प्रदेश सरकार ‘हर घर जल योजना’ पर तेजी से कार्य कर रही

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आज जनपद बलरामपुर में 9800 करोड़ रुपये की लागत की ‘सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना’ को राष्ट्र को समर्पित किया. इस अवसर पर आयोजित एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री जी ने कहा कि ‘सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना’ का पूरा होना इस बात का सबूत है जब सोच ईमानदार होती है तो काम दमदार होता है. सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का काम चार दशक पहले शुरू हुआ था. तब इस परियोजना की लागत 100 करोड़ रुपये से भी कम थी. आज यह परियोजना लगभग 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करने के बाद पूरी हुई है. जनता की मेहनत के एक-एक रुपये का सही समय पर, सही काम के लिए उपयोग होना चाहिए. उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं प्रदेश सरकार की प्राथमिकता योजनाओं को समय पर पूरा करना है. सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का जो कार्य दशकों में पूरा नहीं हो पाया, उसे 05 वर्ष के अन्दर पूरा किया जा चुका है. यह डबल इंजन की सरकार के काम की रफ्तार है.

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वाेपरि रखते हुए देश को 21वीं सदी में नई ऊंचाइयांे पर ले जाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किये जा रहे हैं. देश के विकास के लिए जरूरी है कि पानी की कमी कभी बाधा न बने. देश की नदियों के जल का सदुपयोग हो और किसानों के खेत तक पानी पहुंचे. बहुप्रतीक्षित ‘केन बेतवा लिंक परियोजना’ को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है. 45 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना से बुन्देलखण्ड के किसानों को लाभ प्राप्त होगा. ‘केन बेतवा लिंक परियोजना’ बुन्देलखण्ड को जल संकट से मुक्ति दिलाने में एक बड़ी भूमिका निभायेगी.

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार कोई सरकार छोटे किसानों की सुध ले रही है. केन्द्र एवं प्रदेश सरकार 02 हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसानों को भी सरकारी सुविधाओं से जोड़ रही हैं. बीज से लेकर बाजार तक, खेत से लेकर खलिहान तक उनकी हर तरह से मदद की जा रही है. सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना से बाढ़ जैसी समस्याओं का समाधान निकालने में काफी हद तक मदद मिलेगी. छोटे किसानों के लिए यह सिंचाई परियोजना लाभप्रद साबित होगी. उन्होंने कहा कि इस परियोजना से लाखों किसानों को पानी प्राप्त होगा और उनका आशीर्वाद मिलेगा जो कि जीवन भर कार्य करने की ऊर्जा देगा. बलरामपुर की मसूर दाल का स्वाद देश भर में फैल रहा है. उन्होंने किसानों से अपील की कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ अधिक आय देने वाली फसल का भी उत्पादन करें. उन्होंने कहा की सरयू नहर परियोजना से सिंचाई के बाद किसान खाद्यान्न के साथ-साथ फल फूल, मत्स्य पालन तथा सब्जी उत्पादन से अपनी आय बढ़ा सकेंगे. उन्होंने कहा कि देश में शहद का निर्यात बढ़ कर लगभग दोगुना हो गया है. इससे किसानों की 700 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई हुई है.

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा किसानों को प्रतिवर्ष 06 हजार रुपये की किसान सम्मान निधि प्रदान की जा रही है. साथ ही, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि किसान की आय बढ़ाने का एक विकल्प बायोफ्यूल भी है. उत्तर प्रदेश गन्ने से एथेनाल बनाने के कार्य में आगे बढ़ रहा है. विगत 01 वर्ष में उत्तर प्रदेश द्वारा 12,000 करोड़ रुपए का एथेनॉल दूसरे प्रदेशों को बेचा गया है. जनपद गोण्डा में एथेनाॅल का एक बड़ा प्लाण्ट बन रहा है. जनपद बदायूं एवं जनपद गोरखपुर में बायोफ्यूल के बड़े काॅम्पलेक्स बनाये जा रहे हैं. पहले गन्ना किसानों को समय पर उनके गन्ने का भुगतान नहीं मिल पाता था. प्रदेश सरकार द्वारा नई चीनी मिलों को खोलने के साथ-साथ किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान भी कराया गया है.

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि आगामी 16 दिसंबर से प्राकृतिक खेती करने के संबंध में एक वृहद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसके द्वारा कम से कम लागत में अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी. उन्होंने किसानों से अपील की कि वह इस कार्यक्रम से जुड़ें और नई तकनीकों को  सीखें. उन्होंने कहा कि जनपद बलरामपुर में सामान्य किसानों के साथ-साथ थारू जनजाति के लोगों को भी विकास का लाभ मिल रहा है. पहले सभी प्रकार की योजनाओं का लाभ केवल पुरुषों को मिलता था. प्रधानमंत्री आवास एवं अन्य योजनाओं में अब महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है.

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रदेश में कानून का राज स्थापित किया है. अपराधियों एवं माफियाओं में भय व्याप्त है. अब जमीन पर कोई अवैध कब्जा नहीं कर सकता है. अपराधियों, माफियाओं एवं गुण्डों पर जुर्माना लग रहा है और उनकी अवैध सम्पत्ति पर सरकारी बुलडोजर चल रह है. अब अपराधी उत्तर प्रदेश में गलत काम करने से पहले सौ बार सोचते हंै और यदि उसने गलती की है तो वह जेल में दुबका नजर आता है. प्रदेश सरकार माफियाराज की सफाई में जुटी है, तभी तो उत्तर प्रदेश के लोग कहते हैं कि फर्क साफ है. राज्य सरकार गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी और समाज के सभी वर्ग को सशक्त करने में जुटी है. उन्होंने कहा कि कोरोना कालखण्ड में जीवन एवं जीविका दोनों को बचाया गया. ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत मिल रहे मुफ्त राशन को होली से आगे तक बढ़ा दिया गया है.

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि जनपद बलरामपुर की धरती ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपना अमूल्य योगदान दिया है. बलरामपुर की जनता ने नानाजी देशमुख एवं श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के रूप में दो-दो भारत रत्नों को गढ़ा एवं संवारा है. उन्होंने 08 दिसम्बर, 2021 को हेलीकॉप्टर हादसे में दिवंगत हुए सी0डी0एस0 जनरल बिपिन रावत तथा अन्य सैन्य कर्मियों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि प्रदेश के सपूत ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का जीवन बचाने के लिए डॉक्टर जी जान से लगे हुए हैं.

इससे पूर्व, प्रधानमंत्री जी ने सरयू नहर परियोजना पर आधारित माॅडल एवं चित्रों का अवलोकन कर परियोजना के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की.

