उत्तर प्रदेश: जातीयता के जाल में उलझे राजा सुहेलदेव

राजनीति में जाति और धर्म का दबदबा पूरी तरह से हावी है. इस की सबसे बड़ी वजह है वोट. हमारे देश के लोकतंत्र की विडंबना यह है कि यहां जाति और धर्म के नाम पर ही वोट पड़ते हैं. संविधान में कुछ भी लिखा हो पर चुनाव में टिकट बंटवारे से लेकर मुद्दे तय करने में जाति और धर्म को आधार बनाया जाता है.

उत्तर प्रदेश में इस का सबसे बड़ा उदाहरण श्रावस्ती के राजा सुहेलदेव के रूप में देखा जा सकता है. राजा सुहेलदेव की जाति को लेकर राजनीति ने कैसे-कैसे रंग बदले यह देखना काफी दिलचस्प है. राजा सुहेलदेव को कभी दलित कहा गया, कभी उन्हें पिछड़े तबके से जोड़ा गया तो कभी राजपूत माना गया. जैसेजैसे राजनीति के रंग बदले, वैसेवैसे राजा सुहेलदेव की जाति भी बदलती रही.

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भारतीय जनता पार्टी ने साल 2017 के विधानसभा चुनाव में राजा सुहेलदेव का महिमामंडन शुरू किया था. योगी सरकार बनने के बाद साल 2021 में चित्तौरा झील के किनारे राजा सुहेलदेव की भव्य मूर्ति लगाने का काम शरू किया. वीडियो कौंफ्रैंसिंग के जरीए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बने.

भाजपा के लिए राजा सुहेलदेव इस वजह से भी खास हो जाते हैं, क्योंकि उन्होंने गजनवी सेनापति सैयद सालार मसूद गाजी को हरा कर मार डाला था. ऐसे में भाजपा के लिए राजा सुहेलदेव धार्मिक धुर्वीकरण में खास हो जाते हैं. भाजपा अब यहां चित्तौरा झील के किनारे राजा सुहेलदेव का स्मारक बनवाना चाहती है. इस से नई तरह का विवाद भी खड़ा हो गया है. विवाद यह है कि दलित और पिछडी जातियों के साथसाथ अब राजपूत जातियां भी राजा सुहेलदेव पर अपना हक जताने लगी लगी हैं. पयागपुर के राजा यशुवेंद्र विक्रम सिंह ने अपनी 88 बीघा जमीन राजा सुहेलदेव के लिए दान कर दी है.

पत्रकार संजीव सिंह राठौर कहते हैं, ‘इस से बहराइच को पर्यटन स्थल के रूप में बदलने में मदद मिलेगी. पयागपुर राज परिवार और राजा यशुवेंद्र विक्रम सिंह ने जिस तरह से यह काम किया है, वह समाज के लिए एक मिसाल है.’

कौन थे राजा सुहेलदेव

सुहेलदेव श्रावस्ती के राजा थे. उन्होंने 11वीं शताब्दी की शुरुआत में बहराइच में गजनवी सेनापति सैयद सालार मसूद गाजी को हरा कर मार डाला था. 17वीं शताब्दी के फारसी भाषा की कथा ‘मिरात ए मसूदी’ में उन का जिक्र किया गया है. 20वीं शताब्दी के बाद से हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा उन को एक हिंदू राजा के रूप में पहचान दिलाने का काम शुरू किया, जिस ने मुसलिम आक्रमणकारियों को हरा दिया था.

‘मिरात ए मसूदी’ मुगल सम्राट जहांगीर (1605-1627) के शासनकाल के दौरान अब्द उर रहमान चिश्ती ने लिखी थी. इस के मुताबिक सुहेलदेव श्रावस्ती के राजा के सब से बड़े बेटे थे. एक दूसरी किताब के मुताबिक, सुहेलदेव के पिता का नाम प्रसेनजित था और सुहेलदेव वसंत पंचमी के दिन पैदा हुए थे. वे नागवंशी भारशिव क्षत्रिय थे, जिन्हें आज ‘भर’ या ‘राजभर’ कहा जाता है.

महमूद गजनवी के भतीजे सैयद सालार मसूद गाजी ने 16 साल की उम्र में सिंधु नदी को पार कर भारत पर हमला किया और मुलतान, दिल्ली, मेरठ और आखिर में सतरिख पर जीत हासिल की. सतरिख (बाराबंकी जिला) में उन्होंने अपना मुख्यालय बनाया था. वहां से राजाओं के साथ युद्व शरू किया गया. सैयद सैफ उद दीन और मियां राजब को बहराइच को भेज दिया गया था.

मसूद के पिता सैयद सालार साहू गाजी की अगुआई में सेना ने बहराइच के राजाओं को हरा दिया. वहां के राजा विद्रोह करने लगे. साल 1033 में मसूद ने खुद बहराइच में मोरचा संभाला. इसी दौर में राजा सुहेलदेव ने राजपाट संभाला. मसूद ने अपने दुश्मनों को हर बार हराया. आखिर में साल 1034 में सुहेलदेव की सेना ने मसूद की सेना को एक लड़ाई में हराया और मसूद की मौत हो गई.

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मसूद को बहराइच में दफनाया गया था और साल 1035 में यहां पर उस की याद में दरगाह शरीफ सैयद सालार जंग बनाई गई थी. बताया जाता है कि यहां पर हिंदू संत और ऋषि बलार्क का एक आश्रम था. फिरोज शाह तुगलक द्वारा उसे दरगाह में बदल दिया गया. इस तरह की पौराणिक वजहों से राजा सुहेलदेव की राजनीतिक अहमियत आज के दौर में बढ़ जाती है. राजा सुहेलदेव का स्मारक बनाना योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है. इस से राजनीतिक फायदा दिख रहा है.

जाति का विवाद

राजा सुहेलदेव को अलगअलग जातियों के लोग अपनीअपनी जाति का बताते रहे है. ‘मिरात ए मसूदी’ के मुताबिक, सुहेलदेव ‘भरथारू‘ समुदाय से संबंधित थे. पौराणिक कथाओं के कुछ के लेखकों ने उन की जाति को ‘भर राजपूत‘, ‘राजभर’, ‘थारू‘ और ‘जैन राजपूत’ रूप में भी लिखा है. साल 1940 में बहराइच के स्कूल में शिक्षक ने सुहेलदेव को जैन राजा और हिंदू संस्कृति के उद्धारकर्ता के रूप में पेश किया. साल 1947 में भारत के विभाजन के बाद कविता का पहला मुद्रित संस्करण 1950 में दिखाई दिया. आर्य समाज, राम राज्य परिषद और हिंदू महासभा संगठन ने सुहेलदेव को हिंदू नायक के रूप में प्रदर्शित किया.

समाजसेवी जितेंद्र चतुर्वेदी कहते हैं, ‘सुहेलदेव को भर समुदाय का नायक माना जाता है. दलित समुदाय में आने वाली पासी जाति भी उन पर अपना अधिकार मानती है और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ‘भर या राजभर’ जाति के लोग भी उन्हें अपना नायक बताते हैं. इस को ले कर राजनीकि दल का भी गठन किया गया.’

अप्रैल, 1950 में इन संगठनों ने राजा के सम्मान में सालार मसूद की दरगाह में एक मेला आयोजित करने की योजना बनाई. दरगाह समिति के सदस्य ख्वाजा खलील अहमद शाह ने सांप्रदायिक तनाव से बचने के लिए जिला प्रशासन को प्रस्तावित मेले पर प्रतिबंध लगाने की अपील की. इस के बाद धारा 144 (गैरकानूनी असेंबली) के तहत निषिद्ध आदेश जारी किए गए थे. बहराइच के हिंदुओं ने आदेश के खिलाफ आयोजन किया और तब उन्हें दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. उन की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए हिंदुओं ने एक हफ्ते के लिए स्थानीय बाजारों को बंद कर दिया और गिरफ्तार होने की पेशकश की. इस में कांग्रेस के नेताओं ने भी विरोध किया था. तकरीबन 2 हजार लोग जेल गए थे. कुछ समय के बाद प्रशासन ने मुकदमा वापस ले लिया. वहां 500 बीघा भूमि पर सुहेलदेव का एक मंदिर बनाया गया था.

