दरिंदगी की पराकाष्ठा : भाग 1

दरअसल, उस दिन रांची के बहुचर्चित बीटेक की छात्रा माही हत्याकांड का फैसला सुनाया जाना था. करीब 3 साल पहले हुई हत्या की यह वारदात काफी दिनों तक मीडिया की सुर्खियों में रही थी. जब थाना पुलिस इस केस को नहीं खोल सकी तो यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था.

सीबीआई इंसपेक्टर परवेज आलम की टीम ने लंबी जांच के बाद न सिर्फ इस केस का परदाफाश किया, बल्कि आरोपी राहुल कुमार उर्फ राहुल राज उर्फ आर्यन उर्फ रौकी राज उर्फ अमित उर्फ अंकित को भी गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की.

पता चला कि रेप की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो जाता था या नाम बदल कर कहीं दूसरी जगह रहने लगता था. इस तरह वह एकदो नहीं, बल्कि 10 लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बना चुका था. एक तरह से वह साइको किलर बन चुका था.

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इस वहशी दरिंदे के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत में केस चल रहा था. सीबीआई की ओर से इस मामले में 30 गवाह पेश किए गए थे. जज ए.के. मिश्र ने तमाम गवाह और सबूतों के आधार पर 30 अक्तूबर, 2019 को छात्रा माही हत्याकांड में आरोप तय करते हुए राहुल कुमार को दोषी ठहराया. उन्होंने सजा सुनाए जाने के लिए 22 दिसंबर, 2019 का दिन निश्चित किया.

सीबीआई की विशेष अदालत में 22 दिसंबर को जितने भी लोग बैठे थे, उन सभी के दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था कि जज साहब साइको किलर राहुल कुमार को क्या सजा सुनाएंगे. इस वहशी दरिंदे ने जिस तरह कई लड़कियों की जिंदगी तबाह की थी, उसे देखते हुए उन्हें उम्मीद थी कि उसे फांसी की सजा दी जानी चाहिए.

25 वर्षीय राहुल कुमार कौन है और वह कामुक दरिंदा कैसे बना, यह जानने के लिए उस के अतीत को जानना होगा.

25 वर्षीय राहुल कुमार बिहार के नालंदा जिले के एकंगर सराय थाना क्षेत्र के गांव धुर का रहने वाला है. उस के पिता उमेश प्रसाद पेशे से आटो चालक हैं. 3 भाईबहनों में राहुल सब से बड़ा था.

कहते हैं कि पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं. ऐसा ही कुछ राहुल के साथ भी हुआ. बचपन से ही राहुल जिद्दी और झगड़ालू किस्म का था. वह एक बार जो करने की ठान लेता था, उसे पूरा कर के ही मानता था. इस दौरान वह किसी की भी नहीं सुनता था. मांबाप की डांटफटकार का भी उस पर कोई असर नहीं होता था.

राहुल जैसेजैसे बड़ा होता गया, उस की संगत आवारा किस्म के लड़कों से होती गई. घर से उस का मतलब केवल 2 वक्त की रोटी से होता था. जब उस के पिता उमेश प्रसाद आटो ले कर शहर की ओर निकलते, वह भी घर से निकल जाता था. फिर दिन भर आवारा दोस्तों के साथ घूमता रहता था.

मटरगश्ती करने के लिए वह मां से जबरन पैसे लिया करता था. अगर मां उसे पैसे नहीं देती तो वह लड़झगड़ कर पैसे छीन लेता था. दिन भर दोस्तों के बीच घूमनेफिरने के बाद वह शाम होते ही घर लौट आता था.

घर का वह एक काम तक नहीं करता था, रात को जब आटो चला कर उमेश प्रसाद घर लौटता तो उस की पत्नी राहुल की दिन भर की शिकायतों की पोटली खोल कर बैठ जाती. उमेश राहुल को डांटता और समझाता, पर पिता की बातों को वह अनसुना कर देता. ऐसे में उमेश माथे पर हाथ रख कर चिंता में डूब जाता.

उमेश प्रसाद ने राहुल को समझाने और सही राह पर लाने के बहुत उपाय किए, लेकिन राहुल सुधरने के बजाए दिनबदिन जरायम की दलदल में उतारता गया. शुरुआत उस ने अपने घर के पैसे चुराने से की थी.

इस के बाद उस ने औरों के घरों में भी चोरी करनी शुरू की. भेद न खुलने पर उस की हिम्मत बढ़ती गई. चोरी के साथसाथ राहुल लड़कियों को अपनी हवस का शिकार भी बनाने लगा.

बात सन 2012 की है. राहुल ने पटना के जीरो रोड पर स्थित एक घर में चोरी की. इतना ही नहीं, उस ने वहां एक युवती को अपनी हवस का शिकार भी बनाया. युवती से दुष्कर्म के मामले में 29 जून, 2012 को उसे बेउर जेल भेजा गया.

जब वह जेल में था, तभी उस के चाचा की मौत हो गई. श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए वह 4 सितंबर, 2016 को पैरोल पर अपने गांव गया, उस समय वह पुलिस की सुरक्षा में था.

श्राद्धकर्म के बाद शातिर राहुल ने सिपाहियों को शराब पिलाई और अनुष्ठान का बहाना बना कर फरार हो गया. इस के बाद पुलिस उसे छू तक नहीं सकी. पुलिस अभिरक्षा से फरार होने के बाद उस ने जो कांड किया, उस ने समूचे झारखंड को हिला कर रख दिया.

राहुल नालंदा से भाग कर रांची आ गया था और वहां वह नाम बदल कर राज के नाम से रहने लगा. राहुल हर बार जुर्म करने के बाद अपना नाम बदल लेता था, ताकि पुलिस उस तक आसानी से न पहुंच सके. खैर, वह राहुल से राज बन कर रांची की बूटी बस्ती में पीतांबरा पैलेस के सामने वाली गली में स्थित दुर्गा मंदिर के कमरे में रहने लगा. यहां उस ने कमेटी से आग्रह किया था. कमेटी के बंटी नामक युवक ने उस पर तरस खा कर वहां रखवाया था.

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यहां रह कर राहुल उर्फ राज दूसरा कमरा खोजने लगा. कमरे की तलाश में वह बीटेक की छात्रा माही के घर पहुंच गया. लेकिन वहां कमरा किराए पर नहीं मिला. राहुल का मुख्य पेशा चोरी था. उसे घूमतेघूमते पता चल गया कि माही के घर में सिर्फ लड़कियां रहती हैं. उस दिन के बाद से वह आतेजाते माही का पीछा करने लगा. माही इतनी खूबसूरत थी कि एक ही नजर में वह उस पर मर मिटा था.

23 वर्षीया माही मूलरूप से झारखंड के बरकाकाना जिले के थाना सिल्ली क्षेत्र की रहने वाली थी. उस के पिता संजीव कुमार बरकाकाना में सेंट्रल माइन प्लानिंग ऐंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआई) में नौकरी करते थे.

संजीव कुमार की 2 बेटियां रवीना और माही थीं. दोनों पढ़ने में अव्वल थीं. इसीलिए पिता संजीव भी उन्हें उन के मनमुताबिक पढ़ाना चाहते थे. वह उन पर पानी की तरह पैसे बहा रहे थे.

