‘भाभी जी घर पर हैं ‘ फेम ‘नेहा पेंडसे’ को रिप्लेस करेंगी टीवी की ये हसीना

एंड टीवी का सबसे पॉपुलर शो ‘भाभी जी घर पर हैं’ के सभी किरदारों ने लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. इस शो के सभी किरदारों को दर्शक काफी पसंद करते हैं. कुछ दिनों पहले शो को लेकर ये खबर आई थी की शो की अनीता भाभी यानी नेहा पेंडसे शो को अलविदा कहने वाली है ,क्योंकि निर्माताओं के साथ उनका कॉन्ट्रैक्ट अप्रैल 2022 में खत्म होने वाला है ,तभी से शो के लिए नई अनीता भाभी के ऑडिशंस शुरू हो गए थे. इन्हीं ख़बरों के बीच राहत भरी खबर ये आई है कि शो के लिए नई अनीता भाभी मिल चुकी हैं.

नेहा पेंडसे के बाद अब एक्ट्रेस विदिशा श्रीवास्तव गोरी मेम बनकर तिवारी जी का दिल धड़काएंगी. विदिशा शो में विभूति नारायण यानी आसिफ शेख की पत्नी का किरदार निभाते हुए नजर आएंगी. विदिशा इससे पहले ‘ये हैं मोहब्बतें’, ‘मेरी गुड़िया’, ‘कहत हनुमान जय श्रीराम’ और ‘श्रीमद भागवत महापुराण’ जैसे कई शो में काम कर चुकी हैं. हिंदी टीवी सीरियल्स के अलावा विदिशा ने तेलुगू और दक्षिण सिनेमा की कई फिल्मों में भी काम किया है.

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बता दें कि ‘भाभी जी घर पर हैं’ में अनीता भाभी का किरदार सबसे पहले एक्ट्रेस सौम्या टंडन ने अदा किया था. लेकिन कुछ कारणों से उन्होंने शो को अलविदा कह दिया था. उनके जाने के बाद एक्ट्रेस नेहा पेंडसे ‘अनीता भाभी’ की भूमिका अदा करती नजर आई थीं.
अनीता भाभी के अलावा शो में अंगूरी भाभी के किरदार को भी रिप्लेस किया जा चुका है. शुरुआत में शिल्पा शिंदे यानी अंगूरी भाभी को शुभांगी आत्रे ने रिप्लेस किया था.

दीपिका कक्कर और शोएब इब्राहिम ने मनाई शादी की 4th Annivarsery, ऐसे किया सेलिब्रेशन

टीवी की बहुचर्चित जोड़ी दीपिका और शोएब के लिए कल का दिन बेहद ख़ास रहा, क्योंकि कल ही के दिन दोनों शादी के खूबसूरत बंधन में बंधे थे. दीपिका और शोएब की शादी को 4 साल पुरे हो चुके हैं. दोनों ने साल 2018 में लव मैरिज की थी. दीपिका और शोएब के प्यार की शुरुआत ‘ससुराल सिमर का ‘ नामक सीरियल से हुई थी. इस सीरियल में इन दोनों ने एक साथ काम किया था. दोनों ही टीवी की खूबसूरत जोड़ी में से एक हैं.

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बीती रात दोनों अपनी फैमिली के साथ  शादी की सालगिरह की पार्टी करते नज़र आए. शोएब इब्राहिम ने इस पार्टी की पूरी वीडियो अपने व्लॉग में फैंस के साथ शेयर की हैं. बता दें कि शोएब और उनकी पत्नी दीपिका कलाकार होने के साथ फेमस यू ट्यूब व्लॉगर भी हैं. यू ट्यूब पर ‘दीपिका की दुनिया’ के नाम से दीपिका का चैनल है भी है, जिसके द्वारा दीपिका अपने फैंस से अपनी पर्सनल लाइफ के सभी पलों को शेयर करती रहती हैं. दीपिका के फैंस उनको और शोएब को काफी चाहते हैं.

दीपिका और शोएब अपनी शादी की सालगिरह के दिन अपने आने वाले म्यूज़िक वीडियो के प्रमोशन को लेकर काफी बिज़ी थे , यहाँ बता दें की दोनों ने अपने फैंस को भी एक तोहफा दिया है ,और वो तोहफा है दोनों का आने वाला म्यूज़िक एल्बम. बीते दिन ही दोनों कलाकारों का ‘रब ने मिलाई धड़कन’ नाम का एक म्यूजिक वीडियो रिलीज हुआ है.

फैमिली ने की सरप्राइज़ पार्टी अरेंज

अपने बिज़ी स्केड्यूल की वजह से दीपिका को पार्टी प्लान करने का मौका नहीं मिला .दीपिका तो इतनी बिज़ी थीं कि उन्हें पार्टी के लिए तैयार होने का भी मौका नहीं मिला.ऐसे में शोएब की फैमिली ने इस दिन को यादगार बनाने के लिए दोनों के लिए सरप्राइज़ प्लान किया था.  बता दें कि शोएब कि फैमिली दीपिका को बहुत प्यार करती है और दीपिकी भी अपने ससुराल में काफी खुश है.
वैसे तो ससुराल में सभी दीपिका को बहुत प्यार करते हैं ,लेकिन इस मौके पर शोएब की मां यानि दीपिका की सास उनपर प्यार खूब लुटाती नज़र आईं. दीपिका ने इस दिन को स्पेशल बनाने के लिए पूरी फैमिली के लिए बाहर से ही बिरयानी ऑर्डर की.

अब सोशल मीडिया पर दोनों की पार्टी पिक्स तेज़ी से वायरल हो रही हैं.  फैंस इन दोनों पर जमकर प्यार लुटा रहे है. लेकिन इसी के साथ दीपिका के पार्टी लुक को देखकर फैंस काफी असमंजस में दिख रहे हैं. दीपिका को पार्टी में ढीले ढाले कपड़ों में देखकर यह अंदाज़ा लगाया जाने लगा है की टीवी की यह हसीन अदाकारा कहीं गुड न्यूज़ तो नहीं देने वाली हैं !

नया ठिकाना- भाग 3: क्या मेनका और रवि की शादी हुई?

रवि बोलने लगा, ‘‘आप लोग चिंता मत कीजिए. हम आप को 6,000 रुपए महीना भेजते रहेंगे. किसी तरह वहां का घरजमीन बेच कर मामा के गांव में ही जमीन ले लीजिए. अगर दिक्कत होगी, तो आप दोनो को यहां शहर भी ला सकते हैं.’’

‘नहीं बेटा, हम लोग यहीं रहेंगे. शहर में नहीं आएंगे.’

रवि 12,000 रुपए महीने पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लगा था. मेनका एक ब्यूटीपार्लर में रिसैप्शन पर 8,000 रुपए महीना पर काम करने लगी थी. दोनों के दिन खुशीखुशी बीत रहे थे.

इसी बीच कोरोना बीमारी की चर्चा होने लगी. आज प्रधानमंत्री का भाषण टैलीविजन पर आने वाला था. प्रधानमंत्री ने सभी लोगों को एक दिन के ‘जनता कर्फ्यू’ की कह कर घर पर बिठा दिया. 21 मार्च को शाम 5 बजे 5 मिनट तक अपने घर की छत से थाली और ताली बजाने को कहा गया.

