Anupamaa: ‘अनुज और अनुपमा’ का नाम साथ में देखकर भड़की बा, फाड़ा इनविटेशन कार्ड

टीवी सीरियल अनुपमा (Anupamaa) में इन दिनों महाट्विस्ट दिखाया जा रहा है. शो की कहानी में दिलचस्प मोड़ आ चुका है. शो में अब तक आपने देखा कि अनुज (Anuj Kapadia)  की मदद से अनुपमा राखी दवे के पैसे लौटा देती है. लेकिन वनराज और बा काफी नाराज है. तो दूसरी तरफ रोहन नंदिनी को हासिल करने के लिए समर को जान से मारने की कोशिश करता है. लेकिन नंदिनी समर को बचा लेती है. शो के आने वाले एपिसोड में नया ट्विस्ट एंड टर्न आने वाला है. आइए बताते हैं शो के आगे की कहानी…

शो में दिखाया जा रहा है कि अनुज अनुपमा को अपने घर बुलाता है. अनुपमा के साथ बापू जी भी अनुज के घर जाते हैं.  जब अनुपमा अनुज के घर पहुंचती है तब उसे अनुज बहुत बड़ा सरप्राइज देता है. जिसे देखकर अनुपमा बहुत खुश होती है.

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दरअसल अनुज अनुपमा को एक इनविटेशन कार्ड देता है. यह इनविटेशन कार्ड अनुज के नए प्रोजेक्ट का है. अनुज एक फाइव स्टार होटल का बनवाने वाला है जिसके भूमि पूजन के लिए वह लोगों को इनवाइट कर रहा है. उसने इस इनविटेशन कार्ड में अनुपमा का नाम भी लिखवाया है. तो ऐसे में अनुपमा इनविटेशन कार्ड में अपना नाम देखकर बेहद खुश होती है. अनुपमा इस खुशी को सेलिब्रेट करने के लिए अनुज के किचन में कुछ मीठा बनाती है.

 

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तो दूसरी तरफ अनुपमा और बापूजी घर आते हैं तब शाह परिवार को बताते हैं. बा इनविटेशन कार्ड पर अनुज के साथ अनुपमा का नाम देखकर भड़क जाती हैं. जब बा को यह भी पता चलता है कि अनुपमा ने अनुज के किचन में मिठाई बनाई है तब तो वह गुस्से में इनविटेशन कार्ड भी फाड़ देती है.

 

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इतना ही नहीं, बा भूमि पूजन में जाने से पूरे घरवाले को मना करती है. अनुपमा बा के इस बात से बहुत दुखी होती है. और वह इनविटेशन कार्ड को फिर से जोड़ती है. शो में अब ये देखना होगा कि अनुपमा बा को मना पाती है या नहीं.

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ममता- भाग 2: क्या माधुरी को सासुमां का प्यार मिला

माधुरी के मातापिता अतिव्यस्त अवश्य थे किंतु अपने संस्कारों तथा रीतिरिवाजों को नहीं छोड़ पाए थे इसलिए विजातीय पल्लव से विवाह की बात सुन कर पहले तो काफी क्रोधित हुए थे और विरोध भी किया था, लेकिन बेटी की दृढ़ता तथा निष्ठा देख कर आखिरकार तैयार हो गए थे तथा उस परिवार से मिलने की इच्छा जाहिर की थी.

दोनों परिवारों की इच्छा एवं सुविधानुसार होटल में मुलाकात का समय निर्धारित किया गया था. बातों का सूत्र भी मम्मीजी ने ही संभाल रखा था. पंकज और पल्लव तो मूकदर्शक ही थे. उन का जो भी निर्णय होता उसी पर उन्हें स्वीकृति की मुहर लगानी थी. यह बात जान कर माधुरी अत्यंत तनाव में थी तथा पल्लव भी मांजी की स्वीकृति का बेसब्री से इंतजार कर रहा था.

बातोंबातों में मां ने झिझक कर कहा था, ‘बहनजी, माधुरी को हम ने लाड़प्यार से पाला है, इस की प्रत्येक इच्छा को पूरा करने का प्रयास किया है. इस के पापा ने तो इसे कभी रसोई में घुसने ही नहीं दिया.’

‘रसोई में तो मैं भी कभी नहीं गई तो यह क्या जाएगी,’ बात को बीच में ही काट कर गर्वभरे स्वर के साथ मम्मीजी ने कहा.

मम्मीजी के इस वाक्य ने अनिश्चितता के बादल हटा दिए थे तथा पल्लव और माधुरी को उस पल एकाएक ऐसा महसूस हुआ कि मानो सारा आकाश उन की मुट्ठियों में समा गया हो. उन के स्वप्न साकार होने को मचलने लगे थे तथा शीघ्र ही शहनाई की धुन ने 2 शरीरों को एक कर दिया था.

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पल्लव के परिवार तथा माधुरी के परिवार के रहनसहन में जमीनआसमान का अंतर था. समानता थी तो सिर्फ इस बात में कि मम्मीजी भी मां की तरह घर को नौकरों के हाथ में छोड़ कर समाजसेवा में व्यस्त रहती थीं. अंतर इतना था कि वहां एक नौकर था तथा यहां 4, मां नौकरी करती थीं तो ससुराल में सास समाजसेवा से जुड़ी थीं.

मम्मीजी नारी मुक्ति आंदोलन जैसी अनेक संस्थाओं से जुड़ी हुई थीं, जहां गरीब और सताई गई स्त्रियों को न्याय और संरक्षण दिया जाता था. उन्होंने शुरू में उसे भी अपने साथ चलने के लिए कहा और उन का मन रखने के लिए वह गई भी, किंतु उसे यह सब कभी अच्छा नहीं लगा था.

उस का विश्वास था कि नारी मुक्ति आंदोलन के नाम पर गरीब महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है. एक महिला जिस पर अपने घरपरिवार का दायित्व रहता है, वह अपने घरपरिवार को छोड़ कर दूसरे के घरपरिवार के बारे में चिंतित रहे, यह कहां तक उचित है? कभीकभी तो ऐसी संस्थाएं अपने नाम और शोहरत के लिए भोलीभाली युवतियों को भड़का कर स्थिति को और भी भयावह बना देती हैं.

उसे आज भी याद है कि उस की सहेली नीता का विवाह दिनेश के साथ हुआ था. एक दिन दिनेश अपने मित्रों के कहने पर शराब पी कर आया था तथा नीता के टोकने पर नशे में उस ने नीता को चांटा मार दिया. यद्यपि दूसरे दिन दिनेश ने माफी मांग ली थी तथा फिर से ऐसा न करने का वादा तक कर लिया था, किंतु नीता, जो महिला मुक्ति संस्था की सदस्य थी, ने इस बात को ऐसे पेश किया कि उस की ससुराल की इज्जत तो गई ही, साथ ही तलाक की स्थिति भी आ गई और आज उस का फल उन के मासूम बच्चे भोग रहे हैं.

ऐसा नहीं है कि ये संस्थाएं भलाई का कोई काम ही नहीं करतीं, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि किसी भी प्रतिष्ठान की अच्छाइयां छिप जाती हैं जबकि बुराइयां न चाहते हुए भी उभर कर सामने आ जाती हैं.

वास्तव में स्त्रीपुरुष का संबंध अटूट विश्वास, प्यार और सहयोग पर आधारित होता है. जीवन एक समझौता है. जब 2 अजनबी सामाजिक दायित्वों के निर्वाह हेतु विवाह के बंधन में बंधते हैं तो उन्हें एकदूसरे की अच्छाइयों के साथसाथ बुराइयों को भी आत्मसात करने का प्रयत्न करना चाहिए. प्रेम और सद्भाव से उस की कमियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए, न कि लड़झगड़ कर अलग हो जाना चाहिए.

मम्मीजी की आएदिन समाचारपत्रों में फोटो छपती. कभी वह किसी समारोह का उद्घाटन कर रही होतीं तो कभी विधवा विवाह पर अपने विचार प्रकट कर रही होतीं, कभी वह अनाथाश्रम जा कर अनाथों को कपड़े बांट रही होतीं तो कभी किसी गरीब को अपने हाथों से खाना खिलाती दिखतीं. वह अत्यंत व्यस्त रहती थीं. वास्तव में वह एक सामाजिक शख्सियत बन चुकी थीं, उन का जीवन घरपरिवार तक सीमित न रह कर दूरदराज तक फैल गया था. वह खुद ऊंची, बहुत ऊंची उठ चुकी थीं, लेकिन घर उपेक्षित रह गया था, जिस का खमियाजा परिवार वालों को भुगतना पड़ा था. घर में कीमती चीजें मौजूद थीं किंतु उन का उपयोग नहीं हो पाता था.

