सौजन्य- सत्यकथा
जिस मां ने बेटे को 9 महीने कोख में पाला, उस के लालनपालन में अपनी नींद चैन की भी परवाह नहीं की, वही कपूत बन गया था. राहुल और उस के परिवार वालों की जानकारी से इस हत्याकांड की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह हृदयविदारक थी.
उत्तराखंड के शहर हल्द्वानी की ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के अंतर्गत एक गांव है करायल जौलासाल. राजेंद्र शाही का परिवारइसी गांव में रहता था. राजेंद्र शाही फौज में थे. फौज में होने के कारण वह साल में एकाध बार ही अपने घर आ पाते थे. राजेंद्र शाही के परिवार में उन की पत्नी हीरा देवी सहित समेत 8 सदस्य थे. 4 बेटियों और 2 बेटों में राहुल उर्फ राजा सब से छोटा था.
राजेंद्र सिंह के फौज में होने के कारण सभी बच्चों का लालनपालन हीरा देवी की देखरेख में ही हुआ था. हीरा देवी के सभी बच्चे समझदार थे. सभी ने मन लगा कर पढ़ाई की, जिस की वजह से सभी कामयाब हो गए थे.
राजेंद्र शाही ने बहुत पहले बच्चों की सहूलियत के हिसाब से गांव के छोर पर काफी बड़ा मकान बनवाया था. उन के पास पैसों की कमी नहीं थी. उसी दौरान उन्होंने अपने घर के सामने एक प्लौट और खरीद लिया था. जिसे उन्होंने अपनी बड़ी बेटी ममता के नाम करा दिया था.
ममता अपनी मां के साथ रहती थी. दूसरे नंबर की बेटी मंजू की शादी हो चुकी थी. तीसरे नंबर पर रवींद्र सिंह था, जो फौज में चला गया था.
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रवींद्र की शादी पिथौरागढ़ की युवती से हुई थी. उस की पत्नी अधिकांशत: पिथौरागढ़ में ही रहती थी. राजेंद्र शाही की चौथे नंबर की बेटी सपना सरकारी टीचर बनकर मनीला में रहने लगी थी. जबकि पांचवें नंबर की बेटी अंजलि भीमताल में टीचर बन गई थी. राहुल इन सब में सब से छोटा था. जो इंटरमीडिएट पास करने के बाद नौकरी की तलाश में लगा था.
इस परिवार में सभी पढ़ेलिखे होने के बावजूद एकदूसरे से तालमेल नहीं बिठा पाते थे. हीरा देवी का शुरू से ही लड़कियों की तरफ झुकाव था. यही कारण था कि उन्होंने जब घर के सामने प्लौट खरीदा था, वह किसी लड़के के नाम न करा कर अपनी सब से बड़ी बेटी ममता के नाम कराया था. वही प्लौट बाद में पारिवारिक विवाद का कारण बना.
हीरा देवी की अन्य बेटियां भी उस प्लौट पर अपना अधिकार जमाना चाहती थीं, जबकि ममता उस पर केवल अपना ही अधिकार मानती थी. इसी विवाद के चलते अब से लगभग 16 साल पहले पतिपत्नी में मनमुटाव हो गया था. मनमुटाव के चलते पतिपत्नी के रिश्तों में ऐसी दरार आई कि राजेंद्र सिंह अपने परिवार से अलग रहने लगे.
सन 1990 में राजेंद्र सिंह फौज से रिटायर हो चुके थे. उन के रिटायरमेंट के वक्त भी पतिपत्नी में पैसों को ले कर तकरार बढ़ी थी. जिस के बाद राजेंद्र सिंह ने पत्नी को घर खर्च देना बंद कर दिया था. इस पर हीरा देवी ने अदालत में पति के खिलाफ भरणपोषण का मुकदमा दायर किया था, जिस के चलते हीरा देवी को पति की तरफ से हर माह 3 हजार रुपए भरणपोषण के रूप में मिलते थे, जिस के सहारे ही हीरा देवी अपने खर्च चलाती थीं.
सन 2005 से राजेंद्र सिंह का अपने घर आनाजाना बंद हो गया था. अपना घर होने के बावजूद राजेंद्र सिंह को किराए के मकान में रहने पर मजबूर होना पड़ा. फौज से रिटायर होने के बाद उन्होंने रामनगर में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. उस वक्त बेटा राहुल भी उन के साथ रहता था. राहुल शुरू से ही गुस्सैल और चिड़चिड़े स्वभाव का था.
राहुल ने इंटरमीडिएट करने के बाद आईटीआई की थी. इस के बावजूद उसे कहीं कोई काम नहीं मिल पाया था. राहुल जब कभी घर जाता तो उस की मां हीरा देवी उसे नौकरी न लगने का ताना मारती थी. जिस से उस की दिमागी हालत और भी खराब होती गई थी.
उस की दिमागी हालत के चलते एक बार राहुल ने खुद को भी चोट पहुंचाने की कोशिश की थी. उस की मां अपनी बेटियों को ज्यादा ही महत्त्व देती थी, जिस के कारण राहुल की मां से नहीं पटती थी. पत्नी की तरफ से राजेंद्र सिंह का मन टूटा तो उन्होंने रामनगर से नौकरी छोड़ गुजरात जा कर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की.
गुजरात में नौकरी करने के दौरान भी राहुल उन्हीं के साथ रहा. बापबेटे के बाहर रहने के बावजूद राजेंद्र शाही की बेटियों में आपस में तकरार बनी रही.
गुजरात में नौकरी करने के दौरान राहुल किसी बीमारी का शिकार हो गया. उस की परेशानी को देखते हुए राजेंद्र शाही उसे ले कर दिल्ली आ गए. उस के बाद राजेंद्र शाही और राहुल दोनों ने दिल्ली में ही सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर ली.
