पूनम का यह आइडिया अमन को पसंद आया. चूंकि वह स्वयं बाजारू औरतों का रसिया था, इसलिए जानता था कि देह व्यापार से अधिक मजेदार और कमाऊ धंधा कोई दूसरा नहीं. हालांकि इस धंधे में पुलिस द्वारा पकड़े जाने का अंदेशा बना रहता है, पर जोखिम लिए बिना पैसा भी तो छप्पर फाड़ कर नहीं बरसता.
आधा पैसा अमन ने लगाया, आधा पूनम ने. फिफ्टीफिफ्टी के पार्टनर बन कर दोनों ने कृष्णानगर स्थित किराए के मकान में वेलकम स्पा खोल लिया. यह लगभग एक साल पहले की बात है.
चूंकि पूनम खुद कालगर्ल थी, इसलिए अनेक देहजीवाओं से उस की दोस्ती थी. उन में से ही कुछ देहजीवाओं को उस ने मसाजर के तौर पर स्पा में रख लिया. वे केवल नाम की मसाजर थीं, वे तो केवल अंगुलियों के कमाल से कस्टमर की भावनाएं जगाने और बेकाबू होने की सीमा तक भड़काने में माहिर थीं. कस्टमर भी ऐसे आते थे, जिन्हें मसाज से कोई वास्ता नहीं था. कामपिपासा शांत करने के लिए उन्हें हसीन बदन चाहिए होता था.
चंद दिनों में ही स्पा की आड़ में देह व्यापार कराने का अमन और पूनम का यह धंधा चल निकला. स्पा के दरवाजे हर आदमी के लिए खुले रहते थे. शर्त केवल यह थी कि जेब में माल होना चाहिए.
बीच शहर में खुल्लमखुल्ला देह व्यापार होता रहे और पुलिस को खबर न हो, यह संभव नहीं होता.
वेलकम स्पा में होने वाले देह व्यापार की जानकारी स्थानीय थाना पुलिस को थी, पर किसी वजह से वह आंखें बंद किए थी. एसएसपी संतोष कुमार मिश्रा ने जब औपरेशन क्लीन चलाया, तब छापा पड़ा और स्पा से 2 पुरुष अमन, आलोक तथा 2 महिलाएं पूनम व माया देह व्यापार करते पकड़ी गईं.
पुलिस टीम द्वारा छापे में पकड़ी गई कविता बकेवर कस्बे की रहने वाली थी. उस के पिता कानपुर में पनकी स्थित एक प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करते थे. लेकिन कुछ वर्ष पूर्व संदिग्ध परिस्थितियों में उन की मौत हो गई थी.
पति की मौत के बाद कविता की मां ने स्वयं को टूट कर बिखरने नहीं दिया. कभी स्वरोजगार तो कभी मेहनत मजदूरी कर के अपना और बेटी कविता की परवरिश करती रही. वक्त थोड़ा आगे बढ़ा.
कविता ने किशोरावस्था में प्रवेश किया. चेहरे पर लुनाई झलक मारने लगी. कच्ची कली मसलने के शौकीनों को यही तो चाहिए था. कविता को बड़ा लालच दे कर वे एकांत में उस के संग बड़ेबड़े काम करने लगे. कुछ ही समय बाद कविता कली से फूल बन गई. कविता को जो बुलाता, उस के साथ चली जाती.
जिस्मानी खेल में कविता को आनंद तो बहुत मिला पर बदनामी भी कम नहीं हुई. कस्बे में वह बदनाम लड़की के रूप में जानी जाने लगी. बेटी की करतूतें मां के कानों तक पहुंचीं तो उस ने सिर पीट लिया, ‘‘मुझ विधवा के पास एक इज्जत थी, वह भी इस लड़की ने लुटा दी. मैं तो हर तरह से कंगाल हो गई.’’
बेटी गलत राह पर चलने लगे तो हर मांबाप को उसे सुधारने की एक ही राह सूझती है शादी. कविता की मां ने भी उस का विवाह रोहित के साथ कर दिया. रोहित इटावा के सिविल लाइंस में रहता था और गल्लामंडी में काम करता था.
रोहित टूट कर चाहने वाला पति था. वह अपनी हैसियत के दायरे में कविता की फरमाइश भी पूरी करता था. इसलिए कविता रम गई. 3-4 साल मजे से गुजरे, उस के बाद कविता को रोहित बासी लगने लगा. पति से अरुचि हुई तो कविता का मन अतीत में खोने लगा.
इन्हीं दिनों कविता की मुलाकात स्पा संचालिका पूनम से हुई. उस ने कविता को मसाज पार्लर खोलने की सलाह दी. यही नहीं, पूनम ने कविता को मसाज पार्लर चलाने के गुर भी सिखाए. पूनम की सलाह पर पति के सहयोग से कविता ने सिविल लाइंस में ग्लैमर मसाज सेंटर खोला. कविता ने मसाज के लिए कुछ देहजीवाओं को भी रख लिया.
शुरूशुरू में उसे मसाज पार्लर में कमाई नहीं हुई. लेकिन जब उस ने मसाज की आड़ में देह व्यापार शुरू किया तो नोटों की बरसात होने लगी. औपरेशन क्लीन के तहत जब कविता के मसाज सेंटर पर छापा पड़ा तो यहां से 4 युवतियां कविता, गौरी, रिया तथा शमा और 3 पुरुष रोहित, उमेश व पवन पकड़े गए.
पुलिस छापे में पकड़ी गई अर्चना कच्ची बस्ती इटावा की रहने वाली थी. अर्चना को उस के पिता रामप्रसाद ने ही बरबाद कर दिया था. 30 वर्षीय अर्चना शादीशुदा थी. उस का विवाह जय सिंह के साथ हुआ था. जय सिंह में मर्दों वाली बात नहीं थी. सो अर्चना ससुराल छोड़ कर मायके में आ कर रहने लगी थी. उस ने पिता को साफ बता दिया था कि अब वह ससुराल नहीं जाएगी.
रामप्रसाद तनहा जिंदगी गुजार रहा था. उस की पत्नी की मौत हो चुकी थी और बड़ा बेटा अलग रहता था. जब अर्चना ससुराल छोड़ कर आ गई तो रामप्रसाद की रोटीपानी की दिक्कत खत्म हो गई. अर्चना ने पिता की देखभाल की जिम्मेदारी संभाल ली. अर्चना ने अपना बिस्तर पिता के कमरे में ही बिछा लिया.
रामप्रसाद हर रात अर्चना के खुले अंग देखता था. उन्हीं को देखतेदेखते उस के मन में पाप समाने लगा. वह भूल गया कि अर्चना उस की बेटी है. मन में नकारात्मक एवं गंदे विचार आने लगे. वह हवस पूरी करने का मौका देखने लगा.
एक रात अर्चना गहरी नींद सो रही थी, तभी रामप्रसाद उठा और अर्चना की गोरी, सुडौल और चिकनी पिंडलियों को सहलाने लगा. रामप्रसाद की अंगुलियों की हरकत से अर्चना हड़बड़ा कर उठ बैठी, ‘‘पिताजी यह क्या कर रहे हो?’’