मम्मीजी ने समय गुजारने के लिए उसे किसी क्लब की सदस्यता लेने के लिए कहा था किंतु उस ने अनिच्छा जाहिर कर दी थी. उस के अनुसार घर की 24 घंटे की नौकरी किसी काम से कम तो नहीं है. जहां तक समय गुजारने की बात है उस के लिए घर में ही बहुत से साधन मौजूद थे. उसे पढ़नेलिखने का शौक था, उस के कुछ लेख पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हो चुके थे. वह घर में रहते हुए अपनी इन रुचियों को पूरा करना चाहती थी.

यह बात अलग है कि घर के कामों में लगी रहने वाली महिलाओं को शायद वह इज्जत और शोहरत नहीं मिल पाती है जो बाहर काम करने वाली को मिलती है. घरेलू औरतों को हीनता की नजर से देखा जाता है लेकिन माधुरी ने स्वेच्छा से घर के कामों से अपने को जोड़ लिया था. घर के लोग, यहां तक कि पल्लव ने भी यह कह कर विरोध किया था कि नौकरों के रहते क्या उस का काम करना उचित लगेगा.

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तब उस ने कहा था कि ‘अपने घर का काम अपने हाथ से करने में क्या बुराई है, वह कोई निम्न स्तर का काम तो कर नहीं रही है. वह तो घर के लोगों को अपने हाथ का बना खाना खिलाना चाहती है. घर की सजावट में अपनी इच्छानुसार बदलाव लाना चाहती है और इस में भी वह नौकरों की सहायता लेगी, उन्हें गाइड करेगी.

उस की बात सुन कर मम्मीजी ने मुंह बिचका दिया था लेकिन जो घर नौकरों के द्वारा चलने से बेजान हो गया था माधुरी के हाथ लगाने मात्र से सजीव हो उठा था. इस बात को पापाजी और पल्लव के साथ मम्मीजी ने भी महसूस किया था.

पल्लव, जो पहले रात में 10 बजे से पहले घर में कदम नहीं रखता था. वही अब ठीक 5 बजे घर आने लगा. यही हाल उस के पापाजी का भी था. एक बार भावुक हो कर पापा ने कहा भी था, ‘बेटा, तुम ने इस धर्मशाला बन चुके घर को पुन: घर बना दिया. सचमुच जब तक घरवाली का हाथ घर में नहीं लगता तब तक घर सुव्यवस्थित नहीं हो पाता है.’

एक बार पापाजी उस के हाथ के बने पनीर के पकवान की तारीफ कर रहे थे कि मम्मीजी चिढ़ कर बोलीं, ‘भई, मुझे तो बाहर के कामों से ही फुरसत नहीं है. इन बेकार के कामों के लिए समय कहां से निकालूं?’

‘बाहर के लोगों के लिए समय है, किंतु घर वालों के लिए नहीं,’ तीखे स्वर में ससुरजी ने उत्तर दिया था जो सास के जरूरत से अधिक घर से बाहर रहने के कारण अब परेशान हो उठे थे.

अफगानिस्तान-तालिबान: युद्ध के बाद फिर सेक्स गुलाम

हर युद्ध के बाद ज्यादा जुल्म हमेशा महिलाओं को ही झेलने होते हैं. भोगविलास की वस्तु समझते हुए सैनिकों द्वारा उन के जिस्म को रौंदा जाता है. अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा हो जाने के बाद वहां की महिलाओं को भी सैक्स गुलाम बनाने की कोशिश हो रही है…

अफगानिस्तान में तालिबान के काबिज हो जाने के साथ ही महिलाओं पर अत्याचार की नई कहानी शुरू हो गई है. नाबालिग लड़कियों और युवतियों को सैक्स गुलाम बनाए जाने की आशंका है. महिलाओं को एक बार फिर यौन दासता की ओर धकेला जा सकता है.

हालांकि विभिन्न देश इन हालात पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन अभी हालात ज्यादा साफ नहीं हुए हैं. इस से अफगान में फिर से आदिम युग लौट सकता है.

यह कहानी इसलिए शुरू हुई है कि काबुल पर जीत के बाद तालिबानी लड़ाके जश्न मना रहे हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं. इन में आतंकी महलों और गवर्नर हाउस के भीतर अय्याशी करते हुए नजर आ रहे हैं.

तालिबानी लड़ाकों द्वारा घरघर जा कर लड़कियों और कम उम्र की महिलाओं को सैक्स गुलाम बना कर अपनी हवस का शिकार बनाया गया है. अफगानिस्तान के अलगअलग शहरों से लड़कियों और महिलाओं को अगवा किया गया है.

तालिबानी जिहादी कमांडरों ने अफगानिस्तान के इमामों से अपने इलाकों की 12 से 45 साल की लड़कियों और महिलाओं की सूची मांगी है ताकि उन की शादी अपने समूह के लड़ाकों से कराई जा सके. अगर ये निकाह हुए तो इन महिलाओं को पाकिस्तान के वजीरिस्तान ले जा कर इस्लामी तालीम दी जाएगी और प्रामाणिक इसलाम में परिवर्तित किया जाएगा. तालिबान की वापसी से महिलाएं सब से ज्यादा खौफजदा हैं. पिछले दिनों कुछ प्रांतों पर कब्जे के बाद से ही तालिबानी नेताओं ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया था.

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तालिबान के ताजा आदेश ने अफगानिस्तान की महिलाओं और बेटियों तथा उन के परिवारों में गहरा खौफ पैदा कर दिया है. लोगों की आंखों में 1996 से 2001 का भयावह मंजर तैर रहा है.

तालिबान ने उस समय 5-6 साल के क्रूर शासन में महिलाओं पर तरहतरह के जुल्म किए थे. उन्हें पढ़ाई से दूर रखा गया. बुर्का पहनने पर मजबूर किया गया और बिना पुरुष संरक्षक के घर से बाहर जाने पर पाबंदियां लगा दी गई थीं. उस समय भी हजारों महिलाओं को सैक्स गुलाम बनाया गया था.

अब फिर से तालिबान में शामिल होने के लिए लड़ाके बनने वाले युवाओं को सैक्स सुख की पेशकश की जा रही है. उन्हें शादी करने के लिए महिलाएं मुहैया कराने का प्रलोभन दिया जा रहा है. यह शादी की आड़ में महिलाओं को यौन दासता की ओर धकेलने की एक रणनीति है.

तालिबान के खौफ से खूबसूरत अफगानी लड़कियों को उन के परिवार वाले घरों या दूसरी जगहों पर छिपा रहे हैं, ताकि तालिबानी लड़ाकों की कामुक नजर उन पर न पड़े.

ये लड़कियां अपनी जान और अस्मत की सलामती की दुआ कर रही हैं. मुंह पर मोटी चादरें लपेटे महिलाएं अपना दर्द किसी से कह भी नहीं पा रही हैं.

दुनिया में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. चाहे रूस हो या ब्रिटेन या फिर चीन अथवा पाकिस्तान, हर बार जंग में महिलाओं को ही सब से ज्यादा रौंदा गया. वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों का दिल बहलाने के लिए एक पूरी की पूरी सैक्स इंडस्ट्री खड़ी हो गई थी.

मोम की तरह फिसलती चमड़ी वाली वियतनामी युवतियों के सामने केवल एक ही विकल्प था कि या तो वे अपना खूबसूरत और गदराया जिस्म उन अमेरिकी सैनिकों के हवाले कर दें अन्यथा उन्हें जबरन सैक्स का शिकार बनाया जाएगा.

उस दौरान हजारों कम उम्र की वियतनामी लड़कियों को हार्मोंस के इंजेक्शन लगाए गए थे ताकि उन के उरोज और नितंब उभर सकें तथा उन लड़कियों का भरा हुआ गुदगुदाया जवान बदन अमेरिकी सैनिकों की काम पिपासा शांत कर सके.

उस युद्ध के दौरान सीली गंध वाले वियतनामी बारों में सुबह से ले कर रात तक उकताए हुए अमेरिकी सैनिक आते थे. उन के साथ कोई न कोई वियतनामी महिला होती थी, जिसे उन्होंने अपना सैक्स गुलाम बनाया हुआ था.