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दिल्ली में नौकरी करने के दौरान उन्होंने राहुल का एम्स में इलाज कराया. उस दौरान राहुल बीचबीच में घर आताजाता था. लेकिन अपने प्रति मां का बदला व्यवहार देख कर वह फिर अपने पिता के पास चला जाता था. उस के अधिकांश दोस्त पढ़ाई करने के बाद नौकरियों में लग गए थे. लेकिन राहुल ही एक ऐसा बचा था, जिसे बाहर दोस्तों के उलाहने सुनने पड़ते थे और घर में मां की सुनती पड़ती थी.
अगले भाग में पढ़ें- राहुल ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुला दिया
सौजन्य- सत्यकथा
20दिसंबर, 2020 को सुबह के 7 बजे का वक्त रहा होगा. ममता सो कर उठी तो सब से पहले उसे अपनी मम्मी की याद आई. क्योंकि ममता हर रात अपनी मां के लिए 5-6 बादाम पानी में भिगो कर रखती थी. जिन्हें सुबह होते ही छील कर मां को खाने के लिए देती थी.
उस ने बादाम छीले और मां हीरा देवी को आवाज लगाई. लेकिन मां ने जब कोई जबाव नहीं दिया तो वह उन के कमरे में गई. उस वक्त उस की मां लिहाफ ओढ़े सोई हुई थी.
मां को सोता देख कर उसे हैरानी हुई कि वह अभी तक सोई हुई हैं. जबकि हर रोज वह सब से पहले उठ जाती थीं.
मम्मी के पास जा कर उस ने उन के मुंह से लिहाफ हटाया तो उन के चेहरे को रक्तरंजित देख ममता के होश उड़ गए.
मां की हालत देख उस की चीख निकल गई. सुबहसुबह ममता के चीखनेचिल्लाने की आवाज सुन कर उस की छोटी बहन अंजलि और भाई रवींद्र भी कमरे में आ गए. कमरे में सोती मां हीरा देवी की किसी ने रात में गरदन काट कर हत्या कर दी थी.
सुबहसुबह हीरा देवी की हत्या की बात सुनते ही वहां कुछ ही देर में काफी लोग इकट्ठा हो गए. हीरा देवी की हत्या किस ने और क्यों की, यह कोई नहीं समझ पा रहा था. उस रात उस घर में 5 सदस्य थे, स्वयं हीरा देवी, उन की 2 बेटियां ममता, अंजलि और बेटे रवींद्र शाही व राहुल. हीरा देवी के पति राजेंद्र सिंह शाही किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे.
हालांकि राजेंद्र शाही का घर अलग था, लेकिन घर के मुख्य दरवाजे पर लोहे का जाल वाला शटर लगा था. जिस के होते बाहर वाले इंसान का घर में घुसना नामुमकिन था. फिर ऐसे में बाहर का व्यक्ति घर में घुस कर हीरा देवी की हत्या कर के कैसे भाग सकता था. यह बात समझ के बाहर थी.
इस घटना की जानकारी हल्द्वानी की टीपी नगर पुलिस चौकी को दी गई. चौकी इंचार्ज ने यह सूचना आला अधिकारियों को दे दी. एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या की जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव, सीओ शांतनु पाराशर, कोतवाल संजय कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे.
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पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए मृतका हीरा देवी के परिवार वालों से विस्तार से जानकारी हासिल की.
पुलिस पूछताछ में ममता शाही ने बताया कि हर रोज की तरह सभी घर वाले खाना खा कर सो गए थे. वह सुबह उठी तो मम्मी को बादाम देने गई. तब उसे पता चला कि किसी ने मम्मी का गला काट कर हत्या कर दी. उन की हत्या किस ने किस समय की, किसी को कुछ नहीं मालूम. उस ने बताया कि मम्मी अलग कमरे में सोती थीं और घर के बाकी सदस्य अलग कमरों में सोते थे.
मृतका के पति राजेंद्र शाही उस रात भोटिया पड़ाव क्षेत्र अंबिका विहार में रहने वाली अपनी चाची के घर गए हुए थे. इस घटना की जानकारी उन को छोटी बेटी अंजलि ने फोन कर के दी. तब राजेंद्र शाही घर लौट आए.
घटना की जांचपड़ताल हेतु फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया था. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांचपड़ताल कर के जरूरी नमूने ले कर पैक कर लिए. इस केस के खुलासे के लिए एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव ने कोतवाल संजय कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित कर दी.
घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने हीरा देवी की लाश पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दी. 20 दिसंबर, 2020 को ही मृतका की बेटी मंजू शाही की तरफ से कोतवाली हल्द्वानी में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया गया.
केस दर्ज होते ही पुलिस टीम ने अपनी काररवाई में फिर से फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. पुलिस ने मृतका के पति राजेंद्र शाही और उन के परिवार वालों से पूछताछ की तो पता चला कि इस परिवार में काफी समय से संपत्ति को ले कर विवाद चल रहा था.
इस मामले में राजेंद्र शाही का सब से छोटा बेटा राहुल उर्फ राजा हमेशा तनाव में रहता था, जिस के कारण आए दिन मांबेटे में किसी न किसी बात को ले कर तकरार होती रहती थी.
इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने राहुल को पूछताछ के लिए अपनी कस्टडी में ले लिया. पुलिस ने राहुल को एकांत में ले जा कर उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मां को क्यों मारेगा क्योंकि मां ही उस का सहारा थी.
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उसी दौरान राहुल की बहन ममता ने पुलिस को बताया कि राहुल रात में कभी भी घर का शटर खोल कर बाहर घूमने लगता था. घटना वाली रात भी उस ने उसे रात के एक बजे घर के बाहर घूमते देखा था. इस बात की जानकारी मिलते ही पुलिस का उस के प्रति शक गहरा गया.
