Celebrity Interview: मैं सरस सलिल का फैन हूं – केके गोस्वामी

Celebrity Interview: केके गोस्वामी मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले हैं. इन्होंने भारतीय टैलीविजन सीरियलों, हिंदी, गुजराती, मराठी, बंगाली, भोजपुरी फिल्मों के जरीए अपनी अदाकारी से सभी को मुरीद बना लिया है.

हाल ही में लखनऊ में हुए ‘छठे सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स’ शो में बैस्ट कैरेक्टर ऐक्टर का अवार्ड लेने आए केके गोस्वामी से उन के फिल्म करियर पर बातचीत हुई. पेश हैं, उसी के खास अंश :

कई इंटरव्यू में आप ने अपने शुरुआती संघर्ष पर खुल कर बातें की हैं. क्या आप एक बार उन यादों को हम से साझा करेंगे?

मैं बिहार से ऐक्टर बनने की ख्वाहिश लिए मुंबई आया था. लेकिन मुझे स्क्रीन तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. एक बार मुझे मेरी ही कदकाठी के एक शख्स ने बीयर बार में नौकरी करने की सलाह दी. जब मैं बीयर बार में गया तो वाचमैन ने मुझे डंडा मार कर भगा दिया. यही वह पल था जब मैं ने ठान लिया था कि अब हर हाल में मुझे ऐक्टर बन कर दिखाना है. स्ट्रगल के दौरान ऐसा भी समय आया जब मै हफ्ते में एक दिन खाना खाता था. पैसों की तंगी के बावजूद मैं ने हार नहीं मानी और आखिरकार मुझे कामयाबी मिली.

आप की लवस्टोरी में भी ट्विस्ट रहा है. ऐसा क्या हुआ है?

मेरी हाइट 3 फुट ही है, वहीं मेरी बीवी पीकू मुझ से दोगुनी लंबी हैं. पीकू की हाइट तकरीबन 5 फुट है. मेरी हाइट कम होने के चलते पीकू के घर वालों के मना करने के बावजूद पीकू मुझ से ही शादी करना चाहती थी. आखिरकार पीकू की जिद के आगे घर वालों को मानना पड़ा.

आप के टीवी शो भी पौपुलर रहे हैं. छोटे परदे पर किया गया कौन सा रोल आप के लिए यादगार रहा है?

टीवी सीरियल में जो भूमिकाएं मेरे दिल के बेहद करीब हैं उन में ‘शक्तिमान’ में खली और बली का दोहरा रोल, ‘जूनियर जी’ में बोनापार्ट, ‘शाका लाका बूमबूम’ में क्रिस्टल खास हैं. ‘गुटूरगुं’ में मेरे किरदार पप्पू महाराज को भी लोगों ने खूब पसंद किया है.

हिंदी सिनेमा में किया गया कौन सा रोल आप के दिल के करीब है?

मैं ने जितनी भी हिंदी फिल्मों में काम किया उन में से फिल्म ‘भूत अंकल’ में निभाए गए टिंगु के रोल को काफी सराहना मिली थी. यह रोल देश के मनमस्तिष्क में रचबस गया था.

आप टीवी और हिंदी सिनेमा में काफी हिट रहे हैं, फिर अचानक आप का झुकाव भोजपुरी फिल्मों की तरफ कैसे हो गया?

मैं बिहार की माटी में पलाबढ़ा हूं. भोजपुरी तो मेरे रगरग में बसी हुई है. मेरा शुरुआत से ही भोजपुरी फिल्मों में काम करने की तरफ झुकाव रहा है. मुझे खुशी है कि मुझे जितना प्यार टीवी और हिंदी सिनेमा से मिला, उस से कहीं ज्यादा प्यार भोजपुरी सिनेमा से मिल रहा है.

आप को सरस सलिल पत्रिका की कौन सी बात अच्छी लगती है?

सच कहूं तो एक अभिनेता के रूप में अगर देखें तो दर्शक मेरे फैन हैं और मैं एक पाठक के रूप में ‘सरस सलिल’ पत्रिका का फैन हूं. मुझे ‘सरस सलिल’ के सभी स्तंभ काफी मजेदार, ज्ञानवर्धक, जागरूकता बढ़ाने वाले और रोचक लगते हैं.

Bhojpuri Cinema: मैं दिखावे में यकीन नहीं करती-रिंकू भारती गोस्वामी

Bhojpuri Cinema:भोजपुरी सिनेमा में अपने दमदार किरदारों के जरीए राज करने वाली रिंकू भारती गोस्वामी का जादू इन दिनों 28 करोड़ भोजपुरिया दर्शकों के दिलों पर छाया हुआ है. वे भोजपुरी फिल्मों में अकसर किसी किसी दमदार रोल से दर्शकों का मनोरंजन करती दिखाई देती हैं. वे फिल्मों में सैकंड लीड समेत बतौर सपोर्टिंग एक्ट्रेस चाची, बहन और भाभी के रोल में छाई हुई हैं.

