कर्तव्य : भाग 4

डाक्टर के पास गए तो उन्होंने बताया, ‘‘कुछ सालों से दीपक के फेफड़ों में संक्रमण है जो उसे गैराज में काम करते हुए धूल व धुएं के कारण हो गया था. पहले भी उस का इलाज यहां होता रहा और उसे भरती होने के लिए कहा गया. पर उस ने कहा था, ‘मेरे ऊपर कुछ महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी है और मेरी दोस्त की शादी भी है.’ यह कह कर उस ने सभी जरूरी दवाइयां ली और चला गया. फिर बाद में आया ही नहीं. अभी जब वह यहां आया तो उस की स्थिति बेहद गंभीर थी. अभी भी कुछ कहा नहीं जा सकता.’’

अवनि ने नीरज को देखा फिर डाक्टर से कहा, ‘‘उस के इलाज में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए, डाक्टर साहब.’’

‘‘देखिए, हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं. सबकुछ हमारे हाथ में नहीं है. और मैं आप को यह भी बता दूं कि उस का इलाज लंबा है पर 90 फीसदी चांसेज हैं कि वह ठीक हो जाए. पर कुछ हमारी भी मजबूरियां हैं.’’ डाक्टर ने कहा.

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अवनि ने पूछा, ‘‘कैसी मजबूरी?’’ तो डाक्टर ने थोड़ा सकुचाते हुए कहा, ‘‘कुछ दवाइयां हैं जो यहां नहीं मिलतीं, उन्हें और्डर दे कर मुंबई या फिर चैन्नई से मंगवाना पड़ता है और कंपनी को कुछ ऐडवांस भी देना पड़ता है. दीपक ने जो रकम यहां जमा की थी वह सब खत्म हो गई. उस के औफिस से भी एक बार 50 हजार रुपए का चैक आया था. वह भी दवाई और अस्पताल के चार्ज में लग गया. उसे बाहर तो नहीं कर सकते, पर कुछ ही दिनों में हम उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट करने वाले हैं.’’

दीपक की ऐसी स्थिति के बारे में सुन कर अवनि अपना रोना रोक नहीं सकी और बाहर आ गई. नीरज ने डाक्टर से कहा, ‘‘अब आप रुपयों की चिंता न करें और जो दवाइयां बाहर से मंगवानी हों, फौरन मंगवाए और दीपक का इलाज करें.’’ यह कहते हुए नीरज ने अपने बैग से चैकबुक निकाली और 1 लाख रुपए का चैक बना कर डाक्टर को दे दिया. डाक्टर ने चैक लेते हुए कहा, ‘‘आप निश्चिंत रहिए. मैं आज ही ईमेल कर दवाइयां का और्डर दे देता हूं और कल ड्राफ्ट से ऐडवांस भी भेज दूंगा. कल रात तक फ्लाइट से दवाइयां भी आ जाएंगी, फिर हम उस का बेहतर इलाज कर पाएंगे. उम्मीद रखिए. 1-2 महीने में वह बिलकुल ठीक हो जाएगा.’’

नीरज डाक्टर के रूम से बाहर आए तो देखा कि बच्ची सो गई थी. नीरज ने अवनि के कंधे पर हाथ रखा तो उन्हें देख कर उस की आंखों में आंसू आ गए और वह हाथ जोड़ कर उम्मीदभरी नजरों से नीरज को देखने लगी.

नीरज सब समझ गए. उस ने अवनि के हाथों को पकड़ा और उसे गले लगाते हुए कहा, ‘‘मैं सब समझता हूं, तुम दीपक की चिंता मत करो. हम उस का अच्छे से अच्छा इलाज करवाएंगे.’’ यह कहते हुए उस ने अभी अंदर डाक्टर से हुई बात सविस्तार बता दी. अवनि ने थैंक्यू कहा और रोने लगी. नीरज ने कहा, ‘‘दीपक तुम्हारा दोस्त है तो मेरा भी दोस्त हुआ. तुम यों हाथ जोड़ कर और थैंक्यू बोल कर मुझे शर्मिंदा मत करो.’’

थोड़ी देर बाद सुहानी सो कर उठी और रोने लगी तो नीरज उसे खिलाते हुए बाहर निकल गए. अवनि ने थोड़ी देर बाद कुछ सोचते हुए सिर हिलाया. वह अब समझ गई थी कि क्यों दीपक इतने दिनों तक गायब था, वह इतना कमजोर क्यों हो गया और शादी की खरीदारी के लिए अकेले ही इंदौर क्यों आया, खरीदारी  तो एक बहाना था अपनी बीमारी के बारे में उसे बताने से बचने का, और उस ने बैग क्यों नहीं दिखाया, उस में जरूर दवाइयां, डाक्टर के परचे और बिल रहे होंगे.

कुछ ही देर में नीरज और सुहानी आए और अवनि के पास बैठ गए. दोनों ने फिर अपना सामान गाड़ी में रखा और पास के होटल में रूम ले कर आराम करने लगे. अवनि और नीरज ने सुहानी को खाना खिलाया और खुद भी जैसेतैसे थोड़ा खाना खाया और फिर नीरज और सुहानी सो गए, पर अवनि को नींद नहीं आ रही थी. उसे रहरह कर दीपक की बातें याद आतीं. उस के साथ घूमना, पढ़ना, काम करना और हंसीमजाक के साथसाथ छोटीछोटी बातों पर लड़नाझगड़ना वगैरह. यही सोचतेसोचते वह भी सो गई.

अगले दिन सुबह दोनों फिर अस्पताल गए. डाक्टर ने बताया, ‘‘दीपक को होश नहीं आया, हमारी दी हुई दवाइयां असर नहीं कर रही हैं, शायद मुंबई से आई दवाइयां असर कर जाएं. दवाइयां रात तक ही आएंगी, तभी कुछ कर सकते हैं.’’ डाक्टर के ऐसा कहते ही अवनि दीपक के पास बैठ गई. एक घंटे बाद नीरज ने अवनि से कहा, ‘‘यहां बैठने से कोई फायदा नहीं. होटल चलते हैं. कुछ खा कर आराम करो. रात में फिर आएंगे.’’ फिर दोनों होटल चल गए.

रात को 8 बजे दोनों फिर अस्पताल पहुंचे और सीधे डाक्टर के पास गए और दवाइयों के बारे में पूछताछ की. डाक्टर ने बताया, ‘‘दवाइयां शहर में आ चुकी हैं. लगभग एक घंटे में एयरपोर्ट से अस्पताल पहुंच जाएंगी.’’

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दोनों दवाइयों के इंतजार में बैठ गए. अवनि को यह एक घंटा बहुत ज्यादा लगने लगा. जैसे ही दवाइयां डाक्टर के पास पहुंचीं, उन्होंने उसी नर्स को बुलाया जिस पर दीपक की देखरेख का जिम्मा था. उन्होंने नर्स को दवाइयां से संबंधित कुछ समझाया और थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दे कर दवाइयों के साथ उसे दीपक के कमरे में भेजा. डाक्टर ने नीरज और अवनि से कहा, ‘‘आप बाहर बैठिए, हम उस का इलाज शुरू करते हैं, आप चिंता न करें, सब ठीक होगा.’’

करीब 2 घंटे बाद डाक्टर और नर्स दीपक के रूम से बाहर आए तो नीरज और अवनि बाहर ही खड़े थे. डाक्टर ने कहा, ‘‘दवाई दे दी हैं, अगले 8 घंटे में उस का असर दिखना शुरू हो जाएगा, नहीं तो…’’ यह कह कर डाक्टर चले गए. अवनि को तो यह सुनते ही चक्कर आने लगे, दोनों वहीं बैठ गए सुबह के इंतजार में. बीचबीच में डाक्टर आते और दीपक को चैक कर के चले जाते. नीरज बच्ची को ले कर होटल चले गए, पर अवनि वहीं बैठी रही.

सुबह करीब 7 बजे दीपक को देखने डाक्टर आए और करीब आधे घंटे बाद बाहर आ कर अवनि से बोले, ‘‘दवाइयों ने थोड़ा असर करना शुरू कर दिया है, अभी हालत ठीक हैं, पर पूरी तरह से नहीं कहा सकता कि कितने दिन और लगेंगे. आप लोग चाहें तो वापस जा सकते हैं. उस की हालत खतरे से बाहर है. और हां, आप उस के पास कुछ देर बैठ सकते हैं.’’ अवनि अंदर गई तो देखा वही नर्स दीपक को औक्सीजन मास्क, इंजैक्शन लगा रही थी. उस की आंखों से लगता था कि वह भी रातभर नहीं सोई. अवनि के पूछने पर उस ने भी ‘हां’ ही कहा.

फिर अवनि और नर्स आपस में धीरेधीरे बातें करने लगीं. अवनि ने नर्स से कहा, ‘‘तुम जा कर थोड़ा आराम कर लो, मैं यहीं बैठती हूं.’’ नर्स ने एकदम से कहा, ‘‘नहीं, मैं इन्हें ऐसी हालत में छोड़ कर नहीं जाऊंगी.’’ फिर थोड़ा रुक कर बोली, ‘‘मतलब, नहीं जा सकती, यह मेरी ड्यूटी है.’’

अवनि ने आश्चर्य से नर्स को देखा तो वह फिर अपने काम में लग गई. थोड़ी ही देर में नीरज, सुहानी को बाहर छोड़ कर अंदर आए तो अवनि ने डाक्टर द्वारा कही गई बात नीरज को बता दी तो वे मुसकराकर बोले, ‘‘अब दीपक जल्दी ही ठीक हो जाएगा.’’