पुलिस ने उस की जांचपड़ताल करते हुए उस के कपड़े देखे. उस ने उस वक्त लोअर के ऊपर पैंट पहन रखी थी. पुलिस ने उस की पैंट उतरवाई तो सारा मामला सामने आ गया. उस की लोअर खून से सनी हुई थी.
पुलिस पूछताछ में वह लोअर पर लगे खून का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. उस के तुरंत बाद उस ने अपनी मां की हत्या की बात कबूल ली.
अगले भाग में पढ़ें- आईटीआई करने के बाद भी राहुल को कोई काम क्यों नहीं मिल पाया था
सौजन्य- सत्यकथा
राहुल की मानसिक हालत और भी खराब हो गई थी. जिस कारण परिवार वालों के प्रति उस का व्यवहार काफी बदल गया था. कभीकभी वह अपने पिता की जिंदगी के बारे में सोचता तो परेशान हो उठता था. उस की नजरों में इस सब का कारण उस की मां हीरा देवी थी, जिस के प्रति उसे नफरत पैदा हो गई थी.
अगस्त, 2020 को दोनों बापबेटे दिल्ली से काम छोड़ कर घर आ गए थे. राजेंद्र शाही किराए के मकान के बजाए अपने ही मकान में रहने लगे थे. दिल्ली से आने के बाद से ही राहुल नौकरी की तलाश में लगा था. लेकिन उस की मां उसे हर वक्त बेरोजगारी का ताना मारती रहती थी. जिस से उस का मानसिक संतुलन और भी खराब हो गया था. ऊपर से पारिवारिक विवाद ने घर की शांति छीन रखी थी.
चारों बहनों में जमीनजायदाद को ले कर मनमुटाव होता रहता था. उस वक्त तक राहुल का बड़ा भाई रवींद्र भी मानसिक परेशानी होने के कारण नौकरी छोड़ कर घर आ गया था.
घर के विवाद को देख कर रवींद्र सिंह ने सभी को समझाने की कोशिश की,लेकिन घर में उस की एक न चली. रवींद्र की पत्नी पहले से ही पिथौरागढ़ में रहती थी. जबकि रवींद्र सिंह परिवार के साथ ही रहता था. एक घर में रहते हुए भी परिवार में अलगअलग खाना बनता था. कुल मिला कर राजेंद्र शाही के पास जमीनजायदाद सब कुछ होने के बावजूद परिवार में खुशियां बिलकुल नही थीं.
20 दिसंबर, 2020 को राहुल कुछ ज्यादा ही परेशान था. थोड़ी देर पहले ही वह शहर से आया था. तभी उस की मां ने फिर से वही ताना मारा, ‘‘आ गया आवारागर्दी कर के, तू नौकरी करेगा भी क्यों? तुझे तो मुफ्त की रोटी खाने की आदत पड़ गई है.’’
हीरा देवी न जाने क्याक्या बड़बड़ाए जा रही थी. इस के बावजूद राहुल चुपचाप घर के अंदर चला गया. उस ने कपड़े चेंज किए, फिर मोबाइल खोल कर उसी में लग गया. लेकिन दिमाग में मां के कहे शब्द बारबार गूंज रहे थे.
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शाम तक उस का दिमाग यूं ही घूमता रहा. शाम को पता चला कि उस के पिता आज कहीं गए हुए हैं. वह रात में नहीं आएंगे. राहुल अपने पिता के कमरे में सोता था. उस रात उस ने खाना खाया और फिर अपने ही कमरे में कैद हो गया. रात के 10 बजे ममता ने अपनी मां और भाई रवींद्र को खाना खिलाया और मां हीरा देवी को दवा देने के बाद कमरे में सुला दिया. हीरा देवी बीमार चल रही थी. फिर ममता भी अपने कमरे में जा कर सो गई. लेकिन उस रात राहुल अपनी मां के शब्दों से इतना आहत था कि उसे चाह कर भी नींद नहीं आ रही थी.
तभी उस के दिमाग में तरहतरह की शैतानी खुराफातें पैदा होने लगीं. उस के मन में बैठा शैतान जागा तो उस ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुलाने की योजना बना डाली. वह देर रात उठा, फिर अपनी मां के कमरे में जा कर देखा. वह गहरी नींद में सोई पड़ी थीं.
घर के अन्य सदस्य भी अपनेअपने कमरों में सोए हुए थे. अपने कमरे से निकल कर राहुल सीधा किचन में गया. उस ने वहां से चाकू उठाया और उसे हाथ में थामे मां के कमरे की ओर बढ़ गया. हीरा देवी हर रात दवा खा कर सोती थी. उन पर दवाओं का नशा हावी रहता था.
मां को गहरी नींद में सोते देख राहुल शैतान बन गया. उस ने एक हाथ से अपनी मां का मुंह बंद किया और फिर दूसरे हाथ में थामे चाकू से मां के गले पर एक जोरदार वार कर डाला. इस से पहले कि हीरा देवी कुछ समझ पाती, चाकू के एक ही वार से उन के प्राणपखेरू उड़ गए.
मां को मौत की नींद सुलाने के बाद राहुल ने अपनी खून में सनी शर्ट चेंज कर ली. लेकिन खून सने लोअर के ऊपर उस ने पैंट पहन ली थी. उस के बाद उस ने बाहर के शटर का लगा ताला खोला, फिर वह निडर बेखौफ बाहर घूमता रहा.
उसी दौरान बाहर उस की आहट सुन कर ममता की आंखें खुलीं तो उस ने उसे बाहर घूमते हुए देखा. लेकिन वह उस की आदत को पहले से ही जानती थी. जिस के कारण उस ने उसे नहीं टोका.
इस केस के खुलते ही पुलिस ने मौके का मुआयना कर हत्या में प्रयुक्त चाकू, कमरे से राहुल के खून से सने कपड़े तथा वारदात के बाद खून से सने हाथ धोने में प्रयुक्त साबुन भी बरामद कर लिया था. पुलिस ने राहुल को अपनी ही मां की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
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जमीनजायदाद के मोह ने एक हंसतेखेलते परिवार को बिखरने पर मजबूर कर दिया था, जिस की परिणति परिवार के सभी लोग रिश्तेनातों को दरकिनार कर कोर्टकचहरी के चक्कर लगा रहे थे.