1950-60 के दशक के दौरान स्थानीय नेताओं ने सुहेलदेव को पासी राजा बताना शुरू किया. पासी एक दलित समुदाय है और बहराइच के आसपास एक खास वोटबैंक भी है. धीरेधीरे पासी समाज ने सुहेलदेव को अपनी जाति के सदस्य के रूप में महिमामंडित करना शुरू कर दिया. बहुजन समाज पार्टी ने मूल रूप से दलित वोटरों को आकर्षित करने के लिए सुहेलदेव का इस्तेमाल किया. भारतीय जनता पार्टी ने भी दलितों को आकर्षित करने के लिए सुहेलदेव के नाम का इस्तेमाल किया.

80 के दशक में राजा सुहेलदेव के नाम पर मेले और नौटंकी का आयोजन किया गया, जिस में उन्हें मुसलिम आक्रमणकारियों के खिलाफ लड़े एक हिंदू दलित के रूप में दिखाया गया. 29 दिसंबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजा सुहेलदेव की याद में एक डाक टिकट जारी किया था. योगी सरकार अब वहां भव्य स्मारक बनाने जा रही है.

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‘मिरात ए मसूदी’ के बाद के लेखकों ने सुहेलदेव को भर, राजभर, बैस राजपूत, भारशिव या फिर नागवंशी क्षत्रिय तक बताया है. इसी आधार पर क्षत्रिय समाज इस बात पर एतराज जता रहा है कि सुहेलदेव को उन की जाति के नायक के बजाय किसी और जाति को नायक के रूप में क्यों बताया जा रहा है? ट्विटर पर इस के खिलाफ बाकायदा अभियान छेड़ा गया और ‘राजपूतविरोधीभाजपा‘ हैशटैग को ट्रैंड कराया गया.

क्षत्रिय समाज के नेता मनोज सिंह चौहान कहते हैं, ‘क्षत्रिय समाज के राजा सुहेलदेव बैस के इतिहास से छेड़छाड़ करने को राजपूत समाज बरदाश्त नहीं करेगा. यह हमारे मानसम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा मामला है.’

पूर्वी उत्तर प्रदेश में तकरीबन 18 फीसद राजभर हैं और बहराइच से ले कर वाराणसी तक के 15 जिलों की 60 विधानसभा सीटों पर इस समुदाय का काफी असर है. राजभर उत्तर प्रदेश की उन अतिपिछड़ी जातियों में से हैं जो लंबे समय से अनुसूचित जाति में शामिल होने की मांग कर रहे हैं. साल 2002 में बहुजन समाज पार्टी से अलग होने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी बनाई.

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी पहले भाजपा के साथ राजग गठबंधन में थी. ओम प्रकाश राजभर साल 2017 में योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में मंत्री थे, लेकिन विवादों के बाद उन्हें साल 2019 में पिछड़ा कल्याण मंत्री के पद से हटा दिया गया था.

राजनीति का खेल

बहराइच जिले में सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर हर साल लाखों लोग आते हैं. यह जगह राजा सुहेलदेव स्मारक से 12 किलोमीटर दूर है. इस समाधि पर मुसलमानों के साथसाथ हिंदुओं की भी आस्था है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों से लोग यहां पहुंचते हैं. मसूद की दरगाह को गाजी मियां के नाम से भी जाना जाता है. वहां हर साल मई में उर्स के मौके पर बड़ा मेला लगता है. इस में हर जातिधर्म के लोग आते हैं और एक भाव से मन्नतें मांगते हैं. इस मौके पर गाजी मियां की बरात भी निकाली जाती है. माना जाता है कि उन्हें शादी से पहले कत्ल कर दिया गया था.

बहराइच का मेला गरमी में एक रविवार से तब शुरू होता है, जब बाराबंकी के देवा शरीफ से गाजी मियां की बरात आती है. लेकिन पिछले कई सालों से कट्टर हिंदुत्ववादी राजा सुहेलदेव का विजयोत्सव मनाने लगे हैं. जिस के चलते यहां तनाव रहने लगा है. अब सुहेलदेव का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं. सुहेलदेव को उन परम हिंदू राजा के तौर पर चित्रित किया जा रहा है, जिन्होंने मुसलिम आक्रांताओं को हराया. पौराणिक कहानियों में बताया गया कि सुहेलदेव को हराने के लिए सालार मसूद ने अपनी सेना के आगे गाएं खड़ी कर दी थीं, ताकि सुहेलदेव उस पर हमला न कर पाएं. लेकिन सुहेलदेव ने युद्ध से एक रात पहले गायों को छुड़वा लिया और फिर मसूद को हरा दिया.

साल 2001 में गाजी मियां की दरगाह की जगह मंदिर बनाने की मांग सुहेलदेव समिति ने की. मई, 2004 में गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ ने इस जगह पर 5 दिनों का उत्सव रखा. साल 2002 में खुद को राजभरों का मसीहा मानने वाले ओम प्रकाश राजभर ने सुहेलदेव के नाम पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी बनाई. साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 8 सीटें दी थीं, जिन में से वे 4 सीटें जीत पाए थे.

अब राजा सुहेलदेव के स्मारक और मसूद गाजी की दरगाह को ले कर नया विवाद खड़ा हो रहा है. ऐसे में बहराइच विवाद का एक नया केंद्र बनता दिख रहा है.

Disha Parmar जल्द ही बनेंगी Rahul Vaidya की दुल्हनिया

बिग बॉस 14 के रनर-अप राहुल वैद्य (Rahul Vaidya)  अपने लवलाइफ के कारण एक बार फिर सुर्खियों में छाए हुए हैं. दरअसल  बिग बॉस 14  के दौरान राहुल ने अपनी लेडीलव दिशा परमार को शादी के लिए प्रपोज किया था.

और एक्ट्रेस ने नेशनल टीवी पर हां कहा था. अब राहुल वैद्य के फैंस जानना चाहते हैं कि वो कब तक शादी करेंगे. रिपोर्ट्स के अनुसार राहुल वैद्य ने दिशा परमार के साथ शादी की खबरों पर बात करते हुए कहा है, अगर मेरी मां ने कहा है कि राहुल की शादी जून में होगी तो ऐसा ही होगा.

 

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उन्होंने ये भी कहा कि मेरी मां घर वापस जा चुकी हैं लेकिन दिशा अब भी मेरे साथ है. खबरों के अनुसार उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही हम दोनों फ्री होंगे, हम शादी के बारे में फैसला लेंगे.

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राहुल वैद्य ने कहा, जब मैं घर के अंदर था तब मुझे दिशा के साथ अपने रिश्ते का अहसास हुआ. मैं घर में खुद सारे काम करता था और मुझे दिशा की याद आती थी.

उस समय मुझे लगा कि मेरी जिंदगी में कितनी खूबसूरत लड़की है, क्यों ना इससे शादी की जाए. उन्होंने आगे बताया इसी वजह से मैंने दिशा को घर के अंदर से प्रपोज किया था.

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Yeh Rishta kya kehlata hai: कार्तिक और सीरत के बीच बढ़ेंगी नजदीकियां तो रिया चलेगी एक नई चाल

स्टार प्लस का फेमस सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai)  में इन दिनों हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है. जिससे दर्शकों को एंटरटेनमेंट का जबरदस्त तड़का मिल रहा है. कहानी का ट्रैक एक नया मोड़ ले रही है. तो आईए जानते हैं सीरियल के लेटेस्ट एपिसोड के बारे में.

सीरियल के बीते एपिसोड में आपने देखा कि सीरत की सच्चाई गोयनका परिवार के सामने आ गई थी. सभी घरवाले सीरत को सामने देखकर शॉक्ड रह गए. क्योंकि सीरत और नायरा एक-दूसरे हमशक्ल हैं. और ऐसे में सीरत को सामने देखकर घरवाले हैरान रह गए.

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तो उधर कैरव की हालत काफी खराब है और वो बार-बार अपनी मां नायरा से मिलने की जिद भी करने लगा है. ऐसे में दादी ने सीरत से कहा कि वो कैरव के सामने उसकी मां की तरह ही रहें.