रामप्रसाद ने घबराने के बजाए अर्चना को दबोच लिया और उस के कान में फुसफुसाया, ‘‘चुप रह, शोर मचाने की कोशिश की तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’
अर्चना ने हवस में अंधे हो चुके पिता को दूर धकेलने की कोशिश की. उसे पवित्र रिश्ता याद दिलाया. मगर रामप्रसाद ने उसे अपनी हसरत पूरी करने के बाद ही छोड़ा. इस के बाद यह खेल हर रात शुरू हो गया. अर्चना को भी आनंद आने लगा. जब दोनों का स्वार्थ एक हो गया तो पवित्र रिश्ते की पुस्तक में पाप का एक अलिखित समझौता हो गया.
लगभग एक साल तक बापबेटी रिश्ते को कलंकित करते रहे. उस के बाद अर्चना का मन बूढ़े बाप से भर गया. अब वह मजबूत बांहों की तलाश में घर के बाहर ताकझांक करने लगी. एक रोज उस की मुलाकात एक कालगर्ल संचालिका से हो गई. उस ने उसे पैसों और देहसुख का लालच दे कर देह व्यापार के धंधे में उतार दिया.
छापे में पकड़ी गई रीतू, शालू और साधना (काल्पनिक नाम) हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की छात्राएं थीं. तीनों गरीब परिवार की थीं. उन्हें ऊंचे ख्वाब और महंगे शौक ने यह धंधा करने को मजबूर किया. देह व्यापार में लिप्त संचालिकाओं ने इन छात्राओं को सब्जबाग दिखाए. हाथ में महंगा मोबाइल तथा रुपए थमाए, फिर देहधंधे में उतार दिया.
ये छात्राएं स्कूलकालेज जाने की बात कह कर घर से निकलती थीं और देह व्यापार के अड्डे पर पहुंच जाती थीं. घर आने में कभी देर हो जाती तो वे एक्स्ट्रा क्लास का बहाना बना देतीं. पकड़े जाने पर जब पुलिस ने उन के घर वालों को जानकारी दी तो वह अवाक रह गए. उन का सिर शर्म से झुक गया.
कुछ कहानियां मजबूरी की
छापा पड़ने के दौरान पकड़ी गई अमिता, मानसी व काजल घरेलू महिलाएं थीं. आर्थिक तंगी के कारण इन्हें देह व्यापार का धंधा अपनाना पड़ा. अमिता नौकरी के बहाने घर से निकलती थी और देह व्यापार के अड्डे पर पहुंच जाती थी. मानसी का पति टीबी का मरीज था. दवा और घर खर्च के लिए उस ने यह धंधा अपनाया.
2 बच्चों की मां काजल की उस के पति से नहीं बनती थी, इसलिए वह पति से अलग रहती थी. घर खर्च, बच्चों की पढ़ाई तथा मकान के किराए के लिए उसे यह धंधा अपनाना पड़ा.
पुलिस द्वारा पकड़े गए अय्याशों में 3 महेश, मनीष और राजू दोस्त थे. तीनों चंद्रनगर में रहते थे और एक ही फैक्ट्री में काम करते थे. विक्की, रमेश और पंकज ठेकेदारों के साथ काम करते थे और कृष्णानगर में रहते थे. उमेश और अशोक प्राइवेट नौकरी करते थे. ये भरथना के रहने वाले थे.
पुलिस ने थाना सिविललाइंस में आरोपियों के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार अधिनियम 1956 की धारा 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9 के तहत केस दर्ज कर उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.
– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, कथा में कुछ पात्रों के नाम काल्पनिक हैं.
कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां
नेहा बेहद खूबसूरत थी. वह कस्बे के बाल भारती स्कूल में 10वीं की छात्रा थी. 16-17 साल की उम्र ही ऐसी होती है कि लड़कियां खुली आंखों से सपने देखने लगती हैं. नेहा भी इस का अपवाद नहीं थी. उम्र के तकाजे ने उस पर भी असर किया और वह इंटरमीडिएट में पढ़ने वाले अर्जुन से दिल लगा बैठी. दोनों का प्यार परवान चढ़ा तो उन के प्यार के चर्चे होने लगे.
पिता को जब नेहा के बहकते कदमों की जानकारी हुई तो वह चिंता में पड़ गए. नेहा उन की पीठ में इज्जत का छुरा घोंप कर कोई दूसरा कदम उठाए, उस के पहले ही उन्होंने उस की शादी करने का फैसला किया. दौड़धूप के बाद उन्होंने नेहा का विवाह इकदिल कस्बा निवासी गोपीनाथ के बेटे मनोज से कर दिया.
खूबसूरत नेहा से शादी कर के मनोज बहुत खुश हुआ. शादी के एक साल बाद नेहा एक बेटे की मां बन गई, जिस का नाम हर्ष रखा गया. बस इस के कुछ दिनों बाद से ही नेहा मनोज की नजरों से उतरनी शुरू हो गई.
इस की वजह यह थी कि शादी के बाद भी नेहा मायके के प्रेमी अर्जुन को भुला नहीं पाई थी. वह नेहा से मिलने आताजाता रहता था. यह बात मनोज को भी पता चल गई थी.
वक्त गुजरता गया. वक्त के साथ मनोज के मन में यह शक भी बढ़ता गया कि हर्ष उस की नहीं बल्कि अर्जुन की औलाद है. हर्ष की पैदाइश को ले कर मनोज नेहा से कुछ कहता तो वह चिढ़ कर झगड़ा करने लगती. रोजरोज के झगड़े से तंग आ कर एक रोज उस ने पति को सलाह दी कि अगर तुम्हें लगता है कि अर्जुन से अब भी मेरे संबंध हैं तो यह घर छोड़ कर इटावा शहर में बस जाओ.
नेहा की यह बात मनोज को अच्छी लगी. मनोज का दोस्त अनुज इटावा शहर में ठेकेदारी करता था. उस ने इटावा जा कर अनुज से बात की. अनुज ने अपने स्तर से उसे अपने यहां काम पर लगा लिया और स्टेशन रोड स्थित एक मकान में किराए पर कमरा दिलवा दिया. मनोज अपने बीवीबच्चे को वहीं ले आया.
शहर आ कर मनोज ने चैन की सांस ली. उस के मन से अर्जुन को ले कर जो शक बैठ गया था, वह धीरेधीरे उतरने लगा. नेहा ने भी सुकून की सांस ली कि अब उस के घर में कलह बंद हो गई. दोनों के दिन हंसीखुशी से बीतने लगे.
पर खुशियों के दिन अधिक समय तक टिक न सके. दरअसल, इटावा शहर आ कर मनोज को भी शराब की लत लग गई थी. पहले वह बाहर से पी कर आता था, बाद में दोस्तों के साथ घर में ही शराब की महफिल जमाने लगा. रोज शराब पीने से एक ओर मनोज जहां कर्ज में डूबता जा रहा था, वहीं कुछ दिनों से नेहा ने महसूस किया कि पति के दोस्त शराब पीने के बहाने उस की सुंदरता की आंच में आंखें सेंकने आते हैं. ऐसे दोस्तों में एक अनुज भी था.
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नेहा ने कई बार मनोज से कहा भी कि वह छिछोरे दोस्तों को घर न लाया करे, लेकिन वह नहीं माना. मनोज क्या करना चाहता है, नेहा समझ नहीं पा रही थी. जब तक वह समझी, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
एक शाम मनोज काम से कुछ जल्दी घर आ गया. आते ही बोला, ‘‘नेहा, तुम सजसंवर लो. तुम्हें मेरे साथ चलना है. हम वहां नहीं गए तो वह बुरा मान जाएगा.’’
