Bigg Boss 14 : क्या जैस्मिन भसीन ने अली गोनी संग अपने रिलेशनशिप को कन्फर्म किया ?

बिग बौस 14 (Bigg Boss 14) में दर्शकों को लगातार ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. हाल ही में बिग बौस हाउस में राखी सावंत (Rakhi Sawant), कश्मीरा शाह (Kashmera Shah),  विकास गुप्ता (Vikas Gupta), अर्शी खान (Arshi Khan), राहुल महाजन (Rahul Mahajan) और मनु पंजाबी (Manu Punjabi) की एंट्री हुई है. जिससे कंटेस्टेंट और भी नई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.

घर में आए ये नए सदस्य हर कंटेस्टेंट के लिए नए-नए चैलेंजे लेकर आए हैं. तो आइए जानते हैं, इस शो के लेटेस्ट एपिसोड के बारे में…

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शो में दिखाया गया कि जैस्मिन भसीन (Jasmin Bhasin) अपने दोस्त अली गोनी (Aly Goni) के साथ अपने रिलेशनशिप को कन्फर्म करती नजर आ रही हैं.

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दरअसल घर में आई नयी सदस्य कश्मीरा शाह सबसे पहले जैस्मिन को निशाना बनाती है. कश्मीरा ने ये भी कह दिया कि अली गोनी, जैस्मिन के कारण घर से बेघर हो गया. वो जैस्मिन से कहती हैं कि आपने रुला रुलाकर अली गोनी को बाहर भेज दिया.

 

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इसके बाद कश्मीर बोलती हैं कि अगर आपको जाना था तो आप चली जातीं. जैस्मिन उनको जवाब देते हुए कहती हैं कि हम दोनों का तीन साल का रिश्ता है और जो वह बोलता है वही होता है.

तो वहीं कश्मीरा, जैस्मिन को ताना मारते हुए कहती हैं, मास्टरस्टाक माई ब्यूटी.  तो उधर विकास गुप्ता भी जैस्मिन को ताना मारते हुए कहते हैं कि वह 22 साल की दिखती है और इस घर में भी एक जैसा काम करती है.

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जैस्मिन के इस स्टेटमेंट से फैंस काफी खुश हैं. और उन्हें अली के साथ अपने रिश्ते को कन्फर्म करने के लिए सोशल मीडिया पर फैंस बधाई भी दे रहे हैं. बता दें कि जैस्मिन और अली ने अभी तक इस बात को लेकर कोई औफिशियल अनाउंसमेंट नहीं की है.

अपनों ने दिया धोखा

अपनों ने दिया धोखा : भाग 2

सौजन्य- मनोहर कहानियां

ममता बन गई पुलिस इंसपेक्टर

अब तक ममता इंसपेक्टर के पद पर प्रोन्नत हो चुकी थी. किसी ने कपिल से ईर्ष्या कर पुलिस विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर दी कि कपिल की पत्नी ममता आगरा में इंसपेक्टर है. पत्नी के पुलिस इंसपेक्टर होने के बलबूते पर कपिल ने कई विवादित जमीन की खरीदफरोख्त की है. इस पर पुलिस अधिकारियों ने ममता पवार का स्थानांतरण आगरा से प्रयागराज कर दिया.

ममता को अपने विभागीय अधिकारियों का आदेश तो मानना ही था, लिहाजा उसे मजबूरन प्रयागराज जाना पड़ा. प्रयागराज में तैनाती के दौरान 24 सितंबर, 2019 को ममता की तबियत खराब हुई. उस की गंभीर हालत को देखते हुए उसे पीजीआई लखनऊ में भरती कराया गया. लेकिन 27 सितंबर, 2019 को ब्रेन हैमरेज के कारण उस की मृत्यु हो गई.

ममता की मौत के बाद उस की मां शिमला कपिल से और बैर रखने लगी. अभी तक ममता के कारण वह कुछ नहीं कहती थी. लेकिन ममता की मौत के बाद शिमला का कपिल से विवाद रहने लगा. विवाद का कारण था ममता के नाम कई प्रौपर्टीज का होना

ममता के नाम मेरठ के अंसल टाउन में एक प्लौट, आगरा के जाटनी के बाग में एक फ्लैट जिस में शिमला खुद रह रही थी, आस्था सिटी सेंटर के सामने एक प्लौट और एक बेकरी की दुकान थी. बेकरी की दुकान के किराएनामे में शिमला का नाम था. कपिल ने उस का बैनामा अपने नाम करा लिया था. प्लौट भी कपिल अपने नाम कराने की कोशिश कर रहा था.

शिमला ने ममता को यह संपत्ति खरीदने के लिए अपनी जमापूंजी दी थी. अब उसे डर था कि उस का दामाद कपिल सारी संपत्ति पर कब्जा कर के उसे घर से बेदखल न कर दे. इसे ले कर उन के बीच बहुत गहरा विवाद था.

ममता की मौत के बाद कपिल के सामने उस की रखी शर्त की कोई बंदिश नहीं थी. वैसे भी कपिल अकेलापन महसूस करता था. इसलिए कपिल ने अपने परिवार से संपर्क रखना शुरू कर दिया.
हालांकि फोन पर कपिल पहले भी जबतब बात कर लेता था, लेकिन ममता की वजह से न घर वालों को घर बुला पाता था और न ही उन से मिलने घर जाता था. बंदिश हटी तो कपिल के घर वाले उस के पास आनेजाने लगे.

26 अक्तूबर, 2020 की शाम कपिल अपने फ्लैट में था. 10 दिन पहले उस ने अपनी 90 वर्षीया मां निर्मला को अपने पास रहने के लिए बुला लिया था. वह शाम को अपनी मां से प्लौट पर जाने की बात कह कर घर से निकल गया. अपनी मारुति वैगनआर कार से वह आस्था सिटी सेंटर के पास वाले प्लौट पर गया था. लेकिन पूरी रात बीत गई, वह वापस नहीं लौटा.

सुबह निर्मला ने पड़ोसियों से कहा तो उन्होंने फोन मिलाने को कहा. निर्मला फोन मिलाना नहीं जानती थी, न ही उन के पास बेटे का नंबर था. पड़ोसियों ने नीचे की मंजिल पर रह रही कपिल की सास शिमला से कहा कि वह कपिल के बारे में पता करे. इस पर शिमला कपिल के फ्लैट में आई और निर्मला पर बरस पड़ी, ‘‘ड्रामा मत करो. यहां मजाक बनेगा. वह आ जाएगा, उसे कौन ले जाएगा. तुम चुप रहो बस.’’ कह कर शिमला चली गई.

