Crime Story: लालच में पार की सारी हदें- भाग 2

लेखक- विजय पांडेय/श्वेता पांडेय

सौजन्य-  मनोहर कहानियां

उस समय मृतका नेहा का पति तरुण घर पर नहीं था, इसलिए पुलिस को इस बात का शक था कि कहीं पत्नी की हत्या में उस का हाथ तो नहीं है. आकाश इस दोहरे हत्याकांड की जानकारी अपने बहनोई तरुण को फोन द्वारा दे चुका था. वह थोड़ी देर में घर आ गया.

जब तरुण को पता चला कि नेहा की लाश के पास आनंद राय और एक अन्य व्यक्ति बैठा मिला था, तो उसे भी विश्वास हो गया कि उस की पत्नी और बेटी की हत्या जरूर आनंद राय ने ही की होगी. यह शक उस ने पुलिस के सामने जाहिर भी कर दिया.

तरुण भले ही पत्नी की हत्या का आरोप अपने बहनोई आनंद राय पर लगा रहा था, लेकिन पुलिस की नजरों में तरुण भी संदिग्ध था. इसलिए एसपी अजय यादव ने थानाप्रभारी को आदेश दिया कि वह है तरुण पर नजर रखें, वह फरार न होने पाए.

पूर्व वन मंत्री की बहू और नातिन की हत्या की खबर थोड़ी ही देर में रायपुर शहर में फैल गई. लोग तरुण के बंगले के बाहर पहुंच गए. ऐहतियात के तौर पर पुलिस ने वहां भारी सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम कर दिया.

दोनों लाशों के गले पर पड़े निशानों को देख कर लग रहा था कि दोनों की हत्या गला घोंट कर की गई है. हत्या किस ने और क्यों की, यह बात तो जांच के बाद ही पता चल सकती थी.

मौके की जरूरी काररवाई पूरी कर के पुलिस ने दोनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दीं. इस के बाद पुलिस पूछताछ के लिए उन दोनों व्यक्तियों सहित मृतका के पति तरुण को भी अपने साथ थाने ले गई.

पुलिस ने लोगों के चंगुल से छुड़ा कर जिन 2 लोगों को कस्टडी में लिया था, उन में से एक मृतका का ननदोई डा. आनंद राय था जबकि दूसरा युवक आनंद राय का भतीजा दीपक सायतोडे था.

तलाश अजय राय की

इन दोनों से पुलिस ने नेहा और उस की बेटी की हत्या के बारे में पूछताछ की तो दोनों खुद को बेकसूर बताते रहे, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे उन्होंने स्वीकार कर लिया कि उन दोनों की हत्या उन्होंने नहीं बल्कि अजय राय ने की है.

अजय राय तरुण का दूसरा बहनोई था, आनंद राय का सगा भाई. पेशे से वह इंजीनियर था. पुलिस ने जब उसे तलाशा तो अजय घर पर नहीं मिला.

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एसपी अजय यादव के निर्देशन में पुलिस टीमें अपनेअपने स्तर से उसे तलाशने में जुट गईं. डा. आनंद राय और दीपक सायतोडे  पूछताछ में पुलिस को बारबार यही बयान देते रहे कि वह तो अजय राय के कहने पर साथ आए थे. इन दोनों की हत्या तो इंजीनियर अजय राय ने की है.

पुलिस को लग रहा था कि वे दोनों अभी भी झूठ बोल रहे हैं. उन से विस्तार से पूछताछ के लिए पुलिस ने दोनों को पहली फरवरी, 2021 को कोर्ट में पेश कर के 5 दिन के लिए पुलिस रिमांड पर ले लिया.

उधर पुलिस की कई टीमें फरार इंजीनियर अजय राय की तलाश में जुटी हुई थीं.  सर्विलांस टीम भी अपने स्तर से जांच कर रही थी. इसी बीच जांच टीम को पता चला कि अजय ने उत्तर प्रदेश के शहर प्रयागराज से पहले बाईपास के नजदीक अपना मोबाइल फोन औन किया था. इसी क्लू के आधार पर क्राइम ब्रांच की एक टीम रायपुर से प्रयागराज पहुंच गई.

जिस जगह पर अजय के फोन की लोकेशन मिली थी, वहां हाइवे पर एक पंक्चर वाले की दुकान थी. पुलिस ने उसे अजय का फोटो दिखा कर उस से पूछताछ की.

फोटो देखते ही पंक्चर वाला पहचान गया. क्योंकि 1-2 दिन पहले उसी शक्ल के एक व्यक्ति ने उस के फोन से किसी को फोन किया था. इस से रायपुर पुलिस को जांच में सफलता के कुछ आसार दिखाई देने लगे. पंक्चर वाले ने अपने मोबाइल में देख कर पुलिस को वह नंबर बता दिया, जिस पर उस ने बात की थी. पुलिस ने जांच की तो वह नंबर उत्तर प्रदेश के जिला अयोध्या स्थित सुलतानगंज के रहने वाले शिवप्रकाश का निकला.

पुलिस टीम वहां से अयोध्या की तरफ रवाना हो गई. स्थानीय पुलिस के सहयोग से रायपुर पुलिस अयोध्या के सुलतानगंज में रहने वाले शिवप्रकाश के घर पहुंच गई. वहां से पुलिस ने अजय राय को गिरफ्तार कर लिया.

पता चला कि शिवप्रकाश अजय राय का गहरा दोस्त था. शिवप्रकाश आपराधिक प्रवृत्ति का था. कुछ दिनों पहले ही वह गांजे की तसकरी में जेल की सजा काट कर घर आया था. शिवप्रकाश घर पर नहीं मिला. यह बात 4 फरवरी, 2021 की है.

इंजीनियर अजय राय को गिरफ्तार कर पुलिस रायपुर लौट आई. वहां उस ने अपने भाई डा. आनंद राय और भतीजे दीपक को पुलिस हिरासत में देखा तो समझ गया कि दोनों ने पुलिस को सब कुछ बता दिया होगा. पुलिस ने जब अजय राय से नेहा और उस की बेटी अनन्या की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने हत्या का आरोप अपने भाई आनंद व भतीजे दीपक पर लगाया.

कुछ देर तक वे एकदूसरे पर हत्या का आरोप मढ़ते रहे. लेकिन जब उन के साथ थोड़ी सख्ती बरती गई तो सभी सच बोलने लगे. पता चला कि इन तीनों ने ही सुनियोजित योजना के तहत नेहा और उस की बेटी की हत्याएं की थीं. उन तीनों से पूछताछ के बाद इस दोहरे हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली थी—

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले का कस्बा खम्हारडी. इसी कस्बे के सतनाम चौक के पास एक बड़े राजनीतिज्ञ डी.पी. घृतलहरे का बंगला है. डी.पी. घृतलहरे छत्तीसगढ़ सरकार में वन मंत्री थे. वह जानीमानी शख्सियत थे. उन की 2 बीवियां थीं. पहली पत्नी वसंता से एक बेटी थी शशिप्रभा और दूसरी पत्नी प्रभादेवी से 4 बच्चे थे. जिन में 2 बेटियां थीं और 2 बेटे तरुण व इंद्रजीत.

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दोनों बेटियों की वह शादी कर चुके थे. एक बेटी की शादी उन्होंने शहर के ही जानेमाने डाक्टर आनंद राय से की थी और दूसरी बेटी की शादी उन्होंने आनंद राय के भाई अजय राय के साथ की थी.

अजय राय इंजीनियर था. दोनों बेटियां संपन्न परिवार में ब्याही थीं, इसलिए दोनों ही खुश थीं. बेटा तरुण शादी के योग्य हुआ तो उन्होंने उस की शादी जिले के ही खरोरागांव की रहने वाली नेहा से कर दी.

नेहा भी एक संपन्न परिवार से थी. उस के पिता जमींदार थे. नेहा उच्चशिक्षित और समझदार थी. ससुराल आते ही उस ने घर की सारी जिम्मेदारियां संभाल ली थीं.

