कैक्टस के फूल- भाग 1: क्यों ममता का मन पश्चात्ताप से भरा था?

 Writer- इंदिरा राय

सौरभ के अंतर को कैक्टस के कांटों ने बींध दिया था, तभी उस ने नींद की गोलियां खाने जैसा दुस्साहसी कदम उठाया, लेकिन ममता के पश्चात्ताप से वे कांटे फिर से फूल बन कर उन को सहलाने लगे थे.

तीसरी मंजिल पर चढ़ते हुए नए जूते के कसाव से पैर की उंगलियों में दर्द होने लगा था किंतु ममता का सुगठित सौंदर्य सौरभ को चुंबक के समान ऊपर की ओर खींच रहा था.

रास्ते में बस खराब हो गई थी, इस कारण आने में देर हो गई. सौरभ ने एक बार पुन: कलाई घड़ी देखी, रात के साढ़े 8 बज चुके हैं, मीनीचीनी सो गई होंगी. कमरे का सूना सन्नाटा हाथ उचकाउचका कर आमंत्रित कर रहा था. उंगली की टीस ने याद दिलाया कि जब वे इस भवन में मकान देखने आए थे तो नीचे वाला हिस्सा भी खाली था किंतु ममता ने कहा था कि अकेली स्त्री का बच्चों के साथ नीचे रहना सुरक्षित नहीं, इसी कारण वह तिमंजिले पर आ टंगी थी.

बंद दरवाजे के पीछे से आने वाले पुरुष ठहाके ने सौरभ को चौंका दिया. वह गलत द्वार पर तो नहीं आ खड़ा हुआ? अपने अगलबगल के परिवेश को दोबारा हृदयंगम कर के उस ने अपने को आश्वस्त किया और दरवाजे पर धक्का दिया. हलके धक्के से ही द्वार पूरा खुल गया. भीतर से चिटकनी नहीं लगी थी. ट्यूब- लाइट के धवल प्रकाश में सोफे पर बैठे अपरिचित युवक के कंधों पर झूलती मीनीचीनी और सामने बैठी ममता के प्रफुल्लित चेहरे को देख कर वह तिलमिला गया. वह तो वहां पत्नी और बच्चों की याद में बिसूरता रहता है और यहां मसखरी चल रही है.

उसे आया देख कर ममता अचकचा कर उठ खड़ी हुई, ‘‘अरे, तुम.’’

बच्चियां भी ‘पिताजीपिताजी’ कह कर उस के पैरों से लिपट गईं. पल भर को उस के घायल मन पर शीतल लेप लग गया. अपरिचित युवक उठ खड़ा हुआ था, ‘‘अब मैं चलता हूं.’’

‘‘वाह, मैं आया और आप चल दिए,’’ सौरभ की वाणी में व्यंग्य था.

‘‘ये कपिलजी हैं, मेरे स्कूल में अध्यापक हैं,’’ ममता ने परिचय कराया.

‘‘आज ममताजी स्कूल नहीं गई थीं, वहां पता चला कि मीनी की तबीयत खराब है, उसी को देखने आया था,’’ कपिल ने बिना पूछे अपनी सफाई दी.

‘‘क्या हो गया है मीनी को?’’ सौरभ चिंतित हो गया था.

‘‘कुछ विशेष नहीं, सर्दीखांसी कई दिनों से है. सोचा, आज छुट्टी ले लूं तो उसे भी आराम मिलेगा और मुझे भी.’’

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सौरभ का मन बुझता जा रहा था. वह चाहता है कि ममता अपनी छुट्टी का एकएक दिन उस के लिए बचा कर रखे, यह बात ममता से छिपी नहीं है. न जाने कितनी बार कितनी तरह से वह उसे बता चुका है फिर भी…और बीमार तो कोई नहीं है. अनमनेपन से कुरसी पर बैठ कर वह जूते का फीता खोलने लगा, उंगलियां कुछ अधिक ही टीसने लगी थीं.

‘‘चाय बनाऊं या भोजन ही करोगे,’’ ममता के प्रश्न से उस ने कमरे में चारों ओर देखा, कपिल जा चुका था.

‘‘जिस में तुम्हें सुविधा मिले.’’

पति की नाराजगी स्पष्ट थी किंतु ममता विशेष चिंतित नहीं थी. अपने प्रति उन की आसक्ति को वह भलीभांति जानती है, अधिक देर तक वह रूठे रह ही नहीं सकते.

बरतनों की खटपट से सौरभ की नींद खुली. अभी पूरी तरह उजाला नहीं हुआ था, ‘‘ममता, इतने सवेरे से क्या कर रही हो?’’

‘‘अभी आई.’’

कुछ देर बाद ही 2 प्याले चाय ले कर वह उपस्थित हो गई, ‘‘तुम्हारी पसंद का नाश्ता बना रही हूं, कल रात तो कुछ विशेष बना नहीं पाई थी.’’

‘‘अरे भई, नाश्ता 9 बजे होगा, अभी 6 भी नहीं बजे हैं.’’

‘‘स्कूल भी तो जाना है.’’

‘‘क्यों, आज छुट्टी ले लो.’’

‘‘कल छुट्टी ले ली थी न. आज भी नहीं जाऊंगी तो प्रिंसिपल का पारा चढ़ जाएगा, परीक्षाएं समीप हैं.’’

‘‘तुम्हें मालूम रहता है कि मैं बीचबीच में आता हूं फिर उसी समय छुट्टी लेनी चाहिए ताकि हम सब पूरा दिन साथसाथ बिताएं, कल की छुट्टी लेने की क्या तुक थी, मीनी तो ठीक ही है,’’?सौरभ ने विक्षुब्ध हो कर कहा.

‘‘कल मैं बहुत थकी थी और फिर आज शनिवार है. कल का इतवार तो हम सब साथ ही बिताएंगे.’’

सौरभ चुप हो गया. ममता को वह जानता है, जो ठान लिया तो ठान लिया. उस ने एक बार सामने खड़ी ममता पर भरपूर दृष्टि डाली.

10 वर्ष विवाह को हो गए, 2 बच्चियां हो गईं परंतु वह अभी भी फूलों से भरी चमेली की लता के समान मनमोहिनी है. उस के इस रूप के गुरुत्वाकर्षण से खिंच उस की इच्छाओं के इर्दगिर्द चक्कर काटता रहता है सौरभ. उस की रूपलिप्सा तृप्त ही नहीं होती. इंजीनियरिंग पास करने के बाद विद्युत बोर्ड में सहायक अभियंता के रूप में उस की नियुक्ति हुई थी तो उस के घर विवाह योग्य कन्याओं के संपन्न अभिभावकों का तांता लग गया था. लंबेचौड़े दहेज का प्रलोभन किंतु उस की जिद थी कन्या लक्ष्मी हो न हो, मेनका अवश्य हो.

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जब भी छुट्टियों में वह घर जाता उस के आगे चित्रों के ढेर लग जाते और वह उन सब को नकार देता.

