जब पढ़ाई के लिए लड़कियां मां-बाप को छोड़ें!

आंध्र प्रदेश के एक गांव आदिविकोट्टूरू में लोगों ने खेत में एक लावारिस लाश को देखा. पता चला कि वह कोई भिखारी था. चूंकि हर जगह कोरोना का डर फैला हुआ है, लिहाजा लोग उस भिखारी की लाश के पास जाने से हिचक रहे थे.

ऐसे में श्रीकाकुलम जिले के कासीबुग्गा में तैनात महिला सबइंस्पैक्टर के. श्रीषा ने उस लाश को कंधा दिया और 2 किलोमीटर तक पैदल ले जाने के बाद उस का अंतिम संस्कार कराया.

इस से पहले 26 जनवरी को भारत की पहली महिला फाइटर पायलट भावना कांत वायु सेना की झांकी के साथ परेड में नजर आई थीं, जबकि फ्लाइट लैफ्टिनैंट स्वाति फ्लाईपास्ट में शामिल हुई थीं.

देशभर में न जाने कितनी लड़कियां अपनेअपने फील्ड में नाम कमा रही हैं. इस में उन की वह पढ़ाई काम आती है, जो उन में गजब का जोश भर देती है. पर एक कड़वा सच यह भी है कि आज भी बहुत से मां-बाप अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए उस लिहाज से आजादी नहीं देते हैं, जितनी बेटों को दी जाती है.

2017 का राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी चिंता जाहिर करता है कि 15-18 आयु वर्ग में तकरीबन 39.4 फीसदी किशोरियां किसी भी शैक्षणिक संस्थान में नहीं जा रही हैं. इस की सबसे बड़ी सामाजिक बाधा यह है कि गांव हों या शहर, आज भी लड़कियों को बोझ समझा जाता है, जिनकी पढ़ाई पर क्यों खर्च किया जाए?

इसके अलावा जब कोई लड़की पढ़ने की जिद ठान लेती है तो समाज के तानों से उसे भेदा जाता है. तभी तो बहुत से मां-बाप अपनी लड़कियों को 10वीं या 12वीं तक की पढ़ाई कराते हैं और उसके बाद शादी करा देते हैं.

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बहुत कम ऐसी लड़कियां होती हैं जो ऐसी तमाम बाधाएं पार कर के अपने मां-बाप को छोड़ कर पढ़ाई के लिए घर से बाहर निकलती हैं. अगर वह लड़की एकलौती है तो घर पर मां-बाप अकेले कैसे रहेंगे, यह सवाल भी उसके सामने होता है और साथ ही उसे खुद को भी अनजान जगह पर महफूज रखने की चुनौती का सामना करना होता है.

हरियाणा के महम जिले के निंदाना गांव की रितु राठी तनेजा का ही किस्सा लें. आज रितु एक कामयाब पायलट और एक नामचीन यूट्यूबर हैं, पर साथ ही यह भी याद रखना चाहिए कि वे जिस माहौल और समाज में पैदा हुई हैं वहां कई बार लड़कियों को पैदा होने से पहले ही मां के पेट में मार दिया जाता है.

रितु राठी तनेजा ने बताया कि वे बचपन से बहुत पढ़ना चाहती थीं और इस के लिए बहुत मेहनत भी करती थीं. मांबाप उन के बहुत लाड़ लड़ाते थे और अपनी बेटी को खूब पढ़ाना चाहते थे, पर बाकी रिश्तेदार परिवार पर शादी का दबाव बनाने लगे, जबकि रितु स्कूल के दिनों से ही पायलट बनना चाहती थीं.

लिहाजा, उन्होंने अपने परिवार वालों से कहा कि जितना खर्च वे उन की शादी में करेंगे उतना पैसा उन्हें अमेरिका भेजने में खर्च कर दें. मां-बाप की रजामंदी के बाद रितु ने अमेरिका में पायलट की ट्रेनिंग के लिए अप्लाई किया और उन का सलैक्शन हो गया.

अमेरिका में डेढ़ साल रहने और ट्रेनिंग करने के बाद रितु भारत लौट आईं, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली. इस बीच रितु की मां की ब्रेन हेमरेज से मौत हो गई. धीरे-धीरे परिवार कर्ज में डूब गया.

इस सब के बावजूद रितु ने हार नहीं मानी और एक छोटी नौकरी शुरू की. इसी बीच एक दिन उन के पास एक एयरलाइंस की चिट्ठी आई, जिस में उन को कोपायलट की नौकरी औफर की थी. इस नौकरी के 4 साल में रितु की मेहनत रंग लाई और वे कैप्टन बन गईं.

रितु राठी तनेजा की जिंदगी से पता चलता है कि किसी लड़की का अपने सपने पूरे करना बिलकुल भी आसान नहीं है. अपने मांबाप से पढ़ाई के लिए हां करवाने के बाद भी रितु को समाज के ताने सुनने पड़े. मांबाप ने भी कम पीड़ा नहीं सही. बेटी को खर्चा कर के देश के बाहर भेजा. ये दिन उन के लिए भी इम्तिहान ही थे.

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सवाल उठता है कि जब बेटी पढ़ाई के लिए अपने मां-बाप को छोड़ती है तो उस परिवार के सामने किस तरह की समस्याएं खड़ी हो सकती हैं और उन का हल क्या है? अगर लड़की एकलौती है तो यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है.

लड़की का दूसरी जगह पढ़ने जाने का मतलब है अपने परिवार से कई साल दूर रहना. ऐसी जगह ज्यादातर लड़कियां या तो उस संस्थान में ही होस्टल में रहती हैं, जहां से पढ़ाई कर रही होती हैं. पर ऐसा नहीं होता है तो वे किराए पर बतौर पेइंगगैस्ट रहना महफूज और सस्ता समझती हैं.

अगर थोड़ा पीछे जाएंगे तो इस समस्या की गंभीरता समझ में आ जाएगी. साल 1996-97 की बात है. हरियाणा के कुरुक्षेत्र की कविता (बदला हुआ नाम) वहीं के दयानंद महिला कालेज से अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर चुकी थीं. वे आगे सोशल वर्क में पोस्ट ग्रेजुएशन करना चाहती थीं, लिहाजा उन्होंने इस के लिए कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एंट्रेंस एग्जाम दिया और पास भी हो गईं. उन का दाखिला कुरुक्षेत्र से 40-50 किलोमीटर दूर यमुनानगर के खालसा कालेज में हो गया.