डी.पी. घृतलहरे के दोनों दामाद उच्चशिक्षित और संपन्न जरूर थे, लेकिन वे लालची प्रवृत्ति के थे. किसी न किसी बहाने वे ससुराल से पैसे या अन्य महंगा सामान ऐंठते रहते थे. मंत्रीजी के पास अकूत संपत्ति थी इसलिए दोनों दामादों की नजर उन की संपत्ति पर लगी रहती थी.

इसी दौरान 19 अप्रैल, 2020 को डी.पी. घृतलहरे का देहांत हो गया. उन की मौत के बाद घर के सभी लोग तो दुखी थे ही, लेकिन सब से ज्यादा परेशान तरुण की बुआ कुन्नीबाई थीं. इस की वजह यह थी कि तरुण के दोनों बहनोइयों की गिद्धदृष्टि उन की संपत्ति पर थी.

कुन्नीबाई को यह आशंका लगी रहती थी कि दोनों दामाद भाई की जुटाई संपत्ति को नोचखसोट न लें. कुन्नीबाई के पास खेती की करीब 17 एकड़ जमीन थी. उन्होंने इस संपत्ति का मुख्तियार तरुण को बना दिया था.

तरुण की पत्नी नेहा अपनी दोनों ननदों और ननदोइयों की बहुत सेवा करती थी. जितना उस से बन पड़ता, वह  उन्हें गिफ्ट आदि दिया  करती थी. लेकिन वे लोग उस के द्वारा दिए गए सामान से कभी खुश नहीं होते थे.

लालची जीजाओं का जाल

डा. आनंद राय और इंजीनियर अजय राय इस की चर्चा अकसर अपनी पत्नियों से करते थे. दोनों उलाहना देते हुए कहा करते थे कि तुम्हारे पिता के घर में इतना सब कुछ होने के बावजूद तुम्हारे भाई और भाभी हम लोगों के बारे में तनिक भी नहीं सोचते.

यह तो सभी जानते हैं कि पिता की संपत्ति में बेटियों का भी अधिकार होता है. फिर तुम्हारे साथ यह दोहरा बरताव क्यों होता है.

दोनों बहनें भी समझती थीं कि उन के पति जो कह रहे हैं वह बिलकुल सही है. एक तरह से वे अपनेअपने पतियों को मूक समर्थन देती थीं. संपत्ति को ले कर आनंद राय और अजय राय के मन में लालच ने अपना घर बना लिया था.

नेहा अपने दोनों ननदोई की लालची नीयत से वाकिफ थी. अजय और आनंद ने कई बार नेहा को अपनी बातों के जाल में फंसाने की कोशिश की, लेकिन नेहा उन की बातों में नहीं आई. वह अपनी बुआ कुन्नीबाई को सारी बात बता देती थी. नेहा ने तय कर लिया था कि वह अपने ननदोइयों को संपत्ति हड़पने की चाल में नहीं फंसेगी.

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अगले भाग में पढ़ें- नेहा की बात सुन कर आनंद राय और अजय के चेहरे क्यों सुर्ख हो गए

Women’s Day- नपुंसक: भाग 3

डबडबाई आंखों से छत की ओर देखते हुए उस ने पुन: कहना शुरू किया, ‘‘आरुषी, मैं एक नपुंसक पुरुष हूं और संतान पैदा करने में अक्षम हूं…मुझे माफ कर दो आरुषी, मैं तुम्हारा अपराधी हूं. मैं जानता था कि तुम मुझ से प्यार करने लगी हो और यह बात मुझे पहले ही बता देनी चाहिए थी पर मैं डर रहा था कि तुम मुझे छोड़ कर चली जाओगी. वैसे तुम अभी भी जा सकती हो. मैं अपने दिल को समझा लूंगा.’’

यह सुन कर आरुषी की आंखें फटी की फटी रह गईं. उस के कानों में मानो पिघला सीसा डाल दिया गया हो. जीवन का आधा हिस्सा तो दुख, कलह, क्लेश में बीत गया. दामन में कष्टों के अलावा कुछ था ही नहीं. जिस का बाप चरित्रहीन हो उस की औलाद के आंचल में सिवा धूप के थपेड़ों के कुछ नहीं होता.

उम्र के जिन हसीन पलों को एक आम लड़की सहेज कर रखती है, आरुषी उन पलों को अपने जीवन से हटा देना चाहती थी, क्योंकि उन पलों ने उसे आंसू और दमघोंटू वातावरण दिया था. आज तो उस के जीवन में बहार की पहली दस्तक हुई थी. द्वार के खुलते ही अनिरुद्ध की इस बात ने उसे अंदर से पूर्ण रूप से तोड़ दिया.

‘‘आरुषी, मैं तुम्हें सोचने के लिए समय देता हूं. सुबह मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूंगा. अपने दिल पर हमदर्दी को बढ़ावा मत देना. हमदर्दी में बढ़ाया कदम, जीवन में पछतावे को बुलावा देता है. फैसला सोचसमझ कर करना.’’

भारी कदमों से दोनों ने रेस्टोेरेंट से बाहर की ओर कदम बढ़ाए. उसे घर छोड़ कर अनिरुद्ध अपनी मंजिल की ओर बढ़ गया.

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घर पहुंच कर आरुषी बिना कपड़े बदले ही बिस्तर पर पड़ गई. उस के दिमाग में अनिरुद्ध की कही बातें हथौड़े की चोट कर रही थीं.

आरुषी के कमरे की लाइट जलती देख कर अर्चना मौसी उस के पास आईं और कहा, ‘‘बहुत देर लगा दी, क्या सारी पेंटिंग्स बिक गईं? बिक ही गई होंगी… सारी की सारी इतनी सुंदर जो थीं. तू चाय पिएगी? बनाऊं?’’

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‘‘नहीं,’’ कहते हुए उस ने करवट बदली. ऐसा रूखा उत्तर सुन अर्चना मौसी उस के करीब गईं, देखा तो उस की आंखें तकिया गीला कर चुकी थीं.

‘‘क्या हुआ? पैसे नहीं मिले?’’ शायद पैसों का मारा व्यक्ति हर बात पैसों से ही तौलता है.

‘‘नहीं, मौसी, बात पैसों की नहीं है,’’ उस ने मौसी की तरफ मुंह कर के कहा.

‘‘फिर क्या हुआ?’’

‘‘मौसी, अनिरुद्ध…’’ वह इतना ही कह पाई थी कि उस का गला एकदम अवरुद्ध हो गया और जोर से हिचकी आई. मौसी ने उसे गले लगा लिया तो वह फूटफूट कर रोने लगी.

रोतेरोते उस ने अपनी मौसी को सारा हाल बता दिया. मौसी सुन कर सन्न रह गईं. वह समझ नहीं पा रही थीं कि क्या कह कर वह बेटी को समझाएं. अचानक आरुषी उठी और अपने पर्स में मोबाइल टटोलने लगी. अर्चना मौसी ने उस से पर्स ले लिया, और बोलीं, ‘‘क्या कर रही है?’’

‘‘अनिरुद्ध को मना कर रही हूं.’’

‘‘रुक,’’ अर्चना मौसी ने उस का पर्स अपने हाथ में लेते हुए कहा, ‘‘ठंडे दिमाग से काम ले.’’

कुछ क्षण दोनों चुप रहीं. उस के बाद मौसी ने चुप्पी तोड़ी. बोलीं, ‘‘तेरी नजर में वह नपुंसक पुरुष है, पर मैं उसे महापुरुष का दर्जा देती हूं. उस के विचार उसे महापुरुष बनाते हैं. जरा सोच, अगर यह बात तुझे शादी के बाद पता चलती तो तेरा क्या होता. वह तुझे धोखा नहीं दे रहा. अपने पिता के बारे में सोच कि उन्होंने तुझे दिया ही क्या है, सिवा आंसू और समाज की तिरस्कृत नजरों के. तू आज तक अपने पिता की करनी को भुगत रही है. नपुंसक तो तेरा बाप है, अनिरु द्ध नहीं.

‘‘आज तेरे पास पैसा है, शोहरत है और यह सबकुछ उस अनिरुद्ध की वजह से ही है न. उस ने तेरी कहांकहां मदद नहीं की. तुझे कहां से कहां पहुंचा दिया. अब तक तो इन गलियों में आंसू बहाती, छिपती हुई सी रहती थी पर अब मुझे लगता है उजला सवेरा तेरा इंतजार कर रहा है.’’

