एक औरत : भाग 3 – आतिश के परिवार का खात्मा

एक बार संबंध बन जाने के बाद यह सिलसिला सा बन गया. इस के बाद आतिश मोनिका की और ज्यादा मदद करने लगा. मोनिका का व्यवहार भी अब बदल चुका था. अब वह केसरवानी परिवार में ऐसे आत्मविश्वास के साथ काम और बातें करने लगी जैसे वह उस परिवार की ही सदस्य हो. मौका मिलने पर आतिश भी मोनिका को मौल, रेस्टोरेंट आदि जगहों पर ले जाने लगा.

अवैध संबंधों को कोई लाख छिपाने की कोशिश करे, लेकिन एक न एक दिन उन की पोल खुल ही जाती है. आतिश और मोनिका के साथ भी यही हुआ. एक दिन आतिश की बहन नीहारिका ने अपने भाई को मोनिका के साथ छेड़छाड़ करते देख लिया. हालांकि नीहारिका को मोनिका की बातों आदि से शक तो काफी दिनों से हो रहा था, लेकिन उस दिन सब कुछ अपनी आंखों से देखने के बाद उस का शक विश्वास में बदल गया.

यह बात छिपाने वाली नहीं थी. लिहाजा उस ने यह बात अपनी मां के कानों में डाल दी. मां ने आतिश को तो समझाया ही, साथ ही मोनिका को भी अपने घर के कामों से हटाने का फैसला ले लिया. लेकिन आतिश ने मोनिका का काम छुड़वाने का विरोध किया और साथ ही मां से वादा किया कि अब वह मोनिका से दूर रहेगा.

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घर वालों ने भी सोचा कि शायद आतिश अब मान जाएगा, लेकिनवह नहीं माना. मौका मिलते ही वह और मोनिका अपनी हसरतें पूरी कर लेते थे. उधर नीहारिका और किरण की निगाहें आतिश और मोनिका की हरकतों को समझ लेती थीं.

यह बात जब आतिश की पत्नी प्रियंका को पता चली तो उस ने घर में कोहराम मचा दिया. तब गुस्से में आतिश ने पत्नी की पिटाई कर दी. घर के सभी लोग आतिश को समझातेसमझाते थक गए, लेकिन उस के दिमाग में उन की बातें नहीं घुसी. उसे तो मोनिका के अलावा घर के सभी लोग दुश्मन लगने लगे थे.

आतिश की बहन नीहारिका को कहीं से आतिश और मोनिका की एक फोटो मिल गई, जिस में दोनों साथसाथ थे. उस ने भाई से कहा कि वह मोनिका को भूल जाए, वरना इस फोटो को सोशल मीडिया पर डाल देगी.

आतिश ने उस से कहा कि अगर वह अपने मोबाइल से फोटो डिलीट कर देगी तो वह मोनिका से नहीं मिलेगा. नीहारिका ने कहा कि वह कुछ दिनों तक देखेगी, अगर इस दौरान उस ने मोनिका से बात नहीं की तो वह फोटो डिलीट कर देगी.

आतिश 2-4 दिन तो मोनिका से नहीं मिला, लेकिन वह फिर उस से बातें करने लगा. जब नीहारिका ने देखा कि दोनों ने अपनी आदत नहीं सुधारी है तो उस ने आतिश और मोनिका की वह फोटो फेसबुक पर डाल दी. यह बात जब आतिश को पता लगी तो उस ने नीहारिका की पिटाई कर दी.

नौकरानी मोनिका से पति के संबंधों की वजह से प्रियंका मानसिक तनाव में रहने लगी, क्योंकि पति से वह कुछ कहती तो वह उस की पिटाई कर देता था.

इस बात को ले कर घर में कलह रहने लगी. मां किरण बेटी और बहू का पक्ष लेती थीं, इसलिए आतिश मां को बुराभला कहने से नहीं चूकता था.

दिनोंदिन घर के हालात सुधरने के बजाए बिगड़ते जा रहे थे. आतिश अपने मांबाप तक की पिटाई करने लगा था. शोरशराबा सुन कर पड़ोसी घर आ कर आतिश को समझाने की कोशिश करते तो वह उन्हें भी बेइज्जत कर देता. लिहाजा पड़ोसी भी परेशान हो गए.

पिता तुलसीदास केसरवानी जब ज्यादा परेशान हो गए तो उन्होंने एक दिन अपने शुभचिंतक पड़ोसी से बात की. पड़ोसी की सलाह पर तुलसीदास ने फैसला लिया कि वह धूमनगंज थाने जा कर बेटे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएंगे.

किसी तरह आतिश को इस बात की भनक लग गई कि उस के पिता थाने में उस के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने जाने वाले हैं. रिपोर्ट दर्ज होने के बाद उस के खिलाफ काररवाई हो सकती थी, लिहाजा उस ने अपने मातापिता के सामने हाथ जोड़ते हुए अपने किए की माफी मांगी और सुधर जाने का भरोसा दिया. मांबाप ने भी सोचा कि बेटे को अपनी गलती का अहसास हो रहा है तो उसे माफ कर देने में कोई बुराई नहीं है. लिहाजा उन्होंने उसे सुधर जाने की नसीहत देते हुए माफ कर दिया.

लेकिन माफी मांगने के पीछे आतिश के दिमाग में दूसरी ही खिचड़ी पक चुकी थी. उस ने सोच लिया था कि वह किसी तरह घर के सारे लोगों का काम तमाम कराएगा. उस के बाद पिता की सारी संपत्ति का मालिक बन जाएगा. साथ ही मोनिका के साथ रहने से उसे कोई रोकने वाला भी नहीं होगा.

आतिश की दुकान पर कई सालों से अनुज श्रीवास्तव नाम का एक युवक काम कर रहा था. वह दबंग किस्म का था. आतिश ने अपने घर वालों का कत्ल करने की बात उस से शेयर की, इस के लिए वह पैसे देने को भी तैयार था. अनुज पैसों के लालच में आ गया. 8 लाख रुपए में आतिश ने घर के 4 सदस्यों की हत्या कराने का सौदा पक्का कर दिया. इस के लिए उस ने अनुज को 75 हजार रुपए एडवांस भी दे दिए.

अनुज को लगा कि यह काम वह अकेला नहीं कर सकेगा, इसलिए उस ने कौशांबी के अजुहा गांव के अपने मामा राजकृष्ण श्रीवास्तव व एक अन्य आदमी को भी योजना में शामिल कर लिया. सभी ने तय किया कि गोली के बजाए चाकू से वारदात को अंजाम देना आसान रहेगा.

योजना को अंजाम देने के लिए 14 मई, 2020 बृहस्पतिवार का दिन तय हो गया. योजना के अनुसार आतिश दोपहर डेढ़ बजे किस्त जमा कराने के लिए बैंक चला गया, ताकि उस पर कोई शक न करे और बैंक के सीसीटीवी में भी उस की फुटेज आ जाए.

लौकडाउन की वजह से तुलसीदास की दुकान बंद थी. आतिश के घर से निकलने के बाद अनुज अपने मामा और साथी को ले कर तुलसीदास के घर पहुंच गया. चूंकि अनुज को घर के सभी लोग जानते थे, इसलिए उन्होंने सभी को घर में बुला लिया.

