बैलेंसशीट औफ लाइफ- भाग 1: अनन्या की जिंदगी में कैसे मच गई हलचल

औफिस में अनन्या अपने सहकर्मियों के साथ जल्दीजल्दी लंच कर रही थी. लंच के फौरन बाद उस का एक महत्त्वपूर्ण प्रेजैंटेशन था, जिस के लिए वह काफी उत्साहित थी. इस मीटिंग की तैयारी वह 1 हफ्ते से कर रही थी. उस की अच्छी फ्रैंड सनाया ने टोका, ‘‘खाना तो कम से कम आराम से खा लो, अनन्या. काम तो होता रहेगा.’’

‘‘हां, जानती हूं, पर इस प्रेजैंटेशन के लिए बहुत मेहनत की है, राहुल का स्कूल उस का होमवर्क, उस का खानापीना सुमित ही देख रहा है आजकल.’’ ‘‘सच में, तुम्हें बहुत अच्छा पति मिला है.’’

‘‘हां, उस की सपोर्ट के बिना मैं कुछ कर ही नहीं सकती.’’ लंच कर के अनन्या एक बार फिर अपने काम में डूब गई. पवई की इस अत्याधुनिक बिल्डिंग के अपने औफिस के हर व्यक्ति की प्रशंसा की पात्र थी अनन्या. सब उस के गुणों की, मेहनत की तारीफ करते नहीं थकते थे. आधुनिक, स्मार्ट, सुंदर, मेहनती, प्रतिभाशाली अनन्या

10 साल पहले सुमित से विवाह कर दिल्ली से यहां मुंबई आई थी और पवई में ही अपने फ्लैट में अनन्या, सुमित और उन का बेटे राहुल का छोटा सा परिवार खुशहाल जीवन जी रहा था. अनन्या ने अपने काम से संतुष्ट हो कर घड़ी पर एक नजर डाली. तभी व्हाट्सऐप पर सुमित का मैसेज आया, ‘‘औल दि बैस्ट’, साथ ही किस की इमोजी. अनन्या को अच्छा लगा, मुसकराते हुए जवाब भेजा. अचानक उस के फोन की स्क्रीन पर मेघा का नाम चमका तो उस ने हैरान होते हुए फोन उठा लिया. मेघा उस की कालेज की घनिष्ठ सहेली थी. वह इस समय दिल्ली में थी.

मेघा ने कुछ परेशान सी आवाज में कहना शुरू किया, ‘‘अनन्या, तुम औफिस में हो?’’ ‘‘अरे, क्या हुआ? न हाय, न हैलो, सीधे सवाल तुम ठीक तो हो न?’’

‘‘मैं तो ठीक हूं अनन्या, पर बड़ी गड़बड़ हो गई.’’

‘‘क्या हुआ? कुछ बताएगी भी.’’ ‘‘मार्केट में राघव की आत्मकथा ‘‘बैलेंसशीट औफ लाइफ’’ आई है न. उस ने तेरा और अपना पूरा किस्सा इस में लिख दिया है.’’

‘‘क्या?’’ तेज झटका लगा अनन्या को.

‘‘हां, मैं ने अभी पढ़ी नहीं है पर मेरे पति संजीव को बुक पढ़ कर किसी ने बताया कि किसी अनन्या की कहानी लिख कर तो इस ने शायद उस की लाइफ में तूफान ला दिया होगा. संजीव समझ गए कि शायद यह अनन्या तुम ही हो, आज शायद संजीव यह बुक लाएंगे तो पढ़ूंगी. मेरा तो दिमाग ही घूम गया सुन कर. सुमित जानता है न उस के बारे में?’’

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‘‘हां, जानता तो है कि मैं और राघव एकदूसरे को पसंद करते थे और हमारा विवाह उस के महत्त्वाकांक्षी स्वभाव के चलते हो नहीं पाया और उस ने धनदौलत के लिए किसी बड़े बिजनैसमैन की बेटी से विवाह कर लिया था और आज वह भी देश का जानामाना नाम है.’’ मेघा ने अटकते हुए संकोचपूर्वक कहा, ‘‘अनन्या, सुना है तुम्हारे और उस के बीच होने वाले सैक्स की बात उस ने…’’

अनन्या एक शब्द नहीं बोल पाई, आंखें अचानक आंसुओं से भरती चली गईं. अपमान के घूंट चुपचाप पीते हुए, ‘‘बाद में फोन करती हूं.’’ कह कर फोन रख दिया.

मेघा ने उसी समय मैसेज भेजा, ‘‘प्लीज डौंट बी सैड, फ्री होते ही फोन करना.’’ कुछ पल बाद सनाया ने आ कर उसे झंझोड़ा तो जैसे वह होश में आई, ‘‘क्या हुआ अनन्या? एसी में भी इतना पसीना.. तेरी तबीयत तो ठीक है न?’’

‘‘हांहां, बस ऐसे ही.’’ ‘‘टैंशन में हो?’’

‘‘नहींनहीं, कुछ नहीं,’’ अनन्या फीकी सी हंसी हंस दी. यों ही कह दिया, ‘‘प्रेजैंटेशन के बारे में सोच रही थी.’’ ‘‘कोई और बात है जानती हूं, तू इतनी कौन्फिडैंट है, प्रेजैंटेशन के बारे में सोच कर माथे पर इतना पसीना नहीं आएगा. नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं. ले, पानी पी और चल.’’

अनन्या ने उस दिन कैसे अपना प्रेजैंटेशन दिया, वही जानती थी. अतीत की परछाईं से उस ने स्वयं को बड़ी मुश्किल से निकाला था. मन अतीत में पीछे ले जाता रहा था और दिमाग वर्तमान पर ध्यान देने के लिए आगे धकेलता रहा था. तभी वह सफल हो पाई थी. उस के सीनियर्स ने उस की तारीफ कर उस का मनोबल बढ़ाया था. ‘‘तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही,’’ कह कर वह घर के लिए जल्दी निकल गई. राहुल स्कूल से डे केयर में चला जाता था. सुमित आजकल उसे लेता हुआ ही घर आता था, वह चुपचाप घर जा कर बैड पर पड़ गई.

राघव उस का पहला प्यार था. कौलेज में वह उस के प्यार में ऐसे मगन हुई कि यही मान लिया कि जीवन भर का साथ है. राघव एक छोटे से कसबे से दिल्ली में किराए का कमरा ले कर पढ़ता था. राघव के बहुत बार आग्रह करने पर वह एक ही बार उस के कमरे पर गई थी. वहीं भावनाओं में बह कर अनन्या ने पूर्ण समर्पण कर दिया था. आगे विवाह से पहले कभी ऐसा न हो, यह सोच कर फिर कभी उस के कमरे पर नहीं गई थी. पर दिल्ली के मशहूर धनी बिजनैसमैन की बेटी गीता से दोस्ती होने पर राघव को गीता के साथ ही भविष्य सुरक्षित लगा तो कई बहानों से दूरियां बनाते हुए राघव अनन्या से दूर होता चला गया.

अनन्या भी राघव में आए परिवर्तन को भलीभांति भांप गई थी. उस ने पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई, कैरियर पर लगा दिया था और अपने प्यार को कई परतों में दिल में दबा कर यह जख्म समय के ऊपर ही भरने के लिए छोड़ दिया था. कुछ समय बाद मातापिता की पसंद सुमित से विवाह कर मुंबई चली आई और सुमित व राहुल को पा बहुत संतुष्ट व सुखी थी पर आजकल जो आत्मकथा लिखने का फैशन बढ़ता जा रहा है, उस की चपेट में कहीं उस का वर्तमान न आ जाए, यह फांस अनन्या के गले में ऐसे चुभ रही थी कि उसे एक पल भी चैन नहीं आ रहा था. जिस प्यार के एहसास की खुशबू को अपने दिल में ही दबा उस की स्मृति से लंबे समय तक सुवासित हुई थी, आज जैसे उस एहसास से दुर्गंध आ रही थी.

अपनी सफलता, प्रसिद्धि के नशे में चूर राघव ने अपनी आत्मकथा में उस का प्रसंग लिख उस के लिए मुश्किल खड़ी कर दी थी. कहीं ससुराल वाले, मायके और राहुल बड़ा हो कर यह सब जान न ले. कितने ही अपने, दोस्त, परिचत, रिश्तेदार उस के चरित्र पर दाग लगाने के लिए खड़े हो जाएंगे. औफिस में जिन लोगों की नजरों में आज अपने लिए इतना स्नेह और सम्मान दिखता है, उस का क्या होगा? राघव ने यह क्यों नहीं सोचा? अपने लालच, फरेब, महत्त्वाकांक्षाओं के बारे में लिख कर अपनी चालबाजियां दुनिया के सामने रखता, एक लड़की जो अब कहीं शांति से अपने परिवार के साथ जी रही है, उस के शांत जीवन में कंकड़ मार कर उथलपुथल मचाने का क्या औचित्य है?

