‘उत्तर प्रदेश दिवस’ में दिखा विकास का खाका, किया प्रतिभाओ का सम्मान

लखनऊ :  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर प्रदेश के विकास का खाका जनता के सामने रखा.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बसंत पंचमी से ‘अभ्युदय योजना’ का शुभारम्भ किए जाने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिभाग करने वाले प्रदेश के युवाओं के लिए इस योजना के अन्तर्गत निःशुल्क कोचिंग दी जाएगी. प्रथम चरण में राज्य के सभी मण्डल मुख्यालयों पर यह कोचिंग संस्थान प्रारम्भ किये जाएंगे. इन संस्थानों में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रतिभागी युवाओं के लिए फिजिकल और वर्चुअल, दोनों माध्यमों से मार्गदर्शन की व्यवस्था लागू की जाएगी. इन संस्थानों के लिए विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं राजकीय विद्यालयों का इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रयोग में लाया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने अवध शिल्पग्राम परिसर में उत्तर प्रदेश राज्य के ७१ वें स्थापना दिवस पर ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ समारोह के चतुर्थ संस्करण के उद्घाटन समारोह में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे. मुख्यमंत्री जी ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली विभूतियों को इस अवसर पर सम्मानित किया. समारोह के दौरान अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गये. उन्होंने ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ समारोह के अवसर पर अवध शिल्पग्राम में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया.

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मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लाॅकडाउन के दौरान राजस्थान राज्य के कोटा तथा प्रदेश के जनपद प्रयागराज से प्रतियोगी विद्यार्थियों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने के अभियान के दौरान उनके द्वारा प्रदेश के युवाओं को राज्य में ही कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के सम्बन्ध मंे विचार-विमर्श किया गया था.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के अनेक प्रतिभाशाली लोगों ने अपने परिश्रम और पुरुषार्थ से देश-दुनिया में उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है. राज्य सरकार द्वारा कला, संस्कृति, खेल, विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश का मान-सम्मान बढ़ाने वाली 03 से 05 विभूतियों को ‘यू0पी0 गौरव सम्मान’ से प्रतिवर्ष सम्मानित किया जाएगा. विभूतियों को सम्मानित करने का यह कार्यक्रम इसी वर्ष प्रारम्भ किया जाएगा. सम्मान प्राप्त करने वाली विभूति को 11 लाख रुपए की धनराशि, प्रतीक चिन्ह, मेडल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा.

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मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 24 जनवरी, 2018 को प्रथम ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ समारोह का आयोजन किया गया था. इस अवसर पर ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना प्रारम्भ की गयी थी. प्रदेश के औद्योगिक विकास के निरन्तर प्रयासों की अभिनव कड़ी के रूप में राज्य सरकार द्वारा ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना प्रारम्भ की गयी. इसका उद्देश्य राज्य के विभिन्न जनपदों के परम्परागत और विशिष्ट पहचान वाले उत्पादों को प्रोत्साहित कर युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है. वर्तमान में यह योजना देश की सर्वाधिक लोकप्रिय योजनाओं में से एक है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी ‘एक जनपद, एक उत्पाद योजना’ की सराहना की है. इस योजना में प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने का सामथ्र्य है. केन्द्रीय बजट में भी इस योजना को सम्मिलित किया गया है. उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में एमएसएमई विभाग के अन्तर्गत एक जनपद, एक उत्पाद, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड से सम्बन्धित उद्यमियों व हस्तशिल्पियों को सम्मानित किया गया है. उन्होंने कहा कि यह योजनाएं प्रधानमंत्री जी की ‘वोकल फाॅर लोकल’ की संकल्पना को आगे बढ़ा रही हैं.

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मुख्यमंत्री जी ने कहा कि द्वितीय ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ के अवसर पर राज्य सरकार द्वारा ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ प्रारम्भ की गयी. यह योजना स्थानीय दस्तकारों तथा पारम्परिक कारीगरों के कौशल विकास हेतु संचालित की जा रही है. इसके अन्तर्गत पारम्परिक कारीगरों के आजीविका के साधनों का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि तृतीय ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ के अवसर पर अटल आवासीय विद्यालय की स्थापना की योजना का शुभारम्भ किया गया. इसके तहत, प्रदेश के सभी 18 मण्डलों में अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किये जा रहे हैं.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की संस्कृति और परम्परा पर गर्व की अनुभूति होती है. उत्तर प्रदेश भारत का हृदय स्थल है. यह देश की संस्कृति और परम्परा का केन्द्र स्थल है. उत्तर प्रदेश की देश में अग्रणी भूमिका रही है. विगत कुछ वर्षाें में यह भूमिका प्रभावित हुई. वर्तमान राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश को पुनः अग्रणी बनाने का कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि विगत 10 माह से पूरी दुनिया वैश्विक महामारी कोरोना के विरुद्ध संघर्ष कर रही है. ऐसे समय में प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री जी के ‘जान भी, जहान भी’ मंत्र के अनुरूप कोविड प्रबन्धन के साथ ही, विकास कार्याें को पूरी गति से आगे बढ़ा रही है.

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मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज देश और दुनिया में उत्तर प्रदेश की छवि बदल रही है. प्रदेश की बेहतर कानून-व्यवस्था को अन्य राज्य माॅडल के रूप में अपनाना चाह रहे हैं. राज्य में कानून और व्यवस्था के उत्कृष्ट वातावरण से प्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़े हैं. प्रदेश सरकार ने अब तक लगभग 04 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां उपलब्ध करायी हैं. निजी क्षेत्र में 15 लाख नौजवानों का नियोजन हुआ है. डेढ़ करोड़ से अधिक युवाओं को निवेश के माध्यम से रोजगार तथा लगभग 15 करोड़ नौजवानों को स्वतः रोजगार के लिए केन्द्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं से जोड़ने का कार्य विगत पौने चार वर्ष में हुआ है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों में जो कार्य हुए हैं, उससे एक नई कार्य संस्कृति का जन्म हुआ है. यह नई कार्य संस्कृति हर एक क्षेत्र में प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने की है. प्रदेश में हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है. कृषि, जल संसाधन के क्षेत्रों में इस दिशा मंे उल्लेखनीय कार्य हुआ है. सूखाग्रस्त माने जाने वाले बुन्देलखण्ड व विन्ध्य क्षेत्र में ‘हर घर नल’ योजना कार्य कर रही है. वर्तमान राज्य सरकार द्वारा गन्ना किसानों को 01 लाख 15 हजार करोड़ रुपये के गन्ना मूल्य का भुगतान कराया गया है. पर्यटन एवं संस्कृति क्षेत्रों के भी कार्य अत्यन्त उल्लेखनीय हंै. प्रयागराज कुम्भ-2019 के आयोजन को सुरक्षा, स्वच्छता एवं सुव्यवस्था ने विशिष्ट पहचान दी. यूनेस्को ने कुम्भ को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर कहा. प्रयागराज कुम्भ-2019 के पश्चात प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हुई.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 24 करोड़ जनसंख्या का राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश ने कोरोना प्रबन्धन के क्षेत्र में उदाहरण स्थापित किया है. राज्य ने यह साबित किया है कि किसी भी आपदा का मुकाबला टीमवर्क एवं दृढ़ इच्छा शक्ति के माध्यम से किया जा सकता है. लाॅकडाउन के दौरान प्रदेश में अन्य राज्यों से 40 लाख से अधिक श्रमिक व कामगार वापस आये. राज्य सरकार ने इनके रहने व खाने की व्यवस्था की. प्रदेश सरकार द्वारा ‘उत्तर प्रदेश कामगार और श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) आयोग’ का गठन किया गया है. राज्य सरकार अपने पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों को शीघ्र सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा की गारण्टी भी देगी. प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के हर वृद्ध, निराश्रित महिला एवं पात्र दिव्यांगजन को प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जा रही है. हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है. इससे प्रदेश नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से देश में ही कोरोना का वैक्सीन तैयार किया गया है. ब्राजील के राष्ट्रपति ने यहां विकसित वैक्सीन को संजीवनी बूटी कहा है. भारत में विकसित वैक्सीन यहां के नागरिकों अलावा भूटान, नेपाल, माॅरीशस आदि दुनिया के दूसरे देशों के नागरिकों की जीवन रक्षा कर रहा है. प्रदेश में कोरोना वैक्सीनेशन के पहले चरण के पहले दिन 22 हजार हेल्थ वर्कर्स का वैक्सीनेशन किया गया. दूसरी तिथि को 01 लाख 01 हजार वैक्सीनेशन किये गये. आगामी 28 व 29 जनवरी को भी हेल्थ वर्कर्स का वैक्सीनेशन किया जाएगा.

