संगीन विश्वासघात

28 सितंबर, 2017 को जिला गुरदासपुर के गांव मिताली के रहने वाले रंजीत सिंह की विधवा जसविंदर कौर ने एसएसपी हरचरण सिंह भुल्लर को एक शिकायत दी थी, जिस में उस ने जो लिखा था, वह कुछ इस प्रकार था—

2 बच्चों की मां जसविंदर कौर के पति रंजीत सिंह पंजाब पुलिस में थे, जिन की अप्रैल, 2008 में अचानक मौत हो गई थी. जसविंदर पढ़ीलिखी थी, इसलिए अनुकंपा के आधार पर उसे पति की जगह नौकरी मिल जानी चाहिए थी. इस के लिए उस ने काफी कोशिश की, लेकिन उसे नौकरी नहीं मिल सकी. किसी ने जसविंदर कौर को सलाह दी कि इस तरह कुछ नहीं होना. अगर वह किसी मंत्री या बड़े नेता से कहलवा दे तो उस का काम आसानी से हो जाएगा. जसविंदर को याद आया कि उस की एक सहपाठिन के पिता बड़े नेता हैं. वह राज्य सरकार में मंत्री भी हैं. जसविंदर जा कर उन से मिली. यह सन 2009 के शुरू की बात है.

जसविंदर कौर ने मंत्री महोदय से पूरी बात बता कर यह भी बताया कि उन की बेटी कालेज में उस के साथ पढ़ती थी. मंत्री महोदय ने उस के सिर पर हाथ फेरते हुए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि उन के लिए यह काम जरा भी मुश्किल नहीं है.

यह मंत्री महोदय कोई और नहीं, सरदार सुच्चा सिंह लंगाह थे, जिन से जसविंदर कौर चंडीगढ़ स्थित उन के सरकारी आवास पर अपने घर वालों के साथ मिली थी. लंगाह ने जसविंदर को काम कराने का आश्वासन देते हुए 2-3 दिनों बाद अकेली किसान भवन में आ कर मिलने को कहा. आने से पहले फोन कर लेने की बात कहते हुए उन्होंने उसे अपना मोबाइल नंबर भी दे दिया था.

2 दिनों बाद जसविंदर कौर ने मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह को फोन किया तो उन्होंने उसे अगले दिन दोपहर को किसान भवन आने को कहा, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह वहां अकेली ही आएगी. जसविंदर कौर ने वैसा ही किया. अगले दिन दोपहर को वह अकेली ही चंडीगढ़ के सैक्टर-35 स्थित किसान भवन पहुंच गई. वहां ठहरने के लिए होटलों की तरह हर सुखसुविधा वाले कमरे बने हैं. इन्हीं कमरों में से एक कमरे में लंगाह आराम कर रहे थे. उन्होंने जसविंदर को अपने कमरे में बुलवा लिया.

जसविंदर ने अपनी शिकायत में लंगाह पर जो आरोप लगाए हैं, उस के अनुसार वह किसान भवन के उस कमरे में पहुंची तो मंत्री सुच्चा सिंह उसे अपनी बगल में बिठा कर उस के साथ अश्लील हरकतें करने लगा. इस से जसविंदर बुरी तरह डर गई.

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उस ने लंगाह को रोकने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘अंकल, मैं आप की बेटी सरबजीत कौर के साथ बेबे नानकी कालेज में पढ़ी हूं. इस नाते मैं आप की बेटी की तरह हूं. आप को अपने पिता की तरह मान कर मैं आप के पास मदद के लिए आई हूं. आप मुझ पर रहम करें. मैं विधवा हूं. मेरे 2 बच्चे हैं. प्लीज, मुझे जाने दीजिए.’’

जसविंदर के अनुसार, इस चिरौरी का सुच्चा सिंह लंगाह पर कोई असर नहीं हुआ. पहले तो उस ने अपनी ऊंची पहुंच के बारे में बताते हुए उसे जल्दी सरकारी नौकरी दिलवाने का लालच दिया. लेकिन जसविंदर काबू में नहीं आई तो उस ने उसे धमकी दी कि वह चाहे तो उसे अभी किसी केस में फंसा कर उस की जिंदगी बरबाद कर सकता है. इस के बाद उस ने जबरदस्ती जसविंदर की अस्मत लूट ली.

जसविंदर ने अपनी शिकायत में आगे लिखा है कि सुच्चा सिंह लंगाह का रुतबा देख कर वह डर के मारे चुप रह गई. बस पकड़ कर वह अपने गांव लौट आई. इस बारे में उस ने किसी को कुछ नहीं बताया. फिर वह एक लाचार विधवा औरत थी, जिस के लिए अपने बच्चों को पालने की खातिर नौकरी बहुत जरूरी थी.

यही वजह थी कि इज्जत लुटने के बाद भी जसविंदर लंगाह से संबंध तोड़ नहीं सकी. वह उसे फोन कर के अपने काम के बारे में पूछती रहती. उन का एक ही जवाब होता था कि वह कोशिश कर रहा है कि उस का काम जल्दी हो जाए.

एक बार लंगाह ने बीएमडब्ल्यू कार भेज कर जसविंदर कौर को पंजाब सिविल सेक्रेटेरिएट स्थित अपने औफिस में बुलवाया और उस के सामने ही किसी बड़े पुलिस अफसर को फोन कर के कहा कि वह जसविंदर को उस के पास भेज रहे हैं, उस का काम किसी भी सूरत में आज ही हो जाना चाहिए. इस के बाद लंगाह ने जसविंदर को अपने एक आदमी के साथ उस पुलिस अधिकारी के पास भेज दिया.

पुलिस अधिकारी भला आदमी था, उस ने उसी दिन नियुक्तिपत्र जारी करवा दिया. इस तरह जसविंदर को स्टेट विजिलेंस विभाग में क्लर्क की नौकरी मिल गई. नौकरी पा कर जसविंदर कौर बहुत खुश थी. वह लंगाह को धन्यवाद देने भी गई.

जसविंदर की मजबूरी का फायदा उठाते हुए लंगाह ने एक बार नहीं, कई बार शारीरिक शोषण किया. उस दिन भी वह उसे यह कहते हुए एक जगह ले जा कर वही सब किया कि अभी उस की नौकरी कच्ची है, जल्दी वह उसे पक्की करवा देगा.

डराधमका कर मंत्रीजी करते रहे उस का यौनशोषण

इस के बाद सुच्चा सिंह लंगाह जसविंदर से यह कहने लगा कि उस ने कई लोगों को एजेंसियां दिलवाई हैं, जो हर महीने लाखों रुपए कमा रहे हैं. वह चाहे तो उस के परिवार के किसी सदस्य के नाम एजेंसी दिलवा सकता है, जिस के माध्यम से वह मोटी कमाई कर सकती है. इस तरह की बातें करते हुए अकसर वह कुछ ऐसी बातें कह देते थे, जिस से जसविंदर इतना डर जाती कि उसे अपनी मौत का अहसास होने लगता था.

जसविंदर कौर के अनुसार, मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह अकसर उस से कहा करते थे कि उन की इतनी पहुंच है कि अगर वह किसी का कत्ल भी करवा दें तो कोई उन का कुछ नहीं बिगाड़ सकता. यूपी, बिहार के कई गैंगस्टरों से उन की बहुत पटती है. वे उन के इशारे पर कभी भी कुछ भी कर सकते हैं. यहां तक कि वह जिस का कह दें, वे उस का कत्ल भी कर सकते हैं. इस तरह लंगाह जसविंदर को डरा कर अलगअलग जगहों पर ले जा कर उस का यौनशोषण करता रहा.

एसएसपी को दी गई अपनी शिकायत में जसविंदर ने आगे जो लिखा था कि मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह ने उसे अलगअलग जगहों पर ले जा कर उस के साथ इतनी बार दुष्कर्म किया है कि अब वह बता भी नहीं सकती. कुछ ऐसी जगहों पर भी वह उसे ले गया था, जिन के बारे में उसे आज भी कुछ पता नहीं है. लंगाह जब भी उसे कहीं ले जाता था, गाड़ी खुद चलाता था. उस आदमी ने उस से सिर्फ अपनी हवस ही नहीं मिटाई, बल्कि आर्थिक रूप से भी उसे खूब लूटा.

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सुच्चा सिंह लंगाह ने जसविंदर को चंडीगढ़ में प्लौट दिलाने के नाम पर गांव की उस की जमीन बिकवा दी. उस रकम से सिपहिया नामक आदमी को प्लौट खरीदने के नाम पर बयाने के रूप में 15 लाख रुपए दिलवा दिए. इस के बाद एक वकील को 30 लाख रुपए दिए. बाद में उस से कहा गया कि अब वे लोग अपना प्लौट नहीं बेचना चाहते. जसविंदर को एक लाख रुपए दे कर लंगाह ने कहा कि बकाया रकम उसे धीरेधीरे दे दी जाएगी. कुछ दिनों बाद साढ़े 3 लाख रुपए दे कर उस से कहा गया कि उसे जो रकम मिल गई, वही बहुत है, बयाने की रकम भला कोई वापस करता है. इस तरह बाकी रकम लंगाह ने खुद रख ली थी.

जसविंदर कठपुतली बनी हुई थी मंत्री की

इस के बाद सुच्चा सिंह लंगाह ने जसविंदर के नाम पर सहकारी बैंक से 8 लाख रुपए कर्ज ले कर 1 लाख रुपए उसे दे दिए और बाकी के 7 लाख रुपए खुद रख लिए. इस के बाद यह कह कर जसविंदर के गांव वाले मकान का सौदा करवा दिया कि वह उसे जालंधर शहर में फ्लैट खरीदवा देगा. इस के बाद उस से प्रार्थना पत्र लिखवा कर उस का तबादला जालंधर करवा दिया.