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अनुज ने तुलसीदास केसरवानी से साथ आए लोगों का परिचय अपने रिश्तेदारों के रूप में कराया और कहा कि लौकडाउन की वजह से इन्हें आर्थिक परेशानी है. अगर आप कुछ मदद कर दें तो इन का भला हो जाएगा.

उस समय तुलसीदास केसरवानी और उन की पत्नी किरण ही वहां मौजूद थे. बेटी नीहारिका ऊपर की मंजिल पर अपनी भाभी प्रियंका के पास थी. अनुज की बात पर तुलसीदास को दया आ गई. वह पैसे लेने के लिए अपनी दुकान की तरफ गए. क्योंकि उन की दुकान में जाने का एक दरवाजा घर के अंदर से भी था.

तुलसीदास के पीछेपीछे अनुज और उसका मामा भी गया. उन दोनों ने वहीं पर तुलसीदास केसरवानी का मुंह दबोच कर गला रेत दिया. गला कटने के बाद तुलसीदास जमीन पर गिरे तो आवाज सुन कर उन की पत्नी किरण वहां आई तो बदमाशों ने उन का भी गला रेत दिया. उसी दौरान बेटी नीहारिका भाभी के पास से नीचे आई तो उस की भी उन्होंने गला रेत कर हत्या कर दी.

इस के बाद वे ऊपर की मंजिल पर गए. वहां आतिश की पत्नी प्रियंका की भी उन्होंने हत्या कर दी. घर में 4 लोगों की हत्या करने के बाद उन्होंने बाथरूम में पहुंच कर खून से सने हाथ साफ किए. फिर दरवाजा भिड़ा कर वहां से चले गए.

सीओ बृजनारायण सिंह ने आरोपी आशीष उर्फ आतिश से पूछताछ के बाद अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए उन के घरों पर टीमें भेजीं. लेकिन अनुज श्रीवास्तव ही पुलिस के हाथ लग सका, अन्य अभियुक्त अपने घरों से फरार मिले. पूछताछ में अनुज श्रीवास्तव ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

हत्यारोपी अनुज श्रीवास्तव और आशीष उर्फ आतिश से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश कर जिला जेल भेज दिया.

– कथा पुलिस सूत्रों व जनचर्चा पर आधारित

एक औरत : भाग 2 – आतिश के परिवार का खात्मा

उस समय घर के सभी लोग ठीकठाक थे. जब वह पौने 4 बजे बैंक से घर लौटा तो उसे घर का दरवाजा भिड़ा हुआ मिला, घर में सभी लोगों की लहूलुहान लाशें पड़ी थीं. कहतेकहते आतिश रोने लगा.

मामला गंभीर जरूर था, लेकिन पुलिस अधिकारियों को इस बात की संभावना नजर आ रही थी कि इस केस में ऐसा कोई व्यक्ति शामिल था, जिस के इस परिवार से नजदीकी संबंध थे. प्रारंभिक पूछताछ के बाद पुलिस ने चारों शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए.

हत्या के इस मामले को सुलझाने के लिए एसएसपी सत्यार्थ पंकज ने सीओ बृजनारायण सिंह की अगुवाई में कई पुलिस टीमों को लगा दिया. सभी पुलिस टीमें अलगअलग ऐंगल से केस की तह में पहुंचने की कोशिश में जुट गई.

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एक पुलिस टीम क्षेत्र में स्थित मोबाइल फोन टावर के संपर्क में आने वाले फोन नंबरों (डंप डाटा) को खंगालने में लगी थी तो दूसरी टीम तुलसीदास केसरवानी के घर के बाहर और रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखने में लगी थी. मृतकों के घर के बाहर भी सीसीटीवी कैमरा लगा था, लेकिन जांच में पता चला कि वह कैमरा पहले से ही खराब था.

सीओ बृजनारायण सिंह अब यह पता लगाने में जुट गए कि केसरवानी परिवार के यहां किनकिन लोगों का आनाजाना था और उन के ऐसे कौनकौन नजदीकी रिश्तेदार या संबंधी हैं, जिन का उन के यहां आनाजाना था.

यह सब जानने के लिए उन्होंने आशीष उर्फ आतिश को कोतवाली बुलवाया. पुलिस की एक टीम को लोगों से बातचीत कर के जानकारी मिली थी कि शादीशुदा आतिश के एक महिला के साथ प्रेम संबंध हैं, जिस की वजह से उस के घर में अकसर झगड़ा होता था.

पुलिस के लिए यह जानकारी महत्त्वपूर्ण थी. पुलिस को इस बिंदु पर भी आतिश से बात करनी थी. सीओ बृजनारायण सिंह ने आतिश से सब से पहले पूछा कि उस की या उस के पिता की किसी से कोई दुश्मनी तो नहीं थी.

आतिश ने किसी से रंजिश होने की बात से इनकार कर दिया. इस के बाद उन्होंने आतिश से उन रिश्तेदारों, दोस्तों या संबंधियों के बारे में पूछा जो उस के घर आतेजाते थे. आतिश ने उन सभी के नाम लिखवा दिए.

यह जानकारी लेने के बाद सीओ साहब ने आतिश से उस महिला के बारे में पूछा, जिस के साथ उस के प्रेम संबंध थे. यह सुनते ही आतिश के चेहरे का रंग उड़ गया. वह संभलते हुए बोला, ‘‘सर, मेरी तो शादी हो चुकी थी, पत्नी प्रियंका के होते मैं यह सब कैसे कर सकता था?’’

‘‘क्या शादीशुदा पुरुषों के किसी दूसरी महिला के साथ संबंध नहीं होते?’’ सीओ साहब ने पूछा.

‘‘सर, होते होंगे, लेकिन मैं ऐसा नहीं हूं.’’ आतिश बोला.

‘‘जब ऐसी बात नहीं थी तो तुम्हारी पत्नी और मातापिता के साथ तुम्हारा किस बात को ले कर झगड़ा होता था?’’ सीओ बृजनारायण सिंह ने उस से पूछा.

‘‘सर, घरेलू बातों को ले कर कभीकभी कहासुनी हो जाती थी.’’ आतिश ने सफाई दी.

‘‘आतिश, तुम झूठ बोल रहे हो. बात घरेलू नहीं बल्कि उस औरत और तुम्हारे संबंधों की ही थी. जिस की वजह से तुम ने कई बार अपने मातापिता और पत्नी की पिटाई तक कर दी थी. तुम बात को छिपाने की कोशिश मत करो, हमें सच्चाई बता दोगे तो सही रहेगा वरना हमें दूसरा तरीका अपनाना पड़ेगा.’’ सीओ साहब ने तल्खी से कहा.

सख्ती की बात सुन कर आतिश को लगा कि अब उस का झूठ ज्यादा देर तक नहीं चलेगा. उस की आंखों में आंसू छलक आए. वह सीओ साहब के सामने हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाते हुए बोला, ‘‘सर, मुझे माफ कर दो. मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई. मेरी मति मारी गई थी, जो अपने ही घर वालों का दुश्मन बन बैठा.’’