रिंकू भारती गोस्वामी का भोजपुरी फिल्मों में भाभी का रोल इस तरह पसंद किया जाने लगा है कि अब फिल्म इंडस्ट्री समेत भोजपुरिया दर्शक भी उन्हेंरिंकू भाभीके नाम से ही पुकारने लगे हैं.
रिंकू भारती गोस्वामी एक्टिंग के लिए तो सुर्खियां बटोरती ही हैं, साथ ही अपने बेबाक और बिंदास अंदाज के लिए भी जानी जाती हैं. वे हर मुद्दे पर खुल कर अपनी राय रखती हैं.
सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्सशो के दौरान रिंकू भारती गोस्वामी से हुई एक मुलाकात में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री और अपने एक्टिंग कैरियर पर बेबाक बातें साझा कीं. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश :
आप का सिवान जैसे छोटे शहर से सिनेमा की दुनिया का सफर कैसा रहा है?
यह सफर आसान तो बिलकुल नहीं था. छोटे शहर से आने पर सब से पहले लोगों की सोच से लड़ना पड़ता है. लेकिन मैं ने हमेशा अपने सपनों पर भरोसा रखा. मुश्किलें आईं, लेकिन वे ही मुझे मजबूत
बनाती गईं.
आप ने टीवी से शुरुआत की और फिर भोजपुरी सिनेमा में पहचान बनाई. इस सफर को आप कैसे देखती हैं?
मेरे लिए यह एक सीखने का प्रोसैस रहा है. टीवी ने मुझे कैमरे के सामने खड़ा होना सिखाया और भोजपुरी सिनेमा ने मुझे असली पहचान दी. हर पड़ाव ने मुझे निखारा है.
लोग आप को ‘रिंकू भाभी’ कह कर बुलाते हैं. इस पहचान को आप कैसे लेती हैं?
यह मेरे लिए बहुत बड़ा प्यार है. जब लोग आप को आप के किरदार के नाम से पहचानने लगें, तो समझ लीजिए आप ने कुछ सही किया है. ‘रिंकू भाभीमेरे दिल के बहुत करीब है. इतने सालों तक भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के
बाद आप को बैस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवार्ड मिला. इस खुशी को कैसे सैलिब्रेट किया?
यह अवार्ड जीतना मेरे लिए बहुत खास बात है. मैं ने इसे अपने परिवार और टीम के साथ सैलिब्रेट किया. यह सिर्फ मेरी नहीं, हम सब की मेहनत का फल है. आप को भोजपुरी फिल्मों में अकसर भाभी, चाची, बहन जैसे सैकंड लीड किरदारों में देखा जाता है.
क्या आप की कभी लीड रोल की चाह नहीं होती?
हर कलाकार के मन में लीड रोल का सपना होता है, तो जाहिर है कि मेरा सपना भी है, लेकिन मेरे लिए किरदार की अहमियत ज्यादा है.
आप अपने बेबाक अंदाज के लिए जानी जाती हैं. क्या इस से कभी विवाद भी हुए हैं?
हां, कई बार विवाद हुए हैं. लेकिन मैं वही बोलती हूं जो मुझे सही लगता है. मैं किसी तरह के दिखावे में यकीन नहीं करती, इसलिए लोग मुझे असली मानते हैं.
अगर आप को एक फिल्म में लीड रोल चुनने का मौका मिले, तो कैसा किरदार निभाना चाहेंगी?
मैं एक ऐसी महिला का किरदार निभाना  चाहूंगी जो समाज के खिलाफ जा कर अपनी पहचान बनाती है. उस में स्ट्रगल भी हो, इमोशन भी और एक मजबूत संदेश भी.
फिल्म सैट पर कोई ऐसा मजेदार या यादगार किस्सा जो आज भी आप को हंसा देता हो?
एक बार शूटिंग के दौरान मेरा इमोशनल सीन था और पीछे से किसी ने मजाक कर दिया, पूरा सीन हंसी में बदल गया. मुझे वह दिन आज भी याद आता है.
अगर आप को अपनी अब तक की यात्रा को एक लाइन में बयान करना हो, तो क्या कहेंगी?
संघर्ष से सफलता तक, और अभी सफर जारी है.                    

बृहस्पति कुमार पांडेय

Bhojpuri Star: हर महिला बने बोल्ड-अपर्णा मलिक

Bhojpuri Star: कबड्डी की स्टेट चैंपियन रह चुकी अपर्णा मलिक ने अपने कैरियर की शुरुआत साउथ फिल्म इंडस्ट्री से की, जहां उन्होंने तेलुगु फिल्मों में काम कर अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. इस के बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा की ओर रुख किया और यहां भी अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों में जगह बना ली.
पटना में आयोजित 7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स शो के दौरान अपर्णा मलिक से हुई खास मुलाकात में उन्होंने खुल कर बात की. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश :

कबड्डी की स्टेट चैंपियन से एक्ट्रेस बनने तक, यह ट्रांजिशन कितना फिल्मी रहा?
स्पोर्ट्स बैकग्राउंड होने का बहुत फायदा मिला है. इस से मेरे अंदर हमेशा स्पोर्ट्स स्पिरिट बनी रहती है, जिस से हैल्दी कंपीटिशन की भावना आती है.

क्या आप किसी फिल्म में स्पोर्ट्स गर्ल का रोल करना चाहेंगी?
मैं आप को बताना चाहूंगी कि मेरी एक फिल्म आने वाली है, जिस का नाम हैधाकड़ सासजिस में स्पोर्ट्स गर्ल होते हुए गांव की सीधीसादी लड़की कैसे एक बौक्सिंग चैंपियन बनती है, यह देखने को मिलेगी. मेरी एक तेलुगु फिल्म जो अभी जल्दी ही थिएटर में रिलीज हुई है, ‘वन/4’ जिस में मैं स्विमर बनी हूं, इसलिए मेरी यह हसरत बहुत कम समय में ही पूरी हो चुकी है.

अररिया से सिनेमा तक का सफर, सब से टफ मोमैंट कौन सा था?
अररिया से सिनेमा तक आने का सफर की अगर बात करूं तो मेरा सब से टफ मोमैंट लोगों को सम?ाना रहा क्योंकि अररिया एक छोटी सिटी है. वहां पर लोगों की सोच अभी उतनी विकसित नहीं है कि वे इस चीज को एक्सैप्ट करें कि लड़कियां यहां से निकल के बाहर जा कर या विदेश में जा कर पढ़ाई भी करें, तो फिर सिनेमा जगत में आना तो उन के लिए बहुत बड़ी बात हो जाती है.

आप का पहला आडिशन कैसा गया था?
पहला आडिशन मेरी जिंदगी का बेहद खास अनुभव था. मैं ने उस आडिशन को बहुत ही ध्यान से तैयार किया, 3-4 बार रिकौर्ड किया, अलगअलग स्टेट्स में शूट किया और जब लगा कि यह बिलकुल नैचुरल
और संतोषजनक है, तभी फाइनल वीडियो भेजा. मेरा वह आडिशन बहुत पसंद किया गया. इस के बाद मेरा लुक टैस्ट हुआ, फिर फोटोशूट हुआ और आखिर में मु? तेलुगु फिल्मडैडलाइनऔफर हुई.

क्या ग्लैमरस दिखना इंडस्ट्री की जरूरत है या पर्सनल चौइस?
हर किसी के लिए ग्लैमर की परिभाषा अलग होती है. कई बार लोगों के चेहरे पर ही एक नैचुरल ग्लैमरस लुक होता है, जो उन्हें सब से अलग बनाता है. मेरे हिसाब से ग्लैमरस दिखने के लिए सबसे जरूरी चीज है, आप का कौन्फिडैंस और आप का एटीट्यूड. अगर आप के अंदर खुद को कैरी करने का आत्मविश्वास है, तो वही असली ग्लैमर है.

क्या आप को लगता है कि आज की हीरोइन को ज्यादा बोल्ड होना पड़ता है?
मेरे हिसाब से बोल्ड होने का मतलब है कि आप अपने लिए खड़े हो सकें, अपनी बात खुल कर रख सकें और गलत के खिलाफ आवाज उठा सकें. अगर आप के साथ या किसी और के साथ कुछ गलत हो रहा है और आप उस के खिलाफ बोल पा रहे हैं, तो वही असली बोल्डनैस है, इसलिए मु? लगता है कि सिर्फ हीरोइन को ही नहीं, बल्कि हर महिला को बोल्ड होना चाहिए. हर किसी को अपने हक के लिए खड़ा होना आना चाहिए.

आप का दिल जीतने के लिए किसी में क्या क्वालिटी होनी चाहिए?
हमेशा से सादगी बहुत पसंद है. मेरे लिए सब से जरूरी है कि इनसान दिल का सच्चा हो, अच्छा हो और सम्मान देना जानता हो. अगर किसी में ये गुण हैं, तो मेरे दिल को जीतने के लिए इतना ही काफी है.

