सौजन्य: सत्यकथा
एक शाम सुनीता बनसंवर कर बिस्तर पर लेटी थी, तभी राममिलन आ गया. वह उस की खूबसूरती को निहारने लगा. सुनीता को राममिलन की आंखों की भाषा पढ़ने में देर नहीं लगी. सुनीता ने उसे करीब बैठा लिया और उस का हाथ सहलाने लगी. राममिलन के शरीर में हलचल मचने लगी.
थोड़ी देर की चुप्पी के बाद होश दुरुस्त हुए, तो सुनीता ने राममिलन की ओर देख कर कहा, ‘‘देवरजी, तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो. लेकिन हमारे बीच रिश्तों की दीवार है. अब मैं इस दीवार को तोड़ना चाहती हूं. तुम मुझे बस यह बताओ कि हमारे इस रिश्ते का अंजाम क्या होगा?’’
‘‘भाभी मैं तुम्हें कभी धोखा नहीं दूंगा. तुम अपना बनाओगी तो तुम्हारा ही बन कर रहूंगा. मैं वादा करता हूं कि आज के बाद हम साथ ही जिएंगे और साथ ही मरेंगे.’’ कह कर राममिलन ने सुनीता को बांहों में भर लिया.
ऐसे ही कसमोंवादों के बीच कब संकोच की सारी दीवारें टूट गईं, दोनों को पता ही न चला. उस दिन के बाद राममिलन और सुनीता बिस्तर पर जम कर सामाजिक रिश्तों और मानमर्यादाओं की धज्जियां उड़ाने लगे. वासना की आग ने उन के इन रिश्तों को जला कर खाक कर दिया था.
सुनीता से शारीरिक सुख पा कर राममिलन निहाल हो उठा. सुनीता को भी उस से ऐसा सुख मिला था, जो उसे पति से कभी नहीं मिला था. राममिलन अपनी भाभी के प्यार में इतना अंधा हो गया था कि उसे दिन या रात में जब भी मौका मिलता, वह सुनीता से मिलन कर लेता. सुनीता भी देवर के पौरुष की दीवानी थी. उन के मिलन की किसी को कानोंकान खबर नहीं थी.
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कहते हैं वासना का खेल कितनी भी सावधानी से खेला जाए, एक न एक दिन भांडा फूट ही जाता है. ऐसा ही सुनीता और राममिलन के साथ भी हुआ. एक रात पड़ोस में रहने वाली चचेरी जेठानी रूपाली ने चांदनी रात में आंगन में रंगरलियां मना रहे राममिलन और सुनीता को देख लिया. इस के बाद तो देवरभाभी के अवैध रिश्तों की चर्चा पूरे गांव में होने लगी.
हरिओम को जब देवरभाभी के नाजायज रिश्तोें की जानकारी हुई तो उस का माथा ठनका. उस ने इस बाबत सुनीता से बात की तो उस ने नाजायज रिश्तों की बात सिरे से खारिज कर दी. उस ने कहा राममिलन सगा देवर है. उस से हंसबोल लेती हूं. पड़ोसी इस का मतलब गलत निकालते हैं. उन्होंने ही तुम्हारे कान भरे हैं.
हरिओम ने उस समय तो पत्नी की बात मान ली, लेकिन मन में शक पैदा हो गया. इसलिए वह चुपकेचुपके पत्नी पर नजर रखने लगा. परिणामस्वरूप एक रात हरिओम ने सुनीता और राममिलन को रंगरलियां मनाते रंगेहाथों पकड़ लिया. हरिओम ने दोनों की पिटाई की और संबंध तोड़ने की चेतावनी दी.
लेकिन इस चेतावनी का असर न तो सुनीता पर पड़ा और न ही राममिलन पर. हां, इतना जरूर हुआ कि अब वे सतर्कता बरतने लगे. जिस दिन हरिओम, सुनीता को राममिलन से हंसतेबतियाते देख लेता, उस दिन शराब पी कर सुनीता को पीटता और राममिलन को भी गालियां देता. उस ने गांव के मुखिया से भी भाई की शिकायत की. साथ ही राममिलन को भी कहा कि वह घर न तोड़े.
उन्हीं दिनों हरिओम को बांदा जाना पड़ा. क्योंकि उस के ठेकेदार को सड़क निर्माण का ठेका मिला था. चूंकि हरिओम जेसीबी चालक था, सो उसे भी वहीं काम करना था. जाने से पहले वह अपनी मां व पिता को सतर्क कर गया था कि वह सुनीता व राममिलन पर नजर रखें.
सास गेंदावती सुनीता पर नजर तो रखती थी, लेकिन देवर की दीवानी सुनीता सास की आंखों में धूल झोंक कर देवर से मिल कर लेती थी. हरिओम मोबाइल फोन पर मां से बात कर घर का हालचाल लेता रहता था.
वह सुनीता से भी बात करता था और उसे मर्यादा में रहने की हिदायत देता रहता था. लेकिन सुनीता पति की बातों को कोई तवज्जो नहीं देती थी. वह तो देवर के रंग मे पूरी तरह रंगी थी.
एक रात आधी रात को गेंदावती की नींद खुली तो उसे सुनीता की बेटी मासूम क्रांति के रोने की आवाज सुनाई दी. वह उठ कर कमरे में पहुंची तो सुनीता अपने बिस्तर पर नहीं थी.
सास गेंदावती को समझते देर नहीं लगी कि बहू राममिलन के कमरे में होगी. वह दबे पांव राममिलन के कमरे में पहुंची, वहां सुनीता उस के बिस्तर पर थी. उस रात गेंदावती के सब्र का बांध टूट गया. उस ने दोनों की चप्पल से पिटाई की और खूब फटकार लगाई. रंगेहाथ पकड़े जाने से दोनों ने माफी मांग ली.
लगभग एक सप्ताह बाद हरिओम बांदा से घर आया तो गेंदावती ने बहू को रंगेहाथ पकड़ने की बात बेटे को बताई. तब हरिओम ने सुनीता की खूब पिटाई की, राममिलन को भी खूब डांटा फटकारा और समझाया भी. उस ने दोनों को धमकाया भी कि यदि वे न सुधरे तो अंजाम अच्छा न होगा.
लेकिन सुनीता और राममिलन प्यार के भंवर में इतनी गहराई तक समा चुके थे, जहां से बाहर निकलना उन के लिए नामुमकिन था. अत: दोनों ने हरिओम की धमकी को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया. उन्हें जब भी मौका मिलता था, शारीरिक मिलन कर लेते थे.
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सुनीता और राममिलन के नाजायज रिश्तों ने पूरे घर को चिंता में डाल दिया था. वे इस समस्या से निजात पाने के लिए उपाय खोजने लगे थे. एक रोज गेंदावती ने अपने पति शिवबरन व बेटे हरिओम के साथ बैठ कर मंत्रणा की. फिर तय हुआ कि समस्या से निजात पाने के लिए राममिलन की शादी कर दी जाए. शादी हो जाएगी तो समस्या भी हल हो जाएगी.
शिवबरन निषाद अब राममिलन के लिए गुपचुप तरीके से लड़की की खोज करने लगा. कई माह की दौड़धूप के बाद शिवबरन को असोधर कस्बे में राम सुमेर निषाद की बेटी कमला पसंद आ गई. कमला सांवले रंग की थी. लेकिन शिवबरन व उस की पत्नी गेंदावती ने उसे पसंद कर लिया था.
फिर आननफानन में उन्होंने रिश्ता तय कर दिया. इस रिश्ते के लिए राममिलन ने न ‘हां’ की और न ही इनकार किया. बारात जाने की तारीख तय हुई मई 2021 की 7 तारीख.
