Women’s Day Special- महविश और सिराज: भाग 1

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

‘‘महविश… तू क्या ये बोरों और कपड़ों की कतरनों पर कढ़ाई किया करती है, फालतू में… कम उम्र में ही चश्मा चढ़ जाएगा,’’ अम्मी अकसर डांटतीं तो दादी बीचबचाव करते हुए कहतीं, ‘‘अरे, उस के हाथों में हुनर है, तो तुझे क्यों जलन हो रही है… और फिर वे तो बेकार पड़े कपड़ों पर ही तो कशीदाकारी करती रहती है…

‘‘इसे देख कर मुझे भी अपनी जवानी के दिन याद आ जाते हैं. जैसे कल की ही बात हो… न जाने कितनी चादरें, शालें और तकियों के लिहाफ काढ़ा करती थी मैं.’’

दादी की बात सुन कर अम्मी ने महविश के हाथों से कपड़े का टुकड़ा छीना और उलटपलट कर देखने लगीं और जातेजाते बोलीं, ‘‘हां, ठीक तो है… पर घर के और काम भी कर लिया कर.’’

अम्मी के हाथों से कपड़े का टुकड़ा जैसे ही महविश के हाथों में आया, मानो उस के सूखे हुए जिस्म में जान ही लौट आई. उस ने झट से कपड़े को अपने बैग में सब से नीचे ठूंस दिया.

कितनी खूबसूरती से महविश ने फूलों की कढ़ाई के बीच सिराज के नाम की कढ़ाई की थी. कोई पारखी नजरों वाला ही उस के छिपे नाम को ढूंढ़ सकता था.

सिराज महविश के भाई फैज का दोस्त था और पढ़ाई के सिलसिले में अकसर उस के साथ घर आताजाता था.

जब सिराज आता तो महविश को पता नहीं क्या हो जाता. थोड़ी सी घबराहट, तो थोड़ी सी मुसकराहट महविश के होंठों पर आनेजाने लगती. उस की नजरें बारबार सिराज की नजरों से मिलने को बेताब रहतीं, पर सिराज था जो कभी महविश की तरफ देखता भी नहीं था.

इस की एक वजह थी कि सिराज अपने कैरियर को ले कर संजीदा था और उस का पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पर ही था. दूसरी वजह थी कि उस के घर की माली हालत फैज के मुकाबले कमजोर थी, जिस की वजह से वह सोच में रहता था.

सिराज एक गरीब परिवार से था. उस के अब्बा चीनी मिल में एक मामूली कांटा क्लर्क थे और उस की 2 बहनें और भी थीं. बमुश्किल ही उन लोगों के परिवार की गुजरबसर हो पाती थी, इसीलिए सिराज पढ़लिख कर एक काबिल अफसर बनना चाहता था.

महविश और सिराज के घर आसपास ही थे और दोनों घरों के लोग भी एकदूसरे को अच्छी तरह जानते थे.

महविश को सिराज की संजीदगी बहुत भाती थी. उसे तो अपने लिए हमेशा से ही सिराज जैसा शौहर चाहिए था, जो बातचीत करने में अच्छा हो, शरीफ हो, जिस का शरीर दरमियाना हो और चेहरे पर हलकी दाढ़ी हो तो कहना ही क्या… हां, अगर दाढ़ी ज्यादा घनी हो तो वह महविश को कतई नहीं भाता था.

‘तुम मुझे पसंद हो और मैं तुम से शादी करना चाहती हूं,’ यह बात महविश ने सिराज को कितनी बार बतानी चाही, पर बात हर बार पूरी न हो पाती.

‘‘इस बार सिराज पूरे 25 साल के हो गए हैं, पर अदाएं तो यों दिखाते हैं जैसे अभी बच्चे ही हों… लगता है, मुझे खुद ही अपने निकाह की बात और पहल ही सिराज से करनी होगी,’’ अपनेआप से ही बुदबुदा रही थी महविश और इस काम के लिए महविश ने अपने मकान की छत को अपना रास्ता बनाया…

सिराज और महविश की छत आपस में मिली हुई थी और बड़ी आसानी से एकदूसरे की छतों पर आयाजाया जा सकता था. एक रात जब महविश के घर के सारे लोग सो गए, तो वह दबे पैर छत पर आई और सिराज के घर की छत पर पहुंच कर धीरे से नीचे उतर गई.

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चूंकि सिराज के घर वाले नीचे रहते थे और ऊपर के कमरे में सिराज ही देर रात तक पढ़ाई करता था, इसलिए महविश बड़े आराम से सिराज के कमरे में थी और ठीक उस के सामने खड़ी थी.

‘‘अरे महविश, तुम यहां… और वह भी इतनी रात गए,’’ सिराज ने हैरान हो कर पूछा.

महविश ने उसे चुप रहने का इशारे किया और बिना कुछ बोले सिराज की ओर बढ़ गई. आज इश्क का इकरार जो करना था. महविश की सांसों के तेज चलने से उस का सीना उठबैठ रहा था. महविश के जिस्म की तपन सिराज भी महसूस कर सकता था, पर वह बुत बना खड़ा था.

अचानक पता नहीं क्या हुआ कि महविश सिराज के गले से बुरी तरह लिपट गई. महविश के जिस्म की खुशबू सिराज के पूरे जेहन को मदहोश कर रही थी. सिराज ने भी अपने हाथ महविश की कमर पर कस दिए और दोनों के जिस्म एकदूसरे से जवानी के मजे की मांग करने लगे.

अचानक महविश अलग हुई और अपने दुपट्टे को सीने पर डालते हुए उखड़ी सांसों को सही करते हुए बोली, ‘‘देखो सिराज, मैं यहां इतनी रात गए तुम्हारे साथ कोई गलत काम करने नहीं आई हूं, बल्कि मैं तो तुम से इतना कहना चाहती हूं कि मुझे तुम से इश्क हो गया है और मैं तुम से निकाह करना चाहती हूं.’’

सिराज तो मानो सन्न रह गया था. थोड़ी देर तक तो वह महविश को देखता ही रह गया, फिर बोला, ‘‘नहीं महविश… मेरा निकाह तुम से होना मुमकिन ही नहीं है.’’

‘‘क्यों…? क्यों नहीं है मुमकिन… आखिर मैं किसी से खराब हूं क्या… इस पूरे महल्ले में कोई है भी, जो मेरे हुस्न की बराबरी कर सके,’’ महविश गुस्से में आने के साथसाथ थोड़ा इठला भी रही थी.

‘‘हां… नहीं है कोई तुम्हारे जैसा… जानता हूं मैं… पर दिक्कत तो कहीं  और है.’’

‘‘पर, मुझे तो कोई दिक्कत नहीं दिखती,’’ महविश ने कहा.

‘‘देखो महविश, मेरे और तुम्हारे बीच पैसे और रहनसहन की एक बड़ी खाई?है… हमारे घर पर दो वक्त की दालरोटी भी बमुश्किल से चल पाती है और तुम्हारे घर तो रोज ही गोश्त पकता है… हमारे घर पर हम लोग अपने कपड़े खुद ही धोते है, जबकि तुम लोगों के कपड़े वाशिंग मशीन से धुलते हैं और वे भी नौकरानी उन्हें धोती है…

‘‘कहां तुम्हारे ये डिजाइनर कपड़े… और कहां ये मेरा कुरतापाजामा. और फिर तुम्हारे मकान का बाथरूम और हमारा सोने का कमरा एक बराबर है… भला हम में और तुम में कहां कोई रिश्ते की गुंजाइश है?’’

कुछ देर रुकने के बाद सिराज ने आगे कहना शुरू किया, ‘‘देखो महविश, मैं भी तुम से उतना ही प्यार करता हूं, जितना कि तुम… पर, मैं चाह कर भी तुम से निकाह नहीं कर सकता, क्योंकि मैं तुम्हारे ये भारीभरकम खर्चे नहीं उठा सकता… अब तुम यहां से चली जाओ. कहीं मैं अपनी बदहाली पर रो ही न पड़ूं,’’ सिराज ने कहा.

