सोशल मीडिया का अंधेरा यानी अंधविश्वास

कहते हैं न हर सिक्के के दो पहलू होते हैं,जब सिनेमा आया तो सुसंस्कृत संभ्रांत जन सिनेमा मे काम करने वालों को ओछी निगाह से देखा करते थे. यही नहीं सिनेमा में काम करने वाले के अलावा देखने वालों को भी हेय की दृष्टि से देखा जाता था. धीरे-धीरे स्थिति बदली वैसे ही आज सोशल मीडिया है जिसके दो पक्ष हैं एक पक्ष उजला, दूसरा स्याय.उजले पक्ष के समर्थक सोशल मीडिया की अच्छाई बताते नहीं थकते वहीं दूसरी तरफ जो लोग सोशल मीडिया को अच्छा नहीं मानते वे इसकी बुराई करते नहीं अघाते.

मगर सत्य यह है, की किसी भी चीज के दो पहलू होते हैं- अच्छा और बुरा. यही स्थिति सोशल मीडिया के साथ भी है. दरकार होती है सिर्फ नीर क्षीर विवेक की, समझदारी की. सोशल मीडिया पर जो खबरें चलती है वह पूरी तरह सौ फीसदी सच नहीं होती बहुतेरे वीडियो, खबरें, भ्रामक होती है. अब सारा दारोमदार हमारे ऊपर है की हम सोच समझकर उसे ग्रहण करें समझे की क्या गलत है क्या सही है. इस लेख में हम सोशल मीडिया के द्वारा प्रसारित “अंधविश्वास” को बेनकाब करने की कोशिश कर रहे है-

डूबने पर “नमक” का उपचार !

पिछले दिनों व्हाट्सएप पर एक वीडियो चल रहा था, जिसमें डंके की चोट पर बताया जा रहा था की अगर कोई आपका परिजन डूब जाता है और डॉक्टर उसे मृत भी घोषित कर देते हैं तो आप निश्चित रहिए!! क्योंकि आपका परिजन नमक के उपचार से उठ खड़ा होगा उसे जीवन पुन: प्राप्त हो जाएगा.
एकबारगी, पढ़ा लिखा विवेकशील कहलाने वाला व्यक्ति भी यह वीडियो देखता तो यही मानता कि यह सही है. क्योंकि इस वीडियो को प्रसारित करने वाले ने बड़ी चतुराई से दो और दो को पांच किया है. जिसे समझने के लिए चिकित्सीय, वैज्ञानिक बौद्धिकता की दरकार होती है.

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इस वीडियो में बताया गया कि कैसे डूब कर मृत व्यक्ति को 24 घंटे नमक (खड़ा नमक) से दबाकर रखा जाए इससे उसका हृदय पुन: स्पदंन करने लगेगा. यह देख आम बुद्धि का आदमी इसे जनहित में जारी वीडियो समझेगा मगर यह पूरी तरह अवैज्ञानिक है. हाल ही में मध्यप्रदेश के इंदौर महानगर के निकट एक गांव में 2 भाई एक साथ डूब गए और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. और इसके बाद डॉक्टर, ग्रामीण देखते रहे उनके परिजनों ने नमक मंगाया और दोनों शव को नमक से ढक कर उनके जीवित होने का इंतजार करने लगे. यह खबर भी धीरे-धीरे सोशल मीडिया में प्रसारित होने लगी अंततः चिकित्सक व प्रशासन की समझाइश पर इस अंधविश्वास का अंत हुआ.

इक्कीसवीं शताब्दी और हम !

अक्सर लोग कहते हैं हम 21वीं शताब्दी कंप्यूटर युग में जी रहे हैं और अपनी बौद्धिकता, तार्किकता, वैज्ञानिक समझ का हवाला देकर स्वयं को श्रेष्ठतम घोषित करते हैं. मगर सच्चाई यह है की आज भी हमारे देश में अपढ, गरीब तो छोड़िए पढ़े लिखे समझदार कहलाने वाले तबके में भी अंधविश्वास की छाया दिखाई देती है .साक्षरता के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है मगर शुद्र सोच और स्वार्थ परक बुद्धि के कारण बहुसंख्यक आज भी अंधविश्वास से जकड़ा हुआ है. और इस अंधविश्वास रूढिग्रस्त सोच को खत्म करने के लिए शिक्षा की ज्योति फैलानी जरूरी है.अन्यथा “नमक”जैसे अनेक अंधविश्वास हमारा माखौल उड़ाते रहेंगे.

संविधान में भी उल्लेख है !

हमारे संविधान निर्माता नि:संदेह हमारी नब्ज अपने हाथों में रखते थे. इसी कारण संविधान के अनुच्छेद 51ए (एच) में मानवीयता, वैज्ञानिक चेतना और तार्किक सोच को बढ़ावा देने के लिए सरकार और समाज की जिम्मेदारी तय की गई है. मगर जो अंधविश्वास, रूढ़ीवादी सोच सैकड़ों हजारों सालों से समाज के मन मस्तिष्क में अपना घर बना चुकी है वह सरकार व समाज के लिए चुनौती बनी हुई है.

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आज जब सोशल मीडिया एक ताकतवर हथियार बन चुका है तब समाज के बौद्धिक वर्ग से अपेक्षा की जा सकती है की सोशल मीडिया में फैलते कचरे पर निगाह पड़ते ही उसका पोस्टमार्टम कर दिया जाए. देश की प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाएं, चैनल वायरल न्यूज़ के एपिसोड बनाकर झूठ, ढोंग, अंधविश्वास को बेनकाब करने का काम कर रहे हैं मगर इस काम को बढ़ाना और निरंतरता अपरिहार्य है.

किसान ने वैज्ञानिक खेती से मिसाल कायम की

लेखक-  बृहस्पति कुमार पांडेय

जबकि इन उद्योगों और उद्योगपतियों को जिन किसानों से अपना उद्योग चलाने के लिए ज्यादातर कच्चा माल मिलता है, उन के खेती उत्पादों को यही उद्योगपति और इन के बिचौलिए औनेपौने दाम में खरीद कर मोटा पैसा बनाते हैं.

देश के अन्नदाता तमाम मुसीबतों को झेल कर अनाज, फलफूल, सब्जियां, दूध उत्पाद वगैरह पैदा करते हैं और जब कीमत तय करने की बारी आती है तो इस के लिए उन्हें सरकार और बिचौलियों के भरोसे रहना पड़ता है. इसी वजह से अकसर किसानों को खेती में घाटा सहना पड़ता है.

उद्योगों के लिए सरकारी नीतियों में ढील से ले कर मनमाने तरीके से कीमत तय करने तक की छूट दी गई है, वहीं इन उद्योगपतियों के रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले किसानों और खेती उत्पादों को ले कर सरकारों का नजरिया सालों से ढीलाढाला ही रहा?है. इस का नतीजा है कि उद्योगपति दिन दूना रात चौगुना माल कमाते हैं, वहीं दूसरी ओर किसान माली तंगी का शिकार हो कर खुदकुशी जैसे सख्त कदम उठाते हैं.

सरकार द्वारा हर साल पेश होने वाले सरकारी बजट में भी किसानों को ले कर बस झुनझुना ही अब तक थमाया जाता रहा है. कभी मुफ्तखोरी, तो कभी जीरो बजट खेती का सपना दिखा कर किसानों की तरक्की के बड़ेबड़े दावे सरकारों द्वारा किए जाते रहे हैं, लेकिन किसानों की माली हालत सुधरने के बजाय दिनोंदिन बदतर होती जा रही है. नतीजतन, किसान और उस के परिवारों के लोग धीरेधीरे खेती से दूर होने लगे हैं और अपनी जरूरतभर की चीजें उगाने में लगे हैं.

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अगर किसानों को ले कर सरकारों का नजरिया ऐसा ही रहा तो एक दिन भारत की एक बड़ी आबादी को खाने के लाले पड़ जाएंगे. उस दौरान सरकार और उद्योगों के पास पछताने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं होगा.

इन उलट हालात में भी जिन किसानों ने खुद को खेती से जोड़ कर वैज्ञानिक तरीका अपनाते हुए खेती की पहल की है, उन्हें खेती के जरीए न केवल बेहतर रोजगार मिला?है, बल्कि कीमत तय करने को ले कर सरकार और बिचौलियों से छुटकारा भी मिला है.

ऐसे किसानों ने लीक से हट कर खेती की शुरुआत की तो इन किसानों ने न केवल इज्जत और शोहरत बटोरी, बल्कि खेती भी दूसरे उद्योगों की तरह बेहतर रोजगार का जरीया बन गई.

