पंचवटी का रावण : भाग 2

एसपी साहब की पूछताछ में पंचवटी ने यह तो मान लिया कि रामदीन से उस के संबंध थे और कल्लू इस का विरोध करता था. लेकिन हत्या के बारे में उस ने कुछ नहीं बताया. कुछ सोच कर एसपी साहब ने उसे घर भेज दिया.

एसपी सिद्धार्थ शंकर द्वारा गठित विशेष पुलिस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया, फिर कल्लू के घर वालों के बयान दर्ज किए.

इस के बाद सोहाना गांव निवासी रामदीन व रज्जन के घर दबिश दी गई, लेकिन दोनों घर से फरार थे. उन की सुरागसी के लिए टीम ने उन के परिवार वालों पर दबाव बनाया, उन्हें हिरासत में ले कर कड़ी पूछताछ की गई. लेकिन रामदीन व रज्जन का पता नहीं चला.

उधर सर्विलांस टीम ने मृतक की पत्नी पंचवटी के मोबाइल फोन को खंगाला तो पता चला कि पंचवटी एक नंबर पर अकसर बात करती थी. उस नंबर का पता लगाया गया तो जानकारी मिली कि वह नंबर सोहाना गांव के ही रामदीन का है. इस नंबर पर 28 जून कोे सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक पंचवटी बराबर बात करती रही थी. उसी दिन कल्लू का कत्ल हुआ था.

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सर्विलांस टीम ने लोकेशन ट्रेस करने के लिए रामदीन के नंबर को सर्विलांस पर ले लिया और पंचवटी के नंबर को लिसनिंग पर लगा दिया गया, ताकि दोनों बात करें तो पुलिस को जानकारी हो जाए. इतना ही नहीं टीम ने मृतक के मोबाइल फोन को भी सर्विलांस पर लगाया ताकि फोन चालू करते ही उस की लोकेशन पुलिस को मिल जाए.

पंचवटी ससुराल वालों को चकमा दे कर कहीं फरार न हो जाए, इसलिए जांच कर रही टीम ने उस की निगरानी के लिए घर के बाहर 2 महिला और 2 पुरुष सिपाहियों को तैनात कर दिया. घर वालों को भी सतर्क किया गया कि वे अपनी बहू पर नजर रखें.

2 जुलाई, 2020 की सुबह 7 बजे सर्विलांस टीम को रामदीन के मोबाइल फोन की लोकेशन केन नदी किनारे सिद्ध बाबा देवस्थान के पास की मिली. सर्विलांस टीम ने इस की जानकारी विशेष पुलिस टीम को दे दी.

चूंकि जानकारी अतिमहत्त्वपूर्ण थी, इसलिए टीम सादे कपड़ों में वहां पहुंच गई. लगभग 8 बजे सुबह केन नदी की ओर से सिद्ध बाबा देवस्थान की तरफ 3 आदमी आते दिखे. पुलिस टीम ने उन्हें टोका तो तीनों देवस्थान की ओर भागे. लेकिन पुलिस टीम ने उन्हें दबोच लिया.

तीनों को थाना बांदा कोतवाली लाया गया. थाने पर जब उन से नामपता पूछा गया तो एक ने अपना नाम रामदीन, दूसरे ने अपना नाम रज्जन बताया. जबकि तीसरे का नाम चंद्रप्रकाश उर्फ भूरा, निवासी वनसखा गिरवां जिला बांदा पता लगा.

तब तक एएसपी महेंद्र प्रताप चौहान भी कोतवाली आ गए थे. उन्होंने उन तीनों से कल्लू हत्याकांड के संबंध में पूछा तो वे साफ मुकर गए. उन्होंने बताया कि मृतक के घर वाले उन से रंजिश रखते हैं, इसलिए उन्हें फंसा रहे हैं.

यह सुनते ही पास खड़े कोतवाल दिनेश सिंह को गुस्सा आ गया. वह तीनों को अलग कक्ष में ले गए और तीनों की जम कर पिटाई की. इस से तीनों टूट गए. फिर उन्होंने एएसपी चौहान के सामने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. यही नहीं, पुलिस टीम ने उन तीनों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल 2 तमंचे, 2 जिंदा कारतूस, 2 खोखे और खून सनी कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली, जिसे उन्होंने घटनास्थल से कुछ दूरी पर झाडि़यों में छिपा दिया था.

पुलिस ने रामदीन से मृतक कल्लू का मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया. बरामद सामान को साक्ष्य के लिए सीलमोहर कर दिया गया.

पूछताछ में हत्यारोपी रज्जन ने बताया कि मृतक कल्लू की पत्नी पंचवटी से रामदीन के नाजायज संबंध थे. रामदीन पंचवटी से शादी करना चाहता था. लेकिन उस का पति कल्लू बाधक बना हुआ था. कल्लू को रास्ते से हटाने के लिए पंचवटी और रामदीन ने मिल कर मुझे 3 लाख की सुपारी दी थी. साथ ही रामदीन ने 10 बिस्वा जमीन भी देने का वादा किया था.

सुपारी मिलने के बाद मैं ने अपने रिश्तेदार चंद्रप्रकाश उर्फ भूरा को डेढ़ लाख रुपया देने का लालच दे करअपने साथ मिला लिया. इस के बाद हम लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से कल्लू की हत्या कर दी.

