Valentine’s Special- हरिनूर: भाग 2

जब नई अम्मी को बेटा हुआ, तो जोया आपा और अम्मी को बेदखल कर उसी हवेली में नौकरों के रहने वाली जगह पर एक कोना दे दिया गया.

अम्मी दिनभर सिलाईकढ़ाई करतीं और जोया आपा भी दूसरों के घर का काम करतीं तो भी दो वक्त की रोटी मुहैया नहीं हो पाती थी.

अम्मी 30 साल की उम्र में 50 साल की दिखने लगी थीं. ऐसा नहीं था कि अम्मी खूबसूरत नहीं थीं. वे हमेशा अब्बू की दीवानगी के किस्से बयां करती रहती थीं.

सभी ने अम्मी को दूसरा निकाह करने को कहा, पर अम्मी तैयार नहीं हुईं. पर इधर कुछ दिनों से वे काफी परेशान थीं. शायद जोया आपा के सीने पर बढ़ता मांस परेशानी का सबब था. मेरे लिए वह अचरज, पर अम्मी के लिए जिम्मेदारी.

‘‘शबीना… ओ शबीना…’’ जोया आपा की आवाज ने शबीना को यादों से वर्तमान की ओर खींच दिया.

‘‘ठीक है, उस लड़के को ले कर आना, फिर देखते हैं कि क्या करना है.’’

लड़के का फोटो देख शबीना खुशी से उछल गई और चीख पड़ी. भविष्य के सपने संजोते हुए वह सोने चली गई.

अकसर उन दोनों की मुलाकात शहर के बाहर एक गार्डन में होती थी. आज जब वह नीरज से मिली, तो उस ने कल की सारी घटना का जिक्र किया, ‘‘जनाब, आप मेरे घर चल रहे हैं. अम्मी आप से मुलाकात करना चाह रही हैं.’’

‘‘सच…’’ कहते हुए नीरज ने शबीना को अपनी बांहों में भर लिया. शबीना शरमा कर बड़े प्यार से नीरज को देखने लगी, फिर नीरज की गाड़ी से ही घर पहुंची.

नीरज तो हैरान रह गया कि इतनी बड़ी हवेली, सफेद संगमरमर सी न शीदार दीवारें और एक मुगलिया संस्कृति बयां करता हरी घास का लान, जरूर यह बड़ी हैसियत वालों की हवेली है.

नीरज काफी सकुचाते हुए अंदर गया, तभी शबीना बोली, ‘‘नीरज, उधर नहीं, यह अब्बू की हवेली है. मेरा घर उधर कोने में है.’’

हैरानी से शबीना को देखते हुए नीरज उस के पीछेपीछे चल दिया. सामने पुराने से सर्वैंट क्वार्टर में शबीना दरवाजे पर टंगी पुरानी सी चटाई हटा कर अंदर नीरज के साथ दाखिल हुई.

नीरज ने देखा कि वहां 2 औरतें बैठी थीं. उन का परिचय शबीना ने अम्मी और जोया आपा कह कर कराया.

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अम्मी ने नीरज को देखा. वह उन्हें बड़ा भला लड़का लगा और बड़े प्यार से उसे बैठने के लिए कहा.

अम्मी ने कहा, ‘‘मैं तुम दोनों के लिए चाय बना कर लाती हूं. तब तक अब्बू और भाईजान भी आते होंगे.’’

‘‘अब्बू, अरे… आप ने उन्हें क्यों बुलाया? मैं ने आप से पहले ही मना किया था,’’ गुस्से से चिल्लाते हुए शबीना अम्मी पर बरस पड़ी.

अम्मी भी गुस्से में बोलीं, ‘‘चुपचाप बैठो… अब्बू का फैसला ही आखिरी फैसला होगा.’’

शबीना कातर निगाहों से नीरज को देखने लगी. नीरज की आंखों में उठे हर सवाल का जवाब वह अपनी आंखों से देने की कोशिश करती.

थोड़ी देर तक वहां सन्नाटा पसरा रहा, तभी सामने की चटाई हिली और भरीभरकम शरीर का आदमी दाखिल हुआ. वे सफेद अचकन और चूड़ीदार पाजामा पहने हुए थे. साथ ही, उन के साथ 17-18 साल का एक लड़का भी अंदर आया.

आते ही उस आदमी ने नीरज का कौलर पकड़ कर उठाया और दोनों लोग नीरज को काफी बुराभला कहने लगे.

नीरज एकदम अचकचा गया. उस ने संभलने की कोशिश की, तभी उस में से एक आदमी ने पीछे से वार कर दिया और वह फिर वहीं गिर गया.

शबीना कुछ समझ पाती, इस से पहले ही उस के अब्बू चिल्ला कर बोले, ‘‘खबरदार, जो इस लड़के से मिली. तुझे शर्म नहीं आती… वह एक हिंदू लड़का है और तू मुसलमान…’’ नीरज की तरफ मुखातिब हो कर बोले, ‘‘आज के बाद शबीना की तरफ आंख उठा कर मत देखना, वरना तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का वह हाल करेंगे कि प्यार का सारा भूत उतर जाएगा.’’

नीरज ने समय की नजाकत को समझते हुए चुपचाप चले जाना ही उचित समझा.

अब्बू ने शबीना का हाथ झटकते हुए अम्मी की तरफ धक्का दिया और गरजते हुए बोले, ‘‘नफीसा, शबीना का ध्यान रखो और देखो अब यह लड़का कभी शबीना से न मिले. इस किस्से को यहीं खत्म करो,’’ और यह कहते हुए वे उलटे पैर वापस चले गए.