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दोपहर को डाक्टर आए. दीपक को चैक करने के बाद बोले, ‘‘रात तक होश आ जाएगा.’’ वे इतना कह कर चले गए. अवनि आज खुश थी. रात 8 बजे दोनों फिर अस्पताल गए. नर्स अभी भी वहीं थी. अवनि ने पूछा तो वह बोली, ‘‘मैं घर नहीं जाऊंगी, जब तक ये होश में नहीं आ जाते.’’ अवनि सोचने लगी, ऐसी नर्स तो पहली बार देखी जो मरीज की सेवा करने के कारण घर न जाए. उस ने नर्स को देखा तो नर्स ने सिर नीचे कर लिया.

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

कर्तव्य : भाग 3

कई दिनों तक नीरज ने अवनि और उस के काम पर नजर रखी. उसे अवनि की सादगी, व्यवहार और काम करने का तरीका काफी पसंद आया (शायद अवनि भी). अब वह औफिस के हर मामले में उस की सलाह लेने लगा. एकदो बार तो उस ने पर्सनल मामले में भी उस से पूछ लिया. नीरज और अवनि को साथसाथ काम करते हुए कई महीने हो गए. नीरज अवनि को चाहने भी लगा था, शायद अवनि भी नीरज को. लेकिन दोनों एकदूसरे से मन की बात कह नहीं पा रहे थे. दीपक को अवनि की बातों से इस का अंदाजा हो गया था.

दीपक ने अवनि की मां को नीरज के बारे में बताया. मां ने कहा, ‘‘तुम अवनि को अच्छी तरह जानते हो. उस की पसंदनापसंद भी समझते हो. तुम ही बात करना उस से. लेकिन पहले नीरज के बारे में जानकारी हासिल कर लो कि कैसा लड़का है, उस का परिवार, व्यवहार आदि.’’ दीपक ने मां को आश्वासन दिया कि वे चिंता न करें, वह सब देख लेगा.

एक दिन रविवार की दोपहर नीरज अवनि के घर पहुंच गया और बोला, ‘‘यहां से गुजर रहा था तो सोचा तुम से और तुम्हारी मां से भी मिलता चलूं.’’ अवनि ने नीरज को अपनी मां व छोटी बहन से मिलवाया. फिर हंसती हुई बोली, ‘‘ये है मेरा बैस्ट फ्रैंड दीपक.’’

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‘‘अच्छा तो ये हैं दीपक, आप के बारे में अवनि से कई बार सुन चुका हूं,’’ नीरज ने कहा.

सब ने आपस में कुछ देर बातें कीं. तभी दीपक ने मां से धीरे से कहा, ‘‘शादी की बात करने का अच्छा मौका है.’’ मां जैसे ही नीरज से कुछ कहने को हुईं, एकदम से नीरज ने अपनी और अपने परिवार की जानकारी देने के बाद कहा, ‘‘मुझे अवनि पसंद है और मैं उस से शादी करना चाहता हूं. शायद अवनि भी यही चाहती है. उस ने शर्म के मारे आप से बात नहीं की होगी. क्या आप हमारी शादी के लिए आशीर्वाद देंगी?’’ एक ही सांस में नीरज ने इतना सब कह दिया और फिर पानी पी कर चुप हो गया.

मां और दीपक की तो मनमांगी मुराद पूरी हो गई. उन्होंने अवनि की तरफ देखा तो वह शरमाती हुई अंदर चली गई. मां ने ‘हां’ कहा और जल्दी ही दोनों की शादी कराने की बात कही.

कुछ दिनों से अवनि खुश भी थी और थोड़ी चिंता में भी रहती. नीरज ने उस से पूछा तो उस ने अपने मन की बात कही, ‘‘मेरी शादी के बाद मां और छोटी का क्या होगा. कैसे होगा?’’

‘‘इस में चिंता की क्या बात है? हम सब साथ ही रहेंगे, एक ही घर में,’’ नीरज ने कहा. यह सुनते ही अवनि की खुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहा, उसे दोहरी खुशी हुई.

शादी की तारीख तय हुई लेकिन इधर कुछ दिनों से दीपक का कुछ अतापता नहीं था. अवनि ने उस के औफिस जा कर पता किया तो मालूम हुआ कि उस की तबीयत खराब होने के कारण वह छुट्टी पर है. वह उस के घर गई तो वहां भी ताला लगा हुआ था. अवनि की चिंता बढ़ गई. दीपक का फोन तो पहले से ही स्विच औफ था. अवनि वापस अपने घर आई और दीपक की चिंता में बिना कुछ खाएपिए ही सो गई.

अगले दिन सुबह एक औटो घर के सामने रुका. उस ने देखा कि दीपक उस में से सामान निकाल रहा है. सामान रखा भी नहीं था कि अवनि ने उस पर सवालों की बौछार कर दी. दीपक चुपचाप सुनता रहा. अवनि जब चुप हुई तो उस ने कहा, ‘‘तुम्हारी बात खत्म हो गई हो तो मैं कुछ बोलूं?’’ अवनि चुप जरूर हो गई थी पर अभी भी गुस्से में थी. दीपक फिर बोला, ‘‘तुम्हारी शादी के लिए अपनी तरफ से तुम को देने के लिए और घर के लिए छोटामोटा सामान, कपड़े वगैरह लेने इंदौर गया था. तुम को बता कर जाता तो तुम मना करतीं, औफिस से छुट्टी नहीं मिलती तो वहां पर भी तबीयत खराब होने का बहाना बनाया.’’ यह सुन कर अवनि का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ. उस ने सामान की तरफ देखा. उस पर इंदौर का पता लिखा हुआ था. फिर भी वह थोड़े गुस्से में बोली, ‘‘क्या जरूरत थी ये सब लाने की. चलो, ठीक है लाए, तो वहां से क्यों, यहां भी तो सब मिलता है.’’

थोड़ी बहसबाजी के बाद सब नौर्मल हो गया और सब सामान देखने लगे. दीपक लगभग 50-60 हजार रुपए का सामान लाया था. दीपक ने एक बैग नहीं खोला, अवनि के पूछने पर उस ने कहा, ‘‘औफिस की कुछ स्टेशनरी है.’’ अवनि ने उस से ‘थैक्यू माई बैस्ट फ्रैंड, कहा.

निश्चित दिन शादी हुई. सब खुश थे. दीपक, सुधा और छोटी सब ने मिल कर खूब डांस और धमाल किया. शादी का समारोह सादगीपूर्ण हुआ. अवनि की विदाई हुई. शादी के कुछ दिन बाद अवनि ने मां और छोटी को अपने पास बुला लिया. दीपक कुछ दिन तो अवनि से बराबर मिलता रहा लेकिन बाद में उस का मिलनाजुलना कम हो गया.

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समय के साथसाथ छोटी भी बड़ी हो गई. उस की भी शादी हो गई और बाद में मां अपनी बीमारी व अपने पति की याद में रहरह कर चल बसीं. दीपक भी अब कम आता, 2-3 महीने में एक बार. उस को देख कर लगता कि काफी बीमार और कमजोर है. पूछने पर कहता, ‘‘काम ज्यादा है, खानेपीने का समय नहीं मिलता. टाइमटेबल बिगड़ गया है. अब ध्यान रखूंगा.’’ ऐसा आश्वासन देता और चला जाता.

एक बार 3 महीने से ज्यादा समय हो गया दीपक से मिले, तो अवनि एक दिन सुबहसुबह ही उस के घर पहुंच गई. पर वहां ताला लगा देख कर उस के औफिस भी गई. औफिस में जा कर पता चला कि वह तो कई महीने से औफिस आया ही नहीं. उस की तबीयत बहुत खराब थी. इंदौर जाने को कह गया है इलाज के लिए. यह सुनते ही अवनि के पैरों तले जमीन खिसक गई. फिर थोड़ा संभलती हुई बोली, ‘‘मुझे वहां उस अस्पताल का पता और फोन नंबर मिल सकता है.’’ औफिस वालों ने उसे अस्पताल का पता और फोन नंबर दे दिया.

अवनि जैसेतैसे घर पहुंची. नीरज औफिस जा चुके थे लेकिन अवनि ने उन्हें फोन लगा कर फौरन घर बुलाया और सारी बात बताई. नीरज को भी झटका लगा कि दीपक ने कभी बताया क्यों नहीं? दोनों ने फौरन इंदौर जाने का फैसला किया.

कुछ देर बार दोनों अपनी छोटी सी बच्ची के साथ अपनी गाड़ी से इंदौर के लिए रवाना हुए. अवनि रास्तेभर यही सोचती रही कि दीपक ने ऐसा क्यों किया, कभी कुछ बताया क्यों नहीं, क्या हुआ होगा उसे?

साढ़े 4 घंटे के सफर के बाद वह उस अस्पताल के सामने खड़ी थी जहां दीपक भरती था. अंदर जाते समय उस के पैर कांप रहे थे. रिसैप्शन पर पहुंच कर नीरज ने दीपक का नाम बता कर उस का वार्ड पूछा तो जवाब मिला ‘‘सैकंड फ्लोर, आईसीयू वार्ड, बैड नंबर 6.’’ ऊपर वार्ड के सामने जा कर नीरज बोले, ‘‘तुम थोड़ी देर यहीं बैठो, मैं देख कर आता हूं. फिर तुम जाना. छोटे बच्चों को अंदर ले जाना मना है.’’ अवनि ने कुछ नहीं कहा, सिर्फ हां में सिर हिला दिया.