रज्जन के बयान से स्पष्ट था कि कल्लू की हत्या में उस की पत्नी पंचवटी बराबर की साझेदार थी. पुलिस टीम ने महिला पुलिस के सहयोग से पंचवटी को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. थाना कोतवाली में जब उस का सामना प्रेमी रामदीन और उस के सहयोगी रज्जन से हुआ तो वह सब कुछ समझ गई. उस ने सहज ही पति की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

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चूंकि आरोपियों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था और आलाकत्ल कुल्हाड़ी तथा तमंचा भी बरामद करा दिया था, इसलिए इंसपेक्टर दिनेश सिंह ने सब को विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस जांच और मुलजिमों से विस्तृत पूछताछ में एक ऐसी औरत की कहानी सामने आई, जिस ने देह सुख के लिए अपने उस पति को मौत के घाट उतरवा दिया, शादी के समय जिस के साथ पूरी जिंदगी गुजारने का वचन दिया था.

6 साल पहले उस के इसी पति को ढूंढने के लिए उस के पिता सिपाही लाल ने महीनों धक्के खाए थे. और जब कालीचरण उर्फ कल्लू मिल गया तो पिता ने इसे बेटी की किस्मत माना था. बाद में 18 जून, 2014 को पिता ने पंचवटी का हाथ इसी कल्लू के हाथ में दे दिया था.

कालीचरण को सब लोग भले ही कल्लू कहते थे, लेकिन वह था गोराचिट्टा और स्मार्ट. ऐसा पति पा कर पंचवटी खुश थी. कल्लू भी पंचवटी सी सुंदर बीवी पा कर फूला नहीं समाता था.

शादी के बाद कई सालों तक पंचवटी और कल्लू की गृहस्थी खूब मजे से चलती रही. लेकिन फिर धीरेधीरे उन के आंतरिक रिश्ते में खटास आती गई. वजह यह कि एक तो कल्लू दिन भर काम कर के हाराथका घर लौटता था, दूसरे उस के जोशोखरोश में कमी आ गई थी.

इसी बीच पंचवटी ने कल्लू के परिवार से अलग रहने की जिद करनी शुरू कर दी. कल्लू के पिता चिनकावन को जब पता चला कि छोटी बहू परिवार से अलग रहना चाहती है, तो उन्होंने उसे रहने को 2 कमरों वाला अलग मकान दे दिया.

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परिवार से अलग होने के बाद पंचवटी पूरी तरह आजाद हो गई. अब वह पति को अपनी अंगुलियों पर नचाने लगी. पति के साथ वह सैरसपाटे के लिए बांदा शहर भी जाने लगी.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

पंचवटी का रावण : भाग 1

पंचवटी ने जो कुछ बताया, वह किसी के भी गले उतरने वाला नहीं था, फिर सिद्धार्थ शंकर तो आईपीएस थे. घटनाक्रम का खाका दिमाग में उतारने के बाद उन्होंने गहरी सांस ले कर पूछा, ‘‘तुम कितने समय से मायके में थीं पंचवटी?’’

‘‘जी, एक साल से मायके में थी. मेरा मायका हमीरपुर के गांव रूरीपहरी में है. पिता सिपाही लाल अरहर का व्यापार करते हैं. अरहर गांवों से…’’

पंचवटी मायके का और बखान करना चाहती थी, लेकिन सिद्धार्थ शंकर ने उसे बीच में टोक दिया, ‘‘सिर्फ उतना बताओ जितना पूछा जाए.’’

उन की आवाज में घुले रोष को समझ पंचवटी सहम गई. उन्होंने उस से अगला सवाल किया, ‘‘तुम्हारी अपनी घरगृहस्थी थी, सालभर मायके में रहने की कोई खास वजह? मायके वालों ने रोक रखा था या आने का मन नहीं किया. हां, सोचसमझ कर जवाब देना, क्योंकि हम सभी से पूछताछ करेंगे.’’

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‘‘हम दोनों में अनबन हो गई थी, साहब. इसलिए मायके चली गई थी. लौट कर आना तो था ही, सो आ गई.’’ पंचवटी ने कहा तो एसपी साहब ने पूछा, ‘‘खुद कहां आईं, तुम्हारा पति लाया था. अच्छा, यह बताओ, ससुराल आने के लिए पति को तुम ने बुलाया था या वह खुद ही तुम्हें लाने के लिए पहुंचा?’’

‘‘वह नाराज थे, मैं ने ही उन्हें फोन कर के बुलाया था. वह मेरे गांव रूरीपहरी आए और मैं उन के साथ चली आई.’’

‘‘…और वापसी में कुछ बदमाशों ने तुम्हारे पति को मार डाला, उस का मोाबइल भी ले गए.’’ सिद्धार्थ शंकर ने पंचवटी के आंसुओं से भरे चेहरे पर तीखी नजर डालते हुए पूछा, ‘‘तुम्हारा मोबाइल, जिस से तुम ने पुलिस को खबर दी, पति से महंगा रहा होगा. बदमाशों ने तुम से न मांगा न छीना. तुम पर ऐसी मेहरबानी क्यों?’’

‘‘मैं क्या जानूं साहब, जो सच था मैं ने बता दिया.’’ पंचवटी ने गालों पर ढुलक आए आंसुओं को पोंछ कर चेहरा झुका लिया.

एसपी साहब ने उस पर उपेक्षा की नजर डाल कर कहा, ‘‘कुछ सच बाद के लिए बचा कर रखो, शाम को फिर पूछताछ होगी. खयाल रखना मुझे झूठ पसंद नहीं है.’’

जहां सिद्धार्थ शंकर मीणा पंचवटी से पूछताछ कर रहे थे, वहां से थोड़ी सी दूरी पर उस के पति कालीचरण उर्फ कल्लू की गोली और घावों से छलनी लाश पड़ी थी. आसपास लोगों की भीड़ जमा थी, जो कभी कल्लू की लाश को देख रही थी तो कभी जमीन पर पड़ी उस की मोटरसाइकिल को. कुछ लोगों की नजर पंचवटी पर भी अटकी हुई थी.