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बाद में पड़ोसियों के दबाव में 27 अक्तूबर की शाम को ही शिमला ने स्थानीय छत्ता थाना पुलिस को कपिल के लापता होने की सूचना दी. जिस के बाद छत्ता थाने के इंसपेक्टर सुनील दत्त मय टीम के कपिल के फ्लैट पर पहुंचे. वहां उन्होंने निर्मला से कपिल के संबंध में पूछताछ की. इस के बाद इंसपेक्टर दत्त ने कपिल पवार उर्फ यश की थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी.

कपिल की मिली लाश

बाद में कपिल का कोई सुराग न लगने पर गुमशुदगी को भादंवि की धारा 364 में तरमीम कर दिया गया. इसी बीच इंसपेक्टर सुनील दत्त को 27 अक्तूबर की शाम को इटावा जिले के भरथना थाना क्षेत्र के मल्हौली नहर में एक लाश मिलने की सूचना मिली. उन्होंने इटावा पुलिस से संपर्क कर के लाश की फोटो मंगवाई.

वह फोटो कपिल की मां और उस के दोनों भाइयों को दिखाई गई तो उन्होंने लाश की पहचान कपिल के रूप में कर दी. इस के बाद इंसपेक्टर दत्त ने दोनों भाइयों को एसआई योगेश कुमार के साथ इटावा भेज दिया. दोनों भाइयों ने लाश की शिनाख्त अपने भाई यश उर्फ कपिल के रूप में की. इटावा पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद लाश दोनों भाइयों के सुपुर्द कर दी.

इंसपेक्टर दत्त ने कपिल के फोन नंबर की काल डिटेल्स की जांच की तो उस में एक नंबर पर उन की नजर टिक गई. उस नंबर की जानकारी की गई तो वह नंबर कपिल के दोस्त जीतू उर्फ हर्ष यादव का निकला. जीतू के नंबर की लोकेशन ट्रेस की गई तो 26 अक्तूबर की शाम को कपिल के प्लौट, फिर उस के घर से होती हुई इटावा तक मिली.

इस के बाद उन्होंने अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की तो उस में घटना की रात जीतू कपिल की कार के साथ आया दिखा. साथ में एक जाइलो कार भी थी, जिस में 2 व्यक्ति सवार थे. जीतू ने वहां कुछ देर रुक कर कपिल की सास शिमला से बात की. उस के बाद चला गया.

इस के बाद 30 अक्तूबर, 2020 को इंसपेक्टर दत्त ने कपिल की सास शिमला को हिरासत में ले कर पूछताछ की. पूछताछ में शिमला ने कपिल की हत्या जीतू और उस के 2 साथियों राहुल और अनवर से करवाने की बात स्वीकार कर ली. जिस के बाद इंसपेक्टर दत्त ने अपने मुखबिरों को राहुल और अनवर की तलाश के लिए लगा दिया.

जल्द ही एक मुखबिर ने सूचना दी कि राहुल और अनवर एत्मादपुर से मथुरा की ओर जाइलो कार नंबर यूपी75एन 0021 से जा रहे हैं. जिस के बाद इंसपेक्टर दत्त ने अपनी टीम के साथ जा कर वाटर वर्क्स पुल के ऊपर से दोनों को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब उन से कड़ाई से पूछताछ की गई तो सारी कहानी सामने आ गई.

प्रौपर्टी के धंधे में काम करते हुए कपिल की जानपहचान जीतू उर्फ हर्ष यादव से हो गई थी, जोकि आगरा के एत्माद्दौला थाना क्षेत्र में टेढ़ी बगिया में रहता था. दोनों में दोस्ती भी हो गई.

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जीतू का कपिल के घर आनाजाना हुआ. धीरेधीरे दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि कपिल ने उसे अपनी पत्नी ममता की सारी संपत्तियों की जानकारी उसे दे दी. उस ने यह भी बता दिया कि कई संपत्ति पत्नी ममता और सास शिमला के संयुक्त नाम से भी हैं.

जीतू कहने को कपिल का दोस्त था, लेकिन वह मन ही मन उस से जलता था. कई जमीन के सौदे करवाने में दोनों लगे होते थे लेकिन हर बार कपिल बाजी मार ले जाता था. इस से जीतू को नुकसान उठाना पड़ता था.

कपिल से जीतू मानने लगा रंजिश

करीब डेढ़ साल पहले जोंस मिल कंपाउंड में यमुना किनारे जीतू का डेढ़ हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन का इकरारनामा कपिल के माध्यम से हुआ था. मगर बाद में मौरिस जौन ने जमीन का बैनामा उस के नाम न कर के दूसरे किसी कारोबारी को कर दिया.

मौरिस ने यह कदम जीतू के खिलाफ छत्ता थाने में रंगदारी का मुकदमा दर्ज होने के बाद उठाया था. इस मामले में जीतू ने कपिल से जमीन उस के नाम कराने को कहा लेकिन कपिल ने उस का इस मामले में कोई साथ नहीं दिया. लिहाजा दर्ज मुकदमे में जीतू को जेल जाना पड़ा.

इस से वह कपिल से रंजिश मानने लगा. जीतू वैसे भी आपराधिक प्रवृत्ति का था. उस पर विभिन्न धाराओं में 5 मुकदमे दर्ज हैं.

अपनों ने दिया धोखा : भाग 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ के असोड़ा गांव में बालकिशन सैनी रहते थे. वह खेतीकिसानी करते थे. परिवार में पत्नी निर्मला और 3 बेटे बिरजू, सुखबीर और यशवीर के अलावा 3 बेटियां थीं. सब से छोटा यशवीर था. यश पड़ने में काफी तेज था. उस का पढ़ाई में मन देख कर पिता बालकिशन और मां निर्मला काफी खुश होते थे कि कम से कम एक बेटा तो पढ़ कर अपनी जिंदगी संवार लेगा.

आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के बावजूद बालकिशन ने बेटे की पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आने दी.
यश ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली में रह कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने लगा. बाद में उस ने वहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए कोचिंग देनी शुरू कर दी. दिल्ली में रहते यशवीर ने एलएलबी की और वकील बन गया.

कुछ ही दिनों में उस के कोचिंग सेंटर में काफी छात्रछात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आने लगे. यश का पढ़ाने का तरीका काफी अच्छा था, जिस से छात्रछात्राएं उस से पढ़ने में रुचि लेते थे.
उस के कोचिंग सेंटर में पढ़ने आने वाली छात्राओं में ममता पवार नाम की भी एक छात्रा भी थी. वह भी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में लगी थी. ममता का परिवार बागपत जिले में रहता था. उस के पिता का नाम लक्ष्मीचंद्र पवार और मां का नाम शिमला पवार था.

ममता 3 भाईबहनों में सब से बड़ी थी. पिता बड़े बिजनेसमैन थे. आगरा में उन की काफी संपत्ति थी, जिस वजह से ममता की मां शिमला आगरा में ही रहती थीं. उन का घर आगरा के थाना छत्ता अंतर्गत जाटनी के बाग के एक अपार्टमेंट में था. यह फ्लैट ममता और शिमला के संयुक्त नाम पर था.

