दालचीनी और शहद की चाय से घटाएं अपना वजन, जाने कैसे

वजन को कंट्रोल में रखना आज सभी के लिए काफी जरुरी हो गया है. जंग फूड और तेल मसालेदार खाना जितना सेहत के लिए परेशानी पेदा करता है उतना ही ये शरीर में फेट को बढ़ाता है. इस बिजी लाइफ स्टाइल के चलते कुछ लोग तो कसरत के लिए भी टाइम नहीं निकाल पाते. जिसके कारण वो मोटापे के शिकार हो जाते है. बढ़ते वजन के कारण शरीर को कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा, फिटनेस के दिवाने और स्लिम-ट्रिम रहने की चाहत रखने वाले वजन कम करने के कई तरीके आजमाते हैं. कई बार सफलता, तो कई बार असफलता हाथ लगती है. पर अगर आप घरेलू नुस्खों पर यकीन रखते है तो अपको दालचीनी और शहद की चाय का सेवन करना चाहिए, ये आपके वजन को तेजी से कम करने में मदद करेगी. साथ ही ये चाय आपको कई रोगों से भी दूर रखेंगी. तो चलिए कुछ और भी जानते है इस चाय के बारे में…

दालचीनी और शहद की चाय

दालचीनी और शहद की चाय की बात की जाए तो ऐसा मान सकते हैं कि यह वजन को कम करने वाली जादुई चाय है. जिसे हर फिटनेस क्रेजी को लेना चाहिए क्‍योंकि आपके एक्‍सट्रा फैट को कम करने का एक प्राकृतिक तरीका है. दालचीनी और शहद की चाय एक नेचुरल हेल्‍थ टौनिक है.

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 कैसे बनाए ये चाय

सबसे पहले आप एक कप पानी उबालें.

अब गर्म पानी में 1/2 टी स्‍पून दालचीनी पाउडर मिलाएं और इसे थोड़ा ठंडा कर लें.

इसके बाद गुनगुने दालचीनी वाली चाय में 1 चम्मच कच्चा, और्गेनिक शहद को अच्छी तरह से मिलाएं.

इसके बाद आप इसका सेवन करें, रोजाना सुबह दालचीनी और शहद से बनी चाय आपको चुस्‍त-दुरूस्‍त और फिट रखेगी. आपके वजन को कम और बढ़ते वजन को कंट्रोल रखने के लिए यह एक जादुई चाय है.

 क्या है दालचीनी इसके फायदे

दालचीनी में एंटीमाइक्रोबियल और एंटीपैरासिटिक गुण होते हैं, जो कि शरीर में फैट को बढ़ने से रोकने और वजन को कम करते हैं. यह आपकी भूख को शांत और पेट को भरा हुआ महसूस कराने में मदद करती है, इसके अलावा दालचीनी आपके शरीर में इंसुलिन कार्य को बेहतर बनाता है, जो शरीर में मौजूद अनावश्यक वसा पर अंकुश लगाता है. दालचीनी आपके पेट को स्‍वस्‍थ रखने में मददगार है और यह फैटी एसिड को कम स्‍टोर करती है.

क्या है शहद के फायदे

शहद विटामिन्स और मिनरल्‍स से भरपूर होता है, जो कि खून को साफ करता है और शरीर में कैलोरी की जांच करता है. यह माना जाता है कि शहद शरीर में जमा फेट वसाको कम करने और शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों निकालने की क्षमता रखता है. शहद न केवल आपके मोटापे को कम करने में मदद करता है, बल्कि स्वस्थ, सुंदर बनाने में भी मदद करता है. शहद एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं. वजन कम करने के लिए शहद को रोजाना सुबह गुनगुने पानी या फिर दालचीनी और शहद से बनी चाय का सेवन फायदेमंद है.

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तो ये है दालचीनी और शहद की चाय के फायदें. तो अब से आप रेगुलर चाय की बजाये दालचीनी और शहद वाली चाय पीना शुरु किजिए जो आपको चुस्त दुरुस्त रखने में मदद करेंगी.

ड्रग्स लेते हुए रंगे हाथें पकड़ी गईं एक्ट्रेस प्रीतिका चौहान, साथ ही मिला इतने ग्राम गांजा

बॉलीवुड के पौपुलर एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की आत्महत्या के बाद से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की जांच पड़ताल जोरों शोरों से चल रही है. आपको बता दें ड्रग्स केस में एनसीबी (NCB) अब तक 23 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. हाल ही में कुछ खबरे ऐसी आई हैं जिसे सुन आप सभी के होश उड़ा जाएंगे.

टेलीविजन इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस प्रीतिका चौहान (Preetika Chauhan) को एनसीबी (NCB) ने रंगे हाथों ड्रग्स लेते पकड़ लिया है. जी हां पौपुलर टीवी सीरियल ‘देवों के देव महादेव’ (Devo Ke Dev Mahadev) में अपनी कमाल की अदाकारी से लाखों लोगों का दिन जीत चुकीं एक्ट्रेस प्रीतिका चौहान (Preetika Chauhan) दिखने में बेहद ही खूबसूरत है. हाल ही में एनसीबी (NCB) ने एक्ट्रेस के पास से 99 ग्राम गांजा बरामद किया है.

इसी के साथ ही एनसीबी (NCB) ने प्रीकिता चौहान (Preetika Chauhan) से पूछताछ के लिए उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया है. एक्ट्रेस के साथ साथ एनसीबी (NCB) ने उनके साथ ही एक और व्यक्ति को भी गिरफ्तार कर लिया है जिसका नाम फैजल है. एनसीबी ने फैजल और प्रीतिका दोनों को कोर्ट के सामने पेश कर दिया है और कोर्ट ने 8 नवंबर तक दोनों को हिरासत में रखने का आदेश सुनाया है.

 

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I miss those days when my smile was real😪 #throwbackthursday

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इससे पहले भी एनसीबी अर्जुन रामपाल (Arjun Rampal) की गर्लफ्रेंड गैब्रिएला (Gabriella Demetriades) के भाई को गिरफ्तार कर चुकी हैं. ऐसे में एनसीबी (NCB) इस मामले में किसी को नहीं छोड़ रही और जिस पर भी उन्हें शक होता है वे उनसे पूछताछ करने पहुंच जाती है. अब देखने वाली बात ये होगी कि इस केस में और कौन कौन से नाम सामने आ सकते हैं.

