खेती में जल निकासी का सही इंतजाम

लेखक -शैलेंद्र सिंह

ज्यादा पानी भी खेती के लिए नुकसानदायक बन जाता है. लिहाजा, खेतों से जरूरत से ज्यादा पानी निकालने का पुख्ता बंदोबस्त होना बेहद जरूरी है.

कम पानी में जिस तरह से फसल की अच्छी पैदावार नहीं होती है, उसी तरह से?ज्यादा पानी में भी अच्छी पैदावार नहीं होती है. ऐसे में जरूरी?है कि फसल में पानी की मात्रा सही हो.

खेती के कामों में लगे किसानों द्वारा जल निकासी यानी पानी के निकलने पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है. जिन जगहों पर ज्यादा बारिश होती है, वहां पर जल निकासी का सही इंतजाम न होने से हर साल हजारों एकड़ फसल गल जाती है.

जल निकासी की जरूरत

कुछ जमीनें इस तरह की होती?हैं, जिन में बरसात ज्यादा होने से पानी काफी दिनों तक के लिए भर जाता है. नतीजतन, वहां बोई गई फसल खराब हो जाती है और अगली फसल बोने के लिए भी समय पर खेत तैयार नहीं हो पाता है.

* कहींकहीं नहरों की सतह पास के खेत से ऊंची होती है, वहां बरसात में खेत में पानी भर जाता है. ऐसे खेतों से पानी के निकलने का पुख्ता इंतजाम करना पड़ता?है.

* कुछ खेतों में पानी भरा होने से खेती की मशीनों का इस्तेमाल नहीं हो पाता. इन खेतों में जल निकासी का इंतजाम कर के ही खेती की मशीनों का इंतजाम किया जा सकता?है.

लाभकारी है जल निकासी

* जमीन में मौजूद ज्यादा पानी निकल जाने से औक्सीजन पौधों की जड़ों तक पहुंच जाता है, जिस से फसल अच्छी हो जाती है. फसल की सेहत के लिए पौधों की जड़ों तक हवा का पहुंचना जरूरी होता?है.

* जमीन के लाभदायक जीवाणु हवा में अपना काम ठीक तरह से करते हैं. हवा से उन के काम करने की रफ्तार भी तेज होती है. इस से फसल को जरूरी भोजन भी मिल जाता है.

* जल निकासी से जमीन फसल बोने के लिए जल्दी तैयार की जा सकती है.

* जल निकासी न होने से जमीन कम उपजाऊ हो जाती है. ज्यादा पानी रुकने से अकसर जमीन ऊसरीली हो जाती है.

* जल निकासी से मिट्टी में मिले हानिकारक लवण, जो फसल की बढ़वार में रुकावट होते हैं, वे पानी के साथ बह जाते हैं. नतीजतन, भूमि की उपजाऊ ताकत बढ़ जाती?है.

जल भराव से नुकसान

* जिन इलाकों में ज्यादा पानी भर जाता?है और वहां पर जल निकासी का सही इंतजाम नहीं होता है, उन इलाकों में फसलों को कई तरह से नुकसान हो सकता?है.

* पौधे के लिए एक तय तापमान जरूरी होता है, उस से कम या ज्यादा तापमान होने से फसल पर बुरा असर पड़ता है. नमी ज्यादा होने से मिट्टी का तापमान गिर जाता?है.

* जमीन में सही हवा और तापमान की सहायता से लाभदायक जीवाणु काम करते?हैं. नमी ज्यादा होने पर जीवाणुओं पर उलटा असर पड़ता?है.

* ज्यादा समय तक पानी भरा रहने से जमीन सामान्य फसलें पैदा करने की कूवत खो देती है. नमी ज्यादा होने से जुताई और बोआई समय पर नहीं हो पाती, जिस से फसल की उपज कम हो जाती है.

* बीज जमने के लिए भी सही तापमान की जरूरत होती?है. ज्यादा नमी होने से तापमान कम हो जाता?है, जिस से बीज देर से जमते?हैं. इस का असर फसल के बढ़ने पर पड़ता?है और फसल देर से पकती?है.

* जड़ें पानी के लिए ही नीचे की ओर बढ़ती?हैं. खेतों में ज्यादा पानी भरा रहने से जड़ों को पानी ऊपर ही मिल जाता है, जिस से वे

ऊपर ही रह जाती हैं. इस से फसल कमजोर रह जाती?है.                                         ठ्ठ

एक दामाद और

लेखक-अश्विनी कुमार भटनागर

नरेश को दहेज में घरगृहस्थी के आवश्यक सामान के अतिरिक्त 4 सालियां भी मिली थीं. ससुर के पास न केवल जायदाद थी बल्कि एक सफल व्यवसाय भी था. इस कारण जब एक के बाद एक 5 पुत्रियों ने जन्म लिया तो उन के माथे पर एक भी शिकन न पड़ी. उन्होंने आरंभ से ही हर पुत्री के नाम काफी रुपया जमा कर दिया था जो प्रतिवर्ष ब्याज कमा कर पुत्रियों की आयु के साथसाथ बढ़ता जाता था.

नरेश एक सरकारी संस्थान में सहायक निदेशक था. समय के साथ तरक्की कर के उस का उपनिदेशक और फिर निदेशक होना निश्चित था. हो सकता है कि वह बीच में ही नौकरी छोड़ कर कोई दूसरी नौकरी पकड़ ले. इस तरह वह और जल्दी तरक्की पा लेगा. युवा, कुशल व होनहार तो वह था ही. इन्हीं सब बातों को देखते हुए उसे बड़ी पुत्री उर्मिला के लिए पसंद किया गया था.

उर्मिला को अपने पति पर गर्व था. वह एक बार उस के दफ्तर गई थी और बड़ी प्रभावित हुई थी. अलग सुसज्जित कमरा था. शानदार मेजकुरसी थी. मेज पर फाइलों का ढेर लगा था. पास ही टेलीफोन था, जो घड़ीघड़ी बज उठता था. घंटी बजाने से चपरासी उपस्थित हुआ और केवल नरेश के सिर हिलाने से ही तुरंत जा कर एक ट्रे में 2 प्याले कौफी और बिस्कुट ले आया था. यह बात अलग थी कि वह जो वेतन कटकटा कर घर लाता था उस से बड़ी कठिनाई से पूरा महीना खिंच पाता था. शादी से पहले तो उसे यह चिंता लगी रहती थी कि रुपया कैसे खर्च करे, परंतु शादी के बाद मामला उलटा हो गया. अब हर घड़ी वह यही सोचता रहता था कि अतिरिक्त रुपया कहां से लाए.

उर्मिला का हाथ खुला था, जवानी का जोश था और नईनई शादी का नशा था. अकसर नरेश को हाथ रोकता देख कर बिना सोचेसमझे झिड़क देती थी. खर्चा करने की जो आदत पिता के यहां थी, वही अब भी बदस्तूर कायम थी.

महीने का आरंभ था. घर का खानेपीने का सामान आ चुका था और मन में एक हलकापन था. शाम को फिल्म देखने का कार्यक्रम बना लिया था. फिल्म का नाम ही इतना मजेदार था कि सोचसोच कर गुदगुदी सी होने लगती थी. फिल्म थी ‘दिल धड़के, शोला भड़के.’

दिन के 11 बजे थे. नरेश अपने दफ्तर के कार्य में व्यस्त थे. निदेशक बाहर दौरे पर जाने वाले थे. उन के लिए आवश्यक मसौदे व कागजों की फाइल तैयार कर के 4 बजे तक उन के सुपुर्द करनी थी. इसी समय टेलीफोन बज उठा. निदेशक का निजी सचिव सुबह से 4 बार फोन कर चुका था. फिर उसी का होगा. होंठ चबाते हुए उस ने फोन उठाया.

‘‘नरेश.’’

फोन पर उर्मिला के खिलखिलाने की आवाज सुनाई दी.

‘‘बोलो, मैं कौन हूं?’’

‘‘तुम्हारा भूत लगता है. सुनो, अभी मैं बहुत व्यस्त हूं. तुम 1 बजे के बाद फोन करना.’’

‘‘सुनो, सिनेमा के टिकट खरीद लिए?’’

‘‘नहीं, अभी समय नहीं मिला. चपरासी बिना बोले बैंक चला गया है. आने पर भेजूंगा.’’

‘‘इसीलिए फोन किया था. 4 टिकट और ले लेना.’’

‘‘क्यों?’’ नरेश ने चौंक कर कहा.

दूसरी तरफ से कई लोगों के खिल- खिलाने की आवाजें आईं, ‘‘जीजाजी… जीजाजी.’’

नरेश ने माथा पीट लिया. उर्मिला फोन करने पास की एक दुकान पर जाती थी. वह प्रति फोन 1 रुपया लेता था. सड़क पर आवाजें काफी आती थीं, इसलिए जोरजोर से बोलना पड़ता था. नरेश ने कह रखा था कि जब तक एकदम आवश्यक न हो यहां से फोन न करे. सब लोग दूरदूर तक सुनते हैं और मुसकराते हैं. उसे यह बिलकुल अच्छा नहीं लगता था और उस समय तो वहां पूरी बरात ही खड़ी थी. वह सोचने लगा, दुनिया भर को मालूम हो जाएगा कि वह पलटन के साथ फिल्म देखने जा रहा है. और तो और, ये सालियां क्या हैं एक से एक बढ़ कर पटाखा हैं, इन्हें फुलझडि़यां कहना तो इन का अपमान होगा.

‘‘ठीक है,’’ कह कर उस ने फोन पटक दिया. आगे बात करने का अवसर ही नहीं दिया. रूमाल निकाल कर माथे का पसीना पोंछने लगा. उसे याद था कि कैसे बड़ी कठिनाई से उस ने उर्मिला को टरकाया था, जब वह सब सालियों समेत दफ्तर आने की धमकी दे रही थी.

2 जने जाते तो 14 रुपए के टिकट आते. अब पूरे 42 रुपए के टिकट आएंगे. सालियां आइसक्रीम और पापकार्न खाए बिना नहीं मानेंगी. वैसे तो वह स्कूटर पर ही जाता, पर अब पूरी टैक्सी करनी पड़ेगी. उस का भी ड्योढ़ा किराया लगेगा. उस ने मन ही मन ससुर को गाली दी. घर में अच्छीखासी मोटर है. यह नहीं कि अपनी रेजगारी को आ कर ले जाएं. उसे स्वयं ही टैक्सी कर के घर छोड़ने भी जाना होगा. अभी तो महीना खत्म होने में पूरे 3 सप्ताह बाकी थे.

सालियां तो सालियां ठहरीं, पूरी फिल्म में एकदूसरी को कुहनी मारते हुए खिलखिला कर हंसती रहीं. आसपास वालों ने कई बार टोका. नरेश शर्म के मारे और कभी क्रोध से मुंह सी कर बैठा रहा. उस का एक क्षण भी जी न लगा. जैसेतैसे फिल्म समाप्त हुई तो वह बाहर आ कर टैक्सी ढूंढ़ने लगा.