जसविंदर कौर के अनुसार, लंगाह उसे नदी पार अपनी जमीनों के बीच बनी कोठी पर भी बुलाया करता था, जहां जाने में उसे बहुत डर लगता था. जसविंदर को लगता कि अगर उसे मार कर वहां दफना दिया गया तो किसी को पता तक नहीं चलेगा. वैसे भी उस ने उसे इतना डरा दिया था कि वह उस के हाथों की कठपुतली बनी हुई थी. इसीलिए वह उस के खिलाफ किसी के सामने मुंह खोलने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी.

एक बार जसविंदर के बेटे का एक्सीडेंट हुआ तो लंगाह ने यह कह कर उसे और डरा दिया कि कहीं यह एक्सीडेंट किसी ने कराया तो नहीं? उस ने यह बात इस तरह कही थी कि जसविंदर ने सोचा कि अगर उस ने कभी उस के खिलाफ जाने की सोची तो वह उस के परिवार को नुकसान पहुंचा सकता है.

जसविंदर जितना सुच्चा सिंह से डरती रही, वह उस का उतना ही शारीरिक और आर्थिक शोषण करता रहा. क्योंकि बेसहारा अकेली जसविंदर कौर की उस के सामने औकात ही क्या थी? इस बीच जसविंदर को पता चल गया कि सुच्चा सिंह ने उस की तरह और भी कई औरतों को उसी की तरह लूट कर उन की जिंदगी बरबाद कर दी.

इस के बाद जसविंदर को लगने लगा कि अब वह अति की सीमा पार कर चुका है. आखिर अपनी जान हथेली पर रख कर किसी तरह हिम्मत जुटा कर जसविंदर कौर ने सुच्चा सिंह लंगाह के खिलाफ उपर्युक्त शिकायत लिख कर एसएसपी को दे दी थी.

अपने ऊपर हुई ज्यादतियों को साबित करने के लिए मजबूरन जसविंदर ने इस सब की वीडियो बना ली थी. क्योंकि अगर वह ऐसा न करती तो अपनी पहुंच की बदौलत लंगाह उस की शिकायत को दबवा कर वह उसे किसी केस में फंसवा सकता था. इसीलिए सबूत के तौर पर जसविंदर ने एक वीडियो शिकायत पत्र के साथ नत्थी कर दी थी.

जसविंदर कौर ने शिकायत देने के बाद गुहार लगाई थी कि उसे और उस के परिवार को सुच्चा सिंह लंगाह से बहुत ज्यादा खतरा है. वह इतना खतरनाक आदमी है कि कभी भी उस पर हमला करवा कर मरवा सकता है. इसलिए उस ने निवेदन किया था कि उस की व उस के परिवार की सुरक्षा की व्यवस्था की जाए. उसे इंसाफ दिलवाया जाए और उस के आर्थिक नुकसान की भरपाई करवाई जाए.

सुच्चा सिंह लंगाह ने मंत्री और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का सदस्य रहते हुए तमाम गैरजिम्मेदाराना काम करते हुए बहुत ज्यादतियां की हैं. इसलिए इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए एक बेसहारा मजलूम औरत की फरियाद पर ध्यान दे कर उस के खिलाफ तुरंत काररवाई की जाए.

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शिकायत पत्र के अंत में जसविंदर कौर ने अपने दस्तखत कर के नामपता और मोबाइल नंबर भी लिख दिया था. इस के साथ एक एफिडेविट के अलावा पैनड्राइव और सीडी भी संलग्न थी, जिस में 20 मिनट की वीडियो थी, जो किसी नीली फिल्म से कम नहीं थी. उस में लंगाह को निर्वस्त्र हो कर शिकायतकर्ता के साथ शारीरिक संबंध बनाते दिखाया गया था.

सबूतों के आधार पर सुच्चा सिंह के खिलाफ दर्ज हो गई शिकायत

एसएसपी हरचरण सिंह भुल्लर ने मार्क कर के जसविंदर की शिकायत की काररवाई के लिए डीएसपी (सिटी) गुरबंस सिंह बैंस को भिजवा दी. उन्होंने इस के तथ्यों एवं वीडियो वगैरह की जांच कर के कानूनी राय लेने के लिए उसे जिला न्यायवादी के पास भिजवा दिया. डिस्ट्रिक्ट अटार्नी ने भादंवि की धारा 376, 384, 420 एवं 506 के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने की संस्तुति दे दी.

इस तरह 29 सितंबर, 2017 को गुरदासपुर के थाना सिटी में अपराध संख्या 168 पर उपर्युक्त धाराओं के तहत सुच्चा सिंह लंगाह के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया. इस के बाद लंगाह की वह अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई.

इस के बाद सुच्चा सिंह लंगाह ने भूमिगत हो कर पार्टी के सभी पदों तथा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की सदस्यता से इस्तीफा दे कर अदालत में आत्मसमर्पण करने की घोषणा कर दी. अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उस के इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया. एसएसपी हरचरण सिंह भुल्लर ने मामले की जांच डीएसपी आजाद दविंद्र सिंह एवं इंसपेक्टर सीमा देवी को सौंपने के अलावा जसविंदर कौर को सुरक्षा मुहैया करा दी.

उसी दिन सुच्चा सिंह ने बयान जारी करते हुए कहा कि उन के विरुद्ध यह झूठा मामला सरकार द्वारा गुरदासपुर उपचुनाव जीतने के लिए एक सोचीसमझी साजिश के तहत दर्ज कराया गया है. लेकिन उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. वह 30 सितंबर, 2017 को माननीय अदालत में आत्मसमर्पण कर देंगे.

लेकिन सुच्चा सिंह 30 सितंबर को किसी भी अदालत में आत्मसमर्पण करने नहीं पहुंचा. हालांकि उस दिन छुट्टी थी, फिर भी गुरदासपुर की अदालत में ड्यूटी मजिस्ट्रैट दिन भर बैठे रहे. इतना ही नहीं, मीडियाकर्मी, पुलिस फोर्स और अकाली दल के समर्थक भी अदालत पहुंच कर उस के बंद होने तक उस का इंतजार करते रहे.

जिस तरह सोशल मीडिया पर सुच्चा सिंह लंगाह का आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुआ था, उसी तरह यह खबर भी सामने आई कि केस दर्ज करवाने वाली महिला ने 12 दिन पहले उसे चेतावनी देते हुए कहा था कि जो हुआ, सो हुआ. अब वह उस का पीछा छोड़ दें, वरना उसे मजबूरन पुलिस की शरण में जाना पड़ेगा.

लेकिन सुच्चा सिंह लंगाह ने उस की इस चेतावनी की जरा भी परवाह नहीं की थी. वह जाने कहां छिपा बैठा था. उसी बीच पहली अक्तूबर को भाजपा के पंजाब प्रभारी प्रभात झा ने बयान जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अकाली नेता पूर्वमंत्री सुच्चा सिंह लंगाह को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उसी दिन शाम को शिरोमणि अकाली दल पार्टी ने उसे निकाले जाने का आदेश सार्वजनिक कर दिया.

गिरफ्तारी के डर से भूमिगत हो गया सुच्चा सिंह

मुकदमा दर्ज होने के 3 दिनों बाद सुच्चा सिंह लंगाह वकीलों की टीम के साथ चंडीगढ़ की जिला अदालत में आत्मसमर्पण करने पहुंचा, पर अदालत ने उसे गुरदासपुर जाने को कहा. इस के बाद सुच्चा सिंह फिर भूमिगत हो गया. श्री अकालतख्त साहिब समेत अन्य तख्तों के जत्थेदारों ने इस मामले पर नोटिस लेते हुए उस पर कड़ी काररवाई करने की बात की.

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श्री अकालतख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी गुरबचन सिंह ने इस घटना की भर्त्सना करते हुए अपना बयान जारी किया कि सुच्चा सिंह लंगाह ने एसजीपीसी जैसी सर्वोच्च धार्मिक संस्था का सदस्य रहते हुए जो कृत्य किया है, वह अति निंदनीय है. दुनिया भर में बैठी संगत इस की जोरदार शब्दों में निंदा करती है. जल्दी ही इस मामले पर सिंह साहिबान की बैठक बुला कर और उस में धार्मिक मामलों को ले कर गठित कमेटी की राय ले कर लंगाह के खिलाफ जो काररवाई की जानी चाहिए, वह की जाएगी.

3 अक्तूबर को सुच्चा सिंह लंगाह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी कर दिया. उस ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई, जो खारिज कर दी गई. आखिर 4 अक्तूबर को उस ने अपने वकीलों के साथ जा कर गुरदासपुर की सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया. पुलिस ने पूछताछ के लिए उसे 9 अक्तूबर तक के लिए कस्टडी रिमांड पर ले लिया.

उस समय सुच्चा सिंह ने अदालत में मौजूद पत्रकारों से कहा था कि उन के विरुद्ध साजिश रची गई है, जिस में एक कांग्रेसी नेता तथा एक पुलिस अधिकारी ने मुख्य भूमिका निभाई है. इसी के साथ उस ने यह भी कहा कि उसे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है.

अदालत परिसर में ही कुछ लोगों ने सुच्चा सिंह पर हमला कर दिया, जिस में वह बालबाल बच गया. इस घटना के बाद पुलिस ने एक हमलावर युवक को नंगी तलवार के साथ गिरफ्तार कर लिया था.