सीओ बृजनारायण सिंह ने उसे तसल्ली देते हुए कहा, ‘‘कभीकभी इंसान अपने स्वार्थ में इतना अंधा हो जाता है कि अपनों का ही अहित कर बैठता है. तुम तो पढ़ेलिखे, अच्छे बिजनैसमैन हो तो फिर यह सब कैसे हो गया?’’

‘‘सर, मातापिता, बहन और पत्नी की हत्या का जिम्मेदार मैं खुद ही हूं. मैं ने 8 लाख रुपए की सुपारी दे कर उन की हत्या कराई थी.’’ आतिश ने बताया.

आतिश से पूछताछ के बाद रिश्तों का कत्ल करने की एक ऐसी कहानी सामने आई, जो दिल को झकझोर देने वाली थी—

तुलसीदास केसरवानी अपने परिवार के साथ प्रयागराज की पौश कालोनी प्रीतम नगर में रहते थे. तुलसीदास केसरवानी मूलरूप से कौशांबी जिले के मंझनपुर के रहने वाले थे. सालों पहले वह प्रयागराज आ कर बस गए थे.

उन के परिवार में पत्नी किरण के अलावा एक बेटा आशीष उर्फ आतिश और एक बेटी नीहारिका उर्फ गुडि़या थी. तुलसीदास केसरवानी ने अपने घर में ही अपनी बेटी के नाम पर गुडि़या इलैक्ट्रिकल्स की दुकान खोल ली थी. उन की बिजली के उपकरण बेचने की काफी बड़ी दुकान थी. उन की यह दुकान कालोनी में होने के बावजूद अच्छी चलती थी. दुकान की आमदनी से न केवल उन का घर ठीक से चल रहा था, बल्कि दोनों बच्चों को भी पढ़ायालिखाया.

बेटा आतिश ग्रैजुएशन करने के बाद पिता के साथ दुकान पर बैठने लगा था. तुलसीदास धीरेधीरे दुकान की जिम्मेदारी आतिश को ही सौंपने लगे थे. उन्होंने अपनी दुकान पर काम करने के लिए अनुज नाम के एक युवक को नौकरी पर रख लिया था.

करीब 4 साल पहले आतिश ने शहर की ही प्रियंका से लवमैरिज कर ली थी. पिता तुलसीदास केसरवानी पुराने विचारों के थे. वह मन में एकलौते बेटे की शादी के सपने संजोए थे, लेकिन जब बेटे ने प्रियंका को चुन लिया तो उन्होंने उसे ही बहू स्वीकार कर लिया.

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प्रियंका ने भी अपने व्यवहार से ससुराल के सभी लोगों के दिलों में जगह बना ली. नीहारिका वैसे तो प्रियंका की ननद थी लेकिन उन दोनों की आपस में फ्रैंड की तरह अच्छी पटती थी.

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था, लेकिन करीब 6 महीने पहले मोनिका (परिवर्तित)  नाम की एक महिला आतिश के जीवन में ऐसी आई कि केसरवानी परिवार में हलचल मच गई.

दरअसल, धूमनगंज की रहने वाली मोनिका आतिश के घर में घरेलू काम करने आती थी. उस का विकलांग पति सरकारी नौकरी करता था लेकिन एक फरजीवाड़े के आरोप में वह बरखास्त हो गया था. इस के बाद उस के घर में आर्थिक समस्या खड़ी हो गई थी.

कुछ दिनों तक तो पतिपत्नी अपनी जमापूंजी से घर का खर्च चलाते रहे. इस के बाद उन्होंने लोगों से पैसे उधार ले कर काम चलाया. चूंकि मोनिका का पति विकलांग था, इसलिए वह कोई दूसरा मेहनत का काम नहीं कर सकता था. इसलिए जब भूखों मरने की नौबत आ गई तो मोनिका ने ही काम करने के लिए घर से बाहर कदम रखे.

वह घरों में काम करने लगी. इसी दौरान तुलसीदास केसरवानी की पत्नी किरण ने दया दिखाते हुए मोनिका को अपने यहां घर के काम करने के लिए रख लिया.

मोनिका खूबसूरत होने के साथसाथ घर के काम करने में होशियार थी. इसलिए केसरवानी परिवार में मोनिका को हमदर्दी भरा प्यार मिला, इस से वह केसरवानी परिवार के सभी सदस्यों से घुलमिल गई.

मोनिका जवान व हंसमुख थी. आतिश को उस का हंसमुख होना पसंद था. मोनिका की इसी आदत ने आतिश के दिल में जगह बना ली. यानी शादीशुदा होते हुए भी उस का झुकाव मोनिका की तरफ हो गया. वह समयसमय पर उसे आर्थिक सहयोग भी देने लगा. इस का नतीजा यह हुआ कि दोनों बहुत जल्दी ही एकदूसरे के करीब आ गए. फिर एक दिन ऐसा भी आया, जब दोनों ने अपनेअपने जीवनसाथियों को धोखा दे कर हसरतें पूरी कर लीं.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

एक औरत : भाग 1 – आतिश के परिवार का खात्मा

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को नाच नचा दिया. इस वायरस से मरने वालों की संख्या लाखों तक पहुंच गई. कोई दवा न होने से इस का एक ही इलाज था लौकडाउन. जब पूरे देश में लौकडाउन का तीसरा चरण चल रहा था, तब प्रयागराज (इलाहाबाद) के लोग भी घरों में बंद रहने को मजबूर थे.

प्रयागराज की कोतवाली धूमनगंज के क्षेत्र में एक पौश कालोनी है प्रीतम नगर. आतिश का घर इसी कालोनी में था. शहर में भले ही लौकडाउन था, लेकिन लोगों की सुविधा के लिए बैंक खुल रही थीं.

14 मई को आतिश को मकान की किस्त जमा कराने कटरा स्थित अपने बैंक जाना था. किस्त जमा कराने के लिए वह डेढ़ बजे घर से निकल गया.

किस्त जमा कर के आतिश अपराह्न पौने 4 बजे घर लौटा तो घर का मुख्य दरवाजा बंद था. उस ने दरवाजे को हलके से धक्का दिया तो वह खुल गया. घर के अंदर से किसी के बोलनेबतियाने की आवाज नहीं आ रही थी. आतिश अपनी मां को आवाज लगाते हुए मकान में दाखिल हुआ तो उस की चीख निकल गई. अंदर उस के पिता तुलसीदास केसरवानी, मां किरण और बहन नीहारिका की रक्तरंजित लाशें पड़ी थीं.

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घर के 3 लोगों की लाशें देख कर वह चीखचीख कर रोने लगा. उस के रोने की आवाज सुन कर आसपड़ोस के लोग भी वहां आ गए. जब उन्हें पता चला कि किसी ने आतिश के मातापिता और बहन की गला काट कर हत्या कर दी है तो वे आश्चर्यचकित रह गए. लौकडाउन के चलते इतनी बड़ी वारदात हो जाना आश्चर्य की बात थी.

आतिश का रोरो कर बुरा हाल था. वह पड़ोसियों से लिपटलिपट कर रो रहा था. लोग उसे सांत्वना दे रहे थे. मरने वाले 3 जनों के अलावा घर में आतिश की पत्नी प्रियंका भी थी, जो कहीं दिखाई नहीं दे रही थी. पड़ोसियों ने आतिश से जब प्रियंका के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि दोपहर डेढ़ बजे जब वह घर से निकला था तो प्रियंका घर में ही थी.