तो वहीं सीरत कैरव की मां बनने के लिए तैयार हो गई. क्योंकि उसके दिल में कैरव के लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर बन चुका है. तो दूसरी ओर कार्तिक को इस बात का दुख है कि दादी ने बिना उससे पूछे ही सीरत से ये बातें कर ली.

सीरियल के अपकमिंग एपिसोड में ये दिखाया जाएगा कि सीरत को जैसे ही होश आएगा, वो खुद को अस्पताल में पाएगी. शो में कार्तिक और सीरत की नजदीकियां बढ़ने वाली हैं. और इधर कार्तिक और सीरत को करीब आते हुए देखकर रिया नई-नई चाल चलेगी ताकि वे अलग हो जाए. खबर ये भी आ रही है कि सीरियल  में जल्द ही कार्तिक और सीरत की शादी का ट्रैक भी देखने को मिलने वाला है.

शो के अपकमिंग एपिसोड में ही पता चलेगा कि कार्तिक और सीरत की शादी होती है या नहीं.

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चुनावी साल में युवा, महिला और विकास पर केंद्रित है उत्तर प्रदेश का ‘योगी बजट’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विधान सभा में प्रस्तुत वर्ष 2021-22 का बजट एक लोक कल्याणकारी, विकासोन्मुख व सर्व समावेशी बजट है. यह बजट ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की उत्कृष्ट लोकतांत्रिक भावना से परिपूर्ण है. यह बजट वैश्विक महामारी कोरोना के मध्य देश के सबसे बड़े राज्य को नयी आशा, नयी ऊर्जा देने के साथ ही, प्रदेश की नयी सम्भावनाओं को उड़ान देने का माध्यम बनेगा. इस बजट में हर घर को नल, बिजली, हर गांव में सड़क की व्यवस्था और उसे डिजिटल बनाने तथा हर खेत को पानी एवं हर हाथ को काम देने का संकल्प निहित है.