बाद में वियतनाम युद्ध खत्म हो गया था. अमेरिकी सेना भी वापस लौट गई थी. लेकिन इस के कुछ ही महीनों के भीतर वियतनाम में 50 हजार से ज्यादा बच्चे जन्म ले कर इस दुनिया में आए.

ये बच्चे उन अमेरिकी सैनिकों की पैदाइश थे. इन बच्चों को बुई-दोय यानी जीवन की गंदगी कहा गया. इन बच्चों की आंसू भरी मोटीमोटी आंखें देख कर उन की वियतनामी मां का कलेजा टूट जाता था. कलेजा इन बच्चों को गले लगाने के लिए नहीं टूटता था, बल्कि उन बलात्कारों को याद कर वे सिहर उठती थीं, जिन की वजह से वे मां बनीं.

सन 1919 से करीब ढाई साल तक चले आयरिश युद्ध की कहानी भी क्रूरता की कहानी दोहराती है. ब्यूरो औफ मिलिट्री हिस्ट्री ने भी माना था कि इस पूरे युद्ध के दौरान महिलाओं से बर्बरता हुई थी.

सैनिकों ने बलात्कार और हत्या से अलग एक नया तरीका निकाला था. वे दुश्मन देश की महिलाओं के सिर के सारे बाल काट देते थे. इन महिलाओं को सिर ढंकने की मनाही थी.

सिर मुंडाए चलती ये महिलाएं गुलामी का इश्तिहार होती थीं. राह चलते उन के शरीर को दबोचा जाता और अश्लील ठहाके लगाए जाते.

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इतिहास में नाजियों की गिनती सब से क्रूर सोच में होती है. हालांकि जरमन महिलाएं भी सुरक्षित नहीं रहीं. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान सोवियत की सेना ने पूर्वी प्रूशिया पर कब्जा कर लिया. घरों से खींचखींच कर जरमन महिलाएं और बच्चियां बाहर निकाली गईं और दसियों सैनिक एक साथ उन पर टूट पड़े थे. इन का एक ही मकसद था जर्मनी के गुरूर को तोड़ना.

किसी पुरुष के गुरूर को चकनाचूर करने का सब से ताकतवर तरीका है उस की महिला से बलात्कार करना. रेड आर्मी ने यही किया.

सोवियत सेना के एक कैप्टन अलेक्जेंडर सोलजेनिज्न ने एक किताब लिखी थी. गुलाग आर्किपेलगो नामक इस किताब में सोवियत सेना के युवा कैप्टन ने माना था कि जरमन महिलाओं से बलात्कार रूस के लिए जीत का ईनाम था.

युद्ध खत्म होने के बहुत बाद तक भी हजारों जरमन महिलाएं साइबेरिया में कैद रहीं. वहां कैंप में थके हुए रूसी सैनिक आते और नग्न जरमन महिलाओं की परेड कराते.

जो महिला किसी सैनिक को पसंद आ जाती, वह उसे उठा ले जाता और मन भर जाने के बाद वापस उसी कैंप में पटक जाता था.

अपने कट्टरपन के लिए कुख्यात इस्लामिक स्टेट आईएसआईएस के लड़ाके यजीदी महिलाओं के नाम लिख कर एक कटोरदान में डाल देते थे. फिर लौटरी निकाली जाती. जिस भी महिला का नाम जिस लड़ाके के हाथ लगता, उसे वह औरत तोहफे में दे दी जाती थी.

यह उस लड़ाके की इच्छा पर निर्भर करता था कि वह उस औरत से यौन सुख भोगे या उसे बैलगाड़ी में बैल की तरह जोते.

पूर्वी बोस्निया के घने जंगलों के बीचोबीच विलिना व्लास नाम का एक रिसौर्ट है. यहां चीड़ के पत्तों की सरसराहट के बीच प्रेमी जोड़े टहला करते थे. बोस्निया की ट्रेवल गाइड में इसे हेल्थ रिसौर्ट भी कहा जाता था.

नब्बे के दशक में हुए बाल्कन वार ने इस रिसौर्ट का चेहरा बदल दिया. इस रिसौर्ट को रेप कैंप में बदल दिया गया. यहां बोस्निया की औरतों से सर्बियन लड़ाकों ने महीनों तक गैंगरेप किया.

इस दौरान कुछ महिलाएं संक्रमण से मर गईं, तो कुछ ज्यादती से. कुछ महिलाओं ने आत्महत्या कर मौत को गले लगा लिया. संयुक्त राष्ट्र ने 2011 में यह राज खोला था, तब दुनिया को बर्बरता की इस कहानी का पता चला. तब तक बलात्कारी गायब हो चुके थे और मुर्दा औरतें जुल्म की गवाही देने के लिए हाजिर नहीं हो सकीं.

युद्ध कभी भी हुआ हो. चाहे हजारों साल पहले या आज. युद्ध 2 देशों के बीच हो या अंदरूनी. महिलाएं हमेशा से दरिंदगी की शिकार बनती रहीं. उन पर जुल्म ढहाए गए. अब अफगानिस्तान में भी यही हो रहा है.

हिंदुस्तान की बात करें, तो हमारे देश में भी महिलाओं को सैकड़ोंहजारों साल तक गुलामों की तरह जिंदगी जीनी पड़ी थी. पहले जब राजामहाराजाओं और बादशाहों के राज हुआ करते थे, तब वे अपना साम्राज्य और बढ़ाने के लिए युद्ध करते थे.

इन युद्धों में शहरगांव और जमीनों पर कब्जा कर लूटपाट तो की ही जाती थी. साथ ही पराजित राजा या बादशाह के हरम पर कब्जा कर लिया जाता था.

उस जमाने में हरेक राजामहाराजा और बादशाहों के किले महल, गढ़ और दूसरे ठिकानों में हरम हुआ करते थे. इस हरम में रानीमहारानी और बेगमों से इतर सैकड़ों महिलाएं होती थीं.

रानीमहारानी और बेगमों के लिए महल, गढ़ और किले में ऐशोआराम के हर साधन होते थे, लेकिन हरम में रहने वाली महिलाओं को वे सुखसुविधाएं नहीं मिलती थीं.

हरम की इन महिलाओं को वे शासक कभीकभार भोगते थे. कभीकभार शासकों के बड़े ओहदेदार भी हरम की इन महिलाओं को अपनी वासना का शिकार बना लेते थे.

विदेशी आततायियों को भी हिंदुस्तानी महिलाएं खूब पसंद आती थीं. विदेशी आक्रमणकारियों ने जब भी भारत में किसी सूबे पर हमला किया तो कीमती सामान के साथ हरम को भी लूटा था.

भारत में प्राचीन समय में राजामहाराजाओं के बीच महिलाओं को ले कर युद्ध होते रहे हैं. दूसरे राजा की रानियों की खूबसूरती के चर्चे सुन कर कई राजाओं ने युद्ध किए.

अब अफगानिस्तान की महिलाएं तालिबानियों से अपनी जिंदगी और अस्मत बचाने की चिंता में हैं.

अफगानी-पाकिस्तानी एक्ट्रेस मलीशा ने बताए तालिबानियों के जुल्म

अब तालिबान दुनिया के सामने अपनी उदार छवि पेश करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उस की हुकूमत में जिस तरह से महिलाओं पर बंदिशें लगाई जा रही हैं, उस से जाहिर है कि वह बिलकुल नहीं बदला है. तालिबान ने अफगानी-पाकिस्तानी एक्ट्रेस मलीशा हीना खान के खिलाफ फतवा जारी किया है.

मौडल और एक्ट्रेस मलीशा फिलहाल भारत में ही रहती हैं. वह अफगानिस्तान में महिलाओं पर हो रहे हर जुल्म की खबर लगातार ट्विटर पर शेयर करती रहती हैं. इसी बात से नाराज तालिबान ने उन के खिलाफ फतवा जारी किया है.

तालिबान की ओर से फतवा जारी किए जाने से 2 दिन पहले ही मलीशा ने कहा था कि काबुल में तालिबानियों ने आम लोगों को ले जा रही एक गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग की. ये लोग जंग के मैदान से किसी सुरक्षित जगह पनाह लेने के लिए जा रहे थे.