अब्बू के जाते ही जो शबीना अभी तक तकरीबन बेहोश सी पड़ी थी, तेजी से खड़ी हो गई और अम्मी से बोली, ‘‘अम्मी, यह सब क्या है? आप ने इन लोगों को क्यों बुलाया? अरे, मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है कि ये इतने सालों में कभी तो हमारा हाल पूछने नहीं आए. हम मर रहे हैं या जी रहे हैं, पेटभर खाना खाया है कि नहीं, कैसे हम जिंदगी गुजार रहे हैं. दोदो पैसे कमाने के लिए हम ने क्याक्या काम नहीं किया.

‘‘बोलो न अम्मी, तब ये कहां थे? जब हमारी जिंदगी में चंद खुशियां आईं, तो आ गए बाप का हक जताने. मेरा बस चले, तो आज मैं उन का सिर फोड़ देती.’’

‘‘शबीना…’’ कहते हुए अम्मी ने एक जोरदार चांटा शबीना को रसीद कर दिया और बोलीं, ‘‘बहुत हुआ… अपनी हद भूल रही है तू. भूल गई कि उन से मेरा निकाह ही नहीं हुआ है, दिल का रिश्ता है. मैं उन के बारे में एक भी गलत लफ्ज सुनना पसंद नहीं करूंगी. कल से तुम्हारा और नीरज का रास्ता अलगअलग है.’’

Valentine’s Special- हरिनूर: भाग 3

शबीना सारी रात रोती रही. उस की आंखें सूज कर लाल हो गईं. सुबह जब अम्मी ने शबीना को इस हाल में देखा, तो उन्हें बहुत दुख हुआ. वे उस के बिखरे बालों को समेटने लगीं. मगर शबीना ने उन का हाथ झटक दिया.

बहरहाल, इसी तरह दिनहफ्ते, महीने बीतने लगे. शबीना और नीरज की कोई बातचीत तक नहीं हुई. न ही नीरज ने मिलने की कोशिश की और न ही शबीना ने.

इसी तरह एक साल बीत गया. अब तक अम्मी ने मान लिया था कि शबीना अब नीरज को भूल चुकी है.

उसी दौरान शबीना ने अपनी फैशन डिजाइन के काम में काफी तरक्की कर ली थी और घर में अब तक सब नौर्मल हो गया था. सब ने सोचा कि अब तूफान शांत हो चुका है.

वह दिन शबीना की जिंदगी का बहुत खास दिन था. आज उस के कपड़ों की प्रदर्शनी थी. वह तेजतेज कदमों से लिफ्ट की तरफ बढ़ रही थी, तभी लिफ्ट का दरवाजा खुला, तो सामने खड़े शख्स को देख कर उस के पैर ठिठक गए.

‘‘कैसी हो शबीना?’’ उस ने बोला, तो शबीना की आंखों से आंसू आ गए. बिना कुछ बोले भाग कर वह उस के गले लग गई.

‘‘तुम कैसे हो नीरज? उस दिन तुम्हारी इतनी बेइज्जती हुई कि मेरी हिम्मत ही नहीं हुई कि तुम से कैसे बात करूं, पर सच में मैं तुम्हें कभी भी नहीं भूली…’’

नीरज ने उस के मुंह पर हाथ रख दिया, ‘‘वह सब छोड़ो, यह बताओ कि तुम यहां कैसे?

‘‘आज मेरे सिले कपड़ों की प्रदर्शनी लगी है, पर तुम…’’

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‘‘मैं यहां का मैनेजर हूं.’’

शबीना ने मुसकराते हुए प्यारभरी निगाहों से नीरज को देखा. नीरज को लगा कि उस ने सारे जहां की खुशियां पा ली हैं.

‘‘अच्छा सुनो, मैं यहां का सारा काम खत्म कर के रात में 8 बजे तुम से यहीं मिलूंगी.’’

आज शबीना का मन अपने काम में नहीं लग रहा था. उसे लग रहा था कि जल्दी से नीरज के पास पहुंच .

शबीना को देखते ही नीरज बोला, ‘‘कुछ इस कदर हो गई मुहब्बत तनहाई से अपनी कि कभीकभी इन सांसों के शोर को भी थामने की कोशिश कर बैठते हैं जनाब…’’

शबीना मुसकराते हुए बोली, ‘‘शिकवा तो बहुत है मगर शिकायत कर नहीं सकते… क्योंकि हमारे होंठों को इजाजत नहीं है तुम्हारे खिलाफ बोलने की,’’ और वे दोनों खिलखिला कर हंस पड़े.

‘‘नीरज, तुम्हें पता नहीं है कि आज मैं मुद्दतों बाद इतनी खुल कर हंसी हूं.’’

‘‘शायद मैं भी…’’ नीरज ने कहा. रात को दोनों ने एकसाथ डिनर किया और दोनों चाहते थे कि इतने दिनों की जुदाई की बातें एक ही घंटे में खत्म कर दें, जो कि मुमकिन नहीं था. फिर वे दोनों दिनभर के काम के बाद उसी पुराने गार्डन या कैफे में मिलने लगे.

लोग अकसर उन्हें साथ देखते थे. शबीना के घर वालों को भी पता चल गया था, पर उन्हें लगता था कि वे शादी नहीं करेंगे. वे इस बारे में शबीना को समयसमय पर हिदायत भी देते रहते थे.

इसी तरह साल दर साल बीतने लगे. एक दिन रात के अंधेरे में उन दोनों ने अपना शहर छोड़ एक बड़े से महानगर में अपनी दुनिया बसा ली, जहां उस भीड़ में उन्हें कोई पहचानता तक नहीं था. वहीं पर दोनों एक एनजीओ में नौकरी करने लगे.

उन दोनों का घर छोड़ कर अचानक जाना किसी को अचरज भरा नहीं लगा, क्योंकि सालों से लोगों को उन्हें एकसाथ देखने की आदत सी पड़ गई थी. पर अम्मी को शबीना का इस तरह जाना बहुत खला. वे काफी बीमार रहने लगीं. जोया आपा का भी निकाह हो गया था.