बच्चों के भविष्य के लिए संजीव कुमार ने सन 2005 में रांची की बूटी बस्ती में एक प्लौट खरीदा था. उस पर उन्होंने घर भी बनवा दिया था. घटना से करीब 2 साल पहले यानी 2017 में उन की दोनों बेटियां रवीना और माही वहीं रह कर पढ़ाई करती थीं. संजीव और परिवार के अन्य सदस्य बरकाकाना में रहते थे.

बड़ी बेटी रवीना रांची शहर के एक प्रतिष्ठित कालेज से स्नातक कर रही थी, जबकि छोटी बेटी माही ओरमांझी के एक इंजीनियरिंग कालेज से बीटेक के चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा थी. माही का 15 दिसंबर, 2016 को रिजल्ट आने वाला था. उस के पिता रिजल्ट देखने बरकाकाना से रांची आए थे. रिजल्ट देख कर वह माही के कालेज गए और वहीं से बरकाकाना वापस लौट गए.

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जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

दरिंदगी की पराकाष्ठा

बकरा : भाग 3- क्या अधीर को मिला वैवाहिक जीवन का सुख

अंकुश उस के मना करने पर भी अंदर मीनू की खबर ले आया कि मम्मी जो खाना ले के आई थीं, वह अकेले ही खा रही हैं.

अधीर मीनू पर गुस्सा होने के बजाय अंकुश के बचकानेपन पर ही रहम खाने लगा. वह बुदबुदाए बगैर नहीं रह सका, ‘‘कैसी भुक्खड़ मां है.’’

शाम को अधीर ने बच्चों के साथ खाना खाया. जब तक वह बच्चों के सोने का प्रबंध करता रहा तब तक मीनू से न तो अधीर की, न ही बच्चों की बातचीत हुई थी. अधीर ने बच्चों से फुसफुसा कर कह दिया था, ‘‘इस समय तुम्हारी मम्मी बहुत गुस्से में हैं, इसलिए उन से बात करने की गलती मत करना.’’

पिछली रात को नींद पूरी न होने के कारण और आफिस में काम को निबटाने की जद्दोजहद में अधीर इतना थक कर चूर हो गया था कि वह तकिए पर सिर रखते ही गहरी नींद में सो गया.

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कोई 11 बजे होंगे कि एक हृदयविदारक चीख से अधीर और बच्चे जग गए. चीख मीनू के बेडरूम से आई थी, इसलिए वे उधर ही भागे. वहां मीनू अपने पेट को दोनों हाथों से जोर से दबाए हुए कांप रही थी. असहनीय दर्द के मारे उस का सारा शरीर पसीने से नहा गया था. बच्चे मां की यह हालत देख कर जोरजोर से रोने लगे.

अधीर ने झटपट उसे अस्पताल में दाखिल कराया. रात भर वह उसी तरह रुकरुक कर दर्द से चीखती रही. अधीर ने रात में ही ससुराल में उस की हालत के बारे में फोन पर सूचित कर दिया था. सुबह जब उस के फोन करने पर मीनू के आफिस वाले उसे देखने आए तब तक सारी मेडिकल रिपोर्टें आ गई थीं. डाक्टर की इस सूचना ने अधीर को सुन्न कर दिया कि मीनू के दोनों गुर्दे अत्यधिक शराब पीने के कारण खराब हो गए हैं और उन से लगातार रक्तस्राव हो रहा है.

डाक्टर ने अधीर से कहा, ‘‘आज शाम तक उस के लिए एक गुर्दे का बंदोबस्त हो जाना चाहिए ताकि उस का ट्रांसप्लांट किया जा सके.’’

अधीर के तो हाथपांव फूल गए. गुर्दे बदलने में कम से कम 10 लाख रुपए का खर्च आने वाला था, जबकि अधीर इतने रुपए का बंदोबस्त करने में एकदम असमर्थ था. लेकिन उसे यह उम्मीद थी कि ससुराल वाले अपनी बेटी के लिए रुपए का इंतजाम तो कर ही देंगे.

दोपहर तक मीनू के मांबाप और भाई पहुंच चुके थे. अधीर ने उन को हालात से अवगत कराते हुए कहा, ‘‘मीनू के इलाज के लिए 10 लाख रुपए की जरूरत है.’’

पर आश्चर्य कि उस की सास बड़े बेहूदे ढंग से बोलीं, ‘‘अभी तक तुम्हारी दहेज की चाह पूरी नहीं हुई? मेरी बेटी को मौत के मुंह में धकेल कर भी तुम अपने लालचीपन से बाज नहीं आ रहे हो?’’

मीनू के कुछ आफिस वालों के समझानेबुझाने पर ससुराल वाले यह मानने को तैयार हुए कि मीनू की जान बचाने की कीमत लगभग 10 लाख है.

अधीर के ससुर ने कहा, ‘‘अरे, इतने पैसों की क्या जरूरत है? हम में से कोई अपना गुर्दा मीनू को दे देगा.’’

उन की बात सुनते ही अधीर की सास छाती पकड़ कर गिर पड़ीं. उन्हें आई सी यू वार्ड में भरती कराने के लिए स्ट्रेचर मंगाना पड़ा.

ससुर ने कहा, ‘‘मैं तो खुद ही बी.पी. और शुगर से अधमरा हूं. गुर्दा निकलने के बाद तो बचूंगा ही नहीं…तुम लोग जवान हो, तुम्हारे गुर्दे ही उस में ज्यादा फिट बैठेंगे. आखिर तुम उस के शौहर हो.’’

अभी गुर्दे के बंदोबस्त के संबंध में चर्चा चल ही रही थी कि मीनू का भाई टहलते हुए दूर निकल गया. जब हताश अधीर ने मीनू के खिदमतगार बौस बिरजू की ओर रुख किया तो वह तेजी से चलता हुआ अपनी कार में बैठ कर चला गया.

अधीर ने फिर किसी की ओर नहीं देखा. वह तेज कदमों से चलते हुए डाक्टर के कमरे में आ गया. उस ने अपने दोनों बच्चों को टाफी, बिस्कुट और चिप्स के कई पैकेट थमाते हुए कहा, ‘‘मैं काफी देर तक तुम्हारी मम्मी के पास रहूंगा. तब तक तुम इसी कमरे में मेरा इंतजार करना. ध्यान रहे, मैं तुम्हारी मम्मी की जान बचाने जा रहा हूं. अगर तुम दोनों ने सहयोग नहीं किया तो तुम्हारी मम्मी का भला नहीं होगा.’’

दोनों बच्चों ने कान पकड़ कर वादा किया.

लगभग 2 घंटे के आपरेशन के बाद अधीर का एक गुर्दा निकाल लिया गया. उस ने बच्चों को बुलवा कर बेड पर लेटेलेटे बताया, ‘‘अब रोना मत. मैं ने तुम्हारी मम्मी को बचाने का पुख्ता इंतजाम कर रखा है.’’

तभी अंकुश ने यह जानकारी दी कि पापा, नानी को हार्ट अटैक नहीं पड़ा था. वह तो नाटक कर रही थीं ताकि उन्हें अपना गुर्दा न देना पड़े. डाक्टर ने उन्हें एकाध गोली दे कर रफादफा कर दिया है.

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पिछले 8 सालों से मीनू भलीचंगी चल रही है. उस के स्वभाव में कोई खास बदलाव नहीं आया है सिवा इस के कि वह लड़नेझगड़ने के बाद कोर्ट से कोई काररवाई करने की धौंस नहीं देती. बड़ी से बड़ी लड़ाई लड़ने के बाद भी वह रात को अधीर के बेड के किनारे आ कर सो जाती है. अधीर के खर्राटे लेने के बावजूद वह बेड नहीं छोड़ती है, बल्कि भुनभुना कर रह जाती है, ‘बकरा कहीं का.’

