इस हीरोइन को हुई 6 महीने की जेल, कारण जान कर हैरान रह जाएंगे

लंबी टांगों और दिलकश हुस्न के बदौलत दर्शकों का दिल जीतने वाली मौडल, मिस इंटरकौन्टिनैंटल व अभिनेत्री कोयना मित्रा को मुंबई के एक कोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में 6 महीने जेल की सजा सुनाई है. अदालत ने यह सजा कोयना को साल 2013 के एक केस में दी है. इस अभिनेत्री पर आरोप है कि इस ने मौडल पूनम सेठी के साथ धोखाधड़ी की है. दरअसल, मौडल पूनम ने कोयना पर चेक बाउंस का आरोप लगाया था और उस के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया था.

दोस्त दोस्त न रहा

मीडिया से बात करते हुए पूनम सेठी ने कहा,”कोयना पहले मेरी एक अच्छी दोस्त थी. मैं उस की जरूरत पर सदैव खड़ी रहती थी. एक बार उस ने मुझ से अपनी जरूरत बता कर 22 लाख रुपए उधार लिए थे. मैंने जब उस रकम को लौटाने की बात की तो वह इस रकम को वापस देने के लिए 3 लाख रुपए का एक चेक दिया था, जो बाउंस हो गया. मैंने उसे फिर कहा कि यह आपसी मामला है, मैं नहीं चाहती कि मुझे कानून का सहारा लेना पड़े. पर वह नहीं मानी. मजबूरन मैंने कोर्ट की शरण ली.”

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कोयना की सफाई

उधर कोयना ने खुद पर लगे आरोप को गलत बताया और कहा,” पूनम सेठी के पास उधार देने की कूवत ही नहीं थी. दरअसल, सेठी ने उसके चेक्स चुरा लिए थे.”

अदालत में सुनवाई के दौरान कोयना के पहले तर्क को मजिस्ट्रेट ने मानने से मना कर दिया और दूसरे तर्क पर कोयना यह साबित ही नहीं कर पाई कि सेठी ने उस के चेक चुराए थे. कोर्ट ने कहा,”कोयना ने खुद को मिले नोटिस के जवाब में ये बातें नहीं बताईं और न ही उन्होंने इस के बारे में आगे एक्शन लिया. चेक इस बात पर बाउंस नहीं हुआ कि पैसे देने वाले ने दिए नहीं, बल्कि इस बात पर बाउंस हुआ कि पैसे अकाउंट में है ही नहीं. अगर यह मान भी लिया जाए कि शिकायतकर्ता ने आरोपी के चेक, जो कि ब्लैंक थे, को उस के घर से चुरा लिया था और उन का गलत इस्तेमाल किया, तो भी आरोपी के पास इस पेमेंट को रोकने का पूरा मौका था. लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया.”

कोर्ट ने सुनाया फैसला

कोर्ट ने कोयना को 6 महीने जेल की सजा के साथसाथ उस जुर्माना भी लगाया है और आदेश दिया है कि वह पूनम सेठी को ब्याज सहित 4.64  लाख रूपए दें.

कोर्ट के फैसले के बाद जाहिर है कोयना उसे उच्च अदालत में चुनौती देगी. मामला वहां भी चलेगा पर गुमनामी के अंधेरे में जाने से पहले कोयना धीरेधीरे अपनी पहचान बना रही थी.

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यों भी बौलीवुड में खुद को स्थापित करना और चलते रहना आसान भी नहीं होता. जो लगातार मेहनत करते हैं वे काफी हद तक सफल भी होते हैं पर जैसा कि पहले भी हुआ है, कई हीरोइनें मशहूर तो हुईं पर अचानक से परदे से गायब हो कर गुमनामी के अंधेरों में खो गईं. कुछ वापस आईं कुछ नहीं.

कोयना की वापसी तो हुई पर अदाकारी की वजह से नहीं एक अपराध की वजह से.

अधूरा समर्पण

लेखक- कुमार गौरव अजीतेंदु

सुष्मिता के मांबाप के चेहरे पर संतोष था कि उन की बेटी का रिश्ता एक अच्छे घर में होने जा रहा है. सुष्मिता और सागर ने एकदूसरे की आंखों में देखा और मुसकराए. इस के बाद वे सुंदर सपनों के दरिया में डूबते चले गए.

सुष्मिता अपने महल्ले के सरकारी इंटर स्कूल में गैस्ट टीचर थी और उस के पिता सिविल इंजीनियर. उन्होंने अपने एक परिचित ठेकेदार के बेटे सागर

से, जो एक मल्टीनैशनल कंपनी में अच्छे पद पर था, सुष्मिता का रिश्ता तय कर दिया.

सुष्मिता और सागर जब मिले तो उन्हें आपसी विचारों में बहुत मेल लगा, सो उन्होंने भी खुशीखुशी रिश्ते के लिए हामी भर दी.

सगाई के साथ ही उन दोनों के रिश्ते को एक सामाजिक बंधन मिल चुका था. कंपनी के काम से सागर को सालभर के लिए विदेश जाना था, इसलिए शादी की तारीख अगले साल तय होनी थी.

सुष्मिता से काम खत्म होते ही लौटने की बात कह कर सागर परदेश को उड़ चला. सुष्मिता ने सागर का रुमाल यह कहते हुए अपने पास रख लिया कि इस में तुम्हारी खुशबू बसी है.

एक शाम सुष्मिता अपनी छत पर टहल रही थी और हमेशा की तरह सागर वीडियो काल पर उस से बातें कर रहा था. जब बातों का सिलसिला ज्यादा हो गया तो सुष्मिता ने सागर को अगले दिन बात करने के लिए कहा. इस के थोड़ी देर बाद सुष्मिता ने काल काट दी.

इस के बाद जब सुष्मिता नीचे जाने के लिए पलटी तो अचानक उस की आंखें अपने पड़ोसी लड़के निशांत से मिल गईं जो अपनी छत पर खड़ा उन दोनों को बातें करता हुआ न जाने कब से देख रहा था.

सुष्मिता निशांत को पड़ोस के रिश्ते से राखी बांध चुकी थी, इसलिए वह थोड़ा सकुचा गई और बोली, ‘‘अरे निशांत भैया, आप कब आए? मैं ने तो ध्यान ही नहीं दिया.’’

‘‘जब से तुम यहां आई हो, मैं भी तब से छत पर ही हूं,’’ निशांत ने अपनी परतदार हंसी के साथ कहा.

सुष्मिता ने आंखें नीची कर लीं और सीढि़यों की ओर चल पड़ी. वह निशांत की नजर को अकसर भांपती थी कि उस में उस के लिए कुछ और ही भाव आते हैं.

एक और शाम जब सुष्मिता अकेली ही छत पर टहल रही थी कि तभी निशांत भी अपनी छत पर आया.

‘‘निशांत भैया, कैसे हैं आप? कम दिखते हैं…’’ निशांत उस के मुंह से ऐसी बात सुन कर थोड़ा चौंका लेकिन फिर उस के मन में भी लड्डू फूटने लगे.

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निशांत तो खुद सुष्मिता से बात

करने को बेचैन रहता था. सो, वह छत की बाउंड्री के पास सुष्मिता के करीब आ गया और बोला, ‘‘मैं तो रोज इस समय यहां आता हूं… तुम ही बिजी

रहती हो.’’

‘‘वह तो है…’’ सुष्मिता मस्ती भरी आवाज में बोली, ‘‘क्या करूं भैया, अब जब से पढ़ाने जाने लगी हूं, समय और भी कम मिलता है.’’

इस के बाद उन दोनों के बीच इधरउधर की बातें होने लगीं.

कुछ दिनों बाद एक रोज सुष्मिता घर में अकेली थी. सारे लोग किसी रिश्तेदार के यहां गए हुए थे. सुष्मिता की चचेरी बहन सुनीति उस के साथ सोने के

लिए आने वाली थी. शाम के गहराते साए सुष्मिता को डरा रहे थे. उस ने कई बार सुनीति को मैसेज कर दिया था कि जल्दी आना.

खाना बनाने की तैयारी कर रही सुष्मिता को छत पर सूख रहे कपड़ों का खयाल आया तो वह भाग कर ऊपर आई. कपड़ों को समेटने के बाद उसे अपनी एक समीज गायब मिली. उस

ने आसपास देखा तो पाया कि वह समीज निशांत की छत पर कोने में पड़ी थी.

सुष्मिता पहले तो हिचकी लेकिन फिर आसपास देख कर निशांत की छत पर कूद गई. वह निशांत के आने से पहले वहां से भाग जाना चाहती थी मगर जैसे ही वह अपनी समीज उठा कर मुड़ी, निशांत उसे मुसकराता खड़ा मिला. सुष्मिता ने एक असहज मुसकराहट उस की ओर फेंकी.

निशांत बोला, ‘‘उड़ कर आ गई होगी यहां यह…’’

‘‘हां भैया, हवा तेज थी आज…’’ सुष्मिता वहां से निकलने के मूड में थी लेकिन निशांत उस के आगे दीवार से लग कर खड़ा हो गया और बतियाने लगा. तब तक शाम पूरी तरह चारों ओर छा चुकी थी.

सुष्मिता ने कहा, ‘‘भैया, अब मैं चलती हूं.’’