तालिबानी मशीन गन से फायर कर रहे थे. उन्होंने सि विलियंस की गाड़ी पर ग्रेनेड भी फेंके. कई लोगों ने गाड़ी धीमी कर के यह भी दिखाने की कोशिश की कि उस में महिलाएं और बच्चे बैठे हैं. इस के बावजूद तालिबानी लड़ाकों ने उन पर फायरिंग की.

इस से कार में धमाका हुआ और सभी की मौके पर मौत हो गई. एक ट्विटर पोस्ट में मलीशा ने लिखा था कि 10 दिन के भीतर 300 महिलाओं, लड़कियों और नाबालिगों के साथ रेप किया गया. उन्हें जबरन शादी के लिए मजबूर किया गया है.

तालिबानी लड़ाके घरघर जा कर महिलाओं और जवान लड़कियों की तलाश कर रहे हैं. इन से जबरदस्ती शादी की जा रही है. कुछ लड़कियों की उम्र तो 14-15 साल ही है. ये शादी तो बस नाम की है. इन के साथ कई मर्द संबंध बनाते हैं. कई बार तो एक वक्त में 10-10 मर्द ऐसा करते हैं.

मलीशा हीना खान काबुल में हुई हिंसा और लड़ाई में अपने परिवार के 4 सदस्यों को खो चुकी हैं. मलीशा पिछले कई सालों से मुंबई में रहती हैं. मलीशा का भाई व बहन सहित परिवार के 5-6 सदस्य अफगानिस्तान में ही छिपे हुए हैं. उन के चाचा, भतीजे और 2 चचेरे भाई लड़ाई में मारे गए.

मलीशा हीना खान 2018 में तब सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने लोकप्रिय पाकिस्तानी गायिका राबी पीरजादा का समर्थन किया, जिन के प्राइवेट न्यूड फोटो और वीडियो लीक हो गए थे.

मेरी सासू मां सोने पर भी पाबंदियां लगाती है, मैं क्या करूं?

सवाल
मैं 25 वर्षीय महिला हूं. हाल ही में शादी हुई है. पति घर की इकलौती संतान हैं और सरकारी बैंक में कार्यरत हैं. घर साधनसंपन्न है. पर सब से बड़ी दिक्कत सासूमां को ले कर है. उन्हें मेरा आधुनिक कपड़े पहनना, टीवी देखना, मोबाइल पर बातें करना और यहां तक कि सोने तक पर पाबंदियां लगाना मुझे बहुत अखरता है. बताएं मैं क्या करूं?

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जवाब
आप घर की इकलौती बहू हैं तो जाहिर है आगे चल कर आप को बड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी. यह बात आप की सासूमां सम झती होंगी, इसलिए वे चाहती होंगी कि आप जल्दी अपनी जिम्मेदारी सम झ कर घर संभाल लें. बेहतर होगा कि ससुराल में सब को विश्वास में लेने की कोशिश की जाए. सासूमां को मां समान सम झेंगी, इज्जत देंगी तो जल्द ही वे भी आप से घुलमिल जाएंगी और तब वे खुद ही आप को आधुनिक कपड़े पहनने को प्रेरित कर सकती हैं.

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घर का कामकाज निबटा कर टीवी देखने पर सासूमां को भी आपत्ति नहीं होगी. बेहतर यही होगा कि आप सासूमां के साथ अधिक से अधिक रहें, साथ शौपिंग करने जाएं, घर की जिम्मेदारियों को समझें, फिर देखिएगा आप दोनों एकदूसरे की पर्याय बन जाएंगी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

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मेरा पति सिर्फ मेरा है- भाग 1: अनुषा ने अपने पति को टीना के चंगुल से कैसे निकाला?

सुबहबह के 6 बज गए थे. अनुषा नहाधो कर तैयार हो गई. ससुराल में उस का पहला दिन जो था वरना घर में क्या मजाल कि कभी सुबह 8 बजे से पहले उठी हो.

विदाई के समय मां ने समझाया, ‘‘बेटी, लड़कियां कितनी भी पढ़लिख जाएं उन्हें अपने संस्कार और पत्नी धर्म कभी नहीं भूलना चाहिए. सुबह जल्दी उठ कर सिर पर पल्लू रख कर रोजाना सासससुर का आशीर्वाद लेना. कभी पति का साथ न छोड़ना. कैसी भी परिस्थिति आ जाए धैर्य न खोना और मुंह से कभी कटु वचन न निकालना.’’

‘‘जैसी आप की आज्ञा माताश्री…’’

जिस अंदाज में अनुषा ने कहा था उसे सुन कर विदाई के क्षणों में भी मां के चेहरे पर हंसी आ गई थी.

अनुषा ड्रैसिंग टेबल के आगे बैठी थी. बीती रात की रौनक उस के चेहरे पर लाली बन कर बिखरी हुई थी. भीगी जुल्फें संवारते हुए प्यारभरी नजरों से उस ने बेसुध भुवन की तरफ देखा.

भुवन से वैसे तो उस की अरेंज्ड मैरिज हुई थी, मगर सगाई और शादी के बीच के समय में वे कई दफा मिले थे. इसी दरमियान उस के दिल में भुवन के लिए प्यार उमड़ पड़ा था. तभी तो शादी के समय उसे महसूस ही नहीं हुआ कि वह अरेंज्ड मैरिज कर किसी अजनबी को जीवनसाथी बना रही है. उसे लग रहा था जैसे लव मैरिज कर अपने प्रियतम के घर जा रही है.

बाल संवार सिर पर पल्लू रख कर अनुषा सीढि़यों से नीचे उतर आई. सासससुर बैठकरूम में सोफे पर बैठे अखबार पढ़ते हुए चाय की चुसकियों का आनंद ले रहे थे. अनुषा ने उन को अभिवादन किया और किचन में घुस गई. उस ने अपने हाथों से सुबह का नाश्ता तैयार कर खिलाया तो ससुर ने आशीषस्वरूप उसे 5 हजार रुपए नोट दिए. सास ने अपने गले से सोने की चेन निकाल कर दी. तब तक भुवन भी तैयार हो कर नीचे आ चुका था.

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भुवन ने अनुषा को बताया था कि अभी औफिस में कुछ जरूरी मीटिंग्स हैं, इसलिए

2-3 दिन मीटिंग्स और दूसरे काम निबटा कर

अगले सप्ताह दोनों हनीमून के लिए निकलेंगे. इस के लिए भुवन ने 10 दिनों की छुट्टी भी ले रखी थी.

भुवन का औफिस टाइम 10 बजे का था. औफिस ज्यादा दूर भी नहीं था और जाना भी अपनी गाड़ी से ही था. फिर भी भुवन ठीक 9 बजे घर से निकल गया तो अनुषा को कुछ अजीब लगा. मगर फिर सामान्य हो कर वह खाने की तैयारी में जुट गई.

तब तक कामवाली भी आ गई थी. अनुषा को ऊपर से नीचे तक तारीफभरी नजरों से देखने के बाद धीरे से बोली, ‘‘शायद अब भुवन भैया उस नागिन के चंगुल से बच जाएंगे.’’

‘‘यह क्या कह रही हो तुम?’’ कामवाली की बात पर आश्चर्य और गुस्से में अनुषा ने कहा.

वह मुसकराती हुई बोली, ‘‘बस बहूरानी कुछ ही दिनों में आप को मेरी बात का मतलब समझ आ जाएगा… 2-3 दिन इंतजार कर लो,’’ कह कर वह काम में लग गई.

फिर अनुषा की तारीफ करती हुई बोली, ‘‘वैसे बहूरानी बड़ी खूबसूरत हो तुम.’’

अनुषा ने उस की बात अनसुनी कर दी. उस के दिमाग में तो नागिन शब्द घूम रहा था. उसे नागिन का मतलब समझ नहीं आ रहा था.

पूरा दिन अनुषा भुवन के फोन का इंतजार करती रही. दोपहर में भुवन का फोन आया. दोनों ने आधे घंटे प्यारभरी बातें कीं. शाम में भुवन को आने में देर हुई तो अनुषा ने सास से पूछा.

सास ने निश्चिंतता भरे स्वर में कहा, ‘‘आ रहा होगा… थोड़ा औफिस के दोस्तों में बिजी होगा.’’

