लाल चूड़ा पहने पारस छाबड़ा के साथ रोमांटिक अंदाज में दिखीं Rubina Dilaik, Viral हुईं Photos

बिग बॉस 14 की विनर रुबिना दिलैक एक बार फिर अपने ग्लैमरस अदाज से फैंस का दिल जीत रही हैं. जी हां एक्ट्रेस की लेटेस्ट तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. दरअसल रुबिना दिलैक ने अपनी अपकमिंग प्रोजेक्ट के लिए फोटोशूट करायी हैं.

इस तस्वीर में एक्ट्रेस लाल रंग का चूड़ा पहने हुए नजर आ रही हैं. रुबिना दिलैक और बिग बॉस 13 फेम एक्टर पारस छाबड़ा (Paras Chhabra) इस तस्वीर में रोमांटिक पोज देते हुए दिखाई दे रहे हैं. सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं.

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मिली जानकारी के अनुसार,  दोनों का एक रोमांटिक म्यूजिक वीडियो जल्दी ही रिलीज होने वाला है. उन दोनों को फैंस स्क्रिन पर एक साथ देखने के लिए खूब एक्साइटेड हैं.

सोशल मीडिया पर दोनों के फोटो पर एक यूजर ने कॉमेंट किया, ‘अब तो पावरी होगी तो वहीं कई फैन्स ने लिखा है कि वो इस गाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

आपको बता दें कि पारस छाबड़ा ‘बिग बॉस 13’ में बतौर कंटेस्टेंट नजर आए थे और 14वें सीजन में वह एजाज़ खान की प्रॉक्सी देवोलीना भट्टाचार्जी को सपॉर्ट करने के लिए पहुंचे थे.

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Women’s Day Special- गिरफ्त: भाग 1

मनीषा को सामान रखते देख कर प्रिया ने पूछ ही लिया, ‘‘तो क्या, कर ली अजमेर जाने की पूरी तैयारी?’’

‘‘अरे नहीं, पूरी कहां, बस जो सामान बिखरा पड़ा है उसे ही समेट रही हूं. अभी तो एक बैग ले कर ही जाऊंगी, जल्दी वापस भी तो आना है.’’

‘‘वापस,’’ प्रिया यह सुन कर चौंकी थी, ‘‘तो क्या अभी रिजाइन नहीं कर रही हो?’’

‘‘नहीं.’’

मनीषा ने जोर से सूटकेस बंद किया और सुस्ताने के लिए बैड पर आ कर बैठ गई थी.

‘‘बहुत थक गई हूं यार, छोटेछोटे सामान समेटने में ही बहुत टाइम लग जाता है. हां, तो तू क्या कह रही थी. रिजाइन तो मैं बाद में करूंगी, पहले पुणे में जौब तो मिल जाए.’’

‘‘अरे, मिलेगी क्यों नहीं, सुशांत जीजान से कोशिश में लग जाएगा, अब तुझे वह यहां थोड़े ही रहने देगा,’’ प्रिया ने उसे छेड़ा था और मनीषा मुसकरा कर रह गई.

मनीषा और प्रिया इस महिला हौस्टल में रूममेट थीं और दोनों यहां गुरुग्राम में जौब कर रही थीं. मनीषा की शादी अगले महीने होनी तय हुई थी, इसलिए वह छुट्टी ले कर जाने की तैयारी में थी.

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‘‘बाय द वे,’’ प्रिया ने उसे फिर छेड़ा था, ‘‘तू अब सुशांत के खयालों में उलझी रह और अपनी पैकिंग भी करती रह, मैं नीचे जा रही हूं. क्या तेरे लिए कौफी ऊपर ही भिजवा दूं? अरे मैडम, मैं आप ही से कह रही हूं.’’ प्रिया ने उसे झकझोरा था.

‘‘हां…हां, सुन रही हूं न, कौफी के साथ कुछ खाने के लिए भी भेज देना, मुझे तो अभी पैकिंग में और समय लगेगा,’’ मनीषा बोली.

‘‘मैं सोच रही हूं कि आज रीना के कमरे में ही डेरा जमाऊं, कुछ काम भी करना है लैपटौप पर,’’ प्रिया बोली.

‘‘हां…हां…जरूर,’’ मनीषा के मुंह से निकल ही गया था.

‘‘वह तो तू कहेगी ही, अच्छा है रात को सुशांत से अकेले में आराम से चैट करती रहना.’’ मैं चली. हां, यह जरूर कह देना कि यह सब प्रिया की मेहरबानी से संभव हुआ है.’’

‘‘अरे हां, सब कहूंगी,’’ मनीषा हंस पड़ी थी. प्रिया के जाने के बाद उस ने बचा हुआ सामान समेटा और सोचने लगी, ‘चलो, अब ठीक है. छुट्टी के बाद ही लौटेंगे तो कम से कम सामान तो पैक ही मिलेगा.’

हाथमुंह धो कर उस ने कपड़े बदले. तब तक प्रिया ने कौफी के साथ कुछ सैंडविच भी भिजवा दिए थे. कौफी पी कर वह कमरे के बाहर बनी छोटी सी बालकनी में आ गई थी.

शाम को अंधेरा बढ़ने लगा था पर नीचे बगीचे में लाइट्स जल रही थीं जिस से वातावरण काफी सुखद लग रहा था. झिलमिलाती रोशनी को देखते हुए वह बालकनी में ही कुरसी खींच कर बैठ गई थी.

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तो आखिर शादी तय हो ही गई थी उस की. सुशांत को याद करते ही पता नहीं कितनी यादें दिलोदिमाग पर छाने लगी थीं.

पता नहीं उस के साथ लंबे समय तक क्या होता रहा. पापा ने कई लड़के देखे, कहीं लड़का पसंद नहीं आया तो कहीं दहेज की मांग, तो किसी को लड़की सांवली लगती.

चलचित्र की तरह सबकुछ आंखों के सामने घूमने लगा था. हां, रंग थोड़ा दबा हुआ जरूर था उस का पर पढ़ाई में तो वह शुरू से ही अव्वल रही. इंजीनियरिंग कर के एमबीए भी कर लिया. अच्छी नौकरी मिल गई. फिर आत्मनिर्भर होते ही व्यक्तित्व में भी तो निखार आ ही जाता है.

अब तो हौस्टल की दूसरी लड़कियां भी कहती हैं, ‘अरे, रंग कुछ दबा हुआ है तो क्या, पूरी ब्यूटी क्वीन है हमारी मनीषा.’

एकाएक उस के होंठों पर मुसकान खिल गई थी. सुशांत ने तो उसे देखते ही पसंद कर लिया था. फिर उस की मां और मौसी दोनों आईं और शगुन कर गईं.

अब तो 15 दिनों बाद सगाई और शादी दोनों एकसाथ ही करने का विचार था.

तय यह हुआ कि सुशांत का परिवार और रिश्तेदार 2 दिन पहले ही अजमेर पहुंच जाएं. पापा ने उन के लिए एक पूरा रिसौर्ट बुक करा दिया था. घर के रिश्तेदारों के लिए पास के एक दूसरे बंगले में ठहरने का इंतजाम था.

कल ही मां ने फोन पर सूचना दी थी, ‘मनी, सारी तैयारियां हो चुकी हैं. बस, अब तू छुट्टी ले कर आजा. घर पर तेरा ही इंतजार है.’