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन एवं केन्द्र सरकार के सहयोग से पूर्वी उत्तर प्रदेश निरन्तर विकास पथ पर अग्रसर है. 40 वर्षाें से लम्बित सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को प्रदेश सरकार द्वारा मात्र साढ़े चार वर्षाें में पूरा करके आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर कमलों से जनता को समर्पित किया गया है. इस परियोजना से जनपद बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोण्डा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर तथा महराजगंज के 6,227 ग्रामों के 30 लाख से अधिक किसान लाभान्वित होंगे.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के सपने ‘नदी जोड़ो परियोजना’ को पूरा करती है. सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना घाघरा नदी को सरयू नदी से, सरयू नदी को राप्ती नदी से, राप्ती नदी को बाण गंगा नदी से एवं बाण गंगा को नदी रोहिन नदी से क्रमशः जोड़ती है. इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के इन 09 जनपदों की लगभग 15 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी. इस परियोजना से इस क्षेत्र के किसान सब्जी एवं बागवानी जैसे अन्य कृषिगत कार्य कर पायेंगे. कृषि उत्पादन में वृद्धि के कारण किसानों के खेत सोना उगलने का कार्य करेंगे.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना में घाघरा एवं सरयू नदी जहां मिलती है, वहां पर पहला बैराज बनाया गया है. यह बैराज नेपाल की सीमा से मात्र 07 किलो मीटर की दूरी पर है. इस परियोजना से यह क्षेत्र प्राकृतिक सम्पदा से भरपूर होगा. यहां पर पर्यटन की अनेक संभावनाएं विकसित होंगी. किसानों की आमदनी बढ़ेगी, नौजवानों को रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे, जिससे यहां का नौजवान सक्षम एवं सामथ्र्यवान बनेगा.

प्रधानमंत्री जी ने कुछ दिन पहले ही गोरखपुर में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से स्थापित हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लि0 (खाद कारखाना) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एवं रीजनल मेडिकल रिसर्च सेन्टर का लोकार्पण किया है. गोरखपुर खाद कारखाना 31 वर्ष पहले बन्द हो चुका था, जो अब पहले की तुलना में चार गुना ज्यादा क्षमता के साथ कार्य कर रहा है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में मेडिकल काॅलेजों की एक लम्बी श्रृंखला से हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी हुई है. उन्होंने कहा कि रीजनल मेडिकल रिसर्च सेन्टर के स्थापित होने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस क्षेत्र में दिमागी बुखार, कालाजार, मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया जैसी बीमारियों की जांच में सुविधा प्राप्त होगी. जिससे इन रोगों का इलाज हो सकेगा.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में आधारभूत अवसंरचना को लगातार विकसित किया जा रहा है. यह हमारा सौभाग्य है कि विकसित हो रही आधारभूत अवसंरचना का लोकार्पण एवं शिलान्यास प्रधानमंत्री जी के कर कमलों से हो रहा है. प्रधानमंत्री जी के कर कमलों से कुशीनगर अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट लोगों की सेवा के लिए तत्पर है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने जनपद सिद्धार्थनगर से 09 राजकीय मेडिकल काॅलेज प्रदेश की जनता को समर्पित किये हैं.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने अन्नदाता किसानों के सम्मान की रक्षा एवं उनके जीवन में खुशहाली लाने के लिए वर्ष 2015 में ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ प्रारम्भ की थी. ‘मोर क्राप, पर ड्राॅप’ की विकासोन्मुखी सोच इस सिंचाई योजना के माध्यम से मूर्त रूप ले रही है. किसान की खुशहाली उसके खेत की खुशहाली से जुड़ी हुई है. किसानों की आय को वर्ष 2022 तक दोगुना करने के लिए देश में लगभग 100 सिंचाई परियोजनाओं को  लक्षित किया गया और इन सिंचाई परियोजनाओं को समयबद्धढंग से आगे बढ़ाने का कार्य प्रारम्भ हुआ. उन्होंने कहा कि इस योजना में प्रदेश की जिन 18 परियोजनाओं का चयन किया गया था, उनमें से 17 परियोजनााएं पूरी हो गयी हैं. इन 17 सिंचाई परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश की 22 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा प्राप्त हो रही है. प्रदेश में मध्य गंगा नहर परियोजना का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है, जो तीन जनपदों को जोड़ती है.

इस अवसर पर केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में जो विकास कार्य किये गये हैं, उनसे लोगों के जीवन में सकारात्मक एवं गुणात्मक परिवर्तन आया है. हमारा देश कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाला देश है. किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए उनके खेत तक पानी पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में देश में 70 हजार करोड़ रुपये की 99 सिंचाई परियोजनाओं को चिन्हित किया गया था. जिनमें 63 परियोजनाएं पूरी हो गयी हैं या पूरी होने की कगार पर हैं.

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने अपने कर कमलों से उत्तर प्रदेश की बाण सागर परियोजना, अर्जुन सहायक परियोजना का शुभारम्भ किया है और आज सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना प्रदेशवासियों को समर्पित की जा रही है. उन्होंने कहा कि सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना से 25 लाख टन अतिरिक्त खाद्यान्न का उत्पादन होगा. देश में हर घर तक पानी पहुंचाने का कार्य चल रहा है. वर्ष 2024 तक हर घर तक पीने का पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. प्रदेश सरकार ‘हर घर जल योजना’ पर तेजी से कार्य कर रही है. प्रदेश के 01 लाख घरांे तक पीने का पानी पहुंचाने का कार्य प्रगति पर है. उन्होंने कहा कि लोगों को अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए जल संरक्षण एवं प्रबन्धन के कार्याें के साथ ही पानी की उपयोगिता को भी समझना होगा.

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य, जल शक्ति मंत्री डाॅ0 महेन्द्र सिंह, विधायी एवं न्याय मंत्री श्री बृजेश पाठक, समाज कल्याण मंत्री श्री रमापति शास्त्री, जल शक्ति

(राज्य मंत्री) श्री बलदेव सिंह ओलख, प्रान्तीय रक्षक दल एवं नागरिक सुरक्षा

(राज्य मंत्री) श्री पल्टूराम सहित जनप्रतिनिधिगण एवं शासन-प्रशासन के अधिकारीगण उपस्थित थे.

अंकिता लोखंडे को गोद में उठाकर नाचे विक्की जैन, देखें Video

टीवी की मशहूर एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande) इन दिनों अपनी शादी को लेकर खूब सुर्खियां बटोर रही हैं. वह  अपने ब्वॉयफ्रेंड विक्की जैन (Vicky Jain) के साथ 14 दिसंबर को सात फेरे लेंगी.

अंकिता की मेहंदी सेरेमनी की फोटोज और वीडियो वायरल हो रही है. अब एक्ट्रेस के मेहंदी की रस्म की एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि विक्की जैन और अंकिता लोखंडे जमकर डांस कर रहे हैं.

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विक्की जैन और अंकिता की एक वीडियो सबसे ज्यादा पसंद की जा रही है. इस वीडियो में विक्की जैन एक्ट्रेस को गोद में उठा कर डांस कर रहे हैं.

 

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अंकिता लोखंडे ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए प्यारा सा कैप्शन दिया है, जो प्यार हम दोनों शेयर करते हैं उसने हमारी मेहंदी को खूबसूरत और यादगार बना दिया.

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अंकिता लोखंडे इन तस्वीरों और वीडियो में बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही हैं. तो वहीं विक्की जैन भी हैंडसम नजर आ रहे हैं. दोनों की जोड़ी को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं.

 

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आपको बता दें कि शादी से पहले अंकिता को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था. उन्हें मुंबई के सबअर्बन अस्पताल में एडमिट कराया गया था. रिपोर्ट के अनुसार अंकिता लोखंडे का लेग स्प्रेन हो गया था जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया. हालांकि डॉक्टर ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया था और इसके साथ ही उन्हें बेड रेस्ट की सलाह दी गई थी.