ममता पढ़ने में काफी तेज थी. किसी भी प्रश्न के जवाब से जब तक वह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक उस का पीछा नहीं छोड़ती थी. इस में यश उस की मदद करता था.

यश भी उस की उत्सुकता और पढ़ाई के प्रति अच्छा रुख देख कर खुश होता था. इसलिए वह उसे किसी भी प्रश्न का जवाब समझाने के लिए अतिरिक्त समय दे देता था. इस अतिरिक्त समय में वे दोनों ही होते थे. पढ़नेपढ़ाने के दौरान दोनों काफी खुल गए थे, इसलिए बेझिझक एकदूसरे से बातें करते थे. पढ़ाई के अलावा भी उन के बीच इधरउधर की बातें होने लगीं.

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दोनों को एक साथ रहना और बातें करना अच्छा लगने लगा. दोनों की उम्र में कोई खास अंतर नहीं था. इसलिए दोनों एकदूसरे से दोस्तों की तरह व्यवहार करने लगे. साथ समय बिताते, घूमने जाते और साथ खातेपीते.

दिल की बात की जाहिर

इस सब के चलते दोनों के दिल काफी करीब आ गए. दोस्ती से वे कब प्यार में पड़ गए, उन्हें पता ही न चला. जब दिल की धड़कनें और निगाहें उन के प्यार को जताने लगीं तब उन्हें एहसास हुआ कि वे प्यार में आकंठ डूब गए हैं. दिल की बात जुबां पर लाने के लिए दोनों की जुबान कुछ कहने से पहले ही लड़खड़ा जाती थी.

एक दिन एकांत के क्षणों में ममता मेज पर कोहनियों के बल दोनों हाथ टिकाए यश के सामने बैठी थी तो कपिल ने उस की मेज पर रखे दोनों हाथों के पंजे अपने हाथों में लिए और अपने होंठों से उन्हें चूमते हुए बोला, ‘‘ममता, मैं तुम से बेहद प्यार करता हूं. यह प्यार काफी दिनों से अपने दिल में छिपाए बैठा था, लेकिन तुम से इजहार करने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था. तुम भी मुझ से प्यार करती हो कि नहीं, बस इसी ऊहापोह में हर पल गुजारता था. अब रहा नहीं गया तो तुम से अपने दिल की बात कह दी. अब तुम मेरे प्यार को ठुकराओ या स्वीकार करो, यह फैसला तुम्हारा होगा. तुम जो भी फैसला करोगी, मुझे मंजूर होगा.’’

ममता तो जैसे इसी पल के इंतजार में थी. यश ने जब उस का हाथ चूमा था, तभी समझ गई थी कि आज यश उस से अपने दिल की बात कहने वाला है. वह जान गई थी कि यश भी उस से प्यार करता है.
इसलिए मुसकराते हुए बोली, ‘‘सच कहूं, मैं तो कब से इसी इंतजार में थी कि कब तुम मुझ से अपने प्यार का इजहार करोगे. आज आखिर वह शुभ घड़ी आ गई. मैं भी तुम से बहुत प्यार करती हूं.’’ कहते हुए ममता ने यश की आंखों में झांका तो यश ने उसे झट अपने सीने से लगा लिया. यश ने उसे सीने से लगा कर सुकून की सांस ली तो ममता भी अपनी आंखें बंद कर यश के सीने में कैद दिल की धड़कनें सुनने लगी. यश की हर धड़कन में उसे अपने लिए प्यार महसूस हुआ, जिस की वजह से उस के होंठों पर प्यारी सी मुसकराहट तैरने लगी.

उन का प्यार समय के साथ और प्रगाढ़ होता गया. इस दौरान यश की नौकरी लग गई. वह मेरठ की कोर्ट में पेशकार हो गया. उधर ममता भी उत्तर प्रदेश पुलिस में सबइंस्पेक्टर के पद पर भरती हो गई.
नौकरी करते हुए भी उन की बातचीत होती रहती थी. दोनों शादी करने का फैसला कर चुके थे. लेकिन इस में जाति आड़े आ रही थी. क्योंकि यश सैनी समाज से था और ममता जाट समाज की. ममता ने अपने घर वालों से बात की तो वे यश से अंतरजातीय विवाह करने की बात पर विरोध में आ गए.

ममता ने घर वालों के विरोध के बावजूद यश से विवाह करने की ठान ली. लेकिन उसे और उस के परिवार को इस विवाह से परेशानी न उठानी पड़े, इस के लिए ममता ने यश के सामने शर्त रख दी कि उसे अपना सरनेम बदल कर पवार करना पड़ेगा और विवाह के बाद यश अपने परिवार से कोई संबंध नहीं रखेगा.
यश ने उस की शर्त मान ली और उस ने अपना नाम बदल कर कपिल पवार रख लिया. उस ने सरनेम के साथ नाम भी बदल लिया. 15 साल पहले दोनों ने विवाह कर लिया. ममता की पोस्टिंग आगरा में हो गई. दोनों के अलगअलग शहर में रहने पर परेशानी होने लगी तो कपिल अपनी नौकरी छोड़ कर आगरा आ गया.

आगरा के जाटनी के बाग के जिस अपार्टमेंट में ममता की मां शिमला रहती थी, ममता कपिल उर्फ यश के साथ अपनी मां के फ्लैट से ऊपर वाली मंजिल पर स्थित फ्लैट में रहने लगी. यह फ्लैट ममता के नाम पर था.

आगरा आ कर कपिल वकालत करने लगा. इस के अलावा वह प्रौपर्टी डीलिंग का काम भी करता था. समय के साथ 8 साल पहले ममता ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम उन्होंने कन्नू रखा. इस समय कन्नू सेंट पैट्रिक्स स्कूल में पहली कक्षा की छात्रा थी.

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कपिल कुछ ही समय में वकालत के क्षेत्र में आगरा में छा गया. कई बड़े केस उस के हाथ में आ गए. उन में आगरा का बहुचर्चित जोंस मिल कंपाउंड भूमि घोटाले का मुकदमा भी था. जोंस मिल कंपाउंड की आखिरी महिला वारिस मौरिस जोन ने उसे अपना वकील बनाया था. वह कपिल को बेटे की तरह मानती थीं.

दूसरी ओर कपिल का प्रौपर्टी डीलिंग का धंधा भी खूब फलफूल रहा था. जमीन का सौदा करवाने में कपिल को जबरदस्त महारत हासिल थी. उस ने कई ऐसे सौदे करवाए थे जो विवादित थे.

