हिंदी फिल्म ‘‘अंधाधुन’’ की मलयालम रीमेक ‘‘भ्रामम’’ का ट्रेलर हुआ वायरल, देखें Video

अमेजन प्राइम वीडियो पर सात अक्टूबर से स्ट्रीम होगी रवि के चंद्रन निर्देशित मलयालम रोमांचक अपराध फिल्म ‘‘भ्रामम’’ 2018 में श्रीराम राघवन दृष्टिहीन होने का नाटक करने वाले पियानो वादक की कहानी पर रहस्य प्रधान रोमांचक अपराध फिल्म ‘‘अंधाधुन’’ लेकर आए थे,जिसे जबरदस्त सफलता मिली थी. इस फिल्म में उत्कृष्ट अभिनय करने के लिए अभिनेता आयुष्मान खुराना को कई पुरस्कार भी मिले थे.

अब उसी फिल्म को मलयालम भाषा में निर्देशक रवि के चंद्रन ‘‘भ्रामक’’ नाम से लेकर आ रहे हैं, जिसमें मलयालम सुपर स्टार पृथ्वीराज सुकुमारन की मुख्य भूमिका है. इसे अमेजाॅन प्राइम वीडियो ने सात अक्टूबर 2021 से स्ट्रीम करने का फैसला किया है. पृथ्वीराज सुकुमारन ने स्वयं ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है. पृथ्वीराज सुकुमारन ने अपने ट्वीट में यह भी लिखा है कि ‘कोरोना’महामारी के चलते केरला में अभी तक थिएटर बंद है,इसलिए यह निर्णय हुआ है.

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फिल्म के स्ट्रीम होने से पहले मलयालम क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘‘भ्रामम’’ का ट्रेलर बाजार में आते ही वायरल हो चुका है. एपी इंटरनेशनल और वायकॉम18 स्टूडियोज द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित फिल्म ‘‘भ्रामम’’ में पृथ्वीराज सुकुमारन की मुख्य भूमिका के अलावा उन्नी मुकुंदन, राशी खन्ना, सुधीर करमना और ममता मोहनदास सहित कई प्रतिभाशाली कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में हैं.

‘‘भ्रामम का ट्रेलर रे मैथ्यूज के जीवन की एक झलक पेश करता है. पियानो वादक रे मैथ्यूज (पृथ्वीराज सुकुमारन ) खुद को दृष्टिहीन होने का नाटक करता है. जिसे अपने संगीत में एकांत मिलता है. लेकिन उसका संगीतमय रहस्य,उस वक्त रहस्य से भर जाता है, जब वह एक हत्या का गवाह बनता है और कई समस्याओं में उलझ जाता है. झूठ और छल का पर्दाभास होने पर पियानो वादक रे को अपनी जिंदगी बचाने के लिए मेजें बदलनी पड़ती है. संगीतकार जेक्स बिजॉय द्वारा रचे गए तार्किक पृष्ठभूमि संगीत के साथ, फिल्म एक अच्छी तरह से तैयार की गई पटकथा, एक अविश्वसनीय सहायक कलाकार और मुख्य भूमिका में पृथ्वीराज द्वारा एक शानदार प्रदर्शन पर आधारित है.

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फिल्म के प्रीमियर पर टिप्पणी करते हुए अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन ने कहा-“एक नेत्रहीन पियानोवादक की भूमिका निभाना एक कलाकार के रूप में एक बेरोजगार क्षेत्र में जाने जैसा था. लेकिन मुझे इस तरह के बारीक और स्तरीय चरित्र को चित्रित करने में बहुत मजा आया. भ्रामम एक अच्छी तरह से गढ़ी गई मर्डर मिस्ट्री है और दिलचस्प तत्वों से भरी हुई है,जो मलयालम दर्शकों और उससे आगे के लिए अपील करनी चाहिए. मैं अमेजॅन प्राइम वीडियो पर भ्रम के प्रीमियर की प्रतीक्षा कर रहा हूं और मुझे उम्मीद है कि इस फिल्म को दर्शकों से उतना ही प्यार और सराहना मिलेगी, जितना मुझे इस परियोजना के लिए काम करने में मजा आया, जो मेरे दिल के करीब है. ”

 

Bigg Boss फेम भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह की शार्ट ड्रेस देख भड़के यूजर्स, किया ट्रोल

भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह इन दिनों सुर्खियों में छायी हुई है. वह सोशल मीडिया पर फैंस के साथ फोटोज और वीडियो शेयर करती रहती हैं. अब उन्होंने वन पीस ड्रेस में अपनी एक फोटो शेयर की है, जो इंटरनेट पर धमाल मचा रहा है.

इस तस्वीर में एक्ट्रेस ग्रे कलर के सिंगल कुर्ते में नजर आ रही हैं उन्होंने चश्मा भी पहना हुआ है. इसके साथ ही फोटो में आप उनके हाथ में पर्स और मोबाइल भी देख सकते हैं.

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इस फोटो में अक्षरा स्टनिंग लग रही हैं. कुछ लोग उनके लुक की तारीफ कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोगों को उनका लुक नहीं पसंद आ रहा है.

अक्षरा सिंह की फोटो पर एक यूजर ने कमेंट किया है, ‘ये ड्रेस आपको शोभा नहीं दे रही है. तो वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है, आप जींस और टी-शर्ट में बहुत प्यारी लगती हो. इसके साथ ही कई यूजर्स ने उनकी तारीफ भी की है.

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बता दें कि बिग बॉस 0TT से एक्ट्रेस को ‘भोजपुरी की शेरनी’ का टैग मिला है. इससे पहले भी अक्षरा सिंह की कुछ तस्वीरें वायरल हुई थीं. इस दौरान उन्हें जींस और व्हाइट जींस में देखा गया था.

Bade Acche Lagte Hai 2: शादी से पहले बीमार होगा राम, क्या करेगी प्रिया

टीवी सीरियल ‘बड़े अच्छे लगते हैं 2 ’ (Bade Acche Lagte Hai 2)  में शादी का ट्रैक दिखाया जा रहा है. शो में राम (Ram) और प्रिया (Priya) की जल्द ही शादी होने वाली है. प्रिया की मेहंदी की रस्म शुरू हो चुकी है. उसके घरवाले काफी खुश है कि प्रिया की शादी हो रही है. शो के अपकमिंग एपिसोड में महाट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं, शो के नए ट्विस्ट एंड टर्न के बारे में.

शो में दिखाया जा रहा है कि प्रिया के घर में सब काफी खुश हैं. लेकिन मीरा बहुत इमोशनल हो जाती है. प्रिया उसे समझाती है. मीरा प्रिया को गले लगा लेती है. तो वहीं मामा जी कहते हैं कि प्रिया ने हम सबका ख्याल रखा, अब कोई उसकी देखभाल करेगा.

 

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प्रिया कहती है कि मुझे आप सबकी खुशी चाहिए. इसी बीच शो से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है. इसमें दिखाया जा रहा है कि राम को प्रॉन्स से एलर्जी है लेकिन उसके खाने में प्रॉन्स दिया गया है. जिसे राम खा लेगा. और ऐसे में वह शादी से पहले ही बीमार पड़ जाएगा.

शो में आपने देखा कि राम फिर से प्रिया का दिल जीत लेता है जब वह नंदिनी को छोड़ मीरा को चुनता है और प्रिया की माँ का सम्मान करता है.