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Manohar Kahaniya: कातिल घरजमाई- भाग 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

गुजरात के जानेमाने शहर बड़ौदा के न्यू समा रोड पर स्थित चंदन पार्क सोसायटी के मकान नंबर सी-48 की तीसरी मंजिल पर तेजस पटेल अपनी पत्नी शोभना और 6 साल की बेटी काव्या के साथ रहता था.

10 अक्तूबर दिन रविवार की रात को तेजस और शोभना की बेटी काव्या मामी के साथ गरबा खेल कर हंसीखुशी से ऊपर आई तो रात के साढ़े 11 बज रहे थे. ऊपर आते समय काव्या ने दूसरी मंजिल पर रहने वाले अपने मामा जितेंद्र बारिया को गुडनाइट कहा था. उस समय वह बहुत खुश थी.

बेटी के आने पर तेजस ने पहले से ला कर फ्रिज में रखी आइसक्रीम निकाली और एकएक आइसक्रीम पत्नी और बेटी को दी तथा एक आइसक्रीम खुद खाई. आइसक्रीम खा कर तीनों सोने के लिए लेट गए.

रात डेढ़ बजे के आसपास तेजस ने दूसरी मंजिल पर रहने वाले अपने साले जितेंद्र बारिया से आ कर बताया कि पता नहीं क्यों शोभना और काव्या उठ नहीं रही हैं? यह सुन कर जितेंद्र पत्नी के साथ तुरंत ऊपर पहुंचा. बहन और भांजी की हालत देख कर जितेंद्र घबरा गया.

पत्नी और बहनोई की मदद से वह बहन और भांजी को पास के ही एक प्राइवेट अस्पताल में ले गया, जहां डाक्टर ने दोनों को देखते ही कहा, ‘‘इन की तो मौत हो चुकी है. इन का अब कुछ नहीं किया जा सकता.’’

इतना सुनते ही जितेंद्र रोने लगा. उस के साथ उस की पत्नी भी रोने लगी थी. पर तेजस की आंखों से एक बूंद भी आंसू नहीं गिरा. वह इस तरह मुंह लटकाए खड़ा था, जैसे वह वहां संवेदना व्यक्त करने आया हो और मरने वालों से उस का कोई खास संबंध न हो.

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मांबेटी की मौत डाक्टर को संदेहास्पद लगी थी, इसलिए डाक्टर ने इस बात की सूचना क्षेत्रीय थाना समा पुलिस को दे दी थी.

उस समय रात के यही कोई ढाई बज रहे थे. फिर भी बात 2 लोगों की संदेहास्पद मौत की थी, इसलिए थानाप्रभारी इंसपेक्टर एन.एच. ब्रह्मभट्ट 2 सिपाहियों के साथ कुछ ही देर में अस्पताल पहुंच गए. डाक्टर की मौजूदगी में उन्होंने लाशों का निरीक्षण किया.

लाशों को देख कर ही लग रहा था कि इन्हें गला दबा कर मारा गया है या फिर इन्हें जहर दिया गया है. पर जहर पीने या खाने से मुंह से झाग निकलता है, जबकि इन दोनों के मुंह से झाग बिलकुल नहीं निकला. उन के होंठ एकदम सूखे हुए थे.

इस के अलावा जहर खा कर मरने वाले के शरीर से जहर की गंध भी आती है. लेकिन यहां ऐसा भी कुछ नहीं था. निरीक्षण के दौरान थानाप्रभारी ने ही नहीं, किसी ने भी इस तरह की कोई गंध नहीं महसूस की थी. हां, शोभना के गले पर नाखून की खरोंच का निशान जरूर साफ दिखाई दे रहा था.

इस के अलावा उस ने गले में जो चेन पहनी थी, उस की रगड़ का भी निशान था. इस से डाक्टर और थानाप्रभारी को लगा कि कहीं गला दबा कर तो इन दोनों की हत्या नहीं की गई?

पर जब इस बारे में मृतका शोभना के पति तेजस से पूछताछ की गई तो उस ने साफ मना कर दिया. उस ने कहा, ‘‘साहब, मैं अपनी पत्नी और बेटी की हत्या क्यों करूंगा? हम सब तो रात को प्रेम से साथ खाना खा कर रात साढ़े 11 बजे के करीब आइसक्रीम खा कर सोए थे. रात में मैं डेढ़ बजे उठा तो इन लोगों को देख कर मुझे कुछ गड़बड़ लगी. मैं ने शोभना को जगाना चाहा, तो वह नहीं उठी. मैं घबरा गया. नीचे जा कर साले को बुला लाया. उस के बाद हम सभी दोनों को अस्पताल ले आए.’’

‘‘तुम जब रात में उठे तो तुम्हें क्या गड़बड़ लगी, जो तुम पत्नी को जगाने लगे?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘सर, बेटी के सो जाने के बाद मैं उठ कर पत्नी के बगल जा कर लेट गया था. मैं ने उसे जगाना चाहा, पर वह हिली भी नहीं. तब मुझे पता चला कि यह तो बेहोश है. उस के बाद मैं नीचे भागा.’’ तेजस ने बताया.

‘‘यह सब कैसे हुआ?’’ थानाप्रभारी ब्रह्मभट्ट ने अगला सवाल किया.

‘‘सर, मैं क्या बताऊं. मैं भी तो सो रहा था,’’ तेजस ने कहा.

इस के बाद थानाप्रभारी एन.एच. ब्रह्मभट्ट ने तेजस के साले जितेंद्र बारिया से पूछा, ‘‘तुम्हें क्या लगता है, इन की हत्या की गई है या इन्होंने आत्महत्या की है? क्योंकि देखने से ही लग रहा है कि ये स्वाभाविक मौतें नहीं हैं.’’

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जितेंद्र ने रोते हुए कहा, ‘‘सर, मुझे पूरा विश्वास है कि मेरी बहन ने आत्महत्या नहीं की है. शाम को दोनों बहुत खुश थीं. फिर आत्महत्या करने की कोई वजह भी तो होनी चाहिए. मेरी बहन को कोई तकलीफ नहीं थी, जो वह आत्महत्या करती.’’

‘‘इस का मतलब इन की हत्या की गई है? खैर, इस का भी पता हम लगा ही लेंगे. पहले दोनों लाशों का पोस्टमार्टम करा लें, उस से साफ हो जाएगा कि इन की मौत कैसे हुई है?’’ थानाप्रभारी ने कहा.

अगले भाग में पढ़ें- जहर से मौत की हुई पुष्टि

क्या आपकी दोस्ती खतरे में है?

एक रिश्ता है जो हम अपने व्यवहार से बनाते हैं, वह है दोस्ती. दोस्ती एकमात्र ऐसा रिश्ता है जो हम खुद जोड़ते हैं. दोस्त हम स्वयं चुनते हैं. लेकिन दोस्त की इस दोस्ती से कब व कैसे कट कर लिया जाए. आप भी जानिए.

संभव है कि किन्हीं कारणों से आप की दोस्ती अब पहले जैसी नहीं रह गई हो. आप के दोस्त के बरताव में आप कुछ बदलाव महसूस कर सकते हैं या आप में उस की दिलचस्पी अब न रही हो या कम हो गई हो. कुछ संकेतों से आप पता लगा सकते हैं कि अब यह दोस्ती ज्यादा दिन निभने वाली नहीं है और बेहतर है कि इस दोस्ती को भूल जाएं.