‘‘सुनो,’’ उर्मिला ने कहा.

‘‘अब क्या हुआ?’’

‘‘देर हो गई है. इन्हें खाना खिला कर भेजूंगी. घर में तो 2 ही जनों का खाना है. होटल से कुछ खरीद कर घर ले चलें.’’

बड़ी साली ने इठला कर कहा, ‘‘जीजाजी, आप ने कभी होटल में खाना नहीं खिलाया. आज तो हम लोग होटल में ही खाएंगे. दीदी घर में कहां खाना बनाती फिरेंगी?’’

बाकी की सालियों ने राग पकड़ लिया, ‘‘होटल में खाएंगे. जीजाजी, आज होटल में खाना खिलाएंगे.’’

नरेश सुन्न सा खड़ा रहा.

उर्मिला ने मुसकरा कर कहा, ‘‘हांहां, क्यों नहीं, शोर क्यों मचाती हो?’’ और फिर नरेश की ओर मुंह कर के बोली, ‘‘सुनो, आज इन का मन रख लो.’’

नरेश ने जेब की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘रुपए हैं पास में? मेरे पास तो कुछ नहीं है.’’

उर्मिला ने पर्स थपथपाते हुए कहा, ‘‘काम चल जाएगा. यहीं ‘चाचे दा होटल’ में चले चलेंगे.’’

जब तक खाना खाते रहे पूरी फिल्म के संवाद दोहरादोहरा कर सब हंसी के मारे लोटपोट होते रहे. और जो लोग वहां खाना खा रहे थे वे खाना छोड़ कर इन्हें ही विचित्र नजरों से देख रहे थे. नरेश अंदर ही अंदर झुंझला रहा था.

टैक्सी में बिठा कर जब वह उन्हें घर छोड़ कर वापस आया तो उस ने उर्मिला से पूरा युद्ध करने की ठान ली थी. परंतु उस के खिलखिलाते संतुष्ट चेहरे को देख कर उस ने फिलहाल युद्ध को स्थगित रखने का ही निश्चय किया.

अगले सप्ताह रूमा की वर्षगांठ थी. जाहिर था उस के लिए अच्छा सा तोहफा खरीदना होगा. सस्ते तोहफे से काम नहीं चलेगा. उस का अपमान हो जाएगा. बहन के आगे उस का सिर झुक जाए, यह वह कभी सहन नहीं करेगी.

‘‘मैं सोच रही थी कि उसे सलवार- कुरते का सूट खरीद दूं. उस दिन देखा था न काशीनाथ के यहां,’’ उर्मिला बोली.

‘‘क्या?’’ नरेश ने चौंक कर कहा, ‘‘मैं ने तो सोचा था कि तुम अपने लिए देख रही थीं. वह तो 150 रुपए का था.’’

‘‘तो क्या हुआ?’’ उर्मिला ने नरेश के गले में हाथ डालते हुए कहा, ‘‘मेरा पति कोई छोटामोटा आदमी थोड़े ही है. अरे, सहायक निदेशक है. पूरे दफ्तर में रोब मारता है.’’

‘‘छोड़ो भी. जरा खर्चा तो देखो. सब काम अपनी हैसियत के अनुसार करना चाहिए.’’

‘‘तो क्या मेरे मियां की इतनी भी हैसियत नहीं है?’’ उर्मिला ने रूठ कर कहा, ‘‘मैं पिताजी से उधार ले लूंगी.’’

नरेश को यह बात अच्छी नहीं लगती. पहले भी इस बात पर लड़ाई हो चुकी थी.

‘‘उधार लेने से तो यह फर्नीचर बेचना ठीक होगा,’’ उस ने गुस्से में आ कर कहा.

‘‘हां, क्यों नहीं,’’ उर्मिला ने नाराज हो कर कहा, ‘‘मेरे पिता का दिया फर्नीचर फालतू है न.’’

‘‘तो मैं ही फालतू हूं. मुझे बेच दो.’’

‘‘जाओ, मैं नहीं बोलती. बहन को एक अच्छी सी भेंट भी नहीं दे सकती.’’

‘‘भेंट देने को कौन मना करता है, पर इतनी महंगी देने की क्या आवश्यकता है? वर्षगांठ तो हर साल ही आएगी. और फिर एक थोड़े ही है, 4-4 हैं. अभी तो औरों की वर्षगांठ भी आने वाली होगी,’’ नरेश ने कहा.

‘‘क्यों, 5वीं को भूल गए?’’ उर्मिला ने व्यंग्य कसा. तभी नरेश को याद आया, 25 तारीख को तो उर्मिला की भी वर्षगांठ है.

‘‘जब मेरी वर्षगांठ मनाओगे तो मेरे लिए भी तो भेंट आएगी. पिताजी बंगलौर गए थे. जरूर मेरे लिए बढि़या साड़ी लाए होंगे. और सुनो,’’ उर्मिला ने आंख नचाते हुए कहा, ‘‘तुम्हारी वर्षगांठ पर मैं सूट का कपड़ा दिलवा दूंगी.’’

‘‘मुझे नहीं चाहिए सूटवूट. तुम अपने तक ही रखो,’’ नरेश ने झुंझला कर कहा, ‘‘एक तुम ही इतनी भारी भेंट पड़ रही हो.’’

‘‘ऐसी बात कह कर मेरा दिल मत दुखाओ,’’ उर्मिला ने नरेश का हाथ अपने दिल पर रखते हुए कहा, ‘‘देखो, कितना छोटा सा है और कैसा धड़क रहा है.’’

और नरेश फिर भूल गया.

दूसरे दिन जब उर्मिला सलवारकुरते का सूट ले आई तो नरेश ने आह भर कर कहा, ‘‘तुम्हारे पिताजी भी बड़े योजना- बद्ध हैं.’’

‘‘कैसे?’’ उर्मिला ने शंका से पूछा. उसे लगा कि नरेश कुछ कड़वी बात कहने जा रहा है.

‘‘तुम सारी बहनों की वर्षगांठें एकएक दोदो सप्ताह के अंतर पर हैं. उन्होंने जरा सा यह भी नहीं सोचा कि दामाद को कुछ तो सांस लेने का अवसर दें.’’

‘‘चलो हटो, ऐसा कहते शर्म नहीं आती?’’

‘‘नहीं. बिलकुल नहीं आती.’’

अब आ गई 25 तारीख, उर्मिला की वर्षगांठ. कई दिनों से तैयारी चल रही थी. शादी के बाद पहली वर्षगांठ थी. माता- पिता ने कहा था कि उन के यहां मनाना. परंतु उर्मिला ने न माना. उसे सब को अपने यहां बुलाने का बड़ा चाव था. अपना ऐश्वर्य व ठाटबाट जो दिखाना था. नरेश 400-500 के खर्च के नीचे आ गया. साड़ी मिलेगी उर्मिला को. हो सकता है बहनें भी कुछ थोड़ाबहुत भेंट के नाम पर दे दें. परंतु उस का खर्चा कैसे पूरा होगा? बैंक में रुपया शून्य तक पहुंच रहा था. वह बारबार उर्मिला को समझा रहा था. परंतु उसे वर्षगांठ मनाने का इतना शौक न था जितना दिखावा करने का. उत्साह न दिखाना नरेश के लिए शायद एक भद्दी बात होती. काफी नाजुक मामला था. नरेश ने सोचा कि पहला साल है. इस बार तो किसी तरह संभालना होगा, बाद में देखा जाएगा.

दावत तो रात की थी, पर बहनें सुबह से ही आ धमकीं. दीदी का हाथ जो बंटाना था. अकेली क्याक्या करेगी? दिन भर होहल्ला मचाती रहीं. फ्रिज में रखा सारा सामान चाट गईं. एक की जगह 2 केक बनाने पड़े. दिन में खाने के लिए गोश्त और मंगाना पड़ा. मिठाई भी और आई. एक दावत की जगह 2 दावतें हो गईं.

संध्या होते ही मातापिता भी आ गए. ‘मुबारक हो, मुबारक हो’ के नारे लग गए. सब के मुंह ऐसे खिले हुए थे जैसे आतशी अनार. उधर नरेश सोच रहा था कि वह अपने घर में है या ससुराल में. काश, यह जश्न एक निजी जश्न होता, केवल वह और उर्मिला ही उस में भाग लेते. अंतरंग क्षणों में यह दिन बीतता और शायद सदा के लिए एक सुखद यादगार होता. तब अगर 1,000 रुपए भी खर्च हो जाते तो वह परवा न करता. सब लोग उसे भूल कर एकदूसरे में इतने मगन थे कि किसी ने यह भी न सोचा कि वहां दामाद भी है या नहीं.

रात के 12 बजतेबजते न जाने कब यह तय हो गया कि 30 तारीख शनिवार को, जिस दिन नरेश की छुट्टी रहती है, सब लोग बहुत दूर एक लंबी पिकनिक पर चलेंगे और इतवार को ही लौटेंगे. रहने और खाने का प्रबंध ससुर की ओर से रहेगा. तब ही यह रहस्य भी खुला कि उर्मिला को 2 महीने का गर्भ है.

‘मुबारक हो, मुबारक हो,’ का शोर गूंज उठा.

‘‘दावत लिए बिना नहीं छोड़ेंगे, जीजाजी,’’ एक साली ने कहा और फिर तो बाकी सालियां भी चिपट गईं.

नरेश का तो भुरता ही बन गया. एकएक साली को चींटियों की तरह झाड़ रहा था और फिर से वे चिपट जाती थीं. उर्मिला मुसकरा रही थी और मां व्यर्थ ही उसे बताने का प्रयत्न कर रही थीं कि उसे क्याक्या सावधानी बरतनी चाहिए.

‘‘मां, मैं कल आ कर समझ लूंगी. अभी तो कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा है,’’ उर्मिला ने शरमा कर कहा.

‘‘बेटी, कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए. मेरे विचार में तो तुझे अब हमारे पास ही आ कर रहना चाहिए. वहां तेरी देखभाल अच्छी तरह हो जाएगी.’’

‘‘अरे मां, अभी तो बहुत जल्दी है, मैं आ गई तो फिर इन के खाने का क्या होगा?’’

‘‘ओ हो, कितनी पगली है. अरे नरेश भी आ कर हमारे साथ रहेगा.’’

सालियों ने ताली बजा कर इस सुझाव का स्वागत किया, ‘‘जीजाजी हमारे साथ रहेंगे तो कितना मजा आएगा. जीजाजी, सच, अभी चलिए. हम सब सामान बांध देते हैं. बताइए, क्या ले चलना है?’’

नरेश ने दृढ़ता से कहा, ‘‘यह तो संभव नहीं है. अभी बहुत समय है. वैसे देखभाल तो मां को ही करनी है. बीचबीच में आ कर देखती रहेंगी.’’