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तो दूसरी तरफ राम प्रिया की बेकरी में आता है और देखता है कि वह कस्टमर से गुस्से में बात कर रही है. वह उसे चिढ़ाता है और याद दिलाता है कि जब उसने शिवी की सगाई के दौरान ऑर्डर करने के लिए फोन किया था तो उसने उसे कैसे डांटा था.

आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को ‘स्मार्ट फोन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि तकनीक के प्रयोग से कार्य करने में आसानी व पारदर्शिता आती है. इसके इस्तेमाल से कार्य क्षेत्र में दक्षता आती है. यह कार्य को सम्पादित करने वाले व्यक्ति को सम्मान का पात्र भी बनाती है. आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को दिया जा रहा स्मार्ट फोन उनकी कार्य पद्धति को स्मार्ट बनाएगा. इसके माध्यम से आप सब आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री शासन-प्रशासन एवं जनविश्वास जीतकर अपनी पहचान बना सकती हैं.

मुख्यमंत्री जी ने लोकभवन में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा आयोजित आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को ‘स्मार्ट फोन’ एवं आंगनबाड़ी केन्द्र के लिए ‘ग्रोथ मॉनीटरिंग डिवाइस’ वितरण कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे. मुख्यमंत्री जी ने अपने कर कमलांे द्वारा 20 आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को ‘स्मार्ट फोन’ एवं 10 आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को ‘ग्रोथ मॉनीटरिंग डिवाइस’ प्रदान किये. उन्होंने ‘एक संग मोबाइल एप’ लॉन्च किया. इस अवसर पर एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी.

इस अवसर पर प्रदेश में पोषण अभियान के अन्तर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को तकनीक से जोड़ने व उनकी कार्य सुविधा के लिए 1,23,000 ‘स्मार्ट फोन’ एवं बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए 1,87,000 ‘ग्रोथ मॉनीटरिंग डिवाइस’ वितरित किये जा रहे हैं.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सामान्य रूप से कहने के लिए यह केवल ‘स्मार्ट फोन व ‘ग्रोथ मॉनीटरिंग डिवाइस’ के वितरण का कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन इसकी गूंज सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने में नींव के पत्थर के रूप में है. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का संकल्प है कि पारदर्शी और ईमानदार सरकार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तकनीक के माध्यम से शासन की योजनाओं को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाया जाए. इसके लिए आवश्यक है कि ऐसे संसाधन उन लोगों को उपलब्ध कराए जाएं, जो शासन की योजनाओं को अन्तिम पायदान के व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के प्रति लोगों में सम्मान व आदर का भाव बढ़ा है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति या संस्था की पहचान विपत्ति व आपत्ति के समय पता चलती है. जो व्यक्ति संकट आने पर भाग खड़ा हो, सहयोग न करे वह, कितना भी बड़ा, सम्पन्न व बुद्धिमान हो, अगर उसकी बुद्धिमत्ता व उसका ऐश्वर्य लोक कल्याण व समाज कल्याण के उपयोग में नहीं आ रहा है, तो उसका कोई महत्व नहीं है. संकट के समय सहयोगात्मक व लोक कल्याणकारी कार्य करने वाला ही महत्वपूर्ण होता है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना की द्वितीय लहर के समय प्रदेश सरकार द्वारा निर्णय लिया गया कि प्रत्येक ग्राम व शहरी मोहल्लों में एक निगरानी समिति बनायी जाएगी. अप्रैल, 2021 में प्रदेश में निगरानी समितियां गठित की गयीं. इनके द्वारा घर-घर जाकर एक-एक व्यक्ति की पहचान कर संदिग्ध व्यक्ति को मेडिसिन किट उपलब्ध करायी गयी. इनकी सूची बनाकर अगले 24 घण्टे के अन्दर आर0आर0टी0 की टीम द्वारा जांच कराने की कार्यवाही की गयी. इस कार्य में 10 से 12 लोगों की एक टीम का गठन किया गया था, जिसमें आंगनबाड़ी, आशा वर्कर, ए0एन0एम0, ग्राम प्रधान, पार्षद, सहित ग्राम्य विकास, नगर विकास, पंचायतीराज तथा राजस्व विभाग के कर्मी शामिल थे.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना वर्करों एवं निगरानी समितियों के सहयोग से प्रदेश में कोरोना नियंत्रित स्थिति में है. प्रदेश में कोरोना नियंत्रण एक मॉडल के रूप में सामने आया है कि किस प्रकार सामूहिक प्रयासों से एक महामारी को नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं हुआ है, इसके पूर्व, राज्य सरकार इंसेफेलाइटिस के सफल नियंत्रण का मॉडल प्रस्तुत कर चुकी है. वर्ष 1977 से वर्ष 2017 तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के 07 जनपदों सहित प्रदेश के कुल 38 जनपदों में इन्सेफेलाइटिस रोग से मौतें होती थीं. इसमें अकेले बस्ती व गोरखपुर जनपद में प्रत्येक वर्ष डेढ़ से दो हजार बच्चों की असमय मृत्यु हो जाती थी. प्रदेश सरकार द्वारा किये गये प्रयासों से पूर्वी उत्तर प्रदेश में इन्सेफेलाइटिस रोग से होने वाली 95 से 97 प्रतिशत मृत्यु को नियंत्रित किया जा चुका है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना महामारी को नियंत्रित करने में कोरोना वॉरियर्स, खास तौर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, आशा, ए0एन0एम0 ने अत्यन्त सराहनीय कार्य किया है. उन्होंने कहा कि अच्छा कार्य करेंगे, तो समाज आपको सम्मान देगा. यही भूमिका आपको आगे बढ़ाएगी. कार्य करने से व्यक्ति शारीरिक रूप से मजबूत, मानसिक रूप से परिपक्व तथा आत्मविश्वास से भरपूर होता है. प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जनपद में कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं के लिए पोषाहार तैयार करने के लिए संयंत्र स्थापित किया जा रहा है. उसकी क्वॉलिटी की जांच की व्यवस्था की जा रही है. यह प्रदेश में मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर को कम करने व देश के औसत के समकक्ष लाने में मदद करेगा. इससे राज्य सरकार की दवा एवं अन्य खर्चाें में बचत होगी.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पिछले दिनों पोषण माह के कार्यक्रम में मैंने कहा था कि आंगनबाड़ी या आशा वर्कर का जितना पिछला मानदेय बकाया है, उसका तत्काल भुगतान किया जाए. विभाग ने उसकी कार्यवाही प्रारम्भ की है. यह पिछला वाला था. अभी सरकार उनको और भी देने जा रही है. आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री अपनी पूरी तन्मयता से कार्य कर रही हैं.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में एक्साइज के क्षेत्र में हावी गिरोह को पारदर्शी कार्यपद्धति एवं नीतियों को लाकर पूरी तरह से समाप्त किया. जब भ्रष्टाचार के सभी रास्ते बन्द कर दिये जाते हैं, तो विकास अपने आप बढ़ता हुआ दिखायी देता है. प्रदेश सरकार द्वारा सर्वांगीण विकास की नींव को रखने का कार्य किया जा रहा है. प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र के भवन का निर्माण कराया जा रहा है. इन आंगनबाड़ी भवनों को बाद में प्री-प्राइमरी के रूप में बनाने पर सरकार गम्भीरता से विचार कर रही है.