एक्ट्रेस किम शर्मा ने समुंद्र किनारे अपने फिगर से उड़ाए फैंस के होश, युवराज सिंह कर बैठे ऐसा कमेंट

साल 2000 में सुपरहिट फिल्म ‘मोहब्बतें’ (Mohabbatein) से अपने फिल्मी करियर की शुरूआत करने वाली एक्ट्रेस किम शर्मा (Kim Sharma) इन दिनों काफी चर्चाओं में हैं. जैसा कि हम सब जानते हैं कि एक्ट्रेस किम शर्मा (Kim Sharma) अक्सर अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपनी बोल्ड और ग्लैमरस फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं जिसे उनके फैंस काफी प्यार देते हैं.

 

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Happy Dussera 👹always choose L.O.V.E 🙂

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हाल ही में एक्ट्रेस किम शर्मा (Kim Sharma) ने अपने ‘औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट’ पर अपनी एक फोटो शेयर की है जो कि सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो गई है. इस फोटो में किम शर्मा (Kim Sharma) समुंद्र किनारे अपना हॉट फिगर फ्लॉन्ट कर रही हैं. आपको बता दें कि एक्ट्रेस की यह फोटो पुरानी है और उन्हें समुंद्र किनारे मस्ती करना काफी याद आ रहा है.

 

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What’s better than a day at the beach? #notmuch #flashback 🌊

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इस फोटो के साथ किम शर्मा ने कैप्शन में लिखा कि,- “What’s better than a day at the beach? #notmuch #flashback”. इसी के साथ ही इस फोटो पर पौपुलर क्रिकेटर और किम शर्मा (Kim Sharma) के एक्स बौयफ्रेंड युवराज सिंह (Yuvraj Singh) ने भी कमेंट किया है जिससे कि वे सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे हैं. क्रिकेटर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) ने किम शर्मा (Kim Sharma) की इस फोटो पर कमेंट कर लिखा कि, ‘गांव बसा नहीं, बस्ता लेकर पहुंच गई हैं मैडम’.

 

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#thursday deserves a #throwback 🐚#tbt

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आपको बता दें कि युवराज सिंह (Yuvraj Singh) और किम शर्मा (Kim Sharma) के अफेयर की खबरें काफी वायरल हुई थीं लेकिन दोनों में से कोई भी अपने रिश्ते को मीडिया के सामने लेकर नहीं आया था.

नितीश के सियासी रंग और बिहार का चुनाव

सबसे अधिक छह बार बिहार के मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले नितीश कुमार भारतीय राजनीति मे सत्ता के लिए सबसे अधिक रंग बदलने वाले चेहरे भी हैं. उनके पास सुशासन का तमगा, केवल मंचों से नैतिकता का पाठ पढ़ाने और आश्वासन देने का हुनर भी है. नितीश जब सफेद मुस्लिम टोपी और हरे गमछे मे होते थे तब भी उनके पास सत्ता थी और केसरिया साफे और गमछे के साथ भी सत्ता है. इससे जाहिर है कि वह देश‌ के ऐसे नेता हैं जो सत्ता के लिए कभी भी रंग बदल सकते हैं. जबकि वह खुद आज भी मंचों से सबसे अधिक नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं.

बहुत पीछे जाने की जरूरत नही है.नितीश ने मुस्लिम वोटर्स को रिझाने के लिए ट्रिपल तलाक़ और जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का विरोध किया था. यहां तक कि तीन तलाक और आर्टिकल 370 के मुद्दे पर वोटिंग के दौरान दोनों सदनों से उनकी पार्टी के सांसद वॉकआउट कर गए थे. बिहार विधान सभा मे एनआरसी और एनपीआर लागू न करने का प्रस्ताव पास करवाने वाले नितीश कुमार की पार्टी ने केंद्र में सीएए का समर्थन किया, राज्यसभा और लोकसभा मे उनके सांसदों ने वोट किया. यहां तक की राज्य सभा मे उनके मुस्लिम सांसदों ने भी वोट किया.

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वहीं साल 2010 के नितीश कुमार सब को याद होंगें, जब वह हर कुछ महीनों में केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार के पास बिहार के मदरसों के अनुदान का प्रस्ताव भेजते थे. मनमोहन सरकार उसे बार बार नकार देती थी. केंद्र में सत्ता बदली तो यही नितीश केसरिया साफे में आ गये और अपने पुराने प्रस्ताव को भूल गए. आपको ये भी बता दें कि ये वही नितीश हैं जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी का 10 साल से ज्यादा का सत्ता का साथ छोड़ कर अपने धुर विरोधी लालू यादव का, जिनको वह डेढ़ दशक से ज्यादा समय से कोसते आए थे, हाथ थाम लिया था.

यही नही नितीश उन्हें अल्पसंख्यकों और पिछड़ों का सबसे बड़ा मसीहा बताने लगे और भाजपा को सांप्रदायिक बताने लगे थे. बात यहीं खतम नही होती, फिर वही नितीश थे कि अभी सुहाग की मेहंदी सूखी भी नहीं थी कि पाला बदला भाजपा के बगलगीर हो गये और फिर भाजपा के साथ सरकार बना ली. जो दुनिया के प्रजातंत्र में एक अनूठी अनैतिकता कही जा सकती है? राजनीति में नैतिकता के साथ खिलवाड़ का या जनमत के साथ इतना हास्य शायद इससे पहले नहीं हुआ होगा. वैसे पाला बदलने की घटनाएं पिछले छह सालों मे अब देश के कई राज्यों मे हो चुकी हैं. लेकिन वह नितीश कुमार जैसे नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले लोग नही थे.

बिहार विधानमंडल के पिछले सत्र मे विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने अपना भाषण उर्दू में पढ़ा,क्या ये मुसलमानों को पटाने की कवायद नही थी. जबकि भाजपा विधायकों ने इस पर एतराज भी जताया. उसके बाद ही नितीश कुमार ने अजमेर शरीफ चादर भेजी हजरत ख्वाजा गरीब नवाज के मजार पर चढ़ाने के लिए. जबकि उनका उस्र नही था, पर बिहार मे चुनाव की आहट जरूर थी. बिहार की राजनीति मे 17 प्रतिशत मुसलमान चुनावी नतीजे को प्रभावित करते हैं. लालू के बाद बिहार के मुसलमानों के लिए नितीश कुमार ही पसंदीदा चेहरें हैं.