नीरज अंदर गए. बैड नंबर 6 के पास जा कर रुके तो देखा, दीपक को औक्सीजन मास्क लगा था. साथ ही खून और एक अन्य  दवाई की बोतल भी लगी थी. वह बेहोश था. थोड़ी देर रुकने के बाद वह बाहर आए और बच्ची को लेते हुए अवनि से कहा, ‘‘अब तुम जाओ, और देखो, उस से कुछ बोलना नहीं, वह बेहोश है. बस, चुपचाप देख कर चली आना. फिर डाक्टर से मिलने चलेंगे.’’

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अवनि ने इस बार कुछ नहीं बोला. फिर डरतीडरती अंदर गई. बैड नंबर 6 के पास रुकी. दीपक को देखा, उस की ऐसी हालत देख कर वह एकदम से चक्कर खाने लगी. पास खड़ी नर्स ने उसे पकड़ा और बाहर ले आई. बाहर आते ही वह रोने लगी. नीरज उसे चुप कराते हुए बोले, ‘‘चलो, डाक्टर से मिलते हैं.’’

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कर्तव्य : भाग 2

दीपक ने मना किया पर जब अवनि की मां ने कहा तो उस ने खाने के लिए हामी भर दी, साथ ही, एक शर्त रख दी. उस ने कहा, ‘‘मैं एक शर्त पर खाना खाऊंगा, तुम कल से मेरे साथ कालेज चलोगी.’’ अवनि ने भी हां कर दी. तभी दीपक ने कहा, ‘‘पर वापस तुम्हें बस से ही आना पड़ेगा, मुझे गैराज जो जाना होता है.’’ तीनों हंस दिए.

दीपक ने खाना खाया और फिर से थैंक्स कहा. अवनि ने दीपक की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया तो वह थोड़ी देर सोचता रहा. अवनि ने कहा, ‘‘कोई जल्दी नहीं है. आराम से सोच लो.’’ दीपक ने कहा, ‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं. मेरे दोस्तों में कोई लड़की नहीं है, इसलिए मैं जरा घबरा रहा था.’’

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फिर दीपक ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘डन’’ और अवनि से हाथ मिलाते हुए विदा ली.

अगले दिन सुबह कालेज समय से डेढ़ घंटे पहले ही दीपक, अवनि के घर आ गया. अवनि ने जल्दी आने का कारण पूछा तो वह बोला, ‘‘तुम रोज बस से जाती हो, तो मुझे लगा कि कहीं निकल न जाओ, इसलिए.’’

‘‘नहीं मैं 1 घंटा पहले ही निकलती हूं. बस से कालेज पहुंचने में 45 मिनट लगते हैं.’’ अवनि ने मुसकराते हुए उत्तर दिया. दोनों ने चाय पी और मोटरसाइकल से कालेज के लिए रवाना हुए.

यह सिलसिला यों ही चलता रहा. दीपक उसे कालेज के लिए लेने आया. अब वह उसे कालेज में फ्री समय में मिलने भी लगा. देखते ही देखते 3 वर्ष हो गए. अवनि और सुधा का बीकौम पूरा हो गया और दीपक ने एमकौम फाइनल कर लिया और वह सीए करने के साथसाथ एक प्राइवेट कंपनी में जौब भी करने लगा. नौकरी अच्छी थी और सैलेरी भी, पर काम का बोझ ज्यादा था.

अवनि ने कई बार उस से कहा, ‘‘कोई दूसरी जौब देख लो, यहां काम ज्यादा है तो.’’

दीपक हर बार मुसकराते हुए कहता, ‘‘काम तो दूसरी जगह भी रहेगा, काम तो काम है. समय पर तो पूरा करना ही पड़ेगा. सैलरी भी ठीक है. गैराज के जैसे रोज काला तो नहीं होना पड़ता, धूलधुएं में तो नहीं रहना पड़ता.’’ उस का यह उत्तर सुन कर अवनि चुप हो जाती और फिर उस ने भी कहना छोड़ दिया.

अवनि और दीपक की दोस्ती गहराती जा रही थी. दोनों एकदूसरे से मन की बात कहते और लड़तेझगड़ते भी. घूमनेफिरने के साथसाथ पढ़ाई भी जारी थी और दीपक की जौब भी.

एक दिन अचानक सड़क दुर्घटना में अवनि के पिता की मृत्यु हो गई. अवनि पर तो जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. उस की और छोटी बहन की पूरी जिम्मेदारी उस के कंधों पर आ गई. वह तो जैसे इस बोझ से टूट ही गई थी. रिश्तेदार और आसपड़ोस के लोग तो आए और सांत्वना दे कर, हाथ जोड़ कर चले गए, पर दीपक ने उसे संभाला. उस ने अवनि को ढांढ़स बंधाया और उसे इस मुसीबत के समय हौसला रखने व अपनी, मां और छोटी बहन के प्रति जिम्मेदारी से घबरा कर भागने की नहीं, बल्कि इस मुसीबत से लड़ने की शक्ति दी.

दीपक ने कहा, ‘‘देखो, अगर इस दुखद घड़ी को दूर करना है तो इस से डरने की नहीं, लड़ने की जरूरत है. मां और छोटी बहन का अब तुम ही तो सहारा हो. अगर तुम इस तरह हिम्मत हार जाओगी तो इन को कौन संभालेगा और फिर मैं भी तो हूं तुम्हारे साथ. इस परिस्थिति में तुम को ही हिम्मत दिखानी है और अपने पिता की अपूर्ण जिम्मेदारियों को उठा कर घर को संभालना है. दृढ़शक्ति से उठो और आगे बढ़ती चलो और सब को बता दो कि तुम साधारण लड़की नहीं, तुम में अब भी वही हिम्मत, जोश और साहस है जो पिता की मृत्यु से पहले था.’’

अवनि पर दीपक की बातों का असर हुआ. उस ने मां और छोटी बहन की तरफ देखा और कहा, ‘‘दीपक, तुम ने ठीक ही कहा. मैं हिम्मत नहीं हारूंगी. इस विपरीत परिस्थिति के बोझ से अपने कंधे टूटने नहीं दूंगी, बल्कि पूरी ताकत से यह बोझ उठाऊंगी. मैं अब जौब कर के घर को चलाऊंगी और बहन को अच्छे से पढ़ा कर उस की शादी करवाऊंगी. दीपक ने मुसकराते हुए उस के  कंधे को थपथपाया और वहां से चला गया. अगले 2 दिनों तक वह अवनि के यहां नहीं आया.

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2 दिन बाद दीपक आया. उस ने बताया कि वह 2 दिन अपने औफिस से समय निकाल कर दोपहरशाम को अवनि के लिए जौब ढूंढ़ रहा था. इस में उसे सफलता भी मिली. उस ने बताया, ‘‘एक कंपनी में क्लर्क की पोस्ट खाली है, कल तुम यहां अपना रिज्यूमे ले कर चली जाना, तुम्हारा इंटरव्यू होगा. हो सकता है यह जौब तुम्हें ही मिल जाए. वहां का मैनेजर हमारे औफिस में आता रहता है, उस ने बताया कि उन्होंने इस पोस्ट के लिए अभी तक विज्ञापन नहीं दिया है. तुम कल सुबह 10 बजे चली जाना.’’

अगले दिन अवनि ठीक समय पर इंटरव्यू के लिए पहुंच गई. उस ने सोचा, ‘अगर नौकरी नहीं मिली तो…’ थोड़ी देर बाद वह इंटरव्यू के लिए अंदर गई और आधे घंटे बाद बाहर निकली तो घबराई हुई थी. परिणाम के लिए उसे शाम को बुलाया गया तो उस ने घर वापस जाने के बजाय वहीं रुकना बेहतर समझा. शाम को उसे बताया गया कि वह सिलैक्ट हो गई और कल से ही औफिस जौइन कर सकती है. उस की आंखों से आंसू आ गए, ये खुशी के आंसू थे.

अवनि घर पहुंची. उस ने अपने पिता की फोटो को हाथ जोड़े और मां को गले लगाते हुए कहा, ‘‘मुझे नौकरी मिल गई. अब हमें कोई परेशानी नहीं होगी. मैं खूब मेहनत करूंगी और छोटी को पढ़ाऊंगी भी.’’

थोड़ी देर बाद दीपक आया. उस ने देखा अवनि बहुत खुश है तो वह समझ गया कि उसे नौकरी मिल गई. अवनि ने कहा, ‘‘थैंक्स दीपक, तुम्हारे कारण ही मुझे नौकरी मिल सकी.’’

‘‘नहीं यह तुम्हारी योग्यता और समझदारी के आधार पर मिली है, अब खूब मेहनत करो और आगे बढ़ो,’’ दीपक ने कहा.

अवनि की सालभर की नौकरी होने पर उसे बढ़े हुए इन्क्रीमैंट की जानकारी देते हुए उस के मैनेजर ने कहा, ‘‘मेरा ट्रांसफर हो गया है, कल से तुम नए मैनेजर के साथ ऐसी ही लगन व मेहनत से काम करना.’’

अगले दिन नए मैनेजर बाकी स्टाफ से पहले औफिस आ गए और फाइल देखने लगे. बाद में उन्होंने स्टेनो से एक लैटर टाइप करवाया और उस पर साइन करने के बाद आगे की कार्यवाही के लिए अवनि के पास भेज दिया. अवनि ने लैटर डिस्पैच करते हुए जब लैटर पढ़ा तो वह चौंक गई. लैटर में लिखी रकम के टोटल में फर्क आ रहा था जिस से कंपनी को 50 हजार रुपए का नुकसान हो सकता था.