उन्होंने कहा कि प्रस्तुत बजट गांव, गरीब, किसान, नौजवान, महिलाओं तथा समाज के प्रत्येक तबके का प्रतिनिधित्व करने वाला बजट है. यह बजट आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की भावना के अनुरूप है. रोजगार की व्यवस्था, सभी वर्गाें के उत्थान का इरादा, वंचितों, शोषितों एवं युवाओं के सुन्दर भविष्य की रूपरेखा और प्रदेश के नवनिर्माण की संरचना इस बजट में निहित है.
मुख्यमंत्री जी आज विधान सभा में राज्य सरकार के वर्ष 2021-22 का बजट प्रस्तुत किये जाने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उत्तर प्रदेश को पेपरलेस बजट प्रस्तुत करने वाला देश का पहला राज्य होने पर उन्होंने वित्त मंत्री व उनकी टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि आज ही प्रदेश में पहली बार ई-कैबिनेट बैठक सम्पन्न हुई. बजट से पूर्व हुई कैबिनेट की बैठक पहली ई-कैबिनेट थी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट का आकार 05 लाख 50 हजार 270 करोड़ 78 लाख रुपये का है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कोरोना काल में भी वित्तीय अनुशासन बनाये रखते हुए आधारभूत संरचना के विकास के साथ ही लोक कल्याण के लिए कदम उठाये. विगत वर्ष कोविड-19 से आमजन जीवन के साथ ही अर्थव्यवस्था भी व्यापक रूप से प्रभावित हुई. लक्ष्य के अनुरूप राजस्व की प्राप्तियां सम्भव नहीं हुईं. इसके बावजूद राज्य सरकार ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित एफआरबीएम की सीमा का पालन किया.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्तमान सरकार का वर्ष 2017-18 में पहला बजट किसानों को समर्पित था. वर्ष 2018-19 का दूसरा बजट औद्योगिक विकास तथा बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के विकास के लिए था. वर्ष 2019-20 का बजट महिलाओं के सशक्तिकरण के माध्यम से समाज में उनके प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन के लिए था. वर्ष 2020-21 का बजट युवाओं तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए समर्पित था. वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट का केन्द्र बिन्दु प्रदेश के समग्र एवं समावेशी विकास द्वारा प्रदेश के विभिन्न वर्गाें का ‘स्वावलम्बन से सशक्तीकरण’ है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रस्तुत बजट के माध्यम से प्रदेश में ईज ऑफ लिविंग के लिए हर घर को पानी, बिजली, हर गांव को सड़क तथा डिजिटल बनाने के साथ ही राज्य के समग्र विकास की रूपरेखा प्रारम्भ की गयी है. कृषि क्षेत्र में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना को विस्तार दिया गया है. इस योजना के तहत अब किसान के साथ-साथ उसके परिवार का कमाऊ सदस्य, बटाईदार आदि को भी सम्मिलित किया गया है. दुर्घटना से मृत्यु की स्थिति में 05 लाख रुपये बीमा की व्यवस्था की गयी है. साथ ही, आयुष्मान भारत योजना से कवर न होने वाले किसान परिवारों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 05 लाख रुपये के निःशुल्क चिकित्सा बीमा कवर की व्यवस्था की गयी है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रस्तुत बजट में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए नयी योजनाएं प्रारम्भ की गयी हैं. मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना को नया आयाम दिया गया है. मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का आच्छादन बढ़ाने का निर्णय लिया गया है. प्रस्तुत बजट में एक नयी योजना मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना प्रस्तावित है. इसके अन्तर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पंजीकृत 06 माह से 05 वर्ष के चिन्हित कुपोषित बच्चों तथा एनीमिया ग्रस्त 14 वर्ष तक की स्कूल न जाने वाली किशोरी बालिकाओं को अतिरिक्त पोषण प्रदान किया जाएगा. वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में महिला दुग्ध उत्पादकों के स्वयं सहायता समूहों की आजीविका बढ़ाने के लिए महिला सामर्थ्य योजना भी प्रस्तावित की गयी है. इसके लिए 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को निःशुल्क कोचिंग के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना प्रारम्भ की गयी है. योजना के अन्तर्गत फिजिकली और वर्चुअली निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था है. इस योजना के अन्तर्गत 18 मण्डल मुख्यालयों पर 10 लाख से अधिक युवा जुड़ चुके हैं. प्रदेश में यह योजना तेजी से लोकप्रिय हो रही है. अन्य राज्यों में भी प्रतियोगी परीक्षार्थियों द्वारा इसकी डिमाण्ड की जा रही है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अन्तर्गत पात्र श्रेणी के परीक्षार्थियों को टैबलेट उपलब्ध कराये जाने का प्रस्ताव बजट में किया गया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में कुल 18 मण्डल हैं. जिन मण्डलों में सैनिक स्कूल नहीं हैं, उन मण्डलों में सैनिक स्कूल की स्थापना की जाएगी. संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को गुरुकुल पद्धति के अनुरूप निःशुल्क छात्रावास एवं भोजन की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है. युवाओं को खेल-कूद के बेहतर अवसर सुलभ कराने के लिए ग्रामीण स्टेडियम एवं ओपेन जिम के निर्माण हेतु धनराशि की व्यवस्था प्रस्तुत बजट में प्रस्तावित है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन मण्डलों में राज्य विश्वविद्यालय नहीं हैं, वहां राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी. प्रदेश के 59 जनपदों में राजकीय अथवा निजी मेडिकल कॉलेज स्थापित हैं. मेडिकल कॉलेजों से असेवित 16 जनपदों में पी0पी0पी0 मोड पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाएगी. इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं अत्यन्त सुदृढ़ हो जाएंगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल खण्ड में संगठित व असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए निःशुल्क राशन, भरण पोषण भत्ता उपलब्ध कराया गया. श्रमिकों के आवागमन के लिए भी सुविधा सुलभ करायी गयी. श्रमिकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा सुलभ कराने के लिए अटल आवासीय विद्यालयों की स्थापना करायी जा रही है. प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में एक करोड़ से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं. इनमें खेतों में काम करने वाले श्रमिकों सहित पल्लेदार, कुली आदि बड़ी संख्या में श्रमिक सम्मिलित हैं. असंगठित क्षेत्र के कर्मकारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना तथा चिकित्सा सुविधा सुलभ कराने के लिए मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना प्रारम्भ करने के लिए धनराशि का प्रस्ताव किया गया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोवंश संरक्षण एवं निराश्रित पशुओं की देखभाल के लिए संचालित गो आश्रय स्थलों में 05 लाख 58 हजार गोवंश संरक्षित हैं. मुख्यमंत्री निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना के अन्तर्गत 74,000 से अधिक गोवंश इच्छुक गोपालकों की सुपुर्दगी में दिये गये हैं. प्रस्तुत बजट में सभी न्याय पंचायतों मंे गो आश्रय स्थलों की स्थापना तथा इन्हें स्थानीय एवं स्वैच्छिक संगठनांे की सहभागिता से संचालित करने का प्रस्ताव किया गया है. वाराणसी के गोकुल ग्राम की तर्ज पर शहरों में भी गो संरक्षण की व्यवस्था की जाएगी. व्यापारियों के कल्याण के लिए संचालित मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना के अन्तर्गत प्रति लाभार्थी को देय धनराशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाना प्रस्तावित है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन तथा टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से चिकित्सा सुविधा को सुदृढ़ किया जाएगा. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी, पुणे की तर्ज पर लखनऊ में एक संस्थान बनाया जाएगा, जिससे भविष्य में कोरोना जैसे वायरस पर नियंत्रण के लिए प्रभावी प्रयास किये जा सकें. उन्होंने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में स्थापित किये जा रहे अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ हेतु बजट में धनराशि का प्रस्ताव है. प्रधानमंत्री स्वस्थ भारत योजना के अन्तर्गत एसजीपीजीआई, लखनऊ में लेवल-3 के बायो सेफ्टी लैब की स्थापना की जाएगी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जल जीवन मिशन, हर घर नल पहुंचाने की योजना है. उन्होंने कहा कि शुद्ध पेयजल की उपलब्धता से बीमारियों की आशंका आधी हो जाती है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में इन्सेफेलाइटिस पर नियंत्रण में स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत निर्मित शौचालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. बुन्देलखण्ड, विन्ध्य क्षेत्र तथा आर्सेनिक, फ्लोराइड की समस्या से प्रभावित क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के अन्तर्गत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तुत बजट में 17,000 करोड़ रुपये की धनराशि प्राविधानित की गयी है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों का दायरा बढ़ा है. प्रदेश के 10 नगर स्मार्ट सिटी मिशन तथा 60 शहर अमृत योजना से आच्छादित हैं. शहरी क्षेत्रों में नागरिकों के जीवन में व्यापक सुधार के लिए बजट में धनराशि की व्यवस्था प्रस्तावित की गयी है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग’ में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. पिछले 03 वर्षाें में इस रैंकिंग में प्रदेश पूरे देश में द्वितीय स्थान पर आ गया है. वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान इसके प्रबन्धन के साथ ही औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी कार्य हुआ. प्रदेश में बड़ी मात्रा में निवेश आया. जनपद गौतमबुद्धनगर में डिस्प्ले यूनिट की स्थापना हो रही है. यह संयंत्र चीन से प्रदेश में आया है. डाटा सेण्टर पार्क की स्थापना से बड़ी मात्रा में निवेश हो रहा है. फर्नीचर व हाउस होल्ड में दुनिया की प्रख्यात कम्पनी आइकिया द्वारा प्रदेश में 5500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में व्यापक सुधार हुआ है. कानून-व्यवस्था की बेहतर स्थिति को निरन्तर बनाये रखने के लिए कदम उठाये जा रहे हैं. फॉरेन्सिक साइंस में आवश्यक विशेषज्ञता व प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस और फॉरेन्सिक साइंस इंस्टीट्यूट की स्थापना की गयी है. सभी 18 रेन्ज में फॉरेन्सिक लैब स्थापित करने जा रहे हैं. हर जनपद में साइबर थाना बनाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया गया है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम का क्षेत्र रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है. बन्द पड़ी कताई मिलों की परिसम्पत्तियों को पुनर्जीवित कर पी0पी0पी0 मोड पर औद्योगिक पार्क/आस्थान/क्लस्टर स्थापित करने के लिए धनराशि की व्यवस्था प्रस्तावित है. ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना के अन्तर्गत धनराशि की व्यवस्था का प्रस्ताव किया गया है. प्रदेश के शिक्षित युवा बेरोजगारों को मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना से लाभान्वित करने के लिए भी बजट में धनराशि की व्यवस्था है. उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए 1,000 दिनों तक लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अवस्थापना विकास के लिए निरन्तर कार्य किया गया. पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का 88 प्रतिशत, बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे का 50 प्रतिशत तथा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे का लगभग 25 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है. बलिया लिंक एक्सप्रेस-वे को सैद्धान्तिक मंजूरी प्राप्त हो गयी है. गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि प्राप्त करने हेतु बजट में धनराशि की व्यवस्था प्रस्तावित है. उन्होंने कहा कि हर गांव को सड़क से जोड़ने तथा गांवों के डिजिटलीकरण के लिए धनराशि की व्यवस्था का प्रस्ताव किया गया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में किसी भी अन्य राज्य से अधिक कार्य किया गया है. जनपद अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हवाई अड्डा, अयोध्या के निर्माण के लिए बजट व्यवस्था प्रस्तावित है. जेवर में निर्माणाधीन एयरपोर्ट में हवाई पट्टियों की संख्या 02 से बढ़ाकर 06 करने के लिए धनराशि प्रस्तावित है. यह एयरपोर्ट एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट के रूप में विकसित होगा. कुशीनगर एयरपोर्ट को केन्द्र सरकार द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट घोषित किया गया है. प्रदेश में पुलिस के लिए अवस्थापना कार्याें हेतु बजट की व्यवस्था प्रस्तावित है. प्रत्येक जनपद में पुलिस के लिए बनाये गये आवासों का नामकरण महान क्रान्तिकारी एवं शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किये जाने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि क्रान्तिकारियों व शहीदों के स्मारक स्थलों के जीर्णाेद्धार एवं सौन्दर्यीकरण के लिए बजट व्यवस्था प्रस्तावित है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में असीम सम्भावनाएं हैं. प्रयागराज कुम्भ-2019 में स्वच्छता, सुरक्षा व सुव्यवस्था के कारण 24 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक इसमें सम्मिलित हुए. उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काशी, नैमिष, विन्ध्यवासिनी धाम, चित्रकूट आदि का पर्यटन विकास कराये जाने की योजना है. अयोध्या को दुनिया के नये टूरिस्ट सेण्टर के रूप में विकसित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के माध्यम से ईको व हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा. बजट में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति के लिए भी व्यवस्था है. जनजातीय संग्रहालय की स्थापना के लिए बजट धनराशि प्रस्तावित है.

इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना, वित्त राज्यमंत्री श्री संदीप सिंह, मुख्य सचिव श्री आरके तिवारी, अपर मुख्य सचिव गृह श्री अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं एमएसएमई श्री नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव वित्त श्रीमती एस.राधा चौहान, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं सूचना श्री संजय प्रसाद, सूचना निदेशक श्री शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

आयरन लेडी संजुक्ता पराशर

असम में आईपीएस संजुक्ता पराशर को आयरन लेडी के नाम से जाना जाता है. जिस तरह वह हाथों में एके 47 ले कर जंगलों में कौंबिंग करती थीं, वह भी खूंखार उग्रवादियों के इलाकों में, उस से उन्हें महिला सशक्तिकरण की जीतीजागती मिसाल माना जाना चाहिए. इस आयरन लेडी ने…

15महीने में 16 एनकाउंटर करना कोई छोटी बात नहीं होती. लेकिन कानून की रक्षा के लिए सिर पर

कफन बांध कर निकलने वालों के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं. ये वे लोग होते हैं, जो फर्ज और देश के लिए सिर पर कफन बांध कर निकलते हैं और इस के लिए मर भी सकते हैं. असम की आयरन लेडी के नाम से मशहूर संजुक्ता पराशर उन्हीं में से हैं.