‘‘लेकिन मौसी…’’

अर्चना ने आरुषी को बात पूरी करने से पहले ही रोक दिया और बोली, ‘‘जिंदगी को तन्हा गुजारना कितना मुश्किल है. यह तो तू जानती ही है, हम ने कैसे दिन गुजारे हैं, सुख और खुशियां तो हमें छू कर भी नहीं गुजरीं. हो सकता है तेरी बाकी जिंदगी सुखद पलों से भरी हो, खुशियां हाथ फैलाए तेरा इंतजार कर रही हों. केवल एक सुख के पीछे तू जिंदगी की तमाम खुशियां क्या दांव पर लगा देगी.’’

आरुषी की आंखों से आंसू बह रहे थे, वह चुपचाप अर्चना मौसी की बातें सुन रही थी. उन की बातें आरुषी पर सकारात्मक प्रभाव डाल रही थीं. मौसी ने उस से कहा कि वह अनिरुद्ध को अभी फोन करे.

‘‘मौसी, वह सो गया होगा,’’ आरुषी ने शंका जाहिर की.

‘‘आज की रात उसे नींद नहीं आएगी. वह सारी रात आंखों में ही काट देगा. शायद  तू भी नहीं सो पाएगी, हां, अगर फोन कर लेगी तो शायद तुम दोनों ही चैन की नींद सो सको.’’

आरुषी ने अपने आंसू पोंछे और फोन मिलाया. घंटी बजते ही अनिरुद्ध ने फोन अपने कान से लगाया और आवाज आई, ‘‘आरुषी, मैं अनिरुद्ध बोल रहा हूं और मुझे मेरा जवाब मिल गया. मैं तुम्हारा एहसान जिंदगी भर नहीं भूल सकता. तुम मेरे अधूरेपन की परिपूर्णता हो.’’

अनिरुद्ध से फोन पर हुआ वार्त्तालाप सुन कर अर्चना मौसी और आरुषी एकदूसरे के गले से लिपट गईं.

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Rani Chatterjee ने गली के नुक्कड़ पर क्रिकेट खेलते हुए शेयर किया Video तो फैंस ने की मिताली राज से तुलना

भोजपुरी फिल्मों की मशहूर एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) बीते दिनों  गोवा वेकेशन पर गई थीं. उन्होंने इस वेकेशन से जुड़ी कई फोटोज अपने सोशल मीडिया पर फैंस के साथ शेयर किया था.

हालांकि अब वह वेकेशन से वापस आ चुकी हैं. तो अब एक्ट्रेस का एक वीडियो काफी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है तो आइए जानते हैं रानी का वीडियो सोशल मीडिया पर इतना वायरल क्यों हो रहा है.

 

दरअसल इस वीडियो में रानी चटर्जी गली की नुक्कड़ पर क्रिकेट खेलती नजर आ रही हैं. रानी चटर्जी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है कि गली बॉय नुक्कड़ के क्रिकेटर के साथ, नुक्कड़ की खिलाड़ी रानी चटर्जी.

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है. फैंस भी उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स ने तो ने एक्ट्रेस का स्टाइल को देखते हुए उनकी तुलना टेस्ट और वन डे भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज (Mithali Raj) से कर दी है.

 

वर्कफ्रंट की बात करे तो रानी चटर्जी फिल्म ‘लेडी सिंघम’ में नजर आने वाली हैं. इस फिल्म में रानी चटर्जी के साथ लीड रोल में बॉलीवुड एक्टर शक्ति कपूर भी दिखाई देंगे. इसके अलावा रानी चटर्जी फिल्म ‘छोटकी ठकुराइन’ में भी नजर आने वाली हैं.

रोजगार: अटकी भर्तियां, दांव पर करियर

1. आरएएस भर्ती. पद : 980.

कोर्ट में मामला और वजह : विभागीय मंत्रालयिक कर्मचारी व भूतपूर्व सैनिक कोटे में अपात्र अभ्यर्थी बुलाए. 3 गुना के बजाय डेढ़ गुना अभ्यर्थी बुलाए.

2. पुलिस कांस्टेबल. पद : 5,438.

कोर्ट में मामला और वजह : जिला स्तर की जगह राज्य स्तर पर मैरिट बना दी.

3. स्टेनोग्राफर. पद : 1,085.

कारण : 2018 की भरती, टाइप टैस्ट, सर्वर डाउन का विवाद.

4. प्रीप्राइमरी टीचर, 2018. पद : 1310.

कोर्ट में मामला और वजह : दूसरे राज्यों से एनटीटी की डिगरी पर विवाद.

5. पटवारी भर्ती.

कोर्ट में मामला और वजह : ओबीसी आरक्षण व विवादित आंसरकी मामला.

6. एलडीसी भर्ती, 2018. पद : 11,322.

कोर्ट में मामला और वजह : मैरिट अनुसार संभाग व गृह जिले का आवंटन नहीं. हाईकोर्ट में चुनौती दी गई तो कोर्ट को भरती में दखल देना पड़ा.

7. पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती. कुल पद : 900.

कोर्ट में मामला और वजह : अंक और कटऔफ जारी किए बिना इंटरव्यू के लिए बुलाया.

8. पशुधन सहायक भर्ती.

कोर्ट में मामला और वजह : सवाल व आंसरकी में गड़बड़ी. हाईकोर्ट ने रोक लगाई.

9. हैडमास्टर भर्ती. कुल पद : 1,200. कोर्ट में मामला और वजह : भूतपूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ न देने का मामला विवादित.

पिछले 2 साल में जिस तरह से हर भरती पेपर लीक या कोर्ट के चक्कर में लंबित पड़ी है, उस से साफ है कि सरकार में बैठे अफसर इन भर्तियों को लेकर संवेदनशील नहीं हैं. हर साल लाखों की तादाद में इंटर, ग्रेजुएशन पास करने वाले बच्चे जब किसी सरकारी नौकरी की लिखित परीक्षा दे कर वापस अपने घर तक नहीं पहुंंच पाते हैं, तब तक परीक्षा संबंधी वैबसाइट पर पेपर लीक या परीक्षा स्थगित होने की जानकारी अपलोड कर दी जाती है.

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भरती चाहे स्थगित हो या कोर्ट में जाए, पर इन सभी बातों का नतीजा अभ्यर्थी को ही भुगतना पड़ता है. वह अभ्यर्थी जो सालोंसाल दिनरात मेहनत कर के एक अदद सी नौकरी के सपने देखता है, पर उसे पेपर लीक या स्थगित होने से निराशा ही हाथ लगती है. जिस युवाशक्ति के दम पर हम दुनियाभर में इतराते घूमते हैं, देश की वही युवाशक्ति एक नौकरी के लिए दरदर भटकने को मजबूर है.

5 लाख कर्ज, जमीन गिरवी

हरिराम बताते हैं, “पिताजी ने 5 लाख रुपए कर्ज ले कर कई सरकारी नौकरी के लिए कोचिंग कराई. सोचा था कि मैं घर में बड़ा हूं, नौकरी लग जाएगी तो छोटों को भी रास्ता दिखा सकूंगा, लेकिन सब खत्म हो गया.”

हरिराम नागौर के मेड़तासिटी इलाके के रहने वाले हैं. उन्हें पहले लाइब्रेरियन भरती में नौकरी मिल जाने की पूरी उम्मीद थी, पर पेपर ही आउट हो गया. सरकार ने इम्तिहान रद्द कर दिया. अब जब दोबारा इम्तिहान कराया जा चुका है तो रिजल्ट जारी नहीं किया जा रहा है. भरोसा है कि इस इम्तिहान में पास हो जाएंगे, लेकिन हर दिन उम्मीद धीरेधीरे टूटती जा रही है. कर्ज इतना ज्यादा हो चुका है कि जमीन बेचने के सिवाय अब कोई रास्ता नहीं दिखता.