उस बार भी ऐसा ही हुआ था.

खिसियाई हुई मां ने अंतिम चित्र उस के हाथ में थमा कर कहा था, ‘‘एक फोटो यह भी है किंतु लड़की नौकरी करती है और तुम नौकरी करने वाली लड़की से विवाह करना नहीं चाहते.’’

बेमन से सौरभ ने फोटो को देखा था और जब देखा तो दृष्टि वहीं चिपक कर रह गई, लगा उस की कल्पना प्रत्यक्ष हो आई है.

Manohar Kahaniya: प्यार के जाल में फंसा बिजनेसमैन- भाग 4

दूसरी तरफ उस का पति ललित अकसर फोन कर रुपए की मांग करने लगा. रुपए नहीं देने पर उस के और मानसी के संबंधों का भेद जगजाहिर करने की धमकियां देने लगा.

यहां तक कि उस ने संजीव को कहा जब तक पैसे मिलते रहेंगे उस का मुंह बंद रहेगा, जैसे ही इस में देरी होगी, वह उस के अवैध संबंधों की सारी सच्चाई उस की पत्नी और बच्चों को बता देगा.

संजीव ने लाख विनती की, उस का ललित और मानसी पर कोई असर नहीं हुआ. उन के लिए संजीव महज सोने का अंडा देने वाली मुरगी बन चुका था. पैसों के लालच में डूब चुके ललित और मानसी की ब्लैकमेलिंग के अलावा उस पर बिजनैस संबंधी कई देनदारियों के तकादे आने लगा.

परेशान हो कर किया सुसाइड

वह काफी विचलित हो गया था. इसी तनाव से जूझता 10 अगस्त, 2021 की शाम को घर से किसी आवश्यक काम से जाने को कह कर  निकला था. उस ने यह भी कहा कि उसे आने में देरी हो सकती है.

वह अपने हीरामोती लेन वाले आवास से निकल कर कुआं चौक नंदई स्थित अपने दूसरे मकान में आ गया. उस मकान को संजीव बेच चुका था, मगर उस के पास एक चाबी थी. वहां कुछ समय अपने जीवन का आखिरी समय गुजारा और रात को 11 बजे फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली.

इस से पहले उस ने 5 अलगअलग चिट्ठियां लिखीं. वे चिट्ठियां परिजनों और परिचितों के नाम थीं. उन में एक पूर्व सांसद मकसूदन यादव के नाम भी थी.

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दूसरे दिन जब संजीव जैन घर नहीं आया, तो सुबह घर परिवार में पत्नी और बच्चे चिंतित हो गए. उस की खोजबीन की जाने लगी. फोन पर काल का जवाब नहीं मिल पाया. किसी ने बताया पुराने मकान के पास उस की कार खड़ी है. घर वालों ने सोचा कि संजीव अपने उसी घर पर होगा.

दोपहर तक जब संजीव घर नहीं आया, तब परिवार के लोग और मित्र नंदई के मकान पर गए. वहां मकान भीतर से बंद मिला. उन्होंने एक कमरे का दरवाजा तोड़ा, संजीव फांसी से झूलते हुए मिला.

यह सभी के लिए स्तब्ध करने का दृश्य था. इस की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई. थाना बसंतपुर पुलिस ने घटनास्थल पर आ कर मामले की सूक्ष्म विवेचना शुरू कर दी. घटनास्थल पर संजीव जैन के छोटे भाई विनय जैन को एक लिफाफे में सुसाइड नोट मिले.

सुसाइड नोट पढ़ कर मालूम हुआ कि वह किस तरह ब्लैकमेलिंग के शिकार हो रहे थे. सुसाइड नोट में ही उन्होंने अपने अवैध संबंध की बात लिखी थी. मानसी और ललित द्वारा बारबार पैसे मांगे जाने का भी जिक्र किया था. उस ने अपनी आत्महत्या का कारण उन लोगों द्वारा ब्लैकमेल करना ही लिखा था.

अगले रोज राजनंदगांव सहित छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख समाचारपत्रों में भाजपा नेता संजीव जैन की आत्महत्या का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित हुआ और यह चर्चा का सबब बन गया कि कैसे एक नामचीन, राजनीति में दखल रखने वाली शख्सियत सैक्स और भयादोहन का शिकार हो रहा था.

एसपी राजनंदगांव डी. श्रवण ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी प्रज्ञा मेश्राम के नेतृत्व में बसंतपुर थाने की एक टीम गठित की. उन्हें मामले को शीघ्र खुलासा करने के सख्त निर्देश दिए.

मामले का दायित्व मिलने के बाद एएसपी प्रज्ञा मेश्राम व थानाप्रभारी आशीर्वाद रहटगांवकर को सुसाइड नोट के आधार पर जांच तेज करने की निर्देश दिए. पुलिस ने संजीव जैन के परिजनों के बयान लिए.

बयान और सुसाइड नोट के आधार पर जांच जब आगे बढ़ने लगी तब यूनियन बैंक और फेडरल बैंक के माध्यम से कुछ ठोस जानकारियां सामने आईं.

यह भी खुलासा हुआ कि मानसी नामक महिला से संजीव जैन के अंतरंग संबंध

हुआ करते थे. इस की पुष्टि सुसाइड नोट से भी हुई. मानसी और उस की ससुराल वाले हुए गिरफ्तार मानसी का नाम सामने आने पर जांच शुरू की. वह रायपुर, छत्तीसगढ़ और मेरठ, उत्तर प्रदेश से लापता मिली. बैंक के अकाउंट की जांच की तो यह जानकारी सामने आ गई कि बीते 8 सालों में एक करोड़ सत्तर लाख रुपए संजीव जैन के खाते से मानसी यादव, उस के पति ललित सिंह, ललित सिंह के छोटे भाई कौशल सिंह और कौशल सिंह की पत्नी शिल्पी सिंह के बैंक एकाउंट में ट्रांसफर हुए.

पुलिस के सामने सब कुछ आईने की तरह साफ था, मगर आरोपी उन की पकड़ से दूर थे. मानसी के पते पर पुलिस लगातार छापे मार रही थी, मगर न तो मानसी मिल रही थी और न ही उस का पति ललित सिंह.

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संजीव मामले के आरोपियों के पकड़ में नहीं आने पर पुलिस की लगातार किरकिरी हो रही थी. तभी अचानक 12 सितंबर को प्रज्ञा मेश्राम को एक काल आई.

काल मुखबिर की थी, जिस ने बताया कि मानसी रायपुर में अपनी बहन मधु यादव के यहां डगनिया में तीज के मौके पर पहुंची है. इस सूचना के आधार पर एएसपी प्रज्ञा मेश्राम ने रायपुर पुलिस की मदद से मानसी यादव को हिरासत में ले लिया.

