बाथटब में सेक्सी अंदाज में दिखी टीवी एक्ट्रेस शमा सिकंदर

माया वेब सीरिज फेम स्टार शमा सिकंदर एक बार फिर हौट अवतार में नजर आ रही है हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम एक फोटो को शेयर किया है जिसमें वो बाथटब मे लेटी हुई नजर आ रही है. शमा आए दिन अपनी बोल्ड फोटो की वजह से सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं. शमा के फैंस को उनका यह हौट अवतार बहुत पसंद आ रहा है. फूलों से भरे इस बाथटब शमा बला की खूबसूरत लग रही हैं. इंस्टाग्राम पर उनकी हौट फोटोज का अंमार लगा हुआ है जिसके चलते उनकी फैन फौलोविंग मे काफी कमी नही आती. शमा के इंस्टाग्राम पर 1.4 मिलियन फौलोवर्स है जो किसी भी पौपुलर एक्ट्रेस से ज्यादा है.

फोटोज का रखती है काफी शौक

शमा को फोटोज क्लीक कराने का बेहद शौक है उनकी फोटो में शमा ने रेड कलर की जैकेट में काफी कमाल लग रही है. उनका यह हौट लुक उनके फैंस को काफी पसंद आया. इस दौरान शमा पिलो के साथ खेलती नजर आई. ये फोटो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी इसका कारण था की शमा इस फोटो में थोड़ी न्यूड नजर आ रही हैं.

 

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Jo log dard ko samajhte hain wo log kabhi bhi dard ki wajah nahi bante…. #abdilkisunn

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व्हाइट बिकिनी मे भी मचा चुकी है धमाल

कुछ दिन पहले शमा की इस फोटो ने भी इंटरनेट पर काफी कमाल किया था. इस फोटो में शमा ने व्हाइट बिकिनी पहनी थी जिसमें वो बला की खूबसूरत लग रही थी. बोल्डनेस के मामले में शमा बौलावुड हसीनाओं को भी मात देती हैं. शमा जितनी बोल्ड हैं उतनी ही प्यारी उनकी स्माइल है. यही वजह है कि, शमा की मुस्कान पर लाखों लोग फिदा हैं.

 

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Anyone can say they care. But watch their actions, not their words… #abdilkisunn

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जल्द नजर आने वाली है बायपास में नजर

शमा जल्द ही फिल्म ‘बायपास रोड’ में नजर आने वाली है. इस फिल्म में शमा ‘माया’ के रोल में नजर आने वाली है जिसका फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

‘दो भैसों की लड़ाई में पूरा देश चौपट हो गया’- हीरा सिंह मरकाम

साक्षात्कार – हीरा सिंह मरकाम राष्ट्रीय अध्यक्ष गोंडवाना गणतंत्र पार्टी

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के सुप्रीमो हीरा सिंह छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की राजनीति के एक बड़े स्तंभ कहे जाते हैं. हीरा सिंह ने शिक्षक से विधायक और अपनी पार्टी गठन करने के पश्चात समाज को एकजुट करने का अथक प्रयास किया है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इनकी गहरी पकड़ है यही कारण है कि राहुल गांधी हो या अखिलेश यादव अथवा अजीत जोगी आप से गठबंधन की अपेक्षा रखते हैं. प्रस्तुत है विश्व आदिवासी दिवस पर उनसे हुई एक विशेष बातचीत…

दादा, 80 वर्ष की उम्र में जीवन का क्या निचोड़ है, आपका क्या संदेश है…?
मेरा जन्म प्रकृति के बीच गांव में हुआ. जब हम ऊपर देखते थे तो पेड़ से फल मिल जाते थे नीचे कोरहाई के जंगल में एक घंटे मे टोकरी भर कर भरपूर कांदा- फल मिल जाता था .कहां गया सब….मैं तो कहूंगा सरकार जिसको छुती है छूत लग जाती है, कहीं कोई सफलता नहीं है . सब कुछ निजीकरण करते चले जाते हैं क्योंकि राजा की नियत न हो राजा का चरित्र न हो तो देश और अवाम का भला कैसे होगा. मै ठीक बाकी दुनिया खराब है आज का फलसफा यही है चाहे सत्ता में कोई बैठे.
हम कर रहे हैं वहीं ठीक है एक साधु ने लिखा था न ! दो भैसा की लड़ाई में चिरकुट होगे नाव ! गांव के सुम्मत के गांधी बाबा के सुम्मत के… दो भैसा के लड़ाई में…. तो दो भैसा की लड़ाई में पूरा देश चौपट हो गया .

अर्थात आपका इशारा भाजपा और कांग्रेस पार्टियों की तरफ है और राजनीतिक दल अपना कर्तव्य नहीं निभा रहे…

हां इनको देश से कोई लेना देना नहीं है आप अच्छी तरह जानते हैं जिनका सिर्फ देश सेवा का लक्ष्य नहीं वह नेता रातों रात अरबपति हो जाते हैं. अमित शाह का बेटा 80 हजार से 12 हजार करोड़ रुपए कमा लेता है . आखिर कौन सा यंत्र है इनके पास. रातों-रात… और भी तो भाई हैं 80 हजार वाले जो पैसा लगा पसीना बहाते हैं तब भी उनका पैसा बढ़ता नहीं है . बाबू, अफसरों के चक्कर में ठेकेदारी कर फंस जाता है, हाथ जोड़ गिङगिडाता है.

आप राजनीति में आने से पूर्व शिक्षक थे, नौकरी की थी?
हां, मैं आठ डिपार्टमेंट संभालता था. बोरों में नोट होते थे . दस दस चपरासी होते थे. मैं कभी तनख्वाह नहीं बाटंता था, चपरासी बाटंते थे . बाबू कहते थे,- दादा! फंस जाओगे किसी दिन. मैं कहता,- मैं तो रखवार हूं पैसा तो उन्हीं का है. बेईमानी करेंगे तो फिर दूसरे दिन 11 से 4 बजे पढ़ाऊंगा. 5 बजे के बाद तनख्वाह बाटूंगा तो आधी रात को घर जाएंगे . सब समझ में आ जाएगा . तब एक नोट भी ज्यादा चला जाता तो लेकर वापिस आ जाते और कहते- ‘दादा! यह ज्यादा ले गए थे . ऐसी इमानदारी का युग था, शिक्षक बच्चों को अपने बेटे से ज्यादा चाहता था .आज तो अगर आपने बच्चों को ट्यूशन नहीं पढ़ाई तो वह बच्चा गया.

आगामी चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की क्या रणनीति होगी ?
देखो! हमने मेहनत से अपने वोटर तैयार किए हैं हम उन्हें भटकने नहीं देंगे…. आने वाले समय में जैसे ही स्वस्थ होऊंगा मैं चुनावी सभाओ मैं पहुंचूगा . मैं वोटर को अन्नदाता और श्रमवीर मानता हूं उनके सम्मान के लिए काम करूंगा.

आपने किसान की बात की… क्या आप भी खेती किसानी से जुड़े रहे हैं ?
हां,मैं सुबह 4 बजे उठ जाया करता था विधायक बनने के बाद भी मैं खेती करता था. 4 बजे सुबह नागर फांद देता था. सब्जियां लगी हुई है जिसको चाहिए ले जाए… देख कर सीखे यह आशा थी. आज तो वह स्थिति नहीं रही स्वास्थ्य साथ नहीं देता.

आप की पार्टी और आप का विजन क्या है ?
0 जल, जंगल, जमीन है गोंडवाना के अधीन . हमारा ग्रह ग्राम तिवरता (जिला कोरबा ) कोयला खदान द्वारा अधिग्रहित नहीं है मगर सबसे ज्यादा भोग रहा है पूरी सड़क पेड़ नाले खेत रास्ते दमा के पेशेंट है क्या दे रही कोयला कंपनी आवाम को. सामाजिक सहभागिता यानी सीएसआर की राशि जिलाधीश अपने पास मंगा लेता है.डिस्टिक माइनिंग फंड ( ङीएमएफ ) को मनमाना खर्च किया जा रहा…है लोग दमा, ह्रदय रोग से बीमार हो रहे हैं आसपास के सभी गांव प्रभावित हो रहे हैं. सामाजिक,राजनीतिक, सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रभावित हो रहे ,युवा शराब की लत से पीड़ित हो गए, परिवार नष्ट हो रहे .

विश्व आदिवासी दिवस पर आपका आदिवासी समाज को क्या संदेश है?

पहली बात है हमअपना ‘वोट’ का महत्व समझ जाए .वोट बिके नहीं,अगर बिकेगा तो यही कहा जाएगा कि तुमने वोट दिया थोड़ी है,हमने तो तुम्हारा वोट खरीदा है इस अपमान से बच जाओ.यह शिक्षा गोंडवाना दे रही है .जहां तक केंद्र की बात है चुनाव की … क्षेत्रीय दलों का भी बड़ा महत्व है…. नरबलि नहीं होत है समय होत बलवान अर्जुन लुटे भिलनी वहीं अर्जुन वही बाण …. यही भवितव्य है.

क्षेत्रीय दलों की क्या भूमिका देखते हैं आप वर्तमान चुनावी समर में ?
देखिए ममता, नवीन,लालू,अखिलेश यादव जी मायावती सभी अपने अपने दृष्टिकोण बदले हुए हैं और चाह रहे हैं कि अरस्तू ने कहा था अगर जनता में घोर असंतोष हो जाए तो पड़ोसी देश पर हमला कर दो…जनता देश भक्ति के धारा में बह जाएगी और तुम चुनाव जीत जाओगे यही आज देश की स्थिति बनी हुई है तो 358 ईसवी पूर्व अरस्तू ने यह बता दिया था जो अभी नजर आ रहा है .

 नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी दोनों की कार्यप्रणाली आप देख रहे हैं कुछ कहेंगे…?
0 नरेंद्र मोदी जो बाण चला रहे हैं वह हृदयगाही नहीं है दरअसल दोनों के दोनों के पास प्रधानमंत्री पद की समझ, योग्यता में कमी दिखाई दे रही है. मुखिया मुख सो चाहिए खान पान को एक पाले पोसे अंग तुलसी सहित विवेक. आपको, सबको समान मानकर चलना चाहिए क्या मुसलमानों ने आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी उन्हें कहां बसाओगे ? देश में गृह युद्ध शुरू हो जाएगा उनमें भी देश प्रेम है या फिर सविधान बदल दो धर्मनिरपेक्षता खत्म कर दो.यह धार्मिक सोचनीय स्थिति है.

कोरबा संसदीय क्षेत्र आपका गृह जिला है यहां गोंडवाना क्या करने जा रही है ?

सांपनाथ और नागनाथ वाली स्थिति है. इसमें कुछ फर्क नहीं नाग धार्मिक भाव है. आज नरवा, गरवा, धुरवा,बाड़ी की बात हो रही है यह कहां शुरू हुआ.

भूपेश सरकार ने किसानों के लिए ऐतिहासिक काम प्रारंभ किया है कर्जा मुक्ति…
(बीच में ही कटाते हुए) … क्या किसानों को स्वावलंबी बनाया आपने ?
जो कर्ज माफ किया, 2500 रुपए क्विंटल धान का ले रहे हो, जब आगे चावल ₹70 किलो बिकेगा तब किसके ऊपर आएगा?यह प्रत्यक्ष रूप से जनता का शोषण है, हाथी के दांत दिखाने के और खाने के अलग… किसान आगे फिर लाठी गोली खाएगा… कर्मचारी तो हड़ताल करके अपना वेतन बढ़वा लेगा कर्ज़ माफी का लालीपाप है . खेत स्मार्ट हो, किसान स्मार्ट हो जाएगा गांव और देश स्मार्ट हो जाएगा.

गोंडवाना की सरकार बनती है तो वह सरकार कैसी होगी क्या कल्पना है आपकी?
0 हमारी सरकार गांव की सरकार होगी. हम आदर्श के रूप में एक गांव को मॉडल के रूप में विकसित करके दिखाएंगे की क्या जब यह गांव माडल बन सकता है तो बाकी गांव क्यों नहीं… भ्रष्टाचार. शोषणविहीन, ऋणमुक्त प्रगतिधर्मी समाज व्यवस्था यह हमारा मूल मंत्र है.जल जंगल जमीन गांव की प्रभुसत्ता होगी गांव स्वावलंबी होगा सब कुछ गांव का आज की तरह नहीं की रेत ,नाला, सड़क सब कुछ सरकार का और हम किसके हैं भई…!

“कसौटी” की ‘प्रेरणा’ का हौट अवतार, देखें फोटोज

टीवी के सबसे पौपुलर सीरियल्स में से एक “कसौटी जिंदगी की 2”  की प्रेरणा यानी एरिका फर्नांडीस एक बार फिर फैंस के सामने नए अवतार में नजर आ रही है. हाल ही में एरिका  ने इंस्टाग्राम पर कुछ फोटोज शेयर की है जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे है. इन फोटोज में एरिका  किसी परी से कम नही लग रही है. एरिका सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है और टाइम टाइम पर अपनी फोटोज शेयर कर फैंस को अपडेट करती रहती हैं और फैंस  भी उनकी फोटोज का बेसब्री से इंतजार करते है. तो चलिए देखते है एरिका की इन न्यू फोटोज को..

वाइट मेक्सी ड्रेस में  दिखी एरिक

इन फोटोज में एरिका ने वाइट कलर की मेक्सी ड्रेस पहनी है जिसमे फ्लावरी बौर्डर इस ड्रेस को और भी खूबसूरत बना रही है. इस ड्रेस के साथ उन्होंने जो हेयर स्टाइल किया है वो काफी डेलिकेट और स्टनिंग लुक दे रहा हैं. इस ड्रेस में एरिका किसी फैरी टेल की तरह दिख रही हैं. जबसे एरिका ने इन फोटोज को शेयर किया है फैंस ने जमकर कमेंट करने शुरु कर दिए हैं.

कुछ पहले भी शेयर किए था फोटोसूट

एरिका का ने  कुछ दिन पहले भी अपना एक फोटोशूट शेयर किया था जिसमें वो में सिल्वर रंग के गाउन में नजर आई थी उनका गाउन इतना खूबसूरत था कि किसी की भी नजर आसानी से इससे नहीं हटी. दरअसल जिस फोटोग्राफर ने एरिका की लेटेस्ट फोटोज को क्लिक किया है, उसी फोटोग्राफर ने एरिका की ये खूबसूरत फोटोज भी क्लिक की थी.

एरिका को पसंद है हल्के रंग वाले गाउन

एरिका की फोटोज को देखा जाए तो पता चलता है कि उन्हें हल्के रंग के गाउन काफी पसंद आते है. एरिका गाउन के मामले में काफी चूजी है, लेकिन उनकी पसंद वाकई में शानदार है.