‘‘हां, मच्छर काट रहे मुझे भी यहां…’’ निशांत ने अपने पैरों पर थपकी देते हुए कहा, ‘‘अच्छा जरा 2 मिनट नीचे आओ न… मैं ने एक नया सौफ्टवेयर डाउनलोड किया है… बहुत मजेदार चीजें हैं उस में… तुम को भी दिखाता हूं.’’

न चाहते हुए भी सुष्मिता निशांत के साथ सीढि़यों से उतर आई. उस के मन में एक अजीब सा डर समाया हुआ था.

निशांत ने लैपटौप औन किया और उसे दिखाने लगा. सुष्मिता का ध्यान जल्दी से वहां से निकलने पर था. तभी उस ने गौर किया कि निशांत के घर में बहुत शांति है.

‘‘सब लोग कहां गए हैं?’’ सुष्मिता ने निशांत से पूछा.

निशांत ने जवाब दिया, ‘‘यहां भी सारे लोग शहर से गए हुए हैं… कल तक आएंगे.’’

सुष्मिता का दिल धक से रह गया. उस ने कहा, ‘‘भैया, अब मैं निकलती हूं… मुझे खाना भी बनाना है.’’

सुष्मिता का इतना कहना था कि निशांत ने उस का हाथ पकड़ लिया.

‘‘यह क्या कर रहे हैं भैया?’’ सुष्मिता ने निशांत से पूछा. उसे निशांत से किसी ऐसी हरकत का डर तो बरसों से थी लेकिन आज उसे करते देख कर

वह अपनी आंखों पर भरोसा नहीं कर पा रही थी.

निशांत ने सुष्मिता की कमर में हाथ डाल कर उसे अपनी ओर खींचा और उस के हाथों में थमी समीज उस से ले कर टेबल पर रखते हुए बोला, ‘‘सागर की तसवीरों में रोज नईनई लड़की होती… तो तुम उस को एकदम पैकेट वाला खाना खिलाने के चक्कर में क्यों हो? तुम भी थोड़ी जूठी हो जाओ. किसी को पता नहीं चलेगा.’’

सुष्मिता का दिल जोर से धड़कने लगा. निशांत ने उस के मन में दबे उसी शक के बिंदु को छू दिया था जिस के बारे में वह दिनरात सोचसोच कर चिंतित होती थी.

क्या सही है और क्या गलत, यह सोचतेसोचते बहुत देर हो गई. तूफान कमरे में आ चुका था. बिस्तर पर देह

की जरूरत और मन की घबराहटों के नीचे दबी सुष्मिता एकटक दरवाजे के पास पड़े अपने और निशांत के कपड़ों

को देखती रही. निशांत की गरम, तेज सांसें सुष्मिता की बेचैन सांसों में मिलती

चली गईं.

सबकुछ शांत होने के बाद सुष्मिता ने अपनी आंखों के कोरों के गीलेपन को पोंछा और अपने कपड़ों और खुद को समेट कर वहां से चल पड़ी. निशांत ने भी उस से नजरें मिलाने की कोशिश

नहीं की.

कलैंडर के पन्ने आगे पलटते रहे. सुष्मिता और निशांत के बीच भाईबहन का रिश्ता अब केवल सामाजिक मुखौटा मात्र ही रह गया था. ऊपर अपने कमरे में अकेला सोने वाला निशांत आराम से सुष्मिता को रात में बुला लेता और वह भी खुशीखुशी अपनी छत फांद कर उस के पास चली जाती.

आएदिन सुष्मिता के अंदर जाने वाला इच्छाओं का रस आखिरकार एक रोज अपनी भीतरी कारगुजारियों का संकेत देने के लिए उस के मुंह से उलटी के रूप में बाहर आ कर सब को संदेशा भेज बैठा.

सुष्मिता के मांबाप सन्न रह गए. घर में जोरदार हंगामा हुआ. इस के बाद सुष्मिता की हाइमनोप्लास्टी करा कर सागर के आते ही उसे ब्याह कर विदा कर दिया गया.

सुहागरात में चादर पर सुष्मिता से छिटके लाल छींटों ने सागर को भी पूरी तरह आश्वस्त कर दिया. दोनों की जिंदगी शुरू हो गई. सुष्मिता का भी मन सागर के साथ संतुष्ट था क्योंकि निशांत के पास तो वह खुद को शारीरिक सुख देने और सागर से अनचाहा बदला लेने के लिए जाती थी.

धीरेधीरे 2 साल बीत गए लेकिन सुष्मिता और सागर के घर नया सदस्य नहीं आया. उन्होंने डाक्टर से जांच कराई. सागर में किसी तरह की कोई कमी नहीं निकली. इस के बाद बारी सुष्मिता की रिपोर्ट की थी.

डाक्टर ने दोनों को अपने केबिन में बुलाया और उलाहना सा देते हुए कहा, ‘‘मेरी समझ में नहीं आता मिस्टर सागर कि जब आप लोगों को बच्चा चाहिए

था तो आखिर आप ने अपना पहला बच्चा गिराया क्यों? बच्चा गिराना कोई खेल नहीं है.

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‘‘अगर ऐसा कराने वाला डाक्टर अनुभवी नहीं हो तो आगे चल कर पेट से होने में दिक्कत आती ही है. आप की पत्नी के साथ भी यही हुआ है.’’

सागर हैरान रह गया और सुष्मिता को तो ऐसा लगा मानो उसे किसी ने अंदर से खाली कर दिया हो. सागर ने टूटी सी नजर उस पर डाली और डाक्टर की बातें सुनता रहा.

वहां से लौट कर आने के बाद सागर चुपचाप पलंग पर बैठ गया. अब तक की जिंदगी में सागर से बेहिसाब प्यार पा कर उस के प्रति श्रद्धा से लबालब हो चुकी सुष्मिता ने उस के पैर पकड़ लिए और रोरो कर सारी बात बताई. सागर के चेहरे पर हारी सी मुसकान खेल उठी. वह उठ कर दूसरे कमरे में चला गया.

उन दोनों को वहीं बैठेबैठे रात हो गई. सुष्मिता जानती थी कि इस सब

की जड़ वही है इसलिए पहल भी उसे ही करनी होगी. थोड़ी देर बाद वह सागर

के पास गई. वह दीवार की ओर मुंह किए बैठा था. अपने आंसुओं को किसी तरह रोक कर सुष्मिता ने उस के कंधे पर हाथ रखा.

सागर ने उस की ओर देखा और भरी आंखें लिए बोल उठा, ‘‘तुम भरोसा करो या न करो लेकिन तुम्हारे लिए मैं ने काजल की कोठरी में भी खुद को बेदाग रखा और तुम केवल शक के बहकावे

में आ कर खुद को कीचड़ में धकेल बैठी.’’

सुष्मिता फूटफूट कर रोए जा रही थी. सागर कहता रहा, ‘‘यह मत समझना कि मैं तुम्हारी देह को अनछुआ न पा कर तुम्हें ताना मार रहा हूं, बल्कि सच तो यह है कि पतिपत्नी का संबंध तन के साथसाथ मन का भी होता है और तन को मन से अलग रखना हर किसी के बस में नहीं होता.

‘‘तुम्हारा मन अगर तन से खुद को बचा पाया है तो मेरा दिल आज भी तुम्हारे लिए दरवाजे खोल कर बैठा है, वरना मुझे तुम्हारा अधूरा समर्पण नहीं चाहिए. फैसला तुम्हारे हाथ में है सुष्मिता. अगर तुम्हें मुझ से कभी भी प्यार मिला हो तो तुम को उसी प्यार का वास्ता, अब दोबारा मुझे किसी भुलावे में मत रखना.’’

सुष्मिता ने सागर के सिर पर हाथ फेरा और वापस अपने कमरे में आ गई. उस की आंखों के सामने सागर के साथ बिताई रातें घूमने लगीं जब वह निशांत को महसूस करते हुए सागर को अपने सीने से लगाती थी. उस के मन ने उसे धिक्कारना शुरू कर दिया.

विचारों के ज्वारभाटा में वह सारी रात ऊपरनीचे होती रही. भोर खिलने लगी थी, इसलिए उस ने अपने आंसू पोंछे और फैसला कर लिया.

सुष्मिता ने अपना सामान बांधा और सागर के पास पहुंची. सागर ने सवालिया निगाहों से उस की ओर देखा.

सुष्मिता ने सागर का माथा चूमा और सागर की जेब से उस का वही रुमाल निकाल लिया जो उस ने शादी से पहले उस के परदेश जाते समय निशानी के रूप में अपने पास रखा था.

सुष्मिता ने वह रूमाल अपने बैग में डाला और बोली, ‘‘मुझे माफ मत करना सागर… मैं तुम्हारी गुनाहगार हूं… मैं तुम्हारे लायक नहीं थी… मैं जा रही हूं… अपनी नई जिंदगी शुरू करो… और हां, इतना भरोसा दिलाती हूं कि अब तुम्हारे इस रुमाल को अपनी बची जिंदगी में दोबारा बदनाम नहीं होने दूंगी.’’