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सत्ता मे आने के बाद उन्होने इस समुदाय को लेकर तमाम घोषणएं भी की थी. लेकिन सथानीय लागों का कहना हे कि अधीकांश धोष्णओं की जमीनी हकीकत आज भी, मंचों और भाषणों तक सीमित है.अलबत्ता कब्रिस्तानों की धेराबंदी के मामले मे बड़े पैमाने पर काम दिखता है. उर्दू शिक्षकों की बहाली का मामला हो,मदरसा शिक्षकों के वेतन, मदरसों के अनुदान का मामला हो, मुस्लिम नौजवानों के रोजगार का मामला हो, शिक्षा और स्वास्थ्य का मामला हो, मुस्लिम क्षेत्रों के अस्पताल और सरकारी स्कूलों का मामला हो या अल्पसंख्यक लोन का मामला हो, पर जदयू सरकार ने अब तक काम ठोस काम नही किया है.

नितीश कुमार कभी मुसलमानों को लाली पाप देते हैं तो कभी दलितों और पिछड़ों को. दरअसल, बिहार में अब तक राजनीति जाति से संचालित होती रही है, यानी वह जाति के लचीले खोल में समाकर ही आकार लेती रही है. लेकिन नितीश कुमार ने यहां भी एक दांव खेला और जाति समूहों और उन समूहों से बनने वाले समीकरण को साधा. जैसे कि लालू प्रसाद ने सामाजिक न्याय का नारा देकर पिछड़ों और दलितों को गोलबंद कर अपनी राजनीति को परवान चढ़ाया था. वहीं नितीश ने सामाजिक न्याय के साथ विकास का नारा दिया.जातीय न्याय के साथ ही आर्थिक न्याय और लैंगिक न्याय के नारें को भी उन्होने उछाला.

महिलाओं को पंचायती चुनाव में आरक्षण देकर, अतिपिछड़ा और महादलित नाम से नए राजनीतिक समूह का गठन कर वे ऐसा करने में सफल हो सके. वहीं मुस्लिम में अशराफ मुस्लिम के मुकाबले पसमांदा समूह को उभारकर भी वे ऐसा करने में कामयाब रहे. दरअसल बिहार में जाति का समीकाण उतना आसान है भी नहीं.ओबीसी में दस जातियां हैं, बात सिर्फ कोईरी, कुरमी, यादव और बनिया पर होकर रह जाती है. दलितों मे करीब दो दर्जन जातियां हैं. मुस्लिमों में ही 42 जातियां हैं.अतिपिछड़ा समूह में तो जातियों की संख्या 120 के पार है.गौरतलब है कि ये वही बिहार है जहां आजादी से पहले जनेऊ आंदोलन हुआ था, यादवों और कुछ अन्य ग़ैर-ब्राह्मण पिछड़ी जातियों ने जनेऊ पहनना शुरू किया. फिर समय ने करवट बदला तो इसी बिहार मे जेपी आंदोलन के वक़्त संपूर्ण क्रांति के लिए हज़ारों लोगों ने पटना के गांधी मैदान में जनेऊ तोड़े भी थे. यानी बिहार मे जाति का गणीत बेहद जटिल है और हर राजनीतिक दल उसे अपने हिसाब से हल करना चाहता है.

दरअसल  लालू-राबड़ी के 15 साल के काल के बाद नितीश कुमार बिहार के लिए उम्मीदों और अरमानों की गठरी ले कर आए थे. वादों की लम्बी फेहरिस्त के साथ और कुछ अच्छा करेंगे जैसे भरोसे के साथ. अगर लालू के 15 साल और नितीश के 15 सालों की तुलना की जाये तो बिहार मे बदलाव तो दिखता है, लेकिन उनके अधिकांश वादे फाइलों मे कैद रह गये. खासकर दलितों और मुस्लिमों से जुड़े मामलों पर वह उतने खरे नही उतरे जितना इन वर्गों को सपना दिखाया गया था.

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कोरोना वायरस के चलते हुए लाकडाउन के दौरान बिहार के प्रवासी मजदूरों और छात्रों को लेकर जिस तरह से सुशासन बाबू ने रूख अपनाया था, उससे सत्ता के पहले वाले नितीश कुमार के मुकाबाले मुख्यमंत्री नितीश कुमार ही एक अकुशल प्रशासक के तौर पर दिखे थे.बहुत तेज़ी से उनकी लोकप्रियता मे कमी आयी है. बिहार मे उनकी साख को बट्टा बहुत तेज़ी से लग रहा है. आपको याद होगा कि नितीश को लोगों ने लालू प्रसाद यादव से ज्यादा सक्षम प्रशासक माना था. लेकिन आज राज्य में भ्रष्टाचार हर स्तर पर है. कानून व्यवास्था का मजाक हर जगह, हर रोज़ उड़ता है. कहा जाता है कि शराबबंदी ने राज्य में पुलिस के लिए कमाई का एक नया रास्ता खोल दिया है.छह साल पहले केंद्र से बेटी बचाओ का नारा खूब जोर से उछला था, लेकिन बिहार मे अक्सर बेटियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं होती है.

इसके बावजूद खाकी के बड़े ओहदेदार राजनीति की आकांक्षा रखते हैं. आईपीएस अफसर सुनील कुमार और पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने खाकी से खादी की तरफ रूख कर भी लिया है. यहां भी वही जाति का खेल दिख रहा है. आपको याद होगा कि सुशांत सिंह राजपूत मामले मे तब डीजीपी रहे गुप्तेश्वर पांडेय ने जिस तरह की टिप्पणीयां की थी, इतने बड़े पद पर रहने के दौरान ऐसी टिप्पणीयां सुनने को नही मिलती हैं. राजनीतिक हलकों मे कहा जा रहा है कि नितीश कुमार ने हाल मे दलितों के साथ कुछ कागजी और कुछ असल की जो दरियादिली दिखायी है, कहीं वो सब भारी न पड़ जाये इसलिए बैलेंस करने के लिए  गुप्तेश्वर पांडेय को सवर्ण कार्ड के तौर पर प्रयोग करेगें. वैसे इन चुनावों मे श्री पांडेय को नितीश ने कहीं से उम्मीदवार नही बनाया है. बिहार मे रोजगार की समस्या सारे पुराने आंकड़ों को पार कर गयी है. याद रहे इन में से कई मुद्दों के खिलाफ ही माहौल बना कर नितीश कुमार बिहार की सत्ता पर काबिज हुए थे. आज वो सब कुछ किसी न किसी रूप मे उनके शासन का अंग है.

