Bhojpuri क्वीन रानी चटर्जी ने ये वीडियो शेयर कर की सिनेमा में वापसी की उम्मीद, देखें Video

Lockdown के चलते फिल्म इंडस्ट्री में फिल्मों की शूटिंग पूरी तरह से बंद है और जिन फिल्मों की शूटिंग पूरी हो चुकी है उसमें से ज्यादातर फिल्में डबिंग के चलते लटकी हुई है. बाकी जिन फिल्मों के रिलीजिंग की घोषणा हो चुकी थी उन्हें रिलीज किये जाने के लिए Lockdown हटनें का इंतजार किया जा रहा है. फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग तमाम तरह के आशंकाओं से दो चार हो रहें हैं.

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इन सबके बीच भोजपुरी क्वीन (Bhojpuri Queen) कही जानें वाली रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) नें अपनें सोशल मीडिया एकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर जल्द ही वापसी की उम्मीद जाहिर की है. इस वीडियो में वह फिल्म के किसी गाने की शूटिंग करती नजर आ रहीं हैं जिसमें वह डांस टीम के साथ एक गाने पर शूट करवा रहीं हैं. इस वीडियो में शूटिंग यूनिट से जुड़े लोगों की थोड़ी सी झलक भी दिखलाई पड़ी.

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इस वीडियो को पोस्ट कर उन्होंने उसके कैप्शन में लिखा है की “जल्द होंगे अब सब एक्टर सेट पे” इसके बाद उन्होंने हैजटैग के साथ लिखा है “गो कोरोना गो” इस थ्रोबैक वीडियो के जारी करने के बाद इंडस्ट्री से जुड़े अन्य कलाकारों नें भी उम्मीद जाहिर की है की जल्द ही भोजपुरी सिनेमा की वापसी हो सकती है.

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Corona Virus के चलते लगाये गए Lockdown में जहां भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री (Bhojpuri Film Industry) में सन्नाटा छाया हुआ है और तमाम अभिनेत्रियों नें खुद को अपने घरों तक समेत रखा है वहीं भोजपुरी की कई अभिनेत्रियां तो सोशल मीडिया से भी गायब हैं. रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) घर में रहते हुए भी सोशल मीडिया के जरिये अपने फैन्स से जुडी हुई हैं. वह आये दिन किसी न किसी वीडियो और तस्वीरों को शेयर कर लोगों के बीच चर्चा में बनी रहतीं है. इन दिनों एम एक्स प्लेयर (MX Player) के औनलाइन प्लेटफार्म पर रिलीज की गई वेब सीरीज (Web Series) ‘मस्तराम’ (Mastram) में रानी चटर्जी बोल्ड सीन देकर काफी चर्चा में हैं.

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हौट और सेक्सी तस्वीरों को शेयर करनें में हैं अव्वल

रानी चटर्जी भोजपुरी सिने जगत की उन हीरोइनों में शामिल हैं जो अक्सर अपने हौट अवतार के लिए जानी जाती हैं वह आये दिन अपनी हौट और सेक्सी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर वाहवाही लूटती रहती हैं. रानी नें बौलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के जन्म दिन पर उन्हीं की तरह साड़ी पहन कर माधुरी के अंदाज में एक तस्वीर शेयर की है जिसमें वह हुबहू माधुरी दीक्षित की तरह लग रहीं हैं.

 

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छुटभैये नेतागिरी का अंजाम

राजनीति का नशा आदमी को अर्श से फर्श  व कभी कभी फर्श से अर्श तक पहुंचा देता है. यह तो हमने अक्सर देखा है. मगर छूट भैयेपन की राजनीतिक हवस के कारण कभी-कभी इंसान की हत्या भी हो जाती है, यह भी कम ही देखा गया है.और हत्या भी ऐसी की एक नहीं 6 लोगों ने मिलकर उसे अपने रास्ते से सदा के लिए हटा दिया. क्योंकि वह एक राजनीतिक पार्टी का मोहल्ले का नेता था और अक्सर उन्हें  हलाकान परेशान किया करता था. छत्तीसगढ़ के जिला

बलौदाबाजार थाना अंतर्गत एक ऐसा ही घटनाक्रम घटित हुआ जिसमें एक युवक को मोहल्ले में आतंक और नेताजी वाला रोग भारी पड़ गया. आखिरकार 6 युवकों ने मिलकर उसे हमेशा के लिए अपने रास्ते से हटा दिया. पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि  27 जून शनिवार की रात 8:30 बजे भगवती यादव अपने दोस्त के साथ अपने घर लोहिया नगर के पास मौजूद था. इसी दौरान इकबाल खान और शाहरुख खान अपने चार अन्य दोस्तों के साथ पुरानी रंजिश के चलते चाकू से वार कर भगवती यादव की हत्या कर फरार हो गया.

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देखते देखते घटित घटना के बाद से शहर में लोग आक्रोशित  हो उठे. क्योंकि मामला एक राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता की नृशंस हत्या का था. शहर का माहौल सर गर्म होता  चला गया. क्योंकि लोगों को एहसास हो चला था कि कानून व्यवस्था की कमजोरी के कारण यह घटना घटी है.

अपमान का लिया-” बदला”

हमारे संवाददाता को बलौदा बाजार पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार भगवती यादव भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता था. और हर एक राजनीतिक गतिविधियों में शिरकत किया करता था. इसी दरमियान राजनीति का मद उस पर ऐसा चढ़ा कि वह लोगों को परेशान करने लगा. यही नहीं बीच चौराहे पर भी छोटी सी किसी बात पर बात का बतंगड़ बनाते हुए लोगों को जलील और अपमानित करता रहता. वह समझता कि वह भाजपा का नेता है उसका कोई क्या कर सकता है. यही कवच उसे और  भी बिगड़ैल बनाता चला गया. घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब दो युवकों ने उसे मजा चखाने के लिए योजना बनाई और उसे अन्य चार लोगों के साथ मिलकर क्रियान्वित भी  कर दिया.

पुलिस के उच्च अधिकारियों के अनुसार जब मामला तुल पकड़ता चला गया. तब पुलिस  अलग-अलग टीम बनाकर आरोपियों की तलाश में जुट गई.पुलिस ने मामले की जांच करते हुए 7 घंटे के भीतर सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने भगवती यादव के ऊपर चाकू से हमला किया . आरोपियों ने बताया कि भगवती यादव द्वारा  हमेशा सार्वजनिक रूप से  आरोपियों के साथ मारपीट और लड़ाई झगड़ा किया  करता  था जिससे वे बेहद अपमानित होते जाते थे. और क्षुब्ध होकर इसी का बदला लेने के लिए भगवती की हत्या कर दी.गिरफ्तार आरोपियों में सभी बलौदाबाजार निवासी इकबाल खान, शाहरुख खान, जावेद रजा, राहुल देवार, रजा और सूरज वैष्णव शामिल है.

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धर दबोचे गए सभी अपराधी

मृतक विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल का सक्रिय सदस्य था. बताया जा रहा है कि के युवाओं के एक गुट के साथ उसकी आपसी रंजिश थी जिसकी वजह से  के युवाओं द्वारा बड़ी बेरहमी के साथ घेरकर हत्या कर दी गई. शनिवार देर रात घटित  इस घटना  ने नगर के माहौल को गर्म कर दिया था. और बड़ी तनाव की स्थिति उत्पन्न  कर दी गई थी जिसे स्थानीय प्रशासन ने बड़ी होशियारी से संभाला.

कार्यकर्ता की हत्या के आरोपित शाहरुख खान पिता शेरखान (22), दुर्गा चौक, बलौदाबाजार, इकबाल खान पिता रमजान खान (22) लोहिया नगर वार्ड 17 बलौदाबाजार, राहुल भारती पिता स्व. चंद्रशेखर भारती (22) देवारपारा, भैंसापसरा रोड, बलौदाबाजार, सूरज वैष्णव पिता ओमप्रकाश वैष्णव (20) लोहिया नगर वार्ड 17 बलौदाबाजार, जावेद खान पिता स्व. आबिद अली (22) नयापारा, लोहियानगर बलौदाबाजार, रजा खान पिता रज्जााक खान (23) रिसदा रोड लोहिया नगर, बलौदाबाजार शामिल हैं.

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 402/2020 धारा 302,147,148 149 भादवि के तहत मामला दर्ज  करके उन्हें जेल भेज दिया गया है.

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आशीर्वाद : भाग 1 – कहानी मेनका, अमित और ढोंगी गुरु की

दोपहर का खाना खा कर मेनका थोड़ी देर आराम करने के लिए कमरे में आई ही थी कि तभी दरवाजे की घंटी बज उठी.

मेनका ने झल्लाते हुए दरवाजा खोला. सामने डाकिया खड़ा था.

डाकिए ने उसे नमस्ते की और पैकेट देते हुए कहा, ‘‘मैडम, आप की रजिस्टर्ड डाक है.’’