इंस्टाग्राम पर फेमस होना कितना चैलेंजिंग है?
आज के समय में इंस्टाग्राम पर फेमस होना काफी चैलेंजिंग हो गया है. कई बार ऐसा लगता है कि वहां
फेमस होने के लिए लोगों को बहुतओवर टौपजा कर काम करना पड़ता हैज्यादा एक्सप्रैसिव होना, कभीकभी जरूरत से ज्यादा ओवर एक्टिंग करना. मैं ने कई ऐसे कलाकारों को देखा है, जो सिर्फ फेमस होने के लिए इस तरह के तरीके अपनाते हैं. लेकिन मेरे हिसाब से ये चीजें ज्यादा समय तक टिकती नहीं हैं. जो चीजें जल्दी वायरल होती हैं, उन का असर भी उतनी ही जल्दी खत्म हो जाता है, जैसे वायरल फीवर कुछ दिनों में उतर जाता है.

फैंस के कमैंट्स आप को मोटिवेट करते हैं या प्रैशर देते हैं?
मेरे इंस्टाग्राम और बाकी सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर हमेशा फैंस का बहुत प्यार और सपोर्ट मिलता है. उन के कमैंट्स प्रैशर नहीं देते, बल्कि और ज्यादा मोटिवेट करते हैं. उन का यही प्यार और सपोर्ट हर दिन बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है.

क्या कभी भोजपुरी के किसी कोस्टार ने आप को सरप्राइज किया?
मेरा पहला काम जब पवन सिंह के साथ आया, तो मैं ने उन के बारे में पहले काफीकुछ सुन रखा था, इसलिए थोड़ा सा संशय था. लेकिन जब मैं ने उन के साथ काम किया, तो मेरा अनुभव बिलकुल अलग और बेहद पौजिटिव रहा. वे बहुत ही स्वीट, डीसैंट और सहयोगी इनसान हैं. इसी तरह, खेसारीलाल यादव के बारे में भी लोगों से कई तरह की बातें सुनने को मिली थीं, लेकिन जब मैं ने उनके साथ काम किया, तो लगा ही नहीं कि वे वैसे हैं जैसा अकसर कहा जाता है. वे बहुत ही सरल, विनम्र और सहयोगी हैं.

आप को साउथ और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में सब से बड़ा फर्क क्या लगा?
साउथ फिल्म इंडस्ट्री आज के समय में बहुत बड़ी हो चुकी है और कई मामलों में इंटरनैशनल लैवल तक पहुंच चुकी है. वहीं भोजपुरी इंडस्ट्री में अभी बहुत संभावनाएं हैं और आगे बढ़ने की काफी गुंजाइश है. हालांकि, एक चीज जो दोनों इंडस्ट्री में समान लगी, वह है अपनापन. दोनों ही जगह लोगों का बरताव बहुत ही सहयोगी और आत्मीय होता है. मेरा एक सपना यह भी है कि मैं मलयालम फिल्मों में काम करूं. अभी तक वहां काम करने का मौका नहीं मिला है, लेकिन अगर सबकुछ अच्छा रहा, तो मैं जरूर मलयालम इंडस्ट्री का हिस्सा बनना चाहूंगी.

क्या आप पैन इंडिया स्टार बनने का सपना देखती हैं?
जी हां, मैं पैन इंडिया स्टार बनने का सपना जरूर देखती हूं. अभी तक मैं ने 5 अलगअलग भाषाओं में काम किया है और मेरा मानना है कि जिस दिन मैं इन सभी भाषाओं में एकसाथ एक बड़ी फिल्म कर पाऊंगी, उसी दिन खुद को सही माने में पैन इंडिया स्टार कह सकूंगी.
अपने फैंस के लिए कोई मैसेज?
अपने फैंस के लिए मैं बस इतना कहना चाहूंगी, ‘दिल में हो तुम, सांसों में तुमज् बोलो तुम्हें और क्या दूं…’ आप लोगों का जो प्यार और आशीर्वाद मिला है, वही मेरी सब से बड़ी ताकत है.                         

 

Film: रवि गोसाईं-अदाकारी का अलहदा सफर

Film: गुल आप अपनी शुरुआती जिंदगी के बारे में बताइए. मैं मूल रूप से दिल्ली का रहने वाला हूं. मेरी पढ़ाई लिखाई जैसे स्कूलकालेज सबकुछ दिल्ली से ही हुआ. मेरे मातापिता पंजाब से थे, लेकिन आज अगर पहचान की बात करूं, तो मैं खुद को पूरी तरह मुंबई का मानता हूं. यही शहर है जहां मैं ने अपने सपनों को जिया और उन्हें पूरा होते देखा.


आप की एक्टिंग और डांस की शुरुआत कैसे हुई?
बचपन से ही मुझे एक्टिंग और डांस का बेहद शौक था. पहले मैं ने प्रोफैशनल डांसिंग शुरू की और साथसाथ थिएटर वर्कशौप्स करने लगा. इसी दौरान नुक्कड़ नाटक किए, जिस से एक्टिंग की समझ और जमीन से जुड़ाव मिला.

आप को मुंबई आने का पहला बड़ा ब्रेक कैसे मिला?
मेरे कालेज के एक सीनियर दोस्त थे, जो डायरैक्टर गिरीश मलिक के साथ काम कर रहे थे. वे एक टीवी शो में लीड रोल कर रहे थे और उसी शो के लिए एक और किरदार कास्ट होना बाकी था. उन्होंने मेरा नाम डायरैक्टर साहब को दिया और मुझे मुंबई बुलाया गया. वह शो थापरवरिश’, जो जी टीवी पर आया और जिस में किरण कुमार मेरे पिता के रोल में थे.


आप का फिल्म की दुनिया में आगे का सफर कैसा रहा?
इस के बाद मैं केतन मेहता के असिस्टैंट प्रशांत नारायणन के साथ पृथ्वी थिएटर में एक्टिंग वर्कशौप्स करने लगा. उन्हीं के जरीए मुझे फिल्मओह डार्लिंग, ये है इंडियामें काम मिला. फिर मेरी जिंदगी का एक बेहद अहम मोड़ आया, जब मेरा दोस्त भूपिंदर, जो उस वक्त मेरा फ्लैटमेट भी था, ने मुझे गुलजार साहब की फिल्ममाचिसके बारे में बताया और उन से मुलाकात तय कराई. पहली ही मीटिंग में गुलजार साहब ने मुझे पसंद कर लिया. उन के साथ काम करना हर एक्टर का सपना होता है और मेरा सपना अचानक सच हो गया.