सन 2008-09 में टे्रनिंग के बाद संजुक्ता पराशर की तैनाती असम के माकुम में असिस्टैंट कमांडेंट के रूप में हुई थी. उन की पोस्टिंग के कुछ ही दिन हुए थे कि उदालगिरी बोडो और बांग्लादेशियों के बीच जातीय हिंसा हुई तो संजुक्ता पराशर को उस जातीय हिंसा को रोकने के लिए भेजा गया.

इस औपरेशन को उन्होंने खुद लीड किया और केवल 15 महीने में 16 आतंकवादियों को मार गिराया. साथ ही 64 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. एके 47 रायफल हाथ में ले कर जंगलों में वह न सिर्फ कौंबिंग करती थीं, बल्कि सब से आगे चलती थीं.

संजुक्ता नईनई पुलिस अधिकारी थीं, पर अपनी हिम्मत से उन्होंने उस जातीय हिंसा को तो समाप्त किया ही, उन्होंने अपनी टीम के साथ कुछ ऐसा किया कि उग्रवादी उन के नाम से कांपने लगे.

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देश की आंतरिक सुरक्षा का मामला हो या फिर सीमा पर दुश्मनों से डट कर मुकाबले की बात हो, हमेशा हमारे जेहन में रौबदार पुरुष जवानों के ही चेहरे उभरते हैं. लेकिन अब यह मिथक टूटने लगा है. देश की बेटियां अब पुलिस से ले कर सेना तक में अपना लोहा मनवा रही हैं.

असम की इस प्रथम लेडी आईपीएस ने बहुत कम समय में अपनी बहादुरी से मीडिया में ही नहीं, आम आदमी के दिल तक में अपनी जगह बना ली है.

असम की आयरन लेडी के नाम से मशहूर आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर ने देश के पूर्वी राज्य असम में पिछले कई सालों तक बोडो उग्रवादियों के खिलाफ मोर्चा ही नहीं संभाला, बल्कि उन्होंने जिस तरह जंगलोें में ढूंढढूंढ कर आतंकवादियों को गिरफ्तार किया, इस से इस पुलिस अफसर ने बहादुरी की एक नई मिसाल पेश की है.

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41 वर्षीया आईपीएस संजुक्ता पराशर असम की ही रहने वाली हैं. उन के पिता दुलालचंद बरुआ असम में सिंचाई विभाग में इंजीनियर थे और मां मीरा देवी स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करती थीं.

बचपन से ही संजुक्ता को खेलकूद का शौक था. उन्हें तैराकी बहुत अच्छी आती है. इस के लिए उन्हें स्कूल में कई पुरस्कार भी मिले. मां ने उन की इन खूबियों को निखारा. वह हमेशा संजुक्ता को समझाती थीं कि वह किसी से कम नहीं है.

मां ने उन्हें एक बेटे की तरह ही मौके दिए. उन्होंने ही संजुक्ता को हिम्मत और सम्मान के साथ जीना सिखाया. उसी का नतीजा है कि आज वह सिर उठा कर चल रही हैं.

असम के गुवाहाटी के होली चाइल्ड स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद संजुक्ता आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गईं, जहां उन्हें अलगअलग राज्यों से आए छात्रों से मिलने का मौका मिला. यहां उन के लिए बहुत कुछ नया था.

दिल्ली में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के इंद्रप्रस्थ कालेज से राजनीति विज्ञान से ग्रैजुएशन किया. नंबर कम होने से इंद्रप्रस्थ कालेज में उन का दाखिला ही नहीं हो रहा था, लेकिन फिर हुआ तो आगे चल कर उसी लड़की ने यूपीएससी की परीक्षा में 85वीं रैंक हासिल की.

इंद्रप्रस्थ कालेज से ग्रैजुएशन करने के बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) से इंटरनैशनल रिलेशन में मास्टर डिग्री ली और यूएस फौरेन पौलिसी में एमफिल और पीएचडी की. पीएचडी करने के बाद वह सन 2004 में आब्जर्वर रिसर्च में काम करने लगीं.

बचपन से ही वह आईपीएस बन कर देश और जनता की सेवा करना चाहती थीं, इसलिए आब्जर्वर रिसर्च में काम करने के साथसाथ वह संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी भी कर रही थीं. वह रोजाना करीब 5 से 6 घंटे पढ़ाई करती थीं. उन की मेहनत रंग लाई और सन 2006 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली.

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अच्छी रैंक की वजह से उन्हें अपनी इच्छा से कैडर चुनने की छूट दी गई. संजुक्ता पराशर जब असम में अपनी स्कूली पढ़ाई कर रही थीं, तभी से वह अपने राज्य में हो रही आतंकवादी घटनाओें और भ्रष्टाचारियों की गतिविधियों से दुखी थीं. इसलिए उन्होंने अच्छी रैंक लाने के बावजूद आईएएस बन कर आराम की नौकरी करने के बजाय आईपीएस बन कर असम में काम करने का निर्णय लिया.

इस के लिए उन्होंने असम मेघालय कैडर चुना. क्योंकि आईपीएस बन कर वह कुछ अच्छा करना चाहती थीं. पुलिस अफसर बन कर उन्होंने किया भी यही.

एक महिला होने के नाते असम के अशांत इलाके में काम करना आसान नहीं था, पर संजुक्ता ने दिलेरी के साथ इसे स्वीकार किया. 2008 में ही उन्होंने असम-मेघालय कैडर के आईएएस अधिकारी पुरु गुप्ता से शादी की. इस समय उन के 2 बेटे हैं, जिन की देखभाल उन की मां करती हैं.

व्यस्तता की वजह से वह 2 महीने मेें एक बार ही अपने परिवार से मिल पाती हैं. पुलिस अधिकारी होने के साथसाथ वह मां भी हैं, पर काम की वजह से उन्हें परिवार से दूर रहना पड़ता है.

उदालगिरी में जातीय हिंसा पर काबू पाने के बाद उन की पोस्टिंग आतंकवादग्रस्त इलाके में ही कर दी गई.

वहां संजुक्ता उग्रवादियों के पीछे हाथ धो कर पड़ गईं. उन्हें जोरहट जिले का एसपी बनाया गया तो हाथ में एके-47 ले कर असम के जंगलों में सीआरपीएफ के जवानों को लीड करती थीं.

संजुक्ता पराशर ने अपनी टीम पर हमला करने वाले उग्रवादियों की धरपकड़ तो की ही, साथ ही उन उग्रवादियों को भी पकड़ा, जो जंगल को अपने छिपने के लिए इस्तेमाल करते थे. इस तरह की जगहों पर औपरेशन को लीड करना बहुत मुश्किल होता है. यह बहुत ही दुर्गम इलाका है, जहां मौसम में तो नमी रहती है, कब बारिश होने लगे, कहा नहीं जा सकता. साथ ही नदी, झील और जंगली जानवरों का भी खतरा रहता है.

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नदी और झील पार कर दूसरे छोर तक पहुंचना बहुत कठिन काम होता है. इस के अलावा स्थानीय निवासी भी उग्रवादियों को पुलिस की गतिविधियों की सूचना देते रहते हैं.

2011 से 2014 तक जोरहट की एसपी रहते हुए संजुक्ता पराशर ने औपरेशन को खुद ही लीड करते हुए सन 2013 में 172 तो 2014 में 175 आतंकवादियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया. इस के बाद सन 2015-16 में सोनितपुर की एसपी रहते हुए उन्होंने अपने 15 महीने के औपरेशन में 16 आतंकवादियों को मार गिराया तो 64 को गिरफ्तार किया. जबकि सोनितपुर के जंगलोें में आतंकवादियों को खोज निकालना बहुत जोखिम का काम था.

पर उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया और उग्रवादियों के बीच अपने नाम का लोहा मनवा कर ही रहीं. उन्होंने तमाम उग्रवादियों को गिरफ्तार तो किया ही, इन आतंकियों के पास से उन्होंने भारी मात्रा में गोला, बारूद भी बरामद किया. मणिपुर के चंदेल में 18 सीआरपीएफ के जवानों के शहीद होने के बाद संजुक्ता पराशर को उन की टीम के साथ उस इलाके में पैट्रोलिंग के लिए भेजा गया. इस का नतीजा यह निकला कि इस बहादुर आईपीएस की टीम ने मई, 2016 में मलदांग में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट औफ बोडोलैंड शाक विजिट के 4 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया.