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सागर ने अपनी पलकें तो बंद कर लीं लेकिन उन से आंसू नहीं रुक पाए. सुष्मिता भी अपनी आंखों के बहाव को रोकते हुए तेजी से मुड़ी और दरवाजे की ओर चल पड़ी.                          द्य

चक्कर लड़की का

लेखक- विनोद कुमार

हमारी इस दोस्त मंडली का काम था रोज भांग खाना, सिगरेट और शराब पीना, फिल्में देखना, राह आतीजाती लड़कियों पर फिकरे कसना और उन से छेड़खानी करना.

वैसे मैं शरीफ और पढ़ाईलिखाई से ताल्लुक रखने वाला लड़का था, पर न जाने कैसे इस बुरी संगत में पड़ गया. वैसे अब कुछ याद भी नहीं है.

हम लोग रोज नजदीक के राजेंद्र पार्क में जमा हो कर खूब गप लड़ाते. इधरउधर की डींगें हांकी जातीं.

एक दिन रोजाना की तरह हमारी बैठक चल रही थी. उसी दौरान राकेश बोला, ‘‘यार, आज में ने बहुत खूबसूरत लड़की को फांसा है. वह 16 साल की है. एकदम गोरीचिट्टी, पतली कमर वाली लाजवाब लड़की है. मैं ने उसे क्या फांसा, समझो ऐश्वर्या राय को फांस लिया.’’

‘अच्छा,’ हम तीनों दोस्त चौंक कर उस की बात ऐसे सुनने लगे, जैसे उस ने कोई पते की बात कही हो.

तभी सुनील ने राकेश को चिकोटी काटते हुए कहा, ‘‘और कुछ सुनाओ यार, अपनी चिडि़या के बारे में.’’

इस तरह हमारा दिन कट गया. दूसरे दिन हमारी बैठक हुई तो राकेश फिर अपनी नईनवेली प्रेमिका की तारीफ के पुल बांधने लगा. उस की बातों में हम सब को बड़ा मजा आ रहा था लेकिन जैसे ही राकेश की बात खत्म हुई, सुनील ने एक धमाका किया, ‘‘यारो, हमारी भी सुनो. मेरे पड़ोस की एक लड़की है माया. बड़ी दिलकश है वह. उस के होंठ प्रियंका चोपड़ा की तरह हैं, आंखें ऐश्वर्या राय की तरह और गाल काजोल की तरह.

‘‘आज सवेरेसवेरे उस ने मुझ से करीब एक घंटे बात की. बस, इतनी ही देर में वह मुझ पर मरमिटी है.’’

तभी बड़ी देर से चुप मोहन ने दूसरा धमाका किया, ‘‘तुम लोगों को लड़की फांसने का कोई तजरबा नहीं है. अरे, लड़की फांसने का हुनर तो कोई मुझ से सीखे. आज मैं ने 2-2 लड़कियां फंसाईं. एक सिनेमाहाल के पीछे वाली गली में रहती है और दूसरी शिव मंदिर के पास की कोठी में. दोनों एक से बढ़ कर एक खूबसूरत हैं.’’

मेरे तीनों दोस्त काफी देर से बढ़चढ़ कर अपनीअपनी प्रेमिकाओं का बखान कर रहे थे, पर मैं चुप था. अपनी इस दोस्त मंडली में मुझे बड़ी शर्मिंदगी होती थी क्योंकि मेरी कोई प्रेमिका नहीं थी.

दरअसल बात यह थी कि अगर मेरे दोस्त किसी लड़की पर फिकरे कसते या उस से छेड़खानी करते, तो मैं उन लोगों का साथ दे देता था, पर अकेले में किसी लड़की के साथ ऐसा करना तो दूर, उसे देखने की भी हिम्मत मुझ में नहीं थी.

लिहाजा, मैं ने फैसला कर लिया था कि जब तक किसी लड़की को फंसा कर उसे अपनी प्रेमिका न बना लूंगा, तब तक दोस्तों को अपना मुंह न दिखाऊंगा.

अगले दिन मैं किसी लड़की की तलाश में निकल पड़ा. मैं ने सोचा

कि अच्छे घर की लड़की तो मुझ से फंसने से रही, इसलिए किसी चालू और दिलफेंक किस्म की लड़की की खोज करनी चाहिए.

मैं सारा दिन लड़की की तलाश में भटकता रहा. 2-4 लड़कियां मिली थीं, लेकिन मैं जैसे ही किसी लड़की को देखने की कोशिश करता, तो वह मुझे घूरने लगती. लिहाजा, मैं सकपका जाता और दाल गलती न देख आगे बढ़ जाता.

धीरेधीरे शाम हो गई. तभी एक लड़की देख कर मेरी बांछें खिल गईं. वह चुस्त जींसटौप पहने हुए थी. वह अकेली कहीं जा रही थी. मैं ने सोचा कि जरूर वह दिलफेंक किस्म की होगी. लिहाजा, मैं ने उसे फंसाने की कोशिश शुरू कर दी.

मैं थोड़ा तेज कदम चल कर उस की बराबरी में आ गया और मौका देख कर हौले से उस से टकरा गया. पर वह गुर्रा कर बोली, ‘‘ऐ मिस्टर, तमीज से चलो, वरना मेरी जूती देखते हो न. 5 जूती लगते ही अक्ल ठिकाने आ जाएगी.’’

यह सुनना था कि मैं सिर पर पैर रख कर भागा और सीधा घर आ कर ही रुका. आज मैं अपने दोस्तों के पास नहीं गया. मैं ने सोचा कि अगले दिन जब कोई लड़की पट जाएगी, तभी जाऊंगा.

अगले दिन मैं ने नए सिरे से कोशिश शुरू की. तय किया कि जो लड़की सब से पहले नजर आएगी, उसे तब तक लगातार देखते रहना है, जब तक कि वह दिखती रहे, चाहे इस पर वह खफा हो या खुश. अगर दूसरी तरफ से रजामंदी का संकेत मिलेगा, तो प्यार की पेंगें बढ़ाऊंगा.

मैं कुछ ही दूर गया था कि एक दोमंजिला मकान की बालकनी में एक खूबसूरत सी लड़की को बालों में कंघी करते देखा. मैं वहीं रुक कर उसे लगातार देखने लगा. मेरी इस अदा पर वह भी मुसकराई.

मैं अपनी हथेलियों से चुंबन उछालने लगा. अभी 2-4 चुंबन ही उछाले थे कि लगा जैसे किसी ने मेरी गरदन जकड़ ली हो. मेरी चीख निकल गई. तभी उस ने मुझे जोरदार लात लगाई. मैं औंधे मुंह गिर पड़ा.

मैं कराहते हुए पलटा, तो भयानक मूंछों वाला एक गंजा गुर्रा कर कहने लगा, ‘‘आवारा कहीं का… मेरी बेटी

पर लाइन मारता है. मैं तेरी खाल

खींच लूंगा.’’

मैं किसी तरह लंगड़ाते हुए वहां से भागा. भागतेभागते मैं साइकिल की एक दुकान के पास पहुंचा. वहां एक लड़की अपनी साइकिल में हवा भरा रही थी. वह लड़की ‘छम्मक छल्लो’ की तरह हसीन मालूम पड़ रही थी.

मैं उस के पास पहुंचा और मुसकराते हुए धीरे से कहा, ‘‘हाय मेरी जान, तुम्हारी काली घटा सी जुल्फों में तो गुलाब सी खुशबू है. होंठ इतने रसीले हैं जैसे रसभरी और आंखें इतनी नशीली हैं कि मेरे होश उड़ा दें.’’

इतना कहते ही मेरे सिर पर सैंडलों की बरसात होने लगी. मैं ने गिने, कुल 13 सैंडल मेरे सिर पड़े. आगे की गिनती भूल गया. जब होश आया तो पाया कि साइकिल मिस्त्री अपनी बैंच पर लिटा कर मुझे होश में लाने के लिए मेरे मुंह पर पानी छिड़क रहा था.

मैं सिर सहलाते और कराहते हुए उठा. रहरह कर मुझे चक्कर आ रहे थे. अब मुझ में हिम्मत नहीं थी कि किसी और लड़की को फंसाने की भूल करूं. मैं गिरतेपड़ते घर की ओर चल पड़ा.

मैं यह सोच कर परेशान था कि आखिर अपनी दोस्त मंडली को कैसे अपना मुंह दिखाऊंगा… आखिर मैं ने हार न मानने की ठानी. बहादुर जंग के मैदान में कभी पीठ नहीं दिखाते, पीठ दिखाना तो कायरों का काम है.

अगले दिन मैं भूलेभटके से चाय की एक दुकान पर चला गया. वहां 15-16 साल की एक लड़की चाय पिला रही थी. उसे देख कर मेरी आंखें खुशी से चमक उठीं. मैं ने सोचा कि अगर उस

से प्यार का नाटक करूं, तो शायद कामयाबी मिले. सो मैं ने चाय पीते हुए उस की चाय की खूब तारीफ की और

8 रुपए की जगह 10 रुपए दिए. मेरी यह दरियादिली देख कर वह तो जैसे लाजवाब हो गई.

अगले दिन भी मैं ने यही किया और किसी को न देख अपने प्यार का इजहार कर दिया. वह बिलकुल निहाल हो गई. हालांकि वह मैलाकुचैला सलवारकुरता पहने थी. शक्लसूरत भी कोई खास

नहीं थी.