देशभर के लोगों ने थाली और ताली, घंटी और शंख तक बजा दिए. प्रधानमंत्री सम झ गए कि वे जो बोलेंगे, जनता मानेगी. इस के बाद उन्होंने टैलीविजन पर बड़ा फैसला सुनाया कि अब देश में 21 दिन का लौकडाउन होगा और जो जहां है, वहीं रहेगा. सभी गाडि़यां, बस, ट्रेन और हवाईजहाज तक बंद रहेंगे. सिर्फ राशन और दवा की दुकानें खुली रहेंगी.

दूसरे दिन से हर जगह पर पुलिस प्रशासन मुस्तैद हो गया. किसी तरह बंद कमरे में 21 दिन बिताए, पर फिर 19 दिन का और लौकडाउन बढ़ा दिया गया. अब जितने भी काम करने वाले लोग थे, वे हर हाल में घर जाने का मन बनाने लगे. कंपनी के मालिक ने पैसा देना बंद कर दिया.

रवि और मेनका के अगलबगल के सारे लोग अपनेअपने घर के लिए निकल पड़े. संजय ने भी 1,200 रुपए में एक पुरानी साइकिल खरीद कर चलने का मन बना लिया.

रवि ने अपने मामा के पास फोन किया, तो मामा ने कहा, ‘यहां भूल कर भी मत आना. अगर लड़की वालों को मालूम हो गया तो तुम्हारे साथसाथ हम लोग भी मुश्किल में पड़ जाएंगे.’

आखिर मेनका और रवि जाएं तो जाएं कहां? मेनका पेट से थी. संजय दूसरे दिन साइकिल ले कर निकल गया था. पूरे मकान में सिर्फ रवि और मेनका ही बच गए थे. कोरोना के मरीज हर रोज बढ़ रहे थे. कुछ हो गया, तो कोई साथ नहीं देगा.

रवि ने भी एक साइकिल खरीद ली और मेनका को बोला, ‘‘चलो, हम लोग भी निकल चलें. चाहे जो भी हो, एक दिन तो सब को मरना ही है.’’

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रवि अपना सारा सामान मकान मालिक को 15,000 रुपए में बेच कर निकल पड़ा. रास्ते के लिए कुछ खाना बना लिया. 4 बजे भोर में रवि मेनका को साइकिल की पीछे वाली सीट पर बैठा कर चल पड़ा.

धीरेधीरे शाम हो गई थी. रवि को तेज प्यास लगी थी. सड़क के किनारे एक आलीशान मकान था. गेट के पास एक नल था. रवि रुक कर बोतल में पानी भर रहा था.

उस आलीशान मकान से गेट तक एक बुढि़या आई और पूछने लगी, ‘‘बेटा, तुम लोग कहां से आ रहे हो?’’

‘‘माताजी, हम लोग दिल्ली से आ रहे हैं और बिहार जाएंगे.’’

‘‘अरे, साइकिल से तुम लोग इतनी दूर जाओगे?’’

‘‘हां माताजी, क्या करें. जिस कंपनी में काम करते थे, वह बंद हो गई. मकान मालिक किराया मांगने लगा, तो सभी किराएदार निकल गए. हम लोग क्या करते?’’

‘‘अब रात में तुम लोग कहां रुकोगे?’’

‘‘माताजी, कहीं भी रुक जाएंगे.’’

‘‘अरे, तुम दोनों यहीं रुक जाओ. यहां मेरे घर में कोई नहीं रहता. एक हम हैं और एक खाना बनाने वाली नौकरानी. तुम लोग चिंता मत करो. तुम लोग जैसे मेरे भी बेटाबहू हैं, जो अमेरिका में रहते हैं. वहां दोनों डाक्टर हैं.’’

रवि ने हां कर दी. वह औरत उन  दोनों को घर में ले गई और नौकरानी को बोली, ‘‘2 लोगों का और खाना बना देना.’’

रवि बोला, ‘‘माताजी, हम लोगों के पास खाना है. आप ने रुकने के लिए जगह दे दी, यही बहुत है.’’

‘‘कोई बात नहीं. वह खाना तुम लोगों को रास्ते में काम आएगा.’’

‘‘अच्छा, ठीक है माताजी.’’

इस के बाद वे दोनों फ्रैश हुए. उस के बाद मेनका और बूढ़ी माताजी आपस में बातें करने लगीं.

बूढ़ी माताजी कहने लगीं, ‘‘मेरा भी एक ही बेटा है. वह अमेरिका में डाक्टर है. वहीं उस ने शादी कर ली. 10 साल के बाद पिछले साल जब वह यहां आया था, तब उस के पिताजी इस दुनिया में नहीं रहे थे.

‘‘मेरे पति आईएएस अफसर थे. बहुत अरमान से बेटे को डाक्टरी पढ़ाई थी. मु झे पैसे की कोई कमी नहीं है. 40,000 रुपए पैंशन मिलती है. जमीनजायदाद से साल में 5 लाख रुपए की आमदनी हो जाती है.’’

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खाना खा कर बात करतेकरते काफी रात बीत गई. सुबह जब रवि और मेनका उठे, तो दिन के 8 बज गए थे. नहानाधोना करतेकरते 9 बज गए थे. जब दोनों निकलने की तैयारी करने लगे, तो बूढ़ी माता ने कहा, ‘‘धूप बहुत हो गई है. अब तुम दोनों कल सुबह जल्दी निकलना.’’

दोनों आज भी वहीं रुक गए थे. मेनका नौकरानी के साथ खाना बनाने में मदद करने लगी थी.

बूढ़ी माता रात को अपना दुखदर्द सुनाते हुए रोने लगीं, ‘‘सिर्फ पैसे से ही खुशी नहीं मिलती. मेरे बेटे को शादी किए 10 साल हो गए हैं. मैं ने आज तक अपनी बहू को देखा तक नहीं. एक पोता भी हुआ है, पर उसे भी आज तक देखने का मौका नहीं मिला.’’

मेनका को लगा जैसे उसे नई मां मिल गई है. रात को उस ने बूढ़ी माताजी के पैर दबाए और तेल लगाया. बूढ़ी माताजी को आज असली सुख का एहसास होने लगा था.

सुबह जब रवि ने निकलने के लिए बोला, तो बूढ़ी माता जिद पर अड़ गईं, ‘‘तुम लोग हमेशा यहीं रहो न…’’

रवि और मेनका को भी नया ठिकाना मिल गया था और वे खुशीखुशी यहीं रहने लगे.

नया ठिकाना: क्या मेनका और रवि की शादी हुई?

नया ठिकाना- भाग 2: क्या मेनका और रवि की शादी हुई?