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अनन्या के मन में क्रोध, अपमान की इतनी तेज भड़ास थी कि उस ने मेघा को फोन मिलाया. मेघा ने फोन उठाते ही प्यार से कहा, ‘‘अनन्या, तू बिलकुल परेशान मत होना, पढ़ कर तुझे बताऊंगी क्या लिखा है उस ने.’’

‘‘नहीं, रहने दे मैं कल औफिस जाते हुए खरीद लूंगी, अगर बुक स्टोर में दिख गई तो. पढ़ लूं फिर बताऊंगी उसे, छोड़ूगी नहीं उसे.’’ दोनों ने कुछ देर बातें करने के बाद फोन रख दिया.

Satyakatha: पति बदलने वाली मनप्रीत कौर को मिली ऐसी सजा- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

शादी के बाद ही उन का बड़ा बेटा गुरमुख सिंह अपनी बीवी को ले कर अलग हो गया था. सुखबीर सिंह ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए ड्राइवरी को ही अपना पेशा बनाया था. सुखबीर की शादी के कुछ समय बाद ही हरनाम सिंह भी किसी बीमारी के चलते चल बसा. उस के बाद सुखवीर अपनी पत्नी मनप्रीत कौर के साथ ही अपने पिता के घर में अकेला ही रहने लगा था.

मनप्रीत कौर के साथ शादी हो जाने के बाद दोनों खुशहाल जिंदगी गुजारने लगे थे. सुखवीर सिंह एक सीधेसादे स्वभाव का था. वह कार ड्राइवरी करता था. वह सुबह ही अपनी कार ले कर रोजीरोटी की तलाश में निकल जाता. फिर मनप्रीत कौर घर पर अकेली ही रह जाती थी.

हालांकि सुखवीर सिंह और उस के भाई गुरमुख सिंह का घर एकदूसरे से सटा हुआ था, लेकिन बीच में दीवार होने के कारण दोनों का अपना ही रहना, खानापीना था. जिस कारण मनप्रीत कौर का मन घर से उचटने लगा था.

मनप्रीत कौर और सुखवीर की शादी को 2 साल गुजर गए. लेकिन उन का आंगन फिर भी सूनासूना ही था. जिस कारण दोनों ही परेशान रहने लगे थे. अपनी परेशानी को देखते हुए सुखवीर सिंह ने मनप्रीत कौर को कई डाक्टरों को दिखाया.

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शादी के 2 साल के बाद मनप्रीत एक बच्ची की मां बनी. उन के घर के आंगन में बच्चे की किलकारी गूंजी

तो सुखवीर सिंह की खुशी का ठिकाना न रहा.

लेकिन एक बच्ची की मां बन जाने के बाद भी मनप्रीत कौर का मन घर की तरफ से उखड़ाउखड़ा रहने लगा था. जिस के बाद वह अपनी बेटी परबदीप को साथ ले कर अधिकांश समय अपने मायके में ही गुजारने लगी थी.

मनप्रीत कौर के मायके चले जाने के बाद सुखवीर सिंह के सामने खाना बनाने की दिक्कत आने लगी थी. अपनी परेशानी को देखते हुए उस ने कई बार अपनी बीवी मनप्रीत से घर आ कर रहने को कहा, लेकिन वह कुछ समय के लिए ही अपनी ससुराल रुकती और फिर मायके चली जाती थी. जिस कारण दोनों की जिंदगी में खटास आनी शुरू हो गई थी.

घरगृहस्थी में मनमुटाव के कारण एक दिन मनप्रीत कौर सुखवीर को छोड़ कर घर से अचानक ही गायब हो गई. मनप्रीत कौर के गायब होते ही उस के घर वालों ने उसे हर जगह ढूंढा, लेकिन उस का कहीं भी अतापता नहीं चला.

लेकिन 10-15 दिन बाद वह खुद ही अपने घर चली आई. जिस के बाद दोनों में काफी विवाद भी हुआ. लेकिन फिर भी बच्ची के भविष्य को देखते हुए सुखवीर ने उसे माफ कर दिया और फिर से वह उसी के साथ रहने लगी.

उसी दौरान एक दिन मनप्रीत कौर काशीपुर नगर से अपनी बच्ची के लिए कपड़े खरीदने गई. वहां पर उस की मुलाकात आईसा से हुई. आईसा की कपड़ों की दुकान थी. उस ने वहीं से अपनी बच्ची के लिए कपड़े भी खरीदे. कपड़े खरीदने के दौरान उस ने आईसा से जानपहचान बढ़ा ली.

मनप्रीत कौर देखनेभालने में सुंदर और बोलचाल में तेज थी. तभी आईसा ने उस से जानपहचान बढ़ाते हुए पूछा, ‘‘आप क्या कोई जौब करती हो?’’

‘‘अरे दीदी, क्यों मजाक करती हो. जौब हमारी किस्मत में कहां है.’’ मनप्रीत ने टूटे दिल से जबाव दिया.

‘‘लेकिन एक बात है मनप्रीतजी, आप को कोई भी देख कर यही कहेगा कि आप कोई जौब करती होंगी.’’

‘‘मेरे बारे में कोई कुछ भी समझे. लेकिन शायद मेरी किस्मत बिन स्याही की कलम से लिखी है. किस्मत में एक ड्राइवर लिखा था. जिस के साथ अपनी टूटीफूटी जिंदगी को जैसेतैसे काट रही हूं.’’ मनप्रीत ने आईसा के सामने अपना दुखड़ा रोया.

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‘‘मनप्रीतजी, आप परेशान क्यों हो रही हो. अगर आप चाहो तो मेरी शौप पर आ जाओ. मुझे काफी समय से आप जैसी ही एक लड़की की तलाश है.’’

‘‘दीदी, क्यों मजाक कर रही हो.’’

‘‘नहींनहीं, मैं मजाक नहीं कर रही. अगर आप चाहो तो कल से ही काम पर आ जाओ.’’

आईसा की बात सुनते ही मनप्रीत कौर का चेहरा खिल उठा. उस ने उसी समय आईसा की शौप पर काम करने की हामी भर ली.

मनप्रीत का मायका काशीपुर के पास ही था. उस के बाद वह अपनी बेटी को ले कर अपने मायके आ गई. फिर उस ने बच्ची को अपने मायके में छोड़ा और वह वहीं से आईसा की शौप पर काम करने आने लगी.

कपड़े की दुकान पर काम करने के दौरान ही एक दिन उस की मुलाकात नफीस से हुई. नफीस उस दिन वहां कपड़े खरीदने आया था. उसी मुलाकात के दौरान मनप्रीत ने नफीस की जानकारी लेते ही बता दिया था कि उस का पति भी एक ड्राइवर ही है.  मनप्रीत की सुंदरता को देख कर वह उस का इतना दीवाना हो गया कि उस ने उस का मोबाइल नंबर तक ले लिया था.

मनप्रीत को मायके गए हुए काफी समय हो गया तो सुखवीर उसे बुलाने के लिए ससुराल गया. उसे ससुराल जा कर ही पता चला कि वह काशीपुर में किसी कपड़े की दुकान पर काम करने लगी है.

सुखवीर ने उस से घर चलने को कहा तो उस ने साफ शब्दों में कहा कि उस का मन गांव में नहीं लगता. अगर उसे उस के साथ रहना है तो काशीपुर में कमरा ले कर रह ले.

पत्नी की बात सुनते ही सुखवीर परेशान हो उठा. उस की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि वह मनप्रीत को कैसे समझाए. उस ने उसे समझाने की कोशिश भी की. लेकिन मनप्रीत ने उस की एक न चलने दी. उस के बाद सुखवीर परेशान हो कर अपनी बेटी परबदीप को साथ ले कर अपने गांव लौट गया.

अगले भाग में पढ़ें- मनप्रीत कौर भी उस की एक बहुत बड़ी कमजोरी थी

Manohar Kahaniya: बीवी और मंगेतर को मारने वाला ‘नाइट्रोजन गैस किलर’- भाग 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

Writer- शाहनवाज

11 अक्तूबर 2021 का दिन था. बठिंडा, पंजाब की रहने वाली छपिंदरपाल कौर उर्फ सोनू (28) पटियाला में अपने होने वाले पति से मिलने के लिए जा रही थी. वह बेहद खुश थी क्योंकि एक लंबे अरसे के इंतजार के बाद उस की शादी नवनिंदर प्रीतपाल सिंह उर्फ सिद्धू (39) से होने वाली थी.

लंबा इंतजार इसलिए क्योंकि छपिंदरपाल और नवनिंदर दोनों की सगाई पिछले साल मार्च 2020 में ही हो गई थी. लेकिन उन की शादी उन दिनों देश में फैले कोविड की वजह से नहीं हो पाई. जब कोविड का असर धीरेधीरे कम होने लगा और देश में अनलौक की प्रक्रिया को चालू किया गया, उस के बाद नवनिंदर अपने निजी कारणों से शादी की डेट लगातार टाल दिया करता था.