प्रियंका ऊपर की मंजिल पर रहती थी. पड़ोसियों ने सोचा कि प्रियंका अपने कमरे में सो तो नहीं रही, इसलिए पड़ोसी उसे देखने के लिए ऊपर की मंजिल पर गए तो बैडरूम में प्रियंका की भी लाश पड़ी थी. उसका गला रेता गया था. यह देख सभी हैरान रह गए. हत्यारे को घर में जो भी मिला, उस ने मौत के घाट उतार दिया.

इसी दौरान किसी ने फोन से इस घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. वह इलाका कोतवाली धूमनगंज के अंतर्गत आता है, इसलिए 4 लोगों की हत्या की सूचना पाते ही कोतवाल पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने इस की सूचना विभाग के उच्चाधिकारियों को भी दे दी.

प्रीतम नगर पौश कालोनी थी. लौकडाउन के चलते ऐसी जगह पर एक ही समय में एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या हो जाना पुलिस के लिए चिंता की बात थी. पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची तो कालोनी के तमाम लोग आतिश के घर के बाहर खड़े थे.

कुछ लोग अपने घरों की बालकनी से देख रहे थे. तरहतरह की बातें हो रही थीं. घर के मुखिया 63 वर्षीय तुलसीदास की अपने घर में ही बिजली के उपकरण बेचने की बड़ी दुकान थी. कोतवाल ने पुलिस टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया.

मकान के एक हिस्से में दुकान थी और दूसरे हिस्से से घर के अंदर जाने का रास्ता था. इस का मतलब कातिल घर के रास्ते से ही अंदर घुसे थे. उन्होंने 63 वर्षीय केसरवानी को दुकान की तरफ ले जा कर उन की गला रेत कर हत्या की. वहीं काउंटर की तरफ उन की 60 वर्षीय पत्नी किरण की लाश पड़ी थी और बराबर में उन की 28 वर्षीय बेटी नीहारिका की लाश.

हत्यारों ने मांबेटी की हत्या गला रेत कर की थी. इस के बाद पुलिस ऊपर के कमरे में पहुंची तो वहां आतिश की 27 वर्षीय पत्नी प्रियंका की रक्तरंजित लाश पड़ी मिली. उस का भी गला रेता गया था.

घर की सारी अलमारियां और घर में रखा सारा सामान सुरक्षित था. हत्यारों ने घर के किसी भी सामान को हाथ तक नहीं लगाया था. इस का मतलब था कि हत्यारों का मकसद केवल घर वालों की हत्या करना था.

मामला गंभीर था, इसलिए सूचना पा कर एडीजी प्रेमप्रकाश, आईजी के.पी. सिंह, एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज, एसपी (सिटी) बृजेश श्रीवास्तव और सीओ  (सिविल लाइंस) बृजनारायण सिंह भी आतिश के घर पहुंच गए.

फोरैंसिक टीम और खोजी कुत्ते को भी बुला लिया गया था. घर में खून ही खून फैला हुआ था. अधिकारी भी नहीं समझ पा रहे थे कि जब हत्यारों ने घर में किसी भी सामान को छुआ तक नहीं तो 4-4 लोगों की हत्या का क्या मकसद हो सकता है. खोजी कुत्ता लाशों को सूंघ कर घर से करीब 200 मीटर दूर तक गया और वहां जा कर भटक गया.

फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सबूत जुटाए. घर में आने का केवल मुख्य दरवाजा ही था. फोरैंसिक टीम और पुलिस अधिकारियों ने दरवाजे का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया तो वहां ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिस से पता चलता कि हत्यारों ने घर में जबरदस्ती प्रवेश किया था. इस का मतलब हत्यारों की घर में फ्रैंडली एंट्री हुई थी.

घर में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, लेकिन उन का डीवीआर गायब था. इस का मतलब हत्यारों ने योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम दिया था. हत्यारे कौन थे, यह बात तो जांच के बाद ही पता चल सकती थी. लेकिन कालोनी में जिसे भी इस हत्याकांड का पता चला, वह केसरवानी के घर की ओर चल दिया. लौकडाउन के बावजूद उन के घर के बाहर लोगों का हुजूम जमा हो गया था.

भीड़ को देख कर पुलिस अधिकारियों की आशंका हुई कि भीड़ कोई बवाल खड़ा न कर दे. पुलिस अधिकारियों को आशंका यूं ही नहीं थी, इस का वाजिब कारण था.

दरअसल, करीब ढाई महीने पहले मार्च में शहर के ही सोरांव थाना क्षेत्र में एक ही परिवार में पिता, पुत्र, बहू व पोतेपोती सहित 5 लोगों की हत्या हुई थी. उन का भी गला रेता गया था. उस परिवार में केवल एक ही लड़का बचा था, जो घटना के समय सूरत (गुजरात) में था.

इस के अलावा मई के पहले सप्ताह में एक ही परिवार में पतिपत्नी व बेटी की सोते समय गला रेत कर हत्या कर दी गई थी. इन दोनों वारदातों में अभी तक किसी का भी खुलासा नहीं हुआ था. अब तीसरी वारदात केसरवानी के परिवार में हो गई थी. इसी वजह से लोगों में पुलिस के प्रति गुस्सा बढ़ रहा था.

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भीड़ के संभावित आक्रोश को भांपते हुए एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने जिले के अन्य थानों से भी पुलिस फोर्स मंगा ली.

जब कोतवाल शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी कर रहे थे, एसएसपी ने पड़ोसियों से पूछा कि उन्होंने किसी के चीखने की आवाज सुनी या नहीं? पड़ोसियों ने बताया कि उन्होंने कोई आवाज नहीं सुनी थी.  इस से उन्होंने अनुमान लगाया कि या तो घर के सभी लोगों को नींद की गोलियां दी गई होंगी या फिर हत्यारों की संख्या अधिक रही होगी, जिस से उन्होंने घर वालों को काबू कर के वारदात को अंजाम दिया होगा.

इस परिवार में अब केवल एक ही सदस्य यानी तुलसीदास केसरवानी का एकलौता बेटा आशीष उर्फ आतिश (32 साल) ही जीवित था. एसएसपी ने आतिश से पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह करीब डेढ़ बजे किस्त जमाने करने के लिए कटरा स्थित बैंक गया था.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

बुजदिल : भाग 1 – कलावती का कैसे फायदा उठाया

सुंदर के मन में ऐसी कशमकश पहले शायद कभी भी नहीं हुई थी. वह अपने ही खयालों में उलझ कर रह गया था.

सुंदर बचपन से ही यह सुनता आ रहा था कि औरत घर की लक्ष्मी होती है. जब वह पत्नी बन कर किसी मर्द की जिंदगी में आती है, तो उस मर्द की किस्मत ही बदल जाती है.

सुंदर सोचता था कि क्या उस के साथ भी ऐसा ही हुआ था? कलावती के पत्नी बन कर उस की जिंदगी में आने के बाद क्या उस की किस्मत ने भी करवट ली थी या सचाई कुछ और ही थी?