बिहार में 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव जीतने के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाता महत्वपूर्ण हैं. राज्य में एससी/एसटी वोट करीब 16 प्रतिशत से ज्यादा है. यही वजह है कि सभी पार्टियों और गठबंधन की रणनीती के केंद्र में ये वोटबैंक है. कुमार शुरू से दलितों को किसी न किसी रूप मे रिझातें रहें हैं. ये बात अलग है कि चुनावों से ठीक पहले उन्होने दलितों को रिझाने के लिए एक और दांव खेला, कि अनुसूचित जाति-जनजाति के किसी व्यक्ति की हत्या हो जाने पर उसके परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी.

राजनीतिक हलके मे इसे केवल चुनावी ऐलान माना जा रहा है.क्यों कि घोषण मे पिछली हत्यायों का कोई जिक्र नही है. नितीश ने दलितों को 3 डिसमिल जमीन देने का वादा किया गया था जो आज तक पूरा नहीं हो पाया है. इसी लिए चिराग पासवान जैसे दलित नेताओं ने कहा है कि सरकार को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि अपराधियों में क़ानून का भय हो. जिससे भविष्य में न सिर्फ़ दलितों बल्कि किसी भी वर्ग के लोगों की हत्या न हो सके. बहरहाल बिहार की राजनीति में पिछले 15 दिनों में दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है.जो चुनाव अब तक राजग के लिए काफी आसान लग रहा था जिसमें भाजपा आगे नजर आ रही थी लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल चुके हैं.

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राजग ने 180 से अधिक सीटें जीतने की बात करनी बंद कर दी है. इसके अलावा, भाजपा ने नितीश कुमार के शासन का बचाव करना शुरू कर दिया है. हालांकि जब चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत हो रही थी तब पार्टी के कई नेताओं ने इसको नजरअंदाज किया था और मांग की थी कि चुनाव के बाद नितीश की जगह भाजपा के किसी और नेता को लाया जाए. भाजपा को डर सताने लग रहा है कि नितीश तो खुद डूबेंगे ही,उसके साथ-साथ भाजपा को भी नुकसान हो सकता है. इस लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा फिर एक बार सामने किया जा रहा है. नितीश और प्रधानमंत्री की संयुक्त रैलियों और सभाओं की रणनीति बन रही है.देखना है कि आने वाले दिनों मे चुनाव कितना और करवट बदलता है, क्योंकि कई छोटे-छोटे राजनीतिक दल भी अपने अंदाज मे ताल ठोंक रहें हैं.

Bigg Boss 14 के घर में एक बार फिर पवित्रा-राहुल के बीच हुआ घमासान, देखें प्रोमो

जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं वैसे वैसे ही टीवी के सबसे पौपुलर रिएलिटी शो बिग बॉस के सीजन 14 (Bigg Boss 14) में एंटरटेनमेंट भी बढ़ता जा रहा है. बिग बॉस 14 का हर एपिसोड किसी ना किसी मुद्दे को लेकर चर्चा में आने लगा है. बात करें आने वाले एपिसोड की तो बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के अपकमिंग एपिसोड में पवित्रा पुनिया (Pavitra Punia) और राहुल वैद्य (Rahul Vaidya) के बीच जमकर घमासाल देखने को मिलने वाला है.

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आपको बता दें कि इससे पहले भी कंटेस्टेंट पवित्रा पुनिया (Pavitra Punia) और राहुल वैद्य (Rahul Vaidya) के बीच घर की ड्यूटीज को लेकर लड़ाई हो चुकी है और अब एक बार फिर दोनों कंटेस्टेंट्स आमने सामने आने वाले हैं. शो के अपकमिंग एपिसोड में राहुल वैद्य (Rahul Vaidya) पवित्रा पुनिया (Pavitra Punia) को कुछ ऐसा कहने वाले हैं जिसे सुन पवित्रा अपना आपा खो देंगी.

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दरअसल, राहुल वैद्य (Rahul Vaidya) पवित्रा और अभिनव शुक्ला (Abhinav Shukla) का मजाक उड़ाते हुए उनके नाम साथ में जोड़ेंगे जो कि पवित्रा से बिल्कुल बरदाश्त नहीं होगा. ऐसे में पवित्रा राहुल की बातें सुन कर उन्हें खूब खरी खोटी सुनाएंगी और तो और वे खुद अंदर से टूट जाएंगी. इस दौरान रुबीना दिलाइक (Rubina Dilaik) पवित्रा को समझाने की कोशिश करेंगी और उन्हें ये कहती नजर आएंगी की उन्हें हिम्मत से काम लेना चाहिए.

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पवित्रा पुनिया (Pavitra Punia) और राहुल वैद्य (Rahul Vaidya) की इस लड़ाई में जहां एक तरफ रुबीना दिलाइक (Rubina Dilaik) पवित्रा को समझाती नजर आएंगी तो वहीं दूसरी तरफ घर के पहले कैप्टन निशांत मलकानी (Nishant Malkani) राहुल से ये कहते दिखाई देंगे कि उन्हें पवित्रा से माफी मांग लेनी चाहिए. अब देखने वाली बात ये होगी कि और क्या क्या हंगामे दर्शकों को देखने को मिलने वाले हैं.

Splitsvilla फेम आहना शर्मा ने शेयर की बौयफ्रेंड के साथ रोमांटिक फोटो, फैंस ने की जमकर तारीफ

एमटीवी स्प्लिट्सविला सीजन 12 (MTV Splitsvilla 12) से अपने करियर की शानदार शुरूआत करने वाली एक्ट्रेस आहना शर्मा (Aahna Sharma) इन दिनों ‘कलर्स टीवी’ (Colors TV) के पौपुलर सुपर नैच्यूरल सीरियल ‘नागिन 5’ (Naagin 5) में दिखाई दे रही हैं. आहना शर्मा (Aahna Sharma) दिखने में बेहद ही खूबसूरत हैं और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हैं. सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने के साथ साथ वे अपनी हॉट और ग्मैमरस (Hot and Glamourous) फोटोज अपने फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं.