बांदा शहर कोतवाली प्रभारी इंसपेक्टर दिनेश सिंह अपनी टीम के साथ घटनास्थल का नक्शा बनाने, लाश पर गोलियों और चोटों के निशान गिनने और लोगों से पूछताछ में लगे थे.

एसपी सिद्धार्थ शंकर और एएसपी महेंद्र प्रताप सिंह को इंसपेक्टर दिनेश सिंह ने ही सूचना दे कर बुलाया था. वह अपने साथ फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को भी लाए थे, जिन्होंने अपनाअपना काम निपटा लिया था.

वापस जाते समय एसपी साहब ने इंसपेक्टर दिनेश सिंह को निर्देश दिया, ‘‘लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो और मृतक के घर वालों से कहो, रिपोर्ट लिखाएं. हां, इस औरत को शाम को कोतवाली बुला लेना, पूछताछ करनी है.’’

यह घटना 28 जून, 2020 की है. कोतवाली प्रभारी दिनेश सिंह को कंट्रोल रूम से फोन पर सूचना मिली थी कि सोहाना गांव के बाहर एक युवक की हत्या हो गई है. गांव सोहाना कोतवाली से 12 किलोमीटर दूर था. इंसपेक्टर दिनेश सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने एसपी सिद्धार्थ शंकर और एएसपी महेंद्र प्रताप सिंह को घटना के बारे में बता दिया था.

घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा थी. वहीं तालाब के पास कल्लू की लाश पड़ी थी, उस की मोटरसाइकिल भी. लाश के पास बैठी उस की पत्नी पंचवटी रो रही थी. मृतक की लाश देख पुलिस टीम भी सिहर उठी.

हत्यारों ने कल्लू का कत्ल बड़ी बेरहमी से किया था. न केवल उस के सीने में गोली मारी गई थी, बल्कि किसी तेजधार हथियार से उस की गरदन और शरीर के दूसरे अंगों पर भी वार किए गए थे. उस की गरदन आधी कट गई थी.

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दिनेश सिंह ने पंचवटी को धैर्य बंधाने के बाद उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस का पति कल्लू उसे मायके से ले कर आ रहा था. 4 बजे जब हम लोग गांव के बाहर तालाब के पास पहुंचे तो बदमाशों ने मोटरसाइकिल रुकवा कर उस के पति के सीने में गोली मार दी. फिर उन पर कुल्हाड़ी से कई वार किए और उन का मोबाइल ले कर फरार हो गए.

इंसपेक्टर दिनेश सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण करने और लोगों से बातचीत के बाद कल्लू के शव को पोस्टमार्टम के लिए बांदा जिला अस्पताल भिजवा दिया.

उसी दिन मृतक कल्लू के भाई रामशरण ने थाना कोतवाली बांदा में कल्लू के कत्ल की नामजद रिपोर्ट लिखाई. उस ने इस रिपोर्ट में रामदीन, रज्जन और चंद्रप्रकाश उर्फ भूरा को नामजद किया. रिपोर्ट में पंचवटी का भी नाम था.

इंसपेक्टर दिनेश सिंह ने रामशरण से कहा कि कल को वह एसपी साहब के औफिस जा कर उन से मिल ले. एसपी साहब पंचवटी से पूछताछ करना चाहते हैं लेकिन उस से पहले वह तुम से कुछ जानकारियां हासिल करना चाहते हैं.

उधर एसपी सिद्धार्थ शंकर मीणा ने कल्लू हत्याकांड का जल्दी खुलासा करने के लिए एएसपी महेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की. इस टीम में इंसपेक्टर दिनेश सिंह, दरोगा राजीव यादव, मुन्नालाल, सिपाही कुंवर सिंह, मेवालाल, महिला सिपाही पार्वती, एसओजी प्रभारी आनंद कुमार सिंह और सर्विलांस टीम को शामिल किया गया.

अगले दिन रामशरण एसपी सिद्धार्थ शंकर से मिला. उन के यह पूछने पर कि उस ने अपने भाई कल्लू की हत्या में जिन लोगों को नामजद किया है, उन पर शक क्यों है. इस पर रामशरण ने बताया कि रामदीन अपराधी प्रवृत्ति का दबंग आदमी है. उस के और पंचवटी के नाजायज संबंध हैं. कल्लू इन संबंधों का विरोध करता था. पतिपत्नी में मारपीट भी होती थी. इसी वजह से पंचवटी ने उसे मरवा दिया.

‘‘और बाकी लोग, उन की क्या भूमिका है?’’

‘‘बाकी 2 लोग रज्जन और चंद्रप्रकाश रामदीन के रिश्तेदार हैं, अपराधी भी हैं. रामदीन ने उन्हें साथ लिया होगा. पैसे वाला आदमी है. कुछ रकम दे दी होगी.’’ रामशरण ने बताया.

एसपी साहब ने रामशरण को घर भेज दिया. पंचवटी पर उन्हें पहले ही शक था. अब उस से पूछताछ के लिए मजबूत आधार मिल गया था.

अगले दिन एसपी सिद्धार्थ शंकर के आदेश पर पंचवटी को कोतवाली बुलाया गया. एसपी साहब ने महिला सिपाहियों की मौजूदगी में पंचवटी से पूछताछ की. उन का पहला सवाल था, ‘‘रामदीन से तुम्हारा क्या रिश्तानाता है?’’

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‘‘वह मेरे पति कल्लू का दोस्त था. वही उसे घर ले कर आते थे.’’