मैं ने अपने दोस्तों को दिखाने के लिए उस से उस का एक फोटो मांगा,

तो वह बोली, ‘‘फोटो की बात तो दूर,

मैं ने आज तक कोई स्टूडियो भी नहीं देखा है.’’

मैं परेशान हो गया, फिर कुछ सोच कर बोला, ‘‘मेरे साथ फोटो खिंचवाने चलोगी?’’

वह हैरान रह गई, फिर बोली, ‘‘मैं कल तैयार रहूंगी. तुम इसी समय यहीं पर आ जाना.’’

मैं अगले दिन उस चाय वाली के पास पहुंचा, तो वह तैयार थी. उस के साधारण से सलवारकुरते पर सिलवटें देख मैं परेशान हो गया. उस के बाल नारियल तेल से तरबतर थे. उस के पैरों में 2 रंग की चप्पलें थीं. अपनी ऐसी प्रेमिका पर मुझे रोना आ गया.

बाजार में उस के साथ देख कर लोग मुझे क्या समझेंगे. खैर, दोस्तों के बीच अपनी साख बचाने के लिए मुझे सबकुछ मंजूर था.

लोगों की नजर से खुद को बचातेबचाते मैं स्टूडियो गया और आननफानन में लौट आया.

अगले दिन मैं उस के पास गया, तो वह चाय वाली बोली, ‘‘तुम फौरन यहां से भाग जाओ. मेरे भाई पंजाब मजदूरी करने गए थे, कल वे लौट आए हैं. उन्हें हमारे प्यार की भनक मिल गई है. वे लोग तुम्हें आज देखते ही मारेंगे. शायद वे यहींकहीं छिपे हैं.’’

यह सुन कर मेरे हाथपैर ठंडे हो गए. मैं ने फौरन भागना चाहा, पर तभी 2-4 मजदूर किस्म के नौजवान वहां आए और मुझे घेर कर भद्दीभद्दी गालियां देते हुए कहने लगे, ‘हमारी बहन को बहकाता है. आज हम तेरी जवानी का नशा भुला देंगे.’

फिर वे मुझ पर टूट पड़े और मेरी खूब धुनाई की. मैं ‘बचाओबचाओ’ चिल्लाता रहा, फिर कब बेहोश हो गया, पता नहीं चला. होश आया तो खुद को नाली में पाया.

मेरे बदन के हर हिस्से में दर्द हो रहा था. मैं किसी तरह उठा और पास के सरकारी हैंडपंप पर अपने बदन पर लगे कीचड़ को धोया, फिर घर लौट गया. इस के बाद तकरीबन एक महीने तक मैं बीमार रहा.

इस घटना के बाद मैं ने अपने दोस्तों का साथ छोड़ दिया और कान पकड़े कि कभी किसी लड़की को फंसाने की भूल नहीं करूंगा.                         द्य

गायिका बनने के लिए मैं क्या करूं?

सवाल 

मैं गांव के एक छोटे तबके से हूं. मेरी उम्र 17 साल है और मैं कालेज से बीए करना चाहती हूं. अगर मैं साइकोलौजी से औनर्स करूं तो क्या यह मेरे भविष्य के लिए सही रहेगा? वैसे, मैं गाना भी गा लेती हूं. गायिका बनने के लिए मैं क्या करूं?

जवाब

जिंदगी में कुछ भी हासिल करने के लिए लगन जरूरी है. पहले तो यह तय करें कि आप ऊंची तालीम लेना चाहती हैं या फिर गायिका बनना चाहती हैं. अगर पढ़ाई को चुनें तो साइकोलौजी एक अच्छा विषय है और आप इस में कैरियर बना सकती हैं और अगर गायकी को चुनें तो अभी से कोई अच्छा मंच और मुकाम देखें. अपने शहर के नामी आरकेस्ट्रा वालों से मिलें और टैलीविजन शो के औडिशन भी दें, जो अब हर बड़े शहर में होने लगे हैं. लेकिन आप के लिए साइकोलौजी पढ़ना ही बेहतर रहेगा. इस में एमए की डिगरी ले कर कैरियर बनाएं.

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ट्राय करें शक्ति अरोड़ा के कूल कलर स्टाइल

अपनी क्यूट सी स्माइल के कारण लड़कियों के दिल पर राज करने वाले एक्टर और एंकर शक्ति अरोड़ा एक अच्छे एर्टिस्ट के साथ-साथ बेहतरीन इंसान भी है. हमेशा खुश दिखने वाले शक्ति का बनना है की खुश रहने से ना सिर्फ आप अच्छे लगते है बल्कि अच्छा फील भी करेंगे. शक्ति ने “बा बहु और बेबी” में जिगर अरविन्द ठक्कर की भूमिका के साथ अपने एक्टिंग कैरियर शुरू कि.  उन्होंने कामरान के रूप में ‘लेफ्ट राइट लेफ्ट’ में और सुमित के रूप में ‘दिल मिल गए’ में कैमेयो किये. हालांकि, स्टार प्लस पर ‘तेरे लिए’ ने उन्हें काफी सफलता दी. इसमें इन्होंने फीमेल लीड के भाई तापस बिमलेदु बनर्जी की भूमिका निभाई. इसके बाद ‘अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो’ में मुकुल नामक नकारात्मक भूमिका की. ऐसे कई टीवी शोज में शक्ति की एक्टिंग से लोगों के दिल में अलग जगह बनाई. अच्छी एक्टिंग कैरियल के साथ-साथ शक्ति स्टाइल में भी काफी आगे है. उनके फेशन सेंस की सभी जमकर तारीफ करते है इसलिए आज हम लाए है उनके कुछ खास लुक जिसे ट्राय कर आप भी फेशनेबल बन सकते है.

शक्ति को औरेंज कलर से थोड़ा खास लगाव है इस बाद का सबूत है उनकी ये फोटोज.

औरेंज ब्रेजर ट्राय कर दिखे क्यूट

शक्ति के इस लुक की बात करें तो औरेंज ब्रेजर उनपर काफी सूट कर रहा हैं. लोग अमुमन तौर पर रेगुलर कलर जैसे ब्लैक और ग्रे ही लेते है पर अगर आप थोड़ा फेंसी और कलरफूल ट्राय करना है तो औरेंज कलर काफी अच्छा ओपशन है.

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शक्ति की औरेंज टी-शर्ट लुक

अगर आप कुछ कूल ट्राय करना चाहते है तो औरेंज टी-शर्ट विद वाइट ट्राउजर जरुर ट्राय करें. औरेंज कलर की ये क्वालिटी है की वो फौर्मल और केजुअल दोनों में काफी जचता है. इसे ना सिर्फ किसी पार्टी बल्कि औपिस में भी ट्राय कर सकते है.

शक्ति का हुडी लुक

सर्दी आने वाली है ऐसे मौसम में थोड़ा ठंड़ा पन आ जाता है. हुडी फेशन के मामले में काफी अच्छा आउटफिट है क्योंकी ये किसी भी मौसम के लिए परफेक्ट है. और शक्ति की तरह आप भी अगर औरेंज कलर हुडी ट्राय करना चाहते है तो आप और स्टाइलिश लगेंगे.

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सोशल मीडिया से जुड़ने को फायदेमंद क्यों मानती हैं करिश्मा शर्मा

मगर हाल ही में आई फिल्म ‘‘सुपर 30’’के एक गीत में रितिक रोशन के साथ नजर आ रही अदाकारा करिश्मा शर्मा ऐसा नहीं मानती हैं. वह तो सोशल मीडिया को बहुत ही फायदेमंद बताती हैं.फिल्म ‘‘सुपर 30’’ के प्रदर्शन के बाद जब करिश्माशर्मा से हमारी एक्सक्लूसिब मुलाकात हुई, तो सोशल मीडिया की चर्चा चलने पर उन्होंने कहा-

‘‘मेरे लिए सोशल मीडिया बहुत लाभप्रद साबित हो रहा है. सोशल मीडिया से मेरे करियर को भी फायदा हो रहा है.हम सोशल मीडिया पर बहुत सी चीजों को प्रमोट करते हैं. अब जब कि मैं अच्छे चुनौतीपूर्ण किरदारों को पाने के लिए इंतजार करना चाहती हूं, तो मैं इस बात को सोशल मीडिया से लोगों तक पहुंचा सकती हूं. इस इंतजार के दौरान मैं अपनी किसी पोषाक, अपने डांस के किसी फार्म को प्रमोट कर रही हू या घूमने जा रही हूं. मैं    मालदीव घूमने गयी, मेरी यह ट्पि ‘स्पांसर्ड ट्पि’थी. सारा खर्च वहां की सरकार ने उठाया था. मुझे एक दुनिया देखने का मौका मिला. तो मुझे सोशल मीडिया से कई तरह के अवसर मिल रहे हैं.’’ विदेशों में घूमने व अच्छे कपड़े पहनने का अवसर

करिश्मा शर्मा आगे कहती हैं-ं

‘‘सोशल मीडिया की लोकप्रियता के चलते हुए विदेषों में घूमने अच्छे अच्छे कपडे पहनने के मौके मिल रहे हैं, मेरी एक सहेली तो टोवेल ब्लौगर है. वह तो फ्रांस,प्राग सहित कई जगह मुफ्त में घूम कर आ चुकी है. किश्वर मर्चेंट भी कई देषों की स्पांसर्ड ट्पि कर चुकी हैं. अब तो टीवी सीरियल और वेब सीरीज में भी कलाकारों को यह देखकर काम मिल रहा है कि इंस्टाग्राम पर उनके फौलोवर्स कितने हैं?’’