इस अवसर पर कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए महिला कल्याण बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती स्वाती सिंह ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने बड़ी निष्ठा से कार्य किया. मुख्यमंत्री जी नेे वर्ष 2017 में प्रदेश की बागडोर संभालते ही, राज्य में गुड गवर्नेंस लाए. इस गुड गवर्नेंस का आधार ई-गवर्नेंस है. मुख्यमंत्री जी की मान्यता है कि जब तक आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को ई-गवर्नेंस से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक गुड गवर्नेंस की सोच को साकार नहीं किया जा सकता. इसके दृष्टिगत आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को ‘स्मार्ट फोन’ तथा सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों को ‘ग्रोथ मॉनीटरिंग डिवाइस’ प्रदान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ‘एक संग मोबाइल एप’ आंगनबाड़ी केन्द्रों को सामुदायिक भागीदारी का एक मंच प्रदान करेगा, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति एवं संस्था अपनी सहायता प्रदान कर सकता है.

इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री आर0के0 तिवारी, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं एम0एस0एम0ई0 श्री नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास श्रीमती एस0 राधा चौहान, प्रमुख सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास श्रीमती वी0 हेकाली झिमोमी, सूचना निदेशक श्री शिशिर, निदेशक राज्य पोषण मिशन श्री कपिल सिंह, निदेशक बाल विकास सुश्री सारिका मोहन सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

यूपी के हर जिले में मेडिकल कॉलेज का संकल्प

प्रदेश में 16 जिलों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए सरकार की आकर्षक नीति की वजह से देश के कई बड़े संस्थानों ने पहल की है. इन जिलों में मेडिकल कॉलेज बनने से आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए पांच नवंबर तक आवेदन मांगे हैं. विभाग की ओर से http://etender.up.nic.in वेबसाइट पर टेंडर जारी कर दिया गया है. सरकार की ओर से निजी निवेशकों को कई तरह की छूट भी दी जा रही है.

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 16 जिलों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए कैबिनेट की मुहर लगने के बाद हाल ही में नीति जारी की थी और तीन तरह के विकल्प उपलब्ध कराए थे. हर विकल्प के लिए नियम और शर्तें अलग हैं. निजी क्षेत्र के निवेशक अपनी जमीन या सरकारी जमीन पर भी मेडिकल कॉलेज खोल सकते हैं. खास बात यह है कि विभाग ने इन सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए जमीन पहले से चिह्नित कर आरक्षित कर ली है.

चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया कि पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए कई बड़े निवेशकों ने इच्छा जाहिर की है. विभाग की ओर से नीति जारी कर दी गई है. निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से निविदा प्रक्रिया के तहत निवेशकों का चयन किया जाएगा. सीएम योगी के निर्देश पर पूरी प्रक्रिया को तीव्र गति से पूरा किया जा रहा है.

हर साल मिलेंगे 16 सौ नए डॉक्टर, 10 हजार लोगों को मिलेगी नौकरी

प्रदेश में 16 जिलों में बनने वाले मेडिकल कॉलेजों से हर साल 16 सौ नए डॉक्टर मिलेंगे. साथ ही इन मेडिकल कॉलेजों में करीब 10 हजार लोगों को नौकरी मिलेगी. इसके अलावा इन मेडिकल कॉलेजों में लोगों के उपचार के लिए करीब छह हजार नए बेड उपलब्ध होंगे. इन मेडिकल कॉलेजों में आम लोगों को भी उच्च स्तरीय सहुलियत मिलेगी.

सीएम योगी ने इन जिलों में भी मेडिकल कॉलेज खोलने का लिया है संकल्प

प्रदेश में 16 जिलों बागपत, बलिया, भदोही, चित्रकूट, हमीरपुर, हाथरस, कासगंज, महराजगंज, महोबा, मैनपुरी, मऊ, रामपुर, संभल, संतकबीरनगर, शामली और श्रावस्ती में सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज नहीं हैं. हालांकि इन जिलों में जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी की सुविधा उपलब्ध है. इन जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं में और इजाफा करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हर जिले में मेडिकल कालेज का खोलने का संकल्प लिया है.

अनकहा प्यार- भाग 3: क्या सबीना और अमित एक-दूसरे के हो पाए?

लेकिन एमए पूरा होते ही सबीना के निकाह की बात चलने लगी. उस के पिता चुनाव हार चुके थे. और सारी जमापूंजी चुनाव में लगा चुके थे. बहुत सारा कर्र्ज भी हो गया था उन पर. जब सबीना ने निकाह से मना करते हुए पीएचडी की बात कही, तो उस के अब्बू ने कहा, ‘बीएड कर लो. पढ़ाई करने से मना नहीं करता. लेकिन पीएचडी नहीं. मैं जानता हूं कि पीएचडी के नाम पर पीएचडी करने वालों का कैसा शोषण होता है? निकाह करो और प्राइवेट बीएड करो. अपने अब्बू की बात मानो. समय बदल चुका है. मेरी स्थिति बद से बदतर हो गई है. अपने अब्बू का मान रखो.’ अब्बू की बात तो वह काट न सकी, सोचा, जा कर अमित के सामने ही हिम्मत कर के अपने प्यार का इजहार कर दे.

अमित को जब उस ने बीएड की बात बताई और साथ ही निकाह की, तो अमित चुप रहा.

‘तुम क्या कहते हो?’

‘तुम्हारे अब्बू ठीक कहते हैं,’ उस ने उदासीभरे स्वर में कहा.

‘उदास क्यों हो?’

‘दहेज न दे पाने के कारण बहन की शादी टूट गई.’ सबीना क्या कहती ऐसे समय में चुप रही. बस, इतना ही कहा, ‘अब हमारा मिलना नहीं होगा. कुछ कहना चाहते हो, तो कह दो.’

‘बस, एक अच्छी नौकरी चाहता हूं.’

‘मेरे बारे में कुछ सोचा है कभी.’

वह चुप रहा और उस ने मुझे भी चुप रहने को कहा, ‘कुछ मत कहो. हालात काबू में नहीं हैं. मैं भी पीएचडी करने के लिए दिल्ली जा रहा हूं. औल द बैस्ट. तुम्हारे निकाह के लिए.’

दोनों की आंखों में आंसू थे और दोनों ही एकदूसरे से छिपाने की कोशिश कर रहे थे. जो कहना था वह अनकहा रह गया. और आज इतने वर्षों के बीत जाने के बाद वही शख्स नागपुर में पार्क में इस बैंच पर उदास, गुमसुम बैठा हुआ है. सबीना उस की तरफ बढ़ी. उस की निगाह सबीना की तरफ गई. जैसे वह भी उसे पहचानने की कोशिश कर रहा हो.

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‘‘पहचाना,’’ सबीना ने कहा.

कुछ देर सोचते हुए अमित ने कहा, ‘‘सबीना.’’

‘‘चलो याद तो है.’’

‘‘भूला ही कब था. मेरा मतलब, कालेज का इतना लंबा साथ.’’

‘‘यह क्या हुलिया बना रखा है,’’ सबीना ने पूछा.

‘‘अब यही हुलिया है. 45 साल का वक्त की मार खाया आदमी हूं. कैसा रहूंगा? जिंदा हूं. यही बहुत है.’’

‘‘अरे, मरें तुम्हारे दुश्मन. यह बताओ, यहां कैसे?’’

