बर्दाश्त की हद – भाग 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

निकिता और रेखाबेन का आए दिन का झगड़ा आम सास बहू के झगड़ों और कहासुनी से अलग नहीं था. लेकिन यह झगड़ा तब सीमाएं लांघ गया जब सास रेखाबेन ने गर्भवती बहू के गर्भ में ससुर का बच्चा होने का इलजाम लगाया. जाहिर है कोई भी औरत ऐसा झूठा आरोप नहीं सह सकती. निकिता भी नहीं…

परिवार में सासबहू के झगड़े सैकड़ों सालों से चले आ रहे हैं. ये विवाद कभी खत्म नहीं हुए और न ही हो सकते हैं. सासबहू की लड़ाई को टीवी की महारानी एकता कपूर ने सीरियल के रूप में घरघर तक नए रूप में पहुंचाया.

संपन्न परिवारों में सास और बहू एकदूसरे को मात देने के लिए कुटिल चालों का तानाबाना बुनती रहती थीं, जिस के चलते टीवी सीरियल की कहानियां लंबी खिंचती जाती थीं. अब इन सीरियलों का दौर भले ही खत्म हो गया, लेकिन वास्तविक जीवन में सासबहू के झगड़े जारी हैं.

आज भी कोई इक्कादुक्का परिवार ही ऐसे होंगे, जहां सास और बहू में आपस में प्रेमप्यार बना हुआ हो. आमतौर पर सास अपनी बहू पर मनमर्जी थोपना चाहती है और बहू आजादी चाहती है. विवाद यहीं से शुरू होता है. यह विवाद कभीकभी इतना बढ़ जाता है कि या तो परिवार टूटने की नौबत आ जाती है या फिर अपराध की. कई बार ऐसे किस्से भी सुनने को मिलते हैं जब सास ने अपनी बहू को मार डाला.

कभी इस के उलट कहानी भी सामने आती है. यह कहानी गुजरात की राजधानी अहमदाबाद शहर की है. अहमदाबाद के गोता इलाके में स्थित पौश आवासीय सोसायटी रौयल होम्स में फर्स्ट फ्लोर पर बने फ्लैट में रामनिवास अग्रवाल का परिवार रहता है. उन का शहर में पत्थर, टाइल्स का बड़ा कारोबार है. बेटा दीपक भी उनके साथ व्यापार में हाथ बंटाता है.

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घरपरिवार में मौज थी. केवल 4 सदस्यों के इस परिवार में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. खुद रामनिवास अग्रवाल, उन की पत्नी रेखा बेन, बेटा दीपक और बहू निकिता उर्फ नायरा. रामनिवास की उम्र कोई 55 साल है. उन की पत्नी रेखा करीब 52 साल की थी. बेटा दीपक लगभग 30-32 साल का और बहू निकिता करीब 29 साल की.

दीपक की शादी इसी साल 16 जनवरी को निकिता से हुई थी. निकिता राजस्थान के जिला अजमेर के ब्यावर निवासी सुरेशचंद्र अग्रवाल की बेटी है. रामनिवास भी मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले हैं.

उन का परिवार पहले पाली जिले में सुमेरपुर के पास जवाई बांध इलाके में रहता था. बाद में रामनिवास व्यापार के सिलसिले में अहमदाबाद चले गए. वहां उन का कारोबार अच्छा चल गया.

रामनिवास भले ही गुजरात में बस गए थे, लेकिन राजस्थान की माटी से उन का मोह नहीं छूटा था. इसलिए बेटे दीपक के लिए जब राजस्थान के ब्यावर से निकिता का रिश्ता आया, तो उन्होंने घरपरिवार देख कर हामी भर दी.

वैसे भी ब्यावर के रहने वाले सुरेशचंद्र अग्रवाल साधन संपन्न थे. उन का भी अच्छा कारोबार था. पैसों की कोई कमी नहीं थी. निकिता में भी कोई कमी नहीं थी. तीखे नाकनक्श वाली निकिता ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से एमकौम तक की पढ़ाई करने के बाद सिक्किम यूनिवर्सिटी से फायनेंस में एमबीए की डिगरी भी हासिल की थी.

दीपक और निकिता की शादी हो गई. शादी में सुरेशचंद्र अग्रवाल ने दिल खोल कर पैसा खर्च किया. किसी बात की कमी नहीं छोड़ी. पत्नी के रूप में सुंदर और पढ़ीलिखी निकिता को पा कर दीपक भी निहाल हो गया. दीपक भी हैंडसम था. निकिता भी पति के रूप में दीपक को पा कर खुद पर अभिमान करती थी.

अपनों ने दिया धोखा : भाग 1

दोनों का दांपत्य जीवन खुशी से चलने लगा. निकिता की भले ही शादी हो गई थी, लेकिन पीहर से उस का मोह नहीं छूटा था. वह पीहर जाती, तो महीनेबीस दिन में आती. हालांकि इस बीच मार्च में लौकडाउन हो गया था.

लौकडाउन के दौरान निकिता को करीब 3-4 महीने पीहर में ही गुजारने पड़े. उस का कहना था कि ट्रेन और बसें बंद होने तथा एक से दूसरे राज्य में लोगों की आवाजाही पर रोक होने से वह अहमदाबाद नहीं जा सकी थी.

पढ़ीलिखी बहू और गृहिणी सास की नोंकझोंक

बहू निकिता के ज्यादा समय पीहर में रहने से सास रेखा बेन को कोई सुख नहीं मिल पा रहा था. वैसे तो घर में कामकाज के लिए बाई आती थी. फिर भी रेखा बेन चाहती थी कि कोई उस की भी देखभाल करने वाला हो.

बहू उस के कामकाज में हाथ बंटाए. इस बात को ले कर रेखा और निकिता में कई बार खटपट हो जाती थी. दहेज को ले कर भी रेखा उसे ताने मारती और उस के कामकाज में मीनमेख निकालती रहती थी.

वैसे भी आमतौर पर बढ़ती उम्र के लिहाज से हर महिला चाहती है कि जैसे उस ने घर को संवारा है, वैसे ही बहू भी घरपरिवार की जिम्मेदारी संभाले, लेकिन निकिता शादी के बाद आधे से ज्यादा समय पीहर में ही रही थी. ऐसी हालत में रेखा बेन को ही घरपरिवार में खटना पड़ता था. उसी पर पति की जिम्मेदारी थी और बेटे की भी. इसी बीच, अक्तूबर के महीने में निकिता के दादा का निधन हो गया, तो वह फिर अपने मायके चली गई. इस बार भी वह मायके में कुछ ज्यादा दिन रुक गई. ससुर और पति ने कई बार फोन किए, तो वह 21 अक्तूबर को अहमदाबाद लौट आई.

ससुराल आ कर निकिता ने पति और सास को अपने गर्भवती होने की बात बताई. यह सुन कर दीपक तो खुशी से झूम उठा, लेकिन रेखा बेन के माथे पर सिलवटें पड़ गई. रेखा बेन को बहू के गर्भवती होने से कोई खुशी नहीं हुई. उसे शक था कि निकिता के पेट में बेटे दीपक का नहीं बल्कि ससुर रामनिवास का गर्भ है.