 

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Midsummer ice-cream 🍧

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आहना शर्मा (Aahna Sharma) के फैंस उनकी हर फोटो पर जमकर लाइक्स बरसाते हैं और कमेंट्स कर उनकी खूब तारीफ करते हैं. आपको बता दें कि टीवी एक्ट्रेस आहना शर्मा (Aahna Sharma) इन दिनों अपने बौयफ्रेंड के साथ दुबई में वैकेशन का मजा उठा रही हैं. बीते दिनों आहना के बौयफ्रेंड का जन्मदिन था और इस मौके पर आहना ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी और अपने बौयफ्रेंड की रोमांटिक फोटो शेयर की है.

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आपको बता दें कि एक्ट्रेस आहना शर्मा (Aahna Sharma) के बौयफ्रेंड का नाम प्रणव कुमार (Pranav Kumar) है. जहां एक तरफ एक्ट्रेस आहना शर्मा (Aahna Sharma) ने एमटीवी स्पलिट्सविला सीजन 12 (MTV Splitsvilla 12) से लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई है वहीं दूसरी तरफ उनके बौयफ्रेंड प्रणव कुमार (Pranav Kumar) भी एकता कपूर (Ekta Kapoor) के सीरियल ‘ये हैं चाहतें’ (Yeh Hai Chahatein) में दिखाई दे रहे हैं. आहना शर्मा (Aahna Sharma) ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर प्रणव को किस करते हुए एक बहुत ही रोमांटिक अंदाज में फोटो शेयर की है.

 

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Its aboat time we all made it out on the water 🌊 #yatch #dubai #palmtrees #jumeirah #white

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इस दौरान दोनों ने व्हाइट आउटफिट कैरी किए हुए हैं जिसमें दोनों की जोड़ी बेहद ही खूबसूरत दिख रही है. फैंस इन दोनों की इस फोटो को देख दीवाने से हो गए हैं. ऐसा देखने में आ रहा है कि एक्ट्रेस आहना शर्मा (Aahna Sharma) को अपने बौयफ्रेंड के साथ इस वैकेशन में खूब मजा आ रहा है और इस बात का सबूत उनकी इतनी खूबसूरत फोटोज हैं.

मेरी इंगेजमैंट हुए 4 महीने हो गए हैं लेकिन मुझे अपने मंगेतर पर जरा भी प्यार नहीं आता, मैं क्या करूं?

सवाल 

मैं टीचिंग प्रोफैशन में हूं. और मेरी इंगेजमैंट हुए 4 महीने हो गए हैं, लेकिन मुझे अपने मंगेतर पर जरा भी प्यार नहीं आता. वे जब भी मेरे करीब आते हैं तो मैं उन्हें दूर भगा देती हूं. इस का कारण है कि मैं अपने बौयफ्रैंड को नहीं भुला पा रही हूं. मेरे पेरैंट्स ने जबरदस्ती मेरा रिश्ता तय कर दिया है. उस लड़के की जौब अच्छी है, सिर्फ जाति अलग है. समझ नहीं आ रहा कैसे इस रिश्ते को आगे बढ़ाऊं.

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जवाब

यह सच है कि जिस रिश्ते को जबरदस्ती ढोया जाता है वह हमेशा डगमगाता ही है. साथ ही उस में वह अपनापन भी नहीं आ पाता जो आना चाहिए. आप की क्या मजबूरी थी जो आप ने इस रिश्ते के लिए हां की, इस बात का जिक्र आप ने नहीं किया. लेकिन अभी भी देर नहीं हुई. आप अपने पेरैंट्स को समझाएं कि जिस लड़के को आप पसंद करती हैं वह पढ़ालिखा है और आप को बहुत खुश रखेगा. सिर्फ जाति के कारण हमें अलग न करें. जो रिश्ता आप ने जोड़ा है उस रिश्ते को मैं जीवनभर नहीं निभा पाऊंगी. आप की बात सुन हो सकता है उन्हें समझ आ जाए वरना आप अपने मंगेतर को सारी बातों से अवगत करवा दें ताकि समस्या का कोई हल निकल पाए.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें-  सरस सलिल-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

हैवान बना पति

हैवान बना पति : भाग 2

पति की बात सुन कर सविता सन्न रह गई, फिर बोली, ‘‘पिताजी ने हमारी शादी में अपनी हैसियत से कहीं ज्यादा खर्च किया था. मेरी शादी के लिए उन्होंने अपनी जमीन तक बेच दी थी. अब मैं उन से रुपयों की डिमांड नहीं कर सकती. आप को भी ऐसी डिमांड नहीं करनी चाहिए.’’

सविता की ‘ना’ सुनते ही पवन को गुस्सा आ गया. वह सविता से गालीगलौज करने लगा. इसी बीच पवन की मां दयावती आ गई. उस ने आग में घी का काम किया. उस रोज बात इतनी ज्यादा बढ़ गई कि पवन ने सविता की पिटाई कर दी.

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कुछ दिनों बाद दीपावली पर भाईदूज के दिन बड़ा भाई गोविंद सविता से टीका करवाने उस की ससुराल आया. उस ने सविता को दुखी देखा तो उसे अपने साथ ही लिवा ले गया. मायके में सविता ने मातापिता को अपनी व्यथा सुनाई. उस ने बताया कि पवन को नई कार बुक कराने के लिए 2 लाख रुपए चाहिए.

सविता की मां कलावती को यह सुन कर गुस्सा आ गया. उस ने सविता को ससुराल जाने से मना कर दिया. एक सप्ताह बाद पवन सविता को विदा कराने पहुंचा तो कलावती ने उसे भेजने से इनकार कर दिया. साथ ही असमर्थता भी प्रकट कर दी थी, ‘‘दामादजी, हम रुपयों का बंदोबस्त नहीं कर पाएंगे.’’

