लेखक- आरती सक्सेना

इस के अलावा सैफ अली खान आजकल अपनी बेटी सारा अली खान को ले कर भी चर्चा में हैं जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म ‘केदारनाथ’ से तहलका मचा दिया है. सारा अली खान की कामयाबी को ले कर सैफ क्या कहते हैं? ‘तानाजी : द अनसंग वारियर’ के अलावा वे और कौनकौन सी फिल्मों में काम कर रहे हैं? ऐसे ही कई सवालों के जवाब उन्होंने एक बातचीत में दिए. पेश हैं, उस के खास अंश:

आप की वैब सीरीज ‘स्कैरेड गेम्स’ ने काफी तहलका मचाया था. इस बारे में आप क्या कहेंगे?

जब मुझे इस वैब सीरीज की कहानी के बारे में पता चला था तो मुझे यह बहुत रोचक लगी थी. सो, मैं ने इस वैब सीरीज में काम करना मंजूर कर लिया. आज जब लोग इस में मेरी ऐक्टिंग की तारीफ कर रहे हैं तो मुझे लगा कि मेरा फैसला सही था.

आप ने अपने ऐक्टिंग कैरियर में न तो कभी कोई जल्दबाजी की और न ही फिल्मों के चुनाव को ले कर कभी ढीले पड़े. इस बारे में आप क्या कहेंगे?

मैं फिल्मों के चुनाव को ले कर कोई जल्दबाजी नहीं करता हूं, क्योंकि फिल्मों में काम करना मेरा जुनून है. मैं अपने काम को ऐंजौय करना चाहता हूं. मुझे नहीं लगता कि मैं जल्दबाजी में कोई फिल्म साइन करूं और फिर उसे करते वक्त पछताऊं.

आप की पिछली फिल्म ‘बाजार’ को दर्शकों द्वारा सराहा गया, लेकिन इस फिल्म ने बौक्स औफिस पर कुछ खास धमाल नहीं किया. क्यों?

मुझे लगता है कि सिर्फ बौक्स औफिस पर फिल्म कामयाब होना ही असल कामयाबी नहीं है, बल्कि मेरी नजर में वह फिल्म कामयाब है जिस की चर्चा दर्शकों के बीच हो, जो दर्शकों द्वारा सराही जाए.

फिल्म ‘बाजार’ का विषय भी ऐसा ही कुछ था जिस में सट्टे के कारोबार को हाईलाइट किया गया. शेयर मार्केट में लोग कैसे बनते हैं और कैसे डूबते हैं, यह इस फिल्म का मुख्य मुद्दा था, जो दर्शकों द्वारा सराहा गया.

क्या आप शेयर मार्केट में पैसा लगाना पसंद करते हैं?

नहीं, मैं तो सेफ गेम खेलना पसंद करता हूं. मुझे दूसरी जगह इनवैस्मैंट करना ज्यादा पसंद है बजाय शेयर बाजार में पैसा लगाने के.

आप काफी सालों बाद अजय देवगन के साथ ऐतिहासिक फिल्म ‘तानाजी : द अनसंग वारियर’ करने जा रहे हैं. इस से पहले आप ने उन के साथ फिल्म ‘ओमकारा’ की थी. इस बारे में आप क्या कहेंगे?

हां, मेरा अजय देवगन के साथ काम करने का अनुभव काफी अच्छा रहा है. उन्हें फिल्मों से और फिल्म मेकिंग से प्यार है. इस फिल्म को उन्होंने बहुत दिल से बनाया है. इस में मेरा किरदार एंटी हीरो का है.

यह एक ऐतिहासिक फिल्म है जो ‘बाहुबली’ की तरह बड़े पैमाने पर बन रही है. खासतौर पर बच्चे इस फिल्म को देख कर जरूर ऐंजौय करेंगे.

आप अजय देवगन के अलावा आर. माधवन के साथ भी काफी अरसे बाद फिल्म ‘हंटर’ में नजर आएंगे. सुना है कि इस फिल्म का नाम अब बदल कर कुछ और रखा जाने वाला है. आप ने आर. माधवन के साथ साल 2001 में आई फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ काम किया था. आप को कैसा महसूस हो रहा है?

सरस सलिल विशेष

पता ही नहीं लगता कि समय कैसे तेजी से भाग रहा है. ऐसा लगता है, जैसे कल की ही बात हो. आर. माधवन और मेरी फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ काफी हिट रही थी. हमारा साथ काम करने का अनुभव भी काफी अच्छा था. आज इतने सालों के बाद जब उन से इस फिल्म के लिए मिला तो लगा ही नहीं कि हम काफी अरसे बाद दोबारा साथ काम कर रहे हैं.