रेखा बेन को अपने पति पर भी शक था. उस का शक इसलिए भी था कि ससुर और बहू खूब हंसबोल कर बातें करते थे. मोबाइल पर चैटिंग भी करते थे. हालांकि रेखा बेन ने कभी ससुर और बहू को गलत हरकत करते हुए नहीं देखा, लेकिन उस के दिमाग में शक का कीड़ा कुलबुलाता रहता था. रेखा पहले से ही बहू से खुश नहीं थी. अब उसे उस के चरित्र पर भी शक होने लगा था. शक ऐसा कीड़ा है, जिस का कोई इलाज नहीं है. रेखा पहले तो दहेज को ले कर और उस के कामकाज तथा पीहर में ज्यादा समय रहने पर ऐतराज उठाती थी. अब वह उस के चरित्र पर भी अंगुली उठाने लगी.

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इस से सासबहू के झगड़े बढ़ गए. रेखा को जब भी मौका मिलता, वह निकिता को ताने मारने से नहीं चूकती. रोजाना दिन में 2-4 बार किसी न किसी बात पर रेखा और निकिता में कहासुनी हो ही जाती थी. रेखा बहू की शिकायत अपने बेटे और पति से करती, तो वह हंस कर टाल देते थे.

इस बीच, रामनिवास कोरोना से संक्रमित हो गया. उसे 24 अक्तूबर को निजी अस्पताल में भरती करा दिया गया. पति के कोरोना संक्रमित होने से रेखा बेन चिड़चिड़ी हो गई.

इस के बाद 27 अक्तूबर की रात करीब 8 बजे की बात है. घर पर केवल रेखा और निकिता ही थी. दीपक अपने टाइल्स, पत्थर के औफिस गया हुआ था. रेखा उस समय रसोई में रात के भोजन की तैयारी कर रही थी.

इसी दौरान रेखा अपनी बहू को ताने मारने लगी. रेखा के हाथ में लोहे का एक पाइप था. वह उस पाइप को निकिता के पेट पर धंसा कर कहने लगी, तेरे पेट में ये जो बच्चा है, वह मेरे बेटे का नहीं बल्कि मेरे पति का है.

बर्दाश्त की हद

बर्दाश्त की हद – भाग 2

सौजन्य- मनोहर कहानियां

निकिता बर्दाश्त नहीं कर पाई

सास के मुंह से ऐसी बातें सुन कर निकिता को गुस्सा आ गया. उस ने रेखा के हाथ से वह पाइप छीन लिया और बिना सोचेसमझे उस के सिर में दे मारा.

50-52 साल की रेखा बेन जवान बहू का विरोध नहीं कर सकी. उस के सिर से खून बहने लगा. वह फर्श पर गिर पड़ी. इस के बाद भी निकिता का गुस्सा शांत नहीं हुआ.  उस ने पाइप से सास के सीने, पेट और चेहरे पर कई वार किए. पाइप के लगातार हमलों को रेखा सहन नहीं कर सकी. उस के शरीर से कई जगह से खून रिसने लगा और थोड़ी ही देर में उस के प्राण निकल गए.

जब निकिता का गुस्सा शांत हुआ, तो वह घबरा गई. उस की सोचनेसमझने की शक्ति जवाब दे गई थी. कुछ देर बैठ कर वह सोचती रही कि अब क्या करे? कुछ देर विचार करने के बाद उस ने सास की हत्या को आत्महत्या का रूप देने की योजना बनाई.

उस ने फ्लैट में ही रेखा के शव पर चादर डाल कर उसे जलाने का प्रयास किया. उसे यह नहीं पता था कि इंसान का शव इतनी आसानी से नहीं जलता. शव नहीं जला, तो वह हताश हो कर अपना सिर पकड़ कर बैडरूम में जा बैठी.

इस बीच, पड़ोसियों ने सासबहू के बीच झगड़े और मारपीट की तेज आवाजें सुनीं, तो उन्होंने रामनिवास के फ्लैट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन निकिता ने दरवाजा नहीं खोला. कई बार घंटी बजाने और कुंडी खटखटाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों ने रामनिवास को फोन किया. रामनिवास अस्पताल में थे. पड़ोसी की बात सुन कर वे चिंतित हो उठे. उन्होंने बेटे दीपक को तुरंत घर जाने को कहा. दीपक उस समय अपना औफिस बंद कर चाणक्यपुरी ब्रिज स्थित मंदिर में हनुमानजी के दर्शन करने गया हुआ था. वह रात करीब साढ़े 9 बजे फ्लैट पर पहुंचा.

उस ने घंटी बजाई, लेकिन निकिता ने गेट नहीं खोला. उस ने गेट की कुंडी भी खटखटाई, लेकिन फिर भी दरवाजा नहीं खुला, तो उस ने मां और बीवी के मोबाइल पर फोन किया, लेकिन दोनों ने ही फोन नहीं उठाया. उसे लगा कि निकिता ने मां से झगड़े के बाद गेट बंद कर लिया होगा और अब वह गुस्से में गेट नहीं खोल रही है.

मां की लाश देख होश उड़े

थकहार कर उस ने पड़ोसियों की सीढि़यों के रास्ते अपने फ्लैट में जाने की कोशिश की, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली. बाद में उस ने पड़ोसियों से पाइप की बनी सीढ़ी का इंतजाम किया. इस सीढ़ी पर चढ़ कर वह रसोई के रास्ते अपने फ्लैट में पहुंचा. उस की मां का कमरा बंद था. उस ने कमरा खोला, तो मां की खून से लथपथ अधजली लाश देख कर दीपक सहम गया. मां की लाश के पास ही खून से सना लोहे का एक पाइप पड़ा था. निकिता अपने बैडरूम में चुपचाप बैठी थी. उस ने उस से पूछा कि यह सब क्या और कैसे हुआ?

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निकिता ने दीपक को बताया कि मम्मीजी ने पहले उस से झगड़ा किया. फिर वे अपने कमरे में चली गईं. पता नहीं उन्होंने खुद कैसे अपना यह हाल बना लिया? शायद उन्होंने सुसाइड कर लिया.

दीपक को निकिता की बातें गले नहीं उतर रही थीं. अगर रेखा बेन सुसाइड करतीं, तो खून से लथपथ कैसे हो जातीं और फिर उन का शव कैसे जलता? दीपक ने निकिता से पूछा कि घर में कोई और आदमी आया था क्या? निकिता ने मना कर दिया.

दीपक ने रात को ही फोन नंबर 108 पर एंबुलेंस सेवा को फोन किया. एंबुलेंस के साथ आए डाक्टर और चिकित्साकर्मियों ने रेखा बेन की जांच कर उसे मृत घोषित कर दिया. इस के बाद दीपक ने पुलिस को फोन किया.

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पुलिस उस के फ्लैट में पहुंच गई. पुलिस ने दीपक से पूछताछ की. दीपक ने पिता का फोन आने से ले कर सीढ़ी के रास्ते फ्लैट में चढ़ने और मां का लहूलुहान शव पड़ा होने की सारे बातें बता दीं.

पुलिस ने निकिता से पूछताछ की, तो उस ने वही बातें कहीं, जो दीपक को बताई थीं.

मौके के हालात देख कर पुलिस को भी निकिता की कहानी पर भरोसा नहीं हुआ. रात ज्यादा हो गई थी. फिर भी पुलिस ने रात को ही घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी.

बर्दाश्त की हद – भाग 3

सौजन्य- मनोहर कहानियां

फुटेज में इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि दीपक के फ्लैट में बाहर से कोई आदमी आया था. पुलिस ने पंचनामा बना कर शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया. मामला संदिग्ध था. इस के लिए निकिता से पूछताछ जरूरी थी. पुलिस उसे थाने ले गई.

