सरस सलिल विशेष

एक के बाद एक कर अभ्यर्थी आते और जाते रहे. हालांकि चयन कमेटी में उन के अलावा 4 व्यक्ति और भी बैठे थे जो अपनेअपने तरीके से प्रश्न पूछ रहे थे. डा. राजीव बीचबीच में कुछ पूछ लेते वरना तो वह सुन ही रहे थे. अंतिम निर्णय डा. राजीव को ही लेना था.

आखिरी प्रत्याशी के रूप में आसमानी रंग की साड़ी पहने बीना को देख कर डा. राजीव एकदम चौंक पड़े. वही आवाज, वही रंगरूप, कहीं कोई परिवर्तन नहीं. अनायास ही उन के मुंह से निकल गया, ‘‘मधु, तुम?’’

‘‘कौन मधु सर? मैं तो बीना हूं,’’ हलकी सी मुसकराहट के साथ युवती ने उत्तर दिया.

‘‘सौरी,’’ डा. राजीव के मुंह से निकला.

चयन कमेटी के लोगों ने बीना से कई सवाल किए. बीना ने सभी प्रश्नों का शालीनता के साथ उत्तर दिया. सुबह से अब तक के घटनाक्रम ने एकदम नया मोड़ ले लिया. अभी भी डा. राजीव के मन में द्वंद्व था. सलेक्शन तो बीना का ही होना था सो हो गया. वाइस चेयरमैन यही चाहते थे. एक दुविधा से वह उबर गए, दूसरी अभी शेष थी. डा. राजीव खुद को संयत कर बोले, ‘‘बधाई हो बीना, तुम्हारा चयन हो गया है. बी.सी. साहब को खुशखबरी मैं दूं या तुम दोगी?’’

‘‘मुझे ही देने दें सर,’’ और सब को धन्यवाद दे कर बीना बाहर निकल गई. एकएक कर चयन कमेटी के लोग भी चले गए. सब से अंत में डा. राजीव बाहर आए. देखा तो बीना अभी किसी के इंतजार में खड़ी है.

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‘‘किसी की प्रतीक्षा है?’’

‘‘आप का ही इंतजार कर रही थी सर.’’

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