हां, शराब के साथसाथ बिरजू से भी तौबा कर लिया है. अस्पताल से छूट कर वह सीधे बिरजू के पास गई थी और अपना त्यागपत्र सौंपते हुए उस से जोरजोर से झगड़ आई थी कि उस ने उस का मुसीबत में क्यों नहीं साथ दिया.

एक और बदलाव मीनू में यह आया है कि वह बच्चों को डांटनेफटकारने के बाद उन्हें प्यार से सबक भी देने लगी है. पर अधीर की दिनचर्या में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया है. वह आज भी आफिस जाने से पहले और वहां से लौटने के बाद किचन में लगा रहता है. महरी के न आने पर वह बरामदे से बेडरूम तक बड़े मन से झाड़ूपोछा लगाता है क्योंकि डाक्टर ने उसे खास हिदायत दे रखी है कि अपने इकलौते गुर्दे को चुस्तदुरुस्त रखने के लिए उस के लिए व्यायाम करना बहुत जरूरी है और उसे मेहनत से कतई जी नहीं चुराना चाहिए. जब वह थक कर आराम करने लगता है तो अपने सामने मीनू को हाथ में छड़ी लिए हुए खड़ा पाता है, ‘‘अगर जिंदा रहना चाहते हो तो काम करो.’’

अधीर को कुछ वर्षों पहले का वह सपना याद आ जाता है जिस में मीनू उसे जादुई छड़ी घुमा कर बकरा बना देती है.

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बकरा : भाग 2- क्या अधीर को मिला वैवाहिक जीवन का सुख

विवाह के बाद जो सुकून मिलना चाहिए था, वह अधीर को कभी नहीं मिला. मीनू की परवरिश ही कुछ ऐसे माहौल में हुई थी कि उस के लिए अपने मांबाप, भाईबहन आदि के अलावा किसी दूसरे से तालमेल बैठा पाना मुश्किल ही नहीं, असंभव सा था.

पहले अधीर मीनू के ताना मारने पर प्रतिक्रियाएं व्यक्त करता था, जिस से बात बढ़ कर बतंगड़ बन जाती थी और फिर धुआंधार बहस में माहौल इतना गरम हो जाता कि तलाक के लिए वकील का दरवाजा खटखटाने तक की नौबत आ जाती थी.

पर अधीर बड़े धीरज से काम लेता था. सो उस ने मीनू से जबानजोरी करनी छोड़ दी और उस को शांत करने के लिए सारी हिकमत अपनानी शुरू कर दी. सुबह उस से पहले उठ कर बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना, सुबह की चाय बनाना और लंच के लिए खाना तैयार करने में उस का हाथ बंटाना आदि.

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बहरहाल वह मीनू के स्वभाव को बदलने में हमेशा नाकामयाब रहा. मीनू सारी हदें लांघ कर अमर्यादित तरीके से बरताव करने लगी थी. बच्चों और पति को झिड़कना और डांटना तो मामूली बात थी, अब तो वह गालीगलौज करने पर आमादा हो गई थी. उसे बेलगाम विस्फोटक होने से बचाने के लिए अधीर सुबह से ही ऐसे कामों को निबटाने में जुट जाता था जिन्हें करने से मीनू जी चुराती थी.

उसे संतुष्ट करने के लिए वह अपनी नौकरी को भी दांव पर लगा बैठा था. आफिस देर से पहुंचना, पहले लौट आना और काम को गंभीरतापूर्वक न लेना उस की आदत बन गई थी. इतने पर भी मीनू को अधीर की हर बात से शिकायत थी.

कई बार अधीर को एहसास होता था कि वह घर का काम करतेकरते औरत बनता जा रहा है. उसे यह भी लगता था कि वह अपनी मां की तरह कोई 70 प्रतिशत सहनशील और अंतर्मुखी हो गया है. उसे याद है कि पापाजी की यातनाओं को मां किस खामोशी से सहन कर लेती थीं.

अधीर की तंद्रा तब टूटी जब उस के दोनों बच्चे अंकुश और अलि घर में दाखिल हुए. वे एक ही स्कूल में पढ़ते थे और एक ही बस में साथसाथ आया करते थे. बच्चों को आश्चर्य हो रहा था कि पापा आफिस जाने के बजाय आज घर पर ही हैं. दरअसल, उन्हें यह नहीं पता था कि आज पापामम्मी के बीच कुछ ज्यादा ही छिड़ गई थी. वे तो उन के बीच जंग छिड़ने से पहले ही स्कूल जा चुके थे.

अंकुश रोज की तरह सीधे किचन में गया और वहां खाना नदारद पा कर भूख से बिलबिला उठा. अधीर ने उस की पीठ थपथपाई और बोला, ‘‘मैं अभी खाने का बंदोबस्त करता हूं.’’

उस ने फोन कर के रेस्तरां से तत्काल भोजन मंगा लिया और बच्चों के हाथपैर धुलाते हुए उन का खाने की मेज पर स्वागत किया. जब दोनों बच्चे अपने कमरे में टीवी पर कार्टून फिल्म देखने में खो गए तो वह रात का खाना बनाने की तैयारी करने में जुट गया. सोच रहा था कि शायद आज मीनू का मूड ठीक हो जाए.

तभी मोबाइल की घंटी बजी. उसे यह जान कर कोई खास आश्चर्य नहीं हुआ कि मीनू के मोबाइल से बिरजू की आवाज आ रही थी और वह अंकुश से बात करना चाह रहा था. मोबाइल पर मीनू ने अंकुश को बताया कि वह आज घर नहीं आएगी. अधीर को यह जान कर कोफ्त हुई और उस ने खाना बनाने का कार्यक्रम स्थगित कर के बच्चों को यह समाचार दिया कि वे आज बाहर जा कर खाना खाएंगे.

होटल से लौट कर अधीर को चैन नहीं था. उस के लिए यह बात अब छिपी नहीं रही थी कि मीनू एक तरह से बिरजू की रखैल बन चुकी है. बिरजू उस का बौस है, जो उस का यौन शोषण करता है और बदले में उस की वे सारी जरूरतें पूरी करता है जो वह नहीं कर सकता. वह ऐसी स्थिति में नहीं है कि मीनू को मोटी पाकेट मनी दे सके, विदेशी सौंदर्य प्रसाधन, कपड़े व घूमनेफिरने के लिए उसे एक लग्जरी कार मुहैया करा सके.

देर रात तक अधीर को नींद नहीं आई. वह बेहद मायूस था. उसे मीनू के साथ एक ही बिस्तर पर सोए हुए कोई साल भर तो गुजर ही गया होगा. मीनू की लानत सुनते हुए जोरजबरदस्ती कर के उस के साथ हमबिस्तर होना अब उसे रास नहीं आता था. जी करता था कि वह भी अपनी किसी आफिससहकर्मी के साथ गुलछर्रे उड़ाए, मौजमस्ती में बाकी जिंदगी को हंसीठट्ठा से गुजार दे, लेकिन वह किसी प्रकार की नाजायज हरकत कर के खुद को या अपने घर को कलंकित नहीं करना चाहता था.