दीपक की शिकायत पर सोला थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया. पुलिस ने मौके से खून से सना लोहे का पाइप बरामद कर लिया था.

पुलिस ने थाने में निकिता से पूछताछ की. वह कहती रही कि सास और उस का झगड़ा हुआ था. इस के बाद सास अपने कमरे में चली गई और अंदर से कमरा बंद कर लिया. बाद में कैसे और क्या हुआ, इस का उसे कुछ पता नहीं है.

निकिता ने पुलिस को बताया कि उस की सास पिछले कुछ सालों से ऐसी बीमारी से पीडि़त थी कि कोई उसे छू ले, तो वह तुरंत नहाती थीं. मैडिकल की भाषा में इस बीमारी को औब्सेसिव कंपजिव डिसऔर्डर (ओसीडी) कहा जाता है. दीपक ने भी अपनी मां के ऐसी बीमारी से ग्रस्त होने की बात मानी.

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पुलिस ने दीपक से उस के घरपरिवार और सासबहू के रिश्तों के बारे में पूछा. इस में पता चला कि रेखा बेन और निकिता में दहेज और घरेलू कामकाज को ले कर झगड़े होते रहते थे. इस पर पुलिस अधिकारियों ने निकिता से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की.

आखिर दूसरे दिन 28 अक्तूबर को सुबह निकिता ने जो बताया, उसे सुन कर पुलिस के अधिकारी भी हैरान रह गए. निकिता ने बताया कि उस की सास पुराने खयालों की थी. वह उसे कभी दहेज पर तो कभी किसी दूसरी बात पर ताने मारती थी. शादी के बाद से ही सास से उस की पटरी नहीं बैठी थी.

अभी जब वह पीहर से ससुराल आई और मम्मीजी को अपने गर्भवती होने की बात बताई, तो उन की त्यौरियां चढ़ गईं. उस दिन तो उन्होंने कुछ नहीं कहा. ससुरजी के अस्पताल में भरती होने के बाद मम्मीजी मेरे गर्भ को ले कर अनापशनाप बातें कहने लगीं.

उस दिन जब उन्होंने उस से गर्भ ससुर का होने की बात कही, तो गुस्से में वह अपना आपा खो बैठी और उन के हाथ से पाइप छीन कर ताबड़तोड़ हमले किए. इस से उन की मौत हो गई. निकिता ने सास की हत्या करने की बात कबूल कर ली थी.

उस ने पुलिस को बताया कि सास की हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए उस ने वहां फैले खून को चादर से साफ किया. फिर शव पर चादर डाल कर आग लगा दी ताकि शव जल जाए, लेकिन शव नहीं जला. इस के बाद उस ने अपने मोबाइल से ससुर के वाट्सएप चैट और मैसेज डिलीट किए.

मोबाइल से मैसेज डिलीट करने की बात सामने आने पर पुलिस ने निकिता के साथ परिवार के चारों लोगों के मोबाइल जब्त कर लिए. इन की जांच की, तो निकिता के मोबाइल में एक मैसेज मिला. 24 अक्तूबर के इस मैसेज में ससुर रामनिवास ने लिखा था कि तुम अभी दीपक से दूर ही रहना.

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स्वीकारोक्ति के बाद

निकिता की स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस ने निकिता और उस की सास के खून से सने कपड़े भी जब्त कर लिए. मोबाइल फोन के साथ इन कपड़ों को भी जांच के लिए विधिविज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया गया.

एफएसएल टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए. पुलिस ने दूसरे दिन डाक्टरों के मैडिकल बोर्ड से रेखा बेन के शव का पोस्टमार्टम कराया. बाद में दीपक को शव सौंप दिया गया. घर वालों ने रेखा बेन का अंतिम संस्कार कर दिया.

कोरोना जांच में निकिता निगेटिव मिली. इस के बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया. पुलिस ने निकिता को उस के फ्लैट पर ले जा कर वारदात का सीन रिक्रिएट किया.

इस दौरान पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि निकिता और रेखा बेन के बीच झगड़ा कैसे शुरू हुआ होगा. इस के बाद निकिता ने कैसे उस की हत्या की होगी. सीन रिक्रिएट के जरिए पुलिस ने यह बात जानने की भी कोशिश की कि क्या निकिता ने अकेले ही सास की हत्या की या इस में किसी दूसरे आदमी ने भी उस की मदद की? हालांकि पुलिस को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला.

बेटी के हाथों सास की हत्या की सूचना मिलने पर राजस्थान के ब्यावर शहर से निकिता के मातापिता अहमदाबाद पहुंचे. पहले वे समधन रेखा बेन की अंतिम क्रिया में शरीक हुए. बाद में वे सोला पुलिस स्टेशन जा कर हत्या आरोपी बेटी निकिता से मिले.

उसे पुलिस हिरासत में देख कर मांबाप के आंसू बह निकले. निकिता भी रो पड़ी. सुबकते हुए उस ने अपने मातापिता से केवल इतना ही कहा, ‘मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई.’

पुलिस ने जांचपड़ताल के दौरान पड़ोसियों से भी पूछताछ की. उन्होंने बताया कि रेखा और निकिता के बीच आमतौर पर रोजाना ही किसी ना किसी बात पर झगड़ा होता था. उस दिन भी उन्होंने दोनों के बीच झगड़े और मारपीट की तेज आवाजें सुनी थीं. इस के बाद ही रामनिवास को फोन किया था.

कथा लिखे जाने तक पुलिस ने निकिता को जेल भिजवा दिया था. पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही थी कि क्या निकिता के अपने ससुर से किसी तरह के संबंध थे? हालांकि पुलिस को एक मोबाइल चैटिंग के अलावा इस बारे में दूसरा कोई प्रमाण नहीं मिला. मोबाइल चैटिंग से भी यह बात साफ नहीं होती कि निकिता के ससुर से किसी तरह के संबंध थे.

बहरहाल, 2 महीने की गर्भवती निकिता अपनी सास की हत्या के आरोप में जेल पहुंच गई. ससुर रामनिवास पर बहू से संबंधों का आरोप लग गया. पति दीपक बीच मंझधार में फंस गया.

उस के सामने संकट आ खड़ा हुआ कि वह पिता पर शक करे या पत्नी पर. निकिता के पेट में किस का गर्भ है, यह तो वही जाने. शक की बुनियाद पर एक खातेपीते संपन्न परिवार के रिश्तों में ऐसी दरार आ गई, जो जिंदगी भर नहीं पाटी जा सकती.

जुड़वा स्टार बहनें ‘चिंकी-मिंकी’

जुड़वा बच्चों का जीवन हमेशा ही चर्चा का विषय रहा है. इस को ले कर कई फिल्में भी बनीं और उपन्यास भी लिखे गए. कह सकते हैं यह विषय हमेशा से रोचक रहा है. दिल्ली की रहने वाली ‘चिंकी- मिंकी’ ने जब टिकटौक और इंस्टाग्राम पर अपने रोचक वीडियो पोस्ट करने शुरू किए तो रातोंरात वे मशहूर हो गईं.

अपनी इस खासियत को अपना हुनर बना कर ‘चिंकी-मिंकी’ ने खुद को टीवी की दुनिया में भी स्थापित कर लिया है. अब वे फैशन, टीवी और फिल्मों की दुनिया में अपना नाम कमाना चाहती हैं. कम उम्र में ही दोनों ने दौलत और शोहरत दोनों ही हासिल कर ली है. ‘चिंकी-मिंकी’ दोनों में ही भरपूर ग्लैमर है. जिस की वजह से वे लगातार हिट हो रही हैं.