वहीं घर की अशांति और बेरोजगारी से परेशान राहुल के दिल में परिवार वालों के प्रति इतनी नफरत पैदा हो गई थी कि उस ने अपनी मां को मौत की नींद सुला दिया. हत्या भी ऐसी अकल्पनीय जिसे सुन कर रोंगटे खड़े हो जाएं.
रेटिंग: ढाई स्टार
निर्माताः ‘‘आनंदी इंटरप्राइजेज ‘‘,‘‘जंपिंग टोमेटो मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड ‘‘और ‘‘7 कलर्स सिने विजन ‘’
निर्देशकः अमोल अरविंद भावे
कलाकार: प्रेम बोरहडे, मनीषा भोर, अमोल
पंसारे, विनिता संचेती, सिद्धेश्वर सिद्धेश व अन्य.
अवधिःएक घंटा 43 मिनट
प्रेम, मासूमियत, अज्ञानता, विश्वास, भाग्य और अंधविश्वास के साथ ग्रामण समाज का वास्तविक चित्रण करने वाली मराठी भाषा की फिल्म‘पीटर’ फिल्मकार अमोल अरविंद भावे लेकर आए हैं,जो कि 22 जनवरी को सिनेमाघरों में प्रदर्षित हुई है.इस फिल्म में धर्म और साधु-संतों पर भी कटाक्ष के साथ इस बात का भी चित्रण है कि जब आस्था,अंधश्रृद्धा में परिवर्तिर्त हो जाती है,तो उसके किस तरह के दुष्परिणाम होते हैं.
कहानीः
फिल्म ‘पिटर‘ 10 वर्षीय बालक धन्या (प्रेम बोरहाडे) और बकरी के बच्चे की बीच की दोस्ती को बयां करने के साथ दिल को छू लेने वाली कहानी है. एक दिन धन्या के दादाजी, धन्या के चाचा को एक संत के पास ले जाते हैं. क्योंकि धन्या के चाचा की शादी के 5 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी कोई संतान नहीं है. संत कहते हैं कि उन्हें भगवान सोनोबा को बकरे की बलि देनी पड़ेगी.फिर बकरे के मांस से बनी दावत पूरे गांव को दी जानी चाहिए.अब धन्या के पिता सोपन व चाचा दोनों बकरे की तलाश शुरू कर देते हैं.
मगर गांव में फेस्टिवल के चलते बकरे खत्म हो गई है. आसपास के 4 गांव में तलाश करने के बाद उन्हें एक घर के सामने बकरी का एक बच्चा मिलता है, जिसकी मां सांप के काटने के कारण मर चुकी है. बकरी के बच्चे को भगवान सोनोबा को बलि नहीं दी जा सकती. ऐसे में निर्णय लिया जाता है कि बकरी के बच्चे को घर ले जाकर पांच छह माह तक पाल पोस कर बड़ा करेंगे,उसके बाद उसे सोनोबा भगवान को समर्पित कर देंगे. लेकिन घर आने के बाद धन्या, बकरी के बच्चे यानी कि बकरे के साथ खेलना शुरू कर देता है.

धन्या को उसके दोस्त स्पाइडर मैन बुलाते हैं और स्कूल के दोस्त उस बाल बकरे को ‘पीटर‘बुलाने लगते हैं. क्योंकि धन्या, बकरे को अपना भाई मानता है. धीरे-धीरे धन्या और पीटर के बीच संबंध प्रगाढ़ होते जाते हैं . यह देख कर धन्या की मां को चिंता सताने लगती है कि जब पीटर की बलि देने का दिन आएगा,तो क्याहोगा?
धन्या की मां पारु की इच्छा के विपरीत एक दिन धन्या की आंखो केसामने ही भगवान सोनोबा को पीटर की बलि दे दी जाती हैं.इस घटना से धन्या को सदमा लगता है और वह एकदम गुमसुम रहने लगता है. फिर धन्या के पूरे परिवार को पता चलता है कि धन्या की चाची गर्भनिरोधक गोली का सेवन करती हैं, इसी कारण बच्चा नहीं हो रहा है. क्योंकि धन्या की चाची लीला खुद भी मां नहीं बनना चाहती.

तब पूरे परिवार को एहसास होता है संत ने भी मूर्ख बनाया.अब धान्या की मां उसे स्वस्थ करने के लिए प्रयासरत है.
लेखन व निर्देशनः
फिल्मकार अमोल अरविंद भावे की मराठी भाषा की फिल्म‘‘पिटर’’बाल मन को पढ़ने के साथ ही समाज का एक कच्चा और वास्तविक दर्पण है,जिसमें धर्म के नाम पर प्रचलित प्रथाओं व अंधविष्वास पर कठोर प्रहार किया गया है.इसमें फिल्मकार ने इस बात का सटीक चित्रण किया है कि किस तरह ढोंगी साधु व संत निजी स्वार्थ पशुओं की बलि चढ़वाकर हकीकत में मानवता का बलिदान करते हैं.इस यथार्थपरक फिल्म से वह समाज के हर तबके को यह संदेश भेजने में सफल रहे हैं कि ‘ईश्वर पर विश्वास होना चाहिए,मगर अंध श्रृद्धा नही.इसके साथ ही मनोरंजक तरीके से एक बच्चे के माध्यम से फिल्मसर्जक ने इस बात का सफल आव्हान किया है कि बकरे की बलि प्रथा बंद की जानी चाहिए.मगर फिल्म कीगति काफी धीमी है.इसे एडीटिंग टेबल पर कसे जाने की जरुरत थी.फिल्म में ग्रामीण परिवेश का चित्रण काफी सटीक है.