‘‘अरे बेटा, हमारी जिंदगी का कोई ठिकाना नहीं है. लड़की वाले भी बढि़या हैं. तुम्हारे मामा जब शादी के लिए लड़की वाले को ले कर आए हैं, तो उन की बात भी माननी चाहिए. बता रहे थे कि लड़की भी सुंदर और सुशील है. उस के मातापिता भी बहुत अच्छे हैं. इस तरह का परिवार दोबारा नहीं मिलेगा. लड़की भी मैट्रिक पास है. शादी में अच्छा पैसा भी देने के लिए तैयार हैं… और क्या चाहिए?’’

रवि उदास हो गया. उसे सम झ में नहीं आ रहा था कि पिताजी को क्या जवाब दे. वह उल झन में पड़ गया. एक तरफ मातापिता और दूसरी तरफ दिलोजान से चाहने वाली मेनका.

रवि मेनका के फोन का इंतजार करने लगा. अब तो मेनका ही कुछ उपाय निकाल सकती है.

रात 11 बजे मोबाइल की घंटी बजी. हैलोहाय होने के बाद मेनका ने पूछा, ‘आज गुमटी नहीं खोले थी?’

रवि बोला, ‘‘अरे, बहुत गड़बड़ हो गई है.’’

‘क्या हुआ?’

‘‘कुछ रिश्तेदार घर आए थे.’’

‘तुम्हारी शादी के लिए आए थे क्या?’

‘अरे हां, उसी के लिए आए थे. तुम्हें कैसे मालूम हुआ?’

‘मैं तुम्हारी एकएक चीज का पता करती रहती हूं.’

‘‘अच्छा छोड़ो, मु झे उपाय बताओ. इस से छुटकारा कैसे मिलेगा? मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता हूं. मांबाबूजी शादी करने के लिए अड़े हुए हैं. सम झ में नहीं आ रहा है कि क्या करूं? तुम्हीं कुछ उपाय निकालो.’’

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मेनका बोली, ‘एक ही उपाय है. हम लोग यहां से दूसरी जगह किसी शहर में निकल जाएं.’

‘‘गुमटी का क्या करें?’’

‘बेच दो.’

‘‘बाहर क्या करेंगे?’’

‘वहां तुम कोई नौकरी ढूंढ़ लेना. मेरे लायक कुछ काम होगा, तो मैं भी कर लूंगी.’

‘‘लेकिन, यहां मांबाबूजी का क्या होगा?’’

‘रवि, तुम्हें हम दोनों में से एक को छोड़ना ही पड़ेगा. मांबाबूजी को छोड़ो या फिर मु झे.’

‘‘क्यों?’’

‘इसलिए कि मेरे मांपिताजी किसी भी शर्त पर तुम्हारे साथ मेरी शादी नहीं होने देंगे. इस की 2 वजहें हैं, पहली हम लोग अलगअलग जाति के हैं. दूसरी, मेरे मांपिताजी नौकरी करने वाले लड़के से मेरी शादी करना चाहते हैं.’

रवि बोलने लगा, ‘‘मेरे सामने तो सांपछछूंदर वाला हाल हो गया है. मांबाबूजी को भी छोड़ना मुश्किल लग रहा है और तुम्हारे बिना मैं जिंदा नहीं रह सकता.’’

मेनका बोली, ‘सभी लड़के तो बाहर जा कर काम कर ही रहे हैं. उन्होंने क्या अपने मांबाप को छोड़ दिया है? वहां से तुम अपने मांबाप के पास पैसे भेजते रहना. जब यह गुमटी बेचना तो कुछ पैसे मांबाबूजी को भी दे देना. मांबाबूजी को पहले से ही सम झा देना.’

‘‘अच्छा, ठीक है. इस पर विचार करते हैं,’’ रवि ने कहा.

रवि का एक दोस्त संजय दिल्ली में काम करता था. उस से मोबाइल पर बराबर बातें होती थीं. रवि और संजय दोनों पहली क्लास से मैट्रिक क्लास तक एकसाथ पढ़े थे. संजय मैट्रिक के बाद दिल्ली चला गया था और रवि ने पान की गुमटी खोल ली थी.

संजय की शादी भी हो गई थी. उस की पत्नी गांव में ही रहती थी. संजय साल में 1 या 2 बार गांव आता था.

अगले दिन रवि ने संजय को फोन किया, ‘‘यार संजय, मेरे लिए भी काम दिल्ली में खोज कर रखना. एक कमरा भी देख लेना.’’

संजय बोला, ‘मजाक मत कर.’

‘‘नहीं यार, मैं सीरियसली बोल रहा हूं. अब गुमटी भी पहले जैसी नहीं चल रही है. बहुत दिक्कत हो गई है. घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है. तुम मेरे लंगोटिया यार हो. मैं अपना दुखदर्द किस से कहूंगा?’’

संजय बोला, ‘मैं यहां एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता हूं. तुम चाहोगे तो मैं तु झे ऐसी ही गार्ड की नौकरी दिलवा सकता हूं. हर महीने 10,000 रुपए मिलेंगे. ओवरटाइम करोगे, तो 12,000 रुपए तक हर महीने कमा लोगे.’

‘‘ठीक है. एक कमरा भी खोज लेना.’’

‘ठीक है, जब मन करे तब आ जाना,’ संजय ने कहा.

रवि गांव से शहर जाने का मन बनाने लगा. वह अपने मांबाबूजी से बोला, ‘‘मु झे शहर में अच्छा काम मिलने वाला है. एक साल कमाऊंगा तो यहां नया घर बना लूंगा. उस के बाद शादी करूंगा.’’

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यह सुन कर रवि के बाबूजी बोलने लगे, ‘‘हम लोग यहां तुम्हारे बिना कैसे रहेंगे?’’

‘‘मैं सब इंतजाम कर के जाऊंगा. वहां से पैसा भेजता रहूंगा. संजय बाहर रहता है, तो उस के मांबाबूजी यहां कौन सी दिक्कत में हैं? सब पैसा कमाते हैं. पैसा है तो सबकुछ है, नहीं तो कुछ भी नहीं है.’’

‘‘हां बेटा, वह तो है. तुम जो ठीक सम झो.’’

रवि ने 70,000 रुपए में सामान समेत गुमटी बेच दी और उन में से 30,000 रुपए अपने मांबाबूजी को दे दिए. बाकी अपने पास रख लिए. अब वह यहां से निकलने की प्लानिंग करने लगा.

उस ने मेनका को फोन किया. मेनका बोली, ‘आज मेरे पापा मामा के यहां जाने वाले हैं. मैं स्कूल जाने के बहाने घर से निकलूंगी और ठीक 10 बजे बसस्टैंड पर रहूंगी.’

दूसरे दिन दोनों ठीक 10 बजे बसस्टैंड पहुंच गए. बस से दोनों गया रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से ट्रेन पकड़ कर दिल्ली पहुंच गए.

वहां रवि ने संजय को फोन किया. वह स्टेशन आ गया. रवि के साथ एक लड़की को देख कर संजय हैरान रह गया, पर कुछ पूछ नहीं सका.

वह उन दोनों को अपने कमरे पर ले गया. उस के बाद दोनों को फ्रैश होने के लिए बोला.

जब मेनका नहाने के लिए गई, तो संजय ने पूछा, ‘‘यह साथ में किस को ले कर आ गए हो? मु झे पहले कुछ बताया भी नहीं.’’