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भारत और चीन के विवाद में भले ही टिकटौक को बंद कर दिया गया हो, पर टिकटौक पर वीडियो बना कर मशहूर होने वालों की संख्या कम नहीं है. छोटे शहरों और गांव के युवा अपने वीडियो बना कर खूब मशहूर हुए हैं. ‘चिंकी-मिंकी’ उन में सब से मशहूर हैं.

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दिल्ली की रहने वाली चिंकी मिंकी जुड़वा बहनों के असली नाम सुरभि मेहरा और समृद्धि मेहरा हैं. ये दोनों टिकटौक की पापुलर स्टार्स हैं. इन दोनों के टिकटौक पर करीब 10 लाख फालोअर्स हैं. 2019 के टौप 5 वायरल वीडियो में से एक वीडियो इन दोनों का भी था.

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खास बात यह है कि दोनों सिर्फ टिकटौक पर ही नहीं, बल्कि इंस्टाग्राम पर भी बेहद मशहूर हैं. चिंकी और मिंकी का नाम इतना मशहूर हुआ कि दोनों के असली नाम सुरभि मेहरा और समृद्धि मेहरा को लोग भूल ही गए हैं.

दिल्ली की रहने वाली इन दोनों जुड़वा बहनों के जीवन में तमाम ऐसे पल मौजूद हैं, जो मुश्किल और हास्यपूर्ण भी रहे हैं. दोनों को देख कर अंदाज लगाना मुश्किल है कि किस का क्या नाम है.

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चिंकी और मिंकी दोनों केवल 60 सेकेंड के अंतर से छोटी और बड़ी बहनें हैं. चिंकी यानी सुरभि मेहरा बड़ी और मिंकी यानी समृद्धि मेहरा छोटी है. समृद्धि मेहरा की आवाज थोड़ी पतली है. इन का जन्म दिसंबर 1998 में हुआ था. चिंकी और मिंकी दोनों की पढ़ाई दिल्ली से हुई. 12वीं क्लास में चिंकी ने 92 फीसदी और मिंकी ने 89 फीसदी नंबर हासिल किए.

चिंकी और मिंकी ने स्नातक की पढ़ाई कालेज औफ वोकेशनल स्टडीज शेख सराय, नई दिल्ली से पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही चिंकी और मिंकी टिकटोक पर वीडियो बनाने लगी. ये दोनों ही बहनें स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करना चाहती थीं. इन की तैयारी कनाडा जाने की थी. इसी बीच मशहूर हास्य टीवी सीरियल ‘द कपिल शर्मा शो’ में औडिशन के लिए इन्होंने अपना वीडियो भेजा तो उन को सिलेक्ट कर लिया गया.

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यह बात जब दोनों ने अपने पैरेंट्स को बताई तो उन्हें लगा कि दोनों मस्तीमजाक कर रही हैं. जब उन को पता चला कि यह सच बोल रही हैं तो इन को शूटिंग के लिए मुंबई बुलाया गया. वहां इन लोगों ने स्क्रिप्ट याद कर के मेहनत से अपना किरदार निभाया और इन के लिए सफलता का रास्ता खुल गया. अब चिंकी मिंकी ने जौब करने का फैसला दरकिनार कर दिया है. दोनों अलगअलग फैशन ब्रांड के लिए फोटो शूट और तमाम दूसरे तरह के काम करने लगी हैं.

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सुरभि और समृद्धि मेहरा में सब से खास बात यह है कि दोनों हुबहू एक जैसी हैं. दोनों अपने हेयरस्टाइल और गेटअप को भी एकदूसरे से पूरी तरह मैच रखती हैं. चिंकी मिंकी को देख कपिल शर्मा भी कंफ्यूज हो गए थे. चिंकी बताती है कि उन्हें खुद उन के पैरेंट्स नहीं पहचान पाते थे. ऐसे में कई बार बीमार एक होती थी और दवाई दूसरी को खिला दी जाती थी.

22 साल की उम्र में ही इन का फीगर 32-28-32 किसी अभिनेत्री को मात देता है. इस से साफ लगता है कि फिल्मों में भी ये बहुत आसानी से सफल हो सकती हैं. फैशन ब्रांड, फोटो शूट, वीडियोज और इवेंट के जरिए ये दोनों बहनें 1 से 2 लाख रुपए हर माह कमा लेती हैं. इन की अपनी सालाना कमाई 70 से 80 लाख के करीब होगी.

चिंकी मिंकी दोनों को ही घूमने का बेहद शौक  है. इन दोनों को अपने वीडियो बनाने, पबजी खेलने का भी शौक है. इन का पहला वीडियो ‘चिंकी मिंकी झाबुआ इंदौर ब्लौग’ था. इसे बहुत सफलता मिली. चिंकी मिंकी दोनों को ही अपना फीगर बनाए रखने का बेहद शौक  है.

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ऐसे में ये खानेपीने का बहुत ख्याल रखती हैं. इस के बाद भी कभीकभार चौकलेट और पिज्जा खाती हैं. टमाटर सूप इन को बेहद पसंद है. फलों में आम खाने का शौक है और पहनने में काला और पीला रंग बेहद पसंद है. चिंकी मिंकी दोनों को ही दूसरों को चौंकाने में मजा आता है. इस कारण दोनों एक जैसे कपड़े पहनती हैं और एक जैसे हावभाव प्रदर्शित करती हैं. उन की बातों से किसी को यह पता नहीं चलता कि कौन चिंकी है कौन मिंकी.

दोनों की आवाज में थोड़ा सा अंतर है. इस के अलावा हावभाव और बातचीत करने के अंदाज में अंतर है. यह अंतर वही पकड़ सकता है जो लगातार इन के साथ रहता हो, इन्हें पूरी तरह से समझता हो. सामान्य लोगों के लिए इस अंतर को पकड़ना सरल नहीं है. जिस से ये सभी को चौंकाती रहती हैं.

Serial Story : निर्दय दीवान सालम सिंह- भाग 2

‘‘हम लोग गुलाम हैं. हमें खरीदा बेचा जाता है. दहेज में दिया जाता है. तेरे मौसा को भी दहेज में दे दिया गया था. मैं अकेली रह गई हूं न. हम गुलामों की नियति यही है. पति, सासससुर, मांबाप की बात करती हो. तुम्हारा ससुराल पिथला गांव में है न. ठाकुर दानसिंह के यहां तुम्हारे ससुराल वाले गोले हैं. अगर ठाकुर सा ने तुझे अपनी बेटी के दहेज में दे दिया तो तू क्या कर लेगी. कहां होगी तेरी ससुराल. कौन होंगे तेरे पति, सासससुर… बातें करती है.’’ गुलाबी को कस्तूरी की बातों पर गुस्सा आ गया.

‘‘मैं भी इंसान हूं. औरों की तरह मेरा भी घरपरिवार हो. यह सपना तो सभी का होता है.’’ कस्तूरी बोली.

‘‘जानती है, जो सुखी हैं, सुख की नींद सोते हैं, उन्हीं को सपने देखने का अधिकार है, हम लोगों को नहीं. हमें चैन की जिंदगी नसीब नहीं. गुलाम का अपना क्या होता है. तो उस के सपने भी कैसे अपने हो सकते हैं.’’ गुलाबी की आवाज भर्राने लगी.