उसी दिन सरबतखालसा पंथ के जत्थेदारों की ओर से सिख पंथ के नाम जारी एक हुकमनामे के अनुसार, सुच्चा सिंह को पंथ से निकाल दिया गया. इस के बाद इस फैसले पर 5 सिंह साहिबानों श्री अकालतख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह, तख्त श्री पटनासाहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह, ज्ञानी जगतार सिंह व ज्ञानी रघबीर सिंह ने इस फैसले पर मुहर लगा दी.

कस्टडी रिमांड के दौरान सुच्चा सिंह लंगाह की उम्र अथवा रुतबे की परवाह न करते हुए पुलिस ने उस से गहन पूछताछ की.

कपूरथला से 10वीं पास कर के राजनीति में आने वाले सुच्चा सिंह लंगाह का मूल गांव था लंगाह, जहां उस के पिता तारा सिंह खेतीकिसानी करते थे. माझा में उस की अच्छी पहचान थी. उस के राजनीतिक कद को देखते हुए पार्टी में कई अहम पदों की जिम्मेदारी उसे सौंपी गई थी. क्योंकि वह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का बहुत करीबी और खासमखास था.

सुच्चा सिंह सन 1997 से 2002 तक बादल के नेतृत्व वाली सरकार में लोकनिर्माण मंत्री रहा. इस के बाद सन 2007 से 2012 तक की अकाली-भाजपा सरकार में उसे कृषि मंत्री बनाया गया था. सन 2012 के विधानसभा चुनाव में डेरा बाबा नानक सीट पर वह कांग्रेस के सुखजिंदर सिंह रंधावा से चुनाव हार गया.

उस ने 2 शादियां की थीं. उस के 2 बेटे और 2 बेटियां हैं. उस की पहली पत्नी गुरदासपुर के कस्बा धारीवाल में रहती है, जबकि दूसरी पत्नी नरेंद्र कौर नयागांव (मोहाली) में रहती है. 61 साल के हो चुके सुच्चा सिंह लंगाह पुलिस रिकौर्ड के अनुसार हिस्ट्रीशीटर है. जमीनों पर नाजायज कब्जे के उस पर अनेक मामले चले हैं. सन 2002 में उसे पंजाब के सतर्कता विभाग ने गिरफ्तार कर उस पर मुकदमा चलाया था. सन 2015 में उसे 3 साल की कैद हुई थी. इस फैसले के खिलाफ  की गई उस की अपील हाईकोर्ट में विचाराधीन है.

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इस मामले में सुच्चा सिंह लंगाह बुरी तरह से फंस चुके है. अन्य धाराओं के अलावा पुलिस ने उस के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की धारा 295-ए जोड़ कर उस के कस्टडी रिमांड में एक दिन की बढ़ोत्तरी करवाई थी. 10 अक्तूबर को उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.

बहरहाल, अपनी बेटी की सहपाठिन रही विधवा औरत के साथ विश्वासघात का संगीन खेल खेल कर पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह ने अपने इर्दगिर्द नफरत की एक ऐसी फसल उगा ली है, जिसे काट पाना उस के लिए आसान नहीं है.

कहानी सौजन्य – मनोहर कहानियां

क्या शहनाज के स्वयंवर वाले शो करने से नाराज हैं सिद्धार्थ, जानें एक्टर का जवाब

बिग बौस 13 (Bigg Boss 13) में सबसे ज़्यादा सुर्खियों में रहने वाली जोड़ी शहनाज गिल (Shehnaz Gill) और सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) को दर्शकों ने काफी पसंद किया है. इतना ही नहीं, दर्शकों ने दोनों की जोड़ी का नाम सिडनाज (Sidnaaz) भी रखा है. अब शो खत्म होने के बाद हालांकि शहनाज (Shehnaz) नए शो में नजर आ रही हैं जिसका नाम है मुझसे शादी करोगे (Mujhse Shaadi Karoge). इस शो में वह खुद के लिए दूल्हा ढूंढ रही हैं. ऐसी खबरें आ रही थी कि शहनाज के इस शो के करने से सिद्धार्थ उनसे नाराज हैं. अब जब सिद्धार्थ से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा,- “मैं क्यों नाराज होंउंगा. शहनाज को जो करना है करे. किसी ने उन्हें फोर्स नहीं किया. उनसे पूछा गया था कि क्या वे ये शो करना चाहती हैं. ये एक शो है और इसमें शहनाज ने खुद अपने आपको डाला है.”

ये है सिद्धार्थ का मैरिज प्लान…

 

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Delhi diaries.. . . #Manthan2020 #Event . . Photography: @pawanraikwar Styled by @saachivj Assisted by @sanzimehta777

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हाल ही में सिद्धार्थ इंस्टाग्राम (Instagram) पर लाइव आए और इस दौरान उन्होंने फैन्स से खूब बात की. सिद्धार्थ ने फैन्स से शहनाज से लेकर अपनी शादी तक, सभी सवालों के जवाब दिए.

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लाइव चैट के दौरान एक फैन ने सिद्धार्थ से शादी का सवाल किया तो उन्होंने कहा, “शादी के बारे में क्या बताऊं. शादी के लिए लड़की चाहिए. अब मैं शीला तो हूं नहीं कि खुद से प्यार करूं.”

फिर दूसरे फैन ने पूछा कि क्या वो अपनी शाादी में शहनाज को बुलाओगे? तो सिद्धार्थ ने कहा, “हां, शहनाज को जरूर बुलाऊंगा. लेकिन पहले शादी होने तो दो.”

शहनाज चाहती हैं सिद्धार्थ को दिल से निकालना…

 

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शहनाज जो कई बार शो में सिद्धार्थ के बारे में बात करती थीं, वह हाल ही में ये कहती नजर आईं कि वह सिद्धार्थ को दिल से निकालना चाहती हैं. दरअसल हाल ही के एपिसोड में शहनाज सभी के सामने कहती हैं, “मुझसे शादी करोगे टाइटल बहुत बड़ा है. कंटेंट के चक्कर में मैं कुछ भी नहीं करूंगी. सब मुझे यही कहते हैं कि सिद्धार्थ और मेरे बीच जो था वो वन साइडेड था. तो क्या हुआ? अगर वो मुझे प्यार नहीं करता. ये चीज क्लीयर है कि मुझे वो कभी नहीं मिलेगा. लेकिन ये मेरी लाइफ है, मुझे जो करना है मैं करूंगी.”

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फिर शहनाज उनसे शादी करने आए कंटेस्टेंट्स से कहती हैं, ‘मेरे दिल से तो निकालो उसे. मेरे दिल से उसे निकाल कर दिखाओ.’

यूट्यूब क्‍वीन आम्रपाली दुबे का धमाकेदार गाना ‘लगा के वैसलीन’ हुआ Viral, देखें Video

भोजपुरी फिल्म ‘मेहंदी लगाके रखना’ (Mehendi Lagake Rakhna) के पहले पार्ट में जहां ‘लगाके फेयर लवली’ (Lagake Fair Lovely) ने दर्शकों को झूमने को मजबूर कर दिया था, वहीं अब इस फिल्‍म के तीसरे पार्ट का ऐसा ही एक गाना ‘लगा के वैसलीन’ (Lagake Vaseline) आउट कर दिया गया है, जो बौक्‍स औफिस का फीवर बढ़ाने वाला है. इसकी वजह ये है कि एक तो गाना धमाकेदार है और दूसरा इस गाने में यूट्यूब क्‍वीन आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) के ठमुके शानदार हैं. फिल्म ‘मेहंदी लगाके रखना 3’ (Mehendi Lagake Rakhna 3) के निर्देशक रजनीश मिश्रा (Rajnish Mishra) ने फिर से एक प्रयोग किया है. गाने को मिल रहे रिस्‍पांस से लगता है कि गाना ‘लगा के वैसलीन’ भोजपुरी औडियंस पर नशे की तरह चढ़ने लगी है.

गाने का लिंक –

गौरतलब है कि आम्रपाली दुबे स्‍टारर इस गाने को 24 घंटे से भी कम समय में 160,424 व्‍यूज मिल चुका है. इस गाने को खुद खेसारीलाल यादव (Khesarilal Yadav) और प्रियंका सिंह (Priyanka Singh) ने गाया है. लिरिक्‍स यादव राज ने तैयार किया है, जबकि फिल्‍म के संगीतकार रजनीश मिश्रा हैं. वहीं, फिल्‍म के निर्माता निशांत उज्‍जवल ने गाने को मिले रिस्‍पांस से गदगद हैं. उन्‍होंने दावा किया है कि आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) पर फिल्‍माया गया यह गाना न सिर्फ कई रिकौर्ड ब्रेक करेगा, बल्कि फिल्‍म के प्रति दर्शकों में आकर्षण भी पैदा करेगा. निशांत पहले ही कह चुके हैं कि फिल्म ‘मेहंदी लगाके रखना 3’ इस साल की सबसे बड़ी फिल्‍म होने वाली है. इसलिए फिल्‍म का हर एक गाना चार्टबस्‍टर होने वाला है. अब तक रिलीज दो गानों ने एक हद तक उनकी बातों पर मुहर भी लगाई है.

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वहीं, आम्रपाली दुबे ने फिल्म ‘मेहंदी लगाके रखना 3’ का स्‍पेशल गाना ‘लगा के वैसलीन’ को लेकर खुशी जताई है और कहा कि वे इस फिल्‍म का हिस्‍सा बनकर रोमांचक महसूस कर रही हैं. हालांकि वे फिल्‍म में फुल फ्लेज नहीं हैं, लेकिन फिल्‍म को शुभकामनाएं देते हुए कहती हैं कि दर्शकों को उनका काम पसंद आयेगा और फिल्‍म भी. आम्रपाली ने इस गाने में अब तक का सबसे आकर्षक डांस स्‍टेप्‍स किये हैं. उनके साथ गाने में  सुपर स्‍टार खेसारीलाल यादव भी नजर आये हैं. खेसारी और आम्रपाली की इस गाने में केमेस्‍ट्री भी एक हाइलाइट है. बह‍रहाल अब देखना ये होगा कि यह गाना फिल्‍म के लिए कितना फायदेमंद साबित होती है.