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ज्यादा एक्सपोज नहीं

करिश्मा कहती हैं-

‘‘पर मैं अपने आपको बहुत ज्यादा एक्सपोज नहीं करती. क्योंकि मेरा मानना है कि कलाकार अपने बारे में जितनी मिस्ट्री बनाकर रखेगा, उतना ही लोग उसकी फिल्म को देखने जाएंगे. इसीलिए मैं रियालिटी शो नहीं करती. सोशल मीडिया पर हम सीमित चीजें ही डालते हैं.’’

सोशल मीडिया के फायदे ही फायदेः

सोशल मीडिया के फायदे गिनाते हुए करिश्माशर्मा कहती हैं-ं ‘‘सोशल मीडिया हमें फायदा देता है.यदि आप किसी को नही पहचानते हैं,तो आप सोशल मीडिया में उसे तलाश कर उसके बारे में जानकारी पा सकते हैं.विदेश में रहने वाली कैली जेन्नर के 144 मिलियन फौलोवर्स हैं.उसका अपना प्रायवेट जेट है. उसने यह सारा पैसा सोशलमीडिया से ही कमाया है.मेरी नजर में पैसा कमाने के लिए सोशल मीडिया बहुत बड़ा प्लेटफार्म है. ’’

हौट बौडी के चलते हौट इमेज

करिश्माशर्मा स्वयं सोशल मीडिया व इंस्टाग्राम पर जिस तरह की तस्वीरें पोस्ट करती हैं,उसी के चलते उनकी ईमेज हौट व सेक्सी बनी हुई है,जबकि वह इस ईमेज के विपरीत किरदार निभना चाहती हैं. इस पर करिश्मा शर्मा कहती हैं-

‘‘मैंने जान बूझकर अपनी हौट व सेक्सी इमेज बनाने के लिए इस तरह की तस्वीरें नहीं डाली. अब मैं पिछले दिनों मालदीव घूमने गयी थी. मालदीव में आपने किसी को सलवार सूट पहने हुए देखा है?

तो जब मैं मालद्वीप घूमने जाउंगी,तो वहां के बीच पर बिकनी ही पहनूंगी. स्वाभाविक तौर पर वही तस्वीरें इंस्टाग्राम पर डालूंगी. अब यदि मेरी बौडी हौट है, तो बिकनी वाली तस्वीरों में मैं हौट लगूंगी. इसमें मेरा क्या दोष?’’

वह आगे कहती हैं-ंउचय‘‘तमाम अभिनेत्रियां जहां घूमने जाती हैं,वहां की तस्वीरें डालती हैं.मेरी सम-हजय में यह नहीं आता कि लोगों को क्यों लगता है कि मैं अपनी हौट बौडी या अपने सेक्सी होने को प्रमोट करती हूं. मैं फिर से यही कहूंगी कि मैं जान बूझकर या किसी सोची सम-हजयी योजना के तहत अपने आपको हौट या सेक्सी प्रचारित नहीं कर रही हूं. बहरहाल,मैं तो अलग तरह के किरदार निभाना चाहती हूं, जिससे लोगों को लगे कि मैं कुछ और भी कर सकती हूं.’’

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मूलतः पटना निवासी करिश्मा शर्मा ने 2013 में सीरियल‘‘पवित्र रिश्ता’’से अभिनय करियर की शुरूआत की थी. बाद में ‘प्यार तूने क्या किया’,‘यह है मोहब्बतें’,‘लव बाय चांस’,‘आहत’, ‘सिलसिला प्यार का’सीरियलों में अभिनय किया. 2015 में फिल्म‘प्यार का पंचनामा 2’में छोटा सा किरदार निभाया.पर उन्हे असली पहचान मिली 2017 में वेब सीरीज‘‘रागिनी एमएमएस रिटर्न’’से.फिर वह वेब सीरीज ‘हम-ंउचयआई एम बिकाज आफ अस’में नजर आयी.2018 में प्रदर्शित फिल्म ‘होटल मिलन’ व 2019 में प्रदर्शित फिल्म ‘फंसते फंसाते’ में वह मेनलीड में नजर आयी. अब वह रितिक रोशन की फिल्म ‘‘सुपर 30’’में महज एक गाने ‘‘पैसा’’ में नजर आयीं.इन दिनों वह सोहम शाह के निर्देशन में वेब सीरीज ‘‘फिक्सर’’कर रही हैं,जिसमें उनके साथ तिग्मांषु धुलिया,शब्बीर अहलूवालिया और माही गिल हैं.

 

Edited By- Neelesh Singh Sisodia 

‘‘मुझे संगीत में गंदगी पसंद ही नहीं है.’’-जसबीर जस्सी

जसबीर जस्सी के 1988 के लोकप्रिय गीत ‘‘दिल ले गयी कुड़ी’’को 2017 में फिल्म‘‘स्वीटी वेड्स एनआर आई’’ में रीक्रिएट किया गया था और अब 2 अगस्त को प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘‘खानदानी शफाखाना’’में जसबीर के गीत‘‘कोका’’को रीक्रिएट किया गया है. इस बार ‘कोका’को रीक्रिएट किया है संगीतकार तनिस्क बागची ने. जबकि गाया है जसबीर जस्सी ने ही. सूफी संगीतज्ञ पूरण शाह कोटी और वीएस जोली से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेने वाले जसबीर जस्सी बचपन में ही हारमोनियम बजाने लगे थे. पंजाब के गुरूदासपुर में जन्में जसबीर जस्सी ने उस्ताद षौकत अली खान व बाबा कश्मीरा सिंह जी से भी संगीत की शिक्षा हासिल की. जसबीर जस्सी का पहला पंजाबी संगीत अलबम ‘‘चन्ना वी तेरी चाननी’’1993 में आया था. उसके बाद ‘‘बल्ले बलबीरो बल्ले’’,‘‘दिल ले गयी’’,‘‘कुड़ी कुड़ी’, ‘‘निशानी प्यार दी’’, ‘‘जस्त जस्सी’’, ‘‘मुखड़ा चन्न वरगा’’, ‘‘अख मस्तानी’’, ‘ब्लैक विथ द बैंग’’, ‘शहीद भगत सिंह’’,  ‘‘सावन’’, ‘‘शुभान अल्लाह’’और ‘‘तेरी याद’’ उनके बहु चर्चित संगीत अलबम हैं.पंजाबी फिल्म‘मेल करा दे रब्बा’और ‘मुंडे यू के दे’ के गीतों ने तो लोकप्रियता के परचम लहराए. बौलीवुड में उन्होंने 2011 में प्रदर्शित अक्षय कुमार की फिल्म ‘‘पटियाला हाउस’’में गीत ‘‘लौंग द लश्कारा’’ गाकर शुरूआत की. जिसने संगीत जगत में एक नए इतिहास को रचा था. उसके बाद तनूजा चंद्रा निर्देशित फिल्म ‘‘होप एड ए लिटिल सुगर’में गीत ‘माहिया’गाया.

इसके बाद फिल्म‘‘दोबारा’के लिए गीत ‘‘प्यार मेरे नु’ को लिखने के साथ संगीत से संवारा और स्वरबद्ध भी किया. जसबीर जस्सी सिर्फ संगीत तक ही सीमित नहीं है. उन्होंने अभिनय भी किया है. पंजाबी फिल्म ‘खुशिया’ में टिस्का चोपड़ा, कुलभू-ुनवजयाण खरबंदा व रमा विज के साथ अभिनय किया.फिल्म‘हीर रां-हजया’में गेस्ट अपियरेंस किया.पंजाबी टीवी पर रियालिटी शो के जज बनकर आए.इतना ही नही जसबीर जस्सी ने 2012 में ‘कान्स इंटरनेषनल फिल्म फेस्टिवल’मे भी संगीत की परफार्मेंस दी थी. हाल ही में मुंबई में जसबीर जस्सी से रीक्रिएटेड गीत ‘‘कोका’’ के अलावा संगीत में फैली हुई गंदगी सहित कई मुद्दों पर एक्सक्लूसिब बातचीत हुई. जो कि इस प्रकार रही….

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इन दिनों हिंदी फिल्म‘‘खानदानी शफाखाना’’ का रीक्रिएटेड गाना‘‘कोका’’काफी लोकप्रिय हो रहा है.इसके बारे में क्या कहना चाहेंगे?