कस्तूरी ने उस की पीठ सहलाई. वह भीगी आंखों से बोली, ‘‘अभी तक तो तुम्हारी उम्र सपने देखने की थी. आज से तुम भी हमारी तरह नरक में धकेल दी गई हो. सपने देखना छोड़ सच्चाई का सामना करो.’’

कस्तूरी रो पड़ी. गुलाबी ने उसे सांत्वना दी. उस का सिर और पीठ सहला कर उसे चुप कराती समझाती रही, ‘‘देखो, हम लोग इंसान नहीं मालिक के काम आने वाले पशु हैं. मालिक जैसा चाहे हम से काम ले. मुकलावा हुआ हो या नहीं. हो जाने के बाद क्या हमें छोड़ देंगे. यह तेरी भूल है.

‘‘शादी…शादी हमारे लिए एक रस्म भर है. होने वाली जायज या नाजायज संतानों को बाप का नाम देने की युक्ति. इस से ज्यादा कुछ नहीं. जब हमें खरीदा बेचा जा सकता है. दहेज, ईनाम में दिया जा सकता है तो कैसा पति, किस की पत्नी, किस का भाई, कौन बाप, कोई रिश्ता नहीं, कोई रिश्तेदार नहीं. ढोरडांगर की तरह कभी एक ठाण तो कभी दूसरे ठाण.’’

कस्तूरी उसे देखती रही. आज उसे मौसी में नया ही रूप दिखाई देने लगा. मौसी ही नहीं, उसे सारी दुनिया नई लगने लगी. सपनों की नहीं, क्रूर फरेबी आतंक की दुनिया. मजबूरी, लाचारी, गुरबत की दुनिया. वीभत्स, हास्यास्पद, बजबजाती दुनिया.

उस का दिलोदिमाग शून्य में कहीं लुप्त हो गया था. उसे जरा भी होश नहीं था. कब वह तैयार हुई, कब दीवान सा आए, कब वह औरत बनी. कूड़े पर फेंक दी गई जूठन. दीवट जलते रहे. लौ कांपती हुई बाती से बंधी नाचती रही. धुएं की गंध के साथ पीला उजास सारे घर में भरता रहा. वह नुची हुई फूलों की तरह बिखरी पड़ी थी, जिस के फूल तोड़ कर मसल दिए गए थे और खुशबू लूटी जा चुकी थी.

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रात अपने पूरे अंधेरे के साथ घर पर सवार रही. दीवान के जाते ही मुंडेर पर बैठी रात चुपके से उतरी और उस के दिलोदिमाग पर छा गई. दीवान ने जातेजाते गुलाबी से कहा, ‘‘तुम जौहरी हो. क्या हीरा छिपाए बैठी थी. इसे मेरे पूछे बिना कहीं नहीं भेजोगी. मैं कल फिर आऊंगा.’’

गुलाबी ने देखा, दीवान के चेहरे पर भरपूर तृप्ति थी. दीवान दूसरे, तीसरे, चौथे कई दिन तक आया. एक दिन उस ने कहा, ‘‘गुलाबी, कस्तूरी अब मेरी हुई. अब इस का न तो गौना होगा और न ही यह कहीं जाएगी. इस के लिए मैं एक अलग नया घर बनवा दूंगा. यह वहीं रहेगी. अब इस की सारी जिम्मेदारी मेरी.’’

गुलाबी तो जैसे धन्य हो गई. उस की भांजी अब गोली नहीं, दीवान की रखैल होगी. उस के सामने दूसरा कोई देख भी नहीं सकेगा.

मगर कस्तूरी के मन में कुछ और घुमड़ रहा था. वह खुश नहीं थी. वह वहां से भाग जाना चाहती थी. पर दीवान के सामने उस का उद्धार करने वाला कौन था. उस के मन में आग लगी हुई थी. वह भी बदले की आग.

कस्तूरी को गर्भ ठहर गया था. गुलाबी ने खूब समझाया, मगर वह न मानी. उस ने विरोध का एक तरीका निकाला. उस ने तय कर लिया कि वह उसे जन्म दे कर रहेगी. समय आने पर कस्तूरी ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम रखा कोजा. वह एकदम दीवान सालम की प्रतिकृति था. कस्तूरी सोचती मेरा क्या है, मैं तो एक गोली हूं रखैल, मेरी क्या इज्जत. पर यह दुनिया के सामने दीवान के गुनाहों की सबूत की तरह घूमता रहेगा.

वही रंगरूप, कोमलता, डीलडौल. कैसे कोई झुठला सकेगा इसे कि यह दीवान सालम सिंह का एक गोली की कोख से उपजा अंश नहीं है. जबजब राजा अधम हुआ है, मंत्री ने मनमानी की है, कमजोरी का फायदा तो उठाया ही जाता है.

सालम सिंह एक ओर राज्य की आंतरिक व्यवस्था को अंकुश में रखे हुए था तो वहीं दूसरी ओर वह विपुल धनराशि देश में विभिन्न स्थानों पर रहने वाले रिश्तेदारों को भेज रहा था. रियासत के खजाने को लूटता जा रहा था. अपने मनमाने आदेश चला रहा था. किसी की हत्या करवा देता, किसी की इज्जत लूट लेता. अपने दुराचार, व्यभिचार और अत्याचारों से जनता को कुचल रहा था.

सालम सिंह अपने पिता स्वरूप सिंह की सरे दरबार हुई हत्या से इतना क्रूर दीवान बना कि उस ने महारावल को मंदिर व राजमहल में भक्ति करने तक सीमित कर के एकएक से बदला लिया. अपने पिता के हत्यारों को चुनचुन कर मारा. सालम को जब लगता कि यह व्यक्ति उस के लिए खतरा बन सकता है, तो वह उसे मरवा डालता था.

ऐसे में राजपूतों में दहशत फैल गई. कई राजपूत भाग कर बीकानेर चले गए. कई शांत हो कर बैठ गए. उन्हें लगने लगा कि सालम से पार पाना मुश्किल है.

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सालम सिंह अपनी राह निष्कंटक कर निरंकुश हो गया. अब उस के सामने कोई चुनौती नहीं थी. उस ने किसी को प्रधान सेनापति नहीं बनाया. वह काम भी अपने हाथ में ले लिया. वह किसी राजपूत को इसलिए आगे नहीं आने देना चाहता था कि आगे चल कर उसे कोई चुनौती दे.

इस दरम्यान उसने सालमसागर, स्वरूपसर और जयकिशनसर तालाब खुदवाए. उन पर पक्के घाट व बारादरियां बनवाईं. पेड़ लगवाए. सालमसागर पर प्रायद्वीप की तरह आगे की तरफ निकल आई पहाड़ी पर शानदार बुर्ज बनवाया.

Serial Story : निर्दय दीवान सालम सिंह- भाग 1

जैसलमेर रियासत का दीवान सालम सिंह अपने नए बने मोतीमहल में लेटा हुआ था. दोपहर का समय था. भोजन करने के बाद वह आराम कर रहा था. कमरा हलकी खुशबू से महक रहा था. उस के मन में अजीब सी हुलस थी. झरने से टकरा कर आ रही ठंडीठंडी हवा उस के मन में ताजगी भर रही थी.

