“दूसरी औरत” और सड़क पर हंगामा

“पति पत्नी और वह” फिल्म तो आपने देखी होगी. बड़े ही शालीनता के साथ पति पत्नी और दूसरी औरत का रिश्ता इस बॉलीवुड की मूवी में दिखाया गया है. मगर ऐसा हमेशा नहीं होता. अक्सर “दूसरी औरत’ के चक्कर में पत्नी चंडी और कभी-कभी रण चंडी भी बन जाती है. और तब ऐसा हंगामा होता है कि देखने वाले देखते रह जाते हैं . ऐसा ही किस्सा विगत दिवस छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर वीआईपी कॉलोनी में घटित हुआ जब.  एक व्यक्ति दूसरी महिला के साथ कार में उसेद दिख गया.महिला ने गुस्से में आकर कार की विंडो स्क्रीन पर हमला किया.महिला बार-बार कार के विंड स्क्रीन पर हमला करने लगी. धर्मपत्नी गुस्से में कार के बोनट पर  चढ़ गई और अपनी चप्पल से कार के शीशे पर वार कर रही थी. जब हंगामा बढ़ने लगा मजबूर  पतिदेव कार से बाहर आया. अब तो धर्म पत्नी ने पतिदेव का कॉलर पकड़ लिया और हाथ पांव चलाने लगी.

काफी देर तक हंगामा चलता रहा और लोगों का हुजूम आ जुटा. ऐसी कुछ घटना है आज हम आपको बताने जा रहे हैं और साथ ही उसके सार स्वरूप यह तथ्य भी की पुरुषों को ऐसी स्थितियों से बचना चाहिए.

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पहला मामला-भिलाई के  दुर्ग जाने वाले मार्ग में जुलाई महीने में ही एक श्रीमतीजी ने अपने पति को दूसरी महिला के साथ बाइक पर देख लिया आपत्तिजनक स्थिति में देखते ही उसका पारा चढ गया और पतिदेव को रोककर उसने साथ बैठी महिला पर हमला कर दिया.और फिर बीच सड़क पर हंगामा हो गया. बीच बचाओ करने पुलिस पहुंची तब मामला शांत हुआ.

दूसरा मामला-औद्योगिक नगर कोरबा में एक बड़े अफसर की भद पिट गई जब उसकी धर्मपत्नी ने उसे रंगे हाथ उसकी सहेली के साथ पकड़ लिया. इसका वीडियो भी बन गया और घटनास्थल पर जो हंगामा हुआ वह चर्चा का सबब बन गया.

तीसरा मामला-छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी बिलासपुर में एक पति देव अपनी सहेली के साथ होटल में धर्मपत्नी को ही पकड़ में आ गया और फिर हुआ जोरदार हंगामा. जिसमें पतिदेव की सहेली की खूब पिटाई हुई और वह देख कर देख कर भाग खड़ी हुई.

ऐसी अनेक घटनाएं अक्सर घटित हो जाती हैं और यह संदेश दे जाती हैं की पति पत्नी और वह के बीच “वह” दोनों के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है.

पति आखिर यह “गलती” क्यों करता है?

पति पत्नी और वह का किस्सा संभवत दुनिया का सबसे पुराना किस्सा है जो चला आ रहा है और चलता रहेगा. जब जब पुरुष फिसलता है तब तब ऐसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं कि परिवार टूट जाते हैं. ऐसे में समझदारी तो यह कहती है कि पुरुष को “एक पत्नी व्रत धारी” होना चाहिए.

अक्सर पुरूष अपने नैसर्गिक, प्राकृतिक स्वभाव के कारण दूसरी महिलाओं को देखकर फिसल जाता है और अगर महिला भी उसी स्वभाव की हुई तो फिर कहानी आगे बढ़ती है. निसंदेह ऐसे मामलों में गलती दोनों पक्षों की होती है.

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जहां पुरुष को अपनी सीमाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए वहीं महिलाओं को भी यह समझकर कदम आगे बढ़ाना चाहिए साथी पुरुष शादीशुदा तो नहीं है उसे धोखा तो नहीं दे रहा है. क्योंकि ऐसे हालात में पुरुष का तो कुछ भी नहीं बिगड़ता मगर महिला की अपनी इज्जत सम्मान के साथ  धोखा होता है तो उन्हें लगता है कि वह लुट गई हैं और कहीं के नहीं रही. दोनों ही स्थितियों में महिला को कथित सहेली को ही दर्द और पीड़ा सहनी पड़ती है.

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता वीके शुक्ला के अनुसार उनके लगभग 40 वर्ष के प्रैक्टिस में अनेक मामले उनके पास ऐसे आए हैं जिसमें परिवार दूसरी महिला के प्रवेश के बाद  टूटन की दहलीज पर पहुंच गए. ऐसी परिस्थितियों में जो कि निस्संदेह विकट होती है परिवार टूटने के कगार पर पहुंच जाता है और यहां एक अधिवक्ता, लायर का कर्तव्य हो जाता है किसी तरह परिवार बचा पाए. मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉक्टर जीआर पंजवानी के अनुसार पति पत्नी और वह के बीच जब मामला भयावह रूप धारण कर लेता है तब विकट स्थिति पैदा हो जाती है. एक सामाजिक डॉक्टर के रूप में मैं तो हमेशा यही सलाह देता हूं कि दोनों ही पक्षों को ऐसी परिस्थितियों में समझदारी का परिचय देना चाहिए. पुरुष को अपनी गलती स्वीकार कर लेनी चाहिए और वह के प्रति तोबा कर लेनी चाहिए. वही धर्मपत्नी का भी कर्तव्य है की पति को एक मौका देते हुए, परिवार को टूटने से बचाना चाहिए.

क्या भोजपुरी इंडस्ट्री में भी होता है नेपोटिज्म? रानी चटर्जी ने किए कई अहम खुलासे

भोजपुरी इंडस्ट्री (Bhojpuri Industry) की जानी मानी एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) एक बार फिर चर्चा में आई हैं. जैसा कि हम सब जानते हैं कि रानी चटर्जी काफी बोल्ड एक्ट्रेसेस (Bold Actresses) में से एक हैं जो कि बिना किसी से डरे अपनी बात सामने रखना जानती हैं. इसी के चलते बीते दिनों भोजपुरी क्वीन रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) ने भोजपुरी इंडस्ट्री से जुड़ी कुछ ऐसी बातों का खुलासा किया है जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएगें.

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रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) ने अपने दिए गए एक इंटरव्यू में कहा है कि भोजपुरी इंडस्ट्री में कुछ ऐसे लोग हैं जो कि टेलेन्ट को ध्यान में ना रखते हुए किसी और ही चीज़ पर ध्यान देते हैं. रानी चटर्जी का कहना है कि, “भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में हर साल कई नई अदाकाराएं लॉन्च होती हैं लेकिन वे सभी लम्बा सफर तय नहीं कर पाती हैं, क्योंकि मेकर्स यहां पर प्रतिभा को तवज्जो नहीं देते हैं. बीते दिनों एक एक्टर ने कहा था कि उसे कोई भी लड़की चलेगी लेकिन अभी जो लड़कियां काम कर रही हैं उसे उनके साथ काम नहीं करना है. भोजपुरी इंडस्ट्री के कई कलाकार ग्रुप बनाकर काम करते हैं, जिसमें एंट्री करना मुश्किल होता है.”

 

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How is my retro tshirt??? 💛🖤💛🖤 #fashion #lovers

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इसी के चलते रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) ने इंडस्ट्री से जुड़े सभी लोगों को आड़े हाथों ले लिया है. जी हां रानी चटर्जी ने इन सभी के साथ साथ फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर्स (Film Distributors) और निर्देशकों (Directors) पर भी आरोप लगाते हुए कहा है कि, “भोजपुरी सिनेमा के निर्देशकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के द्वारा भी ऐसा किया जाता है. मुझे समझ नहीं आता है कि इनकी चाहत क्या है. ये लोग पब्लिक के लिए फिल्में बनाते हैं या फिर अपने लिए.”