मेनका ने पैकेट लिया और दरवाजा बंद कर कमरे में आ गई. वह पैकेट देखते ही समझ गई कि इस में एक किताब है. पैकेट पर भेजने वाले गुरुजी के हरिद्वार आश्रम का पता लिखा हुआ था.

मेनका की जरा भी इच्छा नहीं हुई कि वह उस किताब को खोल कर देखे या पढ़े. वह जानती थी कि यह किताब गुरु सदानंद ने लिखी है. सदानंद उस के पति अमित का गुरु था. वह उठतेबैठते, सोतेजागते हर समय गुरुजी की ही बातें करता था, जबकि मेनका किसी गुरुजी को नहीं मानती थी.

मेनका ने किताब का पैकेट एक तरफ रख दिया. अजीब सी कड़वाहट उस के मन में भर गई. उस ने बिस्तर पर लेट कर आंखें बंद कर लीं. साथ में उस की 3 साल की बेटी पिंकी सो रही थी.

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मेनका समझ नहीं पा रही थी कि उसे अमित जैसा अपने गुरु का अंधभक्त जीवनसाथी मिला है तो इस में किसे दोष दिया जाए?

शादी से पहले मेनका ने अपने सपनों के राजकुमार के पता नहीं कैसेकैसे सपने देखे थे. सोचा था कि शादी के बाद वह अपने पति के साथ हनीमून पर शिमला, मसूरी या नैनीताल जाएगी. पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में उन दोनों का यादगार हनीमून होगा.

मेनका के सारे सपने शादी की पहली रात को ही टूट गए थे. उस रात वह अमित का इंतजार कर रही थी. काफी देर के बाद अमित कमरे में आया था.

अमित ने आते ही कहा था, ‘देखो मेनका, आज की रात का हर कोई बहुत बेचैनी से इंतजार करता है पर मैं उन में से नहीं हूं. मेरा खुद पर बहुत कंट्रोल है.’

मेनका चुपचाप सुन रही थी.

‘सदानंद मेरे गुरुजी हैं. हरिद्वार में उन का बहुत बड़ा आश्रम है. मैं कई सालों से उन का भक्त हूं. उन के उपदेश मैं ने कई बार सुने हैं. उन की इच्छा के खिलाफ मैं कुछ भी करने की सोच ही नहीं सकता.

‘मैं ने तो गुरुजी से कह दिया था कि मैं शादी नहीं करना चाहता पर गुरुजी ने कहा था कि शादी जरूर करो तो मैं ने कर ली.’

मेनका चुपचाप अमित की ओर देख रही थी.

अमित ने आगे कहा था, ‘देखो मेनका, आज की रात हमारी अनोखी रात होगी. हम नए ढंग से शादीशुदा जिंदगी की पहली रात मनाएंगे. मेरे पास गुरुजी की कई किताबें हैं. मैं तुम्हें एक किताब से गुरुजी के उपदेश सुनाऊंगा जिन्हें सुन कर तुम भी मान जाओगी कि हमारे गुरुजी कितने ज्ञानी और महान हैं.

‘और हां मेनका, मैं तुम्हें एक बात और भी बताना चाहता हूं…’

‘क्या?’ मेनका ने पूछा था.

‘मेरा तुम से एक वादा है कि तुम मां जरूर बनोगी यानी तुम्हें तुम्हारा हक जरूर मिलेगा, क्योंकि गुरुजी ने कहा है कि गृहस्थ जीवन में ब्रह्मचर्य व्रत को तोड़ना पड़ता है.’

मेनका जान गई थी कि अमित गुरुजी के जाल में बुरी तरह फंसा हुआ है. उस के सारे सपने बिखरते चले गए थे.

अमित एक सरकारी दफ्तर में बाबू के पद पर काम करता था. जब भी उसे समय मिलता तो वह गुरुजी की किताबें ही पढ़ता रहता था.

एक दिन किताब पढ़ते हुए अमित ने कहा था, ‘मेनका, गुरुजी के प्रवचन पढ़ कर तो ऐसा मन करता है कि मैं भी संन्यासी हो जाऊं.’

यह सुन कर मेनका को ऐसा लगा था मानो कुछ तेज सा पिघल कर उस के दिल को कचोट रहा है. वह शांत आवाज में बोल उठी थी, ‘मेरे लिए तो तुम अब भी संन्यासी ही हो.’

‘ओह मेनका, मैं मजाक नहीं कर रहा हूं. मैं सच कह रहा हूं. अगर तुम गुरुजी की यह किताब पढ़ लो, तुम भी संन्यासिनी हो जाने के लिए सोचने लगोगी,’ अमित ने वह किताब मेनका की ओर बढ़ाते हुए कहा था.

‘अगर इन गुरुओं की किताबें पढ़पढ़ कर सभी संन्यासी हो गए तो काम कौन करेगा? मैं गृहस्थ जीवन में संन्यास की बात क्यों करूं? अगर तुम्हारी तरह मैं भी संन्यासी बनने के बारे में सोचने लगूंगी तो हमारी बेटी पिंकी का क्या होगा? बिना मांबाप के औलाद किस तरह पलेगी? बड़ी हो कर उस की क्या हालत होगी? उस के मन में हमारे लिए प्यार नहीं नफरत होगी. इस नफरत के जिम्मेदार हम दोनों होंगे.

‘जिस बच्चे को हम पालपोस नहीं सकते, उसे पैदा करने का हक भी हमें नहीं है और जिसे हम ने पैदा कर दिया है उस के प्रति हमारा भी तो कुछ फर्ज है,’ मेनका कहा था.

अमित ने कोई जवाब नहीं दिया था.

एक दिन दफ्तर से लौट कर अमित ने कहा था, ‘मेनका, मेरे दफ्तर में 3 दिन की छुट्टी है. मैं सोच रहा हूं कि हम दोनों गुरुजी के आश्रम में हरिद्वार चलेंगे.’

‘मैं क्या करूंगी वहां जा कर?’

‘जब से हमारी शादी हुई है, तुम एक बार भी वहां नहीं गई हो. अब तो तुम मां भी बन चुकी हो. हमें गुरुजी का आशीर्वाद लेना चाहिए… वे हमारे भगवान हैं.’

‘मेरे नहीं सिर्फ तुम्हारे. जहां तक आशीर्वाद लेने की बात है, वह भी तुम ही ले लो. मुझे नहीं चाहिए किसी गुरु का आशीर्वाद.’

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‘मेनका, मैं ने फोन कर के पता कर लिया है. गुरुजी अगले एक हफ्ते तक आश्रम में ही हैं. तुम मना मत करो.’

‘देखो अमित, मैं नहीं जाऊंगी,’ मेनका ने कड़े शब्दों में कहा था.

अमित को गुरुजी से मिलने के लिए अकेले ही हरिद्वार जाना पड़ा था.

3 दिन बाद अमित गुरुजी से मिल कर घर लौटा तो बहुत खुश था.

‘दर्शन हो गए गुरुजी के?’ मेनका ने पूछा था.

‘हां, मैं ने तो गुरुजी से साफसाफ कह दिया था कि आप की शरण में यहां आश्रम में आना चाहता हूं… हमेशा के लिए. गुरुजी ने कहा कि अभी नहीं, अभी वह समय बहुत दूर है. कभी मेनका से बात कर उसे भी समझाएंगे.’

‘वे भला मुझे क्या समझाएंगे? क्या मैं कोई गलत काम कर रही हूं या कोई छोटी बच्ची हूं? तुम ही समझते रहो और आशीर्वाद लेते रहो,’ मेनका ने कहा था.

तभी मेनका को पिंकी के रोने की आवाज सुनाई पड़ी. पिंकी नींद से जाग चुकी थी. मेनका उसे थपकियां दे कर दोबारा सुलाने की कोशिश करने लगी.

शाम को अमित दफ्तर से लौट कर आया तो मेनका ने कहा, ‘‘आज आप के गुरुजी की किताब आई है डाक से.’’

इतना सुनते ही अमित ने खुश हो कर कहा, ‘‘कहां है… लाओ.’’

मेनका ने अमित को किताब का वह पैकेट दे दिया.

अमित ने पैकेट खोल कर किताब देखी. कवर पर गुरुजी का चित्र छपा था. दाढ़ीमूंछें सफाचट. घुटा हुआ सिर. चेहरे पर तेज व आंखों में खिंचाव था.

अमित ने मेनका को गुरुजी का चित्र दिखाते हुए कहा, ‘‘देखो मेनका, गुरुजी कितने आकर्षक और तेजवान लगते हैं. ऐसा मन करता है कि मैं हरदम इन को देखता ही रहूं.’

‘‘तो देखो, मना किस ने किया है.’’

‘‘मेनका, तुम जरा एक कप चाय बना देना. मैं अपने गुरुजी की यह किताब पढ़ रहा हूं,’’ अमित बोला.

मेनका चाय बना कर ले आई और मेज पर रख कर चली गई.

अमित गुरुजी की किताब पढ़ने में इतना खो गया कि उसे समय का पता ही नहीं चला.

