहीं छोड़ा था.

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सुभाष की गांव के वीरपाल कठेरिया से दोस्ती थी. दोनों साथ बैठ कर शराब पीते थे. एक दिन सुभाष की नजर वीरपाल कठेरिया की साली रूबी पर पड़ी. पहली ही नजर में रूबी सुभाष के मन को भा गई. उस ने रूबी के सामने प्यार का इजहार किया और शादी का प्रस्ताव रखा. रूबी राजी हो गई. इस के बाद सुभाष ने रूबी के साथ प्रेम विवाह कर लिया. दलित की बेटी बाथम परिवार में बहू बन कर आई तो बाथम बिरादरी के लोगों ने सुभाष का बहिष्कार कर दिया.

रूबी से शादी करने के बाद सुभाष ने अपनी 4 बीघा जमीन बेच दी. इस पैसे से उस ने बंकरनुमा घर बनाया. घर के भीतर के गोपनीय ठिकानों की किसी को जानकारी न हो, इस के लिए उस ने बाहर से राजमिस्त्री या मजदूर बुलाने के बजाय पत्नी के साथ मिल कर निर्माण किया. कमरे के अंदर ही उस ने तहखाना बनाया. इसी बीच उस ने सरकारी कालोनी तथा शौचालय पाने का प्रयास किया, लेकिन मिला कुछ नहीं.

सन 2019 के जनवरी महीने में रूबी ने एक बच्ची को जन्म दिया. बेटी गौरी के जन्म से रूबी सुभाष दोनों खुश थे. गौरी अभी 6 महीने की थी कि एसओजी ने सुभाष को फतेहगढ़ में हुई चोरी के आरोप में पकड़ लिया. पुलिस ने उस को खूब टौर्चर किया और जेल में भेज दिया.

3 महीने पहले वह जमानत पर घर आया तो उस के मन में टीस बनी रही. यह भी खुन्नस थी कि बिरादरी के लोग उस का साथ नहीं देते थे. उस के मन में इस बात की टीस भी थी कि सरकारी सिस्टम से उसे कोई मदद नहीं मिल रही थी. उसे टौर्चर करने वाली पुलिस, ग्रामप्रधान, जो उस के खिलाफ थी, पर भी गुस्सा था.

खतरनाक इरादा था

इसी सब की वजह से सुभाष ने कुछ ऐसा धमाका करने की सोची, जिस से वह सब से हिसाब बराबर कर सके. सुभाष को मोबाइल फोन चलाना अच्छी तरह आता था. उस ने गूगल व यूट्यूब से सर्च कर के बम बनाना और इस के लिए उपकरण बनाना सीखा. गूगल सर्च में ही उस ने मास्को (रूस) में बंधक बनाए गए बच्चों का वीडियो देखा.

वीडियो को देख कर उस ने भी मासूम बच्चों को बंधक बनाने की योजना तैयार की. इस के बाद वह तैयारी में जुट गया. उस ने अपने घर को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया. उस के पास तमंचा व राइफल पहले से ही थी. सुभाष ने कारतूस भी खरीद कर रख लिए.

30 जनवरी को उस की बेटी का बर्थडे था. उस ने दोपहर बाद से बच्चों को बर्थडे पार्टी में बुलाना शुरू कर दिया. 3 बजे तक 24 बच्चे उस के घर आ गए.

इन बच्चों को उस ने तहखाने में बंधक बना लिया और धमकी दी कि शोर मचाया तो वह सब को बम से उड़ा देगा. घटना की जानकारी तब हुई, जब बबली अपने बच्चों को बुलाने गई. इस के बाद पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस ने सर्च औपरेशन कर बंधक बच्चों को छुड़ाया और अपराधी को मार गिराया.

7 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने 5, कालिदास मार्ग स्थित आवास पर सभी 24 बच्चों को सम्मानित किया. योगी ने इस अवसर पर मारे गए सुभाष बाथम की बेटी गौरी की परवरिश सरकार द्वारा किए जाने की घोषणा की.

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इस के अलावा सिलेंडर बम का तार निकाल कर तहखाने में बंधक बच्चों की जान बचाने वाली 13 वर्षीया अंजलि को बतौर पुरस्कार 51 हजार रुपए दिए जाने की घोषणा की. उसे एक टैबलेट दे कर सम्मानित भी किया.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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