 

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कुछ ऐसा हो ही जाए

लेखक-सुधा गुप्ता

अंतिम भाग…

पूर्व कथा

पत्नी की मृत्यु के बाद प्रोफेसर साहब तनहा रह गए थे. बेटाबेटी की उन के प्रति इतनी आत्मीयता नहीं थी कि वह उन से पूछते कि वे कैसे दिन काट रहे हैं, क्या खातेपीते हैं. बेटी अन्नू विवाहित थी. जब भी मायके आती तो उन्हें खाना बना कर खिलाने घर की साफसफाई करने के बजाय मेहमानों की तरह व्यवहार करती. ऐसे में उन की विद्यार्थी पल्लवी का उन से खानेपीने के लिए पूछना, उन का ध्यान रखना, उन्हें भीतर तक छू गया. उसे बहू के रूप में पा कर उन का घर फिर से संवर सकता था अत: वह पल्लवी के मातापिता के पास अपने बेटे आदित्य के लिए पल्लवी का हाथ मांगने गए. बेटी अन्नू को उन्होंने एक दिन पहले बुला लिया ताकि वे भी पल्लवी के मातापिता से मिल लें. आदित्य को पता चलता है तो वह अपने पिता से खफा होता है कि उस से पहले पूछा क्यों नहीं. अन्नू भाई को समझाने के बजाय उलटा उस का साथ देती है. प्रोफेसर साहब अन्नू से कहते हैं कि आदित्य कहीं और शादी करना चाहता था तो तब क्यों नहीं कहा जब मैं ने उस से पूछा था. अब आगे…

सांस रुकने लगी मेरी. दिल भी रुकता सा लगने लगा. सुनता रहता हूं न कि लोग सदमे से मर जाते हैं, इसी तरह मर जाते होंगे. मेरा उजड़ा घर जो बरसों से सराय जैसा है, जहां अन्नू केवल अपनी सुविधा के अनुसार आती है, क्या यह नजर नहीं आता कि उस का पिता देखभाल के अभाव में मौत के कगार पर पहुंच चुका है और भाई भी मां के अभाव में न समय पर खाता है न पीता है. क्या वह नहीं चाहती कि कोई आ कर हम दोनों को संभाल ले या वह डरती है कि भाभी के आने से इस घर पर उस का एकाधिकार समाप्त हो जाएगा.

‘‘मुझे क्या पता था कि आप किसी से आदित्य की शादी की बात चला रहे हैं?’’

‘‘बता तो दिया है, और कैसे बताऊं. कह तो रहा हूं कि कल सुबह 12 बजे वे पतिपत्नी हम से मिलने, हमारा घर देखने आ रहे हैं. उस के बाद हम तीनों के साथ वे होटल शरमन में जाएंगे, जहां पल्लवी अपने भाई के साथ आ जाएगी.’’

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‘‘उसे यहां शादी नहीं करनी.’’

‘‘क्यों, यहां क्या बुराई है? पढ़ीलिखी घरेलू लड़की है, घर संभाल लेगी.’’

‘‘घर तो नौकर भी संभाल लेते हैं. घर का क्या है.’’

‘‘आज तक हम नौकरों के सहारे किस तरह जी रहे हैं, क्या तुम्हें नजर नहीं…’’ इतना कहतेकहते मेरा स्वर घुट गया था.

दोनों बहनभाई इस तरह पलटी मार गए कि मैं समझ ही न पाया क्या करूं. दनदनाती अन्नू अपना सामान उठा कर बाजार चली गई और आदित्य मानो हम दोनों के बीच पिसता सा लगा मुझे.

एक अंतिम विश्वास था कि मेरे बच्चे मुझ से बगावत नहीं कर सकते. सुबह मेहमान आएंगे तो कुछ भी ऐसा नहीं होगा जो अशोभनीय होगा.

रात को खाना सदा की तरह बाजार से ही आया. अन्नू सुबह 10 बजे तक सोई रही. इतवार की वजह से आदित्य भी देर तक सोया रहा. दोनों में से किसी ने घर को व्यवस्थित नहीं किया. बाई आ कर सफाई भर कर गई. वह भला घर का इधरउधर पड़ा सामान क्यों संभालती.

12 बजे जब पल्लवी के मातापिता आए तब अन्नू ने यह कह कर उन्हें बाहर बरामदे में ही बैठा दिया कि यहां धूप है. मेरे कहने पर उन्हें पानी पिलाया और मेरे ही कहने पर कुछ फल काट कर उन के सामने धूल से सनी छोटी सी मेज पर सजा दिए. एक ठंडा सा व्यवहार था दोनों बच्चों का. शरम आ रही थी मुझे कि मेरी एम.ए. पास बेटी इतनी तमीज भी नहीं निभा पाई कि घर आए मेहमान को कहां बिठाते हैं और कैसे आवभगत करते हैं. रिश्ता हो न हो यह तो बाद की बात है लेकिन एक औपचारिक तहजीब तो मेरे बच्चे निभा देते.

‘‘पल्लवी और सोमेश होटल शरमन में हमारा इंतजार कर रहे हैं, चलें?’’ पल्लवी के पिता ने कहा.

काफी नानुकर के बाद दोनों बहनभाई उन के साथ गए और मात्र 5 मिनट वहां बैठ कर साथ ही लौट आए.

‘‘मुझे वापस जाना है, पापा,’’ मैं निकलती हूं. अच्छा आदित्य…’’ इतना कह कर अन्नू अपना बैग उठा कर चली गई और आदित्य अपनी मोटरसाइकिल उठा कर पता नहीं कहां चला गया. एक प्रश्न लिए रह गया मैं. क्या हुआ होगा होटल में? पल्लवी से आदित्य की क्या बात हुई होगी? किस से पूछता मैं कि वहां क्या हुआ, क्या बात हुई.

‘‘कैसी लगी तुम्हें पल्लवी? वे कल पूछेंगे तो क्या जवाब दूंगा,’’ रात को सोते समय मैं ने आदित्य से पूछा.

‘‘आप के कहने पर मैं चला गया था,’’ आदित्य के मुंह से शब्द फूटे, ‘‘लेकिन मैं ने पल्लवी को देखा तक नहीं.’’

‘‘क्यों नहीं देखा? तुम्हें जो पसंद है कम से कम उसी के बारे में मुझे बता देते तो मैं उन के घर रिश्ता ले कर तो न जाता.’’

चुप रहा आदित्य. मुझे झंझावात में छोड़ सो गया. मैं इसी शरम में डूबा जागता

रहा कि पल्लवी के मातापिता क्या सोचते होंगे मेरे बारे में.

सुबह सवेरे पल्लवी के पिता का फोन आ गया. आदित्य ने ही फोन उठाया था. परेशान हो गया मैं, क्या जवाब दूंगा पल्लवी के पिता को?

‘‘प्रोफेसर साहब, मुझे क्षमा कीजिएगा. मैं ने सुबहसुबह ही आप को परेशान किया. वास्तव में मैं अपने बेटे की वजह से घबरा गया हूं इसीलिए फोन करना पड़ा. मेरा बेटा आप के व्यवहार से बहुत नाराज है.

‘‘कल होटल में आप के बच्चों का आना और उठ कर चले जाना एक तमाशा सा ही लगा मुझे भी. समझ में ही नहीं आया कि अगर आप के बच्चे राजी नहीं थे तो आप ने हमारे बच्चों का मजाक क्यों बना दिया? क्षमा कीजिएगा, मुझे आप का रिश्ता मंजूर नहीं है, बस, इसीलिए फोन किया था.’’

आदित्य मेरा चेहरा देखने लगा. कड़वी सी हंसी चली आई मेरे होंठों पर. कंधा थपथपा दिया मैं ने आदित्य का.

‘‘बहुत अभागा है तू आदित्य. सच कहूं तो मैं खुश हूं पल्लवी के लिए. वह प्यारी सी बच्ची इतनी अच्छी है कि यह घर ही उस के लायक नहीं है. अब तुम जो चाहो करो, जैसे चाहो जिओ, आज के बाद मैं कभी कुछ नहीं कहूंगा.’’

उठ कर मैं बाहर बरामदे में चला आया और उसी सोफे पर बैठ गया जहां एक दिन पहले पल्लवी के मातापिता बैठे थे. सौभाग्य मेरे घर आया और बाहर से ही लौट गया. मेरी बेटी ने यह कह कर उन्हें घर दिखाया ही नहीं कि घर व्यवस्थित नहीं है. 10 साल से अपना घर संभालती मेरी बेटी मेरा घर इतना भी सजासंवार नहीं पाई कि मेहमान को दिखा सकते.

यह लड़की अपने भाई का कितना हित करेगी इस का अंदाजा मुझे आज हो रहा है. आज मैं जिंदा हूं, कल न रहा तो कौन आदित्य की चिंता करेगा?

इस घटना के 2 दिन बाद भी मैं कालिज नहीं जा पाया. सोचता हूं, जाऊंगा तो पल्लवी का सामना कैसे कर पाऊंगा. उस बच्ची का मन मेरी वजह से दुखी होगा. आदित्य भी गुमसुम था. न जाने क्यों मुझे पीड़ा नहीं हो रही थी. यह पहला अवसर है जब मैं आदित्य की चुप्पी से परेशान नहीं हूं.

‘‘पापा, आप मुझ से नाराज हैं?’’

‘‘नहीं तो बेटा, मैं नाराज क्यों होने लगा. मेरा क्या है, मैं आज हूं कल नहीं. मुझे क्या हक है जो अपनी पसंद तुम पर थोप दूं. पल्लवी के साथ जीवन तुम्हें काटना था, मुझे तो नहीं. तुम नहीं चाहते तो ठीक है. कल को वह आ जाती और तुम उसे थोपा हुआ मान कर स्वीकार ही न कर पाते तब भी दोष मेरे ही सिर पर आता.

‘‘तुम अपनी पसंद भी बता दो, कम से कम मेरा दायित्व तो पूरा हो. कौन है वह?’’

चुप रहा आदित्य, कुछ बोला ही नहीं. बहन के सामने जिस ने अपने परों पर पानी नहीं पड़ने दिया, अब चुप था.

‘‘मुझे नहीं तो अपनी बहन को बता देते. वह तो तुम्हारी शुभचिंतक है. उसे बता देना, फिर जैसा चाहो कर लेना.’’

‘‘पापा, आप ऐसा क्यों कह रहे हैं? दीदी मेरी बहन है तो मेरा भलाबुरा तो सोचेगी न.’’

‘‘हां, सोचेगी, तभी तो कल घर आए मेहमानों का बड़ा अच्छा सत्कार किया. क्या दोष था उन का जो उन्हें अन्नू ने पानी तक नहीं पूछा. बाहर बिठा दिया जहां हम किसी भी ऐरेगैरे को बिठा कर वापस भेज देते हैं. क्या तुम अपने दोस्तों को भिखारी की तरह बाहर से ही लौटा देते हो? पता नहीं मेरी शिक्षा में क्या खोट रह गया जो घर आए का सम्मान भी करना नहीं आया तुम्हें.’’

‘‘पापा, ऐसा नहीं है. मैं समझ ही नहीं पाया कि क्या करूं.’’

‘‘बस, आदित्य, मेरा जो अपमान तुम दोनों ने किया है उसे मैं मरते दम तक याद रखूंगा.’’

मैं ने हाथ जोड़ कर पल्लवी के परिवार से क्षमा मांग ली.

इस सारी कहानी को बीते 2 साल हो गए. पल्लवी आज भी मेरी नन्ही सी, प्यारी सी मित्र है. उस की शादी एक बहुत अच्छे घर में हो चुकी है. संयोग से अब उस का चयन मेरे ही कालिज में हो गया है, जिस वजह से हमारा साथ आज भी है.

एक कांटा सा जरूर चुभता है जब मुझे वह हादसा याद आता है. हादसा ही तो कहूंगा न मैं क्योंकि उस में मेरा विश्वास जो चकनाचूर हो गया था.

अब मैं रिटायर तो हो गया हूं लेकिन  2-4 साल का एक्सटेंशन मिल गया है. घर पर मन नहीं लगता क्योंकि मेरा घर आज भी वैसा ही सराय सा है. आदित्य की शादी नहीं हुई अभी. शायद उस की पसंद उसे आज तक नहीं मिली. अन्नू आज भी मेरे घर पर अपना उतना ही अधिकार जताती है जितना सदा था लेकिन यह भी सच है कि ममत्व और विश्वास का झीना सा आवरण भी अब हमारे बीच नहीं रहा.

मुझे मेरी बेटी अच्छी नहीं लगती. बड़ी अभागन है मेरी संतान जिसे अच्छाबुरा परखना ही नहीं आया. पारस हाथ आया था जिसे वह अनजाने ही खो बैठे और अब लोहे के टुकड़ों में सिर फोड़ रहे हैं. अच्छी घरेलू लड़की मिल ही नहीं रही जिसे हमारा सराय सा घर पसंद आ जाए. आज पिज्जा और बर्गर का युग है न.

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‘‘सर, आप के बिस्कुट.’’

सदा की तरह पल्लवी ने मुझे अपने हाथ के बने बिस्कुट थमाए. मैं नहीं जानता, न जाने कब का कोई छूटा रिश्ता है मेरा पल्लवी के साथ जो पुन: बना तो टूटा ही नहीं, उस प्रसंग के बाद भी.

‘‘जीती रहो,’’ पल्लवी का माथा सहला दिया मैं ने, जिस पर बड़ा सा सिंदूरी टीका दमकता है अब. हाथ उठा कर प्रकृति से मैं दुआ मांगता हूं कि मेरी बच्ची पल्लवी सदा सुखी रहे, सुहागन रहे, और ऐसी ही कोई बच्ची मेरे आदित्य के जीवन में भी आ जाए. काश, ऐसा कुछ हो जाए. काश, कुछ ऐसा हो

ही जाए. द्य

इंसाफ

लेखक- युगेश शर्मा

नंदिता ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस छोटे भाई को पढ़ा- लिखा कर उस ने अफसर की कुरसी तक पहुंचाया है, एक अच्छे परिवार में शादी करवा कर जिस की गृहस्थी बसाई है वही भाई उस के साथ ऐसा बरताव करेगा. उस ने नया फ्लैट खरीदने के लिए डेढ़ लाख रुपए देने से इनकार ही तो किया था. उस ने तब उस को समझाया भी था कि हमारा यह पुश्तैनी मकान है. अच्छे इलाके में है. 2 परिवार आराम से रह सकें, इतनी जगह इस में है.

तब नवीन ने बड़ी बहन के प्रति आदरभाव को तारतार करते हुए कह डाला, ‘दीदी, मां और बाबूजी के साथ ही इस पुराने मकान की रौनक भी चली गई है. अब यह पलस्तर उखड़ा मकान हमें काटने को दौड़ता है. मोनिका तो यहां एक दिन भी रहना नहीं चाहती. मायके में वह शानदार मकान में रहती थी. कहती है कि इस खंडहर में रहना पड़ेगा, उस को यह शादी के पहले मालूम होता तो वह मुझ से शादी भी नहीं करती. वह सोतेजागते नया फ्लैट खरीदने की रट लगाए रहती है. आखिर, मैं उस के तकाजे को कब तक अनसुना करूं.’

नंदिता ने बहुतेरा समझाया था कि छोटी बहन नमिता की शादी महीने दो महीने में करनी है. अगर जमापूंजी फ्लैट खरीदने में निकल गई तो उस की शादी के लिए पैसे कहां से आएंगे. उस का तो जी.पी.एफ. अकाउंट भी खाली हो चुका है.

नवीन उस दिन बहुत उखड़ा हुआ था. आव देखा न ताव, बोल पड़ा, ‘यह आप की चिंता है, दीदी. मैं इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहता. नमिता की शादी करना आप की जिम्मेदारी है. उस को आप कैसे निभाएंगी, आप जानें.’

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नंदिता आश्चर्य से छोटे भाई का मुंह देखने लगी. नवीन इस तरह की बातें कहेगा, उस ने तो सपने में भी नहीं सोचा था. वह भी बिफर उठी थी, ‘तुम नमिता के बड़े भाई हो, इस परिवार के एकमात्र पुरुष. इस तरह अपनी जिम्मेदारी से पिंड कैसे छुड़ा सकते हो तुम.’

‘देखो, दीदी, अब मैं कोई दूधपीता बच्चा नहीं हूं. सच बात तो यह है कि जिम्मेदारी जिस को सौंपी जाती है वही उस को निभाने के लिए पाबंद होता है. आप परिवार में सब से बड़ी हैं,’ नवीन ने आज अपने मन की सारी भड़ास निकालने का फैसला ही कर लिया था. बोला, ‘बाबूजी ने अंतिम समय हम लोगों की सारसंभाल की जिम्मेदारी आप को सौंपी थी और आप ने तब भी उन से वादा किया था कि आप अपनी इस जिम्मेदारी को निभाएंगी.’