वह फौरन उठी और मैनेजर के रूम में गई. नेमप्लेट पर लिखा था-नीरज राठौर. वह दरवाजा नौक कर बोली, ‘‘मैं अंदर आ सकती हूं?’’

अंदर से आवाज आई, ‘‘कृपया आइए.’’ गेट खोल कर वह अंदर गई तो देखा मैनेजर की कुरसी पर एक नौजवान बैठा हुआ है और कुछ फाइलें उस के सामने फैली हुई हैं.

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उस ने वह लैटर उन की तरफ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘सर, मैं मिस अवनि चौधरी, यहां की क्लर्क. आप ने अभी जो लैटर टाइप करवाया है उस में रकम के टोटल में 50 हजार रुपए का फर्क है. आप कहें तो मैं इस की फाइल चैक कर लूं. मैनेजर ने देखा तो उसे अवनि की बात सही लगी. उस ने फाइल देते हुए कहा, ‘‘तुम सही कहती हो, फर्क है, तुम ने गलती पकड़ी है, इस से कंपनी को 50 हजार रुपए का नुकसान हो सकता था. मुझे खुशी है कि तुम जैसी मेहनती और ईमानदार लड़की इस कंपनी में काम करती है.’’ अवनि ने थैंक्यू कहा और फाइल ले कर बाहर निकल आई.

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

कर्तव्य : भाग 1

स्कूली पढ़ाई अवनि ने गर्ल्स स्कूल से की थी और आज वह पहली बार कालेज में कदम रखने जा रही थी, वह भी कोएड कालेज में. स्कूल के माहौल से कालेज का माहौल बिलकुल अलग होता है. नई बिल्डिंग, हरियाली से भरे कैंपस में नएनए चेहरे, सभीकुछ नया ही तो था उस के लिए. वह डरतेघबराते, सकुचाते हुए मेनगेट से अंदर दाखिल हुई और अपनी क्लास में जाने लगी. पर उसे अपनी क्लास तो मालूम ही नहीं थी. किस से पूछे, कैसे पूछे? इसी उधेड़बुन में उस ने एक चपरासी से पूछ ही लिया, बीकौम फर्स्ट ईयर की क्लास कहां है?

चपरासी ने सही तरीके से उसे समझाया, ‘‘सीधे जा कर 2 मंजिल ऊपर चढ़ना और दाएं से 7वां कमरा. 2/6 यानी सैकंड फ्लोर पर रूम नं. 6, स्टाफरूम है और उस पर नंबर नहीं है.’’ अवनि ने उसे थैंक्यू कहा तो वह मुसकराते हुए आगे बढ़ गया और अवनि सीधे जाने लगी. वह चपरासी के बताए अनुसार ही चली और रूम नं. 6 के सामने जा कर देखा, गेट के ऊपर लगी तख्ती पर लिखा था. ‘‘क्च.ष्शद्व.ढ्ढ4द्गड्डह्म्. घबराते हुए वह क्लासरूम में दाखिल हुई तो लड़केलड़कियों से कमरा लगभग  भरा हुआ था. अधिकतर लड़कियां रंगबिरंगे, चटक रंग के कपड़े पहने हुए थीं, पर अवनि के कपड़े सादे थे. वह एक साधारण परिवार से थी.

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प्रोफैसर आए, उन्होंने सब फ्रैशर्स का स्वागत करते हुए अपना परिचय दिया. इस के बाद उन्होंने अटैंडैंस ली और सभी को अपनाअपना परिचय देने को कहा. अवनि की बारी आई तो उस ने घबराते हुए अपना परिचय दिया. सब का परिचय होतेहोते पूरा पीरियड खत्म हो गया.

अगला पीरियड 45 मिनट बाद था. वह क्लास से बाहर निकली और नीचे जाने लगी. कैंपस की एक बैंच पर बैठी ही थी कि एक लड़की उस के पास आई और बोली, ‘‘मैं यहां बैठ सकती हूं?’’

अवनि बोली, ‘‘हांहां, क्यों नहीं.’’

थोड़ी देर बाद वह लड़की बोली, ‘‘मेरा नाम सुधा है, तुम्हारी ही क्लास में हूं, और तुम्हारा नाम अवनि है न.’’

उस ने ‘‘हां’’ कहा. दोनों ने थोड़ी देर बातें की, फिर दोनों अगले लैक्चर के लिए क्लास में चली गईं. इस बार दोनों साथसाथ ही बैठीं.

घर पहुंच कर उस ने अपनी मां को सारी बातें बताईं, कुछ देर आराम करने के बाद उस ने मां के काम में हाथ बंटाया. खाना खाने के वह बाद अपने से 3 साल छोटी अपनी बहन से बातें करने लगी और फिर उसे पढ़ाने के बाद सुला दिया. फिर वह पढ़ने लगी और पढ़तेपढ़ते ही सो गई.

अवनि और सुधा अच्छी दोस्त बन गई थीं. दोनों साथ ही क्लास में बैठतीं. बाद में लंच भी साथ ही करतीं और फ्री पीरियड में गपशप भी करतीं. सुधा अमीर हो कर भी साधारण ही रहती थी.

सुधा का जन्मदिन आने वाला था, इस के लिए उस ने शौपिंग का प्लान बनाया और रविवार की शाम को अवनि को ले कर मार्केट गई. उस ने अपने लिए नई ड्रैस और अन्य सामान लिया और कुछ सामान की बुकिंग कर दी जिसे अगले दिन उस के घर पहुंचना था. उस ने अवनि के लिए भी एक नई ड्रैस खरीदी. कुछ और खरीदारी के बाद दोनों मार्केट से बाहर आ कर गाड़ी के पास पहुंचीं. सुधा ने उसे घर छोड़ने को कहा तो उस ने मना कर दिया कि वह बस से चली जाएगी.

अवनि बस से उतर कर अपने घर जा रही थी. सड़क किनारे कुछ बच्चे खेल रहे थे, तभी उसे एक कार हौर्न बजाती, लहराती हुई आती दिखी. कार वाले ने बच्चों को बचाने के चक्कर में तेजी से ब्रेक लगाया तब भी कार घिसटतेघिसटते अवनि के पैरों से टकराती हुई थोड़ी आगे जा कर रुकी. कार वाला, जो एक नौजवान था, जल्दी से उतर कर पीछे की ओर भागा और बच्चों को सकुशल देख उस ने राहत की सांस ली और वापस कार की तरफ मुड़ते हुए अवनि को सड़क किनारे एक पत्थर पर पैर पकड़े कराहते देखा.

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वह उस के पास गया और कुछ कहता, इस के पहले ही अवनि उस पर बरस पड़ी, ‘‘कार चलानी नहीं आती तो चलाते क्यों हो, सड़क के किनारे चलने वाले तो जैसे तुम्हें दिखते ही नहीं, कम से कम बच्चों को तो देखते. दिखते भी कैसे? बड़े बाप के बेटे जो ठहरे.’’

कार वाले ने बड़ी नम्रता से कहा, ‘‘आई एम सौरी, मैं तो सड़क पर ही था, बच्चे खेलतेखेलते अचानक सड़क के बीच में आ गए. उन्हें बचाने के चक्कर में तेजी से ब्रैक लगाने के बावजूद आप को टक्कर लग गई. चलिए, मैं आप को अस्पताल ले चलता हूं.’’

अवनि का गुस्सा अब थोड़ा शांत हो गया, वह बोली, ‘‘नो थैंक्स. मेरा घर पास में ही है, मैं चली जाऊंगी.’’ यह कह कर वह उठी तो लड़खड़ा कर वापस बैठ गई. पैर में चोट लगी थी. शायद बड़ी खरोंच थी. खून बह रहा था. कार वाले ने फिर कहा, ‘‘मैं पहले आप को अस्पताल ले चलता हूं. मरहमपट्टी के बाद आप को, आप के घर छोड़ दूंगा, मेरा भरोसा कीजिए.’’ अवनि ने उसे मना नहीं किया और उस के साथ अस्पताल चली गई.

मरहमपट्टी के बाद कार वाले ने उसे घर तक छोड़ा. अवनि को लड़खड़ाते हुए चलता देख उसे सहारा दे कर अंदर तक छोड़ा. तभी अवनि की मां भागती हुई आई. उसे संभाला और बिस्तर पर लिटाया. अवनि ने मां की घबराहट को देखते हुए सारा हाल बताया और कहा कि चोट गहरी नहीं है, थोड़ी खरोंच है, 2-3 दिनों में ठीक हो जाएगी. डाक्टर को दिखा दिया है.

अवनि ने कार वाले को थैंक्स कहते हुए बैठने का इशारा किया. वह बैठ गया. मां अंदर चली गई चायपानी लेने. कार वाले ने अपना परिचय दिया, ‘‘मैं कोई अमीर बाप का बेटा नहीं हूं, मेरा नाम दीपक है और यहीं पास में रहता हूं. यह कार मेरी नहीं है मेरे पड़ोसी की है. मैं पढ़ाई के साथसाथ शाम को एक मोटर गैराज में भी काम करता हूं. आज कालेज की छुट्टी होने के कारण सुबह से ही गैराज चला गया था. पड़ोसी की कार भी ठीक करनी थी, तो उन की कार ले गया था.’’ उस ने आगे बताया. ‘‘मैं अकेला ही हूं इस दुनिया में, दिनभर कालेज में पढ़ता हूं और शाम को 4 घंटे गैराज में काम करता हूं. गुजरबसर हो जाती है.