सीरियल ‘परवरिश’ के बाद टीवी में आप का सफर कैसे आगे बढ़ा?
फिल्ममाचिसके बाद जब मैं अलगअलग डायरैक्टर्स से मिलने लगा, तो संजीव भट्टाचार्य और रवि राय के पास अकसर जाता था. एक दिन मुझे संजीव भट्टाचार्य का फोन आया और उन्होंने कहा, ‘अब तो तुम्हारी फिल्म इतनी बड़ी हिट हो गई है, क्या अब भी मेरे साथ टीवी में काम करोगे?’ मैं ने बिना सोचेहांकर दी.
मैंअमानतसीरियल मेंचंदरका रोल करना चाहता था, लेकिन संजीव भट्टाचार्य ने कहा, ‘वह रोल तो कोई भी कर सकता है, लेकिननिगोड़ेके लिए मुझे एक मंझा हुआ, पुख्ता एक्टर चाहिए. इस किरदार में बहुत शेड्स हैं, जैसे यह हंसाता भी है, रुलाता भी है.’उस एक लाइन ने मुझे क्लीन बोल्ड कर दिया और वही किरदार मेरे लिए यादगार बन गया.


फिल्म ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ आप के लिए क्यों खास थी?
शूटआउट एट लोखंडवालामेरी जिंदगी की बेहद अहम फिल्म है. भले ही मेरा एक बड़ा सीन छोटा हो गया था, लेकिन किरदार बहुत असरदार था. सब से बड़ी बात यह रही कि मुझे फिल्म के पोस्टर में जगह मिली. प्रीमियर शो के दौरान मेरा कटआउट अमिताभ बच्चन साहब के साथ लगा हुआ था. वह पल मेरे लिए यादगार था. और जब फिल्म सुपरहिट हो जाए, तो फायदा तो होता ही है.


आप की महेश भट्ट के साथ जुड़ने की कहानी काफी चर्चित है. क्या था वह किस्सा?
हां, यह बिलकुल सच है. महेश सर अकसर नए एक्टर्स को सीधे फोन कर लेते हैं. एक पंजाबी फिल्मशेरा क्रैकके लिए गिरीश धमीजा के कहने पर उन्होंने मुझे चुना और खुद फोन किया. मैं उस समय सो रहा था. नींद में ही बोला, ‘कौन है यार, सो रहा हूं…’ उधर से आवाज आई, ‘मैं महेश भट्ट बोल रहा हूं. जब तुम सो रहे थे, तुम्हारी किस्मत जाग रही थी. उठ कर औफिस जाना.’ फोन रखते ही 5 मिनट बाद मुझे होश आया और मैं दौड़ पड़ा उन से मिलनेऔर मुझेशेरा क्रैकमिल गई.


आप का ‘द गांधी मर्डर केस’ फिल्म में इंटरनैशनल एक्टर्स के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
उस फिल्म में मुझे हौलीवुड के शानदार कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला, जिन में स्टीफन लैंग भी शामिल थे. साथ ही, ओम पुरी के साथ तकरीबन एक महीना बिताने का मौका मिला.


फिलहाल आप किन प्रोजैक्ट्स पर काम कर रहे हैं?
हाल ही मेंमेहंदी वाला घरऔरमेघा बरसेंगेसीरियल खत्म हुए हैं. इस के बाद वर्टिकल शोज की
एक लाइन सी लग गई हैअब तक मैं 6 सीरीज कर चुका हूं.इस समय मैं सन टीवी के बेहद हिट शोनंदिनी पार्ट 2 (राजनंदिनी)’ की शूटिंग कर रहा हूं, जो अप्रैल महीने तक वडोदरा में चलेगी. इस में मैं भास्कर का मेन नैगेटिव किरदार निभा रहा हूं. एक ऐसा इनसान, जो 2 अलगअलग रूपों में जी रहा है.


सोशल मीडिया को आप कैसे देखते हैं?
अगर सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल किया जाए, तो यह बहुत पौजिटिव टूल है, लेकिन इस की एक लिमिट तय होनी चाहिए वरना यह समय भी खराब कर सकता है. आज इस के अच्छे और बुरे दोनों तरह के असर देखने को मिलते हैं.                                            

Celebrity Interview: मुझे अलग तरह के किरदार निभाने हैं – आयुषी तिवारी

Celebrity Interview: बिहार के सीतामढ़ी इलाके के एक दकियानूसी परिवार में पलीबढ़ी आयुषी तिवारी शुरू से ही पारिवारिक दबाव के बावजूद कुछ अलग करना चाहती थीं. इसी बीच वे अपने मातापिता के साथ मुंबई आ गईं और ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करते हुए जिद कर के रोशन तनेजा के ऐक्टिंग स्कूल से ट्रेनिंग लेनी शुरू की और आज वे थिएटर के अलावा टीवी सीरियल, हिंदी, भोजपुरी, गुजराती और मराठी भाषा की फिल्मों के अलावा कई म्यूजिक अलबमों में अपनी ऐक्टिंग का जलवा दिखा रही हैं.

पेश हैं, उन से हुई बातचीत के कुछ खास अंश :

सीतामढ़ी से मुंबई तक का आप का सफर कैसा रहा?

सीतामढ़ी समेत बिहार के ज्यादातर इलाकों में फिल्म इंडस्ट्री को अच्छा नहीं माना जाता. उन की नजर में फिल्म कलाकार तो नचनिया या भांड के अलावा कुछ नहीं हैं. लेकिन पिछले 8-10 साल में इस सोच में काफी बदलाव आया है.

मेरे लिए अच्छा यह हुआ कि मेरे मेकैनिकल इंजीनियर पिता का तबादला मुंबई हो गया, तो मैं भी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के लिए मुंबई आ गई. पढ़ाई पूरी होने के बाद फिल्म कलाकार बनने से पहले मैं ने कई जगह हाथपैर मारे. मैं ने एक मैगजीन में सब एडिटर के रूप में नौकरी की. फिर मैं ने एयर होस्टैस बनने की कोशिश की, पर एक दिन लगा कि यह मेरे बस की बात नहीं है.

इस के बाद अपने परिवार वालों को मनाने के बाद मैं ने रोशन तनेजा के यहां से ऐक्टिंग की ट्रेनिंग हासिल की.

आप के बात करने के लहजे से यह जाहिर नहीं होता कि आप की मातृभाषा भोजपुरी है और आप बिहारी हैं. यह कैसे मैनेज किया आप ने?

बिहार के हर इनसान की भाषा के लहजे में बिहारीपन होता ही है. जब मैं मुंबई आई, तो मेरी भाषा में भी बिहारी लहजा था. अपनी भाषा में बिहारी लहजे से छुटकारा पाने में मुझे थिएटर से काफी मदद मिली.
इस के बाद मैं ने ‘सावधान इंडिया’, ‘कहीं देर न हो जाए’, ‘पवित्र बंधन’, ‘तारक मेहता का उलटा चश्मा’ समेत कई टैलीविजन सीरियलों में ऐक्टिंग की.

आप के फिल्मी कैरियर की किस फिल्म से शुरुआत हुई थी?