इधर शबीना अपनी दुनिया में बहुत खुश थी. समय पंख लगा कर उड़ने लगा था. एक दिन पता चला कि उस की अम्मी को कैंसर हो गया और सब लोगों ने यह कह कर इलाज टाल दिया था कि इस उम्र में इतना पैसा इलाज में क्यों बरबाद करें.

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शबीना को जब इस बात का पता चला, तो उस ने नीरज से बात की.

नीरज ने कहा, ‘‘तुम अम्मी को अपने पास ही बुला लो. हम मिल कर उन का इलाज कराएंगे.’’

शबीना अम्मी को इलाज कराने अपने घर ले आई. अम्मी जब उन के घर आईं, तो उन का प्यारा सा संसार देख कर बहुत खुश हुईं.

नीरज ने बड़ी मेहनत कर पैसा जुटाया और उन का इलाज कराया और वे धीरेधीरे ठीक होने लगीं. अब तो उन की बीमारी भी धीरेधीरे खत्म हो गई. मगर अम्मी को बड़ी शर्मिंदगी महसूस होती. नीरज उन की परेशानी को समझ गया.

एक दिन शाम को अम्मी शबीना के साथ बैठी थीं, तभी नीरज भी पास आ कर बैठ गया और बोला, ‘‘अम्मी, जिंदगी में ज्यादा रिश्ते होना जरूरी नहीं है, पर रिश्तों में ज्यादा जिंदगी होना जरूरी है. अम्मी, जब बनाने वाले ने कोई फर्क नहीं रखा, तो हम कौन होते हैं फर्क रखने वाले.

‘‘अम्मी, मेरी तो मां भी नहीं हैं, मगर आप से मिल कर वह कमी भी पूरी हो गई.’’

अम्मी ने प्यार से नीरज को गले लगा लिया, तभी नीरज बोला, ‘‘आज एक और खुशखबरी है, आप जल्दी ही नानी बनने वाली हैं.’’

अब अम्मी बहुत खुश थीं. वे अकसर शबीना के घर आती रहतीं. समय के साथ ही शबीना ने प्यारे से बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम शबीना ने हरिनूर रखा.

शबीना ने यह नाम दे कर उसे हिंदूमुसलमान के झंझावातों से बरी कर दिया था.

Valentine’s Special- हरिनूर: भाग 1

‘‘अरे, इस बैड नंबर8 का मरीज कहां गया? मैं तो इस लड़के से तंग आ गई हूं. जब भी मैं ड्यूटी पर आती हूं, कभी बैड पर नहीं मिलता,’’ नर्स जूली काफी गुस्से में बोलीं.

‘‘आंटी, मैं अभी ढूंढ़ कर लाती हूं,’’ एक प्यारी सी आवाज ने नर्स जूली का सारा गुस्सा ठंडा कर दिया. जब उन्होंने पीछे की तरफ मुड़ कर देखा, तो बैड नंबर 10 के मरीज की बेटी शबीना खड़ी थी.

शबीना ने बाहर आ कर देखा, फिर पूरा अस्पताल छान मारा, पर उसे वह कहीं दिखाई नहीं दिया और थकहार कर वापस जा ही रही थी कि उस की नजर बगल की कैंटीन पर गई, तो देखा कि वे जनाब तो वहां आराम फरमा रहे थे और गरमागरम समोसे खा रहे थे.

शबीना उस के पास गई और धीरे से बोली, ‘‘आप को नर्स बुला रही हैं.’’

उस ने पीछे घूम कर देखा. सफेद कुरतासलवार, नीला दुपट्टा लिए सांवली, मगर तीखे नैननक्श वाली लड़की खड़ी हुई थी. उस ने अपने बालों की लंबी चोटी बनाई हुई थी. माथे पर बिंदी, आंखों में भरापूरा काजल, हाथों में रंगबिरंगी चूडि़यों की खनखन.

वह बड़े ही शायराना अंदाज में बोला, ‘‘अरे छोडि़ए ये नर्सवर्स की बातें. आप को देख कर तो मेरे जेहन में बस यही खयाल आया है… माशाअल्लाह…’’

‘‘आप भी न…’’ कहते हुए शबीना वहां से शरमा कर भाग आई और सीधे बाथरूम में जा कर आईने के सामने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया. फिर हाथों को मलते हुए अपने चेहरे को साफ किया और बालों को करीने से संवारते हुए बाहर आ गई.

तब तक वह मरीज, जिस का नाम नीरज था, भी वापस आ चुका था. शबीना घबरा कर दूसरी तरफ मुंह कर के बैठ गई.

नीरज ने देखा कि शबीना किसी भी तरह की बात करने को तैयार नहीं है, तो उस ने सोचा कि क्यों न पहले उस की मम्मी से बात की जाए.

शबीना की मां को टायफायड हुआ था, जिस से उन्हें अस्पताल में भरती होना पड़ा था. नीरज को बुखार था, पर काफी दिनों से न उतरने के चलते उस की मां ने उसे दाखिल करा दिया था.

नीरज की शबीना की अम्मी से काफी पटती थी. परसों ही दोनों को अस्पताल से छुट्टी मिलनी थी, पर तब तक नीरज और शबीना अच्छे दोस्त बन चुके थे.

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शबीना 10वीं जमात की छात्रा थी और नीरज 11वीं जमात में पढ़ता था. दोनों के स्कूल भी आमनेसामने थे. वैसे भी फतेहपुर एक छोटी सी जगह है, जहां कोई भी आसानी से एकदूसरे के बारे में पता लगा सकता है. सो, नीरज ने शबीना का पता लगा ही लिया.

एक दिन स्कूल से बाहर आते समय दोनों की मुलाकात हो गई. दोनों ही एकदूसरे को देख कर खुश हुए. उन की दोस्ती और गहरी होती गई.