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अभिनयः
जहां तक अभिनय का सवाल है तो बाल कलाकार प्रेम बोरहाडे ने कमाल का अभिनय किया है.अन्य कलाकार भी अपने अपने किरदार में ठीक जमे हैं.
टीवी का सबसे विवादित शो बिग बौस 14 (Bigg Boss 14) में फैंस को एंटरटेनमेंट का जबरदस्त तडका मिल रहा है. इस शो से इन दिनों फैंस का खूब एंटरटेनमेंट हो रहा है. बिग बौस 14 का लेटेस्ट एपिसोड काफी एंटरटेनिंग रहा है. तो आइए जानते हैं शो के लेटेस्ट एपिसोड के बारे में.
शो में दिखाया गया कि कंटेस्टेंट को मिला नया लाकडाउन टास्क रद्द हो चुका है और ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि टास्क के रद्द होने के कारण कंटेस्टेंट के बीच जमकर हंगामा होने वाला है.
शो के लेटेस्ट एपिसोड में टास्क रद्द होने के कारण कंटेस्टेंट ने आपस में खूब लड़ाई किया है. और इस लड़ाई के बाद अभिनव शुक्ला (Abhinav Shukla) और रुबीना दिलाइक (Rubina Dilaik) के बीच तीखी बहस हुई.
दरइसल लाकडाउन टास्क के लड़ाई के दौरान अली गोनी (Aly Goni) और अभिनव शुक्ला के बीच जमकर लड़ाई हुई. इसी बात को लेकर अभिनव, रुबीना से बहस करते हुए नजर आ रहे थे कि वह अली गोनी के साथ दोस्ती क्यों निभा रही हैं.
So called sasta logical person Abhinav is bashing #RubinaDilaik for being friendly with Aly..Though I hate Aly but Abhinav himself was so spineless that he used to stick to dustbin who degraded Rubina a lot.
Hypocrite Abhinav#BB14 #BiggBoss14— Krishna Prakash (@KMystry64) January 21, 2021
दरअसल अभिनव शुक्ला (Abhinav Shukla) ने कहा, अली गोनी ने टास्क में उनके साथ बदतमीजी की थी, इसलिए रुबीना को उनसे दूर ही रहना चाहिए. अभिनव की बातों को सुनकर रुबीना दिलाइक (Rubina Dilaik) हैरान हो गईं.फिर उन्होंने अभिनव को समझाया.
I Agree With #RubinaDilaik in Kitchen Area Talks!! Abhinav Is Dumb n Jealous Soul! If Rubina doing fun with everyone he has Prob. But when he doing same thing with Jasmin then sb OK OK! Lol Hypocrisy at Peak!! #BB14 #BiggBoss14
— Itz S Thingz (@KartikFever) January 21, 2021
तो इधर सोशल मीडिया पर फैंस ने अभिनव शुक्ला को जमकर लताड़ा है. यूजर्स का कहना है कि रुबीना दिलाइक और जैस्मिन भसीन की लड़ाई के बाद भी अभिनव हमेशा जैस्मिन से बातें करते रहते थे, तब उनका लाजिक कहां था.
छोटे पर्दे का चर्चित शो ‘निमकी मुखिया’ फेम एक्ट्रेस ‘भूमिका गुरुंग’ इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में छाई हुई हैं. दरअसल भूमिका गुरुंग का अपने ब्वायफ्रेंड अमित सिंह गोसाई से ब्रेकअप हो चुका है.
हाल ही में एक्ट्रेस ने अपने रिलेशनशिप को लेकर मीडिया से बातचीत की हैं. उन्होंने अपने रिश्ते और डिप्रेशन के बारे में बताया है.
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रिपोर्ट्स के अनुसार भूमिका गुरुंग ने अपने रिलेशनशिप को लेकर कहा, मैंने इस रिश्ते को बहुत संभालने की कोशिश की, लेकिन एक टाइम ऐसा आया कि मुझे समझ आ गई कि आप किसी को अपने साथ रहने या फिर सही से बर्ताव करने के लिए उस पर दबाव नहीं बना सकते. लेकिन इस सच को भी एक्सेप्ट करना बहुत मुश्किल है कि उस शख्स के बिना आपकी जिंदगी अच्छी रहेगी.
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बताया जा रहा है कि भूमिका गुरुंग ने आगे कहा लोगों को लगता था कि मैं खुश थी लेकिन मुझे पता था कि मेरे रिलेशनशिप में कुछ भी परमानेंट नहीं था. मेरा यह सात साल का रिश्ता कड़वाहट के साथ खत्म हो गया. मैं डिप्रेशन में चली गई थी.
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खबरों के अनुसार एक्ट्रेस ने कहा, मैं हर दिन अपने रिलेशनशिप को लेकर खबरें देखती थी. किसी दिन ये खबर आती थी कि मेरी उसके साथ शादी करवा दी गई तो दूसरे दिन ब्रेकअप भी करवा दिया जाता था. भूमिका गुरुंग ने ये भी कहा है, मैं रिलेशनशिप में थी, पर खुश नहीं थी. लेकिन अब मैं बहुत खुश हूं.
छत्तीसगढ़ के जिला पेंड्रा मरवाही में हिमाचल से जड़ी बूटी लाकर बेचने का माया जाल रचना एक शख्स को औलाद पैदा हो जाने का भ्रम रचा कर अस्सी हजार रुपए ठग लिए.
दूसरा घटनाक्रम-
संतान सुख का भ्रामक मायाजालसंतान सुख की चाहत में लोग किस तरह अंधविश्वास के फेर में झाड़-फूंक और नकली दवाइयों के चक्कर में पड़ कर लूट जाते हैं उसकी एक बानगी यहां प्रस्तुत है-
संतान सुख और गहराता “अंधविश्वास”.