वहीं ललित सिंह और शिल्पी सिंह भी गिरफ्त में आ गए. कौशल सिंह गिरफ्तारी से बचा हुआ था. पुलिस ने दोनों पतिपत्नी और शिल्पी सिंह को बसंतपुर थाने ला कर के पूछताछ की.

उन्होंने सारे घटनाक्रम को पुलिस के समक्ष सिलसिलेवार ढंग से बता दिया. इसी के साथ उन्होंने अपना अपराध कुबूल कर लिया.

तीनों के इकबालिया बयान के बाद 13 सितंबर, 2021 को पुलिस ने धारा 306, 34 भारतीय दंड विधान के तहत मामला दर्ज कर लिया और उसी शाम मीडिया के समक्ष पूरे मामले का खुलासा कर दिया.

केस का खुलासा थानाप्रभारी आशीर्वाद रहटगांवकर, एसआई कमलेश बंजारे, कांस्टेबल विभाष सिंह, देवेंद्र पाल, महिला कांस्टेबल अश्वनी निर्मलकर, साइबर सेल प्रभारी द्वारिका प्रसाद लाउत्रे, कांस्टेबल हेमंत साहू, आदित्य सिंह, मनीष मानिकपुरी, मनीष वर्मा, अवध किशोर साहू, मनोज खूंटे ने किया. दूसरे दिन तीनों आरोपियों को प्रथम न्यायिक दंडाधिकारी, राजनंदगांव के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया.

—अपराध कथा पुलिस सूत्रों से बातचीत पर आधारित

बैलेंसशीट औफ लाइफ- भाग 3: अनन्या की जिंदगी में कैसे मच गई हलचल

कर के मुझे छेड़ा कि यह अनन्या कहीं तुम ही तो नहीं, मैं ने उस समय हंसी में टाल दिया था पर मैं अनुज से बातें करने के बाद समझ गया था कि तुम्हारे बारे में ही लिखा गया है पर ऐसी बातों को तूल देने में मैं कोई समझदारी नहीं समझता. जो हुआ सो हुआ. इसलिए, तुम से यह बात नहीं की. तुम भी इस बात को इग्नोर कर दो.’’

‘‘मगर सुमित, मैं ऐसे व्यक्ति को सबक सिखाना चाहती हूं, जो अपनी कहानी की पब्लिसिटी के लिए कई लड़कियों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा है. यह तो तुम इतने अच्छे इंसान हो मगर जरा सोचो, कोई और हो तो क्याक्या हो सकता है. मेरे मन को तभी सुकून मिलेगा जब मैं उसे ऐसा सबक सिखाऊंगी कि पब्लिसिटी को तरसते लोग आजीवन याद रखे…मैं दिल्ली जाना चाहती हूं, सुमित.’’ ‘‘उस के लिए तुम्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जो तुम्हें उसे कहना है, फोन पर कह लो. वैसे क्या कहना है?’’

‘‘उस का फोन नंबर कहां है हमारे पास? मैं उसे मानहानि के केस की धमकी दे कर उस का अपमान करना चाहती हूं.’’ ‘‘ठीक है, तुम चाहो तो गीता से बात भी कर सकती हो. वैसे हमें सिर्फ डराना और मानसिक परेशानी ही तो देनी है उसे. हमें उस का पैसा तो बिलकुल भी नहीं चाहिए. मुझे आराम से गीता का नंबर मिल सकता है. मेरे बौस की रिश्तेदार है वह. सुना है अच्छे स्वभाव की है. जरा भी घमंड नहीं है.’’

‘‘ठीक है, सुमित, मुझे उस का नंबर दे दो. वह शायद मुझे भी पहचान ही जाए. तुम मेरे साथ हो तो अब मुझे किसी भी बात की चिंता नहीं है.’’ ‘‘पर मेरी एक शर्त है.’’

‘‘क्या?’’ ‘‘मुझे तुम्हारे चेहरे पर दुख या उदासी न दिखे.’’ अनन्या मुसकराती हुई सुमित से लिपट गई अब उस का मन हलका हो गया था. मन पर रखा एक भारी पत्थर जैसे हट गया था.

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अगले दिन सुमित ने अनन्या के फोन पर गीता का नंबर भेज दिया. अनन्या ने लंच टाइम में एक शांत जगह जा कर गीता का नंबर मिलाया. गीता ने फोन उठाया तो अनन्या ने कालेज के दिनों का अपना परिचय दिया, गीता को सब याद आ गया. बोली, ‘‘कैसी हो? मेरा नंबर कैसे मिला?’’ ‘‘कहां से मिला, वह छोड़ो गीता, बस यह पूछने का मन हुआ कि अपने पति की आत्मकथा पढ़ी होगी तुम ने कैसी लगी?’’

गीता का स्वर कुछ धीमा हुआ, ‘‘क्यों? अपना नाम आने पर परेशान हो?’’ ‘‘मुझे राघव का नंबर दे सकती हो? इतने सच दुनिया के सामने रखने पर उसे गर्व हो रहा होगा न. बधाई तो बनती है न?’’

‘‘मैं समझी नहीं. वैसे राघव इस समय मेरे सामने ही बैठा है.’’ ‘‘यह तो बहुत अच्छा है. क्या तुम फोन स्पीकर पर कर सकती हो? प्लीज.’’

गीता ने फोन स्पीकर पर कर लिया. अनन्या की ठहरी हुई, गंभीर आवाज स्पीकर पर गूंज उठी, ‘‘मैं ने फोन इसलिए किया है राघव कि तुम्हें पहले स्वयं ही बता दूं कि मैं तुम पर मानहानि का दावा करने जा रही हूं 2 करोड़ का. अपनी कहानी में तुम ने जिस तरह मेरे बारे में लिखा है, मैं तुम्हें छोड़ूगी नहीं. ‘‘गीता तुम्हारे जैसे लालची पति को जीवनसाथी बना कर कितनी खुश है, यह तो वही जानती होगी पर लड़कियों की भावनाओं के साथ खेलने वाले इंसान की पब्लिसिटी पाने की ऐसी आदत पर उसे शर्म तो जरूर आती होगी, तुम ने तो उसे भी शर्मिंदा किया है.

‘‘गीता, तुम तो एक औरत हो, इस हरकत में अपने पति का साथ कैसे दे पाई? वह लेखिका जिस से राघव ने यह किताब लिखवाई है, जानती हो, कौन है? वह भी इस का शिकार रही है, यह आदमी तुम्हारे पैसे से उस का मुंह बंद कर सकता है पर मैं इसे सबक सिखा कर रहूंगी. तुम्हारे पैसे ने राघव को तुम्हारा पति तो बना दिया पर चरित्र?’’

गीता के मुंह से हलकी सी आवाज निकली, ‘‘तुम्हारा पति क्या कहेगा?’’