‘‘जीजाजी, आप बहुत खराब हैं. पर दावत से नहीं बच सकते. क्यों दीदी?’’

‘‘हांहां,’’ उर्मिला ने कहा, ‘‘यह भी कोई बात हुई? क्या खाओगी, बोलो?’’

न सिर्फ फरमाइशों का ढेर लग गया बल्कि यह भी निर्णय ले लिया गया कि सारी सालियां शुक्रवार को ही आ जाएंगी. दिन में घर रहेंगी. दोनों समय का पौष्टिक भोजन करेंगी. रात में रहेंगी और फिर यहीं से शनिवार को पिकनिक के लिए प्रस्थान करेंगी. पिताजी कार ले कर आ जाएंगे.

नरेश की आंखों के आगे अंधेरा छा गया. उस के पास तो एक फूटी कौड़ी भी नहीं बची थी. सारे दिन इन छोकरियों के नखरे कौन उठाएगा?

सब लोग इतना पीछे पड़े कि नरेश को शुक्रवार की छुट्टी लेने के लिए राजी होना पड़ा. फिर एक बार हर्षध्वनि के साथ तालियां बज उठीं. उस ध्वनि में नरेश को ऐसा लगा कि वह एक ऐसा गुब्बारा है जिस में किसी ने सूई चुभो दी है और हवा धीरेधीरे निकल रही है.

रात में भिगोए हुए काले चनों का जब सुबह नरेश नाश्ता कर रहा था तो उर्मिला ने याद दिलाया कि आज शुक्रवार है और छोकरियां आती ही होंगी. अंडे, आइसक्रीम, मुर्गा, बेकन, केक, काजू की बर्फी इत्यादि का प्रबंध करना होगा, तो नरेश ने अपनी पासबुक खोल कर उर्मिला के आगे कर दी.

‘‘क्या मेरी नाक कटवाओगे?’’

‘‘तो फिर पहले सोचना था न?’’

‘‘क्या हम इतने गएगुजरे हो गए कि उन्हें खाना भी नहीं खिला सकते?’’

‘‘खाना खिलाने को कौन मना करता है. पर जश्न मनाने के लिए पास में पैसा भी तो होना चाहिए.’’

‘‘अब इस बार तो कुछ करना ही होगा.’’

‘‘तुम ही बताओ, क्या करूं? उधार लेने की मेरी आदत नहीं. ऐसे कब तक जिंदगी चलेगी?’’

‘‘देखो, कल पिकनिक पर जाना है. कुछ न कुछ तो खर्च होगा ही. अब ऐसे झाड़ कर खड़े हो गए तो मेरी तो बड़ी बदनामी होगी,’’ उर्मिला ने नरेश को अपनी बांहों में लेते हुए कहा, ‘‘मेरी खातिर. सच तुम कितने अच्छे हो.’’

‘‘सुनो, अपना हार दे दो. बेच कर कुछ रुपए लाता हूं.’’

‘‘क्या कह रहे हो? क्या मैं अपना हार बेच दूं?’’

‘‘तो फिर रुपए कहां से लाऊं?’’

‘‘क्या अपने दोस्तों से उधार नहीं ले सकते?’’

‘‘वे सब तो मेरे ऊपर हंसते हैं. और वैसे वे लोग तो दफ्तर में होंगे. मैं कहां जाता फिरूंगा?’’

तभी घंटी बज उठी. दरवाजा खुलने में देर हुई इसलिए बजती रही, बजती रही. सालियां जो ठहरीं.

‘‘लो, आ गईं.’’

फिर वही खिलखिलाहट.

‘‘जीजाजी, आज तो फिल्म देखने चलेंगे. ऐसे नहीं मानेंगे.’’

‘‘क्यों नहीं, फिल्म जरूर देखेंगे.’’

‘‘ठीक है, तो आप फिल्म का टिकट ले कर आइए और हम लोग दीदी को ले कर बाजार जा रहे हैं.’’

चायपानी के बाद जब नरेश जाने लगा तो अकेले में उर्मिला ने कहा, ‘‘सुनो, रुपए जरूर ले आना. मेरे पास मुश्किल से 40 रुपए होंगे, और वे भी मां के दिए हुए. वापस जल्दी आ जाना.’’

‘‘हां, जल्दी आऊंगा,’’ नरेश ने कहा, ‘‘मेरे पास रुपए कहां हैं? टिकट के पैसे भी तो जेब में नहीं हैं, और फिर पिकनिक का खर्चा अलग.’’

‘‘कहा न, इतने बड़े अफसर होते हुए भी ऐसी बात करते हो,’’ उर्मिला ने कहा.

‘‘ठीक है, जाता हूं, पर संन्यास ले कर लौटूंगा.’’

नरेश चला तो गया, पर सोचने लगा कि इस ‘चंद्रकांता संतति’ पर कहीं न कहीं पूर्णविराम लगाना ही होगा.

कुछ देर भटक कर वह वापस आ गया. देखा तो चौकड़ी पहले से ही घर में बैठी हुई थी और सब का मुंह लटका हुआ था. उन को देखते ही नरेश ने भी अपना मुंह और लटका लिया.

‘‘क्या हुआ, जीजाजी? आप को क्या हुआ?’’

‘‘बहुत बुरा हुआ. कुछ कहने योग्य बात नहीं है. पर तुम लोगों का मुंह क्यों लटका हुआ है? तुम लोग तो खानेपीने का सामान लेने गई थीं न?’’

‘‘हां, गए तो थे, पर दीदी के पर्स में रुपए ही नहीं थे. सारा सामान खरीदा हुआ दुकान पर ही छोड़ कर आना पड़ा. आप कैसे हैं, जीजाजी? पत्नी को घरखर्च का रुपया भी नहीं देते?’’

‘‘लो, यह तो ‘उलटा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली बात हो गई. अरे, मैं तो सारा वेतन तुम्हारी दीदी के हाथ में रख देता हूं. मेरे पास तो सिनेमा के टिकट खरीदने के भी पैसे नहीं थे. जल्दीजल्दी में मांगना भूल गया था, सो रास्ते से ही लौट आया.’’

‘‘तो क्या आप टिकट नहीं लाए?’’

‘‘क्या करूं, उधार टिकट मांगने की हिम्मत नहीं हुई, पर मैं ने तसल्ली के लिए एक काम किया है.’’

‘‘हाय जीजाजी, हम आप से नहीं बोलते.’’

उर्मिला ने कहा, ‘‘पर पूछो तो सही क्या लाए हैं?’’

औपचारिकता के लिए छोटी ने पूछा, ‘‘आप क्या लाए हैं, जीजाजी?’’

जेब में से 4 पुस्तिकाएं निकालते हुए नरेश ने कहा, ‘‘सिनेमा के बाहर 50 पैसे में फिल्म के गानों की यह किताब बिक रही थी. मैं ने सोचा कि फिल्म न सही, उस की किताब ही सही. लो, आपस में एकएक बांट लो.’’

जब किसी ने भी किताब न ली तो नरेश आराम से सोफे पर पैर फैला कर बैठ गया और हंसहंस कर किताब जोरजोर से पढ़ कर सुनाने लगा और जहां गाने आए वहां अपनी खरखरी आवाज में गा कर पढ़ने लगा. एक समय आया जब सालियों से भी हंसे बिना नहीं रहा गया.

उर्मिला ने किताब हाथ से छीनते हुए कहा, ‘‘अब बंद भी करो यह गर्दभ राग. कुछ खाने का ही बंदोबस्त करो.’’

‘‘बोलो, हुक्म करो. बंदा हाजिर है. बिरयानी, चिकनपुलाव, कोरमा, पनीर, कोफ्ते, शामी कबाब, सींक कबाब, मुगलई परांठे, मखनी तंदूरी मुर्गा?’’

‘‘बस भी करो, जीजाजी, पता लग गया कि आप वही हैं कि थोथा चना बाजे घना. मैं तो 2 दिन से उपवास किए बैठी थी. लगता है सूखा चना भी नहीं मिलेगा.’’

‘‘भई, सूखा चना तो जरूर मिलेगा.  क्यों, उर्मिला? बस, तो फिर आज चना पार्टी ही हो जाए. जरा टटोलो बटुआ अपना, कहीं उस के लिए भी चंदा इकट्ठा न करना पड़ जाए.’’

बड़ी साली ने कहा, ‘‘अच्छा, दीदी, हम चलते हैं. कल ही आएंगे. तैयार रहना.’’

‘‘नहींनहीं, ऐसे कैसे जाओगी. कुछ तो खा के जाओ. जरा बैठो, कुछ न कुछ तो खाना बन ही जाएगा. बात यह है कि सारी गलती मेरी है. वेतन तो तुम्हारे जीजाजी सब मेरे हाथ में देते हैं, पर मैं झूठी शान में सारा एक ही सप्ताह में खर्च कर देती हूं. अब कब तक तुम से छिपाऊंगी.’’

‘‘नहीं, दीदी, थोड़ी गलती तो हमारी भी है. हमें भी तुम्हारे साथ मिलबैठ कर आनंद लेना चाहिए. तुम्हारे ऊपर बोझ नहीं बनना चाहिए,’’ बड़ी ने कहा.

छोटी ने शैतानी से कहा, ‘‘देखा, दीदी, नंबर 2 कितनी चालाक हैं. अपना रास्ता पहले ही साफ कर लिया कि कोई हम में से जा कर उस के ऊपर बोझ न बने.’’

नरेश ने हंसते हुए कहा, ‘‘तो फिर अब जब पोल खुल गई है तो सिनेमा देखने के लिए तैयार हो जाओ.’’

और फिर जो चीखपुकार मची तो लगा सारा महल्ला सिर पर उठा लिया है. टिकट बालकनी के नहीं, पहले दरजे के थे, जिस पर किसी को आपत्ति नहीं हुई. फिल्म देखने के बाद नरेश उन्हें ढाबे में तंदूरी रोटी और दाल खिलाने ले गया. वह भी सब ने बहुत मजे से पेट भर कर खाया.

इस तरह एक दामाद और बच गया.द्य

राखी स्पेशल: आदित्य राय कपूर के इन लुक्स को करें ट्राय

आदित्य राय कपूर बौलीवुड के उन एक्टर्स में से एक है जो सभी टाईप के रोल्स के लिए खुद को काफी अच्छे से मोल्ड कर लेते है. अपने कैरियर की शुरुआत  फिल्म ‘लंडन ड्रीम्स’ से करने वाले आदित्य ने अब तक लगभग सारे जोनर में फिल्में कर चुकी हैं. साल 2013 में आई फिल्म ‘आशिकी 2’ में उनकी एक्टिंग को काफी सराहा गया. इस फिल्म के बाद आदित्य ने ‘ये जवानी है दिवानी’ और ‘दावते इश्क’ जैसी फिल्में की.  आदित्य अपनी फिटनेस के कारण लड़कियों में खासा पौपुलर है. इस चौकलेटी बौय की स्टाइल की बात करें तो वो काफी अलग है जो उनको को एक हटके लुक देती है. आज हम लेकर आए है उनके 4 लुक्स जिसे आप इस राखी पर ट्राय कर सकते है.