वैसे बाहर लू चल रही थी. मगर खिड़की की जगह बने कृत्रिम झरने से पूरा कमरा ठंडा हो रहा था. तभी दरवाजा खुला. उस ने देखा झरने के पास बने दरवाजे से चांदी की सुराही में जल ले कर गुलाबी ऊपर आई. झरने के पास से आती हुई गुलाबी उसे अचानक प्रकट हुई हूर सी लगी. जैसे अभी कहेगी, ‘‘आप ने याद फरमाया हुजूर! बांदी आप की खिदमत के लिए हाजिर है.’’

वह मुसकराया. गुलाबी अपना आंचल संभालती धीरे से पास आई. सुराही आले में रख कर वह उस की तरफ भरपूर नजर से देखती हुई मुड़ी.

सालम ने उस का हाथ पकड़ लिया. गुलाबी को जैसे विश्वास ही नहीं हुआ. आज यह दीवान साहब को क्या हो गया. वह तो सालों से हवेली में काम कर रही है. आज अचानक बरसों बाद फिर इस नाचीज पर मन कैसे आ गया. हवेली में एक से बढ़ कर एक 3-3 स्त्रियां जिन के इशारे का इंतजार कर रही हैं. सुंदर, कोमलांगी, गोरी, गुदगुदी. उन के आगे वह कहां ठहरती है.

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‘‘आजकल तुम्हें मेरा खयाल ही नहीं रहा गुलाबी.’’ सालम ने उसे अपनी तरफ खींचते हुए कहा.

वह संकोच में खड़ी रही.

‘‘अब आप को गुलाबी की क्या जरूरत. आप ठहरे राज्य के दीवान. 3-3 लुगाइयों के धणी. अब आप वही मौसर फूटते छोरे नहीं रहे. आप राज के मालिक हैं.’’

गुलाबी का एक हाथ सालम की गिरफ्त में था. वह दूसरे हाथ से आंचल ठीक करने लगी.

‘‘मुझे पहला पाठ तो तूने ही पढ़ाया था. मेरी गुरु तो तू ही है.’’ सालम हंसा.

‘‘गुरु तो आप हैं, मैं तो आप की चेली हूं. एक दरोगन. बस, आप के पैरों की धूल.’’

‘‘तो आ न, खड़ी क्यों है?’’

‘‘नहींनहीं, अब आप को मुझ दासी के मुंह नहीं लगना चाहिए. आप रियासत के दीवान हैं.’’ गुलाबी हाथ खींचने का नाटक करने लगी.

सालम ने झटका दिया. वह वहीं ढेर हो गई.

‘‘गुलाबी, मैं रोज दाल खाखा कर उकता गया हूं.’’ सालम ने गुलाबी के चेहरे को हाथों में लेते हुए कहा.

‘‘तो आप कहो सो खिलाऊं.’’ गुलाबी ढुल गई.

तभी दरवाजे पर खटका हुआ. गुलाबी हड़बड़ा कर खड़ी हो गई. सालम ने देखा दरवाजे पर झरने के पास 15-16 साल की अनिंद्य सुंदरी खड़ी थी. अति साधारण कपड़ों में उस का गोरा रंग और दिव्य रूप छलक रहा था. जैसे भटकती हुई साक्षात अप्सरा आ गई  हो. दीवान सालम ने ऐसा सौंदर्य पहली बार देखा था. युवती ठिठकी सी हिरनी की तरह हैरत से उसे देख रही थी.

‘‘कस्तूरी, क्या बात है? यहां कैसे आई?’’ गुलाबी ने उस लड़की से पूछा.

मगर सालम की नजरें उस पर से हट ही नहीं रही थीं. कस्तूरी के मुंह से बोल नहीं फूट रहे थे. वह जैसे पत्थर हो गई थी. गुलाबी उस के पास गई, ‘‘यहां क्यों आई है. जा, मैं आ रही हूं.’’

कस्तूरी की मूर्ति जैसे सजीव हो गई. उस में हरकत हुई तो सालम जागा, ‘‘इसे अंदर ले आओ. कौन है यह?’’

‘‘यह कस्तूरी है. मेरी बहन की बेटी. आजकल यहां आई हुई है.’’ गुलाबी उसे अंदर ले आई.

सालम उसे देखता रह गया. गजब की सुंदरता, चेहरे पर मासूमियत. शर्मसार आंखें. लज्जा के गहनों को पलकों के कपाट से ढांके. अपने आप में सिकुड़ती. गुलाबी में खुद को छिपाने की कोशिश करती हुई.

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‘‘सुंदर…यह तो कोई हूर है.’’ सालम चकित होते हुए बोला.

‘‘आप की रैयत है. कस्तूरी चल जा, मैं आ रही हूं.’’ गुलाबी ने धीरे से कहा.

कस्तूरी तुरंत भाग गई. सालम उसे जाते देखता रहा. एक हीरे की अंगूठी उतारी. गुलाबी को देते हुए बोला, ‘‘आज से यह मेरी हुई.’’

‘‘हुकम, माफ करें, यह शादीशुदा है. बचपन में ही इस का विवाह हो गया था. मुकलावा होने वाला है.’’ अंगूठी हाथ में ही रही.

‘‘मुकलावा होता रहेगा. आज की रात तू इसे यहीं लाएगी.’’ सालम ने जोर दे कर कहा.

‘‘हुकम, मेरी बहन…’’

‘‘वह तू जाने, मुझे नहीं मालूम. यह काम तुझे करना है, बस.’’ सालम की आवाज थोड़ी कड़क हो गई.

‘‘जड़ा सोरा को जोतीजेनी. बाई काढणी पड़ै.’’ (अप्रशिक्षित को जोतना सरल नहीं है. पहले उसे प्रशिक्षित करना पड़ता है)

‘‘तो तू किसलिए है. तू तो पुरानी गुरु है.’’ सालम ने हंस कर कहा. उस ने एक और अंगूठी उतार कर गुलाबी को दिखाई.

‘‘आप इतना कह रहे हैं तो…बाकी मैं संभाल लूंगी. पर आप को रात में मेरे गरीबखाने पर पधारना होगा. उसे यहां लाना मुश्किल होगा. वहां सारे इंतजाम हो जाएंगे. एक बार नथ उतरने के बाद आप चाहेंगे तो वह यहां आती रहेगी. पर पहली बार तो…’’ गुलाबी के चेहरे पर मुसकराहट तैर गई. इस मुसकराहट में डर, आशंकाएं, मजबूरियां, भोग और चापलूसी के भाव थे. ये सारे भाव एक साथ एक मुसकराहट में भर देना गुलाबी जैसी औरत के ही वश में था.

सालम ने दूसरी अंगूठी भी गुलाबी को दे दी.

‘‘जा, सारे इंतजाम कर के रखना. मैं रात के दूसरे पहर में कभी भी आ जाऊंगा.’’

गुलाबी ने दोनों अंगूठियों को बेशरमी से कांचली (चोली) में रखा. आंचल को पहले हटाया फिर ढंका. मगर सालम ने ध्यान ही नहीं दिया. वह मुजरा करती हुई वहां से चली गई.

घर आ कर गुलाबी ने कस्तूरी को देखा तो सोचने लगी, ‘दीवान सा गलत नहीं हैं. इस रूप के आगे दूसरी कोई भी सुंदरी कैसे ठहर सकती है. वह रोज उसे देखती थी, पर कभी गौर ही नहीं किया. वाकई वह अब बच्ची नहीं रही. वह तो रूपलावण्य की देवी बन चुकी थी. उस के रूपरंग पर तो वह खुद भी सब कुछ हार जाने को तैयार हो सकती है, फिर दीवान सा तो असली पारखी हैं.’