अपनों ने दिया धोखा : भाग 3

सौजन्य- मनोहर कहानियां

जेल से छूटने के बाद वह कपिल को ठिकाने लगाने की सोचने लगा. लेकिन उस ने कपिल के साथ मिलनाजुलना, बातें करना पहले की तरह ही चालू रखा. जिस से कपिल को उस पर शक न हो.
लौकडाउन के दौरान उस ने कपिल की हत्या करने की सोची लेकिन फिर यह सोच कर रह गया कि इस लौकडाउन में वह शहर से बाहर भाग कर कहीं नहीं जा सकेगा.

लेकिन उस ने लौकडाउन खुलने के बाद किसी भी तरीके से कपिल की हत्या करने की ठान ली. इस के लिए उस ने हत्या के बाद अपने बचाव की भी तैयारी करनी शुरू कर दी.

फिरोजाबाद के एक लूट के मामले में वह कई तारीखों पर कोर्ट नहीं गया तो उस के खिलाफ वारंट जारी हो गया. कपिल और शिमला के बीच विवाद किस हद तक पहुंच गया है, यह भी जीतू बखूबी जानता था.

घटना से 10 दिन पहले संपत्ति विवाद के चलते दोनों की पंचायत हुई. इस में कपिल की तरफ से जीतू और उस के दोस्त थे. शिमला ने अपने घर के लोगों को बुला लिया जोकि बागपत जिले में रहते थे.

पंचायत में कोई नतीजा नहीं निकला. लेकिन जीतू ने भांप लिया कि कपिल की सास शिमला संपत्ति के लिए किसी भी हद तक जा सकती है. इस के लिए उस ने शिमला से बात करने की सोच ली. जीतू ने शिमला से पहले से ही काफी मेलजोल बढ़ा रखा था. जीतू कपिल के उठाए गए कदमों की जानकारी शिमला को देता रहता था. इसलिए शिमला उस पर विश्वास करने लगी थी.

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सास ने दी 10 लाख की सुपारी

दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है, इसी तर्ज पर जीतू ने अकेले में शिमला से बात की और कहा, ‘‘आंटीजी जिस संपत्ति के लिए आप परेशान हो रही हैं, वह तभी आप के हाथ आएगी, जब कपिल दुनिया में नहीं रहेगा.’’

इस पर शिमला ने बिना देर किए बोल दिया, ‘‘जो भी खर्चा आएगा, वह दे देगी लेकिन कपिल को रास्ते से हटा दो.’’

‘‘खर्चा 10 लाख रुपए आएगा. 2 सुपारी किलर हायर करने पड़ेंगे.’’ जीतू ने बताया.
‘‘ठीक है, शाम को आ कर मुझ से एक लाख रुपए ले जाना. बाकी 9 लाख रुपए मैं काम होने के बाद दूंगी.’’ शिमला ने कहा.

शिमला की बात सुन कर जीतू ने सहमति दे दी, फिर वहां से चला आया. जीतू तो वैसे भी कपिल को मारना चाहता था. ऐसे में शिमला के कहने पर हत्या करने पर सुपारी की रकम मिल रही थी. शाम को फिर वापस आ कर उस ने शिमला से एक लाख रुपए ले लिए.

रकम मिलने के बाद उस ने टेढ़ी बगिया में ही रहने वाले अपने दोस्त अनवर और कालिंद्री विहार के राहुल को कपिल की हत्या करने के लिए तैयार कर लिया. उस ने उन दोनों को शिमला से मिलवा भी दिया.
26 अक्तूबर, 2020 की शाम को जीतू अपनी जाइलो कार में राहुल और अनवर को बैठा कर कपिल के प्लौट पर पहुंचा. वह जानता था कि इस समय कपिल अपने प्लौट पर बैठा शराब पी रहा होगा.

उस का सोचना सही था. कपिल प्लौट पर बैठा शराब पी रहा था. जीतू भी अपने साथियों के साथ उस के पास बैठ गया. जीतू ने कपिल के खाने के लिए अनवर से अंडे की भुजिया मंगवाई, जिस में अनवर ने योजनानुसार नशीला पदार्थ मिला दिया.

कपिल ने वह भुजिया खाई तो कुछ ही देर में वह नशे से बेसुध हो गया. जीतू ने राहुल और अनवर की मदद से उसे कार में पिछली सीट पर डाला. इस के बाद राहुल और अनवर जीतू की कार और जीतू कपिल की वैगनआर कार से शिमला से मिलने अपार्टमेंट पहुंचे. वहां शिमला को पूरी बात बताई और बाकी पैसे मांगे. शिमला ने बाकी पैसे पूरा काम होने के बाद ही देने की बात कही.

इस के बाद जीतू अपने साथियों के साथ वहां से निकल आया. फिर तीनों ने कार की सीट बेल्ट से गला घोंट कर कपिल की हत्या कर दी और उस की लाश जाइलो कार से निकाल कर वैगनआर में रख ली. लाश को ले कर तीनों चल दिए. जीतू ने अनवर को रामबाग में छोड़ दिया.

जीतू राहुल के साथ कपिल की लाश को इटावा के भरथना थाना क्षेत्र में मल्हौली नहर के पास ले कर गया. वहां नहर में कपिल की लाश डालने के बाद जीतू राहुल के साथ वापस लौट आया. फिरोजाबाद के पास उस ने राहुल को उतार दिया और घर चला गया.

राहुल, अनवर और शिमला के गिरफ्तार होने का पता लगते ही जीतू ने फिरोजाबाद की कोर्ट में लूट के उसी मामले में आत्मसमर्पण कर दिया, जिन की तारीखों की पेशी में वह पहले से नहीं जा रहा था. उस के खिलाफ वारंट तक निकल गया था.

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वह जानता था कि बडे़ मामलों में पुलिस गिरफ्तारी ऐसे ही नहीं दिखाती, पैर में गोली मार कर मुठभेड़ की बात कह कर दिखाती है. वह गोली नहीं खाना चाहता था, इसलिए उस ने अपने बचाव में यह रास्ता अपनाया था.

राहुल और अनवर के पास से 2 तमंचे और 4 जिंदा कारतूस बरामद हुए. इंसपेक्टर सुनील दत्त ने मुकदमे में भादंवि धारा 302/201/120बी और बढ़ा दी. फिर आवश्यक कागजी खानापूर्ति करने के बाद तीनों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया.

कथा लिखे जाने तक पुलिस जीतू को रिमांड पर लेने की बात कह रही थी. पुलिस कपिल की वैगनआर कार बरामद करने का भी प्रयास कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधार

Serial Story : भोर की एक नई किरण – भाग 3

कुछ दिनों तक स्वाति भैया की बातों पर विचार करती रही और अपने मन को तैयार करती रही, उस युú के लिए जिस में वह खुद अर्जुन थी और भैया के वाक्य उस के लिए गीता के उपदेशों के समान थे.