नेहा खुश हो गई. मुसकरा कर बोली, ‘‘आज बड़े मूड में लग रहे हो. वैसे यह तो बता दो कि जाना कहां है?’’
‘‘मेरे दोस्त अनुज को तुम जानती हो. आज उस ने हमें खाने पर बुलाया है.’’ मनोज ने कहा.
मनोज ने बीवी को ही झोंका धंधे में
अनुज का नाम सुनते ही नेहा के माथे पर शिकन पड़ गई, क्योंकि उस की नजर में अनुज अच्छा आदमी नहीं था. मनोज के साथ घर में बैठ कर वह कई बार शराब पी चुका था और नशे में उसे घूरघूर कर देखता रहता था. नेहा की इच्छा तो हुई कि वह साफ मना कर दे, लेकिन उस ने मना इसलिए नहीं किया कि मनोज का मूड खराब हो जाएगा. वह गालियां बकनी शुरू कर देगा और घर में कलह होगी.
नेहा नहाधो कर जाने को तैयार हो गई तो मनोज आटो ले आया. दोनों आटो से अनुज के घर की ओर चल पड़े. थोड़ी देर में आटो रुका तो नेहा समझ गई कि अनुज का घर आ गया है. मनोज ने दरवाजा थपथपाया तो दरवाजा अनुज ने ही खोला. मनोज के साथ नेहा को देख कर अनुज का चेहरा चमक उठा. उस ने हंस कर दोनों का स्वागत किया और उन्हें भीतर ले गया.
घर के भीतर सन्नाटा भांयभांय कर रहा था. सन्नाटा देख कर नेहा अनुज से पूछ बैठी, ‘‘आप की पत्नी नजर नहीं आ रहीं, कहां हैं?’’
‘‘वह बच्चों को ले कर मायके गई है.’’ अनुज ने हंस कर बताया.
नेहा ने पति को घूर कर देखा तो वह बोला, ‘‘थोड़ी देर की तो बात है, खापी कर हम घर लौट चलेंगे.’’
अनुज किचन से गिलास और नमकीन ले कर आ गया. पैग बने, चीयर्स के साथ जाम टकराए और दोनों दोस्त अपना हलक तर करने लगे. फिर तो ज्योंज्यों नशा चढ़ता गया, त्योंत्यों दोनों अश्लील हरकतें व भद्दा मजाक करने लगे. पीने के बाद तीनों ने एक साथ बैठ कर खाना खाया. खाना खाने के बाद मनोज पास पड़ी चारपाई पर जा कर लुढ़क गया.
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इसी बीच अनुज ने नेहा को अपनी बांहों में जकड़ लिया और अश्लील हरकतें करने लगा. नेहा ने विरोध किया और इज्जत बचाने के लिए पति से गुहार लगाई. लेकिन मनोज उसे बचाने नहीं आया. अनुज ने उसे तभी छोड़ा जब अपनी हसरतें पूरी कर लीं.
उस के बाद दोनों घर आ गए. जैसेतैसे रात बीती. सुबह मनोज जब काम पर जाने लगा तो उस से बोला, ‘‘नेहा, तुम सजसंवर कर शाम को तैयार रहना. आज रात को भी हमें एक पार्टी में चलना है.’’
नेहा ने उसे सुलगती निगाहों से देखा, ‘‘आज फिर किसी दोस्त के घर पार्टी है…’’
मनोज मुसकराया, ‘‘बहुत समझदार हो. मेरे बिना बताए ही समझ गई. जल्दी से अमीर बनने का यही रास्ता है.’’ मनोज ने जेब से 2 हजार रुपए निकाल कर नेहा को दिए, ‘‘यह देखो, अनुज ने दिए हैं. इस के अलावा एक हजार रुपए का कर्ज भी उस ने माफ कर दिया.’’
नेहा की आंखें आश्चर्य से फट रह गईं. मनोज ने उस से देह व्यापार कराना शुरू कर दिया था. कल कराया. आज के लिए उस ने ग्राहक तय कर के रखा हुआ था. शाम को मनोज ने नेहा को साथ चलने को कहा तो उस ने मना कर दिया. इस पर मनोज ने उसे लातघूंसों से पीटा और जबरदस्ती अपने साथ ले गया.
इस के बाद तो यह एक नियम सा बन गया. मनोज रात को रोजाना नेहा को आटो से कहीं ले जाता. वहां से दोनों कभी देर रात घर लौटते, तो कभी सुबह आते. कभी मनोज अकेला ही रात को घर आता, जबकि नेहा की वापसी सुबह होती. नेहा भी इस काम में पूरी तरह रम गई.
धीरेधीरे जब ग्राहकों की संख्या बढ़ी तो नेहा ग्राहकों को अपने घर पर ही बुलाने लगी. छापे वाले दिन मनोज ने जिस्मफरोशी के लिए 2 ग्राहक तैयार किए थे. पहला ग्राहक मौजमस्ती कर के चला गया था, दूसरा ग्राहक सुनील जब नेहा के साथ था, तभी पुलिस टीम ने छापा मारा और वे तीनों पकड़े गए.
पुलिस द्वारा पकड़ी गई पूनम इकदिल कस्बे में रहती थी. उस के मांबाप की मृत्यु हो चुकी थी. एक आवारा भाई था, जो शराब के नशे में डूबा रहता था. कम उम्र में ही पूनम को देह सुख का चस्का लग गया था. पहले वह देह सुख एवं आनंद के लिए युवकों से दोस्ती गांठती थी, फिर वह उन से अपनी फरमाइशें पूरी कराने लगी. यह सब करतेकरते वह कब देहजीवा बन गई, स्वयं उसे भी पता नहीं चला.
पूनम को भिन्नभिन्न यौन रुचि वाले पुरुष मिले तो वह सैक्स की हर विधा में निपुण हो गई. अमन नाम का युवक तो पूनम का मुरीद बन गया था. अमन शादीशुदा और 2 बच्चों का पिता था.
पूनम और अमन की जोड़ी
उस की पत्नी साधारण रंगरूप की थी. वह कपड़े का व्यापार करता था और इटावा के सिविल लाइंस मोहल्ले में रहता था. अमन को जब भी जरूरत होती, वह पनूम को फोन कर होटल में बुला लेता.
एक रात अमन से पूनम बोली, ‘‘अमन क्यों न हम दोनों मिल कर स्पा खोल लें. मसाज की आड़ में वहां देहव्यापार कराएंगे. शौकीन अमीरों को नया अनुभव और उन्माद मिलेगा तो हमारे स्पा में ग्राहकों की भीड़ लगी रहेगी. थोड़े समय में हम दोनों लाखों में खेलने लगेंगे.’’
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इटावा के सिविल लाइंस क्षेत्र में रहने वाले उमेश शर्मा बैंक औफ बड़ौदा में सीनियर मैनेजर थे. वह 2 साल पहले रिटायर हो गए थे. रिटायर होने के बाद उन्होंने खुद को समाजसेवा में लगा दिया था. अपनी सेहत के प्रति वह सजग रहते थे, इसीलिए वाकिंग करने नियमित विक्टोरिया पार्क में जाते थे.