उस ने कस्तूरी से कहा, ‘‘तू बहुत भाग्यशाली है छोरी. तेरे रूप पर दीवान सा मर मिटे.’’

कस्तूरी लजा गई.

‘‘तेरा मुकलावा तो अब तक हो जाना था. बहन ने देखा ही नहीं. तू जवान हो गई है.’’

कस्तूरी की आंखें चंचल और होंठ थिरकने लगे. उस के गाल गुलाबी हो गए.

‘‘अब तुझे बचपन की बातें छोड़ कर जवानी की लहरों पर उतर जाना चाहिए.’’ गुलाबी शातिर आंखों से उसे देखने लगी.

कस्तूरी शर्मसार हो गई. अगर उस के शरीर में खुद में ही सिकुड़ जाने की कला होती तो वह अपने आप को खुद में छिपा लेती.

दिन में बात यहीं तक हुई. कस्तूरी सोचती रही. उसे अपना शरीर बड़ा लगने लगा. हथेलियां, कलाई, बांह, कंधे, चेहरा, आंखें सभी कुछ. उसे लोगों की घूरती आंखें दिखाई देने लगीं. दीवान सा की कामुक आंखें बारबार उस के आगे आ खड़ी होतीं. उस ने लाख हटाने की कोशिश की, आंखें बंद कर देखना बंद कर दिया. उन पर से ध्यान हटाने के लिए कुछ और सोचने लगती. मगर वे ढीठ आंखें सामने से हट ही नहीं रही थीं.

वह अपने पड़ोस के लड़के किशन को देखा करती. वह भी उसे देखता था. उस का देखना भी उसे अच्छा लगता था. मगर उस की आंखें दहशत को पैदा करने की हद तक पीछा नहीं करती थीं. अब तो उसे घेरते शिकारियों के बीच डरी हिरणी की तरह कंपकंपी हो रही थी.

उस ने हमेशा सपना देखा. वह, उस का पति और उस का परिवार. एक सुखी और सुरक्षित जीवन. मगर दीवान सा की आंखों से तो उस में डर बैठ गया था. शाम ढलते ही गुलाबी विशेष तैयारियों में जुट गई. उस ने सारे घर में साफसफाई सजावट की. जगहजगह दीपक जलाए. सारा घर जगमगा उठा. खुद भी नहाधो कर नएकपड़े पहन कर इत्र की खुशबू से महकतीचहकती भाग रही थी. लगता था जैसे आज कोई उत्सव हो.

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कस्तूरी को सुगंधित साबुन से नहलाया, सिर धो कर चमेली का तेल लगा चोटी गूंथी. नए कपड़े पहनाए. कस्तूरी की समझ में नहीं आ रहा था. वह बारबार पूछ रही थी मगर गुलाबी टालती जा रही थी.

जब उसे गहने पहना कर दुलहन की तरह सजाया जाने लगा तो उस के सब्र का बांध टूट गया. वह चिल्ला पड़ी, ‘‘क्या है? क्यों मुझे इस तरह तैयार कर रही हो?’’

‘‘तू तो भाग्यशाली है. तुझ पर दीवान सा की मेहर हो गई है.’’ गुलाबी ने समझाया.

‘‘तो?’’

‘‘और सुन, आज रात दीवान सा हमारे घर आएंगे. वह भी तेरे लिए.’’

‘‘मेरे लिए?’’ कस्तूरी चौंकी.

‘‘तू आज की रात दीवान सा की रानी बनेगी.’’

‘‘मौसी, तुझे नहीं पता मैं ब्याहता हूं. मेरा मुकलावा होने वाला है.’’ कस्तूरी बेचैन हो गई. तन के कपड़े, गहने सभी उसे चुभने लगे. उस का मन किया कि अभी भाग जाए यहां से.

‘‘मैं जानती हूं. क्या बिगड़ जाएगा जो तू एक रात दीवान सा के साथ बिता देगी. शादी टूट नहीं जाएगी.’’ गुलाबी की आवाज कठोर होने लगी.

‘‘यह क्या कह रही है तू. मेरी इज्जतआबरू का भी खयाल नहीं है तुझे?’’

‘‘इज्जत आबरू?’’ गुलाबी हंसी, ‘‘गोलों की इज्जत इसी तरह ऊंचाइयां चढ़ती, उतरती रही है. हम लोग गुलाम हैं और गुलाम का काम मालिक का हुकम बजाना होता है, समझी?’’

‘‘नहीं, मैं ऐसा नहीं कर सकती. अपने पति, सासससुर, मांबाप सब से कैसे नजरें मिला पाऊंगी.’’

Serial Story : निर्दय दीवान सालम सिंह- भाग 3

जैसलमेर शहर से मात्र 2 कोस दूर उत्तर मे स्थित इस बुर्ज के 3 तरफ खाई थी. इस के 2 उद्देश्य थे. एक, अगर हमला हो तो अच्छे मोर्चे की तरह उस का इस्तेमाल किया जाए. क्योंकि वह मोटी दीवारों का गोल बुर्ज था, जिस में हथियार चलाने के लिए स्थान बनाए गए थे.

दूसरा उपयोग अय्याशी के लिए था. बुर्ज में घुसते ही बाईं तरफ ऊपर जाने की सीढि़यां. दाईं तरफ शौचालय. बीच में हाल. हाल के बाईं तरफ बहुत बड़ा झरोखा था, जिस पर एक साथ 10 आदमी बैठ सकते थे. वहां से दूरदूर तक फैली धरती के नजारे देखने लायक थे. दूसरी तरफ भी झरोखा था. इस तरह वह हवादार हो गया था.

इस हाल के अंदर एक निजी कक्ष था. इस का झरोखा दक्षिण की तरफ था. वह झरोखा भी काफी बड़ा था. इस पर 4-5 लोग आराम से बैठ सकते थे. यह कक्ष छोटा था, मगर इस में एक बड़ा पलंग आसानी से आ सकता था. सालम ने इसे भोग का स्थान बना लिया था. राज्य की हर सुंदर स्त्री उसे अपने लिए पैदा हुई लगती थी. गुलाबी जैसी कुछ औरतें उस की मदद करती थीं.

इस बुर्ज में कई स्त्रियों की चीखें घुटघुट कर रह गईं. अकसर यहां शाम होते ही किसी स्त्री की पालकी आती और देर रात वापस जाती. सारी जनता में भय था. लोग सालम से तो डरते ही थे, गुलाबी, खेमा जैसे लोगों से भी दूर रहने की कोशिश करते थे.

बहूबेटियों को हवेली के पास फटकने तक नहीं दिया जाता था. इस हद तक आतंक था कि अगर किसी को उस तरफ से जाना भी पड़ता तो चेहरे पर राख मल कर जाती ताकि उस का गोरा रंग और सुंदर रूप छिप जाए. फिर भी हर समय यही भय रहता कि कहीं सालम या उस के दलालों की नजर न पड़ जाए. अगर नजर में चढ़ गई तो दुर्भाग्य के पंजे से कोई नहीं बचा सकता था.

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अन्य जाति की स्त्रियों के साथ वह दुराचरण करता, मगर अपनी ही जाति बनिया (माहेश्वरी) स्त्रियों के साथ वह रियायत बरतता. यह रियायत स्त्रियों के लिए थी, लड़कियों के लिए नहीं. वह उन से विवाह कर लेता था.