इस शादी के लिए छपिंदर ने लंबा इंतजार किया था, जोकि आने वाले 20 अक्तूबर को खत्म होने वाला था.

नवनिंदर पटियाला के अर्बन एस्टेट इलाके में रहता था जोकि पौश इलाकों में माना जाता है. वह अपने मातापिता का एकलौता बेटा था. उस के 80 साल के पिता इंडियन आर्मी के रिटायर्ड कर्नल थे, जिन की आखिरी इच्छा अपने बेटे की खुशहाल जिंदगी देना था.

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दरअसल, नवनिंदर और छपिंदरपाल उर्फ सोनू दोनों ने एक साथ पंजाबराजस्थान के बौर्डर पर स्थित श्रीगंगानगर में श्री गुरुनानक खालसा ला कालेज से एलएलबी यानी कानून में बैचलर की पढ़ाई की थी. उसी दौरान बठिंडा और पटियाला 2 अलगअलग इलाकों के रहने वाले इन दोनों में दोस्ती गहराई और प्यार हो गया. इस के अलावा नवनिंदर ने समाजशास्त्र में पोस्ट ग्रैजुएशन की पढ़ाई भी की थी और वह अमेरिका के एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में पढ़ाई करने वाले बच्चों को औनलाइन पढ़ाता था.

11 अक्तूबर को जब नवनिंदर ने छपिंदर को शादी की शौपिंग और तैयारियां करने के लिए बुलाया तो छपिंदर उर्फ सोनू की खुशी का ठिकाना नहीं था. छपिंदर के घर वालों ने भी इस के लिए टोकाटाकी नहीं की. उन्होंने खुशी से अपनी बेटी को पटियाला उस के होने वाले पति से मिलने की इजाजत दे दी.

11 अक्तूबर की दोपहर को सोनू पटियाला पहुंच कर नवनिंदर से मिली. सब से पहले नवनिंदर सोनू को अपने साथ एक होटल में ले गया. जहां वह फ्रैश हुई और कपड़े बदल कर वे दोनों पटियाला में लगने वाली बड़ी मार्किट में शौपिंग के लिए निकल गए.

11 अक्तूबर से 13 अक्तूबर तक नवनिंदर ने सोनू को अपने साथ खूब घुमायाफिराया. सोनू ने नवनिंदर से जिस किसी चीज की मांग की, नवनिंदर ने उन सभी मांगों की पूर्ति की. वे दोनों कभी महंगे 5 स्टार होटल में खाना खाने जाते, कभी बड़ेबड़े शौपिंग कौंप्लेक्स में घूमते और खरीदारी करते.

इस बीच मौका मिलते ही सोनू अपने घर वालों से और अपने दोस्तों से फोन कर उन से बात किया करती. अपने घर वालों से उस की लगभग हर दिन ही बातचीत होती थी. सोनू से बातें कर उस के घर वालों के दिल को सुकून मिल जाता था.

सोनू के पिता सुखचैन सिंह अपनी बेटी से बहुत प्यार करते थे. घर पर सोनू के नहीं होने से उन्हें घर बेहद सूना लग रहा था. लेकिन 14 अक्तूबर से सोनू ने फोन उठाना बंद कर दिया. उस के घर वाले उस के नंबर पर फोन करते रहे, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया.

पहले तो सोनू के घर वालों को लगा कि शायद वह कहीं व्यस्त होगी या फिर शौपिंग करने में मशगूल होगी. लेकिन जब सोनू की तरफ से अपने पिता को या घर में किसी को भी कालबैक नहीं की गई तो उन की चिंता बढ़ने लगी. जब उन को महसूस हुआ कि सोनू फोन नहीं उठा रही तो उन्होंने नवनिंदर के नंबर पर फोन किया.

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बेटी की खबर से सुखचैन की बढ़ी चिंता

सोनू के पिता सुखचैन सिंह की काल देख नवनिंदर ने फोन उठाया और बात की. सुखचैन हड़बड़ाते हुए बोले, ‘‘बेटा, ये सोनू फोन क्यों नहीं उठा रही है? हम काफी देर से उसे फोन कर रहे हैं. न तो वह फोन उठा रही है और न ही कालबैक कर रही है. आखिर वह है कहां पर?’’

अगले भाग में पढ़ें- मंगेतर ही निकला कातिल

साथी- भाग 3: क्या रजत और छवि अलग हुए?

‘‘बहुत कोशिश की उसे बदलने की… बहुत समझाया पर वह समझती ही नहीं… थकहार कर मैं भी चुप हो गया.’’

‘‘क्या खूबसूरती ही सबकुछ होती है रजत?’’ रीतिका का स्वर इतना थका था जैसे मीलों की दूरी तय कर के आया हो.

रजत उस के थके स्वर के मतलब को समझ रहा था. वह चुप हो गया. थोड़ी देर दोनों चुप रहे.

फिर एकाएक रीतिका बोली, ‘‘बातों से समझा कर नहीं मानती, तो कुछ कर के समझाओ… जब तक दिल पर चोट नहीं लगेगी, तब तक नहीं समझेगी… जब तक कुछ खो देने का डर नहीं होगा… तब तक कुछ पाने की कोशिश नहीं करेगी.’’

रजत चुप रहा. रीतिका की बात कुछ समझा, कुछ नहीं. तभी उस ने कार एक जगह रोक दी.

‘‘यहां कहां रोक दी कार?’’

‘‘आइसक्रीम खाने के लिए. तुम्हें आइसक्रीम बहुत पसंद है न और वह भी आइसक्रीम पार्लर में खाना.’’

‘‘तुम्हें याद है अभी तक?’’ रीतिका संजीदगी से बोली.

‘‘हां, क्यों नहीं. दोस्तों की आदतें भी कोई भूलता है क्या? चलो उतरो,’’ रजत कार का दरवाजा खोलते हुए बोला.

दोनों उतर कर आइसक्रीम पार्लर में चले गए. उन्हें पता ही नहीं चला कि काफी समय हो गया है. फिर रीतिका को छोड़ कर जब रजत घर पहुंचा तो छवि उस के इंतजार में चिंतित सी बैठी थी. उसे देखते ही बोली, ‘‘बहुत देर कर दी. मोबाइल भी आप घर भूल गए थे.’’

‘‘हां, देर हो गई. दरअसल आइसक्रीम खाने रुक गए थे. रीतिका को आइसक्रीम बहुत पसंद है.’’

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‘‘आइसक्रीम तो हमेशा घर पर रहती है. घर पर ही खिला देते?’’ छवि का स्वर हमेशा से अलग कुछ झुंझलाया हुआ था.

रजत ने चौंक कर छवि के चेहरे पर नजर डाली. उस के स्वभाव के विपरीत हलकी सी ईर्ष्या की छाया नजर आई. बोला, ‘‘उसे आइसक्रीम पार्लर में ही खाना पसंद है… फिर बातचीत में भी देर हो गई…’’ और फिर कपड़े बदलने लगा.

छवि थोड़ी देर खड़ी रही, फिर बिस्तर पर लेट गई. कपड़े बदल कर रजत भी बिस्तर पर लेट गया. नींद उसे भी नहीं आ रही थी. पर उसे आश्चर्य हुआ कि हमेशा लेटते ही घोड़े बेच कर सो जाने वाली छवि आधी रात तक करवटें बदलती रही. रजत को रीतिका की बात याद आ गई कि जब तक दिल पर चोट नहीं लगेगी, कुछ खोने का डर नहीं होगा. तब तक कुछ पाने की भी कोशिश नहीं करेगी.

अब रजत अकसर औफिस से घर आने में कुछ देर करने लगा. कभी उस से कुछ भी न पूछने वाली छवि अब कभीकभी उस से देर से आने का कारण पूछने लगी. वह भी लापरवाही से जवाब दे देता, ‘‘रीतिका को कुछ शौपिंग करनी थी. उस के साथ चला गया था… उस के पति तो यहां पर हैं नहीं अभी,’’ और फिर छवि के चेहरे के भाव देखना नहीं भूलता. वह देखता कि रीतिका का नाम सुन कर छवि का चेहरा स्याह पड़ जाता.

पतिपत्नी के बीच के उस महीन से अदृश्य अधिकारसूत्र को उसने कभी पकड़ा ही नहीं था. अब अकसर ही यही होने लगा. रजत किसी न किसी कारण से देर से घर आता. छुट्टी वाले दिन भी निकल जाता. कभीकभी शाम को भी निकल जाता और खाना खा कर घर पहुंचता. छवि के पूछने पर कह देता कि रीतिका के साथ था.