यह कह कर तो नवीन ने नंदिता के मुंह पर ताला ही लगा दिया था. कुछ कहने, समझाने की उस ने गुंजाइश ही नहीं छोड़ी थी. वह चुपचाप ड्राइंगरूम से उठ कर अपने कमरे में जा कर बिस्तर पर पड़ गई. उस

का दिमाग पुरानी स्मृतियों के झंझा-वातों से भर उठा. बीती घटनाएं फिल्म के दृश्यों की तरह एक के बाद एक उस के स्मृतिपटल पर उभरने लगीं :

जब थोड़ी सी बीमारी के बाद मां की मृत्यु हुई वह बी.ए. फाइनल में थी. मेरिट में आने का मनसूबा बांधे बैठी थी वह. परिवार की सब से बड़ी संतान और लड़की होने से घर की देखभाल का जिम्मा न जाने कब उस के कमजोर कंधों पर आ पड़ा, वह समझ ही नहीं पाई. घर की गाड़ी के पहिए उस को धुरी मान कर घूमने लगे.

‘मेरी समझदार बेटी नंदिता सब संभाल लेगी,’ बाहरभीतर सब तरफ यह घोषणा कर के पिताजी ने तो घर की सारी जिम्मेदारियों से खुद को जैसे बरी कर लिया था.

नंदिता 3 भाईबहन हैं. नंदिता से छोटा नवीन है और नवीन से छोटी नमिता. नवीन को पढ़ने, दोस्तों के साथ मौजमस्ती करने और बाकी समय में क्रिकेट खेलने से फुरसत ही नहीं मिलती थी. नमिता तो परिवार की लाड़ली होने का पूरापूरा फायदा उठाती रही. कभी मूड होता तो घर के काम में नंदिता का हाथ बंटाती वरना सहेलियों और कालिज की पढ़ाई में ही अपने को व्यस्त रखती.

नंदिता जानती थी कि नमिता को आखिर एक दिन पराए घर जाना है. घर के रोजमर्रा के काम में भी वह रुचि ले, ऐसी कोशिश नंदिता करती रहती थी पर नमिता यह कह कर उस पर पानी फेर देती कि अभी तो मुझे आप अपने राज में आजाद पंछी की जिंदगी जी लेने

दो, जब ससुराल पहुंचूंगी तो सब सीख लूंगी. समय अपनेआप सब सिखा देता है. आप आज घर को जिस कुशलता से संभाल रही हैं वह भी तो समय की जरूरत

ने ही आप को सिखाया है, दीदी.

नंदिता ने इस के बाद तो किसी से शिकवाशिकायत करना छोड़ ही दिया था. प्रथम श्रेणी में बी.ए. करने के बाद वह समाजशास्त्र में एम.ए. कर के पीएच.डी. करना चाहती थी. पर सोचा हुआ सब कहां हो पाता है. पिताजी ने घर की जिम्मेदारियों का वास्ता दे कर बी.ए. करने के बाद उस को घर बैठा लिया था. बेचारी मन मसोस कर रह गई थी.

एक दिन भयानक हादसा हुआ. दौरे से लौटते समय एक सड़क दुर्घटना में उस के पिता इन तीनों भाईबहनों को अनाथ कर के संसार से विदा हो गए. नंदिता पर तो जैसे मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा. तब कुल 25 वर्ष की उम्र थी उस की. पिता के दफ्तर वालों ने बड़ी मदद की. उस को पिता के दफ्तर में ही क्लर्क की नौकरी दे दी.

जैसेतैसे परिवार की गाड़ी चलने लगी. कई बार पैसे की तंगी उस का रास्ता रोक कर खड़ी हुई पर नंदिता ने नवीन और नमिता को यह एहसास नहीं होने दिया कि वे अनाथ हैं. उन की पढ़ाई बदस्तूर चलती रही.

नवीन पढ़ने में होशियार था. उस ने प्रथम श्रेणी में बी.ए. की परीक्षा पास की और खंड विकास अधिकारी के पद पर नौकरी पाने में सफल रहा.

एक दिन नंदिता के मन में आया कि अब नवीन की शादी कर दे. बहू के आने पर घर के काम में दिनरात खटने से उस को भी कुछ राहत मिल जाएगी. उस ने लड़की तलाशनी शुरू की. छोटे मामाजी की मदद से नवीन की शादी बड़े अफसर की बेटी मोनिका के साथ हो गई.

नंदिता ने मोनिका को ले कर जो आशाएं मन में पाल रखी थीं वे कुछ महीने बीततेबीतते मिट्टी में मिल गईं. बड़े बाप की बेटी ने ससुराल में ऐसे रंग दिखाए कि नंदिता को घर के काम में उस की तरफ से किसी भी तरह की मदद की उम्मीद छोड़नी पड़ी.

नंदिता को हालांकि सकारात्मक उत्तर की जरा भी आस नहीं थी, फिर भी हिम्मत बटोर कर एक दिन उस ने मोनिका से कह डाला, ‘मोनिका, मुझे भी 10 बजे दफ्तर जाना पड़ता है. मैं चाहती हूं कि रोटियां तुम सेंक लिया करो. किचन का बाकी काम तो मैं निबटा ही लूंगी. तुम से इतनी मदद मिलने पर दफ्तर जाने के लिए मैं अपनी तैयारी भी सहूलियत से कर सकूंगी.’

‘नहीं, दीदी,’ मोनिका ने रूखा सा जवाब दिया, ‘यह मुझ से नहीं होगा. मैं तो सो कर ही सुबह 9 बजे उठती हूं. नवीन के भी बहुत सारे काम मुझे करने पड़ते हैं. रोज रोटियां सेंकने का जिम्मा मैं नहीं ले सकती. वैसे भी किचन के गोरखधंधे में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है. हमारे यहां तो नौकर ही यह सब करते थे. मुझे तो आप बख्श ही दीजिए.’

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इस के बाद तो नंदिता ने घर के कामकाज को ले कर चुप्पी ही साध ली. खुद ही गृहस्थी की गाड़ी को एक मशीन की तरह ढोती चली गई. परिवार के बाकी सदस्य तो सब देख कर भी अनजान बन बैठे. इस बीच मौसाजी की एक बात को ले कर घर में भूचाल ही आ गया और कई दिन उस का कंपन थमा ही नहीं. उस दिन मौसाजी ने सहज भाव से इतना ही तो कहा था कि उन्होंने भी नंदिता के लिए एक अच्छा सा लड़का देखा है. लड़का क्लास टू आफिसर है. परिवार भी खानदानी है, आदर्श विचारों के लोग हैं. दहेज की मांग भी नहीं है. नंदिता वहां बहुत सुखी रहेगी.

मौसाजी की बात सुन कर एक मिनट के लिए तो जैसे सन्नाटा ही छा गया. नवीन और मोनिका एकदूसरे का मुंह ताकने लगे. दोनों के चेहरों पर हैरानी और परेशानी की गहरी रेखाएं खिंचती चली गईं.

‘यह क्या बात ले बैठे आप भी, मौसाजी,’ नवीन ने सकुचाते हुए अपनी बात रखी, ‘दीदी तो इस घर की सबकुछ हैं. वह तो आत्मा हैं हमारे परिवार की. बाबूजी उन्हीं को तो घर की सारी जिम्मेदारियां सौंप गए थे. अभी नमिता की शादी होनी है. हम पतिपत्नी भी अभी ठीक से सैटिल नहीं हो पाए हैं. दुनियादारी की हम लोगों को समझ ही कहां है. दीदी दूसरे घर चली गईं तो इस घर का क्या होगा. हम तो कहीं के नहीं रहेंगे.’

मौसाजी हक्केबक्के थे. मोनिका के शब्दों ने तो उन्हें आहत ही कर डाला था. वह तैश में आ कर बोली थी, ‘दीदी यों ही सब संभालती रहेंगी, यह विश्वास कर के ही तो मैं नवीन के साथ शादी करने के लिए राजी हुई थी. वह हमें अधबीच में छोड़ कर इस घर से नहीं जाएंगी, यह आप साफसाफ सुन लीजिए, मौसाजी.’

नंदिता को लगा जैसे कई बिच्छुओं ने एकसाथ उस के शरीर में अपने जहरीले पैने डंक घुसेड़ दिए हैं और वह चीख भी नहीं पा रही है.

मोनिका की बात ने बुजुर्ग मौसाजी के दिल को छलनी कर डाला. एक लंबी जिंदगी देखी है उन्होंने, समझ गए कि माटी के पक्के बरतनों पर कोई रंग नहीं चढ़ता. बिना कुछ कहेसुने वह तुरंत घर से बाहर हो गए. वह जानते थे कि जिन की आंखों की शरम मर जाती है, जिन के मन में मानवीय रिश्तों की कोई कीमत नहीं रहती, ऐसे लोगों को अच्छी नसीहतें देना रेत का घरौंदा बनाने जैसा है. नंदिता भी वहां ज्यादा देर बैठी न रह सकी.

उस दिन के बाद घर में रोज की जिंदगी तो पिछली रफ्तार से ही चलती रही पर जैसे उस में जगहजगह स्पीड ब्रेकर खडे़ हो गए थे. इन स्थितियों ने नंदिता को काफी दुखी कर दिया. वह चुपचुप रहने लगी. सिर्फ नमिता के साथ ही वह खुल कर बात करती थी, नवीन और मोनिका के साथ उस के संवाद का दायरा काफी सिकुड़ता चला गया था. ज्यादातर वह अपने कमरे में कैदी सी पड़ी रहने लगी थी. कोई कुछ पूछता तो ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब दे कर चुप हो जाती थी. जब अकेली होती तो खुद से पूछने लगती कि उस के स्नेह, परिश्रम और त्याग का उस को क्या यही प्रतिफल मिलना चाहिए था.

नवीन और मोनिका की निष्ठुरता से जूझते हुए भी नंदिता छोटी बहन के लिए अपनी जिम्मेदारी के बारे में बराबर सचेत रही. वह चुपचाप उस के लिए लड़के की तलाश में लगी रहती. एक अच्छा लड़का उस को पसंद आया. प्राइवेट कंपनी में एक्जीक्यूटिव था. अच्छी तनख्वाह थी. देखने में भी ठीक ही था. परिवार में पढ़ालिखा और उदार विचारों वाला था. उम्र में 7 साल का अंतर नंदिता की नजर में ज्यादा महत्त्वपूर्ण नहीं था. अमूमन लड़के और लड़की की उम्र में 5-6 साल का अंतर तो आजकल आम बात है.

लड़के का नाम था, कपिल. एक दिन रविवार को नंदिता ने कपिल को अपने घर चाय पर बुला लिया. उद्देश्य था वह नमिता को ठीक से देख ले, आपस में जो भी पूछताछ करनी हो, कर ले. बाकी बातें तो कपिल के मातापिता से मिल कर उस को स्वयं ही तय करनी हैं. मौसाजी और मामाजी को भी अपने साथ ले लेगी. नवीन और मोनिका को इस बात की भनक लग चुकी थी पर नंदिता ने इस काम में उन की कोई भूमिका तय नहीं की थी इसलिए दोनों चुप थे.

कपिल वक्त का पाबंद निकला. शाम के 5 बजतेबजते पहुंच गया. एक सलोना सा युवक भी उस के साथ था.

‘कपिलजी, एक बात पूछूं?’ नंदिता ने शुरुआत की, ‘आप पिछले कुछ दिनों से मेरे दफ्तर में खूब आजा रहे हैं. कोई काम तो वहां नहीं अटका है आप का?’

‘जी नहीं, कोई काम नहीं अटका. यों ही आया होऊंगा.’

‘आप सरीखा समझदार आदमी किसी सरकारी दफ्तर में यों ही चक्कर काटेगा, यह बात मेरे गले नहीं उतर रही.’

‘समझ आने पर बात आप के गले उतर जाएगी…आप बिलकुल चिंता न करें. अभी तो बस, इतना ही बताइए कि मेरे लिए क्या आज्ञा है?’

नंदिता ने जांच लिया कि लड़का सचमुच तेज है. उस को बातों में भरमाया नहीं जा सकता. सो बिना भूमिका के उस ने काम की बात शुरू कर दी, ‘आजकल शादीब्याह के मामले में आगे बढ़ने के लिए पहली और सब से जरूरी औपचारिकता है लड़कालड़की के बीच सीधा संवाद. मैं चाहती हूं कि आप कमरे में जा कर नमिता से बात करें. जो पूछना हो पूछ लें और जो बताना हो वह बताएं.’

‘मैं भला क्यों करूं यह सब पूछताछ नमिता से,’ कपिल ने शरारती लहजे में कहा.

‘आप को नमिता को अपने लिए चुनना है. इसलिए नमिता से पूछताछ आप नहीं करेंगे तो भला कौन करेगा,’ नंदिता पसोपेश में पड़ गई. सच बात तो यह थी कि कपिल की पहेली को वह समझ ही नहीं पा रही थी.

‘आप से यह किस ने कह दिया कि नमिता को मुझे अपने लिए चुनना है?’

‘कपिलजी, आप को आज यह हो क्या गया है. कैसी उलटीपुलटी बातें कर रहे हैं आप.’

‘मेरी बात तो एकदम सीधीसीधी है, नंदिताजी.’

‘सीधी किस तरह है. मैं ने नमिता के बारे में ही तो आज आप को यहां बुलाया है. आप यह बेकार का कन्फ्यूजन क्यों पैदा कर रहे हैं?’

‘कन्फ्यूजन वाली कोई बात नहीं है, मैं तो बस, आप से बात करने आया हूं.’

‘मतलब.’

‘यही कि मुझे तो जिंदगी में एक का चुनाव करना था, सो मैं ने कर लिया है.’

‘किस का?’

‘नंदिताजी का, नमिताजी की बड़ी बहन का.’

नंदिता को लगा जैसे वह आसमान से गिर पड़ी है. एक बार तो उसे महसूस हुआ कि कपिल उस के साथ ठिठोली कर रहा है. पर उस के हावभाव से तो ऐसा कुछ भी नहीं लग रहा था.

वह बोली, ‘यह क्या गजब कर रहे हैं आप. मैं इतनी स्वार्थी नहीं हूं कि अपनी लाड़ली बहन के सौभाग्य का सिंदूर झपट कर अपनी मांग में सजा लूं. नमिता मेरी छोटी बहन ही नहीं मेरी प्यारी बेटी भी है. मां के देहांत के बाद मैं ने प्यारदुलार दे कर उसे बड़े जतन से पाला है. मैं उस के साथ ऐसा अनर्थ तो सपने में भी नहीं कर सकती.’

नंदिता की आंखों में आंसू छलछला आए. सारा वातावरण संजीदगी से भर गया.

कपिल ने बात को स्पष्ट करते हुए कहा, ‘नंदिताजी, आप सच मानिए, पिछले एक महीने से मैं आप के बारे में ही सारी जानकारी इकट्ठी करने में लगा था. उसी की खातिर आप के दफ्तर भी जाया करता था. आप के साथ घोर अन्याय हुआ है, फिर चाहे वह हालात ने किया हो, आप के पिता ने या फिर आप के भाई ने. आप ने अपने परिवार के लिए जो तपस्या की है उस के एवज में तो आप को वरदान मिलना चाहिए था. पर सब जानते हैं कि अब तक अभिशाप ही आप के पल्ले पड़ा है. क्या अपनी गृहस्थी बसाने का आप का कोई सपना नहीं है? सचसच बताइए?’