बाद में पवन के वादा करने पर कि वह आगे कोई मांग नहीं करेगा और सविता को भी ससुराल में कोई परेशानी नहीं होगी, कलावती ने सविता को विदा कर दिया.

दरअसल यह समझौता रिश्तेदार मनोज कुमार ने बीच में पड़ कर कराया था. मनोज की मध्यस्थता से ही पवन और सविता की शादी हुई थी.

कहने को तो पवन इस बात का आश्वासन दे कर सविता को विदा करा कर ले आया कि सविता को आइंदा कोई परेशानी नहीं होने देगा. लेकिन हुआ इस के विपरीत. पवन को सविता द्वारा मायके में शिकायत करना नागवार लगा. वह उसे किसी न किसी बहाने प्रताडि़त करने लगा. बात उस दिन और अधिक बिगड़ जाती, जिस दिन मां दयावती पवन के कान भर देती.

ऐसे ही एक रोज जब पवन हैवान बना तो सविता ने इस की जानकारी फोन से अपनी मां को दे दी. इस पर कलावती ने बेटी की ससुराल कन्नौज आ कर पवन और उस की मां को खूब खरीखोटी सुनाई. यह बात पवन को बहुत बुरी लगी.

वह मां के अपमान से तिलमिला उठा. उस का कलावती से झगड़ा हुआ. कलावती ने धमकी दी कि यदि तुम लोगों ने बेटी को प्रताडि़त करना बंद नहीं किया तो वह पूरे परिवार को फंसा देगी. सब जेल जाओगे.

कलावती की इस धमकी से पूरा परिवार सहम गया. एक ओर जहां सविता की जेठानियों ने उस से किनारा कर लिया, वहीं दयावती भी अपने बड़े बेटे राजीव के साथ रहने लगी. राजीव की पत्नी रोमी से उस की पटरी खाती थी. सविता को उम्मीद थी कि सास जेठानी के साथ रहेगी तो झगड़ा नहीं होगा. पर ऐसा नहीं हुआ. पवन पहले की अपेक्षा उसे और अधिक प्रताडि़त करने लगा.

एक सुबह सविता बाथरूम में नहा रही थी और पवन कमरे में लेटा था तभी सविता के मोबाइल की घंटी बजी. पवन ने स्क्रीन पर नजर डाली तो वीरेंद्र का नाम आ रहा था. पवन ने फोन रिसीव करते हुए हैलो कहा तो काल करने वाले ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया.

कुछ देर बाद सविता बाथरूम से नहा कर निकली तो पवन ने पूछा, ‘‘यह वीरेंद्र कौन है? वह तुम्हें फोन कर रहा था.’’

‘‘मुझे पता नहीं कौन है?’’ सविता ने सफाई दी.

‘‘पता नहीं या झूठ बोल रही हो. कहीं तुम्हारे मायके का यार तो नहीं है?’’ पवन ने शक जाहिर किया.

‘‘किसी का गलती से फोन लग गया होगा और तुम मुझ पर बदचलनी का आरोप लगाने लगे. शरम आनी चाहिए तुम्हें.’’ सविता पति पर बिफर पड़ी.

पवन को भी गुस्सा आ गया. वह उसे गरियाते हुए बोला, ‘‘हरामजादी, एक तो बदचलन, दूसरे सिर उठा कर मुझे बेशरम कह रही है.’’ पवन ने उसे लातघूंसों से पीटना शुरू कर दिया. वह चीखतीचिल्लाती रही पर सासजेठानी में से कोई भी उसे बचाने नहीं आया.

दूसरे रोज सविता रूठ कर मायके चली गई. इस बार वह अपनी मासूम बेटी रानू को भी साथ ले गई थी.

घर कलह का असर बेटी पर न पड़े, इसलिए सविता ने उसे मायके में रखने का निर्णय कर लिया था. मायके में वह एक सप्ताह तक रही, फिर जब गुस्सा ठंडा पड़ा तो बेटी को मायके में छोड़ कर ससुराल आ गई.

पवन गुस्से से भरा बैठा था. सविता लौट कर आई तो बोला, ‘‘इतनी जल्दी क्यों लौट आई, मायके के यारों के साथ कुछ दिन और मन बहला लेती. ऐसी मौज हमारे घर कहां मिल पाएगी. यहां तो मर्यादा में ही रहना होगा.’’

पति की बात सुन कर सविता को गुस्सा तो बहुत आया, पर झगड़ा टालने के लिए वह गुस्सा पी गई और पवन को जवाब नहीं दिया.

सविता की चुप्पी का पवन ने गलत अर्थ लगाया. उसे पक्का यकीन हो गया कि सविता बदचलन है. यारों से मिलने के लिए ही वह बारबार मायके जाती है.

पवन के मन में अब पत्नी की बदचलनी का भी भूत सवार हो गया था. वह सविता पर बदचलनी का लांछन लगा कर उसे पीटने लगा. शराब के नशे में कभीकभी वह हैवान भी बन जाता था. पर अब उन दोनों के झगड़े के बीच परिवार का कोई अन्य सदस्य नहीं आता था.

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मार्च, 2020 में देश में कोरोना महामारी के चलते लौकडाउन हो गया, जिस से सारी व्यावसायिक गतिविधियां ठप हो गईं. पवन का धंधा भी बंद हो गया. बुकिंग बंद होने से उसे अपनी कार घर में खड़ी करनी पड़ी.

आमदनी घटी तो घर में झगड़ा और बढ़ गया. सविता खर्च के लिए पैसा मांगती तो पवन मना कर देता. इस बात पर दोनों में झगड़ा होता. ऐसे में सविता दखलअंदाजी करने के लिए अपनी मां कलावती को घर बुला लेती. पवन को अपनी सास कलावती की दखलअंदाजी पसंद नहीं थी.

जब कलावती अपनी बेटी का पक्ष ले कर पवन पर तीखे शब्दों का प्रयोग करती, तो पवन बौखला उठता. उस का सास से भी झगड़ा हो जाता. ऐसे में वह आपा खो बैठता और सविता को सास के सामने ही पीटता.

20 अगस्त, 2020 की सुबह सविता ने घर खर्च की मांग की तो पवन ने मना कर दिया. इस बात को ले कर दोनों में फिर झगड़ा हुआ. सविता ने फोन कर मां कलावती को बुला लिया.