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उस ने घड़ी की ओर सिर घुमाया. रात के डेढ़ बज चुके थे. तभी उसे कुछ याद कर के हंसी आ गई. कोई 2 साल पहले वह अपने साले की शादी में शामिल होने ससुराल गया था तो एक शाम सोते हुए वह अचानक जग गया था. मीनू उस के सामने खड़ी, अपने रिश्तेदारों से कह रही थी कि आओ, मैं तुम्हें बकरे का मिमियाना सुना रही हूं.

वह तो इस मजाक पर रिश्तेदारों के सामने झेंप गया था, पर मीनू ठठा कर हंस रही थी.

अधीर सोच रहा था कि अगर उस के खर्राटे को टेप कर के सुनाया जाए तो वह यह तय करना चाहेगा कि वाकई उस के खर्राटे बकरे के टेंटें जैसे ही सुनाई देते हैं.

देर रात सोने के बाद सुबह जब उस की नींद खुली तो उसे बड़ा अचंभा हो रहा था. उस ने एक लंबा सपना देखा था जिस में मीनू ने उसे जादू की छड़ी से छू कर बकरा बना कर उस के गले में एक पट्टा डाल दिया है. वह उसे डंडे से मारमार कर घर का सारा कूड़ाकचरा जबरन खिला रही है और उस के मेंमें करने पर उस पर डंडे बरसा रही है.

सुबह अधीर बच्चों को स्कूल न भेज कर उन्हें अपने साथ आफिस ले गया. उन्हें पार्क में बैठा दिया और अपनी स्टेनो को हिदायत दे दी कि वह आज उस के बच्चों का खयाल रखेगी. उस का काम वह खुद कर लेगा.

मीनू ने जैसे ही घर में अपने कदम रखे, दोनों बच्चे टेलीविजन बंद कर के अधीर के साथ बाहर निकल आए और लान में कुरसी पर बैठ गए. मीनू ने सीधे किचन में जा कर पैक्ड फूड के पैकेट को डाइनिंग टेबल पर फेंक दिया. कुछ देर तक वह अंदर ही व्यस्त रही. अधीर ने सोचा कि वह कपड़े बदल रही होगी.

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बकरा : भाग 1- क्या अधीर को मिला वैवाहिक जीवन का सुख

मीनू ने आफिस जाते वक्त मेज पर परोसी गई थाली को हाथ मार कर नीचे गिरा दिया और जातेजाते अधीर से गुर्रा गई थी, ‘‘आइंदा मेरे लिए खाना मेज पर मत लगाना, वरना…’’

हुआ यह कि सुबह मीनू ने केवल अपने लिए चाय बनाई थी. अधीर को बड़ी कोफ्त हुई कि थोड़ी सी और चाय बढ़ा कर बनाई होती तो उस का क्या चला जाता. खैर, ऐसी टुच्ची हरकत तो वह रोज ही किया करती है.

उस के बाद वह किचन में घुस गया था. बाकायदा दालचावल के साथसाथ गोभी, आलू, मटर का दोपियाजा बनाया था. सोचा था कि मीनू का मूड दोपियाजे की खुशबू से बदल जाएगा पर उस की रसोईगीरी की मशक्कत का अंजाम यह हुआ कि मीनू ने सारा खाना ही जमीन पर छितरा दिया.

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इस घटना के बाद अधीर का मूड इतना खराब हुआ कि उस ने एक दाना भी हलक से नीचे नहीं उतारा.

उस ने छितरे खाने को बटोर कर डस्टबिन में डाला. फिर बचाखुचा खाना एक पालिथीन बैग में डाल कर नीचे पार्क के एक कोने में रख आया. महल्ले के कुत्तों को लगातार तीसरे दिन भी अच्छी दावत मिल गई थी. बहरहाल, अधीर को कुत्ते- बिल्लियों को खाना खिला कर बेहद सुकून मिलता था. कम से कम वे उस के खाने को पर्याप्त सम्मान तो देते थे.

सीढि़यां चढ़ते वक्त ही उस ने तय कर लिया कि वह आज भी दफ्तर नहीं जाएगा बल्कि घर में बैठ कर कुछ लिखेगापढ़ेगा. पिछले कई महीनों से उस ने न तो कोई कविता लिखी थी, न ही कोई कहानी. शायद कुछ लिखने के बाद उस का मूड भी ठीक हो जाए. इसलिए उस ने अपने अफसर रेड्डी को फोन कर दिया, ‘‘सर, मेरा फीवर अभी तक नहीं उतरा है, मैं आज भी…’’

रेड्डी ने उसे 1 दिन की और छुट्टी दे दी थी.

अधीर पहले से कहीं ज्यादा हताश होता जा रहा था. पहले उस के मन में उम्मीद की एक धुंधली किरण टिमटिमाती रहती थी कि एक न एक दिन मीनू के खयालात जरूर बदलेंगे और उन के गृहस्थ जीवन में रस पैदा होगा. पर आज की इस घटना ने उस की उम्मीद को और भी धुंधला किया है. मीनू जिस दिन से उस के आंगन में बहू के रूप में उतरी थी, वह हर रोज उग्र से उग्रतर होती जा रही थी. पिछले 10 सालों से संबंधों में कड़वाहट बढ़ती ही जा रही थी. इस का अन्य बातों के साथसाथ, एक मुख्य कारण यह भी था कि अधीर को जो कुछ भी दहेज में मिला था, उसे वह या तो अपने घर छोड़ आया था या अपनी छोटी बहन की शादी में दे चुका था.

शादी के 2 दिन बाद ही जब दहेज में मिला स्कूटर उस ने अपने छोटे भाई के हवाले किया तो मीनू ने पहली बार यह कह कर अपनी नाकभौं सिकोड़ी थी कि एक दिन तुम मुझे भी अपने भाइयों के हवाले कर देना.

तब वह यह सोचते हुए चुप रह गया था कि जब मीनू उस की रौ में बहेगी तो उस का सामान के प्रति प्रेम का बुखार उतर जाएगा और वह भौतिक जीवन से उचट कर उस की बौद्धिक दुनिया में कदम रखेगी, जहां सुकून है, जिंदगी का असल माने है.

शादी के बाद वह मीनू के साथ खाली हाथ ही हैदराबाद चला आया था. मीनू ने चलतेचलते कहा भी था कि तुम ने शादी का सारा सामान अपने लालची परिवार वालों के हवाले कर के अच्छा नहीं किया.

तब पहली बार अधीर उस की बात को बीच में काटते हुए झल्ला कर बोला था, ‘मीनू, मेरे घर वाले तो तुम्हारे घर वाले भी हैं. फिर उन्हें अपशब्द कह कर अपनी किस बैकग्राउंड का परिचय दे रही हो? पढ़ीलिखी लड़की हो, कम से कम कुछ तो शालीनता से पेश आओ.’

उस पल मीनू का चेहरा एकदम तमतमा गया था. अधीर को पहली बार एहसास हुआ कि वह बेइंतहा हिंसक भी हो सकती है. दोनों ने एकदूसरे की ओर पीठ किए हुए ही अपनी यात्रा पूरी की. सुबह जब टे्रन सिकंदराबाद पहुंची तो अधीर ने उठ कर उस की पीठ पर हाथ रख कर कहा था, ‘डियर, रेडी हो जाओ. हैदराबाद आने ही वाला है.’

अधीर ने तब बर्थ पर बिखरे कंबल, चादर खुद समेट कर बैग और अटैची में रखे थे. मीनू तो उठ कर आईने के सामने सिर्फ अपने मेकअप को फाइनल टच देने में मशगूल थी.