‘‘उस ने यही कहा कि ऐसे आदमी को सजा मिलनी चाहिए जो लड़कियों के साथ खेले, फिर दुनिया के सामने अपने पौरुष का ऐसा डंका पीटे कि लड़कियां टूट जाएं, यह सर्वथा अनुचित है. और वाह, क्या नाम रखा है, ‘बैलैंसशीट औफ लाइफ’ नफेनुकसान के हिसाबकिताब में माहिर, रुपएपैसे के लालच में उलझा हुआ एक चरित्रहीन व्यक्ति अपनी कहानी को और नाम भी क्या दे सकता था? तुम लोगों के बच्चे तो बड़े हो कर अपने पिता के चरित्र पर बड़ा गर्व करेंगे. वाह.’’

गीता ने कहा, ‘‘अनन्या, मुझे थोड़ा समय दो.’’ अनन्या ने फिर फोन काट दिया. इतनी देर तक राघव सिर पर हाथ रखे ही बैठा रहा. उस में गीता से आंखें मिलाने का साहस नहीं था. गीता ने यह किताब लिखवाने के लिए पहले ही मना किया था पर राघव ने उस की एक न सुनी थी. आज वह एक सफल बिजनैसमैन था, गीता के मातापिता गुजर चुके थे. वह अब सारी प्रौपटी की एकमात्र अधिकारी थी.

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गीता ने राघव की छिटपुट गलतियां कई बार माफ की थीं, पर आज गीता ने राघव को जिन जलती नजरों से देखा, राघव उन नजरों को सह न सका. चुपचाप बैठा रहा. गीता नि:शब्द उसे पहले घूरती रही, फिर इतना ही कहा, ‘‘यह बुक मार्केट से तुरंत वापस ले लो. एक भी कौपी कहीं न दिखे और फौरन सब से माफी मांगो नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा,’’ कह कर गीता अपना पर्स उठा कर वहां से चली गई. राघव को इस के सिवा कोई और रास्ता सूझ भी नहीं रहा था. गीता उस के साथ बहुत अनर्थ कर सकती है, यह वह जानता था. वह जो भी था, गीता की दौलत के दम पर था. वह गीता को नाराज नहीं कर सकता था. अत: उस ने गीता को फौरन फोन किया, ‘‘आईएम वैरी सौरी, डियर तुम ने जैसा कहा है वैसा ही होगा.’’

राघव ने उसी समय अपने सैक्रेटरी को बुला कर गीता के कहे अनुसार आदेश दिए. अगली सुबह अनन्या राहुल को तैयार कर रही थी. तभी अपने फोन पर कुछ पढ़ता हुआ सुमित हंस पड़ा. अनन्या ने आंखों से ही कारण पूछा तो सुमित ने अपना फोन उस की ओर बढ़ा कर कुछ पढ़ने का इशारा किया. ट्विटर पर राघव का माफीनामा था और लिखा था कि इस बुक को मार्केट से विदड्रा कर रहा है.

सुमित ने अनन्या के कंधे पर हाथ रख कर पूछा, ‘‘खुश?’’ ‘‘थैंक्यू वैरी मच, सुमित. तुम्हारे जैसा जीवनसाथी पा कर मैं धन्य हो गई.’’

सुमित ने उस के माथे को चूम लिया. अचानक अनन्या ने अपने फोन को उठा कर कोई नंबर मिलाया तो सुमित ने पूछा, ‘‘किसे?’’ ‘‘गीता को थैंक्स कहना है कि उस ने एक स्त्री के मन की बात को समझा. उस ने जो गरिमा दिखाई, बहुत अच्छा लगा. वैसे भी ऐसे पति के साथ निभाना आसान तो नहीं होगा. उसे थैंक्स कहना फर्ज है मेरा.’’

‘हां’ में सिर हिलाता हुआ सुमित उसे प्यार भरी नजरों से देख रहा था.

Manohar Kahaniya: बीवी और मंगेतर को मारने वाला ‘नाइट्रोजन गैस किलर’- भाग 2

सौजन्य- मनोहर कहानियां

Writer- शाहनवाज

पिता की चिंता महसूस कर नवनिंदर हकपका गया. जवाब में उस ने कहा, ‘‘सतश्रीअकाल पापाजी. दरअसल, आज सुबह सोनू के साथ मार्किट शौपिंग के लिए जाना था लेकिन छोटी सी एक बात पर वह रूठ गई. गुस्सा हो कर वह घर से निकल गई, वह भी बिना अपना फोन लिए. मैं ने उस का फोन देखा भी नहीं था. मैं भी उसे तब से फोन मिला रहा हूं, लेकिन अभी देखा कि वह अपना फोन ले जाना भूल गई है. आप चिंता न करें. वह जल्द ही घर लौट आएगी. तब मैं आप की बात उस से करवा दूंगा.’’

अपनी बेटी और होने वाले दामाद के बीच झगड़े की इस बात को सुन कर सुखचैन सिंह के मन का सुख और चैन मानो कहीं गायब सा हो गया. उन के दिल में अपनी बेटी को ले कर बेचैनी पैदा हो गई.

वह हर पल सोनू के बारे में ही सोचे जा रहे थे कि आखिर एक बड़े से शहर में उन की बेटी बिना फोन लिए कहां भटक रही होगी या उस के साथ कुछ अनहोनी न हो जाए.

14 अक्तूबर, 2021 को जब सोनू के घर वालों को यह बात पता चली, उस के बाद से नवनिंदर को हर घंटे फोन आता. लेकिन सोनू के वापस आने की उन्हें कोई खबर नहीं मिली.

सोनू के लापता होने को 24 घंटे हो गए तो घर वालों को अपनी बेटी की चिंता होने लगी कि सोनू का भाई दविंदर सिंह और पिता सुखचैन सिंह अगले दिन 15 अक्तूबर की सुबहसुबह करीब 5 बजे बठिंडा से पटियाला नवनिंदर से मिलने के लिए पहुंच गए.

नवनिंदर ने उन्हें अपने और सोनू के बीच होने वाले झगड़े के बारे में बताया लेकिन नवनिंदर की बात सुन कर उन के मन को शांति नहीं हुई. मामले को गंभीर होता देख, दविंदर, सुखचैन सिंह और नवनिंदर, तीनों पटियाला के अर्बन एस्टेट पुलिस स्टेशन जा पहुंचे.

अर्बन एस्टेट थाने के थानाप्रभारी रौनी सिंह ने सुखचैन सिंह की शिकायत पर सोनू की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर जल्द ही काररवाई शुरू कर दी. ऐसे में सोनू को ढूंढने के लिए सब से पहले जिस शख्स से पूछताछ होनी थी, वह नवनिंदर ही था.

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पुलिस ने नवनिंदर से उन के बीच होने वाले झगड़े की वजह पूछी. जब नवनिंदर ने झगड़े का कारण बताया तो उसे सुन कर पुलिस के मन में पहली नजर में ही उस के ऊपर शक होने लगा. नवनिंदर ने बताया कि मार्किट में एक चीज को खरीदने के लिए उस ने सोनू को मना कर दिया था, जिस के बाद वह रूठ गई थी. होटल में उन के बीच इसी बात को ले कर हलकी नोकझोंक भी हुई थी.