‘‘पर, मैं तो तुम्हारे साथ हर हालात में गुजारा करने को तैयार हूं… मैं कहां तुम से कुछ मांग कर रही हूं.’’

‘‘हां, महविश… मांग तो तुम नहीं कर रही हो, पर क्या तुम उमस भरी रात में बिना एसी और बिना पंखे के रह सकती हो? क्या तुम बिना फिल्टर किया हुआ पानी पी सकती हो? और क्या तुम मेरे साथ बस और आटोरिकशा में सफर कर सकती हो?’’ सिराज ने पूछा.

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‘‘हां… हां, मैं तुम्हें पाने के लिए सबकुछ कर सकती हूं,’’ महविश ने यह बात इतने यकीन से कही थी कि सिराज को कुछ कहते न बना.

अभी महविश कुछ और कहने ही जा रही थी कि नीचे मकान में कुछ हलचल हुई, जिस के चलते महविश को वापस भागना पड़ा.

सिराज वैसे तो हद दर्जे का पढ़ाकू था और घर की जिम्मेदारियां समझने वाला लड़का था, पर उस दिन महविश के शरीर की छुअन से उस के जवान दिल में उमंगें पैदा कर दी थीं.

और यही वजह थी कि उस दिन के बाद सिराज और महविश में ह्वाटसएप पर सुबहसुबह मैसेज भेजना शुरू हो जाता था और दोनों एकदूसरे को मुहब्बत भरी शायरी भी भेजा करते थे.

‘‘आखिर महविश में कोई बुराई  तो नहीं,’’ सिराज अपनेआप से बात कर रहा था.

‘‘हां… बस यही बुराई है महविश में कि उस में कोई बुराई नहीं… वह अच्छे घर से है… पढ़ीलिखी है और खूबसूरत भी… परिवार को ले कर चलने वाली है… अम्मीअब्बू का भी खूब ध्यान कर लेगी वह… और सब से बड़ी बात ये है कि वह मुझ से बहुत इश्क करती है,’’ बुदबुदा रहा था सिराज.

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Women’s Day Special- महविश और सिराज: भाग 3

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

महविश एक नौकरी कर के अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी, ताकि वह सिराज को यह बता सके कि उस की और सिराज की मिलीजुली होने वाली आमदनी से उन का घर अच्छी तरह से चल जाएगा, पर नौकरी न मिल पाने की नौबत में वह परेशान रहने लगी.

आज बगल वाली छत पर काफी हलचल थी. शहर से नुसरत की बड़ी बहन नेमत जो आई थी, सारे बच्चे उन्हीं के आगेपीछे घूम रहे थे, पर महविश का मन उधर न लगता था. वह तो बस एक बोरे को हाथ में ले कर उस पर ऊन से कढ़ाई कर रही थी.

नुसरत की बहन नेमत ने छत से इधर देखा, तो देखती ही रह गईं, उन की नजर तो महविश के हाथों में फंसे जूट के बोरे पर रंगबिरंगी ऊन से बनते फूलों और गुलदस्तों से हट ही नहीं रही थीं.

किसी को अपनी तरफ घूरते देख कर महविश चौंक पड़ी.

‘‘अरे, ऐसे क्या देख रही?हैं?’’

‘‘देख रही हूं कि क्या हुनर है तुम्हारे हाथों में… किस तरह से तुम्हारी सूई इस ऊन से जूट की बोरी पर रंगबिरंगी शक्ल देती जा रही है और जिस तरह तुम इस काम में डूबी हुई नजर आती हो. लगता है कि कोई शायर अपनी गजल लिख रहा हो,’’ नेमत ने कहा.

‘‘जी शुक्रिया,’’ महविश ने मुसकरा कर कहा.

‘‘मगर तुम अपने इस हुनर को दुनिया के सामने क्यों नहीं लाती… और फिर इस काम से तो कमाई का जरीया भी बनेगा,’’ नेमत ने कहा.

कमाई की बात सुन कर महविश के हाथ रुक गए. माना कि उस के अब्बू के पास बहुत पैसा था, पर उसे तो अपनेआप को साबित करना था कि वह खुद के बलबूते पर ही कुछ कर सकती है. महविश जैसे जाग सी गई. उस की आंखों में एक चमक आ गई.

‘‘जी, यह तो घरों में काम आने वाली बहुत साधारण सी चीज है… इस से भला क्या कमाई हो सकती है?’’ महविश ने पूछा.

‘‘है तो साधारण, पर कसबों से निकली हुई यही चीज जब शहर के बड़े शोरूम में सज जाती है, तो इस की हजार गुना कीमत बढ़ जाती है… मुझे देखो, मेरे शौहर ने मुझे फोन पर ही तलाक दे दिया, क्योंकि वे किसी और औरत के फेर में था… मेरे 2 बच्चों की जिम्मेदारी अब मुझ पर थी…

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‘‘मेरे ससुर मुझ पर एक बड़ी उम्र वाले बूढ़े से दोबारा निकाह करने के लिए जोर डालने लगे और तलाकशुदा होने के नाते घर के लोग ही मुझ पर फब्तियां कसने लगे… पर मैं ने न केवल उस बेमेल निकाह से इनकार किया, बल्कि मैं खुद अपने पैरों पर खड़ी हुई…

‘‘तुम्हारी ही तरह मुझे भी चिकनकारी का काम आता है, सो मैं ने थोक में कपड़ाफरोशों से कपड़ा लाना शुरू किया और उस पर चिकन की कढ़ाई कर के उसे सस्ते दामों में बाजार में दुकानदारों को दिया…

‘‘धीरेधीरे मेरा काम चल निकला  और आज मेरे पास इतना काम है कि  मेरा एक छोटा सा कारखाना है और  8-10 लड़कियों को भी मैं ने रोजगार दिया है, जिन्हें मैं हर महीने पगार देती हूं… मुझे किसी के सामने हाथ फैलाने की नौबत नहीं पड़ी,’’ नेमत मुसकराते हुए कह रही थीं.

महविश को लगा कि वह भी कुछ इसी तरह से अपना काम कर सकती?है.

‘‘और हां, अगर चाहो तो मैं तुम्हारे इस काम का नमूना अपने साथ शहर ले जा कर वहां के दुकानदारों को दिखाती हूं. अगर उन्हें अच्छा लगेगा तो मैं फोन से तुम्हें बता दूंगी और फिर आगे का प्रोग्राम सैट कर लेंगे.’’

भला महविश को इस में क्या परेशानी होती… उस ने अम्मी की नजर बचाते हुए 5-7 नमूने नेमत को पकड़ा दिए.

तकरीबन 10 दिन बाद नेमत का फोन आया, जिस में उस ने बताया कि शहर में उस का काम पसंद आया है, इसलिए वह कम से कम 50 पीस बना कर भेजे, जिस के बदले में महविश को एडवांस में 5,000 रुपए का चैक भी भेज दिया गया था.

महविश बहुत खुश थी. उसे अपने हुनर की बदौलत आज कमाईं का जरीया मिल गया था. एक बार महविश का चैक क्या आया, फिर तो उस के पास हर महीने ही काम के और्डर आने लगे और पैसा भी आने लगा.

बस, अब महविश को कुछ नहीं चाहिए था. वह सामने के रास्ते से सिराज से मिलने गई और उस के अम्मीअब्बू के सामने ही उस से बोली, ‘‘जिस तरह की जिंदगी तुम जी रहे हो… मैं भी वैसे ही जी लूंगी सिराज… तुम अगर एक रोटी दोगे तो मैं आधी खा कर ही खुश रह लूंगी और अब तो मैं थोड़े पैसे भी कमाने लगी हूं…

‘‘हम दोनों मिल कर काम करेंगे तो अपना गुजारा हो जाएगा और इन बच्चियों की शादी भी… और फिर जहां रिश्तों में प्यार होता है, वहां छोटीमोटी दिक्कतें हल हो ही जाती?हैं.’’