खूब गोरीचिट्टी, तीखे नाकनक्श और देह के मामले में खूब गदराई कलावती से शादी करने के बाद सुंदर की जिंदगी में जबरदस्त बदलाव आया था. पर इस बदलाव के अंदर कोई ऐसी गांठ थी, जिस को खोलने की कोशिश में सुंदर हमेशा बेचैन हो जाता था.

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एक फैक्टरी में क्लर्क के रूप में 8 हजार रुपए महीने की नौकरी करने वाला सुंदर अपनी माली हालत की वजह से खातेपीते दोस्तों से काफी दूर रहता था

सुंदर अपने दोस्तों की महफिल में बैठने से कतराता था. उस के कतराने की वजह थी पैसों के मामले में उस की हलकी जेब. सुंदर की जेब में आमतौर पर इतने पैसे ही नहीं होते थे कि वह दोस्तों के साथ बैठ कर किसी रैस्टोरैंट का मोटा बिल चुका सके.

लेकिन शादी हो जाने के बाद एकाएक ही सबकुछ बदल गया था. सुंदर की अहमियत उस के दोस्तों में बहुत बढ़ गई थी. बड़ीबड़ी महंगी पार्टियों से उस को न्योते आने लगे थे. बात दूरी की हो, तो एकाएक ही सुंदर पर बहुत मेहरबान हुए अमीर दोस्त उस को लाने के लिए अपनी चमचमाती गाड़ी भेज देते थे.

पर किसी भी दोस्त के यहां से आने वाला न्योता अकेले सुंदर के लिए कभी भी नहीं होता था. उस को पत्नी कलावती के साथ ही आने के लिए जोर दिया जाता था.

कई दोस्त तो बहाने से सुंदर के घर तक आने लगे थे और कलावती के हाथ की गरमागरम चाय पीने की फरमाइश भी कर देते थे. चाय पीने के बाद दोस्त कलावती की जम कर तारीफ करना नहीं भूलते थे.

एक दोस्त ने तो कलावती के हाथ की बनी चाय की तारीफ में यहां तक कह डाला था, ‘‘कमाल दूध, चीनी या पत्ती में नहीं, भाभीजी के हाथों में है.’’

कम पढ़ीलिखी और बड़े ही साधारण परिवार से आई कलावती अपनी तारीफ से फूली नहीं समाती थी. उस के गोरे गाल लाल हो जाते थे और जोश में वह तारीफ करने वाले दोस्त को फिर से चाय पीने के लिए आने का न्योता दे देती थी.

सुंदर अपने दोस्तों को घर आने के लिए मना भी नहीं कर सकता था. आखिर दोस्ती का मामला जो था. लेकिन वह उन दोस्तों से इतना तंग होने लगा था कि उसे अजीब सी घुटन महसूस होने लगती थी.

सुंदर का एक दोस्त हरीश विदेशी चीजों का कारोबार करता था. वह कारोबार के सिलसिले में अकसर दिल्ली और मुंबई जाता रहता था. वह उम्र में सुंदर से ज्यादा होने के बावजूद अभी भी कुंआरा था.

हरीश काफी शौकीन किस्म का इनसान था. दोस्तों की मंडली में सब से ज्यादा रुपए खर्च करने वाला भी.

हरीश जब कभी सुंदर के घर उस से मिलने जाता था, तो कलावती के लिए विदेशी चीजें तोहफे में ले जाता था. हरीश के लाए तोहफों में महंगे परफ्यूम और लिपस्टिक शामिल रहती थीं.

ऐसे तोहफों को देख कर कलावती खिल जाती थी. इस तरह की चीजें औरतों की कमजोरी होती हैं और इस कमजोरी को हरीश पहचानता था.

सुंदर को अपनी बीवी कलावती पर हरीश की मेहरबानी और दरियादिली अखरती थी. वैसे तो शादी के बाद सभी दोस्त ही सुंदर पर मेहरबान नजर आने लगे थे, मगर हरीश की मेहरबानी जैसे एक खुली गुस्ताखी में बदल रही थी.

सुंदर को उस वक्त हरीश उस की मर्दानगी को ही चुनौती देता नजर आता, जब वह विदेशी लिपस्टिक कलावती को ताहफे में देते हुए साथ में एक गहरी मुसकराहट से कहता, ‘‘मैं शर्त के साथ कहता हूं भाभीजी कि इस लिपस्टिक का रंग आप की पर्सनैलिटी से गजब का मैच करेगा.’’

हरीश के तोहफे से खुश कलावती ‘थैंक्यू’ कह कर जब उस को स्वीकार करती, तो सुंदर को ऐसा लगता जैसे वह उस के हाथों से फिसलती जा रही है.

हरीश के पास अपनी गाड़ी भी थी. उस की गाड़ी में बैठते हुए कलावती की गरदन जैसे शान से तन जाती थी. कलावती को गाड़ी में ड्राइवर के साथ वाली सीट पर बैठना अच्छा लगता था, इसलिए वह गाड़ी की अगली सीट पर हरीश के पास ही बैठती थी. मजबूरन सुंदर को गाड़ी की पिछली सीट पर बैठ कर संतोष करना पड़ता था.

शहर में जब कोई नई फिल्म लगती थी, तो हरीश सुंदर से पूछे बिना ही 3 टिकटें ले आता था, इसलिए मना करने की गुंजाइश ही नहीं रहती थी.

जब कलावती फिल्म देखने के लिए तैयार होती थी, तो मेकअप के लिए उन्हीं चीजों को खासतौर पर इस्तेमाल करती, जो हरीश उसे तोहफे में देता रहता था.

सिनेमा जाने के लिए जब कलावती सजधज कर तैयार हो जाती, तो बड़े बिंदास अंदाज में हरीश उस की तारीफ करना नहीं भूलता था. वह कलावती के होंठों पर पुती लिपस्टिक के रंग की खासतौर पर तारीफ करता था.

यह देख कर सुंदर एक बार तो जैसे अंदर से उबल पड़ता था. मगर यह उबाल बासी कढ़ी में आए उबाल की ही तरह होता था.

सिनेमाघर में कलावती सुंदर और हरीश के बीच वाली सीट पर बैठती थी. उस के बदन में से निकलने वाली परफ्यूम की तीखी और मादक गंध दोनों के ही नथुनों में बराबर पहुंचती थी.

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परफ्यूम की गंध ही क्यों, बाकी सारे एहसास भी बराबर ही होते थे. अंधेरे सिनेमाघर में अगर कलावती की एक मरमरी नंगी बांह रहरह कर सुंदर को छूती थी, तो वह इस खयाल से बेचैन हो जाता था कि कलावती की दूसरी मरमरी बांह हरीश की बांह को छू रही होगी.

सिनेमाघर में हरीश दूसरी गुस्ताखियों से भी बाज नहीं आता था. सुंदर से कानाफूसी के अंदाज में बात करने के लिए वह इतना आगे को झुक जाता था कि उस का चेहरा कलावती के उभारों को छू लेता था.

जब सुंदर उस दौर से गुजरता, तब मन में इरादा करता कि वह खुले शब्दों में हरीश को अपने यहां आने से मना करेगा, पर बाद में वह ऐसा कर नहीं पाता था. शायद उस में ऐसा करने की हिम्मत नहीं थी. वह शायद बुजदिल था.