‘‘मैं ने तुम से कहा था कि झूठ मुझे पसंद नहीं है, लेकिन तुम ने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया. सच बताओ, तुम ने रामदीन से कल्लू की हत्या क्यों कराई? अगर तुम ने झूठ बोला तो तुम्हारे सिर पर खड़ी ये महिला सिपाही मारमार कर तुम्हारी खाल उधेड़ देंगी.’’

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

ब्रैस्ट का साइज हैवी होने के कारण सेक्स के दौरान मैं सही महसूस नहीं करती. बताएं मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 26 साल की हूं. पीरियड्स के दौरान मेरी ब्रैस्ट का साइज हैवी हो जाता है. ब्रैस्ट कड़ी भी हो जाती है. पीरियड्स के कुछ दिनों बादतक भी यह समस्या बनी रहती है. इस से सेक्स के दौरान मैं सही महसूस नहीं करती. बताएं मैं क्या करूं?

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जवाब-

पीरियड्स के दौरान ब्रैस्टहैवी होना कोई गंभीर समस्या नहीं है. ऐसा आमतौर पर सौल्ट रिटैंशन की वजह से होता है. बेहतर होगा कि आप फैमिली डाक्टर से मिलें और उन्हें अपनी परेशानी बताएं. उचित उपचार व खानपान से न सिर्फ इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है, बल्कि आप का सौल्ट रिटैंशन और कंजैशन भी कम होजाएगा.

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पंचवटी का रावण

अंधविश्वास की बलिवेदी पर : रूपल क्या बचा पाई इज्जत

मूर्तियों की स्थापना, पैसों की बरबादी

आज से तकरीबन 600 साल पहले कबीरदास ने अपने एक दोहे में कहा था :

पाहन पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूं पहार,

याते तो चाकी भली पीस खाए संसार.

जब विज्ञान का आविष्कार नहीं हुआ था, तब कबीर ने मूर्तिपूजा करने वाले अंधभक्तों को चेताया था कि पत्थरों की मूर्ति पूजने से कभी भगवान नहीं मिलता. ऐसी मूर्तियों से तो पत्थर से बनी चक्की ज्यादा उपयोगी है, जिस में पीसा गया आटा लोगों के पेट भरने के काम आता है.

अफसोस मगर आज की सभ्य, शिक्षित और वैज्ञानिक सोचसमझ वाली पीढ़ी भी कबीर की इन बातों को मानने तैयार नहीं है.

दरअसल, जब हमारे धर्मनिरपेक्ष संविधान की दुहाई देने वाले सरकार के जिम्मेदार मंत्री देश में जगहजगह ऊंचीऊंची मूर्तियां बनवाने और मंदिरमसजिद के निर्माण को ही देश का विकास मानते हों, वहां जनता का ऐसा  अनुसरण करना गलत भी नहीं है. जब देश के वैज्ञानिक चंद्रयान की कामयाबी के लिए मंदिरों में हवनपूजन करते हों, जहां राफेल विमान पर नीबू लटका कर नारियल फोड़े जाते हों, वहां जनता का अंधविश्वासी होना लाजिमी है.

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भारत जैसे विकासशील देश में अंधविश्वास की जड़ों में मठा डालने का काम पंडेपुजारियों द्वारा बखूबी किया जा रहा है,क्योंकि उन की रोजीरोटी बिना मेहनत के इसी तरह के पाखंडी कामों के दम पर चल रही है.

हमारे देश में गरीबी के हालात ये हैं कि आबादी का बड़ा तबका दो वक्त की रोटी मुश्किल से जुटा पाता है, लेकिन पंडेपुजारियों द्वारा धर्म का डर दिखा कर  धार्मिक आडंबरों के लिए लोगों को पैसे खर्च करने मजबूर किया जाता है.  दुर्गा पूजा और गणेश उत्सव पर देश के गलीमहल्ले में मूर्तियां स्थापित की जाती हैं. 9-10 दिन चलने वाले इन उत्सवों पर कई लाख रुपए तक लुटाए जाते हैं. 10,000 रुपए से ले कर 50,000 रुपए की लागत इन मूर्तियों के निर्माण में आती है. 10 दिन बाद उन्हीं मूर्तियों को नदीतालाबों में बहा दिया जाता है.

एक तरफ देश में कोरोना से लड़ने के लिए औक्सीजन और‌ वैंटिलेटर की कमी का रोना रोया जाता है, वहीं दूसरी तरफ छोटे गांवकसबों और शहरों में करोड़ों रुपए इन मूर्तियों पर पानी की तरह बहा दिए जाते हैं. महंगी मूर्तियां बनवा कर उन्हें नष्ट कर देना पैसे की क्रिमिनल बरबादी है.

इस पैसों की बरबादी में उन पंडों की भूमिका रहती है जो खुद कोई  कामधाम करते नहीं हैं, केवल जनता को पूजापाठ में उलझा कर खूब दानदक्षिणा बटोर कर मुफ्त की रोटियां तोड़ते हैं.

चंदे से मौजमस्ती

गणेशोत्सव और दुर्गोत्सव पर बड़ीबड़ी मूर्तियों की स्थापना के लिए पंडेपुजारियों के इशारों पर चंदे का कारोबार चलता है. आम आदमी पर इन पंडों के एजेंट चंदे के लिए भी दबाव डालते हैं. क‌ई कसबों और छोटे शहरों में तो रोड पर बैरियर लगा कर रोड से निकलने वाले गाड़ी मालिकों से जबरन चंदा वसूली की जाती है. चंदा न देने पर उन से बदसुलूकी करने के साथ गाड़ियों में तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया जाता है.