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नंदिता ने संयत होते हुए कहा, ‘वह सब तो ठीक है पर नमिता के सौभाग्य को अपने सपने पर कुर्बान करने के लिए मैं न तो कल तैयार थी और न आज तैयार हूं. उसे मैं जिंदगी भर कुछ न कुछ देती ही रहना चाहती हूं. उस के अधिकार की कोई वस्तु छीनना मुझे कतई गवारा नहीं है. यह मुझ से कभी नहीं होगा. आप जा सकते हैं. आप का प्रस्ताव मुझे कतई मंजूर नहीं है.’

‘आप को मेरा प्रस्ताव मंजूर हो या न हो पर हम तो इस घर से जल्दी ही दुलहनियां ले कर जाएंगे,’ कपिल ने वातावरण को हलका बनाने की गरज से कहा.

‘मेरे जीते जी तो यह कभी नहीं होगा.’

‘जरूर होगा. इस घर से एक दिन 2 दूल्हे 2 दुलहनियां ले कर ही विदा होंगे.’

नंदिता जैसे सोते से जाग उठी. पूछा, ‘और वह दूसरा लड़का?’

‘यह रहा,’ साथ में बैठे सलोने युवक की ओर इशारा करते हुए कपिल ने जवाब दिया, ‘और इन दोनों को किसी कमरे में जा कर आपस में पूछपरख करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.’

‘क्यों?’

‘क्योंकि ये दोनों कालिज के सहपाठी हैं. एकदूसरे को खूब जानते हैं. साथसाथ जीनेमरने की कसमें भी खा चुके हैं, बहुत पहले.’

‘पर ये हैं कौन? परिचय तो दीजिए इन का.’

अचानक नमिता ड्राइंगरूम में आई. वह पास के कमरे में नंदिता और कपिल की बातें कान लगाए सुन रही थी.

‘मैं देती हूं इन का परिचय,’ नमिता बोली, ‘दीदी, इन का नाम विकास है और यह कपिलजी के चचेरे भाई हैं. डिगरी कालिज में 3 साल हम क्लासमेट रहे हैं. मेलजोल अब भी है. दोनों ने साथसाथ जीवन का सफर तय करने का फैसला बहुत पहले कर लिया था.’

‘लेकिन पगली, इस बारे में मुझे तो बताती. मैं तेरी दुश्मन थोड़े ही हूं,’ नंदिता ने नमिता को अपने पास सोफे पर बिठाते हुए कहा.

‘आप वैसे भी इन दिनों काफी परेशान रहती हैं, दीदी. मैं विकास और अपने बारे में आप को बता कर आप की परेशानियों को बढ़ाना नहीं चाहती थी. मैं ने आप से यह बात छिपाने की गलती की है. मुझे माफ कर दो, दीदी.’

‘इस में माफी जैसी कोई बात नहीं है मेरी प्यारी बहना. तू ने जो भी किया अपनी समझ से अच्छा ही किया है. विकासजी, इस बारे में आप को कुछ कहना है या फिर फैसला सुना दिया जाए?’

‘मुझे कुछ नहीं कहना. जो कहना था वह नमिता कह चुकी है. नंदिताजी, आप तो बस, फैसला सुना दीजिए,’ विकास बोला.

‘कपिलजी ने ठीक ही कहा है, इस घर से जल्दी ही 2 दूल्हे, 2 दुलहनियां ले कर विदा होंगे,’ इतना कह कर नंदिता ने नमिता को गले लगा लिया.

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आज बरसों बाद नंदिता की सूखी आंखों में खुशी के आंसू छलछला आए. उसे लगा आज पहली बार कुदरत ने उस के साथ इंसाफ किया है. इस तरह अचानक मिले इंसाफ से कितनी खुशी होती है, इस का एहसास भी उसे पहली बार हुआ.

पौलिटिकल राउंडअप: भाजपा में चुनावी सरगर्मी

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने बताया कि सोमवार, 8 जुलाई को हुई एक बैठक में फैसला लिया गया था कि ‘दिल्ली के मन की बात, बीजेपी के साथ’ अभियान चलाया जाएगा. सदस्यता अभियान के साथ इस कवायद की शुरुआत हो चुकी है.

पार्टी नेता अलगअलग इलाकों में जा कर लोगों से बात कर के उन की राय जानेंगे और पार्टी अपना चुनावी घोषणापत्र तैयार करेगी. पार्टी जनता से जुड़े तमाम मुद्दों पर कानूनी राय भी लेगी, ताकि आगे चल कर कानूनी अड़चनों का सामना न करना पड़े.

लौट आए अखिलेश यादव

लखनऊ. पिछले लोकसभा चुनाव में मायावती के साथ महागठबंधन बना कर भाजपा से लोहा लेने का फार्मूला फुस होने के बाद समाजवादी पार्टी के सर्वेसर्वा अखिलेश यादव राजनीति से थोड़ा कट से गए थे, पर जुलाई महीने के दूसरे हफ्ते में वे पूरे जोश के साथ वापस अपने कार्यालय में आ गए.

उत्तर प्रदेश की 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि समाजवादी पार्टी इन चुनावों के लिए अपनी तैयारियां शुरू करेगी. वैसे, पार्टी कार्यकर्ताओं को बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के रुख पर अखिलेश यादव के कुछ कहने का अब भी इंतजार है.

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राहुल आए रंग में

अहमदाबाद. राहुल गांधी भाजपा पर हमला करने से नहीं चूक रहे हैं और प्रधानमंत्री के गढ़ में जा कर जनता के सामने अपनी बात रख रहे हैं.

राहुल गांधी ने शुक्रवार, 12 जुलाई को आरोप लगाया कि भाजपा सरकारें गिराने के लिए ‘धनबल’ और ‘डरानेधमकाने’ का सहारा ले रही हैं.

याद रहे कि कर्नाटक में 13 महीने पुरानी कांग्रेस और जद (एस) की गठबंधन सरकार से 2 निर्दलीय विधायकों ने समर्थन वापस ले लिया है और कांग्रेस के 13 विधायकों समेत कुल 16 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं.

राहुल गांधी मानहानि के एक मामले में मैट्रोपोलिटन अदालत के सामने पेशी के लिए अहमदाबाद आए हुए थे. मानहानि का यह मामला अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक की तरफ से दायर किया गया है जिस में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एक निदेशक हैं. राहुल गांधी ने खुद को बेकुसूर बताया और उन्हें इस मामले में जमानत मिल गई.

मानहानि के कानून का आजकल अखबारों और राजनीतिबाजों को अदालतों में घसीटने के लिए जम कर इस्तेमाल किया जा रहा है.

ममता हुईं ममतामयी

कोलकाता. ममता बनर्जी ने साबित कर दिया है कि राजनीति उन के खून में बसी है. हाल के लोकसभा चुनाव में भाजपा के बढ़ते दबदबे के बाद उन्होंने खूब कड़े तेवर दिखाए थे और पूरे दमखम के साथ लोहा लिया था. पर जब बात नहीं बनी और उन्हें लगा कि इस से पार्टी को आने वाले विधानसभा चुनाव में नुकसान हो सकता है तो वे मोम की तरह पिघल गईं और गुरुवार, 11 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस के सभी विधायकों से कहा कि वे और विनम्र हो कर जनता से मिलें और अपनी पिछली गलतियों के लिए उन से माफी मांगें.

लगता है कि लोकसभा चुनाव में मिले करारे झटके के बाद से ममता बनर्जी बहुतकुछ नया सीख गई हैं और अभी से ही विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जीजान से जुट गई?हैं.

‘दिग्गी राजा’ का दांव

पुणे. अपने चहेतों में ‘दिग्गी राजा’ के नाम से मशहूर कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार, 12 जुलाई को कर्नाटक और गोवा के हालात पर दावा किया कि नोटबंदी के दौरान भाजपा ने खूब पैसा बनाया और अब उसी पैसे का इस्तेमाल कर पार्टी विधायकों को खरीद रही है. विधायकों को ऐसे खरीदा जा रहा है जैसे बाजार से सामान खरीदा जाता है.

हालांकि, दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार पूरी तरह सुरक्षित है. मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास 121 विधायकों का समर्थन है.

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पत्नियों की सरकार से गुहार

श्रीनगर. जम्मूकश्मीर पर अपना नियंत्रण बनाने के मनसूबे पालने वाली भाजपा के सामने एक नई चुनौती आ गई है. बात यह है कि भारतपाकिस्तान नियंत्रण रेखा के उस पार से एक पुनर्वास योजना के तहत वापस आए पूर्व कश्मीरी आतंकवादियों की पाकिस्तानी पत्नियों ने शुक्रवार, 12 जुलाई को केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की थी कि उन्हें या तो भारतीय नागरिकता दी जाए या फिर वापस भेज दिया जाए.

ऐसी महिलाओं में शामिल ऐबटाबाद की रहने वाली तैयबा ने कहा, ‘‘हम कुल 350 महिलाएं हैं. हमें यहां का नागरिक बनाया जाए, जैसा किसी भी देश में पुरुषों के साथ विवाह करने वाली महिलाओं के साथ होता है. हम भारत सरकार और राज्य सरकार से अपील करती हैं कि या तो हमें पासपोर्ट प्रदान किए जाएं या वापस जाने के लिए यात्रा दस्तावेज प्रदान किए जाएं.’’

 हिमाचल के नए राज्यपाल

शिमला. भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता कलराज मिश्र को हिमाचल प्रदेश का नया राज्यपाल बनाया गया है. याद रहे कि कभी उत्तर प्रदेश और भारतीय राजनीति के कद्दावर नेता रहे कलराज मिश्र को नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 से 2019 के पहले कार्यकाल में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया था, हालांकि उन्होंने साल 2017 में ही मंत्री पद छोड़ दिया था. इस के बाद कलराज मिश्र ने साल 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था.

कलराज मिश्र को आचार्य देवव्रत की जगह हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है जबकि आचार्य देवव्रत को गुजरात का राज्यपाल बनाया गया है.

विज के फिर बिगड़े बोल

अंबाला. हरियाणा के बड़े भाजपाई नेता और राज्य सरकार में मंत्री अनिल विज ने बड़ी ओछी बात कह दी. हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दिए गए इस्तीफे पर अंबाला में 6 जुलाई को अनिल विज ने कहा, ‘‘यह तो उन का फैमिली ड्रामा है. राजीव गांधी ने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है, लेकिन उन के बेटे राहुल ने इस्तीफा दिया तो एक कुत्ता भी नहीं भूंका.’’

इस से पहले फरवरी, 2019 में अनिल विज ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुलना ‘रामायण’ की एक किरदार ताड़का से की थी. तब उन्होंने कहा था, ‘‘छोटे होते थे जब रामलीला देखने जाया करते थे तो उस में एक सीन आया करता था कि ऋषिमुनि जब यज्ञ किया करते थे तो ताड़का आ कर उस में रुकावट डाल दिया करती थी. ठीक उसी तरह की भूमिका ममता बनर्जी कर रही हैं.’’

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लगेगी चुनावी पाठशाला

रायपुर. छत्तीसगढ़ में वोटरों में जागरूकता लाने के लिए चुनाव पाठशाला की शुरुआत की जाने वाली है. इन पाठशालाओं में रोचक खेल और मनोरंजक कार्यक्रमों का सहारा लिया जाएगा. वैसे, राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में वोटिंग के प्रति जागरूक करने के लिए चुनावी पाठशालाएं लगाई गई थीं जिन में चुनावी साक्षरता क्लबों का भी सहारा लिया गया था.

संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी समीर विश्नोई का इस मसले पर कहना है कि पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी साक्षरता

क्लब के जरीए बेहतर काम किया गया था. इस से छत्तीसगढ़ में वोटरों में जागरूकता बढ़ी है.

इस्लाम के नाम पर 4 हजार करोड़ की ठगी

लेखक-  शैलेंद्र कुमार ‘शैल’

जब सारे सुख त्याग कर किसी गुमनाम सी गली में मुंह छिपा कर जीने के लिए मजबूर हो जाएगा और लोग उसे भगोड़े की संज्ञा से नवाजेंगे.45 वर्षीय मोहम्मद मंसूर खान बेंगलुरु के शिवाजीनगर का रहने वाला था. उस ने सन 2006 में बेंगलुरु के शिवाजीनगर में 6 निदेशकों नासिर हुसैन, नाविद अहमद, निजामुद्दीन अजीमुद्दीन, अफसाना तबस्सुम, अफसर पाशा और अरशद खान के साथ मिल कर आई मोनेटरी एडवाइजरी के नाम से एक इसलामिक बैंक की नींव डाली थी.

इसलामिक बैंक की नींव डालने के पीछे उस का मकसद था कि इस बैंक में मुसलिम समाज का ही पैसा जमा हो.इस के लिए उस ने ऐसे लोगों को टारगेट कर के एक पोंजी स्कीम चलाई कि अगर वह उस की आईएमए कंपनी में पैसा निवेश करेंगे तो कंपनी उन्हें मूल धन के साथ हर महीने ढाई से 3 प्रतिशत और साल में 14 से 18 प्रतिशत का मुनाफा देगी.

वे खुद भी कंपनी के मालिक होंगे और उन की कंपनी में अच्छी हिस्सेदारी होगी, उस ने इस स्कीम को ब्याजमुक्त हलाल निवेश का नाम दिया था.

आज भी मुसलिम समाज में अधिकांश लोग ऐसे हैं जो ब्याज को हराम समझते हैं. जो लोग सूद को हराम समझते थे, उन्हें लगा कि एक तरह से वह कंपनी के हिस्सेदार हैं, मालिक हैं और हिस्सेदारी भी अच्छी भली है. लिहाजा कर्नाटक राज्य में रहने वाले सिर्फ मुसलिम समुदाय के तमाम लोगों ने अपनी बड़ीबड़ी रकम मोहम्मद मंसूर खान की आईएमए कंपनी में निवेश करनी शुरू कर दी.

समय आने पर कंपनी ने अपने निवेशकों को वादे के अनुसार मुनाफे के साथ पैसे लौटाए. इस से कंपनी के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ गया और कंपनी में रकम जमा करने वालों की संख्या भी बढ़ गई. 4-5 साल के भीतर कंपनी में निवेशकों की संख्या करीब 40 हजार हो गई थी.

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आईएमए कंपनी में पैसे जमा होने के बाद मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद मंसूर खान और उस के निदेशकों ने कंपनी का विस्तार किया. इन लोगों ने इसलामिक बैंक के साथसाथ अच्छा मुनाफा कमाने के लिए कई और कंपनियों की बुनियाद डाल दी थी.

इन नई कंपनियों के नाम थे आई मोनेटरी एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड, आईएमएम दबाब सेंटर, आईएमए बिल्डर्स ऐंड डेलवपर्स, आईएमए बुलियन ऐंड ट्रेडिंग सर्विस लिमिटेड, आईएमए बुलियन ऐंड ट्रेडिंग एलएलपी, आईएमए इंस्टीट्यूट औफ एजुकेशन, आईएमए ओमन इनवायरमेंट बिजनैस माड्यूल, आईएमए डब्ल्यू ज्वैलरी और आईएमए काउंसलिंग चैरिटेबल सोसायटी. कंपनी का विस्तार होने के साथ साथ मोहम्मद मंसूर खान दोनों हाथों से धन बटोरने लगा.

वादे के मुताबिक कुछ सालों तक मंसूर खान निवेशकों को मासिक और वार्षिक मुनाफे देता रहा. धीरेधीरे यह रिटर्न गिर कर पहले 14 से 9 प्रतिशत पर आया, फिर 7 से 5 प्रतिशत तक आ गया. सन 2018 आतेआते रिटर्न सिर्फ 3 फीसदी ही रह गया.