इसी बीच शबीना कभीकभार नीरज के घर भी जाने लगी, पर वह नीरज को अपने घर कभी नहीं ले गई.

ऐसे ही 2 साल कब बीत गए, पता ही नहीं चला. अब यह दोस्ती इश्क में बदल कर रफ्तारफ्ता परवान चढ़ने लगी.

एक दिन जब शबीना कालेज से घर में दाखिल हुई, तो उसे देखते ही अम्मी चिल्लाते हुए बोलीं, ‘‘तुम्हें बताया था न कि तुम्हें देखने के लिए कुछ लोग आ रहे हैं, पर तुम ने वही किया जो 2 साल से कर रही हो. तुम्हारी जोया आपा ठीक ही कह रही थीं कि तुम एक लड़के के साथ मुंह उठाए घूमती रहती हो.’’

‘‘अम्मी, आप मेरी बात तो सुनो… वह लड़का बहुत अच्छा है. मुझ से बहुत प्यार करता है. एक बार मिलकर तो देखो. वैसे, तुम उस से मिल भी चुकी हो,’’ शबीना एक ही सांस में सबकुछ कह गई.

‘‘वैसे अम्मी, अब्बू कौन होते हैं हमारी निजी जिंदगी का फैसला करने वाले? कभी दुखतकलीफ में तुम्हारी खैर पूछने आए, जो आज इस पर उंगली उठाएंगे? हम मरें या जीएं, उन्हें कोई फर्क पड़ता है क्या?

‘‘शायद आप भूल गई हो, पर मेरे जेहन में वह सबकुछ आज भी है, जब अब्बू नई अम्मी ले कर आए थे. ब नई अम्मी ने अब्बू के सामने ही कैसे हमें जलील किया था.

‘‘इतना ही नहीं, हम सभी को घर से बेदखल भी कर दिया था.’’ तभी जोया आपा घर में आईं.

‘‘अरे जोया, तुम ही इस को समझाओ. मैं तुम दोनों के लिए जल्दी से चाय बना कर लाती हूं,’’ ऐसा कहते हुए अम्मी रसोईघर में चली गईं.

रसोईघर क्या था… एक बड़े से कमरे को बीच से टाट का परदा लगा कर एक तरफ बना लिया गया था, तो दूसरी तरफ एक पुराना सा डबल बैड, टूटी अलमारी और अम्मी की शादी का एक पुराना बक्सा रखा था, जिस में अम्मी के कपड़े कम, यादें ज्यादा बंद थीं. मगर सबकुछ रखा बड़े करीने से था.

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तभी अम्मी चाय और बिसकुट ले कर आईं और सब चाय का मजालेने लगे.

शबीना यादों की गहराइयों में खो गई… वह मुश्किल से 6-7 साल की थी, जब अब्बू नई अम्मी ले कर आए थे. वह अपनी बड़ी सी हवेली के बगीचे में खेल रही थी. तभी नई अम्मी घर में दाखिल हुईं. उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है. उस की अम्मी हर वक्त रोती क्यों रहती हैं?

पेड़ से अमृत धारा गिरने का अंधविश्वास

आज 21वीं शताब्दी में भी अंधविश्वास किस तरह पैर पसारता चला जा रहा है. इसका एक ज्वलंत उदाहरण छत्तीसगढ़ के जिला कवर्धा के ग्राम धमकी में आप देख सकते हैं. जहां एक अर्जुन के पेड़ से जब पानी का स्रोत फूट पड़ा तो लोग पूजा अर्चना करने लगे और निकल रहे पानी को अमृत धारा मानकर पी रहे हैं.

ग्राम धमकी में अजीबो-गरीब मामला सामने आया है. कौहा अर्जुन वृक्ष का नाम सुनकर भले ही मुंह कड़वाहट से भर जाता हो, लेकिन यहां एक कौहा पेड़ लोगों को अंधविश्वास के युग में ले आया है क्योंकि आम लोग इस पानी को तमाम मर्जो की दवा मान रहे हैं.

स्थानीय लोग मासूमियत के साथ कह रहे हैं कि यह पानी पीने से स्वास्थ्य गत फायदा मिलेगा.दर असल, पानी का स्वाद नारियल पानी जैसा और रंग हल्का मटमैला है. और जन चर्चा में आने के कारण यह अफवाह फैल गई है कि यह लाभ ही लाभ देगा. मगर यह भोले-भाले लोग नहीं जानते कि पेड़ से पानी की धार फूटना एक सामान्य घटना है.

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कवर्धा विकासखंड अंतर्गत ग्राम धमकी में एक पुराने कौहा पेड़ से पानी की धार निकल रही है, जिसे कुछ ग्रामीण दैवीय चमत्कार मान कर ग्रहण कर रहे हैं. भले ही मेडिकल विज्ञान में रोगों को दूर करने के नित नए प्रयोग किए जा रहे हो आधुनिक चिकित्सा से इलाज किया जा रहा हो, लेकिन शिक्षा और जागरूकता के आज के समय में लोग जड़ी-बूटियों के साथ रोगों को दूर करने का दावा करते हैं.

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दरअसल, अशिक्षा और अपवाह बाजी के कारण अनेक झूठ हमारे समाज में अपना गहराई स्थान बना चुके हैं. जिसकी वजह से ऐसी घटनाओं का प्रचार होने लगता है.

ग्रामीण अंचल में एक कहावत है कि अगर दवा विश्वास के साथ ली जाए तो हर बीमारी ठीक हो जाती है. यही कारण है कि इन दिनों ग्राम धमकी पहुंच मुख्य मार्ग किनारे स्थित कौहा पेड़ से पानी की धार निकलने से ग्रामीणों में अंधविश्वास उछाल मार रहा है. ग्रामीण जन इसे एक “दैवीय चमत्कार” मानकर बोतलों में भर कर घर ले जा रहे हैं और उस पानी को पीकर अपने आप को रोग मुक्त होने का भ्रम पाल रहे हैं.