छवि कसमसा जाती. कुछ कह नहीं पाती. खुद की तुलना रीतिका से करने लगती. कब, कहां, किस मोड़ पर छोड़ दिया उस ने पति का साथ… वह आगे निकल गया और वह वहीं पर खड़ी रह गई.

वापस आ कर रजत मुंह फेर कर सो जाता और वह तकिए में मुंह गड़ाए आंसू बहाती रहती. ऐसा तो कभी नहीं हुआ उस के साथ. उस ने इस नजर से कभी सोचा ही नहीं रजत के लिए.

रजत को खो देने का डर कभी पैदा ही नहीं हुआ, मन में तो आंसू आने का सवाल ही पैदा नहीं होता. घर, बच्चे, सासससुर की सेवा, घर का काम और पति की देखभाल, जीवन यहीं तक सीमित कर लिया था उस ने. पति इस के अलावा भी कुछ चाहता है इस तरफ तो उस का कभी ध्यान ही नहीं गया.

छवि छटपटा जाती. दिल करता झंझोड़ कर पूछे रजत से ‘क्यों कर रहे हो ऐसा… रीतिका क्या लगती है तुम्हारी…’ पर पता नहीं क्यों कारण जैसे उस की समझ में आ रहा था. रीतिका के व्यक्तित्व के सामने वह अपनेआप को बौना महसूस कर रही थी.

एक दिन रविवार को छवि तैयार हो कर घर से निकल गई. रीतिका खाना बनाने की तैयारी कर रही थी. तभी घंटी बज उठी. रीतिका ने दरवाजा खोला तो छवि को खड़ा देख कर चौंक गई. पूछा, ‘‘छवि, तुम यहां? इस समय? रजत कहां है?’’

‘‘वे घर पर नहीं थे… मैं तुम से मिलने आई हूं रीतिका,’’ छवि सहमी हुई सी बोली.

छवि के बोलने के अंदाज पर रीतिका को उस पर दया सी आ गई, ‘‘हांहां, छवि अंदर आओ न.’’ वह उस का हाथ पकड़ कर खींचती हुई अंदर ले आई, ‘‘बैठो.’’

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छवि थोड़ी देर चुप रही. कभी उस का चेहरा देखती, तो कभी नीचे देखने लगती जैसे तोल रही हो कि क्या बोले और कैसे बोले.

‘‘छवि घबराओ मत खुल कर बोलो क्या काम है मुझ से?’’

‘‘वह… आजकल रजत कुछ बदल से गए हैं…’’ बोलतेबोलते वह हकला सी गई, ‘‘जब से तुम आई हो…’’

सुन कर रीतिका जोर से हंस पड़ी.

‘‘अकसर घर से गायब रहने लगे हैं… तुम्हारे पास आ जाते हैं…’’ कहतेकहते उस की आंखों में आंसू आ गए. ‘‘तुम तो शादीशुदा हो रीतिका… मुझ से मेरा पति मत छीनो…’’

रीतिका हंसतेहंसते चुप हो गई. थोड़ी देर चुप रह कर फिर बोली, ‘‘तुम्हारा पति मैं ने नहीं छीना छवि… तुम ने खुद उसे अपने से दूर कर दिया है.’’

‘‘मैं ने कैसे कर दिया है? वे आजकल तुम्हारे साथ रहते हैं… तुम्हारे साथ पिक्चर जाना, तुम्हें शौपिंग कराना, तुम्हारे साथ घूमना… न बच्चों पर ध्यान देते हैं न घर पर…’’

‘‘छवि, सब से पहले तो इस बात का विश्वास करो कि जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं है हमारे बीच… ऐसा कुछ होता, तो बहुत पहले हो जाता… तब तुम रजत की जिंदगी में न होती… हम दोनों के बीच दोस्ती से अधिक कुछ नहीं… वह कभीकभी मेरी मदद के लिए जरूर आता है पर हमेशा मेरे साथ नहीं होता.’’

‘‘फिर कहां जाते हैं?’’

‘‘अब यह तो रजत ही जाने कि वह कहां जाता है, लेकिन क्यों जाता है, यह मैं समझ सकती हूं…’’

‘‘क्यों जाते हैं?’’ छवि अचंभित सी रीतिका को देखते हुए बोली.

‘‘छवि, शिक्षा का मतलब डिग्री लेना ही नहीं होता, नौकरी करना ही नहीं होता, एक गृहिणी होते हुए भी तुम ने ऐसा कुछ किया जो सिर्फ खुद के लिए किया हो… अब वह जमाना नहीं रहा छवि, जब कहते थे कि पति के दिल पर राज करना है तो पेट से रास्ता बनाओ… मतलब कि अच्छा खाना बनाओ… अब सिर्फ खाना बनाना ही काफी नहीं है…

‘‘अच्छा खाना बनाना आए या न आए पर पति के दिल को समझना जरूर आना चाहिए… अब एक गृहिणी की प्राथमिकताएं भी बहुत बदल गई हैं… क्यों नहीं तुम ने खुद को बदला समय के साथ… कभी रजत की बगल में खड़े हो कर देखा है खुद को…

रजत एक खूबसूरत, उच्चशिक्षित व सफल पुरुष है… और तुम खुद कहां हो… न तुम ने अपनी शिक्षा बढ़ाई, न तुम ने अपने रखरखाव पर ध्यान दिया. न पहनावे पर, न अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाने पर… तुम्हारा उच्चशिक्षित पति तुम्हारे साथ आखिर बात भी करे तो किस टौपिक पर…वह समय अब नहीं रहा छवि जब उच्चशिक्षित पतियों की पत्नियां अनपढ़ भी हुआ करती थीं.’’

रीतिका थोड़ी देर चुप रह कर फिर बोली, ‘‘नौकरी करना ही जरूरी नहीं है… एक शिक्षित, स्मार्ट, सामान्य ज्ञान से भरपूर, अंदरबाहर के काम संभालने वाली गृहिणी भी पति के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ी होने की ताकत रखती है… पर तुम ने किचन से बाहर निकल कर खुद के बारे में कभी कुछ सोचा हो तब तो…

मेटावर्स: वर्चुअल दुनिया की आजादी

मेटावर्स आधुनिक तकनीकी की एक काल्पनिक दुनिया होगी, जहां घर बैठे आप दुनिया के किसी भी माल में घूम कर शौपिंग का अहसास कर सकते हैं. मेटावर्स से हमारी जिंदगी में काफी कुछ बदल जाएगा, लेकिन अब सवाल यही उठ रहा है कि इस में कोई अपराध होगा तो उस से कैसे निपटा जाएगा?

इंटरनेट, कंप्यूटिंग और टेलीकम्युनिकेशन की दुनिया के साथ हो रहे लगातार दूसरे तकनीकी विकास और विस्तार के नए नाम मेटावर्स को ‘वर्चुअल एनवायरनमेंट’ यानी आभासी वातावरण कहा गया है.

मेटावर्स के सिलसिले में बात करने से पहले हमें यह जानना होगा कि आखिर मेटावर्स है क्या? वैसे मेटा ग्रीक शब्द है, जिस का अर्थ होता है बियांड यानी आगे या उस पार. आप ने इस से बने शब्द मेटाबालिज्म, मेटाफिजिक्स, मेटाडेटा आदि सुने होंगे. अब मेटा को यूनिवर्स से जोड़ कर मेटावर्स बनाया गया है. इस तरह यह हमारे यूनिवर्स के साथ रची जा रही काल्पनिक  दुनिया होगी. अब तक हम इंटरनेट से जो कुछ करते थे, उसे अपने सामने स्क्रीन पर देखते थे.

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लेकिन मेटावर्स में हम स्क्रीन के उस पार भी पहुंच जाएंगे. बस, इस के लिए कुछ डिवाइस जैसे वीआर हैंडसेट, एआर ग्लासेज या स्मार्ट चश्मे, स्मार्टफोन आदि की जरूरत होगी. फिर साइबर स्पेस धीरेधीरे मेटावर्स में बदल जाएगा.

यह काम कैसे करेगा और लोगों को कितना लुभाएगा, इस से पहले इस तरह से समझना होगा.

किसी क्रिकेट प्रेमी के लिए कितना रोमांचक और वास्तविक एहसास वाला होगा, यदि वह घर बैठे दूसरे देश के स्टेडियम में खेले जा रहे टी20 मैच का एक दर्शक हो. वह भी हजारों दर्शकों के बीच चौकेछक्के और खिलाडि़यों की प्रतिस्पर्धा और हारजीत के रोमांच को दूसरे के साथ शेयर करे.

दूसरी परिकल्पना घर बैठे किसी शोरूम में विजिट किए गए बगैर नए मौडल की कार की तकनीकी जानकारियां पाने के साथसाथ उसे चला कर जांचपरख करने की भी है.

इसी तरह माल या औनलाइन कपड़े खरीदने से पहले छूने, पहन कर देखने का वर्चुअल एहसास होने पर उस के प्रति विश्वसनीयता बढ़ सकती है.