इटावा का विक्टोरिया पार्क वैसे भी पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाता है. पहले यहां एक बहुत बड़ा पक्का तालाब था. ब्रिटिश शासनकाल में महारानी विक्टोरिया यहां आई थीं तो उन्होंने इस पक्के तालाब में नौका विहार किया था. इस के बाद यहां विक्टोरिया मैमोरियल की स्थापना हुई. अब यह पार्क एक रमणीक स्थल बन गया है.
एक दिन उमेश शर्मा विक्टोरिया पार्क गए तो वहां उन की मुलाकात देवेश कुमार से हुई जो उन का दोस्त था. उसे देख कर वह चौंक गए. क्योंकि 50-55 की उम्र में भी वह एकदम फिट था. उमेश शर्मा उस से 8-10 साल पहले तब मिले थे, जब देवेश कुमार की पत्नी का देहांत हुआ था.
वर्षों बाद दोनों मिले तो वे पार्क में एक बेंच पर बैठ कर बतियाने लगे. उमेश ने महसूस किया कि पत्नी के गुजर जाने के बाद देवेश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा था, वह पहले से ज्यादा खुश दिखाई दे रहा था.
काफी देर तक दोनों इधरउधर की बातें करते रहे. उसी दौरान उमेश शर्मा ने पूछा, ‘‘देवेश यार, यह बताओ तुम्हारी सेहत का राज क्या है. लगता है भाभीजी के गुजर जाने के बाद
तुम्हारे ऊपर फिर से जवानी आई है. क्या खाते हो तुम, जो तुम्हारी उम्र ठहर गई है.’’
‘‘उमेश भाई, खानापीना तो कोई खास नहीं है. मैं भी वही 2 टाइम रोटी खाता हूं जो आप खाते हो. लेकिन मैं अपनी मसाज पर ज्यादा ध्यान देता हूं.’’ देवेश बोला.
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‘‘मसाज’’ उमेश शर्मा चौंके.
‘‘हां भई, मैं सप्ताह में 1-2 बार मसाज जरूर कराता हूं.’’
‘‘लगता है, मसाज किसी अच्छे मसाजिए से कराते हो?’’ उमेश शर्मा ने ठिठोली की.
‘‘सही कह रहे हैं आप, मैं जिन से मसाज कराता हूं वे सारे मसाजिए बहुत अनुभवी हैं. वे शरीर की नसनस खोल देते हैं. आप भी एक बार करा कर देखो, फिर आप को भी ऐसी आदत पड़ जाएगी कि शौकीन बन जाओगे.’’ देवेश ने कहा.
‘‘अरे भाई, आप ठहरे बड़े बिजनैसमैन और हम रिटायर्ड कर्मचारी, इसलिए हम भला आप की होड़ कैसे कर सकते हैं. सरकार से जो पेंशन मिलती है, उस से गुजारा हो जाए वही बहुत है. वैसे जानकारी के लिए यह तो बता दो कि मसाज कराते कहां हो?’’ उमेश शर्मा ने पूछा.
‘‘उमेश भाई, आप अभी तक सीधे ही रहे. मैं आप के सिविल लाइंस एरिया के ही ग्लैमर मसाज सेंटर पर जाता हूं. वहां पर लड़कियां जिस अंदाज में मसाज के साथ दूसरे तरह का जो मजा देती हैं, वह काबिलेतारीफ है. आप को तो पता ही है कि मैं शौकीनमिजाज हूं, लड़कियों का कद्रदान.’’ देवेश ने बताया.
‘‘देवेश, तुम इस उम्र में भी नहीं सुधरे.’’ उमेश शर्मा बोले.
‘‘देखो भाई, मेरा जिंदगी जीने का तरीका अलग है. मैं लाइफ में फुल एंजौय करता हूं. कमाई के साथ लाइफ में एंजौय भी जरूरी है. भाई उमेश, मैं अपने तजुर्बे की बात आप को बता रहा हूं. देखो, मैं ने कृष्णानगर के वेलकम स्पा सेंटर के अलावा अन्य कई होटलों में चल रहे मसाज सेंटरों की सेवाएं ली हैं, लेकिन जितना मजा मुझे ग्लैमर मसाज सेंटर में आता है, उतना कहीं और नहीं आया.
ग्लैमर मसाज सेंटर की संचालिका कविता स्कूल, कालेज गर्ल से ले कर हाउसवाइफ तक उपलब्ध कराने में माहिर है. मेरी बात मानो तो एक बार आप भी मेरे साथ चल कर जलवे देख लो.’’ देवेश ने उमेश शर्मा को उकसाया.
‘‘नहीं देवेश, आप को तो पता है कि मैं इस तरह के कामों से बहुत दूर रहता हूं.’’ उमेश शर्मा ने कहा. कुछ देर बात करने के बाद दोनों अपनेअपने रास्ते चले गए.
देवेश से बातचीत में उमेश शर्मा को चौंकाने वाली जानकारी मिली थी. वह यह जान कर आश्चर्यचकित थे कि उन की कालोनी में मसाज सेंटर के नाम पर जिस्मफरोशी का धंधा चल रहा था और उन्हें जानकारी तक नहीं थी. इस धंधे में स्कूल कालेज की लड़कियों को फांस कर ये लोग उन की जिंदगी तबाह कर रहे थे. चूंकि उमेश शर्मा खुद समाजसेवी थे, इसलिए वह इस बात पर विचार करने लगे कि जिस्मफरोशी के अड्डों को कैसे बंद कराया जाए.
उमेश शर्मा का इटावा के एसएसपी संतोष कुमार मिश्रा से परिचय था. वह सामाजिक क्रियाकलापों को ले कर एसएसपी साहब से कई बार मुलाकात कर चुके थे. लिहाजा उन्होंने सोच लिया कि इस बारे में एसएसपी से मुलाकात करेंगे. और फिर एक दिन एसएसपी संतोष कुमार मिश्रा से मिल कर उमेश शर्मा ने उन्हें स्पा और मसाज सेंटरों की आड़ में चल रहे जिस्मफरोशी के धंधे की जानकारी दे दी.
एसएसपी ने इस सूचना को गंभीरता से लिया. जैसी उन्हें सूचना मिली, उस के अनुसार यह धंधा शहर की पौश कालोनियों के अलावा कुछ होटलों में भी चल रहा था. इसलिए उन्होंने सूचना की पुष्टि के लिए अपने खास सिपहसालारों तथा मुखबिरों को लगा दिया और उन से एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा.
एक सप्ताह बाद मुखबिरों व सिपहसालारों ने जो रिपोर्ट एसएसपी संतोष कुमार मिश्र के समक्ष पेश की, वह चौंकाने वाली थी. उन्होंने बताया कि स्पा और मसाज सेंटरों में ही नहीं, बल्कि शहर के कई मोहल्लों में देहव्यापार जोरों से चल रहा है. उन्होंने कुछ ऐसे मकानों की भी जानकारी दी, जहां किराएदार बन कर रहने वाली महिलाएं देह व्यापार में संलग्न थीं.
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रिपोर्ट मिलने के बाद एसएसपी ने एएसपी (सिटी) डा. रामयश सिंह, एएसपी (ग्रामीण) रामबदन सिंह, महिला थानाप्रभारी सुभद्रा कुमारी, क्राइम ब्रांच तथा 1090 वूमन हेल्पलाइन की प्रमुख मालती सिंह को बुला कर एक महत्त्वपूर्ण बैठक बुलाई.