रवि ने सारी बात बता दी. संजय जहां पर रहता था, उसी मकान में एक कमरा था, जो हाल में ही खाली हुआ था. उसे रवि को  दिलवा दिया.

रवि और संजय दोनों बाजार से जा कर बिस्तर, गैस, चावल और जरूरत का दूसरा सामान खरीद कर ले आए. इस के बाद रवि और मेनका दोनों साथसाथ रहने लगे.

संजय ने जब अपने घर फोन किया तो उस की मां ने बताया कि रवि एक लड़की को ले कर भाग गया है. पंचायत ने रवि के मातापिता को गांव से निकल जाने का फैसला सुनाया है. मालूम हुआ है कि वे दोनों रवि के मामा के यहां चले गए हैं. रवि को ऐसा नहीं करना चाहिए था, लेकिन संजय ने अपनी मां को नहीं बताया कि रवि उसी के पास आया हुआ है.

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संजय ने रवि को सारी बातें बता दीं. रवि ने जब अपने मामा के यहां फोन किया, तो उस के मामा ने उसे बहुत भलाबुरा कहा.

रवि के पिताजी ने कहा, ‘अब हम लोग गांव में मुंह दिखाने लायक नहीं रहे. हम ने कभी सपने में भी नहीं  सोचा था कि तुम इस तरह का काम करोगे. लेकिन एक बात बता रहे हैं कि कभी भूल कर भी तुम लोग गांव नहीं लौटना, नहीं तो लड़की के मातापिता तुम दोनों की हत्या तक कर देंगे.’

अगर आप भी घिरे रहते हैं गैजेट्स से, तो हो जाइए सावधान

किशोरों की सुबह मोबाइल अलार्म से शुरू हो कर आईपैड व वीडियो गेम्स, कंप्यूटर और वीडियो चैट, मूवी, लैपटौप आदि के इर्दगिर्द गुजरती है. दिनभर वे फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप जैसी सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर बिजी रहते हैं. इन्हें नएनए गैजेट्स अपने जीवन में सब से अहम लगते हैं. इन की महत्ता को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन अगर इन का उपयोग जरूरत से ज्यादा होने लगे तो यह एक संकेत है कि आप अपनी सेहत के साथ खुद ही खिलवाड़ कर रहे हैं.

कैलाश हौस्पिटल, नोएडा के डाक्टर संदीप सहाय का कहना है कि देर रात तक स्मार्टफोन, टैब या लैपटौप का इस्तेमाल करने से नींद पर असर पड़ सकता है. इस से न सिर्फ गहरी नींद में खलल पड़ेगा बल्कि अगली सुबह थकावट का एहसास भी होगा. यदि हम एकदो रात अच्छी तरह से न सोएं तो थकावट का एहसास होने लगता है और चुस्ती कम हो जाती है. यह बात सही है कि इस से हमें शारीरिक या मानसिक तौर पर कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन यदि कईर् रातों तक नींद उड़ी रहे तो न सिर्फ शरीर पर थकान हावी रहेगी बल्कि एकाग्रता और सोचने की क्षमता पर भी असर पड़ेगा. लंबे समय में इस से उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं.

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गरदन में दर्द : लैपटौप में स्क्रीन और कीबोर्ड काफी नजदीक होते हैं. इस कारण इस पर काम करने वाले को झुकना पड़ता है. इसे गोद में रख कर इस्तेमाल करने पर गरदन को झुकाने की आवश्यकता पड़ती है. इस से गरदन में खिंचाव पैदा होता है, जिस से दर्द होता है. कभी कभी तो डिस्क भी अपनी जगह से खिसक जाती है. लैपटौप पर ज्यादा समय तक काम करने से शरीर का पौश्चर बिगड़ जाता है. लैपटौप में कीबोर्ड कम जगह में बनाया जाता है. इसलिए इस में उंगलियों को अलग स्थितियों में काम करना पड़ता है. इस से उंगलियों में दर्द होता है. चमकती स्क्रीन देखने पर आंखों में चुभन हो सकती है. आंखें लाल होना, उन में खुजली होना और धुंधला दिखाई देना सामान्य समस्याएं हैं.

स्पाइन, नर्व व मांसपेशियों में दिक्कत : दिन का अधिकतर समय लैपटौप पर बिताने से स्पाइन मुड़ जाती है. इस से स्प्रिंग की तरह काम करने की गरदन की जो कार्यप्रणाली है वह भी प्रभावित होती है. इस से तंत्रिकाएं क्षतिग्रस्त भी हो सकती हैं. अधिकतर लोग लैपटौप को पैरों पर रख कर काम करते हैं. इस से भी मांसपेशियों को नुकसान पहुंचता है.

ज्यादा टीवी देखना भी है हानिकारक : ब्रिटिश जर्नल औफ मैडिसन में प्रकाशित एक लेख के अनुसार 25 या उस से अधिक उम्र के लोगों द्वारा हर घंटे देखे गए टीवी से उन का जीवनकाल 22 सैकंड कम हो जाता है. हर भारतीय एक सप्ताह में औसतन 15-20 घंटे टीवी देखता है. कई शोधों से यह बात भी सामने आई है कि हर घंटे देखे गए टीवी से उन का जीवनकाल 22 सैकंड कम हो जाता है. रोज 2 घंटे टीवी केसामने बिताने से टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा 20त्न बढ़ जाता है.

पढ़ाई से ध्यान हटना :  जो युवा अपना अधिकतर समय कंप्यूटर व गैजेट्स के सामने बिताते हैं उन की पढ़ने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है और धीरेधीरे उन का मन पढ़ाई में कम और गैजेट्स में ज्यादा लगने लगता है. उन को घंटों बैठ कर पढ़ाई करने से ज्यादा अच्छा गेम खेलना लगता है. वे अगर किताबें ले कर बैठ भी जाते हैं तो भी उन का सारा ध्यान कंप्यूटर पर ही टिका रहता है, जो उन की पर्सनैलिटी को नैगेटिव बनाने के साथसाथ उन का कैरियर तक चौपट कर देता है.

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असामाजिक होना : वर्चुअल दुनिया का साथ मिलने पर युवा अकसर असामाजिक होने लगते हैं, क्योंकि वे उस दुनिया में अपनी मनमानी करते हैं. वहां उन्हें कोई रोकने वाला नहीं होता है.

लड़कों में नपुंसकता बढ़ती है : देश की प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में किए जा रहे अध्ययन से पता चला है कि मोबाइल फोन और उस के टावर्स से निकलने वाली रेडिएशन पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर असर डालने के अलावा शरीर की कोशिकाओं के डिफैंस मैकेनिज्म को नुकसान पहुंचाती हैं.

क्यों होता है सेहत को नुकसान : एक शोध के अनुसार इलैक्ट्रौनिक उपकरणों के प्रयोग से हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. ये उपकरण इलैक्ट्रोमैग्नैटिक रेडिएशन छोड़ते हैं, जिन में मोबाइल फोन, लैपटौप, टैबलेर्ट्स वाईफाई वायरलैस उपकरण शामिल हैं.