‘‘मैं एमकौम फर्स्ट ईयर में हूं और मेरे पास मोटरसाइकिल है, उसी से रोज कालेज जाता हूं.’’

मां चाय लाई तो उस ने मना करते हुए कहा, ‘‘थैंक्यू मुझे जाना है.’’ और अवनि को फिर से सौरी कहता हुआ वह बाहर आया और कार में बैठ कर चला गया.

2 दिन तक अवनि कालेज नहीं जा सकी, तीसरे दिन कालेज जाने के लिए तैयार हो रही थी कि एक बच्चे ने आ कर बताया, ‘‘कोई दीदी, आप को पूछ रही हैं.’’ बाहर आ कर देखा तो सुधा थी, 2 दिन कालेज में न देख कर वह मिलने घर ही आ गई. उस ने सुधा को मार्केट के बाद हुई घटना के बारे में बताया और दीपक के बारे में भी.

‘‘अरे, मैं तो उसे जानती हूं, बहुत सीधासादा, अच्छा लड़का है. कभीकभी थोड़ी बातचीत हो जाती है, नोट्स को ले कर,’’ सुधा ने एकदम से कहा. दोनों फिर कालेज के लिए रवाना हुईं.

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शाम तक अवनि का पैरदर्द कम था, फिर भी वह थोड़ा लंगड़ाती हुई चल रही थी. रात को खाना खाया ही था कि डोरबैल बजी. अवनि ने दरवाजा खोला, देखा तो दरवाजे पर दीपक था. अवनि ने उस से अंदर आ कर बैठने को कहा. दीपक बैठते हुए बोला, ‘‘सौरी, 2 दिन से आप के हालचाल पूछने नहीं आ सका. कालेज और गैराज से समय नहीं मिला. काम ज्यादा था. आज काम कम था तो खत्म कर के सीधा यहीं आ गया.’’

‘‘इट्स ओके,’’ अवनि ने कहा, ‘‘नो प्रौब्लम, अब मैं ठीक हूं, थोड़ा दर्द है. 2-3 दिन में वह भी दूर हो जाएगा.’’

फिर बोली, ‘‘खाना खुद बनाते हो या होटल में खाते हो?’’

दीपक ने शरमाते हुए कहा, ‘‘मैं खुद बनाता हूं. अब जाऊंगा, बना कर खाऊंगा.’’

‘‘अब तुम्हें देर भी हो गई है तो आज यहीं से खाना खा कर जाओ. पर हां, सादी रोटी, दालचावल, सब्जी है. पकवान नहीं,’’ मुसकराहट के साथ अवनि ने कहा.

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

Bigg Boss 14 में राहुल वैद्य ने जान कुमार सानू पर लगाया नेपोटिज्म का आरोप, मां ने दिया ऐसा बयान

जबसे बॉलीवुड के टेलेंटिड एक्टर्स में से एक सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) ने आत्महत्या की है तबसे इंडस्ट्री से जुड़ा एक नाम बार बार सामने आ रहा है जो कि नेपोटिज्म (Nepotism) का है. आपको बता दें कि बॉलीवुड में जो कि पौपुलर एक्टर्स और डायरेक्टर्स हैं वे सब सिर्फ अपने जानने वालों और अपने करीबी लोगों को ही आगे बढ़ने देते हैं और सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) जैसे एक्टर्स जो खुद अपनी मेहनत से इस इंडस्ट्री से जुड़े हैं उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

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बॉलीवुड में नेपोटिज्स फैलाने वाले लोगों में से सलमान खान (Salman Khan), करण जौहर (Karan Johar), महेश भट्ट (Mahesh Bhatt), संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) जैसे लोगों का नाम शामिल था. जैसा कि हम सब जानते हैं कि इन दिनों बिग बॉस का सीजन 14 (Bigg Boss 14) खूब सुर्खियों में बना हुआ है और ऐसे में कंटेस्टेंट राहुल वैद्य (Rahul Vaidya) और कुमार सानू (Kumar Sanu) के बेटे और बिग बॉस के कंटेस्टेंट जान कुमार सानू (Jaan Kumar Sanu) ने बीच कुछ ऐसा हुआ जिससे कि वे दोनों चर्चाओं में आ गए हैं.

दरअसल राहुल वैद्य (Rahul Vaidya) ने जान कुमार सानू (Jaan Kumar Sanu) को बिग बॉस के घर से बेघर करने के लिए नॉमिनेट किया. नॉमिनेट करने की पीछे राहुल वैद्य (Rahul Vaidya) की वजह ये थी कि उन्हें लगता है जान कुमार सानू (Jaan Kumar Sanu) नोपोटिज्म की वजह से यहां हैं. राहुल के इस वाक्य के बाद ना सिर्फ बिग बॉस के घर में बल्कि सोशल मीडिया पर भी काफी हंगामा देखने को मिला.

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इसी के चलते जान कुमार सानू (Jaan Kumar Sanu) की मां रीटा भट्टाचार्य (Rita Bhattacharya) ने राहुल वैद्य (Rahul Vaidya) को जवाब देते हुए कहा कि “जान को तो छोड़ ही दीजिए, उनके दूसरे बेटे भी राहुल से अच्छा गा सकते हैं.” इसके आगे रीटा भट्टाचार्य (Rita Bhattacharya) ने कहा,- “जान अपनी मेहनत के दम पर शो में है. अगर राहुल सोचता है कि जान नेपोटिज्म के कारण शो में है तो वे दोनों एक साथ एक ही प्लैटफॉर्म पर क्यों हैं? जान के पिता ने इंडस्ट्री में 23 हजार गाने गाए हैं, इस नाते जान को तो कम से कम 23 गाने तो गा ही लेने चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं है, जान ने जो हासिल किया है, सब अपनी बदौलत किया है.”

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जान कुमार सानू (Jaan Kumar Sanu) की मां ने राहुल वैद्य (Rahul Vaidya) पर निशाना साधते हुए बयान दिया कि, “मैंने इंटरनेट पर कई वीडियो देखे जिनमें राहुल भारत के सबसे अमीर परिवार के घर में गाना गा रहा है. जिसके घर में वो गाना गा रहा था, वह भी देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे अमीर पिता की संतान है. उस वक्त उसे नेपोटिज्म की याद क्यों नहीं आई? जान को भूल जाइए, उसके पिता भी नेपोटिज्म का प्रोडक्ट नहीं हैं. अपने टैलेंट और मेहनत के दम पर वे कुमार सानू बने. कुमार जानते हैं कि उनका बेटा अच्छा गा सकता है, फिर भी फिल्म इंडस्ट्री में एक म्यूजिक कंपोजर या डायरेक्टर नहीं है जिन्हें उन्होंने कहा हो कि उसे एक मौका दो.

Mirzapur 2 में मुन्ना त्रिपाठी की पत्नी के रोल में इस एक्ट्रेस ने जीता फैंस का दिल, इन फिल्मों में भी आ चुकी हैं नजर

अमेजॉन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) की सबसे पौपुलर हिंदी वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ (Mirzapur) ने अपनी कमाल की फैन फौलोविंग हासिल की है. 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुआ मिर्जापुर के पहले सीजन ने लोगों का दिन इस कदर जीत लिया था की फैंस से इस वेब सीरीज के अगले सीजन का इंतजार ही नहीं हो रहा था. लगभग 2 साल बाद अब 23 अक्टूबर 2020 को मिर्जापुर का अगला सीजन रिलीज हो चुका है और फैंस को बेहद पसंद आ रहा है.

 

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Munna urf @divyenndu, tumne bhi binge watch kar liya hai kya? #Mirzapur2 @yehhaimirzapur @primevideoin @excelmovies

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इस वेब सीरीज के सभी कलाकारों ने अपनी बेहतरीन एक्टिंग से लोगों के दिलों में जगह बनाई है जैसे कि कालीन भईया (Pankaj Tripathi), मुन्ना त्रिपाठी (Divyendu Sharma), गुड्डू पंडित (Ali Fazal), बब्लू पंडित (Vikrant Massey), आदी. जैसा कि हम सब जानते हैं कि ‘मिर्जापुर सीजन 2’ (Mirzapur 2) में कई ऐसे नए कलाकारों ने भी एंट्री ली है जिन्होनें इस वेब सीरीज में अपने टेलेंट से और चार चांद लगा दिए हैं.

नए कलाकारों में से एक नाम है एक्ट्रेस ईशा तलवार (Isha Talwar) का जो कि यूपी की सीएम और मुन्ना त्रिताठी की पत्नी के किरदार में दिखाई दीं है. ईशा तलवार (Isha Talwar) दिखने में इतनी खूबसूरत हैं कि मिर्जापुर फैंस उन्हें स्क्रीन पर देखते ही पागल से हो गए थे. सभी के दिलों में सवाल था कि आखिर ये एक्ट्रेस है कौन तो आपको बता दें कि एक्ट्रेस ईशा तलवार (Isha Talwar) साउथ इंडस्ट्री की काफी पौपुलर एक्ट्रेस है.