8 बजे के करीब भुवन घर लौटा. साथ में एक महिला भी थी. लंबी, छरहरी, नजाकत और

अदाओं से लबरेज व्यक्तित्व वाली उस महिला ने स्लीवलैस वनपीस ड्रैस पहन रखी थी. होंठों पर गहरी लिपस्टिक और हाई हील्स में वह किसी मौडल से कम नहीं लग रही थी. अनुषा को भरपूर निगाहों से देखने के बाद भुवन की ओर मुखातिब हुई और हंस कर बोली, ‘‘गुड चौइस. तो यह है आप की बैटर हाफ… अच्छी है.’’

बिना किसी के कहे ही वह सोफे पर पसर गई. सास जल्दी से 2 गिलास शरबत ले आई, शरबत पीते हुए उस ने शरबती आवाज में कहा, ‘‘भुवन, जिस दिल में मैं हूं उसे किसी और को किराए पर तो नहीं दे दोगे?’’

उस महिला के मुंह से ऐसी बेतुकी बात सुन कर अनुषा की भंवें चढ़ गईं. उस ने प्रश्नवाचक नजरों से भुवन की ओर देखा और फिर सास की तरफ.

सास ने नजरें नीचे कर लीं और भुवन ने बेशर्मी से हंसते हुए कहा, ‘‘यार टीना तुम्हारी मजाक करने की आदत नहीं गई.’’

‘‘मजाक कौन कर रहा है? मैं तो हकीकत बयां कर रही हूं. वैसे अनुषा तुम से मिल कर अच्छा लगा. आगे भी मुलाकातें होती रहेंगी हमारी. आखिर मैं भुवन की दोस्त जो हूं. तुम्हारी भी दोस्त हुई न. बैटर हाफ जो हो तुम उस की.’’

वह बारबार बैटर हाफ शब्द पर जोर दे रही थी. अनुषा उस का मतलब अच्छी तरह समझ रही थी.

टीना ने फिर से अदाएं बिखेरते हुए कहा, ‘‘आज की रात तो नींद नहीं, चैन नहीं, है न भुवन.’’

5-10 मिनट रुक कर वह जाने के लिए खड़ी हो गई. भुवन उसे घर छोड़ने चला गया.

अनुषा ने सास से सवाल किया, ‘‘यह

कौन है मांजी जो भुवन पर इतना अधिकार जता रही है?’’

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‘‘देखो बेटा, अब तुम भुवन की पत्नी हो इसलिए इतना तो तुम्हें जानने का हक है ही कि वह कौन थी? दरअसल, बेटा तुम्हें उसे भुवन

की जिंदगी में स्वीकार करना पड़ेगा. हमारी मजबूरी है बेटा. हम सब को भी उसे स्वीकार करना पड़ा है बेटे.’’

‘‘पर क्यों सासूमां? क्या भुवन का उस के साथ कोई रिश्ता है?’’

‘‘ऐसा कोई रिश्ता तो नहीं बहू पर बस यह जान लो कि उस के बहुत से एहसान हैं हमारे ऊपर. वैसे तो वह उस की बौस है, मगर भुवन को इस मुकाम तक पहुंचाने में काफी मदद की है उस ने. अपनी पावर का उपयोग कर भुवन को काफी अच्छा ओहदा दिया है. बस भुवन पसंद है उसे और कुछ नहीं.’’

‘‘इतना कम है क्या सासूमां? वह तो पत्नी की तरह हक दिखाती है भुवन पर.’’

Crime Story: प्यार में जब खेला गया अपहरण का खेल

15 सितंबर, 2016 को अपने दोनों बेटों को स्कूल भेजने के बाद परमजीत कौर घर के  जरूरी काम निपटा कर बाजार चली गई थी. बाजार से लौटने में उसे दोपहर के 2 बज गए. बाजार से लाया सामान रख कर उस ने मां से पूछा, ‘‘बीजी, अभी बच्चे स्कूल से नहीं आए क्या?’’

‘‘थकीमांदी आई हो, आराम से एक गिलास पानी पियो. बच्चे आते ही होंगे, वे कहां जाएंगे, रास्ते में खेलने लग गए होंगे.’’

‘‘बीजी, गांव के सारे बच्चे आ गए हैं, मेरे ही बेटे कहां रह गए?’’ परेशान परमजीत

कौर ने कहा, ‘‘मैं जरा देख कर आती हूं.’’

परमजीत कौर घर से निकल रही थी, तभी घर के बाहर उस के पिता पाला सिंह मिल गए. बच्चों के स्कूल से न आने की बात सुन कर वह भी परेशान हो उठे. बच्चों की तलाश में परमजीत कौर के साथ वह भी चल पड़े. पाला सिंह और परमजीत कौर ने गांव के लगभग सभी बच्चों से अपने बच्चों के बारे में पूछा, पर कोई भी बच्चा उन के बारे में नहीं बता सका.

बच्चों ने सिर्फ यही बताया था कि स्कूल की छुट्टी होने पर उन्होंने उन्हें देखा तो था, लेकिन उस के बाद वे कहां चले गए, यह किसी को पता नहीं था. बच्चों के न मिलने से परमजीत कौर का बुरा हाल था. किसी अनहोनी के बारे में सोच कर वह फूटफूट कर रो रही थी. स्कूल के अध्यापक सतपाल और प्रिंसिपल जगदीश कुमार ने भी बताया था कि छुट्टी होने तक तो दोनों बच्चे साथसाथ दिखाई दिए थे. लेकिन स्कूल से निकलने के बाद वे किधर गए, उन्हें पता नहीं था.

परमजीत कौर के मन में एक ही सवाल बारबार उठ रहा था कि आखिर उस के बच्चे कहां चले गए? रोरो कर वह सब से पूछ भी यही रही थी. शाम करीब 4 बजे गांव के ही हरप्रीत से पता चला कि उस के दोनों बेटों अंकुशदीप और जशनदीप को एक आदमी अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा कर ले गया था.

वह मोटरसाइकिल सवार कौन था, हरप्रीत यह नहीं बता सका था. उस ने बताया था कि वह अपने मुंह पर काला कपड़ा बांधे था, इसलिए वह उसे पहचान नहीं सका था. कोई अंजान आदमी अपनी मोटरसाइकिल पर दोनों बच्चों को बिठा कर ले गया था, इस का मतलब था कि उन का अपहरण हुआ था.

इतना जानने के बाद समय बेकार करना ठीक नहीं था, इसलिए पाला सिंह बेटी परमजीत कौर, स्कूल के प्रिंसिपल जगदीश कुमार और गांव के कुछ लोगों को साथ ले कर पुलिस को सूचना देने जिला फाजिल्का के थाना बहाववालापुरा की पुलिस चौकी वजीदपुर भीमा जा पहुंचे.

चौकीप्रभारी मुंशीराम ने उन लोगों की बातें ध्यान से सुनने के बाद थानाप्रभारी तेजेंद्रपाल सिंह के अलावा उच्चाधिकारियों को भी घटना की सूचना दे दी. इस के बाद उन्हीं के निर्देश पर 8 साल के अंकुशदीप सिंह और 6 साल के जशनदीप सिंह के अपहरण का मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर काररवाई शुरू कर दी.

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मुकदमा दर्ज होते ही चौकीप्रभारी मुंशीराम ने शहर से बाहर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर नाके लगवा दिए. छोटीबड़ी हर गाड़ी की तलाशी ली जाने लगी. पुलिस अपनी काररवाई कर ही रही थी कि चौकी वजीदपुर भीमा के मुंशी के पास एक फोन आया, जिस में फोन करने वाले ने कहा, ‘‘मैं गुरजंट सिंह बोल रहा हूं. अपने साहब से कह दो कि जिन बच्चों को वे ढूंढ रहे हैं, उन के लिए वे परेशान न हों. बच्चे मेरे पास हैं. यह हमारा आपस के लेनदेन का मामला है, इसलिए आप लोगों को बीच में पड़ने की जरूरत नहीं है.’’

यही बात परमजीत कौर को भी फोन कर के कही गई थी. फोन करने वाले ने उस से कहा था, ‘‘मैं बच्चों का अंकल बोल रहा हूं. तुम ने मुझ से जो 20 हजार रुपए लिए थे, उन्हें दे जाओ और मुझ से शादी कर लो. अगर तुम ने मेरी बात मान ली तो मैं तुम्हारे दोनों बेटों को छोड़ दूंगा. अगर नहीं मानी तो उन के छोटेछोटे टुकड़े कर के कहीं फेंक दूंगा.’’