पति की मौत, बहाली भी अटकी

सुगना दौसा के प्रेमपुरा गांव की रहने वाली हैं. साल 2009 में एनटीटी किया था. साल 2018 में सरकार ने भरती निकाली. चयन भी हो गया. अंतिम परिणामों में भी नाम था. खुशी थी कि 1-2 महीने में नौकरी मिलेगी, लेकिन इंतजार लंबा होता गया.

इसी दौरान सुगना के पति की मौत हो गई. सोचा कि नौकरी होगी तो जिंदगी ठीक से कटेगी. लेकिन सरकार की लापरवाही से नियुक्ति आदेश पर रोक लग गई.

सुगना कहती हैं, “साल 2014 में शादी हो गई थी. साल 2018 में सरकार ने एनटीटी भरती निकली तो नौकरी की आस बंधी थी.”

सुगना का नियुक्ति आदेश इसलिए रुका कि सरकार ने गीता बजाज कालेज को इम्तिहान के बाद दायरे से बाहर कर दिया.

हाईकोर्ट में जीते, अब सुप्रीम कोर्ट में

प्रभु सिंह और उन की पत्नी अंजू बीकानेर के रहने वाले हैं. प्रभु सिंह ने बताया कि साल 2010 में बीएड की थी. 2012 की शिक्षक भरती में नंबर आ गया, लेकिन रिशफल नतीजे में बाहर हो गया. इस के बाद साल 2016 की शिक्षक भरती के लैवल 2 में इंगलिश विषय में नंबर आया. इस में भी रिशफल नतीजे में बाहर कर दिया गया.

हाईकोर्ट की सिंगल और डबल बैंच ने उन के हक में फैसला दिया. लेकिन सरकार ने नौकरी देने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी. अब इंसाफ का इंतजार है.

प्रभु सिंह के साथ उन की पत्नी अंजू शेखावत की कहानी भी ऐसी ही है. इसी भर्ती में चयन हुआ था, लेकिन रिशफल नतीजे में बाहर कर दिया गया.

चयन हुआ, बहाली नहीं

बाड़मेर के तेज सिंह का कहना है, “हम 4 भाई और 5 बहनें हैं. घर की माली हालत अच्छी नहीं थी. पिताजी के पैसे तो मेरी और भाईबहनों की शादी और घर चलाने में ही खर्च हो गए. मुझे बीएड कराने के लिए उन्होंने 60,000 रुपए लोन लिया था.

“पहले साल 2013 की भरती में नंबर नहीं आया और फिर साल 2016 की भरती में नंबर आया तो मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया. मातापिता बुजुर्ग हो गए हैं. प्राइवेट स्कूल में नौकरी कर किसी तरह घर चला रहा था, लेकिन कोरोना में लगे लौकडाउन के बाद से उस का भी वेतन अटक गया.”

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शादी का पैसा पढ़ाई पर खर्च

सांचौर तहसील में चौरा गांव है. रामशरण वहीं के रहने वाले हैं. पिता ने बेटियों की शादी के लिए खेत गिरवी रख कर 7 लाख रुपए का कर्ज लिया था. इसी रकम में से एक लाख रुपए खर्च कर रामशरण को रीट के लिए कोचिंग कराई गई. लेकिन सरकार न तो रिशफल नतीजा जारी कर रही और न ही प्रतीक्षा सूची.

रामशरण का कहना है कि रीट में 77 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल किए. भरती के 863 पद आज भी खाली हैं. सरकार प्रतीक्षा सूची जारी करे तो नंबर आ जाएगा. मन में दर्द यह है कि बहन की शादी का पैसा पढ़ाई पर खर्च कर लिया, लेकिन नतीजा सिफर है.

नौकरी नहीं तो छोड़ गई पत्नी

गांव हसामपुर, सीकर के महेश कुमार लखेरा ने 2006-07 में ‘विद्यार्थी मित्र’ के रूप में नौकरी शुरू की. साल 2013 में शिक्षा सहायक भरती निकली, फिर 2015 में विद्यालय सहायक भरती, लेकिन दोनों ही भरतियां कोर्ट में अटक गई हैं.

दिसंबर, 2012 में शादी हुई, लेकिन कुछ दिन बाद पत्नी की मौत हो गई. दिसंबर, 2013 में दूसरी शादी की, लेकिन शादी के 4 महीने बाद अप्रैल, 2014 में सरकार ने ‘विद्यार्थी मित्रों’ को हटा दिया. बेरोजगार हो गए तो पत्नी बेटी को उन्हीं के पास छोड़ कर चली गई.

पढ़ाई में अव्वल, कर्ज की चिंता

राजसमंद के रहने वाले आदित्य शर्मा के घर वालों ने तकरीबन पौने 3 लाख रुपए कर्ज ले कर उन्हें जीएनएम का कोर्स कराया. वे हर बार फर्स्ट डिवीजन लाए. साल 2013 में जीएनएम भरती में आवेदन किया. दस्तावेज सत्यापन तक हो चुके, लेकिन नौकरी नहीं मिली.

एक बार उदयपुर मैडिकल कालेज में अर्जेन्ट टैंपरेरी बेस पर नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन आदित्य बताते हैं कि वे पहली लिस्ट में 11वें नंबर पर, दूसरी लिस्ट में 21वें पर थे और तीसरी लिस्ट में बाहर कर दिए गए.

गिरवी जमीन बिकने की नौबत

अलवर के रोशनलाल सैनी ने जमीन गिरवी रख कर 11 साल पहले ढाई लाख रुपए कर्ज ले कर डीएमएलटी और बीएससी एमएलटी कोर्स किया. कुछ दिन एसएमएस अस्पताल में संविदा पर काम किया. लैब टैक्निशियन भरती 2018 में आवेदन किया. नंबर भी आ गया. दस्तावेज सत्यापन भी हो गया, लेकिन भरती कोर्ट पहुंच गई.

रोशनलाल सैनी कहते हैं, “कर्ज बढ़ कर 7 लाख रुपए से ऊपर पहुंच चुका है. चुकाने की हालत नहीं है. अब जमीन बेच कर कर्ज चुकाने की सलाह देते हैं लोग.”

जमीन बेची, करनी पड़ रही मजदूरी

बयाना, भरतपुर के रहने वाले विनोद कुमार 10वीं जमात में थे तो पिता की मौत हो गई. इस से परिवार की हालत खराब हो गई. 35,000 रुपए में जमीन बेच कर आयुर्वेद नर्सिंग का कोर्स में दाखिला लिया. जमीन का पैसा एक साल में ही खर्च हो गया तो दूसरे साल की फीस बहनोई से उधार ले कर जमा कराई.

साल 2013 में आयुर्वेद नर्सिंग की भरती में आवेदन किया, जो अब तक अटकी पड़ी है. 2014 में शादी हो गई, 2 बच्चे भी हो गए. अब बच्चों को पालने के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है.

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गहने गिरवी, मजदूरी ही सहारा

बीपीएल परिवार के बाबूलाल सैनी को मां ने मजदूरी कर और पत्थरों को तोड़ने का काम कर के पढ़ाया. बीफार्मा का कोर्स कराते समय पैसे कम पड़े तो गहने गिरवी रखे जो आज तक नहीं छुड़ा पाए हैं.

3 बहनों के भाई बाबूलाल कहते हैं कि फार्मासिस्ट भरती निकली, लेकिन 4 बार स्थगित होने के बाद हाल में 5वीं बार रद्द हो गई. मां का सपना था कि बेटा सरकारी नौकरी कर गहने छुड़ा कर लाएगा और बहनों की शादी करेगा, लेकिन कुछ नहीं कर सका.

भरती बोर्ड में न अध्यक्ष, न सचिव

सरकारी महकमों में मुलाजिमों की भरती करने वाला राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड खुद ही भरतियों की बांट जोह रहा है. बोर्ड में अब न तो अध्यक्ष है, न ही सचिव. इतना ही नहीं, बोर्ड में सदस्य तक नहीं है. ऐसे में अब बोर्ड सिर्फ कर्मचारियों के भरोसे ही चल रहा है. बोर्ड में नियुक्तियां नहीं होने से प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अंधकार में है.