 

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Finally not showing up in nightsuits at events ! #kamyaab

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साल 2000 में फिल्म ‘हमारा दिल आपके पास है’ (Humara Dil Aapke Paas Hai) में चाइल्ड आर्टिस्ट के रोल से अपने करियर की शुरूआत करने वाली एक्ट्रेस ईशा तलवार (Isha Talwar) ने तेलुगु, तमिल और मलयालम फिल्मों से अपनी कमाल की फैन फौलोविंग हासिल की है. आपको बता दें कि एक्ट्रेस ईशा तलवार (Isha Talwar) ने ट्यूबलाइट (Tubelight), कालाकांडी (Kaalakaandi), आर्टिकल 15 (Article 15) जैसी कई फिल्मों में बेहतरीन भूमिका निभाई है.

 

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OMG! Do I spot my long lost jawline again??? #onset #Delhi #sharmajinamkeen #newfilm 🙂

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मोहब्बत में पिता की बली: भाग 1

चारों तरफ घुप अंधेरा था. आसमान में बादल छाए थे और हलकी बूंदाबांदी हो रही थी. रात के 10 बज चुके थे. गांव के अधिकांश लोग गहरी नींद में थे. चारों ओर सन्नाटा पसरा था. श्याम नारायण मिश्रा की बेटी रीना को छोड़ कर उन के घर के सभी सदस्य सो गए थे. लेकिन रीना की आंखों से नींद कोसों दूर थी. वह चारपाई पर लेटी बेचैनी से इधरउधर करवटें बदल रही थी.

जब रीना को इत्मीनान हो गया कि घर के सभी लोग सो गए हैं तो वह चारपाई से आहिस्ता से उठी और दबे पांव दरवाजे की कुंडी खोल कर घर के बाहर पहुंच गई. घर के पड़ोस में रहने वाला अक्षय कुमार उर्फ छोटू बाहर खड़ा उस का इंतजार कर रहा था. रीना उस के पास पहुंची तो वह मुसकराते हुए फुसफुसाया, ‘‘आज आने में बड़ी देर कर दी, मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं.’’

रीना ने एकदम उस के करीब आ कर हौले से कहा, ‘‘घर के लोग जाग रहे थे, इसलिए घर से निकल नहीं सकी. सब के सो जाने के बाद आने का मौका मिला’’

‘‘मुझे तो लग रहा था कि आज तुम नहीं आओगी.’’ अक्षय ने रीना का हाथ पकड़ कर कहा.

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है अक्षय कि तुम बुलाओ और मैं न आऊं. तुम्हारे लिए तो मैं अपनी जान भी दे सकती हूं.’’ रीना ने अपना सिर अक्षय के सीने पर सटा कर कहा.

‘‘ऐसी बातें मत करो रीना, हमें जिंदा रहना है और अपने प्यार की दास्तान भी लिखनी है.’’ कहते हुए अक्षय ने रीना को अपनी बांहों में कैद कर लिया.

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उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ के थाना पवई के अंतर्गत एक गांव है सौदमा पवई. आजमगढ़ जाने वाली सड़क के किनारे बसे इस गांव की आबादी मिलीजुली है. इसी सौदमा गांव में श्याम नारायण मिश्रा अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी सुमन के अलावा 3 बेटे रत्नेश, उमेश, पिंकू तथा एक बेटी रीना थी. श्याम नारायण किसान थे. उन के बेटे खेती के काम में उन की मदद करते थे. श्याम नारायण गांव में श्याम पंडित के नाम से मशहूर थे.

रीना मिश्रा 3 भाइयों के बीच अकेली बहन थी, सब से छोटी भी, इसलिए सभी उसे स्नेह देते थे. रीना ने बचपन का आंगन लांघ कर यौवन की दहलीज पर कदम रख दिया था. उस का रंग तो सांवला था लेकिन आकर्षण गजब का था. उम्र का 16वां साल पार करते ही उस के रूपलावण्य में जो निखार आया, वह देखते ही बनता था.

श्याम नारायण मिश्रा के घर के ठीक सामने उदयराज मिश्रा का मकान था. उदयराज मिश्रा के परिवार में पत्नी किरन के अलावा 2 बेटे अजय कुमार, अक्षय कुमार तथा बेटी गरिमा थी. बेटी की उन्होंने शादी कर दी थी. उदयराज भी किसान थे.

श्याम नारायण मिश्रा और उदयराज के परिवारों में निकटता थी. दोनों परिवार एकदूसरे के सुखदुख में भागीदार रहते थे. परिवार की महिलाओं व बच्चों का बेरोकटोक एकदूसरे के घर आनाजाना था. रीना और अक्षय की उम्र में 4 साल का अंतर था. रीना 17 साल की उम्र पार कर चुकी थी, वहीं अक्षय 22 साल का हो चुका था.

रीना कभी मां के साथ तो कभी अकेले अक्षय के घर जाती थी. वह जब भी अक्षय के घर आती, अक्षय से पढ़ाई से संबंधित बातें कर लेती थी. बातचीत करते दोनों हंसीठिठोली भी करते तथा एकदूसरे को चिढ़ाते भी थे.

रीना और अक्षय दोनों ही युवा थे. इस उम्र में मन कुलांचे भरता है. दिल में किसी की चाहत पाने की तमन्ना होती है अत: दोनों का रुझान एकदूसरे के प्रति हो गया. मन ही मन वे आपस में प्यार करने लगे.

एक दिन बात करतेकरते अक्षय का मन मचला. उस ने रीना का हाथ पकड़ लिया. वह कुछ नहीं बोली. अक्षय अपने स्थान से उठ कर रीना से सट कर बैठ गया. रीना तब भी मुसकराती रही.

अक्षय के हौसले को हवा मिली तो उस ने रीना का चेहरा हथेलियों में ले लिया. विरोध करने के बजाय रीना मुसकराती रही.

अक्षय ने उस के होंठों की ओर होंठ बढ़ाए तो रीना ने हया से नजरें झुका लीं. होंठों से होंठों का मिलाप हुआ तो रोमांचित हो कर रीना ने आंखें बंद कर लीं. अक्षय ने रीना के होंठों से अपने होंठ अलग किए, तो रीना ने आंखें खोलीं. शरारती अंदाज में होंठों पर जीभ फिराई और मुसकराने लगी.

रीना के इस कातिलाना अंदाज पर अक्षय सौसौ जान से न्यौछावर हो गया.

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दोस्ती बदल गई प्यार में

शुरू में अक्षय और रीना के बीच महज दोस्ती थी. लेकिन समय के साथ इस रिश्ते ने कब प्यार का रूप धारण कर लिया, इस का पता न तो अक्षय को लगा और न ही रीना को. दोनों उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके थे, जहां महत्त्वाकांक्षाएं हिलोरें मारने लगती हैं. मन में कुछ नया करने की उत्सुकता जाग उठती है. अक्षय को अब रीना सिर्फ दोस्त ही नहीं, बल्कि और भी बहुत कुछ लगने लगी थी. इसलिए वह रीना से बातें करते समय बेहद संजीदा हो जाता था.

रीना भी अक्षय में आए बदलाव से अनभिज्ञ नहीं थी. उस की शोख निगाहें जब अक्षय की निगाहों से टकरातीं तो उस के दिल में गुदगुदी सी होने लगती थी. उस का भी मन चाहता था कि अक्षय इसी तरह प्यार भरी निगाहों से उसे निहारता रहे.

दोनों पर प्यार का ऐसा नशा चढ़ा कि उन्हें एकदूसरे के बिना सब कुछ सूना लगने लगा. दोनों घंटों बैठ कर भविष्य की योजनाएं बनाते रहते. साथ जीनेमरने की कसमें भी खाते.

एक रोज अक्षय को जानकारी मिली कि रीना के मातापिता कहीं रिश्तेदारी में गए हैं और भाई खेत पर काम कर रहा है. उचित मौका देख अक्षय पासपड़ोस के लोगों की नजरों से बचते रीना के घर पहुंच गया.

घर के अंदर पहुंचते ही उस ने मुख्य दरवाजा बंद किया और फिर रीना को अपनी बांहों में जकड़ लिया. रीना कसमसाई और बनावटी विरोध भी किया. लेकिन अक्षय ने उसे मुक्त नहीं किया.

आखिर रीना ने भी शरीर ढीला छोड़ कर उस का साथ देना शुरू कर दिया. इस के बाद उन्होंने अपनी हसरतें पूरी कीं. फिर तो यह सिलसिला चल निकला. मौका मिलते ही दोनों अपनी हसरतें पूरी कर लेते थे.

दोनों रीना और अक्षय ने लाख कोशिश की कि उन के प्रेम संबंधों की भनक किसी को न लगे, लेकिन प्यार की महक को भला कौन रोक पाया. वह तो स्वयं ही फिजा में तैरने लगती है. एक रोज गांव के एक युवक ने शाम के वक्त दोनों को गांव के बाहर बगीचे में हंसीठिठोली करते देख लिया. उस युवक ने यह बात रीना के पिता श्याम नारायण मिश्रा को बता दी.

पिता को उस की बातों पर एक बार को तो विश्वास नहीं हुआ. उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उन की बेटी कोई ऐसा कदम उठाएगी, जिस के कारण उन का सिर शर्म से झुक जाए. श्याम नारायण ने इस बारे में घर में किसी से कुछ नहीं कहा, लेकिन रीना की निगरानी करने लगे.

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पिता ने पकड़ा रंगेहाथों

एक दिन श्याम नारायण ने खुद रीना को अक्षय से एकांत में मिलते देख लिया. प्रेमी से मिलने के बाद रीना जब घर लौटी तो उन्होंने उसे न केवल जम कर लताड़ा, बल्कि उस की पिटाई भी कर दी. उन्होंने उसे हिदायत दी कि आज के बाद अगर उस ने अक्षय से मिलने की कोशिश की तो उस के लिए अच्छा नहीं होगा.