‘हां मां, आ तो रही हूं, परसों पहुंच जाऊंगी आप के पास,’ मां तो पता नहीं कब से पीछे पड़ी थीं.

‘बहुत कर ली नौकरी, अब घर आ कर कुछ दिन हमारे पास रह. शादी के बाद तो ससुराल चली ही जाएगी. और हां, लड़कियां शादी से पहले हलदीउबटन सब करवाती हैं. तू भी ब्यूटी पार्लर जा कर यह सब करवाना.’

‘चली जाऊंगी मां, 15 दिन बहुत होते हैं अपना हुलिया संवारने को,’ मनीषा बोली.

उस ने बात टाली थी. पर मां की याद आते ही बहुत कुछ घूम गया था दिमाग में. एक माने में मां की बात सही भी थी, अपनी पढ़ाई और फिर नौकरी के सिलसिले में वह काफी समय घर से बाहर ही रही. और अब शादी कर के घर से दूर हो जाएगी तो वे भी चाहती हैं कि बेटी कुछ दिन उन के पास भी रह ले. चलो, अब मां भी खुश हो जाएंगी. कह भी रही थीं कि मेरी पसंद के सारे व्यंजन बना कर खिलाएंगी मुझे.

‘अरे मां, अब तो मैं ज्यादा तलाभुना खाना भी नहीं खाती हूं.’

‘हां…हां, पता है. पर यहां तेरी मनमानी नहीं चलेगी, समझी,’ मां ने उसे प्यारभरी फटकार लगाई.

‘अरे, फोन बज रहा है,’ कमरे में रखा उस का मोबाइल बज रहा था. लो, मां को याद किया तो उन का फोन भी आ गया. इसी को शायद टैलीपैथी कहते हैं. वह तेजी से अंदर गई. अरे, यह तो सुशांत का फोन है, पर इस समय कैसे. अकसर उस का फोन तो रात 10 बजे के बाद ही आता था और अगर पास में प्रिया सो रही हो तो वह बाहर बालकनी में बैठ कर आराम से घंटे भर बातें करती थी पर इस समय, वह चौंकी थी.

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‘‘हां सुशांत, बस, मैं कल निकल रही हूं अजमेर के लिए, थोड़ाबहुत सामान पैक किया है,’’ मोबाइल उठाते ही उस ने कहा था.

Women’s Day Special- गिरफ्त: भाग 2

‘‘मनीषा, मैं ने इसीलिए तुम्हें फोन किया था कि तुम अब अपना प्रोग्राम बदल देना, देखो, अदरवाइज मत लेना पर मैं ने बहुत सोचा है और आखिर इस निर्णय पर पहुंचा हूं कि मैं अभी शादी नहीं कर पाऊंगा इसलिए…’’

‘‘क्या कह रहे हो सुशांत? मजाक कर रहे हो क्या?’’ मनीषा समझ नहीं पा रही थी कि सुशांत कहना क्या चाह रहा है.

‘‘यह मजाक नहीं है मनीषा, मैं जो कुछ कह रहा हूं, बहुत सोचसमझ कर कह रहा हूं. अभी मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि शादी कर सकूं.’’

‘‘कैसी बातें कर रहे हो सुशांत, हम लोग सारी बातें पहले ही तय कर चुके हैं और अच्छीखासी जौब है तुम्हारी. फिर मैं भी जौब करूंगी ही. हम लोग मैनेज कर ही लेंगे और हां, यह तो सोचो कि शादी की सारी तैयारियां हो चुकी हैं. पापा ने वहां सारी बुकिंग करा दी है. कैटरिंग, हलवाई सब को एडवांस दिया जा चुका है.’’

‘‘तभी तो मैं कह रहा हूं…’’ सुशांत ने फिर बात काटी थी, ‘‘देखो मनीषा, अभी तो टाइम है, चीजें कैंसिल भी हो सकती हैं और फिर शादी के बाद तंगी में रहना कितना मुश्किल होगा. इच्छा होती है कि हनीमून के लिए बाहर जाएं. बढि़या फ्लैट, गाड़ी सब हों, मैं ने तुम्हें बताया था न कि मेरी एक फ्रैंड है शोभा, उस से मैं अकसर राय लेता रहता हूं. उस का भी यही कहना है, चलो, तुम्हारी उस से भी बात करा दूं. वह यहीं बैठी है.’’

शोभा, कौन शोभा. क्या सुशांत की कोई गर्लफ्रैंड भी है. उस ने तो कभी बताया नहीं… मनीषा के हाथ कांपने लगे. तब तक उधर से आवाज आई. ‘‘हां, कौन, मनीषा बोल रही हैं, हां, मैं शोभा, असल में सुशांत यहीं हमारे घर में पेइंगगैस्ट की तरह रह रहे हैं, तुम्हारा अकसर जिक्र करते रहते हैं. फोटो भी दिखाया था तुम्हारा. बस, शादी के नाम पर थोड़े परेशान हैं कि अभी मैनेज नहीं हो पाएगा. अपने घरवालों से तो कहने में हिचक रहे थे तो मैं ने ही कहा कि तुम मनीषा से ही बात कर लो. वह समझदार है, तुम्हारी तकलीफ समझेगी.’’

मनीषा तो जैसे आगे कुछ सुन ही नहीं पा रही थी. कौन है यह शोभा और सुशांत क्यों इसे सारी बातें बताता रहा है. उस का माथा भन्नाने लगा. ‘‘देखिए, आप सुशांत को फोन दें.’’

‘‘हां सुशांत, तुम अपने घरवालों से बात कर लो.’’

‘‘पर मनीषा…’’ सुशांत कह रहा था, पर मनीषा ने तब तक मोबाइल बंद कर दिया था. 2 बार घंटी बजी थी, पर उस ने फोन उठाया ही नहीं.

‘ओफ, क्या सोचा था और क्या हो गया. अब वह क्या करे. सुहावने सपनों का महल जैसे भरभरा कर गिर गया. अब अजमेर जा कर मांपापा से क्या कहेगी,’ उस का दिमाग काम नहीं कर रहा था.

मोबाइल की घंटी लगातार घनघना रही थी. नहीं, उसे अब सुशांत से कोई बात नहीं करनी और वह गर्लफैंड. वह खुद को बुरी तरफ अपमानित अनुभव कर रही थी. कहां तो अभी इतनी तेज भूख लग रही थी, लेकिन अब भूखप्यास सब गायब हो गई थी. कोई रास्ता सूझ नहीं रहा था कि अब क्या करे? मांपापा को फोन पर तो यह सब बताना ठीक नहीं रहेगा, वे लोग घबरा जाएंगे. मां तो वैसे ही ब्लडप्रैशर की मरीज हैं.

और उसे यह भी नहीं पता कि आखिर वह शोभा है कौन? सुशांत उस के कहने भर से शादी स्थगित कर रहा है या फिर शादी के लिए मना ही कर रहा है.

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ठीक है, उसे भी ऐसे आदमी के साथ जिंदगी नहीं बितानी है, अच्छा हुआ अभी सारी बातें सामने आ गईं और उस ने नौकरी से अभी रिजाइन नहीं दिया वरना मुश्किल हो जाती.

पर चारों तरफ सवाल ही सवाल थे और वह कोईर् उत्तर नहीं खोज पा रही थी.