गौरतलब है कि एक साल में 2 भरती परीक्षाओं के पेपर आउट होने के बाद विवादों में आए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष बीएल जाटावट को इस्तीफा देना पड़ा था, वहीं सचिव का तबादला होने के बाद यहां कोई अधिकारी नहीं लगाया गया है. सदस्यों का कार्यकाल पहले ही पूरा हो चुका है.

अटकी भरतियों को ले कर छात्रों की सुनवाई करने वाला बोर्ड में कोई नहीं बचा. हालत यह है कि छात्रों ने बोर्ड पर प्रदर्शन करना बंद कर दिय. ज्ञापन भी किसे दें. अब छात्रों को बोर्ड भरतियों के मामले में राजस्थान यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन करना पड़ रहा है.

दरदर भटकने को मजबूर

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में बेरोजगारी का ग्राफ काफी बढ़ा है. जिन नौजवानों के दम पर हम भविष्य की मजबूत इमारत की आस लगाए बैठे हैं, उस की बुनियाद की हालत बेहद निराशाजनक है. सालों से तैयारी कर रहे नौजवानों के लिए, जब अपनी राजनीति चमकाने वाले नेताओं का बयान ‘प्रदेश में नौकरी की नहीं योग्यता की कमी है’ कहा जाता है तो इसी सोच के एक दूसरे पक्ष की ओर सरकार का ध्यान क्यों नहीं जाता कि 21वीं सदी में मौडर्न टैक्नोलौजी अपनाने के बाद भी हम एक ऐसा सिस्टम नहीं खड़ा कर पाए हैं जो एक भरती परीक्षा को सकुशल पूरा करा सके.

बेरोजगारी नामक शब्द देश का ऐसा सच है, जिस से राजनीतिबाजों, खुद को देश का रहनुमा समझने वालों ने अपनी आंखें मूंद ली हैं. दरअसल, सरकारें चुनावी मौसम में इन लंबित भर्तियों का विज्ञापन निकाल कर वोट पाने की लालसा में रहती है. देश में बेरोजगारी की दर कम किए बिना विकास का दावा करना कभी भी न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता. देश का शिक्षित बेरोजगार युवा आज स्थायी रोजगार की तलाश में है. ऐसे में बमुश्किल किसी निजी संस्थान में अस्थायी नौकरी मिलना भविष्य में नौकरी की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा है.

प्राइवेट कंपनियों या फैक्टरियों के मालिको को इस बात का आभास अच्छी तरह से है कि बेरोजगारों का दर्द क्या है. इसी की आड़ में वे कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं. कम तनख्वाह में काम करने के लिए कोई शख्स तभी तैयार होता है जब उस को कहीं और काम मिलने में दिक्कत हो. इन हालात में देश के युवा क्या करें, जब उन के पास रोजगार के लिए मौके नहीं है, उचित संसाधन नहीं हैं, सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं.

नौकरियों में नए पदों के सृजन पर रोक लगी हुई है, उस पर बढ़ती बेरोजगारी आग में घी डालने का काम कर रही है. सरकारों को देश में बढ़ती बेरोजगारी के लिए केवल चुनावी मौसम में कही जाने वाली बातों तक ही सीमित नही रहना होगा, बल्कि उस को धरातल पर भी उतारना होगा, वरना कहीं ऐसा न हो कि सत्ता में बैठाने वाले युवा विमुख हो कर सत्ता से बेदखल भी कर दें.

बेबस रोजगार कार्यालय

जयपुर के जिला रोजगार कार्यालय में बीते 2 साल में 2 लाख, 50 हजार, 373 युवाओं ने पंजीयन कराया है, जबकि बेरोजगारों का गैरसरकारी आंकड़ा 5 लाख से ज्यादा है, जिन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिली. प्राइवेट नौकरी के आंकड़े विभाग के पास उपलब्ध नहीं हैं.

राज्य सरकार इन युवाओं को सालाना 6,000 रुपए बेरोजगारी भत्ता देती है यानी 500 रुपए महीना, जबकि महंगाई दर तेजी से बढ़ रही है. सवाल यह है कि क्या कोई भी युवा 500 रुपए महीने में घर चला सकता है, जबकि प्रदेश के आंकड़े और भी चिंताजनक हैं? 2 साल में 8 लाख बेरोजगार रोजगार विभाग पहुंचे, लेकिन विभाग 349 करोड़ रुपए खर्च कर के सिर्फ 765 लोगों को प्राइवेट नौकरी दिला पाया.

रोजगार विभाग कहता है कि 2016 के बाद कोर्ट की रोक के बाद जिले में कोई भी चपरासी, ड्राइवर ग्रुप सी व डी तक की सरकारी नौकरी नहीं लग पाया है. जिला रोजगार विभाग का कहना है कि रोजगार मेलों में युवाओं को प्राइवेट कंपनियों में नौकरी दिलाई है, लेकिन इस में ज्यादातर को वाटरमैन, फायरमैन, गार्ड जैसे पदों पर 8,000 से 10,000 रुपए महीने की नौकरी ही मिली.

जल्द निकालेंगे हल

लंबित भरतियों के मसले पर राज्य के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा कहते है, “प्रदेश के मुख्यमंत्री भरतियां समय पर पूरा करने को ले कर गंभीर हैं. लंबित मामलों में वित्त व विधि विभाग के अफसरों के साथ समीक्षा करेंगे. जो मामले कोर्ट में हैं, उन में देखेंगे कि किस तरह से रिलीफ दे सकते हैं. शिथिलता की जरूरत पड़े तो वह भी देखेंगे.”

बिग बॉस 14 फेम Nikki Tamboli की बढ़ी डिमांड, मिले 3 बॉलीवुड फिल्मों की ऑफर

बिग बॉस 14 कंटेस्टेंट निक्की तम्बोली इन दिनों सुर्खियों में छायी हुई है. बिग बॉस हाउस से बाहर निकलने के बाद उनके पास फैंस उनपर जमकर प्यार बरसा रहे हैं. तो वहीं निक्की तम्बोली को एक से बढ़कर एक प्रोजेक्ट भी मिल रहे हैं.

खबर ये आ रही है कि ओटीटी और फिल्मों में निक्की तम्बोली की डिमांड बढ़ चुकी है. इतना ही नहीं निक्की तम्बोली  को लगातार बॉलीवुड फिल्मों में काम करने का ऑफर भी मिल रहा है.

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार निक्की तम्बोली को तीन बॉलीवुड फिल्मों में काम करने का मौका मिला है. इसके अलावा निक्की तम्बोली की टीम कुछ ओटीटी प्रोजेक्ट पर भी बात कर रही है. तो वहीं निक्की तम्बोली जल्द ही एक म्यूजिक वीडियो में भी नजर आ सकती हैं.

 

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मिल रही जानकारी के अनुसार निक्की तम्बोली  को तीन बॉलीवुड फिल्मों में काम करने का ऑफर मिला है. हालांकि इस खबर को लेकर कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं किया गया है. बता दें कि निक्की तम्बोली की सोशल मीडिया पर फैन फॉलोइंग भी काफी तेजी से बढ़ रही है.

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Bodyguard फेम एक्ट्रेस Hazel Keech ने प्रेग्नेंसी की अफवाहों से तंग आकर सोशल मीडिया से लिया ब्रेक

बॉलीवुड  सुपरहिट फिल्म ‘बॉडीगार्ड’ फेम एक्ट्रेस हेजल कीच (Hazel Keech) ने अब सोशल मीडिया से ब्रेक लेने का फैसला किया है. और खबरों के अनुसार इस फैसले की वजह हेजल कीच ने प्रेग्नेंसी की अफवाह बताई हैं.

कहा जा रहा है कि एक्ट्रेस ने इन अफवाहों से तंग आकर आकर से सोशल मीडिया से दूर रहने के फैसला किया है. दरअसल हेजल कीच ने  सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया. जिसमें लिखा,  मेरा फोन और मैं एक ब्रेक पर जा रहे हैं. मुझे पता है कि यह आप में से ज्यादातर के लिए एक ये एक शॉक जैसा होगा लेकिन यही ठीक है.