गाने का लिंक-

बता दें कि यशी फिल्‍म्‍स, अभय सिन्‍हा और ईज माय ट्रिप डौट कौम प्रस्‍तुत और रेणु विजय फिल्‍म्‍स  इंटरटेंमेंट बैनर तले बनी भोजपुरी फिल्म ‘मेहंदी लगाके रखना 3’ के निर्माता निशांत उज्‍जवल और लेखक, संगीतकार और निर्देशक रजनीश मिश्रा हैं. फिल्म में खेसारीलाल यादव और सहर के अलावा ऋतु सिंह, आम्रपाली दुबे, श्रद्धा नवल, मनोज सिंह टाइगर, बृजेश त्रिपाठी, रोहित सिंह मटरू, नीलकमल, महेश आचार्य, अमित शुक्‍ला, निशा झा, महनाज श्राफ, सूर्या द्विवेदी और उदय तिवारी भी हैं. प्रोजेक्‍ट डिजाइनर अनंजय रघुराज छायांकन आर आर प्रिंस, एक्‍शन हीरा यादव, कोरियोग्राफी रिकी गुप्‍ता, संजय कोर्वे, संजीव शर्मा और कार्यकारी निर्माता अनिल कुमार सिंह व सुरेंद्र कुमार हैं.

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भोजपुरी एक्ट्रेस चांदनी सिंह होली पर खिलाएंगी फगुआ, देखें Photos

‘‘चटपटा हर पल’’ टैग लाइन वाला भोजपुरी टीवी चैनल ‘‘बिग गंगा’’ के दर्शकों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ी है. जब इस चैनल की शुरूआत हुई थी, तब इसका नाम ‘बिग मैजिक गंगा’ था और इसे ‘‘रिलायंस इंटरटेनमेंट’’ ने शुरू किया था. लेकिन 2015 में इसे ‘जी स्टूडियो’ ने खरीद लिया और इसका नाम ‘‘बिग गंगा’’ कर दिया. उसके बाद इसके कई कार्यक्रमों में बदलाव किया गया. तब इसके दर्शकों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई. इतना ही नही जब 2019 में इस चैनल पर ‘‘लोक सम्राटः बिरहा के बाहुबली’’ कार्यक्रम की शुरूआत हुई, तो इसे सबसे ज्यादा दर्शक मिले. इस कार्यक्रम का संचालन बिरहा सम्राट कहे जाने वाले गायक दिनेश लाल यादव (Dinesh Lal yadav) और सह संचालन हास्य अभिनेता मनोज टाइगर (Manoj Tiger) ने किया. इस प्रतियोगी किस्म के कार्यक्रम में बिहार और उत्तर प्रदेश के सोलह बिरहा गायकों ने हिस्सा लिया था.

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अब उसी दिशा में एक कदम आगे बढ़ाए हुए ‘‘बिग गंगा’’ ने होली के अवसर पर कई मशहूर कलाकारों के साथ रंगांरग होली के कई कार्यक्रम प्रसारित करने की योजना बनायी है. भोजपुरी की मशहूर नृत्यांगना और अभिनेत्री चांदनी सिंह (Chandni Singh) द्वारा अपने सोशल मीडिया एकाउंट ‘‘इंस्टाग्राम’’ पर दी गयी जानकारी के अनुसार ‘‘बिग गंगा’’ चैनल पर वह ‘‘फगुआ 2020’’ कार्यक्रम में नजर आएंगी.

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जी हां! चांदनी सिंह (Chandni Singh) ने सोशल मीडिया पर अपनी कुछ तस्वीरें साझा की हैं, जिन्हें उनके फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. यह तस्वीरें होली के अवसर पर नौ मार्च की शाम सात बजे ‘‘बिग गंगा’’ पर प्रसारित होने वाले शो ‘‘फगुआ २०२०’’ की हैं, जिसमें चांदनी सिंह, पंजाबी गायक मीका सिंह (Mika Singh) के साथ नजर आएंगी. इस कार्यक्रम  में चांदनी सिंह, मशहूर भोजपुरी गायक समर सिंह (Samar Singh) के साथ भी नजर आएंगी. चांदनी सिंह अपनी इन तस्वीरों मेंं पूरी तरह देसी लुक में नजर आ रही हैं. उन्होंने अपने लुक को हल्के मेकअप के साथ पूरा किया है. इसके साथ ही चांदनी सिंह ने अपनी पोशाक से मिलते रंग का ईयर रिंग भी पहना है. उनके इस लुक को फैन्स खुब पसंद कर रहे हैं.

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इस संबंध में जब चांदनी सिंह से बात हुई, तो चांदनी सिंह ने कहा- ‘‘देखिए, मैं तो बिहार से हूं और मुझे पता है कि होली के अवसर पर लोग नाचते गाते हुए रंग खेलते हैं. उत्तर प्रदेश में होली के अवसर पर गाए जाने वाले गीतो को ‘फाग’ कहा जाता है, जबकि बिहार और झारखंड में ‘‘फगुआ’’ कहा जाता है. समस्त भोजपुरी भाषी ‘‘फगुआ’’ ही कहते हैं. होली के अवसर पर फाग या फगुआ का अपना अलग मजा है. हर इंसान फाग/फगुआ के संगीत में झूमते हूए एक दूसरे को रंगो से सराबोर करता रहता है. एक इसी के चलते हम लोग दर्शकों को मनोंरजन देने के लिए ‘बिग गंगा’ चैनल पर ‘फगुआ 2020’ लेकर आ रहे हैं, जिसमें मेरा साथ देंगे मीका सिंह और समर सिंह. मैं इस कार्यक्रम को लेकर अपने प्रशंसकों की राय जानने को काफी उत्सुक हूं’’

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ज्ञातब्य है कि चांदनी सिंह खुद को सोशल मीडिया क्वीन समझती हैं. इस कारण वह अपने करियर से जुड़ी हर तस्वीर सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर पोस्ट करती रहती हैं.

https://www.youtube.com/watch?time_continue=1&v=A8JxfWi-YRI&feature=emb_title

नक्सलियों की “हथेली” पर छत्तीसगढ़!

छत्तीसगढ़ में 15 वर्ष की भाजपा सरकार के पलायन के बाद कांग्रेस के आगमन से यह संदेश प्रसारित हुआ था कि बस्तर में नक्सलवाद अब खत्म हो जाएगा. मगर घटनाक्रमों को देखते हुए कहा जा सकता है कि आज भी नक्सलियों, नक्सलवाद के हथेली पर छत्तीसगढ़ रुक-रुक कर सांसे ले रहा है.

भानुप्रतापपुर के दुर्गूकोंदल में एक राजनीतिक दल के पदाधिकारी  रमेश गावड़े की हत्या की जिम्मेदारी नक्सलियों ने आखिरकार ली है. माओवादियों  के  उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी ने एक पर्चा  जारी किया है. रमेश पर जनविरोधी खदान का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है. दरअसल, 29 फरवरी को भाजपा  कार्यकर्ता व पूर्व जनपद सदस्य रमेश गावड़े को उनके घर के सामने ही गोली मारकर हत्या कर दी गई. अब नक्सलियों ने हत्या की जिम्मेदारी ली है. नक्सलियों के द्वारा दुर्गुकोंदल ग्राम के साप्ताहिक बाजार क्षेत्र में और मृतक के घर के सामने पर्चे फेंके,पर्चो में लिखा है कि लौह अयस्क कंपनी के मालिकों के समर्थक पूंजी पतियों के साथ होने के कारण पीएलजी ए एवं जनता ने उन्हें यह सजा दी है. उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी की ओर से पर्चों जारी किया गया है. साथ ही जल जंगल जमीन को बचाने एवं खदान के काम से मजदूरों को दूर रहने की बात कही गई है.  ऐसे ही घटनाक्रमों से यह संदेश प्रसारित हो रहा है कि नक्सलवाद अभी भी सर उठा कर छत्तीसगढ़ में बंदूक और गोली के बूते अपनी हांक रहा है.

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नक्सलियों का खूनी खेल

हाल ही में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में तोंगपाल थाना क्षेत्र के पालेंम में गोपनीय सैनिक कवासी हूंगा की ‘नक्सलियों’ ने गोली मार हत्या कर दी। यह गुप्त सैनिक जैमर गांव का रहने वाला था, जो कुछ समय पहले नक्सलवाद छोड़कर आत्मसमर्पण कर चुका  था.वह पुलिस के लिए  गुप्त सैनिक के रूप में कार्य कर रहा था.  पालेंम का मेला था और वह मेला देखने गया हुआ था. मौके की ताक में बैठे नक्सलियों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी.  पहले भी इस क्षेत्र में ग्रामीण मुचाकी हड़मा की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। पांच  दिन मे  यह दूसरी घटना है. घटनास्थल से सीआरपीएफ कैम्प की दूरी 500 मीटर है.इसके  बावजूद नक्सलियों ने हत्या जैसी घटना को अंजाम देकर सुरक्षा बल को एक तरह से “चुनौती” दी है.  जानकार सूत्रों के अनुसार वह नक्सल संगठन में सक्रिया था बाद में आत्मसमर्पण कर पुलिस के लिए गोपनीय सैनिक के रूप में काम करता था.माओवादियों ने पुलिस मुखबिरी के लिए कवासी हूंगा को चिन्हांकित कर रखा था और मौके की तलाश में थे कि उसे अकेला पाकर हत्या कर दें.पुलिस  अधीक्षक  शलभ सिन्हा ने माओवादियों की ओर से गोली मारकर हत्या किए जाने की पुष्टि की है. इस घटना से जहां ग्रामीणों में दहशत है.