‘‘मेरी छोड़ो, अपने बारे में बताओ.’’

‘‘मैं ठीक हूं. खुश हूं. एक बेटे की मां हूं. प्राइवेट स्कूल में टीचर हूं. पति का अपना बिजनैस है,’’ सबीना ने हंसते

हुए कहा.

‘‘देख कर तो नहीं लगता कि खुश हो.’’

‘‘अरे भई, मैं भी 40 साल की हो गई हूं. कालेज की सबीना नहीं रही. तुम बताओ, यहां कैसे? और हां, सच बताना. अपनी बैस्ट फ्रैंड से झठ मत बोलना.’’

‘‘झठ क्यों बोलूंगा. बहन की शादी हो चुकी है. मां अब इस दुनिया में नहीं रहीं. मैं एक प्राइवेट कालेज में प्रोफैसर हूं. मेरा भी एक बेटा है.’’

‘‘और पत्नी?’’

‘‘उसी सिलसिले में तो यहां आया हूं. पत्नी से बनी नहीं, तो उस ने प्रताड़ना का केस लगा कर पहले जेल भिजवाया. किसी तरह जमानत हुई. कोर्ट में सम?ौता हो गया. आज कोर्ट में आखिरी पेशी है. उसे ले जाने के लिए आया हूं. अदालत का लंचटाइम है, तो सोचा पास के इस बगीचे में थोड़ा आराम कर लूं,’’ उस ने यह कहा तो सबीना ने कहा, ‘‘मतलब, खुश नहीं हो तुम.’’

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उस ने हंसते हुए कहा, ‘‘खुश तो हूं लेकिन सुखी नहीं हूं.’’

जी में तो आया सबीना के, कि कह दे कालेज में जो प्यार अनकहा रह गया, आज कह दो. चलो, सबकुछ छोड़ कर एकसाथ जीवन शुरू करते हैं. लेकिन कह न सकी. उसे लगा कि अमित ही शायद अपने त्रस्त जीवन से तंग आ कर कुछ कह दे. लगा भी कि वह कुछ कहना चाहता था. लेकिन, कहा नहीं उस ने. बस, इतना ही कहा, ‘‘कालेज के दिन याद आते हैं तो तुम भी याद आती

हो. कम उम्र का वह निश्छल प्रेम, वह मित्रता अब कहां? अब तो

केवल गृहस्थी है. शादी है. और उस शादी को बचाने की हर

संभव कोशिश.’’

‘‘आज रुकोगे, तुम्हारा तो ससुराल है इसी शहर में,’’ सबीना ने पूछा.

‘‘नहीं, 4 बजे पेशी होते ही मजिस्ट्रेट के सामने समझौते के कागज पर दस्तखत कर के तुरंत निकलना पड़ेगा. 8 दिन बाद से कालेज की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं. फिर, बस खानापूर्ति के लिए, समाज के रस्मोरिवाज के लिए कानूनी दांवपेंच से बचने के लिए पत्नी को ले कर जाना है. ऐसी ससुराल में कौन रुकना चाहेगा. जहां सासससुर, बेटी के माध्यम से दामाद को जेल की सैर करा दी जा चुकी हो.’’ उस के स्वर में कुछ उदासी थी.

‘‘अब कब मुलाकात होगी?’’ सबीना ने पूछा.

इस घने अंधकार में उजाले का टिमटिमाता तारा लगा अमित. सबीना की आंखों में आंसू आ गए. आंसू तो अमित की आंखों में भी थे. सबीना ने आंसू छिपाते हुए कहा, ‘‘पता नहीं, अब कब मुलाकात होगी.’’

‘‘शायद ऐसे ही किसी मोड़ पर. जब मैं दर्द में डूबा हुआ रहूं और तुम मिल जाओ अचानक. जैसे आज मिल गईं. मैं तो तुम्हें देख कर पलभर को भूल ही गया था कि यहां किस काम से आया हूं. मेरी कोर्ट में पेशी है. अपनी बताओ, तुम कैसी हो?’’

सबीना उस के दुख को बढ़ाना नहीं चाहती थी अपनी तकलीफ बता कर. हालांकि, समझ चुका था अमित कि उस की दोस्त खुश नहीं है. ‘‘बस, जिंदगी मिली है, जी रही हूं. थोड़े दुख तो सब के हिस्से में आते हैं.’’

‘‘हां, यह ठीक कहा तुम ने,’’ अमित ने कहा.

‘‘मेरे कोर्ट जाने का समय हो गया, मैं चलता हूं.’’

‘‘कुछ कहना चाहते हो,’’ सबीना ने कुरेदना चाहा.

‘‘कहना तो बहुतकुछ चाहता था. लेकिन कमबख्त समय, स्थितियां, मौका ही नहीं देतीं,’’ आह सी भरते हुए अमित ने कहा.

‘‘फिर भी, कुछ जो अनकहा रह गया हो कभी,’’ सबीना ने कहा. सबीना चाहती थी कि वह अमित के मुंह से एक बार अपने लिए वह अनकहा सुन ले.

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‘‘बस, यही कि तुम खुश रहो अपनी जिंदगी में. मैं भी कोशिश कर रहा हूं जीने की. खुश रहने की. जो नहीं कहा गया पहले. उसे आज भी अनकहा ही रहने दो. यही बेहतर होगा. झठी आस पर जी कर क्यों अपना जीना हराम करना.’’

दोनों की आंखों में आंसू थे और दोनों ही एकदूसरे से छिपाने की कोशिश करते हुए अपनीअपनी अंधेरी सुरंगों की तरफ बढ़ चले. जो पहले अनकहा रह गया था, आज भी अनकहा ही रह गया.

Manohar Kahaniya: जुर्म की दुनिया की लेडी डॉन- भाग 3

सौजन्य- मनोहर कहानियां

गौडमदर संतोक बेन जडेजा ने 90 के दशक में फिल्मी स्टाइल में अपने पति सरमन जडेजा की हत्या का बदला लेने के लिए जुर्म का रास्ता अख्तियार किया था, लेकिन जल्द ही वह दहशत का दूसरा नाम बन गई थी. एक वक्त में पूरा गुजरात उस के नाम से खौफ खाता था.

संतोक ने बाकायदा अपना गिरोह बना लिया था, जिस में सैकड़ों छोटेबड़े बदमाश काम करते थे. ये लोग रियल एस्टेट, फिरौती, तसकरी और जबरिया वसूली करते थे.

संतोक का खौफ इतना था कि कोई उस के गुर्गों के लिए न कहने की हिम्मत नहीं कर पाता था और जो करता था वह अगली सुबह का सूरज नहीं देख पाता था. पोरबंदर इलाके में तो उस की हुकूमत चलती थी. वह इतनी निर्दयी और खूंखार हो गई थी कि उस के खिलाफ हत्या के 14 मामले दर्ज हुए थे और उस के गैंग के सदस्यों के खिलाफ 550 के लगभग मामले विभिन्न अपराधों के दर्ज थे.

लेकिन अपने चाहने वालों और गरीबों पर वह मेहरबान रही, जिस से उसे गौडमदर का खिताब मिल गया.

संतोक बेन देश की पहली लेडी डौन थी जिस की जिंदगी पर विनय शुक्ला ने फिल्म ‘गौडमदर’ साल 1999 में बनाई थी, जिस में उस का रोल शबाना आजमी ने निभाया था. यह फिल्म जबरदस्त हिट साबित हुई थी, जिसे 6 नैशनल अवार्ड सहित एक फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला था.