इस राखी ट्राय करें वेवेस्टर्न लुक

आदित्य के इस लुक की बात करें तो ये काफी सिंपल और क्लासी है इस लुक में आदित्य ने ग्रे कलर के वैस कोट के साथ क्रीम कलर की पेंट और वाइट कलर की शर्ट का जो कौम्बिनेशन पहना वो काफी स्टाइलिश लग रहा है. इस राखी अगर आप कुछ अच्छा ट्राय करना चाहते है तो ये लुक परफेक्ट है.

प्रिंटेड शर्ट लुक

आदित्य की इस लुक की बाद करें तो ये काफी क्लासी है और यंग लड़को के लिए परफेक्ट है. वाइट शर्ट में ब्लू प्रिंट वाले इस शर्ट में आप काफी कूल नजर आएंगे. साथ ही मौनसून में राखी के इस त्योहार के लिए ये स्टाइल काफी अच्छा मेच करेंगी.

 

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आदित्य का फ्री स्टाइल लुक

इस लुक को फ्री स्टाइल कहना गलत नहीं होगा, टी-शर्ट के साथ ओवर चैक शर्ट काफी एलिगेंट लुक दे रहा है. बारिश के इस मौसम में आपको कुछ फ्री ट्राय करने का मन है तो इस लुक को आप जरुर ट्राय कर सकते है. इस लुक की खास बात है उनकी जींस और शूज का कौम्बिनेशन जो इस लुक को परफेक्ट बना रहा है.

 

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राखी की स्पेशल फंक्शन पर ट्राय करें ये लुक

अगर आप के यहां राखी की कोई स्पेशियल पार्टी होने वाली है तो उनके लिए इस लुक के कोई बेहतर ओपशन नही हैं.

 

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DEV.

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पति को दी जलसमाधि

दूसरी लड़कियों की तरह बिंदिया की भी इच्छा थी कि उस की सुहागरात फिल्मों जैसी हो. शादी का धूमधड़ाका थम चुका था, अधिकांश मेहमान भी विदा हो गए थे. अपने कमरे में बैठी बिंदिया सुहागरात के खयालों में डूबी पति छोटेलाल का इंतजार कर रही थी. बिंदिया ने काफी दिन पहले से सुहागरात के बारे में न केवल काफी कुछ सोच रखा था, बल्कि मन ही मन उसे अमल में लाने की भी तैयारियां कर चुकी थी.

हालांकि बिंदिया बहुत ज्यादा पढ़ीलिखी नहीं थी और न ही किसी मालदार घराने की थी. फिर भी सुहागरात और शादीशुदा जिंदगी को ले कर उस के सपने वैसे ही थे, जैसे उस ने फिल्मों और टीवी सीरियलों में देखे थे. मसलन पति कमरे में दाखिल होगा, फिर आहिस्ता से दरवाजे की कुंडी बंद कर पलंग तक आएगा, प्यार भरी रोमांटिक बातें करेगा, धीरेधीरे उस के अंगअंग को सहलाएगा चूमेगा. कब वह एक एकएक कर उस के सारे कपड़े उतार देगा, इस का उसे होश ही नहीं रहेगा. फिर दोनों जिंदगी के सब से हसीन सुख के समंदर में गोते लगाते हुए कब सो जाएंगे, उन्हें पता नहीं चलेगा.

इन्हीं खयालों में डूबी बिंदिया ने जैसे ही किसी के आने की आहट सुनी, उस के शरीर का रोआंरोआं खड़ा हो गया. उस का हलक सूखने लगा और मारे शरम व डर के वह दोहरी हो गई. जिस रात का ख्वाब वह सालों से देख रही थी, वह आ पहुंची थी. छोटेलाल कमरे में दाखिल हो चुका था.

पर यह क्या, छोटेलाल ने उसे कुछ सोचनेसमझने का मौका ही नहीं दिया. कमरे में आते ही वह उस पर जानवरों की तरह टूट पड़ा. उस के शरीर से इत्र या परफ्यूम नहीं महक रहा था, बल्कि मुंह से शराब की गंध आ रही थी. छोटेलाल ने उस से कोई बातचीत नहीं की और उस के कपड़े जिस्म से उतारे नहीं बल्कि खींच कर अलग कर दिए. उसे लाइट बुझाने का भी होश नहीं था.

सुहागरात बनी बलातरात

जैसे ही बिंदिया का सांवला बदन छोटेलाल की आंखों में नुमाया हुआ, वह बजाय रोमांटिक होने के पूरी तरह वहशी हो गया. उस की हालत वैसी ही थी जैसे लाश के पास बैठे गिद्ध की होती है.

देखते ही देखते वह बिंदिया पर छा गया और कुछ देर बाद यानी अपनी प्यास बुझाने के बाद करवट बदल कर खर्राटे भरने लगा. बिंदिया के सपने चूरचूर हो चुके थे, उसे लग रहा था कि उस ने सुहागरात नहीं बल्कि बलातरात मनाई है, जिस में उस का रोल हवस मिटाने वाली गुडि़या जैसा था.

कुछ देर बाद वह सामान्य हुई तो गहरी नींद में सोऐ छोटेलाल को देख कर उस का मन गुस्से से भर उठा. शराब से तो उसे बचपन से ही नफरत थी. उसे क्या पता था कि उसे एक शराबी के पल्लू से बांध दिया जाएगा.

न घूंघट उठा, न छेड़छाड़ हुई, न दूध पीया गया और न ही प्यारभरी बातें हुईं. जो हुआ उसे याद कर बिंदिया का रोमरोम सुलग रहा था. उसे लग रहा था कि इस गंवार और जाहिल आदमी की पीठ पर लात मार कर उसे उठा कर बताए कि एक पत्नी सुहागरात की रात क्या चाहती है और कैसे चाहती है.

पर बेबसी ने उस के होंठ बांध दिए, क्योंकि उसे पहले ही बता दिया गया था कि अब पति ही तुम्हारा सब कुछ है. उस की मरजी को हुक्म मानना और जैसे भी हो, उसे खुश रखना क्योंकि अब वही तुम्हारा सब कुछ है.

अकसर सुहागरात को ही तय हो जाता है कि आने वाली जिंदगी कैसी होगी. यह बात बिंदिया को अब समझ आ गई थी कि अब जैसे भी हो बाकी की जिंदगी उसे इसी छोटेलाल के साथ काटनी है. जिस में रत्ती भर भी शऊर नहीं है और न ही वह पत्नी और शादीशुदा जिंदगी के मायने समझता है. इतना सब कुछ समझ आ जाने के बाद दुखी और सुबकती बिंदिया ने कपड़े पहने और सोने की कोशिश करने लगी.

राजस्थान का धौलपुर जिला मध्य प्रदेश के मुरैना और उत्तर प्रदेश के जिले आगरा को मिलाता हुआ है. आगरा के आमदोह गांव की बिंदिया की शादी धौलपुर के गांव छातीपुरा के छोटेलाल निषाद से हुई थी.

दोनों ही गरीब घर के थे, लिहाजा शादी से पहले ही बिंदिया ने मन ही मन तय कर लिया था कि पति जो भी रूखासूखा खिलाएगा, खा लेगी. जो भी पहनाएगा, पहन लेगी और जैसे भी रखेगा, रह लेगी. लेकिन जिएगी प्यार से, यही जज्बा जिंदगी को खुशहाल बनाता है, जिस के लिए पैसों की रत्ती भर भी जरूरत नहीं पड़ती.

पहली ही रात बिंदिया को समझ आ गया था कि उस के सपने अब कभी पूरे नहीं होने वाले, क्योंकि छोटेलाल दिन भर मेहनतमजदूरी करता था और रात को अकसर शराब पी कर उस के बदन को नोचनेखसोटने लगता था. बेमन से बिंदिया उस का साथ देती थी, जिस के चलते पूरी तरह न तो उस के तन की प्यास बुझती थी और न छोटेलाल को उस के मन से कोई वास्ता ही था.

घरजमाई बन कर रहने लगा छोटेलाल

छीतापुरा में छोटेलाल को रोजाना काम नहीं मिलता था, इसलिए शादी के कुछ दिनों बाद वह आमदोह आ कर बस गया. यानी घरजमाई बन गया. मायके आ कर बिंदिया को भी थोड़ा सकून मिला. यहां कम से कम सब लोग जानेपहचाने तो थे, जिन से वह अपना दुखदर्द बांट सकती थी, हंसबोल सकती थी.

ससुराल आ कर भी छोटेलाल की आदतों में कोई बदलाव नहीं हुआ. उलटे उस की शराब की लत और बढ़ गई. जल्द ही उस की दोस्ती एक आटो ड्राइवर राजकुमार से हो गई, जो यारबाज आदमी था. वह छोटेलाल को कभीकभी दारूमुर्गे की पार्टी देता रहता था. देखतेदेखते दोनों में गहरी छनने लगी. राजकुमार कभीकभी छोटेलाल के घर यानी ससुराल में ही बैठ कर दावत देने लगा.

शराब से नफरत करने वाली बिंदिया को राजकुमार का आनाजाना खटका नहीं, क्योंकि उसे वह बचपन से ही जानती थी और यह भी जानती थी कि यह वही राजकुमार है, जिस ने जवानी के शुरुआती दिनों में उस के पीछे खूब चक्कर लगाए थे. उसे पटाने की कोशिश की थी, लेकिन बिंदिया ने ही उसे घास नहीं डाली थी.

बिंदिया जब पति के साथ आमदोह वापस आई तो उस की खिली और गदराई जवानी देख कर राजकुमार के मन में पुरानी हसरतें जोर मारने लगी थीं. बिंदिया के हावभाव और बातचीत से वह जल्द ही भांप गया था कि वह पति से खुश नहीं है.

एक सधे खिलाड़ी की तरह उस ने बिंदिया की तरफ प्यार या वासना कुछ भी कह लें, का दाना डाला तो यह जान कर उस का दिल बल्लियों उछलने लगा कि दाना चुगने में बिंदिया ने तनिक भी आनाकानी नहीं की थी. यानी आग दोनों तरफ बराबरी से लगी थी, इंतजार था मौके का. इस आग को धधकने में देर नहीं लगी और एक दिन जरा सी कोशिश करने पर बिंदिया पके आम की तरह राजकुमार की झोली में आ गिरी.

यह पका आम चोरी का था, जिसे राजकुमार मनमुआफिक अपनी मरजी से खा या चूस नहीं सकता था. दोनों को अपने तन और मन की आग बुझाने कस्बे से बाहर जंगलों में जाना पड़ता था. राजकुमार ठीक वैसी ही बातें करता था, जैसी कि बिंदिया चाहती थी. प्यार मोहब्बत और रोमांस की ये वे बातें थीं, जिन्हें वह पति छोटेलाल के मुंह से सुनने को तरसती रही थी.