क्लासें शुरू हुईं. कविता ने पहले कुछ दिन तो कुरुक्षेत्र से यमुनानगर आना-जाना शुरू किया, पर इस सबमें उनका बहुत समय बर्बाद हो जाता था.

कविता ने बताया, “इस के बाद मेरे मम्मीपापा ने मेरे लिए होस्टल देखना शुरू कर दिया. लेकिन जब होस्टल नहीं मिला तो किराए पर कमरा लेने की सोची. मैं इस से पहले कभी अकेली नहीं रही थी. घर पर सभी अपनीअपनी राय देने लगे, क्योंकि उस समय यह बहुत नई और अचरज की बात थी कि कोई लड़की पढ़ाई के लिए अकेली कमरा ले कर घर से दूर रहे.

“घर के बड़ों ने इस का विरोध किया. यहां तक ताना दिया गया कि ‘जितना तेरे मम्मीपापा ने तेरी पढ़ाई पर खर्चा किया है, उतने में तो तेरी शादी हो जाती’. पर मेरे मम्मी-पापा खासकर मम्मी ने साफ कह दिया कि तू सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, बाकी हम संभाल लेंगे.

“मां ने यह बात कह तो दी थी, पर वे भी मेरी तरह अंदर से डरी हुई थीं. एक अकेली लड़की का पढ़ाई के लिए अपने परिवार से दूर रहना वाकई एक मुश्किल टास्क था. फिर भी हिम्मत कर के मेरी मां ने मेरा कमरा सैट किया और रसोई के लिए जरूरत का सामान जुटाया. मेरे अकेलेपन को वहां बनी मेरी नई सहेलियों ने दूर किया. उन में से बहुत सी तो अपने परिवार के साथ रहती थीं.

“इस बात से मुझे बहुत बल मिला और अपना काम खुद करने की आदत डाली, क्योंकि पहले तो सारे काम मां ही कर देती थीं. लेकिन अब अकेले रहने से मुझ में आत्मविश्वास बढ़ा था और मैं अपनी पढ़ाई जारी रख पाई.”

कमोबेश आज भी यह समस्या ज्यादा बदली नहीं है. लोग अपनी बेटियों को पढ़ाने की बात तो करते हैं, पर उन का अकेले दूसरे शहर में पढ़ने जाना किसी मांबाप के आसान फैसला नहीं होता है. लेकिन हर बच्चे के लिए पढ़ाई बहुत जरूरी है और इससे उनमें आत्मविश्वास आता है. यह बात, के. श्रीषा, भावना कांत, स्वाति जैसी लड़कियों ने सच साबित कर दी है, इसलिए उन्हें पढ़ने के लिए बढ़ावा दें, फिर चाहे उन्हें अपने मां-बाप को ही क्यों न कुछ समय के लिए छोड़ना पड़े.

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Crime- नाजायज शराब: ‘कंजर व्हिस्की’ पीना है रिस्की

आखिरकार 4 फरवरी  2021 को पुलिस यह उजागर करने में कामयाब हुई कि मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में जहरीली शराब पीने से 13 गांवों के 28 लोगों की मौत हुई थी. लेकिन इसके जिम्मेदार कौन-कौन लोग हैं?

गौरतलब है कि जनवरी, 2021 के तीसरे हफ्ते में मुरैना में जहरीली शराब पीने से सिलसिलेवार हुई इन मौतों पर खासा हाहाकार मचा था. नतीजतन, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 20 जनवरी, 2021 को सख्त तेवर दिखाते हुए सरकारी अफसरों के कान एक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरीए उमेठते हुए हिदायत दी थी कि नाजायज शराब के इस कारोबार को जैसे भी हो खत्म किया जाए और आइंदा अगर नाजायज शराब से राज्य में मौतें हुईं, तो सीधे तौर पर कलक्टर समेत पुलिस और आबकारी महकमों के अफसर इसके जिम्मेदार होंगे.

इस फटकार के बाद राज्य में हड़कंप मच गया और जगह-जगह मारे गए छापों में नशे के कारोबार में लगे कई लोग गिरफ्तार किए गए. रायसेन जिले के सुलतानपुर थाना इलाके के गांव सेमरा कलां में पुलिस टीम पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा था, क्योंकि छापेमारी की खबर नाजायज शराब बनाने और बेचने वालों को पहले ही न जाने कौन से जादू के जोर से लग चुकी थी. पुलिस के हाथ तकरीबन 5,500 लिटर लहान यानी गुड़ का घोल लगा जो शराब बनाने में इफरात से इस्तेमाल होता है.

2 फरवरी 2021 को भोपाल से महज 30 किलोमीटर दूर तरावली और करारिया गांवों से रिकौर्ड 21,000 लिटर महुए का घोल पुलिस वालों ने जब्त किया था, जिसे ड्रमों में भर कर जमीन में गाड़ कर रखा गया था. एक दूसरी बड़ी कार्यवाही में पुलिस ने इंदौर के तकरीबन आधा दर्जन ढाबे ढहा दिए जहां नाजायज शराब बिकती थी.

इसके पहले मुरैना के ही सेंवढ़ा कसबे से सटे गांव मुबराकपुरा में भी पुलिस ने छापा मार कर हजारों लिटर कच्ची शराब नष्ट की थी. यह गांव मुरैना से तकरीबन 70 किलोमीटर की दूरी पर है. 2 फरवरी, 2021 को ही निमाड़ इलाके के धार जिले के नाजायज शराब बनाने के लिए बदनाम 2 गांवों छोटी बूटी और बड़ी बूटी के छापेमारी में पुलिस ने 40,000 लिटर से भी ज्यादा महुआ का घोल बरामद किया था. इन गांवों में लगी शराब की 200 भट्ठियां तोड़ते हुए पुलिस ने 550 लिटर शराब भी जब्त की थी. ये दोनों गांव इंदौर मुंबई हाईवे पर 10 किलोमीटर में बसे हुए हैं.

निमाड़ इलाके के ही शहरों सनावद, बड़वाह, महेश्वर और कसरावद के कई गांवों में छापा मार कर पुलिस और आबकारी महकमे ने 4,000 लिटर महुए का घोल नष्ट किया था और 60 लिटर भट्ठी की बनी नाजायज शराब भी जब्त की थी.