रात के साढ़े 8 बज गए तो मेनका ने कहा, ‘‘अब गुरुजी को ही पढ़ते रहोगे क्या? खाना खा लीजिए, तैयार है.’’

‘‘अरे हां मेनका, मैं तो भूल ही गया था कि मुझे खाना भी खाना है. गुरुजी की किताब सामने हो तो मैं सबकुछ भूल जाता हूं.’’

‘‘किसी दिन मुझे ही न भुला देना.’’

‘‘अरे वाह, तुम्हें क्यों भुला दूंगा? तुम क्या कोई भूलने वाली चीज हो…’’ अमित ने कहा, ‘‘ठीक है, तुम खाना लगाओ… मैं आता हूं.’’

मेनका रसोई में चली गई.

रात के 11 बजे थे. मेनका आंखें बंद किए बिस्तर पर लेटी थी. साथ में पिंकी सो रही थी. अमित आराम से बैठा हुआ गुरुजी की किताब पढ़ने में मगन था. तभी वह पुरानी यादों में खो गया.

कुछ साल पहले अमित अपने दोस्त से मिलने चंडीगढ़ गया था. दोस्त के घर पर ही गुरुजी आए हुए थे. तब पहली बार वह गुरुजी के दर्शन और उन के प्रवचन सुन कर बहुत प्रभावित हुआ था.

कुछ महीने बाद अमित गुरुजी के आश्रम में हरिद्वार जा पहुंचा था. आश्रम में गुरुजी के कई शिष्य थे जो आनेजाने वालों की खूब देखभाल कर रहे थे.

अमित उस कमरे में पहुंचा जहां एक तख्त पर केसरी रंग की महंगी चादर बिछी थी. उस पर गुरुजी केसरी रंग का कुरता व लुंगी पहने हुए बैठे थे. भरा हुआ शरीर. गोरा रंग. चंदन की भीनीभीनी खुशबू से कमरा महक रहा था. 8-10 मर्दऔरत गुरुजी के विचार सुन रहे थे. अमित ने गुरुजी के चरणों में माथा टेका था.

कुछ देर बाद अमित कमरे में अकेला ही रह गया था.

‘कैसे हो बच्चा?’ गुरुजी ने उस से पूछा था.

‘कृपा है आप की. आप के पास आ कर मन को बहुत शांति मिली. गुरुजी, मन करता है कि मैं यहीं आप की सेवा में रहने लगूं.’

‘नहीं बच्चा, अभी तुम पढ़ाई कर रहे हो. पढ़लिख कर अपने पैरों पर खड़े हो जाओ. यह आश्रम तुम्हारा ही है, कभी भी आशीर्वाद लेने आ सकते हो.’

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‘जी, गुरुजी.’

‘एक बात का ध्यान रखना बच्चा कि औरत से हमेशा बच कर रहना. उस से बचे रहोगे तो खूब तरक्की कर सकोगे, नहीं तो अपनी जिंदगी बरबाद कर लोगे. ब्रह्मचर्य से बढ़ कर कोई सुख संसार में नहीं है,’ गुरुजी ने उसे समझाया था.

उस के बाद जब कभी अमित परेशान होता तो गुरुजी के आश्रम में जा पहुंचता.

विचारों में तैरतेडूबते अमित को नींद आ गई और वह खर्राटे भरने लगा.

2 महीने बाद एक दिन दफ्तर से लौट कर अमित ने कहा, ‘‘मेनका, अगले हफ्ते गुरुजी के आश्रम में चलना है.’

‘‘तो चले जाना, किस ने मना किया है,’’ मेनका बोली.

‘‘इस बार मैं अकेला नहीं जाऊंगा. तुम्हें भी साथ चलना है.’’

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

आशीर्वाद : भाग 3 – कहानी मेनका, अमित और ढोंगी गुरु की

तभी एक शिष्य अमित के पास आया और बोला, ‘‘आप को गुरुजी ने याद किया है.’’

अमित एकदम उठा और शिष्य के साथ चल दिया.

गुरुजी के कमरे में पहुंच कर अमित हाथ जोड़ कर बैठ गया.

सामने बैठे गुरुजी ने पूछा, ‘‘क्या हुआ अमित? मेनका नहीं आई?’’

‘‘गुरुजी, मैं ने उसे बहुत कहा, पर वह नहीं आई. कहने लगी कि मैं माफी नहीं मांगूंगी. इस पर मैं ने उसे थप्पड़ भी मार दिया और वह गुस्से में बेटी के साथ कहीं चली गई.’’

‘‘चली गई? कहां चली गई? इस तरह अपनी पत्नी से हमें अपमानित करा कर तुम ने उसे जानबूझ कर यहां से भेजा है. यह तुम ने अच्छा नहीं किया,’’ गुरुजी ने अमित की ओर गुस्से से देखा.

अमित घबरा गया. वह गुरुजी के चरणों में सिर रख कर बोला, ‘‘मैं ने उसे नहीं भेजा गुरुजी. मैं सच कह रहा हूं. मेरा विश्वास कीजिए.’’

‘‘विश्वास… कैसा विश्वास? मुझे तुम जैसे अविश्वासी भक्त नहीं चाहिए. जिन की पत्नी अपने पति की बात न मानती हो. हम ने मेनका को इसलिए बुलाया था कि उसे भी आशीर्वाद मिल जाता.’’

‘‘गुरुजी, आप कहें तो मैं उसे छोड़ दूं. उस से तलाक ले लूं.’’

‘‘हम कुछ नहीं कहेंगे. जो तुम्हारी इच्छा हो करो…’’ गुरुजी ने नाराजगी

भरी आवाज में कहा, ‘‘अब तुम जा सकते हो.’’

‘‘गुरुजी, मेनका की ओर से मैं माफी मांगता हूं.’’

‘‘ऐसा नहीं होता कि किसी के अच्छेबुरे कर्मों का फल किसी दूसरे को दिया जाए. तुम अपने कमरे में जाओ,’’ गुरुजी ने अमित की ओर गुस्से से देखते हुए कहा.

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अमित चुपचाप थके कदमों से अपने कमरे में पहुंचा.

कुछ देर बाद 2 शिष्य अमित के पास आए और उस के बैग में से कपड़े निकाल कर बाहर डालने लगे मानो कुछ ढूंढ़ रहे हों.

अमित समझ नहीं पाया कि यह क्या हो रहा है? उस ने पूछा, ‘‘भैयाजी, यह क्या कर रहे हो? बैग से कपड़े क्यों निकाल रहे हो?’’

‘‘अभी पता चल जाएगा,’’ कहते हुए एक शिष्य ने बैग में से एक लाल रंग की बहुत सुंदर सी डब्बी निकाल कर खोली. उस में हीरे की एक अंगूठी थी.

दूसरा शिष्य बोला, ‘‘आज ही यह अंगूठी गुरुजी को दिल्लीवासी एक भक्त ने भेंट में दी थी. उस भक्त की आभूषण की दुकान है. यह डब्बी कुछ देर पहले से गायब थी. हमें तुम पर शक था, पर अब तो पता चल गया कि यह चोरी तुम ने ही की है.’’

‘‘नहीं, मैं ने अंगूठी नहीं चुराई. मैं चोर नहीं हूं. मुझे अंगूठी के बारे में कुछ नहीं मालूम. मैं बेकुसूर हूं,’’ अमित घबरा कर बोला.

‘‘अंगूठी तेरे पास से मिली है और तू कहता है कि तू ने चोरी नहीं की,’’ एक शिष्य ने कहा.

तभी 2 शिष्य और आ गए. उन चारों ने अमित के साथ मारपीट शुरू कर दी.

अमित के साथ हो रही मारपिटाई की आवाज सुन आश्रम में कुछ भक्त कमरों से बाहर निकल कर देखने गए. जब उन्हें पता चला कि गुरुजी की अंगूठी चुराने पर उस की पिटाई की जा रही है तो किसी ने भी उसे छुड़ाने की कोशिश नहीं की. सभी नफरत और गुस्से से अमित की ओर देख रहे थे.

सभी का कहना था कि ऐसे चोर की तो खूब पिटाई कर के पुलिस में देना चाहिए.

चारों शिष्यों ने अमित की इतनी पिटाई कर दी कि वह बेहोश हो गया. आश्रम से बाहर उसे सड़क के किनारे फेंक दिया.

गाडि़यां आतीजाती रहीं. लोग देखते रहे कि सड़क के किनारे कोई शख्स पड़ा हुआ है.

पुलिस की गश्ती गाड़ी उधर से जा रही थी. सड़क के किनारे किसी को पड़ा हुआ देख कर गाड़ी रुकी. दारोगा और

2 सिपाही उतरे. उन्होंने अमित को देखा. उस के चेहरे पर मारपिटाई के निशान थे. मुंह व सिर से खून भी निकला था.

पुलिस ने उसे उठा कर जिला अस्पताल में भरती करा दिया. डाक्टर से कह दिया कि जब यह होश में आ जाए तो सूचना दे देना.