रोतेरोते उस की आंखें सूज गई थीं.

‘नहीं, उसे कमजोर नहीं पड़ना है, जब उस की कोई गलती ही नहीं है तो वह क्यों हर्ट हो,’ यह सोच कर वह उठी ही थी कि मोबाइल की घंटी फिर बजने लगी थी. सुशांत का ही फोन होगा. अब फोन मुझे स्विचऔफ करना होगा, यह सोच कर उस ने मोबाइल उठाया. पर यह तो सरलाजी थीं, सुशांत की मां. अब ये क्या कह रही हैं.

उधर से आवाज आ रही थी, ‘‘हां, मनीषा बेटी, मैं हूं सरला.’’

‘‘हां, आंटी,’’ बड़ी मुश्किल से उस ने अपनी रुंधि हुई आवाज को रोका.

‘‘बेटी, यह मैं क्या सुन रही हूं, अभीअभी सुशांत का फोन आया था. अरे बेटे, शादी क्या कोई मजाक है. क्यों मना कर रहा है वह. उस के पापा तो इतने नाराज हुए कि उन्होंने उस का फोन ही काट दिया. अब पता नहीं यह शोभा कौन है और क्यों वह इस के बहकावे में आ रहा है, पर बेटी, मेरी तुम से विनती है, तुम एक बार बात कर के उसे समझाओ.’’

‘‘आंटी, अब मैं क्या कर सकती हूं,’’ मनीषा ने अपनी मजबूरी जताते हुए कहा.

‘‘बेटा, तू तो बहुत कुछ कर सकती है, तू इतनी समझदार है, एक बार बात कर उस से. अब हम तो तुझे अपनी बहू मान ही चुके हैं.’’

‘‘ठीक है आंटी, मैं देखूंगी,’’ कह कर मनीषा ने मोबाइल स्विचऔफ कर दिया था. अब नहीं करनी उसे किसी से भी बात. अरे, क्या मजाक समझ रखा है. बेटा कुछ कहता है तो मां कुछ और, और मैं क्यों समझाऊं किसी को. मैं ने क्या कोई ठेका ले रखा सब को सुधारने का, मनीषा का सिरदर्द फिर से शुरू हो गया था, रातभर वह सो भी नहीं पाई.

फिर सुबहसुबह उठ कर बालकनी में आ गई. अभी सूर्योदय हो ही रहा था. ‘नहीं, कुछ भी हो उसे उस शोभा को तो मजा चखाना ही है, भले ही यह शादी हो या नहीं, पर यह शोभा कौन होती है अड़ंगे लगाने वाली. वह एक बार तो बेंगलुरु जाएगी ही,’ सोचते हुए उस ने मोबाइल से ही बेंगलुरु की फ्लाइट का टिकट बुक करा लिया था. फिर तैयार हो कर उस ने सुशांत को फोन कर दिया, वह अब औफिस आ चुका था.

‘‘मैं बेंगलुरु आ रही हूं, तुम से तुम्हारे औफिस में ही मिलूंगी.’’

‘‘अच्छा, पर…’’

‘‘पहुंच कर बात करते हैं,’’ कह कर उस ने फोन रख दिया था.

एकाएक यह कदम उठा कर उस ने ठीक भी किया है या नहीं, यह वह अब तक समझ नहीं, पा रही थी, पर जो भी हो फ्लाइट का टिकट तो बुक हो ही चुका है, पर बेंगलुरु में ठहरेगी कहां. एकाएक उसे अपनी सहेली विशु याद आ गई. हां, विशु बेंगलुरु में ही तो जौब कर रही है. उसे फोन लगाया, ‘‘अरे मनीषा, व्हाट्स सरप्राइज…पर तू अचानक…’’ विशु भी चौंक गई थी.

‘‘बस, ऐसे ही, औफिस का एक काम था, तो सोचा कि तेरे ही पास ठहर जाऊंगी, तुम वहीं हो न.’’

‘‘हां, हूं तो बेंगलुरु में, पर अभी किसी काम से मुंबई आई हुई हूं, कोई बात नहीं, मां है वहां, तू घर पर ही रुकना. तू पहले भी तो मां से मिल चुकी है, तो उन्हें भी अच्छा लगेगा. मुझे तो अभी हफ्ताभर मुंबई में ही रुकना है.’’

‘‘ठीक है, मैं आती हूं, वहां पहुंच कर तुझे फोन करूंगी.’’

फिर उस ने मां को अजमेर फोन कर के कह दिया कि अभी छुट्टी मिल नहीं पा रही है, 2 दिनों बाद आ पाऊंगी.

बेंगलुरु पहुंचतेपहुंचते शाम हो गई थी. सुशांत औफिस में ही उस का इंतजार कर रहा था.

‘‘अचानक कैसे प्रोग्राम बन गया,’’ उसे देखते ही सुशांत बोला था.

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मनीषा ने किसी प्रकार अपने गुस्से पर काबू रखा और कहा, ‘‘बस…शादी नहीं हो रही तो क्या, दोस्त तो हम हैं ही, सोचा कि मिल कर बात कर लेती हूं कि आखिर वजह क्या है शादी टालने की, फिर मुझे कुछ काम भी था बेंगलुरु में तो वह भी हो जाएगा.’’ आधा सच, आधा झूठ बोल कर उस ने बात खत्म की.

‘‘हांहां, चलो, पहले कहीं चल कर चायकौफी पीते हैं, तुम थकी हुई होगी.’’ कौफी शौप में कौफी पी कर बाहर निकले तो सुशांत ने कहा, ‘‘मैं ने शोभा को भी फोन कर दिया था तो वह घर पर हमारा इंतजार कर रही है, पहले घर चलें.’’

‘शोभा…पहले इस शोभा को ही देखा जाए,’ वह मन ही मन सोचते हुए मनीषा ने कहा, ‘‘जैसा तुम ठीक समझो,’’ कहते हुए मनीषा के शब्द भी लड़खड़ा गए थे.

औफिस घर के पास ही था, घर के बाहर लौन में शोभा इंतजार करती मिली उन दोनों का.

‘‘आइए, आइए,’’ गेट पर खड़ी महिला को देख कर मनीषा चौंकी, तो यह है शोभा, यह तो

40-45 साल की होगी, हां, बनावशृंगार कर के खुद को चुस्त बना रखा है, पर यह सुशांत की फ्रैंड कैसे बनी, उस का दिमाग फिर चकराने लगा था.

‘‘मनीषा, यह है शोभा, बहुत खयाल रखती है मेरा, बेंगलुरु जैसे शहर में एक तरह से इस पर ही निर्भर हो गया हूं मैं.’’

‘‘हांहां, अंदर तो चलो,’’ शोभा कह रही थी. अंदर सीधे वह डाइनिंग टेबल पर ही ले गई. कौफीनाश्ता तैयार था. शोभा ने बातचीत भी शुरू की, ‘‘मनीषा, असल में सुशांत काफी परेशान थे कि तुम्हें कैसे मना करें शादी के लिए, क्योंकि तैयारी तो सब हो चुकी होगी, पर अभी शादी के लिए सुशांत खुद को तैयार नहीं कर पा रहे थे. तो मैं ने ही इन से कहा कि तुम मनीषा से बात कर लो, वह सुलझी हुई लड़की है. तुम्हारी प्रौब्लम जरूर समझेगी. असल में ये तुम्हारी सारी बातें मुझे बताते रहते थे तो मैं भी तुम्हारे बारे में बहुत कुछ जान गई थी,’’ कह कर शोभा थोड़ी मुसकराई.