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उन्होंने इस पोस्ट में आगे लिखा कि कभी-कभी हमें एक दूसरे पर पूरी तरह से निर्भर होने के बजाय हमें इस बात का एहसास भी होना चाहिए कि अकेले कैसे जीते हो. इसलिए मैं कुछ समय के लिए सोशल मीडिया से दूर हो रही हूं. असली दुनिया में जाने के लिए मुझे बधाई दें.

हेजल कीच ने इस पोस्ट में ये भी कहा कि अगर आपके पास मेरा नंबर है, तो मुझे मैसेज करने के बजाय कॉल करें. मैं वापस आउंगी, लेकिन इतनी जल्द नहीं.

हेजल कीच के इस पोस्ट पर एक यूजर ने कमेंट किया, क्योंकि तुम प्रेग्नेंट हो. कहा जा रहा है कि हेजल कीच ने प्रेग्नेंसी की अफवाहों से तंग आकर ब्रेक लिया है.

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बता दें कि हेजल और युवराज सिंह की शादी 30 नवंबर, 2016 में हुई. दोनों की गोवा में डेस्टिनेशन वेडिंग भी हुई थी.

 

बदलते जमाने का सच: भाग 3

अभी रात ज्यादा नहीं हुई थी. गांव के गोवर्धन पांडे शादीब्याह में कुंडलियां मिलाते थे. गांव के लोग उन्हें अच्छा ज्योतिषी समझते थे. गांव वालों के हाथ देख कर और उन के ग्रह के नाम पर हवन करा कर उन की रोजीरोटी बिना कोई काम किए आराम से चलती थी. किसी की शादी करानी हो तो कुंडलियां मिलान करा देना और रोकनी हो तो

उन में कई अड़ंगे डाल देना उन के लिए बाएं हाथ का खेल था. जैसा जजमान वैसा काम.

बाबूजी की उन से खूब पटती थी. दोनों साथसाथ पढ़े भी थे. बचपन के दोस्त भी थे इसलिए राह से भटके बेटे को राह पर लाने का काम भी ज्योतिषी से बढि़या कौन कर सकता था.

दीनानाथ बोले, ‘‘मैं अभी ज्योतिषी को बुला लाता हूं. वे जो कहेंगे वही होगा,’’ फिर किसी से कुछ कहे बगैर वे ज्योतिषी को बुलाने चले गए.

गोवर्धन पांडे ने अभीअभी खाना खाया था और अब सोने की तैयारी कर रहे थे. जब इतनी रात को दीनानाथ को आते देखा तो उन्हें अहसास हो गया कि कोई ग्रहनक्षत्र का चक्कर हैं. वे खुश हो कर बोले, ‘‘आओ यार, इतनी रात में आने की कोई खास वजह लगती है. बताओ, क्या बात है?’’

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दीनानाथ ने आपबीती सुनाई और किसी तरह बेटे को राह पर लाने को कहा.

ज्योतिषी ने हंसते हुए कहा, ‘‘बस, इतनी सी बात है. चिंता न करो. ऐसे बहके लड़कों को राह पर लाना तो मेरे लिए पलभर का काम है… अब बताओ, तुम्हारा काम हो जाएगा तो दक्षिणा में मुझे क्या मिलेगा.’’

‘‘जो तुम मांगोगे पांडे, दूंगा. बस, किसी तरह बेटे को मेरे समधी की बेटी से शादी के लिए राजी करा दो.’’

दीनानाथ जब घर से बाहर निकले तो ज्योतिषी गोवर्धन पांडे अपनी पत्नी से बोले, ‘‘अब चिंता मत करो पंडाइन, भगवान चाहेगा तो तुम्हारे कंगन बनने का जुगाड़ जल्दी ही हो जाएगा. किवाड़ बंद कर लो. आने में देर हो जाएगी.’’

ज्योतिषी गोवर्धन पांडे को देख कर प्रियांशु ने नाकभौं सिकोड़ ली. वह ज्योतिषी को बचपन से ही जानता था. इस ने कइयों के घर में झगड़ा कराया था. कितनों का घर उजाड़ा था. जरूरत पड़ने पर ओझागुनी होने का भी ढोंग रचता था. जब कोई बीमार पड़ता तो पड़ोसी द्वारा भूत चढ़ाने की बात बताता और उन्हें भगाने के नाम पर खूब पैसे वसूलता.

गोवर्धन पांडे ने जब दोनों की जन्मकुंडली मांगी तो प्रियांशु बोला कि नैनी की जन्मकुंडली नहीं बनी है और जन्मतिथि के नाम पर एक गलत तिथि बता दी.

ज्योतिषी बहुत देर तक पोथीपतरा देखते रहे और एक कागज पर कुछ लिखते रहे. आखिर में वे बोले, ‘‘लड़कालड़की के गुण बिलकुल उलटे हैं. शादी होते ही वरवूध में से किसी एक की मृत्यु का योग है.’’

‘‘आप ने अपनी कुंडली देखी है ज्योतिषी चाचा?’’ महीप ने पूछा, ‘‘अगर देखी होती तो चाची आप को रोज जलीकटी न सुनातीं.’’

गोवर्धन पांडे की पत्नी झगड़ालू थीं. किसी न किसी पड़ोसी से रोज ही बातबात पर लड़ जातीं. ज्योतिषी को तो बीच में पड़ते ही गालीगलौज करने लगतीं. सारा गांव यह बात जानता था.

‘‘महीप, तुम चुप रहो. अपने से बड़ों की इज्जत करो,’’ बाबूजी बोले तो वह चुप हो गया.

‘‘बोलने दो दीनानाथ, अभी बच्चा है… धीरेधीरे सब सीख जाएगा,’’ ज्योतिषी गोवर्धन पांडे बोले.

इसी बीच बहन बीच में आ गई. वह बोली, ‘‘प्रियांशु, तुम्हीं सोचो, क्या ऐसी शादी करोगे जिस में किसी की मौत होने का डर हो? मैं तो कहती हूं कि अपनी ऊंची जाति, पिता की भावनाओं और परिवार के रीतिरिवाज, और हम पर लदे कर्ज का ध्यान रखते हुए मेरी ननद से शादी कर लो.’’

‘‘बाबूजी, क्या आप को नहीं लगता कि ज्योतिषी पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं? इन्होंने कुंडली नहीं, बल्कि शादी काटने की गणित बिठाई है. क्या आज तक कोई किसी का भविष्य जान पाया है? क्या राम की शादी के समय कुंडली का विचार नहीं किया गया था?

‘‘ज्योतिषी चाचा को तो मैं ने नैनी की गलत जन्मतिथि बताई थी. उस की कोई भी जन्मतिथि दी जाएगी, इन्हें अपशकुन का ही योग दिखाई पड़ेगा.

‘‘मैं सरला के बारे में नहीं जानता. मैं यह भी नहीं जानता कि वह मुझ से शादी करना चाहती भी है या नहीं. उसे भी मेरे साथ जबरन जोड़ने की कोशिश सभी लोग कर रहे हैं, पर मैं नैनी को बहुत दिनों से जानता हूं. वह एक समझदार और सुलझी हुई पढ़ीलिखी लड़की है. उस के विचार मुझ से मिलते हैं, मन मिलता है. हमारे दिल में एकदूसरे के लिए प्यार है.

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‘‘मैं जानता हूं कि आप, दीदी और ज्योतिषी चाचा मिल कर साजिश रच रहे हैं. कम से कम बाबूजी आप से और दीदी से मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी,’’ प्रियांशु कह कर चुप हुआ तो भाई महीप और मां ने उस का पक्ष लेते हुए कहा, ‘‘इस की शादी नैनी से ही होगी.’’

‘‘आप चिंता न करें बाबूजी, नैनी और मैं मिल कर कर्ज चुका देंगे,’’ प्रियांशु को अहसास हो गया कि पिताजी दहेज के लालच में यह सब कर रहे हैं.

अब दीनानाथ को समझ आ गया था कि उन से बड़ी भूल हुई है. उन्होंने बहुत बड़ा पाप किया था. अपने बेटे के खिलाफ ही साजिश रची थी. अब वह वक्त नहीं रहा, जब धर्म, जाति और कुंडली के नाम पर बेमेल सोच वाले लोगों को जबरन शादी के बंधन में बांध दिया जाता है.