सुबह तकरीबन 7 बजे अमित को होश आया तो उस का पूरा शरीर बुरी तरह से दुख रहा था.

डाक्टर ने अमित के पास आ कर पूछा, ‘‘आप का नाम?’’

‘‘अमित.’’

‘‘क्या रात को किसी से झगड़ा हो गया था?’’ डाक्टर ने सवाल किया.

अमित ने सबकुछ बता दिया कि वह गुरुजी का एक भक्त है. पत्नी के साथ यहां आश्रम में आया था. रात पत्नी से कहासुनी होने पर वह चली गई. गुरुजी के शिष्यों ने उस पर चोरी का आरोप लगा कर मारपिटाई कर सड़क पर फेंक दिया.

‘‘तुम्हारा समय अच्छा है अमित कि उन शिष्यों ने तुम्हारी जान नहीं ली. वे तुम्हें बेहोशी की हालत में गंगा में भी फेंक सकते थे. अब उन्होंने तुम्हारा बैग, मोबाइल वगैरह सामान जरूर फेंक दिया होगा गंगा में.’’

अमित चुप रहा.

‘‘अब तुम्हारी पत्नी कहां होगी?’’ डाक्टर ने पूछा.

‘‘पता नहीं. वह बेटी को ले कर चली गई थी कि रात को किसी होटल में रुकेगी. सुबह बस या टे्रन से वापस जाने की बात कह रही थी.’’

‘‘उस के पास मोबाइल फोन होगा. जरा उस का नंबर बताओ.’’

अमित ने मेनका का मोबाइल नंबर बताया. डाक्टर ने नंबर मिलाया तो उधर घंटी बजने लगी.

‘हैलो,’ उधर से आवाज सुनाई दी.

‘‘मैडम मेनका बोल रही हैं?’’

‘हां, बोल रही हूं. आप कौन?’

‘‘मैं यहां सिविल अस्पताल से डाक्टर विपिन बोल रहा हूं. आप के पति अमित यहां अस्पताल में भरती हैं. अब वे काफी ठीक हैं. लीजिए उन से बात कीजिए,’’ कहते हुए डाक्टर ने मोबाइल अमित को दे दिया.

‘‘हैलो,’’ अमित की कराहती सी आवाज निकली.

‘क्या हुआ? तुम ठीक तो हो न? अस्पताल में क्यों? तुम्हारी तो आवाज भी नहीं निकल रही है.’

‘‘तुम यहां आ जाओ मेनका. मैं तुम्हारे बगैर जी नहीं सकूंगा,’’ कहतेकहते अमित को रुलाई आ गई.

‘मैं आ रही हूं. बस अभी पहुंच रही हूं,’ उधर से मेनका की घबराई सी आवाज सुनाई पड़ी.

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डाक्टर ने पुलिस को सूचना दे दी कि अमित को होश आ गया है.

कुछ देर बाद चिंतित व डरी सी मेनका पिंकी के साथ अस्पताल में अमित के पास पहुंची. अमित के चेहरे पर चोट के निशान थे. सिर पर पट्टी बंधी हुई थी.

अमित को देखते ही वह कांप उठी. उस ने पूछा, ‘‘यह कैसे हुआ?’’

अमित ने सबकुछ बता दिया.

तभी दारोगा व एक सिपाही उन के पास आए. दारोगा ने पूछा, ‘‘अब कैसे हो आप?’’

‘‘ठीक हूं…’’ अमित ने कहा, ‘‘यह मेरी पत्नी और बेटी हैं.’’

‘‘अच्छा, अब आप यह बताओ कि हमें क्या करना है? आप चाहें तो रिपोर्ट लिखा सकते हो.’’

‘‘नहीं सर, हमें कोई रिपोर्ट नहीं लिखवानी है. हमें यह भी पता चल गया है कि गुरुजी की पहुंच ऊपर तक है. कई मंत्री व बड़ेबड़े नेता भी यहां आश्रम में आते रहते हैं. गुरुजी का कुछ नहीं बिगड़ेगा,’’ अमित ने कहा.

‘‘जिस दिन भी इस शैतान गुरु के पाप का घड़ा भर जाएगा, उस दिन यह भी नहीं बचेगा,’’ मेनका बोली.

कुछ देर तक बातचीत कर के दारोगा सिपाही के साथ वापस चला गया.

पछतावे के साथ अमित बोला, ‘‘कल सुबह अस्पताल से मुझे छुट्टी मिल जाएगी. हम वापस घर चले जाएंगे.

‘‘मेनका, मैं ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस गुरु को मैं भगवान समझता रहा, वह एक शैतान है. इस गुरु की अंधभक्ति में मैं ने जिंदगी के इतने साल बरबाद कर दिए.

‘‘मैं ने हमेशा तुम्हारी कही गई बातों की अनदेखी की. तुम तो इन ढोंगी बाबाओं से नफरत करती थीं, लेकिन मैं उस की वजह नहीं समझ पाया.

‘‘तुम ने इशारोंइशारों में कई बार मुझे समझाने की कोशिश भी की थी, पर मेरी अक्ल पर तो जैसे पत्थर पड़ गए थे. दुख की बात तो यह है कि मैं ही तुम्हें यहां जबरदस्ती लाया था.’’

‘‘पुरानी बातों को सोच कर अपना मन मत दुखाओ. अगर मैं इस शैतान का कहना मान लेती तो कुछ भी न होता. तुम पर कोई आरोप न लगता. मारपिटाई भी न होती और न ही मुझे पिंकी के साथ होटल में जाना पड़ता.

‘‘मैं उन औरतों जैसी नहीं हूं जो अपने पति से विश्वासघात कर ऐसे ढोंगी गुरु की हर बात मान लेती हैं,’’ मेनका बोली.

‘‘मेनका, तुम तो बहुत पहले से ही मुझे समझा रही थीं, पर मैं ही गहरी नींद में आंखें बंद किए हुए था. काश, मैं भी तुम्हारी तरह गुरुजी के जाल में न फंसता.’’

‘‘कोई बात नहीं, जब जागो तभी सवेरा,’’ मेनका ने अमित की ओर देखते हुए कहा.

अमित एक नई सीख ले कर अस्पताल से सीधा अपने घर की ओर चल दिया. उस ने मन में ठान लिया था कि घर जाते ही वह उस ढोंगी गुरु के दिए गए सामान को फिंकवा देगा.

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आशुतोष राणा : गांव की मिट्टी से उपजा कलाकार

गांवकसबों के रंगमंच से भी अदाकारी की बारीकियां सीख कर कलाकार फिल्म इंडस्ट्री में अपना मुकाम बना सकते हैं. इस बात को बौलीवुड के मशहूर कलाकार आशुतोष राणा ने साबित कर के दिखा दिया है.

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में धमाकेदार प्रदर्शन करने वाले विलेन के रोल के लिए शानदार कलाकरों में शुमार आशुतोष राणा का जन्म मध्य प्रदेश के छोटे से कसबे गाडरवारा में हुआ था. गाडरवारा में ही स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद वे ग्रेजुएशन करने मध्य प्रदेश के सागर इलाके में चले गए था.

आशुतोष राणा को कालेज के दिनों से ही अदाकारी से बेहद लगाव हो गया था और दशहरे पर वे पुरानी गल्ला मंडी, गाडरवारा में होने वाली रामलीला में रावण का किरदार निभाने लगे थे.

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कालेज की पढ़ाई के दौरान  आशुतोष राणा को ऐक्टिंग कोर्स के लिए उन के गुरु देव प्रभाकर ने बढ़ावा दिया था. गौरतलब है कि साल 1994 में आशुतोष राणा ने दिल्ली के एनएसडी यानी नैशनल स्कूल औफ ड्रामा में दाखिला लिया. एनएसडी में पढ़ाई करने के बाद वे काम की तलाश में मुंबई चले गए और महेश भट्ट के टीवी सीरियल ‘स्वाभिमान’ से टेलीविजन पर ऐंट्री की.

‘जख्म’, ‘दुश्मन’ और ‘संघर्ष’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवा चुके आशुतोष राणा की जिंदगी में एक दिन ऐसा भी आया था, जब महेश भट्ट ने उन्हें सैट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इस की वजह सिर्फ यह थी कि आशुतोष ने उन के पैर छू लिए थे.

आशुतोष राणा ने एक रोचक किस्सा सुनाते हुए कहा, “मुझे फिल्मकार और डायरैक्टर महेश भट्ट से मिलने को कहा गया. मैं उन से मिलने गया और जा कर भारतीय परंपरा के मुताबिक उन के पैर छू लिए. पैर छूते ही वे भड़क उठे, क्योंकि उन्हें पैर छूने वालों से बहुत नफरत थी. उन्होंने मुझे अपने फिल्म सैटट से बाहर निकलवा दिया और असिस्टैंट डायरैक्टरों पर भी काफी गुस्सा हुए कि आखिर उन्होंने मुझे कैसे फिल्म के सैट पर घुसने दिया.’’