समारोह को सम्बोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश का सर्वांगीण विकास हो रहा है. राज्य औद्योगिक रूप से समृद्ध हो रहा है. साथ ही, युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं. नकल विहीन परीक्षा, मेधावी छात्राओं एवं शिक्षकों के सम्मान के माध्यम से उत्कृष्ट शैक्षिक वातावरण बनाया जा रहा है. विश्वविद्यालयों में शोध पीठ की स्थापना की जा रही है.

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन मंत्री श्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री जी की मंशा के अनुरूप महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज तथा पं0 दीनदयाल उपाध्याय की अन्त्योदय की संकल्पना को साकार कर रही है. प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है. मुख्यमंत्री जी द्वारा इसके लिए ‘एक जनपद, एक उत्पाद योजना’, ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ आदि योजनाएं क्रियान्वित की गयी हैं. इन योजनाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का ‘योगी माॅडल’ बताते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती पूरी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करती है. इससे सतत विकास सम्भव होता है.

‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना की प्रगति के सम्बन्ध में एक रिपोर्ट का विमोचन भी किया. इस अवसर पर स्टेट बैंक आॅफ इण्डिया के सी0जी0एम0 श्री अजय कुमार खन्ना एवं अपर मुख्य सचिव एमएसएमई श्री नवनीत सहगल के मध्य ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना के सम्बन्ध में एक एमओयू का हस्तान्तरण किया गया. इसी प्रकार अपर मुख्य सचिव एमएसएमई श्री नवनीत सहगल एवं इण्डियन इंस्टीट्यूट आॅफ पैकेजिंग के डायरेक्टर श्री संजीव आनन्द के मध्य ‘एक जनपद, एक उत्पाद योजना’ के उत्पादों की पैकेजिंग के सम्बन्ध में एक अन्य एम0ओ0यू0 का हस्तान्तरण किया गया. ‘उद्यम सारथी’ एप के माध्यम से ‘एक जनपद, एक उत्पाद योजना’ के सम्बन्ध में समस्त जानकारी प्राप्त की जा सकती है. एप में युवाओं को प्रशिक्षित करने की भी व्यवस्था है. भविष्य में प्रदेश की सभी योजनाओं को एप से जोड़ा जाएगा.

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी ने समाज कल्याण विभाग द्वारा विद्यार्थियों को प्रदान की जाने वाली छात्रवृत्ति का वितरण भी किया. उन्होंने बटन दबाकर 1,43,929 विद्यार्थियों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की 39 करोड़ रुपए की धनराशि का आॅनलाइन अन्तरण किया. उन्होंने 05 छात्र-छात्राओं को प्रतीकात्मक रूप से छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि प्रदान की. कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी ने ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ के तहत 05 पारम्परिक कारीगरों तथा ‘एक जनपद, एक उत्पाद योजना’ के 02 हस्तशिल्पियों को उन्नत टूल किट प्रदान किये. उन्होंने माटी कला बोर्ड के 02 माटी कारीगरों को भी पुरस्कृत किया.

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी ने विभिन्न खेलों में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाले पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों को वर्ष 2019-20 के लिए क्रमशः ‘लक्ष्मण पुरस्कार तथा रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार’ से सम्मानित किया. ‘रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार’ से 08 महिला खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया है. इनमें 01 खिलाड़ी वेटरन वर्ग से हैं. साथ ही, 10 पुरुष खिलाड़ियों को ‘लक्ष्मण पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है. इनमें वेटरन वर्ग के 02 खिलाड़ी सम्मिलित हैं.

‘रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार’ से सम्मानित खिलाड़ियों में हैण्ड बाॅल की सुश्री स्वर्णिमा जायसवाल, एथलेटिक्स की सुश्री प्रियंका, वुशू की सुश्री साक्षी जौहरी, हाॅकी की सुश्री वन्दना कटारिया, शूटिंग की सुश्री हिमानी सिंह, तीरंदाजी की दिव्यांग खिलाड़ी सुश्री ज्योति, शूटिंग की दिव्यांग खिलाड़ी सुश्री आकांक्षा तथा वेटर्न वर्ग में एथलेटिक्स की श्रीमती विमला सिंह हैं.

‘लक्ष्मण पुरस्कार’ से सम्मानित खिलाड़ियों में कबड्डी के श्री नितिन तोमर, रोइंग के श्री पुनीत कुमार, कुश्ती के श्री गौरव बालियान, वुशू के श्री सूरज यादव, बैडमिन्टन के दिव्यांग खिलाड़ी श्री अबू हुबैदा, पावरलिफ्टिंग के दिव्यांग खिलाड़ी श्री सचिन चैधरी, शूटिंग के दिव्यांग खिलाड़ी श्री आकाश, एथलेटिक्स के दिव्यांग खिलाड़ी श्री वरुण सिंह भाटी तथा वेटर्न वर्ग में कुश्ती के श्री राजकुमार तथा एथलेटिक्स के श्री कुलदीप कुमार हैं.

मुख्यमंत्री जी द्वारा युवा कल्याण विभाग के राज्यस्तरीय ‘स्वामी विवेकानन्द यूथ अवाॅर्ड’ भी प्रदान किये गये. व्यक्तिगत श्रेणी में यह अवाॅर्ड 10 युवाओं को प्रदान किए गये हैं. मुख्यमंत्री जी ने यह पुरस्कार श्री सागर कसाना (गाजियाबाद), कु0 इशिका बंसल (आगरा) को प्रदान किये. राज्यस्तरीय ‘स्वामी विवेकानन्द यूथ अवाॅर्ड’ श्री कृष्ण पाण्डेय (गोरखपुर), श्री कलीम अतहर (पीलीभीत), श्री केतन मोर (झांसी), श्री शुभम मिश्रा (लखनऊ), श्री प्रवीण कुमार गुप्ता (अम्बेडकरनगर), श्री अजीत कुमार (लखनऊ), श्री अंकित मौर्य (लखनऊ) तथा रविकान्त मिश्रा (फतेहपुर) को भी दिया गया है. उन्होंने सामूहिक श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले युवक एवं महिला मंगल दल को सम्मानित किया.

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करने हेतु कृषकों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘गोकुल पुरस्कार’ एवं ‘नन्द बाबा पुरस्कार’ वितरित किये. वर्ष 2018-19 में सर्वाधिक दूध उत्पादन के लिए दुग्ध संघ लखीमपुर खीरी की दुग्ध समिति बेलवामोती के सदस्य श्री वरुण सिंह को प्रथम पुरस्कार तथा दुग्ध संघ गोरखपुर की दुग्ध समिति माहोपार के सदस्य श्री धीरेन्द्र सिंह को द्वितीय पुरस्कार दिया. उन्होंने भारतीय गोवंश की गाय के माध्यम से सर्वाधिक दूध उत्पादन के लिए दुग्ध संघ मथुरा की दुग्ध समिति भूड़ासानी के सदस्य श्री हरेन्द्र सिंह को ‘नन्द बाबा पुरस्कार’ प्रदान किया. उन्होंने कृषि विभाग द्वारा दिये जाने वाले ‘कृषक पुरस्कार’ जनपद लखनऊ की डाॅ0 कामिनी सिंह, जनपद बाराबंकी के श्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह तथा जनपद बहराइच के श्री अनिरुद्ध को प्रदान किये. मुख्यमंत्री जी द्वारा ‘दृष्टि योजना’ के अन्तर्गत जनपद भदोही के एफ0पी0ओ0 हरियाली किसान समृद्धि प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड को योजना की प्रथम किस्त के रूप में 18 लाख रुपए का डमी चेक एवं स्वीकृति पत्र प्रदान किया गया.

कार्यक्रम के दौरान ‘इतिहास में महिला शक्ति’ पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया. यूपी गुडविल ताइक्वाण्डो फेडरेशन की प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा मार्शल आर्ट के विभिन्न करतब प्रदर्शित किए गये. इण्डियन ब्लाइण्ड जूडो फेडरेशन की बालिकाओं द्वारा आत्मरक्षार्थ जूडो का प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम के दौरान संस्कृति विभाग के कलाकारों ने थारू नृत्य प्रस्तुत किया.