राममिलन की जब शादी तय हुई थी, तब सुनीता मायके गई हुई थी. वह वहां से वापस आई तब उसे मालूम पड़ा कि देवर की शादी तय हो गई है. उस ने इस बाबत राममिलन से पूछा तो उस ने जवाब दिया कि उस से पूछ कर शादी तय नहीं की गई है. शादी के संबंध में वह कुछ भी नहीं बता सकता. लेकिन सुनीता को शक हुआ कि शादी के लिए राममिलन की रजामंदी है
सुनीता अब अपने भविष्य को ले कर चिंतित रहने लगी. वह सोचती, ‘‘कल को राममिलन की शादी हो जाएगी, तो वह उसे दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल फेंकेगा. वह अपनी रातें तो नईनवेली दुलहन के साथ रंगीन करेगा और वह पूरी रात करवट बदलते बिताएगी.’’
अगले भाग में पढ़ें- सुनीता में आए आकस्मिक परिवर्तन से राममिलन परेशान हो उठा
औनलाइन ठग समयसमय पर ठगी के नएनए तरीके इस्तेमाल करते हैं. ऐसे धोखेबाज अब तक एटीएम कार्ड का क्लोन तैयार कर के या एटीएम बूथ पर किसी शख्स का पिन नंबर धोखे से पूछ कर, बैंक का मुलाजिम बन कर फोन पर बैंक डिटेल पूछ कर आम जनता को चूना लगा चुके हैं. इस के अलावा मोबाइल फोन पर अलगअलग साइट खोलते समय फर्जी लिंक मोबाइल फोन की स्क्रीन पर खुलते हैं, जिन में तरहतरह के लालच दिए जाते हैं. अनजाने में लोग उस लिंक पर क्लिक कर देते हैं तो उन के मोबाइल फोन की डिटेल ठगों के पास पहुंच जाती है. मोबाइल नंबर अगर बैंक से अटैच हो तो उस की भी डिटेल भी मिल जाती है, जिस से ठग आसानी से चूना लगा देते हैं.
औनलाइन ठगों ने अब ठगी का नया हथियार ‘कौन बनेगा करोड़पति’ यानी केबीसी को बनाया है. केबीसी में लकी ह्वाट्सएप नंबर के जरीए 25 लाख रुपए की लौटरी लगने की बात कह कर ये तथाकथित ठग ह्वाट्सएप मैसेज भेज रहे हैं. ऐसे मैसेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियों का फोटो इस्तेमाल किया जा रहा है. इस के साथ ही ह्वाट्सएप नंबर भेज कर उस पर काल करने का झांसा दिया जा रहा है.
भले ही हम विज्ञान और तकनीक के जमाने में जी रहे हैं, पर अभी भी हम बिना मेहनत के भाग्य भरोसे बैठ कर जल्द ही खूब पैसा कमाना चाहते हैं. लोगों की यही सोच उन्हें ठगों के जाल में फंसा देती है. लाटरी और इनाम के लालच में पड़ कर लोग अपने एटीम कार्ड का नंबर और ओटीपी अनजान लोगों को बता देते हैं और अपनी मेहनत से कमाई जमापूंजी गंवा देते हैं.
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टैलीविजन चैनलों पर दिखाए जाने वाले शो को देख कर करोड़पति बनने का सपना संजोए बैठे लोग बिना जांचपड़ताल किए फोन काल करने वाले ठगों के झांसे में आ जाते हैं और अपना सबकुछ लुटा देते हैं.
मध्य प्रदेश के जबलपुर के चरगवां थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया के जरीए ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के नाम पर ठगी करने का एक ऐसा ही मामला सामने आया है. चरगवां थाना क्षेत्र के कुलोन गांव के एक आदमी से ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में 25 लाख रुपए जीतने का झांसा दे कर हजारों रुपए की ठगी की गई.
साल 2020 के दिसंबर महीने की बात है. कुलोन गांव के गुलाब पटेल के मोबाइल फोन पर ह्वाट्सएप पर एक काल आई. गुलाब पटेल ने जैसे ही काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘मैं ‘कौन बनेगा करोड़पति’ से मृत्युंजय बोल रहा है. आप का चयन केबीसी के लिए हुआ है…’
यह सुन कर गुलाब पटेल की खुशी का ठिकाना न रहा, क्योंकि वह टैलीविजन पर प्रसारित होने वाले केबीसी का दीवाना था.
इस के बाद काल करने वाले आदमी ने गुलाब पटेल से कहा, ‘आप से कुछ सवाल पूछने हैं. अगर आप ने सवालों के सही जवाब दिए तो आप 25 लाख की रकम जीत सकते हैं.’
गुलाब पटेल से छोटेछोटे आसान सवाल पूछे गए, जिन के जवाब उस ने आसानी से दे दिए. सवाल के सही जवाब देने पर काल करने वाले ने 25 लाख रुपए की रकम जीतने के बारे में बताया.
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25 लाख की रकम गुलाब पटेल के खाते में जमा करने की बात कह कर उस के आधारकार्ड और बैंक खाते का अकाउंट नंबर भी ले लिया गया.
इस के बाद गुलाब पटेल से कहा गया कि यह रकम आने के लिए आप को 50,000 रुपए देने हैं, पर जब उस ने अपने पास 50,000 रुपए की रकम न होने की बात कही तो उसे 25 लाख रुपए के एक चैक का फोटो ह्वाट्सएप पर भेज दिया गया.
25 लाख रुपए की रकम का चैक देख कर गुलाब पटेल को यकीन हो गया कि उसे केबीसी की तरफ से पूछे गए सवालों के सही जवाब देने के बदले यह इनाम मिला है, लिहाजा उस ने अपने एक दोस्त की मदद से मृत्युंजय नाम के एक आदमी के खाते में रकम टांसफर करा दी, पर कुछ दिनों तक इंतजार करने के बाद जब गुलाब पटेल के बैंक अकाउंट में 25 लाख की रकम नहीं आई तो उस ने उसी नंबर पर काल किया, पर वह नंबर बंद आ रहा था.
इस से गुलाब पटेल को यह समझ आ गया कि केबीसी के नाम पर उस के साथ ठगी की गई है. उस ने चरगवां पुलिस थाने में जा कर अपने साथ हुई धोखाधड़ी की रिपोर्ट लिखाई.
यों होता है ठगी का खेल
मशहूर क्विज शो केबीसी यानी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के शुरू होते ही सोशल मीडिया पर ठगों का गिरोह एक बार फिर से सक्रिय हो गया है. वैसे तो यह शो मेनस्ट्रीम टैलीविजन पर आता है, लेकिन इस का औनलाइन सैगमैंट भी है. पुलिस के मुताबिक, ठगों के चंगुल में लोग इसलिए फंस जाते हैं, क्योंकि वे अपने भाग्य पर आंख मीच कर यकीन करते हैं. थोड़े पैसे खर्च कर, ज्यादा कमाई के लालच में वे ठगों की बातों में आ कर ठगी के शिकार हो जाते हैं.
असली धोखाधड़ी तब शुरू होती है जब धोखेबाजों द्वारा अपने शिकार को इस बात का यकीन दिला दिया जाता है कि उस ने केबीसी प्रतियोगिता जीत ली है. इस के बाद शिकार को 8,000 से 10,000 रुपए तक जमा करने के लिए कहा जाता है. यह पैसा टैक्स मनी या प्रोसैसिंग फीस के नाम पर वसूला जाता है. फोन करने वाले ठग बताते हैं कि इतने पैसे जमा करने के बाद ही 25 लाख रुपए दिए जाएंगे.
