कुदरती कहर हो या मानव जनित दुर्घटनाएं, दुनिया के किसी एक कोने से ऐसी तस्वीर कभीकभी सामने आती है कि जिन्हें देखते ही या तो रूह कांप उठता है या फिर रोंगटे खङे हो जाते हैं. ऐसी त्रासदियों में आमतौर पर या तो बच्चे होते हैं या फिर महिलाएं. यों तो दुनियाभर में बच्चों की ऐसीऐसी भयानक तस्वीरें सामने आई हैं जिन्हें देख कर किसी के भी रोंगटे खङे हो जाएं, मगर बाढ की विनाशलीला के बीच बिहार से एक ऐसी ही खौफनाक तस्वीर सामने आई है, जिसे देख कर कलेजा मुंह को आ जाए.

खौफनाक तस्वीर

इस तस्वीर में एक मृत बच्चा पानी से घिरे एक टीले पर पङा हुआ है. वह टीला भी इतना गीला हो चुका है कि कभी भी भरभरा कर पानी में समा सकता है. बच्चे के आसपास कोई नहीं है और वह लावारिस पङा पानी में समा जाने को तैयार है. उस का पूरा शरीर अकड़ कर फूल चुका है.

ये भी पढ़ें- राजपूतों का सपा से मोहभंग

सीरिया युद्ध में भी ऐसे ही हालात थे

इसी तरह की एक तस्वीर साल 2015 में तुर्की के समुद्रीतट पर से एक सीरियाई बच्चे की भी सामने आई थी. तब सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध की बर्बरता को देख पूरी दुनिया स्तब्ध थी. यह तस्वीर इतना खौफनाक था कि देख कर ही आंखों में आंसू आ जाएं. ऐलन कुर्दी नाम के इस 3 साल के बच्चे का शव तुर्की समुद्रीतट पर बह कर आया था.

पिता-बेटी की रूला देने वाली तस्वीर

कुछ समय पहले उत्तरी अमेरिका की सीमा से लगी रियो ग्रांडे नदी के किनारे एक पिता और बेटी की लाश की तस्वीर भी सामने आई थी, जो बेहद भयानक और मानवीय संवेदना को बुरी तरह रूला रहा था.

अब बाढ की वीभिषका से जूझ रहे बिहार से आई इस मृत बच्चे की तस्वीर ने मानव सभ्यता को हिला कर रख दिया है.

कहर मगर क्यों

कुछ लोग इसे कुदरती कहर बता रहे हैं, कुछ अंधविश्वासी भगवान का प्रकोप, तो वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इस के लिए पूरी मानव सभ्यता को ही दोष दे रहे हैं, जिन की वजह से वन खाली हो गए, जंगलों की इतनी कटाई हुई कि वहां रेगिस्तान जैसे हालात हो गए. इस से पहाड़ों के बीच से आने वाली सैकड़ों नदियां अपना मूल रास्ता भटक कर ऐसा कहर बरपाती हैं कि हर साल हजारों की संख्या में लोग मारे जाते हैं. लाखों बेघर हो जाते हैं और करोड़ों कुपोषण के शिकार हो जाते हैं.

ये भी पढ़ें- जातिवादी सोच का नतीजा है सपा बसपा की हार

कौन है असली गुनहगार

बिहार में हर साल आने वाली बाढ भी जहां मानव भूलों का नतीजा हैं, वहीं सफेदपोश नेताओं की लापरवाही भी, जो सिर्फ बाढ से घिरे लोगों के बीच जा कर फोटो खिंचवाने और मुआवजा की घोषणा कर अपनी जिम्मेदारी खत्म कर लेते हैं. न तो पिछली सरकारें और न ही वर्तमान सरकार ने बाढ से बचाव के लिए कोई प्लान बनाया है.

दरअसल, बिहार में हर साल बाढ नेपाल से छोङे गए पानी से आता है. इस से दोनों ही तरफ के लाखों लोग प्रभावित होते हैं. बस होता इतना भर है कि नेपाल और भारत दोनों ही एकदूसरे पर दोष मढ़ते हैं मगर होता कुछ नहीं. मगर ऐसी खौफनाक तस्वीर देख कर भी सरकार नींद से जाग जाएगी, कहना बेमानी होगा.

 

Tags:
COMMENT