बैठक में एसएसपी ने शहर में पनप रहे देह व्यापार के संबंध में चर्चा की तथा उन अड्डों पर छापा मारने की अतिगुप्त रूपरेखा तैयार की. इस का नाम उन्होंने ‘औपरेशन क्लीन’ रखा.
इस के लिए उन्होंने 4 टीमों का गठन किया. टीमों के निर्देशन की कमान एएसपी (सिटी) डा. रामयश तथा एएसपी (ग्रामीण) रामबदन सिंह को सौंपी गई.
योजना के अनुसार 22 सितंबर, 2019 की रात 8 बजे चारों टीमों ने सब से पहले सिविल लाइंस स्थित ग्लैमर मसाज सेंटर पर छापा मारा. छापा पड़ते ही मसाज सेंटर में अफरातफारी मच गई. यहां से पुलिस ने संचालिका सहित 4 महिलाओं तथा 3 पुरुषों को गिरफ्तार किया.
काउंटर पर बैठी महिला को छोड़ कर सभी महिलापुरुष अर्धनग्न अवस्था में पकड़े गए थे. इन में एक छात्रा भी थी. उस का स्कूल बैग भी बरामद हुआ.
मसाज सेंटर पर छापा मारने के बाद संयुक्त टीमों ने कृष्णानगर स्थित वेलकम स्पा सेंटर पर छापा मारा. यहां से पुलिस टीम ने नग्नावस्था में 2 पुरुष तथा 2 महिलाओं को पकड़ा. पकड़े जाने के बाद वे सभी छोड़ देने को गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन पुलिस ने उन की एक नहीं सुनी.
इस के बाद पुलिस ने स्टेशन रोड स्थित एक मकान पर छापा मारा. पूछने पर पता चला कि पकड़ी गई महिला तथा पुरुष पतिपत्नी हैं. पति ही पत्नी की दलाली करता था. पत्नी के साथ एक ग्राहक भी पकड़ा गया. इस मकान से पुलिस ने 2 संदिग्ध महिलाओं को भी गिरफ्तार किया. लेकिन जब उन दोनों से पूछताछ की गई तो वे निर्दोष साबित हुईं. अत: उन दोनों को पुलिस ने छोड़ दिया.
पुलिस टीमों को सफलता पर सफलता मिलती जा रही थी. अत: टीमों का हौसला भी बढ़ता जा रहा था. इस के बाद पुलिस ने चंद्रनगर, शांतिनगर तथा सैफई रोड स्थित कुछ मकानों पर छापा मारा और वहां से 7 महिलाओं तथा 8 पुरुषों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया. पकड़ी गई युवतियों में 2 छात्राएं थीं जो कालेज जाने के बहाने घर से निकली थीं और देह व्यापार के अड्डे पर पहुंच गई थीं.
पुलिस टीम ने शहर के 2 होटलों तथा एक रेस्तरां पर भी छापा मारा लेकिन यहां से कोई नहीं पकड़ा गया. हालांकि होटल से 2 प्रेमी जोड़ों से पूछताछ की गई, पूछताछ में पता चला कि उन की शादी तय हो चुकी थी, इसलिए पुलिस ने उन्हें जाने दिया. रेस्तरां से पुलिस ने एक शादीशुदा जोड़े से भी पूछताछ की, जो रिलेशनशिप में रह रहे थे. वेरीफिकेशन के बाद पुलिस ने उन्हें भी जाने दिया.
छापे में पुलिस टीमों ने 14 कालगर्ल्स तथा 15 ग्राहकों को पकड़ा था. कालगर्ल्स को महिला थाना तथा पुरुषों को सिविल लाइंस थाने में बंद किया गया. महिला थानाप्रभारी सुभद्रा कुमारी वर्मा ने कालगर्ल्स से पूछताछ की.
पकड़ी कालगर्ल्स नेहा, माया, कविता, पूनम, गौरी, रिया, शमा, रीतू, साधना, शालू, अर्चना, दीपा, अमिता तथा मानसी थीं, वहीं जो ग्राहक गिरफ्तार हुए थे, उन के नाम पंकज, मनोज, अशोक, सुनील, अमन, आलोक, रमेश, पवन, रोहित, विक्की, उमेश, राजू, महेश, मनीष तथा प्रमोद थे. ये सभी इटावा, भरथना, इकदिल तथा बकेवर के रहने वाले थे.
अभियुक्तों की गिरफ्तारी की सूचना पर एसएसपी संतोष कुमार मिश्रा भी महिला थाने पहुंच गए. वहीं पर उन्होंने प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित कर पत्रकारों को विभिन्न जगहों से गिरफ्तार की गई कालगर्ल्स और ग्राहकों की जानकारी दी.
कहीं खुद पति पत्नी का दलाल तो कहीं मजबूर लड़कियां
पकड़ी गई कालगर्ल्स से विस्तृत पूछताछ की गई तो सभी ने इस धंधे में आने की अलगअलग कहानी बताई. नेहा मूलरूप से इटावा जिले के लखुना कस्बे की रहने वाली थी. 3 भाईबहनों में वह सब से बड़ी थी. उस के पिता एक ज्वैलर्स के यहां काम करते थे.
पिता को मामूली वेतन मिलता था, जिस से परिवार का भरणपोषण भी मुश्किल से होता था. भरणपोषण के लिए कभीकभी उन्हें कर्ज भी लेना पड़ जाता था. जब वह इस कर्ज को समय पर चुकता नहीं कर पाते थे, तो उन्हें बेइज्जत भी होना पड़ता था.
कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां
दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद लोगों में अवसाद की स्थिति अपनी चरम पर देखी जा रही है. दुनिया भर में त्रस्त, भयभीत होकर आत्महत्या का दौर जारी है. हमारे देश में भी और छत्तीसगढ़ में भी. हाल ही में छत्तीसगढ़ के एम्स हॉस्पिटल में जहां कोरोना से ग्रस्त एक शख्स का इलाज जारी था. उसने उपरी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी. यह एक वाकया बताता है कि कोरोना पेशेंट किस तरह का व्यवहार कर रहे हैं. उन्हें कैसा सहानुभूति पूर्ण व्यवहार मिलना चाहिए.
आज हम इस आलेख में यही बता रहे हैं कि किस तरह लोग आत्महत्या कर रहे हैं. और बचाव के क्या उपाय हो सकते हैं-
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पहला मामला- कोरोना के मरीज ने एक दिन अचानक घर में पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली. घटना छत्तीसगढ़ के मुंगेली शहर में घटित हुई.
दूसरा मामला- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक महिला ने विष खाकर आत्महत्या कर ली. वह चिट्ठी लिख गई की इसका कोई दोषी नहीं है. बताया गया कि वह कोरोना संक्रमण से भयभीत थी और उसे जिंदगी निसार लग रही थी.
तीसरा मामला- दुनिया में फैलते कोरोना संक्रमण से भयभीत होकर एक डॉक्टर ने अंबिकापुर में आत्महत्या कर ली. तथ्य सामने आए की वह कोरोना संक्रमण से अवसाद ग्रस्त हो गई थी और जिंदगी का उसे अब कोई मायने नहीं लग रहा था.
फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के बाद देश में आए दिन यह सुनने में आ रहा है कि फलां ने आत्महत्या कर ली. आखिर इस आत्महत्या करने का मनोविज्ञान आदमी की मानसिक बुनावट क्या है? इस पर गौर करना अति आवश्यक है.हालांकि आत्महत्या एक अवसाद का क्षण होता है जिससे अगर आप ऊबर गए तो सब कुछ ठीक हो गया अन्यथा इहलीला समाप्त.मगर इन दिनों कोरोना वायरस के संक्रमण काल के पश्चात आत्महत्याओं के दौर में एक बड़ी वृद्धि देखी जा रही है आए दिन यह समाचार आ रहे हैं कि कोरोना के कारण अवसाद में आकर अथवा भयभीत होकर फलां ने आत्महत्या कर ली. हाल ही में छत्तीसगढ़ के एम्स में कोरोना संक्रमित व्यक्ति ने उपरी मंजिल से नीचे कूदकर आत्महत्या कर ली. ऐसे ही घटनाओं के संदर्भ में कहा जा सकता है कि दरअसल यह जल्दी में उठाए कदम होते हैं.अगर ऐसी सोच के लोगों को सही समय पर किसी का साथ और संबल मिल जाए तो वह अवसाद की परिस्थितियों से निकल सकता है. आज इस आलेख में हम इन्हीं विसंगतियों पर चर्चा कर रहे हैं.
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जरूरत हौसला बढ़ाने की
छत्तीसगढ़ के आईपीएस वर्तमान में सरगुजा के पुलिस महानिरीक्षक रतनलाल डांगी कहते हैं -कोरोना संक्रमित लोगों का आत्महत्या जैसा कदम उठाना बेहद चिंता का सबब है. इसके लिए आवश्यकता है की हम सब ऐसे अवसाद ग्रस्त लोगों का हौसला बढ़ाएं.
देश व प्रदेश मे कोरोना संक्रमित लोगों के द्वारा आत्महत्या करने की खबरें आज नेशनल मीडिया में सुर्खियां बन रही हैं.आत्महत्या करने वाले युवक जरा सोचें कि जिस वायरस जनित बिमारी में 90% रिकवरी रेट के बावजूद आपको अपनी जीवनलीला समाप्त करने जैसे कदम उठाने की क्या आवश्यकता है.
रतनलाल डांगी कहते हैं-हम सबकी जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं को रोके. इसमें सबसे बड़ी है भूमिका परिवार,मित्र,पड़ौसी, डॉक्टर और समाज की है. और यही नहीं रतनलाल डांगी सोशल मीडिया के माध्यम से भी जन जागरूकता अभियान चला रहे हैं जिसे अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है.
डॉक्टर गुलाब राय पंजवानी बताते हैं-
संक्रमित व्यक्ति का मनोबल बढ़ाना परिवार का दायित्व है. अगर परिवार ऐसे समय में संबल बन जाए तो कोई भी आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम नहीं उठाएगा.
अधिवक्ता बी के शुक्ला के अनुसार ऐसे अवसाद ग्रस्त व्यक्ति के साथ सहानुभूति पूर्वक चर्चा करके उसके अपने बल को बढ़ाना चाहिए कभी भी किसी भी प्रकार का कटाक्ष नहीं करना चाहिए.उसको हिम्मत दे कि यह ऐसी बीमारी है जिसमें कुछ समय के परहेज से बिल्कुल ठीक हो जाते है.
डॉक्टर उत्पल अग्रवाल के अनुसार जब किसी कोरोना संक्रमित को अस्पताल में भर्ती कराया गया हो तो परिजनों को चाहिए कि समय समय पर उससे मोबाइल पर विडिओ,चैटिंग से सम्पर्क बनाए रखे.उसका मनोबल बढ़ाएं.
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आईपीएस रतनलाल डांगी के शब्दों में कोरोना संक्रमित मरीजों के साथ आसपास के लोगों को भी उस परिवार व संक्रमित व्यक्ति के प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए,किसी प्रकार का सामाजिक बहिष्कार जैसी चीजें न बातचीत मे आए और न ही अपने व्यवहार मे लाएं।भौतिक दूरी रखें न कि सामाजिक दूरी.
जैसे ही मित्रों को जानकारी मिले उनकों भी अपने मित्र से बातचीत करना चाहिए उसे अकेलापन महसूस नहीं होना चाहिए. यही नही अस्पताल मे यदि रखा गया हो तो संक्रमित व्यक्ति की काउंसलिंग की जानी चाहिए.
कोरोना एक सामान्य संक्रमण
कुल मिलाकर सच्चाई यह है कि कोरोना वायरस बड़ी अन्य बीमारियों की अपेक्षा एक संक्रमणकारी बीमारी है जो चर्चा का बयास बनी हुई है.जबकि सच्चाई यह है कि कुछ सामान्य बातों को ध्यान में रखकर हम इससे आसानी से बच सकते हैं दिन में हाथ धोना फिजिकल डिस्ट्रेसिंग आदि है और अगर यह संक्रमण हो भी जाता है तो अब यह बहुत हद तक काबू में आने वाला संक्रमण है. ऐसे में भला करके आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाना नादानी ही कही जा सकती है. यहां यह भी तथ्य सामने आए हैं कि शासकीय हॉस्पिटल में डॉक्टर सुबह नर्सिंग स्टाफ का व्यवहार करोना पेशेंट के साथ मानवीय नहीं होता. कई जगहों पर तो डाक्टर और स्टाफ हाथ खड़ा कर लेता है और अच्छा व्यवहार नहीं करता. मगर यह बहुत ही रेयर है हमारे देश और दुनिया में लगातार यह बात सामने आई है कि मेडिकल स्टाफ कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में अपनी आहुति दे रहा है और लोगों का इलाज कर रहा है.
ऐसे में यह कहा जा सकता है कि डॉक्टर व स्टाफ का बर्ताव भी नम्र,शालीन व आत्मीय होने से व्यक्ति को संबल मिलता है. हॉस्पिटल का माहौल अगर बेहतर है तो व्यक्ति को आत्मशक्ति की अनुभूति होती है. सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है कि ऐसे लोगों को चाहे वो घर में हो या अस्पताल मे ऐसे व्यक्ति को व्यस्त रखा जाए.जिससे उसके दिमाग मे निराशाजनक विचार न आ पाएं.
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प्रतिदिन स्वस्थ होने वालों की जानकारी साझा करने से भी मानसिक रूप से ताकत मिलती है और मनोबल बढ़ता है. इसलिए यहां पर पुलिस अधिकारी रतनलाल डांगी के यह शब्द महत्व रखते हैं कि हमारे छोटे छोटे प्रयास भी कई जानें बचा सकता है इसलिए हम अपने आसपास के लोगों के प्रति संवेदनशील रहें और स्वयं भी जागरूक रह कर यह काम अब अपरिहार्य रूप से करें.
भारत में 15 अगस्त को आजादी का दिन माना जाता है, शायद इसीलिए क्रिकेट के ‘कैप्टन कूल’ महेंद्र सिंह धोनी ने इसे अपना ‘रिटायरमैंट डे’ बना कर खुद को इस खेल से ही आजाद कर दिया. जैसा कि उन का स्टाइल है, सब को चौंकाते हुए उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘आप लोगों के प्यार और सहयोग के लिए धन्यवाद. शाम 7.29 बजे से मुझे रिटायर समझा जाए.’