मेरी पहली फिल्म ‘टैंशन मत ले यार’ थी, जिसे असगर खान ने डायरैक्ट किया था. इस फिल्म में मेरे साथ मुदासिर जफर, ओम पुरी, आलोक नाथ, टीनू आनंद जैसे दिग्गज कलाकार थे. फिर एक फिल्म ‘आटो रोमांस इन मुंबई’ की थी. इस के बाद ‘मर्डर प्लान’ समेत कई और फिल्में भी की थीं.

हाल ही में आप का नया म्यूजिक वीडियो ‘हसरत’ रिलीज हुआ है. इस के साथ आप का जुड़ना कैसे हुआ?

कासिम हैदर मेरे पुराने दोस्त हैं. उन्होंने काफी समय पहले कहा था कि वे मेरे साथ एक गाना करना चाहते हैं, पर तब बात आईगई हो गई थी. फिर एक दिन कासिम हैदर का मुझे फोन आया कि वे एक खास गाना ‘हसरत’ करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं इस गाने का हिस्सा बनूं. मैं ने गाना सुना तो काफी पसंद आया. इस तरह मेरा इस गाने के साथ जुड़ाव हुआ.

फिल्म इंडस्ट्री में आप को कई साल हो गए हैं. आप ने जो सोचा था वह मुकाम मिला या नहीं?

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने मुझे जो कुछ दिया है, उस से मैं खुश हूं, पर संतुष्ट नहीं हूं. अभी तो मुझे बहुत सारा काम करना है. Celebrity Interview

Celebrity Interview: हर लड़की तक कम कीमत पर सैनेटरी पैड पहुंचे – मिथिला पालकर

Celebrity Interview: मुंबई शहर में पलीबढ़ी मिथिला पालकर के दादाजी नहीं चाहते थे कि वे गीतसंगीत, डांस व ऐक्टिंग का हिस्सा बने, जबकि स्कूल के दिनों से ही वे यह सब करने लगी थीं. इसी वजह से वे अपने मातापिता के साथ रहने के बजाय दादर में अपने नानानानी के साथ रहती थीं.

महज 10 साल के ऐक्टिंग कैरियर में मिथिला पालकर ने इरफान खान, दुलकर सलमान, अभय देओल, इमरान खान, काजोल समेत कई दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया है.

एक तरफ वे ‘जियो स्टार’ पर स्ट्रीम हो रही डायरैक्टर विक्टर मुखर्जी की फिल्म ‘स्वीट ड्रीम्स’ को ले कर चर्चा में हैं, तो वहीं दूसरी ओर वे अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘भूत बंगला’ भी कर रही हैं.

मिथिला पालकर ने अपने ऐक्टिंग कैरियर की शुरुआत साल 2014 में मराठी की लघु फिल्म ‘मा झा हनीमून’ से की थी. हिंदी में उन की साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म ‘कट्टीबट्टी’ थी, जिस में वे इमरान खान की बहन के किरदार में नजर आई थीं. साल 2018 में वे इरफान खान, दुलकर सलमान के साथ फिल्म ‘कारवां’ में दिखाई दी थीं.

मिथिला पालकर के कैरियर की सब से बड़ी खासीयत यह रही है कि वे टैलीविजन, फिल्म, ओटीटी और थिएटर के बीच ऐक्टिंग के झूले में झूलते हुए बेहतरीन काम करती रही हैं.

फिल्म ‘स्वीट ड्रीम्स’ के बारे में मिथिला पालकर कहती हैं, ‘‘यह एक रोमांटिक थ्रिलर फिल्म है, पर मुझे नहीं लगता कि हम ने पहले ऐसा कुछ देखा है. अगर मैं पूरी तरह से ‘स्वीट ड्रीम्स’ जैसी किसी चीज के बारे में बात करूं, तो मु झे लगता है कि यह एक युवा प्रेम कहानी है, जो वर्तमान पीढ़ी में घटित हो रही है और लोग इस से जुड़ पाएंगे.’’

मासिक धर्म व स्वच्छता दिवस को चिह्नित करने वाली पहल ‘टीच दैम यंग’ की मिथिला पालकर ब्रांड एंबेसडर हैं. उन का मानना है, ‘‘भारत में सैक्स और मासिक धर्म के बारे में बातचीत से जुड़ी वर्जनाएं अब धीरेधीरे टूट रही हैं. हम मासिक धर्म के बारे में नेताओं, समुदायों, परिवारों और किशोर लड़कों व लड़कियों को मजबूत बनाने, शिक्षित करने और शामिल करने व महिलाओं के अधिकारों को उजागर करने के उद्देश्य से बढ़ती घरेलू पहल को सलाम करते हैं.

‘‘इस के बावजूद मासिक धर्म से जुड़े एक मजबूत सामाजिक कलंक के चलते देश में 20 फीसदी से भी कम महिलाएं सैनिटरी नैपकिन का उपयोग करती हैं. तो जरूरत है हर लड़की और महिला तक सैनेटरी पैड कम कीमत पर उपलब्ध कराने की.’’

मिथिला पालकर बहुत जल्द फिल्म ‘हैप्पी पटेल’ में इमरान खान के साथ नजर आएंगी. आमिर खान द्वारा बनाई जा रही इस फिल्म के डायरैक्टर वीर दास हैं. इसे गोवा में फिल्माया गया है. उन की दूसरी फिल्म अक्षय कुमार के साथ ‘भूत बंगला’ है, जिसे कुछ समय पहले जयपुर में फिल्माया जा चुका है.

Celebrity Interview: मैं ने भी भेदभाव का सामना किया है – अंजना सिंह

Celebrity Interview: पिछले डेढ़ दशक से भोजपुरिया बैल्ट में दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली हीरोइन अंजना सिंह के सितारे इन दिनों बुलंदियों पर हैं.

बीते सालों में महिला प्रधान फिल्मों को बढ़ावा मिलने से अंजना सिंह ने कई दमदार रोल कर के भोजपुरी सिनेमा के ऊपर लग रहे उन आरोपों को भी खारिज कर दिया है कि हीरोइनों का कैरियर हीरो के भरोसे चलता है. चाहे बात फैमिली ड्रामा की हो या फिल्मों में ऐक्शन और मारधाड़ की, अंजना सिंह हर रोल को बखूबी निभा रही हैं, इसीलिए उन्हें इन दिनों ‘टीआरपी गर्ल’ के नाम से भी जाना जाने लगा है.

‘छठे सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स 2025’ शो में आईं अंजना सिंह से उन के फिल्म कैरियर और निजी जिंदगी से जुड़े तमाम मसलों पर खुल कर बातें हुईं. पेश हैं, उसी बातचीत के खास अंश :

आप ने अपने कई इंटरव्यू में बताया है कि आप एयर होस्टेस बनना चाहती थीं, फिर ऐक्टिंग की तरफ रुझान कैसे हुआ?

मैं एयर होस्टेस बनना चाहती थी, लेकिन मुझे बचपन से ऐक्टिंग और डांसिंग का शौक भी था. एक दिन इसी शौक के चलते एक सीरियल के लिए आडिशन दिया, जिस में मुझे सिलैक्ट कर लिया गया. लोगों को मेरी ऐक्टिंग पसंद आने लगी, तो मैं ने फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

आप के हिसाब से एक महिला कलाकार के लिए फिल्मों में कामयाबी के लिए कौनकौन से स्किल या टैलेंट होने चाहिए?