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अधीर ने अपनी नवविवाहिता पत्नी को खुश करने के लिए हैदराबाद के उस किराए के फ्लैट में सारे इंतजाम कर रखे थे. कुंआरा रहते हुए भी उस ने किचन, बेडरूम और ड्राइंगरूम को जरूरी सामान से सुसज्जित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी थी, लेकिन उसे आश्चर्य हो रहा था कि मीनू ने उस के सलीकेदार बंदोबस्त के बारे में एक भी तारीफ भरा लफ्ज नहीं बोला.

समय दिन, हफ्ते, महीने और साल के रास्ते सरकता चला जा रहा था. 3 साल तक कोई संतान न होने का सारा लांछन अधीर को ही झेलना पड़ा, क्योंकि मीनू हर किसी को रटारटाया उत्तर देती, ‘लगता है इन में ही कोई कमी है.’

अधीर की दबंग सास जब हैदराबाद आईं तो वह दामाद को बाकायदा यह मशविरा दे बैठीं, ‘इस हैदराबाद में हमारे रिश्ते का एक डाक्टर है, तुम उसी से अपना चेकअप करा लो. उस ने कई बेऔलादों की तकदीर बदली है.’ और जब उस डाक्टर ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया कि अधीर में कोई कमी नहीं है, तो मीनू और उस की सास का चेहरा गुस्से से सूज गया. मीनू का गुस्सा तब तक खत्म नहीं हुआ जब तक कि वह मेडिकल जांच और इलाज के बाद गर्भवती नहीं हो गई.

पहले बेटे के बाद दूसरी बिटिया हुई. अफसोस कि अधीर के घर वाले दोनों बच्चों के पैदा होते समय वहां नहीं आ सके. मीनू ने तो इस बात पर खूब ताने दिए. जब अधीर सफाई पेश करता तो वह और विस्फोटक हो जाती.

अधीर ने शादी केवल इसलिए की थी कि वह हैदराबाद में नौकरी करते हुए अपने एकाकीपन से बोर हो गया था. उस के लिए घर का काम निबटा कर आफिस की ड्यूटी करना भारी पड़ रहा था, वरना तो वह अपनी जिंदगी से खुश था.

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आदित्य रॉय कपूर ने बताए लड़कों के लिए खास मेक-अप टिप्स, पढ़ें खबर

जब भी मेक-अप की बात आती है तो हर किसी के मन में बस एक ही चीज दौड़ती है और वो ये है कि मेक-अप तो बस लड़कियों के लिए या सेलेब्रिटीज के लिए ही बना है लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है. आज की तारीख में हम कोई स्मार्ट और स्टाइलिश दिखना चाहता है फिर चाहे वे लड़के हों या लड़किया. आमतौर पर लड़के अपने चेहरे पर आए दाग धब्बे और डार्क सर्क्ल्स से परेशान रहते हैं जिसे वे किसी से शेयर नहीं कर पाते.

इस परेशानी की वजह से वे बिना किसी की सलाह लिए गलत प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर अपनी स्किन को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं बॉलीवुड के पौपुलर एक्टर आदित्य रॉय कपूर (Aditya Roy Kapur) के कुछ ऐसे टिप्स जो उन्होनें खुद एक इंटर्व्यू के दौरान आम लड़कों के लिए शेयर किए थे जिससे कि किसी को भी कोई परेशानी ना हो.

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यह बात को तय है कि हेवी मेक-अप भले ही आपकी नेच्यूरल स्किन को खराब कर सकते हैं लेकिन बॉलीवुड एक्टर आदित्य रॉय कपूर (Aditya Roy Kapur) के अनुसार कुछ ऐसे बेसिक मेक-अप हैं जो कि हर इंसान को समय समय पर करते रहना चाहिए. चलिए जानते हैं वे बेसिक मेक-अप के बारे में-

शीट मास्क (Sheet Mask)

sheet-mask

आपको यह जानकर खुशी होगी कि शीट मास्क आपकी स्किन की सभी लेयर्स को गहराई से डिटॉक्स करता है और सभी प्रकार की गंदगी को बाहर निकालता है. ऐसे में कई लोग चारकोल शीट मास्क (Charcoal Sheet Mask) का भी इस्तेमाल करते हैं जो कि उनकी स्किन को यूवी डैमेज और प्रदूषण से होने वाले नुकसान से भी बचाता है. और तो और चारकोल शीट मास्क स्किन में नमी बनाए रखने में भी मदद करता है.

बीबी क्रीम (BB Cream)

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लंबे समय तक धूप में रहने वालों के चेहरों पर काले दाग धब्बों की परेशानियां देखने को मिलती हैं जिससे बचने के लिए बीबी क्रीम काफी मददगार साबित होती है. बीबी क्रीम का पूरा नाम ‘ब्लेमिश बाम’ (Blemish Balm) होता है.

कंसीलर (Concealer)

ऑफिस में कंप्यूटर के आगे ज्यादा देर तक काम करते रहने से आंखों के आस पास डार्क सर्क्ल्स की परेशानी बढ़ जाती है जिसे सही करने में कंसीलर काफी मदद करता है. थोड़ा सा कंसीलर लेकर अपने फेस के गहरे रंग वाली स्किन पर लगाएं. इसके बाद कॉटन पैड या रुई के इस्तेमास से इसे अच्छी तरह मिलाएं जिससे आपकी स्किन बाकी स्किन के साथ मैच हो जाएगी.

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आईब्रो जेल (Eyebrow Gel)

eyebrow

आईब्रे जेल से आप अपनी आईब्रोस को एक स्टाइलिश लुक दे सकते हैं. लड़कियों के मुकाबले लड़के अपनी आईब्रो पर काफी कम ध्यान देते हैं कि वे भी चाहते हैं कि उनकी आईब्रो अच्छी दिखनी चाहिए तो अच्छी आईब्रो पाने के लिए आप आईब्रो जेल का इस्तेमाल कर सकते हैं.

भीम सिंह : पावर लिफ्टिंग का पावर हाउस

कुछ लोगों की कामयाबी की दास्तान जिम की दीवारों पर चस्पां होती हैं. अब से कई साल पहले तक भारतीय जिमों में विदेशी बॉडी बिल्डरों के फोटो लगे होते थे, पर अब बहुत से कामयाब भारतीय पेशेवर बाडी बिल्डर भी जिम की दीवारों की शोभा बढ़ाते हैं.

फरीदाबाद के सैक्टर 31 में बने ‘द्रोणाचार्य जिम’ में ऐसे ही एक इंटरनैशनल खिलाड़ी के कारनामों से वहां की दीवारें अटी पड़ी हैं, जिस ने विदेशी धरती पर भारतीय तिरंगा शान से लहराया है. नाम है भीम सिंह और खेल है पावर लिफ्टिंग.

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अपने नाम की तरह ताकत के पावर हाउस भीम सिंह का पावर लिफ्टर बनने का सपना आसान नहीं रहा है. दिल्ली के असोला फतेहपुर बेरी गांव के गुर्जर समाज के भीम सिंह के पिता तेजपाल 2 एकड़ जमीन के मालिक हैं, किसान हैं.