रोजरोज की किचकिच से कलावती भी परेशान हो गई थी. लिहाजा वह बेटी को ले कर सरायमीरा पुलिस चौकी पहुंच गई. वहां पुलिस ने पवन को बुला कर पत्नी और सास के सामने जलील किया. साथ ही हिदायत दे कर समझौता भी करा दिया. इस के बाद सब वापस घर आ गए.

पत्नी व सास का पुलिस चौकी जाना फिर पुलिस द्वारा जलील करना पवन को नागवार लगा. वह अपमान से भर उठा. इसी बात को ले कर 20 अगस्त की रात 12 बजे पवन और सविता में फिर झगड़ा होने लगा. कलावती बेटी का पक्ष ले कर पवन पर हमलावर होने लगी.

पवन पहले ही गुस्से से भरा बैठा था. वह सविता को पीटने लगा. कलावती बेटी को बचाने आई तो पवन कमरे में रखा हंसिया उठा लिया और मांबेटी पर प्रहार करने लगा.

पवन का रौद्र रूप देख कर सविता और कलावती जान बचाकर छत पर भागीं. पवन पीछा करता हुआ छत पर ही आ गया.

वह हैवान बन चुका था. हंसिया से वार पर वार कर उस ने सविता व उस की मां कलावती को मौत की नींद सुला दिया. इस पर भी जब उस का गुस्सा शांत नहीं हुआ तो उस ने मांबेटी को दूसरी मंजिल की छत से नीचे फेंक दिया.

डबल मर्डर करने के बाद पवन छत से उतर कर नीचे आया. उस ने पत्नी व सास के शवों पर नफरत भरी निगाह डाली फिर आलाकत्ल हंसिया सहित कन्नौज कोतवाली की राह पकड़ ली.

कोतवाली पहुंच कर उस ने पुलिस के सामने डबल मर्डर का जुर्म कबूल कर आत्मसमर्पण कर दिया.

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इधर चीखपुकार सुन कर पवन के घर वाले जाग गए थे. पवन के जाते ही वे घर से बाहर निकले तो सामने मांबेटी की लाशें देख कर सन्न रह गए. इस के बाद घर में कोहराम मच गया. 21 अगस्त, 2020 को थाना कोतवाली पुलिस ने अभियुक्त पवन उर्फ मुरारी को कन्नौज कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

हैवान बना पति : भाग 1

पवन उर्फ मुरारी जिस वक्त कन्नौज कोतवाली पहुंचा, तब रात के 3 बज रहे थे. एसएसआई आर.पी. सिंह रात की ड्यूटी पर थे. पवन उन के सामने जा पहुंचा और बोला, ‘‘साहब, मैं डबल मर्डर कर के आया हूं. मुझे गिरफ्तार कर लो.’’

‘‘डबल मर्डर?’’ सिंह चौंके, ‘‘कौन हो तुम? किस का खून किया है?’’

‘‘साहब, मेरा नाम पवन है. मैं कलेक्ट्रेट के पीछे हौदापुरवा मोहल्ले में रहता हूं. मैं ने अपनी पत्नी सविता और सास कलावती का खून किया है. दोनों की लाशें घर के बाहर पड़ी हैं.’’

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‘‘तुम यह सब नशे में तो नहीं बक रहे हो?’’ आर.पी. सिंह ने उस से पूछा. ‘‘साहब, हंसिया साथ लाया हूं. मैं ने उन्हें इसी से मारा डाला. देखो, मेरा हाथ और चेहरा भी खून से रंगा है.’’ पवन ने खून सना हंसिया फर्श पर रखते हुए कहा.

अब शक की कोई गुंजाइश नहीं थी. उन्होंने 2 सिपाहियों को बुला कर पवन को हिरासत में ले लिया और आलाकत्ल हंसिया सुरक्षित कर लिया.

इस के बाद एसएसआई ने यह सूचना कोतवाल विकास राय को दी. राय नाइट गश्त से आधा घंटा पहले ही लौटे थे.

थानाप्रभारी विकास राय ने डबल मर्डर का जुर्म कबूल करने वाले पवन उर्फ मुरारी से पूछताछ की फिर वरिष्ठ अधिकारियों को घटना से अवगत कराया और पुलिस टीम ले कर घटनास्थल हौदापुरवा मोहल्ले पहुंच गए.

उस समय वहां भीड़ जुटी थी और कोहराम मचा था. राय ने रोपीट रही महिलाओं को वहां से हटाया, फिर निरीक्षण में जुट गए. घटनास्थल का दृश्य बड़ा ही भयावह था. सविता और कलावती की खून से लथपथ लाशें घर के बाहर पड़ी थीं.

उन की गरदन, पीठ और पेट पर गहरे घाव थे. दोनों की हत्या छत पर की गई थी और लाशों को दूसरी मंजिल से नीचे फेंका गया था. सविता की उम्र 24 साल के आसपास थी, जबकि उस की मां कलावती 50 वर्ष उम्र पार कर चुकी थी.

यह बात 21 अगस्त, 2020 की है. भोर का उजाला फैल चुका था और पवन द्वारा अपनी पत्नी और सास की हत्या की खबर पूरे मोहल्ले में फैल गई थी.

सूचना पा कर मृतका सविता के भाई गोविंद, सोहनलाल तथा पिता जगत राम भी आ गए थे. थानाप्रभारी विकास राय अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह तथा सीओ (सिटी) शेषमणि उपाध्याय भी आ गए. पुलिस अधिकारियों ने फोरैंसिक टीम को भी घटनास्थल पर बुलवा लिया.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. वे उस छत पर भी गए, जहां मांबेटी की हत्या कर उन्हें नीचे फेंका गया था. फोरैंसिक टीम ने जांच कर हत्या से जुड़े साक्ष्य जुटाए.

घटनास्थल पर हत्यारोपी पवन उर्फ मुरारी की मां दयावती तथा भाभी रोमी मौजूद थीं. पुलिस अधिकारियों ने उन से पूछताछ की तो रोमी ने बताया कि सविता और उस के पति पवन के बीच किसी बात को ले कर पिछले 2 दिनों से झगड़ा हो रहा था.