शिकार से प्रोसैसिंग फीस को बैंक ड्राफ्ट के रूप में जमा करने को कहा जाता है. ऐसे फोन 0092 से शुरू होने वाले फर्जी नंबरों से किए जाते हैं. कई बार ठग खुद को केबीसी टीम का सदस्य बताते हैं. वे अपने शिकार को अपने झांसे में ले कर आसान सवाल पूछते हैं, उस के बाद ठग लेते हैं.
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इस के अलावा कई बार वे अपने शिकार को फोन कर के बताते हैं कि आप का मोबाइल नंबर लकी ड्रा में सिलैक्ट हो गया है. फोन रिसीव करने के बाद लोग बताते हैं कि उन्होंने तो केबीसी में हिस्सा ही नहीं किया था. उस के बाद सामने से कहा जाता है कि हो सकता है कि आप के परिवार के किसी और सदस्य ने आप के नंबर से फोन कर के हिस्सा लिया हो. इस के बाद लोग उन के झांसे में आ जाते हैं.
केबीसी एक ऐसा शो है जिसे जितनी बड़ी तादाद में टैलीविजन पर देखा जाता है, उस से ज्यादा तादाद में लोग ‘सोनी लिव एप’ के जरीए औनलाइन गेम में हिस्सा लेते हैं.
लोग ‘कौन बनेगा करोड़पति’ शो को सोनी लिव मोबाइल ऐप फीचर पर गेम खेलते हैं तो उसी दौरान ठग भी सक्रिय रहते हैं. वे लोगों को इस बात का यकीन दिला कर अपनी ठगी का शिकार बनाते हैं कि वे केबीसी औनलाइन में विजेता बने हैं.
विदेशों तक जुड़े हैं तार
उत्तराखंड के देहारादून में सेना में हवलदार को साइबर ठगों ने ह्वाट्सएप पर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में 25 लाख रुपए की लौटरी जीतने का संदेश भेजा. यह रकम हासिल करने के लिए रजिस्ट्रेशन, बैंक फीस और इनकम टैक्स वगैरह के नाम पर ठगों ने अलगअलग बैंक खातों में धोखाधड़ी कर तकरीबन 7 लाख रुपए जमा कराए.
इस मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और जब उत्तराखंड की एसटीएफ और साइबर क्राइम पुलिस टीम ने जांच की तो ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और बैंक खातों को भी खंगाला गया. पता चला कि जिन मोबाइल नंबरों से ह्वाट्सएप काल की गई थी, वे कर्नाटक और बिहार सर्किल के थे और पाकिस्तान के आईपी एड्रैस का इस्तेमाल किया गया था. इसी तरह ठगों ने तमिलनाडु, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात जैसे राज्यों के पंजाब नैशनल बैंक, बैंक औफ इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक के कुल 14 बैंक खातों का इस्तेमाल करते हुए धोखाधड़ी से 7 लाख रुपए जमा कराए थे.
इन बैंक खातों की स्टेटमैंट चैक करने पर पता चला कि तिरुवेनवेली, तमिलनाडु के पंजाब नैशनल बैंक के खाते में अप्रैल से अगस्त, 2020 के दौरान तकरीबन 4 लाख रुपए, मदुरै, तमिलनाडु के भारतीय स्टेट बैंक के खाते में 3 महीने में तकरीबन एक लाख रुपए, कानपुर, उत्तर प्रदेश के पंजाब नैशनल बैंक के खाते में 3 महीने में तकरीबन 10 लाख रुपए, इलाहाबाद के भारतीय स्टेट बैंक के खाते में जनवरी से मार्च तक 11.60 लाख रुपए से ज्यादा, जौनपुर, उत्तर प्रदेश के भारतीय स्टेट बैंक के खाते में 2 लाख रुपए, गोपालगंज, बिहार के भारतीय स्टेट बैंक के खाते में 12.30 लाख रुपए से ज्यादा और एक दूसरे खाते में 12 लाख रुपए से ज्यादा, सिलीगुड़ी, असम के भारतीय स्टेट बैंक के खाते में 3.40 लाख रुपए से ज्यादा का लेनदेन पाया गया. इस तरह इन बैंक खातों में 3 महीने में ही एक करोड़ से ज्यादा की रकम का लेनदेन होना पाया गया.
इंस्पैक्टर पंकज पोखरियाल की अगुआई में एक पुलिस टीम दिल्ली, कर्नाटक और तमिलनाडु भी भेजी गई, जिस ने वल्लिन्यागम और पी. जौनसन को तिरुवेनवेली से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उन दोनों ने बताया कि वे एक जानीमानी कंपनी के डीलर हैं और उन का संपर्क श्रीलंका और दुबई में उस कंपनी के बड़े डीलरों से भी हैं. ये डीलर ही लौटरी जीतने का लालच दे कर धोखाधड़ी करते हैं और रकम जमा करने के लिए साइबर अपराधी व अपने देशभर में फैले दूसरे साइबर ठगों के बैंक अकाउंट डीलरों को मुहैया कराते हैं.
उन्होंने आगे बताया कि मुहैया कराए गए बैंक खातों में जब धोखाधड़ी की रकम आती है तो वे उस में से 3 फीसदी से 5 फीसदी तक कमीशन काट कर बाकी रकम श्रीलंका और दुबई के कंपनी डीलरों की आईडी पर रिचार्ज के जरीए भेज देते हैं. इस तरह ये लोग 5-6 साल से काम कर रहे थे और इस दौरान तकरीबन 10 करोड़ से 12 करोड़ रुपए की ठगी करने का अंदाजा है.
ये सावधानियां बरतें
औनलाइन ठगी से बचने के लिए जिन मामलों में कार्ड की जरूरत नहीं पड़ती और बैंकिंग के लिए आईडी, पासवर्ड वगैरह की जरूरत होती है, उन मामलों में धोखाधड़ी करने वाले लोग कार्ड डिटेल वगैरह लुभावने प्रस्ताव दे कर फोन, ईमेल से जानकारी हासिल कर लेते हैं या उन्हें लिंक भेज कर अपनी मनचाही वैबसाइट पर लेनदेन के लिए ले जाते हैं. ग्राहकों को ऐसे मैसेज खोले बिना तत्काल डिलीट करना चाहिए.
अपनी सुरक्षा के लिए आप किसी भी हालत में अपना आईडी पासवर्ड को किसी को भी न दें, बैंक के किसी अफसर या मुलाजिम को भी नहीं.
आजकल पेमेंट को आसान बनाने के लिए कई कंपनियां काम कर रही हैं. पेमेंट सेवा देने वाली कई कंपनियां अपने एप में घुसने के लिए फिंगरप्रिंट के जरीए ग्राहक को पहचानने की सुविधा देती हैं.
यह एक सुरक्षित उपाय है. लेकिन यह पासवर्ड आप के औनलाइन खाते में डकैती डालने का एक आसान रास्ता है.
बैंक और पेमेंट सुविधा देने वाली कंपनियां ग्राहकों को मोबाइल नोटिफिकेशन, एसएमएस वगैरह से लगातार पासवर्ड बदलने को आगाह करती रहती हैं, लेकिन यह पाया गया है कि ज्यादातर ग्राहक महीनों अपने पासवर्ड नहीं बदलते हैं.
औनलाइन बैंकिंग में हो रही धोखाधड़ी को ले कर भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए साल 2017 में 6 जुलाई को दिशानिर्देश जारी किया है. इसे कोई भी भारतीय रिजर्व बैंक की वैबसाइट पर जा कर पढ़ सकता है.
अपने औनलाइन बैंकिंग ट्रांजैक्शन को सुरक्षित बनाने के मकसद से ग्राहक को अपने खाते में हुए किसी भी लेनदेन या पासवर्ड हासिल करने के लिए एसएमएस या ईमेल पाने के लिए मोबाइल नंबर ईमेल पता खाते में अनिवार्य रूप से दर्ज करवाना चाहिए.