आशुतोष राणा ने आगे बताया कि इतनी बेइज्जती के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जब भी महेश भट्ट मिलते या कहीं दिखते तो वे लपक कर उन के पैर छू लेते और वे बहुत गुस्सा होते.

आखिरकार एक दिन महेश भट्ट ने  आशुतोष राणा से पूछ ही लिया, “तुम मेरे पैर क्यों छूते हो जबकि मुझे इस से नफरत है.”

आशुतोष ने जवाब दिया, “बड़ों के पैर छूना मेरे संस्कार में है, जिसे मैं नहीं छोड़ सकता.’’

यह सुनकर महेश भट्ट ने उन्हें गले से लगा लिया और साल 1995 में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले टीवी सीरियल ‘स्वाभिमान’ में एक गुंडे ‘त्यागी’ का रोल दिया. बाद में तो उन्होंने महेश भट्ट के साथ कई फिल्मों में काम किया, जिन में ‘जख्म’ और ‘दुश्मन’ खास हैं.

एनएसडी के 1994 बैच के छात्र रहे आशुतोष राणा कहते हैं कि  प्रशिक्षण के बाद में उन्हें एनएसडी में ही नौकरी का औफर हुआ और वह भी मोटी तनख्वाह पर, लेकिन उन्होंने फिल्म जगत में आने का रास्ता चुना.

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सागर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान आशुतोष राणा के साथ पढ़ने वाले शिक्षक व साहित्यकार सुशील शर्मा बताते हैं, “उस समय हम एमटैक के छात्र थे. आशुतोष विवेक होस्टल के कमरा नंबर 65 में रहते थे. गाडरवारा के होने के चलते हमारी अकसर मुलाकात होती थी. वे उस समय दृश्य और श्रव्य विभाग के छात्र हुआ करते थे. हमें देख कर आशुतोष अकसर बुंदेली भाषा में कहा करते थे, ‘बड्डे तुम तो बड़े पढ़ने वाले हो और हम से जा पढ़ाई होत नैया कछु जड़ीबूटी दे दो हमे भी.'” आज भी आशुतोष राणा जब गाडरवारा आते हैं तो अपने दोस्तों और परिचितों से उसी सहजता से मिलतेजुलते हैं और उन की बोलती आंखें आज भी बिना कुछ कहे संवाद करती हैं.

रेणुका को चुना जीवनसाथी

कभी जीटीवी के फेमस रिएलिटी गेम शो ‘अंताक्षरी’ में अन्नु कपूर की कोहोस्ट रही और फिल्म ‘हम आप के हैं कौन’ में सलमान खान की भाभी के रोल से मशहूर हुई रेणुका शहाणे से आशुतोष राणा ने शादी की. आशुतोष राणा की रेणुका से पहली मुलाकात फिल्म ‘जयति’ की शूटिंग के समय हुई थी.  रेणुका और आशुतोष की दोस्ती मेलमुलाकात के बाद प्यार में बदल गई और आशुतोष और रेणुका ने साल 2001 में शादी कर ली.

शादी के बाद आशुतोष राणा जब रेणुका को ले कर गाडरवारा आते थे, तो रेलवे स्टेशन से घर तक की दूरी उस समय चलने वाले ‘घोड़ा तांगा’ से तय करते थे. आज उन के 2 बेटे शौर्यमान और सत्येंद्र हैं.

आशुतोष का  फिल्मी सफर

साल 1996 में आशुतोष राणा की पहली फिल्म ‘संसोधन’ थी, इस के बाद उन्होंने ‘कृष्ण अर्जुन’, ‘तमन्ना’, ‘जख्म’ ‘गुलाम’ समेत कई फिल्मों में भी काम किया,लेकिन उन्हें असली पहचान साल 1998 में आई काजोल स्टारर फिल्म ‘दुश्मन’ ने दिलाई. ‘बादल’, ‘अब के बरस’, ‘कर्ज’, ‘कलयुग’ और ‘आवारापन’ जैसी फिल्मों में विलेन के किरदार के लिए आशुतोष को जाना जाने लगा.

फिल्म ‘दुश्मन’ में आशुतोष राणा ने साइको किलर गोकुल पंडित का किरदार निभाया था. इस किरदार से आशुतोष ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. उन्हें फिल्म ‘दुश्मन’ और ‘संघर्ष’ के लिए बैस्ट विलेन के फिल्मफेयर अवार्ड से भी नवाजा गया था. बायोपिक फिल्म ‘शबनम मौसी’ के किरदार को भी लोगों ने काफी पसंद किया था.

आशुतोष राणा ने कई हिंदी, तेलुगू, मराठी, तमिल जैसी भाषाओं की फिल्मों में काम किया है. अपनी शुद्ध हिंदी बोलने और ऐक्टिंग के अंदाज की वजह से उन्होंने क‌ई टीवी शो ‘बाजी किसकी’, ‘सरकार की दुनिया’ जैसे टीवी शो में होस्ट के रूप में काम किया है. वर्तमान में वे दिल्ली प्रैस की मनोहर कहानियां की अपराध कथाओं पर बने एक शो में होस्ट के रोल में नजर आ रहे हैं.

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वैसे, आशुतोष राणा हालिया सालों में करण जौहर की फिल्म ‘हंप्टी शर्मा की दुलहनिया’ में आलिया भट्ट और फिल्म ‘धड़क’ में जाह्नवी कपूर के पिता के किरदार में नजर आए थे.

राणा का हिंदी प्रेम

आशुतोष राणा अपनी लाजवाब हिंदी के लिए भी काफी फेमस हैं. साहित्य का माहौल उन्हें अपने घर से ही मिला था. 7 भाई और 5 बहनों के परिवार में उन से बड़े भाई प्रभात नीखरा ‘दादा भैया’ बुंदेली भाषा के जानेमाने कवि थे.  अमरावती, महाराष्ट्र के हास्यव्यंग्य कवि किरण जोशी एक किस्सा साझा करते हुए बताते हैं कि कविताओं से आशुतोष का बड़ा लगाव रहा है. 1991 में जब गाडरवारा में कवि सम्मेलन हुआ था, तो उन्होंने मंच पर आ कर सभी कवियों से आटोग्राफ लिए थे, जबकि आज बौलीवुड में वे जिस मुकाम पर हैं, तो लोग उन से आटोग्राफ लेने की ख्वाहिश रखते हैं.

आशुतोष राणा अच्छे कवि होने के साथसाथ अच्छे लेखक भी हैं. हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति उन का आकर्षण कई बार देखा गया है. यही वजह है कि उन को बड़ेबड़े मंचों पर बुलाया जाता है.उन की कविताओं में देशप्रेम का अथाह सागर है.

आशीर्वाद : कहानी मेनका, अमित और ढोंगी गुरु की

आशीर्वाद : भाग 2 – कहानी मेनका, अमित और ढोंगी गुरु की

पिछले अंक में आप ने पढ़ा था:

शादी के बाद मेनका को पता चला कि उस का पति अमित हरिद्वार के किसी गुरुजी का परम भक्त है. सुहागरात पर जब अमित ने मेनका को गुरुजी की लिखी एक किताब के उपदेश सुनाए तो वह ठगी सी रह गई. बाद में उन की एक बेटी भी हो गई पर अमित का अपने गुरुजी के प्रति मोह न छूटा. इस से मेनका की गुरुजी के प्रति नफरत बढ़ती जा रही थी. एक दिन अमित ने मेनका को हरिद्वार ले जाने की जिद की.

अब पढ़िए आगे…

‘‘मैं नहीं जाऊंगी. तुम पता नहीं क्यों बारबार मुझे अपने गुरुजी के पास ले जाना चाहते हो जबकि मैं किसी गुरुवुरु के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती. अखबारों में और टैलीविजन पर आएदिन अनेक गुरुओं की करतूतों का भंडाफोड़ होता रहता है,’’ मेनका बोली.

‘‘सभी गुरु एकजैसे नहीं होते. आज मैं ने जब गुरुजी से फोन पर कहा कि आप के दर्शन करना चाहता हूं तो उन्होंने कहा कि मेनका को भी साथ लाना. हम उसे भी आशीर्वाद देना चाहते हैं.’’

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‘‘मुझे किसी आशीर्वाद की जरूरत नहीं है. तुम ही चले जाना.’’

‘‘मैं ने गुरुजी को वचन दिया है कि तुम्हें जरूर ले कर आऊंगा. तुम्हें मेरी कसम मेनका, तुम्हें मेरे साथ चलना होगा. अगर इस बार भी तुम मेरे साथ नहीं गईं तो मैं वहीं गंगा में डूब जाऊंगा,’’ अमित ने अपना फैसला सुनाया.

यह सुन कर मेनका कांप कर रह गई. वह जानती थी कि अमित गुरुजी के चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस चुका है. उस पर गुरुजी का जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है. वह भावुक भी है. अगर वह साथ न गई तो हो सकता है कि गुरुजी अमित को इतना बेइज्जत कर दें कि उस के सामने डूब कर मरने के अलावा कोई दूसरा रास्ता न बचे.