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही, समाज कल्याण मंत्री श्री रमापति शास्त्री, दुग्ध विकास मंत्री श्री लक्ष्मी नारायण चैधरी, नगर विकास मंत्री श्री आशुतोष टण्डन, नागरिक उड्डयन मंत्री श्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, जल शक्ति मंत्री डाॅ0 महेन्द्र सिंह, खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री उपेन्द्र तिवारी, महिला कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती स्वाती सिंह, उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री श्रीराम चैहान, कृषि राज्य मंत्री श्री लाखन सिंह राजपूत, लखनऊ की महापौर श्रीमती संयुक्ता भाटिया, सांसद श्री कौशल किशोर सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, मुख्य सचिव श्री आर0के0 तिवारी, अपर मुख्य सचिव गृह श्री अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री मुकेश मेश्राम, सूचना निदेशक श्री शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

Varun Dhawan ने नताशा दलाल संग लिए सात फेरे, देखें शादी की पहली Photo

बौलीवुड एक्टर वरुण धवन (Varun Dhawan) अपनी लेडीलव नताशा दलाल (Natasha Dalal) के साथ शादी के बंधन में बंध गए हैं और फैंस को इस पल का बेसब्री से इंतजार था.

वरुण धवन ने खुद शादी की पहली तस्वीर फैंस के साथ शेयर किया है. इस तस्वीर में वह नताशा दलाल के साथ शादी करते हुए दिखाई दे रहे हैं. इस तस्वीर में वो दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं. फैंस उन्हें लगातार बधाईयां और शुभकामनाएं दे रहे हैं.

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वरुण धवन और नताशा दलाल की शादी की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है. इन तस्वीरों में वरुण धवन के पापा काफी खुश नजर आ रहे हैं.  और वो वरुण और नताशा के ऊपर फूल गिराते हुए दिखाई दे रहे हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वरुण धवन और नताशा दलाल की शादी का रिसेप्शन 26 जनवरी की रात में होगा, जिसमें कई बड़े एक्टर्स भी शामिल होंगे. खबर ये भी आ रही है कि डेविड धवन ने अपने बेटे के रिसेप्शन में पूरी बौलीवुड इंडस्ट्री को इन्वाइट किया है.

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बता दें कि वरुण धवन और नताशा दलाल दोनों ने 24 जनवरी को शादी की. इन दोनों की रिलेशनशिप की खबरें काफी टाइम से आ रही थी. कई बार इन दोनों को साथ में देखा गया. और अब ये दोनों शादी के बंधन में बंध गए हैं.

Crime Story: रान्ग नंबर भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

मध्य प्रदेश के जबलपुर का उपनगरीय इलाका रांझी रक्षा मंत्रालय की फैक्ट्रियों के लिए जाना जाता है. यहां पर गन कैरेज, आर्डिनैंस, व्हीकल और ग्रे आयरन फाउंडी में सेना के उपयोग में आने वाले गोलाबारूद, टैंक और भारी वाहन बनाए जाते हैं.

ग्रे आयरन फाउंडी के गेट नंबर 2 के पास ही रांझी के रिछाई अखाड़ा मोहल्ले में 40 साल का सोनू ठाकुर अपनी 28 साल की पत्नी नीतू और 2 बेटियों के साथ रहता था. मूलरूप से दामोह जिले के हिनौता गांव का रहने वाला सोनू परिवार में 4 भाईबहनों में सब से बड़ा था.

शादी के बाद खर्चे बढ़े तो सोनू गांव में परेशान रहने लगा. वैसे भी गांव में उस का छोटा सा घर था, जिस में उस का पूरा परिवार रहता था. जहां पतिपत्नी एकदूसरे से ढंग से बात भी नहीं कर पाते थे. रात को दोनों एक छोटी सी कोठरी में सोते थे, जहां मन की बातें नहीं हो पाती थी. यह नीतू को बहुत अखरता था.

रात को जब घर के सभी लोग सो जाते, तब उन्हें एकदूसरे का साथ मिलता था. नीतू उलाहना दे कर अकसर सोनू से कहती थी कि वह कहीं अलग घर ले कर रहे. तब सोनू उसे समझा देता कि हमारी नईनई शादी हुई है. अभी परिवार से अलग रहेंगे तो घर वालों को अच्छा नहीं लगेगा. कुछ महीनों के बाद वह अपना कामधंधा जमा कर अलग  रहने लगेगा.

जब शादी को साल भर का समय बीत गया तो एक रात नीतू ने सोनू को सलाह देते हुए कहा, ‘‘क्यों न हम लोग गांव से दूर शहर जा कर कुछ कामधंधा कर लें.’’

सोनू को पत्नी की सलाह पसंद आई. जबलपुर शहर में हिनौता गांव के कुछ लड़के काम करते थे. सोनू ने उन के घर वालों से मोबाइल नंबर ले कर बातचीत की तो उन्होंने बताया कि उसे जबलपुर में आसानी से काम मिल जाएगा.

शादी के साल भर बाद सोनू बीवी के साथ काम की तलाश में जबलपुर आ गया था. दोनों रांझी के अखाड़ा मोहल्ले में वे किराए का कमरा ले कर रहने लगे. नीतू सिलाईकढ़ाई का काम करने लगी और सोनू को बड़ा फुहारा में घमंडी चौक पर कपड़े की एक दुकान में सेल्समैन का काम मिल गया.

देखतेदेखते सोनू को जबलपुर आए करीब 5 साल हो गए थे. पतिपत्नी ने धीरेधीरे तिनकातिनका जोड़ कर एक छोटा सा घर बना लिया था. इन सालों में नीतू 2 बेटियों की मां बन चुकी थी. सोनू और नीतू की गृहस्थी की गाड़ी हंसीखुशी से चल रही थी, मगर एक रौंग नंबर की काल ने उन के जीवन में जहर घोल दिया.

2020 के जनवरी महीने की बात है. दोपहर का वक्त था. घर के कामकाज से फुरसत पा कर नीतू मोबाइल फोन में यूट्यूब पर वीडियो देख रही थी. तभी मोबाइल की रिंग बजी. नीतू ने काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘हैलो, मैं राजू बोल रहा हूं.’’

‘‘कौन राजू? मैं ने आप को पहचाना नहीं.’’

‘‘जी, मैं गाजीपुर से राजू राजभर बोल रहा हूं. कंप्यूटर ट्रेडिंग का काम करता हूं. क्या मेरी बात निशा वर्मा से हो रही है?’’

‘‘जी नहीं, आप ने गलत नंबर लगाया है.’’ नीतू ने जबाब दिया.

‘‘जी सौरी, मुझे निशा वर्मा के घर प्रिंटर भिजवाना था. गलती से आप का नंबर लग गया. वैसे आप कहां से बोल रही हैं?’’ राजू ने विनम्रता से पूछा.

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‘‘मैं तो जबलपुर से बोल रही हूं.’’

‘‘आप की आवाज बड़ी प्यारी है. क्या मैं आप का नाम जान सकता हूं?’’ वह बोला.

‘‘मेरा नाम नीतू ठाकुर है.’’ नीतू ने कहा.

‘‘नीतूजी, आप से बात कर के बहुत अच्छा लगा.’’

‘‘जी शुक्रिया.’’ कह कर नीतू ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया. नीतू को राजू का इस तरह से बात करना अच्छा लगा. इस के बाद राजू नीतू के मोबाइल पर काल करने लगा. रौंग नंबर से शुरू हुआ बातचीत का सिललिला धीरेधीरे दोस्ती में बदल गया. अब नीतू भी हर दिन राजू के फोन आने का इंतजार करने लगी. एकदूसरे को वीडियो काल कर के दोनों की बातचीत होने लगी.

तीखे नैननक्श वाली नीतू ने हायर सेकेंडरी तक पढ़ाई की थी. उसे घूमनेफिरने और मौजमस्ती करने का बड़ा शौक था. उस ने शादी के पहले जो रंगीन ख्वाब देखे थे, वे सोनू से शादी कर के बिखर चुके थे.

थोड़ी सी पगार में घरगृहस्थी चलाने वाला उस का पति सोनू दिन भर काम में लगा रहता और नीतू घर की चारदीवारी में कैद घर के काम में लगी रहती.

पति के काम पर जाने के बाद फुरसत मिलती तो वह मोबाइल पर सोशल मीडिया साइट पर व्यस्त हो जाती.