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ग्वालियर के नजदीक डबरा के एक छापेमारी में 50 लाख रुपए की कीमत की कच्ची शराब और गुड़ का घोल जब्त किया गया था. महाकौशल इलाके के जबलपुर में भी 100 लिटर कच्ची शराब और उस से दोगुनी तादाद में घोल जब्त किया गया था. विंध्य इलाके के रीवा जिले के डिहिया गांव में 650 लिटर महुए का घोल, 50 किलोग्राम यूरिया और भारी तादाद में कच्ची शराब बरामद की गई थी. यहां तो शराब माफिया के हौसले इतने बुलंद थे कि उस ने पुलिस टीम पर हमला कर के 5 पुलिस वाले घायल कर दिए थे.

छापे हैं छापों का क्या

ऐसे कई छापे मुरैना के हादसे के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बिगड़े मूड के चलते राज्य के हर इलाके में पड़े, लेकिन इन से नाजायज शराब की समस्या हल हो गई या हल हो जाएगी, ऐसा कहने की कोई ठोस वजह नहीं है, क्योंकि नकली शराब का कारोबार असली शराब के मुकाबले कहीं ज्यादा और बड़ा है. फर्क इतना भर है कि असली यानी लाइसेंसी शराब फैक्टरियों और कारखानों में बनती है, जबकि नाजायज शराब कोने-कोने में खासतौर से देहाती और उस में भी आदिवासी इलाकों में ज्यादा बन रही होती है. ऐसा भी नहीं है कि इन छापों से नाजायज शराब के कारोबार पर बहुत ज्यादा फर्क पड़ा हो.

भोपाल के शिवाजी नगर में बने आबकारी महकमे के एक मुलाजिम की मानें तो यह चंद दिनों का तमाशा है जो अभी कुछ दिनों तक और चलेगा, क्योंकि होली का त्योहार नजदीक है और उन दिनों में शराब की मांग और खपत ज्यादा रहती है. मुरैना जैसे कोई किरकिरी कराने वाले हादसे का दोहराव न हो, इसलिए ये छापे जारी रहेंगे.

इस मुलाजिम के मुताबिक नाजायज शराब, जो ‘कंजर व्हिस्की’ के नाम से मशहूर हो गई है, का बाजार जायज शराब से कमतर नहीं आंका जा सकता.

क्या है ‘कंजर व्हिस्की’

कंजर एक घुमक्कड़ जाति है जो सुनसान इलाकों में बस जाती है.  आजादी के पहले इस जाति के लोग आमतौर पर लुटेरे माने जाते थे. अंगरेजी हुकूमत में तो इसे बाकायदा अपराधी जाति घोषित कर दिया गया था.

कंजर शराब के धंधे में कैसे आए, इस के लिए इस जाति के गुजरे कल पर नजर डालें तो कई दिलचस्प बातें उजागर होती हैं. चूंकि ये लोग जंगलों में रहते थे, इसलिए कभी इन्हें समाज ने अपनाया नहीं, उलटे इन की हर लैवल पर अनदेखी हुई. इस जाति की औरतें ही घर की मुखिया होती हैं और गुजरबसर करने के लिए वे देह धंधा भी करती थीं, जिसे कंजर बुरा या गलत नहीं मानते. शादी के पहले लड़कियों को अपनी मरजी से कहीं भी किसी से भी सैक्स ताल्लुकात बनाने की आजादी है, लेकिन शादी के बाद नहीं होती, क्योंकि पति तयशुदा रकम दे कर शादी करता है.

बदलते वक्त के साथसाथ कंजर समाज के तौरतरीकों और रहनसहन में भी बदलाव आए, लेकिन इन्हें सभ्य समाज ने कभी बराबरी का दर्जा नहीं दिया. आजादी के बाद इस जाति के लोग यहांवहां भटकते हुए जैसेतैसे गुजरबसर करने लगे, लेकिन लूटपाट और जिस्मफरोशी से पूरी तरह किनारा नहीं कर पाए, लिहाजा आज भी ये बदनाम हैं. इन के ज्यादातर बच्चे स्कूल नहीं जाते और जो थोड़ेबहुत जाते भी हैं, वे 5वीं या 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं. इन के भले के लिए वक्त-वक्त पर सरकारी योजनाएं बनीं, लेकिन सरकारी अफसरों के निकम्मेपन, लापरवाही और अनदेखी के चलते वे भी इन का कोई भला नहीं कर पाईं.

लिहाजा, 30 साल पहले इस समाज के बहुत से लोग पूरी तरह शराब के धंधे में आ गए, क्योंकि खुद पियक्कड़ होने के चलते ये देशी शराब बनाने में माहिर होते हैं. शुरू-शुरू में ये नकली या नाजायज शराब नहीं बनाते थे, लेकिन बाद में मुनाफे के लालच में बनाने लगे. यह वह दौर था जब शराब लगातार महंगी हो रही थी और गांव-देहात के बाशिंदों की पहुंच से बाहर होने लगी थी. इनकी बनाई शराब लाइसेंस वाले ठेकों और दुकानों पर मिलने वाली शराब से बहुत सस्ती होती है, इसलिए उसकी मांग बढ़ने लगी, देखते ही देखते इन की और दूसरों की भी बनाई गई नाजायज शराब ‘कंजर व्हिस्की’ के नाम से मशहूर हो गई. यह नाम पियक्कड़ों और आबकारी महकमे ने ही दिया. देशी शराब का जो क्वार्टर या पौआ सरकारी ठेके पर 80 रुपए में मिलता है उसे ये 40 रुपए में मुहैया कराते हैं.

ऐसे बनती है कंजर व्हिस्की

नाजायज शराब बनाना कोई मुश्किल या टैक्निकल काम नहीं है, इसलिए इसे आसानी से बना लिया जाता है. पूरे देश के आदिवासी कच्ची शराब खुद बनाते हैं और इस बाबत उन्हें कानूनन छूट भी मिली हुई है. यह शराब महुए और गुड़ के लहन यानी घोल से भट्ठी पर बनाई जाती है. इस तरीके से बनाई गई शराब के एक पौआ यानी 180 मिलीलिटर शराब बाजार में 40 रुपए से 60 रुपए में बिकती है, जो सरकारी शराब से काफी सस्ती होती है.