पंडालों में मूर्ति स्थापित होने के बाद पूजा करने आने के लिए भी दबाब डाला जाता है. जो आनाकानी करता है उस का हुक्कापानी बंद कर सामाजिक बहिष्कार किया जाता है. गरीब, एससीबीसी तबके के लोग इन दबंगों से लड़ नहीं सकते तो मजबूरी में इन से तालमेल बना कर अपना पेट काट कर मूर्ति बनाने के लिए चंदा देते हैं और नदियों में बहाने के समय ढोलनगाड़ों का खर्च भी.

गरीबों की खूनपसीने की गाढ़ी कमाई से दबंगों के लड़के और बेरोजगार घूम रहे लड़के शराब के नशे में ढोलनगाड़ों और डीजे की धुन पर नाच कर मौजमस्ती करते हैं. बाद में चंदे के हिसाबकिताब को ले कर लड़ाईझगड़े की नौबत आ जाती है.

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साल 2019 में नरसिंहपुर जिले के गांव पिठवानी में चंदे की रकम के खर्च करने को ले कर एक नौजवान की हत्या समिति के दूसरे लड़कों ने कर दी थी. चंदा देने में सब से ज्यादा दिक्कत गरीब एससी तबके को होती है, क्योंकि मूर्तियां स्थापित करने के लिए दलितों से चंदा तो वसूला जाता है, पर उन्हें छुआछूत की वजह से पंडालों में घुसने के बजाय दूर से ही दर्शन करने का उपदेश दिया जाता है.

इस तरह के धार्मिक आयोजनों में होने वाले पाखंड का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक ओर तो नवरात्रि में कन्या पूजन का ढोंग किया जाता है, दूसरी ओर देवी दर्शन के लिए सड़कों पर निकली लड़कियों के साथ खुलेआम छेड़छाड़ की जाती है.

प्रदूषण की वजह

मूर्ति स्थापना की ये दकियानूसी परंपराएं समाज को आर्थिक रूप से खोखला तो कर ही रही हैं, पर्यावरण के लिए भी ख़तरा बन रही हैं. दुर्गा उत्सव, गणेशोत्सव, मोहर्रम जैसे त्योहार पर बनाई जाने वाली मूर्तियां और ताजिया नदियों, तालाबों को प्रदूषित करने का काम कर रहे हैं.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मूर्ति विसर्जन के लिए गाइडलाइंस जारी तो की हैं, पर उन का पालन हर कहीं नहीं हो रहा है. वैसे, देश में अब कहीं भी प्लास्टिक, प्लास्टर औफ पैरिस, थर्मोकोल जैसी चीजों से बनी हुई मूर्तियों के नदी, जलाशयों में विसर्जन की इजाजत नहीं है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने बहुत साफतौर पर देश में पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मूर्ति विसर्जन के लिए अपनी गाइडलाइंस में कई संशोधन किए हैं और देवीदेवताओं की मूर्तियां प्लास्टिक थर्मोकोल, प्लास्टर औफ पैरिस से बनाने पर रोक लगा दी है.

सीपीसीबी ने मूर्ति विसर्जन के संबंध में अपने पुराने 2010 के दिशानिर्देशों को विभिन्न लोगों की राय जानने के आधार पर संशोधित किया है. सीपीसीबी ने अपनी नए गाइडलाइंस में खासतौर पर प्राकृतिक रूप से मौजूद मिट्टी से मूर्ति बनाने और उन पर सिंथैटिक पेंट और रसायनों के बजाय प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल पर जोर देने की बात कही है.

लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइंस का पालन अंधभक्तों द्वारा कहीं नहीं किया जा रहा. देश में हर साल गणेश चतुर्थी और दशहरा जैसे उत्सवों के दौरान मूर्ति विसर्जन से जलाशय और नदियां प्रदूषित हो जाती हैं. ये मूर्तियां आमतौर पर पारंपरिक मिट्टी के बजाय रसायनिक चीजों की बनाई जाती हैं.

मूर्ति विसर्जन से जलाशयों के प्रदूषण पर अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के एक अध्ययन के बारे में ‘द वायर’ में सुभाष गाताडे का एक आलेख छपा था.

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के मुताबिक मोटे आकलन के हिसाब से अकेले महाराष्ट्र के तकरीबन 2 करोड़ परिवारों में से एक करोड़ परिवार गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं. घरों में स्थापित ये छोटी मूर्तियां आमतौर पर डेढ़ फुट ऊंची, डेढ़ किलो वजन की होती हैं.

इस का मतलब हर साल औसतन डेढ़ करोड़ किलो ‘प्लास्टर औफ पैरिस सैकड़ों टन रंगों के साथ जलाशयों में पहुंचता है और औसतन 50 लाख किलो फूलमाला आदि को भी पानी में बहाया जाता है. इस तरह नदियां, तालाब, नहरें, झरने, कुएं आदि विभिन्न किस्म के जलाशय प्रदूषित होते रहते हैं.

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समिति के लोग अपनी प्रचार मुहिम में लोगों को याद दिलाते हैं कि आज की तारीख में ज्यादातर मूर्तियां प्लास्टर औफ पैरिस से (जो पानी में घुलता नहीं हैं) बनी होती हैं, जिन्हें पारा जैसे खतरनाक रासायनिक चीजों से बने रंगों से रंगा जाता है. अगर ऐसा पानी कोई इनसान इस्तेमाल करें तो उसे कैंसर हो सकता है या उस का दिमागी विकास भी रुक सकता है.

नदियों का दूषित पानी केवल इनसान ही नहीं ,जलीय जीवों, मछलियों और दूसरे प्राणियों के लिए मौत की सौगात बन कर आता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी उत्सवों के दिनों में नदियों के दम घुटने की बात  की है. नदियों के पानी पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि हर साल नवरात्रि के बाद यमुना, गंगा, नर्मदा, हुगली जैसी बड़ी नदियों में प्रदूषण बढ़ जाता है. बोर्ड के निष्कर्षों के मुताबिक सामान्य काल में पानी में पारे की मात्रा तकरीबन न के बराबर होती है, लेकिन उत्सवों के काल में वह अचानक बढ़ जाती है.