2-3 दिन बाद स्वाति के मामाजी का पत्र आया. उन की लड़की की बडौ़दा में रह रहे एक इंजीनियर लड़के से रिश्ते की बात चल रही थी. उन्होंने पत्र में स्वाति और मनीष से लड़का देखने का आग्रह किया था.

सुबह का समय था. मनीष आफिस जाने के लिए तैयार हो रहे थे. तौलिए से हाथ पोंछते हुए वह रसोई घर में आए और स्वाति से बोले, फ्शाम को लड़का देखने जाना है, तैयार रहना.

स्वाति ने मुड़ कर देखा. मम्मी फ्रिज में से पानी की बोतल निकाल रही थीं. उस ने कहा, फ्मम्मी, शाम को आप को और पापा को हमारे साथ लड़का देखने जाना है.

फ्हम लोग जा कर क्या करेंगे? तुम दोनों देख आओ, मम्मी ने पानी गिलास में डालते हुए कहा.

फ्जितनी अच्छी तरह आप लड़के और उस के परिवार की जांचपरख कर लेंगी, हम दोनों नहीं कर पाएंगे.

फ्और यदि हमारी राय भिन्नभिन्न हुई तब? मम्मी ने पूछा.

फ्स्वाभाविक है, ऐसी स्थिति में आप की राय ही मानी जाएगी. मातापिता बच्चों से अधिक अनुभवी और समझदार होते हैं. उन का निर्णय गलत नहीं होता है, स्वाति ने विनम्रता से उत्तर दिया. मम्मी और मनीष कुछ आश्चर्यचकित हो कर स्वाति की ओर देखने लगे. शाम को वे चारों लड़का देखने चले गए थे.

अगले दिन रात में पायल स्वाति से कहानी सुनाने की जिद कर रही थी. स्वाति उस से बोली, फ्बच्चे अपनी दादी से कहानी सुनते हैं. मैं छोटी थी, तब मुझे भी मेरी दादी अच्छीअच्छी कहानियां सुनाती थीं.

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फ्मैं भी दादीमां के पास जाऊं? पायल उठ कर खडी़ हो गई.

फ्हां जाओ, स्वाति ने कहा.

पायल दादी के पास जा कर बोली, फ्दादीमां, आप मुझे कहानी सुनाओ.

दादी उस समय सोने की तैयारी कर रही थीं, अतः बेरुखी से बोलीं, फ्अपनी मम्मी से सुनो कहानी.

फ्मैं तो आप से सुनूंगी. मम्मी कहती हैं, आप को बहुत सी कहानियां आती हैं, पायल मचल कर बोली.

फ्मुझे नहीं आती कोई कहानी. जाओ जा कर अपने कमरे में सो जाओ, दादी की डांट सुन कर पायल रोते हुए कमरे में आ गई और बिना दूध पिए सो गई.

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अगली रात को स्वाति ने बहलाफुसला कर पायल को फिर से दादी के पास कहानी सुनने भेज दिया, कितु अंजाम फिर वही हुआ. उस दिन भी वह रोते हुए भूखी सो गई. सुबह उसे हलका सा बुखार था. मनीष आफिस जाते हुए मम्मी से बोला, फ्मम्मी, पायल को यदि आप कहानी सुना देतीं, तो कुछ बिगड़ नहीं जाता. पिछले 2 दिनों से वह बिना दूध पिए सो रही है, मेरे बच्चों से तुम्हें जरा भी लगाव नहीं है.

मनीष की बात सुन कर वह चौंक पडीं़. आज पहली बार उन्हें बेटे ने किसी बात के लिए टोका था. वह नहीं चाहती थीं, यह बात पुनः दोहराई जाए. इसलिए रात होने पर उन्होंने स्वयं पायल को बुला कर अपने पास लिटा लिया और कहानी सुनाने लगीं.

पायल की भोलीभाली बातों से धीरेधीेरे मम्मी की सोई हुई ममता जगने लगी. अब वह अकसर पायल को अपने पास सुला लेती थीं. धीरेधीरे वह उन से खूब हिलमिल गई.घ्आखिर एक दिन मम्मी ने कह ही दिया कि अब पायल बडी़ हो रही है. अब से वह उन्हीं के पास सोया करेगी.

बच्चों के करीब आने के कारण धीरेधीरे घर का माहौल बदल रहा था. मम्मी और स्वाति के बीच की दूरी कम हो रही थी. अब वह उस के साथ पहले की तरह कठोरता से पेश नहीं आती थीं. स्वाति को अब पछतावा हो रहा था कि जो प्रयास उस ने भैया के कहने पर इतने सालों बाद किया था, उसे पहले करना चाहिए था. यदि मम्मी ने उसे अपने निकट नहीं बुलाया था, तो उस ने भी कभी उन के पास जाने का प्रयत्न नहीं किया था. दोनों ही शायद अपनेअपने अहं के दायरे में कैद थे.

अकसर मनीष स्वाति के इस बदलाव पर आश्चर्य व्यक्त करता. इस पर स्वाति हंस पड़ती और मन ही मन भैया के प्रति श्रúा से भर उठती, जिन्होंने अपनी सूझबूझ से उस के बिखरते घर को बचा लिया था.

इस के बाद मम्मी का पथरी का आपरेशन हुआ. सप्ताह भर तक स्वाति अस्पताल और घर के बीच दौड़ती रही. मम्मी की सेवा में उस ने कोई कसर नहीं उठा रखी थी. एक सप्ताह बाद जब मम्मी घर वापस आईं तो अगले दिन शाम के समय मनीष के एक मित्र परिवार सहित उन्हें देखने आए. बातों के दौरान मम्मी ने बताया कि वह और मनीष के पापा अपने बडे़ बेटे केघ्पास कानपुर जाने की सोच रहे हैं. यह सुन कर स्वाति और मनीष दोनों चौंक उठे. मेहमानों के जाने के बाद स्वाति उदास स्वर में बोली, फ्ऐसा लगता है मम्मी, आप की सेवा करने में मुझ से जरूर कोई कमी रह गई, तभी तो आप यहां से जाने की सोच रही हैं.

फ्नहीं स्वाति, ऐसी बात नहीं है. जितनी सेवा तुम ने मेरी की है, मेरी बेटी होती तो शायद वह भी नहीं करती, मम्मी स्नेह भरे स्वर में बोलीं.

फ्तब फिर आप ने कैसे सोच लिया कि हम आप को जाने देंगे. सनी और पायल क्या आप के बगैर रह सकेंगे? कहते हुए स्वाति अंदर चली गई.

डैडी और मम्मी ने उसे अपने कमरे में बुलाया और कहा, फ्स्वाति, हम चाहते हैं कि यह मकान तुम्हारे नाम कर दें. साथ ही 50-50 हजार रुपए पायल और सनी के नाम जमा कर दें.