दोस्ती एकतरफा रह गई है : दोस्ती नौर्मल हो, प्लुटोनिक या रोमांटिक, किसी तरह की भी दोस्ती एकतरफा नहीं निभ सकती है. अगर आप का पार्टनर आप की दोस्ती का उत्तर नहीं दे रहा है तो इस का मतलब है कि उस की दिलचस्पी आप में नहीं रही. इस दोस्त को गुड बाय कहें.

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आप के राज को राज न रखता हो : आप अपने फ्रैंड पर पूरा भरोसा कर उस से सभी बातें शेयर करते हों और उस से यह अपेक्षा करते हों कि वह आप के राज को किसी और को नहीं बताए पर यदि वह आप के राज को राज न रहने दे तो ऐसी दोस्ती से तोबा करें.

विश्वासघात : विश्वास मित्रता का स्तंभ है. कभी दोस्त की छोटीमोटी विश्वासघात की घटनाओं से आप आहत हो सकते हैं पर उसे विश्वास प्राप्त करने का एक और मौका दे सकते हैं. पर यदि वह जानबूझ कर चोरी करे, आप के निकटतम संबंधी या प्रेमी या प्रेमिका के मन में आप के विरुद्ध झूठी बातों से घृणा पैदा करे तो समझ लें अब और नहीं, बस, बहुत हुआ.

लंबी जुदाई : कभी आप घनिष्ठ मित्र रहे होंगे. ट्रांसफर या किसी अन्य कारण से आप का दोस्त बहुत दूर चला गया है और संभव है कि आप दोनों में पहले वाली समानता न रही हो. आप के प्रयास के बावजूद आप को समुचित उत्तर न मिले तो समझ लें अब वह आप में दिलचस्पी नहीं रखता है. उसे अलविदा कहने का समय आ गया है.

अगर वह आप के न कहने से आक्रामक हो : कभी ऐसा भी मौका आ सकता है जब आप उस की किसी बात या मांग से सहमत न हों और उसे ठुकरा दें. जैसे किसी झूठे मुकदमे में आप को अपने पक्ष से सहमत होने को कहे या झूठी गवाही देने को कहे और आप न कह दें. ऐसे में अगर वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आक्रामक रुख अपनाता है तो समझ लें कि इस दोस्ती से ब्रेक का समय आ गया है.

आपसी भावनाओं का सम्मान : मित्रता बनी रहे. इस के लिए जरूरी है कि दोनों भावनाओं का सम्मान करें. अगर आप की भावनाओं का सम्मान दूसरा मित्र न करे या आप की भावनाओं का निरादर कर लोगों के बीच उस का मजाक बनाए या अवांछित सीन पैदा करे तो समझ लें कि अब यह दोस्ती निभने वाली नहीं है.

जब आप की चिंता की अनदेखी करे : दोस्ती में जरूरी है कि दोनों एकदूसरे की चिंताओं या समस्याओं के प्रति संवेदनशील हों और उन के समाधान में अपने पार्टनर की सहायता करें. अगर आप की मित्रता में ऐसी बात नहीं है तो फिर यह अच्छा संकेत नहीं है.

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आप को नीचा दिखाने की कोशिश न हो : कभी अन्य लोगों के बीच अगर आप का दोस्त आप को नीचा दिखा कर आप में हीनभावना पैदा करे या करने की कोशिश करे तो यह दोस्त दोस्ती के लायक नहीं रहा.

दोस्त से मिल कर कहीं आप नाखुश तो नहीं हैं : अकसर आप दोस्तों से मिल कर खुश होते हैं. अगर किसी दोस्त से मिलने के बाद आप प्रसन्न न हों और बारबार दुखी हो कर लौटते हैं, तो कट इट आउट.

आंदोलन: एक राकेश टिकैत से हारी सरकार

आजादी के लिए किए गए आंदोलन से ले कर बाकी आंदोलनों तक किसान मुख्य धुरी रहा, पर उसे कभी श्रेय नहीं दिया गया. 3 कृषि कानूनों को ले कर पहली बार किसानों की ताकत को स्वीकार किया गया है.

इस से पहले किसानों को तरहतरह से बदनाम करने की जुगत की गई. राकेश टिकैत को सोशल मीडिया पर ‘राकेश डकैत’ लिखा गया. पर एक साल तक लंबी लड़ाई लड़ कर किसानों ने साबित कर दिया कि सही तरह से सरकार का विरोध हो तो कोई भी लड़ाई जीती जा सकती है. ममता बनर्जी की तरह ही राकेश टिकैत ने भाजपा के ‘राजसूय यज्ञ’ को कामयाब होने से रोकने का काम किया.

कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर जब किसान नेता राकेश टिकैत ने आंदोलन शुरू किया, तो उस समय उन को सब से कमजोर नेता माना जा रहा था. यह पंजाब और हरियाणा के किसानों की लड़ाई मानी जा रही थी. उत्तर प्रदेश में इस को केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक ही सीमित माना जा रहा था.

पर, जैसेजैसे किसान आंदोलन आगे बढ़ता गया, वैसेवैसे इस पर किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत की पकड़ बढ़ती गई. 26 जनवरी, 2021 में जब किसानों ने ट्रैक्टर रैली की और लालकिले पर  झंडा उतारा गया, उस के बाद लगा कि किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा. पर इस घटना के बाद से किसान आंदोलन की कमान पूरी तरह से राकेश टिकैत के हाथ आ गई.

राकेश टिकैत के खिलाफ सरकार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता लामबंद होने लगे. इस से दुखी हो कर राकेश टिकैत की आंखों से आंसू निकल गए. राकेश टिकैत ने खुद को मजबूत करते हुए किसान आंदोलन को जारी रखने का ऐलान किया.

वहां से किसान आंदोलन की कमान राकेश टिकैत के पास आ गई. ऐसा लगा, जैसे पश्चिम उत्तर प्रदेश और हरियाणा के जाट किसानों ने इस को अपनी बेइज्जती माना.

धीरेधीरे यह लड़ाई उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों में फैलने लगी. भारतीय किसान यूनियन ने दिल्ली के बौर्डर के साथसाथ लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश के किसानों को एकजुट करना शुरू किया. अब उत्तर प्रदेश किसान आंदोलन का अगुआ बन गया था.

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आलोचनाएं दरकिनार

52 साल के राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन नामक संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. वे भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष रह चुके महेंद्र सिंह टिकैत के दूसरे बेटे हैं.

साल 2020 में कृषि कानून के विरोध में गाजीपुर बौर्डर पर धरनाप्रदर्शन को ले कर राकेश टिकैत चर्चा में आए. उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से एमए की उपाधि हासिल की और साल 1992 में दिल्ली पुलिस में नौकरी की, लेकिन 1993-94 में लालकिले पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़ दी और भारतीय किसान यूनियन के सदस्य के रूप में विरोध में शामिल हो गए.

इस के बाद से ही राकेश टिकैत की किसान राजनीति तेजी से आगे बढ़ने लगी. उन्होंने साल 2018 में हरिद्वार (उत्तराखंड) से ले कर दिल्ली तक ‘किसान क्रांति’ यात्रा निकाली.