जितनी भी नई ऐक्ट्रैस हैं या ऐक्ट्रैस बनना चाहती हैं, उन से मैं यही कहना चाहूंगी कि सब से पहले आप में बहुत सब्र होना चाहिए, हालात से लड़ना आना चाहिए, ऐक्टिंग और डांसिंग के सभी स्किल होने चाहिए.

साथ में परिवार का सपोर्ट भी जरूरी है. जब हम ऐक्टिंग के क्षेत्र में आते हैं, तो कभीकभी हमारे पास काम नहीं होता है. ऐसे समय में हमारी फैमिली ही है, जो हमारे साथ खड़ी होती है. किसी भी क्षेत्र में कामयाबी के लिए पढ़ाई बहुत जरूरी है, इसलिए पढ़ाई को प्राथमिकता में रखें.

आप एक बेटी की मां हैं, फिर भी आप को आप के फैंस भोजपुरी की ‘हौट केक’ या ‘ड्रीम गर्ल’ के नाम से पुकारते हैं. यह सुन कर कैसा लगता है?

मैं गर्व करती हूं कि मैं एक बेटी की मां हूं. मेरी पहचान मेरे फैंस से ही है. यह उन का प्यार है कि वे हमें जिस नाम से बुलाएं. मेरे फैंस ने मेरी ऐक्टिंग और मुझे बहुत सम्मान और प्यार दिया है. इस के लिए मैं अपने फैंस की दिल से शुक्रगुजार हूं.

भोजपुरी फिल्मों में आज हीरोइनों का दौर है. पहले हीरो फाइट करते नजर आते थे, पर इन दिनों आप भी ऐक्शन सीन करती नजर आ रही हैं. फाइट सीन के लिए आप को क्या खास तैयारियां करनी पड़ती हैं और इस बदलाव को किस नजर से देखती हैं?

यह बात सच है कि यह दौर हीरोइनों का है. महिला सशक्तीकरण की दिशा में इस से अच्छा उदाहरण और क्या होगा. आज के दौर में जितनी भी अच्छी हीरोइनें हैं, सभी फिल्मों में बिजी हैं. अगर फाइट की बात करें, तो लोग मुझे ऐसे रोल में देखना चाहते हैं. लोगों को मैं फाइट करते हुए बहुत पसंद आती हूं. लेकिन फाइट सीन करते हुए चोट लगने का डर बना रहता है. कई बार सीन करते हुए मुझे चोट भी लग जाती है. एक बार एक सीन करते समय लगी चोट के चलते मुझे सर्जरी का भी सामना करना पड़ा था. इस के बाद भी मैं ने फिल्मों में फाइट सीन करना नहीं छोड़ा है.

भोजपुरी सिनेमा के ऊपर यह आरोप लगता रहा है कि पहले हीरोइन का कैरियर हीरो की बदौलत चलता था, लेकिन आज हीरो गायब होते जा रहे हैं, लेकिन हीरोइनें छाई हुई हैं. इस बदलाव से आप कितना खुश हैं?

किसी हीरो की बदौलत किसी हीरोइन का कैरियर नहीं चलता है, बल्कि हम अपना कैरियर कैसे ले कर आगे बढ़ना चाहते हैं, यह उस पर निर्भर करता है. वैसे, हर फिल्म इंडस्ट्री पुरुष प्रधान रही है, तो भोजपुरी सिनेमा में हीरो के हिसाब से ऐक्ट्रैस का चुनाव किया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब बहुत सी चीजें बदल गई हैं. इस बदलाव से इंडस्ट्री की सारी हीरोइनें खुश भी हैं. लेकिन, मैं किसी भी हीरो या हीरोइन से भेदभाव नहीं रखती हूं. यह फिल्म इंडस्ट्री हीरो और हीरोइन दोनों की वजह से चलती है. किसी फिल्म की कहानी और कामयाबी के लिए दोनों ही किरदार अहम हैं.

आप के दौर की तमाम फेमस हीरोइनें इंडस्ट्री से गायब हैं और आप के पास फिल्मों की लाइन लगी हुई है. इस का क्या राज है?

मैं ने शुरू से ही पूरा फोकस अपनी ऐक्टिंग और किरदार पर रखा. यही वजह है कि मु?ो डेढ़ दशक से लगातार फिल्में मिल रही हैं.

फिल्म ‘मेरी बेटी मेरा अभिमान’ में आप ने लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव के मुद्दे को उठाया है. क्या आप ने लड़की होने का भेदभाव निजी जिंदगी में भी झेला है?

फिल्म ‘मेरी बेटी मेरा अभिमान’ मेरे दिल के बहुत करीब है, क्योंकि यह फिल्म पूरी तरह से बेटियों पर आधारित है. आज भी गांव के कुछ इलाकों में बेटेबेटियों में भेदभाव देखने को मिल जाता है. ऐसे इलाकों में अकसर यह देखने को मिलता है कि 2 बेटी पैदा होने के बाद भी एक बेटा होने का इंतजार किया जाता है.

अगर पहली बेटी हो गई, तो दूसरा बच्चा उन्हें बेटा ही चाहिए होता है. लेकिन पहला बेटा हो गया, तो दूसरे का प्लान ही नहीं किया जाता है. इसी सोच को बदलने के लिए मैं ने इस फिल्म में काम किया है.

आप ने फिल्म ‘कुश्ती’ की शूटिंग पूरी की है, क्या यह फिल्म भी आप पर केंद्रित रहने वाली है?

फिल्म ‘कुश्ती’ में मैं ने अपने किरदार को ले कर बहुत मेहनत की है, इसलिए यह फिल्म मेरे दिल के काफी करीब है. यह फिल्म महिलाओं की कुश्ती को बढ़ावा देने के लिए बनी है. मैं ने भी इस फिल्म में एक पहलवान का किरदार निभाया है. मुझे पूरी आशा है कि यह फिल्म महिला पहलवानों के मुद्दे पर एक ऐतिहासिक फिल्म साबित होगी.

सारा के लिए कार्तिक ने किया ऐसा काम, फैंस बोले परफेक्ट बौयफ्रेंड

बौलीवुड इंडस्ट्री के सबसे चहेते एक्टर में से एक कार्तिक आर्यन आज-कल एक पर्फेक्ट बौयफ्रेंड के रूप में सामने आ रहे हैं. कार्तिक आर्यन की रयूमर्ड गर्लफ्रेंड और इस समय की खासा पौपुलर एक्ट्रेस सारा अली खान को उनके डांस क्लास के बाहर देखा गया. इन सब में सबसे खास बात ये रही कि सारा अली खान अकेली नहीं थी बल्कि कार्तिक आर्यन भी उनके साथ नजर आए. इन स्वीट कपल को देख आस-पास मौजूद जनता का ध्यान इन दोनो पर से एक सेकेंड के लिए भी ना हटा.