शोध के मुताबिक वायरलैस उपकरणों के ज्यादा उपयोग से इलैक्ट्रोमैग्नैटिक हाईपरसैंसेटिविटी की शिकायत हो जाती है, जिसे गैजेट एलर्जी भी कहा जा सकता है.

डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है कि मोबाइल फोन की रेडियो फ्रीक्वैंसी फील्ड शरीर के ऊतकों को प्रभावित करती है. हालांकि शरीर का ऐनर्जी कंट्रोल मैकेनिज्म आरएफ ऐनर्जी के कारण पैदा गरमी को बाहर निकालता है, पर शोध साबित करते हैं कि यह फालतू ऐनर्जी ही अनेक बीमारियों की जड़ है. हम जिस तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं उस के नुकसान को अनदेखा करते हैं. मोबाइल फोन, लैपटौप, एयरकंडीशनर, ब्लूटूथ, कंप्यूटर, एमपी3 प्लेयर आदि की रेडिएशंस से नुकसान होता है.

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ईएनटी विशेषज्ञ का कहना है कि नुकसान करने वाली रेडिएशंस हमारे स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ करती हैं और हमारी कार्यक्षमता को कम करती हैं. हम पूरे दिन लगभग 500 बार इलैक्ट्रोमैग्नैटिक रेडिएशंस से प्रभावित होते हैं. ये हमारी एकाग्रता को प्रभावित करती हैं. हमें चिड़चिड़ा बनाती हैं और थके होने का एहसास कराती हैं. हमारी स्मरणशक्ति को कमजोर करती हैं, प्रतिरोधक क्षमता को कम करती हैं और सिरदर्द जैसी समस्या पैदा करती हैं.

यही स्थिति मोबाइल की भी है अधिकांश लोग कम से कम 30 मिनट तक मोबाइल पर बात करते हैं. इस तरह एक साल में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले को 11 हजार मिनट का रेडिएशन ऐक्सपोजर का सामना करना पड़ता है. मोबाइल फोन के रेडिएशन के खतरे बढ़ते जा रहे हैं.

क्या कहती है रिसर्च

एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो किशोर कंप्यूटर या टीवी के सामने ज्यादा वक्त बिताते हैं उन किशोरों की हड्डियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिस की वजह से वे गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ रहे हैं. नौर्वे में हुई एक रिसर्च में कहा गया है कि किशोरों में हड्डियों की समस्या बढ़ती जा रही है, जिस की वजह कंप्यूटर पर देर तक बैठ कर काम करना है.

अमेरिकन एकैडमी औफ पीडियाट्रिक्स ने कंप्यूटर के इस्तेमाल का समय भी बताया. आर्कटिक विश्वविद्यालय औफ नौर्वे की एनी विंथर ने स्थानीय जर्नल में एक रिपोर्ट प्रकाशित कराई है, जिस में कंप्यूटर के सामने बैठने की वजह से शारीरिक नुकसान का आकलन किया गया है. इस रिपोर्ट के साथ ही अमेरिकन एकैडमी औफ पीडियाट्रिक्स ने किशोरों के लिए कंप्यूटर के इस्तेमाल का समय भी बताया है.

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मोबाइल फोन, लैपटौप आदि के ज्यादा इस्तेमाल से आप की उम्र तेजी से बढ़ रही है, जिस से आप जल्दी बूढ़े हो सकते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इस स्थिति को टैकनैक कहते हैं. इस में इंसान की त्वचा ढीली हो जाती है. गाल लटक जाते हैं और झुर्रियां पड़ जाती हैं. इन सब के कारण इंसान का चेहरा उम्र से पहले ही बूढ़ा लगने लगता है. इस के अलावा आंखों के नीचे काले घेरे बनने लगते हैं और गरदन व माथे पर उम्र से पहले ही गहरी लकीरें दिखने लगती हैं.

मुंबई के फोर्टिस हौस्पिटल के कौस्मैटिक सर्जन विनोद विज ने बताया कि मोबाइल फोन का लंबे वक्त तक झुक कर इस्तेमाल करने से गरदन, पीठ और कंधे का दर्द हो सकता है. इस के अलावा सिरदर्द, सुन्न, ऊपरी अंग में झुनझुनी के साथ आप को हाथ, बांह, कुहनी और कलाई में दर्द हो सकता है.

ऐसे बचें गैजेट्स की लत से

इंटरनैट और मोबाइल एसोसिएशन औफ इंडिया की हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में 37 करोड़ 10 लाख मोबाइल इंटरनैट यूजर्स होने का अनुमान है, जिन में 40 फीसदी मोबाइल इंटरनैट यूजर्स 19 से 30 वर्ष के हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इलैक्ट्रौनिक गैजेट्स का इस्तेमाल करने के लिए कई बार आगे की ओर झुकने से रीढ़ की हड्डी, मांसपेशियों और हड्डियों की प्रकृति में बदलाव होने लगता है.

कौस्मैटिक सर्जरी इंस्टिट्यूट के सीनियर कौस्मैटिक सर्जन मोहन थामस कहते हैं कि लोगों को अभी इस बात का एहसास नहीं है कि उन की त्वचा गरदन और रीढ़ की हड्डी को कितना नुकसान पहुंच रहा है. तकनीक के इस्तेमाल के आदी लोगों को इलैक्ट्रौनिक गैजेट्स की लत से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए. उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण गरदन की मांसपेशियां छोटी हो जाती हैं. इस के अलावा त्वचा का गुरुत्वाकर्षणीय खिंचाव भी बढ़ जाता है. इस के कारण त्वचा का ढीलापन, दोहरी ठुड्डी और जबड़ों के लटकने की समस्या हो जाती है.

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फ्रांस में अदालत का खटखटाया दरवाजा

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के नए आंकड़ों के मुताबिक भारत की 125 करोड़ की आबादी के पास 98 करोड़ मोबाइल कनैक्शन हैं. हाल ही में फ्रांस की एक अदालत ने इएचएस से पीडि़त एक महिला को विकलांगता भत्ता दे कर वाईफाई और इंटरनैट की पहुंच से दूर शहर छोड़ गांव में रहने का आदेश दिया. हालांकि ऐसा मामला अब तक भारत में नहीं आया, लेकिन अगर आप को भी शारीरिक कमजोरी हो तो डाक्टर को दिखाने के साथसाथ आप भी अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं.

नया ठिकाना- भाग 1: क्या मेनका और रवि की शादी हुई?

गुमटी चलाने वाले रवि की उम्र भी तकरीबन 20 साल होगी. वह भी गोरा, लंबा और हैंडसम था. इस के अलावा वह बहुत हंसमुख लड़का था. किसी भी ग्राहक से मुसकराते हुए बातें करता था. उस की दुकान अच्छी चलती थी.

हर उम्र के लोग रवि की गुमटी पर दिखते थे. बच्चे चौकलेट और चिप्स के लिए, बुजुर्ग पान के लिए, तो नौजवान बीड़ीसिगरेट के लिए, तो औरतें साबुन और शैंपू के लिए.