ऐसे ही एक किसान?हैं कौशल कुमार सिंह, जो बस्ती जिले के हर्रैया तहसील के ब्लौक विक्रमजोत के रहने वाले हैं. उन्होंने खुद को उलट हालात से उबारते हुए वैज्ञानिक तरीके से नकदी फसलों की खेती कर के न केवल अपनी आमदनी में इजाफा किया है, बल्कि शानोशौकत और शोहरत भी हासिल की.

केले की खेती से शुरुआत :  कौशल कुमार सिंह ने कुछ साल पहले 3 एकड़ खेत में केले की जी 9 प्रजाति की रोपाई करने का फैसला लिया. उन्होंने प्रति एकड़ की दर से 1300 पौधे रोपे. इस पर कुल 90,000 से

1 लाख रुपए तक की लागत आई.

उन्होंने इस फसल में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई मात्रा में खाद और उर्वरक का इस्तेमाल किया. नतीजा यह रहा कि आसपास के दूसरे किसानों की अपेक्षा उन के केले की एक घार का न्यूनतम औसत वजन

30 किलोग्राम से ज्यादा आया. इस तरह से उन्होंने महज 1 एकड़ खेत से तकरीबन

400 क्विंटल उपज हासिल की. इस से उन्हें

4 लाख रुपए की खालिस कमाई हुई. तब से वे लगातार केले की खेती करते आ रहे हैं.

अच्छी बात यह रही कि केले की मार्केटिंग को ले कर उन्हें जोखिम नहीं उठाना पड़ा क्योंकि केले के आढ़तियों ने घर से ही बाजार मूल्य से ज्यादा पैसा दे कर उन की फसल खरीद ली. वर्तमान में उन के यहां से एक थोक कारोबारी तकरीबन 70 क्विंटल केले की खरीदारी आराम से कर लेता है.

उन्होंने बताया कि केले की फसल में ज्यादातर फंगस का प्रकोप होता है. इस बीमारी से बचाव के लिए कार्बंडाजिम और कौपर औक्सीक्लोराइड का इस्तेमाल करते?हैं जिस से वे फसल को होने वाले नुकसान से बचा पाते हैं.

अनार ने दिलाई कामयाबी : जहां कौशल कुमार सिंह के आसपास के गांव के किसान पारंपरिक तौर पर गेहूं, धान व तिलहन की खेती करते हैं, वहीं उन्होंने अनार की उन्नत प्रजाति रोपने का फैसला किया और उन्होंने सवा बीघा खेत में अनार के पौधे रोप दिए. पौधों की रोपाई के दौरान उन्होंने पौधे से पौधे की दूरी

9 फुट और लाइन से लाइन की दूरी 9 फुट रखी.

कौशल कुमार सिंह द्वारा लगाए गए अनार के पौधे से हर साल अच्छी तादाद में फूल मिल जाते?हैं. उन्होंने बताया कि अनार की फसल के साथ सहफसल के रूप में वे सूरन की गजेंद्र प्रजाति की खेती कर रहे हैं जिस से उन्हें अच्छीखासी आमदनी होती है. साथ ही, एक फसल के खराब होने की दशा में उन्हें नुकसान न के बराबर होने की संभावना होती है.

स्ट्राबेरी उपजाने वाले पहले किसान : कौशल कुमार सिंह बस्ती जिले के पहले ऐसे किसान हैं, जिन्होंने बिना पौलीहाउस या ग्रीनहाउस लगाए भरपूर मात्रा में स्ट्राबेरी की फसल उगाने में काबयाबी पाई है.

उन्होंने स्ट्राबेरी के पौधों को हरियाणा से मंगा कर अपने खेतों में रोपा. वे स्ट्राबेरी के खेत में किसी तरह के रासायनिक खादों का इस्तेमाल नहीं करते?हैं. साथ ही, स्ट्राबेरी से ज्यादा उत्पादन हासिल करने के लिए वे मेंड़ों पर मल्चिंग कर उस पर स्ट्राबेरी की रोपाई करते?हैं. इस से खेत में अनावश्यक रूप से खरपतवार की रोकथाम अपनेआप हो जाती है और पौधों की बढ़वार व फलों का विकास भी तेजी से होता?है.

कौशल कुमार सिंह के खेतों में तैयार स्ट्राबेरी के फल बाजार में बिकने वाले स्ट्राबेरी के फलों की अपेक्षा डेढ़ से दोगुना बड़े आकार के होते हैं और स्वाद भी उन से ज्यादा अच्छा होता?है.

रिंगपिट विधि से गन्ने की बोआई : गन्ने की खेती में किसानों को ऊंची लागत और बढ़ती मेहनत के बावजूद भी उत्पादन कम मिलता है. ऐसे किसानों को उम्मीद से कम मुनाफा मिल पाता?है.

इस समस्या से निबटने के लिए किसान कौशल कुमार सिंह ने पारंपरिक तरीके से गन्ने की खेती को छोड़ रिंगपिट विधि से खेती करने का फैसला लिया. इस से उन की खेती की लागत में न केवल कमी आई है, बल्कि उत्पादन में भी अच्छाखासा इजाफा हुआ है.

उन्होंने बताया कि रिंगपिट विधि से गन्ना बोने के लिए खेत की जुताई करने की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि इस तरह के गन्ने की बोआई के लिए रिंगपिट डिगर मशीन से खेत में गड्ढे तैयार करते?हैं. इस में एक गड्ढे से दूसरे गड्ढे की दूरी 120 सैंटीमीटर होती है और हरेक गड्ढा 90 सैंटीमीटर व्यास का होता?है.

इस तरह 1 एकड़ में गड्ढे तैयार करने पर तकरीबन 2500-2700 गड्ढे तैयार हो जाते?हैं. इन गड्ढों की गहराई तकरीबन 30 सैंटीमीटर से 45 सैंटीमीटर के आसपास रखी जाती है.

उन्होंने यह भी बताया कि वे गन्ने की बोआई के पहले गड्ढों में 5 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद, 60 ग्राम एनपीके, 40 ग्राम यूरिया और 5 ग्राम फोरेट या फुराडान डाल कर मिट्टी में अच्छी तरह मिला देते हैं. इस तरह प्रति एकड़ तकरीबन 100 क्विंटल गोबर की खाद की जरूरत पड़ती?है.

उर्वरक के रूप में 150 किलोग्राम एनपीके, 104 किलोग्राम यूरिया और

12 किलोग्राम फुराडौन का इस्तेमाल करते?हैं.

इस के बाद वे गन्ने के 2 से 3 आंख वाले काटे गए टुकड़ों को 0.2 फीसदी बाविस्टीन के घोल में 20 मिनट तक डुबो कर उपचारित करते?हैं और बोआई के लिए खोदे गए गन्ने के टुकड़े साइकिल के पहिए की तीलियों की तरह गोलाई में बो देते हैं.

इस तरह उन को प्रति एकड़ खेत के लिए तकरीबन 55 से 60 क्विंटल गन्ना बीज की जरूरत पड़ती है. गड्ढों में गन्ने की बोआई के बाद ऊपर से मिट्टी की परत डाल कर ढक देते?हैं. इस तरह से बोए गए गन्ने का जमाव भी अच्छा होता?है.

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रिंगपिट विधि से गन्ने की बोआई से सिंचाई, उर्वरक देना, पत्तियों की?छंटाई और कटाई आसान हो जाती?है और उपज भी अच्छी मिलती है.

उन्होंने बताया कि सामान्य विधि से गन्ने की बोआई करने पर महज 300-400 क्विंटल उपज मिलती थी. लेकिन रिंगपिंट विधि से गन्ना बोने से उपज दोगुनी मिलने लगी है.

अगर समय से रिंगपिट विधि से बोआई की जाए और संस्तुत मात्रा में खादउर्वरक का इस्तेमाल किया जाए तो यह उत्पादन 1,000 क्विंटल प्रति एकड़ तक मिल सकता है.

खेती में जरूरी संसाधनों का इस्तेमाल?: कौशल कुमार सिंह खेती में काम आने वाले सभी तरह के आधुनिक यंत्रों का इस्तेमाल करते हैं. वे खेती के लिए छोटेबड़े सभी यंत्र खरीद रहे?हैं. वर्तमान में उन के पास ट्रैक्टर, ट्रौली और उस में उपयोग आने वाले यंत्र जैसे रोटावेटर, रिंगपिट डिगर, कल्टीवेटर जैसे तमाम यंत्र हैं.