मुठभेड़ भी जारी है 

जहां एक तरफ नक्सलवादी  अपने मन के मुताबिक निरंतर  लोगों को मार रहे हैं  दूसरी तरफ  पुलिस की नक्सलियों के साथ नारायणपुर के आमदई घाटी में मुठभेड़  होती रहती  है. हाल में नारायणपुर में मुठभेड़ में एक जवान घायल हो गया .  खबर है कि  निकों  कंपनी रोड ओपनिंग में लगी है. जहां आयरन माइंस निकालने के लिए वाहन, जेसीबी और पोकलेन के जरिए रास्ता तैयार किया जा रहा है. आमदई घाटी लोह अयस्क खदान की सुरक्षा में पुलिस बल तैनात है. इसी बीच नक्सलियों ने माइंस खोदने के विरोध में पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरु कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस की ओर से भी फायरिंग शुरू कर दी.

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मुठभेड़ में एक जवान घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया गया. पुलिस द्वारा सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है. बस्तर में पुलिस और नक्सलवादी आपस में बंदूक लिए संघर्षरत है.छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार आने के बाद यह उम्मीद थी कि नक्सलवाद शीघ्र  परास्त होगामगर  ऐसा  होता  दिखाई  नहीं  देता.

छत्तीसगढ़ मे छापे: भूपेश की चाह और राह!

छत्तीसगढ़ मे अचानक पड़ने वाले आयकर के छापों दबिश  से मानो प्रदेश की राजनीति पर बिजली गिर गई. छत्तीसगढ़ सरकार और आयकर विभाग  यानी केंद्रीय सत्ता आमने-सामने आ गए. आयकर विभाग के अधिकारियों पर दबाव बनाने उनकी गाड़ियां जप्त कर ली गई, सारा नाटक सुर्खिया  बनता रहा. प्रतिक्रिया दूर तलक गई . इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को जाने अनजाने में इंवॉल्व कर दिया गया. छत्तीसगढ़ के संदर्भ में या अपने आप ने पहली घटना है जब संवैधानिक संस्था द्वारा की गई कार्यवाही पर प्रतिक्रिया इतनी तल्ख हो गई.

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुलाकात की. उन्हें इतना भी सब्र  नहीं रहा कि इस मसले पर मोबाइल पर, वीडियो कॉन्फ्रेंस पर हालात की जानकारी  दी जा सकती थी.मगर हडबडी ऐसी की सीधे सरकारी प्लेन पर दिल्ली कूच कर गए, जब मौसम बिगड़ा, तो रात राजस्थान जयपुर में गुजारनी पड़ी. यहां यह भी समझना होगा कि आयकर के छापों को क्या कांग्रेस के अध्यक्ष होने के नाते सोनिया गांधी रोक सकती है? अच्छा होता राजनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए भूपेश बघेल मुख्यमंत्री की बहैसियत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से बात करते जिसका संदेश संपूर्ण प्रदेश में सकारात्मक साबित होता.

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 मत चूको चौहान

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कि राजनीतिक परिपक्वता यहीं पर दांव पर लग गई. जब उन्होंने केंद्रीय आयकर विभाग के छापों के बाद घबराकर प्रतिक्रिया व्यक्त करनी शुरू कर दी. ऐसे मामलों में उन्हें धीरज और समझदारी से अपने पद की गरिमा के अनुकूल व्यवहार करना चाहिए था. यह सब जानते हैं कि आयकर विभाग का छापा सीधे-सीधे छत्तीसगढ़ सरकार को परिसर में लाने के लिए था मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार के चहेते लोगों पर छापे पड़ना यह संकेत था कि छत्तीसगढ़ सरकार अपनी सीमा में रहे. ऐसे में सूझबूझ  की दरकार तो यही थी कि 15 वर्षों बाद सत्ता में आई कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ में इस छापों से हमदर्दी हासिल करके दिखाती मगर छत्तीसगढ़ की जनता में इसका संदेश विपरीत चला गया मुख्यमंत्री के बड़े-बड़े सलाहकार सोते रह गए मानो उनके हाथों के तोते उड़ गए और स्वयं मुख्यमंत्री मत चूको चौहान की जगह झुक गए चौहान हो कर रह गए.

सोनिया गाँधी की परिक्रमा 

दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी से मुलाकात के दौरान कांग्रेस के प्रदेश के कर्णधार कहे जाने वाले  पीएल पुनिया भी मौजूद रहे. बघेल और पुनिया ने सोनिया गांधी से चर्चा की. चर्चा के दौरान बघेल ने प्रदेश में चल रहे आईटी छापा की जानकारी दी.मुलाकात कर बाहर निकलने के बाद बघेल और पुनिया ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि हमने राष्ट्रीय नेतृत्व आईटी छापा के बारे में पूरी जानकारी दे दी है. छापा के पीछे केन्द्र की राजनीतिक दुर्भावना साफ तौर देखी जा सकती है. राज्य सरकार को बिना सूचित किए जिस तरह से आईटी की कार्रवाई हुई यह पूरी तरह से संघीय ढाँचा के खिलाफ है. इस मामले में हम कानूनी सलाह लेकर आगे क्या करना इस बारे में सोचेंगे. हम केंद्र सरकार की किसी भी कार्रवाई से डरने वाले नहीं है.

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वहीं पीएल पुनिया ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार डरी हुई है. मोदी सरकार छत्तीसगढ़ में भाजपा के नेताओं और भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों पर हो रही कार्रवाई से घबराई हुई नज़र आती है. नान घोटाला से लेकर पनामा पेपर में जिस तरह भाजपा के नेता घिरे हुए और इस पर भूपेश सरकार की ओर से कराई जाँच को प्रभावित अब राज्य सरकार के खिलाफ आईटी कार्रवाई कर महौल बनाने की कोशिश कर रही है. राज्य सरकार को बिना भरोसे में लिए जिस तरह से कार्रवाई हुई वह संवैधानिक नहीं है. इस मामले को हम संसद सत्र में उठाएंगे.

इंकम टैक्स विभाग की ओर से 27 फरवरी  को मारे गए छापे की जानकारी चार दिनों बाद 2 मार्च  दी गई. उसमें विभाग द्वारा किसी व्यक्ति विशेष चाहे अधिकारी, व्यवसायी एवं राजनीति से जुड़े किसी के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी दे पाने में असमर्थ रहे. इंकम टैक्स कमिश्नर सुरभि अहलुवालिया द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में केवल ग्रुप ऑफ इंडिविजुअल्स, हवाला कारोबारी, व्यवसायियों, शराब कारोबारी, खनिज कार्यों से जुड़े व्यापारी तथा अन्य प्रकरणों से जुड़कर धनराशि अर्जित करने वालों के घर छापे मारे गए.

प्रदेश में बीते चार दिनों से चल रहे आयकर विभाग की छापेमारी को लेकर अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर अपनी आपत्ति जताई है. मुख्यमंत्री ने छापा को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसमें केंद्रीय बल के इस्तेमाल को दुर्भाग्यपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए इसे कानूनी नजरिए से भी गलत बताया है.

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सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड: राज प्रेमी बनें बेस्ट नेगेटिव एक्टर “क्रिटिक्स”

बौलीवुड, छोटे पर्दे और भोजपुरी (Bhojpuri) में सर्वाधिक चर्चित चेहरे के रूप में पसंद किये जाने वाले राज प्रेमी (Raj Premi) को फिल्मों में किये गए उनके निगेटिव रोल के आधार पर सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड (Saras Salil Bhojpuri Cine Award) के पहले सीजन में बेस्ट नेगेटिव एक्टर “क्रिटिक्स” (Best Negative Actor “Critics”) का अवार्ड दिया गया. ज्यूरी ने इस कैटेगरी का अवार्ड अब तक प्रदर्शित उनकी फिल्मों के आधार पर दिया. बस्ती में हुए अवार्ड शो में पहुचें राज प्रेमी ने औडियंस से अपने अभिनय से जुडी तमाम बातें शेयर की.

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राज प्रेमी भोजपुरी सिनेमा के एक मात्र ऐसे कलाकार हैं जो भोजपुरी के साथ बौलीवुड, मराठी और छोटे पर्दे पर भी सक्रिय रहतें हैं. उनकी पर्सनैल्टी और आवाज उनके अभिनय को और भी दमदार बनाती है. राज प्रेमी रामानंद सागर के लोकप्रिय धारावाहिक कृष्णा में ‘हिरण्‍य कश्‍यप’ का और संजय खान की धारावाहिक ‘जय हनुमान’ में हनुमान के कालजयी किरदार से चर्चित हुए. राज प्रेमी नें बौलीवुड की वीर, क्रांतिवीर, अनुराग कश्यप की फिल्म बाम्बे वेलवेट में यादगार रोल किए हैं.

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उन्होंने दिनेशलाल यादव निरहुआ के साथ ‘दूल्‍हे राजा’, पवन सिंह के साथ ‘योद्धा’, ‘चाइलेंज’ व ‘सैईंया सुपरस्‍टार’ और खेसारीलाल यादव के साथ ‘तेरे नाम’, ‘छपरा एक्‍सप्रेस’ व ‘लतखोर’ जैसी हिट फिल्मों में यादगार रोल किये हैं.

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राजप्रेमी ने स्टार भारत के सर्वाधिक चर्चित धारावाहिक काल भैरव रहस्य में लीड भूमिका निभाई है. यह धारावाहिक उस समय इतना पसंद किया गया था की लोग सारे काम छोड़ कर इस धारावाहिक को जरुर देखते थे. इस धारावाहिक के चलते स्टार भारत  की टीआरपी सबसे ऊपर रही थी.