अपने खौफ और रसूख को संतोक ने राजनीति में भी इस्तेमाल किया और साल 1990 में वह जनता दल के टिकट पर कुतियाना सीट से 35 हजार वोटों से जीत कर विधायक भी चुनी गई थी.

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उस का एक बेटा कांधल जडेजा कुतियाना सीट से ही एनसीपी के टिकट पर जीत कर विधायक बना. साल 2011 की होली के पहले संतोक की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी.

खतरनाक सायनाइड किलर केमपंमा

सायनाइड मल्लिका के.डी. केमपंमा बेंगलुरु के नजदीक कमालीपुरा गांव की रहने वाली सीरियल किलर थी, जिस ने कितनों को सायनाइड दे कर मौत की नींद सुलाया. इस की सही गिनती किसी के पास नहीं.

के.डी. केमपंमा ने हत्या करने का नायाब लेकिन पुराना तरीका चुन रखा था. वह अपने शिकार को एकांत में बुलाती थी और वहां उस की हत्या कर उसे लूट लेती थी.

जुर्म करने के लिए वह उन महिलाओं को चुनती थी, जो पारिवारिक या दूसरे कारणों से परेशान रहती थीं और मन्नतें मांगने व पूजापाठ करने मंदिर जाया करती थीं.

के.डी. इन के सामने खुद को एक जानकार तांत्रिक की तरह पेश करती थी और पूजापाठ कर परेशानी दूर करने का झांसा दे कर शिकार को किसी वीरान मंदिर बुलाती थी और वहीं सायनाइड खिला कर हमेशा के लिए परेशान जिंदगी से ही छुटकारा दिला देती थी.

गिरफ्तार होने के बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई थी. लेकिन बाद में उसे आजीवन कारावास में बदल दिया गया था. बेहद गरीब घर की केमपंमा ने एक दरजी से शादी की थी और खुद चिटफंड कंपनी चलाती थी.

पर रातोंरात अमीर बनने के लालच में साल 1999 में उस ने पहली हत्या की थी और फिर मुड़ कर नहीं देखा. साल 2008 में गिरफ्तार होने तक उस का खासा खौफ बेंगलुरु में रहा.

कोठों की बादशाहत वाली सायरा बेगम

सायरा बेगम कोठे वाली के नाम से इसलिए मशहूर हुई थी कि उस ने देह व्यापार के धंधे में तकरीबन 5 हजार लड़कियों को धकेला.

हैदराबाद की रहने वाली इस मौसी सायरा बेगम की दिल्ली के बदनाम रेडलाइड इलाके जीबी रोड पर बादशाहत लंबे समय तक कायम रही. उस पर दरजनों आपराधिक मामले भी दर्ज हुए थे. देह व्यापार के धंधे से सायरा ने करोड़ों रुपए कमाए.

साल 2016 में जब वह गिरफ्तार हुई तो पता चला कि 6 कोठे तो उस के जीबी रोड पर ही हैं और दिल्ली में ही आलीशान फार्महाउस के अलावा बेंगलुरु में भी उस के बेशकीमती 3 फ्लैट हैं. उस के बैंक खातों में ही करोड़ों रुपए जमा थे. सायरा का पति अफाक हुसैन इस धंधे में उस का साथ देता था.

ये लोग पूर्वोत्तर भारत और नेपाल से लड़कियां ला कर उन से धंधा कराते थे. जिस सायरा ने कोई 5 हजार लड़कियों को देह धंधे के दलदल में धकेला, खुद उस की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं.

मांबाप की मौत के बाद वह साल 1990 में दिल्ली रोजगार की तलाश में आई थी, लेकिन वह नहीं मिला तो वह कालगर्ल बन गई.

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बेरोजगारी और दुश्वारियां झेल चुकी सायरा को कभी मजबूर गरीब लड़कियों की हालत पर तरस नहीं आया, जो कम उम्र लड़कियों को जल्द जवान बनाने के लिए हारमोंस के इंजेक्शन भी देती थी. लड़कियों को इस धंधे में लाने के लिए उस ने गिरोह भी बना लिया था, जिस की वह डौन थी.

इन का भी बजता था डंका

इसी तरह खूबसूरती की वजह से रूबीना सिराज सैय्यद ने अपराध की दुनिया में हीरोइन नाम से पहचान बनाई. कभी जानीमानी ब्यूटीशियन रही रूबीना ने पैसों के लालच में छोटा राजन से हाथ मिला लिया. उस ने अपनी खूबसूरती से कइयों को काबू किया.

पुलिस वाले भी उस की खूबसूरती पर लट्टू हो जाते थे. इसी का फायदा उठा कर 70 के दशक में वह जेल में बंद छोटा शकील के गुर्गों तक हथियार और नशे का सामान पहुंचाती थी. महाराष्ट्र सरकार ने उस की आपराधिक गतिविधियों की वजह से उस पर मकोका भी लगाया था.

दूध बेचने वाली शशिकला ने पैसों के लालच में ड्रग्स की तसकरी शुरू की और जल्द ही मुंबई में कुख्यात हो गई. अपराध की दुनिया में उसे बेबी नाम से जाना जाने लगा.

वर्ष 2015 में मुंबई पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार किया, तब तक ड्रग्स की तसकरी से वह 100 करोड़ रुपए की संपत्ति खड़ी कर चुकी थी. शशिकला उर्फ बेबी को मुंबई का सब से बड़ा ड्रग्स माफिया माना जाता है.

बेला आंटी को तो मुंबई की सब से बड़ी शराब माफिया के रूप में जाना जाता था.

70 के दशक में जब अवैध शराब के खिलाफ सख्ती बढ़ी, तब भी बेला आंटी ने ट्रकों में भर कर पूरी मुंबई में अवैध शराब की तसकरी की.

अधिकारियों का मुंह बंद कराने के लिए बेला ने उन्हें मोटी रिश्वत दी. उस ने शराब की तसकरी जारी रखने के लिए तब के गैंगस्टरों, अधिकारियों और राजनेताओं सब को डरा रखा था.

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किसी में हिम्मत नहीं थी कि अवैध शराब की तसकरी में लगी उस की गाडि़यों को कोई रोक सके. यहां तक कि उस वक्त का अंडरवर्ल्ड डौन वर्धाभाई भी उसे अपने एरिया धारावी में शराब की तसकरी करने से नहीं रोक सका था.

भारत के मोस्टवांटेड दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर वो नाम है, जो किसी परिचय का मोहताज नहीं. दाऊद इब्राहिम के भारत से भागने के बाद मुंबई में उस के अवैध धंधों की बागडोर बहन हसीना पारकर ने ही संभाली. अपराध की दुनिया में उस की पहचान गौडमदर औफ नागपाड़ा और अप्पा मतलब बड़ी बहन के तौर पर रही है.

इस में कोई संदेह नहीं कि उस में मुंबई के अपराध जगत में एकछत्र राज किया है. वर्ष 2014 में हार्ट अटैक से उस की मौत हो गई.द्य

Manohar Kahaniya: पत्नी की मौत की सुपारी- भाग 2

सौजन्य- मनोहर कहानियां

पुलिस टीम ने शाहरुख से पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. शाहरुख ने बताया कि उसे 90 हजार रुपए मिले हैं. नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू की मार्फत वह वारदात में शामिल हुआ था.