जंगली पशुओं से फसल बचाने के पुख्ता इंतजाम?: कौशल कुमार सिंह ने अपनी बोई गई फसल को जंगली पशुओं से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हुए हैं.

उन्होंने केला, अनार, सूरन, स्ट्राबेरी वगैरह फसलों की सुरक्षा के लिए कंटीले तारों से पूरे खेत की फेसिंग कराई है. उन के?द्वारा की

गई व्यावसायिक फसल की सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के चलते फसल को कोई नुकसान नहीं

पहुंचता है.

कौशल कुमार सिंह वर्तमान में अनार, केला, स्ट्राबेरी, गन्ना, सूरन के साथ ही साथ आलू, टमाटर, मटर, गेहूं, धान की फसलें वगैरह भी लेते हैं. इन फसलों से उन्हें भरपूर उपज मिलती है. डिजिटल और उन्नत तकनीक के चलते उन्हें किसी तरह की मार्केटिंग की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है.

कौशल कुमार सिंह को बस्ती जिले में आम आदमी से ले कर नेता, जनप्रतिनिधि व सरकारी महकमों के अधिकारीकर्मचारी भी इज्जत व सम्मान देते हैं.

कौशल कुमार सिंह का कहना है कि किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथसाथ आधुनिक तरीकों को अपनाते हुए खेती करनी होगी. उन्नत तकनीक के जरीए ही किसान फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ जोखिम और मार्केटिंग की समस्या से छुटकारा पा सकता है.

वे कहते हैं कि किसानों को खेती के आधुनिक तरीके अपनाने होंगे तभी खेती से परिवार के लोगों की सामान्य जरूरतें पूरी की जा सकें.

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उन के मुताबिक, किसान उन्नत तकनीक के जरीए न केवल खुद को दीनहीन स्थिति से उबार सकता?है, बल्कि इज्जत और सम्मान भी पा सकता है.                                   ठ्ठ

‘बहूबेगम’ के इस एक्टर के फैशन ने मचाया धमाल, देखें फोटोज

सीरियल ‘बहूबेगम’ फेम स्टार अरजीत तनेजा ने अपनी एक्टिंग से तो घर घर में पहचान बनाई ही है पर वो उन टीवी एक्टर्स में शामिल है जो सोशल मीडिया पर काफी अच्छी पकड़ रखते है. अरजीत बखूबी जानते है की उनको कैसे अपने फैंस के बीच एक खास जगह बनानी है. उनके अकले इंस्टाग्राम पर 1.3 मिलियन फौलोवर्स है. अरजीत जब भी अपनी कोई लेटेस्ट फोटो शेयर करत है तो फैंस कमेंट करते नहीं थकते है. अरजीत ने अपने कैरियर की शुरुआत टीवी के पौपुलर सीरियल्स में से एक रहे ‘बड़े अच्छे लगते है’ से की थी जिसमें उन्होंने केमियो रोल किया था. इसके बात ‘कुमकुम भाग्य’ और ’प्यार को हो जाने दो’ जैसे सीरियल्स में भी उनकी एक्टिंग को काफी पसंद किया गया. अरजीत अपनी फिटनेस के लिए भी काफी चर्चा में रहते है इसी कारण से उनको साल 2018 में ‘जी गोल्ड आवार्ड मोस्ट फिट एक्टर’ में नोमिनेशन मिला. हालाकी वो ये अवार्ड जीत नहीं पाएं. अरजीत यूथ में इतने पौपुलर फेस है की फैंस उनकी स्टाइल को काफी फौलो करते है. चलिएं डालते है अरजीत स्टाइल पर एक नजर…

इम्ब्रौइडरी है काफी पसंद

अगर आप किसी फंक्शन में जाने वाले है जैसे किसी खास की संगीत या सगाई तो आप इस लुक को जरुर ट्राय करें. ब्लैक पठानी कुर्ता पजामा में इम्ब्रौइडरी इस पुरे स्टाइल को काफी रिच लुक दे रही है. इम्ब्रौइडरी अरजीत की जुती इस लुक को और भी ज्यादा अच्छा बना रही है.

 

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Azaan-ing ✨ #BahuBegum

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औड फैशन को भी ट्राय करना है जरुरी

अगर आप भी अरजीत की तरह कुछ औड ट्राय करने के शौकीन है तो ये लुक आपके लिए परफेक्ट है. इस लुक को आप गौर से देखेंगे तो ये आपको औल्ड 90’s की याद दिलाएंगा. जिस टाइम चेन वाले ब्लेजर पहने जाते थे. ये लुक को आप किसी पार्टी में ट्राय कर सकते हैं.

 

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🐶 face! 😛

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गैजेट्स से भी मिल सकता है परफेक्ट लुक

अगर आप कपड़ो को लेकर ज्यादा सोचना नही चाहते है और दूसरों से हटके भी दिखना चाहते है तो अरजीत का ये लुक आपको जरुर पसंद आएंगा. कभी कभी हमारे गैजेट्स कपड़ों से ज्यादा ध्यान खीच लेते है. सादी ग्रे कलर की टी-शर्ट के साथ अरजीत ने रेड वौच का जो कौम्बिनेशन किया है वो काफी काबिले तारीफ है.

 

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#GhadiGhadiKaKhelHai🤷‍♂️ #TryingTooHardToPose🙋‍♂️

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पिंक कलर है लड़को के लिए भी परफेक्ट

अरजीत के इस लुक में सबसे खास बात है उनके चौइस औफ कलर की, लाइट पिंक वाले इस लुक में काफी अलग तो लग ही रहे है साथ ही इस लुक में वो ये भी पता रहे की पिंक कलर बस लड़कियों तक ही सीमित नहीं है.

 

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🇬🇧🕺🍾🌟

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खेसारी से लेकर अक्षरा सिंह तक, भोजपुरी स्टार्स ने ऐसे बनाया Janmashtami को खास

इस गाने को खेसारी लाल यादव के साथ पमेला जैन और खुशबू जैन ने गाया है. गाने के बोल हैं मुरली की धुन सुनके. गाने के लिरिक्स गीतकार प्‍यारे लाल यादव ने लिखे हैं. यूट्यूब पर इस गाने को देखने वालों की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है. यह गाना पिछले साल आया था और अब भी इस गाने को लोग पसंद कर रहे हैं.

इस गाने को खेसारी लाल यादव के साथ पमेला जैन और खुशबू जैन ने गाया है. गाने के बोल हैं मुरली की धुन सुनके. गाने के लिरिक्स गीतकार प्‍यारे लाल यादव ने लिखे हैं. यूट्यूब पर इस गाने को देखने वालों की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है. यह गाना पिछले साल आया था और अब भी इस गाने को लोग पसंद कर रहे हैं.

खास बात ये है कि इस गाने में खुद खेसारी लाल यादव मुरली बजाते दिख रहे हैं जिससे उनके फैंस में खासा उत्साह भर गया है. इतना ही नहीं उन्होंने गजब का डांस भी किया है. गाने के बोल प्यारेलाल यादव ने लिखे हैं.

अक्षरा के इस गाने ने भी किया धमाल…

अक्षरा सिंह के गाने ‘ले गइल बा जान कन्हैया बंशी बजाके’ ने तो कमाल ही कर दिया है. इस गाने की यूट्यूब पर धूम मची हुई है. अक्षरा सिंह के द्वारा गाये गये इस गाने के बोल हरेराम पुजारी ने लिखे हैं.

अंजना सिंह के इस गाने को भी ख़ूब किया जा रहा है पसंद…

भोजपुरी एक्ट्रेस अंजना सिंह का एक कृष्ण गीत भी खूब छाया हुआ है. इस गाने को यूट्यूब पर खूब पसंद किया जा रहा है.

‘नच बलिए 9’: ‘मस्त-मस्त’ गर्ल के साथ यूं नाचे ‘बाहुबली’

बौलीवुड हो या साउथ फिल्म जब भी किसी स्टार की नई फिल्म आती है तो प्रमोशन के लिए वो छोटे पर्दे का ही रुख करते है. कुछ ऐसा ही देखा गया ‘नच बलिए 9’ के सेट पर जब साउथ के बाहुबली और सुपर स्टार प्रभास अपनी आने वाली फिल्म ‘साहो’ के प्रमोशन के लिए यहां पहुंचे. यहां वो अपनी फिल्म की एक्ट्रेस और बौलीवुड स्टार श्रद्धा कपूर के साथ आए थे. ‘नच बलिए 9’ के सेट पर दोनों ने काफी धमाल मचाया. प्रभास ने इस खास मोके पर अपने डांस मूव्स से सभी का दिल जीता.