जिस मोबाइल फोन में आप के बैंक की डिटेल अटैच है, मुमकिन हो तो उस में पैसा कम ही रखें.
फोन पर कोई भी बैंक किसी खाते की डिटेल नहीं मांगता है. अगर कोई फोन कर के ऐसी डिटेल मांगे तो समझो आप के साथ ठगी होने वाली है.
किसी को भी अपने बैंक संबंधी ओटीपी, डिटेल, सीवीवी नंबर वगैरह की जानकारी न दें.
मोबाइल फोन पर अपने बैंक की प्रक्रिया करते समय जब पासवर्ड भरें तो उसे किसी के सामने न भरें.
मोबाइल पर कोई भी साइट खोलते समय अगर कोई लिंक ब्लिंकिंग करे तो उस पर कभी भी क्लिक न करें.
रात के साढ़े 10 बज रहे थे. तृप्ति खाना खा कर पढ़ने के लिए बैठी थी. वह अपने जरूरी नोट रात में 11 बजे के बाद ही तैयार करती थी. रात में गली सुनसान हो जाती थी. कभीकभार तो कुत्तों के भूंकने की आवाज के अलावा कोई शोर नहीं होता था.
तृप्ति के कमरे का एक दरवाजा बनारस की एक संकरी गली में खुलता था. मकान मालकिन ऊपर की मंजिल पर रहती थीं. वे विधवा थीं. उन की एकलौती बेटी अपने पति के साथ इलाहाबाद में रहती थी.
नीचे छात्राओं को देने के लिए 3 छोटेछोटे कमरे बनाए गए थे. 2 कमरों के दरवाजे अंदर के गलियारे में खुलते थे. उन दोनों कमरों में भी छात्राएं रहती थीं.
दरवाजा बाहर की ओर खुलने का एक फायदा यह था कि तृप्ति को किसी वजह से बाहर से आने में देर हो जाती थी तो मकान मालकिन की डांट नहीं सुननी पड़ती थी.
तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया. तृप्ति किसी अनजाने डर से सिहर उठी. उसे लगा, कोई गली का लफंगा तो नहीं. वैसे, आज तक ऐसा नहीं हुआ था. रात 10 बजे के बाद गली की ओर खुलने वाले दरवाजे को किसी ने नहीं खटखटाया था.
कभीकभार बगल वाली छात्राएं कुछ पूछने के लिए साइड वाला दरवाजा खटखटा देती थीं. उन दोनों से वह सीनियर थी, इसलिए वे भी रात में ऐसा कभीकभार ही करती थीं.
पर जब ‘तृप्ति, दरवाजा खोलो… मैं माधुरी’ की आवाज सुनाई पड़ी, तो तृप्ति ने दरवाजे की दरार से झांक कर देखा. यह माधुरी थी. उस के बगल के गांव की एक सहेली. मैट्रिक तक दोनों साथसाथ पढ़ी थीं. बाद में तृप्ति बनारस आ गई थी. बीए करने के बाद बीएचयू की ला फैकल्टी में एडमिशन लेने के लिए वह एडमिशन टैस्ट की तैयारी कर रही थी.
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माधुरी बगल के कसबे में ही एक कालेज से बीए करने के बाद घर बैठी थी. पिता उस की शादी करने के लिए किसी नौकरी करने वाले लड़के की तलाश में थे.
‘‘अरे तुम… इतनी रात गए… कहां से आ रही हो?’’ हैरान होते हुए तृप्ति ने पूछा.
‘‘बताती हूं, पहले अंदर तो आने दे,’’ कुछ बदहवास और चिंतित माधुरी आते ही बैड पर बैठ गई.
‘‘एक गिलास पानी तो ला… बहुत प्यास लगी है,’’ माधुरी ने इतमीनान की सांस लेते हुए कहा. ऐसा लग रहा था मानो वह दौड़ कर आई थी.
तृप्ति ने मटके से पानी निकाल कर उसे देते हुए कहा, ‘‘गलियां अभी पूरी तरह सुनसान नहीं हुई हैं… वरना अब तक तो इस गली में कुत्ते भी भूंकना बंद कर देते हैं,’’ फिर उस ने माधुरी की ओर एक प्लेट में बेसन का लड्डू बढ़ाते हुए कहा, ‘‘पहले कुछ खा ले, फिर पानी पीना. लगता है, तुम दौड़ कर आ रही हो?’’
माधुरी ने लड्डू खाते हुए कहा, ‘‘इतनी संकरी गली में कमरा लिया है कि तुम्हारे यहां कोई पहुंच भी नहीं सकता. यह तो मैं पिछले महीने ही आई थी इसलिए भूली नहीं, वरना जाने इतनी रात को अब तक कहां भटकती रहती.’’
‘‘पहले मैं गर्ल्स होस्टल में रहना चाहती थी, पर अगलबगल में कोई ढंग का मिल नहीं रहा था, महंगा भी बहुत था. यह बहुत सस्ते में मिल गया. यहां बहुत शांति रहती है, इसलिए इम्तिहान की तैयारी के लिए सही लगा. बस, आ गई. अगर मेरा एडमिशन बीएचयू में हो जाता है, तो आगे से वहीं होस्टल में रहूंगी.
‘‘अच्छा, अब तो बता कैसे आई हो? इतना बड़ा बैग… लगता है, काफी सामान भर रखा है इस में. कहीं जाने का प्लान है क्या?’’ तृप्ति ने पूछा.
‘‘हां, बताती हूं. अब एक कप चाय तो पिला,’’ माधुरी बोली.
‘‘खाना खाया है या बनाऊं… लेकिन, तुम ने खाना कहां से खाया होगा. घर से सीधे आ रही हो या…’’
‘‘खाना तो नहीं खाया है. मौका ही नहीं मिला, लेकिन रास्ते में एक दुकान से ब्रैड ले ली थी. अब इतनी रात को खाने की चिंता छोड़ो. ब्रैडचाय से काम चला लूंगी मैं,’’ माधुरी ने कहा.
चाय और ब्रैड खाने के बाद माधुरी की थकान तो मिट गई थी, पर उस के चेहरे पर अब भी चिंता की लकीरें साफ दिखाई पड़ रही थीं.
माधुरी बोली, ‘‘तृप्ति, तुम्हें याद है, जब हम लोग 9वीं जमात में थे, तब सौरभ नाम का एक लड़का 10वीं जमात में पढ़ता था. वही लंबी नाक वाला, गोरा, सुंदर, जो हमेशा मुसकराता रहता था…’’
‘‘हां, जिस के पीछे कई लड़कियां भागती थीं… और जिस के पिता की गहनों की मार्केट में बड़ी सी दुकान थी,’’ तृप्ति ने याद करते हुए कहा.
‘‘हां, वही.’’
‘‘पर, बात क्या है… तुम कहना क्या चाहती हो?’’
‘‘वही तो मैं बता रही हूं. वह 2 बार मैट्रिक में फेल हुआ तो उस के पिता ने उस की पढ़ाई छुड़वा कर दुकान पर बैठा दिया. पिछले साल भैया की शादी थी. मां भाभी के लिए गहनों के लिए और्डर देने जाने लगीं तो साथ में मुझे भी ले लिया.
‘‘मैं गहनों में बहुत काटछांट कर रही थी, इसलिए उस के पिता ने गहने दिखाने के लिए सौरभ को लगा दिया, तभी उस ने मुझ से पूछा था, ‘तुम माधुरी हो न?’
‘‘मैं ने कहा था, ‘हां, पर तुम कैसे जानते हो?’
‘‘उस ने बताया, ‘भूल गई क्या… हम दोनों एक ही स्कूल में तो पढ़ते थे.’
