आधुनिक युग की त्रासदी यह है कि महत्त्वाकांक्षी मातापिता के पास बच्चों के लिए वक्त नहीं है. और जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो उन के पास मातापिता के लिए वक्त नहीं होता.
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