हरीश की हिम्मत और बेबाकी लगातार बढ़ती गई. पहले तो सुंदर की मौजूदगी में ही वह उस के घर आता था, मगर अब वह उस की गैरमौजूदगी में भी आनेजाने लगा था.

कई बार सुंदर काम से घर वापस आता, तो हरीश उस को घर में कलावती के साथ चाय की चुसकियां भरते हुए मिलता.

हरीश को देख सुंदर कुछ कह नहीं पाता था, मगर गुस्से के मारे ऐंठ जाता. सुंदर को देख हरीश बेशर्मी से कहता, ‘‘इधर से गुजर रहा था, सोचा कि तुम से मिलता चलूं. तुम घर में नहीं थे. मैं वापस जाने ही वाला था कि भाभीजी ने जबरदस्ती चाय के लिए रोक लिया.’’

सुंदर जानता था कि हरीश सरासर झूठ बोल रहा था, मगर वह कुछ भी कर नहीं पाता. जो चीज अब सुंदर को ज्यादा डराने लगी थी, वह थी कलावती का हाथों से फिसल कर दूर होने का एहसास.

कुछ दिन तक सुंदर के अंदर विचारों की अजीब सी उथलपुथल चलती रही, पर हालात के साथ समझौता करने के अलावा उस को कोई दूसरा रास्ता नहीं सूझ रहा था.

सुंदर को मालूम था कि उस जैसे साधारण आदमी की सोसाइटी में जो शान एकाएक बनी थी, वह उस की हसीन बीवी के चलते ही बनी थी, वरना पांचसितारा होटलों, फार्महाउसों की महंगी पार्टियों में शिरकत करना उस के लिए एक हसरत ही रहती.

एक सच यह भी था कि पिछले कुछ महीनों से सुंदर को इन सब चीजों से जैसे एक लगाव हो गया था. यह लगाव ही जैसे कहीं न कहीं उसे उस की मर्दानगी को पलीता लगाता था.

कलावती भी जैसे अपने रूपरंग की ताकत को पहचानने लगी थी, तभी तो सुंदर के हरीश सरीखे दोस्तों से कई फरमाइश करने से वह कभी झिझकती नहीं थी. देखा जाए, तो शादी के बाद कलावती की ख्वाहिशें सुंदर की जेब से नहीं, बल्कि उस के दोस्तों की जेब से पूरी हो रही थीं.

सुंदर को यह भी एहसास हो रहा था कि झूठी मर्दानगी में खुद को धोखा देने से कोई फायदा नहीं. अगर उस का कोई दोस्त उस की बीवी के होंठों के लिए लिपस्टिक का रंग पसंद करता था, तो उस के असली माने क्या हो सकते थे?

अपनी खूबसूरत बीवी के खोने का डर सुंदर को लगातार सता रहा था. इस डर के बीच कई तरह की बातें सुंदर के मन में अचानक ही उठने लगी थीं. पति की जगह एक लालची इनसान उस के विचारों पर हावी होने लगा.

सुंदर को लगने लगा था कि उस की बीवी वास्तव में खूबसूरत थी और उस के यारदोस्त काफी सस्ते में ही उस को इस्तेमाल कर रहे थे. अगर उस की खूबसूरत बीवी अमीर दोस्तों की कमजोरी थी, तो उन की इस कमजोरी का फायदा वह अपने लिए क्यों नहीं उठाता था?

इस बात में कोई शक नहीं कि हरीश जैसे अमीर और रंगीनमिजाज दोस्त कलावती के कहने पर उस के लिए कुछ भी कर सकते थे.

सुंदर की सोच बदली, तो उस की वह तकलीफ भी कम हुई, जो दोस्तों के अपनी बीवी से रिश्तों को ले कर उस के मन में बनी हुई थी.

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शर्म और मर्दानगी से किनारा कर के सुंदर ने मौका पा कर कलावती से कहा, ‘‘क्या तुम को नहीं लगता कि हमारे पास भी रहने के लिए एक अच्छा घर और सवारी के लिए अपनी कार होनी चाहिए?’’

इस पर कलावती के होंठों पर एक अजीब तरह की मुसकराहट फैल गई. उस ने जवाब में कहा, ‘‘तुम्हारी 8 हजार रुपए की तनख्वाह को देखते हुए मैं इन चीजों के सपने कैसे देख सकती हूं?’’

‘‘कुछ कोशिश करने से सबकुछ हासिल हो सकता है.’’

‘‘वह कैसे?’’

‘‘अगर हमारी आमदनी का कोई ऐक्स्ट्रा जरीया बन जाए, तो कुछ दिनों में ही हमारे दिन भी बदल सकते हैं.’’

‘‘मगर, ऐसा कोई जरीया बनेगा कैसे?’’ कलावती ने पूछा.

‘‘हरीश का काफी अच्छा कारोबार है. अगर वह चाहे तो बड़ी आसानी से हमारे लिए भी कोई आमदनी का अच्छा सा जरीया बन सकता है,’’ एक बेशर्म और लालच से भरी मुसकराहट होंठों पर लाते हुए सुंदर ने कहा.

सुंदर की बात पर कलावती की आंखें थोड़ी सिकुड़ गईं. पति उस से जो कहने के लिए भूमिका तैयार कर रहा था, उसे वह समझ गई थी.

(क्रमश:)

सुंदर आखिर चाहता क्या था? क्या कलावती ने उस की मदद की? हरीश और कलावती का रिश्ता कहां तक पहुंचा? पढ़िए अगले अंक में…

एक औरत : आतिश के परिवार का खात्मा

बुजदिल : कलावती का कैसे फायदा उठाया

इस शख्स की वजह से भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी ने दी Suicide की धमकी, मुंबई पुलिस पर साधा निशाना

भोजपुरी ऐक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) अपनें सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर शेयर किये गए लेटेस्ट पोस्ट के चलते काफी सुर्खियों में आ गई हैं. लेकिन हर बार की तरह उनके सुर्खियों में आने का कारण उनकी फिल्में या हॉट फोटोज नहीं हैं बल्कि यह डिप्रेशन के चलते आत्महत्या किये जाने की धमकी से जुड़ा है. रानी चटर्जी नें अपने इन्स्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर पेज पर एक व्यक्ति द्वारा मानसिक उत्पीड़न किये जाने को लेकर डिप्रेशन (Depression) में आनें के चलते आत्महत्या करने की धमकी दी है. उन्होंने इस बात का जिम्मेदार धनंजय सिंह (Dhananjay Singh) नाम के व्यक्ति को ठहराया है.

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उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर खुलासा करते हुए लिखा है की,-  “#depression में मैं बहुत ज्यादा अब डिस्ट्रब हो चुकी हूं. अक्सर मैं स्ट्रॉन्ग बने रहने की और पोजिटिव बने रहने की बात करती हूं. पर अब और नहीं हो पा रहा है ये आदमी कई सालो से मेरे बारे में ना जाने कितनी गंदी गंदी बाते फेसबुक पर लिख रहा है. मैंने बहुत इग्नोर करने की कोशश की मैंने कई लोगो से बात की पर सबने कहा कि इग्नोर करो. पर “मै भी तो इंसान हूं” “मैं मोटी हूं” “मैं बुढ़िया हूं” या मैं कोई काम करती हूं तो ये इतनी भद्दी बाते लिखता है. लोग मुझे ये सब भेजते है और कहते है इग्नोर करो अब नहीं हो सकता इग्नोर.”