भट्ठी में यह घोल गरम होता है तो एक नली के जरीए निकली भाप को बरतन में इकट्ठा कर लिया जाता है. इसे शराब उतारना कहा जाता है. यह देशी या कच्ची शराब जहरीली नहीं होती, लेकिन एल्कोहल की मात्रा ज्यादा होने से इस से नशा अंगरेजी शराब से ज्यादा होता है. आदिवासी और गैरआदिवासी इलाकों में हर कहीं ये भट्ठियां दिखना आम बात है.

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गड़बड़ तब शुरू होती है जब इस घोल में जानलेवा और खतरनाक कैमिकल मिलाए जाने लगते हैं. इन में यूरिया, नौसादर और आक्सीटोसिन खास हैं. इस के अलावा कच्ची शराब को और नशीला बनाने इस में धतूरा, बेशरम पेड़ की पत्तियां, सड़े संतरे व अंगूर और कुत्ते का शौच यानी मल भी मिलाया जाता है.

यह तो हर कोई जानता है कि शराब कोई सी भी हो उस में इथाइल एल्कोहल होता है. अंगरेजी शराब यानी व्हिस्की में इस की मौजूदगी 40 से 68 फीसदी तक होती है. यह तादाद जानलेवा नहीं होती और 2-3 पैग यानी 180 मिलीलिटर में पीने वाला मानो नशे में उड़ने लगता है.

कच्ची शराब में भी यही होता है लेकिन जब इस में ऊपर बताए कैमिकल मिला दिए जाते हैं, तो यह जहर हो जाती है, क्योंकि इस में रासायनिक क्रियाओं से जहर बन जाता है जो बेहद घातक साबित होता है. मिथाइल एल्कोहल के पेट में पहुंचते ही नुकसानदेह रासायनिक क्रियाएं तेज होने लगती हैं और चंद मिनटों में ही शरीर के अंदरूनी हिस्से काम करना बंद कर देते हैं.  फेफड़ों, जिगर, गुरदे और आंतों को मिथाइल अल्कोहल एक तरह से जला डालता है. इसका सीधा असर दिमाग और नर्वस सिस्टम पर भी होता है, जिससे लोग अंधे तक हो जाते हैं. जब भी जहरीली शराब से लोग मरते हैं तो कइयों के अंधे होने की खबर भी जरूर आती है.

मध्य प्रदेश में जहां-जहां बड़े छापे पड़े वहां-वहां भारी तादाद में आक्सीटोसिन और यूरिया भी मिला. इन केमिकलों को कच्ची शराब में मिलाने से शराब सस्ती भी पड़ती है और नशा भी ज्यादा होता है, लेकिन शामत पीने वालों की होती है.

कंजरों को आक्सीटोसिन, यूरिया और बाकी दूसरे आइटम तो आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन मिथाइल एल्कोहल मिलने में मुश्किल होती है. मुरैना के आरोपियों के पकड़े जाने के बाद यह खुलासा हुआ था कि उन्होंने ज्यादा मुनाफे के लालच में कच्ची शराब में मिथाइल एल्कोहल मिलाया था. इस का 200 लिटर का ड्रम 25,000 रुपए में मिलता है, लेकिन आगरा के एक कारोबारी अंतराम शर्मा ने मिलावटियों को 5 ड्रम महज 30,000 रुपए में मुहैया कराए थे जिस से उन के 95,000 रुपए बच गए थे. इस लिहाज से देखें तो जहरीली शराब से मरने वाले 28 लोगों की जिंदगी की कीमत 3,392 रुपए एक आदमी की बैठती है. यह जहर कास्मेटिक आइटम बनाने के नाम पर खरीदा गया था.

मुख्य आरोपियों मुकेश किरार, राहुल शर्मा और खुशीराम ने इस जहरीली शराब को चखा भी नहीं था. जाहिर है कि इस का अंजाम उन्हें मालूम था. अब यह कह पाना मुश्किल है कि न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि देशभर के नाजायज शराब बनाने वालों को यह मिथाइल एल्कोहल मिलता कहां से है, पर यह साफ दिख रहा है कि इस की खुदरा सप्लाई गांव-गांव तक है.

और ऐसे बिकती है

डबरा के छापों से यह उजागर हुआ था कि नाजायज यानी ‘कंजर व्हिस्की’ बनाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन इसे बेचना उस से ज्यादा आसान काम है. कंजर बाहुल्य इलाकों में औरतें और बच्चें व्हिस्की के पाउच और बोतलें हर कहीं बेचते दिख जाते हैं. मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना, गुना, शिवपुरी और डबरा सहित दतिया जिले में तो औसतन हर 10 किलोमीटर पर टोकनियों में औरतें सड़क किनारे भाजीतरकारी की तरह इस की बिक्री करते दिख जाती हैं. इस के अलावा छोटे होटल और ढाबों पर भी ‘कंजर व्हिस्की’ की सप्लाई होती है.

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लौकडाउन के दिनों में जब पियक्कड़ों को शराब के लाले पड़े थे तब नाजायज शराब इफरात से बिकी थी. पीने वाले अपनी गाड़ियां ले कर गांवदेहातों की तरफ दौड़ते नजर आए थे.

ट्रक ड्राइवर, गरीब मजदूर और किसान सस्ते के चक्कर में बिना जान की परवाह किए यह जहरीली शराब खरीदते हैं और पीते भी जम कर हैं, लेकिन जब जहर अपना असर दिखाता है तो  इन के बचने की गुंजाइश न के बराबर रह जाती है और जो बच जाते हैं, वे जिंदगीभर देख नहीं पाते हैं.

नाजायज शराब बेचने वाली एक औरत दिनभर में 3,000 से 4,000 रुपए कमा लेती है, जब कि इस की लागत 300 से 400 रुपए ही बैठती है. इन के मर्द सुबह 8 से ले कर दोपहर कर 12 बजे तक शराब बनाते हैं और उस की पैकिंग कर औरतों को सड़कों पर मोटरसाइकिल से छोड़ देते हैं और फिर चारों तरफ घूम-घूम कर निगरानी करते रहते हैं. इन्हें जरा सा भी खतरा दिखता है तो ये मोबाइल के जरिए औरतों को आगाह कर देते हैं जिससे वे छिप जाती हैं.