ये दोनों फोन एक ही नंबर से किए गए थे. पुलिस इस सोच में पड़ गई कि फोन करने वाला सनकी है या फिर बेहद चालाक? कहीं वह पुलिस को अपनी इन बातों में उलझा कर कोई नया खेल तो नहीं खेलना चाहता?

बहरहाल, बच्चों की सुरक्षा बेहद जरूरी थी. इसलिए मुंशीराम ने तुरंत उस नंबर की लोकेशन पता करवाई, जो शहर के बाहरी इलाके सीतोगुन्नो की मिली. सीतोगुन्नो जाने के लिए एक टीम तैयार की गई, जिस में थानाप्रभारी तजेंद्रपाल सिंह ने चौकीप्रभारी मुंशीराम, हैडकांस्टेबल सुखदेव सिंह, रमेश कुमार, दलजीत सिंह, कांस्टेबल सरवन, मक्खन और जगदीप सिंह को शामिल किया.

सीतोगुन्नो गांव के पास एक ऊंची पहाड़ी जैसी जगह थी, जिसे पुलिस टीम ने घेर लिया और गुरजंट की तलाश शुरू कर दी. तलाश करती पुलिस टीम जब एक टीले के पास पहुंची तो वहां झाड़ी के पास दोनों बच्चे जमीन पर अर्द्धबेहोशी की हालत में पड़े दिखाई दिए. दोनों बच्चों के हाथपैर और मुंह को बड़ी बेरहमी के साथ बांधा गया था.

मुंशीराम ने जल्दी से बच्चों के हाथपैर तथा मुंह खोला और उन्हें बहाववालापुरा के अस्पताल पहुंचाया. बाकी पुलिस टीम गुरजंट की तलाश में वहीं जमी रही. लेकिन गुरजंट भाग गया था, क्योंकि काफी तलाश के बाद भी वह वहां नहीं मिला था. इस की वजह यह थी कि वह काफी ऊंचाई पर था, जिस से उस ने पुलिस को आते देख लिया होगा.

बहरहाल, थोड़ी देखभाल के बाद दोनों बच्चे स्वस्थ हो गए थे. मुंशीराम ने अंकुशदीप और जशनदीप को सकुशल परमजीत कौर के हवाले कर दिया. अब उन्हें पता करना था कि गुरजंट कौन था और उस ने परमजीत कौर के बेटों का अपहरण क्यों किया था?

मुंशीराम ने गुरजंट की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए. आखिर उन की मेहनत रंग लाई और पैसों की कमी से परेशान हो कर अपने किसी दोस्त से पैसे लेने बसअड्डे के पास आए गुरजंट को मुखबिर की सूचना पर उन्होंने गिरफ्तार कर लिया. उस से और परमजीत कौर तथा उस के पिता पाला सिंह से की गई पूछताछ के बाद बच्चों के अपहरण की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

पाला सिंह जिला फाजिल्का के थाना बहाववालापुरा के गांव हिम्मतपुरा के रहने वाले थे. खेती कर के गुजरबसर करने वाले पाला सिंह की बेटी परमजीत कौर शादी लायक हुई तो उन्होंने सन 2006 में जिला बठिंडा के थाना भुचोमंडी के गांव खुइयां कोठी के रहने वाले रेशम सिंह से उस का विवाह कर दिया. शादी के बाद परमजीत कौर 2 बेटों अंकुशदीप सिंह और जशनदीप सिंह की मां बनी.

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भले ही परमजीत कौर की शादी हुए 8 साल हो गए थे और वह 2 बच्चों की मां बन गई थी, लेकिन उस की अपने पति रेशम सिंह से कभी नहीं पटी. वह कमाता तो ठीकठाक था, लेकिन न वह बीवी का खयाल रखता था और न बच्चों का. यही नहीं, शराब पी कर वह हैवान बन जाता था. छोटीछोटी बातों पर क्लेश करते हुए वह मारपीट के लिए उतारू हो जाता था.

रोज की इस क्लेशभरी जिंदगी से तंग आ कर परमजीत कौर अपने दोनों बेटों को ले कर करीब 3 साल पहले सन 2013 में पति का घर छोड़ कर पिता पाला सिंह के घर आ कर रहने लगी. मांबाप को बोझ न लगे, इस के लिए वह पास की ही एक फैक्ट्री में नौकरी करने लगी. नौकरी लगने के बाद उस ने सिविल कोर्ट में तलाक का मुकदमा कर दिया था. बच्चों के भविष्य को ध्यान में रख कर उस ने गांव के सरकारी स्कूल में उन का दाखिला करा दिया था.

सुबह नौकरी पर जाने के बाद बच्चे दोपहर को घर आते थे तो उस की अनुपस्थिति में उन का खयाल उस की मां अमरजीत कौर रखती थीं. परमजीत कौर को पिता के घर रहते लगभग 3 साल हो गए थे. पिछले साल उस की मुलाकात गुरजंट सिंह से हुई, जो जल्दी ही जानपहचान में बदल गई. गुरजंट सिंह भी वहीं काम करता था, जहां परमजीत कौर करती थी. एक साथ, एक ही जगह पर काम करते हुए ही दोनों में जानपहचान हुई थी.

इस के आगे परमजीत कौर ने न कभी कुछ सोचा था और न ही कुछ सोचने की स्थिति में थी. पति से तलाक के बाद आगे क्या करना है, यह उस के पिता को सोचना था. जबकि जानपहचान होते ही गुरजंट सिंह ने परमजीत कौर को ले कर बहुत आगे की सोच ली थी. वह उस से शादी करने के बारे में सोचने लगा था. एक दिन उस ने यह बात परमजीत कौर से कह भी दी.

परमजीत कौर नेक, शरीफ और धैर्यवान औरत थी. उस ने गुरजंट सिंह को प्यार से समझाते हुए कहा था, ‘‘हम एक साथ काम करते हैं, उठतेबैठते हैं और खातेपीते हैं, यह तो ठीक है? लेकिन रही शादी की बात तो यह न मुझे अच्छी लगती है और न मैं इस बारे में सोचना चाहती हूं.’’

‘‘तो क्या तुम पूरी जिंदगी बिना पति के गुजार दोगी?’’

‘‘यह मेरी समस्या है और इस का समाधान ढूंढना मेरे मातापिता की जिम्मेदारी है, इसलिए तुम्हें इस की चिंता करने की जरूरत नहीं है.’’ परमजीत कौर ने साफसाफ कह दिया.

कहने को तो परमजीत कौर ने गुरजंट को बड़े सभ्य तरीके से समझा दिया था, लेकिन वह अपनी आदत से बाज नहीं आया. वह जब भी परमजीत कौर से मिलता, शादी की ही बात करता. यही नहीं, अब वह आतेजाते परमजीत कौर से छेड़छाड़ भी करने लगा था.

बात जब हद से आगे बढ़ने लगी तो एक दिन परमजीत कौर ने सारी बातें अपने पिता पाला सिंह को बता कर गांव में पंचायत बुला ली. पंचायत ने गुरजंट और उस के पिता हरपाल सिंह को बुलवा लिया.

गुरजंट सिंह जिला श्रीमुक्तसर साहिब के थाना लंबी के गांव भाटीवाला का रहने वाला था. पंचायत ने जब गुरजंट सिंह को उस के पिता के सामने बहूबेटियों को छेड़ने के आरोप में सजा देने की बात की तो उस के पिता ने हाथ जोड़ कर माफी मांगी और वचन दिया कि भविष्य में गुरजंट कभी इस गांव के आसपास भी दिखाई नहीं देगा. उसी दिन हरपाल सिंह गुरजंट को ले कर गांव चला गया. यह जुलाई, 2016 की बात है.

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उस दिन के बाद गुरजंट सिंह परमजीत कौर को तो क्या, गांव के भी किसी आदमी को दिखाई नहीं दिया. 3 महीने बाद अचानक गांव आ कर उस ने बड़ी होशियारी से परमजीत कौर के दोनों बेटों का अपहरण कर लिया, ताकि उस पर दबाव डाल कर वह उस से शादी कर सके.

पूछताछ के बाद मुंशीराम ने इस मुकदमे में अपहरण के साथ षडयंत्र की धारा को जोड़ कर गुरजंट सिंह को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

इस के बाद गुरजंट के पिता हरपाल सिंह ने गांव में पंचायत बुला कर परमजीत कौर और गांव वालों से माफी मांगते हुए कहा कि वे एक बार फिर गुरजंट को माफ कर दें. लेकिन अब क्या हो सकता था. अब तो मामला पुलिस और न्यायालय तक पहुंच चुका था. उस ने जो किया था, उस की सजा तो उसे भोगनी ही पड़ेगी.