मेरा पंजाबी का अति लोकप्रिय गाना है, जिसे 16 साल पहले पंजाबी में मैने ही संगीत से संवारा और मैंने ही गाया था.अब इसे संगीतकार तनि-ुनवजयक बागची ने कुछ बदलाव कर रीक्रिएट कर मुझे गवाया है. जो कि हिंदी फिल्म ‘खानदानी शफाखाना’में सोनाक्षी सिन्हा, बादशाह,प्रियांषु जोरा व वरूण षर्मा पर फिल्माया गया है.यह पंजाबी टशन वाला दमदार जोषीला गाना है.यह गाना लोगों को नाचने पर मजबूर करता है.यह बहुत ही अलग तरह का डांसिंग नंबर है.गाना तो बाजार में आ गया है और ‘यू ट्यूब’पर लोग इसे काफी पसंद कर रहे हैं. इस गाने को जो लोकप्रियता मिल रही है, उसका फायदा फिल्म को बौक्स आफिस पर भी मिलेगी.

आप तो गीतों के रीक्रिएशन व रीमिक्स के काफी खिलाफ हैं?

हां! मैं कभी नही चाहता कि किसी भी क्लासिक व लोकप्रिय पुराने गीत कोरीमिक्स किया जाए. अमूमन रीक्रिएट गाने सही नहीं बनते हैं,इसलिए मैं रीक्रिएशन के खिलाफ रहता हूं. पर संगीतकार तनिस्क बागची ने ‘कोका’ को रीक्रिएट करते हुए बहुत अच्छा काम किया है. उन्होने इस गाने की मौलिक मैलोडी को बरकरार रखा है. मैं ने इसे संगीत से संवारने के साथ ही खुद ही आज से सोलह साल पहले गाया था. तब से यह गाना लोगों की जुबान पर है.उस वक्त जो पंद्रह साल के थे,वह अब 31 साल के हो गए.पर नई पी-सजय़ी भी इस गाने को पसंद कर रही है. पंजाबी में जब गाना हिट हो और वह बौलीवुड में रीक्रिएट होता है,तो उसका असर पड़ता है. फिर इस गाने को लोकप्रिय कलाकारों पर फिल्माया गया है.मेरे लिए सुखद बात यह है कि जब मेरा ‘‘कोका’’ जैसा गीत पंजाबी के बाद बौलीवुड में भी हिट होता है,तो मुझे कुछ और अच्छे गाने बनाने की प्रेरणा व नया जोष मिलता है.

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बौलीवुड संगीत को लेकर क्या कहना चाहेंगे?

उस वक्त बौलीवुड संगीत में कई तरह के संगीत मिक्स हो चुके हैं.फिर चाहे वह पंजाबी संगीत हो या फोक संगीत हो या उत्तर भारत के का क्षेत्रीय संगीत हो. बौलीवुड के संगीतकार फोक संगीत का अपने तरीके से उपयोग कर रहे हैं. वास्तव में पंजाबी हो दूसरा क्षेत्रीय संगीत हो, उसे बौलीवुड से जुड़कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की राह मिल रही है. इसलिए कई तरह का संगीत बौलीवुड में मिक्स हो रहा है.लोग बौलीवुड संगीत को पसंद कर रहे हैं.यह अच्छी बात है.इससे संगीत की रीच ब-सजय़ रही है,यह भी अच्छा है. मगर रचनात्मक,गंभीर,संगीत की अच्छी सम-हजय रखने वाले, मौलिक संगीत को समझने वाले मेरे जैसे भरे हुए लोगों का बौलीवुड से जुड़ना बहुत आवश्यक है. अफसोस ऐसा नहीं हो पा रहा है.

आप पंजाबी संगीत को किस मुकाम पर पाते हैं?

आप ओ पी नैय्यर के जमाने से देख लें, पंजाबी संगीत तो हमेशा लोकप्रियता के शिखर पर रहा है. पंजाबी संगीत में कोई मिलावट नहीं है.पंजाबी संगीत को कभी किसी से खतरा नहीं रहा.क्योंकि पंजाबी संगीत में बहुत जिंदगी है. जीवंतता है. पंजाबी संगीत में वेराइटी मिलती है.पंजाबी संगीत आपको चिअर करने, उदास होने, खुश होने,डांस करने,रोमांटिक होने, अग्रसिब होने,स्प्रिच्युअल होने का अवसर देता है. हकीकत यह है कि अभी तक पंजाब का दस प्रतिशत संगीत ही बाहर आया है.

बौलीवुड तो उपरी सतह का पंजाबी संगीत लेकर ही खुश है. अतीत में भी पंजाबी संगीत के मुकाबले बौलीवुड संगीत की सीडी या कैसेट कभी नही बिके. इसकी क्या वजहें रहीं?

अब डिजिटल पर भी पंजाबी संगीत ही हावी है.जैसा कि मैने पहले कहा कि पंजाबी संगीत जीवंत है.लोगों को जिंदगी व जीवंतता ही चाहिए.पंजाबी लोग अलग तरीके से जिंदगी जीेते हैं,उन्हे उस तरह की अच्छी ंिजंदगी जीने वाला रस पंजाबी संगीत में ही मिलता है.

आपके लिए संगीत क्या है?

संगीत तो मेरे दिल में दबी हुई ऐसी आग है,जो कि बाहर निकलने के लिए उबाल लेती रहती है.मेरी नजरों में संगीत एकता का प्रतीक है.संगीत तो लोगों को एक साथ प्रेम भाव से रहना सिखाता है.मैं आधुनिक हूं, मगर अश्लील नही हूं मुझे संगीत में गंदगी पसंद ही नही है. मैं पंजाबी की ही तरह बौलीवुड में भी साफ सुथरे कर्णप्रिय गाने ही परोसना चाहता हूं मेरी कोशिश रहेगी कि दूसरे लोग जो गंध फैला रहे हैं, उससे मैं खुद को बचाकर रखूं.

अभी कुछ दिन पहले ही यो यो हनी सिंह ने गीत ‘‘मखाना’’ गाया है,जिस पर पंजाब महिला आयोग ने आपत्ति जताई और उसके कहने पर पुलिस ने ओ ओ हनी सिंह के खिलाफ एफआरआई लिखी है.इस पर क्या कहना चाहेंगे?

हनी सिंह ने बहुत गलत किया है.मैं तो चाहूंगा कि उसे प्रतिबंधित करने के साथ ही दंड दिया जाना चाहिए.मैने संगीत में गंदगी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट व मंत्रालय में अर्जियां भेजी हैं.मैं तो उसे कल्चरल क्रिमिनल मानता हूं. मैं सोचता हूं कि हनी सिंह को पता भी नहीं चलता होगा कि वह क्या बोल रहा है. उसने कहा हैं ‘आई एम ओमनाइजर’. पर मेरा मानना है कि बेडरूम की बातों व चीजों को बाहर थोड़े ही लाना होता है.अगर वह ओमनाइजर है,तो उसे खुलेआम बकने की क्या जरुरत है.‘ओमनाइजर’का मतलब है कि आप समाज के एक तबके को नुकसान पहुंचा रहे हो. इस देष में कई लोग ओमनाइजर होंगे,पर वह दूसरों को ऐसा करने के नही कहते.इस तरह का प्रचार नही करते. जब हम सिगरेट पीते हैं, तो सिगरेट पीने का प्रचार नहीं करते.सिगरेट पीने वाला गाने या वीडियो के माध्यम से टीवी या फिल्म में आकर नहीं कहता कि देखो मैं सिगरेट पी रहा हूं. शराब पीते हैं या नशा करते हैं, तो वह खुलेआम दूसरों से ऐसा करने के लिए नहीं कहते.हनी सिह बहुत बड़ा स्टार है. उसका एक एक लफ्ज मायने रखता है. उसका एक एक शब्द समाज के लिए कितना नुकसान देह हो सकता है, इसका ख्याल तो उसे रखना ही चाहिए. हमारी सरकार कितनी सहनषील है कि वह कल्चरल क्रिमिनल को भी खुलेआम सड़क पर घूमने दे रही है.कल्चरल क्रिमिनल को छोड़ना ही नहीं चाहिए,ऐसे अपराधी को पकड़कर जेल में ठूस देना चाहिए.पर हमारी सरकार ऐसे कल्चरल क्रिमिनल को सजा नहीं देती, यह हमारे लिए बहुत बड़ी षर्म की बात है. देखिए,हनी सिंह और दूसरे रैपर्स पश्चिमी सभ्यता में डूबकर हमारे देष में

रैप क्रांति लेकर आए हैं. वह अश्लील गीतों के मसले पर पष्चिमी सभ्यता का अनुकरण कर रहे हैं.पर वह भूल जाते हैं कि हमारी सभ्यता व संस्कृति तथा पष्चिमी देषों की सभ्यता व संस्कृति में जमीन आसमान का अंतर है..

इस तरह के लोगो को रोकने और पंजाबी संगीत को गंदगी से बचाने के लिए आप किस तरह का काम करते हैं?

मैं तो बहुत कुछ करता रहता हूं. सबसे पहले मैं खुद इस बात का ध्यान रखता हूं कि मेरे गीत व संगीत में गंध/गंदगी न हो.मैंने इस तरह की गंदगी व कल्चरल क्रिमिनल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जियां डाल रखी हैं. मैने सूचना व प्रसारण मंत्रालय के साथ साथ संास्कृतिक मंत्रालय को भी पत्र लिखे हैं.पर मेरा अनुभव कहता है कि इन मंत्रालयों व सरकार का इस तरह के अपराधों की तरफ कोई ध्यान ही नही है.जिस तरह फिल्म व संगीत इंडस्टी को सिर्फ लोकप्रियता से मतलब होता है, उसी तरह राजनीति/राजनेता को सिर्फ अपनी लोकप्रियता से मतलब होता है.