‘‘मैं उसे पहचानती तो थी, लेकिन जानबूझ कर अनजान बन रही थी. फिर उस ने मेरी ओर देखा तो शर्म से मेरी आंखें झुक गईं. उस दिन गहनों के और्डर दे कर हम लोग घर चले आए, फिर एक हफ्ते बाद मां के साथ मैं भी गहने लेने दुकान पर गई थी.
‘‘मां ने मुझ से कहा था, ‘दुकानदार का बेटा तुम्हारा परिचित है, तो दाम में कुछ छूट करा देना.’
‘‘मैं ने कहा था, ‘अच्छा मां, मैं उस से बोल दूंगी.’
‘‘पर, दाम उस के पिताजी ने लगाए. उस ने पिता से कहा, तो कुछ कम हो गया… घर आने पर मालूम हुआ कि भाभी के लिए जो सोने की अंगूठी खरीदी गई थी, वह नाप में छोटी थी. मां बोलीं, ‘माधुरी, कल अंगूठी ले जा कर बदलवा देना, मुझे मौका नहीं मिलेगा. कल कुछ लोग आने वाले हैं.’
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‘‘मैं दूसरे दिन जब दुकान पर पहुंची तो सौरभ के पिताजी नहीं थे. मुझे देख कर वह मुसकराते हुए बोला, ‘आओ माधुरी, बैठो. आज क्या और्डर करना है?’
‘‘मैं ने कहा था, ‘कुछ नहीं… बस, यह अंगूठी बदलवानी है. भाभी की उंगली में नहीं आएगी. नाप में बहुत छोटी है.’‘‘वह बोला था, ‘कोई बात नहीं,
इसे तुम रख लो. भाभी के लिए मैं दूसरी दे देता हूं.’
‘‘मैं ने छेड़ते हुए कहा था, ‘बड़े आए देने वाले… दाम तो कम कर नहीं सकते… मुफ्त में देने चले हो.’
‘‘यह सुन कर उस ने कहा था, ‘कल पिताजी मालिक थे, आज मैं हूं. आज मेरा और्डर चलेगा.’
‘‘सचमुच ही उस ने वही किया, जो कहा. मैं ने बहुत कोशिश की, लेकिन उस ने अंगूठी वापस नहीं ली. भाभी के नाप की वैसी ही दूसरी अंगूठी भी दे दी.
जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…
‘‘बहुत मुश्किल से किसी तरह दवा लाने का बहाना कर के मैं गांव से निकली. फोन पर सौरभ को सारी बातें बताईं. उस ने कहा कि मैं रात में बनारस पहुंच जाऊं. सुबह वहीं से मुंबई के लिए ट्रेन पकड़ लेंगे. उस ने रिजर्वेशन भी करा लिया है. उस का एक दोस्त वहां रहता है. मुझे दोस्त के पास रख कर वह लौट आएगा, फिर पत्नी को तलाक दे कर मुझ से शादी कर लेगा.’’
‘‘ओह… तो तुम मुंबई जाने की तैयारी कर के आई हो?’’ तृप्ति ने कहा.
‘‘हां.’’
‘‘माधुरी, तुम समझदार हो, इसलिए तुम को मैं समझा तो नहीं सकती… और फिर अपनी जिंदगी अपने ढंग से जीने का हक सभी को है, पर हम आपस में इस बारे में बात तो कर ही सकते हैं, जिस से सही दिशा मिल सके और तुम समझ पाओ कि जानेअनजाने में तुम से कोई गलत फैसला तो नहीं हो रहा है.’’
‘‘बोल तृप्ति, समय कम है, मुझे सुबह निकलना भी है. यह तो मुझे भी एहसास हो रहा है कि मैं कुछ गलत कर रही हूं. पर मेरे सामने इस के अलावा कोई रास्ता भी तो नहीं है,’’ माधुरी की चिंता उस के चेहरे से साफ झलक रही थी.
‘‘अच्छा माधुरी, सौरभ के पिता से गहनों की कीमत में छूट कराने के लिए तुम्हें सौरभ से कहना पड़ा था न?’’
‘‘हां.’’
‘‘सौरभ से तुम्हारी जानपहचान भी नहीं थी. सिर्फ इतना ही कि तुम्हारे साथ सौरभ भी एक ही स्कूल में पढ़ता था.’’
‘‘हां.’’
‘‘सौरभ के पास पैसे की कोई कमी नहीं थी. काफी सारा पैसा उस के बैंक अकाउंट में था, जिसे खर्चने के लिए उसे अपने पिता की इजाजत लेने की जरूरत नहीं थी.’’
‘‘यह भी सही है.’’
‘‘सौरभ की शादी उस की मरजी से नहीं हुई थी. गूंगीबहरी होने के चलते अपनी पत्नी को वह पसंद नहीं करता था. कहीं न कहीं उस के मन में किसी दूसरी सुंदर लड़की की चाह थी.’’
‘‘तुम्हारी बातों में सचाई है. कई बार उस ने ऐसा कहा था. लेकिन तुम जिरह बहुत अच्छा कर लेती हो. देखना, तुम अच्छी वकील बनोगी.’’
‘‘वह खुद जवान और सुंदर है और तुम भी उस की सुंदरता की ओर खिंचने लगी थी.’’
‘‘यह भी सही है.’’
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‘‘फिर अब तो तुम मानोगी कि तुम से ज्यादा तुम्हारी शारीरिक सुंदरता उसे अपनी ओर खींच रही थी और पहली ही झलक में उस ने तुम में अपनी हवस पूरी की इच्छा की संभावना तलाश ली होगी. और जब तुम ने उस की सोने की महंगी अंगूठी स्वीकार कर ली तब वह पक्का हो गया कि अब तुम उस के जाल में आसानी से फंस सकती हो.
‘‘फिर वही हुआ, अपने पैसे का उस ने भरपूर इस्तेमाल किया और तुम पर बेतहाशा खर्च किया, जिस के नीचे तुम्हारा विवेक भी मर गया. तुम्हारी समझ कुंठित हो गई और तुम ने अपनी जिंदगी का सब से बड़ा धन गंवा दिया, जिसे कुंआरापन कहते हैं.’’
माधुरी के माथे पर पसीने की बूंदें छलक आईं.
‘‘बोल तृप्ति बोल, अपने मन की बात खुल कर मेरे सामने रख,’’ माधुरी उत्सुकता से उस की बातें सुन रही थी.
‘‘माधुरी, अब जिस सैक्स सुख के लिए मर्द शादी तक इंतजार करता है, वही उसे उस के पहले ही मिल जाए और उसे यह विश्वास हो जाए कि अपने पैसों से तुम्हारी जैसी लड़कियों को आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है, तो वह अपनी पत्नी को तलाक देने और दूसरी से शादी करने का झंझट क्यों मोल लेगा?
‘‘फिर वह अच्छी तरह जानता है कि उस की पत्नी की बदौलत ही उस के पास इतनी दौलत है और उसे तलाक देते ही उस को इस जायदाद से हाथ धोना पड़ जाएगा. मुकदमे का झंझट होगा, सो अलग.
‘‘मुझे तो लगता है, तुम किसी बड़ी साजिश की शिकार होने वाली हो. तुम से उस का मन भर गया है. अब वह तुम्हें अपने दोस्त को सौंपना चाहता है.’’
‘‘नहींनहीं…’’ अचानक माधुरी के मुंह से चीख सी निकली.
‘‘पर, इस सब में केवल सौरभ ही कुसूरवार नहीं है, तुम भी हो. तुम ने क्या सोच कर अंगूठी अपने जीजाजी और मां से छिपाई.