हर क्षेत्र में समय, श्रम और पैसे के व्यय को कम करने के लिए डिजिटल वर्ल्ड का नया परिवेश पिछले एक दशक से विकसित किया जा रहा है. कोशिश है कि वर्चुअल एनवायरमेंट को रियलिस्टिक बना कर पेश किया जा सके.

इन अवधारणाओं को जमीन पर उतारने के लिए वर्चुअल रियलिटी (वीआर) और आग्मेंटेड रियलिटी (एआर) की तकनीक बनाई जा चुकी है. छिटपुट प्रयोग और इस्तेमाल के प्रयास भी किए गए हैं, लेकिन उन का व्यापक विकास नहीं हो पाया.

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वीआर सिर्फ गेम तक ही सिमट कर रह गया और एआर बेहतर इंटरनेट की सुविधा के इंतजार में है. उस के साथ एआर को जोड़ने में इंटरनेट स्पीड को ले कर कई बाधाएं बनी रहीं. इसे ही मेटावर्स के जरिए नए सिरे से बहुपयोगी बनाने पर जोर दिया गया है.

वर्चुअल स्पेस का होगा कलेक्शन

वास्तव में मेटावर्स एक साथ जुटाए गए वर्चुअल स्पेस का वैसा कलेक्शन होगा, जिसे रियलिटी के साथ फिजिकली अपनाया जा सके. इस में वर्चुअल वर्ल्ड, आग्मेंटेड रियलिटी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे नए तकनीक इंटरनेट के सहारे काम करेंगे.

यानी कि मेटावर्स एक वर्चुअल दुनिया है, जहां कोई व्यक्ति फिजिकली मौजूद नहीं होते हुए भी अपनी उपस्थित को दर्ज करवा सकता है. उस के साथ महसूस किए जाने वाले वर्चुअल यूनिवर्स में थ्री डाइमेंशनल वर्चुअल स्पेस और उस की साझेदारी को इंटरनेट के जरिए जोड़ने का सिद्धांत बनाया गया है. इस टर्म को पहली बार नील स्टीफेंसन ने 1992 में अपने साइंस फिक्शन उपन्यास ‘स्नो क्रैश’ में गढ़ा था.

सीधे तौर पर समझें तो मेटावर्स एक तरह से वर्चुअल रियलिटी (वीआर) का ही विकसित रूप है. इस में छिपी कई संभावनाएं ठीक वैसी ही हैं, जैसा कि साधारण फोन या शुरुआती दिनों के मोबाइल फोन की तुलना में आज के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्टफोन से मिलती हैं.

मेटावर्स के बहुपयोगी बनने के क्षेत्र में कई जटिलताएं हैं, जिस में कंप्यूटिंग तकनीक से ले कर इंटरनेट की स्पीड, उस की उपलब्धता और डेटा की खपत तक शामिल है.

इस के साथसाथ थ्रीडी वीडियो के कंटेंट, निजी डेटा की सुरक्षा तथा साइबर क्राइम भी मायने रखते हैं. अभी तक वीआर का जो कौंसेप्ट और बाजार में उपलब्ध गजेट है, उन के प्रति सामान्य दिलचस्पी नहीं बन पाने का मूल करण उस का केवल गेम से जुड़ा होना ही रहा है, जबकि मेटावर्स को सिर्फ थ्रीडी गेम के नजरिए से देखना एक भूल होगी.

मेटावर्स से बने डिजिटल दुनिया को और अधिक विकसित बनाने के लिए मोबाइल कनेक्टिविटी को बेहतर करने की जरूरत होगी. इस की उम्मीद 5जी के आने के बाद की जा सकती है.

अब लोगों की जुबान पर चढ़ चुका ‘फेसबुक’ शब्द चंद दिनों का मेहमान रह गया है. उस की जगह आने वाला ग्रीक शब्द ‘मेटा’ और उस का मैथेमेटिकल चिह्न इनफिनिटी को जेहन में बिठाने में कितना समय लगेगा, यह तो वक्त ही बताएगा. जबकि भविष्य का इंटरनेट कहे जाने वाले मेटावर्स (वर्चुअल एनवायरनमेंट) के लिए मार्क जुकरबर्ग ने माहौल बना कर अपनी धूमिल होती छवि को सुधारने की पूरी तैयारी कर ली है.

अपने ‘वर्कप्लेस’ नामक वर्चुअल रियलिटी मीटिंग ऐप और सोशल स्पेस ‘होराइजन्स’ के विकास के लिए उन की 10 बिलियन डालर निवेश के साथ 10 हजार चुने हुए प्रतिभाशाली प्रोफैशनल को नियुक्त करने की योजना है.

उल्लेखनीय है कि फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग वीआर के क्षेत्र में शुरू से ही सक्रिय रहे हैं. उन्होंने अपने आक्युलस हेडसेट के लिए इस क्षेत्र में भारी निवेश भी किया है.

साल 2014 में आक्युलस नाम की कंपनी को 2 अरब डालर में खरीदा था. तभी से होराइजन नाम की एक वैसी डिजिटल दुनिया बनाने के लिए काम किया जा रहा है, जहां लोग वीआर तकनीक की मदद से एकदूसरे से संवाद कायम कर सकें.

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फेसबुक ने कर दी है तैयारी

इसी साल अगस्त में फेसबुक ने ‘होराइजन वर्करूम्स’ नाम का एक फीचर जारी किया था, जिस में लोग वीआर हेडसेट पहन कर वर्चुअल रूम में एकदूसरे के साथ मीटिंग कर सकते हैं. ऐसा करते हुए रूम्स में लोग अपने ही थ्रीडी वर्जन के रूप में नजर आते हैं.

फेसबुक ने इसी सिलसिले में ‘वर्कप्लेस’ और ‘होराइजन्स’ ऐप बनाने की तैयार की है. वर्कप्लेस में वर्चुअल रियलिटी मीट होगा, जबकि होराइजन्स में सोशल स्पेस को जगह मिलेगी. हालांकि वर्चुअल रियलिटी का एक और ऐप ‘वीआरचैट’ पूरी तरह से औनलाइन हैंगआउट चैटिंग के लिए बनाया गया है.

इन से केवल आसपास की दुनिया से जुड़ना या बातचीत करना ही संभव हो पाता है. इस से अलग फेसबुक की नजर में मेटावर्स के वर्कप्लेस और होराइजन्स से अलग किस्म की वैचारिकता के व्यवहारिकता का संतुलित आकार बनेगा.

साथ ही कंपनी मेटावर्स के जरिए इंटरनेट तकनीकों को अगली लहर की तैयारी की कोशिशों का हिस्सा बन जाएगी. कंपनी की मानें तो मेटावर्स में रचनात्मक, सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर एक नया आयाम विकसित कर सकती है.

फेसबुक ने मेटावर्स की तैयारी की घोषणा ऐसे समय में की है, जब कंपनी कई समस्याओं से जूझ रही है. उसे कई बार तकनीकी खामियों के दौर से गुजरना पड़ रहा है.

हाल में ही कई घंटों तक उस की सेवाएं बंद रही हैं. साथ ही भारत समेत कई देशों में इस के बेकाबू होने और अनियंत्रित प्रभाव देने जैसे आरोपों से भी जूझना पड़ रहा है.

बहरहाल, कंपनी वीआर और एआर को अगली पीढ़ी के औनलाइन सोशल एक्सपीरिएंस के मूल रूप में देख रही है. उस के द्वारा एक मजबूत प्रोटेक्ट टीम बनाई गई है. साथ ही कंपनी अपने फेसबुक रियल्टी लैब्स पर अरबों डालर खर्च करेगी.

अनेक कंपनियां कर रही हैं तैयारियां

फेसबुक ने इस पर शुरुआत में करीब 75 हजार करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई है. इस के अलावा यूरोपियन यूनियन में 10 हजार लोगों को नौकरियां भी दी जाएंगी. उधर साउथ कोरिया ने साल 2023 तक सियोल को पहला मेटावर्स शहर बनाने का ऐलान कर दिया है.

फेसबुक के अलावा दुनिया की कई कंपनियां मेटावर्स में उतरने में जुटी हैं. इस में सौफ्टवेयर, हार्डवेयर, इंटरफेस क्रिएशन, प्रोडक्ट और फाईनैंशियल सर्विस देने वाली कैटेगरी हैं.

गूगल, एप्पल, स्नैपचैट ओर एपिक गेम्स भी मेटावर्स पर काम कर रहे हैं. फेसबुक के बाद डिज्नी ने भी मेटावर्स बनाने का ऐलान कर दिया है.