इंदौर के एक सब इंस्पेक्टर की मानें तो इन कंजरों का मुखबिर सिस्टम पुलिस से कहीं ज्यादा पुख्ता और मजबूत होता है. इन के लोग गांव के बाहर 15-20 किलोमीटर तक तैनात रहते हैं.  छापों की खबर इन्हें पहले ही लग जाती है, लिहाजा ये गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो जाते हैं और पुलिस के हत्थे भट्ठी और घोल ही आता है.

कंजरों के उन गांवों में जहां पूरे घर शराब बनाने का धंधा करते हैं वहां 2-4 की तादाद में पैर रखने की हिम्मत पुलिस वाले नहीं करते हैं, क्योंकि ये लोग हमला कर उन्हें खदेड़ देते हैं, इसलिए हालिया छापों की मुहिम में 40 से ले कर 100 पुलिस वालों की टीमें बनाई गई थीं, पर इस के बाद भी धंधा बदस्तूर और बेखौफ जारी है. पुलिस के जाते ही जंगलों में छिपे आरोपी फिर से आ कर शराब बनाना शुरू कर देते हैं.

तो फिर हल क्या

भारी मुनाफे का धंधा नाजायज शराब के कारोबारी कुछ छापों के खौफ से छोड़ेंगे, ऐसा लग नहीं रहा, क्योंकि ऐसी कई मुहिम पहले भी जोरशोर से परवान चढ़ दम तोड़ चुकीं हैं, तो फिर इस समस्या का हल क्या है जिस से देशभर में हजारों लोग हर साल बेमौत मारे जाते हैं. इस सवाल का जवाब किसी मुख्यमंत्री या अफसर के पास नही है. उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, बिहार छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में भी ‘कंजर व्हिस्की’ इसी या किसी और नाम से मध्य प्रदेश की तरह ही धड़ल्ले से बिक रही है. पकड़-धकड़ की मुहिम भी हर राज्य में चल रही है, लेकिन नतीजा हमेशा ढाक के तीन पात ही निकलता है.

नाम न छापने की शर्त पर भोपाल के एक आबकारी अफसर का कहना है कि सस्ती शराब जब ज्यादा बिकने लगती है, तो नुकसान बड़े शराब निर्माताओं का होता है, इसलिए वे हम और पुलिस महकमे पर सियासी दबाव डलवाते हैं, जिस से हम लोग छापे मारने लगते हैं. लेकिन अमला कम होने से बारह महीने ऐसी मुहिम नहीं चलाई जा सकती, इसलिए फिर से नाजायज और जहरीली शराब का कारोबार जोर पकड़ने लगता है. मुरैना जैसा कोई हादसा होता है तो हल्ला और मचता है जिस से कुछ छोटी मछलियां पकड़ में आ जाती हैं.

यह भी हकीकत है कि शराब का महंगा होते रहना सस्ती शराब के चलन को बढ़ावा देता है. सरकार अगर शराब सस्ती करे तो उस का ही नुकसान होता है. ऐसे में बेहतर तो यही लगता है कि वह नाजायज शराब के कारोबार को जायज बनाने के रास्तों पर गौर करे. अगर बड़े शराब निर्माता कच्ची शराब वाजिब दाम पर खरीद कर उसे अपने प्लांट में वैज्ञानिक तरीके से बनाएं तो एक हद तक समस्या हल हो सकती है नहीं तो ‘कंजर व्हिस्की’ जानलेवा होने के बाद भी बिकती रहेगी, क्योंकि इसे बनाने वालों को कोई और काम आता और भाता ही नहीं.

शराब पीने के आदी हो गए लोगों को भी हादसों से सबक लेते हुए नाजायज शराब खरीदने और पीने से बचना चाहिए. यह सस्ती जरूर है, लेकिन रिस्की भी कम नहीं.

‘लक्ष्मी बम’ की इस एक्ट्रेस ने बिकनी में दिखाया अपना हौट अंदाज, देखें Photos

गायिका से अभिनेत्री बनी अमिका शैल धीरे धीरे खुद को बदलती जा रही हैं. यूं तो अमिका शैल को बतौर अभिनेत्री और गायिका कोई खास सफलता अब तक नही मिल पायी है.वह एकता कपूर की वेब सीरीज ‘गंदी बात’’और ‘मिर्जापुर’ का भी 2018 में हिस्सा रह चुकी हैं.

कोरोना काल यानी कि 2020 में वह ओटीटी प्लेटफार्म पर प्रदर्शित फिल्म‘‘लक्ष्मी बम’ में भी नजर आयीं, मगर अभी तक अपने अभिनय की छाप छोड़ने में असफल रही हैं. तो अब खुद को सूर्खियों में रखने तथा खुद के अंदर बदलाव लाते हुए इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी बिकनी वाली तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं.

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उनके नजदीकी सूत्रों का दावा है कि फरवरी के ठंड के माह में वह अपनी इन बिकनी तस्वीरों के माध्यम से तापमान को बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं.

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हम सभी जानते है कि अमिका शैल ने बौलीवुड में एक गायक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी.वह सबसे पहले संगीत के रियालिटी शो ‘‘लिटिल चैंप्स’ में दिखाई दी थीं. उसके बाद वह ‘सा रे गा मा पा’,‘इंडियन आयडल’और ‘वॉयस ऑफ इंडिया’ जैसे कई संगीत के रियालिटी शो में भी नजर आईं.उसके बाद वह पहली बार कलर्स पर प्रसारित टीवी सीरियल ‘उदयन’,‘दिव्य दृष्टि’और ‘बलवीर रिटर्न्स’में भी नजर आयीं.

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अमिका शैल खुद को गायक व अभिनेत्री के साथ साथ फैशन दिवा भी मानती हैं. उनका दावा है कि लोग उनके पहनावे के दीवाने हैं. वह काइली जेनर, किम कार्दशियन और जेनिफर लोपेज से अपने फैशन के लिए प्रेरणा लेती हैं.

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अपने दुबले-पतले फिगर के लिए जानी जाने वाली अमिका शैल फिटनेस उत्साही हैं. वह वर्कआउट करने से कभी नहीं चूकती हैं. अब पहली बार अपनी सुंदर काया से हर किसी को मोहित करने के लिए अमिका शैल ने खासतौर पर बिकनी पहनकर फोटो शूट करवाया है. उनका दावा है कि इन तस्वीरों के चलते उनके प्रशंसक उन पर टूट पड़ेंगे.