‘‘जीजाजी के सामने ही क्यों नहीं कहा कि सौरभ, यह अंगूठी तुम्हें उपहार में दे रहा है. मां को भी क्यों नहीं बताया कि लाख मना करने पर भी सौरभ ने अंगूठी नहीं ली.
‘‘अगर तुम ने ऐसा किया होता तो फिर सौरभ समझ जाता कि उस ने गलत जगह अपनी गोटी डाली है और वह आगे बात न बढ़ाता. जवानी और पैसे के लालच में तुम्हारी मति मारी गई थी. तुम गलत को सही और सही को गलत समझने लगी थी.
‘‘तुम्हारी मां गहनों में छूट चाहती थीं. हर ग्राहक की चाहत सस्ता खरीदने की होती है, उन की भी थी. लेकिन वे नाजायज कुछ नहीं चाहती थीं. उन्होंने धूप में अपने बाल सफेद नहीं किए हैं. उन को सौरभ की अंगूठी देने के पीछे की मंशा पता चल गई थी, इसीलिए ऐसे लोगों से दूर रहने की सलाह दी थी.
‘‘अब तुम्हारी शादी जिस लड़के से तय हुई है, तुम उस से बात करती. उस के स्वभाव, व्यवहार और चरित्र का पता लगाती. अगर पसंद नहीं आता तो साफ इनकार कर देती. यह एक सही कदम होता. इस के लिए कई लोग तुम्हारी मदद में आगे आ जाते. तुम्हारा आत्मविश्वास बना रहता और मनोबल भी ऊंचा रहता.’’
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माधुरी बोली, ‘‘एक गिलास पानी पिला तृप्ति. अब मैं सब समझ गई हूं. कल घर लौट जाऊंगी. मां से बोल दूंगी, आगे की पढ़ाई के लिए समझने मैं तृप्ति के पास आई थी. मां पूछेंगी तो तुम भी यही कह देना.’’
तृप्ति ने कहा, ‘‘कल सुबह मैं चाची को फोन कर के बता दूंगी. सौरभ को अभी तुम बोल दो. अभी वह भी सोया न होगा. बनारस आने की तैयारी में लगा होगा. उस से कहो कि मैं अब गांव लौट रही हूं. मांबाबूजी का दिल दुखाना नहीं चाहती. तुम्हारा घर तोड़ कर किसी की आह नहीं लेना चाहती.
‘‘मुझे पूरा भरोसा है कि सौरभ खुश होगा कि बला उस के सिर से टलेगी.’’
तृप्ति ने सच ही कहा था. सौरभ अभी जाग रहा था और थोड़ी देर पहले ही मुंबई वाले अपने दोस्त से कहा था, ‘यार, अब इस बला को तुम संभालो. वह सुंदर है. खर्च करोगे तो तुम्हारी हो जाएगी. जब मन भर जाएगा तो कुछ दे कर उस के गांव वाली ट्रेन पर बिठा देना. अब मुझे एक दूसरी मिल गई है.’
सौरभ ने एक छोटा सा जवाब दिया था, ‘जैसी तुम्हारी इच्छा. मैं रिजर्वेशन कैंसिल करा देता हूं.’
माधुरी का मन अब हलका था, ‘‘तृप्ति, अब एक काम और कर दे. कल क्यों आज ही घर में फोन कर दे. अभी रात के 12 बजे हैं. मांबाबूजी बहुत चिंतित होंगे. मैं चुपके से यहां आ गई हूं.’’
‘‘अच्छा, बोलती हूं…’’ तृप्ति माधुरी की मां को समझा रही थी, ‘‘चिंता न करें आंटीजी. माधुरी मेरे पास आ गई है. वह आगे पढ़ना चाहती है. आप ने उस को घर से निकलने पर बंदिश लगा दी थी न, इसलिए… हां, उसे बता कर निकलना चाहिए था… अच्छा प्रणाम, माधुरी सो गई है, कल सुबह बात कर लेगी.’’
फोन कट गया. माधुरी को अपने किए पर पछतावा तो था, पर आगे साजिश में फंसने से बच जाने की खुशी भी थी. साथ ही, अपनी सहेली तृप्ति पर गर्व भी था. दोनों सहेलियां बात करतेकरते सो गईं.
‘‘मैं ने डरतेडरते कहा था, ‘इस को वापस लेने से इनकार कर दिया मां.’
‘‘यह सुन कर मां ने कठोर आवाज में पूछा था, ‘किस ने? उस छोकरे ने या उस के बाप ने?’
‘‘मैं ने कहा था, ‘उस के पिताजी नहीं थे, आज वही था.’
‘‘मां ने कहा था, ‘अंगूठी निकाल दे. कल मैं लौटा आऊंगी. बेवकूफ लड़की, तुम नहीं जानती, यह सुनार का छोकरा तुझ पर चारा डाल रहा है. उस की मंशा ठीक नहीं है. अब आगे से उस की दुकान पर मत जाना.’
‘‘मां की बात मुझे बिलकुल नहीं सुहाई. पिछली बार जब मैं उस की दुकान पर गई थी तब तो दाम कम कराने के लिए उसी से पैरवी करवा रही थीं. अब जब इतना बड़ा उपहार अपनी इच्छा से दिया तो नखरे कर रही हैं.
‘‘सच कहूं तृप्ति, मां के इस बरताव से मेरा सौरभ के प्रति और झुकाव बढ़ गया. उस दिन के बाद से मैं उस की दुकान पर जाने का बहाना ढूंढ़ने लगी.
‘‘एक दिन मौका मिल ही गया. बड़े वाले जीजाजी घर आए थे. मां ने जब भाभी के लिए खरीदे गए गहनों को दिखाया तो वे बोले, ‘सुनार ने वाजिब दाम लगाया है. मुझे भी उपहार में देने के लिए एक अंगूठी की जरूरत है. सलहज की उंगली का नाप आप के पास है ही, इस से थोड़ी अलग डिजाइन की अंगूठी मैं भी उसी दुकान से ले लेता हूं.’
‘‘मां ने कहा था, ‘माधुरी साथ चली जाएगी. दुकानदार का लड़का इस का परिचित है. कुछ छूट भी कर देगा.’
‘‘मां ने अंगूठी लौटाने वाली बात को जानबूझ कर छिपा लिया था. वे नहीं चाहती थीं कि मुझ पर किसी तरह का आरोप लगे. मेरी शादी के लिए बाबूजी किसी नौकरी वाले लड़के की तलाश में थे.
‘‘दूसरे दिन जीजाजी के साथ जब मैं उस की दुकान पर पहुंची तब सौरभ किसी औरत को अंगूठी दिखा रहा था. मुझे देखते ही वह मुसकराया और बैठने के लिए इशारा किया. जब जीजाजी ने अंगूठी दिखाने को कहा तो उस के पिताजी ने उसी की ओर इशारा कर दिया.
‘‘तभी कोई फोन आया और उस के पिताजी बोले, ‘2-3 घंटे के लिए मैं कुछ जरूरी काम से बाहर जा रहा हूं. ये लोग पुराने ग्राहक हैं, इन का ध्यान रखना.’
‘‘यह सुन कर सौरभ के चेहरे पर मुसकान थिरक गई. वह बोला, ‘जी बाबूजी, मैं सब संभाल लूंगा.’’
‘‘जीजाजी ने एक अंगूठी पसंद की और उस का दाम पूछा. मैं ने कहा, ‘मेरे जीजाजी हैं.’
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‘‘मेरा इशारा समझ कर सौरभ ने कहा, ‘फिर तो जो आप दे दें, मुझे मंजूर होगा.’
‘‘जीजाजी ने बहुत कहा, लेकिन वह एक ही रट लगाए रहा, ‘आप जो देंगे, ले लूंगा. आप लोग पुराने ग्राहक हैं. आप लोगों से क्या मोलभाव करना है.’