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🖤🖤🖤🖤It makes to post #blackcat

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शूटिंग शुरू होने से पहले ही रुक गई जॉन अब्राहम और इमरान हाशमी की ये फिल्म, जानें क्या रही वजह

निर्माता व निर्देशक संजय गुप्ता (Sanjay Gupta) ने ऐलान किया था कि वह 15 जुलाई से हैदराबाद स्थित रामोजी राव स्टूडियो में अपनी फिल्म “मुंबई सागा” (Mumbai Saga) की शूटिंग शुरू कर देंगे. इस शूटिंग में इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) और जॉन अब्राहम (John Abraham) जैसे कलाकारों के साथ 30 क्रू मेंबर्स जाने वाले थे. लेकिन अचानक राष्ट्रीय स्तर पर और आंध्र प्रदेश में कोरोनावायरस (Corona Virus) की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसा नहीं हो पाया.

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सूत्र बताते हैं कि बिगड़ते हालात को देखते हुए स्वयं जॉन अब्राहम ने ऐसा करने से मना कर दिया जो कि इस फिल्म के सह निर्माता भी हैं. इसी बात को कबूल करते हुए संजय गुप्ता ने कहा है कि उन्होंने शूटिंग शुरू करने के लिए सारी तैयारियां कर ली थी. लेकिन अचानक एक दिन में तीस हजार के करीब कोरोना संक्रमित की संख्या जाहिर होते ही हमने पुनः विचार किया और हैदराबाद जाकर शूटिंग करने के इरादे बदल दिए.

अब संजय गुप्ता अपनी फिल्म “मुंबई सागा ” की शूटिंग मुंबई में ही 15 अगस्त से करने की योजना बना रहे हैं. इस संबंध में फिल्म के निर्माता व निर्देशक संजय गुप्ता ने खंडाला में अपने फार्म हाउस से इंटरव्यू देते हुए कहा- “हमारे लिए कलाकारों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है. हम किसी भी इंसान की जिंदगी के साथ रिस्क नहीं ले सकते. इसलिए अब हमने तय किया है कि हैदराबाद की बजाए मुंबई में ही 15 अगस्त से “मुंबई सागा” की शूटिंग शुरू की जाए, जिसमें जॉन अब्राहम और इमरान हाशमी भी हिस्सा लेंगे. लेकिन यह तारीख भी बदल सकती है. हम मुंबई के एस्सेल स्टूडियो, फिल्म सिटी स्टूडियो अथवा महबूब स्टूडियो में शूटिंग की इजाजत के लिए कोशिश करने वाले हैं.

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हमें 14 दिन स्टूडियो के अंदर यानी कि इन डोर शूटिंग करनी है और 10 दिन स्टूडियो के बाहर शूटिंग करनी है. अब हम महाराष्ट्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुरूप फिल्म सिटी स्टूडियो के संचालक के पास  शूटिंग की इजाजत के लिए आवेदन करने वाले हैं. वहां से हमें जैसे ही इजाज़त मिलेगी वैसे ही तारीख तय कर हम शूटिंग शुरू कर देंगे. हमने हमने अपनी तरफ से अपने प्रोडक्शन की सारी तैयारियां और योजना बना रखी है. लेकिन शूटिंग शुरू होने की असली तारीख इजाज़त मिलने के बाद ही तय होगी.”

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Flight for #Chehrein last schedule : Delhi , Poland . I need a gas mask for one and a thick north face jacket for the other .

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फार्म एन फूड में लेखन के लिए मिला कृषि का सबसे बड़ा सम्मान

देश के सब से बड़े प्रकाशन समूह दिल्ली प्रैस की पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ में लेखक कृषि पत्रकार बृहस्पति कुमार पांडेय को भारत सरकार के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा द्वारा प्रिंट मीडिया हिंदी की श्रेणी में दिए जाने वाले कृषि अनुसंधान और विकास में उत्‍कृष्‍ट पत्रकारिता के लिए ‘चौधरी चरण सिंह पुरस्‍कार 2019’ से सम्मानित किया गया है. इस की घोषणा कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व पुरषोत्तम रुपाला और कैलाश चौधरी, कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 92वें स्थापना दिवस और पुरस्कार समारोह के मौके पर वीडियो कौंफ्रैंसिंग के जरीए दी गई, जिस के तहत बृहस्पति कुमार पांडेय को एक लाख रुपए की राशि के और एक प्रशस्तिपत्र प्रदान किया गया.

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बृहस्पति कुमार पांडेय का चयन ‘फार्म एन फूड’ पत्रिका में लिखे गए उन के लेखों व सफलता की कहानियों के आधार पर प्रदान किया गया. इस पुरस्कार के आवेदन के लिए उन के नाम की संस्तुति दिल्ली प्रैस समूह के संपादक परेश नाथ द्वारा की गई थी.

भारत सरकार के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा द्वारा प्रिंट मीडिया हिंदी की श्रेणी में दिए जाने वाले कृषि अनुसंधान और विकास में उत्‍कृष्‍ट पत्रकारिता के लिए ‘चौधरी चरण सिंह पुरस्‍कार 2019’ के लिए प्राप्त आवेदन के क्रम में आवेदनों के मूल्यांकन के आधार पर ‘फार्म एन फूड के पत्रकार बृहस्पति कुमार पांडेय को सर्वश्रेष्ठ पाया जिस के आधार पर उन का चयन इस पुरस्कार के लिए किया गया.

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चयन मंडल ने ‘फार्म एन फूड’ के पत्रकार बृहस्पति कुमार पांडेय द्वारा पिछले 3 वर्षों में लिखे गए कृषि संबंधी लेखों से किसानों के जीवन में आ रहे बदलाव, कृषि में तकनीकी ज्ञान की जानकारी व कृषकों द्वारा अपनाए जा रहे उन्नत खेतीकिसानी के लेखों के आधार पर चयन किया. यह पुरस्कार हिंदी प्रिंट माध्यम में भारत के कृषि पत्रपत्रिकाओं से जुड़े किसी एक पत्रकार को दिया जाता है.

बृहस्पति कुमार पांडेय ने साल 2007 में दिल्ली प्रेस की युवाओं के लिए प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘मुक्ता’ से जुड़ कर ‘दिल्ली विश्वविद्यालय युवा प्रतिनिधि’ के रूप में अपने लेखन की शुरुआत की थी. इस के बाद वे नियमित रूप से दिल्ली प्रैस की पत्रिकाओं में अपना लेखन जारी रखे हुए हैं. उन्होंने पिछले 13 वर्षों में दिल्ली प्रैस में ‘फार्म एन फूड, के अलावा ‘सरस सलिल’, ‘सरिता’, ‘मुक्ता’, ‘गृहशोभा’, ‘सत्यकथा’, ‘मनोहर कहानियां’ के लिए सैकड़ों लेख लिखे हैं.

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वे ‘फार्म एन फूड’ में नियमित तौर पर खेतीकिसानी में उन्नत तकनीकी के जरीए अपनी माली हालत में सुधार लाने वाले किसानों तक पहुंच कर उन की सफलता की कहानियों को लोगों के सामने लाते रहे हैं. ‘फार्म एन फूड’ में लिखे उन के इन लेखों को पढ़ कर अन्य किसानों ने भी बताई गई उन्नत तकनीकी को अपना कर अपनी माली हालत सुधारने में सफलता पाई है. इस के अलावा वे नियमित तौर पर खेती, बागबानी, मत्स्य पालन. डेरी, पशुपालन, मुरगीपालन, फूड प्रोसैसिंग सहित खेती से जुड़े तमाम मुद्दों को बेहद ही सरल भाषा में किसानों के लिए लिखने का काम करते रहे हैं.