उस ने बताया कि आरती की हत्या में कबरई निवासी विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत भी शामिल थे. ये दोनों प्रतापगढ़ के राजा शुक्ला गैंग के शूटर हैं. पुलिस ने शाहरुख खान की निशानदेही पर .315 बोर का तमंचा भी बरामद कर लिया, जिस से आरती को गोली मारी गई थी.

आरती हत्याकांड का खुलासा हो गया था. पुलिस ने अब इस मामले में श्यामशरण शर्मा, शाहरुख खान, नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू, विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत को नामजद कर लिया था.

श्यामशरण व शाहरुख खान तो पुलिस गिरफ्त में आ गए थे. लेकिन शेष आरोपी फरार थे. उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने जाल फैलाया तो 25 मई को नईम उर्फ भोलू भी पकड़ में आ गया.

नईम उर्फ भोलू ने भी अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उसे 50 हजार रुपए मिले थे. विकास हजारिया और राहुल राजपूत को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई थी. रामशरण निर्दोष था. अत: उसे थाने से जाने दिया गया.ॉ

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पुलिस द्वारा की गई जांच, आरोपियों के बयानों तथा मृतका के पति द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आरती हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, उस का विवरण इस प्रकार है—

मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर है ग्वालियर. इसी शहर के बिरला नगर मोहल्ले में अनिल कुमार शर्मा अपने परिवार के साथ रहते थे.

उन के परिवार में पत्नी आशा के अलावा 3 बेटियां आरती, अंजू, भारती तथा एक बेटा आदित्य था. अनिल कुमार शर्मा मेहनतकश इंसान थे. वह प्राइवेट नौकरी करते थे. नौकरी में मिलने वाले वेतन से वह परिवार का भरणपोषण करते थे.

आरती दोस्तों के साथ करती थी मौजमस्ती

अनिल शर्मा की बेटी आरती अपनी बहनों में सब से बड़ी थी. वह अपनी अन्य बहनों से कुछ ज्यादा ही खूबसूरत थी. वह वीरांगना लक्ष्मीबाई कालेज से बीए की पढ़ाई कर रही थी.

आरती स्वच्छंद थी. उस का स्वभाव भी चंचल था. इसलिए कालेज आतेजाते कई युवक उस के दोस्त बन गए थे. उन के साथ वह मौजमस्ती करती थी.

अनिल शर्मा को जब पता चला कि बेटी गलत राह पर जा रही है तो बदनामी से बचने के लिए उन्होंने उस का ब्याह जल्द करने का फैसला किया. उन्होंने आरती के योग्य वर की खोज की तो उन्हें श्यामशरण पसंद आ गया.

श्यामशरण शर्मा, हमीरपुर जनपद के कस्बा भरुआ सुमेरपुर का रहने वाला था.  बड़े भाई रामशरण शर्मा का विवाह हो चुका था. दोनों भाई मिल कर व्यापार करते थे और साथ रहते थे.

अनिल शर्मा ने जब श्यामशरण को देखा तो उन्होंने उसे अपनी बेटी आरती के लिए पसंद कर लिया. इस के बाद उन्होंने 20 फरवरी, 2004 को आरती का विवाह श्यामशरण के साथ कर दिया.

शादी के बाद श्यामशरण और आरती ने हंसीखुशी से जीवन की शुरुआत की. देखतेदेखते 5 साल कब बीत गए, पता ही न चला. इन 5 सालों में आरती ने बेटी संस्कृति तथा बेटे सुमित को जन्म दिया.

आरती को अपनी खूबसूरती पर घमंड था, जिस से वह पूरे घर को अपनी अंगुलियों पर नचाती थी. कुछ समय तक तो आरती की ज्यादती उस के जेठजेठानी ने सहन की. उस के बाद विद्रोह के स्वर उभरने लगे.

आरती को संयुक्त परिवार में रहना वैसे भी पसंद नहीं था. उस ने घर बंटवारे की मांग कर दी. कलह बढ़ी तो आरती की बात मान कर दोनों भाइयों के बीच घर, व्यापार का बंटवारा हो गया. हालांकि श्यामशरण बंटवारा नहीं चाहता था.

आरती अलग रहने लगी तो वह स्वच्छंद हो गई. उसे घर में कैद हो कर रहना पसंद नहीं था, सो वह बनसंवर कर घर से निकलती, फिर कस्बे के बाजारों में घूमती तथा होटल व रेस्टोरेंट में जाती.

श्यामशरण को पत्नी का इस तरह फिजूल में घूमनाफिरना अच्छा नहीं लगा था. उस ने आरती को फटकारा और बच्चों की परवरिश पर ध्यान देने को कहा. लेकिन आरती ने पति की बात पर ध्यान नहीं दिया. वह पति पर तरहतरह की फरमाइशें पूरी करने का दबाव बनाती और लड़तीझगड़ती.

श्यामशरण पत्नी के ऊलजुलूल खर्चों से परेशान था. उसे घर का खर्च चलाने और आरती की फरमाइशें पूरी करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही थी.

3 बच्चे पैदा करने के बाद श्यामशरण पत्नी की शारीरिक जरूरतों की भी अनदेखी करने लगा. जबकि आरती का यौवन खिल रहा था और वह हर रात पति का साथ चाहती थी. श्यामशरण कमाई के चक्कर में इस कदर व्यस्त हो गया था कि उसे न अपना होश रहा और न आरती का.

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आजाद पंछी की तरह खुले आकाश में विचरण करने वाली आरती को अब पति का घर जेल जैसा लगने लगा था. पति की उदासीनता की वजह से चांदनी रातें भी उसे अमावस की काली रातों जैसी लगने लगीं.

धीरेधीरे उन दोनों के बीच की दूरियां बढ़ती गईं. तब वह शारीरिक जरूरतों के लिए इधरउधर नजरें दौड़ाने लगी. परिणामस्वरूप जल्द ही कस्बे के कई युवकों से उस की यारी हो गई. उन के साथ वह गुलछर्रे उड़ाने लगी.

श्यामशरण शर्मा को आरती की इस करतूत का पता चला तो उस ने शराब पी कर आरती से मारपीट तो की ही, उसे रंडी और वेश्या तक कह डाला.

अगले भाग में पढ़ें- पति ने बनाई हत्या की योजना

आखिरी मुलाकात- भाग 3: क्यों सुमेधा ने समीर से शादी नहीं की?

Writer- Shivi Goswami

अगले दिन भी वही सब. न मेरा फोन उठाया और न खुद फोन या मैसेज किया. बस अपने सर को उस ने अपनी छुट्टी के लिए एक मेल भेजा था, जिस में बस यह लिखा था कि कोई जरूरी काम है.

क्या जरूरी काम हो सकता है? मैं सोच नहीं पा रहा था.

नीलेश ने कहा, ‘तुम उस के घर के फोन पर बात करने की कोशिश क्यों नहीं करते?’

‘अगर किसी और ने फोन उठाया तो?’ मैं ने उस के सवाल पर अपना सवाल किया.

‘तो तुम बोल देना कि तुम उस के औफिस से बोल रहे हो और यह जानना चाहते हो कि कब तक छुट्टी पर है वह.’