मनीषा समझ नहीं पा रही थी कि क्या करे, बड़ी मुश्किल से उस ने खुद को संभाला और फिर बोली, ‘‘शोभाजी, मैं बस 2 दिनों के लिए आई हूं और अपनी एक फ्रैंड के यहां रुकी हूं. मैं चाहती हूं कि मैं और सुशांत बाहर जा कर कुछ बात कर लें, अगर आप चाहें तो.’’

‘‘हांहां, क्यों नहीं, खाना खा कर जाना, खाना तैयार है.’’ फिर शोभा ने सुशांत की तरफ देखा था, ‘‘तुम्हारी पसंद की चिकनबिरयानी बनाई है, अगर मनीषा को नौनवेज से परहेज हो तो कुछ और…’’

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Crime Story: लालच में पार की सारी हदें- भाग 4

लेखक- विजय पांडेय/श्वेता पांडेय

सौजन्य-  मनोहर कहानियां

तीनों को वह ड्राइंगरूम में ले गई. तीनों सोफे पर बैठ गए. कुछ देर वह उन से औपचारिक बातें करती रही. फिर उन लोगों ने बातचीत का रुख संपत्ति और रुपयों की ओर मोड़ दिया. नेहा ने उस वक्त संयम से काम लिया, लेकिन वे तीनों योजना के तहत उस से झगड़ा करने लगे.

नेहा गुस्से में ड्राइंगरूप से उठ कर अपने बैडरूम में चली गई. उस के पीछेपीछे अजय राय, आनंद राय और दीपक भी पहुंच गए. उन तीनों को अपने पीछे आया देख कर नेहा बोली, ‘‘मैं इस समय आप लोगों से कोई बात नहीं करना चाहती. इस बारे में जो कुछ कहना हो तरुण से कहना.’’

तभी अजय दांत पीसते हुए बोला, ‘‘वह हमारी सुनता कहां है.’’

‘‘तो मैं क्या करूं. मेहरबानी कर के आप लोग यहां से चले जाइए.’’

यह सुन कर उन तीनों ने आंखों ही आंखों में इशारा किया. तभी दीपक ने पास बैठी अनन्या को उठा लिया और जूते का फीता निकाल कर उस के गले में कसने लगा.

बेटी की जान बचाने के लिए नेहा उन से भिड़ गई. यह देख अजय और आनंद ने नेहा को काबू में करने का प्रयास किया. उन के बीच 15 मिनट तक हाथापाई होती रही.

मौका पा कर आनंद ने नेहा के पैर जकड़ लिए और अजय ने अपने दोनों हाथों से नेहा का गला घोंट दिया. कुछ ही देर में उस की मौत हो गई.

उधर दीपक ने अनन्या के गले को जूतों के फीते से कस दिया. बच्ची की भी मौत हो गई. दीपक ने अपनी संतुष्टि के लिए उसी फीते से एक बार फिर नेहा के गले को जोर से कसा. वे लोग पूरी तसल्ली चाहते थे कि उन दोनों में से कोई जिंदा न रहे. इस की पुष्टि के लिए उन्होंने दोनों लाशों को उठा कर बाथरूम के टब में डाल कर यह देखा कि नाक या मुंह से पानी में बुलबुले तो नहीं निकल रहे.

5 मिनट तक पानी में कोई बुलबुला नहीं उठा तो उन्हें संतुष्टि हो गई कि दोनों की मौत हो चुकी है. इस के बाद तीनों ने चैन की सांस ली.

फिर वे लाशों को उठा कर नेहा के बैडरूम में ले गए और दोनों लाशें औंधे मुंह दीवान के बौक्स में डाल दीं. इस के बाद तीनों ने सलाह  की कि इन्हें ठिकाने कैसे लगाया जाए. कुछ देर विचार करने के बाद उन्होंने तय किया कि दोनों लाशों को मंदिर हसौद नया रायपुर के सुनसान इलाके में ले जा कर ठिकाने लगा दिया जाए.

अजय राय यह कहता हुआ वहां से अपनी कार से चला गया कि वह उपयुक्त जगह ढूंढ कर आता है. तब तक रात भी गहरा जाएगी. वह नेहा के बैडरूम और बंगले का ताला बंद कर के चला गया. आनंद राय और दीपक दोनों ताले में बंद लाशों के पास ही बैठे रहे.

उधर नेहा के भाई आकाश ने नेहा को फोन किया तो नेहा के फोन की घंटी तो बजती रही, लेकिन वह फोन नहीं उठा रही थी. कई बार काल करने के बाद भी जब नेहा ने फोन नहीं उठाया तो वह अपनी छोटी बहन को साथ ले कर कार से रात करीब साढ़े 11 बजे नेहा के बंगले पर  पहुंच गया.

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दोनों लाशों को ठिकाने लगाने के लिए अजय राय भी एक सुनसान जगह देख कर लौट आया था. जब वह बंगले के पास पहुंचा तो उसे वहां भीड़ दिखाई दी. उस का माथा ठनका. उसे समझते देर नहीं लगी कि बंगले के बाहर लोगों का हुजूम क्यों लगा है.

भाग गया अजय राय

उस समय उस की कार बंगले से करीब आधा फर्लांग दूर थी. माजरा समझते ही उस ने यू टर्न लिया और वहां से  निकल गया. वह समझ गया कि हत्या का मामला खुल चुका है और पुलिस उस तक पहुंच जाएगी. ऐसे में उस ने शहर से बाहर भागने में ही अपनी भलाई समझी.

वह कार से भंडारपुरी, कसडोल, बिलाईगढ़ होता हुआ बिलासपुर बसस्टैंड पहुंचा. उस ने अपनी कार लौक कर के एक जगह छोड़ दी और फिर बस से प्रयागराज के लिए निकल गया. प्रयागराज में वह अपने एक परिचित के यहां रुका.

कुछ दिन प्रयागराज में रुकने के बाद वह अयोध्या चला गया. अयोध्या में उस का एक दोस्त शिवप्रकाश रहता था. वह आपराधिक प्रवृत्ति का था. अयोध्या जाने से पहले उस ने प्रयागराज हाइवे पर पहुंच कर शिवप्रकाश से फोन पर बात करनी चाही. इस के लिए उस ने अपना मोबाइल औन किया.

तभी उसे ध्यान आया कि अगर उस ने अपने मोबाइल से बात की तो वह पुलिस की पकड़ में आ जाएगा. इसलिए उस ने वहां मौजूद एक पंक्चर बनाने वाले से बात की. अजय ने उस से कहा कि उस का मोबाइल खराब हो गया है और उसे किसी से अर्जेंट बात करनी है. यदि वह अपने फोन से उस की बात करा दे तो मेहरबानी होगी. बदले में वह 100 रुपए दे देगा. पंक्चर वाला तैयार हो गया और उस ने अपना मोबाइल अजय को दे दिया. अजय ने उस के मोबाइल से अपने दोस्त शिवप्रकाश से बात की. वह शिवप्रकाश का नंबर डिलीट करना भूल गया था.

