चारों तरफ घुप अंधेरा था. आसमान में बादल छाए थे और हलकी बूंदाबांदी हो रही थी. रात के 10 बज चुके थे. गांव के अधिकांश लोग गहरी नींद में थे. चारों ओर सन्नाटा पसरा था. श्याम नारायण मिश्रा की बेटी रीना को छोड़ कर उन के घर के सभी सदस्य सो गए थे. लेकिन रीना की आंखों से नींद कोसों दूर थी. वह चारपाई पर लेटी बेचैनी से इधरउधर करवटें बदल रही थी.

जब रीना को इत्मीनान हो गया कि घर के सभी लोग सो गए हैं तो वह चारपाई से आहिस्ता से उठी और दबे पांव दरवाजे की कुंडी खोल कर घर के बाहर पहुंच गई. घर के पड़ोस में रहने वाला अक्षय कुमार उर्फ छोटू बाहर खड़ा उस का इंतजार कर रहा था. रीना उस के पास पहुंची तो वह मुसकराते हुए फुसफुसाया, ‘‘आज आने में बड़ी देर कर दी, मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं.’’

रीना ने एकदम उस के करीब आ कर हौले से कहा, ‘‘घर के लोग जाग रहे थे, इसलिए घर से निकल नहीं सकी. सब के सो जाने के बाद आने का मौका मिला’’

‘‘मुझे तो लग रहा था कि आज तुम नहीं आओगी.’’ अक्षय ने रीना का हाथ पकड़ कर कहा.

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है अक्षय कि तुम बुलाओ और मैं न आऊं. तुम्हारे लिए तो मैं अपनी जान भी दे सकती हूं.’’ रीना ने अपना सिर अक्षय के सीने पर सटा कर कहा.

‘‘ऐसी बातें मत करो रीना, हमें जिंदा रहना है और अपने प्यार की दास्तान भी लिखनी है.’’ कहते हुए अक्षय ने रीना को अपनी बांहों में कैद कर लिया.

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उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ के थाना पवई के अंतर्गत एक गांव है सौदमा पवई. आजमगढ़ जाने वाली सड़क के किनारे बसे इस गांव की आबादी मिलीजुली है. इसी सौदमा गांव में श्याम नारायण मिश्रा अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी सुमन के अलावा 3 बेटे रत्नेश, उमेश, पिंकू तथा एक बेटी रीना थी. श्याम नारायण किसान थे. उन के बेटे खेती के काम में उन की मदद करते थे. श्याम नारायण गांव में श्याम पंडित के नाम से मशहूर थे.

रीना मिश्रा 3 भाइयों के बीच अकेली बहन थी, सब से छोटी भी, इसलिए सभी उसे स्नेह देते थे. रीना ने बचपन का आंगन लांघ कर यौवन की दहलीज पर कदम रख दिया था. उस का रंग तो सांवला था लेकिन आकर्षण गजब का था. उम्र का 16वां साल पार करते ही उस के रूपलावण्य में जो निखार आया, वह देखते ही बनता था.

श्याम नारायण मिश्रा के घर के ठीक सामने उदयराज मिश्रा का मकान था. उदयराज मिश्रा के परिवार में पत्नी किरन के अलावा 2 बेटे अजय कुमार, अक्षय कुमार तथा बेटी गरिमा थी. बेटी की उन्होंने शादी कर दी थी. उदयराज भी किसान थे.

श्याम नारायण मिश्रा और उदयराज के परिवारों में निकटता थी. दोनों परिवार एकदूसरे के सुखदुख में भागीदार रहते थे. परिवार की महिलाओं व बच्चों का बेरोकटोक एकदूसरे के घर आनाजाना था. रीना और अक्षय की उम्र में 4 साल का अंतर था. रीना 17 साल की उम्र पार कर चुकी थी, वहीं अक्षय 22 साल का हो चुका था.

रीना कभी मां के साथ तो कभी अकेले अक्षय के घर जाती थी. वह जब भी अक्षय के घर आती, अक्षय से पढ़ाई से संबंधित बातें कर लेती थी. बातचीत करते दोनों हंसीठिठोली भी करते तथा एकदूसरे को चिढ़ाते भी थे.

रीना और अक्षय दोनों ही युवा थे. इस उम्र में मन कुलांचे भरता है. दिल में किसी की चाहत पाने की तमन्ना होती है अत: दोनों का रुझान एकदूसरे के प्रति हो गया. मन ही मन वे आपस में प्यार करने लगे.

एक दिन बात करतेकरते अक्षय का मन मचला. उस ने रीना का हाथ पकड़ लिया. वह कुछ नहीं बोली. अक्षय अपने स्थान से उठ कर रीना से सट कर बैठ गया. रीना तब भी मुसकराती रही.