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राजप्रेमी ने हाल ही में भोजपुरी फिल्म तुमसे अच्छा कौन है की शूटिंग पूरी की है. इस फिल्म में वह सबसे मुख्य भूमिका में नजर आयेंगे. फिल्म में उनके साथ शुभम तिवारी, देव सिंह, रितु सिंह, और धामा वर्मा भी मुख्य भूमिका में नजर आने वालें हैं. इस फिल्म की शूटिंग गोरखपुर के खूबसूरत लोकेशन्स में की गई है.

छपरा एक्सप्रेस फिल्म का ट्रेलर लिंक –

दूल्हे राजा फिल्म का ट्रेलर लिंक –

 

उर्वशी रौतेला की बिकनी फोटोज हुईं वायरल, सोशल मीडिया पर ऐसे बना मजाक

फिल्म ‘पागलपंती’ (Pagalpanti) में पुल्कित सम्राट (Pulkit Samrat), अनिल कपूर (Anil Kapoor), जौन अब्राहम (Johm Abrahim), इलियाना डी’क्रूज (Ileana D’cruz) और कृति खरबंदा (Kriti Kharbanda) के साथ नजर आई उर्वशी रौतेला (Urvashi Rautela) की मालदीव में समुद्र किनारे आसमानी कलर की बिकनी में सामने आई तस्वीरें सोशल मीडिया पर जहां जबरदस्त ट्रेंड कर रहीं हैं, वहीं उनके इस तस्वीर पर सोशल मीडिया यूजर द्वारा जम कर मजाक बनाया जा रहा है.

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फोटो के साथ कैप्शन में लिखा ये…

समुद्र किनारे दिए गए बिकनी पोज में उर्वशी मस्ती करती नजर आ रही हैं. इन्स्टाग्राम और ट्विटर पर शेयर किये गए अपने फोटो कैप्सन में लिखा है,- “front or back? Maldives water got me glistening Water wave A little break in paradise” इसे अगर हिंदी में कहा जाए तो इसका मतलब होगा “सामने या पीछे? मालदीव के पानी ने मुझे पानी की लहर से मिला दिया स्वर्ग में थोड़ा विराम”.

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लोगो ने किया ट्रोल…

इस पोस्ट को उन्होंने अपने ट्विटर पर 3 मार्च की शाम 7:34 पर पोस्ट किया है और उसके बाद इस पोस्ट को लेकर यूजर्स ने तमाम तरह के मीम्स बनाने शुरू कर दिया. उर्वशी द्वारा शेयर किये गए इस फोटो पर अभी तक 775 कमेन्ट 16200 लाइक और 508 रीट्वीट आ चुके हैं. वहीं उन्होंने इन्स्टाग्राम पर इस तस्वीर को एक दिन पहले शेयर किया है जिस पर अभी तक 1,583,336 लाईक आ चुके हैं.

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ऐसे ऐसे कमेंट्स आए नजर…

ट्विटर पर आ रहे रिप्लाई से इस तस्वीर पर बन रहे मजाक को लेकर उर्वशी नें अभी तक किसी भी यूजर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. एक यूजर पंकज ने लिखा है अबे इसके बैक पर हाथ तूने मारा, वहीं मारवाड़ी नाम के यूजर नें लिखा है मैचिंग मैचिंग सी वाटर के साथ (Matching matching sea water ke sath). वहीं लोगों के अश्लील कमेन्ट को लेकर भी कुछ लोगों नें अपनी प्रतिक्रिया दी है. एक यूजर दिसिने कुमार नें लिखा है की सोच कर ही हैरानी होती है की लोग अपनी हद दर्जे की गिरी हुई मानसिकता को सोशल मिडिया पर भी आसानी से दिखा देते है. देशी म्यूजिक कैफे नें लिखा है – दंगे करवाओगी क्या.

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इससे पहले भी शेयर कर चुकी हैं हौट वीडियोज…

वैसे उर्वशी रौतेला द्वारा इन्स्टाग्राम और ट्विटर पर शेयर की गई कोई यह पहली तस्वीर नहीं हैं जिसमें वह हौट पोज में दिखाई दे रहीं है इसके पहले भी उन्होंने कई तस्वीरें शेयर की है जिन पर उनका मजाक बना है. इसके पहले भी उनकी वर्कआउट और सेक्सी पोज में खींची गई कई तस्वीरें वायरल हो चुकी हैं.

चलिए दिखाते हैं आपको कुछ ट्वीट्स –

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प्रेम तर्पण भाग 2 : कृतिका को था किसका इंतजार

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- प्रेम तर्पण भाग 1 : कृतिका को था किसका इंतजार

पूर्णिमा ने जैसे ही कमरे में प्रवेश किया, कृतिका को देख कर गिरतेगिरते बची. सौंदर्य की अनुपम कृति कृतिका आज सूखे मरते शरीर के साथ पड़ी थी. पूर्णिमा खुद को संभालते हुए कृतिका की बगल में स्टूल पर जा कर बैठ गई. उस की ठंडी पड़ती हथेली को अपने हाथ से रगड़ कर उसे जीवन की गरमाहट देने की कोशिश करने लगी.

उस ने उस के माथे पर हाथ फेरा और कहा, ‘‘कृति, यह क्या कर लिया तूने? कौन सा दर्द तुझे खा गया? बता मुझे कौन सी पीड़ा है जो तुझे न तो जीने दे रही है न मरने. सबकुछ तेरे सामने है, तेरा परिवार जिस के लिए तू कुछ भी करने को तैयार रहती थी, तेरा उन का सगा न होना यही तेरे लिए दर्द का कारण हुआ करता था, लेकिन आज तेरे लिए वे किसी सगे से ज्यादा बिलख रहे हैं. इतने समझदार पति हैं फिर कौन सी वेदना तुझे विरक्त नहीं होने देती.’’

कृति की पथराई आंखें बस दरवाजे पर टिकी थीं, उस ने कोई उत्तर नहीं दिया.

पूर्णिमा कृति के चेहरे के भावों को पढ़ने की कोशिश कर रही थी, कुछ देर उस की आंखों में उस की पीड़ा खोजते हुए पूर्णिमा ने धीरे से कहा, ‘‘शेखर, कृति की पथराई आंख से आंसू का एक कतरा गिरा और निढाल हाथों की उंगलियां पूर्णिमा की हथेली को छू गईं.

पूर्णिमा ठिठक गई, अपना हाथ कृतिका के सिर पर रख कर बिलख पड़ी, तू कौन है कृतिका, यह कैसी अराधना है तेरी जो मृत्यु शैय्या पर भी नहीं छोड़ती, यह कौन सा रूप है प्रेम का जो तेरी आत्मा तक को छलनी किए डालता है.’’

तभी आवाज आई, ‘‘मैडम, आप का मिलने का समय खत्म हो गया है, मरीज को आराम करने दीजिए.’’

पूर्णिमा कृतिका के हाथों को उम्मीदों से सहला कर बाहर आ गई और पीछे कृतिका की आंखें अपनी इस अंतिम पीड़ा के निवारण की गुहार लगा रही थीं. उस की पुतलियों पर गुजरा कल एकएक कर के नाचने लगा था.

कृतिका नाम मौसी ने यह कह कर रखा था कि इस मासूम की हम सब माताएं हैं कृतिकाओं की तरह, इसलिए इस का नाम कृतिका रखते हैं. कृतिका की मां उसे जन्म देते ही इस दुनिया से चल बसी थीं. मौसी उस 2 दिन की बच्ची को अपने साथ ले आई थीं, नानी, मामी, मौसी सब ने देखभाल कर कृतिका का पालन किया था. जैसेजैसे कृतिका बड़ी हुई तो लोगों की सहानुभूति भरी नजरों और बच्चों के आपसी झगड़ों ने उसे बता दिया था कि उस के मांबाप नहीं हैं.

परिवार में प्राय: उसे ले कर मनमुटाव रहता था. कई बार यह बड़े झगड़े में भी तबदील हो जाता, जिस के परिणामस्वरूप मासूम छोटी सी कृतिका संकोची, डरी, सहमी सी रहने लगी. वह लोगों के सामने आने से डरती, अकसर चिड़चिड़ाया करती, लोगों की दया भरी दलीलों ने उस के भीतर साधारण हंसनेबोलने वाली लड़की को मार डाला था.

कभी उसे बच्चे चिढ़ाते कि अरे, इस की तो मम्मी ही नहीं है ये बेचारी किस से कहेगी. मासूम बचपन यह सुन कर सहम कर रह जाता. यह सबकुछ उसे व्यग्र बनाता चला गया. बस, हर वक्त उस की पीड़ा यही रहती कि मैं क्यों इस परिवार की सगी नहीं हुई, धीरेधीरे वह खुद को दया का पात्र समझने लगी थी, अपने दिल की बेचैनी को दबाए अकसर सिसकसिसक कर ही रोया करती.

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युवावस्था में न अन्य युवतियों की तरह सजनेसंवरने के शौक, न हंसीठिठोली, बस, एक बेजान गुडि़या सी वह सारे काम करती रहती. उस के दोस्तों में सिर्फ पूर्णिमा ही थी जो उसे समझती और उस की अनकही बातों को भी बूझ लिया करती थी. कृतिका को पूर्णिमा से कभी कुछ कहने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी. पूर्णिमा उसे समझाती, दुलारती और डांटती सबकुछ करती, लेकिन कृतिका का जीवन रेगिस्तान की रेत की तरह ही था.