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अक्सर समाचार माध्यमों और मीडिया में एक खबर होती है कि फलां व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी. सात जन्मों का भारतीय दर्शन, जो यह बताता है कि पति पत्नी का संबंध एक जन्म का नहीं बल्कि सात जन्मों का होता है और इस फिलासफी पर भारतीय समाज गर्व करता है. ऐसे में यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो जाता है कि कोई पति अपनी अर्धांगिनी की हत्या क्यों कर देता है?
आज इस आलेख में हम इस महत्वपूर्ण मसले पर प्रकाश डालने का प्रयास कर रहे हैं.और बताने का यह प्रयास भी. यह जनवरी 2021 में पति पत्नी के संबंधों में आई खटास और परिणाम स्वरूप हत्या जैसी सच्ची घटनाओं पर आधारित है .
पहली घटना-
छत्तीसगढ़ के जिला कोरबा के थाना बालकों में एक पति ने अपनी पत्नी को इसलिए मार दिया क्योंकि उसे उसके अवैध संबंधों की जानकारी हो गई.
दूसरी घटना –
छत्तीसगढ़ जिला रायगढ़ के थाना तमनार में एक शख्स ने अपनी पत्नी को आशा होते विवाद के कारण परेशान होकर मार डाला.
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तीसरी घटना –
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर थाना अंतर्गत एक शख्स ने अपनी पत्नी को सिर्फ इसलिए मार डाला क्योंकि उसे समय पर भोजन नहीं देती थी.
अक्सर समाचार पत्रों में पुलिस के माध्यम से यह समाचार सुर्खियों में रहता है कि पति ने पत्नी की हत्या कर दी और पुलिस ने विवेचना के पश्चात पति को जेल भेज दिया. इस संपूर्ण घटनाक्रम के पीछे के सच को अक्सर उजागर नहीं किया जाता अथवा पाठक वर्ग सरसरी निगाह से उसे देखते हुए आगे निकल जाता है.
इस आलेख में ऐसी ही घटनाओं को बयां करते हुए हम यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि ऐसी घटनाओं पर कैसे अंकुश लगाया जा सकता है.
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य जिला रायगढ़ के तमनार के इंदिरानगर में एक वृद्ध ने अपनी पत्नी की टांगी मारकर हत्या कर दी. आरोपी घर में ताला बंद कर अपनी बेटी के पास पहुंचा और पत्नी की हत्या करने की बात कही. इसके बाद से आरोपी फरार है.तमनार पुलिस मामला दर्ज कर आरोपी को तलाशने में लगी हुई है. पुलिस ने हमारे संवाददाता को बताया छोटेलाल सहिस अपनी पत्नी सुकांति सहिस के साथ इंदिरा नगर में रहता था. दोनों के बीच विवाद हुआ.विवाद इतना बढ़ा कि आरोपी ने टांगी से पत्नी की हत्या कर दी. हत्या के बाद आरोपी घर बंद कर अपनी बेटी के घर गया. यहां पर उसने अपनी पत्नी को मारने की बात कही और निकल गया. सूचना पर मृतका के दामाद और बेटा घर पहुंचे. महिला आंगन में लहूलुहान होकर पड़ी हुई थी. पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस ने मौके पर आकर शव का पंचनामा किया और हत्या आरोपी पति को तलाश कर रही है.
नए साल से हो गयी दुखद शुरुआत
छत्तीसगढ़ में नव वर्ष 2021 की शुरुआत एक ऐसी घटना से मानो शुरू हुई.जिला राजनांदगांव के उपनगर डोंगरगढ़ के समीपस्थ ग्राम रूदगांव में एक महिला की हत्या के मामले में अंततः पति ही अपनी पत्नी का हत्यारा निकला . लम्बे समय तक हंसी-खुशी पारिवारिक जीवन बिताने के बाद ऐसी क्या बात हो गई कि पति को अपनी पत्नी की हत्या करने जैसी गंभीर घटना को अंजाम देना पड़ा?
इसका कारण पुलिस व ग्राम वासियों के लिए एक अनसुलझी पहली बन गई . पुलिस की गिरफ्त में आया पति हत्या का का कोई कारण नहीं बता रहा था.
उल्लेखनीय है कि विगत एक जनवरी को नववर्ष की भोर के साथ ही मितानिन प्रशिक्षक का कार्य करने वाली कोमिन देवांगन (48 वर्ष) की हत्या की खबर ग्राम रूदगांव सहित आसपास सनसनी के रूप में फैल गई . प्रारंभिक पूछताछ में ही शक की सुई महिला के साथ रहने वाले पति की तरफ ही घूम रही थी.वैसे इस मामले में इस बात की पुष्टि हो गई थी कि पति ने ही अपनी पत्नी की हत्या की है. वहीं डाग स्क्वाड की मदद से भी पुलिस ने पति को हिरासत में लेकर पूछताछ प्रारंभ की. परन्तु सबसे बड़ा सवाल भी अनसुलझा रह गया कि इतने लम्बे समय तक हंसी खुशी पारिवारिक जीवन बिताने के बाद पति पत्नी के बीच ऐसी क्या परिस्थितियां बनी कि पति ने क्रोधित होकर पत्नी को मौत के घाट उतार दिया. पुलिस ने बताया कि आरोपित पति हत्या के पीछे के कारण के संबंध में कुछ नहीं बता रहा था. दरअसल, यह तथ्य अंततः सामने आ गया कथित हत्या इसलिए हुई क्योंकि पति को पत्नी पर शक था कि उसके अन्यत्र अवैध संबंध हैं.
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पत्नी को मारा और कर ली आत्महत्या
छत्तीसगढ़ के जिला बलरामपुर के एक लौज में युवक ने पहले गला दबाकर अपनी पत्नी की हत्या कर दी और फिर खुद भी फांसी लगा जान दे दी. पुलिस ने हमारे संवाददाता को बताया कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने स्थित एक लॉज में महिला का शव मिला, दूसरी तरफ युवक बाथरूम में फंदे से लटका मिला. दोनों की उम्र कर 28 साल है. यहां महत्वपूर्ण तथ्य है कि आखिर क्यों
घर जाने के बजाय लॉज में रुके थे पति-पत्नी…. और क्यों ऐसा गंभीर कदम उठाया गया.