मेनका को मजबूरी में कहना पड़ा, ‘‘ऐसा मत कहो… मैं तुम्हारे साथ हरिद्वार चलूंगी.’’

अमित के चेहरे पर मुसकान फैल गई, ‘‘यह हुई न बात. मेनका, तुम्हें गुरुजी से मिल कर बहुत अच्छा लगेगा. वहां मुझे, तुम्हें और पिंकी को आशीर्वाद मिलेगा.’’

मेनका ने कोई जवाब नहीं दिया.

एक हफ्ते बाद अमित मेनका और पिंकी के साथ हरिद्वार जा पहुंचा. रेलवे स्टेशन से बाहर निकल कर उस ने एक आटोरिकशा किया और गुरुजी के आश्रम जा पहुंचा. शिष्यों ने उन के लिए एक कमरा खोल दिया.

सामान रख कर अमित ने मेनका से कहा, ‘‘कुछ देर आराम कर लेते हैं. शाम को गुरुजी से मिलेंगे और आरती देखेंगे. 2-3 दिन हरिद्वारऋषिकेश घूमेंगे.’’

शाम को तकरीबन 6 बजे अमित मेनका व पिंकी के साथ गुरुजी के कमरे के बाहर इंतजार में बैठ गया. कुछ देर बाद शिष्य ने उन को कमरे में भेजा.

कमरे में पहुंचते ही अमित ने हाथ जोड़ कर गुरुजी के चरणों में सिर रख दिया. मेनका ने भी चरण छू कर प्रणाम किया.

‘‘सदा सुखी रहो, सौभाग्यवती रहो,’’ गुरुजी ने आशीर्वाद दिया, ‘‘तुम्हारे घर में अपार सुख और वैभव आ रहा?है मेनका. तुम्हें जल्दी पुत्र रत्न भी प्राप्त होगा.

‘‘यह तुम्हारा पति अमित बहुत भोला और सीधासादा सच्चा इनसान है.’’

मेनका कुछ नहीं बोली.

गुरुजी ने मेनका की ओर देखते हुए कहा, ‘‘शाम की आरती में जरूर शामिल होना.’’

‘‘जी गुरुजी,’’ अमित ने तुरंत जवाब दिया.

शाम को साढ़े 7 बजे आश्रम के मंदिर में खूब जोरशोर से आरती हुई. गुरुजी और शिष्य आरती में लीन थे.

प्रसाद ले कर कमरे में लौट कर अमित ने कहा, ‘‘मुझे तो यहां आ कर बहुत अच्छा लगता है मेनका. तुम्हें कैसा लगा?’’

‘‘ठीक है.’’

कुछ देर बाद एक शिष्य ने आ कर कहा, ‘‘गुरुजी मेनका को बुला रहे हैं.’’

‘‘अभी आ रही है,’’ अमित बोला.

‘‘जाओ मेनका. लगता है, गुरुजी तुम्हें कुछ खास आशीर्वाद देना चाहते हैं.’’

‘‘मैं अकेली नहीं जाऊंगी,’’ मेनका ने कहा.

‘‘अरे मेनका, हम तो भाग्यशाली हैं. गुरुजी हमें बुला कर दर्शन और आशीर्वाद दे रहे हैं. बहुत से लोग तो इन से मिलने को तरसते रहते हैं. जाओ, देर न करो. पिंकी यहीं है मेरे पास,’’ अमित ने कहा.

मेनका को अकेले ही जाना पड़ा. वह धड़कते दिल से नमस्कार कर गुरुजी के सामने बैठ गई.

तख्त पर बैठे हुए गुरुजी ने उस की ओर देख कर कहा, ‘‘मेनका, तुम्हारा भविष्य बहुत ही उज्ज्वल है. जरा अपना हाथ दिखाओ. हम देखना चाहते हैं कि तुम्हारा भाग्य क्या कह रहा है?’’

मेनका ने न चाहते हुए भी गुरुजी की तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया. उस की कोमल हथेली पकड़ कर गुरुजी गंभीर मुद्रा में खो गए.

मेनका के दिल की धड़कनें बढ़ने लगीं. उसे यह सब जरा भी अच्छा नहीं लग रहा था.

‘‘देखो मेनका, जब तक अमित तुम्हारे पास है तुम्हें बहुत सुख मिलेगा, पर…’’ कहतेकहते गुरुजी रुक गए.

‘‘लेकिन क्या गुरुजी…?’’ मेनका चौंकी.

‘‘अमित ज्यादा दिनों तक तुम्हारी जिंदगी में नहीं रहेगा. वह तुम्हारी जिंदगी से काफी दूर निकल जाएगा. बिना पति के पत्नी की हालत कटी पतंग की तरह होती है. यह तुम भी अच्छी तरह जानती हो. मुझे अमित और तुम्हारे बीच के संबंध के बारे में पूरी जानकारी है. जो तुम चाहती हो, वह नहीं चाहता.’’

‘‘गुरुजी, इस में गलती पर कौन है?’’ मेनका ने पूछा.

‘‘गलती पर कोई नहीं है. अपनेअपने सोचने का ढंग है. मैं तुम्हारे मन की हालत समझ रहा हूं. तुम एक प्यासी नदी की तरह हो मेनका. तुम सुंदर ही नहीं, बहुत सुंदर हो, पर तुम्हारे रूप का असर अमित पर जरा भी नहीं पड़ रहा है. अमित इस समय मेरे प्रभाव में है. अगर मैं चाहूं तो वह कभी भी सबकुछ छोड़ कर मेरी शरण में आ सकता है,’’ गुरुजी ने मेनका की ओर देखते हुए कहा.

‘‘आप कहना क्या चाहते हैं?’’

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‘‘मेनका, तुम जितनी सुंदर हो, अमित उतना ही भोला है. वह तुम्हारी इच्छाओं को आज तक समझ नहीं पाया. तुम्हारा यह सुंदर रूप देख कर मेरी प्यास बढ़ गई है. मैं भी एक प्यासा सागर हूं,’’ कहते हुए गुरुजी ने मेनका की हथेली चूमनी चाही.

मेनका को लगा, जैसे उस के शरीर में कोई बिच्छू डंक मार देना चाहता है. उस ने एक झटके से अपना हाथ छुड़ा कर कहा, ‘‘यह क्या कर रहे हैं आप? यहां बुला कर आप ऐसी हरकतें करते हैं क्या?’’

‘‘मेनका, तुम्हें मेरी बात माननी होगी, नहीं तो तुम्हारा अमित तुम्हें छोड़ कर मेरी शरण में आ जाएगा. उस के बिना क्या तुम अकेली रह लोगी?’’

‘‘मैं अकेली रह लूंगी या नहीं, यह तो बाद की बात है, लेकिन मैं आप

की असलियत जान चुकी हूं. इस देश में आप की तरह अनेक ढोंगी व पाखंडी गुरु हैं जिन के बारे में अखबारों में छपता रहता है.

‘‘अमित भोला है, पर मैं नहीं. मैं तो यहां आना ही नहीं चाहती थी. मुझे तो अमित की कसम के सामने मजबूर होना पड़ा. अब मैं आप के इस आश्रम में नहीं रहूंगी,’’ मेनका ने गुस्से में कहा.

यह सुनते ही गुरुजी खिलखिला कर हंस पड़े. मेनका हैरान सी गुरुजी की ओर देखती रह गई.

‘‘सचमुच तुम बहुत समझदार हो मेनका, तुम भोली नहीं हो. मैं तो तुम्हारा इम्तिहान ले रहा था. मैं यह देखना चाह रहा था कि तुम कितने पानी में हो. अब तुम जा सकती हो,’’ गुरुजी ने मेनका की ओर देखते हुए कहा.

मेनका बाहर निकली और तेजी से कमरे में लौट आई. आते ही मेनका ने कहा, ‘‘अब हम यहां नहीं रहेंगे.’’

‘‘क्यों, क्या बात हुई?’’ अमित ने हैरान हो कर पूछा.

‘‘यह तुम्हारे गुरुजी भी उन ढोंगी बाबाओं की तरह हैं जो पकड़े जा रहे हैं. असलियत खुल जाने पर जिन की जगह आश्रम में नहीं, जेल में होती है. कई गुरु जेल में हैं. देखना, किसी न किसी दिन तुम्हारा यह ढोंगी गुरु भी जरूर पकड़ा जाएगा.’’

‘‘क्या हुआ? कुछ बताओ तो सही? तुम तो गुरुजी के पास आशीर्वाद लेने गई थीं, फिर क्या हो गया जो तुम गुरुजी के लिए ऐसे शब्द बोल रही हो?’’

‘‘मैं तो पहले ही यहां आने के लिए मना कर रही थी. पर तुम्हारी कसम ने मुझे मजबूर कर दिया,’’ कहते हुए मेनका ने पूरी घटना सुना दी.

अमित कुछ कहने ही वाला था, तभी एक शिष्य ने कमरे में आ कर कहा, ‘‘अमितजी, आप को गुरुजी बुला रहे हैं.’’