फिल्म ‘हंटर’ भी एक ऐतिहासिक फिल्म है. इस फिल्म में मैं नागा साधु का किरदार निभा रहा हूं. डायरैक्टर नवदीप सिंह ने इस फिल्म को बहुत ही सलीके से बनाया है. जब आप यह फिल्म देखेंगे तो आप को इस बात का एहसास होगा.

इस फिल्म में मैं ने काफी मुश्किल स्टंट किए हैं. मैं ने तलवारबाजी की है, घुड़सवारी की है वगैरह.

नितिन कक्कड़ के डायरैक्शन में बनी फिल्म ‘जवानी जानेमन’ को आप प्रोड्यूस कर रहे हैं और उस में ऐक्टिंग भी कर रहे हैं. इस फिल्म में खास क्या है?

यह हलकीफुलकी घरेलू किस्म की रोमांटिक फिल्म है.

इन सब के अलावा आप और कौनकौन सी फिल्में कर रहे हैं?

एक फिल्म ‘गो गोवा गोन’ का सीक्वैल कर रहा हूं जिस में कुणाल खेमू और वीर दास हैं.

इस के अलावा अनुराग बसु की एक फिल्म कर रहा हूं जिस में मेरे साथ सोनाक्षी सिन्हा हीरोइन हैं. यह एक ड्रामा फिल्म है. इस फिल्म का नाम अभी नहीं रखा गया है.

अब आप ऐक्टर होने के साथसाथ प्रोड्यूसर भी हैं. ऐसे में जब आप किसी फिल्म में ऐक्टिंग करते हैं तो उस फिल्म में डायरैक्टर की दखलअंदाजी आप को पसंद आती है या आप असहज महसूस करते हैं?

नहीं, बिलकुल नहीं. मुझे कभी बुरा नहीं लगता. अगर डायरैक्टर मुझे किसी भी तरह गाइड करता है तो… बल्कि कई बार तो मुझे लगता है कि कुछ सही नहीं है तो भी मैं डायरैक्टर के काम में दखलअंदाजी नहीं करता, क्योंकि मेरा मानना है कि फिल्म बनाने में सब से मुश्किल काम डायरैक्टर का होता है. उस के दिमाग में उस वक्त क्या चल रहा है, वह हम कलाकारों को पता नहीं होता है, इसलिए जैसा डायरैक्टर साहब बोलते हैं, मैं वैसा ही काम करता हूं.

आप की बेटी सारा अली खान ने अपनी पहली ही फिल्म ‘केदारनाथ’ से दर्शकों के दिलों में जगह बना ली है. उस के बाद उन की फिल्म ‘सिंबा’ भी अच्छी चली थी. हर कोई उन की ऐक्टिंग की तारीफ कर रहा है. ऐसे में आप कितना खुश हैं?

मैं सारा का डैडी हूं तो जाहिर है कि मुझे उस की कामयाबी से खुशी होगी. सारा पहले से ही बहुत समझदार है. लिहाजा, मुझे थोड़ाबहुत तो अंदाजा था कि वह ऐक्टिंग में अपनी अलग जगह बनाने में कामयाब रहेगी.

क्या आप यह चाहते थे कि सारा पहले पढ़ाई पूरी करे और उस के बाद ही फिल्मों में आए?

हां, यह सच है. मैं चाहता था कि सारा पहले अपनी पढ़ाई पूरी करे, उस के बाद ही फिल्मों में आए, क्योंकि एक बार फिल्मों से जुड़ने के बाद पढ़ाई पूरी करना बहुत मुश्किल हो जाता है.

एक हीरोइन का पिता कहलाना बतौर ऐक्टर आप के लिए कितना फायदेमंद और नुकसानदायक है?

हर मांबाप को अपने बच्चों की तरक्की पसंद होती है. सारा ने पहली ही बार में बाजी मार ली तो मुझ से ज्यादा खुशी किसी और को नहीं हो सकती.

जहां तक बतौर ऐक्टर एक हीरोइन का पिता होने का सवाल है तो अब इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता है. अनिल कपूर के भी बेटाबेटी ऐक्टर बन चुके हैं, पर आज भी वे ऐवरग्रीन स्टार हैं.

अमितजी, जैकी श्रौफ सब के बच्चे भी इंडस्ट्री में हैं लेकिन पिताओं के कैरियर पर कोई फर्क नहीं पड़ा. आज सब इतने फिट हैं कि उम्र आड़े नहीं आती.

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