रवि की गुमटी एक बड़ी बस्ती में थी, जहां कई गांवों के लोग खरीदारी करने के लिए आते थे. इस बस्ती में एक हाईस्कूल था, जहां आसपास के कई गांवों के लड़केलड़कियां पढ़ने के लिए आते थे. इस स्कूल में इंटर क्लास तक की पढ़ाई होती थी. इस बस्ती में जरूरत की तकरीबन हर चीज मिल जाती थी.

रवि के पिता दमा की बीमारी से परेशान रहते थे. घर का सारा काम रवि की मां करती थीं. इस परिवार का सहारा यही गुमटी थी. सुबह 7 बजे से ले कर रात 9 बजे तक रवि इसी गुमटी में बैठ कर सामान बेचा करता था. उसे खाने और नाश्ता करने तक के लिए फुरसत नहीं मिलती थी.

रवि खुशमिजाज होने के साथसाथ दिलदार भी था. किसी के पास अगर पैसे नहीं होते थे तो वह उसे उधार सामान दे दिया करता था. ग्राहकों को चाचा, भैया, दीदी, चाची से ही संबोधित करता था.

स्कूल में सालाना जलसा मनाया जा रहा था. आज भी वह लड़की जींसटौप पहने रवि की गुमटी पर चिप्स और चौकलेट लेने आई थी. आज वह बला की खूबसूरत लग रही थी.

रवि ने मुसकराते हुए पूछा, ‘‘तुम्हारा नाम क्या है?’’

लड़की ने हंसते हुए कहा, ‘‘नाम जान कर क्या करेंगे?’’

रवि ने कहा, ‘‘ऐसे ही पूछ लिया. माफ करना.’’

लड़की बोली, ‘‘इस में माफी मांगने की क्या बात है? मेरा नाम मेनका है. वैसे, आज हमारे स्कूल में कार्यक्रम है. आप भी देखने आइएगा.’’

‘‘तुम भी हिस्सा लोगी क्या?’’ रवि ने पूछा.

मेनका बोली, ‘‘हां, मैं भी डांस करूंगी.’’

रवि बोला, ‘‘कितने बजे से कार्यक्रम शुरू होगा?’’

‘‘यही तकरीबन 11 बजे से.’’

रवि बोला, ‘‘कोशिश करूंगा.’’

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मेनका बोली, ‘‘कोशिश नहीं जरूर आइएगा. नाटक, गीतसंगीत और डांस… एक से बढ़ कर एक कार्यक्रम होगा. पहली बार इस तरह का बड़ा कार्यक्रम रखा गया है. उद्घाटन करने के लिए विधायकजी आने वाले हैं.’’

‘‘अच्छा, ठीक है. जरूर आऊंगा.’’

रवि स्कूल में 10 बजे ही पहुंच गया. मंच पर परदा लगाने और दूसरे कामों में मदद करने लगा. रवि भी इसी स्कूल से मैट्रिक पास हुआ था. वह भी पढ़ने में होशियार था. मजबूरी में उस ने यह गुमटी खोली थी.

विधायकजी मंच पर आए. फूलमाला और बुके दे कर उन्हें सम्मानित किया गया. उन्होंने दीया जला कर मंच का उद्घाटन किया. अपने विधायक फंड से स्कूल के चारों तरफ से चारदीवारी बनवाने का आश्वासन दिया.

स्वागत गीत, नाटक, सामूहिक लोकगीत यानी एक से बढ़ कर एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए गए. सब से आखिर में मेनका के डांस का ऐलान हुआ.

लहंगाचुनरी पहने जब मेनका ‘मैं नाचूं आज छमछम…’ गीत पर डांस करने लगी, तो वहां मौजूद लोग देखते रह गए. रवि तो उस का डांस देख कर बहुत ज्यादा खुश हो गया.

मेनका को डांस प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार मिला. रवि के दिलोदिमाग पर मेनका का डांस घर कर गया था. उसे रातभर नींद नहीं आई.

दूसरे दिन सुबह 10 बजे मेनका फिर गुमटी पर चिप्स और चौकलेट लेने आई. रवि तो मन ही मन उस का इंतजार ही कर रहा था.

मेनका को देखते ही रवि बोलने लगा, ‘‘तुम ने क्या गजब का डांस किया. लोग तो तुम्हारी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. जिधर सुनो, उधर तुम्हारी ही चर्चा.’’

जब मेनका चिप्स और चौकलेट के पैसे देने लगी, तो रवि ने कहा, ‘‘यह मेरी तरफ से गिफ्ट है. हम गरीब आदमी और दे ही क्या सकते हैं?’’

मेनका कुछ नहीं बोली और चिप्स व चौकलेट इसलिए ले ली कि रवि के दिल को ठेस न पहुंचे.

वैसे, मेनका भी रवि के विचारों से प्रभावित हो गई थी. उस ने एक दिन रवि से उस का मोबाइल नंबर मांगा. रवि तो इस का इंतजार ही कर रहा था, लेकिन खुद मोबाइल नंबर मांगने में संकोच कर रहा था.

आज रवि बेहद खुश था. वह मेनका के फोन का इंतजार कर रहा था. जब भी उस का मोबाइल बजता तो दिल धड़कने लगता. पर जब देखता कि किसी दूसरे का फोन है तो उस का मन खीज उठता.

रवि रात का खाना खा कर अपने बिस्तर पर करवटें बदल रहा था. उसे नींद नहीं आ रही थी. ठीक रात 11 बजे उस का फोन बजा. उस ने जल्दी से फोन रिसीव किया, तो उधर से सुरीली आवाज आई, ‘सो गए क्या?’

रवि बोला, ‘‘तुम ने तो मेरी नींद ही गायब कर दी है. जिस दिन से मैं ने तुम्हारा डांस देखा है, उस दिन से मेरे दिमाग में वही घूमता रहता है. रात में नींद ही नहीं आती है.’’

यह सुन कर मेनका एक गाना गाने लगी, ‘मु झे नींद न आए, मु झे चैन न आए, कोई जाए जरा ढूंढ़ के लाए, न जाने कहां दिल खो गया…’

‘‘अरे मेनका, तुम तो गजब का गीत गाती हो. मैं तो सम झा था कि तुम सिर्फ डांस ही करती हो. कोयल से भी सुरीली आवाज है. इस तरह की सुरीली आवाज कम लोगों को ही मिलती है…’’

वे दोनों काफी समय तक इधरउधर की बहुत सारी बातें करते रहे. रवि को मेनका से यह भी जानकारी मिली कि उस के पिता सरकारी अस्पताल में कंपाउंडर हैं और मां सरकारी स्कूल में टीचर हैं. बातें करतेकरते पता ही नहीं चला और भोर के 4 बजे गए.

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मेनका बोली, ‘अब कल रात को बात करेंगे.’

रवि ने हां बोला और सुबह की सैर के लिए बाहर चला गया.

चायनाश्ता कर के रवि समय पर अपनी गुमटी पर हाजिर हो गया. उस के दिमाग से अब मेनका का चेहरा उतर ही नहीं रहा था.