रीना की मां सुमन ने भी समाज का हवाला दे कर रीना को समझाया, ‘‘बेटी, अक्षय पड़ोसी है. हमारे ही खानदान का है. हम दोनों एक ही गोत्र के हैं. इस नाते तुम दोनों का रिश्ता भाईबहन का है. इसलिए तेरा उस से मेलजोल बढ़ाना ठीक नहीं है.’’

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

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मोहब्बत में पिता की बली: भाग 2

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जब दो प्रेमियों के बीच पाबंदियां लगीं तो वे बुरी तरह छटपटाने लगे. दरअसल रीना अक्षय के दिलोदिमाग पर नशा बन कर छा चुकी थी. उस की सांवली सूरत ने अक्षय पर जादू सा कर दिया था. वही हाल रीना का भी था. वह भी अक्षय से एक पल को भी जुदा नहीं होना चाहती थी.

दोनों की प्रेम लगन बढ़ती गई तो उन्होंने मिलने का एक अनोखा रास्ता खोज लिया. एक दिन अक्षय ने रीना को संदेश भिजवाया कि वह रात को 10 बजे के बाद घर के बाहर गली में उस का इंतजार करेगा.

ग्रामीण परिवेश के लोग रात को जल्द सो जाते हैं और सुबह जल्दी उठते हैं. रीना के घर वाले भी जब रात 10 बजे तक गहरी नींद सो गए तो वह दबे पांव कुंडी खोल कर घर के बाहर चली गई, जहां अक्षय उस का इंतजार कर रहा था.

दोनों ने गिलेशिकवे दूर किए और घर से कुछ दूरी पर स्थित सहकारी भवन में पहुंच गए. वहां किसी के आने या देख लेने की आशंका नहीं थी. अपनी हसरतें पूरी करने के बाद दोनों अपनेअपने घर चले गए. उन के आनेजाने की किसी को भनक तक नहीं लगी. इस के बाद तो उन का वहां मिलने का सिलसिला ही चल पड़ा.

अक्षय और रीना मिलने में भले ही सतर्कता बरतते थे, लेकिन इस के बावजूद वे पकड़े गए. दरअसल एक रात रीना ने जैसे ही दरवाजे की कुंडी खोली, तभी श्याम नारायण की आंखें खुल गईं. वह उठे तो उन्हें दरवाजे पर एक साया दिखाई दिया. वह उस जगह पहुंचे तो रीना खड़ी थी.

श्याम नारायण को समझते देर नहीं लगी कि रीना घर के बाहर जा रही थी. उन्होंने सामने गली की ओर नजर डाली तो वहां एक युवक खड़ा था. वह उस की ओर लपके तो वह वहां से भाग कर अंधेरे में गुम हो गया. श्याम नारायण को समझते देर नहीं लगी कि भागने वाला युवक अक्षय था.

श्याम नारायण का गुस्सा सातवें आसमान जा पहुंचा. उन्होंने रीना का हाथ पकड़ा और घसीटते हुए घर के अंदर ले आए. उन्होंने उस की जम कर पिटाई की. रीना रात भर कराहती रही.

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सुबह होते ही श्याम नारायण पड़ोसी उदयराज के घर जा पहुंचे. उन्होंने उदयराज को धमकाया कि वह अपने आवारा लड़के अक्षय को समझा लें, वह हमारी बेटी रीना को बरगला रहा है. जिस दिन वह रीना के साथ दिख गया, उस दिन बहुत बुरा होगा.

उदयराज सुलझा हुआ इंसान था. उस ने श्याम नारायण की शिकायत बेहद गंभीरता से ली और भरोसा दिया कि वह अक्षय को डांटडपट कर तथा समझा कर रीना से दूर रहने की नसीहत देगा. साथ ही उस ने श्याम नारायण को भी सलाह दी कि वह भी रीना को प्यार से समझाए कि वह अक्षय से बात न करे.

दोपहर बाद अक्षय घर आया तो उदयराज ने उसे आड़े हाथों लिया. उस ने अक्षय को डांटा तथा रीना से दूर रहने की नसीहत दी. इस पर अक्षय ने पिता को बताया कि वह रीना से प्यार करता है और रीना भी उसे चाहती है. वे दोनों शादी करना चाहते हैं.

बेटे की यह बात सुनकर उदयराज ने उसे  बहुत लताड़ा. उन्होंने साफ कह दिया कि दोनों का गोत्र एक है, इसलिए उन की शादी नहीं हो सकती.

उधर रीना और अक्षय प्यार के उस मोड़ पर पहुंच गए थे, जहां से उन का वापस आना नामुमकिन था. इसलिए घर वालों की नसीहत का उन पर स्थाई असर नहीं हुआ. चोरीछिपे दोनों मिलते रहे. उन्हें जब जैसे घरबाहर जहां भी मौका मिलता, मिल लेते.

घर वालों की सतर्कता रह गई धरी की धरी

लेकिन सतर्कता के बावजूद एक रात वे दोनों फिर पकड़े गए. हुआ यह कि श्याम नारायण और उन के बेटे रिश्तेदारी में एक शादी समारोह में शामिल होने मीरजापुर गए थे. घर पर सुमन और रीना ही रह गई थी.

शाम को रीना ने खाना बनाया. उस ने पहले मां को खाना खिलाया फिर खाना खा कर घर का काम निपटाया. इस के बाद वह मां के साथ चारपाई पर लेट गई. सुमन तो कुछ देर बाद सो गई लेकिन रीना की आंखों से नींद कोसों दूर थी. उसे रहरह कर प्रेमी अक्षय की याद आ रही थी.

रीना की जब बेचैनी बढ़ी तो वह छत पर पहुंच कर टहलने लगी. उसी समय उस की निगाह अक्षय पर पड़ी. वह भी अपनी छत पर चहलकदमी कर रहा था. उसे देखते ही रीना की उस से मिलने की कामना बढ़ गई. उस ने एक कंकड़ फेंक कर अक्षय का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. जब अक्षय ने उस की तरफ देखा तो उस ने उसे अपनी छत पर आने का इशारा किया.

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इशारा पाते ही अक्षय अपनी छत से नीचे उतर आया. इस के बाद रीना छत से उतर कर नीचे आई और दरवाजे की कुंडी खोल कर अक्षय को अपनी छत पर ले गई. वहां दोनों मौजमस्ती में लग गए.

उसी दौरान रीना की मां सुमन की आंखें खुलीं. चारपाई पर रीना को न देख कर उस का माथा ठनका. उस ने रीना की घर में खोज की. जब वह नहीं दिखी तो वह छत पर पहुंची. छत का दृश्य देख कर सुमन आश्चर्यचकित रह गई. छत पर रीना और अक्षय आपत्तिजनक अवस्था में थे.

सुमन को देख कर अक्षय तो जैसेतैसे कपड़े लपेट कर अपने घर चला गया, पर रीना कहां जाती. सुमन उस के बाल पकड़ कर खींचते हुए छत से नीचे लाई. फिर उस के गाल पर 4-5 तमाचे जड़ दिए और खूब खरीखोटी सुनाई.

सुमन शब्दों के तीर से रीना का सीना छलती करती रही और रीना अपराधबोध से सब सहती रही. सुबह मांबेटी में इतनी नफरत भर गई कि दोनों ने एकदूसरे का मुंह देखना तक मुनासिब नहीं समझा.

दोनों ही अलगअलग कमरे में पड़ी रोती रहीं. उस रोज घर में खाना भी नहीं बना. दूसरे दिन श्याम नारायण अपने बेटों के साथ वापस घर आ गए. घर में कलह न हो इसलिए सुमन ने पति को यह जानकारी नहीं दी.

सुमन अब रीना पर पैनी नजर रखने लगी थी. दिन की बात तो छोडि़ए, रात को भी वह उस की निगरानी रखती थी. लेकिन शातिर रीना मां की आंखों में धूल झोंक कर प्रेमी से मिल ही लेती थी. परंतु अपनी निगरानी से सुमन यह समझने लगी थी कि रीना और अक्षय का मेलजोल अब बंद हो गया है.

23 जून, 2019 को पड़ोस के गांव में एक यज्ञ का आयोजन था. श्याम नारायण तथा उन के बेटे इस आयोजन में शामिल होने के लिए रात 8 बजे अपने घर से चले गए. सुमन भी खाना खा कर चारपाई पर पसर गई. कुछ देर बाद वह गहरी नींद में सो गई.

रीना ने उचित मौका देखा और अपने प्रेमी अक्षय को घर बुला लिया. इस के बाद वह कमरे में जा कर प्रेमी के साथ मौजमस्ती में लग गई.

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इसी बीच श्याम नारायण यज्ञ आयोजन से घर वापस आ गया. दरअसल उन्हें नींद आ रही थी. घर पहुंच कर उन्होंने दरवाजे पर दस्तक दी तो दरवाजा खुल गया. कमरे के अंदर का दृश्य देख कर श्याम नारायण का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया.

कमरे के अंदर रीना और अक्षय आपत्तिजनक स्थिति में थे. श्याम नारायण ने अक्षय को जोर से लात जमाई तो वह लड़खड़ा कर उठा और वहां से अर्धनग्न अवस्था में ही वहां से भाग गया. इस के बाद उन्होंने रीना की जम कर पिटाई की और भद्दीभद्दी गालियां दीं.