इस के बाद अजय अयोध्या में अपने दोस्त शिवप्रकाश के पास चला गया और वहीं पर रहने लगा. लेकिन वह वहां भी सुरक्षित नहीं रह सका और रायपुर पुलिस के चंगुल में फंस गया. पुलिस उसे अयोध्या से गिरफ्तार कर के ले आई. पुलिस ने बिलासपुर बसस्टैंड से उस की कार भी बरामद कर ली.

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तीनों अभियुक्त पुलिस की गिरफ्त में आ चुके थे. पुलिस ने तीनों को 5 फरवरी, 2021 को कोर्ट में पेश कर 10 दिन की पुलिस रिमांड मांगी. पुलिस के अनुरोध पर कोर्ट ने तीनों आरोपियों को 15 फरवरी, 2021 तक के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया.

रिमांड अवधि में विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों को अदालत पर पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Women’s Day Special- साइबर अपराध: महिलाएं हैं सौफ्ट टारगेट

तकनीक जितनी ताकतवर होती है, उतनी ही तीखी और तेजतर्रार भी. किसी भी समाज और देश के लिए वहां होने वाले अपराध उस के माथे पर कलंक जैसे होते हैं. अब जब से दुनिया ‘साइबर वर्ल्ड’ के दमघोंटू गुब्बारे में बंद हो कर रह गई है, तब से वहां इस तकनीक से होने वाले अपराध भी बेलगाम होने लगे हैं.

इस कड़ी में साइबर उत्पीड़न सब से आगे और बड़ी मजबूती से इनसानियत को शर्मसार कर रही है. आमतौर पर यह उत्पीड़न समाज के उस हिस्से को चोट पहुंचा रहा है जिसे हम बड़ी शान से ‘आधी दुनिया’ का तमगा दे चुके हैं यानी महिला समाज. यही वजह है कि साइबर उत्पीड़न के ऐसेऐसे किस्से हमारे सामने आते हैं कि डर के मारे रोंगटे तक खड़े हो जाते हैं.

हाल ही में दिल्ली के दक्षिणपश्चिमी जिले की साइबर सैल ने सोशल मीडिया पर 50 से ज्यादा लड़कियों और महिलाओं को परेशान करने वाले 19 साल के एक लड़के रहीम खान को फरीदाबाद, हरियाणा से पकड़ा. वह इतना शातिर दिमाग था कि महिला के नाम पर फर्जी आईडी बना कर पहले तो सोशल मीडिया प्लेटफार्म से लड़कियों और महिलाओं को दोस्ती की रिक्वैस्ट भेजता था, फिर वहां मौजूद उन के फोटो से छेड़छाड़ कर वायरल करने की धमकी देता था. साथ ही, पीड़िता को अपना अश्लील फोटो भेजने को भी कहता था. रहीम खान की इस घटिया हरकत के चलते एक लड़की तो डर की वजह से डिप्रैशन में चली गई थी.

डीसीपी इंगित प्रताप सिंह के मुताबिक, आरके पुरम की एक पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा था कि कोई उसे उस के ही अश्लील फोटो इंस्टाग्राम आईडी के जरीए भेज रहा है. इतना ही नहीं, वह उस से अश्लील फोटो भी मांग रहा था.

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मामले की गंभीरता को देखते हुए इस की जांच साइबर सैल को सौंपी गई. साइबर सैल प्रभारी रमन कुमार सिंह की देखरेख में टीम ने जांच शुरू की और तकनीकी जांच के बाद एसआई नीरज कुमार की टीम ने फरीदाबाद के ऊंचा गांव के रहीम खान को पकड़ लिया.

पुलिस ने रहीम खान के मोबाइल फोन से कई चैट डिटेल, महिलाओं व लड़कियों के वीडियो क्लिप और फोटो बरामद किए.

ऐसे अपराध कोई महीनेसाल में नहीं होते हैं, बल्कि भारत जैसे देश में हर दूसरे सैकंड, एक महिला साइबर उत्पीड़न का शिकार होती है. एक नया शब्द ‘ट्रोलिंग’ तो जैसे आम हो गया है. सोशल मीडिया पर महिलाओं खासकर जवान लड़कियों से गालीगलौज करना, उन्हें धमकी देना, घूरना, बदनाम करना, पीछा करना, बदला लेना और अश्लील बातें करना इसी साइबर उत्पीड़न का ही घिनौना रूप है.

हैरत और शर्म की बात है कि देश में साल 2017 से साल 2019 के बीच धोखाधड़ी, यौन उत्पीड़न और घृणा से जुड़े साइबर अपराध के 93,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए. गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी थी.

राष्ट्रीय अपराध रिकौर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2017 में 21,796, साल 2018 में 27,248 और साल 2019 में 44,546 साइबर अपराध मामले दर्ज किए गए.

जी. किशन रेड्डी ने बताया, “देश में होने वाले साइबर अपराध के पीछे जो विभिन्न मंशा रही हैं, उन में निजी दुश्मनी, धोखाधड़ी, यौन उत्पीड़न, नफरत फैलाना, पायरेसी का विस्तार, सूचनाओं की चोरी आदि शामिल हैं.”

साइबर उत्पीड़न में ज्यादातर मामले प्रेमप्रसंग के होते हैं. अगर किसी लड़की या महिला ने अपने पुरुष साथी से पीछा छुड़ाना चाहा (जब ऐसा युगल शादीशुदा नहीं है) तो तिलमिलाए आशिक ने उसे सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दे डाली. जैसे वह उन के प्रेम दर्शाते फोटो या वीडियो या फिर चैटिंग को वायरल कर देगा. दुनिया को बता देगा कि वह कितनी चरित्रहीन है.

बहुत बार तो बहुत से सिरफिरे एकतरफा आशिक भी तकनीक का गलत इस्तेमाल कर के महिलाओं को ब्लैकमेल करते हैं. घबराई महिलाएं परेशान हो कर मैसेज डिलीट कर देती हैं. पर यह समस्या का हल नहीं है, बल्कि सामने वाले को बढ़ावा देना होता है. होना तो यह चाहिए कि जो महिलाएं ऐसे अपराध या साइबर हमलों का शिकार हुई हैं, उन्हें अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए. पहले अपने परिवार वालों और फिर पुलिस में इस अपराध की शिकायत करनी चाहिए.

सवाल उठता है कि कानून इस में क्या और कितनी मदद कर सकता है? सब से पहले तो यह समझिए कि जब कोई लड़की या महिला के खिलाफ साइबर अपराध होता है, तो कानून का सहारा कैसे लिया जा सकता है? याद रखिए कि कंप्यूटर या मोबाइल फोन आदि का सहारा ले कर किए जाने वाले ऐसे मामले सीधेसीधे एक महिला की इज्जत को चोट पहुंचाने से जुड़े होते हैं. ऐसे अपराधों को भारतीय दंड संहिता की धारा 354, धारा 509 और 292(ए) में डाला जा सकता है.

भारतीय दंड संहिता की धारा 354 कहती है कि अगर किसी महिला की लज्जा भंग करने के लिए उस पर हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल किया जाए तो इस धारा के तहत मामला आता है. ऐसे मामलों में अपराधी को कम से कम एक साल से 5 साल की सजा और आर्थिक दंड का भी प्रावधान है.