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अभिनेत्री अमिका शैल को उम्मीद है कि इन तस्वीरों में नजर आ रहा उनका छरहरा बदन उनके प्रशंसकों को 2021 में फिटनेस की प्रेरणा देगा. अमिका सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय हैं.

अब देखने योग्य बात यह होगी कि इन बिकनी तस्वीरों से 2021 में बतौर अभिनेत्री उन्हें कितना काम मिलता है?

Bigg Boss 14: रुबीना दिलाइक ने राखी सावंत पर फेंका पानी तो यूजर्स ने दिया ये रिएक्शन

छोटे पर्दे का विवादित शो ‘बिग बॉस 14’  में दर्शकों को हाईवोल्टेज ड्रमा देखने को मिल रहा है. शो के लेटेस्ट एपिसोड में राखी सावंत (Rakhi Sawant) फिर से अभिनव शुक्ला (Abhinav Shukla) को उकसाने के लिए  कुछ अपशब्द कहती दिखाई दी.

और इस बार अभिनव, राखी सावंत को इस बार करारा जवाब देते हुए दिखाई दिए. दरअसल राखी ने अभिनव शुक्ला को जोरू का गुलाम कहा. और राखी की इस बदतमीजी से रुबीना दिलाइक अपना आपा खो बैठीं.

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और गुस्से में रुबीना दिलाइक, राखी सावंत के ऊपर पानी फेंकने लगी. रुबीना दिलाइक के इस अंदाज देखने के बाद हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है.

सोशल मीडिया पर कई यूजर मे रुबिना के लिए कमेंट किया है. एक यूजर ने लिखा है, रुबीना वेलडन माई गर्ल. तुमने जो भी किया सही ही किया है. तो  वहीं एक और यूजर ने लिखा है, राखी सावंत को तो चप्पल से मारना चाहिए.

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एक साल चलेगा चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा कि सामूहिकता की जिस शक्ति ने गुलामी की बेड़ियां को तोड़ा वही भारत को दुनिया की बड़ी ताकत बनाएगी. सामूहिकता की यह शक्ति, आत्मनिर्भर भारत की ताकत है. देश को आत्मनिर्भर बनाने में सामूहिक भागीदारी बढ़ाने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि देश की एकता और सम्मान सबसे बड़ा है. इसी भावना से प्रत्येक देशवासी को साथ लेकर आगे बढ़ना है. उन्होंने विश्वास जताया कि देश के विकास की यात्रा एक नये भारत के निर्माण के साथ पूर्ण होगी.

प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव का शुभारम्भ किया. उन्होंने इस अवसर पर चौरी चौरा की घटना पर केन्द्रित एक डाक टिकट भी जारी किया.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर स्थित चौरी चौरा स्मारक स्थल से इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए. प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम के साथ जुड़ने के पश्चात संगीत नाटक एकेडमी द्वारा चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव का थीम सॉन्ग ‘चौरी चौरा के वीरों ने रचा नया इतिहास’ प्रस्तुत किया गया.

कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के सूचना विभाग द्वारा चौरी चौरा की घटना के सम्बन्ध में तैयार की गयी डॉक्यूमेण्ट्री भी प्रदर्शित की गयी. इस अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी/स्टॉल भी लगाये गये.

प्रधानमंत्री ने कहा कि 100 वर्ष पहले चौरी चौरा की घटना का संदेश बहुत बड़ा और व्यापक था. अनेक कारणों से पहले जब इस घटना की बात हुई, इसे आगजनी के रूप में देखा गया. आगजनी किन परिस्थितियों में हुई, वह महत्वपूर्ण है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी व उनकी टीम को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि चौरी चौरा के इतिहास को आज जो स्थान दिया जा रहा है, वह प्रशंसनीय है.

chauri chaura mahotsav

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव के शुभारम्भ के साथ ही, पूरे वर्ष विभिन्न कार्यक्रम होंगे. देश की आजादी के 75 वें वर्ष में प्रवेश के समय यह कार्यक्रम अत्यन्त प्रासंगिक हैं. चौरी चौरा की घटना आम मानवी का स्वतःस्फूर्त संग्राम था. इस संग्राम के शहीदों का बलिदान प्रेरणादायी है. बाबा राघवदास, महामना पं0 मदन मोहन मालवीय का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी कम घटनाएं होंगी, जिसमें 19 स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गयी हो. अंग्रेज सरकार अनेक स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी देना चाहती थी, किन्तु बाबा राघवदास, महामना पं0 मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से 150 से अधिक लोगों को फांसी से बचा लिया गया.

प्रधानमंत्री जी ने कार्यक्रम से युवाओं को जोड़े जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उन्हें इतिहास के अनकहे लोगों की जानकारी मिलेगी. भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय युवाओं को स्वतंत्रता सेनानियों एवं स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं पर किताबें व शोध पत्र लिखने के लिए कार्यक्रम चला रहा है. इससे चौरी चौरा की घटना के सेनानियों का व्यक्तित्व और कृतित्व सामने लाया जा सकता है. चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव के कार्यक्रमों को लोककला और संस्कृति से जोड़े जाने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री जी व उनकी टीम की सराहना की.

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि चौरी चौरा के संग्राम में किसानों की भरपूर भूमिका थी. वर्तमान सरकार ने विगत 06 वर्षाें में किसान को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास किया है. कोरोना काल में भी कृषि में वृद्धि हुई तथा रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन हुआ. केन्द्रीय बजट में किसान कल्याण के लिए कई प्राविधान हैं. 1000 मण्डियों को ई-नाम से जोड़ा जाएगा. इससे किसानों को मण्डी में अपनी फसल को बेचने में आसानी होगी. ग्रामीण क्षेत्र के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इससे किसान लाभान्वित और आत्मनिर्भर तथा कृषि लाभकारी होगी.

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना का कार्य तेजी से संचालित है. यह योजना ग्रामीण विकास में सहायक है. इसके अन्तर्गत ग्रामीणों को उनके घर, जमीन के मालिकाना हक का अभिलेख उपलब्ध कराया जा रहा है. इससे ग्रामीण जमीन का मूल्य बढ़ेगा. कर्ज लेने में आसानी होगी.