छोटेलाल ने कभी उस की खूबसूरती की तारीफ नहीं की थी, पर राजकुमार तारीफों के पुल बांध देता था. बिंदिया इस पर और निहाल हो जाती थी. अब हालत यह थी कि छोटेलाल का हक उस के शरीर पर तो था, लेकिन मन पर नहीं. उस के मन पर तो राजकुमार ने कब्जा जमा लिया था.

गांव वालों ने आंखों में ही बना ली वीडियो

गांव में भले ही सीसीटीवी नहीं थे, लेकिन गांव वालों की नजर किसी कैमरे की मोहताज नहीं थी. जल्द ही लोगों को बिंदिया और राजकुमार के नाजायज संबंधों की भनक लग गई. किसी ने दोनों को जंगल में गुत्थमगुत्था होते देख लिया तो बिना स्मार्टफोन का इस्तेमाल किए दिमाग में बना उन के संबंधों का वीडियो औडियो गांव भर में वायरल हो गया.

हालांकि बिंदिया के पास मोबाइल फोन आ गया था, जिस के जरिए वह राजकुमार के संपर्क में रहती थी. दोनों घंटों प्यार और अभिसार की बातों में डूबे रहते थे. खासतौर से उस वक्त जब उस का पति घर पर नहीं होता था और जब होता था तब राजकुमार शराब की बोतल ले कर पहुंच जाता था. लेकिन इस बात की वह पूरी अहतियात बरतता था कि छोटेलाल के सामने कोई ऐसी बात या हरकत न हो, जिस से उस के मन में शक पैदा हो. क्योंकि इस से बनीबनाई बात बिगड़ने का पूरा अंदेशा था.

तमाम सावधानियों के बाद भी बात बिगड़ ही गई. गांव की चर्चा जब छोटेलाल के कानों में पहुंची तो पहले तो उसे यकीन नहीं हुआ, लेकिन इस धुएं की आग कहां है, यह देखने से वह खुद को रोक नहीं पाया. गलत नहीं कहा जाता कि शक का बीज एक बार दिमाग में घर कर ले तो बिना पेड़ बने सूखता या मरता नहीं.

यही छोटेलाल के साथ हुआ. लिहाजा उस ने मन का शक मिटाने या सच जान लेने की गरज से राजकुमार और बिंदिया की निगरानी शुरू कर दी. नतीजा भी जल्द सामने आ गया, जब उस ने एक दिन दोनों को आदिम हालत में रंगेहाथों पकड़ लिया.

रंगेहाथों पकड़ी गई बिंदिया

पत्नी को गैरमर्द की बाहों में बेशरमी से मचलता और लिपटता देख छोटेलाल का खून खौल उठा. उस ने राजकुमार को पकड़ने की कोशिश की तो वह अपने कपडे़ हाथ में ले कर नंगधडं़ग हालत में भाग निकला. लेकिन बेचारी बिंदिया इस हालत में कहां जाती. उस दिन छोटेलाल ने उस की तबीयत से धुनाई कर डाली. मार से बेहाल बिंदिया तरहतरह की कसमें खाते पति से माफी मांगती रही कि अब दोबारा ऐसा नहीं होगा.

छोटेलाल नाम का ही छोटा था, लेकिन दिल का बड़ा निकला. उस ने पत्नी को माफ कर दिया. इस पर बिंदिया ने चैन की सांस ली लेकिन अब राजकुमार का घर आनाजाना बंद हो गया था. दोनों में बातचीत भी नहीं होती थी. यह हालत ज्यादा दिनों तक नहीं रह पाई. छोटेलाल को पैसों की तंगी और शराब की तलब परेशान करने लगी थी.

पति को नर्म पड़ते देख बिंदिया ने राजकुमार को इशारा किया तो वह एक दिन छोटेलाल से माफी मांगने उस के घर जा पहुंचा. शराब की तलब की मजबूरी कह लें या फिर वाकई फिर बड़े दिल वाला कह लें, छोटेलाल ने उसे भी इस शर्त पर माफ कर दिया कि आइंदा वह कभी भी बिंदिया की तरफ आंख उठा कर नहीं देखेगा.

बात अंधा क्या चाहे दो आंखों वाली जैसी थी. दुश्मनी रफादफा हो गई तो फिर महफिल जमने लगी और दोनों दारूमुर्गे की दावत उड़ाने लगे. बिंदिया भी पति और यार की नजदीकियों से खुश थी. उसे राजकुमार से फिर आंख और इश्क लड़ाने का मौका मिल रहा था.

लेकिन अब छोटेलाल चौकन्ना था और पहले के मुकाबले सख्त भी हो चला था, इसलिए दोनों को परेशानी होने लगी. इतने नजदीक होने पर जिस्मों की दूरियां राजकुमार और बिंदिया की प्यास और भड़का रही थीं.

गांव में पहले ही इतनी बदनामी हो चुकी थी कि दोनों के दिलोदिमाग से शरमोहया नाम की चीज खत्म हो चुकी थी. तंग आ कर इन हैरानपरेशान प्रेमियों ने वासना की आग में जलते एक सख्त फैसला ले लिया, जिस की 2 महीने तक किसी को हवा नहीं लगी.

पुलिस पहुंची बिंदिया के पास

वह बीते 5 जून की तारीख थी, जब कुछ पुलिस वाले आमदोह गांव पहुंचे और बिंदिया का पता पूछने लगे. बिंदिया जब पुलिस के सामने आई तो उस के चेहरे की रंगत उड़ी हुई थी. पुलिस वालों ने छोटेलाल के बारे में पूछताछ की तो उस ने टरकाने की गरज से जवाब दिया कि वह तो कुछ दिनों से कहीं गए हुए हैं. बिंदिया को अहसास नहीं था कि पुलिस वाले अपना पूरा होमवर्क कर के आए हैं. उन्होंने शुरुआती पूछताछ में ढील दी और फिर बिंदिया की निगरानी और पूछताछ शुरू की तो पता चला कि छोटेलाल के जाने के बाद राजकुमार का बिंदिया के घर आनाजाना बढ़ गया था. कुछ लोगों ने दोनों के नाजायज ताल्लुकात होने की बात भी दबी जुबान से कही.

असल में हुआ यूं था कि 5 मार्च को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के गांव गुलेंदा निवासी मुन्ना सिंह ने नूराबाद थाने में खबर दी थी कि सुनरेखा नदी के किनारे एक लाश तैर रही है. खबर मिलते ही थानाप्रभारी विनय यादव हरकत में आ गए. घटनास्थल पर पहुंच कर उन्होंने गांव वालों की मदद से लाश को बाहर निकाला.

लाश का मुआयना करने पर चोट के निशान नहीं पाए गए तो पुलिस वाले इसे हादसे से हुई मौत मानते रहे. लाश के पास से ऐसा कोई सबूत नहीं मिला था, जिस से उस की शिनाख्त हो पाती. लेकिन जब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आई तो उस में मौत की वजह जहर बताया गया.

पुलिस की दिक्कत यह थी कि लाख कोशिशों के बाद भी मृतक की पहचान का कोई सुराग नहीं मिल रहा था. इस के बाद भी पुलिस वालों ने हिम्मत नहीं हारी.

एसपी मुरैना असित यादव ने इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाने के लिए एसडीपीओ ओ.पी. रघुवंशी के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी, जिस में विनय यादव के अलावा एएसआई जयपाल सिंह, अजय बेशांदर, रामदास सिंह, हैडकांस्टेबल केशवचंद, धर्मवीर, मुन्ना सिंह, सुनील, सुरेंद्र सिंह, अजय और दीनदयाल को शामिल किया गया.

एक महीने तक पुलिस टीम मृतक की शिनाख्त की कोशिश में जुटी रही, तब कहीं जा कर पता चला कि मृतक छोटेलाल निषाद पुत्र पूरन निषाद निवासी छीतापुरा है. यहीं से पुलिस टीम को पता चला कि छोटेलाल कुछ महीनों पहले अपनी ससुराल आमदोह जा कर रहने लगा था.

जब पुलिस वालों को बिंदिया और राजकुमार के संबंधों के बारे में पता चला तो उन्होंने गुपचुप तरीके से बिंदिया के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई, जिस से पता चला कि न केवल उस की और राजकुमार की लंबीलंबी बातें होती थीं, बल्कि हादसे के दिन दोनों के ही फोन की लोकेशन भी घटनास्थल की आ रही थी. अब कहनेसुनने को कुछ खास नहीं बचा था.

पुलिस वालों ने जब बिंदिया से राजकुमार के बारे में पूछा तो वह यह कह कर साफ मुकर गई कि वह तो किसी राजकुमार को नहीं जानती. लेकिन पुलिस टीम जानती थी कि बिंदिया राजकुमार को कितने गहरे तक जानती है.

दोनों ने कबूला अपना गुनाह

राजकुमार और बिंदिया से अलगअलग पूछताछ की गई तो दोनों के बयानों में काफी विरोधाभास पाया गया. फिर जल्द ही दोनों ने अपना जुर्म कबूल लिया कि उन्होंने ही योजना बना कर छोटेलाल नाम का कांटा अपने रास्ते से हटाया था.

योजना के मुताबिक बिंदिया ने छोटेलाल के खाने में जहर मिला दिया था, जो राजकुमार ने उसे ला कर दिया था. जब जहर का असर हुआ तो छोटेलाल लुढ़क गया. उस के बेहोश होते ही दोनों एकदूसरे से लिपट गए और सब से पहले अपनी कई दिनों की हवस की प्यास बुझाई.

इस के बाद लाश ठिकाने लगाने के लिए राजकुमार ने फोन कर के अपने दोस्तों सुलतान कुशवाह व जंगबहादुर उर्फ गुड्डू जाटव को बुला लिया. चारों ने बेहोश छोटेलाल को आटोरिक्शा में बीच में इस तरह बैठाया कि कोई देखे तो लगे कि सवारियां बैठी हैं.

यह आटोरिक्शा आमदोह नगला थाना चौकी आगरा से होता हुआ गुलेंदा के पास पहुंचा, जहां सुनसान जगह देख इन्होंने छोटेलाल को नदी में फेंक दिया. जब 2 महीने तक कुछ नहीं हुआ तो दोनों बेफिक्र हो गए कि उन के गुनाह पर परदा पड़ा रहेगा. पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. नाजायज संबंधों के चलते प्रेमी के साथ मिल कर पति की हत्या की एक और कहानी खत्म हुई, जो अपने पीछे कई सवाल भी छोड़ गई. मसलन मौजमस्ती के लिए लोग क्या कुछ नहीं कर गुजरते.

बिंदिया बजाए राजकुमार को यार बनाने के छोटेलाल को ही रास्ते पर लाने की कोशिश करती तो इस से बात बन सकती थी, लेकिन उसे अपने सपनों का राजकुमार, राजकुमार कुशवाह में दिखा और सपनों की जिंदगी जीने के लिए पति को ही निपटा दिया, जिस की सजा वह भोगेगी, भोग रही है.