बताते चलें कि देश के सब से बड़े प्रकाशन समूह दिल्ली प्रैस ने कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ की शुरुआत साल 2008 में की थी, जिस का उद्देश्य भारतीय किसानों को लेखों के जरीए खेतीकिसानी में बदलाव के अवसर उपलब्ध कराना, उन की माली आमदनी में इजाफा करना व उन्हें कृषि से जुड़े उन्नत ज्ञान की जानकारी देना रहा है. यह पत्रिका अपने उद्देश्यों में पूरी तरह सफल रही है, इसलिए वर्तमान में यह भारतीय किसानों की सब से प्रिय पत्रिका बनी हुई है.

नेपाल-भारत रिश्तों में दरार डालता चीन

नेपाल ने भारत के 3 इलाकों को अपने नक्शे में शामिल कर भारत के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है. नेपाली सरकार ने इस सिलसिले में एक विधेयक संसद में पेश किया था, जिस पर 18 जून, 2020 को नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने दस्तखत कर दिए.

इस बिल को नेपाल के मुख्य विरोधी दल नेपाली कांग्रेस ने भी समर्थन दिया है. नए नक्शे में नेपाल ने भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा इलाके को अपना दिखाया है. इन इलाकों के अलावा भारत के गुंजी, नाभी और कुटी गांव को भी नेपाली नक्शे में दिखाया गया है.

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नेपाल ने भारत के जिन इलाकों को अपने नक्शे में दिखाया है, वह तकरीबन 395 वर्गकिलोमीटर का इलाका है. नेपाली संविधान का यह दूसरा संशोधन है, जिस में राजनीतिक नक्शे और राष्ट्रीय प्रतीक को बदला गया है.

गौरतलब है कि जब भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर जाने वाली लिंक रोड का उद्घाटन किया था, तो नेपाल ने उस का विरोध किया था. उस के बाद ही 18 मई, 2020 को नेपाल ने नए नक्शे में भारत के इस हिस्से को अपने में दिखाने का बखेड़ा खड़ा कर दिया. भारत कालापानी को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा मानता है, जबकि नेपाल उसे अपने धरचुला जिले का हिस्सा बताता है.

भारत का मानना है कि चीन के बहकावे में आ कर नेपाल ने अपने नक्शे में बदलाव किया है. गौरतलब है कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली वामपंथी हैं और भारत विरोधी सियासत और सोच के लिए जाने जाते हैं.

पिथौरागढ़ और नेपाल की सीमा पर तकरीबन 80 किलोमीटर की छोटी सड़क ने ही बड़ा बवाल मचा दिया है. यह सड़क लिपुलेख के कालापानी से होती हुई कैलाश मानसरोवर तक जाती है. इस कच्ची सड़क को भारत ने पक्का कर दिया और राजनाथ सिंह ने उद्घाटन किया तो नेपाल में सियासी हलचल मच गई.

वैसे, इस मसले को ले कर नेपाल में भी प्रदर्शन शुरू हो चुका है. नेपाल के सत्तारूढ़ दल के सहअध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ भारत विरोधी प्रदर्शन को हवा दे रहे हैं. ‘प्रचंड’ ने दहाड़ लगाई कि भारत को सबक सिखाना जरूरी हो गया है. वहीं प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने नेपाल में कोरोना वायरस के फैलाव के लिए भी भारत को जिम्मेदार ठहराया है और चीन को क्लीनचिट दी है.

गौरतलब है कि साल 1981 में भारत और नेपाल के बीच सीमा तय करने के लिए एक जौइंट कमेटी बनाई गई थी. इस कमेटी ने 98 फीसदी सीमा तय कर ली थी, केवल सुस्ता और कालापानी का मसला लटका रह गया था.

जब भारत ने कैलाश मानसरोवर तक सड़क बनाई, तो नेपाल ने भारत से बातचीत कर मामले को सुल झाने के बजाय आननफानन नया नक्शा छाप कर भारत के कई हिस्से को अपना साबित करने की कोशिश की है.

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साल 1962 के भारत और चीन की लड़ाई के समय भी नेपाल ने इस सड़क पर अपना दावा ठोंका था, पर नेपाल को कामयाबी नहीं मिली और उस हिस्से पर भारत का कब्जा अब तक बरकरार रहा है.

साल 2015 में जब भारत और चीन ने लिपुलेख इलाके से व्यापार रास्ते का करार किया, तो उस समय भी नेपाल ने विरोध जताया था.

इसी बीच नेपाल की केपी शर्मा ओली की सरकार को उन की ही पार्टी के नेता ‘प्रचंड’ उखाड़ने में लगे हुए हैं. ‘प्रचंड’ खुद प्रधनमंत्री बनने की ताक में हैं और ओली की जड़ें खोद रहे हैं. इसी वजह से उन्होंने भारत विरोध के अपने पुराने हथकंडे को फिर से सुलगा दिया है और नेपाल की सियासत को कंटीले तारों में उल झा दिया है.

पति की मार को प्यार समझती पत्नियां

एक तरफ औरतों के हालात में सुधार लाने के लिए दुनियाभर में कोशिशें की जा रही हैं, घरेलू हिंसा को पूरी तरह बंद करने के लिए कोशिशें हो रही हैं, इस के बाद भी हमारे देश में आज भी कुछ पत्नियां पति से पिटाई होने को भी प्यार की बात समझती हैं.

समाज पर मर्दवादी सोच की छाप के चलते कुछ औरतें पति से मार को प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं. और तो और वे यह सोचती हैं कि अगर उन के पति उन्हें मारतेपीटते नहीं हैं, तो वे उन से प्यार नहीं करते हैं.

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भले ही शारीरिक हिंसा के दौरान पैर, हाथ समेत शरीर के दूसरे अंगों में फ्रैक्चर हो जाए, लेकिन यह बहुत आम बात है. सब से ज्यादा चिंता की बात यह है कि सरकार इस तरह की हिंसा को बंद करने के लिए कानून भी बना चुकी है और सजा का प्रावधान भी है, लेकिन कुछ औरतों या समाज पर इस का कोई असर नहीं पड़ रहा है.

अभी हाल की ही घटना है. कुछ दिनों के लिए मेरा बिहार में रहना हुआ था. वहां अकसर पड़ोस से शाम के समय एक पड़ोसन के चीखनेचिल्लाने की आवाजें आती थीं. एक बार दिन के समय मेरा अपनी उस पड़ोसन से आमनासामना हो गया और धीरेधीरे बोलचाल भी शुरू हो गई. जल्द ही वह पड़ोसन काफी घुलमिल गई. लेकिन मु झे यह जान कर हैरानी हुई कि आज के समय में भी पढ़ेलिखे लोगों में भी यह सोच हो सकती है.

उस पड़ोसन के मुताबिक, अपने पति से रोज की मारपीट की अब उस को आदत हो गई है. ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब पड़ोसन के पति ने उस की धुनाई न की हो.

उस ने अपनी बात को सही साबित करने के लिए यह भी बोला, ‘‘मेरे साथ की कुछ जानकार औरतों को तो लातघूंसों और गालियों का प्रसाद मिलता ही रहता है. 7 साल पहले सिर पर भारी कर्ज उठा कर पिता ने मेरी शादी की थी. 5 तरह की मिठाइयां अलग से बनवाई थीं और अपनी बिरादरी के लिए भोज रखा था. दानदहेज भी खूब दिया था.’’