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तो आप मानते हैं कि संस्कृति को बिगाड़ने में राजनीति का बहुत बड़ा योगदान होता है?

मैं यह नहीं कहता कि संस्कृति को बिगाड़ने में राजनीति भी जुड़ी होती है.बल्कि मेरा मानना है कि उन्हे इसकी अवेयरनेस नहीं होती है.राजनेता संस्कृति को बिगाड़ना नहीं चाहते.पर उन्हे इस बात की जानकारी नहीं होती है. उन्हे लगता है कि यह बहुत छोटा काम है.पर उन्हें यह नहीं पता कि कल्चर और भा-ुनवजयाा बर्बाद हो गयी,तो देष व दुनिया को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता.

हिंदी में कोई और गाने कर रहे हैं?

सजयेर सारे गाने गा रहा हूं. ‘बैंड आफ महाराजा’ में हिंदी गाना ही गाया है.

Edited By- Neelesh Singh Sisodia 

छत्तीसगढ़ की राजनीतिक बिसात

आज की हमारी इस रिपोर्ट में डॉ. चरणदास महंत की राजनीतिक दौड़ में बार-बार पिछड़ने की समीक्षा करना चाहेंगे . लाख टके का सवाल यह है कि डॉ. चरणदास महंत छत्तीसगढ़ के मोस्ट सीनियर राजनेता होने के बाद मुख्यमंत्री की दौड़ में पीछे क्यों रह जाते हैं . और भविष्य में क्या वे अर्जुन के मानिदं लक्ष भेदने के अनुसधांन में नहीं लगे हुए हैं . छत्तीसगढ़ की राजनीतिक फिजा को महसूस करें तो आज भूपेश बघेल के पश्चात ताम्रध्वज साहू, टी.एस. सिंहदेव मुख्यमंत्री पद की दौड़ में है मगर डॉ. चरणदास महंत की दौड़ भी जारी है और ऐसा तथ्य बताते हैं कि उन्होंने अपनी स्थिति धीरे-धीरे ही सही मजबूत बनाई है इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण अपनी बेगम श्रीमती ज्योत्सना को सांसद चुनाव में विजयी बनाकर भी है . आज हम इस रिपोर्ट में डॉक्टर चरणदास का भविष्य और राजनीतिक कद को समझने का प्रयास करेंगे .

कौन कछुआ कौन खरगोश

छत्तीसगढ़ की राजनीति की नब्ज को समझने वाले जानते हैं कि डा. चरणदास महंत को छत्तीसगढ़ की राजनीति में नकारना असंभव है .1987 में आप पहली दफे विधायक बने और सीधे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने आपको राज्य कृषि मंत्री बनाया था .तब से अपनी 30 सालों की राजनीतिक यात्रा में डाक्टर चरणदास ने संघर्ष झैला है कभी अर्श पर रहे कभी फर्श पर मगर उन्होंने राजनीति के मैदान में अपनी अमिट छाप छोड़ी और प्रदेश भर में समर्थकों की भीड़ जोड़ी दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री बने तो आप जनसंपर्क मंत्री, आबकारी मंत्री और गृह मंत्री भी बने . दिग्विजय सिंह ने ही डॉ चरणदास को संसद की टिकट दी और मध्य प्रदेश की राजनीति से रुखसत कर सांसद बनवाया फिर हारे फिर जीते फिर हारे और यूपीए-2 में केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बन कर सोनिया और राहुल गांधी के प्रियपात्र बन गए . डॉ . चरणदास अपने मृदु व्यवहार और पारखी नजर के बूते छत्तीसगढ़ में अपनी अलग ही बखत रखते हैं इससे उनके विरोधी भी इंकार नहीं करते .

छत्तीसगढ़ के मोस्ट सीनियर लीडर

डाक्टर चरणदास महंत छत्तीसगढ़ में मोतीलाल वोरा के पश्चात नि:संदेह मोस्ट सीनियर राजनेता है . आप सीधे मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे मगर इसलिए चुक गए क्योंकि भूपेश बघेल और टी.एस.सिंहदेव के नेतृत्व में चुनाव हुए थे डॉक्टर महंत को भी केंद्र ने जिम्मेदारी दी थी वे चुनाव संयोजक थे . जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ कांग्रेस से किनारा कर के चले गए तो डॉक्टर चरणदास महंत का वजन बेहद बढ़ गया . इधर जब वे सांसद चुनाव हार गए और दुर्ग से ताम्रध्वज साहू सांसद बन दिल्ली पहुंचे तो उनकी कद्र बड़ी . मगर चरण दास लगे रहे और निष्ठा से छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ताओं को टटोलते रहते क्षेत्र में पहुंच उत्साहवर्धन करते रहते . यही कारण है कि सक्ति विधानसभा से स्वयं भारी मतों से जीत गए वहीं अपनी धर्मपत्नी जो ज्योत्सना महंत को कोरबा लोकसभा से सांसद भेजने में ऐतिहासिक विजय प्राप्त की . यह ऐसा दांव था जो डॉक्टर महंत पर भारी पड़ सकता था अगर श्रीमती चुनाव हार जाती तो डॉक्टर चरणदास राहुल गांधी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहते मगर अपनी सधी हुई राजनीतिक चाल से उन्होंने छत्तीसगढ़ में अपनी पैठ जबरदस्त रूप से बनाई .

ज्योत्सना महंत की जीत का अर्थ

डा चरणदास महंत की बेगम ज्योत्सना महंत के लोकसभा चुनाव में विजयी होने से विपक्ष भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस में उनके विरोधियों के हाथों के तोते उड़ गये . जी हां यह सच है ज्योत्सना महंत अस्वस्थ रहती है राजनीति से कोई मतलब नहीं मगर आपने चुनाव जीत कर दिखा दिया की राजनीति में सिर्फ चेहरा ही सब कुछ नहीं मैनेजमेंट भी कोई चीज होती है .

ज्योत्सना महंत चुनाव में मौन मौन रही अभी भी डा. चरणदास की छाया की तरह उन्हें आगे बढ़ा रहे हैं मगर यह जीत छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल लेकर आई है . क्योंकि भूपेश बघेल मुख्यमंत्री रहते टी.एस.सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू कैबिनेट मंत्री रहते जो कारनामा नहीं दिखा पाए डा चरणदास ने विधानसभा अध्यक्ष रहते संवैधानिक पद की गरिमा की रक्षा करते हुए कर के दिखा दिया . अब इस खरगोश- कछुआ दौड़ में आगे क्या हो सकता है आप स्वयं अनुमान लगा सकते हैं भूपेश बघेल के नेतृत्व क्षमता पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगा सकता उन्होंने अपना काम बखूबी किया है मगर डॉक्टर चरणदास की पैठ अनेक चेहरो पर शिकन खींच चुकी है यह छत्तीसगढ़ की राजनीति की सच्चाई है .

Edited By – Neelesh Singh Sisodia  

प्रकृति के बीच अप्राकृतिक यौन संबंध

अप्राकृतिक यौन संबंध चिंरतन काल से होते रहे है. यही कारण है कि विधि में इसके सहमति और असहमति को देखते हुए सुस्पष्ट प्रावधान किया हुआ है. अप्राकृतिक योन अर्थात एक ऐसा मनोविज्ञान जो अपने साथी की और एक अलग नजरिए से आकर्षित करता है. इसे लेकर योन- शास्त्रों में भी चर्चा की गई है. लेकिन सार भूत तथ्य यही है कि यह एक बीमारी की जड़ है और इससे बचना चाहिए, मगर इसके बावजूद आम जनमानस में अप्राकृतिक योन के किस्से उजागर होते रहते हैं.कभी किसी शख्स पर या धारा 377 लगाकर हवालात में बंद कर दिया जाता है. हद तो तब हो जाती है जब कभी कोई पत्नी ही पुलिस थाना पहुंच मामले की रिपोर्ट लिखाती है. आखिर यह अप्राकृतिक यौन संबंध का सच क्या है, यह हमें समझना चाहिए.

पति पत्नी और अप्राकृतिक संबंध!

पति-पत्नी के बीच विवाद होना आम बात है. लेकिन छत्तीसगढ़ बालों जिला के डौंडी थाने में एक ऐसा मामला हाल ही में सामने आया है, जिसे सुनकर आप चौक जाएंगे. यहाँ महिला ने अपने पति पर अप्राकृतिक सेक्स करने का आरोप लगाया है. पति के इस उत्पीडन से तंग आकर पत्नी ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है. जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया . पुलिस के अनुसार युवती की शादी एक साल पूर्व डौंडी थाना क्षेत्र के युवक डुमेश्वर गावडे पिता वीर सिंह गावडे से हुई थी. महिला का कहना है कि शादी के कुछ दिनों तक तो सब ठीक था. उसके बाद पति ने उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाने पर दबाव डालने लगा. मना करने पर उसके साथ मारपीट की गई. काफी दिनों से वह इस यौन उत्पीड़न से गुजर रही थी.लाख समझाने की कोशिश की, लेकिन नहीं माने और मारपीट कर जबरन अप्राकृतिक सेक्स करता रहा. एक दिन उसने हद ही कर दी. पति की ज्यादती बर्दाश्त से बाहर हो गई तो 18 जुलाई की शाम महिला डौंडी कोतवाली पहुंची और अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई.पीड़िता ने महिला पुलिस को सारी बातें बताई और कठोर कार्रवाई की मांग की. महिला की शिकायत पर पुलिस ने पति के खिलाफ आइपीसी की धारा 376, 377, 323, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस ने आरोपी पति को गांव से गिरफ्तार कर लिया.
ऐसे जाने कितने सच्चे झूठे किस्से हमारे बीच मीडिया के माध्यम से आते जाते रहते हैं. विधि औचित्य की परिप्रेक्ष्य में ऐसे मामलों को देखना समझना होगा.