शुरू हो गया पूजा पाठ और अंधविश्वास

पेड़ से निकल रहे पानी को लोग चमत्कार मान रहे हैं. जबकि यह एक सामान्य घटना है,. इसके पूर्व भी अनेक जगहों पर पेड़ से पानी निकलने की घटना हुई है जिसे वैज्ञानिक और चिकित्सा शास्त्री विश्लेषण करके यह बता चुके हैं कि यह एक बहुत साधारण बात है.

मगर अंधविश्वास के मारे बड़ी मात्रा में निकल रहे इस सफेद द्रव्य को चखकर इसका स्वाद मीठा होना बता रहे हैं और यह मानते हैं कि इससे अनेक बीमारियां दूर हो जाती है. हमारे संवाददाता ने एक वन अधिकारी से बात की तो उन्होंने बताया वनस्पति विज्ञान की यह सामान्य घटना है जंगल में जब पानी नहीं मिलता तो कई बार जानकार वन अधिकारी, कर्मचारी पेड़ से पानी निकालकर प्यास बुझाते हैं.

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मगर लोग इस पदार्थ को लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इसे चमत्कार मान “पूजा-अर्चना” कर रहे हैं. वहीं इस पानी को बोतल में भर कर अपने घर भी ले जा रहे हैं. यहां यह भी महत्वपूर्ण जानकारी आपको बता दें कि पेड़ से पानी निकलने की बात जैसे-जैसे ही आस-पास के गांव में फैली,यहां लोग जुटने लगे और पानी बोतल में भरकर घर ले जाने का सिलसिला लगातार चल रहा है. कुछ लोग इस पेड़ की अगरबत्ती जला कर पूजा अर्चना भी कर रहे हैं यहां यह भी महत्वपूर्ण तथ्य है कि अभी तक शासन प्रशासन की ओर से लोगों को जागरूक करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है. जो यह बताता है कि हमारा शासन प्रशासन किस तरह लोगों को अंधविश्वास में डूबने उतरने के लिए छोड़कर कुंभकरण जैसी निंद्रा में है.

दरकार है अंधविश्वास भगाने की

वस्तुतः ऐसी घटनाएं हमारे देश में आमतौर पर घटित होती रहती हैं. और अशिक्षा, अंधविश्वास के कारण लोग इस के फेर में पड़कर अपना समय बर्बाद करते हैं और स्वास्थ्य भी.

छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध चिकित्सक और अंधविश्वास के खिलाफ लंबे समय से जागरूकता प्रसारित करने वाले डॉ .दिनेश मिश्र के मुताबिक बरसात और ठंड के मौसम में पेड़ों से इस प्रकार पानी निकलना एक सामान्य सी प्रक्रिया है ,यह कोई चमत्कार नहीं है .पेड़ों में जमीन से पानी ऊपर खींचने के लिए एक विशिष्ट उत्तक होता हैं ,जिन्हें जाइलम कहते हैं जाइलम का काम ही अपनी कोशिकाओं के माध्यम से जमीन से पानी खींच कर उस पानी को अपनी नलिकाओं से पूरे पेड़ के विभिन्न अंगों में पहुंचाना है इसके लिए विशिष्ट रचनाएं होती है जिससे पानी ऊपर चढ़कर पेड़ के सभी भागों अंग तक पहुंचता है,जल की आपूर्ति करता है बरसात और ठंड के मौसम में जब जमीन में पानी की मात्रा अच्छी ,व भूजल का दबाव अधिक रहता है.

उन्होंने जानकारी दी है कि वायुमण्डल में आर्द्रता होती है, तब पेड़ की जड़ों से जो पानी खींचा जाता है वह पेड़ के किसी भी हिस्से से जो कमजोर हो, अथवा तने में मौजूद छिद्रों से से पानी के रूप में निकलता है और यह कई बार एक पतली सी धारा से लेकर अधिक मोटे प्रवाह के रूप में भी कई स्थानों से भी निकलते हुए देखा गया है ,कभी-कभी यह जल स्वच्छ भी रहता है और कभी-कभी पेड़ के भीतरी अंगों उसमे उपस्थित जीवद्रव्य, कुछ बैक्टेरिया, और मेटाबोलिज्म के कारण उत्पन्न गैसों व अशुद्धियों से रंग में कुछ परिवर्तन हो सकता है. जो मटमैला, तो कभी दूधिया दिखाई पड़ता है है .

जॉन लिंडले की पुस्तक फ़्लोरा इंडिका में इस प्रकार से जल,व दूधिया स्त्राव का वर्णन है.वही डॉ रेड्डी की किताब वानिकी में इस प्रकार के स्त्राव का वर्णन आता है यह तने के वात रन्ध्र (स्टोमेटा) से निकलता है और कभी कभी तने के जख्मी हिस्से से भी स्त्रावित होता है.

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Yo Yo Honey Singh के इस गाने पर डांस करती नजर आईं अक्षरा सिंह, देखें Video

भोजपुरी सिनेमा की फेमस एक्ट्रेस अक्षरा सिंह इन दिनों अपने वीडियोज और फोटो के कारण सुर्खियों में छायी रहती हैं. अब एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर चर्चित पंजाबी गाने ब्राउन रंग पर डांस करते हुए वीडियो फैंस के साथ शेयर किया है.

इस वीडियो में अक्षरा ब्लैक कलर की साड़ी में दिखाई दे रही हैं. वह अपनी अदाओं से फैंस को दीवाना बना रही हैं. बता दें कि इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर लाखों से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं.