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार के प्रयास से किस तरह देश व प्रदेश की तस्वीर बदल रही है, गोरखपुर इसका उदाहरण है. यहां खाद कारखाना फिर से शुरु हो रहा है. इससे किसानों को लाभ होगा व युवाओं को रोजगार मिलेगा.

पूर्वांचल में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया गया है. 04 लेन व 06 लेन की सड़कें बन रही हैं. गोरखपुर से 08 शहरों हेतु हवाई यात्रा सुविधा उपलब्ध हो गयी है. कुशीनगर में इण्टरनेशनल एयरपोर्ट की स्थापना से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. यह सभी विकास कार्य स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि हैं.
कार्यक्रम स्थल चौरी चौरा, गोरखपुर में उपस्थित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने अपने स्वागत सम्बोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी का कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए आभार प्रकट करते हुए कहा कि चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव भारत माता के अमर बलिदानी सपूतों के प्रति श्रद्धा व सम्मान व्यक्त करने का अवसर है. चौरी चौरा की घटना 04 फरवरी, 1922 को इसी स्थान पर हुई थी. प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा व मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव के आयोजन का निर्णय लिया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि चौरी चौरा में आमजन और पुलिस की गोली से तीन लोग शहीद हुए. ब्रिटिश सरकार द्वारा 228 स्वतंत्रता सेनानियों पर मुकदमा चलाया गया. 225 स्वतंत्रता सेनानियों को सजा हुई. इनमें से 19 को मृत्यु दण्ड, 14 को आजीवन कारावास, 19 को आठ वर्ष का कारावास, 57 को पांच वर्ष का कारावास, 20 को तीन वर्ष का कारावास तथा 03 को दो वर्ष के कारावास की सजा दी गयी. इस घटना को ध्यान में रखकर वर्ष 1857 से वर्ष 1947 के मध्य के सभी शहीद स्मारकों एवं आजादी के बाद विभिन्न युद्धों में शहीद अमर बलिदानियों के शहीद स्थलों पर राज्य सरकार द्वारा वर्ष भर चलने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रारम्भ की जा रही है. उन्होंने कहा कि चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव का ‘लोगो’ ‘स्वरक्तैः स्वराष्ट्रं रक्षेत्’ अर्थात ‘हम अपने रक्त से अपने राष्ट्र की रक्षा करते हैं’, स्वतंत्रता आन्दोलन के शहीदों के जीवन आदर्शाें से ओतप्रोत है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सायंकालीन सत्र में सभी शहीद स्मारकों व शहीद स्थलों पर पुलिस बैण्ड द्वारा राष्ट्रभक्ति के गीतों का कार्यक्रम, कवि गोष्ठी का आयोजन तथा दीपोत्सव का कार्यक्रम होगा. स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी तिथियों पर अमर स्वाधीनता सेनानियों, उनसे जुड़े स्मारकों और शहीद स्थलों पर, उन तिथियों पर मुख्य आयोजन के साथ ही, प्रदेश में समस्त शहीद स्मारकों व शहीद स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे. विद्यालयों में लेखन, पेंटिंग, वाद-विवाद प्रतियोगिता, ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित साहित्य की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी. स्वतंत्रता सेनानियों एवं घटनाओं के सम्बन्ध में विशिष्ट शोध को बढ़ावा देने का कार्यक्रम भी प्रारम्भ हो रहा है.

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया. इनमें श्री रामनवल, श्री ओमप्रकाश, श्री लाल किशुन, श्री गुलाब, सुश्री सावित्री, श्री वीरेन्द्र, श्री रामआशीष, श्री मानसिंह यादव, श्री हरिलाल, श्री सौदागर अली, श्री लल्लन, श्री रामराज, श्री मैनुद्दीन, श्री सत्याचरण, श्री दशरथ और श्री राम नारायण त्रिपाठी सम्मिलित हैं. इसके अतिरिक्त उन्होंने 100 दिव्यांगजन को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल का वितरण किया तथा हरी झण्डी दिखाकर उन्हें रवाना किया. इससे पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने शहीद स्मारक, चौरी चौरा पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की. उन्होंने संग्रहालय का भ्रमण कर कराये जा रहे सौन्दर्यीकरण कार्याें का निरीक्षण किया तथा राष्ट्र गीत वन्दे मातरम के समवेतिक गान में प्रतिभाग किया.

कार्यक्रम के अन्त में पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ0 नीलकंठ तिवारी ने अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया. कार्यक्रम को सांसद श्री कमलेश पासवान, विधायक श्रीमती संगीता यादव ने भी सम्बोधित किया.

इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री श्री रमापति शास्त्री सहित जनप्रतिनिधिगण व अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे.

‘दिया और बाती हम’ की इस एक्ट्रेस के साथ हुई बदसलूकी, चार आरोपी हुए गिरफ्तार

टीवी का फेमस सीरियल ‘दिया और बाती हम’ की एक्ट्रेस प्राची तेहलान के साथ दिल्ली में बदसूलकी का मामला सामने आया है. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है.

‘दिया और बाती हम’ में आरजू राठी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस प्राची तेहलान के साथ दिल्ली के रोहिणी इलाके में बदसलूकी हुई थी. मिली जानकारी के मुताबिक उस घटना के वक्त सभी आरोपी नशे की हालत में पाये गए थे.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘दिल्ली पुलिस ने रोहिणी इलाके में टीवी अभिनेत्री प्राची तेहलान की कार का पीछा करने और उनके साथ बदसलूकी करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. , घटना के समय आरोपी नशे की हालत में थे.

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खबरों के अनुसार, नशे की हालत में चार लोगों ने उनकी कार का पीछा किया और अपार्टमेंट पहुंचने पर प्राची के साथ गाली-गलौज भी की.

इसके बाद प्राची ने पुलिस में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. खबरों के अनुसार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. और उनका मेडिकल टेस्ट कराया गया जिसमें उनके नशे की पुष्टि की गई.

बताया जा रहा है कि प्राची तेहलान अपने पति के साथ रोहिणी में रहती हैं. उनके पति बिजनेसमैन हैं.घटना वाली रात को दोनों अपने रिश्तेदार के घर गए थे. वापस लौटते वक्त उनके साथ ये घटना हुई.

बता दें कि प्राची ने टीवी सीरियल्स के अलावा फिल्मों में भी काम किया है. वह राष्ट्रीय स्तर पर बास्केट बौल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं.

