अप्रैल से ले कर सितंबर तक भारत के मैदानी इलाकों में गरमी और बरसात का मौसम रहता है. कभी चिलचिलाती जानलेवा लू तो कभी बादल बरसने के बाद उमस भरी चिपचिपाती गरमी.

शहरों में तो लोग छाते या टोपी से अपना बचाव कर लेते हैं, पर गांवदेहात में इन चीजों का चलन ज्यादा नहीं है. हां, वहां की लड़कियां शहर की लड़कियों की तरह चुन्नी वगैरह से खुद को ढक कर धूप के हमले से खुद को बचा लेती हैं, पर लड़कों को छाते और टोपी का झंझट ज्यादा रास नहीं आता है.

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