राकेश टिकैत की बढ़ती लोकप्रियता से डरे लोगों ने कभी उन को कांग्रेस का ‘दलाल’ कहा, तो कभी भाजपा का ‘दलाल’. कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई तेज करने के बाद भाजपा की आईटी सैल ने राकेश टिकैत का नया नामकरण ‘राकेश डकैत’ कर दिया.

उन के घरपरिवार और बच्चों के साथसाथ उन की जमीनजायदाद पर उंगली उठाई गई. पर राकेश टिकैत अपनी आलोचना से कभी डरे नहीं और कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई जारी रखी. जब केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का काम किया तो भी राकेश टिकैत ने कहा, ‘जब तक एमएसपी की गारंटी नहीं दी जाएगी, तब तक आंदोलन वापस नहीं होगा.’

राकेश टिकैत सम झदार नेता हैं. वे खेतीबारी से जुड़े हैं. उन्हें पता है कि किसान की उपज का लाभ बिचौलिए खा रहे हैं. किसान की पहली परेशानी खेती की उपज का सही दाम नहीं मिलना है. अगर एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी सरकार दे तो ही किसानों को सही मूल्य मिल सकेगा.

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किसान सरकार से सही कीमत के लिए लड़ सकता है. अगर मंडी निजी क्षेत्रों में चली गई, तो किसान वहां अपनी लड़ाई नहीं लड़ पाएगा. ऐसे में एमएसपी पर गांरटी सब से जरूरी है.

किसानों से जुड़ी जनता

राकेश टिकैत नेता नहीं, बल्कि एक किसान हैं. यही वजह है कि वे दूसरे नेताओं जैसे दांवपेंच के माहिर नहीं हैं. वे 2 बार चुनाव लड़े और दोनों ही बार हार गए. इस हार को ले कर उन की आलोचना होती है और उन्हें कभी देश के किसानों का नेता नहीं माना गया.

इस के बाद भी राकेश टिकैत ने कभी इन बातों की परवाह नहीं की. वे किसानों के हित में अपनी आवाज को बुलंद करते रहे. कृषि कानूनों के विरोध में चले आंदोलन में भी उन्हें वजनदार नेता नहीं माना गया था, पर धीरेधीरे वे किसान आंदोलन की धुरी हो गए.

यही वजह है कि किसान आंदोलन में राकेश टिकैत ने किसी भी सियासी पार्टी के नेताओं को आगे नहीं आने दिया. इस में उन्होंने केवल किसानों को ही जोड़ा और आंदोलन को मजबूत बनाया.

साल 2022 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव है. किसान आंदोलन के चलते किसान सरकार से नाराज चल रहे थे. केंद्र सरकार की ‘किसान सम्मान निधि’ से भी किसान खुश नहीं थे, जिस की वजह से किसान और गांव के रहने वालों ने उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों में भाजपा को हराने का काम किया.

राकेश टिकैत की दूसरी बड़ी कामयाबी यह थी कि जब वे जहांजहां जाते थे, तो कृषि कानूनों के साथसाथ बढ़ रही महंगाई, बेरोजगारी पर बात करते थे. वे आंदोलन कर रहे लोगों

का समर्थन करते थे, खुल कर और पूरी बेबाकी से सरकार के खिलाफ बोलते थे, जिस की वजह से किसानों और गांव के लोगों के साथसाथ आम शहरी लोगों का भी समर्थन उन्हें मिलने लगा था.

राकेश टिकैत आम लोगों को किसानों की परेशानियों से जोड़ने लगे, जिस में कृषि कानूनों के अलावा महंगाई, खाद, डीजल, पैट्रोल और छुट्टा जानवरों की परेशानियां थीं. मीडिया में जितना कोई नेता नहीं छप रहा था, उस से कहीं ज्यादा जगह किसान आंदोलन को मिलने लगी.

सरकार की परेशानी की वजह यह थी कि किसान के मुद्दे सुर्खियां बन रह रहे थे. किसान आंदोलन को तमाम कोशिशों के बाद भी खालिस्तानी या देश विरोधी साबित नहीं किया जा सका. इतना ही नहीं, यह किसान आंदोलन धर्म के मुद्दे को भी प्रभावित कर रहा था. इस से यह डर लगने लगा था कि यह एक साल चल गया और इस से ज्यादा चला तो धर्म की राजनीति पिटने लगेगी. लोग धर्म से ज्यादा किसान राजनीति की बात करने लगे थे.

झुके भी पर हटे नहीं

किसान आंदोलन की राह में 2 बड़े मोड़ आए थे, जब लगा कि अब किसान आंदोलन खत्म करने का रास्ता सरकार को मिल गया. राकेश टिकैत ऐसे मुद्दों पर  झुकते दिखे, पर आंदोलन से पीछे नहीं हटे. लालकिले की घटना के बाद सारे किसान नेता आंदोलन छोड़ कर पीछे हट गए, इस के बाद भी राकेश टिकैत डटे रहे.

दूसरी घटना उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में घटी, जहां 4 किसानों को कार से कुचल कर मार दिया गया. राकेश टिकैत ने  झुक कर सरकार और प्रशासन की बात को माना, लेकिन यह साफ कर दिया कि किसान आंदोलन चलता रहेगा.

लोगों को लग रहा था कि सरकार इस की आड़ ले कर किसान आंदोलन को तोड़ देगी. राकेश टिकैत की कामयाबी यह थी कि उन्होंने किसान आंदोलन को हिंसक नहीं होने दिया.

यही वजह है कि किसानों की ताकत के आगे हिंदुत्व की ताकत कमजोर पड़ने लगी. पौराणिक सोच रखने वाले नेताओं को लगा कि किसान आंदोलन कहीं हिंदुत्व के मुद्दे को कमजोर न कर दे. कोई अलग धारा न बन जाए. इस से बेहतर है कि कृषि कानूनों को खत्म किया जाए.

साल 2022 में पंजाब और उत्तर प्रदेश के चुनावों को बहाना बना कर इस काम को किया गया, जिस से जनता को यह चुनावी स्टंट ही सम झ आता रहे. धर्म की हार की बात सामने ही न आ सके.

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राकेश टिकैत ने किसान आंदोलन में मंदिरों की भूमिका पर सवाल उठाए थे. ऐसे में किसान और धर्म आमनेसामने न आ जाएं और धर्म को नुकसान न हो, इस कारण कृषि कानूनों को वापस ले लिया गया. इस का श्रेय किसानों की एकजुटता को जाता है, जो अपने बलबूते लड़ाई लड़ते रहे और जीत हासिल की.

किसान की एक नजर खेती पर और दूसरी राजनीति पर – राकेश टिकैत, किसान नेता कृषि कानूनों के वापस होने के बाद पहली बार राकेश टिकैत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आए और इको गार्डन धरना स्थल पहुंच कर अपनी राय रखी. कुछ सवालों के जवाब उन्होंने अपने ही अंदाज में दिए :

कृषि कानूनों के वापस होने के बाद किसान आंदोलन को क्या खत्म माना जा रहा है?

किसान आंदोलन खत्म नहीं हुआ है. हमारा आंदोलन चलता रहेगा. यह आंदोलन अब पूरे देश में चल रहा है. किसानों ने तय किया है कि जब तक एमएसपी पर सरकार कानून बना कर गांरटी नहीं देगी, तब तक यह आंदोलन चलता रहेगा.