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वहीं धारा 509 के अनुसार अगर कोई शब्द, इशारा, ध्वनि या किसी वस्तु को इस आशय से दिखाया जाए जिस से किसी स्त्री की लज्जा का अनादर होता है या जिस से उस की निजता पर अतिक्रमण होता है तो ऐसी हालत में अपराधी को 3 साल तक जेल या आर्थिक दंड या दोनों ही सजा दी सकती हैं.

गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल भी बनाया गया है जिस में बताया गया है कि औनलाइन कैसे सुरक्षित रह सकते हैं. इस पोर्टल पर बच्चों और महिलाओं के साथ हो रहे साइबर अपराध की शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है.

ऐसा करने से बचें

-सोशल मीडिया पर अपने निजी फोटो डालने से बचें. किसी अनजान से चैटिंग करते हुए निजी बातें न करें. वीडियो भी न शेयर करें.

-सोशल मीडिया पर अपनी प्राइवेसी सैटिंग्स को पब्लिक न करें. सैटिंग्स ऐसी ही रखें कि आप के जानपहचान वाले ही आप के फोटो आदि देख सकें.

-सोशल मीडिया पर किसी अनजान को न जोड़ें. एकदम से भरोसा तो कतई न करें. अगर वह कहीं बाहर मिलने के लिए बुलाता है तो सावधान हो जाएं.

-अगर आप किसी समस्या में फंस भी जाएं तो घबराएं नहीं, बल्कि पुलिस को इस की जानकारी दें.

याद रखिए, तकनीक का यह तीखापन कानून और आप की जागरूकता व हिम्मत से ही कुंद किया जा सकता है, इसलिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हुए हमेशा जागरूक रहें.

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मेरी पत्नी के घरवालों ने मुझ पर नाबालिग लड़की को अगवा करने का केस दर्ज करा दिया है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं एक मुसलिम लड़का हूं. 4 साल पहले मैं ने अपने ही गांव की एक 15 साल की हिंदू लड़की से शादी की थी. हमारा 2 साल का एक बेटा है. लड़की के मांबाप हमें तंग करते हैं. उन्होंने मुझ पर नाबालिग लड़की को अगवा करने का केस दर्ज करा दिया है. मैं क्या करूं?

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जवाब-

बहुत खूब. आप ने पहले तो 15 साल की लड़की से शादी कर ली और कम उम्र में ही उस की गोद भी भर दी, कानूनन यह गुनाह है. अब खामोशी से रहें या फिर कहीं और जा कर बस जाएं. लड़की चूंकि नाबालिग है, इसलिए आप कमजोर पड़ रहे हैं. कानूनन नाबालिग लड़की की मरजी के कोई माने नहीं होते हैं, फिर भी आप को?थोड़ीबहुत राहत मिल सकती है. इस के लिए आप अपने इलाके के किसी नामी वकील से मशवरा लें.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Crime Story: लालच में पार की सारी हदें- भाग 3

लेखक- विजय पांडेय/श्वेता पांडेय

सौजन्य-  मनोहर कहानियां

नेहा के साथ दाल न गलने पर आनंद और अजय परेशान हो गए. तब उन के मन में खयाल आया कि जब नेहा नहीं फंस रही तो क्यों न तरुण को अपने जाल में फंसा कर इस संपत्ति को बेचने के लिए मजबूर किया जाए.

तरुण अपने दोनों बहनोइयों की चाल में फंस गया. उन के बहकावे में आ कर वह अपनी प्रौपर्टी का सौदा करने को तैयार हो गया. इस के बाद अजय राय, आनंद राय और तरुण तीनों की आपस में खूब पटने लगी तो नेहा समझ गई कि उन्होंने तरुण को अपने जाल में फंसा लिया है. लिहाजा वह उन पर नजर रखने लगी.

एक दिन कमरे में बैठे तीनों जब संपत्ति  को बेचने के बारे में बातें कर रहे थे, तब नेहा परदे की ओट में उन की बातें सुन रही थी. नेहा को लगा कि यदि अब वह खामोश रही तो सारी संपत्ति हाथ से निकल जाएगी. वह उसी समय दरवाजे की ओट से निकल कर ड्राइंगरूम में पहुंच गई. उन तीनों के सामने अचानक नेहा के पहुंचते ही ड्राइंगरूम में सन्नाटा छा गया.

नेहा को देखते ही अजय राय ने तुरंत टौपिक बदल दिया, लेकिन उन तीनों के चेहरों पर जो हवाइयां उड़ रही थीं, उस से नेहा समझ गई. फिर भी अनजान बनते हुए वह बोली, ‘‘आप तीनों के चेहरों पर हवाइयां कैसे उड़ रही हैं. आजकल तरुण से आप लोगों की बहुत ज्यादा पट रही है, आखिर इस की वजह क्या है?’’

‘‘ऐसी कोई बात नहीं है. दरअसल, काफी दिनों बाद साले साहब से रूबरू हुए तो घुलमिल कर बातें कर रहे थे.’’ आनंद राय बोला.

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‘‘लेकिन मुझे तो बात कुछ और ही नजर आ रही है. मेरे आने से पहले आप लोग प्रौपर्टी बेचने के बारे में कुछ बातें कर रहे थे,’’ नेहा कहा, ‘‘यदि मेरी बात गलत हो तो आप लोग बता दीजिए.’’

नेहा की बात सुन कर तीनों समझ गए कि उसे पूरी बात पता चल गई है. इसलिए वह हक्केबक्के हो कर एकदूसरे की तरफ देखने लगे. तभी अजय बोला, ‘‘दरअसल नेहा, जब तुम पूछ रही हो तो बताए देता हूं कि हमें बड़ी मुश्किल से इस बंगले का खरीदार मिला है, जो बंगले की अच्छी कीमत देने को तैयार है.

‘‘बारबार हमें ऐसा मौका नहीं मिलेगा. समझदारी इसी में है कि हम इसे बेच दें. हम लोग सोच रहे हैं कि इस बंगले को बेच कर जो रकम मिलेगी, उस से हम जमीन खरीद कर उस पर आलीशान फ्लैट्स बना कर

उन्हें बेच देंगे. इस से हमें करोड़ों रुपए का फायदा होगा.’’

‘‘जीजाजी, नेक सलाह के लिए हम आप के शुक्रगुजार हैं. लेकिन एक सलाह मेरी भी है कि आप दोनों जो स्कीम बता रहे हैं, उस की जगह अपनीअपनी संपत्ति बेच कर खुद कर लें. आप को लाखोंकरोड़ों का फायदा मिल जाएगा.’’ नेहा ने दोनों ननदोइयों से कहा.

‘‘देखो दामाद होने के नाते मैं आप दोनों का बड़ा सम्मान करती हूं लेकिन भविष्य में इस तरह की स्कीम और संपत्ति खरीदनेबेचने की बातें यहां कहने मत आना. आप मेरे पति को भी अपनी बातों में ले कर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं.’’ नेहा ने कहा और अपने पति से वहां से उठने का इशारा किया.

नेहा की बात सुन कर आनंद राय और अजय के चेहरे सुर्ख हो गए. इस से उन्हें अपमान महसूस हुआ. उस समय रात हो गई थी. उन्होंने दीवार घड़ी की ओर देखा फिर दोनों भाई बंगले से बाहर निकल गए. तरुण या नेहा ने उन दोनों को रोकने की कोशिश नहीं की.