मोबाइल फोन के जरिए राजू और नीतू का संबंध जब परवान चढ़ने लगा तो दोनों एकदूसरे से मिलने को बेताब रहने लगे. नीतू राजू के प्रेम में इस कदर खो चुकी थी कि बारबार राजू से जबलपुर आ कर मिलने की बात करती.

आग राजू के सीने में भी धधक रही थी. राजू नीतू को भरोसा दिलाता कि वह जल्द ही जबलपुर आ कर उस से मिलेगा.

इसी बीच मार्च महीने में कोरोना महामारी के कारण 24 मार्च को लौकडाउन लग गया. लौकडाउन में भी नीतू और राजू की मोबाइल पर बातें होती रहीं. नीतू का पति सोनू घर के बाहर गली में जब भी टहलने जाता, नीतू राजू को काल कर लेती. जैसेजैसे लौकडाउन में ढील मिलने लगी, राजू जबलपुर जाने की प्लानिंग करने लगा.

राजू जिस कंपनी के लिए कंप्यूटर ट्रेडिंग का काम करता था, उस का कारोबार जबलपुर शहर में भी था. किसी तरह कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर से बात कर के उस ने जबलपुर की कंपनी में काम करने का जुगाड़ कर लिया. कंपनी की तरफ से उसे जबलपुर में काम करने का मौका मिला तो उस के मन की मुराद पूरी हो गई.

इसी हसरत में 25 साल का कुंवारा राजू नीतू की चाहत में सितंबर 2020 में अपने गांव जफरपुर, गाजीपुर से जबलपुर आ गया .

जिस दिन राजू जबलपुर आ कर नीतू से मिला तो नीतू की खुशी का ठिकाना न रहा. राजू ने नीतू को करीब से देखा तो देखता ही रह गया.

‘‘वाकई तुम बहुत खूबसूरत हो,’’ राजू ने नीतू से कहा तो वह शरमा कर बोली, ‘‘मेरी तारीफ बाद में करना. मैं चाय बना कर लाती हूं.’’

जब नीतू राजू के लिए चाय बनाने किचन में गई, राजू अपने आप को रोक नहीं सका. वह भी किचन में पहुंच गया और नीतू को अपनी बांहों में भर लिया. वह उस के गालों को चूमते हुए बोला, ‘‘तुम्हें पाने को कितना इंतजार करना पड़ा.’’

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नीतू ने अपने आप को छुड़ाते हुए नखरे दिखा कर कहा, ‘‘थोड़ा सब्र और करो, धीरज का फल मीठा होता है.’’

नीतू राजू को चाय का कप पकड़ा कर बाहर आ गई. उस ने बाहर आ कर देखा उस की दोनों बेटियां आंगन में खेल में मस्त थीं.

इसी मौके का फायदा उठा कर नीतू ने राजू के पास जा कर कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और राजू के सीने से लग गई. राजू ने नीतू की कमर में हाथ डाला और उसे बिस्तर पर ले गया. 8 महीने से मोबाइल पर चल रहे उन के संबंध के हसीन ख्वाब पूरे हो गए. उस दिन दोनों ने दिल खोल कर अपनी हसरतें पूरी कर लीं.

राजू ने जब उसे बताया कि उस ने अपना ट्रांसफर जबलपुर करा लिया है, इसलिए अब यहीं रहेगा. नीतू बड़ी खुश हुई. इतना ही नहीं, उस ने राजू को अपना रिश्तेदार बताते हुए उसे अपने मोहल्ले में भाड़े पर खाली कमरा दिला दिया. उस के खानेपीने की जिम्मेदारी वह खुद उठाने लगी.

नीतू ने राजू से मिलने का एक तरीका खोज लिया था. उस ने पति सोनू से बात कर उसे इस बात के लिए राजी कर लिया कि ढाई हजार रुपए महीने में राजू को दोनों टाइम खाना बना कर देगी. सोनू ने यह सोच कर हामी भर दी कि थोड़ी सी मेहनत से बैठे ठाले ढाई हजार रुपए महीने की आमदनी बढ़ जाएगी, जो उस की बेटियों की पढ़ाईलिखाई के काम आएगी.

अगले भाग में पढ़ें-  जांच टीम को सोनू के घर में भी खून के धब्बे मिले

Crime Story: रान्ग नंबर भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

सोनू का यही निर्णय उस के लिए घातक साबित हुआ. नीतू को तो बस अपने प्रेमी से मिलने का बहाना चाहिए था. अब वह बेरोकटोक राजू के लिए खाने का टिफिन देने के बहाने उस से मिलनेजुलने लगी.

सोनू सुबह 9 बजे घर से निकल जाता और दिन भर कपड़े की दुकान में काम कर के थकाहारा रात 9 बजे के बाद घर पहुंचता. नीतू और उस के पति सोनू की उम्र में 12 साल का फासला था. यही वजह थी कि नीतू की शारीरिक जरूरतों को वह पूरा नहीं कर पाता था.

जब भी राजू को मौका मिलता वह नीतू के घर भी आ जाता. नीतू भी अपनी बेटियों तनु और गुड्डी को काम के बहाने घर से बाहर भेज देती और दोनों जी भर कर हसरतें पूरी करते.

29 नवंबर, 2020 की सुबह के साढ़े 7 बजे जबलपुर के रांझी थाने को फोन पर सूचना मिली कि ग्रे आयरन फाउंडी के गेट नंबर 2 के पास की नाली में कंबल में लिपटी एक लाश पड़ी है.

खबर मिलते ही टीआई आर.के. मालवीय ने पुलिस के आला अधिकारियों को सूचना दी और पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

घटनास्थल पर आसपास के लोगों की भीड़ मौजूद थी. लोगों ने लाश की शिनाख्त कर बताया कि वह पास में ही रहने वाले सोनू ठाकुर की लाश है. सोनू की गरदन और बाएं हाथ की नस कटी हुई थीं. घटनास्थल के पास ही सोनू की पत्नी अपनी दोनों बेटियों को सीने से चिपकाए चीखचीख कर रो रही थी.

जब पुलिस ने सोनू के बारे में नीतू से पूछताछ की तो उस ने बताया कि रात को साढ़े 10 बजे यह घर से घूमने की बात कह कर निकले थे. जब देर रात तक नहीं लौटे तो उस ने फोन किया. फोन स्विच्ड औफ बता रहा था.

नीतू से प्रारंभिक पूछताछ करने के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भेज दी और आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ कर मामले की जांच शुरू कर दी.

जांच के दौरान पुलिस टीम के ट्रेनी आईपीएस अमित कुमार, टीआई आर.के. मालवीय और फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और पाया कि जीआईएफ गेट नंबर 2 के पास की जिस नाली में सोनू की लाश मिली थी, वहां खून के धब्बों के निशान थे.

सड़क पर मिले खून के निशानों का पीछा करतेकरते पुलिस सोनू के घर तक पहुंच गई.

जांच टीम को सोनू के घर में भी खून के धब्बे मिले. जबकि नीतू ने सोनू के रात साढ़े 10 बजे घर से बाहर जाने की बात कही थी. पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि नीतू के मोहल्ले में रहने वाले एक युवक राजू से संबंध थे.

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संदेह की सुई नीतू की तरफ घूमी तो पुलिस ने नीतू को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ की. पहले नीतू पुलिस को गोलमोल जबाब देती रही. लेकिन जब पुलिस टीम की महिला आरक्षक ने उस से सख्ती के साथ पूछताछ की तो जल्द ही उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया.

नीतू के बयान के आधार पर रांझी पुलिस ने राजू को भी हिरासत में ले कर पूछताछ की. पुलिस पूछताछ में नीतू और राजू ने पुलिस को जो कहानी बताई, वह नाजायज संबंधों की ऐसी कहानी निकली जो दोनों को गुनाह के रास्ते पर ले गई थी.

रौंग नंबर फोन काल से शुरू हुए नीतू और राजू के अवैध संबंधों की जानकारी धीरेधीरे पूरे मोहल्ले में चर्चा का विषय बन चुकी थी. नीतू द्वारा फोन पर की जाने वाली लंबी बातें सोनू के मन में शक की जड़ें जमा चुकी थीं.

शक होने पर सोनू नीतू पर नजर रखने लगा. एक दिन सोनू ने नीतू को मोबाइल फोन पर किसी से अमर्यादित बातें करते हुए सुन लिया तो इसे ले कर दोनों में विवाद हो गया. अपनी गलती छिपाने के लिए नीतू रोनेधोने का नाटक करने लगी. उस ने कहा कि वह उस के चरित्र पर शक कर रहा है.