अमित शिष्य के साथ चल दिया.

मेनका धड़कते दिल से कमरे में बैठी रही. उस की आंखों के सामने बारबार गुरुजी का चेहरा और वह सीन याद आ रहा था, जब गुरुजी ने उस का हाथ पकड़ कर चूमना चाहा था. उस के मन में गुरुजी के प्रति नफरत भर उठी.

कुछ देर बाद अमित लौटा और बोल उठा, ‘‘मेनका, यह तुम ने अच्छा नहीं किया जो गुरुजी की बेइज्जती कर दी. गुरुजी ने तो तुम्हें आशीर्वाद देने के लिए बुलाया था लेकिन तुम ने गुरुजी की शान में ऐसी बातें कह दीं, जो नहीं कहनी चाहिए थीं. अब तुम्हें मेरे साथ चल कर गुरुजी से माफी मांगनी पड़ेगी.’’

यह सुन कर मेनका समझ गई कि गुरुजी ने अमित से झूठ बोल दिया है. वह बोली, ‘‘अमित, यहां आ कर तो मैं बेइज्जत हुई हूं. गुरुजी ने जो हरकत मेरे साथ की है, उस के बाद तो मैं ऐसे गुरु की शक्ल भी देखना नहीं चाहूंगी. माफी मांगने का तो सवाल ही नहीं उठता है.’’

अमित का भी पारा ऊपर चढ़ने लगा. वह मेनका को घूरता हुआ बोला, ‘‘मेनका, मुझे गुस्सा न दिलाओ. मेरे गुरुजी झूठ नहीं बोलते. मेरे साथ चल कर तुम्हें माफी मांगनी पड़ेगी.’’

‘‘मुझे नहीं जाना तुम्हारे ढोंगी गुरु के पास.’’

अमित अपने गुस्से पर काबू न रख सका. उस ने एक जोरदार थप्पड़ मेनका के मुंह पर दे मारा और कहा, ‘‘मैं तुम्हारी शक्ल भी देखना नहीं चाहता…’’

‘‘मैं यहां से चली जाऊंगी अपनी बेटी को ले कर. आज की रात किसी होटल में रुक जाऊंगी. कल सुबह होते ही बस या टे्रन से वापस मेरठ चली जाऊंगी. तुम चाहे जितने दिन बाद आना.

‘‘देख लेना किसी न किसी दिन इस ढोंगी गुरु की पोल भी खुलेगी और यह भी जेल में पहुंचेगा.’’

मेनका ने एक बैग में अपने व पिंकी के कपड़े भरे और पिंकी को गोद में उठा कर आश्रम से बाहर निकल गई.

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मेनका एक होटल में पहुंची और एक कमरा ले कर बिस्तर पर कटे पेड़ की तरह गिर पड़ी.

आश्रम के कमरे में बैठे अमित को बारबार मेनका पर गुस्सा आ रहा था. मेनका ने गुरुजी की बेइज्जती कर दी. वह माफी मांगने भी नहीं गई. वह बहुत हठी है. न जाने खुद को क्या समझती है वह. चली जाएगी जहां जाना होगा, वह तो अब उस से कभी बात नहीं करेगा. उसे ऐसी पत्नी नहीं चाहिए जो गुरुजी और उस की बात ही न सुने. इस के लिए उसे तलाक भी लेना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेगा.

(क्रमश:)

क्या मेनका और अमित की शादी वाकई तलाक के कगार तक जा पहुंची थी? क्या मेनका ने गुरुजी से माफी मांगी? पढ़िए अगले अंक में…

भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह ने नेपोटिज्म को लेकर कही ये बातें, सुशांत के जाने से हैं बेहद दुखी

सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की सुसाइड से कई बातें सामने निकल कर आई हैं जिससे कि सभी लोग इस समय काफी गुस्से मे हैं. दरअसल बॉलीवुड में हो रहे नेपोटिज्म (Nepotism) की वजह से सुशांत सिंह राजपूत जैसे टैलेन्टिड एक्टर्स आगे नहीं बढ़ पाते फिर चाहे उनके अंदर जितना मर्जी टैलेंट हो या उन्होनें जितनी मर्जी स्ट्रगल की हो लेकिन जिनके पीछे गोडफादर हैं उन्हें बहुत ही आराम से बॉलीवुड में एंट्री भी मिल जाती है और फिल्मों की ऑफर में भी कोई कमी नहीं आती.

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सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की बात करें तो खबरों के अनुसार उन्हें जो भी फिल्में मिलती थी वो सब उनसे छीन कर किसी और एक्टर को दे दी जाती थी. इसी के चलते सुशांत ने शुरू में तो ये सब बरदाश्त कर लिया लेकिन एक समय आया जब पानी उनके सर के ऊपर से चला गया और वे धीरे धीरे डिप्रेशन का शिकार होते चले गए. इसके बाद एक दिन उनके मन में ना जाने क्या आया और उन्होनें खुद को फांसी पर लटका लिया.

 

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RIP 🙏 you never no what someone is going through Zindagi rahte huye kisi ki kadra kar lo😭

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ऐसे में ना सिर्फ आम इंसान बल्कि कई बॉलीवुड एक्टर्स भी इंडस्ट्री में हो रहे नेपोटिज्म के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं जैसे कि कंगना रनौत (Kangana Ranaut), मनोज वाजपेयी (Manoj Bajpayee), शेखर सुमन (Shekhar Suman), आदी. इसी कड़ी में भोजपुरी इंडस्ट्री से जुड़े कई लोग भी सामने आए हैं और हाल ही में जानी मानी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) ने अपने सोशल मीडियो अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वे नेपोटिज्म के बारे में खुल कर बात कर रही हैं.

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अक्षरा सिंह (Akshara Singh) ने वीडियो में कहा कि, “मेरे मन में कई तरह के विचार आ रहे हैं. हर कोई नेपोटिज्म के बारे में बात कर रहा है. यहां पर मैं भी अपने मन की बात आप सबसे कहना चाहती हूं. मुझे लगता है कि हर जगह नए टैलेंट को आगे बढ़ने देना चाहिए. हम जैसे आम लोगों को बॉलीवुड में काम करने के लिए बहुत सारी मीटिंग्स करनी होती हैं और ऑडिशन देने होते हैं लेकिन स्टार किड्स को आसानी से मौका मिल जाता है. स्टारकिड्स का भी ऑडिशन होना चाहिए. तभी तो मुकाबला बराबरी का होगा.”

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इसी बारे में बात करते हुए अक्षरा सिंह (Akshara Singh) आगे कहती हैं कि, ‘मुझे लगता है कि बॉलीवुड में नेपोटिज्म से ज्यादा गुटबाजी खतरनाक है. छोटे और नए कलाकार से लेकर टेक्नीशियन भी गुटबाजी का शिकार बन जाते हैं. मैंने खुद भोजपुरी इंडस्ट्री मे गुटबाजी देखी है. इस गुटबाजी के चलते मुझे काम करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. ये इंसानियत नहीं है.

एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) की इन बातों से साफ पता चलते है कि नेपोटिज्म सिर्फ बॉलीवुड इंडस्ट्री में ही नहीं बल्कि हर जगह है और हम सबको मिलकर इसके खिलाफ आवाज़ उठानी होगी ताकी ज्यादा से ज्यादा मौका टैलेन्टिड एक्टर्स को मिले ना कि स्टार किड्स को.

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सुशांत सिंह राजपूत की सुसाइड से उदास हुईं शहनाज गिल, लाइव चैट में कही ये बात

सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की सुसाइड को भले ही काफी दिन हो गए हैं लेकिन आज भी लोग इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे कि वे अब हमारे बीच नहीं रहे. इस बात का किसी को अंदाजा नहीं था कि बौलीवुड के टैलेन्टिड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत सिर्फ 34 साल की उम्र में ये दुनिया छोड़ कर चले जाएंगे. जहां एक तरफ सुशांत की फिल्मों नें हम सबको हंसाने के साथ साथ काफी मोटिवेट भी किया तो वहीं दूसरी तरफ उनके जाने की खबर ने सबकी आंखों में आंसू भर दिए.

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जब से सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) ने अपने ही अपार्टमेंट में खुद को फांसी लगा कर आत्महत्या की तभी से लोग सुशांत के बारे में सोशल मीडिया पर खूब चर्चा करते दिखाई दे रहे हैं, कोई उन्हें याद करके उदास है तो किसी को इस बात का यकीन ही नहीं हो रहा कि वे इस दुनिया से जा चुके हैं. ऐसे में एक और शख्स का नाम सामने आया है जिन्होनें कलर्स टीवी के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बौस  के पौपुलर सीजन 13 (Bigg Boss 13) में हम सबको खूब एंटरटेन किया था.