पिछले 7 सालों में पति ने सिर्फ लिया हो, ऐसा नहीं था. उस ने रचना के शरीर पर ढेरों निशान और 2 बेटियों का तोहफा दे दिया था.

मैं ने पूछा ‘‘क्यों बरदाश्त करती हो इतना?’’

उस पड़ोसन ने बड़ा अजीब सा जवाब दिया, ‘‘हमारी मां, दादी, बूआ, मौसी ने हम लड़कियों को बताया था कि उन के पति उन को कैसे पीटते थे. वे उन का प्यार मान कर गृहस्थी चलाती रहीं. पति खुश रहता है तो घर में बिखराव नहीं होता. वही हम कर रहे हैं. ऐसे घर टूट कर नहीं बिखरते.’’

मैं ने कहा, ‘‘यह तो पागलपन है.’’

पड़ोसन ने अपनी मजबूरी जताते हुए कहा, ‘‘मैं अगर पिटाई की खिलाफत करूंगी, तो मेरा पति मु झे छोड़ देगा.’’

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फख्र समझती हैं

इस सिलसिले में जब एक गैरसरकारी संस्था से बात की गई तो पता चला कि पत्नियों की पिटाई कुछ तबकों में इस कदर स्वीकार की जा चुकी है कि इसे दूर करना बेहद मुश्किल हो जाता है. कोईकोई पति तो जितनी बेरहमी से पिटाई करता है, उस की पत्नी सम झती है कि वह उस से उतना ही ज्यादा प्यार करता है. उन को अपने पति से पिटने में कोई शर्म नहीं आती, बस उन की कोशिश रहती है कि घर की बात घर में रहे.

ये औरतें जब आपस में मिलती हैं, तो इस तरह से दिखाती हैं जैसे उन का पति उन्हें कितना प्यार करता है. उन के पति से ज्यादा बढि़या पति शायद किसी दूसरी औरत का हो, जबकि हकीकत में हर औरत एकदूसरे की कहानी जानती है.

तलाक का खौफ

जानकारों का कहना है कि ऐसी औरतें तलाक से बचने के लिए पति के जोरजुल्म को खुशी से सहती हैं. एक

35 साला औरत ने बताया कि उस का पति घर की छोटी से छोटी बातों में दखल देता है और खिलाफत करने पर उसे बेरहमी से पीटता है. कभीकभार

तो इतनी बुरी तरह से मारता है कि पूरा शरीर दर्द से कराह उठता है. लेकिन उसे बिलकुल बुरा नहीं लगता.

‘‘जहां प्यार होगा, वहीं तो तकरार होगी,’’ वह औरत हंसते हुए बोलती है. वह अपने पति से बेहद खुश है.

डर है बेबुनियाद

सीमा नाम की एक औरत का तलाक हो चुका है. हालांकि यह सबकुछ इतना आसान भी नहीं था. उस ने बताया, ‘‘मु झे कुछ दिनों तक क्या महीनों तक यही लगा जैसे सबकुछ खत्म हो चुका है. अब मेरी जिंदगी आगे बढ़ ही नहीं सकती. वह खत्म हो गई है, लेकिन आज मेरा खयाल बदल चुका है.

‘‘आज मैं यह कह सकती हूं कि वक्त चाहे अच्छा हो या फिर बुरा, कुछ न कुछ सिखाता ही है. तलाक ने भी बहुतकुछ सिखाया है.

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‘‘तलाक के बाद सब से बड़ी सीख यह मिली है कि किसी एक इनसान के नहीं होने से दुनिया खत्म नहीं हो सकती.’’

नाग से जहरीला आदमी

नाग से जहरीला आदमी : भाग 3

अभी तक अमितेश पूरी तरह मोना का नहीं हुआ था. वह भले ही उस के साथ लिवइन में रहती थी, लेकिन उस पर पूरा हक शादी के बाद ही हो सकता था. क्योंकि कुछ भी हो, कोई कितना भी प्यार करता हो, पहला और ज्यादा हक तो उस की ब्याहता पत्नी का ही बनता है. लिवइन में रहने वाली महिला पत्नी के सामने रखैल से ज्यादा कुछ नहीं होती.

अमितेश की एक शादी हो चुकी थी. उस पत्नी से उसे 2 बच्चे भी थे, इसलिए दूसरी शादी के लिए उसे पहली पत्नी से तलाक लेना जरूरी था. मोना के लिए वह शिवानी से तलाक लेने को भी तैयार था, पर उसे तलाक की कोई वजह नजर नहीं आ रही थी. क्योंकि शिवानी सीधीसादी गृहस्थ महिला थी. अभी ससुराल वाले भी उसी के पक्ष में थे. इस के लिए अमितेश को पिता और बहन को भी अपने पक्ष में करना था.

घर वाले उस के पक्ष में तभी आते, जब शिवानी से उन्हें परेशानी होती. इस के लिए उस ने चाल चलनी शुरू कर दी. वह जम कर शिवानी की उपेक्षा करने लगा, जिस से शिवानी तिलमिला उठी और यह सोचने पर मजबूर हो गई कि अमितेश उस के साथ ऐसा क्यों कर रहा है.

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जल्दी ही उसे अपनी उपेक्षा की वजह पता चल गई. पता चला कि उस के पति को बीवी जैसा सुख देने वाली कोई और मिल गई है, इसीलिए वह उस की उपेक्षा कर रहा है.

विवाद बढ़ा तो पिता और बहन ने अमितेश का ही लिया पक्ष

मोना से अमितेश के संबंध होने की बात पता चलते ही पतिपत्नी में विवाद होने लगा. विवाद बढ़ा तो इस का असर घरपरिवार पर भी पड़ने लगा, जिस से घर में परेशानी होने लगी. पिता और बहन को जितना लगाव अमितेश से था, उतना शिवानी से नहीं था. होता भी कहां से अमितेश उन का अपना खून था, शिवानी गैर घर से आई थी.

घर वालों को शिवानी का अमितेश से लड़ना अच्छा नहीं लगता था. उन्हें लगता था कि शिवानी उसे परेशान करती है इसलिए वे शिवानी का पक्ष लेने के बजाए अमितेश का ही पक्ष लेते थे.

इस से शिवानी घर में अकेली पड़ गई. उस के ससुर और ननद दोष उसे ही देते थे. उन का कहना था कि उसी की वजह से अमितेश ने इंदौर आना छोड़ दिया. वह अपनी बात कहती तो उसकी बात पर कोई विश्वास नहीं करता था.

पिता और बहन अमितेश के पक्ष में आ गए तो उस ने शिवानी को तलाक देने की तैयारी कर ली. क्योंकि मोना तलाक के लिए उस पर लगातार दबाव डाल रही थी. शिवानी अमितेश से लड़ाईझगड़ा करती थी, उस ने इसे ही आधार बना कर तलाक की अर्जी तो लगा दी पर बाद में उसे लगा पतिपत्नी में लड़ाईझगड़े का आधार तलाक के लिए पर्याप्त नहीं है, इसलिए उस ने तलाक की अर्जी वापस ले कर शिवानी से समझौता कर लिया.

उस ने तलाक की अर्जी भले ही वापस ले ली थी, पर वह शिवानी से किसी भी तरह छुटकारा पाना चाहता था. क्योंकि अब वह मोना के बगैर नहीं रह सकता था. जब उस ने विचार करना शुरू किया कि किस तरह शिवानी से पूरी तरह मुक्ति मिल सकती है तो उस के दिमाग में एक ही बात आई, उस की हत्या. लेकिन यह काम आसान नहीं था. अगर वह हत्या के आरोप में पकड़ा जाता तो पूरी जिंदगी जेल में बीतती, मोना भी उसे नहीं मिल पाती.