इस की वजह यह थी कि जिस जगह पर अन्य पुलिस अधिकारी जाने से डरते थे, संजुक्ता पराशर वहां बेखौफ हो कर औपरेशन चलाती थीं. यही वजह थी कि उन का नाम सुन कर उग्रवादी कांपने लगे थे, उन्हें जान से मारने की धमकी देने लगे थे. बाजारों में भी उन के खिलाफ पैंफ्लेट चिपकाए गए, पर उग्रवादियों की इन धमकियों से न कभी वह डरीं और न कभी इस की परवाह की.

वह अपने आतंकवाद विरोधी अभियान में उसी तरह लगी रहीं. आतंकवादियों के लिए वह बुरे सपने की तरह थीं.

महिला होने के बावजूद संजुक्ता पराशर का नाम सुन कर बड़े से बड़े दहशतगर्दों की दहशत दम तोड़ देती थी. क्योंकि वह बड़ा से बड़ा जोखिम भरा काम करने से जरा भी नहीं घबराती थीं. इस की वजह यह है कि संजुक्ता के लिए महिला होना किसी तरह की कमजोरी नहीं है.

अपनी इसी बहादुरी की वजह से संजुक्ता पराशर आज लड़कियों की रोल मौडल बन गई हैं. सन 2017 में उन की पोस्टिंग नैशनल इनवैस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) में एसी के रूप में 4 साल के लिए कर दी गई. तब से वह एनआईए में ही काम कर रही हैं.अपने काम से हमेशा संतुष्ट रहने वाली संजुक्ता पराशर को एक बात का अफसोस है कि जब वह सोनितपुर की एसपी थीं, तब वह एक बिजनेसमैन को नहीं बचा पाईं थीं. इसे वह अपने जीवन का सब से मुश्किल केस भी मानती हैं.

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दरअसल, एक गैंग ने उस बिजनेसमैन को हनीट्रैप में फांस कर अपहरण कर लिया था. अपहरण में उसी का गनमैन और एक कालगर्ल शामिल थी. फिरौती के लिए जिस नंबर से फोन किए जा रहे थे, वह सिम फरजी नामपते पर लिया गया था. इसलिए पुलिस को अपहर्ताओं तक पहुंचने में काफी समय लग गया और पुलिस जब तक उन तक पहुंचती, तब तक अपहर्ताओं ने बिजनेसमैन की हत्या कर दी थी.

साल 2017 में संजुक्ता पराशर को भोपाल और उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में हुए 7 धमाकों की जांच के लिए नैशनल इनवैस्टीगेशन एजेंसी में बतौर टीम हैड नियुक्त किया गया था. तब से वह एनआईए में तैनात हैं.

संजुक्ता को महिला सशक्तिकरण के लिए दिल्ली महिला आयोग ने अवार्ड भी दिया था.

17 दिन की दुल्हन: भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

10 दिसंबर, 2020 को आरजू अमनदीप गुप्ता की दुलहन बन कर ससुराल कानपुर आ गई. ससुराल में उसे जिस ने भी देखा, उसी ने उस के रूपसौंदर्य की सराहना की. सुंदर व गुणवान पत्नी पा कर अमनदीप जहां खुश था, वहीं अच्छा घरवर पा कर आरजू भी खुश थी. सुंदर व सुशील बहू मिलने से सास पिंकी व ससुर आर.सी. गुप्ता भी फूले नहीं समा रहे थे. वह आरजू को बेटी की तरह स्नेह करते थे.

आर.सी. गुप्ता की बेटी का नाम भी आरजू था और बहू का भी. अब घर में 2 आरजू थीं. अत: उन्होंने दोनो को नंबर अलाट कर दिए थे. बहू को वह आरजू फर्स्ट कह कर बुलाते थे और बेटी को आरजू सेकेंड.

आर.सी. गुप्ता के घर किसी चीज की कमी न थी, सो आरजू हर तरह से खुश थी. मोबाइल फोन पर बतियाने का भी किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध न तो पति की तरफ से था और न ही सासससुर की तरफ से. अत: आरजू दिन में कई बार अपनी मां अर्चना से मोबाइल फोन पर बतियाती थी और उन्हें बताती थी कि वह ससुराल में हर तरह से खुश है.

आरजू ने अपने परिवार का एक वाट्सऐप ग्रुप बनाया था, जिस में वह अकसर फोटो शेयर करती थी. आरजू की अपनी ननद आरजू गुप्ता से भी खूब पटती थी. ननदभौजाई सहेली जैसी थीं. खूब हंसतीबोलती थीं. हंसीमजाक में खूब ठहाके लगते थे. आरजू के सरल स्वभाव तथा मृदुल व्यवहार से पड़ोसी भी प्रभावित थे. वह अकसर पिंकी से उस की बहू की तारीफ करते थे. पिंकी बहू की तारीफ सुन कर गदगद हो उठती थी. लेकिन यह खुशी शायद प्रकृति को मंजूर नहीं थी. फिर तो जो हुआ, शायद उस की उम्मीद किसी को नहीं थी.

25 दिसंबर, 2020 की सुबह 9 बजे आरजू नींद से जागी. उस के बाद उस ने मोबाइल पर अपनी मां अर्चना से बात की और बताया कि वह फ्रैश होने बाथरूम जा रही है. अमनदीप उस समय कमरे में ही था. उस के बाद क्या कुछ हुआ, किसी को पता नहीं. पिंकी और उस की बेटी रसोईघर में थीं और आर.सी. गुप्ता ड्यूटी पर जा चुके थे.

कुछ देर बाद नौकरानी रज्जो साफसफाई के लिए कमरे में आई. वह पानी लेने के लिए बाथरूम की तरफ गई. उस ने बाथरूम का दरवाजा खोला तो बहू आरजू बाथरूम के गीले फर्श पर गिरी पड़ी थी. उस ने उसे हिलायाडुलाया. जब कोई हरकत नहीं हुई तो वह चीख पड़ी.

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उस की चीख सुन कर अमनदीप, उस की मां पिंकी व बहन आरजू आ गई. उस के बाद तो माही वाटिका अपार्टमेंट में सनसनी फैल गई. सूचना पा कर आर.सी. गुप्ता भी आ गए.

इस के बाद अमनदीप व आर.सी. गुप्ता पड़ोसियों के सहयोग से आरजू को कार से मधुलोक अस्पताल ले गए. लेकिन डाक्टरों ने उसे देखते ही जवाब दे दिया. उस के बाद आरजू को कार्डियोलौजी तथा रीजेंसी अस्पताल लाया गया. लेकिन यहां भी डाक्टरों ने हाथ खड़े कर लिए.

फिर आरजू को हैलट अस्पताल लाया गया. जहां डाक्टरों ने उस का परीक्षण किया और आरजू को मृत घोषित कर दिया. शव को घर लाया गया और थाना नौबस्ता पुलिस को आरजू की मौत की सूचना दी गई.

इधर सुबह 11 बजे अमनदीप की बहन आरजू ने नीरज कटारे के बड़े बेटे अमन कटारे से मोबाइल फोन पर बात की और बताया कि आरजू भाभी बाथरूम में फिसल गई हैं. आप लोग तुरंत आ जाइए.

अमन को कुछ संदेह हुआ तो उस ने दबाव डाल कर पूछा. इस पर उस ने कभी बाथरूम में फिसल कर तो कभी गीजर से करंट लगने की बात बताई. अमन को लगा कि दाल में कुछ काला जरूर है. बहन की जिंदगी खतरे में हो सकती है. अत: उस ने सारी बात अपने मांबाप को बताई. उस के बाद तो परिवार में सनसनी फैल गई.

नीरज कटारे ने देर करना उचित नहीं समझा. उन्होंने फोन पर जानकारी दे कर अपने खास रिश्तेदारों को बुलवा लिया. फिर अपने बेटे अमन, अनंत, पत्नी अर्चना तथा 20-25 रिश्तेदारों को साथ ले कर निजी वाहनों से कानपुर के लिए निकल पड़े.