दीनानाथ बोले, ‘‘बेटा, बाप हो कर भी मैं तुम से माफी मांगता हूं. मुझ से गलती हुई है. शादीब्याह गुड्डेगुडि़या का खेल नहीं है. इस में 2 लोग एकदूसरे के साथ जिंदगीभर के लिए बंधते हैं. पतिपत्नी को जाति नहीं, बल्कि दिल और विचार एकदूसरे के साथ जोड़ते हैं.

‘‘मुझे तुम्हारा रिश्ता तय करते वक्त इस बात का खयाल रखना चाहिए था. दहेज के लालच ने मुझे अंधा बना दिया था. पहले तो लगा कि महीप उद्दंड है, पर उस पर मुझे अब गर्व हो रहा है. उस ने मेरी आंखें खोलने की कोशिश की थी, पर मेरी आंखें न खुलीं.

‘‘कल मैं नैनी की मां से तुम्हारे लिए उस का हाथ मांगने खुद जाऊंगा. साथ ही, तुम्हारी बहन की नादानी के लिए नैनी से भी माफी मांग लूंगा,’’ कहते हुए उन्होंने प्रियांशु को गले लगा लिया.

बहन ने कहा, ‘‘मेरी गलती के लिए आप क्यों माफी मांगेंगे बाबूजी? मैं भी आप के साथ चलूंगी.’’

बदलते जमाने का यही सच था.

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Crime Story: गोली पर लिखा प्यार- भाग 3

सौजन्य-  मनोहर कहानियां

लेखक- आर.के. राजू

मेघा के व्यवहार में आए बदलाव को देख कर मनोज के मन में एक दूसरा शक यह पैदा हो गया कि कहीं मेघा का किसी और से चक्कर तो नहीं चल रहा, जिस की वजह से वह उसे लगातार इग्नोर कर रही है. वह यही सोचता कि दाल में जरूर कुछ काला है. सच्चाई जाने बिना ही वह मेघा के बारे में गलत सोचने लगा.

इसी दरम्यान उस ने तय कर लिया कि वह मेघा को एक बार और समझाने की कोशिश करेगा. यदि वह शादी के लिए तैयार नहीं हुई तो फिर वही करेगा जो उस ने तय कर रखा है. इस के लिए मनोज ने एक भयंकर योजना तैयार कर ली थी.

सिपाही होने की वजह से वह कई क्रिमिनलों को जानता था. एक क्रिमिनल के सहयोग से  उस ने .315 बोर का एक तमंचा और कारतूसों का इंतजाम कर लिया.

मनोज से मेघा की बेवफाई बरदाश्त नहीं हो रही थी. हर समय वह उस के बारे में ही सोचता रहता था.

घटना से 3 दिन पहले मनोज ने मेघा को फोन किया तो मेघा ने उस का फोन रिसीव नहीं किया. तब वह और ज्यादा परेशान हो गया. 30 जनवरी, 2021 की रात्रि ड्यूटी करने के बाद सुबह को उस ने 2 दिन का अपना रेस्ट मंजूर करा लिया. उस के दिमाग में मेघा के अलावा और कुछ नहीं था.

31 जनवरी को जब मेघा ने उस का फोन रिसीव नहीं किया तो वह शाम करीब 6 बजे मेघा के कमरे पर  पहुंच गया.

मनोज ने मेघा का दरवाजा खटखटाया तो उस ने गुस्से में दरवाजा नहीं खोला. वह उस समय किचन में थी. इस के बाद वह कमरे में चली गई. तब मनोज दरवाजे के बाहर से ही जोरजोर से अनापशनाप बकने लगा. मेघा के कमरे के बराबर में ही उस का किचन था. किचन का दरवाजा खुला हुआ था.

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मेघा ने कमरे का दरवाजा नहीं खोला तो मनोज किचन में पहुंच गया. किचन से एक खिड़की मेघा के कमरे में खुलती थी. उसी खिड़की के रास्ते वह मेघा के कमरे में दाखिल हो गया.

उसे देख कर मेघा भड़क गई. उस ने कहा, ‘‘तुम्हें इस तरह से खिड़की के रास्ते से नहीं आना चाहिए था.’’ मनोज तो वैसे ही गुस्से से भरा हुआ था. उस ने कहा, ‘‘मेघा, मैं आज तुम से साफसाफ यह पूछना चाहता हूं कि तुम अभी शादी करोगी या नहीं क्योंकि मैं अब ज्यादा दिनों तक शादी के लिए नहीं रुक सकता.’’

इस पर मेघा ने कहा, ‘‘कुछ दिन और रुक जाओ. जब मेरा कैरियर बन जाएगा तब मैं शादी करूंगी.’’

मगर मनोज को तसल्ली कहां थी. वह तेज आवाज में झगड़ने लगा. मेघा उस की योजना से अनजान थी. वह भी गुस्से में उस से झगड़ने लगी. दोनों के चीखनेचिल्लाने की आवाजें कमरे से बाहर जाने लगीं.

मेघा के पास में रहने वाली प्रिया जानती थी कि मनोज मेघा का प्रेमी है. उस ने उन के झगड़े में दखल देना उचित नहीं समझा. सोचा थोड़ी देर में दोनों सामान्य हो जाएंगे. लेकिन उसे क्या पता था कि वहां कुछ देर में खून बहने वाला है.

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झगड़े के दौरान मनोज को गुस्सा आया तो उस ने अपनी अंटी में खोंसा हुआ तमंचा निकाल कर मेघा के ऊपर फायर कर दिया. मेघा के सीने में गोली लगी. गोली लगते ही वह फर्श पर गिर पड़ी. तभी खुद को भी मिटाने के लिए मनोज ने दूसरी गोली अपने पेट पर  मार ली.

गोलियों की आवाज सुनते ही मकान मालकिन और बराबर में रह रही सिपाही प्रिया मेघा के कमरे पर पहुंच गईं. फिर इस की सूचना पुलिस को दे दी गई.

मनोज के गिरफ्तार होने के बाद एसपी सुनीति भी थाने पहुंच गई थीं. उन्होंने भी करीब डेढ़ घंटे तक मनोज से पूछताछ की. इस के बाद थानाप्रभारी ने हत्या के आरोप में गिरफ्तार मनोज को 3 फरवरी, 2021 को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

उसी दिन एसपी सुनीति ने कांस्टेबल मनोज ढल को बरखास्त कर दिया. अब मामले की जांच थानाप्रभारी आर.पी. शर्मा कर रहे हैं.

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—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story: गोली पर लिखा प्यार- भाग 1

सौजन्य-  मनोहर कहानियां

लेखक- आर.के. राजू

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का एक बड़ा कस्बा है गजरौला. यह कस्बा मुरादाबाद से दिल्ली जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-24 पर स्थित है. गजरौला की पहचान एक औद्योगिक नगर के

रूप में भी है क्योंकि यहां पर कई बड़े कारखाने और फैक्ट्रियां हैं. मेघा चौधरी इसी कस्बे की अवंतिका कालोनी में सुधारानी के मकान में रहती थी. मेघा चौधरी गजरौला थाने में कांस्टेबल थी.

31 जनवरी, 2021 की शाम करीब 6 बजे की बात है. मेघा चौधरी किचन में खाना बनाने की तैयारी कर रही थी, तभी मनोज ढल उस के पास आया. मनोज उस का प्रेमी था. वह भी उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल था और उस की पोस्टिंग अमरोहा जिले के सैदनगली थाने में थी.

मनोज अकसर मेघा चौधरी से मिलने आता रहता था. उस के आने के बाद उन दोनों के बीच कुछ देर तक बातचीत चलती रही. इसी दौरान उन की बातों में इतना तीखापन आ गया कि आवाजें कमरे से बाहर तक जाने लगीं. लग रहा था जैसे उन के बीच झगड़ा हो रहा हो. उसी समय मेघा के कमरे से गोली चलने की 2 आवाजें आईं.