अक्षय के हौसले को हवा मिली तो उस ने रीना का चेहरा हथेलियों में ले लिया. विरोध करने के बजाय रीना मुसकराती रही.

सरस सलिल विशेष

अक्षय ने उस के होंठों की ओर होंठ बढ़ाए तो रीना ने हया से नजरें झुका लीं. होंठों से होंठों का मिलाप हुआ तो रोमांचित हो कर रीना ने आंखें बंद कर लीं. अक्षय ने रीना के होंठों से अपने होंठ अलग किए, तो रीना ने आंखें खोलीं. शरारती अंदाज में होंठों पर जीभ फिराई और मुसकराने लगी.

रीना के इस कातिलाना अंदाज पर अक्षय सौसौ जान से न्यौछावर हो गया.

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दोस्ती बदल गई प्यार में

शुरू में अक्षय और रीना के बीच महज दोस्ती थी. लेकिन समय के साथ इस रिश्ते ने कब प्यार का रूप धारण कर लिया, इस का पता न तो अक्षय को लगा और न ही रीना को. दोनों उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके थे, जहां महत्त्वाकांक्षाएं हिलोरें मारने लगती हैं. मन में कुछ नया करने की उत्सुकता जाग उठती है. अक्षय को अब रीना सिर्फ दोस्त ही नहीं, बल्कि और भी बहुत कुछ लगने लगी थी. इसलिए वह रीना से बातें करते समय बेहद संजीदा हो जाता था.

रीना भी अक्षय में आए बदलाव से अनभिज्ञ नहीं थी. उस की शोख निगाहें जब अक्षय की निगाहों से टकरातीं तो उस के दिल में गुदगुदी सी होने लगती थी. उस का भी मन चाहता था कि अक्षय इसी तरह प्यार भरी निगाहों से उसे निहारता रहे.

दोनों पर प्यार का ऐसा नशा चढ़ा कि उन्हें एकदूसरे के बिना सब कुछ सूना लगने लगा. दोनों घंटों बैठ कर भविष्य की योजनाएं बनाते रहते. साथ जीनेमरने की कसमें भी खाते.

एक रोज अक्षय को जानकारी मिली कि रीना के मातापिता कहीं रिश्तेदारी में गए हैं और भाई खेत पर काम कर रहा है. उचित मौका देख अक्षय पासपड़ोस के लोगों की नजरों से बचते रीना के घर पहुंच गया.

घर के अंदर पहुंचते ही उस ने मुख्य दरवाजा बंद किया और फिर रीना को अपनी बांहों में जकड़ लिया. रीना कसमसाई और बनावटी विरोध भी किया. लेकिन अक्षय ने उसे मुक्त नहीं किया.

आखिर रीना ने भी शरीर ढीला छोड़ कर उस का साथ देना शुरू कर दिया. इस के बाद उन्होंने अपनी हसरतें पूरी कीं. फिर तो यह सिलसिला चल निकला. मौका मिलते ही दोनों अपनी हसरतें पूरी कर लेते थे.

दोनों रीना और अक्षय ने लाख कोशिश की कि उन के प्रेम संबंधों की भनक किसी को न लगे, लेकिन प्यार की महक को भला कौन रोक पाया. वह तो स्वयं ही फिजा में तैरने लगती है. एक रोज गांव के एक युवक ने शाम के वक्त दोनों को गांव के बाहर बगीचे में हंसीठिठोली करते देख लिया. उस युवक ने यह बात रीना के पिता श्याम नारायण मिश्रा को बता दी.

पिता को उस की बातों पर एक बार को तो विश्वास नहीं हुआ. उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उन की बेटी कोई ऐसा कदम उठाएगी, जिस के कारण उन का सिर शर्म से झुक जाए. श्याम नारायण ने इस बारे में घर में किसी से कुछ नहीं कहा, लेकिन रीना की निगरानी करने लगे.

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पिता ने पकड़ा रंगेहाथों

एक दिन श्याम नारायण ने खुद रीना को अक्षय से एकांत में मिलते देख लिया. प्रेमी से मिलने के बाद रीना जब घर लौटी तो उन्होंने उसे न केवल जम कर लताड़ा, बल्कि उस की पिटाई भी कर दी. उन्होंने उसे हिदायत दी कि आज के बाद अगर उस ने अक्षय से मिलने की कोशिश की तो उस के लिए अच्छा नहीं होगा.

रीना की मां सुमन ने भी समाज का हवाला दे कर रीना को समझाया, ‘‘बेटी, अक्षय पड़ोसी है. हमारे ही खानदान का है. हम दोनों एक ही गोत्र के हैं. इस नाते तुम दोनों का रिश्ता भाईबहन का है. इसलिए तेरा उस से मेलजोल बढ़ाना ठीक नहीं है.’’

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

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