हिम्मत कर के मैं ने उस के घर के फोन पर काल किया. पहली बार किसी ने फोन नहीं उठाया. नीलेश के कहने पर मैं ने दोबारा कोशिश की. इस बार फोन पर आवाज आई जो मैं सुनना चाहता था.

‘हैलो सुमेधा, मैं समीर बोल रहा हूं. कहां हो, कैसी हो? और तुम औफिस क्यों नहीं आ रही हो? मैं ने तुम्हारा मोबाइल नंबर कितनी बार मिलाया, लेकिन तुम ने फोन नहीं उठाया. सब ठीक तो है?’

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सुमेधा चुपचाप मेरी बातों को बस सुने जा रही थी.

‘सुमेधा कुछ तो बोलो.’

‘अब मुझे कभी फोन मत करना समीर…’ सुमेधा ने धीमी आवाज में कहा.

‘क्या, पर हुआ क्या यह तो बताओ?’ मैं ने बेचैन हो कर पूछा.

‘पापा को माइनर हार्ट अटैक आया था. अब उन की हालत ठीक है. मेरे लिए एक रिश्ता आया था पापा ने वह रिश्ता तय कर दिया है और उन की हालत को ध्यान में रखते हुए मैं न नहीं कर पाई.’

‘तुम्हें उन्हें मेरे बारे में तो बताना चाहिए था,’ मैं ने कहा.

‘समीर वह लड़का बिजनैसमैन है,’ सुमेधा ने एकदम से कहा.

‘ओह, तो शायद इसीलिए तुम्हारी उस से शादी हो रही है,’ मैं ने कहा.

‘तुम जो भी समझो मैं मना नहीं करूंगी. अगले महीने मेरी शादी है. मैं ने आज ही अपना रिजाइनिंग लैटर अपने सर को मेल कर दिया है. बाय समीर.’

मैं बस फोन को देखे जा रहा था और नीलेश मुझे देखे जा रहा था. उस का मेरे प्यार को स्वीकार करना जितना खूबसूरत सपने की तरह था, उतना ही आज उस का यह बोलना किसी बुरे सपने से कम नहीं था. मैं चाहता था कि दोनों बातों में से सिर्फ एक ख्वाब बन जाए, लेकिन दोनों ही हकीकत थीं.

आज इस बात को पूरे 3 साल हो गए. उस दिन के बाद मैं ने कभी सुमेधा को न तो फोन किया और न ही उस ने मेरा हाल जानने की कोशिश की. जिस दिन उस की शादी थी उसी दिन मुझे दिल्ली की एक मल्टीनैशनल कंपनी से इस नौकरी का औफर आया था. यहां की सैलरी से दोगुनी सैलरी और एक फ्लैट. सब कुछ ठीक ही नहीं बल्कि एकदम परफैक्ट. आज जो मेरे पास है अगर वह मेरे पास 3 साल पहले होता तो शायद आज सुमेधा मिसेज समीर होती.

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वक्त बदल गया और वक्त के साथ लोग भी. आज मैं जिस मुकाम पर पहुंच गया हूं शायद उस समय इन सब चीजों की कल्पना उस ने कभी की ही नहीं होगी. उस वक्त मैं सिर्फ समीर था लेकिन आज एक मल्टीनैशनल कंपनी का जनरल मैनेजर. आज मेरे पास सब कुछ है लेकिन मेरी सफलता को बांटने के लिए वह नहीं है जिस के लिए शायद मैं यह सब करना चाहता था.

अचानक मेरे मोबाइल की बजी. घंटी ने मुझे मेरी यादों से बाहर निकाला.

नीलेश का फोन था. सब कुछ बदल जाने के बाद भी मेरी और नीलेश की दोस्ती नहीं बदली थी. शायद कुछ रिश्ते सच में सच्चे और अच्छे होते हैं.

‘‘कब तक पहुंचेगा?’’ नीलेश ने पूछा.

‘‘निकलने वाला हूं बस,’’ मैं ने नीलेश से कहा.

‘‘जल्दी निकल यार,’’ कह कर नीलेश ने फोन रख दिया.

नीलेश की शादी है आज. शादी दिल्ली में ही हो रही थी. मुझे सीधे शादी में ही शरीक होना था. अपने सब से अच्छे दोस्त की शादी में न जाने का कोई बहाना होता भी तो भी मैं उस को बना नहीं सकता था.

मैं फटाफट तैयार हुआ. अपनी कार निकाली और चल दिया. वहां पहुंचा तो चारों तरफ फूलों की भीनीभीनी खुशबू आ रही थी. नीलेश बहुत स्मार्ट लग रहा था. मैं ने उस की तरफ फूलों का गुलदस्ता बढ़ाते हुए कहा, ‘‘यह तुम्हारी नई जिंदगी की शुरुआत है और मेरी दिल से शुभकामनाएं तुम्हारे साथ हैं.’’

नीलेश मेरे गले लग गया. और लोगों को भी उसे बधाइयां देनी थीं, इसलिए मैं स्टेज से नीचे उतर गया. उतर कर जैसे ही मैं पीछे मुड़ा तो देखा कि लाल साड़ी में एक महिला मेरे पीछे खड़ी थी. उस के साथ उस का पति और बेटा भी था.

वह कोई और नहीं सुमेधा थी, जो मेरी ही तरह अपने दोस्त की शादी में शामिल होने आई थी. मुझे देख कर वह चौंक गई. वह मुझ से कुछ कहती, इस से पहले ही मेरी पुरानी कंपनी के सर ने मेरी तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘वैल डन समीर. मुझे तुम पर बहुत गर्व है. थोड़े से ही समय में तुम ने बहुत सफलता हासिल कर ली है. मैं सच में बहुत खुश हूं तुम्हारे लिए.’’

मैं बस हां में सिर हिला रहा था और जरूरत पड़ने पर ही जवाब दे रहा था. मेरा दिमाग इस वक्त कहीं और था.

सुमेधा अपने पति के साथ खड़ी थी. उस का पति एक बिजनैसमैन था, लेकिन उस की कंपनी इतनी बड़ी नहीं थी. आज मेरा स्टेटस उस से ज्यादा था.

यह मैं क्या सोच रहा हूं? मेरी सोच इतनी गलत कब से हो गई? मुझे किसी की व्यक्तिगत और व्यावसायिक जिंदगी से कोई मतलब नहीं होना चाहिए. मेरा दम घुट सा रहा था. अब इस से ज्यादा मैं वहां नहीं रुक सकता था. मैं जैसे ही बाहर जाने लगा सुमेधा ने पीछे से मुझे आवाज लगाई.

‘‘समीर…’’

उस के मुंह से अपना नाम सुनते ही मन में आया कि उस से सारे सवालों के जवाब मांगूं. पूछूं उस से कि जब प्यार किया था तो विश्वास क्यों नहीं किया? सब कुछ एकएक कर के उस की आवाज से मेरी आंखों के सामने आ गया.

लेकिन अब वह पहले वाली सुमेधा नहीं थी. अब वह मिसेज सुमेधा थी. मुझे उस का सरनेम तो क्या उस के पति का नाम भी मालूम नहीं था और मुझे कोई दिलचस्पी भी नहीं थी ये सब जानने की. न मैं उस का हाल जानना चाहता था और न ही अपना बताना.

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मैं ने पलट कर उस की आंखों में आखें डाल कर कहा, ‘‘क्या मैं आप को जानता हूं?’’