 

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हाल ही में अक्षरा सिंह का  नया  गाना ‘जिसका चाटता है उसी को काटता है’ सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था. ये गाना इस बात की ओर भी इशारा किया कि फिर से उन्‍हें किसी ने ठेंस पहुंचाई. जिसके बाद उन्‍होंने  अपने इस गाने के जरिये विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब देने का काम किया.

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‘जिसका चाटता है उसी को काटता है’ को अक्षरा ने खुद गाया. इस गाने के गीतकार मनोज मतलबी, संगीतकार अविनाश झा घुंघरू  वीडियो निर्देशक पंकज सोनी हैं.

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Yeh Rishta Kya Kehlata hai फेम इस एक्ट्रेस ने टीवी इंडस्ट्री को कहा अलविदा

टीवी इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस लता सभरवाल (Lataa Saberwal) ने कुछ दिन पहले ही एक बड़ा ऐलान कर के अपने फैंस को बड़ा झटका दिया था.

दरअसल एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर फैंस के साथ ये शेयर की थी कि वो टीवी सीरियल्स की दुनिया को अलविदा कह रही हैं. और इसके बाद हर कोई ये जानना चाहता था कि आखिर लता सभरवाल टीवी इंडस्ट्री को क्यों छोड़ रही हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने इस फैसले की सही वजह बताई है. खबरों की मानें तो एक्ट्रेस ने इसकी वजह टीवी सीरियल्स से बोरियत होने को कहा है. लता सभरवाल ने कहा, लॉकडाउन ने हम सभी को एक अलग नजरिया दिया. उस वक्त मुझे एहसास हुआ कि मेरी प्राथमिकता मेरा 7 वर्षीय बेटा है, और मैं कुछ समाज के लिए भी करना चाहती थी.

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खबरों के अनुसार लता सभरवाल ने कहा, मैं 20 साल की उम्र से ही एक्टर बनना चाहती थी लेकिन मेरा लक्ष्य बदल गया. मैं अपने बेटे को उसकी पढ़ाई में मदद करना चाहती हूं. मैं उन लोगों के लिए वीडियोज बनाना चाहती हूं जो शारीरिक और मानसिक रुप से समर्थ नहीं हैं.

एक्ट्रेस ने कहा कि वह टीवी सीरियल्स से तंग आ चुकी थी. उन्होंने कहा, मैं टीवी शोज से ऊब चुकी थी. जहां हम रोज जाते हैं और कंटेंट बनाते हैं. लेकिन अब अगर ऐसा 5-6 दिनों का कंटेंट है तो ठीक है, नहीं तो मैं बॉलीवुड में काम करना चाहती हूं.

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उन्होंने आगे बताया कि  मैं लोगों को अपनी कहानी बताना चाहती हूं. कैसे लखनऊ के एक मीडिल क्लास फैमिली की लड़की जिसका पूरा परिवार पढ़ाई के क्षेत्र में हैं और प्रोफेशनल है, मगर वो एक्ट्रेस बनी. अब मैं कुछ ऐसा करना चाहती हूं जिससे लोगों की जिंदगी पर असर पड़े. उन्होंने अपने पति के बारे में भी बताया कि संजीव मुझे काफी सपोर्ट करते हैं.

Bigg Boss 14: अली गोनी ने रुबीना को लेकर कही ये बड़ी बात तो जैस्मिन हुईं गुस्से में लाल

टीवी का सबसे विवादित शो ‘बिग बॉस 14’ (Bigg Boss 14) का जल्द ही ग्रैंड फिनाले होने वाला है. तो ऐसे में घर में मौजूद कंटेस्टेंट बिग बॉस 14 की ट्राफी जीतने के लिए पूरी लगन से गेम खेल रहे हैं.

हाल ही में अर्शी खान और बीती रात अभिनव शुक्ला  घर से बेघर हो गए. अब घर में रुबीना दिलाइक, अली गोनी, राखी सावंत, राहुल वैद्य, देवोलीना भट्टाचार्जी, निक्की तम्बोली  बचे हुए हैं.

फिलहाल शो में रुबीना दिलाइक को सबसे स्ट्रांग कंटेस्टेंट माना जा रहा है. घर में रुबीना और अली के बीच टफ कम्पटीशन चल रहा है.

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शो में अली गोनी ने कहा है कि वह रुबीना को अपनी बहन मानते है. बीते एपिसोड में दिखाया गया कि रुबीना और जैस्मिन भसीन के बीच जमकर लड़ाई हुई थी. लेकिन इससे रुबीना और अली को कोई फर्क नहीं पड़ा.  और ऐसे में अली ने रूबीना को लेकर एक बड़ी बात कही है.

अली ने कहा है कि रुबीना लाइफ टाइम के लिए उनकी बहन है. क्योंकि जैस्मीन के बेघर होने के रुबीना के अलावा किसी ने भी घर में उसकी देखभाल नहीं की थी.

उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने मेरे लिए घर में खाना बनाया है. अली ने कहा ये भी बताया कि जब  मैं बीमार हो गया था तब रुबीना ने मेरा ख्याल रखा और मुझे बेहतर महसूस कराया. उसने भी बिना किसी को जाने मुझे कॉफी पिलाई. उसने मुझे मेरी बहन की तरह ही सब कुछ किया.

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अली के इस बात जैस्मिन भसीन गुस्सा होती नजर आ रही हैं. जी हां, जैस्मिन को गुस्से में देखने के बाद यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि जैस्मिन गुस्से में आकर अली से ब्रेकअप तो नहीं कर लेंगी.

शो के लेटेस्ट प्रोमो में जैस्मिन अली से कहती हैं कि ये ट्राफी भी रुबीना को दे देना. अब शो के अपकमिंग एपिसोड में ये देखना दिलचस्प होगा कि जैस्मिन, अली और रुबिना के रिश्ते से कितना इफेक्ट होती है और ऐसे में अली के साथ वह कैसा बर्ताव करती हैं.