अपने पावर लिफ्टर बनने के बारे में भीम सिंह ने बताया, “मेरे बड़े भाई अभय सिंह दिल्ली के सिरीफोर्ट जिम में काम करते थे. जब साल 2009 में मैं ने 12वीं जमात पास की थी, तो वे मुझे अपने जिम में ले गए थे, ताकि ट्रेनिंग ले सकूं और बाद किसी जिम में ही नौकरी मिल जाए.

“वहां मैं ने अभी 2-3 महीने की ट्रेनिंग की थी कि वहीं मेरे बड़े भाई जैसे बलविंदर आते थे, जो पावर लिफ्टिंग में कामनवैल्थ और वर्ल्ड चैंपियन हैं, के साथ ट्रेनिंग करने का मौका मिला. तब मुझे पावर लिफ्टिंग के बारे में कुछ नहीं पता था. चूंकि वे इसी की ट्रेनिंग करते थे, लिहाजा मैं ने भी वही सीखना शुरू कर दिया.

“बाद में उन्हें लगा कि मैं इस खेल में आगे जा सकता हूं तो उन्होंने मुझे सलाह दी कि मैं दिल्ली स्टेट पावर लिफ्टिंग के ट्रायल में हिस्सा लूं, क्या पता सिलेक्शन हो जाए.

यह 2010 की बात है. वहां मैं ने बैंच प्रैस में 72 किलो भारवर्ग में 140 किलो वेट उठाया था और मैं सैकंड आया था.

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बैंच प्रैस होता क्या है? इस सवाल के जवाब में भीम सिंह ने बताया, “साल 2010 से पावर लिफ्टिंग से अलग बैंच प्रैस शुरू की गई थी. इस तरह का यह पहला कॉम्पिटिशन था, जिस में मैं ने हिस्सा लिया था.

“इस खेल में रेफरी की कमांड पर चलना होता है. खिलाड़ी बैंच पर लेटता है. रैफरी के कहने पर वह बार पर लगे वेट को अनरैक करता है, उसे वहीं होल्ड करता है, फिर रैफरी के आदेश पर उसे अपनी छाती तक लाया जाता है. कुछ देर उसी पोजिशन में रुकते हैं, फिर रैफरी के कहने पर उस वेट को लिफ्ट कर बार से दोबारा रैक करना होता है. इस में खिलाड़ी को 3 चांस मिलते हैं. जो उस का बैस्ट होता है, उस से हारजीत का फैसला होता है.

“इस के बाद मैं जमशेदपुर में फरवरी, 2010 में नैशनल खेलने गया और गोल्ड मैडल जीता. वहां से वापस आया तो मेरे भाई मुझे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन लेने आए थे. गांव पहुंचे तो देखा कि गांव के बाहर 40-50 लोग जमा थे. उन्होंने मेरा शानदार स्वागत किया. किसी ने फूलमाला पहनाई तो किसी ने पैसों की माला. इस से मेरा हौसला बढ़ा और लगा कि अब इस में ही आगे कुछ करना है.

“लेकिन इस के लिए पैसे की बहुत जरूरत थी. बड़े भाई ने सपोर्ट किया. मैं भी नौकरी करने लगा था. मेरी डाइट पर तब 10,000 रुपए का खर्च आता था. 12 घंटे की नौकरी के बाद 3-4 घंटे अपनी प्रैक्टिस भी करनी होती थी. इसी तरह साल 2015 तक मेरे 4 नैशनल में 4 मैडल हो गए थे.

फिर मेरे गुरुजी और इंडियन पावर लिफ्टिंग फैडरेशन के जनरल सैक्रेटरी भूपेंद्र धवन ने कहा कि अब तुम्हें इंटरनैशनल खेलना है, इसलिए प्रैक्टिस करो. यह जनवरी की बात है. उस के बाद जुलाई, 2015 में उन्होंने कहा कि तुम्हें यूरोपियन चैंपियनशिप के लिए अगले महीने इंगलैंड जाना है.

“मैं ने ऐंट्री फीस और वीजा फीस भरी जिस में 30,000 रुपए का खर्च आया. लेकिन चैंपियनशिप से 4 दिन पहले मेरा वीजा रिजैक्ट हो गया. मेरा मन टूट गया और सोचा कि अब कहीं नहीं जाना, पर फिर गुरुजी ने कहा कि प्रैक्टिस जारी रख, अगली बार फिर ट्राई करेंगे. पर अगले साल भी जरमनी का वीजा रिजैक्ट हो गया.

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“पर मैं ने हार नहीं मानी और साल 2017 में इंगलैंड में होने वाली पावरलिफ्टिंग की यूनिवर्स प्रतियोगिता के लिए अप्लाई किया. साथ ही किसी की सलाह पर एक स्पोर्ट्स कंपनी प्योर प्ले का इनविटेशन लैटर भी वीजा के साथ भेजा. वीजा लगा और वहां मैं ने गोल्ड मैडल जीता.

“इस के महीने बाद मैं ने हौलैंड के लिए वीजा अप्लाई किया. वहां भी गोल्ड मैडल जीता. अगले साल जरमनी में मैं ने 3 गोल्ड मैडल जीते.”

इतने मैडल जीतने के बाद सरकार से कोई मदद मिली? इस सवाल पर भीम सिंह ने कहा, “ज्यादा नहीं. वैसे, पहले रेलवे नौकरी देती थी, पर पिछले 2 साल से वह भी बंद है.

“लेकिन इस खेल से मुझे यह फायदा हुआ है कि देशदुनिया में मेरा नाम हुआ है. मैं ने अपना जिम खोल लिया है. यहां मेरे कई शिष्य हैं जिन्हें मैं ट्रेनिंग दे रहा हूं और इस खेल को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा हूं.”

शहनाज गिल ने दिया ‘रसोड़े में कौन था?’ का ऐसा जवाब, वायरल हुआ वीडियो

टेलिवीजन इंडस्ट्री के सबसे बड़ रिएलिटी शो बिग बॉस का सीजन 13 (Bigg Boss 13) इतना सफल रहा कि उसने सभी सीजन के मुकाबले सबसे ज्यादा पौपुलैरिटी हासिल की. इस सीजन का हर कंटेस्टेंट लगातार सुर्खियों में बना रहा और तो और शो को खत्म हुए काफी समय हो गया है लेकिन आज भी इस सीजन के कंटेस्टेंट किसी ना किसी वजह से चर्चाओं का कारण बन ही जाते हैं.

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बिग बौस (Bigg Boss) सीजन 13 की एंटरटेनर और पंजाब की कैटरीना कैफ कहे जाने वाली कंटेस्टेंट शहनाज गिल (Shehnaz Gill) इस समय अपने फैंस के दिलों पर राज कर रही है. जी हां बिग बॉस (Bigg Boss) के घर से निकलने के बाद शहनाज गिल (Shehnaz Gill) की फैन फौलोविंग में काफी उछाल देखने को मिला है और अब सभी फोटोग्राफर्स भी इस उम्मीद में रहते हैं कि कब वे शहनाज गिल की फोटो खींच सकें.

हाल ही में शहनाज गिल (Shehnaz Gill) का एक वीडियो बड़ी ही तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वे अपने किसी दोस्त के साथ होती हैं और तभी फोटोग्राफर वहां पहुंच कर उनकी तारीफ करने लगता है और फोटो खींचने लगता है. इतना ही नहीं बल्कि वे फोटोग्राफर शहनाज की तारीफ कर उनसे उनका मास्क भी हटाने को कहता है ताकी वे शहनाज की अच्छे से फोटो खींच सके.