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अप्राकृतिक योनाचारी हमारे बीच भी हैं!

हमारे शहर में लगभग 40 वर्ष पूर्व एक सुमित्रर सिंह नामक शख्स हुआ करता था.वह पैसे देकर युवकों से अप्राकृतिक संबंध बनाया करता था. शहर में यह चर्चा रहती थी कि देखो! सुमित्रर सिंह आ रहा है…. हंसी मजाक में लोग एक दूसरे को छेड़ा करते थे और बताया करते थे कि यह शख्स अप्राकृतिक यौन संबंध बनाया करता है. इससे बचकर रहना. ऐसे ही सख्त सुमित्रर सिंह अरे शहर कस्बों में रहते हैं, यह एक अलग मनोविज्ञान है एक अलग मानसिक बनावट अथवा इसे बीमारी कहा जा सकता है. मगर ऐसे लोग हमारे बीच होते हैं यह एक बड़ी सच्चाई है यही शख्स जब एक से दो हो जाते हैं तो एक दूसरे का साथ देते हुए जीवन काटने का अवलंबन स्वीकार कर वैवाहिक बंधनों में भी बंध जाते हैं. जिन्हें आजकल समलैंगिक संबंध कहा जाने लगा है .अब देश की उच्चतम न्यायालय और हमारी सरकार ने भी इसे जायज ठहरा दिया है. जब यह संबंध सहमति से बनते हैं तो कानून अपने हाथ खड़े कर लेता है.
छत्तीसगढ़ के बार काउंसिल के अनुशासन समिति के अध्यक्ष बीके शुक्ला बताते हैं ऐसे मामलों में प्रतिरोध होने पर विधि-विधान में इसके लिए दंड की सजा निर्धारित है.

धारा का होता है दुरुपयोग भी!

इस लेखक के एक परिचित मित्र की धर्मपत्नी में तलाक लेने के लिए पति पर ऐसा दबाव बनाया कि आप भी असमंजस में रह सकते हैं…. जी हां! पत्नी ने बकायदा थाना,कोर्ट में यह कहा कि मेरे साथ अप्राकृतिक यौन संबंध मेरा पति बनाता है। महिला पति से बेजार थी व छुटकारा पाना चाहती थी. इसके लिए उसने अप्राकृतिक संबंधों की धारा 377 का दुरुपयोग करने का पूरा प्रयास किया. मगर सुखद तथ्य यह की पीड़ित पति पुलिस प्रशासन और न्यायालय दोनों ही जगह से एक तरह से बाल-बाल बच गया. यह एक ऐसी धारा है जिस का दुरुपयोग भी होता है और यह एक सच्चाई भी है अब यह पुलिस एवं न्यायालय पर निर्भर है क्या फैसला होगा. अगर आप बेगुनाह है तब भी यह धारा आप का मान मर्दन तो कर ही देती है. शातिर वकील, पुलिस एवं लोग इसका भरपूर दुरूपयोग करते रहते हैं. अपने विरोधियों को निपटाने के लिए धारा 377 इस्तेमाल करते हैं ,चाहे भले वह मामला कोर्ट में वर्षों घिसटने के बाद हो जाए. अधिवक्ता उत्पल अग्रवाल बताते हैं धारा 377 का इस्तेमाल अक्सर विरोधियों को निपटाने के लिए किया जाता है. ऐसा ही एक मामला हमारे कोर्ट में भी आया था जिसमें एक श्रमिक नेता ने कोल इंडिया के एक अधिकारी को फंसाने के लिए 377 धारा का मामला दर्ज कराया था. जिसकी शहर में बड़ी चर्चा थी. पुलिस प्रशासन भी जानता था की पेंच कहां है,मगर मामला पंजीबद्ध हुआ और न्यायालय में प्रस्तुत किया गया. दरअसल यह धारा ब्रिटिश शासन काल से1861 से विद्यमान रही है. इसका स्वरूप बदलता रहा है. कभी यह पूर्णता दंडनीय स्वरूप में रही है मगर 2018 के बाद सरकार ने इसे दो वयस्कों के बीच सहमति पर विधिवत मुहर लगा दी है कि यह अपराध नहीं है. इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर आज भी तलवारें खिंची हुई है और लोग पक्ष विपक्ष में अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत कर रहे हैं. आप भी सोचिए और देखिए आप किस तरफ है.

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Edited By- Neelesh Singh Sisodia 

सिद्धू सरकार से बाहर : क्या बड़बोलापन जिम्मेदार?

इस अहम की लड़ाई में सिद्धू मोहरा बन गए. यह जंग दिल्ली दरबार तक भी पहुंची और 15 जुलाई को इस्तीफे की शक्ल में बाहर आई. नवजोत सिंह सिद्धू ने 15 जुलाई, 2019 को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को अपना इस्तीफा भेज दिया था और उन्होंने पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनोर को यह इस्तीफा भेज दिया.

कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच विवाद 14 जुलाई को उस समय गहरा गया था, जब सिद्धू ने नवीन एवं नवीनीकरण ऊर्जा स्रोत मंत्रालय लेने से मना कर दिया था. सिद्धू ने इस्तीफे में लिखा है, ‘मैं पंजाब मंत्रिमंडल के मंत्री पद से इस्तीफा देता हूं.’

ट्विटर पर अपना इस्तीफा पोस्ट करते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट किया कि मेरा इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पास 10 जून, 2019 को पहुंच गया था. पर मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा यह बताने के बाद कि सिद्धू का इस्तीफा नहीं मिला है तो सिद्धू ने ट्वीट किया कि पंजाब के मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा भेजूंगा.

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6 जून को मंत्रिमंडल के पुनर्गठन में नवजोत सिंह सिद्धू से स्थानीय सरकार, पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों का विभाग ले कर उन्हें नए और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मंत्रालय दे दिया था, पर उन्होंने कामकाज संभालने से मना कर दिया था.

हालांकि नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच विवाद में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने दखल दिया तो उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा मंजूर नहीं किया था.

नवजोत सिंह सिद्धू फिर से कैबिनेट में स्थानीय निकाय विभाग मांग रहे थे, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह किसी भी कीमत पर उन्हें यह विभाग देने को तैयार नहीं हुए. 40 दिनों के बाद भी सिद्धू ने ऊर्जा विभाग का कामकाज नहीं संभाला. 14 जुलाई को उन्होंने खुलासा किया कि वह मंत्री पद से अपना इस्तीफा 10 जून को राहुल गांधी को सौंप चुके हैं. सवाल उठने पर नवजोत सिंह सिद्धू ने 15 जुलाई को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को अपना इस्तीफा सौंप दिया.

वजह, कैप्टन ने सिद्धू पर आरोप लगाया था कि उन की घटिया कारगुजारी के कारण लोकसभा चुनाव में पार्टी को शहरों में नुकसान हुआ. इसे सिद्धू अपने माथे पर कलंक मान रहे हैं.

जिन 13 मंत्रियों के विभाग बदले गए हैं, उन में सिद्धू ही एकमात्र ऐसे मंत्री थे जिन पर नकारा होने का ठप्पा लगा. हालांकि कांग्रेस नवजोत सिंह सिद्धू को खोना नहीं चाहती. उसे लग रहा है कि अगर सिद्धू किसी दूसरी पार्टी में जाते हैं तो वह कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं.

कांग्रेस की भी यही सोच है कि सिद्धू हमेशा से ही अपने बड़बोलेपन के कारण परेशानी खड़ी कर देते हैं तभी तो अमरिंदर सिंह ने उन से इस्तीफा मांग लिया. कांग्रेस अब सिद्धू को नया काम दे कर चुप कराने की कोशिश में है.

वैसे, सिद्धू का क्रिकेट से राजनीति की ओर आना और उस के बाद छोटा परदा यानी टैलीविजन पर अपनी एक्टिंग के चलते छा जाना और वहां पर अपनी शेरोशायरी का लोहा मनवाना उन्हें अच्छी तरह आता है.

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सिद्धू का इस्तीफा कहीं दूसरी ओर का संकेत न हो, यह देखने वाली बात होगी. कहीं वे फिर से भाजपा की ओर न चले जाएं, इसलिए कांग्रेस भी उन्हें नाराज नहीं करना चाहती. यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि नवजोत सिंह सिद्धू किस करवट बैठते हैं.

Edited By- Neelesh Singh Sisodia 

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