इस साल फरवरी में जब रिटर्न घट कर 1 फीसदी रह गया तो निवेशकों के सब्र का बांध टूट गया. निवेशकों के दिमाग तब बिलकुल घूम गए जब मई, 2019 तक एक फीसदी रिटर्न भी खत्म हो गया.

निवेशकों को तगड़ा झटका मई, 2019 में तब लगा, जब उन्हें पता चला कि आईएमए का औफिस ही बंद हो गया है. निवेशकों ने जब इस मुद्दे पर बात की तो मंसूर खान ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि वे चिंता न करें, उन के रुपए सुरक्षित हैं.

मंसूर खान ने पहले तो कहा कि ईद के चलते औफिस बंद था, मगर जब लगातार विदड्रौल रिक्वेस्ट आने लगीं तो वह अंडरग्राउंड हो गया. मंसूर के अंडरग्राउंड होते ही निवेशकों में खलबली मच गई. अपने रुपयों को ले कर वे सड़क पर उतर आए.

तब और ज्यादा हैरानी हुई जब कंपनी पार्टनर और मंसूर खान के करीबी दोस्त खालिद अहमद ने 4 जून, 2019 को बेंगलुरु के कार्शियल स्ट्रीट थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया. उन्होंने आईएमए के एमडी मंसूर पर 4 करोड़ 80 लाख रुपए की ठगी का आरोप लगाया था. खालिद अहमद की शिकायत पर भादंसं की धारा 406, 420 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया. बात कर्नाटक के डीजीपी नीलमणि राजू तक पहुंची तो उन के कान खड़े हो गए. मामला अमानत में खयानत से जुड़ा हुआ था, उन्होंने इसे काफी गंभीरता से लिया और एएसपी (क्राइम) आलोक कुमार को मामले की जांच कर के रिपोर्ट देने को कहा.

6 जून, 2019 को आलोक कुमार ने एमडी मंसूर खान को पूछताछ के लिए औफिस बुलाया. मंसूर खान आ गया तो एएसपी कुमार ने उस से उस के बिजनैस पार्टनर खालिद अहमद द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे की बाबत एक घंटे तक पूछताछ की.

पूछताछ के बाद उन्होंने मंसूर खान से कंपनी की बैलेंस शीट और अन्य दस्तावेज पेश करने को कहा. इस पर मंसूर खान ने कंपनी की बैलेंस शीट और अन्य दस्तावेज पेश करने के लिए 9 जून तक का समय मांगा. एएसपी आलोक कुमार ने उसे 3 दिन की मोहलत दे दी.इसी बीच कहानी में एक नया मोड़ आ गया. 7 जून को मंसूर खान की एक औडियो क्लिप वायरल हुई. औडियो में खान ने कहा कि वह अधिकारियों की प्रताड़ना से आजिज आ कर आत्महत्या करने जा रहा है. उसे ढूंढने की कोशिश न की जाए. औडियो के वायरल होने के बाद उग्र लोगों ने आईएमए के औफिस पर हमला बोल दिया, लेकिन पुलिस ने किसी तरह स्थिति संभाल ली.

देश से भागने की तैयारी पहले से ही थी

पुलिस मंसूर खान के वायरल औडियो की सच्चाई जानने में जुटी हुई थी कि 8 जून को एक और चौंकाने वाली बात पता चली तो पुलिस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. पता चला कि मंसूर खान 8 जून की रात पौने 9 बजे की फ्लाइट से देश छोड़ कर दुबई चला गया.

छानबीन में जानकारी मिली कि उस ने प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से शाम के पौने 7 बजे इमिग्रेशन क्लियर करा लिया था और रात पौने 9 बजे उस ने दुबई की फ्लाइट पकड़ ली.

एयरपोर्ट के सीसीटीवी कैमरे की जांच करने पर पता चला कि शाम के समय मोहम्मद मंसूर खान अपनी कार खुद चला कर एयरपोर्ट पहुंचा था. अपनी कार उस ने एयरपोर्ट के बाहर खड़ी कर दी और पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए देश छोड़ कर फरार हो गया.

उस के देश छोड़ कर फरार होते ही निवेशकों में बेचैनी छा गई. निवेशक अपने पैसों को ले कर बुरी तरह परेशान थे. परेशानी स्वभाविक ही थी, क्योंकि निवेशक परेशान क्यों न हों? कंपनी में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाड़ के मुसलिम समाज के करीब 40 हजार निवेशकों ने कंपनी में पैसे जमा किए थे, जिस में 200 करोड़ रुपए तो सिर्फ मुसलिम महिलाओं द्वारा निवेश किए गए थे.

एमडी मोहम्मद मंसूर खान के फरार होते ही पुलिस सतर्क हो गई और अगले दिन यानी 9 जून को आईएमए के 6 अन्य डायरेक्टरों नासिर हुसैन, नाविद अहमद, निजामुद्दीन अजीमुद्दीन, अफसाना तबस्सुम, अफसर पाशा और अरशद खान को गिरफ्तार कर लिया. शिवाजीनगर स्थित मंसूर खान के आवास से उस की लग्जरी एसयूवी कार भी जब्त कर ली गई.

आईएमए के निदेशकों को पुलिस ने गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन यह पता नहीं चल पा रहा था कि कंपनी ने लोगों को कितने का चूना लगाया है मोटे तौर पर 15 हजार करोड़ की ठगी का अनुमान लगाया जा रहा था. मंसूर खान के देश छोड़ कर फरार होते ही कर्नाटक सरकार की नींद टूटी.

सरकार ने मामले की जांच के लिए डीजीपी नीलमणि राजू को पत्र लिखा. मामले की जांच के लिए डीजीपी नीलमणि ने जांच के लिए 3 पुलिस टीमें बनाईं.

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एक टीम थाना स्तर से बनाई गई, जहां बड़े पैमाने पर निवेशकों ने थाने में कंपनी के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए थे. दूसरी टीम 11 सदस्यों की एसआईटी का गठन कर बनाई गई. तीसरी जांच टीम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बनाई गई थी. गिरफ्तार सभी निदेशकों से पुलिस और अन्य जांच कमेटी ने अलगअलग पूछताछ की. पूछताछ के बाद कहानी कुछ इस तरह सामने आई—

बेंगलुरु के शिवाजीनगर का रहने वाला मोहम्मद मंसूर खान एक पढ़ालिखा जहीन इंसान था. पढ़लिख कर वह अच्छी नौकरी करना चाहता था. इस के लिए उस ने कई जगह हाथपैर मारे, लेकिन तकदीर के मारे मंसूर खान को कहीं अच्छी नौकरी नहीं मिली. इस के बाद उस ने नौकरी के पीछे दौड़ना छोड़ दिया. वह सोचने लगा कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए, जिस से 2 पैसे उसे भी मिलें और दूसरों के घर के भी चूल्हे जलते रहें.

शातिर दिमाग के मंसूर खान ने जल्द ही इस का भी उपाय ढूंढ लिया. उस ने एक ऐसा बैंक स्थापित करने की योजना बनाई जिस में सिर्फ मुसलिम समाज का ही पैसा निवेश हो और उन्हें ब्याज भी न देना पड़े. मंसूर खान ने योजना बनाई ही नहीं बल्कि सन 2006 में उसे धरातल पर भी उतार लिया. चूंकि इसलाम में ब्याज से मिली रकम को अनैतिक और इसलाम विरोधी माना जाता है. इस धारणा को तोड़ने के लिए मंसूर ने धर्म का कार्ड खेला और निवेशकों को बिजनैस पार्टनर का दरजा दिया.

साथ ही उन्हें भरोसा दिलाया कि 50 हजार के निवेश पर उन्हें मासिक ढाई से 3 प्रतिशत और वार्षिक 14 से 18 प्रतिशत रिटर्न दिया जाएगा. इस तरह वह मुसलमानों के बीच ‘ब्याज हराम है’ वाली धारणा तोड़ने में कामयाब रहा. अपनी स्कीम को आम मुसलमानों तक पहुंचाने के लिए उस ने स्थानीय मौलवियों और मुसलिम नेताओं को साथ लिया. सार्वजनिक तौर पर मंसूर खान और उस के कर्मचारी हमेशा साधारण कपड़ों में ही दिखते लंबी दाढ़ी रखते और औफिस में ही नमाज पढ़ते.

नियमित तौर पर ये लोग मदरसों और मसजिदों में दान दिया करते थे. निवेश करने वाले हर मुसलिम को कुरान भेंट की जाती थी. शुरुआत में निवेश के बदले रिटर्न आते और निवेशकों को बड़े चैक दिए जाते, जिस से उस की योजना का और ज्यादा प्रचार हुआ.

योजना के प्रचार और निवेशकों को मिले मुनाफे से मुसलिम समाज को भरोसा हो गया कि यह इसलामिक बैंक भरोसे का बैंक है. यहां जमापूंजी सुरक्षित है. मंसूर खान योजना को पोंजी स्कीम के तहत चला रहा था. पोंजी स्कीम क्या है, जरा इस पर भी एक नजर डालते हैं.

पोंजी स्कीम या धोखाधड़ी का यह सिलसिला हालफिलहाल से नहीं, बल्कि सालों से चलता आ रहा है. पोंजी स्कीम का जन्म इटली में जन्मे चार्ल्स पोंजी नाम के शख्स से हुआ है, जिस ने इटली, कनाडा और अमेरिका में अपने धोखेबाजी के धंधे की बुनियाद रखी थी. तब से ये निरंतर अग्रसर है.

पोंजी स्कीम किसी कंपनी द्वारा नियोजित होती है, जिन में लोगों को अपने पैसे उस योजना में निवेश करने होते हैं. उस के बाद उन्हें और भी लोगों को उस कंपनी से जोड़ना होता है, जिस के बदले उन्हें अतिरिक्त लाभ दिया जाता है.

पोंजी स्कीम में रिटर्न कई गुना ज्यादा और 100 फीसदी नो रिस्क के दावे पर मिलता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नए जुड़े मेंबर का पैसा पुराने जुड़े मेंबर के पास जाता है और यह सिलसिला चलता रहता है. जनता कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में धोखे का शिकार बनती रहती है.

रिजर्व बैंक औफ इंडिया ने कर्नाटक सरकार को किया था सचेत मंसूर खान भले ही कारपोरेट जगत में  मंसूर खान की ठगी का बिजनैस जोरों पर चल रहा था. निवेशकों द्वारा जमा किए पैसों से मंसूर ने कंपनी का विस्तार किया और 7 अन्य नई कंपनियां बनाईं. जिन के नाम हम शुरू में बता चुके हैं. नित नई ऊंचाइयों को छू रहा था, मगर वह यह भूल रहा था कि उस की निगरानी कोई और भी कर रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक ने सन 2015 की शुरुआत में और फिर 2018 में बेंगलुरु में सब से वांछित संदिग्ध आईएमए को धोखधड़ी के रूप में चिह्नित किया था.

इस के बाद रिजर्व बैंक ने इस ओर इशारा करते हुए कर्नाटक सरकार को अलर्ट किया था. आरबीआई ने सरकार को बताया था कि आईएमए निवेशकों से रुपए जमा करा कर सिर्फ पोंजी स्कीम के तहत योजना चला रही है.

आरबीआई के अलर्ट के बावजूद सरकार ने आईएमए के खिलाफ कोई ठोस काररवाई नहीं की. सरकार ने आरबीआई को दलील दी कि आईएमए कंपनी निवेशकों से रुपए डिपोजिट नहीं करा रहा. वह लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप कंपनी है यानी डिपोजिट लेने के बजाए आईएमए निवेशकों को साझेदारी दे रहा है.

सरकार की यह दलील सुन कर आरबीआई चुप हो गई थी. बताया जाता है कि पैसों के बल पर मंसूर खान ने कर्नाटक सरकार में अपनी पैठ अंदर तक बना ली थी. उस के गुनाह न तो सरकार को दिख रहे थे और न ही उस की गूंज सुनाई दे रही थी. 3 सालों तक ऐसे ही चलता रहा. सरकार कान में तेल डाल कर सो गई थी.

आरबीआई ने सन 2018 में कर्नाटक सरकार को एक बार फिर चेतावनी भेजी. इस बार भी सरकार को अलर्ट किया गया कि कंपनी निवेशकों से अवैध तरीके से पैसे डिपोजिट करा रही है और निवेशकों को उन के लाभांश देने में असफल है. आरबीआई के अलर्ट के बाद इस बार सरकार नींद से जागी.

सरकार ने राजस्व विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर को इस की जांच के लिए नियुक्त किया. असिस्टेंट कमिश्नर ने जब जांच की तो उस में बड़ा झोल पाया यानी आरबीआई द्वारा दी गई सूचना सच साबित हुई.

असिस्टेंट कमिश्नर ने इस मामले को गंभीरता से ले कर कई कठोर फैसले लिए. उन्होंने 16 नवंबर, 2018 को आईएमए के खिलाफ एक पब्लिक नोटिस सार्वजनिक किया.

नोटिस में उल्लेख किया, ‘सरकार के संज्ञान में आया है कि मेसर्स आई मोनेटरी एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड और उस की सहयोगी कंपनियों ने अवैध रूप से जनता से पैसे वसूल किए हैं और उस धनराशि को अपने स्वयं के हित में लगाया है, जिस से भुगतान में चूक हुई है. जमाकर्ताओं के पैसे शीघ्र वापस करने के प्रबंध करें.’ इस के बाद उन्होंने धोखाधड़ी करने वाले सातों निदेशकों के नाम सूचीबद्ध किए. धीरेधीरे मंसूर खान के मंसूबे सामने आने लगे थे. उस ने कंपनी में जनता की निवेश रकम लौटाने का इरादा त्याग दिया था. दरअसल, इस के पीछे एक खास वजह सामने आई थी. केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद सरकार ने सन 2016 में अचानक नोटबंदी का फैसला लिया और रातोंरात पुराने नोट बंद कर दिए.

सरकार के इस निर्णय से कालाधन रखने वालों की कमर टूट गई. मंसूर भी इस का शिकार हुआ था. उसी साल सरकार ने जीएसटी भी लागू कर दिया था. जीएसटी की वजह से उस की पोंजी स्कीम भी चरमरा कर रह गई. उस के जनता से किए रिटर्न के वादे धराशाई हो गए तो निवेशकों के सब्र का बांध टूट गया.

बताते हैं कि बेंगलुरु के मैसूर रोड के ओल्ड गुड्डलाहल्ली के रहने वाले 55 वर्षीय अब्दुल पाशा ने कंपनी में 8 लाख रुपए का निवेश किया था. उन की 3 बेटियां और एक बेटा था. जुलाई, 2019 में उन की बेटी की शादी होनी थी. इस बीच आईएमए के द्वारा ठगी किए जाने की जानकारी मिलते ही उन के सीने में तेज दर्द उठा. दर्द की शिकायत मिलते ही घर वाले पाशा को इलाज के लिए अस्पताल ले गए. इलाज के दौरान उन की मौत हो गई.

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मंसूर के अंडरग्राउंड होते ही निवेशकों में खलबली मच गई. तब और ज्यादा हैरानी हुई जब कंपनी पार्टनर और मंसूर खान के करीबी दोस्त खालिद अहमद ने बेंगलुरु के कार्शियल स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज कराई.

अरबों की चलअचल संपत्ति थी कंपनी के निदेशकों की

26 जून, 2019 को प्रवर्तन निदेशालय ने अनौपचारिक रूप से बेंगलुरु स्थित आईएमए ग्रुप औफ कंपनीज की 209 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर ली. इस अटैचमेंट में 197 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति, 105 बैंक खातों का पता चला, जिन में से 51 बैंक खातों से 98 लाख रुपए, एचडीएफसी बैंक से 11 करोड़ रुपए और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण जमा योजना में जमा राशि शामिल थी.