 

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@mumbaipolice 🙏🙏🙏😭😭😭😭😭 give up

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रानी चटर्जी ने आगे लिखा कि,- “मैं कई सालो से इस बात को लेकर काफी परेशान हों चुकी हूँ, मानसिक तनाव से गुजर रही हूं, ये शायद चाहता है कि मैं अपनी जान दे दूं. इसकी वजह से मेरी निजी जिंदगी में बहुत तनाव है. #MumbaiPolice से ये मेरी रिक्वेस्ट है अगर मै कुछ कर लेती हूं तो इसका जिममेदार धननज्य सिंह (Dhananjay Singh) होगा. मैंने साइबर सेल में भी इसकी शिकायत की थी पर वहा पर कहा गया कि इसने मेरा नाम नहीं लिखा है. पर मैं जानती हूं ये सिर्फ मेरे लिए लिखता है. इसके ऐसे पोस्ट पर लोग मेरा नाम लिख कर गंदी गंदी गालियां लिखते है और ये उसके मजे लेता है. मैं हताश हो चुकी हूं, अब हिम्मत नहीं बची हैं या तो मैं आत्महत्या कर लू क्यूं की मैं बहुत बुरे डिप्रेशन से गुजर रही हूं इसकी वजह से कई सालो से. अब और नहीं होता बर्दास्त. #suiside.

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रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) द्वारा सोशल मीडिया पर आत्महत्या करने की धमकी दिए जाने के बाद भोजपुरी सिने जगत में भूचाल सा आ गया है. भोजपुरी सिनेमा से जुड़े तमाम बड़े एक्टर्स और ऐक्ट्रेस रानी चटर्जी के साथ खड़े हो गए हैं और रानी से इस तरह की बातें ना करने की अपील कर रहें हैं. वहीं लोगों नें दोषी धननज्य सिंह (Dhananjay Singh)  के खिलाफ कार्यवाही करने की भी मांग कर रहें हैं.

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वहीं दूसरी तरह रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) के आत्महत्या करने की धमकी से जुड़ा पोस्ट सामने आने के बाद उनके फैन्स में भी काफी गुस्सा देखने को मिल रहा है. उनके फैन्स उनके इस पोस्ट में कमेन्ट कर इस तरह की बातें न करने की भावुक अपील की है साथ ही दोषी के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की मांग भी की है.

 

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नागिन के बाद फिर एक बार मेरे पसंदीदा डायरेक्टर राजकुमार पांडेय जी के साथ मेरी आने वाली फिल्म पांचाली का पहला लुक आज रिलीज हुआ है कैसा लगा दोस्तो? पांचाली फिल्मी दुनिया की हकीकत को सामने लाएगी .. congratulations. मुझे ये बताते हुए खुशी हो रही है कि इस फिल्म बहुत से कलाकारों को ब्रेक दिया गया है जो बाहर से आए है राजकुमार जी ने हमेशा नए कलाकारों को मौका दिया है #newmovies #2020 #bhojpurimovie #blessed #actor #love

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रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) नें हाल ही में अपनी आने वाली फिल्म “पांचाली” के फर्स्ट लुक का पोस्टर अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर किया है और लिखा है की “नागिन के बाद फिर एक बार मेरे पसंदीदा डायरेक्टर राजकुमार पांडेय जी के साथ मेरी आने वाली फिल्म पांचाली का पहला लुक आज रिलीज हुआ है जो फिल्मी दुनिया की हकीकत को सामने लाएगी. उन्होंने पांचाली का पोस्टर शेयर करते हुए लिखा है की “मुझे ये बताते हुए खुशी हो रही है कि इस फिल्म में बहुत से कलाकारों को ब्रेक दिया गया है जो बाहर से आए है  राजकुमार जी ने हमेशा नए कलाकारों को मौका दिया है”.

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Lockdown के चलते इन एक्ट्रेसेस ने डांस कर फैन्स को किया एंटरटेन, देखें Video

कोरोना के चलते अब Lockdown 3.0 खत्म हो चुका है और अब भारत में Lockdown 4.0 चालू हो चुका है इसी बीच सोशल मीडिया पर सिनेमा जगत से जुड़ी कई एक्ट्रेस का घरों में डांस करने का वीडियो वायरल हो रहा है.

बौलीवुड और टीवी एक्ट्रेस Lockdown के चलते अपने घरों में रहते हुए अलग अलग तरीकों से खुद को व्यस्त रखनें का प्रयास कर रहीं हैं जिससे वह अपनें आप को फिट रख पायें. इस लिस्ट में कई एक्ट्रेस का नाम शामिल हैं जो डांस के जरिये खुद को फिट रखनें का प्रयास कर रहीं हैं.

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नुसरत भरुचा (Nusrat Bharucha)

 

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Everybody has their coping mechanisms & mine is- Music ❤️ & if there is Music, I will Dance! Anytime, Anywhere.. Gets me going 😇

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इसमें जो पहला नाम है वह है नुसरत भरुचा (Nusrat Bharucha) का. उन्होंने अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वह जमकर डांस करती नजर आ रहीं हैं. डांस वाले इस वीडियो पर उनके फैन्स के खूब रियक्शन मिल रहे है.

बीते दिनों नुसरत भरुचा (Nusrat Bharucha) नें सोशल मीडिया पर अपने कई बिकनी फोटोज और वीडियो शेयर कर सनसनी फैला दी थी. उनके इस बिकनी फोटोज और वीडियोज को लाखों बार देखा जा चुका है.

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नुसरत अब तक कई फिल्मों में नजर आ चुकी हैं. उन्होंने ‘जय संतोषी मां’ (Jai Santoshi Maa) के जरिये सिनेमा जगत में डेब्यू किया था. इसके बाद वह ‘कल किसने देखा’ (Kal Kisne Dekha), ‘लव सेक्स और धोखा’ (Love, Sex aur Dhokha), ‘प्यार का पंचनामा’ (Pyaar Ka Punchnama), ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ (Sonu Ke Titu Ki Sweety) जैसी फिल्मों में काम किया.

एली अवराम (Elli Avram)

 

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Balance is the Key. (Press IGTV)

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स्वीडिश मूल की भारतीय बौलीवुड अभिनेत्री एली अवराम (Elli Avram) नें अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर एक डांस वीडियो शेयर किया है जो कि जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वह स्लो मोशन में डांस करती नजर आ रही हैं. उनके द्वारा किये गए डांस स्टेप्स और अदाओं को सोशल मीडिया पर जम कर तारीफ मिल रही है.

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एली एवराम (Elli Avram) नें फिल्म ‘मिकी वायरस’ (Mickey Virus) से बौलीवुड में डेब्यू किया था. एली रियलिटी शो बिग बौस सीजन 7 की प्रतिभागी भी रह चुकी हैं. वह एक्टर कपिल शर्मा (Kapil Sharma) के साथ “किस किसको प्यार करूं” (Kis Kisko Pyaar Karoon) में भी नजर आ चुकी हैं.