पुलिस ने बताया कि बलरामपुर के कंचन नगर निवासी विद्युत विश्वास और अपनी पत्नी रिक्ता मिस्त्री के साथ रायपुर गया था. लौटने के बाद दोनों घर जाने के बजाय एसएस लॉज में रुक गए थे. इसके बाद दोनों के शव लॉज के कमरे में मिले. इसके बाद पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. ऐसी ही जाने कितनी ही घटना है आए दिन घटित होती हैं और इनका गंभीर विवेचन नहीं हो पाता कि आखिर घटनाक्रम के पीछे का सच क्या है ताकि समाज में इसका हल निकाला जा सके. सामाजिक कार्यकर्ता और संगीत के द्वारा मनोविज्ञान के अध्ययेता घनश्याम तिवारी के अनुसार सबसे अहम सवाल होता है पति पत्नी के बीच एक दूसरे पर विश्वास जब यह विश्वास की मीनार दरकने लगती है तब हत्या जैसी घटना घटित होती है.
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के अधिवक्ता डॉ उत्पल अग्रवाल के मुताबिक न्यायालय में जाने कितने केस हत्या के आते हैं जिनमें बहुतेरे पति द्वारा पत्नी की हत्या के ही होते हैं मैंने यह समझा है कि इसका महत्वपूर्ण कारण अवैध संबंध अथवा शक की सुई ही होता है.
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सामाजिक कार्यकर्ता रमाकांत श्रीवास के मुताबिक अगर पति पत्नी दोनों समझदारी सूझ बूझ से काम लें और अपनी अपनी जिम्मेदारी और दायित्व को समझें तो कभी भी हत्या जैसा घटनाक्रम घटित नहीं होगा.
पिछले तकरीबन एक साल से कोरोना के चलते पूरी दुनिया में ‘पौजिटिव’ शब्द इतना खौफनाक बना हुआ है कि अब दिल को खुश करने वाली खबरें न के बराबर ही सुनाई देती हैं. हां, ‘नैगेटिव’ शब्द सुन कर जरूर उम्मीद के कान खड़े हो जाते हैं. पर नया साल बदला तो कुछ ऐसा नया हुआ जिस ने कम से कम भारत को तो गजब का जोश दिला दिया. यह ‘पौजिटिव’ खबर खेल जगत से आई थी और यह खेल था क्रिकेट.
19 जनवरी, 2021 को जैसे ही भारत ने मेजबान आस्ट्रेलिया को गाबा के मैदान पर 3 विकेट से हरा कर 4 टैस्ट मैच की सीरीज 2-1 से अपने नाम की, वैसे ही क्रिकेट प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई. पर क्यों? ऐसा नहीं है कि भारत ने पहले किसी दूसरी टीम को उसी के देश में नहीं हराया है, पर अब जो गजब तमाशा हुआ है, उसे काफी समय तक याद रखा जाएगा.
याद कीजिए इस सीरीज का पहला एडिलेड टैस्ट मैच. भारतीय टीम अपनी दूसरी पारी में टैस्ट इतिहास में अपने सब से कम स्कोर 36 पर आउट हो गई थी और भारत के पक्ष में जा सकने वाला यह मैच हार गई थी. कप्तान विराट कोहली बहुत ज्यादा निराश थे और इस बात से चिंतित थे कि उन के ‘पैटरनिटी लीव’ पर जाने के बाद टीम का क्या हश्र होगा.
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कोढ़ पर खाज यह थी कि भारतीय टीम में खिलाड़ियों की चोट एक बड़ी समस्या बन रही थी. घायल मोहम्मद शमी पूरी सीरीज से बाहर हो गए थे. साथ ही यह सवाल भी मुंह बाए खड़ा था कि टीम की कमान कौन संभालेगा? पहले मैच में जीत का स्वाद चखने के बाद तो वैसे भी मेजबान आस्ट्रेलियाई टीम के खून मुंह लग चुका था.
इधर जब अजिंक्य रहाणे कप्तान बने और अगले 3 मैच में भारतीय टीम की क्या गत हो सकती है, इस बात का अंदेशा होते ही लगा कि अब तो किसी तरह इज्जत बचा कर घर वापसी की जाए. पर समस्या इस से भी बड़ी थी और वह यह कि टीम के 5 खिलाड़ियों शुभमन गिल, मोहम्मद सिराज, नवदीप सैनी, वाशिंगटन सुंदर और टी. नटराजन ने इस से पहले टैस्ट मैच नहीं खेला था. शार्दुल ठाकुर के पास भी नाम का ही अनुभव था.
ऊपर से आस्ट्रेलिया में मैच हो और नस्लीय टिप्पणी न की जाए… ऐसा भला कभी हुआ है. मतलब सीन पूरा फिल्मी था, एकदम ‘लगान’ टाइप कि बेटा, ओखली में सिर दे चुके हो, अब तो बेहिसाब मूसल पड़ेंगे.
बहरहाल, छेद हुए जहाज के कप्तान बने अजिंक्य रहाणे ने मेलबर्न के दूसरे टैस्ट मैच में सब्र से काम लिया और एक शानदार सैंचुरी लगा कर भारतीय टीम को पहली पारी में बढ़त दिलाई. उन्होंने 112 रन बनाए थे.
बाकी का काम गेंदबाजों ने किया. जसप्रीत बुमराह, आर. अश्विन और मोहम्मद सिराज की सधी गेंदबाजी से भारतीय टीम ने न केवल उस मैच पर कब्जा जमाया, बल्कि सीरीज को 1-1 की बराबरी पर ला दिया. इस मैच में जसप्रीत बुमराह ने 6 विकेट, आर. अश्विन और मोहम्मद सिराज ने 5-5 विकेट लिए थे. भारत ने यह मैच 8 विकेट से अपने नाम किया था.