फेसबुक कंपनी का कहना है कि वह इस प्रोजेक्ट को एक लौंग टर्म विजन के नजरिए से देख रही है. वह इस विजन को हकीकत में बदलने को ले कर प्रतिबद्ध है और अगले कई सालों तक इस के लिए निवेश करने की उम्मीद करती है. वैसे इस के नतीजे आने का लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक अगले 5 साल में अंजाम तक पहुंचा जा सकता है.

फेसबुक के अनुसार महत्त्वपूर्ण बात यह भी है कि मेटावर्स में किसी एक कंपनी का अधिकार नहीं होगा और यह सशक्त प्लेटफार्म के रूप में बना इंटरनेट सभी के लिए उपलब्ध होगा.

जैसा कि तकनीक के स्वरूप से ही स्पष्ट हो चुका है कि इस में वीआर, एआर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्यूटिंग, विविध टौपिक के थ्रीडी वीडियोज, गेम्स के कंटेंट, इंटरनेट प्रदाता कंपनियां आदि के अतिरिक्त गजेट की व्यापकता के लिए अलगअलग कंपनियां शामिल होंगी.

मेटावर्स में आप को कोई ड्रैस पसंद आए तो आप उसे वर्चुअल पहन कर, छू कर देख सकते हैं. जब ड्रैस फिट आए तो और्डर कर सकते हैं. इसलिए कुछ नामी फैशन कंपनियां और फिटनेस कंपनियां भी इस से जुड़ने की तैयारी कर रही हैं.

उल्लेखनीय है कि हाल ही में पौप स्टार आर्यना ग्रांदे और रैपर ट्रैविस स्कौट वीडियो गेम्स की दुनिया में चर्चित फोर्टनाइट के जरिए अपना प्रदर्शन कर चुके हैं, जिसे लोगों से अपने घरों में बैठ कर देखा है. रियलिटी को वर्चुअल बना कर प्रस्तुत करने का यह एक अच्छा उदाहरण बन चुका है.

फेसबुक को उम्मीद है कि जैसेजैसे मेटावर्स का काम आगे बढ़ेगा, वैसेवैसे दूसरी टेक कंपनियां इस से जुड़ती चली जाएंगी. फिर भी मेटावर्स के विकास को ले कर उपजने वाले जो भी नकारात्मक सवाल खड़े हो सकते हैं, उस संदर्भ में कहा जा सकता है कि सफलता मिलने में कई साल लग सकते हैं.

फिर भी इस के लिए कई टेक कंपनियों के बीच लगने वाली होड़ से इनकार नहीं किया जा सकता है. पिछले कुछ सालों में वीआर तकनीक की अच्छी गुणवत्ता वाले हेडसेट आ चुके हैं. हम ने 360 डिग्री फिल्मांकन वाले थ्रीडी वीडियो बनाने में दक्षता हासिल कर ली है.

एआई में भी जबरदस्त विकास हुआ है. सब से बड़ी बात यह है कि हर तबके के लोगों के बीच तेजी से औनलाइन कार्यशैली विकसित हो रही है. गेम की दुनिया में हर रोज कुछ न कुछ नया हो रहा है. पिछले साल आए आक्युलस क्वेस्ट2 वीआर गेमिंग हेडसेट को खूब पसंद किया गया है.

मेटावर्स के विकसित हो जाने तक भारत में भी इंटरनेट से जुड़ी तमाम तकनीकी समस्याएं दूर हो जाएंगी और इस के प्रोडक्ट भारतीय उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए बाजार में उतारे जाएंगे.

साथ ही सोशल मीडिया, औनलाइन एजूकेशन और रिमोट हेल्थ सेक्टर से मिलने वाली सर्विस के नजरिए से भी इस की उपयोगिता काफी महत्त्वपूर्ण साबित होगी.

उठते सवाल और आशंकाएं

मेटावर्स की दुनिया में सब से बड़ा सवाल तो डाटा लीक होने का उठता है. फेसबुक जैसे ऐप्स के पास यूजर का काफी डेटा जमा हो जाता है.

कहा तो यही जाता है कि इस का कोई गलत इस्तेमाल नहीं होगा लेकिन मेटावर्स में बहुत ज्यादा डेटा जमा होने के आसार हैं. यहां भी दावा किया जा रहा है कि डेटा लीक नहीं हो सकेगा. फिर भी इसे ले कर चिंताएं जताई जाने लगी हैं.

अगर डेटा लीक न भी हो तो भी लोगों का जो डेटा जमा होगा, उस का क्या किया जाएगा? क्या कोई एक कंपनी उस का मालिकाना हक रखेगी या यूजर के पास यह हक होगा कि अपने डेटा को लौक कर सके.

लोगों की प्राइवेसी में किसी दूसरे का दखल रोका जा सकेगा या नहीं, यह भी देखना होगा. वैसे तो इंटरनेट पर किसी को भी ब्लौक करने का औप्शन होता है लेकिन मेटावर्स में नई तकनीकी आएंगी तो क्या किसी को रोका जा सकेगा, इस पर भी शक जताया जा रहा है.

यह भी स्पष्ट नहीं हो रहा है कि मेटावर्स में किसी को ट्रोल किया जाए या कोई क्राइम होगा तो कानून उस से कैसे निपटेगा?

सवाल यह भी उठ रहा है कि मेटावर्स की उस काल्पनिक दुनिया का कंट्रोल किस के हाथ में होगा? अब तक दुनिया के तमाम देशों में डिजिटल करेंसी को मान्यता नहीं मिली है, जबकि मेटावर्स में डिजिटल करेंसी से शौपिंग होगी.

ऐसे में धोखाधड़ी होगी तो कहां गुहार लगाई जाएगी. पूरी मेटावर्स इकानौमी आखिर काम कैसे करेगी? इसी तरह के अनेक सवाल लोगों के जेहन में उठ रहे हैं. इस तरह की समस्याओं से निपटने के संबंध में पहले ही विचार करना जरूरी होगा.

प्राइम मिनिस्टर का टि्वटर हैक करने का मतलब !

शनिवार 11-12 दिसंबर  की आधी रात प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी के ट्विटर को हैक कर लिया गया. बहुत ही कम समय के लिए हैकर्स ने नरेंद्र मोदी के ट्विटर को हैक करके अपना संदेश प्रसारित कर दिया. इस रिपोर्ट में हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्यूटर हैकर्स पक्ष की बात करेंगे मगर इसके साथ ही यह सवाल खड़ा हो गया है कि अगरचे लंबे समय तक देश और दुनिया के वीवीआइपी पर्सनालिटी के ट्विटर को हैक करके क्या कोई भविष्य में पूरी दुनिया में बवंडर ला सकता है, क्या यह संभव नहीं है?

फेंटेसी की दुनिया में अनेक किस्से कहानियां सच और ख्वाब बन करके जन चर्चा का विषय बनते रहे हैं. और आगे चलकर के कभी-कभी वह सच भी हो जाते हैं. ऐसा अनेक बार हुआ है.

ऐसे में यह बहुत कम समय का हमारे प्रधानमंत्री का ट्विटर हैक, हमें सोचने विचारने के लिए बहुत बड़ा विषय दे गया है कि आने वाले समय में सरकार और हमें सावधान रहना होगा. क्योंकि यह एक ऐसा माध्यम है जो मिनटों में संदेश पूरी दुनिया में फैला देता है और एक गलत संदेश लाखों करोड़ों लोगों की जान माल पर खतरा बन सकता है.

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अब जैसा कि होता है ट्विटर ने अपनी सफाई दे दी है प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्विटर पर अपनी बात को रख दिया है मगर यह बात सब जान चुके हैं कि सोशल मीडिया का यह संजाल जितना हमें जानकारी देकर खुश तबियत करता है, उतना ही हमारी गर्दन भी अपने ही हाथों में रखता है.

नरेंद्र मोदी के टि्वटर हैक के पहले भी बड़ी हस्तियों के सोशल हैंडल को हैक किया जा चुका है उल्लेखनीय है कि माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर एकसाथ ढेर सारे बड़े सिलेब्स का अकाउंट हैक होने का मामला सामने आया था- ऐपल, एलन मस्क, जेफ बेजोस, जॉन बिडेन, बराक ओबामा, उबर और माइक्रोसॉफ्ट को-फाउंडर बिल गेट्स तक के अकाउंट्स हैक हो गए थे .

पाठकों को याद दिला‌ दें कि हैकर्स ने कई अकाउंट्स से ट्वीट किए था और कहा कि उनकी ओर से भेजे गए बिटकॉइन्स को डबल कर दिया जाएगा.

अकाउंट्स की मदद से सोशल मीडिया यूजर्स से क्रिप्टोकरंसी बिटकॉइन भी उन्हें भेजने को कहा था हैक किए गए अकाउंट्स एक के बाद एक बढ़ते गए और ऐपल, एलन मस्क, जेफ बेजोस के बाद जॉन बिडेन, बराक ओबामा, उबर, माइक्रोसॉफ्ट को-फाउंडर बिल गेट्स और कई बिटकॉइन स्पेशलिटी फर्म्स के अकाउंट हैक हो गए.