महविश जिस मुहब्बत भरे अंदाज में सिराज को निकाह के लिए राजी कर रही थी, उसे देख कर तो सिराज के अम्मीअब्बू बहुत खुश हुए.

‘‘पर बेटी, भला तुम्हारे घर वाले हमारे सिराज के साथ तुम्हारा निकाह क्यों करेंगे, जबकि वे हमारी हैसियत जानते हैं,’’ सिराज के अब्बू ने कहा.

‘‘उन को मनाना मेरा काम है… बस मुश्किल तो सिराज की है,’’ महविश ने सिराज की तरफ देखते हुए कहा. सिराज चुप था, पर उस की खामोशी अपना इकरारनामा कर चुकी थी.

जब महविश के निकाह की बात उस के घर पर चली, तो महविश ने दबी जबान से ये कह दिया कि वे अपनी आगे की जिंदगी सिराज के ही साथ गुजारना चाहती है.

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‘‘पर बेटी, वे लोग हम से कम पैसे वाले हैं. उन के घर में तू कैसे निबाह पाएगी?’’ अम्मी ने कहा.

‘‘मैं ने अपनेआप को हर हालात में रहने के लिए ढाल लिया है अम्मी,’’ मुसकराते हुए महविश ने कहा.

‘‘अम्मी को समझ आ गया था महविश का कमरा बदलना, सादे कपड़े पहनना और उन्हें अपने हाथ से धोना…’’ अम्मी की आंखों में नमी तैर आई थी.

दोनों परिवारों ने आपसी रजामंदी से सिराज और महविश का निकाह करवा दिया था.

महविश के काम को शहरों में बहुत पहचान मिली. हस्तकला उद्योग के नाम पर काम को पहचान भी मिली. महविश को तमाम और्डर मिलते, जिन्हें वह समय पर पूरा कर के भिजवाती.

आज सिराज और महविश के निकाह को 10 साल हो गए हैं. सिराज की बहनों का भी निकाह हो चुका है और वे अपनी ससुराल में खुश हैं.

महविश के सच्चे प्यार ने सारी मुश्किलों को हल कर दिया था.

सिराज और महविश के पास अपनी एक फैक्टरी है, जिस का नाम है ‘मह राज हस्तकला उद्योग’. आखिर सिराज और महविश मिल जो गए थे.

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Women’s Day Special- महविश और सिराज: भाग 2

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

‘‘तो फिर आगे बढ़ कर हिम्मत दिखा और थाम ले महविश का हाथ… क्योंकि किसी ने कहा है कि हमें शादी उस से नहीं करनी चाहिए, जिस से हम प्यार करते हों, बल्कि उस से करनी चाहिए, जो हम से प्यार करता हो… और यह बात महविश ने बता दी है कि वह मुझ से बहुत प्यार करती है,’’ इसी तरह की उधेड़बुन में सिराज आजकल खोया रहता, अपनेआप से सवाल करता और अपनेआप से ही जवाब दिया करता था.

अगले दिन सिराज काफी परेशान रहा और जब उस के कुंआरे मन से नहीं रहा गया, तो सिराज ने अपनी बात अपने दोस्त और महविश के भाई फैज से कहने की सोची.

हालांकि यह बात सोचते हुए उस के मन में ये भी डर था कि फैज किस तरह से इस बात पर रिएक्ट करेगा, पर फिर भी डरतेडरते सिराज ने अपने और महविश के रिश्ते के बारे में फैज से बात की.

‘‘देखो फैज… बात थोड़ी अजीब सी है पर जरूरी है, इसलिए तुम से कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है…’’ सिराज ने फैज से कहा.

‘‘अरे सिराज, तुम्हें मुझ से कुछ भी कहने के लिए कोई भी संकोच करने की जरूरत नहीं है. साफसाफ कहो.’’

‘‘दरअसल, मैं और महविश एकदूसरे को पसंद करते हैं और शादी करना चाहते हैं,’’ सिर्फ इतना ही कह कर सिराज खामोश हो गया और फैज की प्रतिक्रिया का इंतजार करने लगा.

फैज के घर सिराज का आनाजाना तो था ही, इसलिए फैज को ज्यादा कुछ समझने में देर न लगी. कुछ देर तक फैज कुछ सोचता रहा, उस के बाद बोला, ‘‘अगर महविश भी तुम से निकाह करना चाहती है, तो ये उस की नादानी हो सकती है, पर तुम तो समझदार हो, अपने और महविश के बीच का फर्क अच्छी तरह समझ सकते हो.’’

कुछ देर चुप रहने के बाद फैज आगे बोला, ‘‘देखो, हो सकता है कि तुम्हें मेरी बात बुरी लग जाए, पर यह सच?है कि महविश नाजों से पली हुई एक लड़की है… और भला तुम को मुझ से ये बात कहने से पहले खुद ही सोचना चाहिए था कि कहां महविश और हम लोगों का लाइफस्टाइल और कहां तुम्हारा?

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महविश इतने बड़े घर की लड़की तुम जैसे गरीब लड़के के साथ कैसे निबाह कर सकती है भला…’’ हालांकि जो भी बातें फैज कह रहा था, उन की जानकारी तो सिराज को पहले से ही थी.

फैज ने फिराज को जी भर कर खरीखोटी भी सुनाई और उस के और महविश के जीवन स्तर के बीच का फासला भी अच्छी तरह से समझाया.

सिराज फैज की बातें सुन कर गम के दरिया में गोते लगाने लगा, वह समझ गया था कि एक गरीब के लिए बड़े घर की लड़की के साथ का सपना कभी हकीकत नहीं बन सकता.

कुछ दिन यों ही बीत गए. सिराज घर से न निकला, महविश हर आहट पर दरवाजा देखती, बारबार फैज के कमरे में बहाने से जाती, पर सिराज का कहीं अतापता ही नहीं था.

महविश ने सिराज का हालचाल जानने के लिए उसे फोन किया, तो सिराज ने फोन नहीं उठाया. महविश परेशान हो उठी थी. उस ने सोचा जरूर कुछ गलत हुआ है, नहीं तो सिराज उस के फोन का जवाब जरूर देता. महविश का दिन बेचैनी में कटा. उस ने सोचा कि सुबह होगी तो वह किसी तरह से सिराज से मिल कर असली बात का पता लगाने की कोशिश करेगी.

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रात में भी महविश की आंखों में नींद नहीं आ रही थी. उस के कई मैसेज का जवाब भी सिराज ने नहीं दिया था. अभी महविश मोबाइल को उलटपलट ही रही थी कि मोबाइल की मैसेज की घंटी बज उठी. महविश ने झट से देखा. यह सिराज का ही मैसेज था.

महविश ने उसे जल्दीजल्दी पढ़ना शुरू किया, जिस में सिराज ने फैज से हुई पूरी बात लिखी थी और यह भी लिखा था कि उसे पढ़ने के बाद मेरा नंबर ब्लौक कर देना और मुझे भूल जाना.

महविश भी ये जान कर परेशान हो गई कि उस के घर वाले सिर्फ इसलिए उस की शादी सिराज  से नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें डर है कि नाजों  में पली उन की  बेटी सिराज के कम सुविधा वाले घर  में गुजारा नहीं कर पाएगी.

‘तो फिर ठीक है… मैं ने अगर सिराज से असली मुहब्बत की है तो मैं उसे पाने के लिए कुछ भी करूंगी,’ मन ही मन कुछ सोच लिया था महविश ने.