जिंदगी का सफर: भारत की पहली महिला कुली संध्या मरावी

लेखक- कपूर चंद   

अधिकांश लोग औरत को अकसर कमजोर समझते हैं, लेकिन उन्हें यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि औरत कमजोर नहीं होती. वह अगर किसी काम को करने की ठान ले तो उस के लिए कुछ भी असंभव या मुश्किल नहीं होता. बल्कि वह उस काम को भी कर सकती है जिस पर पुरुष समाज अपना वर्चस्व समझता है.

जबलपुर के एक छोटे से गांव कुंडम की रहने वाली कल्याणी संध्या मरावी इस का जीताजागता उदाहरण है. वह कटनी रेलवे स्टेशन पर ऐसा काम करती हैं, जिसे देख कर लोग भी हैरान रह जाते हैं. 30 साल की संध्या वहां पर कुली के रूप में काम करती हैं.

संध्या ने यह काम खुशी से नहीं किया बल्कि उन के घर के ऐसे हालात हो गए जिस की वजह से उसे यह करने के लिए मजबूर होना पड़ा. दरअसल 22 अक्तूबर, 2016 को संध्या के पति भोलाराम मरावी की मृत्यु हो गई. वह लंबे समय से बीमार थे. पति की मौत के बाद संध्या पर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. घर में पति के अलावा कोई भी कमाने वाला नहीं था.

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पति जबलपुर के ही कटनी रेलवे स्टेशन पर कुली थे. उन की कमाई से मां, पत्नी और 3 बच्चों का पेट भरता था. पति की मौत के बाद संध्या की समझ में यह नहीं आ रहा था कि अब परिवार का खर्च कैसे चलेगा. अपनी बूढ़ी सास के अलावा तीनों बच्चों को कैसे पालेगी. यही सोचसोच कर वह परेशान हो रही थीं.

उन्होंने यह तय कर लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह परिवार को भूखों नहीं मरने देगी. काफी सोचनेविचारने के बाद उस ने तय कर लिया वह पति के काम को ही शुरू करेगी. वह कटनी रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर के पास पहुंची और उन्हें अपनी समस्या से अवगत कराया.

स्टेशन मास्टर ने संध्या से यही कहा कि वह उस की इतनी मदद कर सकते हैं कि उस के पति का कुली का लाइसैंस उस के नाम ट्रांसफर करा देंगे. तो क्या वह कुली के रूप में यहां काम कर सकती है? संध्या तो पहले ही इस के लिए मन बना कर आई थीं, इसलिए तुरंत हां कर दी और दूसरी बात यह थी कि इस काम को करने के अलावा उन के सामने कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था.

संध्या ने अपने परिवार का बोझ कम करने के लिए यात्रियों का लगेज उठाना शुरू किया तो उस के सामने कई तरह की परेशानियां आईं. उन्हें कुली के काम करने का कोई अनुभव नहीं था फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. स्टेशन पर 45 पुरुष कुलियों के बीच वह अकेली महिला कुली थीं.

शुरुआत में यात्री भी उसे अपना लगेज देने में झिझकते थे. उन्हें इस बात का डर रहता था कि कहीं यह महिला उस का लगेज गिरा कर कोई बड़ा नुकसान न कर दे. क्योंकि अधिकांश पुरुष महिला को असहाय और कमजोर ही समझते हैं. लेकिन संध्या ने जिम्मेदारी के साथ अपने काम को अंजाम देना शुरू किया.

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वह यात्रियों के लगेज को सिर और कंधे पर रख कर जब चलती थीं तो तमाम लोग उसे आश्चर्य से देखते. संध्या ने किसी की भी कोई परवाह नहीं की क्योंकि अपने परिवार के बोझ के आगे उन्हें यात्रियों का वह बोझ हल्का लगता था.

संध्या कुंडम गांव में रहती हैं. वह वहां से 45 किलोमीटर का सफर तय कर के पहले जबलपुर रेलवे स्टेशन पहुंचती हैं और इस के बाद 90 किलोमीटर दूर कटनी पहुंचती हैं. इस तरह रोजाना 270 किलोमीटर का सफर तय करके वह अपने परिवार के लिए रोजीरोटी मुहैया करा रही हैं. वर्ष 2017 से कुली का काम कर रही संध्या का सपना है कि वह अपने तीनों बच्चों को खूब पढ़ालिखा कर कामयाब इंसान बनाए.

रोजाना 270 किलोमीटर का सफर तय करने की वजह से उन का काफी समय बर्वाद हो जाता है, जिस से वह अपने बच्चों को समय नहीं दे पाती हैं. संध्या चाहती हैं कि उन का तबादला उन के घर के समीप यानी जबलपुर कर दिया जाए तो उन की परेशानी कुछ कम हो सकती है.

Crime: अकेला घर, चोरों की शातिर नजर

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के एक कारोबारी परिवार का ही किस्सा लेते हैं. 17 जनवरी, 2021 को वहां के शास्त्रीनगर इलाके के रहने वाले बौबी जैन, जिन का कानपुर में लोहे का कारोबार है, अपने परिवार के साथ आगरा गए थे, लेकिन जब वापस लौटे तो घर में बड़ी चोरी हो चुकी थी.

बौबी जैन के घर का मेन ऐंट्री वाला गेट टूटा हुआ था. घर के अंदर सामान फैला हुआ था. सवा लाख रुपए की नकदी के अलावा पत्नी के हीरे और सोने के जेवर भी गायब थे. उन जेवरों की कीमत तकरीबन 14 लाख रुपए थी.

पुलिस तहकीकात में पता चला कि चोरों को इस बात की खबर थी कि बौबी जैन का परिवार घर पर नहीं है. तभी यह कांड कर दिया गया.