लेकिन हत्या के अलावा अमितेश को दूसरा कोई उपाय नजर नहीं आ रहा था. वह इस बात पर विचार करने लगा कि शिवानी की हत्या किस तरह करे कि वह मर जाए और उस पर शक न जाए. काफी सोचविचार के बाद भी जब उस की समझ में कुछ नहीं आया तो उस ने टीवी पर आने वाले अपराध आधारित शो देखने शुरू किए. इन्हीं में से किसी धारावाहिक के एपिसोड में उस ने देखा कि एक आदमी ने जहरीले सांप से कटवा कर पत्नी की हत्या कर दी.

अमितेश को यह उपाय अच्छा लगा. उस ने इसी तरह की योजना बनानी शुरू कर दी. वह पता लगाने लगा कि भारत में सब से जहरीला सांप कौन सा होता है. उसे पता चला कि भारत में सब से अधिक जहरीला सांप डेजर्ट कोबरा है. पर वह मध्य प्रदेश में नहीं पाया जाता.

आजकल गूगल पर किसी भी बात के बारे में जाना जा सकता है. उस ने गूगल पर सर्च किया तो पता चला यह सांप राजस्थान में पाया जाता है.

सारी जानकारी जुटा कर अमितेश नवंबर 2019 में नौकरी से इस्तीफा दे कर इंदौर स्थित अपने घर आ गया. घर आ कर उस ने शिवानी से कहा, ‘‘लो अब मैं हमेशाहमेशा के लिए तुम्हारे पास आ गया. अब तो तुम्हें विश्वास हो जाना चाहिए कि मैं केवल तुम्हारा हूं.’’

‘‘कहीं इस में भी तुम्हारी कोई चाल न हो?’’ शिवानी ने कहा.

‘‘तुम्हें तो अब मेरी हर बात में चाल ही नजर आती है. अरे मैं तुम्हारे पास रह कर कौन सी चाल चलूंगा.’’ शिवानी को विश्वास दिलाने की गरज से अमितेश ने कहा, ‘‘तुम मेरी पत्नी ही नहीं, मेरे बच्चों की मां भी हो. मैं तुम्हें छोड़ कर भला कहां जा सकता हूं.’’

शिवानी को पति की बातों पर विश्वास करना ही पड़ा. उस के पास इस के अलावा कोई और विकल्प भी नहीं था क्योंकि उसे रहना तो वहीं था.

इस की सब से बड़ी वजह यह है कि हमारे यहां यह मान लिया जाता है कि शादी के बाद बेटी का घर ससुराल ही होता है. भले ही ससुराल में उसे कितनी भी तकलीफ झेलनी पड़े, शादी के बाद बेटी मांबाप के लिए बोझ बन जाती है. ऐसा ही शिवानी के साथ भी था. फिर अब वह अकेली भी नहीं थी. उस के 2 बच्चे भी थे. उन्हें साथ ले कर वह मायके नहीं जा सकती थी.

योजना पर अमल के लिए

इंदौर पहुंच कर अमितेश ने शिवानी से छुटकारा पाने वाली बात पिता ओमप्रकाश पटेरिया को बता कर उन से मदद मांगी. अमितेश उन का एकलौता बेटा था, बुढ़ापे की लाठी. वह भला उस का साथ क्यों न देते. क्योंकि उस ने उन से साफ कह दिया था कि मोना के बगैर वह नहीं रह सकता. अगर वह उस का साथ नहीं देते तो वह या तो हमेशाहमेशा के लिए घर छोड़ देता या मौत को गले लगा लेता.

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ऐसा ही कुछ कह कर उस ने बहन को भी शिवानी की हत्या में साथ देने के लिए राजी कर लिया. जब पिता और बहन राजी हो गए तो अमितेश 19 नवंबर को राजस्थान के जिला अलवर गया और वहां रहने वाले किसी संपेरे से 5 हजार रुपए में डेजर्ट कोबरा खरीद लाया. सांप को उस ने एक बरनी में बंद कर के अलमारी में छिपा दिया और मौके का इंतजार करने लगा.

वह हर रात शिवानी के सो जाने पर उसे जहरीले सांप से कटवाने की कोशिश करता पर सांप को हाथ से पकड़ कर शिवानी को कटवाने की वह हिम्मत नहीं कर पाता.

इस तरह एकएक कर के 11 रातें गुजर गईं. सांप से कटवाने में उसे एक बात का डर और सता रहा था कि कहीं शिवानी जाग गई और उस के हाथ में सांप देख लिया तो शोर मचा देगी. उस के बाद वह पकड़ा जाएगा और हत्या की कोशिश में उसे सजा हो जाएगी.

जब अमितेश ने देखा कि वह जीते जी शिवानी को सांप से नहीं कटवा पा रहा है तो उस ने पिता और बहन की मदद ली. जब वे दोनों मदद के लिए राजी हो गए तो पहली दिसंबर की सुबह पिता और बहन की मदद से अमितेश ने सो रही शिवानी के मुंह को तकिए से दबा कर मार डाला.

शिवानी की हत्या के बाद उस के पिता और बहन बच्चों को ले कर साऊ चले गए तो अमितेश अपनी अगली योजना पर काम करने लगा. अब वह मृत शिवानी को सांप से कटवाना चाहता था. इस कोशिश में उसे काफी समय लग गया, क्योंकि वह खुद भी डर रहा था कि कहीं सांप उसे ही न काट ले. आखिरकार दोपहर बाद वह चिमटे से सांप को पकड़ कर शिवानी को कटवाने में सफल हो गया.

शिवानी तो पहले ही मर चुकी थी लेकिन अमितेश को तो यह दिखाना था कि शिवानी सांप के काटने से मरी है, इसलिए उस ने क्रिकेट खेलने वाले बैट से सांप को मार कर शिवानी के पास बैड पर रख दिया. इस के बाद सारी तैयारी कर के उस ने किराएदार निखिल को आवाज लगाई कि शिवानी को सांप ने काट लिया है. वह निखिल को गवाह बनाना चाहता था कि उस ने शिवानी के पास उस सांप को देखा है, जिस के काटने से उस की मौत हुई है.

निखिल गवाह तो बना पर अमितेश को बचाने का नहीं बल्कि फंसाने का. उसी ने पुलिस को बताया था कि पतिपत्नी में नहीं पटती थी. उस की इस बात से अमितेश शक के घेरे में आ गया था.

सभी से विस्तारपूर्वक की गई पूछताछ के बाद पुलिस ने अमितेश, उस के पिता ओमप्रकाश पटेरिया, बहन रिचा चतुर्वेदी के खिलाफ शिवानी की हत्या का मुकदमा दर्ज कर के उन्हें बाकायदा गिरफ्तार कर लिया.

इस के अलावा अमितेश ने यह भी स्वीकार किया कि उस ने डेजर्ट कोबरा की हत्या क्रिकेट बैट से की थी, इसलिए पुलिस ने उस के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 51 के तहत भी केस दर्ज किया.

इस धारा में कम से कम 3 साल और ज्यादा से ज्यादा 7 साल की सजा का प्रावधान है. इस के अलावा 10 हजार रुपए का जुरमाना भी देना होता है.

सारी काररवाई पूरी कर पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया.

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जिस मोना के लिए आज अमितेश जेल में है, क्या वह उस का इंतजार करेगी? कतई नहीं, मोना अपनी जवानी उस के इंतजार में क्यों गंवाएगी. अब वह अमितेश जैसा ही कोई और ढूंढ लेगी.

नाग से जहरीला आदमी : भाग 2

समय के साथ अमितेश एक बेटी और एक बेटे का पिता बना. बेटी वैदिका इस समय 8 साल की है तो बेटा वैदिक 4 साल का. सब मिलजुल कर रह रहे थे, इसलिए घर में खुशी ही खुशी थी. घर में परेशानी तब शुरू हुई, जब करीब 5 साल पहले अमितेश का तबादला इंदौर से नोएडा हो गया.