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शहनाज गिल (Shehnaz Gill) अपना मास्क उतारते हुए उस फोटोग्राफर के साथ मस्ती करते हुए कहती हैं कि, “तेरे को लोग बोलोंगे कि इसका मास्क हटवा रहा है”. इसके बाद फोटोग्राफर शहनाज से पूछता है ‘रसोड़े में कौन था?’ (Rasode Me Kaun Tha) जिस पर शहनाज जवाब देती हैं, ‘कौन सा रसोड़ा, व्हाट इज रसोड़ा, आई डोन्ट नो ऐनी रसोड़ा.’ शहनाज का ये क्यूट जवाब सभी फैंस को बेहद पसंद आया.

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आपको बता दें कि हाल ही में शहनाज गिल (Shehnaz Gill) टोनी कक्कड़ (Tony Kakkar) के साथ सौंग ‘कुर्ता पजामा’ (Kurta Pajama) में दिखाई दी थीं जिसे फैंस ने खूब पसंद किया था. इस गाने को करीब 1 महीने में 85 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं.

असीम रियाज और हिमांशी खुराना ने दिया फैंस को सरप्राइज, आज रिलीज होगा नया म्यूजिक वीडियो

बिग बॉस सीजन 13 (Bigg Boss 13) के सबसे पौपुलर और सबसे पसंदीदा जोड़ी में से एक असीम रियाज (Asim Riaz) और हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) की जोड़ी एक बार फिर चर्चा में आ गई है. बीते दिन ही असीम रियाज और हिमांशी खुराना ने अपने फैंस को सरप्राइज देने के लिए अपने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने नए गाने का पोस्टर शेयर किया है. असीम और हिमांशी के इस नए म्यूजिक वीडियो का नाम है ‘अफसोस करोगे’ (Afsos Karoge) जो कि आज ही के दिन रिलीज होने जा रहा है.

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जैसा कि हम पोस्टर में देख सकते हैं कि असीम रियाज (Asim Riaz) और हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) का ये नया म्यूजिक वीडियो ‘देसी म्यूजिक फैक्टरी’ (Desi Music Factory) के औफिशियल यू-ट्यूब चैनल पर ही रिलीज किया जाएगा. इस पोस्टर में असीम और हिमांशी बड़े ही रोमांटिक अंदाज में दिखाई दे रहे हैं. आपको बता दें कि इस म्यूजिक वीडियो को पौपुलर सिंगर स्टेबिन बेन (Stebin Ben) ने अपनी आवाज दी है.

 

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इससे पहले भी असीम रियाज (Asim Riaz) और हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) के कई म्यूजिक वीडियोज आ चुके हैं जिन्हें फैंस ने खूब पसंद किया था. हाल ही में हिमांशी और असीम का एक म्यूजिक वीडियो काफी वायरल हुआ था जिसका नाम है ‘दिल को मैने दी कसम’ (Dil Ko Maine Di Kasam). इस म्यूजिक वीडियो पर अब तक 43 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं.

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“DISTANCE” ✨✨Track is out now guys show some love and support to @iamhimanshikhurana @tseries.official

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अब देखने वाली बात ये होगी कि बिग बॉस 13 (Bigg Boss 13) की सबसे चर्चित जोड़ी असीम रियाज (Asim Riaz) और हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) का नया म्यूजिक वीडियो ‘अफसोस करोगे’ (Afsos Karoge) को फैंस का कितना प्यार मिलता है.

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ताजमहल की नगरी में : भाग 2

अगले दिन विजय मां को आगरा ले आया. सास के आ जाने के बाद प्रेमलता का अजय से घर में मिलना संभव नहीं था. यह चिंता प्रेमलता ने अजय के सामने जाहिर की तो अजय ने कहा, ‘‘घर में न सही, हम बाहर मिल लेंगे. तुम क्यों फिक्र करती हो.’’

‘‘मुझे लग रहा है कि विजय को मुझ पर शक हो गया है. अब वह रोज रात को दारू की बोतल ले आता है. तुम तो जानते हो न गुस्से में उसे कुछ होश नहीं रहता और अगर उसे मेरे तुम्हारे रिश्ते के बारे में पता चल गया तो पता नहीं वह क्या करेगा. वैसे भी इस रिश्ते का अंत क्या है?’’ प्रेमलता बोली.

‘‘मैं क्या जानूं भाभी, मैं तो इतना जानता हूं कि मैं तुम से प्यार करने लगा हूं. मेरा चंचल मन तुम्हारे इर्दगिर्द ही मंडराता रहता है. हां, अगर तुम चाहो तो हम यहां से कहीं दूर चले जाएंगे और अपनी दुनिया बसा लेंगे.’’ अजय ने सुझाव दिया.

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‘‘लेकिन मेरे बेटे का क्या होगा? इस तरह तो दो परिवारों के बीच दुश्मनी हो जाएगी. नहीं, अभी ऐसे ही चलने दो, फिर आगे देखते हैं क्या होता है.’’ प्रेमलता ने सलाह दी.

अजय का पहले की तरह ही विजय के यहां आनाजाना लगा रहा, जो विजय की मां को अखरता था. वह बीमार जरूर थीं लेकिन उन की अनुभवी नजरों ने बहू के चालचलन को पहचान लिया. उन्होंने महसूस किया कि किसी से फोन पर बात करने के बाद बहू खरीदारी के बहाने बाहर चली जाती है. उसे लगा कि जरूर दाल में काला है.

एक दिन उस ने बेटे से कहा, ‘‘मैं हफ्ते भर से यहां हूं, अब घर जाना चाहती हूं. पर यहां सब कुछ ठीक नहीं है. गांव की बात दूसरी थी पर अजय यहां भी बहू के आगेपीछे मंडराता रहता है.’’

‘‘अम्मा, अजय तो बचपन से हमारे घर आता है. प्रेमलता को भी बहुत मानता है. तुम ऐसा क्यों सोचती हो.’’ विजय ने समझाना चाहा.

‘‘अब तू ही देख ले, कल तेरे पिताजी मुझे ले जाएंगे और जब दवा खत्म हो जाएगी तो मैं तुम्हें बता दूंगी.’’

अगले दिन मुन्ना सिंह पत्नी को लिवा ले गए. मां की बातों से न न करते हुए भी विजय के दिलोदिमाग में शक का बीज अंकुरित हो गया.

पिछले हफ्ते विजय के एक साथी ने प्रेमलता को बाजार में अजय के साथ देखा था. यह बात उस ने विजय को बताई तो उसे विश्वास नहीं हुआ था कि उस की पत्नी और अजय के बीच कुछ चक्कर है.

फिर भी अगले दिन उस ने प्रेमलता से पूछा, ‘‘अजय, मेरी गैरमौजूदगी में यहां क्यों आता है?’’

‘‘अगर तुम कहो तो मैं उसे मना कर दूंगी.’’ प्रेमलता बोली.

‘‘नहींनहीं, चलो छोड़ो, मैं ने तो ऐसे ही पूछ लिया.’’

लेकिन यह ऐसे ही पूछ लेना प्रेमलता के लिए खतरे की घंटी की तरह था. इसलिए अब वह सतर्क रहने लगी.

सास के चले जाने के बाद प्रेमलता ने चैन की सांस ली. विजयपाल को कभीकभी लगता था कि उस का शक गलत भी हो सकता है, लेकिन शक से छुटकारा पाना भी आसान नहीं होता.