बराबर के कमरे में मेघा की दोस्त महिला कांस्टेबल प्रिया भी किराए पर रहती थी. गोली की आवाज सुनते ही प्रिया तुरंत मेघा के कमरे में पहुंची. गोली की आवाज सुन कर  मकान मालकिन भी वहां आ गई थी.

उन लोगों ने देखा तो वहां का दृश्य देख कर हक्कीबक्की रह गईं. कमरे में मेघा और मनोज लहूलुहान पड़े थे. दोनों को गोली लगी थी और कमरे में खून फैला हुआ था. मनोज के पास ही एक देसी तमंचा पड़ा हुआ था. प्रिया समझ गई कि दोनों को उसी तमंचे से गोली लगी है.

प्रिया खुद कांस्टेबल थी. उस ने तुरंत गजरौला थाने में फोन कर के इस की सूचना दे दी. यह बात सुबह करीब सवा 6  बजे की है.

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थानाप्रभारी आर.पी. शर्मा रात की गश्त से लौट कर अपने क्वार्टर में आराम कर रहे थे. एसएसआई प्रमोद पाठक थाने में मौजूद थे. उन्होंने जब इस घटना के बारे में सुना तो यह जानकारी थानाप्रभारी को दी और खुद पुलिस टीम के साथ अवंतिका कालोनी में घटनास्थल पर पहुंच गए.

चूंकि मामला पुलिसकर्मियों से जुड़ा हुआ था, इसलिए थानाप्रभारी ने इस घटना से उच्च अधिकारियों को भी सूचित कर दिया. इस के बाद वह खुद घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस तुरंत दोनों घायलों को गजरौला के अस्पताल ले गई, लेकिन उन की हालत गंभीर थी इसलिए गजरौला से उन्हें मुरादाबाद के साईं अस्पताल रेफर कर दिया गया.

सूचना मिलते ही सीओ विजय कुमार, एएसपी अजय प्रताप सिंह व एसपी सुनीति भी घटनास्थल पर पहुंच गईं. उन्होंने घटनास्थल का मुआयना किया और मकान मालकिन व कांस्टेबल प्रिया से पूछताछ की.

पूछताछ के बाद पुलिस को पता चला कि मेघा चौधरी और मनोज ढल का काफी दिनों से प्रेम संबंध चल रहा था. अब तक की जांच के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची की इस घटना को कांस्टेबल मनोज ढल ने ही अंजाम दिया होगा. पुलिस ने मौके से मिले सबूत अपने कब्जे में लिए.

उधर मुरादाबाद के साईं अस्पताल में भरती कांस्टेबल मेघा और मनोज की हालत गंभीर बनी हुई थी. डाक्टरों की टीम दोनों के इलाज में तत्परता से जुटी थी. मामला पुलिसकर्मियों से जुड़ा हुआ था, इसलिए सूचना पाते ही मुरादाबाद रेंज के आईजी रमित शर्मा, एसएसपी प्रभाकर चौधरी, एसपी (सिटी ) अमित कुमार आनंद भी साईं अस्पताल पहुंच गए. आईजी रमित शर्मा ने अमरोहा पुलिस को आदेश दिए कि वह इस मामले में निष्पक्ष तरीके से काररवाई करे.

आईजी साहब के आदेश पर अमरोहा जिले की एसपी सुनीति ने गजरौला के थानाप्रभारी आर.पी. शर्मा के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बना दी. थानाप्रभारी ने सिपाही मनोज ढल के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 452, 307 व आर्म्स ऐक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी.

उधर इलाज के दौरान कांस्टेबल मेघा चौधरी ने 31 जनवरी की रात करीब 11 बजे दम तोड़ दिया. पुलिस मेघा चौधरी और मनोज ढल के घर वालों को पहले ही सूचना दे चुकी थी, इसलिए सुबह होते ही दोनों के घर वाले साईं अस्पताल पहुंच गए.

मेघा चौधरी के घर वालों को जब पता चला कि उस की मौत हो चुकी है तो उन का रोरो कर बुरा हाल हो गया. मेघा के भाई सागर चौधरी ने थानाप्रभारी को मनोज ढल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराने की तहरीर दी.

पहली फरवरी को मुरादाबाद में मेघा का पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने उस की लाश उस के घर वालों को सौंप दी. मेघा मूलरूप से मुजफ्फरनगर जिले के सरलाखेड़ी गांव की रहने वाली थी, इसलिए घर वाले उस का शव अपने गांव ले कर चले गए.

उधर मनोज की हालत में निरंतर सुधार हो रहा था. 3 फरवरी, 2021 को जब उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

थाना गजरौला ले जा कर उस से इस संबंध में पूछताछ की गई. एसपी सुनीति भी उस से पूछताछ करने के लिए थाना गजरौला पहुंच गईं. पूछताछ में मनोज ढल ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही मेघा को गोली मार कर खुद को भी गोली मारी थी. इस के पीछे की उस ने जो कहानी बताई, वह प्रेम संबंधों की बुनियाद पर रचीबसी निकली—

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मेघा चौधरी और मनोज ढल वर्ष 2018 बैच के कांस्टेबल थे. करीब डेढ़ साल पहले मेघा चौधरी और मनोज ढल की तैनाती अमरोहा जिले की तहसील हसनपुर के थाना आदमपुर में थी. आदमपुर बेहद पिछड़ा हुआ इलाका है. ग्रामीण क्षेत्र में तैनाती होने के कारण मनोज अकसर मेघा की मदद कर दिया करता था. जिस कारण दोनों में घनिष्ठता बढ़ गई थी. दोनों ही अविवाहित थे. उन के बीच नजदीकियां बढ़ीं तो मामला प्यार में बदल गया. दोनों एकदूसरे को चाहने लगे.

ड्यूटी के दौरान दोनों समय निकाल कर अकसर मिलते रहते थे. मनोज मेघा के प्यार में आकंठ डूब चुका था. उस के सिर पर प्यार का ऐसा नशा सवार हुआ कि वह अपनी ड्यूटी के प्रति भी लापरवाह रहने लगा. आदमपुर के थानाप्रभारी ने मनोज और मेघा को कई बार समझाया कि वह जिम्मेदारी से अपनी ड्यूटी करें. ड्यूटी के प्रति लापरवाही ठीक नहीं है.

लेकिन दोनों ने उन की बात पर ध्यान नहीं दिया तो उन्होंने उन दोनों को हिदायत दी.  मनोज तो मेघा का जैसे दीवाना हो चुका था. इसलिए अपने प्यार के चलते उस ने थानाप्रभारी की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया.

तब थानाप्रभारी ने अमरोहा के तत्कालीन एसपी डा. विपिन कुमार टांडा से कांस्टेबल मेघा चौधरी और मनोज की शिकायत कर दी. उन की शिकायत पर एसपी ने मेघा चौधरी का तबादला आदमपुर से गजरौला थाने में कर दिया और मनोज का तबादला कर के उसे थाना सैदनगली भेज दिया गया.

मेघा चौधरी ने 10 सितंबर, 2020 को गजरौला थाने पहुंच कर अपनी आमद दर्ज करा दी. गजरौला थाने में ड्यूटी जौइन करते ही मेघा ने अपने कार्यों से पूरे पुलिस स्टाफ को प्रभावित किया. वह बहुत ही  महत्त्वाकांक्षी थी. उस के मन में आगे बढ़ने की लगन थी. थानाप्रभारी मेघा चौधरी के कार्य से संतुष्ट थे. उस के काम को देखते हुए उन्होंने उसे महिला डेस्क की जिम्मेदारी सौंपी.

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इस के अलावा वह पुलिस की एंटी रोमियो टीम के साथ भी काम करने लगी. नारी शक्ति अभियान से जुड़ी एंटी रोमियो टीम का काम स्कूलकालेज की छात्राओं को जागरूक करना होता है.

मेघा चौधरी इस काम को बड़ी गंभीरता से कर रही थी. वह स्कूलकालेज में जा कर छात्राओं को जागरूक करती थी. वह उन्हें बताती थी कि यदि रास्ते में कोई मनचला उन के साथ छेड़छाड़ या परेशान करे तो उस से कैसे निपटा जाए.

अगले भाग में पढ़ें- मेघा ने शादी की या नहीं ?

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