अगले दिन महविश ने अपने लिए एक नौकरी ढूंढ़नी शुरू की. उस ने सारे न्यूजपेपर देख डाले, मोबाइल फोन पर भी नौकरी खोजी, पर कोई फायदा नहीं हुआ. क्योंकि यह एक छोटा कसबा था और कसबों में अमूमन नौकरियों की कमी रहती है. महविश उदास तो जरूर हुई, पर उस ने हिम्मत नहीं हारी.

‘‘अगर मुझे सिराज के साथ रहना है, तो मुझे अपनेआप को उसी के हिसाब से ढालना होगा,’’ अपनेआप से कह उठी थी महविश और उसी समय से महविश ने अपनी अलमारी से अपने महंगे कपड़े निकाल कर आसपास की जरूरतमंद लड़कियों को दे दिए और बाजार जा कर अपने लिए कम कीमत का सूती कपड़ा ले आई.

सिलाई और कढ़ाई पर तो महविश का हाथ साफ ही था, पायदान वाली मशीन पर बैठ कर अपने लिए 2 सूट सिल डाले और सिले हुए सूटों को पहनने लगी.

‘‘अब यह तुझे फिर से नया शौक क्या चढ़ गया है, जो ये सस्ते से कपड़े पहन रही है,’’ अम्मी ने पूछा.

‘‘कुछ नहीं अम्मी… बस अपनेआप को ढाल रही हूं,’’ मुसकराते हुए महविश ने कहा.

महविश के इस जवाब का मतलब अम्मी को समझ नहीं आया, तो सिर हिलाते हुए वहां से चली गईं.

उसी दिन महविश ने अपना कमरा भी बदल लिया. उस ने अपने कमरे का सारा महंगा सामान निकाल कर नीचे स्टोररूम के बगल वाले कमरे में कर दिया.

‘‘अरे… कपड़े तक तो ठीक था, पर अब उस सीलन भरे कमरे में तो अपना लैपटौप और एलईडी ले जा रही है. ये सारे सामान तो सीलन से खराब हो जाएंगे,’’ अम्मी ने कहा.

‘‘कुछ नहीं खराब होगा अम्मी… क्योंकि मैं इन में से कोई सामान नीचे नहीं ले गई… मैं तो बस अपनी किताबें और अपनी कढ़ाईबुनाई का सामान ही ले गई हूं,’’ महविश ने जवाब दिया.

‘‘अरे, पर उस कमरे में एसी तो दूर, बल्कि एक अच्छा पंखा भी नहीं है… कैसे सोएगी तू वहां?’’ अम्मी की आवाज में झुंझलाहट साफ नजर आई.

‘‘अपनेआप को ढाल रही हूं अम्मी,’’ महविश ने फिर से मुसकराते हुए जवाब दिया. अम्मी को तो कुछ भी समझ नहीं आया, पर दादी उस की बात पर जरूर मुसकरा रही थीं.

महविश के दिमाग में क्या चल रहा था, वे समझ नहीं पाईं, पर इतना जरूर था, यह महविश अब पहले जैसी महविश नहीं थी. यह महविश जरूर अपनेआप को किसी और ही सांचे में ढालने की कोशिश कर रही थी, पर वे सांचा कौन सा था, यह अभी तक कोई नहीं जान पाया था.

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Crime Story- रंगीन सपनों का जहर: भाग 1

सौजन्य: मनोहर कहानियां

गौरव हलधर डाक्टरी की पढ़ाई करतेकरते प्रीति मेहरा के जाल में ऐसा फंसा कि जान के लाले पड़ गए. डा. प्रीति को गौरव को रंगीन सपने दिखाने की जिम्मेदारी उस के ही साथी डा. अभिषेक ने सौंपी थी. भला हो नोएडा एसटीएफ का जिस ने समय रहते…

एसटीएफ औफिस नोएडा में एसपी कुलदीप नारायण सिंह डीएसपी विनोद सिंह सिरोही के साथ बैठे किसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे

थे. तभी अचानक दरवाजा खुला और सामने वर्दी पर 3 स्टार लगाए एक इंसपेक्टर प्रकट हुए. उन्होंने अंदर आने की इजाजत लेते हुए पूछा, ‘‘मे आई कम इन सर.’’

‘‘इंसपेक्टर सुधीर…’’ कुलदीप सिंह ने सवालिया नजरों से आगंतुक की तरफ देखते हुए पूछा.

‘‘यस सर.’’

‘‘आओ सुधीर, हम लोग आप का ही इंतजार कर रहे थे.’’ एसपी कुलदीप सिंह ने सामने बैठे विनोद सिरोही का परिचय कराते हुए कहा,  ‘‘ये हैं हमारे डीएसपी विनोद सिरोही. आप के केस को यही लीड करेंगे. जो भी इनपुट है आप इन से शेयर करो फिर देखते हैं क्या करना है.’’

कुछ देर तक उन सब के बीच बातें होती रहीं. उस के बाद कुलदीप सिंह अपनी कुरसी से खड़े होते हुए बोले, ‘‘विनोद, मैं एक जरूरी मीटिंग के लिए मेरठ जा रहा हूं. आप दोनों केस के बारे में डिस्कस करो. हम लोग लेट नाइट मिलते हैं.’’

इस बीच उन्होंने एसटीएफ के एएसपी राजकुमार मिश्रा को भी बुलवा लिया था. कुलदीप सिंह ने उन्हें निर्देश दिया कि गौरव अपहरण कांड में अपहर्त्ताओं को पकड़ने में वह इस टीम का मार्गदर्शन करें.

एसपी के जाते ही वे एक बार फिर बातों में मशगूल हो गए. सुधीर कुमार सिंह डीएसपी विनोद सिरोही और एएसपी मिश्रा को उस केस के बारे में हर छोटीबड़ी बात बताने लगे, जिस के कारण उन्हें पिछले 24 घंटे में यूपी के गोंडा से ले कर दिल्ली के बाद नोएडा में स्पैशल टास्क फोर्स के औफिस का रुख करना पड़ा था.

इस से 2 दिन पहले 19 जनवरी, 2021 की बात है. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एसपी शैलेश पांडे के औफिस में सन्नाटा पसरा हुआ था. क्योंकि मामला बेहद गंभीर था और पेचीदा भी.

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पड़ोसी जिले बहराइच के पयागपुर थाना क्षेत्र के काशीजोत की सत्संग नगर कालोनी के रहने वाले डा. निखिल हलधर का बेटा गौरव हलधर गोंडा के हारीपुर स्थित एससीपीएम कालेज में बीएएमएस प्रथम

वर्ष का छात्र था. वह कालेज के हौस्टल में रहता था.

गौरव 18 जनवरी की शाम तकरीबन 4 बजे से गायब था. इस के बाद गौरव को न तो हौस्टल में देखा गया न ही कालेज में.

18 जनवरी की रात को गौरव के पिता डा. निखिल हलधर के मोबाइल फोन पर रात करीब 10 बजे एक काल आई. काल उन्हीं के बेटे के फोन से थी, लेकिन फोन पर उन का बेटा गौरव नहीं था.

फोन करने वाले ने बताया कि उस ने गौरव का अपहरण कर लिया है. गौरव की रिहाई के लिए आप को 70 लाख रुपए की फिरौती देनी होगी. जल्द पैसों का इंतजाम कर लें, वह उन्हें बाद में फोन करेगा.

डा. निखिल हलधर ने कालबैक किया तो फोन गौरव ने नहीं, बल्कि उसी शख्स ने उठाया, जिस ने थोड़ी देर पहले बात की थी.

डा. निखिल ने बेटे से बात कराने के लिए कहा तो उस ने उन्हें डांटते हुए कहा, ‘‘डाक्टर, लगता है सीधी तरह से कही गई बात तेरी समझ में नहीं आती. तू क्या समझ रहा है कि हम तुझ से मजाक कर रहे हैं? अभी तेरे बेटे की लेटेस्ट फोटो वाट्सऐप कर रहा हूं देख लेना उस की क्या हालत है. और हां, एक बात कान खोल कर सुन ले, यकीन करना है या नहीं ये तुझे देखना है. यह समझ लेना कि पैसे का इंतजाम जल्द नहीं किया तो बेटा गया तेरे हाथ से. ज्यादा टाइम नहीं है अपने पास.’’