छोटेलाल जैसे पति भी अगर पत्नियों की भावनाओं को समझें, उन की कद्र करें तो न केवल हादसों से बच सकते हैं, बल्कि एक खुशहाल जिंदगी भी जी सकते हैं.

(कहानी सौजन्य मनोहर कहानी)

फ्लर्ट

अंतिम भाग

लेखक- शन्नो श्रीवास्तव

पूर्व कथा

सोनी अपने ममेरे भाई राजू भैया की लड़कियों से छेड़छाड़ करने की आदत से परेशान थी. लड़कियां भी न जाने क्यों उस की लच्छेदार बातों में फंस जाती थीं. जबकि इस के पीछे उस का मकसद सिर्फ टाइमपास होता था, उन्हें ले कर वह भावुक हो ऐसा कभी नहीं हुआ.

सोनी राजू भैया की दीदी की ननद की शादी में जाती है. जहां राजू दीदी की चचेरी ननद रेशमी को प्यार भरी बातों से काफी बेवकूफ बनाता है.

विवाह के बाद राजू सोनी के सामने शेखी बघारता है कि कैसे रेशमी उस की बातों में आ गई और अच्छी बेवकूफ बनी. सोनी राजू को समझाने की कोशिश करती है कि वह अपनी यह आदत छोड़ दें वरना मामाजी से शिकायत कर देगी. राजू के घर पर सोनी मामी से मिलती है और कहती है कि राजू भैया की शादी जल्दी करवा दे क्योंकि वह लड़कियों के पीछे लगे रहते हैं. राजू भैया की मां भी सोनी की बात पर ज्यादा गौर नहीं करती. अब आगे…

कुछ दिनों बाद मेरी बूआ की लड़की की शादी पड़ी. लड़के वाले गोरखपुर के थे इसलिए बूआ का परिवार कानपुर से 5 दिन पहले ही गोरखपुर आ कर होटल सत्कार में ठहर गया और शादी की तैयारियां होने लगीं. शादी का कार्ड मामा के यहां भी गया था और राजू भैया को खासकर शादी की व्यवस्था संभालने के लिए फूफाजी ने बुलाया था.

बूआ के जेठजी का भी पूरा परिवार साथ में आ गया था. उन की इकलौती लड़की गौरी भी आई थी. कामधाम से खाली हो कर रात में जब हम सब गाने या बातचीत के लिए बैठते तो उस समय राजू भैया का जगह ढूंढ़ कर गौरी के बगल में जा कर बैठना मेरी नजर से बच नहीं पाया. और एक दिन जब शाम तक राजू भैया होटल में नहीं आए तो गौरी ने मुझ से पूछा, ‘‘सोनी, आज तेरे राजू भैया नहीं आएंगे क्या?’’

‘‘क्यों, कोई काम था?’’ मैं ने पैनी निगाह उस पर गड़ाते हुए पूछा.

‘‘नहीं, काम नहीं था, वह रोज आते थे, आज नहीं दिखे तो पूछ लिया.’’

‘‘बैठे होंगे किसी गर्लफ्रेंड के पास, यहां की याद नहीं आई होगी,’’ मैं ने लापरवाही से कहा. मकसद था, बस गौरी को उन की आदत से अवगत कराना.

‘‘उन की बहुत सारी गर्लफे्रंड हैं क्या?’’ कुछ देर की खामोशी के बाद सर्द आवाज में गौरी ने पूछा.

‘‘हां, गर्ल तो बहुत सी हैं पर वे फें्रड भी हैं या नहीं मैं नहीं जानती.’’

इस के बाद गौरी की आंखों में मैं ने जो कुछ देखा उस से एक अनजाना सा भय लगा मुझे.

उस के बाद मैं शालू दीदी के साथ खरीदारी और ब्यूटी पार्लर के चक्कर लगाने में इतनी व्यस्त हो गई कि उधर मेरा ध्यान ही नहीं गया. एक बार बीच में फिर राजू भैया से झगड़ने का अवसर पा गई तो मैं ने उन्हें आडे़ हाथों लिया.

‘‘आप उस के पीछे क्यों पड़े हैं?’’

‘‘किस के पीछे?’’

‘‘गौरी के.’’

‘‘अच्छा, वह पगली? गौरी नाम है उस का, पूरी बेवकूफ दिखती है.’’

‘‘बेवकूफ है, पगली है, फिर भी उस के पीछे हाथ धो कर पडे़ हैं.’’

‘‘बेवकूफ है तो क्या, है तो सुंदर. कौन सा मुझे उस के साथ शादी कर के घर बसाना है. वैसे वह है कहां? उसे बातों के छल्ले में घुमाने में मुझे बहुत मजा आता है,’’ कहते हुए राजू भैया उस की ही तलाश में निकल पडे़.

शालू दीदी की शादी हो गई. सभी लोग अपनेअपने घर चले गए. मेरी परीक्षाएं नजदीक आ गई थीं इसलिए मैं भी सबकुछ भूल कर पढ़ाई में लग गई. मामा के यहां आनाजाना भी बंद था इसलिए राजू भैया से भी मुलाकात बहुत कम हो पाती थी.

तभी अचानक एक दिन कानपुर से बूआ का फोन आया. उन्होंने कहा, ‘‘भैया, गौरी की तबीयत बहुत खराब है, आप लोग यहां आ जाइए. साथ में सोनी को भी लेते आइएगा तो अच्छा रहेगा.’’

‘‘गौरी की तबीयत खराब है तो मुझे क्यों इस तरह अचानक बुला रहे हैं और साथ में सोनी को भी,’’ मम्मीपापा को बात कुछ समझ में नहीं आ रही थी. बारबार पूछने पर भी बूआ फोन पर कुछ नहीं बता पा रही थीं और हमें कानपुर ही बुला रही थीं.

मम्मीपापा कुछ समझ नहीं पा रहे थे, पर गौरी बीमार है और मुझे बुलाया है यह सुन कर लगा था कि तार कहीं न  कहीं राजू भैया से जुड़े हैं.

मेरा शक सही निकला. हम वहां पहुंचे तो गौरी बिस्तर पर पड़ी थी. बूआ ने बताया, ‘‘शालू की शादी से वापस आने के बाद से ही इस का यह हाल है. पहले तो हम लोगों ने सोचा कि शालू की याद आती होगी, बाद में डाक्टर को दिखाना पड़ा तो उन्होंने डिप्रेशन बताया. एक दिन तो डिप्रेशन इतना बढ़ गया कि इस ने आत्महत्या करने की भी कोशिश की थी.’’

‘‘आखिर बात क्या है?’’ मम्मी ने पूछा, ‘‘कुछ तो कारण पता चला होगा और फिर हम लोगों को यों अचानक क्यों बुलाया है?’’

‘‘भाभी, गौरी राजू के लिए पागल हो गई है. इस की बस, एक ही रट है कि राजू नहीं मिला तो जान दे दूंगी. इतने दिनों तक तो हम इसे समझाते रहे पर जब पानी सिर से ऊपर हो गया और गौरी ने जान देने की कोशिश की तो मजबूर हो कर हमें आप को बुलाना पड़ा. जेठजी की यह इकलौती संतान है. इस की इस हालत से वह अपना धैर्य खो चुके हैं. अब हमारे हाथ में कुछ नहीं है, अब आप लोग ही कुछ कर सकते हैं वरना कहीं अनर्थ न हो जाए.’’

मम्मी जानती थीं कि राजू भैया की हर हकीकत मुझे पता होती है इसलिए वह मुझे एक किनारे ले जा कर धीरे से पूछने लगीं, ‘‘यह क्या चक्कर है, सोनी? क्या सचमुच राजू और गौरी के बीच कुछ बात है? क्या राजू भी चाहता है इसे? तुझे तो सचाई मालूम होगी?’’

दूसरे दिन मैं ने गौरी को टटोलते हुए पूछा, ‘‘यहां आने के बाद तुम ने राजू भैया से कभी फोन पर बात की थी?’’

‘‘हां, मैं ने फोन कई बार किया. शुरू में तो उन्होंने बात की पर बाद में ‘रांग नंबर’ कह कर फोन रख देते हैं. मैं ने उन्हें कई पत्र भी लिखे पर एक का भी उन्होंने जवाब नहीं दिया. पता नहीं पत्र उन्हें मिले ही नहीं या वह जवाब ही नहीं देना चाहते,’’ कहतेकहते गौरी की आंखों से झरझर आंसू गिरने लगे.

‘‘देखो गौरी, मैं ने तो तुम्हें पहले ही बताया था कि राजू भैया की बहुत सारी गर्लफ्रेंड हैं, फिर भी तुम उन्हें कैसे चाहने लगीं. तुम इतनी अच्छी लड़की हो, तुम्हें एक से बढ़ कर एक लड़के मिलेंगे, उन के बारे में सोचना छोड़ दो. उन के जैसे लड़के किसी से प्यार नहीं करते, बस, अपना टाइमपास करते हैं लड़कियों के साथ.’’

‘‘अगर वे मुझ से प्यार नहीं करते थे तो क्यों बारबार मेरी तारीफ करते थे, मेरे पास आने का बहाना ढूंढ़ते थे, मुझ से घंटों बातें करते थे, अपना फोन नंबर दिया और पत्र लिखने को कहा. क्या यह सब उन के लिए टाइमपास था?’’

‘‘हां, गौरी, हां, मैं राजू भैया को बहुत अच्छी तरह जानती हूं. वह तुझे प्यार नहीं करते,’’ मैं ने दिल कड़ा कर के सचाई उस से कह ही डाली.

‘‘प्यार नहीं करते हैं तो जा कर अपने राजू भैया से कह देना कि मैं उन्हें प्यार करती हूं और करती रहूंगी वे चाहे करें या न करें. साथ में यह भी कह देना कि गौरी ने उन के साथ टाइमपास नहीं किया है बल्कि दिल से प्यार किया है और अब जीवन भर उन का इंतजार करूंगी. हां, यदि जुदाई बरदाश्त न कर पाई तो जहर पी लूंगी.’’

गौरी के तेवर और हालत मम्मी को बताई तो उन का चेहरा ही उतर गया. ‘‘क्या करेंगे अब? एक से बढ़ कर एक रिश्ते आ रहे हैं राजू के लिए. यह गौरी तो केवल देखने में ही सुंदर है, दिमाग कितना कम है यह हम से छिपा है क्या. किसी तरह इंटर तक पढ़ाई की और अब घर बैठी है. शादी करवा दी तो मेरे राजू की जिंदगी बरबाद हुई और न करवाई तो लड़की ने कुछ कर लिया तो हम कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रह जाएंगे.’’