इस मौके की सबसे खास बात ये रही कि जैसे ही कार्तिक और सारा डांस क्लास से बाहर आए उसी समय तेज बारिश होने लगी और तुरंत कार्तिक ने अपनी छतरी खोल सारा की ओर कर दी. कार्तिक की ये हरकत सबको काफी स्वीट लगी और लगे भी क्यों ना आखिर कार्तिक और सारा अनके फैंस के इतने फेवरेट जो हैं. कार्तिक के इस अंदाज को देख ये कहना बिल्कुल गलत नही होगा कि वे सारा के प्रति काफी केयरिंग है और वे नही चाहते की सारा को कभी कोई तकलीफ हो.

 

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कार्तिक आर्यन सारा अली खान को बारिश से बचाते हुए उनको उनकी गाड़ी तक छोड़ने भी गए. सारा भी इस दौरान आम लड़कियो की तरह शरमाती हुई नजर आईं और उनके चेहरे की शर्माहट से साफ पता चल रहा था कि उनको कार्तिक का ये अंदाज काफी पसंद आ रहा है. कार्तिक आर्यन के इस हरकत से पता चलता है की वे असल जिंदगी में कितने स्वीट और केयरिंग हैं.

बता दें, सारा अली खान ने अपनी फिल्मी करियर की शुरूआत फिल्म केदारनाथ से की थी और अब तक सिर्फ दो फिल्में कर सारा ने अपनी खुद की फैन फौलोविंग इतनी बढ़ा ली है और देखते ही देखते कब वे सबकी इतनी फेवरेट बन गई किसी को पता ना चला तो वहीं दूसरी तरफ कार्तिक आर्यन ने भी काफी जल्दी अपने एक्टिंग के टैलेंट से सबका दिल जीत लिया है. खबरो की माने को कार्तिक आर्यन और सारा अली खान एक साथ इम्तियाज अली की अगली फिल्म में साथ नजर आने वाले हैं जो कि साल 2020 में 14 फरवरी यानी वैलेंटाइन डे के मौके पर रिलीज की जाएगी.

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Written By: Karan Manchanda

युवराज सिंह की एक्स भाभी ने दिखाया बोल्ड अवतार, फोटोज देख दंग रह गए फैंस

मशहूर इंडियन क्रिकेटर युवराज सिंह की भाभी आकांक्षा शर्मा आए दिन चर्चा का विषय बन ही जाती हैं. आकांक्षा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर फैंस के साथ अपनी फोटोज शेयर करती रहती हैं. जब से आकांक्षा ने बिग बौस सीजन 10 में एंट्री की थी तब से उनके फैंस को उनकी पर्सनल लाइफ से जुड़े काफी राज पता चलने के साथ-साथ उनकी ज़िदगी में काफी दिलचस्पी रहने लगी थी. खबरो की माने तो हाल ही में आकांक्षा का तलाक युवराज सिंह के भाई जोरावर सिंह से हुआ था.

आकांक्षा शर्मा अक्सर अपनी बोल्ड फोटोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं और इसी के साथ उन्होने जोरावर सिंह के साथ हुए तलाक के बाद भी अपनी ये आदत नही बदली. बीते दिनो आकांक्षा ने अपने औफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट पर काफी बोल्ड फोटोज शेयर की थी जिसे देखने के बाद ये कहना बिल्कुल गलत नही होगा कि उनके तलाक का असर उन पर बिल्कुल नही पड़ा है बल्कि तलाक के बाद से वे अपने आप को काफी फ्री महसूस कर रही हैं.

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”The higher I get, the lesser they get me.”

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आकांक्षा शर्मा की ये फोटोज देखते हुए साफ जाहिर होता है कि वे अब अपनी लाइफ खुलकर एंजौय कर रही हैं और वे फिलहाल अपना वेकेशन मना कर वापस मुंबई लौटी हैं. उनकी ये हौट और बोल्ड फोटोज देख फैंस काफी खुश हुए और साथ ही इन फोटोज पर जमकर लाइक और कमैंट किए. फैंस को उनका ये ग्लैमरस अंदाज काफी पसंद आया है और ये कहना भी गलत नही होगा कि आकांक्षा अपने फैंस को इम्प्रेस करना अच्छे से जानती हैं.

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बता दें, आकांक्षा शर्मा और जोरावर सिंह की शादी 1 मार्च 2014 को हुई थी और तलाक से पहले आकांक्षा ने युवराज सिंह और उनकी मां शबनम सिंह पर अक्टूबर 2017 में घरेलु हिंसा का आरोप भी लगाया था पर बाद में आकांक्षा ने अपना केस वापस ले कर उन सब से माफी भी मांगी.

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Written By: Karan Manchanda

सारा की कामयाबी से खुश हूं- सैफ अली खान

लेखक- आरती सक्सेना

इस के अलावा सैफ अली खान आजकल अपनी बेटी सारा अली खान को ले कर भी चर्चा में हैं जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म ‘केदारनाथ’ से तहलका मचा दिया है. सारा अली खान की कामयाबी को ले कर सैफ क्या कहते हैं? ‘तानाजी : द अनसंग वारियर’ के अलावा वे और कौनकौन सी फिल्मों में काम कर रहे हैं? ऐसे ही कई सवालों के जवाब उन्होंने एक बातचीत में दिए. पेश हैं, उस के खास अंश:

आप की वैब सीरीज ‘स्कैरेड गेम्स’ ने काफी तहलका मचाया था. इस बारे में आप क्या कहेंगे?

जब मुझे इस वैब सीरीज की कहानी के बारे में पता चला था तो मुझे यह बहुत रोचक लगी थी. सो, मैं ने इस वैब सीरीज में काम करना मंजूर कर लिया. आज जब लोग इस में मेरी ऐक्टिंग की तारीफ कर रहे हैं तो मुझे लगा कि मेरा फैसला सही था.

आप ने अपने ऐक्टिंग कैरियर में न तो कभी कोई जल्दबाजी की और न ही फिल्मों के चुनाव को ले कर कभी ढीले पड़े. इस बारे में आप क्या कहेंगे?

मैं फिल्मों के चुनाव को ले कर कोई जल्दबाजी नहीं करता हूं, क्योंकि फिल्मों में काम करना मेरा जुनून है. मैं अपने काम को ऐंजौय करना चाहता हूं. मुझे नहीं लगता कि मैं जल्दबाजी में कोई फिल्म साइन करूं और फिर उसे करते वक्त पछताऊं.

आप की पिछली फिल्म ‘बाजार’ को दर्शकों द्वारा सराहा गया, लेकिन इस फिल्म ने बौक्स औफिस पर कुछ खास धमाल नहीं किया. क्यों?