घर पहुंच कर दोनों भाइयों ने इस की शिकायत अपनीअपनी पत्नियों से की कि उन की भाभी नेहा ने किस तरह से उन का अनादर किया है. दोनों बहनों ने इस की शिकायत नेहा भाभी से की. जवाब में नेहा ने ननदों को पूरी बात बता दी.

पर इतनी बेइज्जती होने के बाद भी अजय राय और आनंद राय ने तरुण के बंगले पर जाना बंद नहीं किया. सपत्ति का विवाद दिन प्रतिदिन बढ़ता गया. लालच में अंधे हो कर वे अपमान की गठरी सिर पर लिए घूमते रहे. जब बात नहीं बनी तो दोनों भाइयों ने एक दिन यहां तक कह दिया कि पिता की संपत्ति में बेटियों का भी हक होता है

इस पर नेहा बोली, ‘‘मैं कब मना कर रही हूं कि संपत्ति में बेटियों का हक नहीं होता, लेकिन जो संपत्ति ससुर की है वह उसी में से हिस्सा ले सकती हैं. पर तुम तो सास और बुआ की संपत्ति पर अपनी नजरें गड़ाए बैठे हो. यह बात सरासर गलत है. ऐसा मैं हरगिज नहीं होने दूंगी. बताओ, कानून की कौन सी किताब में यह बात लिखी है कि बुआ की संपत्ति पर दामादों का हिस्सा बनता है.

‘‘जब कुन्नीबाई बुआ ने अपनी मरजी से 17 एकड़ भूमि का मुख्तियार तरुण को बनाया है तो आप लोगों को क्यों जलन हो रही है. आप को हिस्सा लेना ही था तो ससुर के सामने मांग लेते. उस समय तो आप लोग नहीं बोले. अब वह नहीं हैं तो उन की संपत्ति पर नजरें गड़ाए हुए हो.’’

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नेहा अपने दोनों ननदोइयों को इसी तरह बेइज्जत कर दिया करती थी. जिस से दोनों भाई नेहा से नफरत करने लगे थे. लालच में अंधा हुआ इंसान विवेकशून्य हो जाता है. दोनों भाइयों डा. आनंद राय और इंजीनियर अजय राय का भी यही हाल था. कोई रास्ता नहीं मिला तो अपनी मंशा पूरी करने के लिए उन्होंने एक आपराधिक योजना तैयार कर ली.

उन्होंने सोचा कि क्यों न तरुण को ही रास्ते से हटा दिया जाए. लेकिन इस योजना पर उन्होंने विराम लगा दिया.

इस की वजह यह थी कि तरुण की पत्नी नेहा साधनसंपन्न और दबंग परिवार से थी. उन्होंने सोचा कि तरुण के साथ कुछ भी किया तो वह उन्हें जीने नहीं देगी. वह कोई दूसरी योजना बनाने लगे.

नेहा ने अपने पति तरुण को भी समझा दिया था कि दोनों बहनोई लालची प्रवृत्ति के हैं. वे लालच में कुछ अहित भी कर सकते हैं. तरुण पत्नी की बात अच्छी तरह समझ गया था. लिहाजा उस ने अपनी बहनोइयों की बातों पर तवज्जो देनी बंद कर दी. जब कभी नेहा के ननदोई प्रौपर्टी को ले कर तरुण से बात करते तो नेहा खुद ही बीच में आ जाती और पति के बोलने से पहले ननदोइयों की बात काट देती थी. वह उन लोगों की निगाह में पति को अच्छा इंसान बनाना चाहती थी.

आनंद और अजय का लालच विकराल होता गया. नेहा उन के रास्ते का पत्थर बन गई थी. इस पत्थर को हटाए बिना उन्हें अपनी चाहत पूरी होती दिखाई नहीं दे रही थी.

नेहा को रास्ते से हटाने के लिए ये लोग उचित अवसर की तलाश में रहने लगे. सोचविचार कर दोनों भाइयों ने एक खौफनाक साजिश रच डाली. इस साजिश में उन्होंने अपने भतीजे दीपक सायतोडे को भी शामिल कर लिया.

योजना को दिया अंजाम

आखिरकार 30 जनवरी, 2021 को उन्हें सही मौका मिल गया. इस के लिए उन्होंने कुछ दिनों तक रेकी भी की. जब उन लोगों को पता चला कि तरुण अपने गांव गया है और उस का छोटा भाई इंद्रजीत भी घर पर नहीं है, तो  मौका पा कर आनंद और अजय दीपक को ले कर खम्हारडी स्थित उन के बंगले पर पहुंच गए.

उस समय रात के करीब साढ़े 9 बजे थे. तीनों बेरोकटोक बंगले के मुख्य दरवाजे पर पहुंच गए. उस वक्त नेहा अपनी 9 साल की बेटी अनन्या उर्फ पीहू के साथ खेल रही थी. घंटी बजी तो अनन्या बोली, ‘‘देखो मम्मी, लगता है पापा आ गए हैं.’’

नेहा दरवाजा खोलने के लिए चली, तभी दोबारा घंटी बजी तो नेहा बोली, ‘‘रुको, आ रही हूं.’’

नेहा ने जैसे ही दरवाजा खोला. दोनों ननदोई और एक अपरिचित व्यक्ति सामने खड़े थे. उन्हें देखते ही वह बोली, ‘‘इस वक्त, खैरियत तो हैं?’’

‘‘हां, सब ठीक हैं. क्या हमें अंदर आने को नहीं कहोगी,’’ आनंद बोला.

नेहा एक तरफ होती हुई बोली, ‘‘आइए.’’

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अगले भाग में पढ़ें- बेटी की जान बचाने के लिए नेहा भिड़ गई

Crime Story: लालच में पार की सारी हदें- भाग 1

लेखक- विजय पांडेय/श्वेता पांडेय

सौजन्य-  मनोहर कहानियां

करीब 10 साल पहले नेहा की शादी छत्तीसगढ़ के पूर्व वन मंत्री डी.पी. घृतलहरे के बेटे तरुण के साथ हुई थी. 30 जनवरी, 2021 को रात करीब साढ़े 9 बजे आकाश ने बहन नेहा को फोन लगाया. नेहा के फोन की घंटी तो बज रही थी, लेकिन वह काल रिसीव नहीं कर रही थी.

आकाश ने कई बार ट्राई किया, लेकिन उस के फोन की घंटी तो बजती रही, लेकिन नेहा ने फोन रिसीव नहीं किया. आकाश परेशान हो गया कि पता नहीं नेहा इस समय कहां है जो फोन नहीं उठा रही. तब आकाश ने अपने बहनोई तरुण को फोन मिलाया.

तरुण ने आकाश को बताया कि वह तो अपने गांव आया है और उस का छोटा भाई इंद्रजीत कहीं बाहर गया हुआ है. घर पर इस समय नेहा और अनन्या ही हैं. 9 वर्षीय अनन्या उर्फ पिहू नेहा की बेटी थी.

आकाश ने सोचा कि जब नेहा घर पर है तो वह फोन क्यों नहीं उठा रही. आकाश ने कोई एकदो बार नहीं बल्कि कई बार फोन किया था पर उस के फोन की घंटी तो बज रही थी लेकिन वह फोन उठा नहीं रही थी. यह बात उस ने अपने घर वालों को बताई तो घर के सभी लोग परेशान हो गए.