और भी हैं वजहें

नदियों को प्रदूषित करने में धार्मिक कर्मकांड की भूमिका ज्यादा है. मर चुके लोगों की अस्थियों से ले कर, मंदिरों में रोजाना चढ़ाई जाने वाले सामग्री भी नदियों में विसर्जित की जाती है. धार्मिक पर्वत्योहारों पर इन नदियों के घाट पर स्नान और पूजापाठ के  बहाने नारियल, अगरबत्ती, प्रसाद और पौलीथिन का कचरा खुलेआम घाटों पर देखा जा सकता है. मर चुके लोगों के कर्मकांड के लिए नदियों के तटों पर होने वाले मुंडन से निकले बाल और भंडारे में इस्तेमाल होने वाली डिस्पोजल सामग्री भी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है. आजकल नदियों के पानी में अपनी गाड़ियां धोने का काम भी होने लगा है.

पानी के संकट की आहट सुनाई देने लगी है. जल स्रोतों के लगातार दोहन से छोटीछोटी नदियां सूखने लगी हैं. रेत के उत्खनन ने भी नदियों की सेहत को नुकसान पहुंचाया है. ऐसे में जरूरत इस बात की है कि हम नदियों को प्रदूषण से बचाएं ताकि आने वाले समय में पानी के संकट का सामना करने से बच सकें.

कोरोना वायरस का संक्रमण जिस ढंग से बढ़ रहा है और सरकार ने अनलौक के बहाने अपने हाथ खींच लिए हैं, ऐसे समय में हमें भी वर्तमान हालात से सबक लेने की जरूरत है. जो रुपएपैसे हम मूर्तियां बनवाने और पानी में बहाने में खर्च कर रहे हैं, वही पैसा अपने बच्चों की पढ़ाई और अपने परिवार को कोविड 19 के संक्रमण से बचाने में खर्च कर समझदारी का परिचय दे सकते हैं.

पंडेपुजारियों के बहकावे में न आ कर ठंडे दिमाग से सोचें कि जब लौकडाउन हुआ था तो मंदिरों के दरवाजे बंद थे और कोई भी आप की मदद के लिए आगे नहीं आया था. धर्म के इन्हीं ठेकेदारों के दबाव में सरकार ने भले ही मूर्तियां स्थापित करने की छूट दे दी है, पर आप के परिवार की सुरक्षा और पैसों की बरबादी के लिए इस भेड़चाल से बचने की जरूरत है.

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जया बच्चन के बयान से नाखुश हुए रवि किशन, ड्रग्स मामले में कही ऐसी बात

बॉलीवुड इंडस्ट्री में आए दिन ड्रग्स का मुद्दा गरमा रहा है और तो और काफी एक्टर और एक्ट्रेसेस इस मुद्दे में अपने बयानों के चलते सुर्खियों का विषय बन गए हैं. ऐसे में यह मुद्दा इतना बढ़ गया कि इसमें बॉलीवुड एक्टर्स के साथ साथ नेताओं को भी कूदना पड़ा. इन दिनों राज्‍यसभा सांसद जया बच्‍चन (Jaya Bachchan) और अभिनेता से नेता बने बीजेपी सांसद रवि किशन (Ravi Kishan) के बीच अपने अपने बयानों के चलते काफी तनाव भरा माहौल चल रहा है.

 

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कल …

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जया बच्चन (Jaya Bachchan) ने बीते मंगलवार एक बयान दिया था जिससे कि वे काफी सुर्खयों में आ गईं और वे बयान कुछ इस कदर था कि, “यह शर्मनाक है कि लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं”. जया बच्चन के इस तरह के बयान पर रवि किशन (Ravi Kishan) ने नाराजगी जताई है और अपना रिएक्शन देते हुए कहा है कि, ‘जो जया जी ने बोला है, मैं उससे बहुत दुखी हूं. यह बहुत गलत है. मुझे लगा था कि वह इस मुद्दे पर मेरा समर्थन करेंगी. कहेंगी कि हमें ड्रग कार्टेल को साथ मिलकर खत्‍म करना चाहिए या पेडलर्स को पकड़ना चाहिए. मेरे कहने का मतलब यह है कि ये ड्रग्‍स कोई फैशन ना बना दे, इसलिए जो कोई कर रहा है उनको पकड़ना जरूरी है.’

इसी बारे में आगे बात करते हुए रवि किशन (Ravi Kishan) ने कहा, ‘यही कारण है कि मैंने अपनी तरफ से आवाज उठाई. उसमें मुझे सपोर्ट मिलना चाहिए था. वह मेरी सीनियर हैं, मैंने उनके साथ काम किया है, वह मुझे जानती हैं, उन्‍होंने हमेशा मुझे आशीर्वाद दिया है… अब पता नहीं उन्‍होंने ऐसा क्‍यों कहा. उन्‍होंने ये भी कहा कि जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं. मैं उनसे बस इतना कहना चाहता हूं कि मुझे किसी ने ब्रेक नहीं दिया. मेरा कोई गॉडफादर नहीं है. भोजपुरी से लेक‍र बॉलिवुड तक मैंने अपना सफर खुद तय किया है. मैं एक सेल्‍फ-मेड मैन हूं.’