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मोहब्बत में पिता की बली: भाग 3

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बाप की पिटाई ने आग में घी डालने जैसा काम किया. रीना के मन में अब बाप के प्रति नफरत की आग भड़क उठी. उस ने मन ही मन निश्चय कर लिया कि वह प्रेमी की मदद से बाप को सबक जरूर सिखाएगी. उस ने यह भी निश्चय कर लिया कि यदि दोबारा बाप ने हाथ उठाया तो वह मुंहतोड़ जवाब देगी.

26 जून, 2019 की सुबह जब पिता व भाई खेत पर काम करने चले गए और मां खाना बनाने में लग गई तब रीना दबे पांव घर से निकली और बिना किसी डर के उस ने गली के मोड़ पर खड़े अक्षय से मुलाकात की. वह गंभीर हो कर बोली, ‘‘अक्षय, मैं तुम से बेहद प्यार करती हूं और तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रहना चाहती. लेकिन मेरा बाप हम दोनों के प्यार में रोड़ा बन रहा है. मैं चाहती हूं कि…’’

‘‘क्या चाहती हो तुम?’’ अक्षय उस की बात पूरी होने से पहले ही बोल पड़ा.

‘‘यही कि इस रोड़े को हमेशा के लिए हटा दो ताकि हमारी मुलाकात में कोई अड़चन न आए.’’ वह बोली.

‘‘तुम ठीक कह रही हो रीना. मैं तुम्हारा साथ जरूर दूंगा. मैं भी उस की लात अभी तक भूला नहीं हूं. जो उस ने मेरी पीठ पर जमाई थी.’’ अक्षय ने कहा.

इस के बाद रीना और अक्षय ने मिल कर श्याम नारायण की हत्या की योजना बनाई. योजना के तहत अक्षय पवई गया और एक मैडिकल स्टोर से नींद की गोलियां ला कर रीना को दे दीं.

योजना के तहत रीना ने 27 जून, 2019 की शाम खाना बनाने के बाद नशीली गोलियां खाने में मिला दीं. इस के बाद उसे छोड़ कर परिवार के सभी सदस्यों ने खाना खाया और अलगअलग चारपाई पर जा कर सो गए.

श्याम नारायण मिश्रा घर के बाहर मड़ई (झोपड़ी) में सोने चले गए. वह वहीं सोते थे. थोड़ी देर बाद नींद की गोलियों के असर से परिवार के लोग गहरी नींद में चले गए. लेकिन रीना की आंखों में नींद नहीं थी. वह तो प्रेमी के आने का इंतजार कर रही थी.

रात करीब 12 बजे अक्षय रीना के घर के बाहर आया. रीना को संकेत देने के लिए उस ने रीना के घर के बाहर सड़क किनारे लगा हैंडपंप चलाया. रीना हैंडपंप की आवाज सुन कर बाहर निकल आई और अक्षय को घर में ले गई. अक्षय ने रीना से पूछा कि मर्डर किस हथियार से करना है. इस पर रीना घर से फावड़ा व खुरपी ले आई.

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फिर दोनों श्याम नारायण की चारपाई के पास पहुंचे. रीना ने गहरी नींद में सो रहे पिता पर एक नजर डाली, फिर दोनों श्याम नारायण पर टूट पड़े. अक्षय ने फावड़े से श्याम नारायण के सिर, चेहरे व शरीर के अन्य हिस्सों पर प्रहार किया. वहीं रीना ने खुरपी से बाप के गले पर प्रहार कर जख्मी कर दिया. श्याम नारायण के लहूलुहान होने पर खून के छींटे दोनों के कपड़ों पर भी पडे़. कुछ देर तड़पने के बाद श्याम नारायण ने दम तोड़ दिया.

हत्या कर शव लगाया ठिकाने

हत्या करने के बाद रीना और अक्षय ने लाश ठिकाने लगाने की सोची. रीना के घर के बगल में एक संकरी गली थी, जिस के बीच नाली थी. दोनों ने इसी नाली में लाश छिपाने की योजना बनाई. योजना के तहत रीना ने दोनों हाथ तथा अक्षय ने दोनों पैर पकड़े और शव संकरी गली में बनी नाली में फेंक दिया. शव के ऊपर उन्होंने खरपतवार डाल दी, जिस से शव न दिखे.

शव ठिकाने लगाने के बाद रीना व अक्षय ने खून सना फावड़ा व खुरपी घर के अंदर भूसे की कोठरी में छिपा दी तथा घटनास्थल से खून आदि साफ कर दिया. रीना ने पिता का मोबाइल, चार्जर तथा चुनौटी (तंबाकू, चूना रखने की डब्बी) रसोई में ले जा गैस के पास रख दी. फिर बाथरूम में खून सने कपड़े उतारे और हाथों में लगा खून साफ किया. कपड़े उस ने घर में ही छिपा दिए और चारपाई पर जा कर लेट गई.

उधर अक्षय ने हैंडपंप से खून सने हाथ साफ किए तथा खून सने कपड़े उतार कर दूसरे पहन लिए. खून सने कपड़े उस ने गांव के बाहर झाडि़यों में छिपा दिए. इस के बाद वह इत्मीनान से घर के बाहर पड़ी चारपाई पर आ कर सो गया.

सुबह अलसाई आंखों से सुमन देर से जागी. वह चाय बनाने रसोई में पहुंची तो वहां पति का मोबाइल, चार्जर व चुनौटी रखी थी. सामान देख कर वह असमंजस में पड़ गई, फिर सोचा कि शायद वह भूल गए होंगे.

चाय बना कर वह बाहर आई तो देखा पति चारपाई पर नहीं हैं. उस ने घर के अंदर सो रहे बेटों तथा बेटी रीना को उठाया और बताया कि उन के पापा पता नहीं कहां चले गए हैं? कुछ ही देर बाद श्याम नारायण मिश्रा के गायब हो जाने का हल्ला पूरे गांव में मच गया.

श्याम नारायण मिश्रा की तलाश शुरू हुई तो उसी खोजबीन में किसी ने उन की लाश घर के बगल में संकरी गली में नाली में पड़ी देखी. लाश के ऊपर जो घासफूस डाली गई थी, जो पानी में बह गई थी.

लाश मिलते ही घर में कोहराम मच गया. सुमन मिश्रा दहाड़ें मार कर रोने लगी. परिवार के अन्य सदस्य भी रोनेपीटने लगे. इसी बीच गांव के किसी व्यक्ति ने थाना पवई पुलिस को सूचना दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी संजय कुमार पुलिस टीम के साथ सौदमा गांव आ गए.

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उन्होंने घटना की सूचना पुलिस अधिकारियों को भी दे दी, फिर शव को नाली से बाहर निकलवाया. श्याम नारायण मिश्रा की हत्या बड़ी बेरहमी से की गई थी. उन के शरीर पर किसी धारदार हथियार से प्रहार कर मौत के घाट उतारा गया था. उन के सिर, चेहरा व शरीर के अन्य भागों पर एक दरजन से अधिक चोटें थीं.

थानाप्रभारी अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसपी त्रिवेणी सिंह, एसपी (यातायात) मोहम्मद तारिक तथा सीओ (फूलपुर) शिवशंकर सिंह आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया तथा परिजनों से पूछताछ की. अधिकारियों ने थानाप्रभारी को आदेश दिया कि वह शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजें और घटना का जल्द खुलासा करें.

आदेश पाते ही थानाप्रभारी ने शव को पोस्टमार्टम हेतु भिजवाया और मृतक की पत्नी सुमन, बेटी रीना तथा बेटों रत्नेश, रमेश व पिंकू से पूछताछ की. सभी ने हत्या से अनभिज्ञता जाहिर की.

इसी बीच थानाप्रभारी को पता चला कि मृतक की बेटी रीना और पड़ोसी युवक अक्षय के बीच प्रेम संबंध हैं, जिस का श्याम नारायण विरोध करते थे. हत्या का रहस्य इन्हीं दोनों के पेट में छिपा है. यदि दोनों से सख्ती से पूछताछ की जाए तो भेद खुल सकता है.

दोनों प्रेमी हुए गिरफ्तार

यह जानकारी मिलते ही पहली जुलाई, 2019 को थानाप्रभारी संजय कुमार ने रीना और उस के प्रेमी अक्षय को हिरासत में ले लिया. थाना पवई ला कर जब दोनों से श्याम नारायण की हत्या के संबंध में सख्ती से पूछा गया तो दोनों टूट गए और हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

रीना की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त फावड़ा, खुरपी तथा खून सने कपड़े बरामद कर लिए.

अक्षय की निशानदेही पर पुलिस ने उस के खून से सने कपड़े बरामद कर लिए जिन्हें उस ने झाडि़यों में छिपा दिया था. मृतक का मोबाइल, चार्जर, चुनौटी भी पुलिस ने बरामद कर ली. बरामद सामान को पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर जाब्ते में शामिल कर लिया.

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चूंकि अभियुक्तों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, अत: थानाप्रभारी संजय कुमार ने मृतक की पत्नी सुमन मिश्रा की तरफ से रीना और अक्षय के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें बंदी बना लिया.

अभियुक्तों से एसपी त्रिवेणी सिंह ने भी पूछताछ की और उन्हें मीडिया के समक्ष पेश कर घटना का खुलासा किया. 2 जुलाई, 2019 को थाना पवई पुलिस ने अभियुक्त रीना व अक्षय को आजमगढ़ कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया, जहां से उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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