अजय के दिल में भी एक अजीब सी हलचल थी. अब प्रेमलता के साथ अपनी दुनिया बसाना चाहता था. वह उस की हर इच्छा पूरी करने के लिए तैयार था.

पिछले कुछ दिनों से वह रोज रात को घर चला जाता था, लेकिन 12 दिसंबर, 2019 को वह घर नहीं पहुंचा और उस का फोन भी स्विच्ड औफ आ रहा था.

रामअवतार ने विजयपाल को फोन किया तो उस ने कहा कि अजय से तो उस की कई दिनों से मुलाकात नहीं हुई.

उन्होंने अपनी रिश्तेदारों और अजय के दोस्तों को फोन कर के पूछताछ की, लेकिन सभी ने बताया कि 12 दिसंबर को शाम तक अजय ट्रांसपोर्ट कंपनी में ही था फिर उस के मोबाइल पर कोई काल आई थी और वह चला गया था.

यह बात चिंताजनक थी. रामअवतार 14 दिसंबर को थाना छत्ता जीवनी मंडी आया और उस ने थानाप्रभारी उमेशचंद्र त्रिपाठी को अपने 25 वर्षीय बेटे के बारे में बता कर गुमशुदगी दर्ज करा दी. उस ने यह भी शक जताया कि अजय की गुमशुदगी में विजयपाल और उस की बीवी का कोई हाथ हो सकता है क्योंकि एक दिन विजय का उसे फोन आया था.

उस ने कहा था, ‘‘चाचा, तुम्हारा बेटा अब जवान हो गया है और उसे इधरउधर मुंह मारने की आदत हो गई है. अच्छा होगा उस की शादी कर दो.’’

रामअवतार के अनुसार उस ने जब फोन कर के अजय से पूछतछ की तो उस ने यही कहा कि विजय भैया मजाक कर रहे हैं.

थानाप्रभारी उमेशचंद्र त्रिपाठी ने रामअवतार से अजय का एक फोटो लिया और उन्हें काररवाई करने का आश्वासन दे कर घर भेज दिया. इस के बाद थानाप्रभारी ने अजय के फोटोग्राफ जिले के सभी थानों में भेज दिए. लेकिन काफी पूछताछ करने के बाद भी विजय जैसे दिखने वाले किसी व्यक्ति की लाश मिलने की खबर नहीं मिली.

इस के बाद पुलिस ने ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक तथा कई मजदूरों से पूछताछ की, लेकिन किसी ने नहीं बताया कि अजय और विजय के बीच कोई झगड़ा था. इस के बाद पुलिस जीवनी मंडी स्थित विजय के घर गई. उस समय विजयपाल ट्रांसपोर्ट कंपनी में जाने को तैयार हो रहा था. पुलिस को देखते ही वह सकपका गया. लेकिन फिर हिम्मत कर के उस ने पूछा, ‘‘साहब, आप कैसे आए हैं?’’

‘‘तुम से अजय के बारे में पूछताछ करनी थी,’’ दरोगा नरेंद्र कुमार शर्मा ने कहा.

‘‘पूछिए, क्या पूछना है. अजय मेरा चचेरा भाई है. हम दोनों में बहुत प्यार है, लेकिन आप अजय के बारे में मुझ से क्यों पूछ रहे हैं? कुछ किया है क्या उस ने?’’ विजय बोला.

‘‘उस ने कुछ किया है या नहीं, यह तो पता नहीं पर उस के साथ जरूर कुछ गलत हुआ है. अब तुम बताओ कि तुम्हें अजय के बारे में क्या पता है?’’ दरोगाजी ने पूछा.

‘‘साहब, अजय अपना काम मेहनत से कर रहा है. कमाई भी ठीक है. कभीकभी हमारे घर भी आता है.’’ विजय ने कहा.

‘‘तो अब तेरी जबान से निकलवाना ही पड़ेगा.’’ एसआई नरेंद्र कुमार ने सख्ती से कहा, ‘‘और तेरी पत्नी कहां है?’’

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‘‘साहब, वह तो अपने मायके गई है. आजकल में आ जाएगी. मायके जाना भी गुनाह है क्या?’’ विजयपाल ने कहा.

पुलिस समझ गई कि विजयपाल चालाक बन रहा है. पुलिस ने अजय, विजय और प्रेमलता के मोबाल नंबर सर्विलांस पर लगा दिए थे. रिपोर्ट से पता चला कि अजय की विजयपाल और प्रेमलता के साथ कई बार बात हुई थी और 12 दिसंबर, 2019 को प्रेमलता और अजय के बीच भी कई बार बात हुई थी.

पुलिस को विश्वास होने लगा था कि जरूर मामला अवैध संबंधों से जुड़ा है. पर विजय पाल कुछ भी बताने को तैयार नहीं था. ऐसे में प्रेमलता की गिरफ्तारी जरूरी थी. पुलिस प्रेमलता के पीछे लग गई. 16 दिसंबर को वह वाटर वर्क्स चौराहे पर दिख गई. पुलिस उसे हिरासत में ले कर थाना छत्ता लौट आई.

प्रेमलता से पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उस ने कहा, ‘‘साहब, अजय के कत्ल में मेरा कोई हाथ नहीं है. यह ठीक है कि अजय और मेरे बीच अवैध संबंध बन गए थे और मेरे पति ने हम दोनों को एक साथ देख लिया था. विजय ने उसे रास्ते से हटाने का तय कर लिया था.’’

प्रेमलता के अनुसार उस ने पति से कहा था कि वह अजय से कभी नहीं मिलेगी, लेकिन विजय ने मारपीट कर उस से अजय को फोन करा कर अपने घर मिलने को बुलाने को कहा. पति की बात मानना मेरी मजबूरी थी, फिर न चाहते हुए भी उस ने अजय को फोन कर के बुला लिया.

विजय का गुस्सा काबू में नहीं था, जैसे ही अजय घर आया तो विजय ने तेजधार के बांके से अजय पर वार कर किए. अजय कुछ समझ नहीं पाया. लहूलुहान हो कर वह फर्श पर गिर गया, फिर विजय ने उस का गला दबा दिया.

अब लाश ठिकाने लगानी थी. दोनों ने मिल कर एक साड़ी में लाश लपेटी, फिर उसे बोरे में भरा. विजय ने उसे धमकाया कि जुबान खोलने पर उस का भी यही हाल किया करेगा. वह बुरी तरह डर गई. प्रेमी देवर मर चुका था, जिस के साथ वह दुनिया बसाना चाहती थी.

विजय और प्रेमलता लाश वाले बोरे को मोटरसाइकिल पर रख कर झरना नाला के जंगल में ले गए, जहां लाश वाला बोरा फेंक दिया और घर आ कर सारा घर भी धो दिया.

प्रेमलता के बयान के बाद विजय ने भी अपना गुनाह कबूल कर लिया. पुलिस ने विजय की निशानदेही पर झरना नाला जंगल से अजय तोमर की लाश और आलाकत्ल बरामद कर लिया. पुलिस ने दोनों को भादंवि की धारा 364, 302, 201 के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

गलत काम का नतीजा गलत ही होता है. बूढ़े बाप ने अपने जवान बेटे को खो दिया. शादीशुदा प्रेमलता ने अपने जवान देवर को गुमराह किया. 2 घरों की खुशियां अंधी आशिकी ने छीन लीं और उन का बेटा अनाथ हो गया.

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