सारे देश के किसानों को एमएसपी के जरीए खेती की उपज की सही कीमत दिलानी है. एमएसपी का फायदा पूरे देश के किसानों को मिलना चाहिए. पहले सरकार यह गांरटी दे.

क्या कृषि कानूनों के वापस लेने के पीछे उत्तर प्रदेश और पंजाब के विधानसभा चुनाव हैं?

किसान देश की सब से बड़ी ताकत है. कृषि कानूनों को वापस ले कर सरकार ने केवल एक मांग मानी है. किसानों के लिए जरूरी है कि उन की दूसरी मांगें भी मानी जाएं. किसान आंदोलन में सैकड़ों किसान शहीद हुए हैं. हम अपने किसान भाइयों के बलिदान को बेकार नहीं जाने देंगे.

किसान के लिए खाद, बीज, सिंचाई, डीजल, पैट्रोल की कीमतें और खेती की उपज की सही कीमत दी जाए, जिस से उन्हें राहत मिले. छुट्टा जानवरों की परेशानी से नजात दिलाई जाए.

इस आंदोलन को तकरीबन एक साल हो गया है. आप ने किसानों को कैसे इस आंदोलन से जोड़ कर रखा?

सरकार किसानों की जमीन बड़ी कंपनियों को देने की तैयारी में थी. यह बात किसान सम झ गया था. किसान कभी भी अपने सम्मान का सौदा नहीं कर सकता. कंपनी का राज आने से किसान ही नहीं, बल्कि दूसरे लोग भी परेशान होते. जनता की रोटी बड़े लोगों की तिजोरी में कैद हो जाती. यह बात किसान सम झ गए हैं. इस के साथ में शहरी लोग भी सम झ गए हैं, तभी पूरे देश में किसान आंदोलन को समर्थन मिलने लगा.

सरकार लोगों को लड़ाने और तोड़ने का काम करती है. इन लोगों ने आंदोलन में शामिल हुए सिख समाज के लोगों को खालिस्तानी बता दिया और मुसलमानों को पाकिस्तानी. उत्तर प्रदेश के किसानों को केवल जाट बता दिया.

इन्होंने उत्तर प्रदेश के भीतर हिंदूमुसलिम दंगे कराए. ये लोग हरियाणा के अंदर गए तो वहां जाट और गैरजाट की राजनीति की. गुजरात के भीतर पटेल और गैरपटेल की राजनीति की.

इस तरह की घटनाओं के पीछे किस तरह के लोगों की सोच आप को दिखती है?

हम तो किसानों को यही सलाह देते हैं कि आरएसएस के लोग बेहद खतरनाक हैं. इन से बच कर रहो. बहुत से लोग सोचते हैं कि उन का बेटा पढ़लिख कर कलक्टर बनेगा. अब ऐसा नहीं होगा.

सरकार ने पिछले दरवाजे से बिना परीक्षा के ही आईएएस बनाने की तैयारी कर ली है. बिना परीक्षा के ही लगभग 40 लोगों को आईएएस बना दिया गया है, अभी 300 के करीब और बनेंगे.

किसानों को सजग रहना चाहिए. अपनी एक आंख दिल्ली पर तो दूसरी आंख खेती पर रखें. उत्तर प्रदेश सरकार गुंडागर्दी कर रही है. जिला पंचायत के चुनाव में सब ने देखा है. अब विधानसभा चुनाव में भी यही हो सकता है.

सुलझती जिंदगियां- भाग 2: आखिर क्या हुआ था रागिनी के साथ?

‘‘ऐसा कौन सा दुख है तुझे, जिस के बोझ तले तू पगला गई है? उच्च पदस्थ इंजीनियर पति, प्रतिष्ठित परिवार और क्या चाहिए जिंदगी से तुझे?’’ सीमा बोली.

‘‘चल छोड़, तू नहीं समझ पाएगी,’’ रागिनी ने ताना दिया.

‘‘मैं, मैं नहीं समझूंगी?’’ अचानक ही उत्तेजित हो उठी सीमा, ‘‘तू कितना समझ पाई है मुझे, क्या जानती है मेरे बारे में… आज 10 वर्ष के बाद हम मिले हैं. इन 10 सालों का मेरा लेखाजोखा है क्या तेरे पास? जो इतने आराम से कह रही है? क्या मुझे कोई गम नहीं, कोई घाव नहीं मिला इस जिंदगी में? फिर भी मैं तेरे सामने मजबूती से खड़ी हूं, वर्तमान में जीती हूं, भविष्य के सपने भी बुनती हूं और अतीत से सबक भी सीख चुकी हूं, मगर अतीत में उलझी नहीं रहती. अतीत के कुछ अवांछित पलों को दुस्वप्न समझ कर भूल चुकी हूं. तेरी तरह गांठ बांध कर नहीं बैठी हूं,’’ सीमा तमतमा उठी.

‘‘क्या तू भी किसी की वासना का शिकार बन चुकी है?’’ रागिनी बोल पड़ी.

‘‘तू भी क्या मतलब? क्या तेरे साथ भी यह दुर्घटना हुई है?’’ सीमा चौंक पड़ी.

‘‘हां, वही पल मेरा पीछा नहीं छोड़ते. फिल्म, सीरियल, अखबार में छपी खबर, सब मुझे उन पलों में पहुंचा देते हैं. मुझे रोना आने लगता है, दिल बैठने लगता है. न भूख लगती है न प्यास, मन करता है या तो उस का कत्ल कर दूं या खुद मर जाऊं. बस दवा का ही तो सहारा है, दवा ले कर सोई रहती हूं. कोई आए, कोई जाए मेरी बला से. मेरे साथ मेरी सास रहती हैं. वही मेड के साथ मिल कर घर संभाले रहती हैं और मुझे कोसती रहती हैं कि मेरे हीरे से बेटे को धोखे से ब्याह लिया. एक से एक रिश्ते आए, मगर हम तो तेरी शक्ल से धोखा खा गए. बीमारू लड़की पल्ले पड़ गई. मैं क्या करूं,’’ आंखें छलछला उठीं रागिनी की.

‘‘तू अकेली नहीं है इस दुख से गुजरने वाली. इस विवाहस्थल में तेरीमेरी जैसी न जाने कितनी और भी होंगी, पर वे दवा के सहारे जिंदा नहीं हैं, बल्कि उसे एक दुर्घटना मान कर आगे बढ़ गई हैं. अच्छा चल, तू ही बता तू रोड पर राइट साइड चल रही है और कोई रौंग साइड से आ कर तुम्हें ठोकर मार कर चला जाता है, तो गलत तो वही हुआ न? ऐसे ही, जिन्होंने दुष्कर्म कर हमारे विश्वास की धज्जियां उड़ाईं, दोषी वे हैं. हम तो निर्दोष हैं, मासूम हैं और पवित्र हैं. अपराधी वे हैं, फिर हम घुटघुट कर क्यों जीएं, यह एहसास तो हमें उन्हें हर पल कराना चाहिए, ताकि वे बाकी की जिंदगी घुटघुट कर जीएं.’’ सीमा ने आत्मविश्वास से कहा.

‘‘क्या तू ने दिलाया यह एहसास उसे?’’ रागिनी ने पूछा.