‘मस्त-मस्त गर्ल’ साथ थिरके प्रभास…

श्रद्धा कपूर के साथ ग्रैंड एंट्री के बाद प्रभास ने ‘मस्त मस्त गर्ल’ रवीना टंडन के साथ सलमान खान के सुपरहिट गाने जुम्मे की रात पर डांस कर शो में चार चांद लगा दिए. इस दौरान दोनों ने इस गाने के सबसे फेमस हुक स्टेप को भी किया. दोनों के डांस को देख कर औडियन्स भी झूमने लगी. प्रभास और रवीना के डांस वीडियों के साथ-साथ फोटोज भी काफी वायरल हो रहे हैं.

 

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Darling #Prabhas’s Dance Step 😍💘💃🙈🙈 On @beingsalmankhan Kick Movie Song💃💃😍 Darling @actorprabhas ❤ and@officialraveenatandon with @shraddhakapoor On the Sets Of #NachBaliye9 For promotions of The film #Saaho in #Mumbai . #Prabhas ❤ #ShraddhaKapoor #SaahoPramotions  #SaahoOnAugust30 #30AugWithSaaho  @actorprabhas . . . . @shraddhakapoor @officialsaahomovie @sujeethsign  #ShraddhaKapoor #Shraddha#Sandy_prabhas_bahubali  #Darling #DarlingPrabhas #Rebelstar#RebelstarPrabhas  #Prabhasraju #PrabhasDance #SalmanKhan#PrabhasInMumbai #AnushkaShetty #PoojaHegde #RebelstarPrabhas#Tollywood #Kollywood #Bollywood #Sandalwood#ActorPrabhas #InstaPrabhas #Pabsu#Prabhas_Raju #SaahoPrabhas #UVCreations

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Wow! @actorprabhas @officialraveenatandon #nachbaliye9 #Saaho @nachbaliyesuperfan

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श्रद्धा कपूर ने भी दिखाया डांस का जलवा

कोरियोग्राफर और ‘नच बलिए 9’  शो के जज अहमद खान ने ही बौलीवुड के भाईजान सलमान खान को इस सुपरहिट गाने पर थिरकाया था. ऐसे में वो अपने इस गाने पर प्रभास का साथ देने के लिए श्रद्धा कपूर के साथ ये हुक स्टेप करते दिखे. इस दौरान प्रभास और श्रद्धा कपूर को यहां देख सभी लोग खुशी से झूम उठे. वहीं, दोनों ने रवीना टंडन के साथ जमकर फोटोज क्लिक करवाईं.

साहो के फिल्म फैंस एक्साइटेड

‘साहो’ का इंतजार सभी को है इस फिल्म में साउथ फिल्मों के सुपर स्टार प्रभास के साथ-साथ बौलीवुड से श्रद्धा कपूर, जैकी श्रौफ, नील नितिन मुकेश और चंकी पांडे जैसे स्टार्स शामिल है. बता दें ‘साहो’ एक तमिल फिल्म है जिसको हिन्दी में भी डब किया जाएगा. इस फिल्म की रिलीजिंग डेट 30 अगस्त है.

‘देसी बौयज’ की इस हौट एक्ट्रेस ने शो किया बेबी बंप, Photos Viral

बौलीवुड एक्ट्रेस ब्रूना अबदुल्लाह यूं तो सोशल मीडिया पर काफी पौपुलर सेलेब्रिटीज में से एक हैं. समय समय पर ब्रूना इंस्टाग्राम हो या फेसबुक फैंस के लिए अपनी लेटेस्ट फोटोज शेयर करती रहती हैं. आपको बता दे की ब्रूना प्रेग्नेंट है जिसके चलते वो आज कल काफी सुर्खियों में हैं. ब्रूना की डिलीवरी डेट नजदीक है और इसी महीने वो मां बनने वाली हैं. ऐसे में वो काफी एक्साइटेड नजर आ रही है. हाल ही में ब्रूना ने इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ प्रेग्नेंसी फोटोज शेयर की किसे फैंस खासा पसंद कर रहे हैं.

बेबी बंप की दिखाई झलक

ब्रूना इन फोटोज में काफी सुंदर नजर आ रही है. प्रेग्नेंसी के स्पेशल पलों को ब्रूना अपने फैंस के साथ शेयर करने में काफी खुश नजर आ रही है. इस फोटो में ब्रूना ने अपने बेबी बंप को हाथों से पकड़ा हुआ है जिससे साफ पता चल रहा है की वो बहुत केयरिंग मदर बनने वाली है. उन्होंने अपनी फोटोज शेयर करते हुऐ बताया की वो अपनी प्रेग्नेंसी के 38वे हफ्ते है. इसके बाद उन्होंने आगे लिखा- “मैं बता नहीं सकती की मैं कितनी खुश हूं ये बेबी बंप वाकई में काफी सुंदर है”

बेबी बंप के बाद की ग्लैमरस फोटोज शेयर

ब्रूना ने बेबी बंप की फोटोज के बाद अपनी कुछ पुरानी फोटोज शेयर की इसमें वो काफी हौट अवतार में नजर आई. इन फोटोज में ब्रूना ने काले रंग की मोनोकिना पहनी हुई है. ब्रूना के फैंस इन फोटोज में कमेंट करते नही रुक रहे है.

 

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As promised! 3/3 South African series! . . #capetown #campsbaybeach #hurley

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फिल्मों का सफर…

ब्रूना की ग्लैमरज पर्सनेलिटी और बौल्डनेस काफी पसंद की जाती है. बात अगर उनके फिगर की करें तो प्रग्नेंसी के पहले वो हमेशा काफी फिट और सेक्सी अंदाज में ही नजर आई है. ब्रूना ने बौलीवुड में अपनी शुरुआत साल 2007 में आई फिल्म ‘कैश’ से की थी. इसके बाद वो ‘आई हेट लव स्टोरी’ और ‘देसी बौयज’  में भी नजर आई. इसके बाद साल 2012 में आई तमिल फिल्म बिल्ला 2 में उनके काम को काफी सराहा गया. ब्रूना आखिरी बार 2018 में आई फिल्म उड़नछू में नजर आई थी.

 

जिप्सम का इस्तेमाल क्यों, कब और कैसे करें

प्रदीप कुमार सैनी, डा. आरके यादव, डा. शंभू प्रसाद, डा. आदेश कुमार

वे कैल्शियम व सल्फर का इस्तेमाल नहीं करते हैं जिस से खेत की मिट्टी में कैल्शियम व सल्फर की कमी की समस्या धीरेधीरे बढ़ती जा रहीहै. इन की कमी सघन खेती वाली जमीन, हलकी जमीन और अपक्षरणीय जमीन में अधिक होती है.

कैल्शियम व सल्फर संतुलित पोषक तत्त्व प्रबंधन के मुख्य अवयवों में से?हैं जिन की पूर्ति के अनेक स्रोत?हैं, इन में जिप्सम एक खास उर्वरक?है. रासायनिक रूप से जिप्सम कैल्शियम सल्फेट है, जिस में 23.3 फीसदी कैल्शियम व 18.5 फीसदी सल्फर होता है.

जब जिप्सम पानी में घुलता है तो कैल्शियम व सल्फेट आयन प्रदान करता है. तुलनात्मक रूप से कुछ ज्यादा घनात्मक होने के चलते कैल्शियम के आयन मिट्टी में मौजूद विनियम सोडियम के आयनों को हटा कर उन की जगह ले लेते?हैं. आयनों का मटियार कणों पर यह बदलाव मिट्टी की रासायनिक व भौतिक अवस्था में सुधार कर देता है और मिट्टी फल के उत्पादन के लिए सही हो जाती?है. साथ ही, जिप्सम जमीन में सूक्ष्म पोषक तत्त्वों का अनुपात बनाने में सहायता करता है.

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जिप्सम क्यों डालें?

* जिप्सम एक अच्छा भूसुधारक है. यह क्षारीय जमीन को सुधारने का काम करता है.

* तिलहनी फसलों में जिप्सम डालने से सल्फर की पूर्ति होती है.

* जिप्सम मिट्टी में कठोर परत बनने से रोकता?है और मिट्टी में पानी के प्रवेश को रोकता?है.

* फसलों में जड़ों की सामान्य बढ़ोतरी और विकास में सहायक है.

* कैल्शियम और सल्फर की जरूरत की पूर्ति के लिए.