पिता सेवानिवृत्त हो चुके थे, इसलिए वह घर पर ही रहते थे. पत्नी और बच्चों को पिता के भरोसे इंदौर में छोड़ कर अमितेश नोएडा आ गया था. उस ने पत्नी से वादा किया था कि बच्चों की परीक्षा हो जाने के बाद वह उन्हें साथ ले जाएगा. लेकिन अमितेश अपने इस वादे पर कायम नहीं रहा.

बच्चों की परीक्षा खत्म हो गई तो शिवानी ने पति के साथ चलने की जिद की. तब उस ने पिता के अकेले होने की बात कह कर उसे इंदौर में ही रहने को कहा. उस का कहना था कि उस के नोएडा जाने पर पिता परेशान तो होंगे ही, उन की देखभाल भी नहीं हो पाएगी.

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शिवानी जबरदस्ती नहीं कर सकती थी, क्योंकि अमितेश ने बहाना ही ऐसा बनाया था. मजबूर हो कर शिवानी को ससुर के पास इंदौर में ही रुकना पड़ा. जबकि सही बात यह थी कि अमितेश ने पिता की देखभाल का सिर्फ बहाना बनाया था. क्योंकि उस का नोएडा की एक युवती मोना सिंह से प्रेम संबंध बन गया था. इसी वजह से वह शिवानी को नोएडा नहीं लाना चाहता था.

मोना से उस की मुलाकात बैंक में ही हुई थी. वह किसी काम से बैंक आई थी. उस का वह काम बिना मैनेजर के नहीं हो सकता था. मोना अमितेश से मिली तो उस ने उस की जिस तरह मदद की, उस से वह काफी प्रभावित हुई. फिर तो वह जब भी बैंक आती, अमितेश से जरूर मिलती. धीरेधीरे ये मुलाकातें दोस्ती में बदल गईं तो दोनों ने एकदूसरे के फोन नंबर ले लिए.

मोना आधुनिक विचारों वाली स्वच्छंद युवती थी. किसी भी मर्द से बातें करने में उसे जरा भी परहेज नहीं था. यही वजह थी कि वह अमितेश से फोन पर बातें करने लगी. धीरेधीरे बातों का यह सिलसिला बढ़ता गया और समय भी. इसी के साथ बातें करने का विषय भी बदलता गया. दुनियादारी की बातों के साथ प्रेम की बातें भी होने लगीं.

गर्लफ्रैंड लगी पत्नी से प्यारी

अमितेश शादीशुदा था. साथ ही 2 बच्चों का बाप भी. उस की उम्र बताती थी कि वह शादीशुदा होगा, मोना को यह बात पता भी थी. फिर भी अमितेश से दोस्ती और प्यार में उसे कोई आपत्ति नहीं थी. शायद वह मौके का फायदा उठाने वाली युवती थी. अमितेश घर और पत्नी से दूर नोएडा में अकेला रह रहा था. उसे प्यार और पत्नी के साथ की जरूरत भी महसूस होती थी.

पर पत्नी बच्चों की परीक्षा की वजह से साथ नहीं आ पाई थी. इसी का फायदा मोना सिंह ने उठाया. पत्नी साथ होती तो शायद अमितेश का झुकाव मोना सिंह की ओर नहीं होता. पत्नी के प्यार को तरस रहे अमितेश ने अपनी यह जरूरत मोना सिंह से पूरी करने की कोशिश की. वह बैंक के बाहर भी उस से मिलने लगा.

मोना मर्दों की कमजोरी का फायदा उठाने वाली युवती थी. तभी तो उस ने अमितेश जैसे कमाऊ आदमी को अपने प्रेमजाल में फांसा था. मोना अमितेश को अकसर अट्टा बाजार में मिलने के लिए बुलाती. नोएडा में अट्टा बाजार ही एक ऐसी जगह है, जहां आदमी की हर जरूरत का सामान मिल जाता है. प्रेमियों के मिलने का उचित स्थान भी वही है. क्योंकि वहां इतनी भीड़ होती है कि कोई एकदूसरे को नहीं देखता.

बैठने की जगहें भी हैं तो घूमने और खरीदारी के लिए दुकानें और मौल भी हैं. आधुनिक फैशन की हर चीज वहां मिलती है तो खाने के अच्छे रेस्टोरेंट भी हैं. अब तक मोना और अमितेश की बातें ही नहीं मुलाकातें भी लंबी हो गई थीं. दोनों लगभग रोज ही अट्टा बाजार में मिलने लगे थे. इस से मन नहीं भरता तो छुट्टी के दिन भी पूरा पूरा दिन साथ बिताते.

एक कहावत है, आदमी को अगर बैठने की जगह मिल जाए तो वह लेटने की सोचने लगता है. ऐसा ही कुछ अमितेश के साथ भी हुआ. मोना से दोस्ती के बाद प्यार हुआ, फिर दोनों साथसाथ घूमने लगे. शादीशुदा अमितेश का मन मोना से एकांत में मिलने का होने लगा. वह उस पर पैसे भी जम कर खर्च कर रहा था. ऐसे में भला फायदा क्यों न उठाता. लेकिन इस के लिए मोना को अपने फ्लैट पर लाना जरूरी था, क्योंकि उस से बढि़या एकांत जगह कहां हो सकती थी.

मोना भी बेवकूफ नहीं थी. वह अच्छी तरह जानती थी कि अमितेश उस पर पैसा क्यों लुटा रहा है. वह तो उस की हर इच्छा पूरी कर उसे पूरी तरह अपना बनाना चाहती थी, क्योंकि अब तक उसे अमितेश के बारे में सब कुछ पता चल चुका था. उस की हैसियत का भी उसे पता था. वह बैंक में मैनेजर था, अगर ऐसा आदमी इस तरह मिल जाए तो भला कौन नहीं पाना चाहेगा. मोना उसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार थी.

वैसा ही हाल अमितेश का भी था. वह भी मोना को पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था. क्योंकि उस के आगे अब पत्नी बेकार लगने लगी थी. वैसे भी उसे पत्नी से एकांत में मिलने वाला प्यार नहीं मिल रहा था. उस के लिए वह तड़प रहा था. इंदौर इतना नजदीक भी नहीं था कि उस का जब मन होता, पत्नी से मिलने चला जाता. इसलिए मोना से नजदीकी बनने के बाद वह उस से उस प्यार की अपेक्षा करने लगा, क्योंकि वह प्यार उस की जरूरत भी बन चुका था.

मोना का हाथ हाथ में ले कर अमितेश घूमता ही था. ऐसे में ही एक दिन उस ने कहा, ‘‘मोना, तुम मेरे फ्लैट पर मिलने क्यों नहीं आती?’’

‘‘मैं तो तैयार हूं, तुम्हीं नहीं बुलाते.’’ मोना ने कहा.

‘‘मेरे कमरे पर आने की तुम्हारी हिम्मत है?’’ अमितेश ने पूछा.

‘‘मेरी तो आने की हिम्मत है, तुम अपनी हिम्मत की बात करो.’’

‘‘मैं तो तुम्हारे बारे में सोच रहा था कि कहीं तुम मना न कर दो.’’ अमितेश ने कहा.

‘‘मैं जब तुम्हारे साथ घूम सकती हूं, तुम जहां बुलाते हो, वहां आ सकती हूं तो भला मैं तुम्हारे फ्लैट पर क्यों नहीं आ सकती. तुम बुलाने की हिम्मत तो करो.’’ मोना ने अमितेश की आंखों में आंखें डाल कर कहा.