नवनिंदर की ये बातें सुन कर थानाप्रभारी के मन में सवाल उठने शुरू हो गए थे. वह सोचने लगे कि जिस जोड़ी की भला कुछ दिनों के बाद शादी होने वाली हो, उन के बीच इस बात पर झगड़ा होना और घर से निकल जाना, कैसे संभव हो सकता है.

ये वजह उन्हें कुछ हजम नहीं हुई. तो ऐसे में नवनिंदर से पुलिस की पूछताछ करने वाली टीम ने कुछ और जरूरी सवालजवाब किए.

पुलिस वालों ने नोटिस किया कि नवनिंदर ने उन के जितने सवालों का जवाब दिया, उन से उन्हें नवनिंदर पर शक गहराता जा रहा था. ऐसी स्थिति में थानाप्रभारी ने सोनू के पिता और भाई को तसल्ली दी और जल्द ही सोनू के बारे में पता लगाने का आश्वासन भी दिया. और इस मामले को ले कर पुलिस ने तुरंत काररवाई करनी शुरू कर दी.

पुलिस टीमें जुटीं जांच में

पुलिस की कई टीमें इस काम में जुट गईं. एक टीम पटियाला में सोनू को ढूंढने में लगी थी तो दूसरी टैक्निकल टीम उस की लास्ट लोकेशन और उस से पहले वह कहांकहां गई, उस के बारे में पता करने में व्यस्त थी.

ऐसे में थानाप्रभारी के नेतृत्व में एक टीम ऐसी बनाई गई जोकि सोनू के मंगेतर नवनिंदर की हिस्ट्री का पता लगाने के लिए थी. इस टीम में खुद थानाप्रभारी शामिल थे.

एक तरफ पुलिस की सभी टीमें सोनू का पता लगाने का काम कर रही थीं तो दूसरी तरफ समय बीतने के साथसाथ सोनू के घर वालों के सब्र का बांध टूटता जा रहा था. घर वालों के मन में सोनू को ले कर बेचैनी और चिंता ने इस कदर घर कर लिया था कि जिसे निकाल बाहर फंकना बेहद मुश्किल था. अगले 4-5 दिनों तक पुलिस से सोनू के परिवार वालों को कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन अंदर ही अंदर पुलिस की टीमें अपना काम कर रही थीं.

20 अक्तूबर, 2021 के दिन थानाप्रभारी ने बठिंडा से सोनू के घर वालों को पटियाला अर्बन एस्टेट पुलिस थाने में बुलाया. पुलिस ने नवनिंदर के बारे में कुछ ऐसी चीजों का पता लगा लिया था, जिस का सोनू के घर वालों को पता होना जरूरी था.

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खबर मिलते ही सुखचैन सिंह, दविंदर और साथ में कुछ और लोग अर्बन एस्टेट पुलिस थाने जल्द से जल्द पहुंच गए. उन के पहुंचते ही थानाप्रभारी ने उन्हें अपने औफिस में बुलाया और उन के होने वाले दामाद नवनिंदर के बारे में कुछ ऐसे खुलासे किए, जिसे सुन कर सोनू के घर वालों के होश उड़ गए थे. पता चला कि नवनिंदर की पहली शादी 12 फरवरी, 2018 को गांव बिशनपुरा, जिला संगरूर, पंजाब की रहने वाली सुखदीप कौर से हो चुकी थी. सुखदीप उच्चशिक्षित परिवार से ताल्लुक रखती थी और वह खुद भी ट्रिपल एमए थी. लेकिन 19 सितंबर 2021 को उस की रहस्यमयी हालत में मौत हो गई. रहस्यमयी इसलिए क्योंकि उस की मौत कैसे हुई, इस का किसी के पास कोई प्रूफ नहीं था.

पुलिस की टीम ने जब संगरूर में सुखदीप के घर पर जा कर उस की मृत्यु का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि सुखदीप की मौत हार्ट अटैक से हुई थी. जब उन से पूछा गया कि उन्हें इस बात पर कैसे यकीन है कि सुखदीप की मौत हार्ट अटैक से हुई तो उन्होंने बताया कि उस के पूरे शरीर पर किसी चीज का निशान नहीं था, जिस से उन्हें किसी और बात पर शक हो.

मंगेतर ही निकला कातिल

परिवार ने यह भी बताया कि सुखदीप 5 महीने की प्रेग्नेंट भी थी. सिर्फ यही नहीं, पुलिस टीम ने नवनिंदर के बारे में कुछ और भी पता लगाया जोकि हैरान करने वाला था. फरवरी 2018 में सुखदीप से पहली शादी के बाद उस ने पहली अक्तूबर, 2018 को भवानीगढ़ संगरूर की रहने वाली लखविंदर कौर से भी शादी की थी. इस की जानकारी सुखदीप के घर वालों को नहीं हुई.

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यह कैसी विडंबना- भाग 3: शर्माजी और श्रीमती के झगड़े में ममता क्यों दिलचस्पी लेती थी?

पूर्व कथा

15 साल बाद परिवार समेत ममता एक बार फिर दिल्ली में बसीं. वे उसी महल्ले व उसी घर में रहने लगीं जहां पहले रह कर गई थीं. घर के सामने अभी भी शर्मा दंपती रहते हैं. दादीनानी बनने के बाद भी श्रीमती शर्मा का साजशृंगार उन की तीनों बहुओं से बढ़ कर होता है. पुरानी पड़ोसिन सरला ने ममता को बताया कि श्रीमती शर्मा के नाजनखरे तो आज भी वही हैं मगर पतिपत्नी के रोजरोज के झगड़े बहुत बुरे हैं, दिनरात कुत्तेबिल्ली की तरह लड़ते हैं. तुम्हें भी इन के झगड़ने की आवाजें विचलित करेंगी. 75 वर्षीय श्रीमती शर्मा कहती हैं कि उन के 80 वर्षीय पति शर्माजी का एक औरत से चक्कर है. एक लड़की भी है उस से…ममता यह सुन कर अवाक् रह जाती है. हालांकि उसे यहां दोबारा आए 2 दिन ही हुए और वह शर्मा आंटी से बहुत प्रभावित हुई थी, उन की साफसफाई, उन के जीने के तरीके से. 5-6 दिन बीतने के बाद भी किसी तरह के लड़नेझगड़ने की आवाज नहीं आई तो ममता सोचती है कि उसे जो बताया गया है, वह गलत होगा. इस बीच, शर्मा दंपती ममता के घर पधारे. दोनों ने हंसीखुशी ममता के साथ खूब गपशप की, दोपहर को वहीं खाना खाया. शाम को पति आए तो ममता उन के साथ शर्मा दंपती से मिलने उन के घर गई. इस तरह वे अच्छे पड़ोसी बन गए. सरला यह जान कर हैरान हो जाती है. वह ममता को समझाने लगती है कि अपना ध्यान रखना, शर्मा आंटी कहानियां गढ़ लेती हैं. इन्होंने अपनी तो उतार रखी है. कहीं ऐसा न हो, तुम्हारी भी उतार कर रख दें. इधर, दीवाली आने को होती है और ममता घर का बल्ब जला कर परिवार समेत जम्मू चली जाती है.