* कैल्शियम की कमी के चलते ऊपर बढ़ती हुई पत्तियों के अग्रभाग का सफेद होना, लिपटना और संकुचित होना होता है. अत्यधिक कमी की स्थिति में पौधों की बढ़वार रुक जाती है और वर्धन शिखा भी सूख जाती है जो कि जिप्सम डालने से पूरी की जा सकती है.

* अम्लीय मिट्टी में एल्यूमिनियम के हानिकारक प्रभाव को जिप्सम कम करता है.

* जिप्सम देने से मिट्टी में पोषक

तत्त्वों आमतौर पर नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम, कैल्शियम और सल्फर की उपलब्धता में बढ़ोतरी हो जाती है.

* जिप्सम कैल्शियम का एक मुख्य स्रोत है जो कार्बनिक पदार्थों को मिट्टी के?क्ले कणों से बांधता?है जिस से मिट्टी कणों में स्थिरता प्रदान होती है और मिट्टी में हवा का आनाजाना आसान बना रहता है.

* जिप्सम का इस्तेमाल फसलों में अधिक उपज व उन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किया जाता है.

* जिप्सम का इस्तेमाल फसल संरक्षण में भी किया जा सकता?है क्योंकि इस में सल्फर सही मात्रा में होता है.

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जिप्सम को कब और कैसे?डालें?

जिप्सम को मिट्टी में फसलों की बोआई से पहले डालते हैं. जिप्सम डालने से पहले खेत को पूरी तरह तैयार करें. (2-3 गहरी जुताई और पाटा लगा कर). इस के बाद एक हलकी जुताई कर के जिप्सम को मिट्टी में मिला दें.

आमतौर पर धान्य फसलें 10-20 किलोग्राम कैल्शियम प्रति हेक्टेयर और दलहनी फसलें 15 किलोग्राम कैल्शियम प्रति हेक्टेयर जमीन से लेती?हैं और सामान्य फसल पद्धति 10-20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर कैल्शियम जमीन से लेती?हैं.

जिप्सम को क्षारीय जमीन में मिलाने के लिए जरूरी मात्रा, क्षारीय जमीन की विकृति की सीमा, वांछित सुधार की सीमा और भूसुधार के बाद उगाई जाने वाली फसलों

पर निर्भर करती?है.

कितना सुधारक डालना है, इस की मात्रा का निर्धारण करने के लिए सब से पहले कितना जिप्सम डालने की जरूरत होगी, तय किया जाता है. इस को जिप्सम की जरूरत कहा जाता है.

जिप्सम की सही मात्रा जानने के लिए जिप्सम की विभिन्न मात्राओं को ले कर प्रयोग किए गए. इन प्रयोगों से यह प्रमाणित होता?है कि धान की फसल के लिए जिप्सम की कुल मात्रा का एकचौथाई भाग काफी है, जबकि गेहूं की फसल के लिए कुल मात्रा से आधा काफी है और मैदानी इलाकों में पाई जाने वाली क्षारीय मिट्टी के लिए तकरीबन 12-15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर जिप्सम का इस्तेमाल किया जाता है.

क्षारीय जमीन सुधार के कामों को शुरू करने का सब से सही समय गरमी के महीनों में होता?है. जिप्सम फैलाने के तुरंत बाद कल्टीवेटर या देशी हल से जमीन की ऊपरी 8-12 सैंटीमीटर की सतह में मिला कर और खेती को समतल कर के मेंड़बंदी करना जरूरी है ताकि खेत में पानी सब जगह बराबर लग सके.

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जिप्सम को मिट्टी में ज्यादा गहराई तक नहीं मिलाना चाहिए. धान की फसल में जिप्सम की जरूरी मात्रा को फसल लगाने से 10-15 दिन पहले डालना चाहिए. पहले 4-5 सैंटीमीटर हलका पानी लगाना चाहिए. जब पानी थोड़ा सूख जाए, तो दोबारा 12-15 सैंटीमीटर पानी भर कर रिसाव क्रिया पूरी करनी चाहिए.

क्षारीय जमीन में जिप्सम को बारबार मिलाने की जरूरत नहीं होती है. यह पाया गया है कि यदि धान की फसल को क्षारीय जमीन में लगातार उगाते रहें तो जमीन के क्षारीयपन में कमी आती है. खेतों को भी लंबे समय तक के लिए खाली नहीं छोड़ना चाहिए.

टेढ़ी चाल

शौचालय से आ कर हाथ धोते हुए संगीता ने पूछा, ‘‘कौन आया था अभी? घंटी किस ने बजाई थी?’’

सुमन ने समाचारपत्र में आंखें गड़ाते हुए कहा, ‘‘कोई नहीं, रामप्रसाद आया था.’’

‘‘रामप्रसाद?’’ संगीता के स्वर में कटुता थी, ‘‘तो इस में छिपाने की क्या बात है? जरूर रुपए मांगने आया होगा. उस के जैसा भिखमंगा कोई नहीं देखा. कितने रुपए दिए?’’

‘‘अरे, कहा न, न मांगे, न मैं ने दिए,’’ सुमन के स्वर में एक लापरवाही सी थी.

‘‘मैं मान ही नहीं सकती. अरे, मेरा क्या, तुम सब रुपए लुटा दो,’’ संगीता ने क्रोध से कहा, ‘‘पर अपनी गृहस्थी का भी तो खयाल करो. बताओ न, कितने रुपए दिए?’’

तिलमिला कर सुमन ने कहा, ‘‘तुम हमेशा उल्टा क्यों सोचती हो? वह सिर्फ यह कहने आया था  कि उस के यहां आज सत्यनारायण की कथा है. निमंत्रण दिया था. मुझे तो इन ऊटपटांग बातों से चिढ़ है, इसलिए मैं ने टाल दिया.’’

‘‘मैं कहती थी न, रामप्रसाद यों ही नहीं आने का. तुम इन बातों को मानो या न मानो, पर उस ने तो कथा के नाम से पैसे जरूर मांगे होंगे,’’ संगीता बोली.

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झींकते हुए सुमन ने कहा, ‘‘अगर मांगता भी तो क्या इन फालतू कामों के लिए दे देता?’’

‘‘तो देख लेना,’’ संगीता ने चेतावनी दी, ‘‘अगर अभी नहीं ले गया तो अब किसी न किसी बहाने आता ही होगा. आखिर प्रसाद भी तो बनाना होगा, पैसे कम पड़ गए होंगे,’’ संगीता ने नकल की.

सुमन ने क्रोध से कहा, ‘‘भलीमानस, अब आए तो तुम ही दरवाजा खोलना और तुम   ही उस से निबट लेना. मेरा दिमाग मत खराब करो. अगर हो सके तो एक प्याली चाय बना दो. कब से बैठा इंतजार कर रहा हूं.’’

‘‘छि, एक प्याली चाय भी नहीं बना सकते? बड़े तीसमारखां बनते हैं कि दफ्तर में यह करता हूं, दफ्तर में वह करता हूं.’’

सुमन ने चिढ़ कर कहा, ‘‘दफ्तर में तुम्हारे जैसे 50 चपरासी हैं यह सब काम करने के लिए.’’

रसोई में से आवाज आई, ‘‘क्या कहा? सुनाई नहीं दिया.’’

सुमन ने दोहराना ठीक नहीं समझा. इतवार का दिन था. सारा दिन बरबाद करने से क्या लाभ? फिर कहा, ‘‘जल्दी ले आओ चाय, तलब लग रही है.’’

सुमन की आदत कुछ ऐसी है कि वह समयअसमय असुविधा होते हुए भी किसी के सहायता मांगने पर कभी न नहीं करता. रुपए के मामले में तो सदा नुकसान ही उठाना पड़ता है.

थोड़े से रुपए दे कर तो वह भूल ही जाता है. संगीता उस के इस स्वभाव से तंग है. सदा खीजती ही रहती है.

उस का एक ही प्रश्न होता है, ‘‘क्या फायदा आलतूफालतू लोगों का काम करने से? बदले में क्या कभी कुछ   मिलता है?’’

‘‘तो क्या हमेशा बदले में कुछ पाने की आशा से ही कुछ करना चाहिए?

निस्वार्थ सेवा में जो आनंद है वह स्वार्थ में कहां?’’

‘‘धरे रहो अपनी निस्वार्थ सेवा,’’ संगीता तुनक कर कहती, ‘‘मरे, काम निकलने के बाद कभी झांकते तक नहीं.’’

‘‘यह अपने मन की बात है,’’ सुमन बोला.