कल दोपहर सविता की मां कलावती आ गई थी. उस के बाद झगड़ा और बढ़ गया था. पवन को सास का आना और उन दोनों के झगड़े में हस्तक्षेप करना नागवार लगा. झगड़े के बाद मांबेटी पवन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने थाने भी गई थीं, पर उन की रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी.

थाने से लौटने के बाद सविता का पवन से फिर झगड़ा हुआ. झगड़े में कलावती फिर से कूद पड़ी और बेटी का पक्ष ले कर पवन को भलाबुरा कहने लगी. चूंकि पतिपत्नी का झगड़ा आम बात थी, इसलिए हम लोग हस्तक्षेप नहीं करते थे.

रात 2 बजे चीखपुकार मची तो हम लोगों की नींद खुल गई. उसी दौरान छत से कोई चीज गिरने की आवाज आई. देखा तो सविता और कलावती की लाशें घर के बाहर पड़ी थीं. वे दोनों डर की वजह से छत से कूदीं या फिर पवन ने ढकेला, इस बारे में कुछ नहीं पता. मौकाएवारदात पर मृतका सविता का भाई गोविंद तथा पिता जगतराम भी मौजूद थे.

सीओ शेषनारायण उपाध्याय ने उन से घटना के संबंध में पूछताछ की तो गोविंद ने बताया कि उस का बहनोई पवन बहन को प्रताडि़त करता था. उसे सविता के चरित्र पर शक था. उस के पिता ने 10 लाख रुपए में 10 बीघा जमीन बेची थी. उन पैसों से खूब धूमधाम से सविता की शादी की थी.

इस के बाद भी उस का पेट नहीं भरा. वह सविता पर मायके से रुपए लाने का दबाव डालता था. बात न मानने पर उसे मारतापीटता और झगड़ा करता था. झगड़ा निपटाने में मां को हस्तक्षेप करना पड़ता था, जिस से वह मां से भी खुन्नस खाता था. इसी खुन्नस में पवन ने मां और बहन की हत्या कर दी.

पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतका सविता तथा कलावती के शव पोस्टमार्टम के लिए कन्नौज के जिला अस्पताल भिजवा दिए. साथ ही सुरक्षा के तौर पर आरोपी के घर पुलिस का पहरा बिठा दिया.

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शवों को पोस्टमार्टम हाउस भिजवाने के बाद पुलिस अधिकारी थाना कोतवाली पहुंचे कातिल पवन पहले ही आत्मसमर्पण कर चुका था. पुलिस अधिकारियों ने उस से पूछा, ‘‘तुम ने अपनी पत्नी व सास की हत्या क्यों की?’’

‘‘साहब, उन दोनों ने मेरी जिंदगी में जहर घोल रखा था. जिस से मेरा जीना तक मुहाल हो गया था. रोजरोज की टेंशन से परेशान हो कर मुझे यह करने के लिए मजबूर होना पड़ा.’’

चूंकि पवन अपना जुर्म कबूल चुका था, अत: थानाप्रभारी विकास राय ने मृतका सविता के भाई गोविंद को वादी बना कर भादंवि की धारा 302 के तहत पवन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. पवन को विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया गया.

पवन से की गई पूछताछ और पुलिस जांच में डबल मर्डर की जो कहानी प्रकाश में आई, वह घर की कलह व अवैध संबंधों पर आधारित निकली.

कन्नौज, उत्तर प्रदेश का औद्योगिक नगर है. यहां का इत्र व्यवसाय पूरी दुनिया में मशहूर है. इसलिए कन्नौज को सुगंध की नगरी के नाम से भी जाना जाता है. इसी कन्नौज का एक मोहल्ला हौदापुरवा है, जो कन्नौज कोतवाली के क्षेत्र में आता है. हौदापुरवा पहले कन्नौज से सटा एक गांव था, लेकिन जब कन्नौज को जिले का दरजा मिला और विकास हुआ तो हौदापुरवा शहर का मोहल्ला बन गया.

इसी हौदापुरवा मोहल्ले में विकास कुमार सिंह का अपना दोमंजिला मकान था. उस के परिवार में पत्नी दयावती के अलावा 3 बेटे राजीव, वीर सिंह व पवन उर्फ मुरारी थे. तीनों की शादी हो चुकी थी. राजीव पशुपालन विभाग में काम करता था और अपने परिवार के साथ मकान की पहली मंजिल पर रहता था. वीर सिंह परिवार के साथ भूतल पर रहता था. वह जनरल स्टोर चलाता था.

सब से छोटा पवन उर्फ मुरारी अपने भाइयों से ज्यादा स्मार्ट तथा पढ़ालिखा था. वह अपने मातापिता के साथ मकान की दूसरी मंजिल पर रहता था और अपनी कार बुकिंग पर चलाता था. पवन व सविता की शादी 6 जून, 2014 को हुई थी.

ससुराल में शुरूशुरू में सविता के दिन ठीकठाक गुजरे. फिर धीरेधीरे उस पर गृहस्थी का पूरा बोझ लाद दिया गया. घर के सारे काम करने के अलावा पति व सास की सेवा भी उसे ही करनी पड़ती थी. धीरेधीरे सास के ताने व जेठानियों के व्यंग्य शुरू हो गए थे. सविता सब कुछ सहती रही. जबतब वह अकेले में आंसू बहा कर मन हलका कर लेती थी. पति पवन अपनी मां का ही पक्ष लेता था.

विवाह के 2 साल बाद सविता ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम रानू रखा गया. रानू के जन्म से सविता के जीवन में नई ज्योति तो जली, साथ ही जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं. घर के कामों के अलावा उसे अपनी नवजात के लिए भी समय निकालना पड़ता था. नतीजा यह हुआ कि सास की खींचातानी बढ़ गई.

दरअसल सास दयावती को इस बात का मलाल था कि उस के बेटे को शादी में उस की हैसियत के मुताबिक दहेज नहीं मिला. दहेज कम मिलने को ले कर वह सविता को ताने दे कर प्रताडि़त करती रहती थी.

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एक रोज पवन ने सविता से कहा, ‘‘हमारी कार अब खटारा हो गई है, जिस से बुकिंग कम मिलने लगी है. अगर तुम मायके से 2 लाख रुपया ले आओ, तो हम नई कार फाइनैंस करा लें. इस से हमारी बुकिंग बढ़ जाएगी और अच्छी कमाई भी होने लगेगी.’’

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

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