राजू सोनू की गैरमौजूदगी में उसे और उस की बच्चियों को घुमाने ले जाता था. दोनों के नाजायज संबंधों का यह खेल ज्यादा दिनों तक समाज की नजरों से नहीं छिप सका. दोनों के संबंधों की चर्चा मोहल्ले में खुलेआम होने लगी. मोहल्ले के कुछ लोगों ने सोनू को बताया कि उस की गैरमौजूदगी में राजू अकसर उस के घर आताजाता है.

सोनू को अब इस बात का पक्का यकीन हो गया था कि पत्नी उस के साथ बेवफाई कर रही है. इस बात से सोनू मानसिक रूप से परेशान रहने लगा.

एक दिन सोनू को अपनी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी. इसलिए अपने सेठ से बोल कर वह दोपहर के वक्त घर आ गया. उस की बेटियां खिलौनों के साथ खेल रही थीं. उस ने जैसे ही कमरे का दरवाजा खोला, अंदर का दृश्य देख उस के होश उड़ गए. बिस्तर पर नीतू अपने प्रेमी के साथ रंगरलियां मना रही थी.

यह देख उस की आंखों में खून उतर आया. वह पत्नी पर चीखा, ‘‘हरामजादी, मेरी गैरमौजूदगी में आशिक के साथ ये गुल खिला रही है.’’

सोनू की चीख सुन कर दोनों हड़बड़ा कर कर अलग हो गए. राजू अपने कपड़े समेट कर भाग खड़ा हुआ और नीतू अपराधबोध से नजरें नीची किए खड़ी रही. उस ने पति से माफी मांगी और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का वादा किया. सोनू ने भी उसे माफ कर दिया.

नीतू कुछ दिन तो ठीक रही, लेकिन उस से प्रेमी की जुदाई बरदाश्त नहीं हो रही थी. इसलिए वह उस से फिर मिलनेजुलने लगी. सोनू सब कुछ जान कर भी पत्नी की वेवफाई को बरदाश्त कर रहा था. कई बार उस के मन में विचार आता कि वेवफा पत्नी को हमेशाहमेशा के लिए छोड़ कर कहीं चला जाए, परंतु मासूम बेटियों के भविष्य की खातिर वह चुप रह जाता.

सोनू को कुछ नहीं सूझ रहा था. वैसे तो सोनू ने जीआईएफ गेट नंबर 2 के सामने खुद का घर बना लिया था. मगर नीतू के बहके कदमों को रोकने के लिए उस ने सोचविचार के बाद फैसला कर लिया कि इसी रविवार कुछ दिनों के लिए वह बीवीबच्चों को ले कर गांव चला जाएगा और गांव में ही कुछ कामधंधा करेगा.

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उसे भरोसा था कि कुछ दिन नीतू राजू से दूर रहेगी तो यह रोग भी दूर हो जाएगा. नीतू अपनी बेटियों की परवरिश में सब कुछ भूल कर सही रास्ते पर आ जाएगी. वापस गांव लौटने के अपने इस फैसले की जानकारी उस ने नीतू को भी दे दी थी.

जब नीतू ने राजू से परिवार सहित गांव वापस लौटने की बात कही तो राजू के माथे पर भी चिंता की लकीरें उभर आईं.

उसे लगा कि जिस नीतू की खातिर वह अपने गांव से इतनी दूर आ गया, वही अब उस की नजरों से दूर चली जाएगी. राजू की प्लानिंग नीतू के साथ शादी कर के घर बसाने की थी. राजू के इस निर्णय में नीतू की भी सहमति थी.

अगले भाग में पढ़ें- अब दोनों सोनू की लाश को ठिकाने लगाने की सोचने लगे

आखिर पढ़ाई की संस्थाओं में अड़चनें क्यों आ रही है?

मोदी सरकार ने भीमराव अंबेडकर के आरक्षण का असर कम करने के लिए पढ़ाई की संस्थाओं में जो इकोनौमिकली वीकर सैक्शनों के लिए आरक्षण घोषित किया था, उस में भी अड़चनें आ रही हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के कालेजों में बहुत सी सीटें खाली रह गई हैं क्योंकि चाहने वालों को सर्टिफिकेट नहीं मिले थे.

शायद बात दूसरी है. रिजर्वेशन के खिलाफ हल्ला इसलिए नहीं है कि ऊंची जातियों के लोगों को शिक्षा संस्थानों या नौकरियों में जगह नहीं मिल पा रही है और उन की जगह पिछड़े और दलित आ रहे हैं. यह हल्ला तो इसलिए मच रहा है कि आखिर पिछड़े और दलित पढ़ें ही क्यों और सरकारी नौकरी में बाबू अफसर क्यों बनें?

ऊंची जाति वालों को रोज पुराण पढ़ कर आज भी सुनाए जा रहे हैं कि साफ लिखा है कि पिछड़ी और निचली जाति के लोगों का काम न राज करना है, न ज्ञान पाना और देना है, न व्यापार करना है. ऊंची जातियों के लोगों ने पिछले 200 सालों में बड़ी मेहनत से पुराणों की महानता का बखान करकर के लोगों के दिमाग में बैठाया है कि जो भी इन में लिखा है वही पहला और आखिरी सच है और इन में अगर लिखा है कि शूद्र (सभी पिछड़े ओबीसी) व जाति बाहर (सभी तरह के दलित) न पैसे के हकदार हैं, न राज के, न पढ़ाई और ज्ञान के तो सही लिखा है. यह इन के पिछले जन्मों के पापों का फल है और इन्हें भुगता जाना चाहिए चाहे कोई भी कीमत हो. इन्हें न भोगना भगवान के आदेश के खिलाफ जाना है. अगर नासमझ पिछड़े व दलित इस ईश्वरवाणी को नहीं समझ रहे तो ज्ञानी स्वामियों का फर्ज व अधिकार है कि वे समझाएं चाहे बोल कर या डंडा मार कर या फिर जेल में बंद कर के.

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अगर कालेजों में इकोनौमिकली वीकर सैक्शन की सीटें नहीं भर रहीं तो इसलिए कि इन जातियों में गरीब हैं ही न के बराबर और जो हैं वे इतने निकम्मे हैं जो घटी कटऔफ में भी दाखिला नहीं ले पाते.

जो पिछड़े और दलित अच्छे नंबर पा कर ज्ञान और सत्ता पा रहे हैं उन से निबटना हमारे महाज्ञानी अच्छी तरह जानते हैं और तभी वे सत्ता में बैठ गए हैं जबकि उन की गिनती मुट्ठीभर है. पिछड़े और दलित किसानों की सरकारों को कहीं चिंता है क्या, जो वे दिल्ली की सरहदों पर धरना दिए बैठे हैं. अगर धर्म का काम, जैसे कांवड़ यात्रा, हो रहा होता तो नरेंद्र मोदी और अमित शाह खुद चल कर सिर नवाने जाते.

विश्वविद्यालयों में ईडब्ल्यूएस कोटे में जो सीटें खाली हैं वे आरक्षण के खिलाफ हल्ले की पोल खोलती हैं.

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देह धंधे में फंसीं औरतें

बंगलादेश की एक गारमैंट फैक्टरी में 9,000 रुपए महीने पर नौकरी करने वाली तलाकशुदा औरत शबाना को उस के ही साथ काम करने वाले एक आदमी ने भारत में अच्छी नौकरी का लालच दिया.

उस आदमी पर भरोसा कर के शबाना बिना अपने मांबाप को बताए ही दलाल के जरीए मुंबई पहुंच गई, लेकिन वहां पर उस के साथ धोखा हुआ और उस आदमी ने उसे सिर्फ 50,000 रुपए में एक नेपाली औरत को बेच दिया, जो एक चकलाघर चलाती थी. फिर शबाना को न चाहते हुए भी देह धंधा करना पड़ा.

मुंबई से बैंगलुरु, फिर अलगअलग शहरों में देह धंधे के अड्डों से होती हुई अलगअलग लोगों के चंगुल में फंसने के बाद आखिर में शबाना का ठिकाना बना पुणे का रैडलाइट इलाका. वहीं से पुणे पुलिस ने शबाना को छुड़ाया और एक एनजीओ के सुपुर्द कर दिया.

इस संस्था के लोगों ने ही मुंबई में बंगलादेशी हाईकमीशन से जुड़े औफिस से बात की और शबाना के घर वालों का पताठिकाना मालूम किया. जांचपड़ताल के बाद शबाना को उस के देश भेजने की तैयारी की गई.