ठीक 10 बजे मेनका आई और मुसकराते हुए चिप्स और चौकलेट ली. आंखों से इशारा किया, पैसे दिए और चलने लगी.

रवि पैसे नहीं लेना चाहता था, लेकिन वहां कई लोग खड़े थे, इसलिए वह पैसे लेने से इनकार नहीं कर सका.

मेनका अब हर रात रवि को फोन करती थी. छुट्टी का दिन छोड़ कर वह जब भी स्कूल आती, गुमटी पर जरूर आती. चिप्स और चौकलेट के बहाने रवि को नजर भर देखती और चली जाती.

रवि की शादी का रिश्ता आया था. रवि के पिताजी ने उस से कहा, ‘‘मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती है. तुम्हारी मां भी काम करतेकरते परेशान हो जाती है. जीतेजी अगर अपनी बहू देख लेते तो…’’

‘‘पिताजी, इस गुमटी से 3 लोगों का ही पेट पालना मुश्किल होता है. किसी तरह घर में 2 कमरे बन जाते, तब शादी कर लेता,’’ रवि ने कहा.

The Kapil Sharma Show : Kapil Sharma ने Archana Puran Singh पर लगाया ये बड़ा इल्ज़ाम ! देखें वीडियो

सोनी चैनल पर प्रसारित होने वाला कॉमेडी शो  ‘The Kapil Sharma Show’ में जब भी फिल्म से जुडी कोई स्टारकास्ट आती है तो मस्ती और धमाल ज़रूर होता है. कपिल के मस्ती भरे अंदाज़ को दर्शक भी काफी पसंद करते हैं. शो का  पिछला हफ्ता  भी काफी  मजेदार रहा. क्योंकि शो में पहुंची द फेम गेम (The fame Game) और ए थर्सडे (A Thursday) की कास्ट ,और शो में हुआ खूब मस्ती और धमाल.  इस शो में कपिल अर्चना पूरन सिंह टांग खींचते हैं जिसे दर्शक भी अब काफी पसंद करने लगे हैं.

अब शो के आने वाले हफ्ते की  झलक भी सामने आ गई है. अगले हफ्ते फिल्म निर्माता साजिद नाडियाडवाला अपनी अपकमिंग फिल्म की स्टार कास्ट टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) और कृति सेनन (Kriti sanon) के साथ शो में नजर आएंगे .यानी इस शो का आने वाला एपिसोड काफी एंटरटेनिंग होने वाला है क्यूंकि साजिद कपिल से अपने पर्सनल राज़ शेयर करेंगे.

लेकिन इसी बीच इस शो का एक वीडियो तेजी के साथ वायरल हो रहा है ,कपिल शर्मा इस वीडियो में शो की गेस्ट अर्चना पूरन सिंह पर प्रोड्यूसर्स से फ़िल्में हड़पने का गंभीर आरोप लगाते  हुए नज़र आ  रहे हैं. लेकिन अर्चना कपिल के इन आरोपों पर गुस्सा होने की बजाय अपने बेबाक अंदाज़ से ठहाके मार कर हँसते हुए दिखाई देती हैं.

हुआ यूँ कि शो में आने वाले गेस्ट फिल्म निर्माता  साजिद नाडियाडवाला और अर्चना पूरन सिंह काफी पुराने दोस्त हैं ,और साजिद ने ही अर्चना को इंडस्ट्री में पहला ब्रेक दिया था. जब ये बात साजिद ने कपिल को बताई तो कपिल ने चुटीले अंदाज़ में अर्चना कि खिंचाई करते हुए कहा ‘अर्चना जी ये बात ठीक नहीं है आप धमकाकर फिल्म साइन करवाती हैं. कपिल के इस आरोप पर अर्चना चौंकने कि बजाय खूब ठहाके मार कर हंसती हैं.

साधारण छाती का दर्द हो सकता है एनजाइना, जानें कैसे

छाती का दर्द सभी को अमूमन होता ही है और इस को हम बहेत आसानी से गैस या अपच के दर्द से जोड़ देता है. अगर आप भी ज्यादातर छाती के दर्द से परेशान है तो जितनी जल्जी हो सके आप डाक्टर से संपर्क करें क्योंकि ये दर्द समान्य नही बल्कि एनजाइना को  एनजाइना पेक्टोरिस भी कहते है हो सकता है. एनजाइना एक प्रकार का छाती का दर्द है जो हृदय में रक्त के प्रवाह में कमी के कारण होता है. एनजाइना कोरोनरी धमनी (coronary artery) की बीमारी का एक लक्षण है. एनजाइना देखा जाए तो सामान्य है, फिर भी यह अन्य प्रकार के सीने में दर्द, जैसे कि अपच के दर्द या परेशानी से अलग करना मुश्किल हो सकता है. अगर आपको छाती में दर्द होता है, तो तुरंत डाक्टर की सलाह लें, इसमें बिल्कुल देरी ना करें.

पेशेंट कैसे महसूस करते है एनजाइमा को

अगर आप किसी एनजाइना पेशेंट से पहुछेंगे तो वो कहेगा-  कि उनके सीने को निचोड़ा जा रहा है या ऐसा महसूस कर रहा है जैसे उनके सीने पर भारी वजन रखा गया है. एनजाइना एक नए प्रकार का दर्द है जिसे केवल डौक्टर ही पहचान सकता है.

कैसे पहचाने एनजाइना

सीने में दर्द या बेचैनी, जो संभवतः दबाव, निचोड़ और जलन होना.

सीने में दर्द के साथ आपकी बाहों, गर्दन, जबड़े, कंधे या पीठ में दर्द होना.

जी मिचलाना.

थकान.

सांसों की कमी.

पसीना आना.

सिर चकराना.

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क्या है एनजाइना के कारण

एनजाइना आपके हृदय की मांसपेशियों में रक्त के प्रवाह में कमी के कारण होता है. आपके रक्त में औक्सीजन होता है, जिसे आपके हृदय की मांसपेशियों को जीवित रहने की आवश्यकता होती है. जब आपके हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त औक्सीजन नहीं मिलता, तो यह इस्किमिया नामक एक स्थिति का कारण बनता है. आपके हृदय की मांसपेशियों में रक्त के प्रवाह में कमी का सबसे आम कारण कोरोनरी धमनी रोग (सीएडी) है.

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एंजाइना का खतरा होता है इन कारण से

ये बीमारी आमतौर पर पुरुषों में ज्‍यादा पाई जाती है. खासकर, जो लोग तम्‍बाकू या धूम्रपान करते हैं. डायबिटीज के कारण भी इस बीमारी के होने की आशंका ज्‍यादा रहती है. हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्‍ट्रौल इस बीमारी को बढ़ावा देती है. एक्‍सरसाइज न करने वालों को भी एंजाइना का खतरा रहता है. इसके अलावा अधिक उम्र में और जेनेटिक कारणों से ये बीमारी हो सकती है.