Top 10 Best Relationship Tips in Hindi: रिलेशनशिप से जुड़ी टॉप 10 खबरें हिंदी में

Top 10 Best Relationship Tips in Hindi: हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. क्योंकि हरेक के विचार और व्यवहार एक दूसरे से अलग होते हैं. कभी-कभी ऐसा होता है कि छोटी-छोटी बातों के कारण रिश्ता टूट भी जाता है. तो अगर आप अपने रिश्ते को मजबूत बनाना चाहते हैं तो पढ़िए सरस सलिल की Top 10 Best Relationship Tips in hindi. आप इन खास टिप्स को अपनाकर रिश्ते को मजबूत कर सकते हैं.

  1. रिलेशनशिप में सेक्स का है बहुत महत्व, जानें कैसे

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संबंधों में एक-दूसरे का साथ बेहद जरूरी है. आपसी संबंधों में जहां एक साथी का दूसरे साथी से मानसिक जुड़ाव होता है ऐसे में शारीरिक देह को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. मानसिक जुडा़व के साथ-साथ शारीरिक जुड़ाव भी संबंधों में मधुरता लाता है. पति-पत्नी के संबंधों में सेक्स का अपना अलग महत्व है. न सिर्फ पति-पत्नी बल्कि वैवाहिक जीवन में सेक्स का महत्व बहुत अधिक होता है. इससे पति-पत्नी न सिर्फ एक-दूसरे के नजदीक रहते हैं बल्कि सेक्स संबंधों में खटास को भी दूर करता है. जिस प्रकार जीवन में भोजन की आवश्यकता होती है, ठीक उसी तरह से वैवाहिक जीवन में सेक्स की आवश्यकता होती है. आइए जानते हैं संबंधों में सेक्स के महत्व के बारे में.

सही मायने में सेक्स सिर्फ भौतिक सुख ही नहीं बल्कि मानसिक सुख भी देता है, इसके साथ ही ये तनाव दूर करने में भी बहुत कारगर है. सेक्स के माध्यम से ही पति-पत्नी के संबंधों में भावनात्मक जुड़ाव अधिक दिखाई देता है.

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2. पति की दूरी, आखिर कैसे बने नजदीकी

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शायद ही ऐसी कोई पत्नी होगी जो अपनी शादी पर 2-4 आंसू न बहाती हो. शादी के कुछ साल गुजरने के बाद पति में तो अपनी भावनाएं व्यक्त करने की काबिलीयत जैसे कुम्हला सी जाती है और पत्नी अपने पति को दिनबदिन नीरस बनता देखती रहती है, जिस से उस का मन व्यग्रता और हताशा से भरने लगता है. ये दूरियां एक ऐसी कशमकश पैदा करती हैं जिस की शिकायत पत्नियां बरसों से करती आई हैं, उन्हें रविवार की दोपहर को क्रिकेट मैच में, अखबार के पन्नों में या फिर चुप्पी में सिमटा या लिपटा पति मिलता है.

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3. जब पत्नी बहाना बनाए, नजदीक न आए

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महेंद्र की शादी को 10 साल हुए गए हैं. उस के दो बच्चे हैं. उसे हर रात को अपनी पत्नी का साथ चाहिए. प्यार की बरसात चाहिए. पर उस की पत्नी मोहिनी उसे गच्चा दे जाती है. वह कभी छोटी बेटी को सुलाने का बहाना बना देती है तो कभी घर का ज्यादा काम करने की वजह से बदन दर्द की शिकायत करते हुए मुंह फेर कर सो जाती है. कभी नजदीक आती भी है तो बेमन से.

महेंद्र इस बात से चिड़चिड़ा हो गया है. वह ऑफिस में भी खुश नहीं रहता है. कभीकभार तो वह अपने साथी कर्मचारियों से भी भिड़ जाता है. नतीजतन अब वह शराब पीने लगा है और कभीकभार किसी प्रोफेशनल लड़की को पैसे दे कर उस के साथ रात बिता लेता है. बहाना बनाता है ऑफिस के टूर का या नाईट शिफ्ट का.

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4. बारिश में इश्क की खुमारी!

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मानसून के मदमाते मौसम में तो उन का प्यार सावन के झड़ी बन कर एकदूसरे पर बरस जाता है. कल की ही बात है. दोनों सुबह ऑफिस जाने के लिए तैयार हो चुके थे. रीना साड़ी पहने हुई थी जबकि रंजन ने फॉर्मल पैंटशर्ट. इसी बीच बारिश ने अपना रंग दिखा दिया. पहले रिमझिम, उस के बाद तेज बरसात. रीना अपनी बालकनी में जा कर आसमान से बरसते पानी का लुत्फ़ लेने लगी. थोड़ी देर में वह भूल गई कि उसे ऑफिस जाना है. बेखयाली में वह थोड़ा सा भीग गई.

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5. सेक्स लाइफ बेहतर बनाने के लिए करें ये आसान काम

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हम अपना वजन कम करने के लिए क्या नहीं करते हैं. इसके लिए हम डाइटिंग भी करते है. जिससे लिए हम कम से कम खाना खाते हैं, लेकिन आप जानते हैं कि कम खाना खाने से कई फायदे हैं. इन्हीं में से एक फायदा है सेक्स लाइफ. कम खाना खाने से आपकी सेक्स लाइफ बेहतर रहती है. यह बात एक शोध में सामने आई.

अगर आप कैलोरी के प्रति सचेत हैं और अतिरिक्त वजन घटाने के लिए स्वास्थ्यवर्धक भोजन ग्रहण करते हैं तो आपके खुश होने का एक और बड़ा कारण मिल गया है. एक दिलचस्प शोध में यह पता चला है कि कम खाने से न सिर्फ लोगों को वजन कम करने में मदद मिलती है, बल्कि यह मूड को भी बेहतर बनाता है और तनाव को कम करता है, जिससे आपकी सेक्स लाइफ बेहतर होती है.

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6. रिश्ता दिल से

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क्या प्यार की कोई सही उम्र होती है? क्या प्यार के लिए कोई छोटा और कोई बूढ़ा होता है? जी नहीं, प्यार की कोई उम्र, कोई सीमा नहीं होती. प्रसिद्ध लेखिका मारिया एजवर्थ ने कहा था कि इंसानी दिल किसी भी उम्र में उस दिल के आगे खुलता है जो बदले में अपने दिल का रास्ता खोल दे. तकरीबन 2 शतक पूर्व कही गई उन की बात आज भी सटीक साबित होती है. शायद इसी बात की मार्मिकता को समझते हुए गजल सम्राट जगजीत सिंह ने फिल्म ‘प्रेम गीत’ (1981) के एक गीत ‘होठों से छू लो तुम…’ की कुछ पंक्तियों में कहा है, ‘न उम्र की सीमा हो… न जन्मों का हो बंधन, जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन…’ चार दशक पहले लिखा यह गीत आज भी प्रासांगिक है. तब प्यार की जो नई परिभाषा कल्पना में पिरो कर शब्दों से सजाई गई थी, आज वह समाज की हकीकत बन गई है.

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7. ब्रेकअप से टूटता है पुरुषों का दिल भी

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समीर (बदला हुआ नाम) कुछ महीनों से काफी डिप्रैशन में रहने लगा है. हंसमुख मिजाज का और दूसरों को भी खुश रखने वाला समीर न तो अब किसी से ज्यादा बातें करता है और न ही कहीं आताजाता है. औफिस से आते ही वह अपने कमरे में बंद हो जाता है. कारण, कुछ महीने पहले उस का अपनी गर्लफ्रैंड से ब्रेकअप हो गया, जिस के कारण वह काफी डिप्रैस्ड रहने लगा है. समीर का कहना है जब उस की गर्लफ्रैंड से उस का ब्रेकअप हुआ तो लगा मानो उस की पूरी दुनिया ही उजड़ गई. वह अपने ब्रेकअप के दर्द से बाहर नहीं आ पा रहा है.