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शबाना की कहानी भी दूसरी हजारों ऐसी औरतों की तरह ही लगती है, जो अच्छी नौकरी की तलाश में भारत  आती हैं और एक अंधेरी जिंदगी में फंस जाती हैं.

लेकिन, शबाना की कहानी में एक मोड़ था. उस ने भारत से लौटने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साल 2017 में एक चिट्ठी लिखी थी, जिस में उस ने लिखा था, ‘भारत में अपने ग्राहकों से टिप में मिले कुछ पैसे मैं ने बचा रखे हैं, लेकिन उन में से ज्यादा 500 रुपए और 1,000 रुपए के पुराने नोट हैं, जो रद्द हो चुके हैं. बहुत ज्यादा तकलीफ और कलंक उठा कर कमाए गए मेरे कुछ हजार रुपयों को अगर मोदीजी बदलवा दें तो मैं उन की अहसानमंद रहूंगी.’

इस भावुक चिट्ठी का रुपाली शिभारकर ने हिंदी अनुवाद किया था. फिर इस चिट्ठी को शबाना की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तब की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया था.

इसी चिट्ठी में शबाना ने लिखा था कि बैंगलुरु में रैडलाइट इलाके में काम करते समय कोठे के मालिक हाथ में एक भी पैसा नहीं देते थे, लेकिन कुछ ग्राहक खुश हो कर टिप दे देते थे, वह उन्हें पेटीकोट के भीतर किसी तरह से छिपा कर रख लेती थी, लेकिन अब वे नोट चलन से बाहर हैं. मोदीजी अगर नोट बदलवा दें तो कुछ पैसे ले कर वह अपने घर जा सकेगी.

पर सब को मालूम है कि जिद्दी और गरूर वाली यह सरकार बेबस औरत की सुनने नहीं वाली.

पश्चिम बंगाल के 24 परगना की सायमा को इस की बिलकुल भनक नहीं थी कि जिस की मुहब्बत में वह अपने गांव से भाग कर मुंबई जा रही है, वही उस का सौदागर बन जाएगा.

सायमा को जिस्मफरोशी की मंडी में बेच दिया गया था. तब उस की उम्र महज 16 साल थी. जिस्मानी और दिमागी तौर पर कमजोर सायमा उन जुल्मों को याद कर के सिहर उठती है, जो उस ने बेचे जाने के बाद सहे थे.

सायमा ऐसी अकेली नहीं है. नैशनल क्राइम रिकौर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि पूरे भारत में मानव तस्करी की शिकार लड़कियों में से 42.67 फीसदी सिर्फ पश्चिम बंगाल की हैं.

देह धंधे के लिए तस्करी का शिकार हुई ज्यादातर पीडि़ताओं को वही सबकुछ झेलना पड़ता है, जो सायमा ने झेला. इन में से कुछ का अनुभव और भी बुरा है.

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सामाजिक कार्यकर्ता बैताली गांगुली कहती हैं कि कोलकाता न सिर्फ देह धंधे के लिए की जा रही मानव तस्करी का एक बड़ा केंद्र है, बल्कि यह बंगालदेश और नेपाल से तस्करी का शिकार हुई लड़कियों का ‘ट्रांजिट पौइंट’ भी है.

उन का आगे कहना है कि तस्करी का शिकार हुई ज्यादातर लड़कियों को या तो कोलकाता में एशिया की देह धंधे की सब से बड़ी मंडी ‘सोनागाछी’ में बेच दिया जाता है या फिर उन्हें उन बड़े शहरों में बेचा जाता है, जहां ‘डांस बार’ का धंधा जोरों पर चल रहा है.

पश्चिम बंगाल की सरकार और कुछ सामाजिक संगठनों ने ऐसी लड़कियों को मानव तस्करों के चंगुल से बचाने के लिए बड़ी मुहिम चलाई है.

इस में देश के अलगअलग ‘रैडलाइट’ इलाकों और डांस बारों से बहुत सी लड़कियों को बचाया भी गया है, मगर सामाजिक संस्थाओं के सामने इन लड़कियों के दोबारा बसाने की समस्या सब से बड़ी चुनौती के रूप में रही है, क्योंकि शोषण के बाद इन में मनोवैज्ञानिक अस्थिरता के लक्षण पैदा हो जाते हैं.

देह धंधे के लिए तस्करी का शिकार हुई ऐसी ही लड़कियों को ‘ट्रौमा’ यानी अवसाद से बाहर निकालने के लिए सामाजिक संगठनों ने म्यूजिक और डांस का सहारा लिया है.

‘समवेद’ नामक एक गैरसरकारी संगठन ने तस्करी का शिकार हुईं इन लड़कियों को उन के पुनर्वास केंद्रों पर ही जा कर म्यूजिक और डांस के जरीए जिंदगी को दोबारा जीने के लिए बढ़ावा देना शुरू किया है.

‘समवेद’ की सोहिनी चक्रवर्ती कहती हैं, ‘‘यह डांस और म्यूजिक इस तरह से पिरोया गया है, ताकि इन्हें मुक्ति का अहसास दिला सके. मुक्ति पिछली जिंदगी से, पिछले अनुभवों से और कड़वी यादों से.’’

सोहिनी चक्रवर्ती का कहना है कि जोरजुल्म ?ोलने के बाद इन बचाई गईं लड़कियों का बरताव बिलकुल बदल जाता है. ये न किसी से बात करना चाहती हैं, न घुलनामिलना. इन के अंदर चिड़चिड़ापन आ जाता है. डांस और म्यूजिक इन्हें सब से मुक्ति देने में मदद करता है.

नीतू, जो तस्करी का शिकार होने के बाद कोलकाता के एक पुनर्वास केंद्र में रह रही थी, ने बताया कि जब उसे रैडलाइट इलाके से बचाया गया था, तब वह बिलकुल टूटी हुई थी.

नीतू ने बताया, ‘‘मेरे साथ जोकुछ हुआ, उस के बाद मैं जीना नहीं चाहती थी. न किसी से मिलना चाहती थी, न अपने घर ही वापस लौटना चाहती थी. लगता था मानो जिंदगी अब खत्म हो गई है. मगर जब मैं ने डांस और म्यूजिक का सहारा लिया, तो सबकुछ बदलाबदला सा नजर आया. ऐसा लगा जैसे मु?ो मुक्ति मिल रही हो.’’

आज नीतू की तरह कोलकाता के पुनर्वास केंद्रों में रहने वाली कई ऐसी लड़कियां हैं, जो खुद म्यूजिक और डांस के जरीए इस अवसाद से उबर गई हैं.

अब नीतू बतौर प्रशिक्षक पुनर्वास केंद्रों में रह रही दूसरी लड़कियों को अपनी जिंदगी दोबारा जीने के लिए बढ़ावा देने का काम कर रही हैं.

देश के तकरीबन हर राज्य के किसी न किसी इलाके में देह धंधा अपने पैर पसारे हुए है, जहां लाखों औरतें दुनिया से कट कर बेबस जिंदगी जी रही हैं.

ऐसी बहुत ही कम औरतें होती हैं, जो अपनी मरजी से देह धंधे में आती हैं. ज्यादातर औरतें ऐसी ही होती हैं, जिन के सामने या तो कोई मजबूरी होती है या अनजाने ही इन्हें इन बदनाम बाजारों में बेच दिया जाता है.

दुनिया के तमाम दूसरे रिश्तों से दूर ये औरतें न किसी की मां होती हैं, न बहन, न बेटी और न पत्नी, इन्हें सिर्फ वेश्याओं के नाम से जाना जाता है. अपनी इज्जत को दांव पर लगा कर समाज के न जाने कितने रसूखदार लोगों की इज्जत बचाए रखने का काम करती हैं ये. लेकिन क्या आप जानते हैं कि तंग गलियों और स्टोररूमनुमा ऐसे कमरों में रहने वाली ये वेश्याएं, जहां सूरज भी अपनी किरणों को भेजने से गुरेज करता है, का भारत में बुरा हाल है.

महिला और बाल विकास मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में  30 लाख से ज्यादा औरतें देह धंधे से जुड़ी हैं, जिन में से तकरीबन 36 फीसदी औरतें ऐसी हैं, जो 18 साल की उम्र से पहले ही इस धंधे में शामिल हो गईं, जबकि ह्यूमन राइट्स ‘वाच’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2 करोड़ सैक्स वर्कर हैं, जो किसी न किसी रूप से इस धंधे में शामिल हैं.

