लड़की और उस की मां ने विरोध किया तो अपराधियों ने छात्रा पर तेजाब उड़ेल दिया जिस से उस का चेहरा और पेट बुरी तरह से जल गया. अपराधी सामूहिक बलात्कार करने की नीयत से वहां आए थे.

तेजाब फेंकने की वारदातें देश के अलगअलग हिस्सों में आएदिन होती रहती हैं और लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. पहले तो ये शहरों तक ही सिमटी थीं, पर अब तो गांवदेहात की लड़कियों पर भी तेजाब फेंकने के मामले बढ़ रहे हैं.

मथुरा, उत्तर प्रदेश के दामोदरपुर में 25 साला महिला पुलिसकर्मी के ऊपर बदमाशों ने तेजाब फेंक दिया था जिस से वे बुरी तरह से घायल हो गई थीं. वे ड्यूटी कर के अपने घर जा रही थीं कि दरिंदों ने इस वारदात को अंजाम दे दिया.

इसी तरह बिहार के औरंगाबाद जिले के कुटुंबा थाना क्षेत्र की एक लड़की कोचिंग के लिए जा रही थी कि अचानक उस के ऊपर एक मोटरसाइकिल सवार मनचले ने तेजाब फेंक दिया. वहां मौजूद लोग उस घायल लड़की को इलाज के लिए तत्काल अस्पताल ले गए.

इसी जिले के हसपुरा ब्लौक के रघुनाथपुर गांव के नजदीक एक लड़की, जो पुलिस की बहाली के लिए सुबह दौड़ने की प्रैक्टिस कर रही थी, की कुछ दरिंदों ने उस के साथ रेप कर के उस

की हत्या कर दी और चेहरे पर तेजाब डाल दिया.

बिहार के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन द्वारा अंजाम दिए गए तेजाब कांड को आज भी लोग भूल नहीं पाते हैं, जिस में चंदा बाबू के परिवार के 2 सदस्यों सतीश और गिरीश पर तेजाब की बालटी उलट कर उन की हत्या कर के लाश को टुकड़ेटुकड़े कर बोरे में भरवा कर फिंकवा दिया था.

बरेली, उत्तर प्रदेश में पानी लेने आई 3 औरतों पर तेजाब फेंक दिया गया था जिस से वे तीनों बुरी तरह से झुलस गई थीं.

वाराणसी, उत्तर प्रदेश में एक दोस्त के घर ठहरी रूसी लड़की पर उसी के दोस्त ने तेजाब फेंक दिया था जिस से वह 50 फीसदी झुलस गई थी.

इसी तरह उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक आदमी द्वारा अपनी पत्नी, सासससुर समेत 7 दूसरे लोगों पर तेजाब फेंक कर घायल करने का मामला सामने आया था.

पत्नी द्वारा दुष्कर्म और दहेज व सताने का मामला दर्ज कराया गया था जिस से नाराज हो कर पति ने यह घिनौना काम किया था. इस तेजाबी कांड में एक 6 महीने का बच्चा भी चपेट में आ गया था और 3 लड़कियां भी बुरी तरह से झुलस गई थीं.

शामली जिले में 4 सगी बहनें बोर्ड के इम्तिहान से ड्यूटी कर के लौट रही थीं कि तभी मोटरसाइकिल से 2 लड़के आए और उन चारों पर तेजाब फेंक कर चलते बने.

छत्तीसगढ़ में 4 नाबालिग लड़कियों पर तेजाब फेंकने की वारदातें हो चुकी हैं. महाराष्ट्र में एक पत्रकार और उस के परिवार के सदस्यों पर एक अज्ञात लड़की ने तेजाब फेंक दिया था.

मुजफ्फरनगर में एक बस में सवार लड़की पर एक लड़के ने तेजाब फेंक दिया था जिस से लड़की के साथसाथ दूसरी सवारियां भी घायल हो गई थीं.

इसी तरह उत्तराखंड के देहरादून

सरस सलिल विशेष

में भी एक कालेज छात्रा पर एक लड़के ने तेजाब फेंक दिया था.

तेजाब फेंकने की बढ़ती वारदातें लोगों को झकझोर कर रख देती हैं. लड़के पहले लड़की से प्यार करते हैं और फिर किसी तरह अनबन होने से प्यार का धागा टूटने पर ऐसे वहशी दरिंदों द्वारा लड़कियों पर तेजाब फेंकने की वारदातों को अंजाम दिया जाता है.