अब आगे…

श्रीमती शर्मा से प्रभावित ममता अपनी पड़ोसिन सरला के मशविरे की अनदेखी करती रही लेकिन एक दिन वही ममता अपने घर से श्रीमती शर्मा को बाहर करती नजर आई. वहीं जब शर्माजी का देहांत हुआ तो वह इस असमंजस में दिखी कि अफसोस करे या सुकून की सांस ले.

गतांक से आगे…

अंतिम भाग

सरला ने जम्मू से चावल मंगवाए थे. वापस आने पर सामान आदि खोला. सोचा, सरला को फोन करती हूं, आ कर अपना सामान ले जाए. तभी 2 लोगों की चीखपुकार शुरू हो गई. गंदीगंदी गालियां और जोरजोर से रोना- पीटना. मैं घबरा कर बाहर आई. शर्मा आंटी रोतीपीटती मेरे गेट के पास खड़ी थीं. लपक कर बाहर चली आई मैं.

‘‘क्या हो गया आंटी, आप ठीक तो हैं न?’’

‘‘अभीअभी यह आदमी 205 नंबर से हो कर आया है. अरे, अपनी उम्र का तो खयाल करता.’’

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अंकल चुपचाप अपने दरवाजे पर खड़े थे. क्याक्या शब्द आंटी कह गईं, मैं यहां लिख नहीं सकती. अपने पति को तो वे नंगा कर रही थीं और नजरें मेरी झुकी जा रही थीं. पता नहीं कहां से इतनी हिम्मत चली आई मुझ में जो दोनों को उन के घर के अंदर धकेल कर मैं ने उन का गेट बंद कर दिया. मन इतना भारी हो गया कि रोना आ गया. क्या कर रहे हैं ये दोनों. शरम भी नहीं आती इन्हें. जब जवानी में पति को मर्यादा का पाठ नहीं पढ़ा पाईं तो इस उम्र में उसी शौक पर चीखपुकार क्यों?

सच तो यही है कि अनैतिकता सदा ही अनैतिक है. मर्यादा भंग होने को कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता. पतिपत्नी के रिश्ते में पवित्रता, शालीनता और ईमानदारी का होना अति आवश्यक है. शर्मा आंटी की खूबसूरती यदि जवानी में सब को लुभाती थी तब क्या शर्मा अंकल को अच्छा लगता होगा. हो सकता है पत्नी को सीढ़ी की तरह इस्तेमाल भी किया हो.

जवानी में जोजो रंग पतिपत्नी घोलते रहे उन की चर्चा तो आंटी मुझ से कर ही चुकी थीं और बुढ़ापे में उसी टूटी पवित्रता की किरचें पलपल मनप्राण लहूलुहान न करती रहें ऐसा तो मुमकिन है ही नहीं. अनैतिकता का बीज जब बोया जाता तब कोई नहीं देखता, लेकिन जब उस का फल खाना पड़ता है तब बेहद पीड़ा होती है, क्योंकि बुढ़ापे में शरीर इतना बलवान नहीं होता जो पूरा का पूरा फल एकसाथ डकार सके.

सरला से बात हुई तो वह बोली, ‘‘मैं ने कहा था न कि इन से दूर रह. अब अपना मन भी दुखी कर लिया न.’’

उस घटना के बाद हफ्ता बीत गया. सुबह 5 बजे ही दोनों शुरू हो जाते. शालीनता और तमीज ताक पर रख कर हर रोज एक ही जहर उगलते. परेशान हो जाती मैं. आखिर कब यह घड़ा खाली होगा.

संयोग से वहीं पास ही में हमें एक अच्छा घर मिल गया. चूंकि पति का रिटायरमैंट पास था, इसलिए उसे खरीद लिया हम ने और उसी को सजानेसंवारने में व्यस्त हो गए. नया साल शुरू होने वाला था. मन में तीव्र इच्छा थी कि नए साल की पहली सुबह हम अपने ही घर में हों. महीना भर था हमारे पास, थोड़ीबहुत मरम्मत, रंगाईपुताई, कुछ लकड़ी का काम बस, इसी में व्यस्त हो गए हम दोनों. कुछ दिन को बच्चे भी आ कर मदद कर गए.

एक शाम जरा सी थकावट थी इसलिए मैं जा नहीं पाई थी. घर पर ही थी. सरला चली आई थी मेरा हालचाल पूछने. हम दोनों चाय पी रही थीं तभी द्वार पर दस्तक हुई. शर्मा अंकल थे सामने. कमीज की एक बांह लटकी हुई थी. चेहरे पर जगहजगह सूजन थी.

‘‘यह क्या हुआ आप को, अंकल?’’

‘‘एक्सीडेंट हो गया था बेटा.’’

‘‘कब और कैसे हो गया?’’

पता चला 2 दिन पहले स्कूटर बस से टकरा गया था. हर पल का क्लेश कुछ तो करता है न. तरस आ गया था हमें.

‘‘बाजू टूट गई है क्या?’’

‘‘टूटी नहीं है…कंधा उतर गया है. 3 हफ्ते तक छाती से बांध कर रखना पड़ेगा. बेटा, मुझे तुम से कुछ काम है. जरा मदद करोगी?’’

आदित्य की दुश्मन बनेगी इमली, तबाह होगा त्रिपाठी परिवार

टीवी सीरियल ‘इमली’ (Imlie) की कहानी में नया मोड़ देखने को मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि इमली ने आदित्य और उसके परिवार को छोड़कर आगे बढ़ने का मन बना लिया है. इमली के जाने के बाद आदित्य टूट चुका है. तो वहीं शो में नयी एंट्री आर्यन सिंह राठौर की हुई है. जिससे कहानी में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए ट्रैक के बारे में.

इमली के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे, इमली गर्ल हॉस्टल में रहना शुरू कर देगी. तो वहीं इमली मंदिर जाएगी. मंदिर में इमली के पीछे पीछे आदित्य और आर्यन भी पहुंच जाएंगे.

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तो दूसरी तरफ आर्यन तेजी से दौड़कर निकलेगा. ऐसे में इमली के हाथ से पूजा की थाल गिर जाएगी. थाल गिरते ही इमली का पारा सातवें आसमान पर पहुंच जाएगा.

 

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शो में आप ये भी देखेंगे कि इमली आर्यन को जमकर सुनाएगी. जब आर्यन को पता चल जाएगा कि इमली आदित्य की पत्नी है. ऐसे में वह इमली को आदित्य के खिलाफ इस्तेमाल करेगा.