अभी तक इस बात को मजाक समझ रहे निखिल हलधर समझ गए कि उस ने जो कुछ कहा, सच है. कुछ देर बाद उन के वाट्सऐप पर गौरव की फोटो आ गई, जिस में वह बेहोशी की हालत में था.

जैसे ही परिवार को इस बात का पता चला कि गौरव का अपहरण हो गया है तो सब हतप्रभ रह गए. निखिल हलधर संयुक्त परिवार में रहते थे. उन के पूरे घर में चिंता का माहौल बन गया.

बात फैली तो डा. निखिल के घर उन के रिश्तेदारों और परिचितों का हुजूम लगना शुरू हो गया. डा. निखिल हलधर शहर के जानेमाने फिजिशियन थे, शहर के तमाम प्रभावशाली लोग उन्हें जानते थे. उन्होंने शहर के एसपी डा. विपिन कुमार मिश्रा से बात की.

उन्होंने बताया कि गौरव गोंडा में पढ़ता था और घटना वहीं घटी है, इसलिए वह तुरंत गोंडा जा कर वहां के एसपी से मिलें.

डा. निखिल हलधर रात को ही अपने कुछ परिचितों के साथ गोंडा रवाना हो गए. 19 जनवरी की सुबह वह गोंडा के एसपी शैलेश पांडे से मिले. शैलेश पांडे को पहले ही डा. निखिल हलधर के बेटे गौरव के अपहरण की जानकारी एसपी बहराइच से मिल चुकी थी.

डा. निखिल हलधर ने शैलेश पांडे को शुरू से अब तक की पूरी बात बता दी. एसपी पांडे ने परसपुर थाने के इंचार्ज सुधीर कुमार सिंह को अपने औफिस में बुलवा लिया था. क्योंकि गौरव जिस एससीपीएम मैडिकल कालेज में पढ़ता था, वह परसपुर थाना क्षेत्र में था.

सारी बात जानने के बाद एसपी शैलेश पांडे ने कोतवाली प्रभारी आलोक राव, सर्विलांस टीम के इंचार्ज हृदय दीक्षित तथा स्वाट टीम के प्रभारी अतुल चतुर्वेदी के साथ हैडकांस्टेबल श्रीनाथ शुक्ल, अजीत सिंह, राजेंद्र , कांस्टेबल अमित, राजेंद्र, अरविंद व राजू सिंह की एक टीम गठित कर के उन्हें जल्द से गौरव हलधर को बरामद करने के काम पर लगा दिया.

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एसपी पांडे ने टीम का नेतृत्व एएसपी को सौंप दिया. पुलिस टीम तत्काल सुरागरसी में लग गई. पुलिस टीमें सब से पहले गौरव के कालेज पहुंची, जहां उस के सहपाठियों तथा हौस्टल में छात्रों के अलावा कर्मचारियों से जानकारी हासिल की गई.

नहीं मिली कोई जानकारी

मगर गौरव के बारे में पुलिस को कालेज से कोई खास जानकारी नहीं मिल सकी. इंसपेक्टर सुधीर सिंह डा. निखिल हलधर के साथ परसपुर थाने पहुंचे और उन्होंने निखिल हलधर की शिकायत के आधार पर 19 जनवरी, 2021 की सुबह भादंसं की धारा 364ए के तहत फिरौती के लिए अपहरण का मामला दर्ज कर लिया.

एसपी शैलेश पांडे के निर्देश पर इंसपेक्टर सुधीर कुमार सिंह ने खुद ही जांच की जिम्मेदारी संभाली. साथ ही उन की मदद के लिए बनी 6 पुलिस टीमों ने भी अपने स्तर से काम शुरू कर दिया. चूंकि मामला एक छात्र के अपहरण का था, वह भी फिरौती की मोटी रकम वसूलने के लिए. इसलिए सर्विलांस टीम को गौरव हलधर के मोबाइल की काल डिटेल निकालने के काम पर लगा दिया गया.

मोबाइल की सर्विलांस में उस की पिछले कुछ घंटों की लोकेशन निकाली गई तो पता चला कि इस वक्त उस की लोकेशन दिल्ली में है. पुलिस टीमें यह पता करने की कोशिश में जुट गईं कि गौरव का किसी से विवाद या दुश्मनी तो नहीं थी. लेकिन ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली.

गौरव और उस से जुड़े लोगों के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर ले लिया गया था. पुलिस की टीमें लगातार एकएक नंबर की डिटेल्स खंगाल रही थीं. गौरव के फोन की लोकेशन संतकबीर नगर के खलीलाबाद में भी मिली थी.

पुलिस की एक टीम बहराइच तो 2 टीमें खलीलाबाद व गोरखपुर रवाना कर दी गईं. खुद इंसपेक्टर सुधीर सिंह एक पुलिस टीम ले कर दिल्ली रवाना हो गए.

20 जनवरी की सुबह दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने सर्विलांस टीम की मदद से उस इलाके में छानबीन शुरू कर दी, जहां गौरव के फोन की लोकेशन थी. लेकिन अब उस का फोन बंद हो चुका था इसलिए इंसपेक्टर सुधीर सिंह को सही जगह तक पहुंचने में कोई मदद नहीं मिली.

इस दौरान गोंडा में मौजूद गौरव के पिता डा. निखिल हलधर को अपहर्त्ता ने एक और फोन कर दिया था. उस ने अब फिरौती की रकम बढ़ा कर 80 लाख कर दी थी और चेतावनी दी थी कि अगर 22 जनवरी तक रकम का इंतजाम नहीं किया गया तो गौरव की हत्या कर दी जाएगी.

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दूसरी तरफ जब गोंडा एसपी शैलेश पांडे को पता चला कि दिल्ली पहुंची पुलिस टीम को बहुत ज्यादा कामयाबी नहीं मिल रही है तो उन की चिंता बढ़ गई. अंतत: उन्होंने एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश को लखनऊ फोन कर के गौरव अपहरण कांड की सारी जानकारी दी और इस काम में एसटीएफ की मदद मांगी.

अमिताभ यश ने एसपी शैलेश पांडे से कहा कि वे अपनी टीम को नोएडा में एसटीएफ के औफिस भेज दें. एसटीएफ के एसपी कुलदीप नारायण गोंडा पुलिस की पूरी मदद करेंगे.

पांडे ने दिल्ली में मौजूद इंसपेक्टर सुधीर सिंह को एसटीएफ के एसपी कुलदीप नारायण से बात कर के उन के पास पहुंचने की हिदायत दी तो दूसरी तरफ एडीजी अमिताभ यश ने नोएडा फोन कर के एसपी कुलदीप नारायण सिंह को गौरव हलधर अपहरण केस की जानकारी दे कर गोंडा पुलिस की मदद करने के निर्देश दिए.

यह बात 20 जनवरी की दोपहर की थी. गोंडा कोतवाली के इंसपेक्टर सुधीर सिंह नोएडा में एसटीएफ औफिस पहुंच कर एसपी एसटीएफ कुलदीप नारायण सिंह तथा डीएसपी विनोद सिरोही से मिले.

विनोद सिरोही बेहद सुलझे हुए अधिकारी हैं. उन्होंने अपनी सूझबूझ से कितने ही अपहरण करने वालों और गैंगस्टरों को पकड़ा है. उन्होंने उसी समय अपहर्त्ताओं को दबोचने के लिए इंसपेक्टर सौरभ विक्रम सिंह, एसआई राकेश कुमार सिंह तथा ब्रह्म प्रकाश के साथ एक टीम का गठन कर दिया.