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बॉलीवुड में ड्रग्स को लेकर रवि किशन (Ravi Kishan) ने कहा कि, ‘मैं व्‍यक्‍त‍िगत तौर पर महसूस करता हूं कि इंडस्‍ट्री में ड्रग्‍स है. ड्रग्‍स हर जगह है. मैंने संसद में पहले भी आवाज उठाई थी. इंडस्‍ट्री में कुछ लोग ये करते होंगे, लेकिन हमें उन्‍हें रोकना होगा. जब मैं 90 के दशक में इंडस्‍ट्री में आया था, तब ये सब नहीं था. ये सब बीते 10 साल में हुआ है. हमें इस रैकेट का भंडाफोड़ करना होगा, पार्टियों में छापेमारी करनी होगी और इसे खत्‍म करना होगा.’

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Bigg Boss 14 के घर में लगेगा बोल्डनेस का तड़का, जैस्मिन भसीन की होगी एंट्री

जैसे जैसे बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) के रिलीज होने की डेट पास आती जा रही है वैसे वैसे बिग बॉस (Bigg Boss) फैंस के दिलों में एक्साइटमेंट भी बढ़ती जा रही है. हाल ही में शो के मेकर्स ने कलर्स टीवी (Colors TV) के औफिशियल इंस्टाग्राम पर बिग बॉस के आने वाले सीजन का प्रोमो शेयर करते हुए शो के प्रीमियर डेट की अनाउंसमेंट की थी जो कि 3 अक्टूबर है. जी हां, आपका सबसे पसंदीदा रिएलिटी शो बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) 3 अक्टूबर से ऑन एयर होने जा रहा है.

 

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Not your baby🖤🌙 Shot by @rahuljhangiani Styled by @begborrowstealstudio Dress by @showshaa

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सभी बिग बॉस (Bigg Boss) फैंस के दिल में इस समय एक ही सवाल है कि आखिर इस सीजन में कौन कौन से कंटेस्टेंट्स एंट्री लेंगे. आपको बता दें कि कंटेस्टेंट्स की फाइनल लिस्ट सामने आ चुकी है जिसमें टेलिवीजन इंडस्ट्री की जानी मानी और खूबसूरत एक्ट्रेसेस में से एक जैस्मिन भसीन (Jasmin Bhasin) का नाम भी शामिल है. आपको बता दें कि एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन (Jasmin Bhasin) एक बार पहले भी बिग बॉस के घर में कदम रख चुकी हैं. जी हां, जैस्मिन बिग बॉस सीजन 13 (Bigg Boss 13) में अपने करीबी दोस्त सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) को सपोर्ट करने पहुंची थी.

 

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🤷🏻‍♀️🤷🏻‍♀️🤷🏻‍♀️🤷🏻‍♀️🤷🏻‍♀️

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बात करें एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन (Jasmin Bhasin) के लुक्स की तो वे दिखने में बेहद ही खूबसूरत हैं और तो और वे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने के साथ साथ वे अपने फैंस के साथ काफी कनेक्टिड रहती हैं और अक्सर अपनी खूबसूरत और हॉट फोटोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं. जैस्मिन के फैंस भी उनकी हर फोटो पर जमकर प्यार बरसाते हैं और कमेंट्स कर उनकी तारीफ करते नहीं थकते.

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Roses are red, oceans are blue, this is me in isolation how about you? 😜😜 #stayhomestaysafe #licensetochill #quaranteenlife

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शायद यही वजह है कि इंस्टाग्राम पर जैस्मिन भसीन (Jasmin Bhasin) के 2 मिलियन से भी ज्यादा फौलोवर्स हैं. इतना ही नहीं बल्कि एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन (Jasmin Bhasin) की फैन फौलोविंग इस कदर है कि उनके नाम से कई लोगों ने इंस्टाग्राम पर फैन क्लब्स (Fan Clubs) भी बनाए हुए हैं जिसके चलते उनकी हर फोटो बड़ी ही तेजी से वायरल हो जाती है. जैस्मिन के इंस्टाग्राम अकाउंट पर उन्होनें अपनी कई बोल्ड फोटोज शेयर की हुई हैं जो कि उनके फैंस काफी पसंद करते हैं.

 

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Flaunting my sexiest curve, my smile😉

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अब देखने वाली बात ये होगी कि क्या होगा जब एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन (Jasmin Bhasin) अपनी बोल्डनेस का तड़का बिग बॉस (Bigg Boss) के घर में लगाएंगी.

 

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Endless blues…… #asfreeastheocean

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प्यार का प्रतिशोध

प्यार का प्रतिशोध : भाग 3

आखिर जब लालमणि से नहीं रहा गया तो एक रोज उस ने प्यार का इजहार कर ही दिया, ‘‘वंदना, मैं तुम से बेहद प्यार करता हूं. तुम्हारे बिना अब मैं खुद को अधूरा समझता हूं. तुम मेरे दिल में रचबस गई हो. तुम्हारे अलावा मुझे कुछ सूझता ही नहीं.’’

वंदना कुछ क्षण मौन रही फिर बोली, ‘‘लल्लू, प्यार तो मैं भी तुम से करती हूं, पर हम दोनों के बीच ऊंचनीच, बिरादरी का मतभेद है. पता नहीं मेरे मांबाप इस रिश्ते को स्वीकार करेंगे भी या नहीं. मुझे इस बात का डर सता रहा है.’’

‘‘तुम डरो नहीं वंदना, हम चाचाचाची को मना लेंगे. मुझे उम्मीद है वह मेरी बात मान जाएंगे. क्योंकि चाचा राममिलन जानते हैं कि अब मैं कमाने लगा हूं. मुझ में नशाखोरी जैसा कोई ऐब भी नहीं है. सब से बड़ी बात हम दोनों हमउम्र हैं और दोनों एकदूसरे को प्यार करते हैं.’’ लालमणि बोला.