‘‘जीजाजी धर्मसंकट में थे. उन्होंने अपना डैबिट कार्ड बढ़ाते हुए कहा, ‘अब मैं भी मोलभाव नहीं करूंगा. आप जो दाम भर देंगे, स्वीकार कर लूंगा.’
‘‘खैर, जीजाजी ने जो सोचा था, उस से कम दाम उस ने लगाया. उस ने हम लोगों के लिए मिठाई मंगाई और जब जीजाजी मुंह धोने वाशबेसिन की ओर गए तो वही पुरानी अंगूठी मुझे जबरन थमाते हुए कहा था, ‘अब फिर न लौटाना… नहीं तो मेरा दिल टूट जाएगा.’
‘‘जीजाजी देख न लें, इसलिए मैं ने उस अंगूठी को ले कर छिपा लिया.
‘‘उस दिन के बाद हम दोनों मौका निकाल कर चोरीछिपे एकदूसरे से मिलते रहे. सौरभ से मालूम हुआ कि उस के पिताजी ने पिछले साल उस की शादी एक अमीर लड़की से दहेज के लालच में करा दी थी. लड़की तो सुंदर है, लेकिन गूंगीबहरी है. वह अपने मातापिता की एकलौती बेटी है. मां का देहांत हो चुका है. पिता ने अपनी जायदाद लड़की के नाम कर दी है. शहर में एक तिमंजिला मकान भी उस की नाम से है. उस मकान से हर महीने अच्छा किराया मिलता है. रुपयापैसा उसी के अकाउंट में जमा होता है. पिताजी ने भी गहनों की यह दुकान उस के नाम कर दी है.
‘‘तृप्ति, सौरभ मुझ पर इतना पैसा खर्च करने लगा कि मैं उसी की हो कर रह गई.’’
‘‘यानी तुम ने अपना जिस्म भी उसे सौंप दिया?’’ तृप्ति ने हैरान होते हुए पूछ लिया.
‘‘क्या करती… कई बार हम लोग होटल में मिले. कोई न कोई बहाना बना कर मैं सुबह निकलती और उस के बुक कराए होटल में पहुंच जाती. शुरू में तो काफी हिचकिचाई, पर बाद में उस के आग्रह के आगे झुक गई.’’
‘‘फिर…?’’ तृप्ति ने पूछा.
‘‘फिर क्या… मैं हर वक्त उसी के बारे में सोचने लगी. उस ने मुझे भरोसा दिलाया कि कुछ दिनों बाद वह अपनी पत्नी को तलाक दे देगा और मुझ से शादी कर लेगा.’’
‘‘और तुम्हें विश्वास हो गया?’’
‘‘उस ने शपथ ले कर कहा है. मुझे विश्वास है कि वह धोखा नहीं देगा.’’
‘‘अब बताओ कि तुम यहां कैसे आई हो?’’ तृप्ति ने उत्सुकता से पूछा.
‘‘एक हफ्ता पहले जीजाजी आए थे. उन्होंने बाबूजी के सामने एक लड़के का प्रस्ताव रखा था. लड़का एक सरकारी दफ्तर में है, लेकिन बचपन से ही उस का एक पैर खराब है, इसलिए लंगड़ा कर चलता है. वह मुझ से बिना दहेज की शादी करने को तैयार है.
‘‘बाबूजी तैयार हो गए. मां ने विरोध किया तो कहने लगे, ‘एक पैर ही तो खराब है. सरकारी नौकरी है. उसे कई रियायतें भी मिलेंगी.
‘‘जब मां भी तैयार हो गईं तो मैं ने मुंह खोला, पर उन्होंने मुझे डांटते हुए कहा, ‘तुम्हें तो नौकरी मिली नहीं, अब मुश्किल से नौकरी वाला एक लड़का मिला है, तो जबान चलाती है.’
‘‘लेकिन, बात यह नहीं थी. किसी ने मां के कान में डाल दिया था कि मेरा सौरभ से मिलनाजुलना है. मां को तो उसी समय शक हो गया था, जब मैं अंगूठी बिना लौटाए आ गई थी.
‘‘इधर सौरभ मेरे लिए कुछ न कुछ हमेशा खरीदता रहता था. अब घर में क्याक्या छिपाती मैं. कोई न कोई बहाना बनाती, पर मां का शक दूर न होता. वे भी चाहती थीं कि किसी तरह जल्द से जल्द मेरी शादी हो जाए, ताकि समाज में उन की नाक न कटे.
‘‘मां का मुझ पर भरोसा नहीं रहा था. उन्होंने मुझे गांव से बाहर जाने की मनाही कर दी. उधर बाबूजी ने जीजाजी के प्रस्ताव पर हामी भर दी.
लड़के ने मेरा फोटो और बायोडाटा देख कर शादी करने का फैसला मुझ पर छोड़ दिया. बिना मुझ से सलाह लिए मांबाबूजी ने अगले महीने मेरी शादी की तारीख भी पक्की कर दी है.
‘‘मांबाबूजी का यह रवैया मुझे नागवार लगा, इसलिए मैं सौरभ से इस संबंध में बात करना चाहती थी. मैं उस के साथ कहीं भाग जाना चाहती थी.
सौजन्य: सत्यकथा
सुनीता जितना सोचती, उतना ही उसे अपना जीवन अंधकारमय लगता. इसी उलझन में सुनीता ने राममिलन से हंसनाबोलना बंद कर दिया. वह उस के प्रणय निवेदन को भी ठुकराने लगी. राममिलन उसे मनाने की कोशिश करता, लेकिन वह उस की कोई बात नहीं सुनती.
सुनीता में आए आकस्मिक परिवर्तन से राममिलन परेशान हो उठा. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह भाभी को कैसे मनाए. एक रोज जब उस से नहीं रहा गया तो उस ने पूछा, ‘‘भाभी, मुझ से ऐसी क्या खता हो गई, जो मुझ से नाराज हो. पहले तो तुम खूब हंसती थी, खूब बोलती थी. समर्पण को सदैव तैयार रहती थी. लेकिन अब दूर भागती हो. हंसनाबोलना भी गायब हो गया है. हमेशा चेहरे पर उदासी छाई रहती है. आखिर बात क्या है?’’
‘‘यह तुम अपने आप से पूछो देवरजी, तुम ने मेरे साथ जीनेमरने का वादा किया था. क्या वह वादा तुम शादी करने के बाद निभा सकोगे. शादी के बाद तुम दुलहन के पल्लू में बंध जाओगे और मुझे भूल जाओगे. यही सोच कर मैं उदास रहती हूं. तुम से दूर भागने का भी यही कारण है.’’ सुनीता बोली.
‘‘भाभी, मैं आज भी तुम्हारा हूं और कल भी रहूंगा. साथ जीनेमरने का वादा भी मैं नहीं भूला हूं. रही बात शादी की, तो वह मैं अपनी मरजी से नहीं कर रहा हूं. शादी तो मांबाप ने अपनी मरजी से तय कर दी है.’’
‘‘जो भी हो देवरजी, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती और घर वाले हमें साथ रहने नहीं देंगे. इसलिए हमेंतुम्हें एकदूसरे से किया गया वादा निभाना होगा.’’
‘‘हम वादा निभाने को तैयार हैं.’’ कहते हुए राममिलन ने सुनीता को अपनी बांहों में समेट लिया. उस के बाद उन दोनों ने एक साथ आत्महत्या करने का निश्चय किया. फिर वह समय का इंतजार करने लगे.
30 नवंबर, 2020 को शिवबरन की रिश्तेदारी में असोथर कस्बा में शादी थी. इसी शादी में सम्मिलित होेने के लिए शिवबरन अपने बड़े बेटे हरिओम के साथ शाम 6 बजे घर से निकल गया.