काल डिटेल्स से मिले सुराग

अपराधियों तक पहुंचने का सब से बड़ा हथियार इन दिनों इलैक्ट्रौनिक सर्विलांस है. एसटीएफ की टीम ने उसी समय गौरव के फोन की सर्विलांस के साथ उस की सीडीआर खंगालने का काम शुरू कर दिया.

गौरव के फोन की काल डिटेल्स खंगाली तो उस में एक ऐसा नंबर मिला, जिस में उस के फोन पर कुछ दिनों से एक नए नंबर से न सिर्फ काल की जा रही थी, बल्कि यह नंबर गौरव की कौन्टैक्ट लिस्ट में ‘माई लव’ के नाम से सेव था.

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दोनों नंबरों पर 5 से 18 जनवरी तक 40 बार बात हुई थी और हर काल का औसत समय 10 से 40 मिनट था. इस नंबर से गौरव के वाट्सऐप पर अनेकों काल, फोटो, वीडियो का भी आदानप्रदान हुआ था.

इस नंबर के बारे में जानकारी एकत्र की गई तो यह नंबर दिल्ली के एक पते पर पंजीकृत पाया गया. लेकिन जब पुलिस की टीम उस पते पर पहुंची तो पता फरजी निकला.

जब इस नंबर की लोकेशन खंगाली गई तो पुलिस टीम यह जान कर हैरान रह गई कि 18 जनवरी की दोपहर से शाम तक इस नंबर की लोकेशन गोंडा में हर उस जगह थी, जहां गौरव के मोबाइल की लोकेशन थी.

पुलिस टीम समझ गई कि जिस के पास भी यह नंबर है, उसी ने गौरव का अपहरण किया है. पुलिस टीमों ने इसी नंबर की सीडीआर खंगालनी शुरू कर दी. पता चला कि यह नंबर करीब एक महीना पहले ही एक्टिव हुआ था और इस से बमुश्किल 4 या 5 नंबरों पर ही फोन काल्स की गई थीं या वाट्सऐप मैसेज आएगए थे.

एसटीएफ के पास ऐसे तमाम संसाधन और नेटवर्क होते हैं, जिन से वह इलैक्ट्रौनिक सर्विलांस के माध्यम से अपराधियों की सटीक जानकारी एकत्र करने के साथ उन की लोकेशन का भी सुराग लगा लेती है. एसटीएफ ने रात भर मेहनत की. जो भी फोन नंबर इस फोन के संपर्क में थे, उन सभी की कडि़यां जोड़ कर उन की मूवमेंट पर नजर रखी जाने लगी.

रात होतेहोते यह बात साफ हो गई कि अपहर्त्ता नोएडा इलाके में मूवमेंट करने वाले हैं. वे अपहृत गौरव को छिपाने के लिए दिल्ली से किसी दूसरे ठिकाने पर शिफ्ट करना चाहते हैं. बस इस के बाद सर्विलांस टीमों ने अपराधियों की सटीक लोकेशन तक पहुंचने का काम शुरू कर दिया और गोंडा पुलिस के साथ एसटीएफ की टीम ने औपरेशन की तैयारी शुरू कर दी.

21 जनवरी की देर रात गोंडा पुलिस व एसटीएफ की टीमों ने ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे जीरो पौइंट के पास अपना जाल बिछा दिया.

पुलिस टीमें आनेजाने वाले हर वाहन पर कड़ी नजर रख रही थीं. किसी वाहन पर जरा भी संदेह होता तो उसे रोक कर तलाशी ली जाती. इसी बीच एक सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार पुलिस की चैकिंग देख कर दूर ही रुक गई. उस गाड़ी ने जैसे ही रुकने के बाद बैक गियर डाल कर पीछे हटना और यूटर्न लेना शुरू किया तो पुलिस टीम को शक हो गया.

एसटीएफ की टीम एक गाड़ी में पहले से तैयार थी. पुलिस की गाड़ी उस कार का पीछा करने लगी जो यूटर्न ले कर तेजी से वापस दौड़ने लगी थी.

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देखते ही पहचान लिया गौरव को

मुश्किल से एक किलोमीटर तक दौड़भाग होती रही. आखिरकार नालेज पार्क थाना क्षेत्र में एसटीएफ की टीम ने डिजायर कार को ओवरटेक कर के रुकने पर मजबूर कर दिया. खुद को फंसा देख कार में सवार 3 लोग तेजी से उतरे और अलगअलग दिशाओं में भागने लगे.

एसटीएफ को ऐसे अपराधियों को पकड़ने का तजुर्बा होता है. पीछा करते हुए एसटीएफ तथा गोंडा पुलिस की दूसरी टीम भी वहां पहुंच चुकी थी. पुलिस टीमों ने जैसे ही हवाई फायर किए, कार से उतर कर भागे तीनों लोगों के कदम वहीं ठिठक गए.

पुलिस टीमों ने तीनों को दबोच लिया. उन्हें दबोचने के बाद जब पुलिस टीमों ने स्विफ्ट डिजायर कार की तलाशी ली तो एक युवक कार की पिछली सीट पर बेहोशी की हालत में पड़ा था.

इंसपेक्टर सुधीर सिंह युवक की फोटो को इतनी बार देख चुके थे कि बेहोश होने के बावजूद उन्होेंने उसे पहचान लिया. वह गौरव ही था. पुलिस टीमों की खुशी का ठिकाना न रहा, क्योंकि अभियान सफल हो गया था.

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पुलिस टीमें तीनों युवकों के साथ गौरव व कार को ले कर एसटीएफ औफिस आ गईं. इंसपेक्टर सुधीर सिंह ने गौरव के पिता डा. निखिल व एसपी गोंडा शैलेश पांडे को गौरव की रिहाई की सूचना दे दी. वे भी तत्काल नोएडा के लिए रवाना हो गए.

गौरव के अपहरण में पुलिस ने जिन 3 लोगों को गिरफ्तार किया था, उन में से एक की पहचान डा. अभिषेक सिंह निवासी अचलपुर वजीरगंज, जिला गोंडा के रूप में हुई. वही इस गिरोह का सरगना था और फिलहाल बाहरी दिल्ली के बक्करवाला में डीडीए के ग्लोरिया अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 310 में किराए पर रहता था.

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Crime Story- रंगीन सपनों का जहर: भाग 3

सौजन्य: मनोहर कहानियां

डा. अभिषेक सिंह पेशे से चिकित्सक था और नांगलोई-नजफगढ़ रोड पर स्थित राठी अस्पताल में काम करता था. उस के साथ पुलिस ने जिन 2 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया, उन में नीतेश निवासी थाना निहारगंज, धौलपुर, राजस्थान तथा मोहित निवासी परौली, थाना करनलगंज गोंडा शामिल थे. जब उन तीनों से पूछताछ की गई, तो अपहरण की जो कहानी सामने आई, वह काफी दिलचस्प थी.

डा. अभिषेक सिंह ने गौरव का अपहरण करने के लिए हनीट्रैप का इस्तेमाल किया था. यानी गौरव को पहले एक खूबसूरत लड़की के जाल में फंसाया गया था. जब गौरव खूबसूरती के जाल में फंस गया तो उस का फिरौती वसूलने के लिए अपहरण कर लिया गया.

मूलरूप से गोंडा के अचलपुर का रहने वाला डा. अभिषेक सिंह 2013-2014 में बेंगलुरु के राजीव गांधी यूनिवर्सिटी औफ हेल्थ साइंस से बीएएमएस की पढ़ाई करने के बाद जब अपने शहर लौटा तो उस के दिल में बड़े अरमान थे. डाक्टरी के पेशे से बहुत सारी कमाई करने और बड़ा सा बंगला बनाने के सपने देखे थे. लेकिन कुछ समय बाद ही ये सपने चकनाचूर होने लगे.