कृतिका के घर के पास एक लड़का रोज उसे देखा करता था, कृतिका उसे नजरअंदाज करती रहती, लेकिन न जाने क्यों उस की आंखें बारबार कृतिका को अपनी ओर खींचा करतीं, कभी किसी की ओर न देखने वाली कृतिका उस की ओर खिंची चली जा रही थी.

उस की आंखों में उसे खिलखिलाती, नाचती, झूमती जिंदगी दिखने लगी थी, क्योंकि एक वही आंखें थीं जिन में सिर्फ कृतिका थी, उस की पहचान के लिए कोई सवाल नहीं था, कोई सहानुभूति नहीं थी. कृतिका के कालेज में ही पढ़ने आया था शेखर.

कृतिका अब सजनेसंवरने लगी थी, हंसने लगी थी. वह शेखर से बात करती तो खिल उठती. शेखर ने उसे जीने का नया हौसला और पहचान से परे जीना सिखाया था. पूर्णिमा ने शेखर के बारे में घर में बताया तो एक नई कलह सामने आई. कृतिका चुपचाप सब सुनती रही. अब उस के जीवन से शेखर को निकाल दिया गया.

कृतिका फिर बिखर गई, इस बार संभलना मुश्किल था, क्योंकि कच्ची माटी को आकार देना सहज होता है.

कृतिका में अब शेखर ही था, महीनों कृतिका अंधेरे कमरे में पड़ी रही न खाती न पीती बस, रोती ही रहती. एक दिन नौकरी के लिए कौल लैटर आया तो परिवार वालों ने भेजने से इनकार कर दिया, लेकिन इस बार कृतिका अपने संकोच को तिलांजलि दे चुकी थी, उस ने खुद को काम में इस कदर झोंक दिया कि उसे अब खुद का होश नहीं रहता.

परिवार की ओर से अब लगातार शादी का दबाव बढ़ रहा था, परिणामस्वरूप सेहत बिगड़ने लगी. उस के लिए जीवन कठिन हो गया था, पीड़ा ने तो उसे जैसे गोद ले लिया हो, रातभर रोती रहती. सपने में शेखर की छाया को देख कर चौंक कर उठ बैठती, उस की पागलों की सी स्थिति होती जा रही थी.

अब कृतिका ने निर्णय ले लिया था कि वह अपना जीवन खत्म कर देगी, कृतिका ने पूर्णिमा को फोन किया और बिलखबिलख कर रो पड़ी, ‘पूर्णिमा, मुझ से नहीं जीया जाता, मैं सोना चाहती हूं.’

पूर्णिमा ने झल्ला कर कहा, ‘हां, मर जा और उन लोगों को कलंकित कर जा जिन्होंने तुझे उस वक्त जीवन दिया था जब तेरे ऊपर किसी का साया नहीं था, इतनी स्वार्थी कैसे और कब हो गई तू? तू ने जीवन भर उस परिवार के लिए क्याक्या नहीं किया, आज तू यह कलंक देगी उपहार में?’

कृतिका ने बिलखते हुए कहा, ‘मैं क्या करूं पूर्णिमा, शेखर मेरे मन में बसता है, मैं कैसे स्वीकार करूं कि वह मेरा नहीं, मैं तो जिंदगी जानती ही नहीं थी वही तो मुझे इस जीवन में खींच कर लाया था. आज उसे जरा सी भी तकलीफ होती है तो मुझे एहसास हो जाया करता है, मुझे अनाम वेदना छलनी कर जाती है, मैं तो उस से नफरत भी नहीं कर पा रही हूं, वह मेरे रोमरोम में बस रहा है.’

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पूर्णिमा बोली, ‘कृतिका जरूरी तो नहीं जिस से हम प्रेम करें उसे अपने गले का हार बना कर रखें, वह हर पल हमारे साथ रहे, प्रेम का अर्थ केवल साथ रहना तो नहीं. तुझे जीना होगा यदि शेखर के बिना नहीं जी सकती तो उस की वेदना को अपनी जिंदगी बना ले, उस की पीड़ा के दुशाले से अपने मन को ढक ले, शेखर खुद ब खुद तुझ में बस जाएगा. तुझ से उसे प्रेम करने का अधिकार कोई नहीं छीन सकता.

कृतिका को अपने प्रेम को जीने का नया मार्ग मिल गया था, शेखर उस की आत्मा बन चुका था, शेखर की पीड़ा कृतिका को दर्द देती थी, लेकिन कृतिका जीती गई, सब के लिए परिवार की खुशी के लिए माधव से कृतिका का विवाह हो गया.

माधव एक अच्छे जीवनसाथी की तरह उस के साथ चलता रहा, कृतिका भी अपने सारे दायित्वों को निभाती चली गई, लेकिन उस की आत्मा में बसी वेदना उस के जीवन को धीरेधीरे खा रही थी और वही पीड़ा उसे आज मृत्यु शैय्या तक ले आई थी, उसे ब्रेन हैमरेज हो गया था.

रात हो चली थी. नर्स ने आईसीयू के तेज प्रकाश को मद्धम कर दिया और कृतिका की आंखों में नाचता अतीत फिर वर्तमान के दुशाले में दुबक गया.

पूर्णिमा ने माधव से कहा कि कृतिका को आप उस के घर ले चलिए मैं भी चलूंगी, मैं थोड़ी देर में आती हूं. पूर्णिमा ने घर आ कर तमाम किताबों, डायरियों की खोजबीन कर शेखर का फोन नंबर ढूंढ़ा और फोन लगाया, सामने से एक भारी सी आवाज आई, ‘‘हैलो, कौन?’’

‘‘हैलो, शेखर?’’

‘‘जी, मैं शेखर बोल रहा हूं.’’

‘‘शेखर, मैं पूर्णिमा, कृतिका की दोस्त.’’

कुछ देर चुप्पी छाई रही, शेखर की आंखों में कृतिका तैर गई. उस ने खुद को संभालते हुए कहा, ‘‘पूर्णिमा… कृतिका… कृतिका कैसी है?’’

पूर्णिमा रो पड़ी, ‘‘मर रही है, उस की सांसें उसी शेखर के लिए अटकी हैं जिस ने उसे जीना सिखाया था, क्या तुम उस के घर आ सकोगे कल?’’

शेखर सोफे पर बेसुध सा गिर पड़ा मुंह से बस यही कह सका, ‘‘हां.’’

कृतिका को ऐंबुलैंस से घर ले आया गया. घर के सामने लोगों की भीड़ जमा हो गई, सब की आंखों में उस माटी में खेलने वाली वह गुडि़या उतर आई, दरवाजे के पीछे छिप जाने वाली मासूम कृति आज अपनी वेदनाओं को साकार कर इस मिट्टी में छिपने आई थी.

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दरवाजे पर लगी कृतिका की आंखों से अश्रुधार बह निकली, शेखर ने देहरी पर पांव रख दिया था, कृतिका की पुतलियों में जैसे ही शेखर का प्रतिबिंब उभरा उस की अंतिम सांसों के पुष्प शेखर के कदमों में बिखर गए और शेखर की आंखों से बहती गंगा ने प्रेम तर्पण कर कृतिका को मुक्त कर दिया.

फैल रहा है सेक्सी कहानियों का करंट

‘‘हैलो दोस्तो, मेरा नाम सोनिया है. मैं राजस्थान के जोधपुर में रहती हूं. मेरी उम्र 24 साल है. मैं बहुत सेक्सी हूं और हमबिस्तरी के लिए नए नए मर्दों की तलाश में रहती हूं, जिस से ज्यादा से ज्यादा मजा ले सकूं.  मेरे उभार बहुत मोटे हैं और…

‘‘आज मैं आप को अपनी पहली हमबिस्तरी की कहानी बताने जा रही हूं. मैं तब 16 साल की थी और बहुत चंचल थी. मेरी एक सहेली थी रितु. वह भी मेरी तरह हमबिस्तरी की शौकीन थी.

‘‘एक दिन उस का फोन आया कि वह घर में अकेली है, रात को उस का बौयफ्रैंड आएगा. अगर तू चाहे तो आ जा, बड़ा मजा आएगा.

‘‘मैं झट से तैयार हो गई और मम्मीपापा से पूछ कर रितु के घर जा पहुंची और बैडरूम में जा कर जो नजारा देखा, तो मदहोश हो उठी.

‘‘रितु बगैर कपड़ों के अपने बौयफ्रैंड की गोद में बैठी थी, जो उस का अंगअंग मसल रहा था और चूम भी रहा था. यह देख कर मुझ से रहा न गया और मैं भी कपडे़ उतार कर उन की ओर लपकी…

‘‘यह कहानी आप सुन रहे हैं ‘कामुकता डौट कौम’ पर…’’

कचरा सेक्सी कहानी

इस तरह की और इस से भी ज्यादा सेक्सी कहानियां इन दिनों यू ट्यूब और गूगल पर धड़ल्ले से सुनी जा रही हैं, जिन में आवाज किसी लड़की की होती है, जो बेहद बिंदास और खुलेपन से इन्हें इस तरह सुना रही होती है कि सुनने वाले के बदन में बिजली का करंट दौड़ जाता है, क्योंकि कहानी सुना रही लड़की इसे अपनी आपबीती बताती है और अंगों के नाम भी ठीक वैसे ही लेती है, जैसे गालियों में इस्तेमाल किए जाते हैं.

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वह लड़की हमबिस्तरी को इस तरह बयां करती है कि सुनने वाले को लगता है कि सबकुछ सच है और उस की आंखों के सामने ही हो रहा है.

‘कामुकता डौट कौम’, ‘बैड टाइम हौट स्टोरी’ और ‘अंतर्वासना डौट कौम’ जैसी दर्जनभर पौर्न साइटों ने अपना बाजार बढ़ाने के लिए ग्राहकों की कमजोर नब्ज पकड़ते हुए उन्हें कहानियों के जरीए एक नई दुनिया में सैर कराने का मानो बीड़ा सा उठा लिया है.