रात लगभग डेढ़ बजे नीरज कटारे कानपुर स्थित बेटी की ससुराल माही वाटिका पहुंचे. वहां बेटी का शव देख कर फफक पड़े. अर्चना बेटी के शव से लिपट कर फफक पड़ी. अमन व अनंत भी बहन का शव देख कर बिलख पड़े.

रिश्तेदारों ने उन सब को सांत्वना दे कर किसी तरह से शव से अलग किया. ससुरालीजनों से नीरज कटारे ने जब बेटी की मौत का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि आरजू बाथरूम में फिसल कर गिर पड़ी थी, जिस से उस की मौत हो गई. उस की जिंदगी बचाने के लिए वह उसे हर बड़े अस्पताल ले गए. लेकिन बचा नहीं पाए.

इधर आरजू की मौत की सूचना पा कर थाना नौबस्ता प्रभारी इंसपेक्टर सतीश कुमार सिंह पुलिस टीम के साथ आ गए. चूंकि मौत का यह मामला एक धनाढ्य परिवार की बहू का था, अत: सिंह ने सूचना पुलिस अधिकारियों को दे दी.

सूचना पा कर एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी (साउथ) दीपक भूकर, तथा डीएसपी विकास कुमार पांडेय आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल व शव का निरीक्षण किया तथा मृतका के पति अमनदीप, सास पिंकी, ससुर आर.सी. गुप्ता तथा मृतका की ननद आरजू से घटना के संबंध में पूछताछ की.

ससुरालीजनों ने बताया कि आरजू की मौत बाथरूम में फिसल कर गिरने से हुई है. पुलिस अधिकारियों ने मृतका के मातापिता से भी जानकारी हासिल की. चूंकि मायके वालों ने अभी तक ससुरालीजनों पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया था, अत: उन्होंने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजने का आदेश दिया.

अधिकारियों के जाने के बाद दरोगा अशोक कुमार ने मृतका आरजू का शव पोस्टमार्टम हाउस हैलट अस्पताल कानपुर भेज दिया. लेकिन यहां दरोगा अशोक कुमार से चूक हो गई. दरअसल नियम के मुताबिक किसी विवाहित युवती की शादी के 7 साल के भीतर संदिग्ध मौत हो जाती है तो उस का पंचनामा मजिस्ट्रैट की मौजूदगी में भरा जाता है और मजिस्ट्रैट ही पंचनामा पर हस्ताक्षर करता है.

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इस चूक के कारण पोस्टमार्टम हाउस के डाक्टरों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं किया. कागज दुरुस्त होने के बाद ही उन्होंने पोस्टमार्टम किया और रिपोर्ट नौबस्ता के पुलिस को सौंप दी.

प्रभारी इंसपेक्टर सतीश कुमार सिंह ने जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ी तो उन के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. क्योंकि आरजू की मौत हादसा नहीं हत्या थी. उस का मुंह और नाक दबा कर हत्या की गई थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक आरजू के माथे, गाल, कंधे पर चोट के निशान पाए गए. आंखों में खून उतर आने से लालपन था. इस से ऐसा प्रतीत होता था कि आरजू का मुंह किसी चीज से ढंक कर जोर से दबाया गया. इस से उस के होंठ अंदरबाहर फट गए और आंखोें में खून उतर आया. माथे, कंधे और गाल पर जख्म से माना गया कि उस ने मौत से पहले काफी संघर्ष किया था. दम घुटने से उस के फेफड़ों का वजन भी बढ़ गया था. रिपोर्ट के अनुसार आरजू की मौत दम घुटने से हुई थी.

आरजू की हत्या की खबर जब समाचार पत्रों में छपी तो कानपुर शहर में सनसनी फैल गई. आरजू के मायके वालों का भी गुस्सा फट पड़ा. उन्होंने माही वाटिका अपार्टमेंट जा कर आर.सी. गुप्ता के घर धावा बोल दिया. उन्होंने उन को खूब खरीखोटी सुनाई और दहेज के लिए बेटी को मार डालने का आरोप लगाया.

अपार्टमेंट में झगड़े की खबर पा कर पुलिस पहुंच गई और इंसपेक्टर सतीश कुमार सिंह ने अमनदीप व उस के पिता आर.सी. गुप्ता को हिरासत में ले लिया तथा थाना नौबस्ता ले आए.

अगले भाग में पढ़ें- फोरैंसिक टीम ने जांच में आरजू की मौत को हादसे में उलझा दिया

17 दिन की दुल्हन: भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

मध्य प्रदेश का एक चर्चित शहर है शहडोल. इसी शहर में नीरज कटारे अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी अर्चना के अलावा 2 बेटे अमन, अनंत तथा एक बेटी आरजू थी. नीरज कटारे ईंट कारोबारी थे. शहर में उन का आलीशान मकान था और उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. शहर के व्यापारियों में उन की अच्छी प्रतिष्ठा थी. वह गहोई समाज से ताल्लुक रखते थे.

नीरज की बेटी आरजू 2 भाइयों के बीच एकलौती बहन थी, सो घरपरिवार सभी की दुलारी थी. अर्चना व नीरज आरजू को बेहद प्यार करते थे और उस की हर ख्वाहिश पूरी करते थे.

आरजू बचपन से ही खूबसूरत थी. जब उस ने युवावस्था में कदम रखा तो उस की सुंदरता में और भी निखार आ गया. वह जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही पढ़नेलिखने में भी तेज थी. उस ने अपनी मेहनत और लगन से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर ली थी और सौफ्टवेयर इंजीनियर के तौैर पर बेंगलुरु की एक निजी कंपनी में जौब करने  लगी थी.

हालांकि नीरज कटारे धनवान व्यापारी थे, आरजू को नौकरी की आवश्यकता नहीं थी, वह उसे अपने से दूर भी नहीं भेजना चाहते थे, लेकिन बेटी की इच्छा का सम्मान करते हुए, उन्होंने आरजू को बेंगलुरुमें जौब करने की इजाजत दे दी थी.

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आरजू जब जौब करने लगी, तब नीरज कटारे को उस के ब्याह की चिंता सताने लगी. वह अपनी लाडली बेटी की शादी ऐसे घर में करना चाहते थे, जो संपन्न हो. घर में किसी चीज का अभाव न हो तथा लड़का भी आरजू के योग्य हो.

उन्होंने आरजू के लिए योग्य लड़के की तलाश शुरू की तो उन्हें अमनदीप पसंद आ गया. अमनदीप के पिता आर.सी. गुप्ता कानपुर शहर के नौबस्ता थानांतर्गत केशव नगर में माही वाटिका अपार्टमेंट में रहते थे. परिवार में पत्नी पिंकी गुप्ता के अलावा बेटा अमनदीप तथा बेटी आरजू थी.

अमनदीप सौफ्टवेयर इंजीनियर था. बेंगलुरु स्थित जिस कंपनी में आरजू इंजीनियर थी, उसी कंपनी में अमनदीप भी सौफ्टवेयर इंजीनियर था.

आर.सी. गुप्ता रेलवे में लोको पायलट थे. बेटा अमनदीप भी अच्छा कमाता था. अत: उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. परिवार भी छोटा था और वह गहोई समाज से भी जुड़े थे. इसलिए आर.सी. गुप्ता का बेटा अमनदीप उन्हें पसंद आ गया था. अमन की पसंद का एक कारण और भी था, वह यह कि नीरज कटारे के परिवार की एक बेटी कानपुर में आर.सी. गुप्ता के परिवार में ब्याही थी. वह सुखी व संपन्न थी. इसलिए भी उन्होंने अमनदीप को पसंद कर लिया था.

रिश्ते की बात के समय दोनों पक्षों में तय हुआ कि रिश्ता फाइनल तब माना जाएगा जब लड़कालड़की एकदूसरे को पसंद कर लेंगे. इस के लिए निश्चित दिन अमनदीप अपने परिवार के साथ शहडोल गया और आरजू तथा उस के घरवालों से मुलाकात की. आरजू व अमनदीप ने एकदूसरे को देखा और आपस में बातचीत की. दोनों शादी को राजी हो गए.