स्वाति आश्चर्यचकित हो कर बोली, फ्यह सब क्यों मम्मी, आज आप लोग मुझ से कैसी बातें कर रहे हैं.

फ्देखो बेटे, जिदगी का कोई भरोसा नहीं. हमारे बाद भी सबकुछ तुम्हीं लोगों का है, इसलिए अपने सामने थोडा़थोडा़ तीनों बेटों के नाम कर दें तो अच्छा है, डैडी बोले.

फ्नहीं डैडी, मुझे आप लोगों का मकान और पैसा नहीं चाहिए. अपना प्यार दे कर आप लोगों ने मुझे सबकुछ दे दिया है. इस के बाद और किसी दौलत की मुझे जरूरत नहीं, कहते हुए स्वाति कमरे से बाहर आ गई. बाहर आते हुए उस ने सुना, डैडी मम्मी से कह रहे थे, फ्तुम ने व्यर्थ ही कठोरता का आवरण ओढ़ कर इतनी अच्छी लड़की को स्वयं से दूर कर रखा था.

फ्इस बात का पछतावा तो मुझे भी है, यह मम्मी की आवाज थी. स्वाति की आंखों से खुशी के आंसू निकल आए और वह वहां से हट गई.

अगले सप्ताह अचानक श्रीकांत बडौ़दा आ गए. भैया को देख स्वाति अचंभित हो उठी. उसे तो पता ही नहीं चला था कि भैया को गए 6 माह व्यतीत हो चुके हैं. गृहस्थी का सुख पाने में उस ने जिस आस्था का परिचय दिया था, उस में तो वैसे भी समय का पता नहीं चलना था. कमरे में अटैची रखते हुए श्रीकांत ने हंसते हुए कहा, फ्वादे के मुताबिक ठीक 6 माह बाद तुम्हें लेने आया हूं, बताओ चलोगी?

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स्वाति ने सजल आंखों से मुसकराते हुए भाई की ओर देखा ओर कहा, फ्आप की दी हुई शिक्षा की वजह से प्रबलतम अंधकार के बाद भोर की एक नई किरण मेरे आंगन में दिखाई दी है, अब इस के प्रकाश को छोड़ कर कहां जाऊं?

श्रीकांत के चेहरे पर संतोष की आभा छा गई और उन्होंने स्वाति को प्यार से गले लगा लिया.

Serial Story : भोर की एक नई किरण

Serial Story : भोर की एक नई किरण – भाग 2

मनीष की मम्मी बेटे का विवाह कहीं और करना चाहती थीं परंतु मनीष ने स्वाति को पसंद कर लिया. बेटे के हठ के आगे मां को झुकना पडा़, पर उन्होंने कभी दिल से बहू को स्वीकार नहीं किया. वह पहले दिन से ही स्वाति का विरोध करती रहीं. स्वाति जब कभी उन का कोई काम करती, वह उस में कमी अवश्य निकालतीं. स्वाति के ससुर जब भी उस का पक्ष लेते वह उन्हें भी डांट देती थीं.

विवाह के 2-3 दिन बाद उन्होंने सारे काम का दायित्व स्वाति को सौंप दिया था. धीरेधीरे स्वाति ने चुप्पी साध ली. इस बीच वह 2 बच्चों की मां बन चुकी थी फिर भी घर में उस का कोई महत्त्व नहीं था. मनीष स्वाति के साथ होते हुए अन्याय को देख कर भी अनदेखा कर देता था. मनीष की उदासीनता ने स्वाति को इस घर से चले जाने के लिए प्रेरित किया. वह सोचती, जहां रह कर उस का खुद का व्यक्तित्व कुुंठित हो रहा हो, वहां वह किस प्रकार अपने बच्चों की उचित परवरिश कर सकती है. इसलिए उस ने श्रीकांत को पत्र लिखा ताकि उस के पास रह कर वह नए सिरे से अपना जीवन शुरू करे. श्रीकांत ने स्वाति को बताया, फिलहाल, वह 7-8 दिन बडौ़दा में रुकने वाला था.

एक रात श्रीकांत और स्वाति छत पर जा कर बैठ गए थे. छत पर ठंडी हवा चल रही थी कितु स्वाति बहुत अधीर थी. अब तक श्रीकांत ने उस से चलने के बारे में कुछ नहीं कहा था. श्रीकांत के बैठते ही स्वाति ने उस का हाथ पकड़ लिया और रुंधे गले से बोली, फ्भैया, मुझे यहां से ले चलो. मैं अब और यहां नहीं रह सकती.

जब से मैं यहां आया हूं स्वाति, तुम्हारी ही स्थिति को जानने और समझने का प्रयास कर रहा हूं.

फिर तो आप ने देखा होगा भैया कि मेरा घर में कोई महत्त्व नहीं. किसी को मुझ से तनिक भी लगाव नहीं. यहां तक कि मनीष को भी नहीं. तब मैं क्यों जबरन यहां पडी़ रहूं?

प्रश्न जबरन पडे़ रहने का नहीं है, स्वाति. प्रश्न यह है, क्या यहां से चले जाने से संबंध अच्छे बन जाएंगे?

जब संबंध ही नहीं रखने, तो उन के अच्छे या बुरे होने का क्या अर्थ है?

पगली, क्या ऐसे संबंध इतनी सरलता से टूट जाते हैं, कह कर श्रीकांत कुछ क्षण बहन के चेहरे को देखते रहे फिर बोले, याद रखो, स्वाति, संबंध तोड़ना सरल है. क्षण भर में हम कोई भी संबंध बिगाड़ सकते हैं कितु असली कला है, उन्हें जीवन भर निभाना.

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एक पल रुक कर श्रीकांत गंभीर स्वर में बोले, फ्स्वाति, तुम्हें मुझ पर पूरा विश्वास है न कि मैं जो कुछ भी करूंगा वह तुम्हारी भलाई के लिए होगा.

यह भी कोई पूछने की बात है, भैया आप से अधिक तो मुझे खुद पर भी भरोसा नहीं.

तब सुनो स्वाति, पिछले कई दिनों से मैं यहां की स्थिति को देख और समझ रहा हूं. वास्तव में तुम लोगों के संबंधों में टकराव नहीं, वरन उदासीनता है और इस के लिए मैं समझता हूं, तुम भी कम दोषी नहीं हो.

यह क्या कह रहे हैं आप, भैया ?

मैं ठीक कह रहा हूं, यदि तुम्हारी सास ने तुम्हें नहीं अपनाया तो तुम ने भी कभी उन के निकट जाने का प्रयास नहीं किया जबकि तुम्हें पता था कि यह विवाह मनीष के हठ के कारण हुआ है.