प्रवर्तन निदेशालय ने यह काररवाई 4 जून, 2019 को कार्शियल स्ट्रीट थाने में एमडी मोहम्मद मंसूर खान के खिलाफ दर्ज की गई भादंसं की धारा 406 और 420 के आधार पर की थी. बेंगलुरु पुलिस ने आईएमए ग्रुप औफ कंपनीज और इस के प्रबंध निदेशक मोहम्मद मंसूर खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था.

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच की काररवाई शुरू की. जांच के दौरान पता चला कि आरोपी मंसूर खान ने संस्थाओं में पोंजी योजनाओं के माध्यम से 40 हजार से अधिक मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के लोगों से कंपनी में रुपए जमा कराए.

पुलिस की जांच जैसेजैसे आगे बढ़ती गई, वैसेवैसे आईएमए का कच्चा चिट्ठा खुलता गया. जांच में पता चला कि जनता द्वारा किए गए निवेश पर वादा किए गए मासिक रिटर्न का भुगतान करने के लिए आईएमए समूह कोई व्यवसाय नहीं कर रहा था बल्कि मोहम्मद मंसूर खान एक पोंजी योजना चला रहा था. मंसूर खान के निर्देशों पर ही उस के सभी निदेशक काम कर रहे थे.

जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने अब तक मोहम्मद मंसूर खान और उस की संस्थाओं के नाम पर आयोजित 20 अचल संपत्तियों की पहचान की है, जिन्हें ठगी के रूप में अर्जित किया गया है. कुल अचल संपत्तियों का मूल्यांकन सरकारी मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा 197 करोड़ आंका गया. ईडी ने एक प्रैस विज्ञप्ति के जरिए ये बात सार्वजनिक की है.

बैंक को भी 600 करोड़ का चूना लगाने के चक्कर में था मंसूर

विभिन्न निजी बैंकों और आईएमए समूह की कंपनियों की सहकारी समितियों के साथ 105 बैंक खातों की जांचपड़ताल करने पर ईडी को पता चला कि मोहम्मद मंसूर खान को निवेश के रूप में लगभग 4 हजार करोड़ मिले थे. जनता की यह रकम आरोपी खान और उस के निदेशकों ने अपने विभिन्न खातों में डाल ली थी. यही नहीं, खान ने निदेशकों और अन्य सहयोगियों के नाम पर विभिन्न अचल और चल संपत्तियों को सार्वजनिक कर दिया ताकि जांच में यह पता न चल सके कि इन बेनामी संपत्तियों के असल मालिक कौन हैं?

जांच के दौरान कंपनी के जिन 105 बैंक खातों की जानकारी मिली, उन में जमा 12 करोड़ रुपए ईडी ने जब्त कर लिए. मंसूर खान ने निवेशकों के रुपयों में से लगभग 44 करोड़ रुपए की नकदी विभिन्न बैंक खातों में जमा की थी.

जब आयकर विभाग को इस की भनक लगी तो उस के कान खड़े हो गए. इस पर आयकर विभाग ने काररवाई की तो पता चला कि आईएमए समूह ने आयकर विभाग को 22 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स चुकाया था. इस में से 11 करोड़ रुपए की शेष राशि एक बैंक में पड़ी थी, जिस की पहचान जांच में की गई.

197 करोड़ रुपए की 20 अचल संपत्तियां और लगभग 12 करोड़ रुपए की चलअचल संपत्ति अधिनियम के तहत ईडी ने जब्त कर ली. ईडी फरार आरोपी मोहम्मद मंसूर खान के खिलाफ रेड कौर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में है, जिस से भगोड़ा अपराधी अधिनियम को लागू करने की संभावनाएं तेज हो गईं.

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली बात पता चली. मोहम्मद मंसूर खान ने फरार होने से पहले आखिरी बार 600 करोड़ के भारीभरकम लोन लेने की कोशिश की थी. कर्नाटक सरकार के एक मंत्री ने उसे इस के लिए एनओसी लगभग दे भी दी थी, मगर एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की सतर्कता से यह प्लान फेल हो गया था.

जांच में पता चला कि मंसूर खान ने लोन के लिए एक बैंक का रुख किया था. बैंक को मंसूर खान के खिलाफ जारी धोखाधड़ी के नोटिस के बारे में जब पता चला तो उस ने उसे अनापत्ति प्रमाणपत्र लाने को कहा. मंसूर ने अपनी ऊंची पहुंच के चलते इस एनओसी का जुगाड़ भी कर लिया था.

एनओसी पर प्रमुख सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी के दस्तखत होने बाकी थे. आईएएस अधिकारी को मंसूर खान की जालसाजी के बारे में पहले ही पता चल गया था. उन्होंने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया और दस्तावेजों पर साइन करने से साफ इनकार कर दिया.

इस पर मंत्री ने उन पर काफी दबाव बनाया, मगर उन पर इस दबाव का कोई असर नहीं हुआ. अधिकारी की सूझबूझ के चलते 600 करोड़ का एक और चूना लगतेलगते बच गया था.

जांच के दौरान 4 हजार करोड़ रुपए की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है. आगे की जांच की प्रक्रिया जारी है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा है कि आईएमए के मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है. सरकार निवेशकों की स्थिति समझती है. इस मुद्दे पर गृहमंत्री एम.बी. पाटिल से भी बात की तो उन्होंने बताया कि यह मामला सेंट्रल क्राइम ब्रांच (सीसीबी) को सौंप दिया गया है. दोषियों पर काररवाई की जाएगी.

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कथा लिखे जाने तक ईडी मंसूर खान के खिलाफ रेड कौर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी में जुटी थी.

पुलिस के मुताबिक, मंसूर खान दुबई भागने से पहले अपने परिवार को पहले ही दुबई में शिफ्ट करा चुका था ताकि उस के देश छोड़ कर भागने पर पुलिस परिवार को परेशान न कर सके. देखना है कि क्या पुलिस ठग मंसूर खान को दुबई से भारत वापस ला पाती है या नहीं.

गिरफ्त में आया मंसूर खान

इसलाम में सूद को हराम माना जाता है, भले ही वह किसी भी माध्यम से आए. ज्यादातर मुसलमान इस बात को मानते भी हैं और अमल भी करते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि मुसलिम समुदाय ज्यादा आय का पक्षधर न हो. हर कोई चाहता है कि उस की नियमित आय के अतिरिक्त भी आय का कोई साधन हो. हराम माने जाने वाले सूद के पैसे को अपने तरीके से हलाल बता कर हैदराबाद की डाक्टर नौहेरा शेख ने देशविदेश के मुसलिम निवेशकों से 3000 करोड़ रुपए की ठगी की थी.

भले ही नौहेरा पकड़ी गई हो, लेकिन निवेशकों की खूनपसीने की कमाई का पैसा तो मिलने से रहा. इसी तरह इसलामिक बैंक (आई मोनेटरी एडवाइजरी) के नाम पर 4000 करोड़ रुपए की ठगी करने वाला मंसूर खान पल्ला झाड़ कर 8 जून, 2019 को दुबई भाग गया था. जाने से पहले उस ने एक वीडियो जारी कर के सुसाइड करने की धमकी भी दी थी. उस के खिलाफ जांच कर रही एसआईटी और ईडी ने लुकआउट सरकुलर भी जारी किया था.

एसआईटी ने दुबई में अपने सूत्रों से उस का पता लगा कर उस से कहा कि वह भारत लौट आए और खुद को कानून के हवाले कर दे. गनीमत है कि इस चेतावनी पर 19 जुलाई को वह भारत लौट आया. अब एसआईटी और ईडी उस से पूछताछ भी करेंगी और उस की धोखाधड़ी की जांच भी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

(कहानी सौजन्य मनोहर कहानी)

कश्मीर में धारा 370 समाप्त

देश के एक बड़े वर्ग की इच्छा को भुनाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपने संसदीय बहुमत के सहारे कश्मीर के 1947 के विलय के अनुबंधों को तोड़ते हुए जम्मूकश्मीर को अलग संवैधानिक स्थान देने वाले अनुच्छेद 370 और 35ए को एक झटके में कुछ घंटों में समाप्त कर के जम कर वाहवाही लूटी. 1947 से ही कश्मीर भारत के लिए नासूर बना हुआ है और मुसलिमबहुल जनता वाला यह राज्य भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है.

इस ऐतिहासिक फैसले का परिणाम इस समस्या को सुलझाने में हो या न हो कश्मीर के अलावा बाकी भारतीयों को जो खटका रहता था कि उन को विशिष्ट स्तर पर क्यों रखा जा रहा है, समाप्त हो गया है. भारतीय जनता पार्र्टी ने यह कदम उठा कर उन भारतीयों को संतोष दिया है जो एक देश एक संविधान का नारा देते थे. ये लोग बाकी संविधान को कितना मानते थे, कितना समझते थे, यह बात न आज पूछने की है, न कहने की.

भारत सरकार को अंदाजा है कि इस कदम को उठाने के बाद कश्मीर में और आग सुलगेगी. इसीलिए कश्मीर को पूरी छावनी बना डाला गया है और वहां से पर्यटकों को निकाल दिया गया है. यहां तक कि अचानक अमरनाथ यात्रा भी स्थगित कर दी गई. भारत सरकार को अब पूरा एहसास है कि कश्मीर विवाद और उलझेगा, तभी तो वहां भारी संख्या में सेना व अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं.

देश का हर नागरिक देश की अखंडता व एकता में विश्वास रखता है और जब अरसा पहले तमिलों ने या पंजाब में सिखों ने अलग होने की मांग रखी थी तो भारत सरकार ने बल व कूटनीति दोनों का इस्तेमाल कर के इन इलाकों को शांत किया था. आशा की जानी चाहिए कि यही कश्मीर के साथ होगा.

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कश्मीर का वैसे तो भारत में विलय 1947 में ही हो गया था पर जो संवैधानिक रेखा खिंची थी उस के हटने से वही फर्क पड़ेगा जो गोवा, पुडुचेरी या सिक्किम पर पड़ा. कभी विदेशी ताकतों के अधीन रहे या स्वतंत्र इन भूभागों के भारत में पूर्ण विलय के बाद न वहां के जनमानस पर कोई असर पड़ा है और न बाकी देश पर. कश्मीर के अनुच्छेदों 370 व 35ए की समाप्ति के बाद कश्मीर की हालत सुधरेगी यह तो आशा नहीं पर बाकी भारत को भारी संतोष होगा कि उस ने एक संवैधानिक विजय पाई है.

भारतीय जनता पार्टी को वही लाभ होगा जैसा इंदिरा गांधी को 1969-71 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण, प्रिवी पर्स समाप्त करने, कपड़ा मिलों व खानों

का राष्ट्रीयकरण और बंगलादेश

को अलग कराने से हुआ था.

इंदिरा गांधी के इन ऐतिहासिक

कदमों का देश में जो स्वागत हुआ

था, वैसा ही अब हो रहा है, पर इंदिरा गांधी ने यह अपनी गद्दी की खातिर किया था.

कश्मीर के बारे में निर्णय लेने में अब दिल्ली को दो बार नहीं सोचना पड़ेगा कि संविधान आड़े आ रहा है. केंद्र सरकार को किसी तरह की अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी. हां, कश्मीरी इसे कैसे पचाएंगे, यह कहना कठिन है. भारतीय जनता पार्टी फिलहाल तो कश्मीरियों को पुचकारने या मनाने के मूड में नहीं है.

कर्नाटक में करा नाटक

भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार कर्नाटक में पौराणिक परंपरा के अनुसार सुग्रीवों व विभीषणों के सहारे कांग्रेस और जनता दल सैक्युलर की गठबंधन सरकार को गिरा कर लंका को जीत ही लिया है. अब किसी विभीषण को राज्य का उपमुख्यमंत्री बना कर रामराज्य स्थापित कर दिया जाएगा. जब लोकसभा में भारी बहुमत हो और अधिकांश राज्यों में भाजपा की ही सरकारें हों, ऐसे में भाजपा की कर्नाटक की बेचैनी और विधायकों की खरीद समझ से परे है.

यह स्पष्ट है कि भाजपा उस कल्पित चक्रवर्ती राज के सपने देख रही है जिस में कश्मीर से कन्याकुमारी तक भाजपा का राज हो और कामगार खुश हों या न हों, ऋषिमुनियों को लगातार प्रतिष्ठा, दान और पैसा सब मिलता रहे. ऐसे में कर्नाटक क्यों हाथ से दूर रहे. 5 गांव मांगने वाले पांडवों ने कहनेसुनने पर अपने पूरे खानदान को मरवा दिया था और महाभारत के युद्ध के अंत में बचे पांडवों को हिमालय पर जा कर आत्महत्या करनी पड़ी थी.

जहां चुनावों में विधिवत जीत मिली हो वहां तो कुछ नहीं कहा जा सकता. पर जहां बहुमत न मिला हो वहां भी सरकार बनाने की जो जिद भाजपा ने पकड़ ली है, वह देश को भारी पड़ेगी. इस जिद के चलते साम, दाम, दंड व भेद अपनाए जाएंगे और यही साम, दाम, दंड, भेद भाजपा की शासन संस्कृति बन जाएंगे. ये राज्य के हर अंग पर चलेंगे.

सरकार पहले ही जाति व धर्म का भेद भुना कर पूरे समाज को दीवारों से बांट रही है. हर धर्म ही नहीं, हर जाति के लोग भी अपने में सिमट रहे हैं कि कहीं उन के अस्तित्व पर आंच न आ जाए, उन की किसी कमजोरी या गलती को तिल का ताड़ न बना दिया जाए. कर्नाटक में कांग्रेस के बागी विधायक भाजपा से इसीलिए जा मिले ताकि उन को संरक्षण मिल सके.

जब भी कोई शासक अति शक्तिशाली होता है, वह थोड़े से विरोध को भी नहीं सह सकता. उस के लिए लोकतंत्र एक सीढ़ी मात्र होता है जिसे चढ़ने के बाद उसे जला देना ठीक रहता है ताकि और कोई उस का इस्तेमाल कर चुनौती न दे सके. कर्नाटक में सरकार का फेरबदल अनावश्यक था. एक लोकतांत्रिक पार्टी सत्तारूढ़ पार्टी मेंहो रही उठापटक को चुनावों में भुना सकती है, अपनी सरकार बनाने के लिए नहीं.

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कांग्रेस और जनता दल सैक्युलर अपनी पार्टियों में घुसे सैकड़ों सुग्रीवों और विभीषणों से मुकाबला नहीं कर सकते. जाति का सवाल उठे बिना यह स्पष्ट है कि आज जो दलबदल हो रहे हैं उन में वही सब से बड़ा कारण है. कांग्रेस और दूसरे दलों की अब खैर नहीं, क्योंकि भाजपा अपना एकछत्र राज चाहती है. यही सपना कभी 1977 में मोरारजी देसाई ने देखा था और यही राजीव गांधी ने 1984 में संसद में भारी बहुमत पा कर देखा था.

धार्मिक कट्टरता

रांची की जिला अदालत के एक मजिस्ट्रेट मनीश कुमार सिंह ने कट्टरपंथी बनती 19 वर्षीया हिंदू लड़की रिचा भारती को फेसबुक पर अनापशनाप पोस्ट करने से रोकने के लिए जो कदम उठाया, वह सही होते हुए भी अजीब था. इसलाम को बदनाम करने के प्रयास में अगर पहली पेशी में बिना पूरी सुनवाई के सिर्फ जमानत की शर्त पर कुरान की 5 प्रतियां बांटने को कहा जाए तो यह एक तरह की सजा ही होगी. जो मजिस्ट्रेट को नहीं देनी चाहिए थी.