वह मेरी तरफ एकटक देखती रही. अगर मैं पहले वाला समीर नहीं था तो वह भी पहले वाली सुमेधा नहीं रही थी.

शायद मेरा यही सवाल हमारी आखिरी मुलाकात का जवाब था. उस की चुप्पी से मुझे मेरा जवाब मिल गया और मैं वहां से चल दिया.

Satyakatha: ऑपरेशन करोड़पति- भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

मीनाक्षी के जाने के बाद थानाप्रभारी ने मामले की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देने के साथ ही तुरंत पूरे शहर की नाकेबंदी करा दी.

शहर के पुलिस महकमे में नवीन पटेल के अपहरण की सूचना फैल गई. इस की जानकारी व्यापारी वर्ग को भी लग गई, किंतु वे पुलिस की हिदायत के मुताबिक शांत बने रहे.

पुलिस ने सब से पहले निशांत की तलाशी का लक्ष्य बनाया, ताकि अपहरण का कोई सुराग हाथ लग सके. उस के मोबाइल फोन की ट्रैकिंग की जाने लगी.

अपहरण कांड की सूचना पा कर अगले दिन गोवा के डीजीपी मुकेश कुमार मीणा और एसपी शोभित सक्सेना ने थानाप्रभारी विजय चोडणखर के साथ मिल कर घटनास्थल यानी नवीन पटेल के शोरूम का जा कर निरीक्षण किया.

आसपास के शोरूम वालों से पूछताछ करने पर उन्हें कोई विशेष जानकारी नहीं मिली.

शोरूम के कुछ कर्मचारियों ने घटना के दिन शटर बंद करने और चाकू की नोंक पर नवीन को गाड़ी में जबरन बिठाने के अलावा अधिक बातें नहीं बताईं. उन्होंने इस कांड में 5 लोगों के शामिल होने के साथसाथ दोपहर 12 से एक बजे के बीच शोरूम के सामने सफेद एसयूवी कार खड़ी होने की बात कही.

निशांत के बारे में पूछने पर कर्मचारियों ने कहा कि उस रोज वह छुट्टी पर था. इस छानबीन के बाद पुलिस अधिकारी अपने औफिस लौट आए. थाने आ कर थानाप्रभारी ने शोरूम के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की भी जांच की.

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जल्द ही उन्हें उन फोन नंबरों की काल डिटेल्स भी मिल गई, जिस से पता चला कि घटना के वक्त उन की लोकेशन घटनास्थल के आसपास थी. इस के बाद नए सिरे से मामले की रूपरेखा तैयार कर तफ्तीश के लिए पुलिस की 4 टीमों का गठन किया गया. सभी टीमें गोवा के अलगअलग इलाकों में फैल गईं.

इस मामले में गोवा के आगशी और अगाकैन पुलिस की भी मदद ली गई. अपहर्त्ताओं के मोबाइल फोन की सर्विलांस से मालूम हुआ कि वे नंबर पुराने गोवा सांताक्रुज केवसा के इलाके से एक्टिव करवाए गए थे. उस का आईएमईआई नंबर गोवा के एक व्यक्ति के मोबाइल का था.

पुलिस की जांच टीम उस के सहारे आगशी और अगाकैन पुलिस को सतर्क करती हुई उस व्यक्ति के पते पर पहुंच गई. वहां जा कर मालूम हुआ कि जिन फोन नंबरों से फिरौती की रकम मांगी गई थी, वह फोन दिहाड़ी मजदूरों के थे, जो एक दिन पहले ही कार सवार युवकों ने छीन लिए थे.

उन की कार उन युवकों के हुलिया के बारे में पुलिस ने मजदूरों से पूछा तो उन के बारे में उस का हुलिया सीसीटीवी की तसवीरों वाले कार से मेल खाने जैसी थी.

उस वक्त वे मेनरोड से अपने घर लौट रहे थे. तभी उन के पास एक कार आ कर रुकी थी, जिस में 5 लोग बैठे थे.

एक रास्ता पूछने के लिए बाहर निकला था. उस ने यह भी बताया कि कार में एक आदमी सिर झुकाए 2 लोगों के बीच बैठा हुआ था. दोनों उसे पीछे से हाथ किए ऐसे पकड़ रखे थे, जैसे वे गिरने वाले हों.

मजदूर के बताए गए बदमाशों के हुलिए से जांच टीम को काफी राहत मिली. अपहरण कांड के तार एकदूसरे से जुड़ने लगे थे, लेकिन सब से अहम था अपहर्त्ताओं का पकड़ा जाना और नवीन पटेल को सकुशल बरामद करना.

पुलिस ने गोवा में घटित हाल की आपराधिक वारदातों में शामिल लोगों की जानकारी निकलवाई. उस के आधार पर सब से पहला नाम राहजनी और वाहन चोरी के कई गंभीर इलजाम वाले वीरेंद्र कुमार बिहारी का सामने आया.

इस नई जानकारी के बाद पुलिस टीम की तफ्तीश वीरेंद्र कुमार बिहारी की तरफ घूम गई. पुलिस टीम ने जब वीरेंद्र के ठिकाने पर छापा मारा तो वह हाथ नहीं लगा, लेकिन उस का एक साथी पुलिस टीम के हत्थे चढ़ गया.

उसे पुलिस टीम थाने ले आई. उस से पूछताछ शुरू होने के साथ ही पुलिस को एक और महत्त्वपूर्ण सुराग मिल गया. वीरेंद्र का पकड़ा गया साथी कोई और नहीं, नवीन पटेल का कर्मचारी निशांत था.

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पहले तो उस ने अपहरण कांड से अनजान और और खुद को बेकुसूर बताया, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उस ने सच कुबूल लिया.

उस ने अपने अन्य साथियों के नाम भी बता दिए और यह भी बताया कि वह अपहृत नवीन को कहीं छिपा कर रखने का इंतजाम करने के लिए कमरे पर आया था.

पुलिस को अपहर्त्ताओं तक पहुंचने के लिए इतनी जानकारी काफी थी. पुलिस टीम नवीन पटेल को उन के चंगुल से छुड़ाने के लिए निशांत को साथ ले कर उस के बताए अनुसार उस ठिकाने पर जा पहुंची, जहां वे मीनाक्षी को काल कर पैसे मांग रहे थे.

वे सभी पुराने गोवा में एक जर्जर इमारत में थे. पुलिस ने वहां बंधक बना कर रखे गए नवीन पटेल को अपहर्त्ताओं के चंगुल से सकुशल बरामद कर लिया.

नवीन पटेल को  सकुशल आजाद करवाने के बाद तीनों थाने के अधिकारियों की मदद से नवीन पटेल अपहरण कांड में शामिल सभी  आरोपियों को निशांत मोगन की निशानदेही पर गिरफ्तार कर लिया गया.

थाने ला कर जब उन से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपने नाम वीरेंद्र कुमार बिहारी, सुरजीत केसकर, सुभाष भोसले और मंजूनाथ कारवार बताए.

सभी से अपहरण से संबंधित मोबाइल फोन और चाकू बरामद कर लिया. उन के खिलाफ नवीन पटेल के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर दिया गया. दूसरे दिन उन्हें गोवा मेट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट के सामने पेश कर गोवा की सेंट्रल जेल भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक आगे की तफ्तीश गोवा कोतवाली के थानाप्रभारी विजय चोडणखर कर रहे थे.

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