भैया, मैं आप से बहस नहीं कर रही हूं, कितु जब बहू अपने प्रियजनों को छोड़ कर अनजाने लोगों के बीच आती है, तब ससुराल वालों का फर्ज बनता है, उसे अपनाएं और भरपूर प्यार दें ताकि वह उस घर को अपना समझ कर नया जीवन प्रारंभ कर सके.

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श्रीकांत ने सिर हिलाते हुए स्वाति की बात का समर्थन किया, फिर उसे समझाते हुए बोले, फ्जीवन में सदैव सबकुछ सरलता से प्राप्त नहीं होता है. कभीकभी उस के लिए अथक प्रयास भी करना पड़ता है. याद रखो स्वाति, किसी से कुछ पा लेना व्यक्ति की अपनी क्षमता पर निर्भर करता है.

अब इन बातों से क्या लाभ, स्वाति बोली, फ्अब तो सबकुछ समाप्त हो चुका है. इन लोगों के व्यवहार ने मेरा मन मार दिया है. अब कुछ भी करने का उत्साह शेष नहीं है.

स्वाती, जब हमें ऐसा लगे कि अंधकार अब कभी समाप्त नहीं होगा, तभी प्रकाश की किरण दिखाई देने की संभावना प्रबलतम होती है. इन टिमटिमाती हुई बत्तियों को देखो, इतना कह कर श्रीकांत ने हाथ से एक ओर इशारा किया. स्वाति ने उस ओर देखा, पूरी तरह अंधकार में किसी फैक्टरी की वह जलती हुई 3-4 बत्तियां बडी़ भली लग रही थीं.

अपनी जिदगी के अंधकार में हमें इसी तरह के बिदुओं से अपना आगे का रास्ता चुनना चाहिए, श्रीकांत ने कहा.

फ ने इतनी अच्छी बातें करनी कहां से सीखी भैया, स्वाति श्रीकांत की बातों से प्रभावित हो कर बोली.

फ्मां से, स्वाति. तुम उस समय बहुत छोटी थी. मां को मैं ने कभी भी निराश होते नहीं देखा था. कितनी भी कठिन स्थिति क्यों न हो, वह कोई न कोई आशा की किरण अवश्य खोज लेती थीं, श्रीकांत ने कुछ पल रुक कर स्वाति की ओर देखा. स्वाति सिर झुकाए कुछ सोच रही थी. श्रीकांत ने फिर कहा, फ्मैं चाहता हूं, एक बार तुम सच्चे मन से उस दूरी को समाप्त करने का प्रयत्न करो जो तुम्हारे और तुम्हारी सास के बीच हुई है. यदि तुम ने उन की ओर एक कदम भी बढा़या तो दूरी कुछ कम ही होगी, स्वाति ने सहमति में सिर हिलाया.

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इस के पश्चात श्रीकांत स्वाति को धीरेधीरे कुछ समझाते रहे और अंत में बोले, फ्मैं आज से ठीक 6 माह बाद पुनः यहां आऊंगा. यदि स्थिति में तनिक भी सुधार नहीं हुआ तो अपने भाई पर विश्वास रखो, तुम्हें अवश्य ही यहां से ले जाऊंगा. इस के बाद वे दोनों नीचे आ गए. अगले दिन श्रीकांत बडौ़दा से अपने घर वापस लौट आए.

शर्मनाक : इलाज की कमी में ‘पर्वत पुरुष’ दशरथ मांझी की बेटी ने दम तोड़ा

लौंगिया देवी की इस दुखद मौत के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना दुख जाहिर किया. इतना ही नहीं, दाह संस्कार के दौरान कुछ कर्मचारी पदाधिकारी भी वहां हाजिर हुए.

लौंगिया देवी काफी समय से बीमार थीं. उन की कोई सुध लेने वाला नहीं था. उन के दोनों बेटे मजदूरी करने के लिए किसी दूसरी जगह चले गए. लौंगिया देवी घर में अकेली रह रही थीं. एक दिन अचानक ‘द फ्रीडम’ के संस्थापक सुधीर कुमार उन के गांव गेहलौर पहुंचे. उन्होंने 19 नवंबर को वीडियो बना कर लौंगिया देवी के बुरे हालात को दिखाया, जिसे सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया.

लोगों की यह आवाज गृह विभाग के मुख्य सचिव आमिर शुभानी के कानों तक पहुंची. उन्होंने तत्काल गया के डीएम को फोन किया. गया के डीएम ने एंबुलैंस भेज कर लौंगिया देवी को सदर अस्पताल में भर्ती कराया. पर उन की हालत ठीक नहीं रहने की वजह से उन्हें सदर अस्पताल से मगध मैडिकल कालेज रेफर कर दिया गया. कुछ दिनों तक वहां इलाज चला, फिर वहां से भी उन्हें पटना रेफर कर दिया गया.

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लेकिन लौंगिया देवी के परिवार वाले उन्हें पटना नहीं ले जा सके और घर ले आए. घर लाते ही 4 दिसंबर को लौंगिया देवी ने दम तोड़ दिया.

याद रहे कि अपने दम पर पहाड़ काट कर रास्ता बनाने वाले दशरथ मांझी पर केतन मेहता ने ‘मांझी : द माउंटेनमैन’ फिल्म बनाई थी और करोड़ों रुपए कमाए थे. आज उन्हीं दशरथ मांझी के परिवार के सदस्यों की हालत बहुत ज्यादा चिंताजनक है.

जिस फूस की झोंपड़ी में लौंगिया देवी रहती थीं, पिछले 3 साल से उस के फूस की मरम्मत तक नहीं हो सकी थी. ‘दशरथ मांझी महोत्सव’ का बैनर उस झोंपड़ी के ऊपर डाला हुआ है. उस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का फोटो भी साफ नजर आ रहा है, जो मुख्यमंत्री की कल्याणकारी योजनाओं का मजाक उड़ा रहा है. याद रहे कि लौंगिया देवी पहाड़ काटने में अपने पिता दशरथ मांझी की मदद करती थीं. उन्हें खानपानी भी यही लौंगिया देवी ही पहुंचाने जाती थीं.

जब दशरथ मांझी जिंदा थे, तब वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने गए थे. तब नीतीश कुमार ने अपनी कुरसी छोड़ कर उन्हें उस पर बिठा दिया था. अखबारों में प्राथमिकता के साथ पहले पेज पर यह खबर छपी थी. तब लोगों के दिल में नीतीश कुमार के प्रति भी सम्मान का भाव खूब जगा था.

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दशरथ मांझी के किरदार पर फिल्म बना कर और किताबें लिख कर लोगों ने अथाह कमाई की है, पर उस के असली हकदार उन के परिवार के सदस्य आज भी गरीबी और जलालत के बीच जिंदगी जी रहे हैं. लिहाजा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सिर्फ ट्विटर पर श्रद्धांजलि नहीं दें, इन के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी कारगर होगी जब दशरथ मांझी के परिवार के हालात में सुधार होगा.