मुझे लगता है कि सिर्फ बौक्स औफिस पर फिल्म कामयाब होना ही असल कामयाबी नहीं है, बल्कि मेरी नजर में वह फिल्म कामयाब है जिस की चर्चा दर्शकों के बीच हो, जो दर्शकों द्वारा सराही जाए.

फिल्म ‘बाजार’ का विषय भी ऐसा ही कुछ था जिस में सट्टे के कारोबार को हाईलाइट किया गया. शेयर मार्केट में लोग कैसे बनते हैं और कैसे डूबते हैं, यह इस फिल्म का मुख्य मुद्दा था, जो दर्शकों द्वारा सराहा गया.

क्या आप शेयर मार्केट में पैसा लगाना पसंद करते हैं?

नहीं, मैं तो सेफ गेम खेलना पसंद करता हूं. मुझे दूसरी जगह इनवैस्मैंट करना ज्यादा पसंद है बजाय शेयर बाजार में पैसा लगाने के.

आप काफी सालों बाद अजय देवगन के साथ ऐतिहासिक फिल्म ‘तानाजी : द अनसंग वारियर’ करने जा रहे हैं. इस से पहले आप ने उन के साथ फिल्म ‘ओमकारा’ की थी. इस बारे में आप क्या कहेंगे?

हां, मेरा अजय देवगन के साथ काम करने का अनुभव काफी अच्छा रहा है. उन्हें फिल्मों से और फिल्म मेकिंग से प्यार है. इस फिल्म को उन्होंने बहुत दिल से बनाया है. इस में मेरा किरदार एंटी हीरो का है.

यह एक ऐतिहासिक फिल्म है जो ‘बाहुबली’ की तरह बड़े पैमाने पर बन रही है. खासतौर पर बच्चे इस फिल्म को देख कर जरूर ऐंजौय करेंगे.

आप अजय देवगन के अलावा आर. माधवन के साथ भी काफी अरसे बाद फिल्म ‘हंटर’ में नजर आएंगे. सुना है कि इस फिल्म का नाम अब बदल कर कुछ और रखा जाने वाला है. आप ने आर. माधवन के साथ साल 2001 में आई फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ काम किया था. आप को कैसा महसूस हो रहा है?

पता ही नहीं लगता कि समय कैसे तेजी से भाग रहा है. ऐसा लगता है, जैसे कल की ही बात हो. आर. माधवन और मेरी फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ काफी हिट रही थी. हमारा साथ काम करने का अनुभव भी काफी अच्छा था. आज इतने सालों के बाद जब उन से इस फिल्म के लिए मिला तो लगा ही नहीं कि हम काफी अरसे बाद दोबारा साथ काम कर रहे हैं.

फिल्म ‘हंटर’ भी एक ऐतिहासिक फिल्म है. इस फिल्म में मैं नागा साधु का किरदार निभा रहा हूं. डायरैक्टर नवदीप सिंह ने इस फिल्म को बहुत ही सलीके से बनाया है. जब आप यह फिल्म देखेंगे तो आप को इस बात का एहसास होगा.

इस फिल्म में मैं ने काफी मुश्किल स्टंट किए हैं. मैं ने तलवारबाजी की है, घुड़सवारी की है वगैरह.

नितिन कक्कड़ के डायरैक्शन में बनी फिल्म ‘जवानी जानेमन’ को आप प्रोड्यूस कर रहे हैं और उस में ऐक्टिंग भी कर रहे हैं. इस फिल्म में खास क्या है?

यह हलकीफुलकी घरेलू किस्म की रोमांटिक फिल्म है.

इन सब के अलावा आप और कौनकौन सी फिल्में कर रहे हैं?

एक फिल्म ‘गो गोवा गोन’ का सीक्वैल कर रहा हूं जिस में कुणाल खेमू और वीर दास हैं.

इस के अलावा अनुराग बसु की एक फिल्म कर रहा हूं जिस में मेरे साथ सोनाक्षी सिन्हा हीरोइन हैं. यह एक ड्रामा फिल्म है. इस फिल्म का नाम अभी नहीं रखा गया है.

अब आप ऐक्टर होने के साथसाथ प्रोड्यूसर भी हैं. ऐसे में जब आप किसी फिल्म में ऐक्टिंग करते हैं तो उस फिल्म में डायरैक्टर की दखलअंदाजी आप को पसंद आती है या आप असहज महसूस करते हैं?

नहीं, बिलकुल नहीं. मुझे कभी बुरा नहीं लगता. अगर डायरैक्टर मुझे किसी भी तरह गाइड करता है तो… बल्कि कई बार तो मुझे लगता है कि कुछ सही नहीं है तो भी मैं डायरैक्टर के काम में दखलअंदाजी नहीं करता, क्योंकि मेरा मानना है कि फिल्म बनाने में सब से मुश्किल काम डायरैक्टर का होता है. उस के दिमाग में उस वक्त क्या चल रहा है, वह हम कलाकारों को पता नहीं होता है, इसलिए जैसा डायरैक्टर साहब बोलते हैं, मैं वैसा ही काम करता हूं.

आप की बेटी सारा अली खान ने अपनी पहली ही फिल्म ‘केदारनाथ’ से दर्शकों के दिलों में जगह बना ली है. उस के बाद उन की फिल्म ‘सिंबा’ भी अच्छी चली थी. हर कोई उन की ऐक्टिंग की तारीफ कर रहा है. ऐसे में आप कितना खुश हैं?

मैं सारा का डैडी हूं तो जाहिर है कि मुझे उस की कामयाबी से खुशी होगी. सारा पहले से ही बहुत समझदार है. लिहाजा, मुझे थोड़ाबहुत तो अंदाजा था कि वह ऐक्टिंग में अपनी अलग जगह बनाने में कामयाब रहेगी.

क्या आप यह चाहते थे कि सारा पहले पढ़ाई पूरी करे और उस के बाद ही फिल्मों में आए?

हां, यह सच है. मैं चाहता था कि सारा पहले अपनी पढ़ाई पूरी करे, उस के बाद ही फिल्मों में आए, क्योंकि एक बार फिल्मों से जुड़ने के बाद पढ़ाई पूरी करना बहुत मुश्किल हो जाता है.

एक हीरोइन का पिता कहलाना बतौर ऐक्टर आप के लिए कितना फायदेमंद और नुकसानदायक है?

हर मांबाप को अपने बच्चों की तरक्की पसंद होती है. सारा ने पहली ही बार में बाजी मार ली तो मुझ से ज्यादा खुशी किसी और को नहीं हो सकती.

जहां तक बतौर ऐक्टर एक हीरोइन का पिता होने का सवाल है तो अब इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता है. अनिल कपूर के भी बेटाबेटी ऐक्टर बन चुके हैं, पर आज भी वे ऐवरग्रीन स्टार हैं.

अमितजी, जैकी श्रौफ सब के बच्चे भी इंडस्ट्री में हैं लेकिन पिताओं के कैरियर पर कोई फर्क नहीं पड़ा. आज सब इतने फिट हैं कि उम्र आड़े नहीं आती.

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