‘‘फ्लैट पर आने का मतलब समझती हो?’’ अमितेश ने कहा.

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‘‘खूब अच्छी तरह समझती हूं, इसीलिए तो हिम्मत की बात कही है. कमरे पर आने का मतलब है, तुम्हारी इच्छा पूरी करना. मैं उस के लिए भी तैयार हूं. अब तुम सोचो कि तुम उस के लिए तैयार हो कि नहीं?’’

‘‘मैं तैयार हूं, तभी तो तुम से फ्लैट पर चलने को कह रहा हूं.’’

‘‘तैयार तो मैं भी हूं पर अगर तुम पत्नी वाला प्यार चाहते हो तो मुझे तुम्हें पत्नी का दर्जा भी देना होगा.’’ मोना ने मन की बात स्पष्ट बता दी.

पत्नी की जगह लेने को तैयार हुई गर्लफ्रैंड

मोना की इस बात पर अमितेश सोच में पड़ गया. उसे सोच में डूबा देख कर मोना ने कहा, ‘‘किस सोच में डूब गए. पत्नी वाला प्यार चाहिए तो दर्जा तो पत्नी वाला ही देना होगा. जिम्मेदारियां तो उठानी ही पड़ेंगी न?’’

अमितेश को मोना बहुत अच्छी लगती थी. उस ने पत्नी और मोना में जोड़ लगाना शुरू किया. उस की पत्नी शिवानी घरेलू, पुराने विचारों वाली, घरपरिवार में ही सुख तलाशने वाली महिला थी. उस ने ससुराल में साड़ी के अलावा कभी कुछ नहीं पहना था. उस की शक्लसूरत भी साधारण थी. उस में नाजनखरे नहीं थे, अपने बच्चों में ही उलझी रहती थी. उस के लिए बच्चे पहले थे, पति बाद में.

अमितेश को इस सब की आदत भी पड़ चुकी थी, लेकिन मोना से मिलने के बाद शिवानी उसे बेकार लगने लगी थी. उसे अब मोना ही मोना दिखाई देती थी. मोना जींसटौप तो पहनती ही थी, अमितेश उसे जो भी कपड़े खरीद कर देता, वह उन सभी को पहनती थी. बाजार में खुलेआम उस का हाथ पकड़ कर चलती थी. नाजनखरे करने भी खूब आते थे. भला इस उम्र में इस तरह की प्रेम करने वाली मिले तो कौन नहीं, उस की हर शर्त मान लेगा.

अमितेश ने भी मोना की हर शर्त मान ली. फिर तो मोना अमितेश के फ्लैट पर आने की कौन कहे, अपना सामान ले कर हमेशाहमेशा के लिए आ गई. वह बिना शादी के ही अमितेश के साथ रहने लगी. इस तरह किसी मर्द के साथ रहने को आजकल लिवइन कहा जाता है. महानगरों में इस तरह रहना नई पीढ़ी के लिए एक तरह का फैशन बन गया है.

अमितेश मोना के प्रेमजाल में पूरी तरह फंस चुका था, उस के आगे शिवानी बेकार लगने लगी थी. उस की हर जरूरत मोना से पूरी होने लगी तो वह शिवानी को भूलने लगा. उस की उपेक्षा करने लगा.

शुरूशुरू में घरपरिवार में व्यस्त रहने वाली शिवानी ने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया, पर बात जब कुछ ज्यादा ही बढ़ गई तो उस ने अमितेश को उलाहना देना शुरू किया. ऐसे में अमितेश काम का बहाना बना कर खुद को बचाने की कोशिश करता.

लेकिन कोई भी गलत काम कितने दिन छिपा रह सकता है. उस ने शिवानी को बच्चों की परीक्षा के बाद नोएडा लाने को कहा था. बच्चों की परीक्षा हो गई तो शिवानी बच्चों को ले कर नोएडा आने की तैयारी करने लगी. क्योंकि नोएडा में बच्चों के दाखिले भी कराने थे. लेकिन उन्हें नोएडा लाने के बजाय अमितेश बहाने बनाने लगा. क्योंकि अब तक वह पूरी तरह मोना का हो चुका था. जैसेजैसे दिन बीत रहे थे, वह मोना के नजदीक आता जा रहा था और शिवानी से दूर होता जा रहा था.

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जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

नाग से जहरीला आदमी : भाग 1

1 दिसंबर, 2019 की शाम की बात है. इंदौर के मोहल्ला संचार नगर एक्सटेंशन का रहने वाला अमितेश एकदम से चिल्लाया, ‘‘निखिल, ओ निखिल, शिवानी को सांप ने काट लिया है. जल्दी आओ, वह बेहोश हो गई है. मेरी मदद करो, इसे अस्पताल ले जाना है.’’

शिवानी अमितेश की पत्नी थी. निखिल कुमार खत्री उस का किराए था. जिस समय अमितेश ने उसे आवाज लगाई, वह रात का खाना बना रहा था. उस ने झट से गैस बंद की और सब कुछ जस का तस छोड़ कर अमितेश के बैडरूम में जा पहुंचा. क्योंकि शिवानी उस समय बैडरूम में ही थी. उस ने देखा शिवानी बैड पर पड़ी थी. उसी के पास बैड पर एक काला कोबरा सांप मरा पड़ा था.

अमितेश काफी घबराया हुआ था. शिवानी के पास पड़े सांप को देख कर निखिल को समझते देर नहीं लगी कि इसी सांप ने शिवानी को काटा है. उस के आते ही अमितेश ने कहा, ‘‘निखिल, जल्दी करो, इसे अस्पताल ले चलते हैं. जल्दी इलाज मिलने से शायद बच जाए. देर होने पर सांप का जहर पूरे शरीर में फैल सकता है.’’

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दोनों शिवानी को उठा कर बाहर ले आए. बाहर अमितेश की कार खड़ी थी. उसे कार में लिटा कर अमितेश अंदर जाने लगा तो निखिल ने सोचा, चाबी लेने जा रहा होगा. पर जब वह लौटा तो उस के हाथ में एक बरनी थी, जिस में वही मरा हुआ सांप था, जिस ने शिवानी को काटा था. उसे देख कर निखिल ने पूछा, ‘‘इसे कहां ले जा रहे हो?’’

‘‘डाक्टर को दिखा कर बताएंगे कि इसी सांप ने काटा है.’’ अमितेश ने कहा और बरनी को पीछे की सीट पर शिवानी के पास रख कर खुद ड्राइविंग सीट पर बैठ गया. बगल वाली सीट पर निखिल के बैठते ही कार आगे बढ़ गई. शिवानी को वह इंदौर के जानेमाने अस्पताल एमवाईएच अस्पताल ले गया.

अमितेश ने डाक्टरों को बताया कि इसे सांप ने काटा है. शिवानी को देखते ही डाक्टर समझ गए कि उस की मौत हो चुकी है. अमितेश के अनुसार शिवानी की मौत सांप के काटने से हुई थी. लेकिन जब डाक्टरों ने शिवानी को ध्यान से देखा तो उन्हें मामला गड़बड़ लगा. शिवानी के हाथ पर 3 काले गहरे नीले निशान थे, जो सांप के काटने के हो सकते थे, पर साथ ही उस के शरीर पर चोट के भी निशान थे.

अमितेश कह रहा था कि शिवानी की मौत सांप के काटने से हुई है. सांप के काटने के निशान भी उस के बाएं हाथ पर थे. यही नहीं, उस ने डाक्टरों को वह सांप भी दिखाया, जिस ने शिवानी को काटा था. डाक्टरों ने देखा कि जहां सांप ने काटा था, वहां तो नीले निशान थे, पर बाकी शरीर सफेद पड़ गया था, जबकि सांप के काटने से मरने वाले का शरीर नीला पड़ जाता है.