देश के सब से बड़े रैडलाइट एरिया सोनागाछी, कोलकाता को माना जाता है. यहां तकरीबन 3 लाख औरतें देह धंधे से जुड़ी हैं. दूसरे नंबर पर मुंबई का कमाठीपुरा है, जहां तकरीबन 2 लाख से ज्यादा सैक्स वर्कर हैं. फिर दिल्ली का जीबी रोड, आगरा का कश्मीरी मार्केट, ग्वालियर का रेशमपुरा, पुणे का बुधवार पेठ है.

छोटे शहरों की बात करें, तो वाराणसी का मडुआडीह, मुजफ्फरपुर का चतुर्भुज स्थान, आंध्र प्रदेश के पेड्डापुरम व गुडिवडा, सहारनपुर का नक्कासा बाजार, इलाहाबाद का मीरगंज, नागपुर का गंगाजमुना और मेरठ का कबाड़ी बाजार भी इसी बात के लिए बदनाम है.

आंकडों के मुताबिक, देश में रोजाना तकरीबन 2,000 लाख रुपए का देह धंधा होता है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एक स्टडी के मुताबिक, भारत में

68 फीसदी लड़कियों को रोजगार के झासे में फंसा कर वेश्यालयों तक पहुंचाया जाता है, जबकि 17 फीसदी लड़कियों को शादी का वादा कर के इस धंधे में धकेल दिया जाता है.

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क्या है कानून

भारत में वेश्यावृत्ति या देह धंधा अभी भी अनैतिक देह व्यापार कानून  के तहत आता है. हालांकि देश में समयसमय पर इस बात को ले कर बहसें चलती रही हैं कि क्यों न वेश्यावृत्ति को कानूनन वैध बना दिया जाए यानी यह कानून फुजूल का रहा, यह स्वीकार करने के बाद उस के फुजूल के होने की वजहों को जांचने के बजाय इस पूरे धंधे से दंड व्यवस्था अपनी जिम्मेदारी ही समेट ले? राज्य व्यवस्था औरतों के हिंसक उत्पीड़न, शोषण और खरीदेबेचे जाने की पाशविक परंपरा को अपनी मूक असहाय सहमति दे.

‘भारतीय दंड विधान’ 1860 से ‘वेश्यावृत्ति उन्मूलन विधेयक 1956’ तक सभी कानून सामान्यतया वेश्यालयों के कार्य व्यापार को नियंत्रित रखने तक ही प्रभावी रहे हैं.

इस कानून के अनुसार, वेश्याएं अपने व्यापार का निजी तौर पर यह काम कर सकती हैं, लेकिन कानूनी तौर पर जनता में ग्राहकों की मांग नहीं कर सकती हैं. इस कानून का मकसद भारत में यौन कार्यों की विभिन्न वजहों का रोकना और धीरेधीरे वेश्यावृत्ति को खत्म करना है.

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वेश्यावृत्ति गैरकानूनी है. अगर कोई शख्स किसी सार्वजनिक जगह पर बेहूदा या अश्लील हरकत करते पाया जाता है, तो भी उस के खिलाफ सजा का प्रावधान है.

अनैतिक आवागमन

‘रोकथाम’ अधिनियम

आईटीपीए 1986 वेश्यावृत्ति को रोकने के लिए बनाया गया है. इस कानून के मुताबिक, जो औरत किसी शख्स को जिस्मानी संबंध बनाने के लिए उकसाएगी, उस को दंड दिया जाएगा. इस के अलावा कालगर्ल्स अपने फोन नंबर को सार्वजनिक रूप से पब्लिश नहीं कर सकतीं, ऐसा करने पर उन को  6 महीने के कारावास व जुर्माने का प्रावधान है. किसी सार्वजनिक जगह के पास देह धंधा करने पर  सैक्स वर्कर को 3 महीने की सजा और जुर्माने का प्रावधान है.

ग्राहक के लिए

एक ग्राहक अगर किसी वेश्या के साथ सार्वजनिक जगह के 200 गज के दायरे में संबंध बनाते पाया जाता है या उस पर यौन संबंधों में शामिल होने का आरोप लगता है, तो उसे 3 महीने के कारावास के साथ जुर्माना देना होगा. अगर सैक्स वर्कर 18 साल से कम उम्र की है, तो ग्राहक को 7 से 10 साल की सजा का प्रावधान है.

वेश्यालय चलाने पर

कोई शख्स अगर वेश्यालय चलाता है या किसी से चलवाता है या वेश्यालय चलाने में मदद करता है, तो उसे 3 साल का सश्रम कारावास व 2,000 रुपए का जुर्माना होगा. अगर वही शख्स दोबारा इस अपराध का दोषी पाया गया, तो उस को कम से कम 2 साल व ज्यादा से ज्यादा 5 साल का कठोर कारावास और 2,000 रुपए का जुर्माना देना होगा.

सेहत एक बड़ी समस्या

वेश्याओं की सेहत को ले कर हमेशा से ही बहस होती रही है. भारत में एचआईवी संक्रमण के बढ़ने की वजह इन्हें ही माना जाता है. हालांकि पिछले दशक में एचआईवी संक्रमित वेश्याओं की तादाद में गिरावट आई है.

इस कार्यक्रम के तहत 5,000 वेश्याओं को जागरूक किया गया है.  2 लोगों की टीम यहां की वेश्याओं को उन की बीमारियों के बारे में, कंडोम के इस्तेमाल के सही तरीके और इस के फायदे के बारे में बता रही है.

इस कार्यक्रम को साल 1992 में शुरू किया गया था, तब सिर्फ 27 फीसदी वेश्याएं कंडोम का इस्तेमाल करती थीं, लेकिन साल 2001 तक 86 फीसदी वेश्याएं कंडोम का इस्तेमाल करने लगीं. मुंबई व पुणे सहित देश के बाकी हिस्सों में चल रहे रैडलाइट एरिया में भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं.

भारत में वेश्यावृत्ति को कानूनी मंजूरी नहीं हासिल है, इसलिए इन्हें किसी भी तरह के खास हक भी नहीं दिए गए हैं. वेश्याओं के भी सिर्फ वही हक हैं, जो आम नागरिकों को मिलते हैं.

हालांकि अगर यहां वेश्यावृत्ति को कानूनी मंजूरी दी गई, तो वेश्याएं भी श्रमिक कानून के अंदर आ जाएंगी और उन्हें भी बाकी मजदूरों को मिलने वाले विशेषाधिकार मिल जाएंगे. समयसमय पर यहां वेश्यालयों को कानूनी मंजूरी देने की मांग उठती रहती है.

10 मार्च, 2016 को आल इंडिया नैटवर्क औफ सैक्स वर्कर्स ने एक संगठन बना कर देश के 16 राज्यों में एक कैंपेन चलाया था. इस कैंपेन में

90 सैक्स वर्कर्स शामिल थीं. वह इस बात की ओर सरकार और देश का ध्यान खींचना चाहती थीं कि उन्हें समाज में सिक्योरिटी नहीं मिलती है.

उन का यह भी कहना था कि समाज के बाकी लोग जिस तरह से कोई त्योहार या अवसर में शामिल होते हैं, हमें उस तरह से भी शामिल नहीं किया जाता. वे बाकी दूसरे कामों की ही तरह देह धंधा करती हैं, इसलिए उन्हें भी दूसरे कर्मचारियों की तरह पैंशन मिलनी चाहिए और यौन कार्य को भी सार्वभौमिक पैंशन योजना के तहत लाया जाना चाहिए.

हालांकि इन की किसी भी मांग को अभी तक पूरा नहीं किया गया है.

Crime Story: रान्ग नंबर भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

पहले दोनों के मन में विचार आया कि घर से भाग कर शादी कर लें और सुकून से अपनी जिंदगी गुजारें, मगर मासूम बेटियों की खातिर नीतू कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई. राजू का भी जबलपुर शहर में कामधंधा ठीकठाक चल रहा था. उसे पता था कि नई जगह कामधंधा जमाने में कितनी मुश्किल होती है. वह अपने गांव भी नहीं लौटना चाहता था, क्योंकि उसे पता था घर वाले बालबच्चों वाली विवाहिता नीतू को इतनी आसानी से नहीं अपनाएंगे.

जैसेजैसे रविवार का दिन नजदीक आ रहा था, नीतू और राजू की चिंता बढ़ती जा रही थी. राजू को पता था कि रविवार के पहले यदि इस समस्या का कोई हल नहीं निकला तो सोनू नीतू को ले कर अपने गांव चला जाएगा. अंतत: दोनों ने सोनू को अपने प्यार की राह से दूर करने का निर्णय ले लिया था.