आमतौर पर यह देखा जा रहा है

कि प्यार में ज्यादातर लड़कियां धोखा खाती हैं. यहां तक कि उन के जिस्म से खिलवाड़ भी किया जाता है और जब शादी करने की बात आती है तो ज्यादातर लड़के मुकर जाते हैं. वे तो प्यार का सिर्फ ढोंग करते हैं और लड़कियों के जिस्म से खेलना चाहते हैं.

बहुत से मनचले तो किसी लड़की को एकतरफा चाहते हैं और जब लड़की उन्हें तवज्जुह नहीं देती है तो उस पर तेजाब फेंकने जैसी वारदात कर बैठते हैं.

लड़की के मातापिता लड़की की शादी किसी दूसरे लड़के के साथ करने के लिए ठान लेते हैं तो उन हालात में

भी लड़की के ऊपर तेजाब फेंकने की वारदातें हो जाती हैं.

अगर कोई लड़का हकीकत में किसी लड़की से प्यार करता है तो वह किसी भी सूरत में तेजाब नहीं फेंक सकता. इतिहास इस बात का गवाह है कि प्यार में धोखा खाने वाले लोग मासूम की तसवीर के सहारे मरते दम तक उस से प्यार करते हैं.

तेजाब फेंकने वाले प्रेमी अपराधी सोच के होते हैं. जिन लड़कियों का तेजाब से चेहरा झुलस गया है, वे बदसूरत दिखने लगी हैं. वे उन दहशतगर्दों से सवाल भी पूछती हैं कि क्या तुम मुझे इस रूप में आज भी चाहते हो? इस का जवाब इन दहशतगर्दों के पास शायद नहीं होगा.

औरंगाबाद जिले के रजानगर महल्ले की 9वीं जमात की छात्रा सलमा पर एक लड़के ने साल 2016 में तेजाब फेंक दिया था जिस से वह बुरी तरह से झुलस गई थी.

सलमा ने बताया, ‘‘जब मेरे साथ साल 2016 में तेजाब की घटना घटी थी तो लोगों द्वारा हमदर्दी और मदद करने का आश्वासन देने वालों का तांता लगा था. पत्रकारों की भी भीड़ जमा हुई थी. रिश्तेदारों ने भी तरहतरह से भरोसा दिया था. लेकिन आज सभी लोग भूल गए हैं. अब तो जिंदगी काटनी ही मुश्किल हो गई है. मेरा चेहरा देखने से लोगों की यात्रा खराब होने लगी है. मुझे देख कर बच्चे भी डरने लगे हैं.

‘‘अब तो मैं घर वालों पर ही बोझ बन कर रह रही हूं. कोई दूसरा उपाय भी नहीं है. अपराधी को सजा हो भी जाए तो थोड़ी देर के लिए तसल्ली जरूर होगी, लेकिन मेरी जिंदगी तो नरक ही बन गई है.

‘‘मैं लड़की नहीं, एक जिंदा लाश के समान हूं. बारबार खुदकुशी करने का जी करता है. लेकिन यह सोच कर फैसला बदल देती हूं कि परिवार ने मेरे चलते बहुत दुख झेला है और मेरी वजह से इन लोगों को जेल नहीं जाना पड़े. अब तो भूल से कभी आईना भी नहीं देखती. गलती से अगर देख लेती हूं, आंखों से आंसू रुकते नहीं हैं.’’

दिल्ली की लक्ष्मी अग्रवाल, जिन के साथ भी तेजाब की वारदात घटी थी, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से सवाल किया

कि तेजाब खुलेआम बिकता क्यों है? कोर्ट ने खुलेआम तेजाब बेचने पर रोक लगाई थी, लेकिन आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं.

सामाजिक सरोकार से जुड़ी रंजीता सिंह का कहना है कि जब तक इन दहशतगर्दों पर कड़ी कार्यवाही नहीं की जाएगी, इन का मनोबल बढ़ता जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए तेजाब फेंकने वालों पर 10 साल की सजा का प्रावधान किया है, फिर भी इन वारदातों पर रोक लगने के बजाय ये और ज्यादा बढ़ती जा रही हैं.

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