 

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“Use your smile to change the world; don’t let the world change your 😊

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जी हां, हम यहां पर बात कर रहे हैं पंजाब की कैटरीना कैफ (Katrina Kaif) कहे जाने वाली कंटेस्टेंट शहनाज कौर गिल (Shehnaz Kaur Gill) की. हाल ही में शहनाज गिल ने एक लाइव चैट में सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के जाने पर खूब नाराज़गी जाहिर की थी. शहनाज ने लाइव चैट में कहा कि, “मैं कभी भी सुशांत सिंह राजपूत से नहीं मिली हूं न ही मैंने उनको बहुत करीब से जाना है. मैंने उनकी सभी फिल्मों को भी नहीं देखा है. उसके बाद भी जब मुझे सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की खबर मिली तो मैं हैरान थी. इस खबर ने मुझे बहुत निराश कर दिया था.”

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Naturally smart Dumb by choice 😉

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इसी बारे में शहनाज गिल (Shehnaz Gill) ने आगे बात करते हुए कहा कि, “सुशांत सिंह राजपूत को इस तरह से अपनी जिंदगी को खत्म नहीं करना चाहिए था. सुशांत सिंह राजपूत बहुत टैलेंटेड एक्टर थे. वह आगे चलकर देश का नाम रोशन कर सकते थे. वो अपनी जिंदगी में बहुत कुछ हासिल कर सकते थे. क्या पता आने वाले समय में वह बॉलीवुड के सुपरस्टार बन जाते.”

 

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Ur thoughts create words 🤔words create actions👨‍🎤n ur actions become ur destiny ✨so b positive ⭐️

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शहनाज गिल (Shehnaz Gill) की इन बातों से साफ दिखाई दे रहा है कि भले ही वे सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) को करीब से नहीं जानती थी लेकिन फिर भी शहनाज को उनके जाने का बहुत दुख हुआ है और सिर्फ शहनाज को ही नहीं बल्कि उनके जाने का दुख हर किसी के मन में है फिर चाहे वे कोई बॉलीवुड स्टार हो या आम इंसान.

Dr Ak Jain: मर्दों में बढ़ती शीघ्रपतन की समस्या, पढ़ें खबर

आज के दौर में हर उम्र के मर्दों में शीघ्रपतन की समस्या देखने में आ रही है. आम भाषा में इसे जल्दी पस्त हो जाना और अंगरेजी में इसे प्रीमैच्योर इजैकुलेशन या अर्ली इजैकुलेशन कहा जाता है. ऐसा अकसर अंग में प्रवेश से पहले या उस के तुरंत बाद हो सकता है. इस की वजह से दोनों पार्टनर सेक्स संबंधों के लिहाज से असंतुष्ट रहते हैं. दरअसल, शीघ्रपतन आदमियों में सेक्स की आम समस्याओं में से एक है. शायद हर मर्द अपनी जिंदगी में कभी न कभी इस परेशानी से घिरता है. अगर अंग में डालने से पहले ही मर्द का वीर्य गिर जाता है, तो ऐसे में उस जोड़े में बच्चे पैदा न होने की समस्या भी पेश आती है.

शीघ्रपतन की समस्या का असर आदमी की सेक्स लाइफ पर देखने को मिलता है. इस समस्या के चलते आदमी अपनी लाइफ पार्टनर या प्रेमिका को सेक्स सुख नहीं दे पाता. इस से नाजायज संबंध भी बन जाते हैं, जिस का नतीजा कई बार परिवार के टूटने के रूप में भी होता है. इस समस्या के हल के लिए लोग नीमहकीमों के चंगुल में भी फंस जाते हैं, जो उन को लूटते हैं और समस्या को सुलझाने के बजाय और बढ़ा देते हैं. ज्यादा हस्तमैथुन करने से शरीर के बायोलौजिकल क्लौक का सैट हो जाना है. इस की वजह से आदमी को क्लाइमैक्स पर पहुंचने की जल्दी होती है और वह जल्दी से जल्दी मजा पाना चाहता है.

अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या से जूझ रहे हैं तो संपर्क करिए लखनऊ के डॉक्टर ए. के. जैन से जो पिछले 40 सालों से इन समस्याओं का इलाज कर रहे हैं.

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* सेक्स के बारे में ज्यादा सोचना भी शीघ्रपतन के लिए जिम्मेदार होता है. सेक्स फैंटेसी या पोर्न फिल्में देखने से भी आदमी ज्यादा जोश में आ जाता है और जल्दी ही पस्त हो जाता है.

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* शराब के ज्यादा सेवन या डायबिटीज की वजह से भी शीघ्रपतन की समस्या पैदा हो सकती है.

* सेक्स संबंध बनाने के शुरुआती दिनों में भी इस तरह की समस्या पैदा हो जाती है.

* नया पार्टनर होने के चलते जोश में जल्दी वीर्य गिर सकता है.

* जल्दी पस्त होना इस बात पर भी निर्भर करता है कि जोश देने का तरीका कैसा है.

* ओरल सेक्स से भी आदमी जल्दी डिस्चार्ज हो सकता है.

क्या करें?

अगर शीघ्रपतन की समस्या आप की जिंदगी में भी तनाव की वजह बन चुकी है, तो इसे चुपचाप सहन न करते रहें, बल्कि अपने डाक्टर से मिलें. वह आप की शारीरिक जांच कर इस की वजह पता लगाने की कोशिश करेगा. डाक्टर के साथ खुल कर अपनी सेक्स लाइफ के बारे में बात करें और अगर कभी किसी बीमारी से पीडि़त हैं, तो उस के बारे में भी किसी तरह की जानकारी न छिपाएं.

ये उपाय भी आजमाएं

* जल्दी पस्त होना रोकने के लिए लंबी सांसें लें.

* जब भी वीर्य निकलने का समय हो, अपने साथी को लंबी सांसें लेने को कहें. इस से धड़कनों की रफ्तार कम होगी और वीर्य जल्दी नहीं निकलेगा.

* सेक्स के पहले इस प्रक्रिया के बारे में उसे अच्छे से समझाएं.

* ‘निचोड़ने की विधि’ के तहत अपने साथी के अंग को नीचे से जोर से दबाएं. ऐसा तब करें, जब आप के साथी का वीर्य निकलने वाला हो. इस से उस के अंग का इरैक्शन कम होगा और वीर्य नहीं निकलेगा.

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* जल्द वीर्य को गिरने से रोकने के लिए स्टौप एंड स्टार्ट विधि अपनाएं. इस के तहत अपने साथी को 3 से 4 बार हस्तमैथुन करने के लिए कहें, जिस में वीर्य निकलने के समय पर उस का रुकना जरूरी है. इस से उसे पता चलेगा कि किस समय इजैकुलेशन होता है और वह इस पर अच्छे से काबू भी कर सकता है.

शीघ्रपतन और दवाएं

ऐसा नहीं है कि शीघ्रपतन होने से हर किसी के मन में तनाव की भावना पैदा हो जाती है. कुछ लोग इसे ले कर ज्यादा नहीं सोचते और इस का हल अपने तरीके से निकालते हैं. लेकिन अगर आप को लगता है कि इस से आप के मजे में कमी आ रही है, तो आप जोलोफ्ट, प्रोजाक जैसी दवाओं का सेवन कर सकते हैं. ये दवाएं शीघ्रपतन रोकने में आप की मदद करती हैं व आप का साथी बिस्तर पर आने से कई घंटे पहले भी इन दवाओं का सेवन कर सकता है.

एक बार इस दवा का सेवन कर लेने पर जब आप दोनों अच्छा वक्त बिताना शुरू कर रहे हों, तो उस समय मर्द की कामुकता में इजाफा होगा. इस से न सिर्फ वीर्य निकलने से रुकेगा, बल्कि पहले के मुकाबले आप के सेक्स संबंध भी बेहतर होंगे.

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इन दवाओं के सेवन के लिए बेहतर यही होगा कि आप किसी माहिर सेक्स डाक्टर से सलाह लें. इस के अलावा जोश रोकने के लिए अंग पर लोकल एनैस्थैटिक क्रीम या स्प्रे का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. अंग में जोश में कमी आने से वीर्य गिरने में देरी आएगी. कुछ मर्दों में कंडोम का इस्तेमाल भी इसी तरह जोश घटाने में मददगार होता है.

आमतौर पर आदमी वीर्य गिरने को कंट्रोल करना सीख लेते हैं. इस बारे में जानकारी हासिल करना और कुछ आसान उपायों को अपनाने से हालात पूरी तरह सामान्य हो जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक शीघ्रपतन की समस्या का जारी रखना आदमी में डिप्रैशन या एंग्जाइटी की वजह से हो सकता है. किसी मनोवैज्ञानिक से मिल कर इन परेशानियों को दूर किया जा सकता है.

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लखनऊ के डॉक्टर ए. के. जैन, पिछले 40 सालों से इन सभी समस्याओं का इलाज कर रहे हैं. तो आप भी पाइए अपनी सभी  सेक्स समस्या का बेहतर इलाज अंतर्राष्ट्रीय ख्याति एवं मान्यता प्राप्त डॉ. जैन द्वारा. 

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