एरिका फर्नांडिस (Erica Jennifer Fernandes)

 

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🕺🏻 #tiktok #instagood #Instagram #dance

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टीवी एक्ट्रेस एरिका फर्नांडिस (Erica Jennifer Fernandes) भी Lockdown के खूब मजा लेती नजर आ रहीं हैं. उन्होंने भी अपनें इन्स्टाग्राम एकाउंट पर डांस करते हुए का वीडियो शेयर किया है जिसमें वह टिक टौक  (Tik Tok) पर लचीली कमर से बेली डांस करती नजर आ रही हैं. एरिका सीरियल ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ (Kuch Rang Pyaar Ke) में डा. सोनाक्षी बोस और कसौटी जिंदगी के (Kasautii Zindagi Kay) में प्रेरणा शर्मा रूप में यादगार किरदार के लिए जानी जाती हैं.

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Naaaaaa😜 ————————————— #ElliAvrRam #yourstruly

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23 साल की हुई ‘बालिका वधू’ फेम अविका गौर, बेस्ट फ्रेंड ने की बर्थडे के दिन शादी

टेलिवीजन इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस अविका गौर (Avika Gor) ने काफी छोटी उम्र से ही इंडस्ट्री में काम करना शुरू कर दिया था. अविका अपने पहले सीरियल के चलते ही दर्शकों की बेहद फेवरेट बन गई थीं. अविका के पहले सीरियल का नाम था ‘बालिका बधू’ (Balika Vadhu) जो कि काफी पौपुलर रहा था और इस सीरियल में अविका ने ‘आनंदी’ का किरदार निभाया था. इस सीरियल के बाद अविका एक के बाद एक हिट सीरियल्म में काम कर दर्शकों का और भी ज्यादा प्यार लेती चली गईं.

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हाल ही में यानी कि 30 जून को अविका गौर (Avika Gor) ने अपना 23वां बर्थडे सेलिब्रेट किया था और इस बर्थडे की सबसे खास बात ये थी कि इसी दिन अविका के बेस्टफ्रेंड मनीष रायसिंघानी (Manish Raisinghan) की शादी भी थी. दरअसल अविका गौर और मनीष रायसिंघानी ने एक दूसरे से प्रोमिस किया था कि वे अपनी शादी एक दूसरे के बर्थडे वाले दिन ही करेंगे तो मनीष ने तो अपना प्रोमिस अच्छे से निभाया और अब देखने वाली बात ये होगी कि अविका अपना प्रोमिस निभा पाती हैं या नहीं.

खबरों के मुताबिक कुछ ऐसी बातें भी फैली थीं कि अविका गौर और मनीष रायसिंघानी एक दूसरे को डेट कर रहे हैं और ये इन बातों के फैलने पर किसी को कोई हैरानी नहीं हुई. दरअसल अविका और मनीष के बीच की कैमिस्ट्री है ही इतनी जबरदस्त कि सबको यही लगता है कि इन दोनों के बीच जरूर कुछ ना कुछ जरूर होगा.

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अगर बात करें अविका गौर के लुक्स की तो पहले कि अविका और अब की अविका में काफी फर्क आ चुका हैं और यह बात को कोई भी उनकी फोटोज देख कर ही बता सकता है. अविका पहले से और भी ज्यादा हॉट और ग्लैमरस हो गई हैं. आपको बता दें कि, अविका गौर के बेस्टफ्रेंड मनीष रायसिंघानी खुद भी एक एक्टर हैं और उन्होनें सीरियल तीन बहुरानियां (Teen Bahuraniyan), ससुराल सिमर का (Sasural Simar Ka) जैसे सीरियल्स में काम किया है.

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आपको जानकर हैरानी होगी कि अविका गौर ने सीरियल्स के साथ साथ फिल्मों में भी अपनी कमाल की अदाकारी दिखाई है. अविका ने हिंदी फिल्मों के अवाला तमिल, तोलुगू, कन्नड़ फिल्मों में काम किया है जिससे कि उनकी पौपुलैरिटी में और चार चांद लग गए हैं.

इस Bhojpuri गाने में खेसारी लाल यादव और गुंजन पन्त की जोड़ी मचा रही धमाल

भोजपुरी सिनेमा में अपने खूबसूरती से दर्शकों के दिलों पर राज करनें वाली गुंजन पन्त (Gunjan Pant) अभिनेता खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) के साथ हाल ही में रिलीज हुए भोजपुरी वीडियो सौंग (Bhojpuri Video Song) “कसाईल बा कमरिया सड़िया” (Kasail Ba Kamriya Sadiya) में धमाल मचाती नजर आ रहीं हैं.

इस वीडियो सौंग में भोजपुरी सुपरस्टार खेसारीलाल यादव (Khesari Lal Yadav) और एक्ट्रेस गुंजन पंत (Gunjan Pant) की औन स्क्रीन केमिस्ट्री खूब जम रही है जो कि दर्शकों को खूब पसंद भी आ रही है. इस भोजपुरी गाने को खेसारी म्यूजिक वर्ड (Khesari Music World) के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है.

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इस गाने को खुद खेसारीलाल यादव (Khesari Lal Yadav) नें गाया है. इस गाने के लिरिक्स यादव राज (Yadav Raj) नें लिखा है. संगीत की बात करें तो यह आशीष वर्मा (Ashish Verma) ने दिया है. इस एल्बम के वीडियो डायरेक्टर जीतू भोजपुरिया (Jitu Bhojpuriya), अरेंजर कैलाश जी व आशीष वर्मा हैं. इसकी संकल्पना सोनू पाण्डेय (Sonu Pandey) की है और कैमरा की जिम्मेदारी बबलू रीमिक्स, धर्मेंद्र, अली नें निभाई है. इस गाने में कोरियोग्राफर की जिम्मेदारी नीलेश सिंह (Nilesh Singh) नें निभाई है. इसका संपादन संपादक संतोष राणा, चंदन प्रजापति नें व डिजिटल की जिम्मेदारी विक्की यादव (Vicky Yadav) नें निभाई है.

इस गाने से पहले एक्ट्रेस गुंजन पन्त (Gunjan Pant) ‘सेटिंग करा के जा’ गाने में काजल राघवानी व खेसारीलाल यादव के साथ नजर आई थीं. भोजपुरी बेल्ट में इस गाने को खूब पसंद किया गया था.
इस Lockdown के बीच सुपरस्टार खेसारीलाल यादव (Khesari Lal Yadav) के कई Bhojpuri गाने रिलीज हो चुके हैं जिसमें हाल ही में रिलीज हुए गाने ललकी टिकियवा (Lalki Tikiyawa) को खेसारीलाल यादव और अंतरा सिंह प्रियंका (Antra Singh Priyanka) नें गया है. इसके अलावा हाई हील के सैंडिल, कमर लोड सही ना, केस हाई कोर्ट में जाई, सबेरे साड़ी खुलल रहता जैसे तमाम वीडियो सौंग रिलीज हो चुके हैं. जिसे Lockdown के बीच के बीच बार-बार देखा जा रहा हैं.

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https://www.youtube.com/watch?v=ZvLBTIv6avY&pbjreload=10

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