हालांकि अगले इंडियन प्रीमियर लीग में महेंद्र सिंह धोनी चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से मैदान में क्रिकेट खेलते दिखेंगे, पर अगर उन के शुरुआती दिनों की बात करें, तब शायद किसी को यकीन भी नहीं था कि रांची का यह लड़का क्रिकेट की रेस का इतना तेज घोड़ा निकलेगा. यही वजह है कि वे भारतीय क्रिकेट के सब से कामयाब कप्तान रहे.
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वर्ल्ड क्रिकेट में भी महेंद्र सिंह धोनी एकलौते ऐसे कप्तान रहे हैं, जिन्होंने साल 2007 में आईसीसी का वर्ल्ड टी20, साल 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप और साल 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीत कर नया इतिहास बनाया.
महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में ही भारतीय टीम साल 2009 में टैस्ट क्रिकेट में नंबर वन बनी थी. उन्होंने अपनी शानदार कप्तानी की बदौलत भारत को घरेलू मैदानों पर 21 टैस्ट मैचों में जीत दिलाई थी, जो किसी भी भारतीय कप्तान का सब से बेहतर रिकौर्ड है.
निजी जिंदगी में फर्राटा मोटरसाइकिलों के शौकीन महेंद्र सिंह धोनी ने क्रिकेट भी तेज रफ्तार से खेला. विकेटकीपर से ले कर मैच फिनिशर का रोल उन्होंने बड़े उम्दा तरीके से निभाया. लेकिन पिछले कुछ समय से उन का और टीम का तालमेल सही नहीं बैठ रहा था. काफी समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि उन का पहले जैसा जलवा नहीं रहा है. वे बतौर बल्लेबाज मैदान पर सुस्त दिखने लगे हैं, जबकि वे अभी भी पूरी तरह फिट नजर आ रहे थे. यही वजह है कि उन के इस संन्यास पर उन के कोच रह चुके चंचल भट्टाचार्य ने कहा कि यह चौंकाने वाला फैसला है.
कोच की बात में दम है, क्योंकि फिलहाल तो भारतीय क्रिकेट टीम में महेंद्र सिंह धोनी की टक्कर कोई विकेटकीपर नहीं दिखाई दे रहा है. ऋषभ पंत और केएल राहुल में टक्कर है, पर ये दोनों ही फिलहाल उस लैवल के नहीं दिखाई दे रहे हैं, जो लैवल धोनी ने इतने सालों में सैट कर दिए हैं. दिनेश कार्तिक को भी बतौर विकेटकीपर जगह बनाने में बड़ी मेहनत करनी होगी.
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इस के अलावा महेंद्र सिंह धोनी ने बतौर कप्तान और विकेटकीपर विपक्षी टीमों पर इतना जबरदस्त दबाव बना कर रखा था कि भारतीय टीम उन पर मनोवैज्ञानिक रूप से हावी रहती थी. खेल को ले कर उन्होंने इतने ज्यादा प्रयोग कर दिए थे और नए टैलेंट पर इतना ज्यादा भरोसा जता दिया था कि धीरेधीरे टीम बहुत मजबूत हो गई थी.
याद रहे कि महेंद्र सिंह धोनी ने अपना पिछला मैच वर्ल्ड कप 2019 में न्यूजीलैंड के खिलाफ सैमीफाइनल खेला था. भारत यह मैच 18 रन से हार गया था. इस के बाद 27 नवंबर 2019 को मुंबई के एक कार्यक्रम में उन्होंने क्रिकेट में वापसी के सवाल पर मीडिया से कहा था कि इस बारे में उन से जनवरी, 2020 तक कुछ न पूछा जाए.
अब जबकि वे क्रिकेट को अलविदा कर चुके हैं तो यह सवाल उठना भी लाजिमी है कि बतौर कप्तान विराट कोहली उन के बिना टीम को कैसे हैंडल करेंगे, जबकि पहले तो मैदान पर हर छोटी से छोटी समस्या पर वे ‘मही’ का मुंह ताकते थे?
विराट कोहली ने ‘कैप्टन कूल’ खोया है. डीआरएस (डिसीजन रिव्यू सिस्टम) लेने में धोनी जैसा कोई नहीं था. आकाश चोपड़ा तो इसे ‘धोनी रिव्यू सिस्टम’ बोलते थे. इस के अलावा फंसे हुए मैच को अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से अपनी तरफ मोड़ने की कला भी धोनी को बखूबी आती थी. अब टीम में उन की जगह बल्लेबाजी करने वाला कोई मजबूत चेहरा नहीं दिखाई दे रहा है. ईशान किशन, संजू सैमसंग अभी उतने नहीं मंजे हैं कि मैच फिनिशर का भार अपने कंधे पर ले सकें.
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बल्लेबाजी में रोहित शर्मा और विराट कोहली के बाद कोई दिग्गज नहीं दिखाई दे रहा है. लिहाजा, अब भारतीय टीम को गंभीरता से सोचना होगा और इस बात पर गौर करना होगा कि महेंद्र सिंह धोनी जैसा हरफनमौला खिलाड़ी कैसे पैदा किया जाए, वरना विराट कोहली ऐंड टीम को आने वाले समय में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
टेलिवीजन इंडस्ट्री का सबसे ज्यादा कॉन्ट्रोवर्शियल शो बिग बॉस (Bigg Boss) का हर सीजन इतना सुपरहिट रहता है कि फैंस को हर सीजन के अंत से ही अगले सीजन का इंतजार होने लगता है. बिग बॉस सीजन 13 (Bigg Boss 13) की सफलता के बाद फैंस के दिलों में बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) को लेकर और भी ज्यादा उम्मीदें बढ़ गई हैं. अब देखने वाली बात ये होगी कि बिग बॉस का सीजन 14 (Bigg Boss 14) दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतर पाता है या नहीं.
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Ghar ke sab kaam karlo khatam, kyunki ab scene paltega! #BiggBoss2020 #BB14 @beingsalmankhan
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आपको यह जानकर खुशी होगी कि शो के मेकर्स काफी समय से बिग बॉस के सीजन 14 (Bigg Boss 14) को लेकर काफी मेहनत कर रहे हैं और बीते दिन ही मेकर्स ने बिग बॉस सीजन 14 का प्रोमो (Bigg Boss 14 Promo) कलर्स टीवी (Colors TV) के औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट (Official Instagram Account) पर रिलीज कर दिया गया है. बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के इस प्रोमो में बॉलीवुड इंडस्ट्री के सबसे सुपरहिट एक्टर और दर्शकों के चहीते सलमान खान (Salman Khan) एक थिएटर में पॉपकोर्न खाते नजर आ रहे हैं.
प्रोमो में सलमान खान (Salman Khan) का कहना है कि, “मनोरंजन पर 2020 ने उठाया प्रशन, देंगे उत्तर मनाते हुए जश्न. अब सीन पलटेगा क्योंकि बिग बॉस देंगे 2020 को जवाब.” बिग बॉस के इस प्रोमो से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि मेकर्स ने हर बार की तरह इस बार भी दर्शकों के मनोरंजन का पूरा पूरा ध्यान रखा है. इस प्रोमो के कैप्शन में मेकर्स ने लिखा है कि, “2020 ke manoranjan ka scene palatne aa raha hai #BB14, jald hi sirf #Colors par. Catch #BiggBoss2020 before TV on @vootselect.”