सालम ने 6 विवाह किए थे. उस के 6 पत्नियां थीं. फिर भी वह हर रात बुर्ज पर जा कर किसी न किसी कि आबरू लूटता था. इज्जत लुटा कर स्त्रियां या लड़कियां चुप रह जातीं, मगर दीवान सालम ने आना भाटी की बहन की इज्जत लूटी तो वह गड़ीसर में जा कर डूब मरी. आना को सालम की करतूत पता चली तो उस ने तलवार से दीवान पर हमला किया.

तलवार सालम के सिर की पगड़ी से टकरा कर बाएं कंधे में जा गड़ी. अत्यधिक गुस्से के कारण वह उस पर दूसरा वार नहीं कर पाया. आना भाटी काठ हो गया था. न हिला न भागा. तभी कई लोगों ने उसे दबोच लिया. तलवार छीन ली और पीटते हुए उसे कोतवाली ले गए. वहां पर आना को मारापीटा गया और पूछा गया कि यह सब किस का षडयंत्र था. मगर आना कुछ नहीं बोला.

सालम के बेटे बिशन सिंह ने कोतवाल से कहा कि जैसे भी हो, इस से षडयंत्रकारियों के नाम उगलवाओ. षडयंत्र था ही नहीं तो आना किस के नाम बताता. आना ने दीवान पर हमला क्यों किया, गड़ीसर पर मिली बहन की लाश ने सारी कहानी खोल कर रख दी थी. आना भाटी दीवान का सुरक्षा गार्ड था. दीवान ने उसी गार्ड की बहन की इज्जत लूटी थी.

दीवान मरा नहीं था. वह घायल हो गया था. उस का वैद्य ने इलाज शुरू किया. सालम ने सातवीं शादी भी की. वह शादी तो कर लेता था लेकिन पत्नियों की शारीरिक जरूरत का खयाल नहीं रखता था. क्योंकि उसे तो किसी नई लड़की या महिला के साथ रात गुजारने की आदत बन चुकी थी. इसलिए उस की सातवीं पत्नी घाटण बहू अपनी सौतन औरतों के कहने पर हवेली में ही अपने जिस्म की आग बुझाने का कोई उपाय ढूंढने लगी.

उस की सभी सौतनों ने अपनेअपने हिसाब से टाइमपास का साधन चुन लिया था. उस की सौतन ने कहा था, ‘‘तुम्हें अपने जीने के साधन खुद तलाश करने पड़ेंगे. दीवान सा के भरोसे उम्र नहीं निकल सकती.’’

बस घाटण बहू ने यह बात गांठ बांध ली और अपने लिए साधन तलाशने लगी. ऐसे में एक रात उस की मुलाकात कस्तूरी के बेटे कोजा से हुई. उस रात गुलाबी की तबीयत खराब थी, इस कारण कोजा हवेली आया था. घाटण बहू ने दीवान सा की इस प्रतिमूर्ति को देखा तो वह उस पर मुग्ध हो गई. उस ने कोजा से कहा कि आज से तुम मेरे पास रहोगे. गुलाबी आए न आए, तुम मेरा काम करोगे. समझे. कोजा ने हां भर दी.

घाटण बहू ने कोजा को हवेली में अपने सामने वाला कमरा रहने को दे दिया. कोजा हवेली में आनेजाने लगा और घाटण बहू की हाजिरी बजाने लगा. घाटण बहू ने कोजा के साथ एक दुनिया रचाई और उस में मस्त हो गई. कोजा उस का नौकर, दोस्त, हमदर्द, प्रेमी सभी कुछ बन गया था.

उधर कोजा के रंगढंग देख कर उस की मां कस्तूरी का दिल बैठ रहा था. घाटण बहू की मेहरबानी और निकटता ने कोजा के स्वभाव को बदल डाला था. पहले नौकरी पर रखना और उस के बाद वहीं रह जाना, अच्छे संकेत नहीं थे. ऐसे में मां ने कोजा को बहुत समझाया और यहां तक कहा कि सालम तेरे पिता हैं, इस नाते घाटण बहू तेरी मां है.

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मगर कोजा ने कहा कि मैं एक रखैल की नाजायज औलाद हूं. मैं उस पापी दीवान से बदला ले रहा हूं, जिस ने मेरी मां को ब्याहता होने के बावजूद मुकलावा करने के बजाय खुद की रखैल बनाया और इज्जत से खेलता रहा. मैं उस से बदला ले रहा हूं. चाहे वह मेरी जान ही क्यों न ले ले.

एक रोज सालम के कानों में घाटण बहू और कोजा की खिलखिलाती हंसी सुनाई दी. दीवान को पता चला कि यह हंसी उस की रखैल के बेटे और उस की सातवीं पत्नी घाटण बहू की है. दीवान ने कोजा के हवेली आने पर प्रतिबंध लगा दिया. मगर घाटण बहू ने उसे हवेली में आने की स्वीकृति दे दी.

दीवान का आदेश भारी पड़ा. कोजा के विरह में घाटण बहू ने दूध में जहर मिला कर दीवान सालम सिंह को रास्ते से हटा दिया. उस के बाद वह फिर से कोजा के साथ रहने लगी.

जब दीवान के बेटे को पता चला कि उस की विधवा मां एक गोले के साथ मौजमस्ती करती है तो उस ने दोनों को तलवार से काट डाला.

Serial Story : निर्दय दीवान सालम सिंह

Indian Idol 2020 : इस कंटेस्टेंट की आवाज सुनकर जज भी हो जाएंगे हैरान, देखें Video

छोटे पर्दे का मशहूर सिंगिंग रिएलिटी शो ‘इंडियन आइडल 2020’ (Indian Idol 2020) में हर दिन कंटेस्टेंट बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं. शो के जज नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar), विशाल डडलानी (Vishal Dadlani) और हिमेश रेशमिया (Himesh Reshammiya) को ये जिम्मेदारी दी गई है कि उन्हें इन सिंगर्स में से सबसे टैलेंटेड सिंगर्स को आगे बढ़ने का मौका देना है.

इस सिंगिंग रिएलिटी शो के अपकमिंग एपिसोड में थिएटर राउंड होने वाला है. थिएटर राउंड के जरिए शो में टॉप 14 कंटेस्टेंट्स की एंट्री होने वाली हैं.

बता दें कि मेकर्स ने शो से जुड़ा एक प्रोमो जारी किया है. प्रोमो के अनुसार सभी कंटेस्टेंट्स की आवाज सुनकर नेहा कक्कड़ की खुशी का कोई भी ठिकाना नही हैं. इस प्रोमो में आप देख सकते हैं कि नेहा कक्कड़ के साथ-साथ विशाल डडलानी और हिमेश रेशमिया नचिकेत नाम के एक कंटेस्टेंट को देखकर चौंक जाते हैं.

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प्रोमो को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि नचिकेत सीधा थिएटर राउंड में आकर सभी का दिल जीतने वाले हैं.

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शो के बीते एपिसोड में दिखाया गया कि कंटेस्टेंट आकाश कुमार दुबे की इंटरेस्टिंग कहानी सुनाकर हिमेश रेशमिया, नेहा कक्कड़ और  विशाल डडलानी लोट-पोट हो गए. दरअसल आकाश दूबे ने जजों को बताया कि उन्हें अपने पिता से बहुत डर लगता है. जब उन्होंन इस डर के पीछे की वजह जजों को सुनाई तो विशाल डडलानी और नेहा कक्कड़ का हाल हंस- हंसकर बुरा चुका था.

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