अच्छी नौकरी नहीं मिली तो बन गया अपराधी

उसे गोंडा के किसी भी अस्पताल में ऐसी नौकरी नहीं मिली, जिस से अच्छे से गुजरबसर हो सके. छोटेछोटे अस्पतालों में नौकरी करने के बाद तंग आ कर डा. अभिषेक 2018 में दिल्ली आ गया.

यहां कई अस्पतालों में नौकरी करने के बाद वह सन 2019 में नजफगढ़ के राठी अस्पताल में नौकरी करने लगा. हालांकि इस अस्पताल में उसे पहले के मुकाबले तो अच्छी तनख्वाह मिलती थी, लेकिन इस के बावजूद वह अपनी जिंदगी से संतुष्ट नहीं था.

इसी दौरान डा. अभिषेक की दोस्ती उसी अस्पताल में काम करने वाली एक लेडी डाक्टर प्रीति मेहरा से हो गई. प्रीति भी बीएएमएस डाक्टर थी. खूबसूरत और जवान प्रीति प्रतिभाशाली थी.

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उस के दिल में भी अपना अस्पताल बनाने की महत्त्वाकांक्षा पल रही थी. लेकिन इस सपने को पूरा करने में समर्थ नहीं होने के कारण अक्सर मानसिक परेशानी से घिरी रहती थी. जब अभिषेक से उस की दोस्ती हुई तो लगा कि वे दोनों एक ही मंजिल के मुसाफिर हैं. दोनों की दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई.

दोनों के सपने भी एक जैसे थे, लाचारी भी एक जैसी थी. लेकिन सपनों को पूरा करने की धुन दोनों पर सवार थी.

पिछली दीपावली पर नवंबर, 2019 में जब अभिषेक अपने घर गोंडा गया तो उस की मुलाकात अपनी बुआ के बेटे रोहित से हुई. बुआ की शादी बहराइच के पयागपुर इलाके में हुई थी. रोहित भी पयागपुर में ही रहता था. रोहित की जानपहचान मोहित सिंह से भी थी. मोहित सिंह गोंडा में रहने वाले अभिषेक के दोस्त राकेश सिंह का साला था.

मोहित दिल्ली के करोलबाग की एक दुकान में काम करता है. रोहित भी मोहित को जानता है. रोहित व मोहित दोनों की जानपहचान एससीपीएम कालेज गोंडा से आयुर्वेदिक चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे गौरव हलधर से थी. दोनों ही गौरव के अलावा उस के परिवार के बारे में भी अच्छी तरह से जानते थे.

अभिषेक जब दीपावली पर अपने घर गया तो पयागपुर से बुआ का बेटा रोहित उस के घर आया हुआ था. रोहित के सामने अभिषेक का दर्द छलक गया. शराब पीने के बाद उस ने रोहित से यहां तक कह दिया कि अगर उसे चोरी, डाका या किसी का अपहरण भी करना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेगा.

अभिषेक की बात सुनते ही रोहित का माथा ठनक गया. पहले तो उस ने अभिषेक को समझाना चाहा. लेकिन अभिषेक नहीं माना और बोला भाई बस तू एक बार किसी ऐसे शिकार के बारे में बता दे, जिस से मेरा सपना पूरा करने के लिए रकम मिल सकती हो. अभिषेक नहीं माना तो रोहित ने उसे गौरव हलधर के बारे में बताया और उस के पूरे परिवार की जानकारी भी दे दी.

रोहित ने अभिषेक को बताया कि डा. निखिल हलधर का बेटा गौरव गोंडा में ही फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रहा है. अगर किसी तरीके से उस का अपहरण कर लिया जाए तो फिरौती के रूप में बड़ी रकम मिल सकती है.

डा. अभिषेक ने जब डा. प्रीति मेहरा को गौरव का अपहरण करने की अपनी योजना के बारे में बताया तो उस ने नाराजगी नहीं जताई बल्कि खुश हुई और उस ने ही अपनी तरफ से सुझाव दिया कि गौरव का अपहरण करने में वह खुद उस की मदद करेगी.

प्रीति ने अभिषेक को बताया कि एक जवान लड़के का अगर अपहरण करना हो तो किसी जवान लड़की को उस के सामने चारा बना कर डाल दो, वह खुदबखुद उस जाल में फंस जाएगा.

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अभिषेक से उस ने गौरव का नंबर देने के लिए कहा तो अभिषेक ने उसे रोहित से गौरव का नंबर ले कर दे दिया. इस के बाद डा. प्रीति मेहरा ने एक रौंग नंबर के बहाने गौरव को काल कर बातचीत का सिलसिला शुरू कर दिया. पहली ही बार में बात करने के बाद गौरव उस के जाल में फंस गया और दोनों का एकदूसरे से परिचय कुछ ऐसा हुआ कि उस दिन के बाद वे दोनों एकदूसरे से बात करने लगे.

प्रीति मेहरा वीडियो काल के जरिए जब गौरव से बात करती तो कई बार गौरव को अपने नाजुक अंग दिखा कर अपने लिए उसे बेचैन कर देती.

दरअसल, साजिश के इस मुकाम तक पहुंचने से पहले डा. अभिषेक ने इसे अंजाम देने के लिए कुछ लोगों को भी अपने साथ जोड़ लिया था.

करोलबाग में कपड़े की दुकान पर काम करने वाले मोहित को जब अभिषेक ने गौरव का अपहरण करने की योजना बताई और उस से मदद मांगी तो मोहित ने अभिषेक को अपने एक दोस्त  नितेश से मिलवाया.

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Crime Story- रंगीन सपनों का जहर: भाग 4

सौजन्य: मनोहर कहानियां

दरअसल, नितेश व मोहित एक ही जिम में व्यायाम करने के लिए जाते थे. इसीलिए दोनों के बीच दोस्ती थी. नितेश इंश्योरेंस कराने का काम करता था. इंश्योरेंस के साथ वह लोगों के बैंक में खाते खुलवाने से ले कर उन्हें लोन दिलाने का काम करता था. इसीलिए फरजी आईडी से ले कर जाली आधार कार्ड व पैन कार्ड बनाने में उसे महारथ हासिल थी.

मोहित ने उसे मोटी रकम मिलने का सब्जबाग दिखा कर अपहरण की इस वारदात में अपने साथ मिला लिया. इस के बाद नितेश ने 3 आईडी तैयार कीं और उन्हीं आईडी के आधार पर उस ने 3 सिमकार्ड खरीदे. फरजी आईडी से खरीदे गए तीनों सिम कार्ड डा. प्रीति मेहरा, डा. अभिषेक व मोहित ने अपने पास रख लिए.

डा. प्रीति ने तो अपने सिम कार्ड का इस्तेमाल गौरव हलधर से दोस्ती करने के लिए शुरू कर दिया. लेकिन अभिषेक व मोहित ने अपहरण करने से चंद रोज पहले ही अपने सिम कार्ड का इस्तेमाल किया था.

प्रीति मेहरा ने गौरव को अपने प्रेमजाल में इस तरह फंसा लिया कि वह उस के एक इशारे पर कुछ भी करने को तैयार था. जब सब ने यह देख लिया कि शिकार जाल में फंसने का तैयार है तो प्रीति ने गौरव को वाट्सऐप मैसेज दिया कि वह 18 जनवरी को उस से मिलने गोंडा आ रही है.

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रोहित भी उस समय दिल्ली आया हुआ था. दिल्ली से स्विफ्ट डिजायर कार ले कर डा. अभिषेक, डा. प्रीति मेहरा, मोहित, रोहित व नितेश गोंडा पहुंच गए.

गोंडा पहुंचने से पहले रोहित बहराइच में ही उतर गया. इधर गोंडा पहुंच कर डा. प्रीति ने एक राहगीर से किसी बहाने फोन ले कर गौरव को मिलने के लिए फोन किया और उस के कालेज से एक किलोमीटर दूर एक जगह पर बुलाया.