आकाश का घर रायपुर जिले के खरोड़ा गांव में था, जबकि उस की बहन की ससुराल रायपुर के ही खम्हारडी कस्बे में थी. खम्हारडी उस के घर से कोई 40 किलोमीटर दूर था.

आकाश ने तय किया कि वह अभी नेहा की ससुराल जाएगा. वह अपनी छोटी बहन को कार में बिठा कर खम्हारडी के लिए रवाना हो गया. करीब एक घंटे में वह नेहा की ससुराल पहुंच गया.

नेहा ऊंचा राजनीतिक रसूख वाले परिवार में ब्याही थी, उन का वहां आलीशान बंगला था. आकाश जब बंगले पर पहुंचा तो मेनगेट का ताला बंद था. उस ने मन ही मन सोचा कि बंगले के गेट का ताला क्यों बंद है, उस ने बंगले के बाहर से नेहा के फोन पर फिर से काल की. अब भी उस के फोन की घंटी बज रही थी लेकिन उस ने काल रिसीव नहीं की.

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आकाश को उस के बहनोई तरुण ने बता दिया था कि बंगले पर केवल नेहा और अनन्या ही हैं. लेकिन गेट पर लगे ताले से लग रहा था कि बंगले में कोई नहीं है. आकाश ने आसपास रहने वाले लोगों से मालूम किया कि नेहा कहीं गई हुई है क्या? लेकिन पड़ोसियों ने अनभिज्ञता जाहिर की.

आकाश ने उन्हें बताया कि वह साढ़े 9 बजे से नेहा को फोन लगा रहा है, फोन की घंटी तो जा रही है पर वह फोन रिसीव नहीं कर रही. पता नहीं इस समय वह कहां है.

पड़ोसियों ने भी बताया कि नेहा इस तरह बंगले से अकेली कभी नहीं जाती. जब वह फोन नहीं उठा रही तो जरूर कुछ न कुछ गड़बड़ है.

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कुछ ही देर में बंगले के बाहर तमाम लोग जमा हो गए. आकाश को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. तभी कुछ लोगों ने सलाह दी कि क्यों न गेट का ताला तोड़ कर बंगले के अंदर देखा जाए. तब आकाश ने लोगों के सहयोग से बंगले के मेनगेट का ताला तोड़ दिया.

लोगों के साथ जब वह बंगले में पहुंचा तो उसे नेहा के बैडरूम का भी ताला बंद मिला. यह देख कर वह आश्चर्यचकित रह गया कि बंगले के बाकी सब कमरे खुले हुए हैं तो नेहा के कमरे का ही ताला क्यों बंद है. आकाश ने नेहा के कमरे का ताला भी तोड़ दिया.

ताला तोड़ कर जैसे ही आकाश और अन्य लोग कमरे में घुसे तो वहां पर 2 लोग बैठे हुए मिले. उन में से एक नेहा का ननदोई डा. आनंद राय था. उस के साथ एक और व्यक्ति था. आकाश और अन्य लोग उस व्यक्ति को नहीं जानते थे.

यह बात किसी की समझ में नहीं आई कि 2 तालों में बंद हो कर लोग नेहा के बैडरूम में क्यों बैठे हैं. आकाश और अन्य लोगों को देख कर आनंद राय और उस के साथी के चेहरे का रंग उड़ गया.

आकाश ने जब उन से कमरे में बंद रहने की वजह पूछी तो वे कुछ जवाब नहीं दे पाए, बल्कि वहां से भागने की कोशिश करने लगे. शक होने पर लोगों ने दोनों को पकड़ लिया. उन्हें शक होने लगा कि जरूर कुछ न कुछ गड़बड़ है. उन्होंने कमरे की तलाशी लेनी शुरू कर दी. जब उन्होंने बैड का बौक्स खोला तो बौक्स में नेहा और उस की बेटी अनन्या की लाशें औंधे मुंह पड़ी मिलीं.

दोनों की लाशें देखने के बाद लोग समझ गए कि जरूर दोनों के मर्डर के पीछे इन  का ही हाथ है. लिहाजा लोगों ने उन्हें पकड़ लिया. इसी दौरान किसी ने खम्हारडी थाने में फोन कर के बता दिया कि किसी ने बंगले में पूर्व मंत्री डी.पी. घृतलहरे की बहू और नातिन की हत्या कर दी है.

मामला एक हाईप्रोफाइल परिवार से जुड़ा हुआ था, इसलिए सूचना पाते ही थानाप्रभारी ममता शर्मा हैडकांस्टेबल वेदव्यास दीवान, बच्चन सिंह ठाकुर, टीकम सिंह आदि को साथ ले कर घटनास्थल की तरफ रवाना हो गईं. थाने से घटनास्थल करीब एक किलोमीटर दूर था इसलिए वह कुछ देर में ही वहां पहुंच गईं.

इस दोहरे हत्याकांड की जानकारी उन्होंने  एसपी अजय यादव को भी दे दी. थानाप्रभारी जब मौके पर पहुंचीं तो देखा कि कुछ लोग 2 लोगों को पकड़े हुए थे और नेहा व उस की बेटी की लाश बैड के बौक्स में पड़ी थीं.  लोगों ने पुलिस को बताया कि जब उन्होंने इस कमरे का ताला तोड़ा था तो ये दोनों इन लाशों के पास ही बैठे मिले थे. ये ही इन के कातिल हैं.

पति भी संदेह के दायरे में

पुलिस को पूछताछ में पता चला कि उन दोनों में से एक मृतका का सगा ननदोई डा. आनंद राय है. इस के बाद पुलिस के सामने ही लोग उन दोनों की पिटाई करने लगे. लोगों में आक्रोश भरा हुआ था. गुस्से में लोग कहीं दोनों को मार न डालें, इसलिए थानाप्रभारी ने बड़ी मुश्किल से उन्हें भीड़ के चंगुल से छुड़ा कर अपने कब्जे में लिया और उन्हें तुरंत थाने भिजवा दिया.

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कुछ ही देर में फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट, पुलिस फोटोग्राफर और एसपी अजय यादव भी वहां पहुंच गए. आक्रोशित लोगों को एसपी साहब ने समझाया. मौकामुआयना करने से यह स्पष्ट पता चल रहा था कि मृत्यु से पहले नेहा ने अपने बचाव में जीजान लगा कर संघर्ष किया था. क्योंकि उस के चेहरे व शरीर पर खरोंचों के निशान थे. फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट ने मौके से सुबूत जुटाए. पुलिस अधिकारियों ने भी मौके का बारीकी से मुआयना किया.

पुलिस अधिकारियों ने वहां मौजूद आकाश से बात की तो उस ने बताया कि जब वह यहां आया तो बंगले के बाहर वाले गेट पर ताला लगा हुआ था. जब वह ताला तोड़ कर अंदर आया तो नेहा के बैडरूम का ताला भी बाहर से बंद था. कमरे का ताला तोड़ा तो कमरे में  नेहा का ननदोई डा. आनंद राय और उस के साथ एक अन्य व्यक्ति बैठा हुआ मिला. उसे शक है कि बहन और भांजी की हत्या में इन दोनों का हाथ है.

अगले भाग में पढ़ें- इंजीनियर अजय राय को पुलिस गिरफ्तार कर ली

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