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8. पति-पत्नी के रिश्ते में कायम रखें रोमांस

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सुमित और पूजा के विवाह को हुए 10 साल बीत चुके हैं. लेकिन दोनों के बीच का प्यार देख कर लगता है जैसे कुछ ही अरसा हुआ है. दोनों का कहना है कि आज भी दोनों अपने रिश्ते में वही ताजगी और नयापन महसूस करते हैं जैसे शुरुआती दिनों में. दरअसल, उन्होंने अपने रिश्ते को बो िझल नहीं बनने दिया. एकदूसरे की खुशी का खयाल रखा. सिर्फ शारीरिक नहीं, भावनात्मक रिश्ता इतना मजबूत बनाया हुआ है कि उस में ‘मैं’ की भावना नहीं है. लेकिन हर पतिपत्नी सुमित और पूजा की तरह खुशमिजाज नहीं होते.

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9. क्या आपकी दोस्ती खतरे में है?

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एक रिश्ता है जो हम अपने व्यवहार से बनाते हैं, वह है दोस्ती. दोस्ती एकमात्र ऐसा रिश्ता है जो हम खुद जोड़ते हैं. दोस्त हम स्वयं चुनते हैं. लेकिन दोस्त की इस दोस्ती से कब व कैसे कट कर लिया जाए. आप भी जानिए.

संभव है कि किन्हीं कारणों से आप की दोस्ती अब पहले जैसी नहीं रह गई हो. आप के दोस्त के बरताव में आप कुछ बदलाव महसूस कर सकते हैं या आप में उस की दिलचस्पी अब न रही हो या कम हो गई हो. कुछ संकेतों से आप पता लगा सकते हैं कि अब यह दोस्ती ज्यादा दिन निभने वाली नहीं है और बेहतर है कि इस दोस्ती को भूल जाएं.

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10.जब पार्टनर हो शक्की

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‘‘इतनी लेट नाइट किस से बात कर रहे थे? मेरा फोन क्या नहीं उठाया? वह तुम्हें देख कर क्यों मुसकराई? मेरी पीठ पीछे कुछ चल रहा है क्या?’’ यदि ऐसे सवालों से आप का रोज सामना होता है तो आप ठीक समझे आप का पार्टनर शक्की है.

यदि आप इन सवालों से थक गए हैं और यह रिश्ता नहीं निभा सकते, पर अपने बौयफ्रैंड या गर्लफ्रैंड को प्यार भी करते हैं और उसे इस शक की आदत पर छोड़ना भी नहीं चाहते, तो ऐसे शक्की पार्टनर से निबटने के लिए इन टिप्स पर गौर करें:

द्य किसी भी रिश्ते में सब से बुरी चीज शक करना ही हो सकता है. इस से असुरक्षा, झूठ, चीटिंग, गुस्सा, दुख, विश्वासघात सब आ सकता है. रिश्ते की शुरुआत में एकदूसरे को समझने के लिए ज्यादा कोशिश रहती है. एकदूसरे पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है. एक बार आप दोनों में बौंडिंग हो गई तो आप जीवन की और महत्त्वपूर्ण बातों की तरफ ध्यान देने लगते हैं. इस का मतलब यह नहीं होता है कि पार्टनर में रुचि कम हो गई है. इस का मतलब है कि अब वह आप की लाइफ का पार्ट है और आप अब उस के साथ कुछ और बातों में, कामों में अपना ध्यान लगा सकते हैं.

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Udaariyaan: इस वजह से रुक गया तेजो और फतेह का तलाक, अब जैस्मिन चलेगी नई चाल

कलर्स टीवी (Colors Tv) का सीरियल उडारियां (Udaariyaan) इन दिनों टीआरपी लिस्ट में शामिल है. शो की कहानी दर्शकों को खूब पसंद आ रही है. शो में अब तक आपने देखा कि तेजो ने फतेह (Ankit Gupta) से कहा है कि वह उसे तलाक दे देगी और घरवावलों से कह देगी कि वह अपनी जिंदगी में मूव ऑन करना चाहती है. तो वहीं जेल से बाहर आते ही तेजो घरवालों से कहती है कि वह फतेह को तलाक देगी और वह तलाक के पेपर पर साइन कर देती है  और वह दोनों कोर्ट जाते हैं लेकिन जज दोनों को 6 महीने तक साथ रहने की बात कह देती है. इससे दोनों का तलाक रुक जाता है. और तेजो फतेह के घर वापस आ जाती है. तेजो को देखकर जैस्मिन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है. शो के अपकमिंग एपिसोड में महाट्विस्ट आने वाला है. आइए जानते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

जैस्मिन चलेगी नई चाल

 

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शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि जैस्मिन तेजो के साथ एक नई चाल चलेगी. दरअसल फतेह की फैमिली तेजो से बहुत प्यार करती है और ऐसे में जैस्मिन कुछ ऐसा करेगी कि तेजो वीर परिवार की नजरों में गिर जाये.

 

शो में आपने देखा कि तेजो के साइन करने के बाद फतेह भी तलाक के पेपर्स पर साइन कर देता है लेकिन फतेह को बहुत बुरा लगता है तो वहीं जैस्मिन काफी खुश होती है. उडारियां में ये भी दिखाया गया कि तलाक के लिए तेजो और फतेह की कोर्ट में पेशी होगी. इस दौरान जज दोनों से सवाल करती है. वह पूछती है कि क्या फतेह और तेजो सच में तलाक लेना चाहते हैं या उनको एक और मौका चाहिए. ये बात सुनकर खुशबीर कहता है कि वह तेजो और फतेह के तलाख के खिलाफ है.

 

खुशबीर ये भी कहता है कि वह इस तलाक को नहीं मानता है. तेजो हमेशा उसके घर की बहू रहेगी. खुशबीर काफी गुस्से में दिखाई देता है.

Anupamaa: राखी को धक्के मारकर निकालेगी अनुपमा, घमंड होगा चकनाचूर

टीवी सीरियल अनुपमा (Anupamaa) में इन दिनों लगातार महाट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो की कहानी अनुज-अनुपमा, वनराज-काव्या (Vanraj-Kavya) के इर्द-गिर्द घुम रही है. अनुपमा खुद की सम्मान के लिए सबका मुंहतोड़ जवाब देती नजर आ रही है.  शो में ये भी दिखाया गया कि नशे में अनुज ने वनराज से कह दिया कि वह अनुपमा से प्यार करता है. लेकिन होश में आने के बाद वनराज-अनुज भूल जाते हैं कि उनके बीच क्या बात हुई. तो वहीं बा अनुपमा को कॉल करती है पर अनुपमा पिक नहीं करती है, इस वजह से बा अनुपमा से नाराज है और उसे खूब कोसती है. शो के अपकमिंग एपिसोड में महाट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं, शो के नए ट्विस्ट एंड टर्न के बारे में.

शो में दिखाया जा रहा है कि वनराज अनुज से माफी मांगता है और कहता है कि उसकी वजह से उसका मुंबई ट्रिप खराब हो गया. वनराज अपनी आदतों से बाज नहीं आता है, वह अनुपमा को ताना मारता है और कहता है कि अगर वह नहीं होता तो अनुपमा-अनुज के लिए कल की रात यादगार होती.

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वनराज की बात को सुनकर अनुपमा और अनुज चौंक जाते हैं. तो वहीं अनुपमा वनराज से कहती है वह अपने काम से मतलब रखें. अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड में दिखाया जाएगा कि राखी शाह हाउस आकर खूब हंगामा करेगी. तो दूसरी तरफ अनुपमा और वनराज देखेंगे कि घर में राखी दवे, बा के झूले पर बैठी है. उसके सामने ही मामाजी, बा और बापूजी घुटनों के बल बैठकर टूटी हुई माला के मोती समेट रहे हैं. राखी अपने पैसे भी मांग रही है.

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ये सब देखकर अनुपमा और वनराज का का खून खौल उठेगा. अनुपमा राखी दवे को पैसे वापस कर देगी. वह वनराज को भी इसे लेकर ताना देगी क्योंकि अनुपमा के दिए हुए चेक पर अनुज का साइन होगा.

 

शो में आप ये भी देखेंगे कि वनराज-अनुपमा राखी दवे को घर से बाहर निकालेंगे और दरवाजा बंद कर देंगे. राखी का घमंड चकनाचूर हो जाएगा. राखी मन ही मन इस बेइज्जती का बदला लेने की ठानेगी. शो में अब ये देखना होगा कि राखी अनुपमा से कैसे बदला लेती है.

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