सारी दुनिया जानती है की सोशल मीडिया को कभी भी कोई हैकर अपने हिसाब से कुछ समय के लिए हैंडिल कर सकता है मगर इस परिप्रेक्ष्य में कल्पना की जा सकती है कि अगर यह लंबे समय तक हुआ तो क्या होगा. क्या लंबे समय तक अगर कोई फितरती दिमाग कंट्रोल कर लेता है तो सारी दुनिया अस्त व्यस्त नहीं हो जाएगी उसका जवाबदेह कौन होगा.

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यह ट्यूटर हैक एक नमूना हो तो!

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी का ट्विटर हैंडल हैक करने के बाद हैकर्स ने दो ट्वीट किए. पहला ट्वीट- शनिवार देर रात 2 बजकर 11 मिनट पर किया गया. जिसमें कहा गया,- ‘भारत ने आधिकारिक रूप से बिटक्वॉइन को कानूनी मान्यता दे दी है. सरकार ने 500 BTC खरीदे हैं और आम लोगों में बांट रही है. जल्दी करें भारत… भविष्य आज आया है!’

दो मिनट तक यह ट्वीट पीएम मोदी के ट्विटर हैंडल पर रहा. उसके बाद इसे डिलीट कर दिया गया.

इसके 3 मिनट बाद यानी 2 बजकर 14 मिनट पर पीएम मोदी के हैक किए गए ट्विटर हैडल से दूसरा ट्वीट किया गया, जिसमें पहले वाले ट्वीट की बातों को ही दोहराया गया. फिर कुछ ही मिनटों में उसे भी डिलीट कर दिया गया. हालांकि तब तक ट्विटर पर पीएम मोदी के ट्विटर अकाउंट से किए गए इन ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट लेकर वायरल हो रहे थे.

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हम इस विशेष रिपोर्ट में सिर्फ यह कहना चाहते हैं की विज्ञान के दो पक्ष होते हैं अच्छा भी और बुरा भी. अच्छा तो सारी दुनिया आज देख रही है और इसमें बुराई भी देख रही है. मगर सोशल मीडिया को अगर कभी किसी ने लंबे समय तक अपने कब्जे में ले लिया और उसमें अपने फितरती दिमाग से संदेश प्रसारित करने लगे तो क्या होगा.

Review: ‘वेल्ले’- समय व पैसे की बर्बादी

रेटिंग: एक़ स्टार

निर्माताः अभिषेक नामा, सुनील एस सैनी, नंदिनी शर्मा, गणेश एम सिंह, जोहरी टेलर

निर्देशकः देवेन मुंजाल

लेखकः पंकज मट्टा

कलाकारः करण देओल, आन्या सिंह, अभय देओल, मौनी रॉय, जाकिर हुसैन, विशेष तिवारी,  सावंत सिंह प्रेमी, राजेश कुमार, महेश ठाकुर,  अनुराग अरोड़ा व अन्य

अवधिः दो घंटा चार मिनट

धर्मंन्द्र के पोते और सनी देओल के बेटे करण देओल असफल फिल्म ‘‘पल पल दिल के पास’’ के बाद अब हास्य फिल्म ‘‘वेल्ल’े ’ में नजर आ रहे हैं,जो कि 2019 में प्रदर्शित तेलगू फिल्म ‘‘ब्रोचेवारेवारूरा’’ का हिंदी रीमेक है. वेले का मतलब हाते है ऐसे लोग जिनके पास र्काइे काम नहीं होता. फिल्म ‘वेले’ में भी करण देओल अपने अभिनय का जलवा दिखाने में बुरी तरह से असफल रहे हैं.

काश करण देओल धड़ाधड़ फिल्में करने की बनिस्बत अपनी अभिनय प्रतिभा को निखारने पर वक्त देते.

कहानीः

लेखक व निर्देशक ऋषि सिंह  अभय देआ देओल अपनी नई कहानी पर फिल्म बनाने के लिए निर्माता की तलाश के साथ ही अपनी इस फिल्म में मशहूर अदाकारा रोहिणी, मौनी रॉय को हीरोइन लेना चाहते है. ऋषि सिंह अभिनेत्री रोहिणी को कहानी सुनाने बैठते हैं. वह कहानी सुना रहे है.

यह कहानी 12 वीं कई वर्षां  से पढ़ रहे तीन दोस्तों- राहुल- करण देओल, राम्बो- सावंत सिंह प्रेमी और राजू- विशेष तिवारी के गैंग की है. यह वही गैंग है यानी कि ‘वेल्ले’  जो सिर्फ मस्ती करते हैं. इनकी जिंदगी का मकसद रिलैक्स करने के साथ मौज मस्ती करना है. यह तीनों जिस स्कूल में पढ़ते हैं, वहां के सख्त प्रिंसिपल राधेश्याम 1की बेटी रिया को अपने गैंग का हिस्सा बनाकर अपने गैंग को ‘आर 4’ नाम देते हैं.वास्तव मं े रिया की मां नही है.उसे पढ़ने की बजाय नृत्य का शौक है.पर रिया के पिता नृत्य के खिलाफ हैं.राहुल अपने दोस्त रितेषदीप की मदद से नृत्य का परषिक्षण दिलाने की बात करता है. पर पैसा नही है. तब रिया एक योजना बनाती है. जिसमें राहुल,रम्बो व राजू फंस जाते हैं. रिया की येाजना के अनुरूप यह लोग रिया का अपहरण कर रिया के पिता से आठ लाख रूपए वसूलते है. फिर रिया घर से भागकर राहुल के मित्र रितेषदीप की मदद से नृत्य की कोचिंग क्लासेस में प्रवेश लेती है.

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इसी बीच एक गैंग रिया का अपहरण कर रिया के कहने पर राहुल को फाने कर दस लाख रूपए की मांग करता है अन्यथा वह रिया को बेच देने की धमकी देता है.उधर ऋषि सिंह के पिता अस्पताल पहुंच गए हैं, जिनके ऑपरेशन के लिए दस लाख रूपए चाहिए.

रोहिणी उसे दस लाख रूपए देने के साथ ही ऋषि सिंह के साथ अस्पताल रवाना होती है.रास्ते में राहुल व उसके साथी यह दस लाख रूपए छीन लते हैं. फिर कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं. अंततः राधेश्याम का अपनी बेटी रिया के प्रति प ्रेम उमड़ता है.राहुल ,ऋषि सिंह व राधेश्याम को पैसे वापस दे देत.सभी सुधर जाते हैं.

लेखन व निर्दशनः

इस फिल्म की सबसे बड़ी कमजारे कड़ी इसकी कथा व पटकथा तथा कथा कथन शैली है. फिल्मकार एक बात भूल जाते है कि दक्षिण भारत की कहानी को उत्तर भारत के दशर्क के लिए ज्यो का त्यों नही परासे जाना चाहिए. इसके लिए पटकथा में आवशयकक बदलाव करने के लिए मेहनत की जानी चाहिए, जो कि लेखक व निर्देशको ने नहीं किया. इतना ही नही किरदारों के लिए कलाकारो का चयन भी गलत रहा. फिल्म के निर्देशक दवे ने मुंजाल बुरी तरह से मात खा गए हैं.

फिल्म देखते समय कई जगह ऐसा लगता है कि निर्देशक ने कलाकारो से कह दिया कि कुछ करते रहा. हिसाब से करना है,यह बताना भलू गए या वह स्वयं नहीं समझ पाए.कई दृष्यों का दोहराव भी अजीबो गरीब तरीके से किया गया है. बतौर निर्देशक देवेन मुंजाल फिल्म के किरदारों और फिल्म के मूल संघर्ष को स्थापित करने में विफल रहे हैं. एडीटर ने भी अपने काम को सही ढंग से अंजाम नही दिया.

अभिनयः

राहुल के किरदार में करण दोओल ने बुरी तरह से निराश किया है. उनके चेहरे पर न भाव है और न ही किरदार के अनुरूप उनकी बौडी लैंगवेज है. करण देओल को अपनी संवाद अदायगी पर भी मेहनत करने की जरुरत है. महज सुंदर हाने से अभिनय नही आ जाता. करण देओल की बनिस्बत उनके दास्त बने विशेष तिवारी व सावंत सिंह ज्यादा बेहतर नजर आए है.

ऋषि सिंह के किरदार में अभय देओल के लिए करने को कुछ खास रहा नही. जो कुछ दृश्य उनके हिस्से आए, वह लेखक व निर्देशक की महे रबानी से उभर नही पाए. अभिनेत्री रोहिणी के किरदार में मौनी रॉय भी निराश करती है.