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शो में दिखाया जाएगा कि इमली-आदित्य एक बार फिर से एक दूसरे के दुश्मन बन जाएंगे. इमली अपना प्यार भुलाकर आदित्य से बदला लेने का फैसला करेगी.

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GHKKPM: विराट ने पाखी को गोद में उठाया, मेकर्स हुए ट्रोल

स्टार प्लस का  सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की कहानी में लगातार बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो के बिते एपिसोड में दिखाया गया कि पाखी विराट को पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है तो वहीं विराट और सई एक दूसरे के करीब आ रहे हैं. शो के आने वाले एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो के लेटेस्ट एपिसोड में दिखाया गया कि विराट-सई ने निनाद और अश्विनी की शादी की सालगिरह का जश्न मनाया. इससे निनाद-अश्विनी को बहुत खुशी हुई और उनके बीच की दूरियां मिट गई.

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शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि विराट और पाखी एक साथ बाहर जाएंगे. ऐसे में विराट सई को उसके कॉलेज छोड़ेगा. तो दूसरी तरफ पाखी भी अपना काम पूरा करने निकल जाएगी.

 

शो में आप देखेंगे कि एक बाइक वाला पाखी को धक्का मार देगा. पाखी विराट का नाम लेकर चिल्लाने लग जाएगी. विराट  आकर पाखी को अपनी गोद में उठा लेगा. तो दूसरी तरफ सई वहां पहुंच जाएगी. सई ये दैखकर हैरान हो जाएगी.

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आपको बता दें कि यूजर्स ने इस सीन को लेकर आपत्ति जताई है. सोशल मीडिया पर #ShameOnStarPlus हैशटैग चल रहा है और चैनल को ट्रोल किया जा रहा है. यूजर्स चैनल को टैग कर लिख रहे हैं कि क्‍या यही तुम्‍हारी नई सोच है कि एक देवर की गोद में उसकी भाभी को दिखाया जा रहा है.

 

यूपी में “हर घर नल” योजना की केंद्र सरकार ने की खुलकर तारीफ

बुंदेलखंड और विंध्‍य समेत प्रदेश भर के ग्रामीण इलाकों में पीने के साफ पानी की आपूर्ति पर पर लगातार काम कर रही राज्‍य सरकार की 735 पेयजल आपूर्ति योजनाओं पर केंद्र सरकार ने अपनी मुहर लगा दी है. राज्यस्तरीय योजना स्वीकृति समिति ने गुरुवार को ग्रामीण क्षेत्रों में नल से पानी कनेक्शन के लिए राज्‍य सरकार की ओर से भेजे गए  1,882 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है . इस बीच केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट कर यूपी में हर घर नल योजना की प्रगति की जमकर तारीफ की है. केंद्रीय मंत्री ने राज्‍य सरकार की तारीफ करते हुए कहा है कि यूपी ने हर घर नल से जल योजना को जन आंदोलन बना दिया है. केंद्र सरकार ने हर घर नल योजना को लेकर पहली बार किसी राज्‍य की इस तरह तारीफ की है .

बैठक में स्‍वीकृत की गई इन योजनाओं से 33 जिलों के 1262 गांवों की 39 लाख की आबादी को फायदा होगा. बैठक में समिति द्वारा 735 योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गयी. इसके तहत 4.03 लाख ग्रामीण परिवारों को पानी के कनेक्शन दिए जाने की योजना है . मौजूदा समय में प्रदेश में 2.64 करोड़ में से कुल 34 लाख (12.9%) ग्रामीण परिवारों को उनके घरों तक नल का पानी मिल रहा है.

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने ट्वीट मे इस बात का भी उल्लेख किया है कि राज्य में 1882 करोड़ रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं ताकि गांवों में आसानी से नल कनेक्शन पहुंचाए जा सकें. इससे 1262 गांवों के 39 लाख लोगों को लाभ मिलेगा. उन्‍होंने लिखा है कि योगी जी की सरकार ने वर्ष 2021-22 में 78 लाख परिवारों को नल कनेक्शन देने की संवेदनशील योजना बनाई है. यूपी में “जल जीवन भी और अब मिशन भी “ बन चुका है.

यूपी में युद्ध स्तर पर हर घर को नल से जल देने की योजना पर काम तेजी से किया जा रहा है. सरकार अगले महीने बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में हर घर को नल से जल देने की शुरुआत करने जा रही है. इसके लिए कई इलाकों में ट्रायल रन चल रहा है.

बीमारू और आपराधिक छवि से बाहर निकल रहा आजमगढ़

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की छवि बीमारू जिले, माफिया और आतंकवादी सरपरस्ती की बन गई थी. योगी सरकार के प्रयास से यह छवि बदल रही है. दो लोकसभा, 10 विधानसभा क्षेत्र, 8 तहसीलें और 22 ब्लॉक आजमगढ़ का  भूगोल है. पिछले चार दशक तक उसके इतिहास के पन्नों में आतंक और बीमारू शब्दों की यथार्थ बारंबारता रही.

कभी इस जिले की पहचान

अयोध्या सिंह हरिऔध व श्याम नारायण पांडेय जैसे साहित्य सर्जकों से रही, ब्लैक पॉटरी जैसे खूबसूरत कुटीर उद्योग से रही, अस्सी के दशक से वह जिला माफियागिरी और टेरर कनेक्शन के नाम पर बदनाम हो गया. निवेश और विकास की बात तो दूर, यहां स्थापित कारोबारी ही पलायित होने लगे. किसी भी बड़े शहर में आजमगढ़ का नाम खौफ का पर्याय हो चला था. इन सबके बावजूद सीटों के गणितीय फॉर्मूले में तत्कालीन सत्ताधीश तमाशा देखते रहे.

बीते साढ़े चार सालों से आजमगढ़ माफिया की बजाय विकास का गढ़ बनने की राह पर सरपट आगे बढ़ा है. वैसे तो यह जिला सपा का गढ़ माना जाता है लेकिन जिले की विकासपरक पहचान की पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की है. योगी जिले को राज्य विश्वविद्यालय की सौगात देने जा रहे हैं.

यह सच है कि आजमगढ़ कभी भारतीय जनता पार्टी का राजनीतिक किला नहीं रहा. लेकिन, यह भी उतना ही सच है कि इस जिले की पहली बार सुधि भाजपा सरकार ने ही ली. मार्च 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही योगी आदित्यनाथ ने आजमगढ़ के विकास को बहुत तवज्जो दी. मुख्यमंत्री ने आजमगढ़ की जनता से विश्वविद्यालय की स्थापना का वादा किया था और उसे पूरा भी कर दिखाया है. एक बात तो साफ हो गई है कि आने वाले दिनों में आजमगढ़ की नई पहचान उच्च शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में हो सकेगी. जबकि बीते चार दशकों में कभी हाजी मस्तान तो कभी दाऊद इब्राहिम,अबू सलेम, अबू बकर जैसे माफिया डॉन ही और कई बार बम ब्लास्ट के टेरर कनेक्शन जिले की बदनाम पहचान बन गए थे. साढ़े चार सालों में प्रदेश की कानून व्यवस्था का ऐसा बोलबाला हुआ है कि आजमगढ़ कभी माफिया पनाह मांगने लगे हैं.