राजू और नीतू ने सोनू को हमेशा के लिए उन की जिंदगी से दूर करने का खौफनाक प्लान तैयार कर लिया. उन्होंने सोच लिया लिया था कि किसी भी तरह सोनू को जान से मार कर सदासदा के लिए एकदूसरे के हो जाएंगे.

घटना के दिन राजू दिन भर घर से बाहर नहीं निकला. वह सोनू की हत्या कर लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाता रहा. नीतू पूरे दिन सब्जी काटने वाले चाकू की धार तेज करने में लगी रही. नीतू ने तेज धार वाले चाकू को अपने तकिए के नीचे छिपा कर रख लिया था .

28 नवंबर, 2020 की रात रोज की तरह सोनू अपने घर आया तो उस ने नीतू से दूसरे दिन बस से अपने गांव वापस लौटने की चर्चा की तो नीतू ने भी हामी भर दी. यह देख कर सोनू खुश हो गया. खाना खाने के कुछ देर बाद वह अपनी बेटियों को दुलारता रहा और फिर टहलने के लिए घर से बाहर आ गया.

साढ़े 10 बजे वापस आ कर वह बिस्तर पर लेटेलेटे नीतू से प्यारभरी बातें करता रहा. अपनी दोनों बेटियों को सुलाने के बाद नीतू भी बिस्तर पर आ कर प्यार का नाटक करने लगी. जब सोनू निढाल हो कर सो गया तो नीतू आगे की योजना बनाने लगी.

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नीतू की आंखों से उस रात नींद कोसों दूर थी. उस ने रात करीब एक बजे राजू को फोन कर के घर बुला लिया. राजू के आते ही योजना के मुताबिक नीतू ने गहरी नींद सो रहे सोनू के दोनों पैर पकड़ लिए और राजू ने उस की छाती पर बैठ कर चाकू से उस का गला रेत दिया और एक हाथ की कलाई भी काट दी.

कुछ देर छटपटाने के बाद सोनू निढाल हो कर एक तरफ लुढ़क गया. अब दोनों सोनू की लाश को ठिकाने लगाने की सोचने लगे. उन्होंने बिस्तर पर गिरे खून के दागधब्बों को पोंछा. फिर लाश एक कंबल में लपेट ली.

इसी बीच नीतू ने घर का दरवाजा खोल कर बाहर का मुआयना किया. मौका देखते ही दोनों लाश को ग्रे आयरन फाउंडी के गेट नंबर 2 के पास बनी नाली में फेंक आए.

लाश को ठिकाने लगाने के बाद दोनों अपनेअपने घर चले गए और कपड़ों पर लगे खून के दाग साफ करते रहे. दूसरे दिन सुबह नीतू ने घर पर रोनापीटना शुरू कर दिया.

चीखपुकार सुन कर मोहल्ले के लोग उस के घर जमा होने लगे तो नीतू ने बताया कि उस के पति रात से घर नहीं लौटे हैं और उन का मोबाइल भी बंद है.

सोनू के गायब होने की बात सुन कर मोहल्ले के लोग उस की खोज में लग गए थे, तभी किसी ने आ कर बताया कि ग्रे आयरन फाउंडी गेट नंबर 2 के पास सोनू की लाश एक कंबल में लिपटी पड़ी है.

मोहल्ले के लोगों के साथ नीतू भी नाले के पास पहुंच गई. सोनू की लाश देख कर चीखचीख कर घडि़याली आंसू बहाने लगी.

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सोनू की लाश मिलने की खबर से नीतू का प्रेमी राजू भी वहां आ गया था. सोनू की मौत को लेकर मोहल्ले के लोग नीतू के प्रेमी राजू पर भी शक कर रहे थे. इसी बीच वहां पर रांझी थाने की पुलिस ने आ कर कुछ ही घंटों में हत्या की गुत्थी सुलझा दी.

रांझी थाना पुलिस ने 24 घंटे में ही सेल्समैन सोनू सिंह हत्याकांड का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा और ट्रेनी आईपीएस अमित कुमार ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर मामले का खुलासा किया. दोनों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, खून से सने कपड़े, मृतक सोनू और आरोपी नीतू के 3 मोबाइल, एटीएम कार्ड आदि जब्त कर लिए गए.

मृतक सोनू के घर वालों के जबलपुर पहुंचने से पहले नीतू हवालात चली गई. उस की दोनों बेटियों तनु और गुड्डी को पड़ोसियों की देखरेख में रखवाया गया. बाद में गांव से उस के परिजनों के आते ही उन के सुपुर्द किया गया.

पति से वेवफाई कर मौजमस्ती की खातिर बनाए गए नाजायज संबंधों की वजह से नीतू ने अपनी जिंदगी के साथ मासूम बेटियों की जिंदगी भी बरबाद कर दी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story: रान्ग नंबर

Sapna Choudhary जल्द ही भोजपुरी फिल्म में निरहुआ के संग आएंगी नजर

बिग बौस फेम और हरयाणवी डांसर सपना चौधरी (Sapna Choudhary) पूरे देश में पौपुलर हैं. उनके ठुमकों पर फैंस झूम जाते हैं.  अब सपना चौधरी भोजपुरी सिनेमा में दस्तक देने वाली हैं.

जी हां, सही सुना आपने. सपना चौधरी जल्द ही भोजपुरी सिनेमा में एक्टिंग करती हुई दिखाई देंगी.  सपना चौधरी इस बार कोई आईटम डांस नम्बर नहीं बल्कि एक फिल्म लेकर आ रही हैं, जिसमें उनके साथ भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार दिनेश लाल यादव यानी निरहुआ (Dinesh Lal Yadav) भी  दिखाई देंगे.

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खबरों के अनुसार इस फिल्म का नाम अभी डिसाइड नहीं हुआ है. सपना चौधरी और दिनेश लाल यादव निरहुआ की यह फिल्म इन्लिक्स इंडिया के बैनर तले बनेगी. बताया जा रहा है कि इस फिल्म का निर्देशन बृजेश मौर्या करेंगे.

हाल ही में हरियाणवी सौन्ग ‘घूंघट की ओट’ पर सपना चौधरी जबरदस्त डांस करते नजर आई थी. इस वीडियो को दर्शकों ने खूब पसंद किया था.

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सपना चौधरी का यह डांस वीडियो को सोनोटेक पंजाबी यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया गया है. सपना चौधरी अपने डांस के लिए पूरे देश में मशहूर है. सपना चौधरी का एक  नये गाने का पोस्टर भी जारी किया गया था. उनके इस गाने के नाम ‘लोरी’ है, जो 20 जनवरी को रिलीज किया गया.

कंगना रनौत ने शेयर की अपनी मां की Photo, लिखा ‘देसी जुगाड़ के जैसा कोई जुगाड़ नहीं है’

बौलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. आए दिन वह अपने लाइफ से जुड़े पलों को अपने फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं. फैंस को भी उनके पोस्ट का बेसब्री से इंतजार रहता है.

हाल ही में एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर अपनी मां की तस्वीर शेयर की हैं. और इस तस्वीर के साथ उन्होंने बहुत ही प्यारा कैप्शन लिखा है.

कंगना रनौत ने अपनी मां की तस्वीर ट्विटर पर शेयर किया है. इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कंगना की मां अंगीठी पर रोटियां सेंकती हुई दिखाई दे रही हैं.

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कंगना ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है कि मैंने मां से बात की, उन्होंने बताया कि रसोईघर में बहुत ठंड है, इसलिए बाहर धूप में अंगीठी पर खाना पका रही हैं.

ये सुनकर मेरी जिज्ञासा बढ़ गई और जब मैंने ये तस्वीर देखी तो खुद को हंसने से रोक नहीं पाई. देसी जुगाड़ के जैसा कोई जुगाड़ नहीं है. इस संसाधनपूर्ण आविष्कार के लिए मुझे मेरी मां पर गर्व है.

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बता दें कि हाल ही में कंगना रनौत ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘धाकड़’ का नया पोस्टर और रिलीज डेट शेयर किया है. फिल्म के प्रोड्यूसर सोहेल मलकाई व दीपक मुकुट हैं और डायरेक्टर रजनीश घई हैं. इस फिल्म में केगना के अलावा अर्जुन रामपाल, दिव्या दत्ता और कई स्टार्स भी नजर आएंगे. ये फिल्म 1 अक्टूबर 2021 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.

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