मम्मीपापा की हालत देखने लायक थी और जब गौरी के मम्मीपापा ने उन के सामने हाथ जोड़ कर बेटी के प्राणों की भीख मांगी तो पापा शरम से गड़ गए. गौरी के पापा को गले से लगाते हुए उन्होंने राजू भैया के पापा से बात करने  और उन्हें शादी  के लिए मनाने का पक्का वादा कर दिया.

सारी बातें सुनने के बाद मामामामी को तो सांप सूघ गया. इकलौते बेटे की शादी के सारे सपने बिखरते दिखने लगे. कोई और लड़की होती तो बात आईगई करने की भी कोशिश करते पर मामा के सामने बहनबहनोई के मानसम्मान का प्रश्न था और पापा के सामने छोटी बहन की ससुराल का मामला था.

आखिर मामामामी तैयार हो गए. राजू भैया को जब सारी बातें पता चलीं तो बौखला गए, ‘‘ऐसे कोई भी लड़की मेरे पीछे पागल हो जाए तो मैं कैसे उस से शादी कर लूं. मेरी पूरी जिंदगी का सवाल है, मैं नहीं करूंगा उस बेवकूफ लड़की से शादी.’’

‘‘बेटे, मैं चुप रहता हूं तो इस का मतलब यह नहीं है कि कुछ देखता भी नहीं हूं. आप की आदतें मेरी नजरों से छिपी नहीं हैं. मैं ने कभी कुछ कहा नहीं आप से इस का मतलब यह नहीं है कि आप की हरकतों से मैं अनजान हूं,’’ पापा के इस गंभीर वाक्य से राजू भैया की नजरें जमीन में गड़ गईं.

मामी ने समझाया, ‘‘देखो बेटा, अब परिस्थिति के साथ समझौता तो  करना ही पडे़गा. कहीं सचमुच उस ने फिर से जहर खा लिया तो हम सब पुलिस और कोर्टकचहरी के चक्कर में फंस जाएंगे और बदनामी भी कितनी होगी. देखने में तो गौरी ठीकठाक ही है, शादी के बाद पढ़ा लेंगे उसे आगे.’’

‘‘दिमाग होगा तब न पढ़ेगी आगे,’’ राजू भैया चीख पडे़.

‘‘दिमाग है या नहीं यह सब तब नहीं दिखा था क्या जब उस की तारीफों के पुल बांधा करते थे. कान खोल कर सुन लो, न चाहते हुए भी अब उस लड़की से तुम्हारी शादी कर देने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचता है मेरे सामने,’’ मामा बुरी तरह झल्लाते हुए उठ गए वहां से.

शादी से बचने का कोई और रास्ता न देख कर एक रात राजू भैया घर ही छोड़ कर चले गए. उन के इस तरह चले जाने का गम मामामामी की बरदाश्त के काबिल न था. पथराई आंखों से वे रोज बेटे के वापस आने या उस की कुशलता का समाचार पाने के इंतजार में रास्ता निहारते.

लाख छिपातेछिपाते भी राजू के घर छोड़ कर चले जाने की खबर एक दिन गौरी ने सुन ली और उसी रात उस ने अपनी धमकी को सच में तबदील कर दिया. फांसी के फंदे से झूलती गौरी के हाथों से पुलिस को जो ‘सुसाइड नोट’ मिला उस में उस ने साफसाफ शब्दों में राजू भैया को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया था. उस के बाद से पुलिस राजू भैया की तलाश में लग गई थी.

मामामामी अब यह सोचने लगे थे कि राजू घर वापस न ही आए तो अच्छा हो वरना पुलिस के हाथ लग गया तो न जाने क्या हाल होगा उस का.

गौरी की मौत ने मेरे परिवार के रिश्तों को भी बिखेर दिया. फूफाजी और उन के परिवार वालों ने मम्मीपापा को दोषी ठहराते हुए कहा कि यदि आप लोग चाहते तो हमारी बेटी की जान बच सकती थी. फूफाजी ने बूआ से साफ कह दिया कि हमारी भतीजी की मौत के जिम्मेदार तुम्हारे भैयाभाभी व उन के रिश्तेदार हैं. उन से तुम चाहो तो रिश्ता रखो पर मेरा अब उन से कोई संबंध नहीं है.

गौरी की मौत जैसे दर्दनाक हादसे के बाद सभी बड़ेबुजुर्गों ने अपनाअपना गुस्सा एकदूसरे पर उतार दिया और मैं सोचने लगी, ‘काश, किसी भी एक बुजुर्ग ने किसी भी एक अभिभावक ने, राजू भैया को उन की ऐसी आदतों के लिए रोकाटोका या समझाया होता तो न यों गौरी ने असमय मौत को गले लगाया होता और न यों हमारा परिवार बिखरता.’     द्य

अब यह डायरेक्टर हुआ स्क्रीन लिंचिंग का शिकार

लेकिन मोब लिंचिंग का डिजिटल संस्करण भी खूब चलन में है जिसे ट्रोलिंग कहा जाता है . वह तो भक्तों का बस नहीं चलता नहीं तो वे हर उस शख्स को स्क्रीन में घुसकर ही ठोक डालें जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलता हो या फिर किसी भी मुद्दे पर उनसे असहमति जताता हो . ताजा मामला किस फिल्म डायरेक्टर की स्क्रीन लिंचिंग का है यह जानने से पहले भोपाल के एक बुद्धिजीवी की इस बात पर गौर करना दिलचस्प होगा कि जल्द ही भाजपा सरकार एक डिवाइस लांच करने जा रही है जो एक छोटे से बल्ब के आकार की होगी .

इस डिवाइस को हर हिंदुस्तानी के माथे पर अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा . इस बल्ब की खूबी यह होगी कि जो भी मोदी जी के खिलाफ सोचेगा तो यह जलने लगेगा और नजदीकी थाने में सायरन बजने लगेगा कि किस नंबर की डिवाइस बाला किस लोकेशन पर मोदी जी के खिलाफ सोचने की जुर्रत कर रहा है . पुलिस की गाडियाँ थाने से निकलकर दौड़ेगी और उस देशद्रोही को गिरफ्तार कर लिया जाएगा बशर्ते इस दौरान भक्तों की भीड़ उसे पीट पीट कर मार न डाले . तो हुआ यूं कि गेंग ऑफ वासेपुर के डायरेक्टर अनुराग कश्यप भी भक्तों की गेंग के शिकार हो गए . इन भक्तों ने अनुराग ही दिखाते ट्रोल कर कर उन्हें सोशल मीडिया की दुनिया को अलविदा कहने मजबूर कर दिया . मूलतः उत्तरप्रदेश के गोरखपुर ( वही योगी जी बाला ) के रहने बाले इस युवा निदेशक का गुनाह बहुत संगीन था कि उसने धारा 370 पर अपने ट्वीट का मुंह खोल दिया था .

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आइये अनुराग के ट्वीट्स पर भी गौर करें उन्होने पहले लिखा , सबसे ज्यादा डराने बाली बात यह है कि एक शख्स सोचता है कि वो जानता है कि 120 करोड़ लोगों के लिए क्या सही है और फायदेमंद है. साथ ही उसके पास ताकत है उसे लागू करने की . ट्विटर के हर यूजर को एक बीमारी भी होती है वह है उसकी प्रतिक्रियाओं की , जो इस ट्वीट पर भी हुईं तो अनुराग का दिल मचल उठा और उन्होने एक और लंबा चौड़ा ट्वीट कर डाला जिसका सार यह था कि वे कश्मीर के भूगोल इतिहास के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते और न ही वे कश्मीरी पंडित या मुसलमान हैं फिर भी उन्हें लगता है कि 370 हटाने का तरीका गलत था . बस इतना पढ़ना भर था कि भक्तों की टोलियों ने उन्हें स्क्रीन पर मारना यानि ट्रोल करना शुरू कर दिया कि उन्हें कश्मीर और धारा 370 के बारे में जो लगा तो वह क्यों लगा , लगना वही चाहिए जो मोदी जी कह दें . उनके कहे और किए से हटकर लगना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं लिहाजा सोशल मीडिया की अदालत ने उन्हें मुजरिम मानते सजा भी सुना दी .

इसी दौरान किसी ट्रोलर को याद आया कि अरे यह तो वही मुआ है जिसने कुछ दिन पहले ही मोब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं पर हिज हाइनेस को चिट्ठी भी लिखी थी लिहाजा जुर्म दो गुना हो गया . इसलिए अभी अलिखित सोशल मीडिया एक्ट की इकलौती धारा के तहत उन्हें तो नहीं बल्कि उनके बुजुर्ग माता पिता और युवा बेटी को सजा ए मौत का फैसला सुना डाला गया. बक़ौल अनुराग , जब आपके माता पिता को काल पर और बेटी को ऑन लाइन धमकी मिल रही हो तो उस पर कोई बात करना नहीं चाहता कोई वजह भी नहीं है बात करने की . दबंग शासन करेंगे और दबंगई जीने का नया तरीका होगा . ऐसे नए इंडिया के लिए आप सभी को बधाई .

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इसके बाद उन्होने अपने ट्विटर अकाउंट को बंद कर दिया यानि विसर्जित कर दिया . इसके आगे कहने कुछ नया और खास है नहीं सिवाय इसके कि आपको अगर इस देश में रहना है तो नरेंद्र मोदी के दिमाग से सोचना होगा , उनके हर जायज ( नाजायज तो आजकल कुछ होता ही नहीं ) फैसले से इत्तफाक रखना पड़ेगा . आप को यह याद रखना पड़ेगा कि आप किसी महान लोकतान्त्रिक देश में नहीं बल्कि झींगालाला नुमा एक कबीले में रहते हैं जिसके सरदार के खिलाफ बोलना तो दूर की बात है सोचना भी पाप होता है . और अगर इसके बाद भी बुद्धिमानी दिखाते आपने अपनी खुपड़िया चलाई तो आपके साथ हुये हादसे के जिम्मेदार आपBखुद होंगे .

24 साल की हुईं सारा अली खान, देखें उनकी चाइल्डहुड Photos

बौलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान आज अपना 24वां जन्मदिन मना रही हैं. इस खास मौके पर फैंस के साथ- साथ उनके दोस्त भी उनको जमकर विश करने में लगे है. सारा फिल्मों में भले ही काफी गंभीर और  काम को लेकर फोकस रहती है पर असल जिंदगी में वो उतनी ही हंसमुख, मजाकिया और जिंदादिल है. सारा ने अपनी बौलीवुड सफर की शुरुआत फिल्म ‘केदारनाथ’ से की इसके बाद सभी उनकी एक्टिंग के दिवाने हो गए. सारा आज एक सफल एक्ट्रेस के रुप में पहचान बनी चुकी है.