वैसे वह संगीता से इतने असहयोग की आशा नहीं करता था. आरंभ में वह काफी प्रसन्न दिखाई देती थी, पर अब तो वह जलन और कुढ़न का भी शिकार हो गई है. बातबात पर चिढ़ती रहती है.

कुछ ही महीने पहले की बात है कि किसी के यहां दावत पर दफ्तर के सहयोगी प्रेमचंद और उस की पत्नी करुणा से भेंट हुई थी. करुणा एक स्कूल में पढ़ाती थी. बातों ही बातों में पता लगा कि सुमन को कागज के कई प्रकार के फूल बनाने आते हैं. करुणा ने सोचा कि अगर वह यह कला सीख लेगी तो बच्चों को भी सिखा सकेगी. उस ने सुमन से पूछा कि क्या वह उस के घर यह कला सीखने आ सकती है. सुमन को क्या आपत्ति हो सकती थी?

संगीता को अच्छा नहीं लगा कि करुणा इस तरह खुलेआम बेखौफ हो कर उस के पति से बात करे. इस पर तुर्रा यह कि बिना उस से पूछे सुमन ने उसे घर आने का खुला निमंत्रण भी दे दिया. इस बात पर घर में आ कर उस ने खूब लड़ाई की.

जब करुणा आई तो वह बेमन से बैठी रही. प्रेमचंद ने हंस कर उस का मन बहलाने का प्रयत्न किया, पर उस के चेहरे की सख्ती छिपी न रही.

सुमन ने करुणा को थोड़ाबहुत फूल बनाना बताया और देर हो जाने के कारण फिर आने का निमंत्रण दे दिया. उसे कोई काम अधूरा करना अच्छा नहीं लगता था.

उन के जाने के बाद संगीता फूट पड़ी, ‘‘मैं पहले से कहे देती हूं कि अब ये लोग यहां नहीं आएंगे. सारे काम छोड़ कर मरी को बस कागज के फूल बनाने ही सूझे.’’

‘‘ओहो, तो हमारा कौन सा नुकसान हो गया? अरे, जो आता था सो बता दिया. उस का भला हो गया. बच्चों को स्कूल में सिखाएगी. इस से कला का और विस्तार होगा,’’ सुमन ने कहा.

‘‘किसी व्यावसायिक स्कूल में जा कर सीखती तो गांठ से पैसे जो खर्च करने पड़ते. यहां तो मुफ्त में ही काम निकल गया. चायनाश्ता भी मिल गया.’’

‘‘तुम तो बेकार में झगड़ती हो. इस में चायपानी भी जोड़ दिया.’’

‘‘अपनेआप बनानी पड़े तो जानो. वैसे मैं ने कह दिया है कि अब वह इस घर में नहीं आएगी.’’

‘‘अब कल तो आएगी ही. उस के बाद मना कर दूंगा.’’

‘‘कल भी नहीं. मैं दरवाजा ही नहीं खोलूंगी.’’

‘‘दरवाजा मैं खोल दूंगा. तुम कष्ट मत करना,’’ सुमन ने हंसते हुए कहा.

‘‘क्यों, क्या वह तुम्हारी कुछ लगती है?’’ सुमन की हंसी से आहत हो कर संगीता ने व्यंग्य किया.

‘‘तुम तो पागल हो,’’ सुमन क्रोध से बोला और मेज पर से पत्रिका उठा कर पन्ने पलटने लगा.

अंत में घर में शांति बनाए रखने के प्रयास में दूसरे दिन सुमन को प्रेमचंद से कहना पड़ा कि संगीता की तबीयत ठीक नहीं. वह स्वयं किसी दिन आ कर करुणा को बाकी के फूल बनाना सिखा देगा.

दरवाजे पर घंटी बजी तो सुमन की तंद्रा टूटी. उठ कर देखा तो प्रेमदयाल खड़ा था. पड़ोसी था. हाथ में एक थैला था. देख कर मुसकराया.

‘‘आओ, आओ, प्रेमदयाल, कैसे आए?’’

अंदर आ कर बैठते हुए प्रेमदयाल ने कहा, ‘‘अपने बगीचे में इस बार अच्छे पपीते हुए हैं. एक पपीता ले कर आया हूं.’’

‘‘यह तो बहुत अच्छा किया. बहुत दिनों से मन भी कर रहा था पपीता खाने को,’’ सुमन ने हंस कर कहा.

पपीता हाथ में ले कर देखा, ‘‘सच ही बहुत अच्छा लग रहा है. काफी मेहनत करते हो.’’

‘‘अच्छा तो चलता हूं.’’

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‘‘अरे, ऐसे कैसे? बैठो, एक प्याला चाय पी कर जाना. मैं भी सोच रहा था कि कोई आए तो चाय पीने का बहाना मिले.’’

अंदर आ कर मुसकरा कर पपीता संगीता को दिखा कर रखते हुए कहा, ‘‘जल्दी से चाय तो बना दो. प्रेमदयाल आया है.’’

‘‘वह तो देख रही हूं. महीने भर से सूरत नहीं दिखाई. आज पपीता लाया है तो जरूर कोई मतलब होगा.’’

‘‘क्यों, क्या बिना मतलब पपीता नहीं ला सकता?’’

‘‘सब हमारी तरह मूर्ख नहीं होते. देख लेना, अभी कोई काम बताएगा.’’

‘‘छोड़ो भी, कहां का खटराग ले बैठीं. झटपट चाय बना दो.’’

संगीता ने मुंह बनाते हुए चाय बनाने के लिए गैस पर पानी का पतीला रख दिया. चाय पीने के बाद प्रेमदयाल ने बाहर जाते हुए दरवाजे पर ठिठक कर कहा, ‘‘हां, एक बात कहना तो मैं भूल ही गया था. मुन्ना आएगा आप के पास. आप का कुछ समय लेगा.’’

‘‘अरे, तो इस में कहनेपूछने की क्या बात है? कभी भी आ जाए. उस का घर है. मैं नहीं होऊंगा तो संगीता होगी यहां.’’

‘‘नहीं, मेरा मतलब है उसे आप से कुछ पढ़ना है. परीक्षा सिर पर है. कल ढेर सारी समस्याएं सामने रख दीं उस ने. अब हम तो इतना पढ़ेलिखे हैं नहीं. जो कुछ पढ़ा था वह भी भूल गए. कुछ मदद कर देना उस की.’’

‘‘हांहां, क्यों नहीं. भेज देना,’’ सुमन ने कहा.

सुमन मन ही मन सोच रहा था कि संगीता को बताए या नहीं. पर पत्नी के कान तो बाहर ही लगे हुए थे.

‘‘कहा नहीं था मैं ने कि बिना मतलब के प्रेमदयाल कभी सूरत नहीं दिखाएगा, पिछले साल के 4 अमरूद क्या भूल गए?’’

‘‘ओहो, अब बच्चे को अगर कुछ समझा दूंगा तो मेरा क्या घिस जाएगा? इस तरह कभीकभी पढ़ता रहा तो कभी अपने बच्चों के काम आएगा,’’ सुमन ने हंस कर कहा.

संगीता ने क्रोध से कहा, ‘‘चलो हटो, मुझे यह ठिठोली अच्छी नहीं लगती. यहां आ कर घंटों सिर खपाता रहेगा. कहां मिलेगा मुफ्त का मास्टर? एक पपीता दे कर 500 रुपए बचा लिए.’’

‘‘लो, फिर हिसाबकिताब में उलझ गईं, अच्छा बताओ, क्या सब्जी लानी है?’’

सुमन ने बाहर पैर रखा ही था कि निरंजन ने आ कर हाथ पकड़ लिया, ‘‘तो मिल ही गए. मैं तो डर रहा था कि कहीं चले न गए हो.’’

‘‘क्या बात है? घबरा क्यों रहे हो?’’

‘‘पप्पू को कुत्ते ने काट लिया है. वैसे तो कुत्ता पालतू है, पर उस के इंजेक्शन तो लगवाने ही पड़ेंगे. जरा स्कूटर निकालो तो उसे अस्पताल ले चलें.’’

‘‘ठीक है, तुम चलो, मैं अभी आता हूं.’’

‘‘बड़ी मेहरबानी होगी.’’

‘‘बस, मुझे तुम्हारी यही बात अच्छी नहीं लगती. ऐसा कह कर शर्मिंदा मत करो.’’

सुमन स्कूटर की चाबी लेने घर में आया.

‘‘क्यों, क्या हो गया? थैला तो हाथ में है और रुपए भी मैं ने दे दिए थे?’’ संगीता ने संदेह से पूछा.