बिहार के बांका जिले में साल 2020 के नवंबर महीने में शिव विहार (थाना कालोनी) में चोरों ने देर रात पूर्व जिला पार्षद कंचन साह का घर सूना पा कर ताला तोड़ कर नकदी समेत तकरीबन 3 लाख रुपए की कीमत के जेवर की चोरी कर ली.

इस बाबत कंचन साह के पति दिलीप कुमार साह ने पुलिस को बताया कि छठ पर्व के मौके पर वे अपने पुश्तैनी घर रजौन में थे. इसी दौरान रात को चोरों ने ताला तोड़ कर घर में रखे नकद 30,000 रुपए समेत सोने और चांदी के जेवरों की चोरी कर ली.

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सितंबर, 2020 में मध्य प्रदेश के इंदौर के बाणगंगा थाना इलाके में चोरों ने एक निजी गैस कंपनी के ठेकेदार के सूने घर में धावा बोल कर लाखों रुपए का सोना लूट लिया. चोरी की पृरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. घर के मालिक के मुताबिक चोर तकरीबन 22 तोला सोना ले गए, जिस की कीमत 30 लाख रुपए के आसपास आंकी गई.

देशभर में चोरी के ऐसे न जाने कितने ही मामले रोज सामने आते रहते हैं. दिल्ली भी इस से अछूती नहीं है. साल 2018 में आईपीसी के तहत दर्ज अपराध के कुल 2,36,476 मामलों में से 75 फीसदी मामले चोरी के थे. हद तो यह रही थी कि चोरी के इन मामलों में से 86 फीसदी मामलों में पुलिस चोरों का पता ही नहीं लगा पाई थी.

कहने का मतलब है कि चोरी होना तो जैसे अब अपराध ही नहीं रह गया है. इस से चोरों के हौसले इतने ज्यादा बुलंद हो चुके हैं कि अगर उन्हें पता चल जाए कि फलां घर में कोई नहीं है, तो वे दिनदहाड़े वहां कांड कर देते हैं. रात हो तो कहने ही क्या.

नवंबर, 2020 का एक मामला देखें. चोरों ने एक रात उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद इलाके के कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली सैक्टर 3 में कारोबारी पीयूष कुमार के बंद घर में पहले दारू पार्टी की उस के बाद लाखों के माल पर हाथ साफ कर दिया.

कुछ चोर तो इतने शातिर होते हैं कि अपनी काली करतूतों से मीडिया और फिल्मी दुनिया तक में छा जाते हैं. ‘बंटी चोर’ याद है? उस का असली नाम देविंदर सिंह है और अपनी चालाकी भरी चोरियों के चलते वह ‘सुपर चोर’ का खिताब पा चुका है. एक समय तो वह इतना ज्यादा चर्चा में था कि उस पर साल 2008 में फिल्म ‘ओए लकी लकी ओए’ बना दी गई थी. वह साल 2010 में टैलीविजन के रिएलिटी शो ‘बिग बौस’ में भी दिखाई दिया था.

ऐसा ही एक चोर कालिया नाम का है, जो राजस्थान के बाड़मेर इलाके का रहने वाला है. कालिया चोरी की 100 से ज्यादा वारदातों को अंजाम दे चुका है और उस पर 45 मुकदमे दर्ज हैं. उस ने बाड़मेर पुलिस की नाक में दम कर रखा है.

बताया जाता है कि कालिया चोर को धंधे वालियों और नशे की बुरी लत है. इन दोनों के लिए वह
कितनी बार चोरी कर चुका है, खुद उसे भी नहीं पता. फिलहाल वह पुलिस की गिरफ्त में है.

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देश में न जाने कितने ही बंटी और कालिया जैसे चोर भरे पड़े हैं जो खाली घरों की रेकी कर के वहां चोरी की वारदात को अंजाम देते हैं. बहुत से शहरी इलाकों में घर में काम करने वाली नौकरानी, ड्राइवर या चौकीदार ही इन को अपने साहब के आशियाने का भेद दे देते हैं, जिस से इन का काम और भी आसान हो जाता है.

लिहाजा, ऐसे लोगों से भी सावधान रहना चाहिए. दिलोदिमाग से यह बात निकाल देनी चाहिए कि हमारे साथ ऐसा नहीं होगा. कहते हैं कि ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’, पर साथ ही यह भी सच है कि ‘जब जागो तभी सवेरा’. खुद के घर में कोई ऐसा हादसा हो, इस से पहले अगर कुछ कदम उठा लिए जाएं तो चोरों को अपनी हाथ की सफाई दिखाने का मौका ही हाथ नहीं लगेगा. जब भी परिवार समेत घर से बाहर जाएं, तो इन बातों पर अमल जरूर करें :

-घर के किसी कमरे की लाइट जला कर जाएं. इस से घर रात को एकदम सूना नहीं लगेगा.

-घर की कीमती चीजों की नुमाइश न करें. अगर कामवाली या कोई दूसरा नौकर घर पर आता है, तो आंख मूंद कर उस पर यकीन न करें. जेवर और नकदी को अलमारी में ही लौकर रखें.

-अपने घर की दूसरी जोड़ी चाबी को भरोसेमंद पड़ोसी के पास रख सकते हैं. अगर किसी पर यकीन नहीं है, तो उन्हें एकदम सेफ जगह पर रखें.

-गैरजरूरी कीमती सामान को बैंक के लौकर में रखें.

-परिवार समेत घर से बाहर जाने पर घर के हर खिड़कीदरवाजे को अच्छी तरह बंद करें और जहां जरूरी हो ताला लगाएं.

-किसी भी सेल्समैन, सब्जी वाले या किसी अनजान से अपने या अपने घर के बारे में ज्यादा बात न करें.

-अगर सीसीटीवी कैमरा लगवा सकते हैं, तो जरूर लगवाएं.

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