आजमगढ़ की जनता ने समाजवादी पार्टी को सिर आंखों पर बैठाया लेकिन जनता को उसके नेताओं ने वोट बैंक तक ही सीमित रखा. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां के लोगों ने मुलायम सिंह यादव को अपना रहनुमा बनाया तो 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव को. इसके बावजूद आजमगढ़ के माथे पर बीमारू का कलंक चस्पा रहा. रहनुमा बनकर सपा नेता आजमगढ़ की जनता को ही भूल बैठे. राजनीतिक विरोधियों का क्षेत्र भले रहा लेकिन सीएम योगी ने जनता को विकास परियोजनाओं का उपहार देने में कभी भेदभाव नहीं किया. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के माध्यम से आजमगढ़ के विकास के एक नई तस्वीर उभरने वाली है. इन दोनों एक्सप्रेसवे के जरिए आजमगढ़ प्रमुख कारोबारी और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित होगा. इससे बड़े पैमाने पर स्थानीय रोजगार सृजित होगा. मुंबई और खाड़ी देशों को होने वाला युवाओं का पलायन भी रुकेगा. यही नहीं सीएम योगी के नियमित पर्यवेक्षण में यहां एयरपोर्ट भी बनकर तैयार है और जल्द ही आजमगढ़ और आसपास के लोगों को बड़े शहरों के लिए सीधी एयर कनेक्टिविटी हो जाएगी. इतना ही नहीं आजमगढ़ के पारंपरिक कुटीर शिल्प ब्लैक पॉटरी को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान योगी सरकार ने ही दिलाई है. यह कुटीर उद्योग प्रोत्साहन के अभाव में दम तोड़ रहा था. सरकार ने इसे आजमगढ़ की ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) योजना में शामिल किया. ओडीओपी में शामिल होते की इस कुटीर उद्योग से जुड़े उद्यमियों के दिन बहुर गए हैं. इस कुटीर उद्योग की धमक और वैश्विक मंच पर भी होने लगी है.

पूरब की तरक्की नया “गेटवे” पूर्वांचल एक्सप्रेसवे

पूर्वांचल की बदहाली, गरीबी, बेबसी और अति पिछड़ेपन का दंश कभी लोकसभा में गाजीपुर के तत्कालीन सांसद विश्वनाथ गहमरी ने इस भावुकता से उठाया था कि सदन में बैठे अधिकांश माननीयों की आंखें नम हो गई थीं. पूरब के लोगों की आंखें एक बार फिर छलकने को बेताब हैं. पर, इस बार आंसू खुशी के होंगे, समृद्धि के पूरे होते सपनों के होंगे, देश की अर्थव्यवस्था में सिरमौर बनने के लिए बढ़ते कदम के होंगे. अवसर होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों 341 किमी लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन का. इस एक्सप्रेसवे के रूप में पूरब के लोगों को तरक्की का “गेटवे” भी मिल जाएगा.

पूर्वांचल के लोगों के लिए दिल्ली अब दूर नहीं होगी, गाजीपुर से सिर्फ 10 घण्टे में देश की राजधानी पहुंचा जा सकेगा. पहले इसका दोगुना या इससे भी अधिक समय लगता था. योगी सरकार ने यूपी में रोड कनेक्टिविटी को अर्थव्यवस्था के मजबूत प्लेटफार्म के रूप में तैयार किया है. सीएम के निर्देश पर उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को भी इसी मंशा से विकसित किया गया है. पूर्व की सरकारों में जिन जिलों में पारंपरिक सड़कें ही चलने लायक नहीं थीं, वहां सिक्स लेन एक्सप्रेसवे की सौगात विकास की नई इबारत लिखने जा रही है. यह एक्सप्रेसवे सिर्फ आमजन की आवागमन सुगमता का ही मार्ग नहीं है बल्कि निवेश व औद्योगिक विकास से रोजगार का भी नया द्वार खोलने वाला है.

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के दायरे में आने वाले जनपदों में कारोबारी गतिविधियों को नया विस्तार तो मिलेगा ही, एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ इंडस्ट्रियल क्लस्टर स्थानीय श्रम शक्ति को सेवायोजित भी करेंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप पांच इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं. इसके लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की तरफ से नौ हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि चिन्हित भी कर ली गई है. चूंकि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के दायरे में आने वाले अधिकांश जिले कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले हैं, इसलिए इंडस्ट्रियल क्लस्टर में पहली प्राथमिकता फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स पर है. इसके अलावा टेक्सटाइल, रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, बेवरेज, केमिकल, मेडिकल उपकरणों से जुड़ी फैक्ट्रियां भी स्थापित होंगी. इन फैक्ट्रियों में स्थानीय श्रम शक्ति को रोजगार मिल सके, इसके लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर उन्हें प्रशिक्षित भी किया जाएगा.

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और बलिया लिंक एक्सप्रेसवे से जोड़कर तीव्रतम होगी विकास की रफ्तार
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को निर्माणाधीन गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और बलिया लिंक एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा. दो लिंक एक्सप्रेसवे से जोड़कर पूर्वी उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार तीव्रतम की जाएगी. इससे गोरखपुर, संतकबीर नगर, बलिया समेत करीब आधा दर्जन अतिरिक्त जिले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएंगे.

आपात स्थिति में वायुसेना के भी काम आ सकेगा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
पूर्वांचल एक्सप्रेस वे को इतना मजबूत बनाया गया है कि आपातकालीन आवश्यकता पर वायुसेना अपने लड़ाकू विमान की इस पर लैंडिंग भी कर सकती है. एक्सप्रेसवे पर सुल्तानपुर में बकायदे 32 किमी लंबी सड़क को वायुसेना की हवाई पट्टी के रूप में ही विकसित किया गया है. प्रधानमंत्री द्वारा सुल्तानपुर में एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किए जाने से पूर्व वायुसेना यहां लड़ाकू विमान की ट्रायल लैंडिंग कर सकती है.

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे : एक नजर में

शिलान्यास – 14 जुलाई 2018

एक्सप्रेसवे का प्रारंभिक स्थान- एनएच 731 के लखनऊ-सुल्तानपुर रोड पर स्थित लखनऊ का चांदसराय गांव

अंतिम स्थान – एनएच 19 पर गाजीपुर का हैदरिया गांव (यूपी-बिहार बॉर्डर से 18 किमी पहले)
ले आउट – पूर्णतः प्रवेश नियंत्रित 6 लेन, कुल लम्बाई 340824 किमी

परियोजना की लागत – 2249466 करोड़ रुपये, भूमि अधिग्रहण समेत

कवर हुए जनपद – 9 (लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अम्बेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ व गाजीपुर)

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