किसी को विश्वास नहीं हुआ अमितेश की बात पर

डाक्टरों का संदेह जब विश्वास में बदल गया कि कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है तो उन्होंने हत्या का शक होने की सूचना अस्पताल प्रशासन को दे दी. अमितेश थाना कनाडिया क्षेत्र में रहता था, इसलिए अस्पताल प्रशासन ने इस की जानकारी थाना कनाडिया पुलिस को दे दी.

सूचना मिलते ही थाना कनाडिया के थानाप्रभारी अनिल सिंह, एसआई अविनाश नागर, 2 सिपाही महेश और मीना सुरवीर को साथ ले कर एमवाईएच अस्पताल पहुंच गए. पुलिस को देख कर अमितेश घबराया जरूर, पर वह अपनी बात पर अड़ा रहा कि शिवानी की मौत सांप के काटने से ही हुई है.

अमितेश भले ही अपनी बात पर अड़ा था, पर पुलिस ने शिवानी के शव का निरीक्षण किया तो उसे पूरा विश्वास हो गया कि अमितेश झूठ बोल रहा है.

इस की वजहें भी थीं. सांप के काटने से मरने वाले का शरीर नीला पड़ जाता है, जबकि शिवानी का शरीर सफेद था. इस के अलावा उस की बाईं आंख के नीचे चोट का निशान भी था. दोनों पैरों के पंजे नीचे की ओर खिंचे हुए थे. हाथों की मुट्ठियां बंद थीं और नाक के बाहरी किनारों की चमड़ी छिली थी, जैसे किसी चीज से रगड़ी गई हो.

अमितेश जिस डेजर्ट कोबरा सांप को बरनी में भर कर लाया था, वह कोबरा मध्य प्रदेश में नहीं पाया जाता था. इस के अलावा जिस तरह सांप का सिर कुचला हुआ था, उस तरह सांप का सिर कुचलना आसान नहीं है. क्योंकि कोबरा बहुत फुर्तीला होता है. पुलिस को लग रहा था कि सांप को पकड़ कर मारा गया है.

इस सब के अलावा अहम बात यह भी थी कि घटना बरसात के मौसम की होती तो एक बार मान भी लिया जाता कि सांप कहीं से आ गया होगा. पर ठंड के मौसम में शहर के बीचोबीच इस तरह बैडरूम में जा कर सांप के काटने की बात किसी के गले नहीं उतर रही थी.

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रख कर अनिल सिंह ने शिवानी की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस के बाद घटनास्थल के निरीक्षण के लिए अमितेश और निखिल को साथ ले कर संचार नगर एक्सटेंशन स्थित अमितेश के घर आ गए. पुलिस ने बैडरूम का निरीक्षण किया.

बैड पर बिछी चादर इस तरह अस्तव्यस्त थी, जैसे उस पर लेटने वाला खूब छटपटाया हो. बैड पर 2 तकिए थे. उन में से एक तकिए के कवर पर लार का निशान था. पुलिस ने तकियों के कवर और बैडशीट को फोरैंसिक जांच के लिए भिजवा दिया.

अनिल सिंह ने अब तक की जांच में जो पाया था और जो काररवाई की थी, उसे अपने अधिकारियों को बता दिया. निखिल और अमितेश से पूछताछ शुरू करने से पहले उन्होंने शिवानी की मौत की सूचना उस के मायके वालों को देना जरूरी समझा. अमितेश से फोन नंबर ले कर उन्होंने शिवानी की मौत की बात उस के पिता को बताई, तो उन्होंने सीधा आरोप लगाया, ‘शिवानी की मौत सांप के काटने से नहीं हुई, उस की हत्या की गई है.’

अनिल सिंह ने उन से इंदौर आने को कहा और निखिल कुमार खत्री से पूछताछ शुरू की. पूछताछ में निखिल ने जो देखा था, सचसच बता दिया. अमितेश से घर वालों के बारे में पूछा गया तो उस ने बताया कि उस के पिता ओमप्रकाश पटेरिया, दोनों बच्चों बेटी वैदिका और बेटे वैदिक को ले कर राऊ में रहने वाली उस की बहन रिचा चतुर्वेदी के यहां गए हैं. पुलिस ने फोन कर के उन्हें भी शिवानी की मौत की सूचना दे कर इंदौर आने को कहा.

अगले दिन सब लोग इंदौर आ गए. ललितपुर से शिवानी के पिता और भाई भी आ गए थे. पुलिस ने एक बार फिर अमितेश कुमार पटेरिया, पिता ओमप्रकाश पटेरिया, बहन रिचा चतुर्वेदी, किराएदार निखिल कुमार खत्री से विस्तारपूर्वक पूछताछ की. इस पूछताछ में सभी के बयान अलगअलग पाए गए. इस से पुलिस का शक विश्वास में बदल गया, लेकिन पुलिस को सबूत चाहिए था.

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दूसरी ओर शिवानी के पिता और भाई का कहना था कि अमितेश का नोएडा में रहने वाली किसी युवती से प्रेमसंबंध है. वह युवती नोएडा में उस के साथ लिवइन में रहती थी, इसीलिए वह शिवानी को साथ नहीं रखता था. उस ने शिवानी से तलाक के लिए मुकदमा भी दायर किया था, लेकिन बाद में खुद ही मुकदमा वापस ले लिया था. उस युवती को ले कर शिवानी और अमितेश में अकसर लड़ाई झगड़ा होता था.

पतिपत्नी के बीच विवाद की बात अमितेश और उस के घर वालों ने भी स्वीकार की. पुलिस चाहती तो अमितेश को गिरफ्तार कर सकती थी, लेकिन वह किसी साधारण परिवार से नहीं था इसलिए पुलिस को अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरैंसिक रिपोर्ट का इंतजार था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली पोल

तीसरे दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो सारा मामला साफ हो गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, शिवानी की मौत अस्पताल लाने से 8 घंटे पहले सांप के काटने से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई थी. फोरैंसिक रिपोर्ट से भी साबित हो गया था कि शिवानी की हत्या की गई थी. पुलिस ने अमितेश के बैडरूम से जो तकिए के कवर जब्त किए गए थे, उन में से एक तकिए के कवर पर शिवानी की लार के धब्बे पाए गए थे.

शक विश्वास में बदल गया था, पुलिस ने अमितेश को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ की तो उस ने शिवानी की हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने पुलिस को बताया कि उसी ने पिता ओमप्रकाश एवं बहन रिचा की मदद से शिवानी की हत्या सोते समय मुंह पर तकिया रख कर की थी.

अमितेश से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस के पिता ओमप्रकाश पटेरिया और बहन रिचा चतुर्वेदी को भी गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उन दोनों ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस पूरी पूछताछ में शिवानी की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

जल संसाधन विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर पद से रिटायर 73 वर्षीय ओमप्रकाश पटेरिया परिवार के साथ मध्य प्रदेश, इंदौर के थाना कनाडिया क्षेत्र में पड़ने वाले संचार नगर एक्सटेंशन में रहते थे. उन के परिवार में बेटा अमितेश कुमार और बेटी रिचा पटेरिया थी. पत्नी की मौत हो गई थी. बेटी बड़ी थी और बेटा छोटा. बेटी की पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने उस की शादी कर दी थी.

बेटा अमितेश कुमार पटेरिया पढ़लिख कर एक्सिस बैंक में मैनेजर के पद पर तैनात हो गया था. करीब 13 साल पहले ओमप्रकाश ने उस की शादी ललितपुर की शिवानी के साथ कर दी थी. अमितेश बैंक में अधिकारी था. पिता भी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर था, घर में किसी चीज की कमी नहीं थी, इसलिए जिंदगी आराम से कट रही थी.

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