पिता सैफ की लाडली हैं सारा अली खान

कुछ समय पहले ही सारा ने अपनी कुछ फोटोज इंस्टाग्राम पर शेयर की थीं जिनमें वह अपना पापा सैफ अली खान के साथ मस्ती करती नजर आ रही हैं. सारा के बचपन की इन फोटोज से साफ है कि, सैफ अली खान अपनी बेटी सारा से कितना प्यार करते हैं. भले ही सारा अब बड़ी हो चुकी हों लेकिन बचपन में वह अपने पापा की गोद खेलने मजा आज भी याद करती है.

फैमिली फोटो भी की थी शेयर

सारा को फैमिली फोटोज शेयर करने का भी काफी शौक है कुछ टाइम कहने उन्होंने अपनी मां अमृता सिंह और भाई इब्राहिम खान के साथ फोटो शेयर की थी. इस फोटो में तीनों का प्यार देखते ही बनता है. इसके बाद उन्होंने पापा सैफ, तैमूर और भाई इब्राहिम के साथ भी एक फोटो को शेयर किया जिसमें करीना भी नजर आई.

 

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Simmba screening 👀🙏❤️🤞🏻 it’s a merry merry Christmas for sure!🎄🎄🎂🎂🎁🎁🍭🍭

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Merry merry merry Christmas to everyone 🎄🎁🍭🦃🍬🎂🎉🎊💝

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फोटो मे सारा अली का सफर

सारा अलि खान के बर्थडे पर उनके कुछ खास फोटोज…

 

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If you want to shine like the sun, burn like the sun ☀️🌞💥

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Thank you for my first cup of koffeeee @karanjohar ☕️🤩 #fatherdaughter #koffeewithkaran #suchfun #seeyousoon 👀

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Happy Diwali and a prosperous New Year!!✨🎉💫🌟💥 #likemotherlikedaughter #gotitfrommymama

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MTV Ace of Space 🤩👊🏻✌️😀 What a blast 💥Thank you for having me 🙏

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Simmba Girl 💁🏻‍♀️🦄🍭💜

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बौलीवुड सेलेब्स ने फैंस को ऐसी दी ईद की बधाई

बौलीवुड सेलेब्स ईद के मौके पर जमकर एंजौय करने में लगे है. एक और जहां कुछ स्टार्स फोटोज शेयर कर रहे है तो कुछ ईद के मौके पर सभी को विश करते नजर आ रहे है. इस खास मौके पर सेलेब्स ने ट्वीट कर अपने दोस्तों और फैंस को मजकर ईद की मुबारकबाद दी. इस लिस्ट में अमिताभ बच्चन, अमुपम खेर और रितेश देशमुख जैसे सितारों का नाम शामिल है. बिग बी ने तो ज्यादा इंतजार न करवाते हुए रात में ही अपने फैंस को ईद की शुभकामनाएं दे दी थीं. चलिए देखते है किसने कैसे विश किया…

अमिताभ बच्चन ने किया विश

अमिताभ बच्चन ने रात में ही अपने फैंस को ईद की मुबारकबाद दे दी थी. अमिताभ ने ट्वीट करके अपने फैंस को ईद मुबारक कहा.

सलमान खान के जीजू ने भी किय विश

सलमान खान के जीजा अतुल अग्निहोत्री ने भी ईद की शुभकामनाएं अपने फैंस के लिए भेजी हैं. उन्होंने बड़ी ही खूबसूरत तस्वीर शेयर करके ईद मुबारक कहा.

रितेश देशमुख भी नहीं है पीछे

रितेश देशमुख ने भी ट्वीटर के जरिए ईद की दिली शुभकामनाएं दी हैं. रितेश ने अपने फैंस को ईद मुबारक कहा.

अनुपम खेर भी दि शुभकामनाएं

अनुपम खेर ने भी सोशल मीडिया पर ईद की शुभकामनाएं दी हैं। अनुपम ने लिखा, ईद मुबारक हो… ऊपर वाला सबको खुश रखे.

हुमा कुरैशी ने भी किया विश

हुमा कुरैशी ने भी ईद के मौके पर अपने सभी फैंस को मुबारकबाद दी है. इसके साथ ही हुमा ने इस बात की भी दुआ की कि, हर जगह अमन और चैन कायम रहे.

‘डा. मशहूर गोलाटी’ यानी सुनील ग्रोवर ने भी किया विश

सुनील ग्रोवर ने भी ट्वीट के जरिए ईद की बधाईयां दी. उन्होंने लिखा, ईद मुबारक, मेरी तरफ से आप सब को ढे़र सारा प्यार और शुभकामनाएं.

यूलिया वंतूर ने भी किया विश

रोमानियाई मौडल और सलमान खान की रयूमर्ड गर्लफ्रेंड एक्ट्रेस यूलिया वंतूर  ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस को औ बधाई दी है.  यूलिया ने एक वीडियो शेयर कर ईद को सेलिब्रेट किया है.

 

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Eid Mubarak! Be blessed with a lot of love, light and beautiful people around #eid #love #iuliavantur

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बर्थडे के खास मौके पर ब्लू बिकिनी में नजर आईं जैकलीन फर्नांडीस

बौलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीस का 11 अगस्त को बर्थडे था इस मौके पर उन्होंने अपने दोस्तों के साथ खूब मस्ती की. जैकलीन ने अपने खास दिन की कुछ फोटोज और वीडियोंज  इंस्टाग्राम पर शेयर की जिसमें वो काफी हौट लग रही थी. अपने बर्थडे की शुरुआत जैकलीन ने समुंदर किनारे अपने सभी दोस्तों के साथ मिलकर पार्टी करके और  खूब मस्ती करके की फिर रात में उनके दोस्तों ने सरप्राइज पार्टी का प्लान किया. इस पुरे दिन जैकलीन काफी खुश नजर आईं साथ ही उनकी बिकिनी फोटोज सोशल मीडिया पर तेजी से वायलर होना भी शुरु हो गई.

वाइट और ब्लू रंग बिकिनी में दिखी

जैकलीन ने ब्लू रंग की बिकिनी में श्रीलंका के समुंदर किनारे जमकर मस्ती तो की साथ ही साथ उन्होंने खूब फोटोज भी क्लिक करवाई. जैकलीन ने बर्थडे सेलीब्रेट करने से पहले खूब सारे पोज दिए और इस दौरान उन्होंने अपने हैट के साथ जो पोज दिए वो फैंस काफी पसंद कर रहे है. इसके बाद जैकलीन ने बीती शाम अपने दोस्तों के साथ पार्टी की जिसकी फोटोज उन्होंने इंस्टाग्राम पर शेयर की.

 

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It’s my cake day!!!!! How do you like your pancakes?? 🌸⭐️💝💖⭐️ #cinnamonhotels

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Thank you @srilankanairlinesofficial for making this trip so special for me my Family and my friends!!! 💝💝

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शैम्पेन के भी उठाएं मजे

जैकलीन ने अपने दोस्तों के साथ शैम्पेन का लुत्फ भी उठाया, जिसकी वीडियों उन्होंने इंस्टाग्राम पर शेयर की. जैकलीन ने समुंदर किनारे अपने दोस्तों के साथ पहले रेस लगाई और उसके बाद सभी ने एक दूसरे को भिगाने की पूरी कोशिश की. इस पुरे मस्ती भरे माहौल को जैकलीन ने खूब एंजौय किया. समुंदर के किनारे पहुंचते ही जैकलीन एकदम बच्ची ही बन गई.

 

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My Happy place with my happy people!🥰 #thetravelankas 🦁

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जल्द नजर आएंगी करन जौहर की फिल्म में

जैकलीन की एक्टिंग के तो सभी दिवाने है, बता दे की जैकलीन जल्द ही करन जौहर की फिल्म ‘ड्राइव’ में नजर आने वाली है जिसमें वो सुशांत सिंह राजपूत के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी.

सैफ अली खान की तरह ही स्टाइलिश हैं उनके जीजू

बौलीवुड एक्टर कुणाल खेमू सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते है इंस्टाग्राम हो या फेसबुक कुणाल की फैन फौलोविंग मे कही कमी नही हैं. 1993 में चाइल्ड एक्टर के रुप में अपने बौलीवुड कैरियर की शुरुआत करने वाले कुणाल को साल 2005 की फिल्म “कलयुग” से असल पहचान मिली. इस के बाद उनको एक के बाद  एक फिल्मों में देखा गया. फिलहाल कुणाल अपनी आने वाली फिल्म ‘मलंग’ की शूटिंग में बीजी है. कुणाल एक्टिंग के साथ साथ अपने फिजिक के कारण भी लोगों में खासा पौपुलर रहते है. एक बच्चे के पिता होने के बावजूद कुणाल काफी फिट हैं. फिटनेस के साथ ही उनका स्टाइल भी किसी से कम नही है इंस्टाग्राम पर उनकी फोटोज इस बात का सबूत है. सेफ अली खान की तरह उनके जीजू यानी कुणाल खेमू काफी फेशनेबल है. आज उन्हीं में से कुछ फैशन स्टाइल हम आपके लिए लेकर आए है जिसे ट्राय कर आप भी स्टाइलिश लग सकते है.

वाइट वीद ब्लैक स्ट्रीप शर्ट लुक

कुणाल की इस फोटो में उन्होंने जो शर्ट पहनी है वो काफी ट्रेंडिंग है. इस पेर्टन की शर्ट आप अब मार्केट में देख सकते है. इस लुक की खास बाद है की आप इसे केजुअली कहीं भी ट्राय कर सकते हैं. इस शर्ट के साथ उनकी ब्लैक पेंट और ब्लैक एंड वाइट स्ट्रीप वाली स्लीपर काफी अच्छा लुक दे रही हैं.

चैक सूट के साथ ट्राय करें बौ टाय

अगर आप किसी पार्टी के लिए प्लानिंग कर रहे है तो ये लुक आपके लिए परफेक्ट है. चैक प्रिंट वाले इस सूट के साथ बो टाय इस लुक को काफी रिच लुक दे रही हैं. इस लुक में कुणाल की हेयर स्टाइल भी काफी अच्छी लग रही हैं.

 

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Today for HT Style Awards wearing @radbespoke @lifeinslowmotion.in Styled by @neha.bijlaney @kareenparwani hair @taniksingh12

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कूल दिखना चाहते है तो इस लुक को करें ट्राय  

पब पार्टी के लिए आप इस लुक  ट्राय कर सकते है. पर्पल कलर की जैकेट वाले इस लुक में कुणाल काफी स्टनिंग लग है. बर्नआउट जींस के साथ केप और सनग्वासेस इस लुक को कम्पलिट कर रहे है.

 

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Blue and white Jacket – @geneslhofficial Styled by – @vibhutichamria @sunakshikansal

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कुणाल का हुडी हेट लुक

ग्रे कलर की इस हूडी के साथ कुणाल ने जो हेट पहना है वो उन्हे काफी यूनिक लुक दे रही हैं. इस लुक में उन्होंने जो वाइट शूज पहने है वो काफी अच्छा लुक दे रहे है. इस  लुक आप किसी भी वेकेशन में ट्राय कर सकते है.

 

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Snow ❄️ ⛄️

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