अंधविश्वास: हिंदू धर्म में गोबर की पूजा, इंसानों से छुआछूत

लेखक- धीरज कुमार

हिंदू धर्म में पेड़पौधे की पूजा की जाती है. तुलसी के पौधे में रोजाना जल दिया जाता है. पीपल के पेड़ के नीचे दीया जलाया जाता है और पूजा की जाती है.

औरतें बरगद के पेड़ के नीचे पूजा कर के अपने पतियों की लंबी उम्र होने की कामना करती हैं. इस तरह अनेक पेड़पौधे हैं, जिन की पूजा हिंदू धर्म में रीतिरिवाज और श्रद्धा से की जाती है.

इस धर्म में जानवरों की पूजा भी की जाती है. गाय को माता की तरह सम्मान दिया गया है. बैल को भी पूजा जाता है. बैल को भगवान शंकर की सवारी माना जाता है. चूहे को गणेश की सवारी माना जाता है. बंदर को हनुमान का रूप माना जाता है. यहां तक कि विषधर सांपों की भी पूजा नागपंचमी के दिन की जाती है, जिन के काटने से आदमी की तुरंत मौत हो सकती है.

इस धर्म में नदी, तालाब, पोखर, जलाशय की पूजा की जाती है. कुछ नदियों को तो काफी पवित्र माना जाता है, भले ही उन में काफी गंदगी हो.

गंगा, यमुना जैसी नदी को मोक्षदायिनी माना जाता है. पहाड़ों को भी पवित्र माना जाता है और पूजा जाता है, इसीलिए अनेक मंदिर पहाड़ों पर भी बने हैं. लोग वहां भगवान के दर्शन करने  जाते हैं.

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इस तरह से देखा जाए, तो हिंदू धर्म में जानवरों, पशुपक्षियों, कीड़ेमकोड़ों, पेड़पौधों सभी की पूजा की जाती है. पर इनसानों से काफी भेदभाव किया जाता है. सिर्फ भेदभाव ही नहीं किया जाता है, बल्कि लोगों के बीच काफी छुआछूत पनपी है.

रोहतास के डेहरी ब्लौक के विनोद कुमार कुशल कारोबारी हैं. वे हिंदू धर्म पर चुटकी लेते हुए कहते हैं, ‘‘हिंदू धर्म में गाय, बैल, बंदर, चिडि़या, पेड़पौधे, कीड़ेमकोड़े, सांप सब को सम्मान दिया जाता है, पर इनसानों को नफरत से देखा जाता है.

‘‘यहां तक कि हिंदू धर्म में गोबर की पूजा भी की जाती है, पर इनसानों से भेदभाव किया जाता है. हिंदू धर्म में बिना गोबर के पूजा नहीं होती है. सभी पूजा में गोबर की अहमियत है यानी गोबर होना जरूरी है. कुछ तरह की पूजा में तो गाय की बछिया के मूत्र का भी इस्तेमाल किया जाता है. उसे काफी पवित्र माना जाता है. उस से कोई घृणा नहीं करता है.

‘‘पर, यहां आम इनसान की तो कोई अहमियत नहीं है. जिस इनसान से आप अपने खेतों में काम करवाते हैं, मजदूरी करवाते हैं, उस से आप के खेतखलिहान, फसल में छूत नहीं लगती है. लेकिन आप उसे जब अपने घर खाने के लिए देते हैं, तो उसे थाली में नहीं खिलाते हैं, बल्कि पत्तल में खिलाना पसंद करते हैं. उसे छूते ही आप अपवित्र मानने लगते हैं.’’

ओमप्रकाश बाल्मीकि अपनी आत्मकथा ‘जूठन’ में लिखते हैं कि बचपन में उन के मातापिता गांव के भोज, जलसे में फेंकी गई पत्तलों से बचा भोजन इकट्ठा कर घर लाते थे. फिर उसे धूप में सुखा कर रख देते थे. जरूरत पड़ने पर उसे पानी में भिगो कर खाते थे.

ये बातें काल्पनिक नहीं हैं. यह तो सचाई है. यह सब छुआछूत के चलते हालफिलहाल तक चलन में था. लेकिन हिंदू धर्म के ब्राह्मणों, पंडितों, पुजारियों, धर्माचार्यों ने कभी इस का विरोध नहीं किया. कभी भी उन्हें मुख्यधारा में लाने की कोशिश नहीं की.

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आज जब गरीब तबके में जागरूकता फैली तो यह काम बंद हो चुका है. लेकिन ऊंचे तबके के लोगों के मन में आज भी इस बात की कसक है कि उन की मरजी से जीने वाले लोग आज अपनी मरजी से जीने लगे हैं. कल तक वे निचले तबके के लोगों पर जुल्म करते थे और आज भी कर रहे हैं. बस थोड़ी कमी आ गई है, क्योंकि आज इन में स्वाभिमान जागने लगा है.

आज भी कुछ गांवों में ऊंचे तबके के लोग निचले तबके के लोगों को जातिसूचक शब्दों से ही संबोधित करते हैं. वे अपने नामों से कम जाने जाते हैं, बल्कि अपने जातिसूचक नामों से ज्यादा जाने जाते हैं.

यही वजह है कि आज भी निचला तबका इन जातियों से दूरी बना कर रहता है. कई बार तो वे हिंदू धर्म में रह कर कुंठा का अनुभव करते हैं, इसीलिए कुछ लोग धर्म परिवर्तन की चाह रखने लगे हैं. उन का कहना है कि जब हिंदू धर्म हम लोगों को जोड़ कर रख नहीं सकता है, तो उस धर्म को अपने माथे पर ढोने से क्या फायदा.

गांव में आज भी ऊंचे तबके वालों के घर भोज, जलसे, जन्ममृत्यु, विवाह जैसे मौकों पर लोगों को भोज खिलाया जाता है, तो सब से पहले ब्राह्मणों को खिलाया जाता है. इस के बाद ऊंची जाति के लोग खाते हैं. इस के बाद निचले तबके के लोगों को खिलाया जाता है. वह भी गलियों या खेतों में जमीन पर बैठा कर खिलाया जाता है, इसीलिए आज निचले तबके के पढ़ेलिखे नौजवान इन के घरों के जलसे, भोज खाने से परहेज करते हैं.

आपसी नफरत का ही नतीजा है कि निचले तबके के लोगों का गांव में घर एक तरफ किनारे होता है, जबकि ऊंची जाति वाले लोगों का घर दूसरी तरफ अलग होता है.

गांव में जाने के बाद इस बात का एहसास हो जाता है कि ऊंची जाति वालों का घर किधर है और निचले तबके वालों का घर किधर है. कोई भी इसे आसानी से पहचान सकता है.

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यह जातीय नफरत का ही नतीजा है कि आज भी गांव का समाज वैसा के वैसा ही है जैसा आजादी के समय था. गांवों में बिजली आ गई है, सड़कें बन गई हैं, मोबाइल फोन और इंटरनैट का खूब इस्तेमाल हो रहा है, पर अगर नहीं बदला है तो लोगों के विचार, भेदभाव करने का नजरिया, छुआछूत करने की आदत. लोगों को निचले तबके से नफरत करने की सोच में कोई बदलाव नहीं आया है. आज भी सब जस का  तस है.

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