अदालत के इस फैसले का लाभ देशभर के हिंदूवादी लोगों ने जम कर उठाया. वे  व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, ट्विटर, फेसबुक पर मजिस्ट्रेट का मखौल उड़ाने, उन की भर्त्सना करने और रिचा भारती को महान बताने में जुट गए. 2 दिनों बाद मजिस्ट्रेट ने फैसला तो बदला लेकिन तब तक धर्म के दुकानदारों को भरपूर बारूद मिल चुका था.

मजिस्ट्रेट की नीयत खराब न थी. वे इतना ही चाहते होंगे कि 19 वर्षीया लड़की धर्म की दुकानदारी के पचड़े में न पड़े और कुरान बांटने के बहाने मुसलमानों के संपर्क में आए. पर, हिंदू कट्टरों ने लगातार खोदी जा रही खाई में इसे रुकावट समझा.

ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सऐप ऐसी पोस्टों से भरे पड़े हैं जिन में मुसलिम कपड़े पहने युवक बुराभला कह रहे हैं. ये पोस्ट असली हैं, इस को साबित करना असंभव है. यह संभव है कि किसी भी हिंदू को टोपी पहना कर, दाढ़ी बढ़वा कर कुछ भी कहते रिकौर्डिंग कर लें और फिर दुष्प्रचार के लिए डाल दें. आज का डरा हुआ मुसलमान, दलित, पिछड़ा इतनी हिम्मत नहीं रखता कि वह पाखंडियों के बारे में कुछ कह सके, धमकियां देना तो बहुत दूर की बात है. पर, हिंदू धर्म के प्रचारकों के लिए इस नए प्रकार का नाटक कराना वैसा ही आसान है जैसा वे रामलीला में राक्षसों की पोशाक पहना कर युवाओं से कराते हैं.

देश का टुकड़ेटुकड़े गैंग उदारवादियों में नहीं है जो मानवता की बात करते

हैं. टुकड़ेटुकड़े गैंग तो धर्म के अंधविश्वासियों में है जो हर रोज भारत माता की जय और जय श्रीराम के नारे लगवाते हैं.

सुरक्षा कहां जरूरी

नेताओं के चारों ओर काली या खाकी वरदी में बंदूकधारी गार्डों की भीड़ कई बार नेताओं को छिपा देती है और उन्हें अपने समर्थकों से दूर कर देती है. फिर भी न जाने क्यों ज्यादातर नेता इस सिक्योरिटी को अपने लिए तमगा समझते रहे हैं जबकि यह उन के और समर्थकों के बीच अकसर दीवार भी बन जाती है. साथ ही, इस भीड़ में मौजूद गुप्तचर सत्तारूढ़ दल के नेताओं के लिए घातक भी हो सकते हैं.

देश में कानूनव्यवस्था ऐसी नहीं है कि तालियां बजाई जाएं. पर 10-15 गार्डों की सुरक्षा को रखना न केवल सरकार पर निरर्थक बोझ है, यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ भी है. सुरक्षा मन से होती है. गांधी की हत्या हो गई थी. इंदिरा गांधी की हत्या सुरक्षाकर्मियों ने ही कर दी थी. राजीव गांधी तमाम सुरक्षा के बावजूद मारे गए थे.

सुरक्षा केवल मानसिक बल से मिलती है, सरकारी गार्डों से नहीं. आज जिस तरह से आत्मघाती हत्यारों को तैयार किया जा रहा है, उस से कोई

भी सुरक्षित नहीं है. आज बाजार में राइफलें खुलेआम उपलब्ध हैं जो काफी दूर तक अचूक निशाना साध सकती हैं. वहीं, पुलिस व सेना से ऐसी राइफलों को चुरानाछीनना भी आम  है. इन की, चाहो तो, तस्करी भी आसानी से हो सकती है.

अगर सरकार ने बहुत से नेताओं

व दूसरे लोगों की सुरक्षा का स्तर घटाया है तो सही किया है. यह चाहे राजनीतिक विरोध के चलते किया गया हो या सुरक्षा कर्मियों की निरर्थकता के लिए, फैसला सही ही है. सुरक्षा तो वहां होनी चाहिए जहां पैसा है, कमजोर लोग हैं, बच्चे हैं. आमतौर पर वे जगहें असुरक्षित रहती हैं.

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हमारे यहां महल्लों में पुलिस की नियमित गश्त लगना बंद हो गई है. घरवाले अपने आसपास तैनात पुलिसमैन का नाम व नंबर जानना तो क्या, शक्ल भी नहीं पहचानते. हर 100-200 घरों के आसपास एक नियमित गश्त करने वाला नेताओं की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी है. वह अपरोक्ष रूप में नेताओं को भी सुरक्षा देगा क्योंकि पुलिसमैन बहुत कुछ पता कर सकता है.

कैसे बचाए धान की फसल को कीड़ों से,जानें

लेखक- डा. ऋषिपाल

धान खरीफ की फसल है. जिस तरह धान की फसल लेने के लिए नम व गरम आबोहवा की जरूरत होती?है, ठीक उसी तरह से कीट की

बढ़वार और प्रजनन के लिए भी इसी तरह की जलवायु की जरूरत होती है. इसी वजह से धान की फसल पर अनेक कीटों का हमला होता है.

यही वजह है कि फसल को कम नुकसान पहुंचाने वाले कीट भी नुकसान पहुंचाने लगते?हैं. कीटों की वजह से धान की फसल में तकरीबन 10-15 फीसदी उत्पादन में कमी आ जाती?है.

मुख्य कीट और बचाव

पीला तना बेधक : इस कीट की मादा के अगले जोड़ी पंख पीले रंग के होते?हैं जिन के मध्य में काले रंग का बिंदु होता है. कीड़े के पिछले पंख भूसे के रंग जैसे होते हैं. मादा कीट की उदर की नोक पर भूरे पीले रंग का गुच्छा होता है.

इस कीट की पूरी तरह से विकसित सूंड़ी का रंग पीला सफेद होता?है. इस कीड़े के प्रौढ़  रात में घूमते हैं. कीड़े की मादा रात में 7 से 9 बजे के बीच अपने अंडे मुलायम पत्तियों की नोक पर देती है.

मादा गुच्छों में 100 से 200 अंडे देती?है. अंडे 7-8 दिन में फूट जाते हैं और उन से सूंडि़यां निकल आती हैं. नवजात सूंड़ी पत्ती की ऊपरी सतह पर चढ़ कर रेशमी धागों के सहारे दूसरे पौधों पर पहुंच जाती?है.

शुरुआती अवस्था में इस कीट की सूंड़ी पत्ती के ऊपर धारी सी बना कर खाती?है. तकरीबन 1 हफ्ते बाद सूंड़ी तने में छेद कर के अंदर घुस जाती?है और नुकसान पहुंचाती है.

इस कीट का प्रकोप फसल की बढ़वार अवस्था में होता है और पौधे का नया बढ़ने वाला भाग यानी बीच की पत्ती वाला भाग सूख जाता है. इसे मृत गोभ कहते?हैं. इस गोभ को आसानी से बाहर खींचा जा सकता?है.

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फसल की बाली में प्रकोप होने पर कुछ पौधों की बालियां अंदर ही अंदर सूख जाती हैं और बाहर नहीं निकलती?हैं. पौधों में बालियां निकलने के बाद जब कीट का हमला होता?है तब बालियां सूख कर सफेद दिखाई देती हैं और उन में दाने नहीं पड़ते?हैं. इन्हें सफेद बाली कहते हैं. इस कीड़े द्वारा नुकसान करने पर फसल के उत्पादन में भारी कमी आ जाती है.

भूरा फुदका : इस कीड़े का रंग हलका भूरा होता?है. आकार पच्चर की तरह होता?है. इस कीट की मादा पत्ती की मध्य शिरा के पास खुरच कर या पत्ती के पर्णच्छंद को खुरच कर 250 से ले कर 300 तक समूह में अंडे देती है.

एक समूह में 15-30 अंडे होते हैं. ये अंडे बेलनाकार व सफेद रंग के होते हैं. अनुकूल वातावरण में अंडे 5-8 दिन में फूट जाते हैं. इस कीट के शिशु व प्रौढ़ दोनों ही पौधे के तने से रस को चूस कर फ्लोयम व जाइलम को बंद कर देते हैं.

इस कीट के प्रकोप से पत्तियां सूख कर भूरी हो जाती?हैं और फसल की इस अवस्था को फुदका झुलसा रोग कहा जाता है.

इस कीट का प्रकोप अगर फसल की बढ़वार अवस्था में होता है तो पौधों में बालियां नहीं निकलती?हैं. अगर कीट का हमला फूल के गुच्छे निकलने के बाद होता है तो ज्यादातर बाली में दाने नहीं बनते हैं. इस कीट के हमले से कभीकभी पूरी फसल चौपट हो जाती है.

सफेद पीठ वाला फुदका : इस कीड़े के हर अगले पंख के पिछले सिरे के मध्य में एक सुस्पष्ट काला धब्बा होता?है जो अगले पंखों के एकसाथ आने पर मिल जाता है. इस कीड़े का पृष्ठक हलके पीले रंग का होता है. इस कीड़े के प्रौढ़ काले भूरे रंग के होते?हैं व शरीर का रंग हलका पीला होता?है. इस कीड़े के अगले व पिछले पंखों के जोड़ पर सफेद रंग की पट्टी होती है.

एक मादा अपने जीवनकाल में 500-600 अंडे देती?है. 5-6 दिन बाद अंडों से शिशु निकलते?हैं. शिशु का रंग हलका भूरा होता है. इस कीड़े के शिशु व प्रौढ़ दोनों ही पत्तियों का रस चूसते हैं. नतीजतन, नीचे की पत्तियां पीली पड़ कर मुरझा जाती हैं और छोटे पौधे सूख जाते?हैं, वहीं बड़े पौधे से कल्ले निकलने में देरी हो जाती है. इस वजह से बालियों की तादाद कम रह जाती है और फसल का उत्पादन घट जाता है. इस कीट के प्रकोप से चावल की क्वालिटी भी प्रभावित होती है.

हरा फुदका : हरा फुदका कीड़े के शिशु व प्रौढ़ दोनों ही पच्चर की शक्ल और हरे रंग के होते हैं. इन के अगले पंखों के?ऊपर काले रंग के धब्बे होते हैं और पंखों के बाहरी किनारे भी काले रंग के होते?हैं. ये कीड़े रोशनी के प्रति काफी आकर्षित होते हैं. इस कीड़े के शिशु व प्रौढ़ दोनों ही पत्तियों से रस चूसते?हैं. इस के चलते पौधे पीले पड़ जाते हैं और छोटे भी रह जाते?हैं. जब कीड़े का प्रकोप ज्यादा होता है तो पौधे की पत्तियां भूरे रंग की हो जाती?हैं.

यह कीड़ा टुग्रो नामक विषाणु का वाहक है. फसल में इस विषाणु के हमले के फलस्वरूप पौधे पीले पड़ जाते?हैं और उन का फुटाव भी कम पड़ जाता है. टुग्रो प्रभावित पौधों से जो बालयां निकलती?हैं, उन में दानों की तादाद भी कम होती है.

पत्ती लपेटक : इस कीड़े का प्रौढ़ भूरे नारंगी रंग का होता है. इस कीट के पंख के किनारे भूरे रंग के होते?हैं. इस कीड़े की मादा संगम के बाद 1-2 दिन के बाद अंडे देना शुरू कर देती है. मादा कीड़ा 300 अंडे तक देती है जो हलके पीले रंग के होते हैं. अंडे पत्ती की मध्य शिरा के आसपास दिए जाते?हैं. अंडे 6-8 दिन में फूटने लगते?हैं. सूंड़ी की अवधि 15-17 दिन रहती?है.

इस कीट की प्रथम अवस्था सूंड़ी इधरउधर घूमती है और अपनी लार द्वारा रेशमी धागा बना कर पत्ती के किनारों को जोड़ लेती है और अंदर ही रह कर पत्ती के हरे भाग को खुरचखुरच कर खाती है. इस से पत्ती पर शुरू में सफेद धारी दिखाई देती है और धीरेधीरे ये पत्तियां सूख जाती?हैं. पत्तियों के सूखने से पौधा कमजोर पड़ जाता?है और फसल का उत्पादन घट जाता है.

गंधी बग : इस कीड़े के प्रौढ़ तकरीबन 15 मिलीमीटर लंबे व पीलापन लिए चपटे हरे रंग के होते हैं. इस कीट के शिशु भी हरे रंग के होते?हैं. मादा कीट पत्तियों की निचली सतह पर लाइनों में अंडे देती है. एक मादा अपने जीवनकाल में तकरीबन

150 से 250 अंडे देती है. इस कीड़े को अगस्त से नवंबर माह तक खेतों में देखा जा सकता है.

शुरुआती अवस्था में यह कीट धान के खेतों की मेंड़ों पर उगे खरपतवारों पर अपना जीवनयापन करते हैं. लेकिन जैसे ही सितंबरअक्तूबर माह में जब बालियां दूधिया अवस्था में होती हैं, वयस्क कीड़े दानों से रस चूस लेते?हैं. इस के फलस्वरूप बाली दानों से खाली रह जाती है. इस कीड़े के हमले से दानों के टूटने की संभावना बढ़ जाती है. इस कीड़े से एक विशेष प्रकार की गंध आती है. इसी वजह से इस कीड़े को गंधी बग भी कहते हैं.

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कीड़ों से बचाव के ऐसे उपाय

कीड़ों के आने का पता लगाएं:

* पीला तना भेदक कीड़े की निगरानी के लिए 5 फैरोमौन ट्रैप प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगाएं.

* खेत में फूल आने से पहले प्रकाश प्रपंच लगा कर कीड़ों को आकर्षित कर मार देना चाहिए.

* खेत व नर्सरी में कीड़ों की तादाद का पता लगाने के लिए जाल ट्रैप से स्वीप कर पता लगा लें.

कृषि क्रियाएं :

* धान के कीड़े प्रतिरोधी किस्मों की रोपाई और बोआई करनी चाहिए.

* स्वस्थ बीज व स्वस्थ नर्सरी पौधों का इस्तेमाल करना चाहिए.

* फसल में संतुलित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए. ज्यादा यूरिया के इस्तेमाल से पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप फसल पर देखा जाता है, जबकि पोटाश का इस्तेमाल करने पर कीड़े का प्रकोप कम होता?है.

* गरमी में गहरी जुताई करनी चाहिए, जिस से कीड़े की सुषुप्तावस्था को नष्ट किया जा सके.

* फसल की जल्दी रोपाई कर देनी चाहिए ताकि कीड़े के हमले से पहले पौधे की लंबाई सही बढ़ चुकी हो.

* गाल मिज के हमले के समय खेत में पानी भरा हो तो उसे तुरंत निकाल देना चाहिए क्योंकि पानी भरे खेत में गाल मिज का हमला ज्यादा पाया जाता है.

* मुख्य खेत में पौधे की रोपाई से पहले नर्सरी पौधे की ऊपर की तरफ यानी नोक की तरफ से 1.5-2.0 इंच पत्तियों को काट देना चाहिए ताकि मुख्य खेत में कीट के अंडे न पहुंच पाएं.

* खेत में पक्षियों के बैठने के लिए बांस के डंडे यानी बर्डपर्चर लगा देने चाहिए, ताकि पक्षी डंडों पर बैठ कर कीटों को खाते रहें. फसल में बाली निकलने पर?डंडों को उखाड़ कर रख लेना चाहिए.