प्रीति मेहरा का रंगीन वार

प्रीति के मोहपाश में फंसा गौरव वहां चला आया. गौरव को प्रीति ने अपने साथ कार में बैठा लिया, जहां बैठे बाकी अन्य लोगों ने उसे दबोच कर नशे का इंजेक्शन दे दिया. इस के बाद वे गोंडा से चल दिए. उन की योजना गौरव को संतकबीर नगर के खलीलाबाद में रहने वाले सतीश के घर पर छिपाने की थी. वे वहां पहुंच भी गए, लेकिन बाद में इरादा बदल दिया और कुछ ही देर में कार से दिल्ली के लिए रवाना हो गए.

18 जनवरी की रात को ही दिल्ली पहुंच गए. रास्ते में गाजियाबाद के पास उन्होंने गौरव के फोन से गौरव के पिता निखिल को फिरौती के लिए पहला फोन कर 70 लाख की फिरौती की मांग की.

इसके बाद उन्होंने गौरव को अभिषेक के बक्करवाला स्थित डीडीए फ्लैट में छिपा दिया. नितेश या मोहित उसे खाना देने जाते थे और डा. अभिषेक व प्रीति उसे लगातार नशे के इंजेक्शन देते थे ताकि वह होश में आ कर शोर न मचा दे. उन लोगों ने कई बार गौरव के साथ मारपीट भी की.

इधर रोहित ने जब गोंडा व बहराइच में गौरव के अपहरण कांड को ले कर छप रही खबरों के बारे में अभिषेक को बताया कि पुलिस की एक टीम दिल्ली में गौरव की तलाश कर रही है तो अभिषेक ने गौरव को अपने फ्लैट से कहीं दूसरी जगह रखने की योजना बनाई.

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इसीलिए डा. अभिषेक मोहित व नितेश के साथ 21 जनवरी की रात को गौरव को बेहोशी का इंजेक्शन दे कर उसे कार से ले कर ग्रेटर नोएडा जा रहा था, तभी पुलिस ने सर्विलांस के जरिए उन की लोकेशन का पता लगा कर उन्हें दबोच लिया.

नितेश के पिता व गोंडा पुलिस के नोएडा पहुंचने के बाद एसटीएफ ने उन्हें  गोंडा पुलिस के हवाले कर दिया. इधर पुलिस को जब इस में रोहित व सतीश नाम के 2 और लोगों के शामिल होने की खबर लगी तो गोंडा पुलिस की टीम ने दबिश दे कर उसी रात रोहित व सतीश को भी गिरफ्तार कर लिया.

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम की खबर पा कर डा. प्रीति फरार हो चुकी थी. उस की तलाश में एसटीएफ और गोंडा पुलिस ने कई जगह छापे मारे, लेकिन वह पुलिस की पकड़ में नहीं आई.

गोंडा पुलिस ने प्रीति की गिरफ्तारी पर 25 हजार के इनाम की घोषणा की थी. जिस के बाद गोंडा पुलिस ने 1 फरवरी को प्रीति को उस के गांव धौर जिला झज्जर, हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया.

मूलरूप से हरियाणा की प्रीति मेहरा वर्तमान में दिल्ली के प्रेमनगर में रहती थी. फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में हैं. कैसी विडंबना है कि सालों की मेहनत के बाद डाक्टर बनने वाले अभिषेक व प्रीति अपने अधूरे ख्वाब को पूरा करने के लिए शार्टकट से पैसा कमाने के चक्कर में जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गए.

डीजीपी ने फिरौती के लिए हुए अपहरण कांड का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली गोंडा पुलिस की टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है.

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—कथा पुलिस की जांच, पीडि़त व अभियुक्तों के बयान पर आधारित

यूरोप और अमेरिका में रिलीज होने वाली पहली भोजपुरी फिल्म होगी पवन सिंह की ‘स्वाभिमान’

अमेरिका में होगी प्रदर्शित भारतीय मूल के पोलैंड निवासी एनआरआई राम शर्मा अपनी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी ‘‘राम शर्मा फिल्म प्रोडक्शन हाउस’’ के बैनर तले बन रही फिल्म ‘‘स्वाभिमान’’ की शूटिंग इन दिनों प्रातपगढ़ उत्तर प्रदेश में कर रहे हैं.

पवन सिंह, अंजना सिंह और डिंपल सिंह के अभिनय से सजी भोजपुरी फिल्म ‘स्वाभिमान’ पहली फिल्म होगी, जिसे भारत के अलावा यूरोप और लैटिन अमरीका में भी प्रदर्शित किया जाएगा. राम शर्मा को अपनी इस फिल्म से काफी उम्मीदें हैं. उनकी राय में यह फिल्म बेहद पारिवारिक है और इस फिल्म के जरिए वैश्विक पैमाने पर भोजपुरिया संस्कार को विस्तार मिलेगा.

चंद्रभूषण मणि निर्देशित फिल्म‘‘स्वाभिमान’’में फिल्म के निर्माता राम शर्मा बतौर अभिनेता अभिनय भी कर रहे हैं.वह इस फिल्म में पवन सिंह के बड़े भाई की भूमिका में नजर आने वाले हैं.जो कि एक जमींदार ठाकुर हैं. एनआर आई होते हुए भी भोजपुरी फिल्म करने के सवाल पर राम शर्मा कहते हैं- ‘‘मैं एनआरआई जरूर हूं.लेकिन बिहार के गया जिले के शेरघाटी का रहने वाला हूं. मैं बिहार की धरती से बहुत प्यार करता हूं. इसलिए मुझे लगा कि पवन सिंह के साथ एक भोजपुरी सिनेमा बनाया जाए.

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पवन सिंह के गानों का विदेशों में बहुत क्रेज है. उनके गाने यूरोप में चारों तरफ सुना जाते हैं. इसलिए हमने पवन सिंह को साइन किया. मैंने अपनी इस फिल्म को हिंदुस्तान के अलावा पोलैंड (यूरोप) और लैटिन अमेरिका में प्रदर्शित करने का निर्णय लिया है. मैं इस फिल्म को वहां की स्थानीय भाषा में डब करके रिलीज करूंगा.फिल्म ‘स्वाभिमान‘ से पोलैंड और भोजपुरी संस्कृति का एक्सचेंज होगा. वहां पवन सिंह को पसंद करने वालों की कमी नहीं है, इसलिए मुझे पूर्ण विश्वास है कि फिल्म वहां खूब पसंद की जाएगी. इसलिए हम फिल्म के निर्माण में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.’’

जबकि फिल्म के निर्देशक चंद्रभूषण मणि ने कहा कि यह एक कमर्शियल, लेकिन बेहद साफ सुथरी फिल्म होगी, जिसकी शूटिंग आज से हमने शुरू कर दी है.आज जितनी भी फिल्में बन रही हैं, उन सभी से हटकर होगी फिल्म ‘स्वाभिमान‘. फिल्म की पटकथा पर हमने काफी काम किया है.

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फिल्म को लेकर हमने बेहतर योजना बनायी है. हमने इसके गानों पर काम किया है. संवाद और पटकथा पर विशेष ध्यान दिया है और अब हम इस कहानी को चलचित्र में उतारने के लिए कैमरे में कैद कर रहे हैं.अभी मैं बस इतना कहूंगा कि इस फिल्म को थिएटर में प्रदर्शित होने पर जरूर देखिएगा. पवन सिंह के साथ अंजना सिंह और डिपंल सिंह की केमेस्ट्री दर्शकों को आकर्षित करने वाली है.’’

फिल्म ‘‘स्वाभिमान’’को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं- पवन सिंह, अंजना सिंह, डिंपल सिंह, किरण सिंह, वीणा पांडेय, अमरेंद्र सिंह बिहारी, कमाल कृष्णा (विलेन), गुलशन कुमारी, रिया, ज्योति, आशिका, ज्योति पांडेय,धामा वर्मा,नरेश छाबड़ा राज शर्मा (बाल कलाकार) और आकृति नेगी.

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