नीरज कटारे आरजू की शादी जल्द करना चाहते थे. लेकिन मार्च 2020 में कोरोना महामारी की वजह से देश में तालाबंदी हो गई, जिस से सारी गतिविधियां ठप्प हो गईं. तालाबंदी के बाद अमनदीप बेंगलुरु से कानपुर आ गया और घर से ही कंपनी का काम करने लगा. लेकिन आरजू ने शादी तय होने के बाद नौकरी छोड़ दी और शहडोल आ गई. वह परिवार के साथ हंसीखुशी से रहने लगी.

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5 महीने बाद जब लौकडाउन में ढील मिली और शादी तथा अन्य समारोह में सशर्त छूट मिली तब नीरज कटारे ने आरजू के रिश्ते की तारीख तय की और शादी की तैयारी में जुट गए. 8 दिसंबर, 2020 को उन्होंने अपनी लाडली बेटी का ब्याह अमनदीप के साथ धूमधाम से कर दिया. शादी में उन्होंने लगभग 28 लाख रुपया खर्च किया और हर वह सामान दहेज में दिया था, जिस की इच्छा लड़के व उस के घरवालों ने जताई थी.

अगले भाग में पढ़ें- आरजू बाथरूम के गीले फर्श पर गिरी पड़ी थी

17 दिन की दुल्हन: भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

चूंकि मृतका के मातापिता अब दहेज हत्या का आरोप लगा रहे थे और रिपोर्ट दर्ज करने की मांग कर रहे थे. अत: थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह ने मृतका के पिता नीरज कटारे की तरफ से भादंवि की धारा 498ए/304बी के तहत ससुरालीजनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी. अधिकारियों का आदेश था कि दोषियों को छोड़ा न जाए और निर्दोष को जेल न भेजा जाए.

दामाद की गिरफ्तारी के बाद अर्चना अपने पति नीरज कटारे के साथ थाना नौबस्ता पहुंचीं. वह रोते हुए कह रही थीं कि शादी में 28 लाख रुपया खर्च किया था. लेकिन लाल जोड़े में बेटी को 18 दिन भी न देख पाई. वह हवालात में बंद दामाद अमनदीप से एक ही बात पूछ रही थी कि उन की बेटी से कौन सी गलती हो गई जो उसे मार डाला. अगर दहेज की बात थी तो बताते, हम तुम सब लोगों को नोटों से तौल देते और अपनी बेटी की जान बचा लेते.

आरजू की हत्या की जांच सीओ (गोविंद नगर) विकास पांडेय को सौंपी गई थी. उन्होंने सब से पहले मृतका के पति अमनदीप से पूछताछ की. अमनदीप ने बताया कि उस ने अपनी मरजी से आरजू से शादी की थी. वह 38 लाख रुपया सालाना पैकेज पर कंपनी में काम कर रहा था. उस ने आरजू की हत्या नहीं की. दहेज की कोई मांग भी नहीं की थी.

इस पर थानाप्रभारी ने उस से पूछा कि अगर उस ने आरजू की हत्या नहीं की तो किस ने की, उसी का नाम बता दो. इस पर वह चुप्पी साध गया. बारबार कुरेदने पर भी कुछ जवाब नहीं दिया. उस से कई राउंड पूछताछ की गई, लेकिन उस का एक ही जवाब था, उस ने आरजू की हत्या नहीं की.

सीओ विकास कुमार पांडेय ने मृतका की सास पिंकी, ससुर आर.सी. गुप्ता, ननद आरजू गुप्ता तथा नौकरानी रज्जो से पूछताछ की तथा उन सब के बयान दर्ज किए. सभी ने एक स्वर से हत्या के संबंध में अनभिज्ञता जताई और आरजू की मौत को हादसा बताया.

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पूछताछ के बाद बाकी लोगों को तो थाने से जाने दिया गया. लेकिन संदेह के आधार पर मृतका के पति अमनदीप गुप्ता को दहेज हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया.

आरजू की मौत के बाद पुलिस ने घटनास्थल को सील कर दिया था. अत: 28 दिसंबर की सुबह 11 बजे फोरैंसिक टीम एसपी (साउथ) दीपक भूकर, सीओ विकास कुमार पांडेय तथा नौबस्ता थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह के साथ माही वाटिका अपार्टमेंट स्थित अमनदीप के फ्लैट पर पहुंची और बाथरूम तथा कमरे की जांच शुरू की. आरजू के कमरे को खंगालने पर टीम को टूटी चूडि़यां, बाल तथा चप्पलें मिलीं.

इस सामान को टीम ने सुरक्षित कर लिया. टीम ने बाथरूम चैक किया तो टीम को गीजर से गैस लीकेज होने के सबूत मिले. इस के अलावा जांच से पता चला कि बाथरूम का दरवाजा बंद करने के बाद वह स्थान क्लोज चैंबर बन जाता है यानी बाथरूम से हवा बाहर निकलने का कोई स्थान नहीं मिला.

फोरैंसिक टीम ने जांच में आरजू की मौत को हादसे में उलझा दिया. पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई 5 पन्नों की रिपोर्ट में फोरैंसिक टीम ने आरजू की मौत को हादसा बताया. टीम ने पोस्टमार्टम की रिपोर्ट को नकार दिया.

उन की रिपोर्ट के अनुसार गैस गीजर में एलपीजी गैस सिलेंडर लगाया गया था जो लीकेज था. एलपीजी में प्रोपेन व न्यूटेन गैस होती हैं जो हवा से भारी होती हैं. गीजर की टोंटी खोलते वक्त गैस निकल रही थी. इस केस में यही लग रहा है.

किसी कारण से आरजू मुंह के बल बाथरूम में गिर कर बेहोश हुई. सतह पर जमी गैस ने उस की जान ले ली. टीम ने आरजू की मौत की वजह सफोकेशन स्मूथरिंग बताई.

फोरैंसिक टीम ने आरजू के कत्ल की थ्यौरी पर सवालिया निशान जरूर लगाया लेकिन एसएसपी प्रीतिंदर सिंह ने फोरैंसिक टीम की अपेक्षा पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ज्यादा अहम माना, जिस में हत्या की पुष्टि हुई थी. उन्होंने कहा जो आरोप मृतका के घरवालों ने लगाए हैं, उसी आधार पर जांच जारी रहेगी. ससुरालीजनों पर दहेज हत्या का केस चलेगा.

इधर आरजू के पिता नीरज कटारे व मां अर्चना कटारे ने एसएसपी प्रीतिंदर सिंह से मुलाकात की और जांच अधिकारी पर जांच में शिथिलता बरतने का आरोप लगाया.

इस शिकायत पर एसएसपी ने सीओ विकास पांडेय से जांच वापस ले ली और सीओ (नजीराबाद) संतोष सिंह को जांच सौंप दी. संतोष सिंह ने जांच शुरू की और मृतका के पिता नीरज व मां अर्चना कटारे के बयान दर्ज किए.

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मृतका आरजू की मां अर्चना कटारे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी एक मार्मिक ट्वीट लिख कर न्याय की मांग की. उन्होंने ट्वीट मे लिखा, ‘योगीजी मुझे आप से तुरंत मिलना है. मैं वह अभागिन मां हूं जिस की इंजीनियर बेटी की शादी के 17 दिन के भीतर हत्या कर दी गई. हमें केवल न्याय चाहिए. हम अपनी आंखों के सामने दोषियों को सजा ए मौत चाहते हैं.’

आरजू की हत्या से शहडोल की महिलाओं में भी गुस्सा फट पड़ा. हत्या के विरोध में सैकड़ों महिलाओं ने न्याय यात्रा निकाली. वे नारे लगा रही थीं, ‘शहडोल की जनता करे पुकार, आरजू को न्याय दे सरकार. शहडोल की बेटी को जिस ने मारा है, फांसी दो वो हत्यारा है’. यात्रा जैन मंदिर से होते हुए कलेक्ट्रैट पहुंची. यहां महिलाओं ने एसपी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग रखी कि नगर की बेटी आरजू की हत्या के आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए.

30 दिसंबर, 2020 को पुलिस ने अमनदीप गुप्ता को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक उस की जमानत नहीं हुई थी. पुलिस की जांच जारी है. अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी जांच के बाद ही की जाएगी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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