‘‘मेरा तो बौयफ्रैंड ही धोखेबाज निकला. आज से 10 साल पहले जब हम पापा के दिल्ली ट्रांसफर के कारण लखनऊ छोड़ कर चले गए थे, तब वहां नया कालेज, नया माहौल पा कर मैं कितना खुश थी. हां तेरी जैसी बचपन की सहेली से बिछुड़ने का दुख तो बहुत था, मगर मैं दिल्ली की चकाचौंध में कहीं खो गई थी. जल्दी ही मैं ने क्लास में अपनी धाक जमा ली…

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‘‘धु्रव मेरा सहपाठी, जो हमेशा प्रथम आता था, दूसरे नंबर पर चला गया. 10वीं कक्षा में मैं ने ही टौप किया तो धु्रव जलभुन कर राख हो गया, मगर बाहरी तौर पर उस ने मुझ से आगे बढ़ कर मित्रता का हाथ मिलाया और मैं ने खुशीखुशी स्वीकार भी कर लिया. 12वीं कक्षा की प्रीबोर्ड परीक्षा में भी मैं ने ही टौप किया तो वह और परेशान हो उठा. मगर उस ने इसे जाहिर नहीं होने दिया.

‘‘इसी खुशी में ट्रीट का प्रस्ताव जब धु्रव ने रखा तो मैं मना न कर सकी. मना भी क्यों करती? 2 सालों से लगातार हम साथ कालेज, कोचिंग और न जाने कितने फ्रैंड्स की बर्थडे पार्टीज अटैंड करते आए थे. फर्क यह था कि हर बार कोई न कोई कौमन फ्रैंड साथ रहता था. मगर इस बार हम दोनों ही थे और धु्रव पर अविश्वास करने का कोई प्रश्न ही नहीं था.

‘‘पहले हम एक रेस्तरां में लंच के लिए गए. फिर वह अपने घर ले गया. घर में किसी को भी न देख जब मैं ने पूछा कि तुम ने तो कहा था मम्मी मुझ से मिलना चाहती हैं. मगर यहां तो कोई भी नहीं है? तो उस ने जवाब दिया कि शायद पड़ोस में गई होंगी. तुम बैठो मैं बुला लाता हूं और फिर मुझे फ्रिज में रखी कोल्डड्रिंक पकड़ा कर बाहर निकल गया.

‘‘मैं सोफे पर बैठ कर ड्रिंक पीतेपीते उस का इंतजार करती रही, मुझे नींद आने लगी तो मैं वहीं सोफे पर लुढ़क गई. जब नींद खुली तो अपने को अस्तव्यस्त पाया. धु्रव नशे में धुत पड़ा बड़बड़ा रहा था कि मुझे हराना चाहती थी. मैं ने आज तुझे हरा दिया. अब मुझे समझ आया कि धु्रव ने मेरे नारीत्व को ललकारा है. मैं ने भी आव देखा न ताव, पास पड़ी हाकी उठा कर उस के कोमल अंग पर दे मारी. वह बिलबिला कर जमीन पर लोटने लगा, मैं ने चीख कर कहा कि अब दिखाना मर्दानगी अपनी और फिर घर लौट आई. बोर्ड की परीक्षा सिर पर थी. ऐसे में अपनी पूरी ताकत तैयारी में झोंक दी. फलतया बोर्ड परीक्षा में भी मैं टौपर बनी.

‘‘धु्रव का परिवार शहर छोड़ कर जा चुका था. उन्हें अपने बेटे की करतूत पता चल गई थी,’’ कह कर सीमा पल भर को रुकी और फिर पास से गुजरते बैरे को बुला कर पानी का गिलास ले कर एक सांस में ही खाली कर गई.

फिर आगे बोली, ‘‘मां को तो बहुत बाद में मैं ने उस दुर्घटना के विषय में बताया था.

वे भी यही बोली थीं कि भूल जा ये सब. इन का कोई मतलब नहीं. कौमार्य, शारीरिक पवित्रता, वर्जिन इन भारी भरकम शब्दों को अपने ऊपर हावी न होने देना… तू अब भी वैसी ही मासूम और निश्चल है जैसी जन्म के समय थी… मां के ये शब्द मेरे लिए अमृत के समान थे. उस के बाद मैं ने पीछे मुड़ कर देखना छोड़ दिया,’’ सीमा ने अपनी बात समाप्त की.

‘‘मैं तो अपने अतीत से भाग भी नहीं सकती. वह शख्स तो मेरे मायके का पड़ोसी और पिताजी का मित्र है, इसीलिए मेरा तो मायके जाने का ही मन नहीं करता. यहीं दिल्ली में पड़ी रहती हूं,’’ रागिनी उदास स्वर में बोली.

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‘‘कौन वे टौफी अंकल? वे ऐसा कैसे कर सकते हैं? मुझे अच्छी तरह याद है वे सफेद कुरतापाजामा पहने हमेशा बैडमिंटन गेम के बीच में कूद कर गेम्स के रूल्स सिखाने लगते थे और फि र खुश होने पर अपनी जेब से टौफी, चौकलेट निकाल कर ईनाम भी देते थे. हम लोगों ने तो उन का नाम टौफी अंकल रखा था,’’ सीमा ने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा.

‘‘वह एक मुखौटा था उन का अपनी घिनौनी हरकतें छिपाने का. तुझे याद है वे हमारे गालों पर चिकोटी भी काट लेते थे गलती करने पर और कभीकभी अपने हाथों में हमारे हाथ को दबा कर रैकेट चलाने का अभ्यास भी कराने लगते थे. उन सब हरकतों को कोई दूर से देखता भी होगा तो यही सोचता होगा कि वे बच्चों से कितना प्यार करते हैं. मगर हकीकत तो यह थी कि वे जाल बिछा रहे थे, जिस में से तू तो उड़ कर उन की पहुंच से दूर हो गई पर रह गई मैं.

भोजपुरी स्क्रीन की सबसे हिट जोड़ी फिर हुए साथ, लुक्स और सिजलिंग केमिस्ट्री बढ़ा रही पारा

बॉलीवुड रैपर बादशाह की साल की ग्लोबल हिट पानी पानी का भोजपुरी वर्जन सारेगामा हम भोजपुरी द्वारा बनारस के होटल ताज में रिलीज कर दिया गया है. भव्य कार्यक्रम के दौरान ट्रेडिंग स्टार खेसारीलाल यादव,प्रसिद्ध एक्ट्रेस अक्षरा सिंह,सारेगामा के सीएमडी विक्रम मेहरा, गायिका ऋणी चंद्रा मौजूद रहें. ग्लोबल हिट पानी पानी का भोजपुरी वर्जन रिलीज होते ही खूब वायरल हो हरा है. गाने में भोजपुरी ट्रेंडिंग स्टार खेसारीलाल यादव और सुपर हॉट अक्षरा सिंह नज़र आ रही हैं वहीं अपने ट्रेडमार्क स्वैग के साथ बादशाह  भी इस गाने में भोजपुरी रैप करते नज़र आ रहे हैं. जबकि गाने की फीमेल वोकल्स रिनी चंद्रा ने दी हैं, जिसे आस्था गिल ने हिंदी ओरिजिनल में गाया था.