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इस के बाद वंदना और लालमणि का प्यार परवान चढ़ने लगा. उन के बीच की दूरियां कम होने लगीं. फिर उन का शारीरिक मिलन भी होने लगा. लालमणि ऐसे समय पर घर आता जब राममिलन घर के बाहर होता.

वंदना मां की आंखों में धूल झोंक कर प्रेमी से मिलन कर लेती. उन्हें घर में मौका न मिलता तो खेतखलिहान, बागबगीचे में भूख मिटा लेते. इस मिलन का परिणाम यह हुआ कि गांव भर में दोनों के अवैध संबंधों की चर्चा होने लगी.

वंदना के बहकते कदमों की खबर जल्द ही उस के पिता राममिलन और मां राजकुमारी के कानों तक जा पहुंची. दोनों को जमीन घूमती हुई नजर आई. इज्जत ही गरीब की दौलत होती है और उसी दौलत को उन की बेटी नीलाम करने पर उतारू थी. यह बात उन्हें भला कैसे गवारा होती.

लिहाजा दोनों ने बेटी डांटाफटकारा भी और समझाया भी, ‘‘वंदना, लल्लू छोटी जाति का है. उस से तुम्हारा रिश्ता हरगिज नहीं हो सकता. अगर तूने मनमानी की तो बिरादरी के लोग हमारा हुक्कापानी बंद कर देंगे. उस हालात में हमारा जीना दूभर हो जाएगा. इसलिए तू अपना रास्ता बदल ले.’’

मांबाप की नसीहत सौ फीसदी सच थी, इसलिए वंदना ने उन की बात मान ली और लालमणि से मिलनाजुलना बंद कर दिया. उस ने लल्लू को बता भी दिया कि उस के मांबाप उस के साथ शादी को राजी नहीं हैं. यह पता चलते ही लालमणि का गुस्सा फट पड़ा. वह राममिलन तथा राजकुमारी को अपने प्यार में बाधक मानने लगा.

जब उस का गुस्सा शांत होता तो वह वंदना के घर पहुंच जाता और चाचाचाची के पैर छू कर उन्हें शादी के लिए मनाता. इतना ही नहीं, उन के न मानने पर अंजाम भुगतने की धमकी भी देता. उस ने वंदना पर भाग कर शादी करने का भी दबाव डाला, पर वंदना राजी नहीं हुई. इस से लालमणि वंदना से भी नाराज रहने लगा.

24 मई, 2020 की रात 8 बजे भी लालमणि, राममिलन के घर पहुंचा और उस पर तथा उस की पत्नी राजकुमारी पर उस से वंदना की शादी करने का दबाव डाला. लेकिन वह दोनों राजी नहीं हुए. इस पर लालमणि ने उन्हें धमकी दी कि इस का परिणाम अच्छा नहीं होगा.

धमकी देने के बाद लालमणि ने प्यार के प्रतिशोध में वंदना के मातापिता को शादी का रमांबाप की हत्या होने पर बिलखती वंदना और उसे ढांढस बंधाती आसपड़ोस की महिलाएोंड़ा मानते हुए ठिकाने लगाने का निश्चय कर लिया और घर चला गया. उस ने घर में पहले से रखी शराब पी फिर आधी रात के बाद घर से निकला और वंदना के घर पहुंच गया.

राममिलन के घर का मुख्य दरवाजा बंद था. इस पर वह घर के पिछवाड़े पहुंचा और नीम के पेड़ पर चढ़ कर वंदना के घर की छत पर पहुंच गया. वंदना नीचे कमरे में सोई थी. छत पर राममिलन व उस की पत्नी राजकुमारी गहरी नींद में सो रहे थे.

जीने के रास्ते लालमणि किचन में चाकू लाने पहुंचा, पर उसे चाकू नहीं मिला, तभी उस की निगाह सामने रखी हंसिया पर पड़ी. वह हंसिया ले कर छत पर आया और सो रहे राममिलन की गरदन पर हंसिया से वार पर वार करने लगा.

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हंसिया के वार से राममिलन की गरदन कट गई और खून बहने लगा. कुछ देर तड़पने के बाद राममिलन की मौत हो गई. इस के बाद इसी तरह उस ने राजकुमारी पर हंसिया से वार किया तो वह चीख पड़ी. उस की चीख सुन कर वंदना छत पर आ गई, लेकिन तब तक वह राजकुमारी को भी मौत के घाट उतार चुका था.

वंदना को आया देख कर लालमणि ने हंसिया वहीं फेंक दिया और पेड़ के रास्ते छत से नीचे आ गया. उस ने प्राइमरी स्कूल के पास जा कर खून सने हाथपांव और मुंह धोया, फिर घर जा कर कपड़े बदले. इस के बाद उस ने खून सने कपड़े अपने खेत के पास झाडि़यों में छिपा दिए. सवेरा होने से पहले ही वह घर से फरार हो गया.

इधर वंदना मांबाप की लाशें देख कर चेतनाशून्य हो गई. जब उसे होश आया तो उस ने चीखनाचिल्लाना शुरू किया. उस की चीख सुन कर पासपड़ोस के लोग आ गए. फिर तो सूरज की किरण बिखरते ही पूरे गांव में डबल मर्डर का शोर मच गया.

इसी बीच किसी व्यक्ति ने मोबाइल फोन से डबल मर्डर की सूचना गोसाईगंज पुलिस को दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी एस.के. सिंह घटनास्थल पर आ गए.

लालमणि उर्फ लल्लू से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे 3 जून, 2020 को सुलतानपुर की जिला अदालत में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

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कथा संकलन तक लालमणि की जमानत स्वीकृत नहीं हुई थी. वंदना अपनी बड़ी बहन गीता के साथ उस की ससुराल अमेठी चली गई थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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