‘‘अरे, यह निरंजन है न, बाहर मिल गया. उस के बच्चे को कुत्ते ने काट लिया है. उसे अस्पताल पहुंचाना है.’’

संगीता ने भड़क कर कहा, ‘‘तो क्या शहर में स्कूटर और टैक्सी वालों ने हड़ताल कर दी है? लेकिन जब मुफ्त में सवारी मिलती हो तो कौन भाड़ा देना पसंद करता है?’’

‘‘इनसान को जो सहारा मिल जाए उस का ही तो आसरा लेगा. अभी आता हूं. ज्यादा देर नहीं लगेगी.’’

‘‘सब्जी नहीं होगी तो खाना नहीं बनेगा. उसी निरंजन से कह देना, होटल से कुछ ले कर बंधवा देगा. स्कूटर के 5 रुपए भी खर्च नहीं कर सकता.’’

‘‘तुम तब तक दालचावल चढ़ाओ, मैं लौट कर आता हूं.’’

‘‘मैं क्या जानती नहीं उस कंजूस को? वहां 2 घंटे खड़ा रखेगा और फिर वापस भी तुम्हारे साथ आएगा. 4 महीने हुए तब मैं ने कहा था कि दौरे पर हर महीने हैदराबाद जाते हो, मेरे लिए मोतियों की माला ले आना. उस दिन से आज तक सूरत नहीं दिखाई.’’

‘‘अब क्या कहूं, संगीता, तुम्हारी तो उल्टा सोचने की आदत है. अब उसे क्या परेशानी है, हमें क्या मालूम? एक बार रुपए दे कर देखतीं कि लाता है या नहीं.’’

‘‘भली चलाई. माला के तो दर्शन दूर रुपए भी हाथ से जाते. मैं कहे देती हूं कि उसे अस्पताल छोड़ कर चले आना, नहीं तो मैं ताला लगा कर चली जाऊंगी.’’

‘‘अच्छा, बाबा, अभी आता हूं,’’ सुमन झट से चाबी ले कर चला गया.

सब्जी ला कर आराम से बैठ कर सुमन ने पत्नी के कंधे पर हलके से थपथपाते हुए कहा, ‘‘अब एक प्याला चाय हो जाए तो कहूं कि धरती पर अगर सर्वोत्तम स्थान है तो बस यहीं है, यहीं है, यहीं है.’’

संगीता ने कर्कश स्वर में कहा, ‘‘मुझे नहीं अच्छी लगती यह खुशामद. अपनेआप बना लो.’’

‘‘किसी ने ठीक ही कहा है कि क्रोध में औरत की खूबसूरती दोगुनी हो जाती है. अब तुम मुझे दोगुनी सुंदर ही अच्छी लगती हो. अगर कहीं चौगुनी या आठगुनी सुंदर हो गईं तो भला मैं कहां बरदाश्त कर पाऊंगा? अब बना दोगी चाय तो तुम्हारे गुण गाऊंगा, नहीं तो… ’’

‘‘नहीं तो क्या?’’ संगीता ने पूछा.

‘‘नहीं तो क्या, नीचे हिदायतुल्ला के ढाबे में जा कर पी लूंगा.’’

‘‘क्यों, ढाबे में क्यों जाओगे?’’ संगीता ने बिगड़ कर कहा, ‘‘निरंजन के जाओ, प्रेमदयाल के जाओ, उस के… उस के… करुणा के यहां जाओ. बढि़या खुशबूदार चाय मिलेगी.’’

गहरी आह भरते हुए सुमन ने कहा, ‘‘बस, मजा ही किरकिरा कर दिया. क्या तीर मारा है.’’

दूसरे ही दिन संगीता को पत्र मिला कि उस के छोटे भाईबहन कालिज की छुट्टियों में उस के पास कुछ दिनों के लिए आने वाले हैं. संगीता बहुत प्रसन्न थी. उस ने बाजार से सामान लाने के लिए एक बड़ी सूची बना ली. सुमन के दफ्तर से आने की प्रतीक्षा कर रही थी.

सुमन ने जल्दी आने का वादा किया था. उस का मन खराब न हो, इसलिए गैस पर पानी चढ़ा दिया था ताकि सुमन के आते ही उसे एक प्याला चाय प्रस्तुत की जा सके.

‘‘लगता है तुम्हारी शादी हुए एक महीना भी नहीं हुआ. क्या जंच रही हो. लगता है, आज बाजार जाना नहीं होगा,’’ सुमन ने शरारत से कहा.

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‘‘क्या मतलब?’’ संगीता ने शरमाते हुए कहा.

‘‘अरे, मैं ठहरा मामूली इनसान. एक ही काम कर सकता हूं. या तो तुम्हारे साथ सामान खरीदने चलूं या तुम्हें लोगों की नजरों से बचाता फिरूं.’’

‘‘यह लो चाबी और उठो. ज्यादा बातें मत बनाओ,’’ संगीता पर्स उठा कर बाहर आ गई.

पता नहीं कैसे भूल हो गई कि जैसे ही सुमन ने किक मार कर स्कूटर चलाया तो गीयर न्यूट्रल में न होने से झटके से आगे भाग पड़ा. हैंडल हाथ से छूट गया और सुमन व स्कूटर दोनों गिर पड़े. नीचे नुकीले पत्थर पड़े थे. सुमन का सिर टकरा गया और वह अचेत हो गया. उस के शरीर से रक्त बहने लगा.

संगीता अवाक् रह गई. यह क्या हो गया? जब उसे होश आया तो चिल्लाने और रोने लगी. भीड़ इकट्ठी हो गई. सब अपनीअपनी राय दे रहे थे, पर कोई कुछ कर नहीं रहा था. तभी भीड़ को चीरता हुआ रामप्रसाद आया, ‘‘क्या हुआ, भाभी? अरे, सुमन बाबू को चोट आ गई? आप चिंता मत कीजिए. आप घर जाइए, मैं संभालता हूं.’’

रामप्रसाद ने लोगों की मदद से एक टैक्सी रोक कर सुमन को उस में लिटाया और जानपहचान के एक लड़के से स्कूटर घर में रखने को कह कर सुमन को अस्पताल ले गया. संगीता के आंसू नहीं रुक रहे थे. पासपड़ोस की कुछ स्त्रियां आ कर उसे सांत्वना दे रही थीं.

लगभग 1 घंटे के बाद प्रेमदयाल ने आ कर कहा, ‘‘चिंता की कोई बात नहीं है. अधिक चोट नहीं आई है. हैलमेट होने से बच गए, नहीं तो पता नहीं क्या हो जाता.’’

‘‘कब आएंगे?’’ संगीता ने आतुरता से पूछा.

‘‘अब कुछ दिन तो अस्पताल में रहना पड़ेगा. मरहमपट्टी हो गई है. इंजेक्शन भी लगा दिए गए हैं. अभी तो सो रहे हैं. यह देखने के लिए कि अंदरूनी चोट तो नहीं है एक्सरे करने पड़ेंगे. वैसे डाक्टर ने कहा है कि जैसी हालत है उस से लगता है कि घबराने की कोई बात नहीं है.’’

‘‘मैं चलूंगी उन के पास.’’

‘‘क्यों नहीं. अरे, आप को ही तो लेने आया हूं. एक बार आंख खुली थी तो आप को पूछ रहे थे. मुझ से कहा कि आप को साथ ले जा कर सामान ले आऊं.’’

संगीता बोली, ‘‘कोई बात नहीं. सामान फिर आ जाएगा. आप मुझे ले चलिए.’’

टैक्सी में बिठा कर प्रेमदयाल संगीता को अस्पताल ले आया. जैसे ही पैसे देने को संगीता ने पर्स खोला, प्रेमदयाल ने रोक दिया, ‘‘कभी तो हमें भी सेवा करने का मौका दीजिए.’’

संगीता चुप हो गई और आतुरता से प्रेमदयाल के साथ सुमन के कमरे में पहुंची. सुमन सो रहा था. नींद के इंजेक्शन लगे थे. एक ही स्टूल था. प्रेमदयाल ने संगीता के लिए आगे कर दिया.

पास ही निरंजन और रामप्रसाद भी खड़े थे. कुछ और लोग भी थे जिन्हें संगीता नहीं जानती थी.

निरंजन ने कहा, ‘‘चिंता की कोई बात नहीं. हम सब लोग हैं. आप बिलकुल आराम से बैठिए. डाक्टर थोड़ी देर में आएंगे.’’

संगीता ने अवरुद्ध कंठ से कहा, ‘‘खाने का क्या होगा? कुछ बताया डाक्टर ने? मैं घर से बना कर ले आऊंगी.’’