खाना खाने के बाद गेंदावती पोते हर्ष (3 वर्ष) के साथ कमरे में जा कर लेट गई. घर पर काम निपटाने के बाद सुनीता भी अपनी मासूम बेटी क्रांति के साथ कमरे में जा कर लेट गई. लेकिन उस की आंखों से नींद ओेझल थी.
रात लगभग 11 बजे राममिलन, सुनीता के कमरे में आ गया. उन दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई. बातचीत के दौरान सुनीता ने कहा, ‘‘देवरजी, अपनी जीवनलीला समाप्त करने का आज सही समय है. तुम मेरा साथ दोगे या नहीं?’’
‘‘तुम्हारे बिना मेरे जीवित रहने का मकसद ही क्या है. अत: मैं भी तुम्हारे साथ ही अपना जीवन समाप्त करूंगा.’’ इस के बाद सुनीता और राममिलन ने छत के कुंडे में साड़ी को बांधा और साड़ी के दोनों सिरों को फांसी का फंदा बनाया. फिर एकएक सिरा गले में डाल कर फांसी के फंदे पर झूल गए. कुछ देर बाद ही दोनों की गरदन लटक गई.
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पहली दिसंबर, 2020 की सुबह करीब 7 बजे गेंदावती जागीं तो उन्हें मासूम बच्ची क्रांति के रोने की आवाज सुनाई दी. वह सुनीता के कमरे पर पहुंचीं, तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. तब उन्होंने दरवाजे की कुंडी खटखटाई और आवाज दी, ‘‘बहू, दरवाजा खोलो, बच्ची रो रही है. क्या घोड़े बेच कर सो रही हो?’’ पर अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. वह राममिलन के कमरे में पहुंची तो वह कमरे में नहीं था.
अब गेंदावती का माथा ठनका. उन के मन में तरहतरह के कुविचार आने लगे. इसी घबराहट में वह सुनीता की चचेरी जेठानी रूपाली को बुला लाई. उस ने भी दरवाजा थपथपाया और आवाज लगाई पर अंदर से कोई हलचल नहीं हुई. शोरशराबा सुन कर पासपड़ोस के लोग भी आ गए.
उसी समय शिवबरन व उस का बेटा हरिओम भी असोथर से आ गए. उन दोनों ने अपने दरवाजे पर भीड़ देखी तो घबरा गए. गेंदावती ने पति व बेटे को बताया कि सुनीता दरवाजा नहीं खोल रही है. राममिलन भी कमरे में नहीं है.
शिवबरन व हरिओम ने भी दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन जब दरवाजा नहीं खुला तो दोनों ने कमरे का दरवाजा तोड़ दिया और कमरे के अंदर प्रवेश किया.
कमरे के अंदर का दृश्य बड़ा ही वीभत्स था. पंखे के हुक से साड़ी का फंदा बंधा था. साड़ी के एक छोर पर सुनीता तथा दूसरे छोर पर राममिलन का शव लटक रहा था. सुनीता का चेहरा राममिलन की छाती पर था. सुनीता का एक पैर चारपाई के नीचे लटक रहा था तथा दूसरा पैर चारपाई को छू रहा था.
देवरभाभी द्वारा आत्महत्या करने की खबर लमेहटा गांव में फैल गई. सैकड़ों लोग घटनास्थल पर आ पहुंचे. इसी बीच किसी ने थाना गाजीपुर पुलिस को सूचना दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी कमलेश पाल पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ गए. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को सूचित किया तो एसपी सतपाल, एएसपी राजेश कुमार तथा सीओ संजय कुमार शर्मा आ गए.
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पुलिस अधिकारियों ने फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया तथा मृतक व मृतका के घर वालों से पूछताछ की. फोरैंसिक टीम ने भी जांच कर साक्ष्य जुटाए. निरीक्षण व पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों शवों को फांसी के फंदे से नीचे उतरवाया. फिर दोनों शवों को पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल फतेहपुर भिजवा दिया.
मृतक के पिता शिवबरन निषाद की तहरीर पर गाजीपुर पुलिस ने भादंवि की धारा 309 के तहत सुनीता और राममिलन के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज किया, लेकिन दोनों की मौत हो जाने से पुलिस ने इस मामले की फाइल बंद कर दी.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) अक्सर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हैं. और वह अपने फैंस के साथ अपनी फोटोज और वीडियोज शेयर करती रहती हैं.
फैंस भी इंटरनेट उनके पोस्ट को काफी पसंद करते हैं. लेकिन अब रानी चटर्जी ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी है कि वो सोशल मीडिया से थोड़े दिन के लिए ब्रेक ले रही हैं.
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एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने यह लिखा कि शायद यह सोशल मीडिया पर मेरा आखिरी पोस्ट है. मैं कुछ दिनों के लिए इंस्टाग्राम और फेसबुक से ब्रेक ले रही है. मैं जल्द ही नई एनर्जी के साथ वापस लौटूंगी.
भोजपुरी एक्टर Pawan Singh की बर्थडे पार्टी में नजर आये बड़े सितारें, देखें फोटोज
रानी चटर्जी के इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने कमेंट किया हैं. एक यूजर ने लिखा, हम आपको मिस करेंगे, तो वहीं एक्ट्रेस गुंजन पंत ने कमेंट करते हुए लिखा, ‘खुश रहो और फोन पर कनेक्ट रहो.
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वर्कफ्रंट की बात करें तो, रानी चटर्जी जल्द ही अपकमिंग एक्शन-ड्रामा ‘लेडी सिंघम’ (Lady Singham) में नजर आएंगी. इस फिल्म में रानी चटर्जी एक पुलिस औफिसर के किरदार में नजर आएंगी. इस फिल्म में बौलीवुड एक्टर शक्ति कपूर (Shakti Kapoor) भी दिखाई देंगे.
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छोटे पर्दे का मशहूर रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के होस्ट अमिताभ बच्चन इस शो को अलविदा कहने वाले हैं ? दरअसल उनकी एक ब्लौग पोस्ट से इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है.
अमिताभ बच्चन ने एक ब्लौग पोस्ट लिखा है. इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मैं थक चुका हूं और रिटायर हो रहा हूं. मैं माफी चाहता हूं… केबीसी की शूटिंग का यह आखिरी दिन काफी लंबा था, कल तक ठीक हो जाऊंगा. लेकिन यह याद रखें कि काम तो काम ही होता है. किसी एक व्यक्ति के हटने के बाद भी उसे पूरी गंभीरता के साथ किया जाना चाहिए.

उन्होंने इस पोस्ट में आगे लिखा कि आप सबका स्नेह और प्यार ने शूटिंग के आखिरी दिन को एक विदाई जैसा बना देता है. वहां सभी लोग एक साथ इकट्ठा होते हैं. इच्छा तो कभी नहीं रुकने की नहीं होती है. मुझे उम्मीद है कि यह जल्द ही फिर से होगा. पूरी टीम बहुत ही प्यारी, केयरिंग और मेहनती थी. यह सब हमारे सेट से दूर जाने को मुश्किल कर देता है.
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उन्होंने पोस्ट के अंतिम लाइन में लिखा कि पूरी टीम को इतने प्यार, केयर और अच्छे व्यवहार के लिए मेरी ओर बहुत-बहुत शुक्रिया. यह खत्म हो रहा है और सब भावुक भी हो रहे हैं लेकिन आगे एक और दिन आने वाला है.
बता दें कि ‘कौन बनेगा करोड़पति 12’ का शूटिंग के आखिरी दिन पर अमिताभ बच्चन ने एक ब्लौग पोस्ट लिखकर यह जानकारी दी है.