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मौनी रॉय खुद को सदैव सूर्खियां में रखने के लिए उल जलूल खबरें फैलाने में अपना वक्त व पैसा बर्बाद करने के अभिनय को निखारने पर ध्यान देती. मौनी रॉय की बनिस्बत रिया के किरदार में आन्या सिंह बाजी मार ले जाती है. आन्या सिंह कई दृश्यों में लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचन में सफल रही है. राजेश कुमार जैसे प्रतिभाशली व अनुभवी कलाकार ने यह फिल्म क्यों की,  यह समझ से परे है.

नि:शुल्क राशन वितरण महाअभियान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहां राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत निःशुल्क राशन वितरण महाअभियान का शुभारम्भ किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने 10 लाभार्थियों कोे निःशुल्क राशन वितरित किया. ज्ञातव्य है कि इस महाअभियान के तहत प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को 80,000 राशन की दुकानों के माध्यम से माह दिसम्बर, 2021 से माह मार्च, 2022 तक निःशुल्क राशन वितरित किया जाएगा.

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रेरणा से प्रदेश सरकार आज निःशुल्क खाद्यान्न वितरण की एक बड़ी योजना को आगे बढ़ा रही है. प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2020 में माह अप्रैल से नवम्बर तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से एक बड़ा अभियान चलाया था. इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 15 करोड़ जरूरतमंदों सहित देश के 80 करोड़ पात्र लोग लाभान्वित हुए. वर्ष 2020 में राज्य सरकार ने भी अप्रैल, मई, जून, तीन माह निःशुल्क खाद्यान्न वितरित किया था, जिससे प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को इस सुविधा का लाभ प्राप्त हुआ.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2021 में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी केन्द्र व प्रदेश सरकार ने निःशुल्क खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था को प्रारम्भ किया. मई, 2021 (रामनवमी) से दीपावली तक केन्द्र सरकार ने 07 माह तक निःशुल्क खाद्यान्न वितरण की योजना लागू की थी. प्रदेश सरकार ने भी अन्त्योदय तथा पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को माह जून, जुलाई तथा अगस्त, 2021 तक निःशुल्क खाद्यान्न वितरित किया. उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार से डबल खाद्यान्न का लाभ प्रत्येक जरूरतमन्द को प्राप्त हो इस दृष्टि से आज इस वृहद खाद्यान्न वितरण योजना का पुनः शुभारम्भ कर दीपावली से होली तक आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना महामारी सदी की सबसे बड़ी महामारी है. दुनिया के अनेक देश इस महामारी की तीसरी लहर की चपेट में हंै. निरन्तर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि थोड़ी सी भी लापरवाही एक बड़ी आबादी को इस महामारी की चपेट मंे ला सकती है. केन्द्र व राज्य सरकार थर्ड वेव से मुकाबला करने के लिए तैयार हैं. प्रधानमंत्री जी ने जीवन और जीविका को बचाने के लिए मुफ्त टेस्ट, उपचार तथा खाद्यान्न उपलब्ध कराने के साथ-साथ निःशुल्क वैक्सीन की भी सुविधा उपलब्ध करायी है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमारे शास्त्र कहते हैं कि भूखे को रोटी देना पुण्य का कार्य है. यदि शासन की योजना से जोड़कर उस पुण्य में हम भागीदार बनते हैं तो यह महापुण्य का कार्य होगा. खाद्यान्न वितरण का कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है. वर्ष 2017 से पहले यह खाद्यान्न, खाद्यान्न माफियाओं के हवाले चला जाता था और यह खाद्यान्न उत्तर प्रदेश से किसी दूसरे देश चला जाता था. गरीब देखता रह जाता था, लेकिन उसको खाद्यान्न नहीं मिल पाता था. प्रदेश में वर्ष 2005-06 का खाद्यान्न घोटाला हो या उस दौरान सैकड़ों लोगों की हुई भूख से मौत, यह किसी से छुपा नहीं है. यह सिलसिला लगातार वर्ष 2015-16 तक चलता रहा.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें सत्ता में थीं, तो गरीबों का खाद्यान्न हड़प जाती थीं. गरीबों को शौचालय, मकान, बच्चों को छात्रवृत्ति तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं यथा बिजली, पानी, साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं मिली थी. उन्हें किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पाता था. स्वास्थ्य केन्द्रों में बदहाल स्थिति थी. विकास कार्याें में पेशेवर माफियाओं व अपराधियों का हस्तक्षेप रहता था, जिससे सामान्य व्यक्ति परेशान रहता था.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही सभी नागरिकों को योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के मिल रहा है. उन्होंने कहा कि इसी बीच के कालखण्ड में दाल व तेल के दाम बढ़ने प्रारम्भ हो गये तो सरकार ने तय किया यदि बाजार में महंगाई होगी तो राज्य सरकार अपनी तरफ से छूट देने का कार्य करेगी. उसी का परिणाम है कि खाद्यान्न के साथ-साथ निःशुल्क खाद्य तेल व दाल प्रदेश सरकार उपलब्ध करा रही है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज जो योजना लागू की रही है, उसमें प्रत्येक अन्त्योदय कार्डधारक को निःशुल्क अनुमन्य खाद्यान्न के साथ ही 01 लीटर खाद्य तेल, 01 किलो नमक, 01 किलो दाल व 01 किलो चीनी उपलब्ध करायी जा रही है. इसी प्रकार प्रत्येक पात्र गृहस्थी कार्डधारक को अनुमन्य खाद्यान्न के साथ ही निःशुल्क 01 लीटर खाद्य तेल, 01 किलो नमक तथा 01 किलो दाल उपलब्ध करायी जा रही है. केन्द्र तथा राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली यह सहायता एक सम्बल है ताकि कोरोना महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जा सके.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना महामारी से सरकार लगातार जूझ रही है. भारत से अधिक सम्पन्न तमाम देशों में स्वास्थ्य की बेहतरीन सुविधाएं हैं, लेकिन कोरोना प्रबन्धन में सबसे अच्छा कार्य भारत का, और भारत में सबसे अच्छा कार्य उत्तर प्रदेश का रहा. 25 करोड़ की आबादी में कोरोना छूमंतर. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोरोना के प्रति लापरवाही बरती जाए, बल्कि हमें और सावधानी बरतनी होगी.

प्रधानमंत्री जी के मंत्र ‘फ्री में वैक्सीन, सबको वैक्सीन’ को हम जीवन में उतारंे. उन्होंने अपील की कि जिन लोगांे ने कोविड वैक्सीन नहीं ली है, वह वैक्सीन अवश्य लगवाएं. कोरोना की थर्ड वेव में यह देखने को मिल रहा है कि जिसने वैक्सीन की डोज प्राप्त की है उस पर वायरस का प्रभाव बहुत कम है. वैक्सीन एक सुरक्षा कवच है तथा कोरोना के बचाव का सबसे अच्छा माध्यम भी है.

अनुज की जिंदगी में होगी मालविका की एंट्री, अब क्या करेगी अनुपमा

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’  (Anupamaa)  की कहानी में बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि अनुपमा अनुज के साथ अपने रिश्ते को दोस्ती का नाम देती थी लेकिन अब वह अनुज से प्यार करने लगी है. वनराज ने उसे अहसास दिलाया कि वह भी अनुज के लिए वही महसूस करती है, जो अनुज 26 सालों से उसके लिए महसूस कर रहा है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि वनराज अनुपमा को आगे बढ़ने के लिए कहेगा. वह ये भी कहेगा कि वो अनुपमा के लायक था ही नहीं. इसी बीच अनुज को होश आ जाएगा. अनुज के होश आते ही अनुपमा उससे दिल की बात कहने की कोशिश करेगी लेकिन अनुपमा नहीं कह पाएगी.

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अनुज की हालत में सुधार होगा. और वह हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो जाएगा. तो अनुज के साथ अनुपमा उसके घर जाएगी. तो दूसरी तरफ अनुज के पास बार बार मालविका के फोन आएगा. अनुपमा घर पहुंचते ही अनुज की नजर उतारेगी. बापूजी अनुपमा को अनुज के साथ रुकने की सलाह देंगे. पारितोष भी अनुपमा को सपोर्ट करेगा.

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अनुपमा अनुज के घर जाने के लिए तैयार हो जाएगी. अनुपमा फैसला करेगी कि इस बार वह अपने दिल की बात अनुज को बता देगी. वह अनुज के ख्यालों में खोई रहेगी.

 

अनुज जीके से माल्विका के बारे में बात करेगा. अनुज कहेगा कि मालविका इंडिया में है और वह मेरी रिस्पॉन्सबिलिटी है. तो दूसरी तरफ वह ये सोचकर परेशान हो जाएगा कि अनुपमा को माल्विका के बारे में कुछ नहीं बताया है. शो में अब ये देखना होगा कि जब मालविका अनुज के घर आएगी तो वह अनुपमा के साथ कैसे बिहेव करती है.

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