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इस जीत से भारतीय टीम को नया जोश मिला, पर पहले मोहम्मद शमी और फिर उमेश यादव के चोट के चलते टीम से बाहर होने के बाद सिडनी में खेले जा रहे तीसरे मैच में भारतीय टीम को अनुभवी तेज गेंदबाज की कमी खलती नजर आई. अब जसप्रीत बुमराह के साथ 2 नए गेंदबाज मैदान पर थे. अपना दूसरा मैच खेल रहे मोहम्मद सिराज और डैब्यू कर रहे नवदीप सैनी.
7 जनवरी से शुरू हुए इस मैच में मोहम्मद सिराज और नवदीप सैनी ने नपीतुली गेंदबाजी की. इस मैच में मोहम्मद सिराज ने 2 और नवदीप सैनी ने 4 विकेट लीं. इस के अलावा बल्लेबाज शुभमन गिल ने टैस्ट कैरियर की पहली फिफ्टी जड़ी.
लेकिन आस्ट्रेलिया ने जब अपनी दूसरी पारी में 6 विकेट पर 312 रन बना कर भारत को जीतने के लिए 407 रन का टारगेट दिया तो लगा कि अब यह मैच भारत के हाथ से फिसल गया है. मैच के आखिरी दिन भारतीय टीम को 300 से ज्यादा रन बनाने थे और उस् के 2 विकेट गिर चुके थे. अब तो मैच ड्रा हो जाए, यही गनीमत थी, पर ऋषभ पंत ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 97 रन बनाए, पर अफसोस अपनी सैंचुरी से महज 3 रन पहले ही वे आउट हो गए.
अब आस्ट्रेलिया को भारत के 5 विकेट लेने थे और कई ओवरों का मैच अभी बाकी था. भारत के लिए नैगेटिव खबर यह थी कि बल्लेबाज हनुमा विहारी रन लेते समय मांसपेशी खिंचने से पूरी तरह फिट नहीं थे, पर उन्होंने हार नहीं मानी और आर. अश्विन के साथ अपनी जिंदगी की एक यादगार साझेदारी निभाई, जिस में रन बनाने से ज्यादा अहम था विकेट पर खड़े रहना.
हनुमा विहारी ने तकरीबन 4 घंटे तक बल्लेबाजी की. उन्होंने 161 गेंद खेलीं और नाबाद 23 रन बनाए. इसी तरह आर. अश्विन ने 128 गेंद खेल कर नाबाद 39 बनाए और यह मैच ड्रा करा दिया.
अब इस सीरीज का आखिरी मैच ब्रिस्बेन के उस गाबा मैदान पर खेला जाना था, जहां पर आस्ट्रेलियाई टीम पिछले 32 साल से कोई टैस्ट मैच नहीं हारी थी. इतना ही नहीं, कोई भी एशियाई टीम यहां कभी टैस्ट मैच नहीं जीती थी.
हालांकि भारतीय टीम का जोश बढ़ चुका था, पर खुद पर हुई नस्लीय टिप्पणियों से जूझते हुए टीम के खिलाड़ियों पर एक गाज और गिरनी बाकी थी, जब गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और आर. अश्विन भी चोट की वजह से मैच से बाहर हो गए. मतलब इस ऐतिहासिक मैच में टीम की गेंदबाजी का सारा बोझ शार्दुल ठाकुर, नवदीप सैनी, वाशिंगटन सुंदर, टी. नटराजन और मोहम्मद सिराज के नएनवेले कंधों पर था.
शार्दुल ठाकुर और मोहम्मद सिराज ने निराश नहीं किया. शार्दुल ठाकुर ने इस मैच में 7 विकेट लिए, वहीं मोहम्मद सिराज ने दूसरी अहम पारी में 5 आस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को आउट कर मैदान से बाहर का रास्ता दिखाया.
आस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 369 और दूसरी पारी में 294 रन बनाए. भारत ने पहली पारी में 336 रन बनाए थे, लिहाजा दूसरी पारी में यह मैच जीतने के लिए उसे 328 बनाने थे. वैसे, पहली पारी में भारत की ओर से शार्दुल ठाकुर ने 67 और वाशिंगटन सुंदर ने 62 अहम रन बटोरे थे.
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भारतीय टीम की दूसरी पारी में शुभमन गिल ने 91 और ऋषभ पंत ने नाबाद 89 रन बनाए और इस शानदार जीत को आसान बनाया. इस के अलावा चोटिल पर निडर चेतेश्वर पुजारा ने 211 गेंद पर 56 रन बनाए, जो अस्ट्रेलियाई टीम का मनोबल तोड़ने में बहुत काम आए. वे आस्ट्रेलिया के सामने उस ‘दीवार’ की तरह अड़े रहे, जैसे कभी राहुल द्रविड़ डटा करते थे.
यह जीत सिर्फ खेल में मिली कोई आम जीत नहीं है, बल्कि लोगों को सीख भी देती है. महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के शब्दों में समझें तो, “हम सभी भारतीयों और दुनिया के लोगों को याद रखना होगा कि जिंदगी में आप जब कभी भी 36 या इस से कम स्कोर करते हैं, तो इस से दुनिया खत्म नहीं हो जाती है.”
सचिन तेंदुलकर की इस बात में बहुत दम है. जिस तरह से भारतीय युवा टैस्ट टीम ने कद्दावर आस्ट्रेलिया को उसी के घर में हार का स्वाद चखाया है, उस से यह बात सच साबित होती है कि सामने वाले को कभी कमतर नहीं आंकना चाहिए, भले ही मैदान खेल का हो या फिर दुनिया का.
वेलडन भारतीय क्रिकेट टीम!