सेक्सी कहानियां सुनने वालों को यह अहसास कराया जाता है कि कहानी सुनाने वाली लड़की सच बोल रही है, इसलिए बीचबीच में तरहतरह की आवाजें भी भर दी जाती हैं.

आहें और सिसकियां भरती लड़की कमरे का हुलिया बताती है और सोफे, परदे का रंग भी बताती है और कहानी के मुताबिक चिल्लाने का दिखावा भी करती है.

एक कहानी की मीआद तकरीबन 12 मिनट की होती है, जिस के खत्म होतेहोते सुनने वाला उस में इस तरह डूब जाता है कि उसे अपनेआप का होश नहीं रहता.

सुनने वालों को लत लगाने के लिए ये साइट वाले रोज एक नई कहानी देते हैं, जिन में लड़की का नाम और उम्र बदल जाते हैं, शहर भी बदल जाते हैं,  कभी वह खुद को निपट कुंआरी बताती है, तो कभी शादीशुदा.

ऐसी कहानियों में कोशिश यह भी की जाती है कि वे आम लोगों के तजरबे से मेल खाती लगे, इसलिए नजदीकी रिश्तेदारों से सेक्स की कहानियां भी इफरात से सुनवाई जाती हैं.

जीजासाली, देवरभाभी, भाभी या बहनोई का भाई, भाई का दोस्त जैसे दूर के रिश्तेदार तो अहम हैं, पर नजदीकी रिश्तेदारों मसलन मांबेटे, बापबेटी, भाईबहन वगैरह से हमबिस्तरी की भी कहानियों का ढेर है.

ऐसी सेक्सी कहानियों को चटकारे ले कर सुनाने वाली सोनिया, रितु या सपना को तो कोई शर्म नहीं आती, उलटे वे इन्हें इस तरह सुनाती हैं कि जिस से लगता है कि उन्हें कतई शर्म, डर या पछतावा नहीं होता, बल्कि उन का मकसद मजे लूटना भर होता है.

इन कहानियों में दौड़ती ट्रेन या कार में हमबिस्तरी होती है, तो रेगिस्तान और समुद्री किनारे की सेक्सी कहानियां भी सुनवाई जाती हैं. इन कचरा कहानियों की मांग तेजी से बढ़ रही है.

ब्लू फिल्मों से उचटा जी

अब ब्लू कहानियां आसानी से स्मार्टफोन पर मिल जाती हैं. भोपाल के एक इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ रहे 20 साला छात्र सुयश का कहना है कि वह पहले ब्लू फिल्में देखता था, लेकिन उन में एक ही तरह के सीन बारबार दोहराए जाते हैं, इसलिए उन में उसे मजा नहीं आता था. दूसरे, ब्लू फिल्में चूंकि स्क्रीन पर चलती हैं, इसलिए किसी के आ जाने पर पकड़े जाने का डर भी बना रहता था. अब इन कहानियों को वह हैडफोन के जरीए बगैर किसी डर या हिचक के सुनता है और घर वालों को लगता है कि वह गाने सुन रहा है.

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सुयश बताता है कि एक दोस्त के बताने पर उस ने पहली बार जब कहानी सुनी थी, तब शरीर में बिजली सी दौड़ गई थी, क्योंकि किसी लड़की के मुंह से अंगों के खुले शब्द सुनने का उस का यह पहला तजरबा था और हमबिस्तरी का आंखोंदेखा हाल. जिस तरह वह सुना रही थी, उस का भी अलग ही लुत्फ था.

जब कंप्यूटर, टैलीविजन और स्मार्टफोन चलन में नहीं थे, तब लोग मस्तरामछाप नीलीपीली किताबें इफरात से पढ़ते थे, पर उन में दिक्कत यह थी कि साइज में छोटी और घटिया क्वालिटी के पन्नों पर छपी इन किताबों को छिपा कर रखना पड़ता था. इन्हें पढ़ कर फेंक देना या जला देना मजबूरी हो जाती थी.

आज से तकरीबन 25-30 साल पहले ये किताबें तकरीबन 30 रुपए में मिलती थीं, जो महंगी होती थीं, पर इन की मांग इतनी होती थी कि इन की कमी हमेशा बनी रहती थी.

इस तरह की किताबें अभी भी मिलती हैं, पर इन्हें पढ़ने वाले न के बराबर बचे हैं, क्योंकि इलैक्ट्रौनिक आइटमों ने ब्लू फिल्मों को देखना आसान बना दिया है. लोग अब इन से भी ऊबने लगे, तो नया फंडा सेक्सी कहानियों का आ गया है.

कई कहानियों में साहित्यिक शब्दों का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें सुन कर लगता है कि इन्हें लिखने वाला माहिर कहानीकार है.

क्यों सुन रहे हैं लोग

विदिशा से भोपाल आनेजाने वाले बृजेश, जो 50 साल के हो चले हैं और 3 बच्चों के पिता भी हैं, का कहना है कि उन्होंने अभी 2 साल पहले ही स्मार्टफोन खरीदा है और वे उस का इस्तेमाल करना सीख गए हैं.

पहले विदिशा से भोपाल के एक घंटे के रास्ते में उन्हें काफी बोरियत होती थी. वे पहले सेक्सी मैगजीन पढ़ते थे, लेकिन ट्रेन में खुलेआम पढ़ने में दिक्कत होती थी, इसलिए ऊपर की बर्थ पर जा कर कोने में मुंह छिपा कर पढ़ते थे.

बाद में स्मार्टफोन में ब्लू फिल्में देखना शुरू किया, तो भी दिक्कत पेश आई, इसलिए टायलेट में चले जाते थे, पर वहां भी चैन नहीं था. देर हो जाती थी, तो बाहर से ही मुसाफिर दरवाजा खड़खड़ाना शुरू कर देते थे कि जल्दी निकलो. इसी हड़बड़ाहट में एक बार फोन कमोड से पटरियों पर जा गिरा, तो 6 हजार रुपए का चूना लग गया.

अब बृजेश सुकून से ये ब्लू कहानियां सुनते हुए वक्त काटते हैं. वे हैड फोन लगा कर यू ट्यूब चालू करते हैं और कहानी शुरू हो जाती है जो भोपाल जा कर ही खत्म होती है.

बकौल बृजेश, ‘‘यह एक अलग किस्म का तजरबा है, जिसे लफ्जों में बयां नहीं किया जा सकता. घर पर उन्होंने बीवी को भी ये कहानियां सुनवाने की कोशिश की, पर वे इन्हें सुन कर भड़क गईं.’’

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हर्ज भी क्या है

क्या ब्लू कहानियां सुनना हर्ज की बात है या इन से कोई नुकसान है? इस सवाल का जवाब ढूंढ़ पाना उतना ही मुश्किल काम है, जितना नीलीपीली किताबों के दौर में उन के नुकसान ढूंढ़ना हुआ करता था.

ब्लू फिल्में धड़ल्ले से हर कोई देखता है. आलम यह है कि कई राज्यों के मंत्रीअफसर तक स्मार्टफोन पर इन्हें देखते पकड़े गए हैं.

जाहिर है, ऐसी कहानियों से लोग टाइमपास करते हैं, सेक्स की अपनी भूख शांत करते हैं और नई उम्र के लड़के इन्हीं के जरीए सेक्स की बातें और गुर सीखते हैं. इन्हें किसी भी दौर में रोका नहीं जा सका है, न ही रोक पाने के लिए कोई कानून सरकार लागू कर पा रही है. सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले में अपनी बेबसी जाहिर कर चुका है.

क्या ऐसी कहानियां गुमराह करती हैं? इस पर बहस की तमाम गुंजाइशें मौजूद हैं, इसलिए सुनने वालों को यह बात समझ लेनी चाहिए कि इन कहानियों का हकीकत से कोई लेनादेना नहीं होता और न ही इन्हें सुन कर सभी औरतों की इमेज वैसी समझनी चाहिए, जैसी कि इन कहानियों में तफसील से बताई जाती है.

जरूरत से ज्यादा और लगातार ऐसी कहानियां सुनना जरूर नुकसानदेह है, इसलिए सेक्स की अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए ऐसी कहानियां पढ़नी चाहिए, जिन में सेक्स साफसुथरे ढंग से पेश किया जाता है और जिन में कोई सबक भी अच्छेबुरे का मिलता हो.

दरअसल, ये कहानियां जोश पैदा करती हैं, जो हर्ज की बात नहीं. भोपाल के सेक्स रोगों के माहिर एक बुजुर्ग डाक्टर का कहना है कि इन्हें सुन कर उन लोगों में भी जोश आता है, जो सेक्स में ढीलापन या कमजोरी महसूस करते हैं. इस की एक अहम वजह यह भी है कि कहानी लड़की सुनाती है, जिस के मुंह से प्राइवेट पार्ट्स के नाम और हमबिस्तरी का खुला ब्योरा सुनना नए दौर का एक अलग तजरबा है.

इन कहानियों के डायलौग भी वैसे ही होते हैं, जैसे आमतौर पर हमबिस्तरी के वक्त की जाने वाली बातचीत होती है. पर सुनने वालों को इन का आदी नहीं होना चाहिए.

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साफ दिख रहा है कि भविष्य में इन कहानियों की मांग और बाजार जोर पकड़ेगा. मुमकिन है कि कहानी गढ़ने वाले कामयाबी मिलती देख कुछ नए प्रयोग इन में करें, जिस से सुनने वालों की दिलचस्पी इन में न केवल बनी रहे, बल्कि बढ़े भी.

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