यंत्रों से रोकथाम :

* धान के खेत के आसपास मेंड़ों पर खड़े खरपतवारों के साथसाथ घास को उखाड़ कर नष्ट कर देना चाहिए ताकि खरपतवार और घास पर पनपने वाले कीड़े धान की फसल को नुकसान न पहुंचाएं.

* कीटों के समूह को एकत्र कर नष्ट कर देना चाहिए.

* पीला तना बेधक कीट के प्रकोप से बचने के लिए लंबी बढ़ने वाली प्रजातियों को बांध कर रखना चाहिए.

* पानी के साथसाथ जो सूडि़यां खोल सहित दूसरे खेत में बह कर जाती हैं, उन को रोकना चाहिए.

* फूल आने से पहले खेत में खोल सहित सूंडि़यों को रस्सी से हिला कर इकट्ठा कर नष्ट कर देना चाहिए.

व्यावहारिक विधि

* पीला तना बेधक कीट के प्रकोप से बचने के लिए खेत में 20 फैरोमौन ट्रैप प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगाएं ताकि तना?बेधक कीट के प्रौढ़ नर ट्रैप में इकट्ठा हो कर मरते रहें. पौधों की रोपाई के 20 दिन बाद और 10-12 दिन बाद ल्यूर को बदलते रहना चाहिए.

जैविक विधि द्वारा रोकथाम

* सूंड़ी परजीवी प्लेटीगेस्टर ओराइजी का इस्तेमाल गाल मिज के प्रकोप वाली फसल में करना चाहिए.

* भूरा फुदका कीट के लिए क्रटोरहिनस लिविडिपेनिस 50-75 अंडे प्रति वर्गमीटर के अंतराल पर और 3 परभक्षी मकड़ी लाइकोसा स्यूडोनोलेटा प्रति पौधा खेत में छोड़ना चाहिए.

* 1.5 किलोग्राम लहसुन को पीस कर रातभर पानी में भिगो दें. सुबह पानी को छान कर उस में 250 ग्राम गुड़ और 200 ग्राम कपड़े धोने वाला साबुन मिला दें. पानी की मात्रा को 150 लिटर कर के उस का छिड़काव फसल पर करें. ऐसा करने से गंधी बग दानों से रस नहीं चूस पाएगा.

* अगर फसल के अंदर मित्र जीव जैसे मिरिड बग और तमाम तरह की मकडि़यां नियंत्रण कर रही हैं तो इन का संरक्षण करना चाहिए.

* नीम की निंबोली की

5 किलोग्राम मात्रा कूटपीस कर रातभर 25 लिटर पानी में भिगोएं. निंबोली का सफेद रस निकाल कर उसी पानी में डालें. पानी में 250 ग्राम कपड़े धोने वाला साबुन मिला कर पानी को छान लें और इस पानी की मात्रा को 100 लिटर कर के फसल पर छिड़काव करें.

* बिवेरिया बेसियाना की 2.5 किलोग्राम मात्रा को 500-600 लिटर पानी में मिला कर छिड़कें.

* फसल रोपने के एक महीने बाद या खेत में तना बेधक कीट के अंडे दिखाई देने पर ट्राईकोग्रामा जपोनिकम के 75000-1,00000 अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से ट्राइकोकार्ड को काट कर पत्तियों के नीचे लगाना चाहिए. इस प्रक्रिया को 5-6 बार 8-10 दिन के अंतराल पर दोहराना चाहिए.

कीटनाशी द्वारा रोकथाम

* नर्सरी में बोते समय कार्बोफ्यूरान

40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से या फोरेट 12.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से नर्सरी में डालना चाहिए.

* कीट की तादाद के आधार पर फोलीडाल या कार्बारिल 5 फीसदी धूल का 20-25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकाव करें.

* यदि तना बेधक कीट का प्रकोप दिखाई दे तो कौरटौप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी की 18 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सूखी रेत या राख में मिला कर खेत में बिखेर देनी चाहिए.

* कीटनाशक का प्रयोग करते समय खेत में हलका पानी खड़ा रहना चाहिए.

0.5 मिलीलिटर कोराजन की मात्रा प्रति लिटर पानी की दर से छिड़कना चाहिए.

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* यदि पौधे के प्रति झुंड पर 10 कीट दिखाई दें तो फसल के ऊपर इथोफेनप्रौक्स

20 ईसी की 1 मिलीलिटर या डाईक्लोरोवास

1 मिलीलिटर व वीपीएमसी की 1 मिलीलिटर के मिश्रण को एक लिटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें या क्विनालफास 25 ईसी

(1.5 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी की दर से) या इथोफेनप्रौक्स 20 ईसी या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल (1 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी की दर से) का छिड़काव करें.

सब्सिडी पर कृषि उपकरण ले कर उन्नत खेती करें

आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादन भी बढ़ा है और किसानों की माली हालत भी सुधरी है. माली रूप से कमजोर, निम्न और मध्यम तबके के किसानों को आज भी सरकारी योजनाओं की जानकारी न होने से उन्हें फायदा नहीं मिलता.

किसानों की भलाई के लिए बनी सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए आप अपने इलाके के कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर कृषि उपकरणों की खरीद पर अनुदान का फायदा ले कर उन्नत ढंग से खेतीकिसानी की जा सकती है.

आजकल केंद्र और राज्य सरकारें भी किसानों को कृषि उपकरण मुहैया कराने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं. कृषि उपकरणों पर सब्सिडी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब सहित देश के?ज्यादातर राज्यों में किसानों को दी जाती?है. विभिन्न कृषि उपकरणों पर 40 फीसदी से ले कर 80 फीसदी तक की सब्सिडी दी जाती है. सभी राज्यों में ई-पोर्टल के माध्यम से औनलाइन आवेदन करने के नियम राज्य सरकारों द्वारा तय किए गए हैं.

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बिहार में?ट्रैक्टर को?छोड़ 76 तरह के कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जाता है. औनलाइन आवेदन के अलावा कृषि विभाग?द्वारा अनुमंडल स्तर पर लगने वाले कृषि मेलों में खरीदी करने पर भी किसानों को सब्सिडी मिलती?है.

राजस्थान में अधिकृत, पंजीकृत क्रयविक्रय सहकारी समिति, ग्राम सेवा सहकारी समिति या राज्य के किसी भी जिले में पंजीकृत निर्माता, विक्रेता से कृषि यंत्र खरीद करने पर भी सब्सिडी दी जाती?है.

किसानों के अनुदान क्लेम का भुगतान उन के बैंक खाते में दिया जाता है. पंजीकृत निर्माताओं, विक्रेताओं को सीधे अनुदान राशि का भुगतान नहीं किया जाता है.

मध्य प्रदेश में पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा औनलाइन आवेदन ले कर कृषि यंत्रों पर सब्सिडी यानी अनुदान दिया जाता रहा है. किसानों को अनुदान की यह सुविधा ट्रैक्टर, टै्रक्टरचालित रीपर कम बाइंडर व सिंचाई यंत्रों (पंप, स्प्रिंकलर, ड्रिप सिस्टम, पाइपलाइन, रेनगन), कंबाइन हार्वेस्टर, जीरो टिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, पैडी राइस ट्रांसप्लांटर, रेज्डबेड प्लांटर, रेज्डबेड प्लांटर विथ इंक्लिनेड प्लेट एंड शेपर, हैप्पी सीडर, लेजर लैंड लेवलर, रोटावेटर, मल्चर, स्वचालित रीपर, स्ट्रा रीपर के आवेदन के लिए उपलब्ध?हैं. फर्टिलाइजर ड्रिल, मल्टीक्रौप थ्रैशर, एक्सियल फ्लो पैडी थ्रेशर जैसे उपकरणों पर उपलब्ध है.

किसे मिलेगा अनुदान

ट्रैक्टर के लिए किसी भी तबके के किसान, जिन के नाम से खेती की जमीन हो, आवेदन कर सकते?हैं. ट्रैक्टर से चलने वाले सभी प्रकार के कृषि यंत्र भी किसी भी तबके के किसान ले सकते?हैं. इस के लिए किसान के नाम पर पहले से ट्रैक्टर होना जरूरी?है.

कृषि पंप के लिए किसान के नाम से बिजली कनैक्शन होना जरूरी?है. जिन किसानों ने पिछले 5 साल में कृषि विभाग से किसी भी योजना के तहत किसी?भी प्रकार का अनुदान का फायदा नहीं लिया?है, वे किसान ही कृषि यंत्रों की खरीद के लिए पात्र होंगे.

सब्सिडी के लिए आवेदन करने की तारीख से 10 दिन के भीतर चयनित डीलर के माध्यम से अपना आवेदन देना होगा वरना यह पंजीयन खुद ही निरस्त हो जाएगा. आवेदन निरस्त होने पर आगामी 6 महीने तक आवेदन प्रस्तुत करने की पात्रता नहीं होगी.

कृषि यंत्रों पर 40,000 से 60,000 रुपए तक की सब्सिडी मिलती?है. ट्रैक्टर के लिए

2 लाख रुपए तक अनुदान और कंबाइन जैसे बड़े यंत्रों पर 1 लाख रुपए तक की सब्सिडी का प्रावधान है.

ट्रैक्टर की अधिक जानकारी के लिए किसान भाई निर्माता जौनडियर इंडिया प्रा. लि., देवास से मोबाइल फोन नंबर 7875289413, मल्टीक्रौप थ्रेशर के लिए सोनालिका इंडस्ट्रीज, होशियारपुर, पंजाब के मोबाइल फोन नंबर 9814054025, सीड ड्रिल, कल्टीवेटर, मल्टीक्रौप प्लांटर के लिए लालवानी इंडस्ट्रीज, भोपाल के मोबाइल नंबर 9009646664, स्प्रिंकलर सिस्टम के लिए रेवा पौलीमर्स, जबलपुर के मोबाइल नंबर 9425155366 पर फोन कर के कृषि यंत्रों की कीमत व सब्सिडी संबंधी जानकारी ले सकते हैं.

महंगे उपकरण खरीदना मुश्किल

हर किसान महंगे उपकरणों की खरीदी नहीं कर पाते हैं, इसलिए सरकार ने कृषि उपकरणों पर किसानों के होने वाले खर्चों में कटौती करने और उन की आमदनी बढ़ाने की दिशा में एक नई योजना शुरू की है. इस योजना का नाम स्मैम यानी सबमिशन औन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन है. इस योजना के तहत किसान समूह बना कर भी ट्रैक्टर सहित कई प्रकार के हाईटैक कृषि यंत्र ले सकते हैं.

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के जरीए कृषि उपकरणों की खरीद करने वाले किसान समूहों को गांव लैवल पर 10 लाख से 25 लाख रुपए तक का अनुदान दिए जाने की योजना?है. किसान समूह गांव लैवल पर कृषि विभाग में आवेदन जमा करा सकते?हैं.

महंगे कृषि यंत्र खरीदने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग उन्हें रियायती दरों पर ये उपकरण मुहैया करवाएगा. इस के लिए किसानों को समूह बना कर विभाग में आवेदन करना होगा. विभाग?द्वारा हर जिले में किसान समूहों को यह लाभ दिया जाएगा.

कृषि विभाग के उपसंचालक जितेंद्र सिंह बताते हैं कि कस्टम हायरिंग सैंटर खोलने के लिए जिला लैवल पर किसानों के समूह (सहकारी समितियां, पंजीकृत किसान समूह, स्वयंसहायता समूह) पंजीकृत कृषि समूहों से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 40 हौर्सपावर से 70 हौर्सपावर तक का ट्रैक्टर, एसएमएस सहित कंबाइन हार्वेस्टर, हैप्पी सीडर, रोटरी?प्लो, रीपर बाइंडर, स्ट्रा बेलर, मल्चर, हे रेक,?स्ट्रा चोपर, स्ट्रा श्रेडर वीड, ट्रैक्टरचालित स्ट्रा स्लेशर, स्ट्रा रीपर और जीरो टिल सीड कम फर्टिलाइजर कृषि यंत्रों पर 10 लाख रुपए तक की खरीद पर 4 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाता है. मध्य प्रदेश सहित सभी राज्यों के पंजीकृत 391 कृषि उपकरणों के निर्माताओं और 14,980 डीलर के माध्यम से खरीदी की जा सकती है.

कहां करें आवेदन

सभी राज्यों में सब्सिडी के लिए औनलाइन फार्म भरे जाने के नियम?हैं. मध्य प्रदेश में

कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए कृषि विभाग

की वैबसाइट पर औनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं.

किसानों द्वारा डीलर का चयन केवल बायोमीट्रिक मशीन (फिंगरप्रिंट स्कैनर मशीन) के जरीए किया जा सकेगा इसलिए जो किसान पहले से पंजीकृत हैं या जो पहली बार पंजीयन करवा रहे?हैं, वे सभी जिस डीलर से यंत्र खरीदना चाहते?हैं, उन के पास या जहां भी बायोमीट्रिक मशीन उपलब्ध?हो, वहां से पंजीयन कराने की कोशिश करें.

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आवेदन के लिए किसान इस लिंक ई कृषि यंत्र अनुदान स्रड्ढह्ल.द्वश्चस्रड्डद्दद्ग.शह्म्द्द/द्बठ्ठस्रद्ग3.ड्डह्यश्च3 पर क्लिक करें, दी गई लिंक पर किसान भाई सब्सिडी कैलकुलेटर पर किस यंत्र पर कितना अनुदान उन्हें मिलेगा, यह भी देख सकते हैं.

चयनित डीलर के जरीए किसान अपने कागजात के साथसाथ बिल की प्रति और सामान के विवरण को भी पोर्टल में दर्ज कराएं.

एक बार डीलर को चुन लिए जाने पर डीलर को फिर से बदलना संभव नहीं होगा. डीलर को किसान द्वारा कृषि उपकरण या यंत्रों की खरीदी की राशि का भुगतान बैंक ड्राफ्ट, चैक, औनलाइन बैंकिंग के माध्यम से ही किया जाना होगा. नकद राशि नहीं ली जाएगी.

डीलर के माध्यम से कागजात व बिल वगैरह पोर्टल पर अपलोड करने के 7 दिन में विभागीय अधिकारी द्वारा सामान और कागजातों का सत्यापन किया जाएगा. सत्यापन में सभी कागजात सही पाए जाने, खरीदी के अनुसार कृषि उपकरण या यंत्रों के सही पाए जाने पर ही किसान को सब्सिडी का फायदा मिल सकेगा.

ये कागजात हैं जरूरी

किसान को आधारकार्ड,?बैंक पासबुक की फोटोकौपी, सिंचाई उपकरणों के लिए बिजली कनैक्शन का प्रमाणपत्र और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए सक्षम अधिकारी जैसे तहसीलदार, एसडीएम द्वारा जारी किया गया जाति प्रमाणपत्र का होना जरूरी है.

किसानों को यह?भी अवगत कराया जाता है कि विक्रेता द्वारा काटे गए बिल (देयक) पर लिखी गई कीमत के अलावा प्रकरण पास कराने, जल्दी कार्यवाही कराने जैसी वजहों के लिए किसी भी राशि का भुगतान किसी को भी नहीं किया जाए.

शासन द्वारा औनलाइन प्रक्रिया पूरी तरह से निर्धारित है और पारदर्शी है. इस में सभी तरह की जानकारी व प्रकरणों की स्थिति साफसाफ पोर्टल पर देखी जा सकती है.

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यदि किसान भाइयों को कोई शिकायत है तो वे संचालनालय किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, पंचम तल, विंध्याचल भवन, भोपाल को कृषि यंत्रों पर अनुदान की जानकारी के लिए विभाग के फोन नंबर 0755-4935001 और सिंचाई यंत्रों पर अनुदान के लिए मोबाइल नंबर 6264408543 पर संपर्क कर सकते हैं.

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