पानी पानी का भोजपुरी संस्करण आज सारेगामा हम भोजपुरी के यूट्यूब चैनल पे रिलीज किया गया है साथ ही सभी प्रमुख संगीत स्ट्रीमिंग ऐप पर भी उपलब्ध  है.  यह जोड़ी कभी ऑन और ऑफ-स्क्रीन काफी लोकप्रिय जोड़ी थी. एक लंबे अंतराल के बाद, भोजपुरी पानी पानी वीडियो में अब फिर से दिखाई दे रही, जो अपने विभिन्न लुक्स और सिज़लिंग केमिस्ट्री में पारा को बढ़ा रही है.

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अक्षरा और खेसारी बेहतरीन लुक में  सिग्नेचर पानी पानी हुक स्टेप कर रहे हैं. खेसारी और अक्षरा के बीच की डायनामिक केमिस्ट्री खूब धमाल मचा रही है और फैंस इसे खूब पसंद भी कर रहे हैं.

वहीं, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खेसारीलाल यादव ने कहा कि पानी पानी साल का सबसे बड़ा हिंदी गाना है और इसे भोजपुरी में फिर से तैयार करने का मौका मिलना, बेहतरीन अनुभव है. जब सारेगामा हम भोजपुरी ने मुझसे भोजपुरी वर्जन करने के लिए संपर्क किया तो मैंने एक दम हाँ कर दिया. इसे और खास बना दिया गया कि मुझे वीडियो में अक्षरा सिंह के साथ मूव्स करने को मिले और बादशाह भाई ने भोजपुरी में रैप किया है. मुझे लगता है कि यह भोजपुरी संगीत का सबसे बड़ा गाना होने जा रहा है.

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सिजलिंग अक्षरा कहती हैं मूल पानी पानी के सिग्नेचर हुक स्टेप का मिलान करना एक बड़ी उपलब्धि थी. वीडियो को बहुत बड़े पैमाने और ग्लैमर के साथ शूट किया गया है और मुझे खेसारी के साथ लंबे अंतराल के बाद काम करना अच्छा लगा. यह मेरे प्रशंसकों के लिए साल के अंत में एक उपहार होने जा रहा है – यह हर पार्टी प्लेलिस्ट का हिस्सा होगा.

मौके पर सारेगामा हम भोजपुरी के प्रबंध निदेशक विक्रम ने कहा कि यह गाना ओरिजन गाने से भी बड़ा होने वाला है. हम गाने का प्रमोशन सिर्फ यूपी बिहार ही नहीं, बल्कि ईस्ट और साउथ में भी करने वाले हैं. इससे अक्षरा औऱ खेसारी का भी कद बड़ा होगा. साथ ही गाने के बाद हम फिल्में भी बनाने वाले हैं, ताकि भोजपुरी की बेहतरी हो. उन्होंने कहा कि इस गाने के लिए देश के नम्बर वन सिंगर बादशाह की सहमति ही नहीं, बल्कि इसमें उनका रुचि लेकर योगदान देना भोजपुरी के लिए शानदार है.

गाना यहां देखा जा सकता है:

Anupmaa करेगी अनुज से प्यार का इजहार, कामयाब होगी वनराज की चाल?

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupamaa) की कहानी में इन दिनों लगातार ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि अनुज की हालत गंभीर है और अनुपमा पूरी तरह टूट चुकी है. ऐसे में वनराज अनुपमा को अहसास दिलाता है कि वह भी अनुज से प्यार करने लगी है. उसे अनुज की तरफ आगे बढ़ना चाहिए. वनराज अनुपमा को काफी समझाता है, वह कहता है कि एक मां को भी प्यार करने का हक है. उसे भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए. शो के आने वाले एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए ट्रैक के बारे में.

शो में आप देखेंगे कि वनराज अपने घर पर फोन करेगा और अनुज के साथ हुए हादसे के बारे में बताएग. ये सुनते ही शाह परिवार हॉस्पिटल पहुंच जाएंगे.तो दूसरी तरफ अनुपमा अपने आस-पास अनुज को महसूस करेगी. अनुपमा को अपने चारों तरफ अनुज नजर आएगा. उसे प्यार का अहसास होगा.  इसी बीच बा खुद को दोषी मानेगी तो वही पारितोष भी सारी बातें भुलाकर अनुपमा को सपोर्ट करेगा.

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अनुपमा को कुछ भी अच्छा नहीं लगेगा, उसे बार बार अनुज का ही ख्याल आएगा. अनुपमा समझ जाएगी कि वह भी अनुज से प्यार करने लगी है. खबरों के अनुसार अनुपमा अनुज से आई लव यू कहेगी.

 

खबर ये भी आ रही है वनराज बिजनेस में सफलता पाने के लिए अनुपमा का इस्तेमाल कर रहा है. इसलिए वह अनुज-अनुपमा को एक करना चाहता है. बताया जा रहा है कि पारितोष भी वनराज का साथ दे रहा. दोनों अनुपमा को सपोर्ट कर रहे हैं.

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शो में आप देखेंगे कि आईसीयू में अनुज की हालत अचानक खराब हो जाएगी. अनुज की तबियत बिगड़ते ही जीके के सब्र का बांध टूट जाएगा. जीके फूट- फूटकर रोएंगे. तो दूसरी तरफ काव्या वनराज की हरकतों को देखकर समझ जाएगी कि वनराज कोई चाल चल रहा है. काव्या किंजल और नंदिनी को बताएगी लेकिन उसे सब इग्नोर करेंगे.

अब शो में ये देखना होगा कि क्या वनराज अनुपमा को किसी मकसद में कामयाब होने के लिए इस्तेमाल कर रहा है या उसका साथ दे रहा है.

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बिग बॉस 15 (Bigg Boss 15) फेम राखी सावंत इन दिनों सुर्खियां बटोर रही हैं. हाल ही में उनके पति ने भी शो में एंट्री की. बिग बॉस 15 में राखी सावंत के पति का शानदार स्वागत किया गया. लेकिन अब रितेश से जुड़ा एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. आइए बताते हैं क्या है पूरा मामला.

सोशल मीडिया पर राखी सावंत के पति रितेश की कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं. इसमें रितेश अपनी पहली पत्नी और बच्चे के साथ नजर आ रहा है. जबकि एक दूसरी तस्वीर रितेश और उनकी पहली पत्नी की शादी की हैं.

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इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि रितेश अपनी पत्नी के साथ स्टेज पर  बैठे हुए हैं और दूसरी फोटो में  पत्नी और  बच्चे के साथ दिखाई दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि रितेश की पहली शादी साल 2014 में हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रितेश की पहली पत्नी का नाम स्निग्धा प्रिया बताया जा रहा है. खबरों के मुताबिक रितेश की पहली पत्नी ने बताया है कि दोनों अलग रहते हैं लेकिन तलाक नहीं हुआ है.

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आपको बता दें कि राखी सावंत ने बिग बॉस 14 में इस बात का खुलासा किया था कि उनकी शादी अवैध है. राखी ने ये भी बताया था कि रितेश पहले से शादीशुदा है और एक बच्चे के पिता है.

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बताया जा रहा है कि रितेश की पहली पत्नी स्निग्धा प्रिया ने दावा किया है कि रितेश आर्थिक तौर पर मजबूत नहीं है. इसलिए उन्होंने ताखी सावंत के साथ रिश्ता बनाया है.

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