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‘Naagin 5’ के सेट पर आखिरी दिन इन एक्टर्स ने की खूब मस्ती, देखें Photos

कलर्स टीवी का फेमस शो ‘नागिन 5’ जल्द ही ऑफ एयर होने वाला है. हालांकि यह सीरियल कुछ ही महीने पहले ही शुरु हुआ था.

लेकिन शो की कम टीआरपी के कारण मेकर्स ने इसे बंद करने का फैसला किया है. हाल ही में इस शो के सेट पर सुरभि चंदना, शरद मल्होत्रा, मोहित सहगल ने अपनी पूरी टीम के साथ जश्न मनाया.

 

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दरअसल यह जानकारी सोशल मीडिया से मिली. ‘नागिन 5’ की लीड एक्ट्रेस सुरभि चंदना ने सोशल मीडिया पर सेट के आखिरी दिन की तस्वीर शेयर की हैं. सुरभि ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए टीम से जुड़े हर एक सदस्य को शुक्रिया कहा है.

 

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‘नागिन 5’ के सेट पर सभी कलाकारों ने जहां खूब मस्ती की, वहीं दूसरी ओर सभी ने आखिरी में मिलकर चॉकलेट फॉरेस्ट केक काटा. इस केक पर लिखा था ‘हम आपको बहुत मिस करेंगे.

तो वहीं सेट से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसमे सुरभि चंदना बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की फिल्म ‘मुझसे शादी करोगी’ का गाना गाती हुई दिखाई दे रही हैं.बता दें कि इसी हफ्ते ‘नागिन 5’ (Naagin 5) का आखिरी एपिसोड ऑनएयर होने वाला है.

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Bigg Boss 14: राखी सावंत का Shocking खुलासा, पैसे के बदले दोस्त ने की थी ऐसी डिमांड

बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14)  के लेटेस्ट एपिसोड कंटेस्टेंट अपनी निजी जिंदगी के बारे में खुलासा करते नजर आ रहे हैं. और राखी सावंत ने अपने जीवन से जुड़ा एक बड़ा खुलासा किया है.

शो के लेटेस्ट एपिसोड  में राखी सावंत (Rakhi Sawant) ने राहुल वैद्य (Rahul Vaidya) को बताया कि उनके एक दोस्त ने पैसों के बदले उनके साथ ‘गंदी हरकत’ करने की कोशिश की.

शो में दिखाया गया कि राहुल ये कहते हैं कि उन्हें राखी से बात करना पसंद है. और ऐसे में राखी इमोशनल हो जाती हैं और वो राहुल से कहती हैं कि जब वे छोटी थी तो उनकी मां को कैंसर हो गया. और उन्हें मां के ऑपरेशन के लिए पैसों की जरूरत थी.

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राखी ने आगे बताया कि उन्होंने अपने एक दोस्त से पैसे मांगे और उसने राखी को पैसे दे दिए. राखी ने अपने दोस्त से कहा था कि वो उन्हें पैसे वापस कर देंगी लेकिन उनके दोस्त ने कहा कि उसे पैसे नहीं चाहिए.

बाद में राखी अपने दोस्त से मिलने पहुंची. दोस्त के पास महंगी कार थी और उसने राखी को अपनी कार के अंदर बुलाया और फिर दरवाजा लॉक कर दिया.

राखी ने बताया, मुझे नहीं पता था कि यह खुलेगी कैसे?  मेरा दोस्त नशे में था. मैंने कहा कि मेरे पास देने के लिए कुछ नहीं है. उसने गंदी बाते की और जब मैंने मना किया तो उसने मुझे कार से धक्का दे दिया.

राहुल, राखी से कहते हैं कि तुमने उसका पता क्यों नहीं लगाया, उसे सजा दिलवानी चाहिए थी. इस बात पर  राखी कहती हैं,  मैं उसे कहां ढूंढती. उसी दौरान मेरे पिता को हार्ट अटैक आ गया था और मैं अपने परिवार के साथ थी.

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ये सारी बातें कहते हुए राखी सावंत फूट-फूट कर रोने लगती हैं. राहुल उन्हें समझाते हैं कि किसी भी बुरी याद को अपने साथ मत रखो और जीवन में आगे बढ़ो.

तो उधर बिग बॉस राहुल और राखी को कन्फेशन रूम में बुलाते हैं. बिग बॉस राखी से कहते हैं कि आज के बाद आप घर में अपने पास्ट के बारे में बात ना करें. और वो राहुल से भी कहते हैं कि वो इस बात को किसी और के साथ शेयर ना करें.

‘पवित्र रिश्ता’ के दूसरे सीजन में Ankita Lokhande एक बार फिर निभाएंगी लीड रोल

छोटे पर्दे का सुपरहीट सीरियल पवित्र रिश्ता का जल्द ही दूसरा सीजन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर लौन्च होने वाला है. इस शो के लीड एक्टर्स अंकिता लोखंडे यानि अर्चना और सुशात सिंह राजपूत यानि मानव आज भी दर्शकों के दिल में राज करते हैं.

एकता कपूर का ये सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ को साल 2009 में लौन्च किया गया था. इस शो के जरिए अंकिता और सुशांत को हर घर में अर्चना और मानव के रूप में अपनी पहचान बनाई.

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शो में दोनों की केमेस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया. उनकी दमदार एक्टिंग को दर्शको ने खूब पसंद किया. तो ऐसे में मेकर्स ने इस सीरियल के दूसरे सीजन को लौन्च करने का फैसला लिया है. जी हां, ‘पवित्र रिश्ता’ का नया सीजन जल्द ही ओटीटी प्लेटफार्म एएलटी बालाजी पर आप देख पाएंगे.

 

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खबर ये आ रही है कि ‘पवित्र रिश्ता’ को डायरेक्ट करने वाले कुशल जावेरी ने शो के दूसरे सीजन लॉन्च करने को लेकर कहा हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने बताया कि अंकिता लोखंडे ने इस प्रोजेक्ट को साइन कर दिया है. उन्होंने ये भी कहा कि अंकिता ने मुझे कॉल पर बताया था कि उसने ये शो साइन कर दिया है.

बता दें कि यह शो दूसरे सीजन के साथ जल्द ही लान्च होने वाला है. और इस शो में अर्चना यानी अंकिता लोखंडे फिर से दिखाई देंगी.

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