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इस प्रोमो के रिलीज होते ही फैंस सचमुच काफी खुश हो गए और बिग बॉस (Bigg Boss) का बेसब्री से इंतजार करने लगे. प्रोमो के कमेंट्स सेक्शन में बिग बॉस के फैंस की अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. इस प्रोमो के अब तक 1 लाख 75 हजार से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है.
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में बड़े चेहरों में शुमार भोजपुरी अभिनेत्री मोनालिसा (Monalisa) जितना फिल्मों में अपने एक्टिंग के लिए पंसद की जाती हैं उससे कहीं ज्यादा वह अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं. यही वजह है की सोशल मीडिया पर उनके लाखों की संख्या में फॉलोअर्स हैं. अगर उनके इन्स्टाग्राम (Instagram) पर फॉलोअर्स के संख्या की बात करें तो वर्तमान में 35 लाख से भी ज्यादा लोग उनको फॉलो करते हैं तो वहीं फेसबुक पर भी उनके 1 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं.
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सोशल मीडिया पर मोनालिसा की फैन फॉलोइंग के इतनी बड़ी संख्या का महज एक कारण है मोनालिसा (Monalisa) द्वारा शेयर की जाने वाली उनकी हॉट और सेक्सी तस्वीरें. मोनालिसा आये दिन अपने ऐसे दिलकश अंदाज वाली तस्वीरें शेयर करती रहतीं हैं जिसे हर कोई बार – बार देखना चाहता है.
मोनालिसा (Monalisa) इन दिनों अपने इन्हीं दिलकश अंदाज वाली तस्वीरों के सोशल मीडिया पर शेयर करने के चलते छाई हुई हैं. हाल ही में मोनालिसा (Monalisa) नें अपने पति विक्रांत (Vikrant) के साथ बड़े ही रोमांटिक अंदाज में तस्वीरें शेयर की है साथ ही इसके कैप्शन में लिखा है “प्यार को महसूस करो (Feel The Love)”. जिस पर उनके फैन्स की काफी प्रतिक्रिया मिली है. वहीं वह येलो और ब्लैक कलर की शॉर्ट ड्रेस में भी बेहद दिलकश दिखाई दे रही हैं. इसमें से एक तस्वीर के कैप्शन में उन्होंने लिखा है “क्योंकि हर तस्वीर एक कहानी बयां करती है (Because Every Picture Tells A Story)”. मोनालिसा को इन तस्वीरों पर (So sweet and Beautiful dear) जैसे कमेन्ट्स मिल रहें हैं.
मोनालिसा (Monalisa) नें शार्ट ड्रेस के अलावा कई साड़ी में भी तस्वीरें शेयर की हैं जिसमें वह और भी कयामत ढाती नजर आ रहीं हैं. इन तस्वीरों में मोनालिसा बेहद खूबसूरत और प्यारी लग रही हैं. मोनालिसा (Monalisa) नें अपनी साड़ी वाली एक तस्वीर शेयर की है जिसमें वह स्लीव्सलेस बोट नेक ब्लाउज के साथ पर्पल शिफॉन साड़ी में नजर आ रहीं हैं. उनका यह लुक उनके फैन्स के दिल पर बिजलियां गिराने वाला है. इसके अलावा उन्होंने बंगाली साड़ी पहने हुए भी एक तस्वीर शेयर की है.
उन्होंने अपने साड़ी वाली एक तस्वीर को शेयर करते हुए उसके कैप्शन में लिखा है “ठीक दो साल पहले, मेरे पहले टेलीविजन फिक्शन शो ‘नजर’ के लिए इतना उत्साह. प्रमोशन के लिए सिटी टूर और डायन अपनी चोटी के साथ पोज देते हुए”. इस तस्वीर को भी उनके फैन्स के खूब लाइक्स मिल रहें हैं.
बताते चलें की मोनालिसा (Monalisa) का स्टार भारत पर आने वाला शो ‘नजर’ काफी पॉपुलर हुआ था इसी लिए कोरोना के कारण इसका स्टार भारत पर रिपीट टेलीकास्ट एक बार फिर से हुआ था. इस सीरियल में मोनालिसा (Monalisa) ने अपने डायन वाले रोल से खूब सुर्खियां बटोरी थीं.
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मोनालिसा (Monalisa) ने भोजपुरी फिल्मों के अलावा हिंदी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, उड़िया और बंगाली जैसी कई भाषाओं की फिल्मों में अभिनय किया है. बंगाली हिंदू परिवार में जन्मी मोनालिसा (Monalisa) का वास्तविक नाम अंतरा बिस्वास है लेकिन फिल्मों में आने के बाद उनके चाचा नें उनका नाम अंतरा विश्वास (Antra vishvas) से मोनालिसा (Monalisa) रख दिया था.
फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने मोनालिसा (Monalisa) के नाम से काफी पॉपुलैरिटी बटोरी है. मोनालिसा ने भोजपुरी एक्टर विक्रांत सिंह राजपूत (Vikrant Singh Rajpoot) से बिग बॉस के कंटेस्टेंट बनने के दौरान शादी कर ली थी.
साइंटिस्ट्स ने सबसे कौमन सेक्स पोजीशंस में से एक को सबसे खतरनाक बताया है. साइंटिस्ट्स के मुताबिक, आधे से ज्यादा पीनाइल फ्रैक्चर्स के लिए वूमन औन टौप पोजीशन जिम्मेदार है. ब्राजील के रिसर्चर्स ने तीन हौस्पिटल्स में केसेज की स्टडी के बाद ये खुलासा किया है.
इस पोजीशन में महिलाएं अपने पूरे बौडी वेट के साथ पेनिस को कंट्रोल करती हैं. अगर पेनेट्रेशन में जरा भी गड़बड़ी हुई तो मर्द कुछ नहीं कर पाते. इसमें महिलाओं को तो दर्द नहीं होता लेकिन पेनिस को चोट पहुंचती है. डौगी स्टाइल सेक्स भी 29 परसेंट फ्रैक्चर्स के लिए जिम्मेदार माना गया है.
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रिसर्च में, मिशनरी पोजीशन सेक्स के लिए सेफेस्ट पोजीशन के तौर पर सामने आई है. रिसर्चर्स ने हौस्पिटल में इलाज कराने आए 44 पुरुषों का अध्ययन किया. इनमें से 28 फ्रैक्चर्स हेट्रोसेक्सुअल सेक्स से हुए, 4 होमोसेक्सुअल से और 6 पेनिस मैनिपुलेशन से. हालांकि बाकी 4 फ्रैक्चर्स का कारण डौक्टर्स को समझ नहीं आया.
रिसर्चर्स ने नोट किया कि केसेज में चोट अनकौमन है और जिन्हें फ्रैक्चर होता है, वे बताने से डरते हैं. ऐसे में इस तरह के फ्रैक्चर्स की असल संख्या और ज्यादा हो सकती है. रिसर्च पेपर के कंक्लूजन में लिखा है, “हमारी स्टडी के मुताबिक, वूमन औन टौप पोजीशन के साथ सेक्सुअल इंटरकोर्स पीनाइल फ्रैक्चर्स के लिए सबसे रिस्की है. जब एक मर्द मूवमेंट को कंट्रोल करता है तो वो पेनेट्रेशन के दौरान पेनिस में दर्द को रोकने की स्थिति में होता है.”