Serial Story : भोर की एक नई किरण – भाग 1

देहरादून एक्सप्रेस अपनी पूरी रफ्तार से भागी जा रही थी. कितु इस से भी तेज भाग रहा था, श्रीकांत का मन. भागती ट्रेन के शोर से भी अधिक स्वाति के पत्र के शब्द उन के दिमाग पर हथौडे़ बरसा रहे थे और चोट से बचने के लिए उन्होंने अपना चेहरा खिड़की से सटा लिया और प्रकृति के विस्तार में अपनी आंखें गडा़ दीं. कितु दूरदूर तक फैले हुए खेतखलिहान और भागते हुए वृक्ष भी उन के मन को न बांध सके. मन बारबार वर्तमान से अतीत की ओर भाग रहा था.

उन की बहन स्वाति ने मनोविज्ञान में एम.ए- किया था. उस का इरादा पीएच.डी- करने का था. वह शुरू से ही पढ़ने में बेहद तेज थी. मेहनत एवं लगन की उस में कमी नहीं थी. लेक्चरर बन कर अपना एक अलग स्थान बनाने के लिए वह जीजान से जुटी हुई थी. लेकिन स्वाति कहां जानती थी कि कभीकभी एक छोटा सा अनुरोध भी जीवन को नया मोड़ दे देता है.

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मनीष ने उसे एक विवाह समारोह में देखा था और वहीं उसे उस ने पसंद कर लिया. उस की ओर से जब विवाह का प्रस्ताव आया तो स्वाति ने तुरंत इनकार कर दिया. विवाह के लिए वह अपने कैरियर को दांव पर नहीं लगा सकती थी. विवाह तो बाद में भी किया जा सकता था. उस के भाई श्रीकांत जो मित्र और पथप्रदर्शक भी थे, उन की भी यही इच्छा थी कि पहले कैरियर फिर विवाह.घ्भाभी सुधा ने दोनों को समझाया था कि जीवन में ऐसे मौके बारबार नहीं आते, स्वाति ऐसे मौकों की कभी अवहेलना मत करो.

स्वाति ने प्रतिरोध करते हुए कहा, ‘भाभी, तुम भलीभांति जानती हो कि मैं ने वर्षों से एक ही सपना देखा है कि मैं जीवन में कुछ बनूं और तुम लोग मेरा यह स्वप्न तोड़ देना चाहते हो.’

बहुत सोचने के बाद श्रीकांत को सुधा की बात अधिक उचित जान पडी़. उन्होंने सुझाया, ‘क्यों न ऐसा रास्ता अपनाया जाए जिस से लड़का भी हाथ से न जाए और स्वाति की इच्छा भी रह जाए. मनीष से पत्रव्यवहार कर के यह स्पष्ट कर लेते हैं कि उसे विवाह के बाद स्वाति के पीएच-डी- करने पर कोई आपत्ति तो नहीं.’

इस के बाद श्रीकांत और मनीष के बीच पत्रव्यवहार हुआ, जिस से पता चला कि मनीष को इस पर कोई आपत्ति न थी. तब खुशीखुशी स्वाति और मनीष का विवाह हो गया.घ्स्वाति को विदा करते हुए जहां श्रीकांत को उस के दूर चले जाने का गम था, वहीं यह संतोष भी था कि उन्होंने बहन के प्रति कर्तव्यों को पूरा कर के मां को दिया हुआ वचन निभाया है. इस के लिए वह सुधा के भी आभारी थे, जिस ने भाभी के रूप में स्वाति को मां जैसा स्नेह दिया था.

विवाह के बाद स्वाति जब पहली बार मनीष के साथ मायके आई तो श्रीकांत को उस की खुशी देख कर सुखद अनुभूति हुई. समय का पंछी आगे उड़ता रहा और देखतेदेखते 6 वर्ष बीत गए. इस बीच स्वाति 2 बच्चों की मां भी बन गई. शादी के बाद जब कभी श्रीकांत और सुधा ने उस से पीएच-डी- पूरी करने के विषय में पूछा तो वह हंस कर टाल गई. श्रीकांत समझते, स्वाति अपने विवाहित जीवन के सुख में इतना खो गई है कि अब वह पीएच-डी- करने की बात भूल बैठी है. उन का स्वाति के बारे में यह भ्रम न जाने कब तक बना रहता, यदि अचानक उन्हें उस का भेजा पत्र न मिलता. पत्र देखते ही वह स्वाति से मिलने केघ्लिए चल पडे़ थे.घ्अचानक टेªन का झटका लगा और श्रीकांत अतीत से वर्तमान में लौट आए.

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उन्होंने जेब से पत्र निकाला और फिर एक बार उन की नजरें इन पंक्तियों पर अटक गईं:

फ्पिछले 6 सालों से अपने ही घर में अपने वजूद को तलाश करतेकरते थक चुकी हूं. इस से पहले कि पूरी तरह टूट कर बिखर जाऊं, मुझे यहां से ले जाओ.

पत्र पढ़ते ही श्रीकांत बेचैन हो उठे. उन का शेष सफर बहुत कठिनाई से बीता.

बडौ़दा स्टेशन पर उतरते ही उन्होंने टैक्सी पकडी़ और स्वाति के घर जा पहुंचे. बडे़ भाई को देखते ही स्वाति उन से लिपट गई और सुबकने लगी. मनीष आश्चर्यचकित हो कर बोला, फ्अरे, भैया आप आने की खबर कर देते तो मैं स्टेशन पहुंच जाता, कहते हुए उस ने श्रीकांत के पैर छुए.

फ्अचानक आफिस का कुछ विशेष काम निकल आया. इसलिए खबर देने का समय ही नहीं मिला.

फ्चलो, अच्छा हुआ. इसी बहाने आप आए तो, स्वाति के ससुर ने श्रीकांत को सोफे पर बैठाते हुए कहा.

फ्पायल कहां है? श्रीकांत ने चारों तरफ निगाहें दौडा़ते हुए पूछा.

फ्पायल स्कूल गई है, स्वाति बोली और बेटे सनी को अपने भाई की गोद में दे कर चाय का प्रबंध करने चली गई.

दोपहर में श्रीकांत जब आराम करने के लिए स्वाति के कमरे में आए तो स्नेहपूर्वक उसे पास बैठाते हुए बोले, फ्तुझे किस बात का दुख है, स्वाति?

भाई का स्नेहिल स्पर्श पाते ही स्वाति फफक पडी़, फ्मुझे यहां से ले चलो भैया वरना मैं मर जाऊंगी, और उस के बाद स्वाति ने धीरेधीरे श्रीकांत को सब बता दिया.

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