‘‘अब आप कहां जा सकती हैं?’’ प्रेमदयाल ने मुसकरा कर कहा, ‘‘आप तो बस, इन की देखभाल कीजिए. खाने  के लिए मैं ने घर खबर पहुंचा दी है. आप का खाना भी आ जाएगा.’’

‘‘पर इतना कष्ट करने की क्या आवश्यकता थी?’’ संगीता ने औपचारिक रूप से पूछा.

‘‘भाभीजी, कष्ट में जो आनंद है वह आनंद में कहां? कभी किसी के काम आएं इसी में प्रसन्नता है. पर वैसे ऐसा अवसर कभी न आए, बस, यही इच्छा है.’’

संगीता चुप हो गई. रात को वह वहीं सो गई.

प्रेमदयाल, निरंजन और रामप्रसाद काफी देर तक रहे. फिर सुबह आने को कह कर चले गए.

सुबह 8 बजे करुणा और प्रेमचंद भी आए. दोनों के हाथों में फलों के थैले थे. ‘‘हमें तो रात में देरी से पता चला. बहुत देर हो गई थी, इसलिए नहीं आ सके. अब कैसी तबीयत है?’’ करुणा ने कहा.

‘‘अब उठने पर पता चलेगा. वैसे डाक्टर ने कहा है कि घबराने की

कोई बात नहीं है. एक्सरे वगैरह ले लिए हैं.’’

तभी सुमन ने आंखें खोलीं. चारों ओर देखा और फिर संगीता को देख कर मुसकराया, ‘‘आज शाम तक मैं चलने लायक हो जाऊंगा. आज सामान लाने चलेंगे, पर कपड़े जरा हलके पहनना.’’

‘‘छि,’’ संगीता ने शरमा कर कहा.

‘‘क्या हुआ?’’ करुणा ने पूछा, ‘‘जरा हम भी तो सुनें?’’

‘‘कुछ नहीं, यों ही बड़बड़ा रहे हैं.’’

उन के जाने के बाद सुमन ने पूछा, ‘‘यहां कौन लाया था?’’

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‘‘रामप्रसाद.’’

‘‘उसे टैक्सी के पैसे देने होंगे. लोगों का खाने का भी उधार हो गया. समझ में नहीं आता कि यह सब एहसान कैसे चुकाऊंगा,’’ सुमन ने कहा.

सुमन के होंठों पर हाथ रखते हुए संगीता ने कहा, ‘‘बसबस, अब कुछ कहने की जरूरत नहीं है. मुझे सबक मिल गया है.’’

‘दबंग-3’ में इस लड़की के साथ रोमांस करेंगे सलमान, उम्र में हैं 23 साल छोटी

सलमान खान की अपकमिंग फिल्म दबंग-3 एक बार फिर सुर्खियों में है. दरअसल, इस फिल्म के जरिए बौलीवुड के जाने-माने प्रोड्यूस, डायरेक्ट और एक्टर महेश मांजरेकर की बेटी सई मांजरेकर डेब्यू करने वाली हैं. खबरों की माने तो महेश की बेटी सई मांजरेकर इस फिल्म से बौलीवुड इंडस्ट्री में कदम रखने वाली हैं.

सलमान से 23 साल छोटी हैं सई…

सई इसी साल फिल्म दबंग 3 में सलमान खान के साथ नज़र आने वाली हैं और इसी फिल्म के चलते सई मांजरेकर चर्चा का विषय बनती जा रही हैं. फिल्म रfलीज़ से पहले सई की कुछ फोटोज भी वायरल हो रही हैं जिसमे वे बेहद खूबसूरत लग रही हैं. दिलचस्प बात ये है कि सई उम्र में सलमान से करीब 23 साल छोटी हैं. सलमान जहां 53 साल के हैं वही सई 30 की हैं.

पोस्टर किया शेयर…

सई मांजरेकर ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से फिल्म दबंग 3 का पोस्टर भी शेयर किया जिसके कैप्शन में उन्होनें लिखा कि, “चुलबुल इज बैक”. सई के इस पोस्टर से साफ पता चल रहा है कि वे इस फिल्म के लिए काफी एक्साइटेड हैं.

सलमान खान के साथ करेंगी रोमांस…

 

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सई मांजरेकर ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी एक भी बोल्ड फोटो शेयर नहीं की पर फिर भी उन्होनें फैंस के दिलो में अपनी जगह बना ली है. सई अपनी डेब्यू फिल्म दबंग 3 में सलमान खान के साथ रोमांस करती दिखाई देंगी. खबरो की मानें तो सई फिल्म दबंग 3 की अपने हिस्से शूटिंग सलमान के साथ पूरी कर चुकी हैं.

बता दें, महेश मांजरेकर से कोई भी शख्स अंजान नही है. महेश ने काफी फिल्मों मे काम किया है जैसे कि, ‘जय हो’, ‘रेड्डी’, ‘दबंग’ ‘बौडीगार्ड’, आदी. भले ही महेश फिल्मो में ज्यादातर नेगेटिव किरदार निभाते दिखाई दिए लेकिन उनकी एक्टिंग के टेलेंट को सबने प्यार दिया. फिल्म दबंग 3 इसी साल 20 दिसम्बर 2019 को बड़े पर्दे पर रिलीज होगी तो अब देखना ये होगा कि जिस प्रकार दर्शको ने महेश मांजरेकर को पसंद किया उसी तरह सई मांजरेकर भी दर्शको का प्यार लेने में सफल होंगी या नही.

इस एक्ट्रेस ने पहनी ऐसी बिकिनी कि फैंस भी हो गए हैरान

बौलीवुड इंडस्ट्री की पौपुलर एक्ट्रेस अदा शर्मा इन दिनों अपने लेटेस्ट बोल्ड फोटोशूट को लेकर काफी चर्चा में हैं. अदा ने कई फिल्मों में काम किया है जिसे औडियंस ने काफी पसंद भी किया है जैसे कि, ‘कमांडो 2’, ‘हम है राही कार के’, ‘हसी तो फसी’, ‘1920’, आदि. हाल ही में अदा शर्मा का एक बोल्ड फोटोशूट सामने आया है जिसमें वे अपनी अदाओं से फैंस के दिलों में कयामत ढा रही हैं.

चीते की प्रिंट वाली बिकिनी…

फैंस ने हर बार की तरह अदा के इस हौट फोटोशूट को बेहद पसंद किया है. वे अपने इस लेटेस्ट फोटोशूट चीते की प्रिंट वाली बिकिनी पहनी दिखाई दे रही हैं. जिसे देख के कुछ फैंस हैरान भी हो गए. हालांकि, सभी ने अदा शर्मा के इस फोटोशूट को जमकर प्यार दिया है और अच्छे-अच्छे कमेंटस कर उनकी काफी तारीफ कर रहे हैं.

अदा की अदाएं…

 

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अदा शर्मा अपने इस लेटेस्ट हौट फोटोशूट में बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं. अदा ने अपने इस बोल्ड अंदाज से सबका दिल जीत लिया और उनके इस फोटोशूट को देख ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि अदा ने एक बार फिर अपने इस बोल्ड फोटोशूट के जरिए फैंस को खुश कर दिया है और अपना दीवाना बना लिया है.

आउटडोर फोटोशूट…

अदा शर्मा की ये फोटोज आउटडोर फोटोशूट की है जिसमें उन्होने सिर्फ एक चीते प्रिंट वाली बिकिनी पहनी हुई है. अदा अपने इस बोल्ड अवतार में किसी अप्सरा से कम नहीं दिख रहीं. अदा की इन फोटोज में उनकी कातिलाना अदाएं देख किसी के भी होश उड़ सकते हैं.

बता दें, अदा शर्मा ने बौलीवुड में कदम साल 2008 में विक्रम भट्ट द्वारा निर्देशित फिल्म ‘1920’ से किया था और इस फिल्म में अपनी एक्टिंग के टेलेन्ट की वजह से ‘बेस्ट फीमेल डेब्यू’ फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नोमीनेट भी हुई थीं. अदा शर्मा एक्ट्रेस होने के साथ-साथ एक बेहतरीन डांसर भी हैं, यहां तक की उन्होनें अपनी ग्रेजुएशन भी भारतीय ट्रेडिशनल डांस फोर्म ‘कथक’ में ही की है. कथक के अलावा  उन्हें काफी सारी डांस फोर्म आती हैं जैसे कि ‘जैज़’, ‘सालसा’, ‘बैली’, आदी.

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